Kanimozhi house raided IT officials said it was ‘false tip’

CHENNAI: 

Amid allegations of a huge cash-for-votes racket in Tamil Nadu, officials of the Income Tax department visited the house of DMK leader Kanimozhi this evening to “verify allegations of cash being stashed there,” sources said.  Kanimozhi, DMK lawmaker and the sister of party chief MK Stalin, is the candidate for the Tuticorin seat. It was alleged that “lots of cash” was stashed on the first floor of her house in Thoothukudi, sources said. IT sources, however, said later that it was a “false tip” and they drew a blank. No case has been registered.

“Crores and crores of rupees are kept in the house of Tamilisai Soundararajan’s (state BJP chief) residence, why no raids there? Modi is using IT, CBI, judiciary and now Election Commission to interfere in the elections. They are doing this as they fear losing,” DMK chief Stalin said.

Elections for the state’s 39 Lok Sabha seats and 18 assembly seats will be held on Thursday, during the second phase.

In the run-up to the polls, a string of raids have been held in the state, in which around Rs. 500 crore — in illegal cash and gold — has been seized.

Today, in a first, election for the Vellore Lok Sabha seat was cancelled following recovery of huge cash from alleged associates of DMK candidate Kathir Anand, the son of DMK treasurer Durai Murugan.

On March 30, tax officials raided Durai Murugan’s residence and allegedly seized Rs. 10.50 lakh. Two days later, they claimed to have seized Rs. 11.53 crore from a cement godown belonging to an associate of the DMK leader.

Last week, tax department officials conducted searches at 18 locations in the state. The list of sites included state capital Chennai, Namakkal and Tirunelveli. Most of the searches were on properties owned by opposition leaders.

Tax raids on opposition leaders have become one of the key issues in the ongoing elections, with most leaders accusing the BJP of targeting political rivals through government agencies.

DMK spokesperson A Saravanan called it “a murder of democracy and a sick joke”. He added, “This is not an embarrassment for us, but this will backfire and the sympathy this would generate will make the DMK win all seats”.

Though 204 crore unaccounted cash has been recovered in Tamil Nadu ahead of polls, the Income Tax officials have not named any political party or candidates with regard to the remaining 190 crore cash.

A senior officer told newsmen “We are investigating their political affiliation”.

टीएमसी उम्मीदवार का समर्थन करने के लिए बंगलादेशी कलाकार को किया ब्लैक लिस्ट

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) के लिए पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के लिए चुनाव प्रचार करना बांग्लादेश के अभिनेता फिरदौस अहमद को भारी पड़ गया है. दरअसल, गृह मंत्रालय ने ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन की रिपोर्टमिलने के बाद कार्रवाई करते हुए बांग्लादेशी अभिनेता का बिजनेस वीजा रद्द कर दिया है. इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने फिरदौस को भारत छोड़ने का नोटिस भी जारी कर दिया है. वहीं, गृह मंत्रालय ने उन्हें भविषअय के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया है. 

मालूम हो कि बांग्लादेशी अभिनेता फिरदौस अहमद ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उम्मीदवार के समर्थन में सोमवार को चुनाव प्रचार किया था. इसके बाद मंगलवार को गृह मंत्रालय ने कोलकाता के विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी से इस मामले पर रिपोर्ट मांगी थी. बता दें कि बांग्लादेश के अभिनेता फिरदौस अहमद ने रायगंज से तृणमूल उम्मीदवार कन्हैयालाल अग्रवाल के समर्थन में चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया था.

बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट में पाया है कि फिरदौस अहमद ने लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान में हिस्सा लेकर वीजा शर्तों का उल्लंघन किया है. इससे पहले भी अहमद बिजनेस वीजा पर कई बार भारत आ चुके हैं. अहमद को भारत-बांग्लादेश सीमा के पास हेमताबाद और करांदिघी में चुनाव प्रचार रैलियों में अग्रवाल के समर्थन में वोट मांगते देखा गया था. 

कभी भी राजनीति में प्रवेश कर सकते हैं रोबर्ट वाड्रा, उन्हे कौन रोकेगा? राज बब्बर

राबर्ट वाड्रा भारतीय राजनीति में कोई नया नाम नहीं है। आप कांग्रेस के प्रथम परिवार के दामाद हैं। पेशे से व्यापारी और कांग्रेस में इतना दम रखते हैं की यह जब चाहें सक्रिय राजनीति में कूद सकते हैं। राज बब्बर ने तो यहाँ तक कह दिया की उन्हे कौन रोक सकता है राजनीति में आने से? यह दीगर बात है की उन पर ईडी की जांच में सहयोग न देने की शिकायत कई बार हो चुकी है और वह 5 लाख के मुचलके पर बाहर हैं।

नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा ने राजनीति में आने को लेकर बड़ा बयान दिया है. रॉबर्ट वाड्रा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि फिलहाल अभी मेरी राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं है. अब तक इस बारे में कोई योजना नहीं बनाई है. उन्होंने कहा कि मैं लोगों के बीच जाकर कड़ी मेहनत कर रहा हूं. जब लोगों को लगेगा कि मुझे राजनीति में प्रवेश करना चाहिए तो, मैं पूरी ताकत के साथ राजनीति के मैदान में उतरूंगा. 

वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर ने रविवार को रॉबर्ट वाड्रा के पार्टी में शामिल होने को लेकर कहा था कि अगर वह चाहेंगे तो पार्टी उनके बारे में जरूर सोचेगी. वह परिवार का हिस्सा हैं. उन्हें पार्टी में सम्मलित करने के लिए कौन मना करेगा. गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने सक्रिय राजनीति में आने के बाद कांग्रेस महासचिव के साथ पूर्वी यूपी प्रभारी का पद संभाला था. इसके बाद से ही रॉबर्ट वाड्रा के राजनीति में आने की चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं.

बीते सप्ताह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नामांकन से पहले हुए रोड शो में रॉबर्ट वाड्रा अपने दोनों बच्चों और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ नजर आए थे. कुछ समय पहले रॉबर्ट वाड्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि जैसे ही मेरे ऊपर लगे सभी आरोप निराधार साबित हो जाएंगे उसके बाद में बड़े स्तर पर काम करना चाहूंगा

शकील अहमद के इस्तीफे और निर्दलीय चुनाव लड़ने से महागठबंधन को झटका या कोई नयी रणनीति???

जहां एक ओर शकील अहमद के इस्तीफे को एक झटके के तौर पर देखा जा रहा है वहीं राजनीतिज्ञ इस कांग्रेस की सोची समझी चाल करार दे रहे हैं। शकील निर्दलीय कुनव लड़ेंगे जहां प्रोक्ष रूप से उन्हे कांग्रेस का साथ होगा। इस प्रकार कांग्रेस गठबंधन के सामने पाक साफ बनी रहेगी और वहीं जीतने के बाद शकील पुन: कांग्रेस का दामन थाम लेंगे। गठबंधन में कॉंग्रेस एक सीट की बढ़ौतरी कर लेगी।

कांग्रेस नेता शकील अहमद ने पार्टी प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है. और राहुल गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया है.

नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है. बिहार में मधुबनी सीट महागठबंधन के सहयोगी दल के पास जाने के बाद से शकील अहमद आलाकमान को इस पर पूर्ण विचार करने को कह रहे थे. वहीं, आरजेडी नेता असरफ फातमी ने भी पार्टी को इसके लिए अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी. अब शकील अहमद ने मधुबनी सीट से नामांकन कराने का फैसला कर लिया है और पार्टी से इस्तीफा देने के लिए राहुल गांधी को चिट्ठी भेज दी है.

शकील अहमद ने कांग्रेस के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है. साथ ही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना इस्तीफा भी भेज दिया है. हालांकि कहा जा रहा है कि उन्होंने पूर्ण विचार के लिए 18 तारीख तक अल्टीमेटम दे दिया है. लेकिन वह मधुबनी सीट से मंगलवार को नामांकन करने का फैसला किया है.

शकील अहमद ने कहा है कि वह मधुबनी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने को तैयार है. इसलिए वह मंगलवार को नामांकन भी कराएंगे. बता दें कि महागठबंधन में मधुबनी सीट वीआईपी पार्टी के खाते में गई है. और पार्टी ने बद्री कुमार पूर्वे को यहां से उम्मीदवार घोषित किया है.

Congress’s Shakeel Ahmad tweets, “As I have decided to file my nomination papers tomorrow from Madhubani Parliamentary Constituency in Bihar, I’m resigning from the post of Senior Spokesperson of AICC. I’m sending my resignation to Congress President Shri Rahul Gandhi.”(file pic) pic.twitter.com/axaHxTV0S41906:10 PM – Apr 15, 2019Twitter Ads info and privacy66 people are talking about this

इससे पहले आरजेडी नेता अली असरफ फातमी ने भी पार्टी छोड़ने के संकेद दिए थे. उन्होंने पार्टी को 18 तारीख तक का अल्टीमेटम दिया है. जिसके बाद उन्होंने ने भी मधुबनी सीट से नामांकन कराने का दावा किया है. हालांकि उन्होंने कहा था कि अगर कांग्रेस शकील अहमद को सिंबल दे देती है तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे.

फातमी ने कहा था कि उनकी बात लालू यादव और तेजस्वी यादव से मधुबनी सीट पर चुनाव लड़ने को लेकर हो गई थी. लेकिन अंतिम समय में किस तरह की साजिश की गई जो सीट वीआईपी को दे दिया गया. वहीं, फातमी ने शकील अहमद के नाम को लेकर महागठबंधन को मौका दिया है और कहा है कि इस पर भी विचार किया जा सकता है.

बहरहाल, महागठबंधन में अब फिर से अंदर खाने में जंग छीड़ गई है. मधुबनी सीट को वीआईपी पार्टी को देने के बाद आरजेडी और कांग्रेस दोनों नेताओं ने बगावती तेवर दिखा दिए हैं. ऐसे में देखना यह कि महागठबंधन में मधुबनी सीट के लिए क्या फैसला होता है. अगर इस पर विचार नहीं किया गया तो मधबनी सीट उनके हाथ से निकलते हुई दिख रही है.

लोकतन्त्र के 4थे स्तम्भ के आत्मीयों की निर्मम हत्याएँ पीड़ादायक तो हैं ही साथ ही घोर दुर्भाग्यपूर्ण हैं: सारिका तिवारी

www.demokraticfront.com ग्रुप सरकार के दोगले रवैये और इस घटना की कड़े शब्दों में निन्दा करता है। और इंसाफ के लिए बिहार सरकार से मांग करता है।

कमल कलसी, बोधगया, (बिहार):

अखिल भारतीय पत्रकार समिति संघ के दिनेश पंडित अजय कुमार पांडे, संतोष कुमार ,राजेश कुमार द्विवेदी, शुभम कुमार विश्वनाथ आनंद, अविनाश कुमार, सहित सैकड़ों पत्रकारों ने बैठक कर नालंदा के शेखपुरा से हिंदुस्तान अखबार के ब्यूरो चीफ आशुतोष कुमार आर्य के पुत्र को निर्मम हत्या किए जाने को लेकर शोक सभा का आयोजन किया गया।

उपस्थित पत्रकारों ने 2 मिनट का मौन रखकर उसकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की एवं इस दुख की घड़ी में ईश्वर शक्ति प्रदान करें और साथ में एकजुटता का परिचय देते हुए हत्यारा की गिरफ्तारी करने की अपील जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन एवं सरकार से की है l बैठक में पत्रकारों ने निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए कहा है कि एक तरफ सरकार पत्रकारों की परिजनों की सुरक्षा करने की बात करती है वहीं दूसरी तरफ लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों पर एवं पत्रकार के परिजनों पर जिस प्रकार से हत्यारा ओं द्वारा निर्मम हत्या की जा रही है हमला किया जा रहा है जो देश लोकतंत्र के लिए खतरा है ।

ज्ञातव्य शेखपुरा हिंदुस्तान अखबार के ब्यूरो चीफ आशुतोष आर्य के पुत्र को रविवार की शाम जब घर पर नहीं लौटा वह लोगों में घबराहट होने लगी खोजबीन किया गया, बाद में पता चला कि गांव के कुछ दूर पर ही हत्या कर फेका हुआ है। इस प्रकार से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के परिजनों के साथ जिस प्रकार से हत्या हमला किया जा रहा है जो दुर्भाग्यपूर्ण है सरकार को चाहिए कि ऐसे लोगों को कठोर से कठोर कार्रवाई कर दंडित करें। पत्रकारों ने इसका पुरजोर विरोध किया है एवं जल्द से जल्द हत्यारों की गिरफ्तार करने की मांग की है।

पत्रकारों ने कहा है कि परिजनों की हत्या करने से कलम की लेखनी कम नहीं पड़ सकता। पत्रकारों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि हत्यारों को 2 दिन के अंदर गिरफ्तारी नहीं किया जाता है को चरणबद्ध आंदोलन पूरे देश में चलाई जाएगी पहले प्रखंड मुख्यालय जिला मुख्यालय में किया जाएगा।

महिला आयोग आरोपों को साबित करे: आज़म खान

समाजवादी सुप्रीमो अखिलेश यादव की उपस्थिती में आज़म खान ने जयाप्रदा पर अभद्र टिप्पणी की तो भाजपा ने अखिलेश यादव से माफी मांगने की बात कही। लेकिन समाजवादियों केतिहास में न तो आज तक एस कभी हुआ है न ही आगे इस बात की उम्मीद है। महिला आयोग ने इस घटना का स्वत:संग्यान लेते हुए आजम खान को नोटिस भेजा और उनका नामांकन रद्द करने की मांग भी की। इधर आज़म खान अपने चीर परिचित अंदाज़ में कहते सुनाई दिये की ‘कोई साबित कर दे मैं चुनाव नहीं लड़ूँगा’

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने रामपुर से लोकसभा चुनाव लड़ रही भाजपा प्रत्याशी और फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा के खिलाफ एक विवादास्पद टिप्पणी की है. राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने खान की टिप्पणी को ”बेहद शर्मनाक” करार दिया और कहा कि महिला आयोग उन्हें एक कारण बताओ नोटिस भेज रहा है. खान की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये शर्मा ने ट्वीट किया कि एनसीडब्ल्यू चुनाव आयोग से यह भी अनुरोध करेगा कि उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए.

शर्मा ने यह प्रतिक्रिया एक अन्य व्यक्ति के ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दी, जिसने सपा नेता का कथित वीडियो ट्वीट किया था. खान का ”अपमानजनक” टिप्पणी वाला वीडियो कई सोशल मीडिया साइटों पर साझा किया जा रहा है. वीडियो के मुताबिक रामपुर में एक चुनावी सभा में खान ने कहा “रामपुर वालों, उत्तर प्रदेश वालों, हिंदुस्तान वालों. उसकी असलियत समझने में आपको 17 बरस लग गए. मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का जो अंडरवियर है वह भी खाकी रंग का है. मैं 17 दिन में पहचान गया, आपको पहचानने में 17 बरस लगे, 17 बरस.” 

हालांकि, आजम खान ने इस वीडियो में जयाप्रदा का नाम नहीं लिया है लेकिन भाजपा इसे जया के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के रूप में पेश कर रही है. खान की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शर्मा ने कहा, ”यह बेहद शर्मनाक” है.

नक्सली हमले में भीमा मंडावी की मौत

लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण से पहले छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमला हुआ है भाजपा का बड़ा झटका . छत्तीसगढ़ के अतिसंवेदनशील नक्सल प्रभावित जिले दंतेवाड़ा में मंगलवार की शाम नक्सलियों ने एक बड़ी घटना को अंजाम दिया। नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी की चपेट में आने से हमले में भाजपा विधायक भीमा मंडावी की मौत हो गई। उनके साथ ही घटना में सुरक्षा में तैनात चार जवान भी शहीद हो गए। इस घटना के बाद छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल ने हाइ लेवल मीटिंग बुलाई है। पीएम मोदी ने हमले की निंदा की है। उन्‍होंने कहा कि भीमा मांडवी भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता थे। मेरी संवेदनाएं विधायक के परिवार के साथ है  

रायपुर: 

लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण से पहले छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमला हुआ है. बीजेपी विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर नक्सली हमला हुआ है. 5 जवानों के शहीद होने की खबर है. बस्तर के इकलौते बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की इस नक्सल हमले में मौत हो गई है. एंटी-नक्सल ऑपरेशन के डीआईजी पी. सुंदर राज ने विधायक की मौत की पुष्टि की. इतना ही नहीं हमले के बाद सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच करीब आधा घंटे तक गोलीबारी भी हुई. 

पी. सुंदर राज ने बताया, “हमारे पास बीजेपी विधायक भीमा मंडावी के मारे जाने की खबर है. उनके ड्राइवर और तीन पीएसओ भी इस हमले में मारे गए हैं. यह शक्तिशाली विस्फोट था.”

नकुलनार के पास विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया है. नक्सलियों ने भीमा मंडावी के काफिले की एक गाड़ी को ब्लास्ट कर उड़ा दिया है. हमले में PSO समेत 5 जवानों के शहीद होने की खबर है. उधर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दोनदेकला में सभा छोड़कर वापस रायपुर लौट आए हैं. सीएम आवास में थोड़ी देर में उच्च स्तरीय बैठक शुरू होगी. डीजी डीएम अवस्थी, नक्सल डीजी गिरधारी नायक, गृह सचिव अरुणदेव गौतम सीएम हाउस बुलाए गए हैं. 

नक्सलियों ने विधायक के काफिले में बारूदी सुरंग में विस्फोट किया. राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया, “जिले के कुआकोंडा क्षेत्र के श्यामगिरी के करीब नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दंतेवाड़ा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक भीमा मंडावी के वाहन को उड़ा दिया. इस घटना में मंडावी की मौत हो गई तथा चार जवान भी शहीद हो गए. नक्सलियों ने विस्फोट के बाद गोलीबारी भी की है.” 

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली है, “भीमा मंडावी का काफिला आज बचेली से कुआकोंडा की ओर रवाना हुए थे. काफिला जब श्यामगिरी के करीब था तब नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया. इस घटना में वाहन क्षतिग्रस्त हो गया तथा उसमें सवार पांच लोगों की मृत्यु हो गई.” उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र के लिए अतिरिक्त बल रवाना किया गया है.

भाजपा के शत्रु अब कांग्रेस के हुए

पूनम सिन्हा स्पा ऊमीद्वार और पति शत्रु कांग्रेस के उम्मीदवार घर में गठबंधन

पत्नी को समाजवादी पार्टी से टिकट दिलवा राजनाथ सिंह के मुक़ाबले चुनाव लड़वायेंगे, और खुद कांग्रेस की पटना सीट से उम्मीदवार बनेंगे। अपनी सुविधा से यशवंत सिन्हा और अरूण शोरिए के साथ मोदी के धूर विरोधी रहे और शिकायत भी मोदी से। जब मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया था तभी से यह मोदी विरोध में उतर पड़े थे। अब मोदी विरोधि पार्टियों में अपने परिवार को उतार यह किसके साथ न्याय कर रहे हैं या फिर यह सभी को महागठबंधन का सच और उत्तरप्रदेश में अखिलेश का झूठ दिखाने जा रहे हैं।

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से लगातार बागी तेवर अपनाए शत्रुघ्न सिन्हा ने आखिरकार अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है. दिल्ली में उन्हें कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं ने सदस्यता दिलाई. इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर कई आरोप भी लगाए. उन्होंने इस बात के लिए भी नाराजगी जताई कि 2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनी तो उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया.

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि बीजेपी में अरुण शौरी, मुरली मनोहर जोशी, जसवंत सिंह और यसवंत सिन्हा सरीखे कई काबिल नेताओं को मंत्री नहीं बनाया गया. उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या मेरी छवि खराब थी? मेरे ऊपर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं थे. ऐसे लोगों को मंत्री बनाया गया है, जिन्हें कोई जानता तक नहीं है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार में सिर्फ पीएमओ से सारा काम होता है.

शत्रुघ्न सिन्हा ने आरोप लगाया कि सभी काबिल नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया, जिसकी आज तक एक मीटिंग नहीं हुई. साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लाल कृष्ण आडवाणी के करीबी हेने के कारण बीजेपी में उनका पत्ता काटा गया.

कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने बीजेपी की स्थापना दिवस पर बधाई भी दी. साथ ही कहा कि पार्टी में मेरी परवरिश नानाजी देशमुख के देखरेख में हुई. मुझे अटली जी और आडवाणी जी ने मर्गदर्शन दिया. बीजेपी में शामिल होने के बाद सुबोध कांत सहाय मुझे पहली बार पब्लिक लाइफ में लेकर गए.

साथ ही बिहारी बाबू ने कहा कि मुझे कांग्रेस के नेता 25 वर्षों से कह रहे थे कि आपको कांग्रेस में शामिल होना चाहिए. बीजेपी से ट्रेनिंग लेता हुआ मैं सही मायने में लोकशाही का पालन करते हुए आगे बढ़ता गया.

लालू की जमानत याचिका पर सुनवाई 10 को

नई दिल्ली/पटना : 

लालू यादव के वकील कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दी है कि लालू यादव कि जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई हो, अब सिब्बल कहे और बात ना मानी जाये ऐसा तो हो ही नहीं सकता, उनकी जमानत पर सुनवाई अब 10 अप्रैल को होगी। अटकलें हैं कि उन्हे चुनावों के चलते सेहत के आधार पर जमानत मिल ही जाएगी।

चारा घोटाला के विभिन्न मामलों में सजा काट करे राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई हो सकती है. लालू यादव के वकील कपिल सिब्बल ने जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की है. खबर है कि सुप्रीम कोर्ट 10 अप्रैल को जमानत याचिका पर सुनवाई कर सकता है. इससे पहले कोर्ट ने 15 मार्च सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. ज्ञात हो कि लालू यादव ने स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मांगी है.

इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. दरअसल, लालू प्रसाद यादव ने स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मांगी है, जिसमें कहा गया है कि उनकी उम्र 71 की हो गई है. उन्हें डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हृदय रोग सहित कई अन्य बीमारियां हैं. फिलहाल, उनका रिम्स में इलाज चल रहा है. वह प्रतिदिन करीब 13 प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं.

चुनाव के लिए अहम है जमानत

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. ऐसे में लालू प्रसाद यादव का सुप्रीम कोर्ट का रुख करना बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि वह आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करनी है. इसको लेकर पार्टी नेताओं के साथ उन्हें कई बैठक करनी होगी और रणनीति तय करनी होगी.

हाईकोर्ट में दे थी ये दलीलें

झारखंड हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि इस मामले में तत्कालीन विभागीय मंत्री विद्यासागर निषाद, तत्कालीन विभागीय सचिव बेक जूलियस, नेता आरके राणा, जगदीश शर्मा और जगन्नाथ मिश्र बरी हो गए तो लालू प्रसाद ने किसके साथ मिलकर अवैध निकासी का षड्यंत्र रचा.

साथ वकील ने यह भी दलील दी थी कि कोर्ट ने लालू प्रसाद को षडयंत्र करने का दोषी पाया है, जबकि सीबीआई इसे साबित करने में विफल रही है.यदि यह मामला षड्यंत्र का रहता तो सभी को दोषी करार दिया जाना चाहिए. इससे साबित होता है कि उन्होंने कोई षड्यंत्र नहीं किया.

900 करोड़ रूपये से अधिक के चारा घोटाले से संबंधित तीन मामलों में प्रसाद को दोषी ठहराया गया है. ये मामले 1990 के दशक की शुरुआत में पशुपालन विभाग के कोषागार से पैसे की धोखाधड़ी करने से संबंधित थे. उस समय झारखंड बिहार का हिस्सा था.

अखिलेश अपनी नीतियों के कारण अजमगढ़ खो देंगे : ‘निरहुआ’

नई दिल्ली: 

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ के नाम से जाने जाते हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में निरहुआ भी चुनावी मैदान में हैं और बीजेपी की तरफ से उन्हें यूपी के आजमगढ़ से उम्मीदवार बनाया गया है. इस सीट पर निरहुआ का मुकाबला यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश सिंह यादव से होने वाला है. अब तक अपनी फिल्मी करियर में निरहुआ ने खूब नाम कमाया है और अब वह राजनीतिक गलियारों में भी अपनी पहचान बनाने निकल पड़े हैं.

पूरा आजमगढ़ यही कह रहा है

एक निजी टीवी चैनल के साथ खास बातचीत में निरहुआ ने आजमगढ़ सीट पर चर्चा करते हुए बताया, ‘अखिलेश सिंह हमारे बड़े भाई हैं, साथ ही एक बड़े नेता भी हैं, लेकिन आजमगढ़ में वह सिर्फ अपने नीतियों के कारण हारेंगे. मेरे लिए तो पूरा आजमगढ़ ही मेरा है, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लमान हो, चाहे वो कोई दलित हो या पिछड़ा हो कोई भी हो, सारे मेरे साथ हैं. पूरा आजमगढ़ कह रहा है कि भइया हमें सिर्फ आप ही चाहिए. सच के साथ जो हैं, उसके साथ सभी हैं. अगर मैं गलत राह पर होता तो मेरे साथ कोई नहीं होता.’

आजमगढ़ में चुनाव लड़ना को बताया नियती

आज तक जिसके लिए आप चुनाव प्रचार करते आए हैं और आज उन्हें के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. क्या आप उन्हें हराने की क्षमता रखते हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए निरहुआ ने बताया, ‘ईश्वर को कब क्या करना है और नियती में कब क्या लिखा है वो हम लोग नहीं जानते. कहा जाता है कि एक पल में क्या से क्या हो जाएगा ये कोई नहीं जानता है और आज मैं अखिलेश सिंह के खिलाफ चुनाव में खड़ा हूं, यह उसी का उदाहरण है.’

पीएम मोदी ने जो कहा वो कर दिखाया

वहीं, पीएम मोदी के बारे में बातचीत करते हुए निरहुआ ने कहा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी आज किसी से ये नहीं पूछने जाते हैं कि तुम अगले हो या पिछले हो, तुम मोदी हो या यादव हो. अरे भाई गरीब है तो इसको पेंशन दो, शौचालय दो… सबको दे रहे हैं, सबका साथ सबका विकास. पीएम ने जो कहा, वो करके दिखाया भी. कथनी और करनी में बाकी लोगों का तो बड़ा अंतर है. बाकी लोग तो कहते कुछ और हैं और करते कुछ और हैं.’

यूपी में सारी सीटें बीजेपी की

निरहुआ ने कहा, ‘वे लोग कहते हैं कि हम बाबासाहेब अंबेडकर जी को मानते हैं. बाबासाहेब अंबेडकर के नाम पर दलितों को इकट्ठा किए और बाबासाहेब अंबेडकर ने कहा कि शिक्षत बनो, संघर्ष करो और आगे बढ़ो. ये थोड़ी ही न कहा था कि शिक्षक बनो और दलितों का शोषण करो. ये (मायावती) तो शिक्षक बन गईं और शिक्षक बनने के बाद इन्होंने अपने दिमाग का इस्तेमाल करके सबको एक साथ जुटाकर उनके हक की चीजों को आज क्या कर रही हैं, देखिए आप.’ उन्होंने अंत में कहा, ‘यूपी में सारी सीटें बीजेपी ही जीतेगी. मैं उन लोगों के विचार से बिलकुल भी सहमत नहीं हूं, जो ये सोचते हैं कि नरेंद्र मोदी जी से बेहतर प्रधानमंत्री कोई और हो सकते हैं.