अब देश में होंगे 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर अब राज्य नहीं

इतिहास के पटल पर आज 31 अक्तूबर का दिन खास तौर पर दर्ज़ हो गया जब आज आधी रात से  जम्मू कश्मीर का राज्य के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया ।

यह पहला मौका है जब एक राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया हो। आज आधी रात से फैसला लागू होते ही देश में राज्यों की संख्या 28 और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या नौ हो गई है।

आज जी सी मुर्मू और आर के माथुर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रथम उपराज्यपाल के तौर पर बृहस्पतिवार को शपथ लेंगे।

श्रीनगर और लेह में दो अलग-अलग शपथ ग्रहण समारोहों का आयोजन किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल दोनों को शपथ दिलाएंगी।

सरकार ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला किया था, जिसे संसद ने अपनी मंजूरी दी। इसे लेकर देश में खूब सियासी घमासान भी मचा। 

भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में जम्मू-कश्मीर को दिया गया विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने की बात कही थी और मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के 90 दिनों के भीतर ही इस वादे को पूरा कर दिया। इस बारे में पांच अगस्त को फैसला किया गया।


सरदार पटेल की जयंती पर बना नया इतिहास 


सरदार पटेल को देश की 560 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय का श्रेय है। इसीलिए उनके जन्मदिवस को ही इस जम्मू कश्मीर के विशेष अस्तित्व को समाप्त करने के लिए चुना गया।
देश में 31 अक्टूबर का दिन राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। आज पीएम मोदी गुजरात के केवडिया में और अमित शाह दिल्ली में अगल-अलग कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। कश्मीर का राज्य के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया। इसके साथ ही दो केंद्रशासित प्रदेशों का दर्जा मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया है। नए केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अस्तित्व में आए हैं।

 जम्मू और कश्मीर में आतंकियों की बौखलाहट एक बार फिर सामने आई है. आतंकियों ने कुलगाम में हमला किया है, जिसमें 5 मजदूरों की मौत हो गई है. जबकि एक घायल है. मारे गए सभी मजदूर कश्मीर से बाहर के हैं. जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से घाटी में ये सबसे बड़ा आतंकी हमला है. आतंकियों की कायराना हरकत से साफ है कि वे कश्मीर पर मोदी सरकार के फैसले से बौखलाए हुए हैं और लगातार आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं.

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने कहा कि सुरक्षा बलों ने इस इलाके की घेराबंदी कर ली है और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चल रहा है. अतिरिक्त सुरक्षा बलों को बुलाया गया है. माना जा रहा है कि मारे गए मजदूर पश्चिम बंगाल के थे.

ये हमला ऐसे समय हुआ है जब यूरोपियन यूनियन के 28 सांसद कश्मीर के दौरे पर हैं. सांसदों के दौरे के कारण घाटी में सुरक्षा काफी कड़ी है. इसके बावजूद आतंकी बौखलाहट में किसी ना किसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं. डेलिगेशन के दौरे के बीच ही श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर के कुछ इलाकों में पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं.

जम्मू एवं से अनुच्छेद-370 हटने के बाद यूरोपीय संघ के 27 सांसदों के कश्मीर दौरे को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा सवाल उठाने पर भारतीय जनता पार्टी ने जवाब दिया है. पार्टी का कहना है कि कश्मीर जाने पर अब किसी तरह की रोक नहीं है. देसी-विदेशी सभी पर्यटकों के लिए कश्मीर को खोल दिया गया है, और ऐसे में विदेशी सांसदों के दौरे को लेकर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं है.

भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा, ‘कश्मीर जाना है तो कांग्रेस वाले सुबह की फ्लाइट पकड़कर चले जाएं. गुलमर्ग जाएं, अनंतनाग जाएं, सैर करें, घूमें-टहलें. किसने उन्हें रोका है? अब तो आम पर्यटकों के लिए भी कश्मीर को खोल दिया गया है.’शहनवाज हुसैन ने कहा कि जब कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटा था, तब शांति-व्यवस्था के लिए एहतियातन कुछ कदम जरूर उठाए गए थे, मगर हालात सामान्य होते ही सब रोक हटा ली गई. उन्होंने कहा, ‘अब हमारे पास कुछ छिपाने को नहीं, सिर्फ दिखाने को है.’

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘जब कश्मीर में तनाव फैलने की आशंका थी, तब बाबा बर्फानी के दर्शन को भी तो रोक दिया गया था. यूरोपीय संघ के सांसद कश्मीर जाना चाहते थे. वे पीएम मोदी से मिले तो अनुमति दी गई. कश्मीर को जब आम पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है तो विदेशी सांसदों के जाने पर हायतौबा क्यों? विदेशी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर जाने से पाकिस्तान का ही दुष्प्रचार खत्म होगा.’

आठ दिन और छ्ह फैसले

सारिका तिवारी, चंडीगढ़ 31-अक्टूबर:

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई नवंबर की 17 तारीख को रिटाइर हो रहे हैं  उन्हें छह महत्त्वपूर्ण मामलों में फैसला सुनाना है। सुप्रीम कोर्ट में इस समय दिवाली की छुट्टियां चल रही हैं और छुट्टियों के बाद अब काम 4 नवंबर को शुरू होगा।

अयोध्या बाबरी मस्जिद मामला, राफल समीक्षा मामला , राहुल पर अवमानना मामला, साबरिमाला , मुख्य न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न का मामला और आर टी आई अधिनियम पर फैसले आने हैं।

अयोध्या-बाबरी मस्जिद का मामला इन सभी मामलों में सर्वाधिक चर्चित है अयोध्या-बाबरी मस्जिद का मामला। पांच जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई पूरी कर चुकी है और 16 अक्टूबर को अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा। इस पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ही कर रहे हैं। इस विवाद में अयोध्या, उत्तर प्रदेश में स्थित 2 .77 एकड़ विवादित जमीन पर किसका हक़ है, इस बात का फैसला होना है। हिन्दू पक्ष ने कोर्ट में कहा कि यह भूमि भगवान राम के जन्मभूमि के आधार पर न्यायिक व्यक्ति है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना था कि मात्र यह विश्वास की यह भगवान राम की जन्मभूमि है, इसे न्यायिक व्यक्ति नहीं बनाता। दोनों ही पक्षों ने इतिहासकारों, ब्रिटिश शासन के दौरान बने भूमि दस्तावेजों, गैज़ेट आदि के आधार पर अपने अपने दावे पेश किये है। इस सवाल पर कि क्या मस्जिद मंदिर की भूमि पर बनाई गई? आर्किओलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट भी पेश की गई।

 रफाल समीक्षा फैसला मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में एसके कौल और केएम जोसफ की पीठ के 10 मई को रफाल मामले में 14 दिसंबर को दिए गए फैसले के खिलाफ दायर की गई समीक्षा रिपोर्ट पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह मामला 36 रफाल लड़ाकू विमानों के सौदे में रिश्वत के आरोप से संबंधित है। इस समीक्षा याचिका में याचिकाकर्ता एडवोकेट प्रशांत भूषण और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने मीडिया में लीक हुए दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट में तर्क दिया कि सरकार ने फ्रेंच कंपनी (Dassault) से 36 फाइटर जेट खरीदने के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण सूचनाओं को छुपाया है। कोर्ट ने इस मामले में उन अधिकारियों के विरुद्ध झूठे साक्ष्य देने के सन्दर्भ में कार्रवाई भी शुरू की जिन पर यह आरोप था कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को गुमराह किया है। 10 अप्रैल को अदालत ने इस मामले में द हिन्दू आदि अखबारों में लीक हुए दस्तावेजों की जांच करने के केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों को दरकिनार कर दिया था। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि ये दस्तावेज सरकारी गोपनीयता क़ानून का उल्लंघन करके प्राप्त किए गए थे, लेकिन पीठ ने इस प्रारंभिक आपत्तियों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि साक्ष्य प्राप्त करने में अगर कोई गैरकानूनी काम हुआ है तो यह इस याचिका की स्वीकार्यता को प्रभावित नहीं करता।

राहुल गांधी के “चौकीदार चोर है” बयान पर दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा रफाल सौदे की जांच के लिए गठित मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ मीनाक्षी लेखी की अवमानना याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रखा। राहुल गांधी ने रफाल सौदे को लक्ष्य करते हुए यह बयान दिया था कि “चौकीदार चोर है।” कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी इस टिपण्णी के लिए माफी मांग ली थी।

सबरीमाला समीक्षा फैसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने सबरीमाला मामले में याचिकाकर्ताओं को एक पूरे दिन की सुनवाई देने के बाद समीक्षा याचिका पर निर्णय को फरवरी 6 को सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोगोई की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति खानविलकर, न्यायमूर्ति नरीमन, न्यायमूर्ति चंद्रचूड और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की संविधान पीठ ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में ट्रावनकोर देवस्वोम बोर्ड, पन्दलम राज परिवार और कुछ श्रद्धालुओं ने 28 दिसंबर 2018 को याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी थी। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में अपनी दलील में यह भी कहा था कि संवैधानिक नैतिकता एक व्यक्तिपरक टेस्ट है और आस्था के मामले में इसको लागू नहीं किया जा सकता। धार्मिक आस्था को तर्क की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता। पूजा का अधिकार देवता की प्रकृति और मंदिर की परंपरा के अनुरूप होना चाहिए। यह भी दलील दी गई थी कि फैसले में संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत ‘अस्पृश्यता’ की परिकल्पना को सबरीमाला मंदिर के सन्दर्भ में गलती से लाया गया है और इस क्रम में इसके ऐतिहासिक सन्दर्भ को नजरअंदाज किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई के अधीन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने 4 अप्रैल को सीजेआई कार्यालय के आरटीआई अधिनियम के अधीन होने को लेकर दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल ने दिल्ली हाईकोर्ट के जनवरी 2010 के फैसले के खिलाफ चुनौती दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सीजेआई का कार्यालय आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2(h) के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’है। वित्त अधिनियम 2017 की वैधता पर निर्णय ट्रिब्यूनलों के अधिकार क्षेत्र और स्ट्रक्चर पर डालेगा प्रभाव राजस्व बार एसोसिएशन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रखा। इस याचिका में वित्त अधिनियम 2017 के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जिनकी वजह से विभिन्न न्यायिक अधिकरणों जैसे राष्ट्रीय हरित अधिकरण, आयकर अपीली अधिकरण, राष्ट्रीय कंपनी क़ानून अपीली अधिकरण के अधिकार और उनकी संरचना प्रभावित हो रही है। याचिकाकर्ता की दलील थी कि वित्त अधिनियम जिसे मनी बिल के रूप में पास किया जाता है, अधिकरणों की संरचना को बदल नहीं सकता।

यौन उत्पीडन मामले में सीजेआई के खिलाफ साजिश मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के खिलाफ यौन उत्पीडन के आरोपों की साजिश की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति एके पटनायक ने की और जांच में क्या सामने आता है, इसका इंतज़ार किया जा रहा है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, आरएफ नरीमन और दीपक गुप्ता की पीठ ने न्यायमूर्ति पटनायक को एडवोकेट उत्सव बैंस के दावों के आधार पर इस मामले की जांच का भार सौंपा था। उत्सव बैंस ने कहा था कि उनको किसी फ़िक्सर, कॉर्पोरेट लॉबिस्ट, असंतुष्ट कर्मचारियों ने सीजेआई के खिलाफ आरोप लगाने के लिए एप्रोच किया था। ऐसा समझा जाता है कि न्यायमूर्ति पटनायक ने इस जांच से संबंधित अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।


मध्य प्रदेश निकाय चुनावों संबन्धित अध्यादेश को लेकर भाजपा काँग्रेस में ठहरी

मध्य प्रदेश में निकाय चुनाव को लेकर कमलनाथ कैबिनेट में एक प्रस्ताव मंजूर किया था। जिसमें नगरपालिका चुनाव के प्रावधानों में संशोधन किया है। जिसके बाद अब प्रदेश में महापौर का चुनाव सीधे जनता के बजाए पार्षदों के जरिए किया जाएगा। लेकिन इस अध्यादेश को फिलहाल राज्यपाल लालजी टंडन ने रोक दिया है, उनकी मंजूरी फिलहाल इस प्रस्ताव को नहीं मिली है। जिसके बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर भाजपा पहले ऐसे ही कांग्रेस के आमने-सामने है। अध्यादेश पर फिलहाल रोक लगाने से राज्यपाल पर कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने बयान दिया है उन्होंने राज्यपाल से राज धर्म पालन करने की अपील की है। इसी मामले में सोमवार को बीजेपी नेता उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर अध्यादेश पर विरोध जताया. 

लाल जी टंडन

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन द्वारा महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से करने वाले कमलनाथ सरकार के अध्याधेश को मंजूरी नहीं देने का विवाद गहराता जा रहा है. इसे राज्य की कमलनाथ सरकार के लिए नगरीय निकाय चुनाव से पहले बड़ा झटका माना जा रहा है. बता दें कि बीजेपी इस अध्यादेश का विरोध कर रही है.

इसी मामले में सोमवार को बीजेपी नेता उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर अध्यादेश पर विरोध जताया. दरअसल, राज्यपाल लालजी टंडन ने महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से करने वाले राज्य सरकार के अध्याधेश को मंजूरी नहीं दी है. बता दें कि महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से करने संबंधी प्रस्ताव को बीते महीने मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंजूरी दी थी. 

इस प्रस्ताव के तहत प्रदेश में महापौर और नगर पंचायत अध्यक्षों का निर्वाचन पार्षदों द्वारा किया जाना है. वहीं, बीजेपी द्वारा इस प्रक्रिया का विरोध किया जा रहा है. बीजेपी ने निकाय चुनाव की अप्रत्यक्ष प्रक्रिया को मंजूरी नहीं देने के लिए राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा था. वहीं, शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत के अध्यक्षों का चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से होना चाहिए. उन्होंने सीएम कमलनाथ से चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने की मांग की है.

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज का कहना है कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होने पर खरीद-फरोख्त का खतरा बढ़ेगा. वहीं, विवेक तन्खा के ट्वीट पर शिवराज सिंह ने कहा कि राज्यपाल राजधर्म का पालन कर रहे हैं. उन्हें कांग्रेस नेता सीख ना दें. गौरतलब है कि कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने ट्वीट कर राज्यपाल लालजी टंडन को राजधर्म का पालन करने को कहा था. 

बता दें कि राज्यपाल लालजी टंडन ने महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से करने वाले राज्य सरकार के अध्याधेश को मंजूरी नहीं दी है. हालांकि, राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार के एक अन्य अध्यादेश को मंजूरी दे दी है. ये अध्यादेश पार्षद प्रत्याशी के हलफनामे में गलत जानकारी से जुड़ा है. इसमें विधानसभा चुनाव की तरह उन्हें 6 माह की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना का प्रावधान है.

सोनिया दरबार में सिंधिया की पेशी न होने पर सिंधिया की सफाई

आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच होने वाली बैठक टलने की खबरों के बीच सिंधिया की तरफ से सफाई आई है। इस बारे में सिंधिया ने कहा, ‘मैंने सोनिया गांधी से मिलने के लिए समय नहीं मांगा था, ऐसी खबरें गलत थीं, मैं महाराष्ट्र चुनाव पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं।’

नई दिल्ली: 

कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को मंगलवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से  मिलने का मिलने वक्त नहीं मिल पाया. सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को महाराष्ट्र स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक है जिसे काफी अहम माना जा रहा है.

बता दें मध्य प्रदेश कांग्रेस में घमासान मचा है. मध्य प्रदेश कांग्रेस की कलह पार्टी हाईकमान के लिए चिंता का सबब बनी हुई है. कुछ दिनों पहले सोनिया ने प्रदेश नेताओं को निर्देश दिया था कि अगर किसी को किसी भी नेता या सरकार से कोई दिक्कत है तो वो पार्टी के अंदर उचित फोरम पर उठाए,उसकी समस्या का निदान ज़रूर होगा. अगर उचित फोरम बात न सुनी जाए तो पार्टी अध्यक्ष को भी मामलों से अवगत करा सकते हैं. सोनिया गांधी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी चर्चा की है. 

सिंधिया को सोनिया द्वारा समय न दिये जाने पर सिंधिया की सफाई कुछ इस तरह से सामने आई है:

राज्य में लगभग डेढ़ दशक बाद सत्ता में आई कांग्रेस नए अध्यक्ष की तलाश कर रही है. प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ वर्तमान में मुख्यमंत्री भी हैं और वे विधानसभा चुनाव के बाद से कई बार पार्टी हाईकमान के सामने नया अध्यक्ष बनाने का अनुरोध कर चुके हैं. इतना ही नहीं, वह अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश भी कर चुके हैं. इसके बाद से ही नए अध्यक्ष को लेकर पार्टी में मंथन का दौर जारी है.

कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान का ही नतीजा है कि एक साथ 10 से ज्यादा नेताओं के नाम पार्टी अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हो गए हैं. इनमें प्रमुख रूप से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व मंत्री मुकेश नायक, वर्तमान मंत्री उमंग सिंघार के नाम शामिल हैं. इसके अलावा ओमकार सिंह, मरकाम कमलेश्वर पटेल, सज्जन वर्मा, बाला बच्चन, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन और पूर्व महिला अध्यक्ष शोभा ओझा के नाम की चर्चा भी जोरों पर है.

विवादित बयानों के चलते दिग्विजय सिंह को कानूनी कार्यवाही झेलनी पड़ सकती है

हिन्दू आतंकवाद, आरएसएस की शाखाएँ आतंकी कैंप इत्यादि इत्यादि। यह फेरहिस्ट बहुत लंबी है। यूपीए के शासन काल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए भी दिग्विजय सिंह ने हिंदू विरोधी बातें कह कर एक धर्म विशेष को खुश करने की राजनीति की थी। उसी दौर की फसल थी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा यह कहना की भारत में प्राकृतिक संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है। यह सब तुष्टीकरण की राजनीति है जिससे पीछा छुड़ाना काँग्रेस के बस से बाहर होता जा रहा है। अभी हाल ही में दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि बजरंग दल और बीजेपी के आईटी सेल के पदाधिकारी द्वारा ISI से पैसे लेकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस ने पकड़ा है.

संभल/दिल्ली:

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह हमेशा ही अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं. दिग्विजय सिंह द्वारा बीजेपी और बजरंग दल के सदस्यों पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से पैसे जासूसी के हालिया आरोपों के बाद से ही उनकी लगातार आलोचना हो रही है. इन सबके बीच उत्तर प्रदेश के संभल में दिग्विजय सिंह के इस बयान को लेकर मुकदमा दर्ज कराया गया है. संभल की चंदौसी कोलतवाली में बीजेपी के नगर महामंत्री सतीश अरोड़ा ने यह केस दर्ज कराया है. 

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि बजरंग दल और बीजेपी के आईटी सेल के पदाधिकारी द्वारा से पैसे लेकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस ने पकड़ा है. दिग्विजय सिंह ने ट्विटर लिखा कि मैंने यह आरोप लगाया है, जिस पर मैं आज भी क़ायम हूं. वहीं, एक अन्य बयान में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए मुस्लिमों से ज्यादा से गैर मुसलमान जासूसी कर रहे हैं. दिग्विजय सिंह ने यह बयान मध्य प्रदेश के भिंड में दिया था. 

उनके इस बयान के बाद बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सोलंकी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि हम दिग्विजय सिंह के बयान की निंदा करते हैं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे और मानहानि का दावा भी करेंगे. वहीं, टेरर फंडिंग के आरोपी सतना के बलराम के मामले में बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सोलंकी ने कहा कि बलराम बजरंग दल का कार्यकर्ता न कभी था और ना ही कार्यकर्ता है और ना ही उसका परिवार बजरंग दल से जुड़ा है. बजरंग दल का बलराम से कोई लेना देना नही है.

सिंधिया ने पार्टी अन्तरिम चीफ को दिया अल्टिमेटम

दावा किया जा रहा है कि अपने अल्‍टीमेटम में उन्‍होंने सोनिया गांधी से कहा है कि अगर उन्‍हें मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनाया गया, तो वह इस्तीफा दे देंगे और पार्टी भी छोड़ देंगे.

ग्‍वालियर :

मध्‍य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शुक्रवार को एक खबर तेजी से चल रही है. इसके मुताबिक कहा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को अल्टीमेटम दिया है. दावा किया जा रहा है कि अपने अल्‍टीमेटम में उन्‍होंने सोनिया गांधी से कहा है कि अगर उन्‍हें मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनाया गया, तो वह इस्तीफा दे देंगे और पार्टी भी छोड़ देंगे.

इस पूरे प्रकरण में मध्‍य प्रदेश सरकार की कमलनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री और सिंधिया समर्थक प्रद्धुमन सिंह तोमर ने कहा है कि यह केवल अफवाह है, सिंधिया जी पद की लालसा में कभी नहीं रहते है. वह सिर्फ समाजसेवा के लिए राजनीति करते हैं. कुछ लोग हैं, जो ऐसी अफवाह फैला रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के लोगों की भावना है कि सिंधिया जी को प्रदेशाध्यक्ष बनाया जाए.

प्रद्धुमन सिंह का कहना है उनके समर्थक उन्हें प्रदेशाध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं. आपको बता दें कि पिछले दो-तीन दिन से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर सिसासी घमासान मचा हुआ है. इस बीच कमलनाथ खुद आज सोनिया गांधी से इसी मसले को लेकर मिले हैं. 

कमलनाथ सरकार में 3 महीने से तनख्वाह न मिलने से परेशान सिपाही ने जज के घर लगाया फंदा

रायसिंह कुछ दिनों से परेशान चल रहा था उसकी गोहद में काुछ खेती की जमीन है जिस पर कब्जा हो गया है और पिछले तीन महिने से वेतन नहीं मिलने से भी वह रायसिंह तनाव से गुजर रहा था

ग्वालियर.

जज जाकिर हुसैन के बंगले पर पदस्थ होमगार्ड सैनिक ने जज के बंगले पर ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। होमगार्ड सैनिक ने आत्महत्या ऑन ड्यूटी की है। वर्दी पहने हुए उसकी लाश बंगले के अंदर लटकी हुई मली है। मृतक गार्ड का नाम सौनिक रायसिंह यादव निवासी बरोली मौ तहसील जिला भिण्ड बताया जा रहा है। पिछले 25 साल मृतक पुलिस विभाग में होमगार्ड नौकरी कर कर रहा था। घटना की जानकारी मिलते ही सीएसपी मुनीस राजौरिया, टीआई नरेश यादव, महेश शर्मा घटनास्थल पर पहुंचे साथ ही जज भी मौके पर पहुंचे उसके बाद मृतक के परिवार के लोगों को घटना की जानकारी दी गई।

सुबह बंगले में माली आया तो शव लटका हुआ था

स्टेशन के पास बाल भवन के पीछे बने सरकार बंगला नं. 47 पर तैनात होमगार्ड के जवान रायसिंह यादव (52) ने जज के बंगले में फांसी के फंदे पर लटक कर जान दे दी। रायसिंह ने शुक्रवार रात 9 बजे ड्यूटी पर आया था उसकी ड्यूटी रात 9 से सुबह 6 बजे तक की थी। सुबह जब बंगले का माली आया तो उसने रायसिंह को लटका हुआ पाया तो तुरंत यह खबर जज जाकिर हुसैन को दी।

लाश की तलाशी ली जिसमें सुसाइड नोट मिला

जज ने घटना की जानकारी यूनिवर्सिटी पुलिस को दी इसके बाद तुरंत थाना के टीआई बंगले पर पहुंचे तो देखा की रायसिंह यादव का शव फंदे पर लटका हुआ है। पुलिस ने फोरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाया और लाश की तलाशी ली जिसमें पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है लेकिन पुलिस ने सोसाइड में क्या लिखा है यह नहीं बताया। लाश को फंदे से उतार कर पीएम के लिए भिजवाया गया। मृतक जवान के परिवार को घटना की जानकारी दी गई। मृतक जवान के तीन बच्चे है।

माली ने किया खुलासा, खेती की जमीन है जिस पर कब्जा हो गया

पुलिस ने माली से घटना के बारे में पूछा तो उसने बताया कि मेनें तो सुबह रायसिंह की लाश देखी और सभी को सूचित किया। रायसिंह कुछ दिनों से परेशान चल रहा था उसकी गोहद में काुछ खेती की जमीन है जिस पर कब्जा हो गया है और पिछले तीन महिने से वेतन नहीं मिलने से भी वह रायसिंह तनाव से गुजर रहा था। यूनिवर्सिटी थाना प्रभारी ने कहा कि मामला आत्महत्या का लग रहा है बताया गया है कि रायसिंह मानसिंक रूप से परेशान चल रहा था।

मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री विवाह व निकाह योजना का बजट खत्म

  • मुख्यमंत्री विवाह व निकाह योजना का बजट खत्म, इमरजेंसी फंड से मांगे 100 करोड़ रु.
  • देवउठनी के बाद होने वाली शादियों का पैसा द्वितीय अनुपूरक में मिलेगा

भोपाल.

मध्य प्रदेश की राज्य सरकार के पास अब मुख्यमंत्री कन्या विवाह व निकाह योजना में शादी रचाने वाले नए जोड़ों को देने के लिए भी पैसा नहीं है। हालत यह है कि एक अप्रैल से अब तक मुख्यमंत्री कन्या विवाह व निकाह योजना में 22 हजार 500 शादियां हो चुकी हैं, लेकिन किसी के भी खाते में 51 हजार रुपए नहीं पहुंचे, क्याेंकि इस साल स्कीम में जितना भी पैसा था, वह 31 मार्च 2019 से पहले हुई 18 हजार शादियों पर खर्च कर दिया गया। इन हालातों के मद्देनजर सामाजिक न्याय विभाग ने वित्त विभाग से कहा है कि वह इमरजेंसी फंड से राशि जारी करे, ताकि कन्या के खाते में 51 हजार रुपए दिए जा सकें। विभाग ने आकस्मिक निधि से 100 करोड़ रुपए मांगे।


यह स्थिति तो अभी है, लेकिन दीपावली के बाद देव उठनी से शादी समारोह और सामूहिक विवाह सम्मेलन फिर शुरू हो जाएंगे। इससे पहले निकाह भी हो सकते हैं, ऐसे में कन्या को देने के लिए बजट नहीं है। विभाग उम्मीद कर रहा है कि द्वितीय अनुपूरक में राशि का प्रावधान होने के बाद परेशानी नहीं रहेगी। विभाग के संचालक कृष्ण गोपाल तिवारी का कहना है कि अभी बजट के अभाव में बेटियों को राशि नहीं मिल पाई है। प्रमुख सचिव को इस बारे में पत्र लिखा गया है। विभाग के प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया का कहना है कि दुल्हनों को विभाग द्वारा दी वाली राशि जल्दी खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। प्रदेश के कुछ जिलों झाबुआ, छिड़वाड़ा, जबलपुर के आसपास के जिलों को बजट दे दिया गया है। जल्दी सभी जिलों को दे दिया जाएगा।

यहां बता दें कि कांग्रेस ने मप्र में सत्ता वापसी करने के बाद कन्या विवाह व निकाह की राशि 28 हजार (3 हजार रुपए स्मार्ट फोन के मिलाकर) से बढ़ाकर 51 हजार रुपए की है। सामूहिक विवाह सम्मेलन में शादी करने पर तीन हजार रुपए आयोजकों को दिए जाते हैं, जबकि 48 हजार रुपए कन्या के खाते में जाते हैं। 

कमल नाथ का भांजा रतुल पुरी गिरफ्तार

रतुल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे हैं.

नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 354 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में उद्योगपति रतुल पुरी को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया. रतुल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे हैं.

CBI ने 17 अगस्त को ही 354 करोड़ के बैंक फ्राड में मामला दर्ज कर छापेमारी की थी. उसी के बाद ED ने कल PMLA के तहत मामला दर्ज किया था और रतुल पुरी को गिरफ्तार कर लिया गया. रतुल पुरी को कल देर रात गिरफ्तार किया गया.


भाजपा का दामन थाम सकते हैं एनसीपी-काँग्रेस के कई नेता

हाल ही में एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बेहद करीबी पूर्व मंत्री मधुकरराव पिचड समेत 3 एनसीपी विधायक पार्टी छोडकर बीजेपी में शामिल हुए थे. शरद पवार ने कहा कि राजनीति में बुरा वक्त आता रहता है. लेकिन, उसकी फिक्र के बजाय उससे लड़ने और उबरने की हिम्मत की जरुरत होती है. वहीं, कांग्रेस विधायक भाई जगताप का कहना है कि आया राम-गया राम राजनीति में चलता रहता है.

मुंबई: महाराष्ट्र मे कांग्रेस और एनसीपी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं. दोनों ही पार्टियों के कई नेता पार्टी छोड़ बीजेपी और शिवसेना का दामन थामने की तैयारी में हैं. बीजेपी ने दावा दोहराया है कि दोनों दलों के करीब पचास विधायक सत्तारुढ़ दलों में जल्द शामिल हो रहे हैं. उधर कांग्रेस के नेता संजय निरुपम ने भी खुलासा किया है कि कांग्रेस के कुछ नेता बीजेपी मेँ शामिल होने की तैयारी में हैं. वहीं, पार्टी मेँ बगावत बढ़ऩे का खतरा भांपकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को मुंबई में पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की और पार्टी को सियासी झटकों से उबारने की तरकीबें तलाशी. 

एनसीपी प्रमुख शरद पवार अपनी पार्टी मेँ फूटते बगावत के सुरों को दबाने की तरकीबें तलाशने मे जुटे हैं. पार्टी नेताओं के दूसरे दलों का दामन थामने से रोकने की कवायद में पवार ने शनिवार सुबह मुंबई मेँ अपने घर पर पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी मेँ फूटते बागी सुर को दबाने की कोशिश की. पिछले ही दिनों पवार के बेहद करीबी पूर्व मंत्री मधुकरराव पिचड समेत 3 एनसीपी विधायक पार्टी छोडकर बीजेपी में शामिल हुए थे. वहीं, कई और नेता पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं. 

एनसीपी से ज्यादा बुरा हाल कांग्रेस पार्टी का है. महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी के कई विधायक बीजेपी और शिवसेना में जाने की तैयारी में हैं. मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने ट्वीट कर खुद इस बात का खुलासा किया है कि कांग्रेस में कई लोग बीजेपी में शामिल होने की कोशिश में लगे हैं. निरुपम ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव से पहले भी उनकी पार्टी के नेता पार्टी छोड़ बीजेपी मेँ प्रवेश की जुगत मेँ लगे थे. वहीं, एनसीपी में मची भगदड़ और बिखराव पर शरद पवार बार-बार ये कहते नहीं थक रहे हैं कि पार्टी इन सियासी झटकों से जल्द एकबार फिर उबरेगी.   

शरद पवार ने कहा कि राजनीति में बुरा वक्त आता रहता है. लेकिन, उसकी फिक्र के बजाय उससे लड़ने और उबरने की हिम्मत की जरुरत होती है. वहीं, कांग्रेस विधायक भाई जगताप का कहना है कि आया राम-गया राम राजनीति में चलता रहता है. उधर, महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री गिरीशमहाजन ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी के पचास से ज्यादा विधायक बीजेपी में शामिल होने वाले हैं.
 
288 विधायकों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी और कांग्रेस के विधायकों की फौज हर दिन घटती जा रही है. आये दिन दोनो पार्टियों के विधायक सत्तारुढ़ दलों का दामन थाम रहे हैं. सूबे में काग्रेस को हाल में तगडा झटका तब लगा था, जब महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थामा. इसके साथ ही विखे पाटिल, देवेंद्र फडणनवीस की कैबिनेट में हाउसिंग मिनिस्टर भी बन बैठे. उसके बाद से ही कांग्रेस विधायकों की बीजेपी में शामिल होने की होड़ मच गई. बताया जा रहा है कि मुंबई से एक कांग्रेस विधायक और नासिक जिले से एक कांग्रेस विधायक जल्द पार्टी छोडने की तैयारी में है.

एनसीपी को भी जोर के सियासी झटके लगे हैं. एनसीपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री मधुकरराव पिचड और उनके विधायक बेटे वैभव पिचड, पूर्व मंत्री गणेश नाइक के बेटे संदीप नाईक, पूर्व मंत्री सचिन अहीर, सातारा से एनसीपी विधायक शिवेँद्र राजे और मुंबई से कांग्रेस के विधायक कालीदास कोलंबकर पिछले दिनों ही सत्तारुढ़ दलों का दामन थाम चुके हैँ. इन नेताओं के पार्टी मे शामिल होने से बीजेपी ने सूबे के उन इलाकों मे अपनी सियासी जमीन और मजबूत कर ली है. जहां पार्टी थोडी कमजोर थी. महाराष्ट्र में अक्तूबर महीने में विधानसभा के चुनाव हैं और चुनाव से पहले एनसीपी और कांग्रेस की नीँद उड़ी हुई है.