कॉलरवाली बाघिन का सनातन रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार

मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली पेंच टाइगर रिजर्व की विश्व विख्यात कॉलरवाली बाघिन की मृत्यु हो गई है। उसने अपने पूरे जीवन काल में 29 टाइगरों को जन्म दिया जो एक विश्व रिकॉर्ड बताया जाता है। … पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी की मादा टाइगर टी 15 की पहचान कॉलरवाली बाघिन के रूप में थी।

मध्यप्रदेश (ब्यूरो) :

पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी की मादा टाइगर टी 15 की पहचान कॉलरवाली बाघिन के रूप में थी। वह वन्यप्राणी प्रेंमियों के बीच काफी चर्चित थी और कुछ दिनों से बीमार चल रही थी। सोलह साल से ज्यादा उम्र की कॉलरवाली बाघिन को 2005 में उस समय की विख्यात बाघिन बड़ी मादा ने जन्म दिया था। मां की मौत के बाद उसकी विरासत को कॉलरवाली बाघिन टी 15 ने संभालकर अपनी पहचान बनाई और उसने पूरे जीवन काम में 2008 से लेकर 2018 के बीच आठ बार में 29 शावकों को जन्म दिया। उनसे पेंच में टाइगर के कुनबे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। 

कॉलरवाली बाघिन के 25 शावक जीवित रहे
सोलह साल से ज्यादा उम्र वाली कॉलरवाली बाघिन ने जिन 29 शावकों को जन्म दिया, उनमें से 25 शावक जीवित रहे थे। वन्यप्राणी विशेषज्ञों के मुताबिक एक बाघिन के जीवनकाल में इतनी बढ़ी संख्या में टाइगर शावकों को जन्म देने और उनमें से 25 शावकों के जीवित रहने का अनोखा रिकॉर्ड कॉलरवाली बाघिन के नाम है। उसने सबसे पहले 2008 में तीन शावकों को जन्म दिया था। इसके बाद उसी साल अक्टूबर में चार, अक्टूबर 2010 में पांच, मई 2012 में तीन, अक्टूबर 2013 में तीन, अप्रैल 2015 में चार, 2017 में तीन और दिसंबर 2018 में चार शावकों को कॉलरवाली बाघिन ने जन्म दिया। 

मध्य प्रदेश को टाइगर्स स्टेट का दर्जा दिलाने में 29 शावकों को जन्म देने वाली कॉलरवाली बाघिन की भूमिका अहम थी। कॉलरवाली बाघिन का जन्म सितम्बर 2005 में हुआ था। इस बाघिन को ‘पेंच की रानी’ व ‘सुपर मॉम’ के नाम से भी जाना जाता था। ‘कॉलरवाली’ बाघिन ने मई 2008 से दिसंबर 2018 के मध्य कुल आठ बार में 29 शावकों को जन्म दिया और पेंच में बाघों का कुनबा बढ़ाने में अपना अविस्मरणीय योगदान दिया। 29 शावकों में से 25 शावकों को जन्म पश्चात एक बाघिन द्वारा जीवित रख पाना भी अपने आप में अभूतपूर्व कीर्तिमान है। साल 2011 में इस बाघिन ने एक साथ पाँच बच्चों को जन्म दिया था, जो अपने आप में दुर्लभ है।

बाघिन की मौत के बाद से वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी चहेती बाघिन के लिए शोक संदेश लिख रहे हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने ट्वीट कर दुख जताया।

शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “मप्र को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली, मध्य प्रदेश की शान व 29 शावकों की माता पेंच टाइगर रिजर्व की ‘सुपर टाइग्रेस मॉम’ कॉलरवाली बाघिन को श्रद्धांजलि। पेंच टाइगर रिजर्व की ‘रानी’ के शावकों की दहाड़ से मध्य प्रदेश के जंगल सदैव गुँजायमान रहेंगे।”

आईएफएस परवीन कासवान ने अपने ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, “पेंच की कॉलरवाली बाघिन का अंतिम संस्कार किया गया। आपको भारत के अलावा ऐसा कहाँ देखने को मिलेगा।”

एक यूजर ने ‘सुपर मॉम’ के निधन पर लिखा, “हम आज भी ऐसे भारत में रहते हैं, जहाँ बाघों का अंतिम संस्कार किया जाता है। पेंच की कॉलरवाली को अलविदा। ऐसी बाघिन जिसने शावकों की पुश्तों को जन्म दिया। एक ऐसी बाघिन जिसने जीवन पर्यंत शावकों का ध्यान रखा, लेकिन मृत्यु के समय अकेली रही।”

शिवानंद द्विवेदी ने ट्विटर पर लिखा, “यह हिंदू संस्कृति में ही संभव है।”

‘मैं चाहता हूँ कि हमारे संस्कार हमारे बच्चे भी देखें’

लोगों ने कॉलरवाली बाघिन का शुक्रिया भी किया

दरअसल पेंच नेशनल पार्क में इस बाघिन के गले में सबसे पहले रेडियो कॉलर लगाया गया था, ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इसके बाद से ही बाघिन को कॉलरवाली के नाम से जाना जाने लगा था। जनवरी 2019 में बाघिन की एक तस्वीर भी वायरल हुई थी, जिसमें वह अपने शावकों को मुँह में दबाकर ले जाती हुई दिखी थी। उसकी माँ को टी-7 बाघिन (बड़ी मादा) और पिता को चार्जर के नाम से जाना जाता था।

अंतर्दृष्टि आर-पार देखने की विधि है : ओशो रजनीश

धर्म संस्कृति डेस्क, चंडीगढ़:

चीजों को, जैसी वे दिखाई पड़ती हैं, उनको वैसी ही मत मान लेना। उनके भीतर बहुत कुछ है | एक आदमी मर जाता है। हमने कहा, आदमी मर गया। जिस आदमी ने इस बात को यही समझ कर छोड़ दिया, उसके पास अंतर्दृष्टि नहीं है| गौतम बुद्ध एक महोत्सव में भाग लेने जाते थे। रास्ते पर उनके रथ में उनका सारथी था और वे थे। और उन्होने एक बूढे आदमी को देखा। वह उन्होंने पहला बूढ़ा देखा।

जब गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, तो ज्योतिषियों ने उनके पिता को कहा कि यह व्यक्ति बड़ा होकर या तो चक्रवर्ती सम्राट होगा और या संन्यासी हो जाएगा। उनके पिता ने पूछा कि मैं इसे संन्यासी होने से कैसे रोक सकता हूं ? तो उस ज्योतिषि ने बडी अद्भूत बात कही थी। वह समझने वाली है। उस ज्योतिषि ने कहा, अगर इसे संन्यासी होने से रोकना है, तो इसे ऐसे मौंके मत देना जिसमें अंतर्दृष्टि पैदा हो जाए। पिता बहुत हैरान हुए – यह क्या बात हुई ? उनके पिता ने पूछा। ज्योतिषि ने कहा, इसको ऐसे मौंके मत देना कि अंतर्दृष्टि पैदा हो जाए। तो पिता ने कहा, यह तो बडा मुश्किल हुआ, क्या करेंगे ?

उस ज्योतिषी ने कहा कि इसकी बगिया में फूल कुम्हलाने के पहले अलग कर देना। यह कभी कुम्हलाया हुआ फूल न देख सके। क्योंकि यह कुम्हलाया हुआ फूल देखते ही पूछेगा, क्या फूल कुम्हला जाते हैं ? और यह पूछेगा, क्या मनुष्य भी कुम्हला जाते हैं ? और यह पूछेगा, क्या मैं भी कुम्हला जाऊंगा ? और इसमें अंतर्दृष्टि पैदा हो जाएगी। इसके आस-पास बूढे लोगों को मत आने देना। अन्यथा यह पूछेगा, ये बूढे हो गए, क्या मैं भी बूढा हो जाऊंगा ? यह कभी मृत्यु को न देखे। पीले पत्ते गिरते हुए न देखे। अन्यथा यह पूछेगा, पीले पत्ते गिर जाते है, क्या मनुष्य भी एक दिन पीला होकर गिर जाएगा ? क्या मैं गिर जाऊंगा ? और तब इसमें अंतर्दृष्टि पैदा हो जाएगी।

पिता ने बडी चेष्टा की और उन्होंने ऐसी व्यवस्था की, कि बुद्ध के युवा होते-होते तक उन्होंने पीला पत्ता नहीं देखा, कुम्हलाया हुआ फूल नहीं देखा, बूढा आदमी नहीं देखा, मरने की कोई खबर नहीं सुनी। फिर लेकिन यह कब तक हो सकता था ? इस दुनिया में किसी आदमी को कैसे रोका जा सकता है कि मृत्यु को न देखे ? कैसे रोका जा सकता है कि पीले पत्ते न देखे ? कैसे रोका जा सकता है कि कुम्हलाये हुए फूल न देखे ?

लेकिन मैं आपसे कहता हूं, आपने कभी मरता हुआ आदमी नहीं देखा होगा, और कभी आपने पीला पत्ता नहीं देखा, अभी आपने कुम्हलाया फूल नहीं देखा। बुद्ध को उनके बाप ने रोका बहुत मुश्किल से, तब भी एक दिन उन्होंने देख लिया। आपको कोई नहीं रोके हुए है और आप नहीं देख पा रहे है। अंतर्दृष्टि नहीं है, नहीं तो आप संन्यासी हो जाते। यानी सवाल यह हैं, क्योंकि उस ज्योतिषि ने कहा था कि अगर अंतर्दृष्टि पैदा हुई तो यह संन्यासी हो जाएगा। तो जितने लोग संन्यासी नहीं है, मानना चाहिए, उन्हें अंतर्दृष्टि नहीं होगी।

खैर, एक दिन बुद्ध को दिखाई पड़ गया। वे यात्रा पर गए एक महोत्सव में भाग लेने और एक बूढा आदमी दिखाई पडा और उन्होंने तत्क्षण अपने साथी को पूछा, इस मनुष्य को क्या हो गया ?
उस साथी ने कहा , यह वृद्ध हो गया।
बुद्ध ने पूछा , क्या हर मनुष्य वृद्ध हो जाता है ?
उस साथी ने कहा, हर मनुष्य वृद्ध हो जाता है।
बुद्ध ने पूछा, क्या मेैं भी ?
उस साथी ने कहा, भगवन, कैसे कहूं! लेकिन कोई भी अपवाद नहीं है। आप भी हो जाएंगे।
बुद्ध ने कहा, रथ वापस लौटा लो, रथ वापस ले लो।
सारथी बोला, क्यों ?
बुद्ध ने कहा, मैं बूढा हो गया।
यह अंतर्दृष्टि है। बुद्ध ने कहा, मैं बूढा हो गया। अदभुत बात कही। बहुत अदभुत बात कही।
और वे लौट भी नहीं पाए कि उन्होंने एक मृतक को देखा और बुद्ध ने पूछा, यह क्या हुआ ?
उस सारथी ने कहा, यह बुढापे के बाद दूसरा चरण है, यह आदमी मर गया।
बुद्ध ने पूछा, क्या हर आदमी मर जाता है ?
सारथी ने कहा, हर आदमी।
और बुद्ध ने पूछा, क्या मैं भी ?
और सारथी ने कहा, आप भी। कोई भी अपवाद नहीं है।
बुद्ध ने कहा, अब लोैटाओ या न लौटाओ, सब बराबर है।
साथी ने कहा, क्यों ?
बुद्ध ने कहा, मैं मर गया।

यह अंतर्दृष्टि है। चीजों को उनके ओर-छोर तक देख लेना। चीजें जैसी दिखाई पडें, उनको वैसा स्वीकार न कर लेना, उनके अंतिम चरण तक। जिसको अंतर्दृष्टि पैदा होगी, वह इस भवन की जगह खंडहर भी देखेगा। जिसे अंतर्दृष्टि होगी, वह यहां इतने जिंदा लोगों की जगह इतने मुर्दा लोग भी देखेगा-इन्हीं के बीच, इन्हीं के साथ। जिसे अंतर्दृष्टि होगी, वह जन्म के साथ ही मृत्यु को भी देख लेगा, और सुख के साथ दुःख को भी, और मिलन के साथ विछोह को भी।

अंतर्दृष्टि आर-पार देखने की विधि है। और जिस व्यक्ति को सत्य जानना हो, उसे आर-पार देखना सीखना होगा। क्योंकि परमात्मा कहीं और नहीं है, जिसे आर-पार देखना आ जाए उसे यहीं परमात्मा उपलब्ध हो जाता है। वह आर-पार देखने के माध्यम से हुआ दर्शन है। ओशो रजनीश

ग्वालियर में हिंदू महासभा ने छत्तीसगढ़ की कॉंग्रेस सरकार को चेतावनी दी और गांधी के हत्यारे की पुण्यतिथि मनाई

दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे मोहनदास गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे का साथी था। परचुरे ने ही गवालियर में स्थित अपने घर में नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को शरण दी थी। परचुरे ने मोहनदास करमचंद गांधी की हत्या के लिए गोडसे और नारायण आप्टे को पिस्टल उपलब्ध कराई थी। इसके ही आरोप में डॉक्टर दत्तात्रेय को आजीवन कारावास हुआ था। हिंदू महासभा की तरफ से छत्तीसगढ़ सरकार को चेतावनी के बाद आज ग्वालियर में महात्मा गांधी के हत्यारे दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे की जयंती मनाई। छतीसगढ़ में सरकार कॉंग्रेस की है जिनहोने म्हात्मा गांधी को अपशब्द बोलने पर एक संत को गिरफ्तार कर लिया था।

दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे(सबसे दायें), नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे

डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम, नयी दिल्ली/मध्य प्रदेश :

दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के साथी थे। परचुरे ने ही ग्वालियर में स्थित अपने घर में गोडसे और आप्टे को शरण दी थी। इन दोनों को महात्मा गांधी की हत्या के लिए पिस्टल भी उसी ने उपलब्ध कराई थी। इसी आरोप में परचुरे को आजीवन कारावास की सजा मिली थी।छत्तीसगढ़ सरकार को चेतावनी के बाद आज ग्वालियर में महात्मा गांधी के हत्यारे दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे की जयंती मनाई गई। यह आयोजन हिंदू महासभा की तरफ से किया गया। हिंदू महासभा ने दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे की 37वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी तस्वीर का अनावरण किया है। इस मौके पर हिंदू महासभा के प्रदेश पदाधिकारी से लेकर सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम पूर्व घोषित होने के बावजूद पुलिस प्रशासन की तरफ से इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस मौके पर हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज ने कहाकि देश का विभाजन मोहनदास करमचंद गांधी ने किया था। इसके चलते 50 लाख हिंदू बेघर हो गए और 10 हिंदुओं का कत्लेआम हो गया।

शहर के बीचों-बीच स्थित हिंदू महासभा कार्यालय में शुक्रवार दोपहर को प्रदेश के सभी हिंदू महासभा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकजुट हुए। इसके बाद यहां विधिवत बापू के हत्यारे गोडसे, नारायण आप्टे और दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे की तस्वीर लगाई गई। इसके बाद पूजा-अर्चना कर आरती उतारी गई। इस दौरान अंबाला की जेल से लाई गई मिट्टी से बापू के तीनों हत्यारों की तस्वीर का अभिषेक किया।

पूजा-अर्चना के दौरान बापू के हत्यारों की अमर होने की आवाज गूंज रही थी। हिंदू महासभा के लोग बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे नारायण आप्टे और परचुरे के अमर रहने के जयकारे लग रहे थे। इसके साथ ही हिंदू महासभा के लोगों ने उनकी आरती भी उतारी। सबसे खास बात यह है हिंदू महासभा का यह कार्यक्रम पहले से ही घोषित था। कल महासभा के लोगों ने खुद शहर में बीच चौराहे पर चुनौती दी थी कि वह बापू के हत्यारों की पुण्यतिथि मनाएंगे। लेकिन इसके बावजूद आज पुलिस प्रशासन बेखबर नजर आया। 

दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे का साथी था। परचुरे ने ही ग्वालियर में स्थित अपने घर में नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को शरण दी थी। परचुरे ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को पिस्टल उपलब्ध कराई थी। इसके आरोप में ही डॉ दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे को आजीवन कारावास हुआ था।

देश में हिंदू महासभा का गढ़ ग्वालियर रहा है। बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे ने ग्वालियर के हिंदू महासभा कार्यालय में कई दिन गुजारे हैं। नाथूराम गोडसे ने जिस बंदूक से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या की थी वह बंदूक भी यहीं से खरीदी थी। उसने इसे चलाने की ट्रेनिंग भी यहीं से ली थी।

पीयूष जैन के बाद एक और इत्र व्यापारी रानू मिश्रा के यहां छापा पड़ा है

कन्नौज में इत्र व्यापारी पीयूष जैन के बाद एक और इत्र व्यापारी रानू मिश्रा के यहां छापा पड़ा है। खबरों के अनुसार रानू का घर टीम ने अंदर से बंद कर रखा है और उनके घर में खोजबीन की जा रही है। वहीं पीयूष के घर भी अब भी अधिकारी मौजूद हैं और तलाशी ले रहे हैं।

 इत्र व्यापारी पीयूष जैन

डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम – लखनऊ (ब्यूरो) :

यूपी के कन्नौज में एक इत्र कारोबारी के घर जीएसटी की विजिलेंस टीम के छापे की खबर है। जानकारी के मुताबिक कन्नौज शहर के होली मोहल्ला स्थित बड़े इत्र कारोबारी रानू मिश्रा के घर और कारखानों में विजिलेंस टीम जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि रानू मिश्रा, पान मसाला और नमकीन बनाने वाली कंपनियों को इत्र कम्पाउंड की सप्लाई करते हैं। ऐसे में कानपुर के कारोबारी पीयूष जैन के बाद यह दूसरी कार्रवाई है। वहीं दूसरी तरफ कानपुर में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर छापा मारने के बाद विजिलेंस टीम कन्नौज पहुंची है। बताया जा रहा है कि इत्र कारोबारी पीयूष जैन के दो बेटों को लेकर टीम कन्नौज पहुंची है जहां वो गुरुवार को सील किए मकान का ताला खोलकर सर्च ऑपरेशन शुरू कर चुकी है।

गौरतलब है कि पीयूष जैन कनौज के बड़े व्यापारियों में शुमार हैं। वे 40 से ज्‍यादा कंपनियों के मालिक हैं. इनमें से दो कंपनियां मिडिल ईस्ट में हैं। कन्‍नौज में पीयुष की परफ्यूम फैक्‍ट्री, कोल्‍ड स्‍टोरेज और पेट्रोल पंप भी हैं। मुम्बई में पीयुष का हैड आॅफिस है साथ ही वहां उनका एक बंगला भी है। पीयूष जैन इत्र का सारा बिजनेस मुंबई से करते हैं, यहीं से इनका इत्र विदेशों में भी भेजा जाता है।

इनकम टैक्स को टैक्स चोरी के अलावा शेल कंपनियां बनाकर मोटी-रकम इधर-उधर करने के दस्तावेज मिले हैं। खबरों के अनुसार पीयूष जैन अखिलेश यादव के करीबी हैं। कहा जा रहा है कि उन्हीं के संरक्षण में इतना सबकुछ चल रहा था।

उधर, इस मामले के सामने आने के बाद से राजनीति भी बढ़ गई है। सपा के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने ट्वीट कर लिखा है कि डबल इंजन की सरकार में लूट भी डबल हो गई। कानपुर का व्यापारी भी बीजेपी की हिस्सेदारी का ही आदमी है। बीजेपी का काला मन है इसीलिए वो जबरदस्ती व्यापारी को समाजवादी से जोड़ रही है। समाजवादी का व्यापारी के न इत्र से न बीजेपी के मित्र से कोई लेना देना नहीं। इससे पहले भाजपा के संबित पात्रा ने इस केस को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा था।

महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के बाद हरियाणा और यूपी में रात्रि कर्फ्यू

शोधकर्ताओं ने संभावित तीसरी लहर की भविष्यवाणी के लिए भारत में कोरोना की पहली और दूसरी लहर के आंकड़ों और अलग-अलग देशों में ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों का भी इस्तेमाल किया है। रिसर्च करने वाली टीम में आईआईटी कानपुर की गणित और सांख्यिकी विभाग के सबरा प्रसाद राजेशभाई, सुभरा शंकर धर और शलभ शामिल थे। MedRxiv में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर के रुझानों के बाद आईआईटी कानपुर के प्रोजेक्ट में कहा गया कि भारत में तीसरी लहर दिसंबर के मध्य में शुरू हो सकती है और ये फरवरी की शुरुआत में चरम पर होगी। बता दें कि शोधकर्ताओं ने तीसरी लहर की भविष्यवाणी करने के लिए गौसियन मिक्सचर मॉडल नाम के सांख्यिकीय उपकरण का इस्तेमाल किया था। गौरतलब है कि गुरुवार को पीएम मोदी ने कोविड-19 संक्रमण को लेकर एक समीक्षा बैठक की थी। केंद्र की इस बैठक में कोविड टास्क फोर्स के सदस्य भी शामिल हुए थे। इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से राज्यों को पत्र लिखा गया है जिसमें संक्रमण से बचने के लिए सख्ती लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम पंचकुला :

देश में कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के प्रसार को देखते हुए हरियाणा सरकार ने पाबंदियों का ऐलान किया है। राज्य में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू लगाने का फैसला किया गया है तो सार्वजनिक स्थानों पर 200 से अधिक लोगों के जुटने पर रोक लगा दी गई है। हरियाणा से पहले मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे बीजेपी शासित राज्यों ने भी नाइट कर्फ्यू की घोषणा कर दी है।

राज्य में कोरोना से निपटने के लिए तैयारियों की समीक्षा बैठक के बाद खट्टर ने कहा, ”राज्य में ओमिक्रॉन केसों के बढ़ने की संभावना को देखते हुए और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए 1 जनवरी 2022 से सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में प्रवेश के लिए वैक्सीन की दोनों खुराक को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर 200 से अधिक लोगों के एकत्रित होने और रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक गाडियों की आवाजाही को सख्ती से बैन कर दिया गया है।”

खट्टर ने कहा, ”ओमिक्रॉन के प्रभाव को रोकने के लिए जरूरी है कि लोगों को और अधिक जागरूक बनाया जाए। सभी को टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। कोविड के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को तैयारी पूरी कर लेनी चाहिए। 23 दिसंबर को दो लाख से अधिक लोगों को कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक मिली। इसके अलावा हर दिन 30 से 32 हजार मरीजों की जांच की जा रही है और जो पॉजिटिव पाए जा रहे हैं उनकी जीनोम स्वीकेंसिंग कराई जा रही है।”

हरियाणा सरकार ने लोगों को क्रिसमस का त्यौहार और नए साल का जश्न मनाने की छूट देते हुए 1 जनवरी से नाइट कर्फ्यू लागू करने के आदेश दिए हैं। हरियाणा सरकार के रात्रि कर्फ्यू के दौरान रात 11 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक आवागमन पूरी तरह से बंद रहेगा। इसके साथ ही 1 जनवरी से हरियाणा के सराकरी संस्थानों में एंट्री करने के लिए वैक्सीनेशन की दोनो डोज को अनिवार्य बना दिया गया है।

हरियाणा और गुजरात से पहले यूपी सरकार की तरफ से राज्य में नाइट कर्फ्यू लगाने का फैसला लिया गया है। सरकार की  तरफ से जारी आदेश में 25 दिसंबर से रात्रि 11 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक कोरोना कर्फ्यू लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।  वहीं शादी-विवाह आदि सार्वजनिक आयोजनों में कोविड प्रोटोकॉल के साथ अधिकतम 200 लोगों के भागीदारी की अनुमति दी गई है। आयोजनकर्ता इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को देंगे।

मध्य प्रदेश सरकार ने भी तीसरी लहर की आशंका के चलते राज्य में नाइट कर्फ्यू को लागू कर दिया है। कर्फ्यू रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक जारी रहेगा. सरकार की तरफ से कोरोना संक्रमण से बचने के लिए नई गाइडलाइंस भी जारी की गई है। नए आदेश के बाद सभी सिनेमाहॉल, मल्टीप्लेक्स, थियेटर, जिम, कोचिंग सेंटर, क्लब और स्टेडियम में 18 साल से अधिक उम्र के सिर्फ वो ही लोग प्रवेश पा सकेंगे जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। सभी विभागाध्यक्षों, ऑफिस हेड को ये देखना होगा कि उनके स्टाफ ने वैक्सीन की दोनों डोज लगवायीं या नहीं। अगर नहीं लगवायीं तो उन्हें ऐसा करने के प्रेरित करें।

गौरतलब है कि गुरुवार को पीएम मोदी ने कोविड-19 संक्रमण को लेकर एक समीक्षा बैठक की थी। केंद्र की इस बैठक में कोविड टास्क फोर्स के सदस्य भी शामिल हुए थे। इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से राज्यों को पत्र लिखा गया है जिसमें संक्रमण से बचने के लिए सख्ती लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

ताकत दिखाना, जिससे दूसरे समुदाय की भावना भड़कती है, वह उचित नहीं है – खट्टर

विधानसभा में शून्यकाल के दौरान नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने हिंदू संगठनों की ओर से की जा रही आपत्ति का मुद्दा उठाया था। इसका जवाब देते हुए खट्टर ने कहा कि सभी धर्मों के लोग निर्धारित धार्मिक स्थानों जैसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च में प्रार्थना करते हैं और सभी बड़े त्योहारों के लिए खुले में अनुमति दी जाती है। अहमद के मुद्दे पर खट्टर ने कहा, ‘लेकिन ताकत दिखाना, जिससे दूसरे समुदाय की भावना भड़कती है, वह उचित नहीं है।’

डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम चंडीगढ़

हरियाणा के गुरुग्राम में खुले में नमाज का मामला राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी उठा। इस मामले को उठाने वाले नूँह से कॉन्ग्रेस विधायक आफताब अहमद के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि ताकत दिखाकर दूसरे समुदाय की भावनाओं को भड़काना उचित नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार (21 दिसंबर 2021) को शून्यकाल के दौरान कॉन्ग्रेस विधायक अहमद ने गुरुग्राम में मुस्लिमों द्वारा खुले में नमाज करने पर हिंदू संगठनों के विरोध का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “कुछ तत्व लगातार जुमे (शुक्रवार) की नमाज को बाधित कर रहे हैं। संविधान ने सभी को अपने धर्मों के पालन के इजाजत दी है। किसी को भी नमाज में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। गुरुग्राम में हजारों करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। शहर विकास का प्रतीक है। अगर कोई अपनी मर्जी से प्रार्थना भी नहीं कर पाएगा तो क्या संदेश जाएगा।”

इसके जवाब में सीएम ने कहा, “सभी धर्मों के लोग मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्चों जैसी धार्मिक जगहों पर ही प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा सभी बड़े त्योहारों के मौके पर खुले में प्रार्थना की अनुमति दी जाती है। लेकिन ताकत का प्रदर्शन करना जो दूसरे समुदाय की भावनाओं को भड़काता है, उचित नहीं है।” मुख्यमंत्री के मुताबिक, किसी को भी खुले इस तरह के आयोजन नहीं करने चाहिए। यह हम सब जिम्मेदारी है कि शांतिपूर्ण माहौल बना रहे।

खट्टर ने इस बात पर खुशी भी व्यक्त की कि लोग एक निश्चित स्थान पर जुमे की नमाज के लिए समहत हुए हैं और नए सिस्टम के लागू होने तक इस पर सहमति है। इसके साथ ही सीएम ने खुले में नमाज के मुद्दे को स्थानीय विवाद करार दिया और कहा कि इस मसले को हवा नहीं देनी चाहिए, अन्यथा इससे साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है।

इससे पहले 10 दिसंबर 2021 को सीएम ने सख्त हिदायत देते हुए कहा था कि खुले में नमाज की प्रथा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि खुले में नमाज किसी भी हाल में नहीं होना चाहिए। खट्टर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, “हमने यहाँ पुलिस को भी कहा है और डिप्टी कमिश्नर को भी कहा है। इस विषय का समाधान निकालना है। कोई अपनी जगह पर नमाज़ पढ़े या पूजा-पाठ करे, इससे हमें कोई दिक्क्त नहीं है। धार्मिक स्थल इसीलिए बने होते हैं। खुले में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। ये नमाज़ पढ़ने की जो प्रथा यहाँ खुले में शुरू की गई है, वो कतई सहन नहीं की जाएगी। सबके साथ बैठकर इसका समाधान निकाला जाएगा।” साथ ही सीएम ने खुले में नमाज के लिए जिन 37 स्थानों को निश्चित किया गया था, उसे भी रद्द कर दिया था।

8 विद्यार्थियों का धर्म बदलने पर स्कूल के साथ परिवारों का बवाल

24 नवंबर को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने विदिशा के डीएम को इस मामले में चिट्ठी लिखी थी। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद उन्होंने 31 अक्टूबर को आठ बच्चों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने का आरोप लगाया था। हालांकि, स्कूल के प्रिंसिपल ने धर्मांतरण के आरोप का खंडन किया था और इसे फर्जी खबर बताया था। सोमवार को हंगामा होने पर एसपी और कलेक्टर मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को समझाइश दी। एसपी मोनिका शुक्ला ने बताया कि मामले की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

राजविरेन्द्र वशीष्ठा, चंडीगढ़/मध्य प्रदेश :

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के एक मिशनरी स्कूल में दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के तोड़फोड़ करने का मामला सामने आया है। इस मामले के सामने आये ही गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान भी सामने आया है। जी दरअसल उन्होंने आज यानी मंगलवार को कहा कि ‘सरकार को धर्म परिवर्तन की गतिविधियों में शामिल लोगों की जांच करवा रहे है। हालांकि इस मामले में 4 लोग गिरफ्तार हुए है।’

मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित एक स्कूल में कथित धर्मांतरण को लेकर हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन की खबर है। आरोप है कि सेंट जोसेफ स्कूल में नारेबाजी, तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की गई। घटना 6 दिसंबर 2021 (सोमवार) की है जब स्कूल में 12वीं की परीक्षा हो रही थी। आक्रोशित लोगों ने स्कूल मैनेजमेंट पर कार्रवाई की माँग की है। हालाँकि विश्व हिन्दू परिषद ने किसी भी हिंसक घटना से इनकार किया है।

इसी स्कूल ने पहले भी भारत माता की जय बोलने पर 31 छात्रों को सज़ा दी थी और अपने संगठन का मुद्दा बताया था। नामली कस्बे में स्थित सेंट जोसफ कॉन्वेंट स्कूल में पिछले दिनों (शुक्रवार) 9वीं कक्षा के 31 बच्चों को जमीन पर बैठाया गया और उन्हें परीक्षा देने से वंचित कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बच्चों ने एसेंबली में ‘भारत माता की जय’ का घोष किया था, जिससे उन्हें परीक्षा से वंचित किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिन्दू संगठनों ने स्कूल के अंदर 8 छात्रों के धर्मान्तरण का आरोप लगाया है। इस संबंध में प्रशासन को ज्ञापन भी दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है। साथ ही तोड़फोड़ करने वालों पर IPC के तहत केस भी दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारी (SDOP) भारत भूषण शर्मा ने यह जानकारी मीडिया को दी।

स्कूल प्रशासन ने खुद पर लगे सभी आरोपों को नकारा है। स्कूल के प्रिंसिपल ने इसको 2 समुदायों के बीच दूरी पैदा करने की साजिश बताया। इस घटना के लिए उन्होंने कुछ यूट्यूब चैनलों की खबरों को जिम्मेदार ठहराया। कर्मचारियों की सुरक्षा की माँग करते हुए झूठी खबर चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। स्कूल के मैनेजर ब्रदर एंथोनी ने पुलिस पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं देने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, “सिर्फ 2 पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। जिन 8 बच्चों के धर्मान्तरण के आरोप पर हंगामा हुआ वे हमारे स्कूल के छात्र नहीं थे।”

विश्व हिन्दू परिषद ने हिंसा को नकारते हुए बताया कि स्कूल के अंदर कलावा तक पहनने से रोका जाता है। VHP कार्यकर्ता नीलेश अग्रवाल के मुताबिक स्कूल में बच्चों को तिलक लगाने से रोका जाता है। दूसरे धर्म के बच्चों से अन्य धर्मों की प्रार्थना करवाई जाती है। धर्मान्तरण के निशाने पर ख़ासतौर से गरीब बच्चों को रखा जाता है। उन्होंने कहा हम सप्ताह भर से इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

याद रहें की 12 जुलाई 2016 में भी एक ईसाई स्कूल ने ऐसा ही किया था। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक मिशनरी स्कूल द्वारा छात्रों के भारत माता की जय के नारे लगाने पर पाबंदी लगाने का मामला सामने आया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, स्कूल प्रशासन के इस फैसले के बाद बच्चों के पैरंट्स के बीच काफी नाराजगी है। उधर स्कूल का कहना है कि मैनेजमेंट के आदेश पर यह रोक लगाई गई है।

अहिरवार समाज संघ ने इस संबंध में 4 दिसंबर को विदिश के डीएम से शिकायत की थी। इसमें कहा गया है कि 8 हिंदू बच्चों का पानी छिड़क कर ईसाई धर्मांतरण कराया गया। स्कूल की आड़ में धर्मांतरण रैकेट चलाने का आरोप लगाया गया है। गौरतलब है कि इस स्कूल के खिलाफ 2018 में फीस नहीं देने पर एक हिंदू छात्र को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए ABVP ने प्रशासन से शिकायत की थी।

भास्कर बहाना है, मीडिया निशाना है

केंद्र में किसान आंदोलन का कोई उचित समाधान ना दे पाने से इस मोर्चे पर मुंह की खाये केंद्र सरकार, बंगाल से भी मुंह की खा कर लौटी मोदी – शाह की जोड़ी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ पर पिल पड़ी और वहाँ भी कुछ हाथ नहीं लगा तो तिलमिलाई सरकार अपनी साख बचाने का प्रयास कर ही रही थी कि मानसून सत्र के एन पहले फोन टेपिंग का मामला सुर्खियों में आ गया। अब मोदी शाह आकंठ गुस्से मेन डूब गए और फिर जो लावा फूटा तो वह सबसे आसान शिकार मीडिया पर।

  • दैनिक भास्कर समूहों के सभी ऑफिसों पर पड़ रहे हैं आयकर विभाग के छापे
  • भोपाल स्थित ऑफिस पर सुबह से ही जारी है छापेमारी
  • अखबार मालिक के घर पर भी की जा रही है छापेमारी
  • न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक कर चोरी के मामले में जारी है छापेमारी

चंडीगढ़/नयी दिल्ली:

कुछ बोल के लब आज़ाद हैं तेरे

अभी अभी भारत समाचार चैनल लखनऊ में रेड।

आयकर विभाग ने कर चोरी के आरोपों में मीडिया समूह दैनिक भास्कर और भारत समाचार के विभिन्न शहरों में स्थित परिसरों पर गुरुवार को छापे मारे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि छापेमारी भास्कर समूह के  भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और कुछ अन्य स्थानों पर की गयी है। वहीं भारत समाचार के प्रमोटर्स और एडिटर-इन-चीफ के ठिकानों पर भी आयकर विभाग की तरफ से कार्रवाई की गयी है।

हालांकि अभी तक विभाग या उसके नीति निर्माण निकाय से किसी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है लेकिन आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई विभिन्न राज्यों में संचालित हिंदी मीडिया समूह के प्रमुखों के खिलाफ चल रही है। कांग्रेस नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर कहा कि आयकर विभाग के अधिकारी समूह के करीब छह परिसरों पर “मौजूद हैं”। इनमें राज्य की राजधानी भोपाल में प्रेस कॉम्प्लेक्स में उसका कार्यालय भी शामिल है। बताते चलें कि कोरोना संकट के दौरान दैनिक भास्कर की तरफ से कई ग्राउंड रिपोर्ट किए गए थे।

बताते चलें कि आयकर विभाग की तरफ से यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है। विपक्षी दल पेगासस जासूसी मामले को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं। मंगलवार को कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी पार्टियों ने संसद के दोनों सदनों में यह मुद्दा उठाते हुए कार्यवाही बाधित कर दिया था। विपक्षी सदस्यों ने पत्रकारों, नेताओं, मंत्रियों, न्यायाधीशों और अन्य लोगों की इजराइली पेगासस स्पाईवेयर से जासूसी कराए जाने के आरोपों पर दोनों सदनों में जमकर विरोध जताया था।

सिंधिया की ‘उड़ान’ पर पायलट गहलोत द्वारा सिरे से नकारे गए अभी भी हैंगर में

ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया के कॉंग्रेस छोड़ भाजपा में जाने पर आहत हुए राहुल गांधी ने मीडिया को बताया था की वह और सिंधिया कोपलेज के समय से एक दूसरे के मित्र हैं और सिंधिया का यह कदम उनकी कोंग्रेसी विचारधारा से मेल नहीं खाता। आरएसएस ने उन्हें मात्र इस्तेमाल कर मध्य प्रदेश की सत्ता हथियाने के लिए किया है, जिस सम्मान और पद के लिए वह वहाँ गए हैं उन्हें वह इज्जत और गरिमामय स्थान वहाँ नहीं मिलेगा। कल जब सिंधिया को उड्डयन मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार दिया गया तो कोंग्रेसी खेमे में मायूसी छा गयी। सिंधिया को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिलते ही रास्थान में पायलट को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। गहलोत अपने पुराने साथी को किसी भी सम्मानजनक स्थिति में देखना पसंद नहीं कर रहे। यहाँ तक कि उन्होने आलाकमान के सचिन को लेकर सुझाए गए फार्मूले को भी सिरे से नकार दिया। सिंधिया को मिले केन्द्रीय मंत्रिमंडल के सम्मान से सचिन सोच में तो पड़े होंगे?

  • एक साल बाद जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया को केन्द्रीय मंत्रिपद मिला वहीं गहलोत ने पायलट को सिरे से खारिज कर दिया
  • ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ी तो सचिन पायलट का भाव बढ़ने का अनुमान जताया जाने लगा था
  • हालांकि, लंबा वक्त बीतने के बाद भी पायलट खुद को कांग्रेस पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रहे हैंज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में केंद्रीय मंत्री पद मिलने के बाद पायलट को लेकर कयासों का बाजार गरम
  • सोशल मीडिया पर पायलट की कांग्रेस में दाल नहीं गलने और अब बीजेपी के विकल्प पर चर्चे

सरीका तिवारी, जयपुर/नयी दिल्ली/ चंडीगढ़:

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर सियासी संकट को गुजरे अब एक साल पूरा हो चुका है। पिछले साल जुलाई में ही पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने सरकार में सम्मानजन स्थिति को लेकर गहलोत नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी। मामला बिगड़ने के बाद आलाकमान के दखल पर एक कमेटी का गठन कर कुछ समय के लिये खींचतान के माहौल को शांत कर दिया गया, लेकिन रुक-रुककर पायलट और समर्थक विधायकों की टीस फिर से उठती रही है। कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी में आये ज्योतिरादित्य सिंधिया को मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में मिली पॉजिशन के बाद फिर से बगावती सुर सामने आये हैं।सोशल मीडिया पर ‘पायलट’ ट्रेंड करने रहा है। पायलट समर्थक विधायक पर फिर से बगावती तेवर और मानेसर या दिल्ली का रास्ता इख्तियार करने की स्थिति बनी तो पीछे नहीं हटने की बात कर रहे हैं।

जुलाई 2020 के बाद 2021 का जुलाई भी आ गया है। इस दौरान राजनीति में जो सवाल सबसे ज्यादा पूछा गया वह है कि सचिन पायलट कब कॉन्ग्रेस छोड़ेंगे? ज्योतिरादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस छोड़ने के कुछ ही समय बाद उन्होंने भी बगावत का मूड दिखाया था। लेकिन बगावती तेवर दिखाने के बावजूद सिंधिया की तरह आखिरी फैसला नहीं कर पाए। अब एक बार फिर उसी सिंधिया को मोदी कैबिनेट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट के कॉन्ग्रेस छोड़ने को लेकर कयास तेज हो गए हैं।

पायलट ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उनके समर्थक विधायकों के बीच हलचल दिख रही है। जो संकेत मिल रहे हैं कि उससे लगता है कि इस बार आगे बढ़ने पर समर्थक शायद ही कदम पीछे खींचने को राजी हों। इसकी एक वजह कॉन्ग्रेस के राजस्थान प्रभारी अजय माकन के दौरे के बावजूद गहलोत और पायलट गुट के बीच सहमति नहीं बन पाना है।

एक दैनिक समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार सुलह के फॉर्मूले को लेकर माकन ने दो दिन तक गहलोत के साथ मंत्रिमंडल विस्तार, राजनीतिक नियुक्तियों और कॉन्ग्रेस संगठन में नियुक्तियों पर चर्चा की। लेकिन, गहलोत अपनी कैबिनेट में पायलट गुट को मनमाफिक जगह देने को तैयार नहीं हैं। वे विधायकों की संख्या के अनुपात में मंत्री बनाने का तर्क दे रहे हैं, जबकि पायलट ने बगावत ही ज्यादा प्रतिनिधित्व को लेकर की थी। कुछ रिपोर्टों में तो यहाँ तक कहा गया है कि पायलट समर्थकों को कैबिनेट में जगह देने से ही गहलोत ने साफ इनकार कर दिया है। वे संगठन में इस गुट को प्रतिनिधित्व देने को राजी बताए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि 2018 में जब राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सत्ता में वापसी हुई थी तो उसका श्रेय सचिन पायलट को दिया गया था। असल में 2013 में गहलोत के नेतृत्व में करारी शिकस्त के बाद पायलट को कॉन्ग्रेस ने केंद्रीय राजनीति से प्रदेश में भेजा था और बतौर प्रदेश अध्यक्ष उन्हें कमान दी थी। 2014 के आम चुनावों में कॉन्ग्रेस का खाता नहीं खुलने के बावजूद पायलट जमीन पर जुटे रहे और 2019 के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को उनकी मेहनत का फल भी मिला। लेकिन मुख्यमंत्री चुनते वक्त उन्हें किनारे कर दिया गया। गहलोत कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री का पद मिला पर शुरुआत से ही उन्हें और उनके समर्थकों को सरकार में उपेक्षा का दंश झेलना पड़ा। प्रियंका गाँधी से मुलाकात के बाद पायलट ने पिछली बार पैर पीछे खींच लिए थे और उसके बाद से वे सरकार तथा उनके समर्थक अलग-थलग पड़े हैं।

पिछले दिनों जब बीजेपी ने कॉन्ग्रेस से आए हिमंत बिस्वा सरमा को असम का मुख्यमंत्री बनाया था तब भी इसे पायलट के लिए संकेत के तौर पर देखा गया था। अब देखना यह है कि पायलट कॉन्ग्रेस के अपने पुराने साथी सिंधिया की तरह उड़ान भरने की हिम्मत जुटा पाते हैं या कॉन्ग्रेस के ओल्ड गार्ड के रहमोकरम तले मौका मिलने की अंतहीन उम्मीद के साए तले जीते रहेंगे।

भाजपा और कांग्रेस चाहे जितनी कोशिशें कर लें अरविंद केजरीवाल को बदनाम नहीं कर सकती: योगेश्वर शर्मा

  • योगेश्वर शर्मा ने कहा: राजनीति छोडक़र तीसरी लहर से निबटने का इंतजाम करना चाहिए
  • भाजपा और कांग्रेस देश को गुमराह करने के लिए माफी मांगे

पंचकूला,26 जून:

आम आदमी पार्टी का कहना है कि  केंद्र की भाजपा सरकार और जगह जगह चारों खाने चित्त हो रही कांग्रेस अरविंद केजरीवाल को बदनाम करने की लाख कोशिशें कर लें,सफल नहीं होंगी। पार्टी का कहना है कि दिल्ली के लोग जानते हैं कि केजरीवाल उनके लिए लड़ता है और उनकी खातिर इन मौका प्रस्त पार्टियों के नेताओं की बातें भी सुनता है। यही वजह है कि दिल्ली की जनता ने तीसरी बार भी उन्हें सत्ता सौंपी तथा भाजपा को विपक्ष में बैठने लायक और कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ा। आने वाले दिनों में यही हाल इन दोनों दलों का पंजाब मेें भी होने वाला है। इसी के चलते अब दोनों दल आम आदमी पार्टी व इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल को निशाना बना रहे हैं।  पार्टी का कहना है कि अब तो इस मामले के लिए बनाई गई कमेटी  के अहम सदस्य एवं एम्स के प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि अब तक फाइनल रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे यह कहना जल्दबाजी होगी कि दिल्ली ने दूसरी लहर के पीक के वक्त जरूरी ऑक्सीजन की मांग को चार गुना बढक़र बताया। उन्होंने कहा कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है, ऐसे में हमें जजमेंट का इंतजार करना चाहिए। ऐसे में अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाने वाले भाजपा एवं कांग्रेस के नेता जनता को गुमराह के करने के लिए देश से माफी मांगे।
 आज यहां जारी एक ब्यान में आप के उत्तरी हरियाणा के सचिव योगेश्वर शर्मा ने कहा कि भाजपा और कांग्रेसी नेताओं को शर्म आनी चाहिए कि वे उस अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगा रहे हैं जो अपने लोगों के लिए दिन रात एक करके काम करता है और उसने कोरोनाकाल में भी यही किया था। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में कोविड की दूसरी लहर जब अपने चरम पर थी तो यहां ऑक्सीजन की मांग में भी बेतहाशा वृद्धि हो गई थी। चाहे सोशल मीडिया देखें या टीवी चैनल हर जगह लोग अप्रैल और मई माह में ऑक्सीजन की मांग कर रहे थे। कई अस्पताल और यहां तक कि मरीजों के तीमारदार भी ऑक्सीजन की मांग को लेकर कोर्ट जा पहुंचे थे। उन्होंने कहा है कि अरविंद केजरीवाल ठीक ही तो कह रहे हैं कि उनका गुनाह यह है कि वह दिल्ली के  2 करोड़ लोगों की सांसों के लिए लड़े और वह भी उस समय जब  भाजपा और कांग्रेस के नेता चुनावी रैली कर रहे थे। तब भाजपा के दिल्ली के सांसद अपने घरों में छिपे बैठे थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ठीक ही तो दावा किया है कि जिस रिपोर्ट के आधार पर अरङ्क्षवद केजरीवाल को बदनाम किया जा रहा है, वह है ही नहीं। है तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दरअसल भाजपा का आईटी सैल अरङ्क्षवद केजरीवाल के पंजाब दौरे के बाद से ही बौखलाया हुआ है, क्योंकि पंजाब में उसका आधार खत्म हो चुका है और आप पंजाब के साथ साथ अब गुजरात में भी सफलता के परचम फैला रही है। पंजाब व गुजरात में भाजपा के लोग आप का दामन थाम रहे हैं। ऐसे में उसे व कांग्रेस को आने वाले विधानसभा चुनावों में अगर किसी से खतरा है तो वह अरङ्क्षवद केजरीवाल और उनकी पार्टी आप से है। उन्होंने कहा कि ये पार्टियां और उनके नेता उन लोगों को झूठा बताकर उनका अपमान कर रहे हैं जिन लोगों ने अपनों को खोया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश में अपने पोस्टर लगवाने के बजाये कोविड-19 की तीसरी लहर के खतरे से निपटने की तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए।  उन्होंने प्रधानमंत्री को सचेत किया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हैं, इसलिए यह आराम का वक्त नहीं है, बल्कि सरकार को अग्रिम प्रबंध करने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न हो कि जिस तरह केंद्र सरकार के दूसरी लहर से पहले के ढीले व्यवहार के कारण हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, वैसा ही तीसरी लहर के बाद हो। उन्होंने सरकार को वायरस के बदलते स्वरूप की तुरंत वैज्ञानिक खोज कर विशेषज्ञों की राय के अनुसार सभी इंतजाम करने को कहा। उन्होंने कहा कि अपनी नाकामियों का ठीकरा अरविंद केजरीवाल पर फोडऩे से काम नहीं चलेगा। काम करना होगा क्योंकि देश के लोग देख रहे हैं कि कौन काम कर रहा है और कौन ऐसी गंभीर स्थिति में भी सिर्फ राजनीति कर रहा है।