द्देश आपके झूठे प्रचार से आजिज़ आ चुका है राहुल जी: बीजेपी

नई दिल्लीः पुलवामा आतंकी हमले वाले दिन प्रधानमंत्री पर फिल्म की शूटिंग में व्यस्त रहने के राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए बीजेपी ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष उस दिन सुबह के समय का फोटो जारी करके देश को गुमराह करना बंद करें, देश आपके फेक न्यूज से तंग आ चुका है.  राहुल गांधी के ट्वीट के बाद बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा, ‘‘ राहुल जी, भारत आपके फेक न्यूज से तंग आ चुका है . उस दिन सुबह के समय की फोटो निर्लज्जता से जारी करके देश को गुमराह करना बंद करें .’’ 

कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए बीजेपी के ट्विटर हैंडल पर कहा गया है कि ऐसा लगता है कि आपको पहले पता चल गया होगा, लेकिन भारत के लोगों को शाम में ही जानकारी मिली. बीजेपी ने कहा कि अगली बार इससे बेहतर स्टंट करें जहां जवानों की शहादत नहीं जुड़ी हुई हो.

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पुलवामा आतंकी हमले वाले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक चैनल के लिए फिल्म की शूटिंग करने संबंधी खबरों को लेकर शुक्रवार को उन पर हमला बोला और आरोप लगाया कि जब शहीदों के घर ‘दर्द का दरिया’ उमड़ा था तो ‘प्राइम टाइम मिनिस्टर’ हंसते हुए दरिया में शूटिंग कर रहे थे. 

शहीदों के घर ‘दर्द का दरिया’ उमड़ा था और ‘प्राइम टाइम मिनिस्टर’ दरिया में शूटिंग कर रहे थे: राहुल
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पुलवामा आतंकी हमले वाले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक चैनल के लिए फिल्म की शूटिंग करने संबंधी खबरों को लेकर शुक्रवार को उन पर हमला बोला और आरोप लगाया कि जब शहीदों के घर ‘दर्द का दरिया’ उमड़ा था तो ‘प्राइम टाइम मिनिस्टर’ हंसते हुए दरिया में शूटिंग कर रहे थे.

गांधी ने प्रधानमंत्री की शूटिंग से जुड़ी तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए कहा, ‘‘पुलवामा में 40 जवानों की शहादत की खबर के तीन घंटे बाद भी ‘प्राइम टाइम मिनिस्टर’ फिल्म शूटिंग करते रहे. देश के दिल व शहीदों के घरों में दर्द का दरिया उमड़ा था और वे हंसते हुए दरिया में फोटोशूट पर थे.’’ 

इससे पहले बृहस्पतिवार को कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि जब देश इस जघन्य हमले के कारण सदमे में था तो उस वक्त मोदी कार्बेट पार्क में एक चैनल के लिए फिल्म की शूटिंग और नौकायन कर रहे थे. उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री अपनी सत्ता बचाने के लिए जवानों की शहादत और ‘राजधर्म’ भूल गए. सुरजेवाला ने कहा, ‘‘हमला 14 फरवरी दिन में करीब तीन बजे हुए और प्रधानमंत्री करीब सात बजे तक शूटिंग और चाय नाश्ते में व्यस्त थे. प्रधानमंत्री के इस आचरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.’’ 

उधर, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की सुरक्षा पर प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को लेकर आरोप लगाने का देश की जनता पर कोई असर नहीं होने वाला है. गौरतलब है कि गत 14 फरवरी को हुए पुलवामा आत्मघाती आतंकी हमले में सीआरपीएफ के कम से कम 40 जवान शहीद हो गए थे.

मध्य प्रदेश कांग्रेस कर्णाटक की तर्ज़ पर

भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों के रवैए से नाराज सत्ता पक्ष के ही विधायक लामबंद हो रहे हैं. ऐसे 25 से अधिक विधायकों ने तो एक क्लब ही बना लिया है. इन विधायकों में से कई मुख्यमंत्री कमलनाथ के सामने अपनी नाराजगी भी जाहिर कर चुके हैं.

सूत्रों का कहना है कि कई मंत्रियों के रवैए से विधायकों में नाराजगी है. इस क्लब में अधिकांश विधायक वे हैं जो पहली बार विधानसभा का चुनाव जीत कर आए हैं. इस क्लब में सत्ताधारी दल के अलावा निर्दलीय और कांग्रेस सरकार को समर्थन देने वाले दलों के विधायक भी बताए जा रहे हैं.

बसपा की विधायक रामबाई ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए स्वीकार किया कि 28 से 30 विधायक इस क्लब में हैं. इसी तरह विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने भी विधायकों की नाराजगी का जिक्र किया. सूत्रों का कहना है कि विधायकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि उनके क्षेत्रों में अफसरों के तबादले उनकी सलाह के बगैर व उन्हें भरोसे में लिए बगैर किए जा रहे है और मंत्री लगातार उनकी उपेक्षा कर रहे हैं. 

इब्तेदाए गांधी है रोता है क्या….

कांग्रेस पार्टी की महासचिव का पदभार संभालने से लेकर अपने पति के भ्र्श्तचर में दोषारोपण के पश्चात ईडी द्वारा की जा रही जांच में तथाकथित सहयोग को लेकर चर्चा में आई प्रियंका वाड्रा ने यूपी में एक मेगा रोड शो किया और वहाँ चोरों और जेब कतरों की चांदी हो गयी विपक्ष तो अभी से यह कहने लग गया है की इसी नीति और नियत के साथ यह देश को लूटने का प्रयास करेंगे। जहां जहां गांधी परिवार जाएगा उनके गिरहकट, चोर, लुटेरे दलाल सभी साथ साथ हैं।

जहां आम लोगों के कीमती सामान पर हाथ साफ किए गए वहीं पार्टी नेताओं सहित शहर के अस्सिटेंट मजिट्रेट और कांग्रेस के प्रवक्ता जीशान हैदर के भी फोन इस भीड़ में चोरी कर लिए गए

कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश पूर्व की कमान थमा दी है. लोकसभा चुनावों में उत्तरप्रदेश राजनीतिक तौर पर सबसे महत्वपूर्ण राज्य है. सोमवार को प्रियंका ने अपने रोड शो के जरिए राज्य में अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत कर दी. इस रोड शो में भले प्रियंका ने कुछ नहीं कहा लेकिन उनके बड़े भाई और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने जरुर घोषणा कर दी कि बीजेपी को उखाड़ फेंकने का समय आ गया है और राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी.

प्रियंका के रोड शो में लोगों का हुजूम जमा हो गया. पूरे रास्ते पर लोगों की भीड़ प्रियंका का इंतजार कर रही थी. भीड़ का आलम ये था कि 15 किलोमीटर के सफर के लिए प्रियंका को 6 घंटे का वक्त लगा. रोड शो में प्रियंका के साथ राहुल गांधी और यूपी पश्चिम के जेनरल सेकरेट्री ज्योतिरादित्य सिंघिया भी मौजूद थे. एयरपोर्ट से लेकर राज्य में पार्टी के मुख्यालय तक के 15 किलोमीटर के इस रोड शो में हर तरफ सिर्फ लोग ही लोग थे. और इसी भीड़ का पॉकेटमारों ने खुब फायदा उठाया. प्रियंका के रोड शो में कम से कम 50 मोबाइल फोन चोरी हो गए.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भीड़ में एक मोबाइल चोर को पकड़ा और उसे पुलिस के हवाले कर दिया. एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने पुलिस को बताया कि मेगा रैली में कम से कम 50 लोगों के मोबाइल और पर्स चोरी हुए हैं. लेकिन पुलिस ने उस संदिग्ध को छोड़ दिया क्योंकि उसके पास से चोरी का एक भी मोबाइल या पर्स बरामद नहीं हुआ. सरोजनी नगर पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज करा दी गई है.

पार्टी नेताओं सहित शहर के अस्सिटेंट मजिट्रेट और कांग्रेस के प्रवक्ता जीशान हैदर के भी फोन इस भीड़ में चोरी कर लिए गए. मामले की आधिकारिक शिकायत दर्ज करा ली गई है और साइबर सेल एक्सपर्ट द्वारा जांच जारी है.

अब कांग्रेस के हाथ लगी 10 करोड़ का लालच देने वाली औडियो क्लिप

कर्नाटक में वाकयी राजनैतिक घमासान मचा हुआ है या फिर यह एक चुनावी शगूफा मात्र है? यह सम्झना उतना ही कठिन है जितना कि कांग्रेस के बयानों पर यकीन करना। कुछ महत्त्व पूर्ण बातें जो शक पैदा करतीं हैं वह यह की कांग्रेस ही के एमएलए बिकाऊ हूँ की तख्ती गले में डाले घूमते है, उन्हे पार्टी अथवा सरकार से कोई नाराजगी नहीं?
दूसरे यह समझ नहीं आता कि जेडीएस के विधायक किस मिट्टी के बने हैं जिनहे खरीदने बेचने कि बात ही नहीं उठती कांग्रेस अपने घटक दल से ही यह नीति क्यों नहीं सीख लेती कि विधायकों को किस तरह से ईमानदार बनाया जाये
एक और बात जो समझ से परे है कि सरकार एचडी कुमारस्वामी कि अस्थिर होती है तो वह इल्ज़ाम कांग्रेस पर लगाते हैं.

कर्नाटक का राजनीतिक संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है. बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. एक तरफ बीजेपी का कहना है कि राज्य सरकार के पास बहुमत नहीं है तो दूसरी तरफ कांग्रेस का दावा है कि बीजेपी विधायकों की खरीद फरोख्त कर एचडी कुमारस्वामी की सरकार को अस्थिर करना चाहती है. शनिवार सुबह कांग्रेस नेताओं ने कर्नाटक में कथित ऑडियो टेप जारी होने के दावे के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. इस पीसी में कांग्रेस ने सीधे पीएम मोदी, अमित शाह और बीएस येदियुरप्पा पर आरोप लगाए.

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘कर्नाटक से आई खबर को सुनकर पूरा देश हैरान है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने एक ऑडियो क्लिप जारी किया, जिसमें येदियुरप्पा जेडीएस विधायक के भाई से कर्नाटक की सरकार को अस्थिर करने की बात कर रहे हैं. यह मोदी जी और अमित शाह की गंदी राजनीति को दिखाता है.’

वेणुगोपाल ने कहा, ‘ऑडियो क्लिप में सुना जा सकता है कि बीएस येदियुरप्पा विधायकों को 10 करोड़ ऑफर कर रहे हैं. यह साफ है कि 18 विधायक हैं और इसमें 200 करोड़ का खर्च आएगा. वे 12 विधायकों को मंत्री का पद ऑफर कर रहे हैं और 6 को अलग-अलग बोर्ड का चेयरमैन बनाने की बात कर रहे हैं.’

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘वे इस्तीफा देने के बाद विधायकों को चुनाव खर्च के लिए भी पैसे देने की बात कर रहे हैं. उन्होंने अपने विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए स्पीकर को 50 करोड़ रुपए की पेशकश की. क्लिपिंग में येदियुरप्पा, अमित शाह और नरेंद्र मोदी जी के नामों का जिक्र भी कर रहे हैं.’

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस मामले पर कहा कि किस हैसियत से कर्नाटक बीजेपी प्रमुख और पूर्व सीएम सुप्रीम कोर्ट के जजों से संपर्क कर केस को सही साबित करने की चर्चा कर रहे हैं? क्या नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने उन्हें इस बात का आश्वासन दिया है? सुरजेवाला ने पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट बीजेपी का ‘जेबी दुकान’ बन गया है?

दरअसल, शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने एक ऑडियो टेप जारी किया था. इस ऑडियो के माध्यम से उन्होंने सरकार को गिराने के लिए बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप भी लगाया. कर्नाटक में कांग्रेस जेडीएस सरकार बनने के बाद से ही लगातार उठापटक जारी है.


राजीव कुमार से पूछताछ जारी अब कुनाल घोष की बारी

केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष से भी रविवार को शिलॉन्ग में पूछताछ करेगी

शारदा चिटफंड घोटाले मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ की. उनसे यह पूछताछ पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में की गई. हजारों करोड़ रुपए के शारदा चिटफंड स्कैम में सबूतों को नष्ट करने में भूमिका को लेकर राजीव कुमार सीबीआई के निशाने पर हैं.

इसके अलावा अब सीबीआई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व सांसद कुणाल घोष से भी पूछताछ करने वाली है. सीबीआई उनसे रविवार को शिलॉन्ग में ही सवाल-जवाब करेगी.
मेघालय में सीबीआई के जरिए तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद कुणाल घोष से पूछताछ की जाएगी. यह पूछताछ शिलॉन्ग के सीबीआई ऑफिस में 10 फरवरी को की जाएगी. इसके अलावा राजीव कुमार से एक बार फिर शारदा चिटफंड मामले में सीबीआई के जरिए 10 फरवरी को पूछताछ की जाएगी. यह पूछताछ भी शिलॉन्ग में ही होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बीते मंगलवार को राजीव कुमार को सीबीआई के सामने पेश होने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा था कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर ‘शारदा चिटफंड घोटाले’ से जुड़े मामलों की जांच में सीबीआई के साथ ‘विश्वसनीय रूप से’ सहयोग करें. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.

राजीव कुमार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफी करीबी हैं

रिपोर्ट्स में बताया गया था कि कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्टेट क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट के साथ मिलकर 80-100 सवालों की एक लिस्ट तैयार की थी. जो सीबीआई के अधिकारी राजीव कुमार से पूछे जाने हैं.

कर-नाटक संकट: कांग्रेस के 4 विधायकों पर हो सकती है अनुशासनात्मक कार्यवाही

कांग्रेस ने दल-बदल निरोधक कानून के तहत बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है.

बेंगलुरू: कर्नाटक में सियासी संकट गहराता जा रहा है. पार्टी के 5 विधायकों ने अभी तक बजट सत्र में हिस्सा नहीं लिया. पार्टी द्वारा व्हिप जारी करने के बाद भी रमेश जरकीहोली, उमेश जाधव, महेश कुमथली, बी नागेंद्र पार्टी और जेएन गणेश बैठक में हाजिर नहीं हुए. कांग्रेस ने दल-बदल निरोधक कानून के तहत बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है.

कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने कहा कि वह विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार से मुलाकात करेंगे और उनसे अनुरोध करेंगे कि वह रमेश जरकीहोली, उमेश जाधव, महेश कुमथली और बी नागेंद्र के खिलाफ कार्रवाई करें. उन्होंने कहा कि इन चारों एवं जेएन गणेश को छोड़कर बाकी सभी कांग्रेस विधायकों ने पार्टी विधायक दल की बैठक में शिरकत की.

सिद्धारमैया ने कहा कि रोशन बेग और बीसी पाटिल नाम के दो विधायकों ने भी कांग्रेस विधायक दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन उन्होंने इसके लिए पूर्व अनुमति ले ली थी. हाल में एक रिजॉर्ट में अपने एक साथी विधायक के साथ हुई कथित झड़प के बाद गणेश को फरार घोषित कर दिया गया है. सिद्धारमैया ने कहा कि चार विधायकों ने उन्हें पत्र भेजकर कहा था कि वे विधानसभा के पूरे बजट सत्र में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. 

इस बीच, मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने भाजपा द्वारा सरकार गिराने की कोशिश किए जाने के अपने दावे को पुख्ता बताने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक ऑडियो क्लिप जारी कर दी. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि दो ऑडियो क्लिप ऐसी हैं जिनमें येदियुरप्पा और जेडीएस विधायक नागनगौड़ा के बेटे शरण गौड़ा के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत रिकॉर्ड है. येदियुरप्पा पर आरोप है कि वह धन का लालच देकर नागनगौड़ा को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे थे. 

कुमारस्वामी के साथ मौजूद शरण ने बताया कि येदियुरप्पा ने किस तरह उसके पिता को लालच देने के लिए फोन पर उससे संपर्क साधा और देवदुर्गा में उसे मिलने को कहा. प्रेस कांफ्रेंस में एक अस्पष्ट क्लिप का एक ही हिस्सा सुनाया गया. क्लिप में एक पुरुष की आवाज सुनाई दे रही है जो धन और मंत्री पद की पेशकश कर रहा है. वह शरण गौड़ा को आश्वस्त कर रहा है कि यदि दल-बदल निरोधक कानून के तहत घेरा गया तो स्पीकर और न्यायाधीशों को ‘संभाल लिया जाएगा.’ 
इस पर पलटवार करते हुए येदियुरप्पा ने ऑडियो क्लिप को ‘‘फर्जी’’ करार दिया और कहा कि ‘‘मनगढ़ंत कहानी’’ सुनाई गई है. उन्होंने कहा कि नागनगौड़ा को लालच देने के लिए उन्होंने किसी से मुलाकात नहीं की है. येदियुरप्पा ने कहा कि वह मंदिर में दर्शन के लिए देवदुर्गा गए थे और फिर शहर लौट आए थे. उन्होंने कहा कि कुमारस्वामी ड्रामा कर रहे हैं और अपनी नाकामियां छुपाने की कोशिश कर रहे हैं. येदियुरप्पा ने कहा कि अगर आरोप साबित हुए तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे.   

ममता के साथ धरने पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ होगी प्रशासनिक कार्यवाही


इसके अलावा चूक करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मेडल उतारने के बारे में भी चर्चा की जा रही है.

4 फरवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जरिए धरना बुलाया गया. जिसमें कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार भी मौजूद थे. राजीव कुमार की मौजूदगी पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने कार्रवाई का आदेश दिया. वहीं कोलकाता में विरोध प्रदर्शन स्थल पर पांच अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारी भी शामिल थे.

गृह मंत्रालय के जरिए पश्चिम बंगाल सरकार से राजीव कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने को कहा था. पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को संबोधित एक पत्र में कहा गया था कि कुमार ने ऑल इंडिया सर्विस (कंडक्ट) नियम, 1968 /AIS (अनुशासन और अपील) नियम 1969 का उल्लंघन किया था.

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा अधिकारियों के जरिए धरने पर खास ध्यान देते हुए पश्चिम बंगाल सरकार से अधिकारियों से एक्शन लेने के लिए कहा है. केंद्र सरकार ने ऑल इंडिया सर्विस रूल के तहत धरना देने के लिए राज्य सरकार से कठोर कार्रवाई करने के लिए कहा है. सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने कथित तौर पर सभी पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की ठानी है.

चूक करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मेडल उतारने के बारे में भी चर्चा की जा रही है. केंद्र सरकार सूची में शामिल अफसरों के नाम भी हटा सकती है और उन्हें केंद्र सरकार में सेवा देने से एक निश्चित अवधि के लिए रोक सकती है.

कर नाटक में विधायकों की अनुपस्थिति

बेंगलुरू: कर्नाटक विधानसभा में गुरुवार को दूसरे दिन बीजेपी विधायकों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई. बीजेपी विधायकों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के पास बहुमत नहीं है. बुधवार को सदन की कार्यवाही में अनुपस्थित रहने वाले कांग्रेस के नौ विधायक गुरुवार को भी सदन में मौजूद नहीं रहे. अध्यक्ष केआर रमेश कुमार के सदन में प्रवेश करते ही बीजेपी विधायकों ने हंगामा किया.

कुमार के सीट पर बैठने और कार्यवाही शुरू करने से पहले ही बीजेपी विधायकों ने ‘सीएम वापस जाओ, सीएम वापस जाओ’, ‘सीएम इस्तीफा दो, सीएम इस्तीफा दो’, ‘बिना बहुमत की सरकार जाओ’, और ‘एकता नहीं, बहुमत नहीं’ के नारे लगाए. प्रदर्शनरत विधायकों ने अध्यक्ष के अनुरोध को नहीं माना जिसके कारण उन्होंने दस मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.

जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो बीजेपी विधायकों का प्रदर्शन जारी रहा जिससे कारण अध्यक्ष ने शुक्रवार दोपहर साढ़े 12 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी जब मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की सरकार 2019-2020 बजट पेश करेगी. कर्नाटक विधान परिषद में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली जहां बीजेपी सदस्य अध्यक्ष के आसन के समीप आ गए और उन्होंने यह कहते हुए नारेबाजी की कि सरकार के पास बहुमत नहीं है. 
असंतुष्ट कांग्रेस विधायक उमेश जाधव, महेश कुमातल्ली, रमेश जारकीहोली और बी नागेंद्र दूसरे दिन भी सदन से अनुपस्थित रहे और उनसे संपर्क नहीं हुआ. ऐसी खबर है कि ये विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं. फरार कांग्रेस विधायक जे एन गणेश भी सदन से अनुपस्थित रहे. पुलिस साथी विधायक आनंद सिंह से कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने के मामले में गणेश की तलाश कर रही है. 

ममता से टूटे 17 लाख परिवार

निवेशक ने कहा, ‘हम मांग करेंगे कि सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए और ठगे गए निवेशकों को पैसा लौटाया जाए.’

बताया जाता रहा है की शारदा चिटफंड घोटाले में 17 लाख निवेशकों का पैसा डूबा, और अब उनके इंसाफ की उम्मीद भी। यह मामला पैसे – राजनीति से कुछ अलग है। यकीन नहीं होता की ममता बैनर्जी राजनैतिक रूप से इतनी अपरिपक्व हो सकतीं थीं, जितना उन्होने अपने आप को दर्शा दिया। उन्होने अपने इस कदम से यह जाता दिया की उन्हे 17 लाख परिवारों की न कोई चिंता थी न है और न ही अब इन 17 लाख परिवारों के वोट की भी उन्हे लेश मात्र आवश्यकता है।

विभिन्न चिटफंड कंपनियों के हाथों धोखाधड़ी के शिकार हुए निवेशकों और एजेंटों ने सोमवार को कहा कि सीबीआई अधिकारियों को कोलकाता के पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करने से रोकने के पश्चिम बंगाल के कदम से वे ठगा-सा महसूस कर रहे हैं. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर करोड़ों रुपए के इस घोटाले के पीछे की सच्चाई को छिपाने का प्रयास करने का आरोप लगाया.

चिटफंड कंपनियों से परेशान लोगों के संगठन चिट फंड सफरर्स फोरम के संयोजक आसिम चटर्जी ने कहा कि कोलकाता के पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से पूछताछ की सीबीआई की कोशिश पर राज्य सरकार और केंद्र के बीच टकराव न केवल निंदनीय है बल्कि सच्चाई को छिपाने की कोशिश भी है.

फोरम के एक अन्य संयोजक जयंत हलधर ने कहा कि फोरम जल्द ही चिटफंट कंपनियों के हाथों ठगे गए निवेशकों की रैली करेगा.

उन्होंने कहा, ‘हम मांग करेंगे कि सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए और ठगे गए निवेशकों को पैसा लौटाया जाए.’

ठगे गए निवेशक बीसू ने कहा, ‘मै एक चिटफंट कंपनी में एजेंट और निवेशक दोनों था. मुझे करीब 30 लाख रुपए का चूना लगा दिया गया. अब जब सीबीआई इस घोटाले के पीछे की सच्चाई ढूंढने का प्रयास कर रही है तब राज्य सरकार उसे रोकने की कोशिश कर रही है.’ उन्होंने कहा, ‘हम ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.’

उन्होंने आश्चर्य प्रकट किया कि राज्य सरकार शीर्ष पुलिस अधिकारी से पूछताछ को रोकने के लिए इतनी आतुर क्यों है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने बार बार कहा है कि उसी की सरकार है जिसने चिट फंड मालिकों को गिरफ्तार कराया.

ममता का सत्ताग्रह

courtesy zee news

सबसे पहले ये समझिए कि इस सीबीआई vs ममता विवाद की जड़ क्या है ? आपको पश्चिम बंगाल के सारदा और Rose Valley घोटाले याद होंगे, जिनमें ममता बनर्जी की पार्टी के कई नेता फंसे हुए हैं. ये घोटाले करीब 19 हज़ार 500 करोड़ रुपये के हैं. इसमें 17 लाख से भी ज़्यादा लोगों का पैसा फंसा हुआ है. 

इन्हीं घोटालों के संबंध में CBI कोलकाता के मौजूदा पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करना चाहती है. इसके लिए राजीव कुमार को कई बार Summon किया गया, लेकिन वो नहीं आए. कल शाम को CBI के अफसरों की एक टीम राजीव कुमार से पूछताछ करने के लिए उनके घर जाना चाहती थी. लेकिन कोलकाता पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया. काफी देर तक ये ड्रामा होता रहा. इसके बाद कोलकाता पुलिस, CBI के करीब 25 अधिकारियों को लेकर थाने चली गई. और दो घंटे तक उन्हें हिरासत में रखा. 

इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने CBI के खिलाफ कल रात 9 बजे से कोलकाता में धरना शुरू कर दिया. और इस धरने में उनके साथ कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार भी शामिल हैं. ये धरना इस वक़्त भी जारी है. ममता बनर्जी की उम्र 64 वर्ष है, लेकिन इस उम्र में भी अपने राजनीतिक धरने के लिए उनके पास ऊर्जा की कोई कमी नहीं है.
 
ममता बनर्जी ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया. और ये आरोप लगाए कि CBI केन्द्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है. और देश का संघीय ढांचा खतरे में है. इसके साथ ही ममता बनर्जी के इस धरने के खिलाफ देश भर की विपक्षी पार्टियां इक्कठी हो गईँ. ममता बनर्जी के धरने को चंद्रबाबू नायडू, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव समेत बहुत से नेताओं का समर्थन मिल गया है. राहुल गांधी, पहले ममता बनर्जी का विरोध करते थे, उन पर सवाल उठाते थे. लेकिन अब उन्होंने यू-टर्न ले लिया है. आगे हम इस पर भी विस्तार से बात करेंगे. 

एक मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी के जितने भी काम थे, वो आज उन्होंने इसी धरना स्थल से किए. ममता बनर्जी ने इसी धरना स्थल पर कैबिनेट की मीटिंग की, किसानों की रैली को संबोधित किया और पुलिसवालों को कुछ अवॉर्ड्स भी दिए. यानी ममता बनर्जी ने पूरी तैयारी की हुई है और वो इस धरने को एक तरह की राजनीतिक Vacation बनाना चाहती हैं?

हालांकि राजनीतिक लाभ के लिए देश की संस्थाओं की हत्या करना बहुत ख़तरनाक है. और जब भी ऐसा होता है, तो देश विखंडित हो जाता है. और देश के छोटे छोटे राज्य भी.. संविधान के नैतिक दायित्वों का उल्लंघन करने लगते हैं. ज़रा सोचिए कि क्या अब भारत में वो समय आ गया है जब पश्चिम बंगाल जाने के लिए वीज़ा लगेगा? वहाँ ना तो भारत का पासपोर्ट चलेगा और न ही भारत की नागरिकता मान्य होगी ? अगर यही फॉर्मूला देश के दूसरे राज्यों में चल निकला, तो कुछ दिन बाद मायावती,लालू यादव और चंद्रबाबू नायडू सहित विपक्षी दलों के तमाम नेता अपना अलग देश बना लेंगे. और वो परिस्थिति भारत की अखंडता के लिए शुभ नहीं होगी. 
 
बड़ा सवाल ये है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI को किसी राज्य में पूछताछ और कार्रवाई करने का अधिकार है या नहीं ? अगर किसी राज्य में कोई घोटाला हुआ है, तो वहां जांच के लिए CBI नहीं जाएगी तो कौन जाएगा? क्या ममता बनर्जी अपने नेताओं और पुलिस अधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच, अपनी ही पुलिस से करवाना चाहती हैं? वैसे CBI को ये जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सौंपी गई थी, तो क्या ये भी मान लिया जाए कि ममता बनर्जी को इस देश के सुप्रीम कोर्ट पर भी विश्वास नहीं है? 

अगर कल को ममता बनर्जी की तरह ही देश के हर राज्य का मुख्यमंत्री ये कह दे कि उसे CBI पर विश्वास नहीं है और अगर CBI उसके राज्य में कोई कार्रवाई करेगी, तो वो CBI के अफसरों को गिरफ्तार करवा देगा, तो फिर क्या होगा? क्या ये देश के संघीय ढांचे के साथ छेड़छाड़ नहीं होगी? इस तरह तो मायावती, लालू यादव और चंद्रबाबू नायडू सहित विपक्षी दलों के तमाम नेता, अपनी मनमानी करके.. एक तरह से अपना अलग देश बना लेंगे. और वो परिस्थिति भारत की अखंडता के लिए शुभ नहीं होगी. 

CBI के अधिकारियों को हिरासत में लेने के पीछे कोलकाता पुलिस का पहला तर्क ये था कि इन अधिकारियों के पास कोई वॉरंट या कागज़ नहीं थे. जबकि हमारे पास CBI की वो पत्र मौजूद है, जो पुलिस कमिश्नर के घर जाने से पहले CBI के अधिकारियों ने पुलिस को लिखा था. 
 
ये पत्र CBI ने कल कोलकाता पुलिस को लिखी थी. इस चिट्ठी में CBI ने सुरक्षा की मांग की है. CBI ने लिखा है कि उसे कोलकाता पुलिस के कमिश्नर राजीव कुमार के घर पर एक Secret Operation करना है, इसलिए उन्हें सुरक्षा दी जाए. ये चिट्ठी CBI के पुलिस इंस्पेक्टर प्रसेनजीत मुखर्जी की तरफ से लिखी गई है. 
 
अब आपको ये बताते हैं कि कोलकाता पुलिस ने CBI के अधिकारियों के साथ कैसा व्यवहार किया ? आज पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी है और इस रिपोर्ट में बहुत बड़े खुलासे हुए हैं. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पश्चिम बंगाल पुलिस और राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा कर दी है. रिपोर्ट में लिखा है कि ना सिर्फ CBI के अधिकारियों को रोका गया, बल्कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनके मोबाइल फोन और कागज़ात भी छीन लिए. CBI के बहुत से अधिकारियों, और यहां तक कि महिला अधिकारियों के साथ भी बुरा व्यवहार किया गया. और उन्हें थाने में अवैध हिरासत में रखा गया. 

रिपोर्ट में लिखा है कि ना सिर्फ CBI के अफसरों को बल्कि CBI के Joint डायरेक्टर पंकज श्रीवास्तव के परिवार को भी परेशान किया गया. पश्चिम बंगाल पुलिस ने पंकज श्रीवास्तव के घर की घेराबंदी कर दी थी और इस दौरान उनकी पत्नी और बेटी को परेशान किया गया. हमने कल रात से अब तक के इस घटनाक्रम पर एक रिपोर्ट तैयार की है. ये एक हाई वोल्टेज राजनीतिक ड्रामा था. इसके हर एक पहलू के बारे में आपको पता होना चाहिए.

अब आपको उस व्यक्ति के बारे में बताते हैं, जिसकी वजह से पश्चिम बंगाल में राजनीति की आग लगी हुई है. और ममता बनर्जी और CBI के बीच ये पूरा हंगामा हुआ है. ये व्यक्ति हैं कोलकाता पुलिस के कमिश्नर राजीव कुमार जो ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे हुए हैं. आपके मन में भी ये सवाल ज़रूर आ रहा होगा कि इन घोटालों में राजीव कुमार की क्या भूमिका है? 

राजीव कुमार की उम्र 53 वर्ष है. वो 1989 बैच के IPS अफसर हैं. IPS का मतलब होता है – Indian Police services. यानी भारतीय पुलिस सेवा. लेकिन उनका जो आचरण है वो इससे मेल नहीं खाता. वो ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठकर भारत की नहीं बल्कि ममता बनर्जी की सेवा कर रहे हैं. 

राजीव कुमार चिट फंड घोटालों के लिए राज्य सरकार की तरफ से बनाई गई Special Investigation Team यानी SIT के प्रमुख थे. उन्होंने 2013 में सारदा और Rose Valley घोटाले की जांच की थी. लेकिन 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ये दोनों मामले CBI को सौंप दिए. बाद में CBI ने आरोप लगाया कि राजीव कुमार ने कई Documents, Pen Drive और जांच से जुड़े Mobile Phones उसे नहीं सौंपे. इस बारे में राजीव कुमार को कई बार समन भेजा गया लेकिन वो CBI के सामने पेश नहीं हुए. CBI के मुताबिक इन्‍हीं सबूतों के सिलसिले में उसके अधिकारी रविवार रात राजीव कुमार के आवास पर गए थे.
  
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे दो बड़े घोटाले छिपे हुए हैं. जिनका नाम है सारदा चिटफंड घोटाला और Rose Valley घोटाला. और जब तक आपको इन घोटालों की जानकारी नहीं होगी, आपको इस केस की गंभीरता का पता नहीं चलेगा. आप ये नहीं समझ पाएंगे कि ममता बनर्जी किस तरह भ्रष्टाचारियों को बचा रही हैं? पूरे देश में ममता बनर्जी की राजनीति की बात हो रही है. Mamta vs Modi जैसी राजनीतिक शब्दावली का प्रयोग हो रहा है. लेकिन कोई भी उन लोगों की बात नहीं कर रहा जिन्होंने घोटाले में अपना सब कुछ गंवा दिया.

सारदा घोटाले में देश के कई राज्यों के लाखों गरीबों के जीवन भर की कमाई, कुछ ताकतवर लोगों ने लूट ली, और अपनी जेबें भर लीं. गरीबों की कमाई से इन ताकतवर लोगों ने जमकर अय्याशी की…टीवी चैनल खोले…बेहिसाब पैसा जुटाया….और गरीबों को धोखा दे दिया. इसमें सत्ता के तंत्र से लेकर मीडिया तक, सब शामिल रहे.
 
सारदा ग्रुप ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा सहित देश के कई राज्यों में करीब 17 लाख लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए. Ponzi Schemes के ज़रिए लोगों को बड़े मुनाफे का लालच दिया गया और बाद में इन योजनाओं के Agents ने दुकानें बंद कर ली. 2013 में सारदा ग्रुप का घोटाला सामने आया और ये घोटाला करीब ढाई हज़ार करोड़ रुपये का बताया गया. सारदा ग्रुप के 17 लाख निवेशक थे, और घोटाला सामने आने के बाद पूरे बंगाल में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. यहां तक कि सारदा ग्रुप की स्कीम में पैसा लगाने वाले करीब 311 एजेंटों और लोगों ने खुदकुशी भी कर ली. वर्ष 2013 में घोटाला सामने आने के बाद इसके मुख्य आरोपी और सारदा ग्रुप के चेयरमैन सुदीप्तो सेन को गिरफ्तार किया गया. 

सारदा ग्रुप के ज़रिए जिन लोगों ने अपनी जेबें भरीं और जिनका नाम इस घोटाले में आया…उनमें से कई मंत्री और सांसद भी थे, जिन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार भी किया था लेकिन इनमें से ज़्यादातर आरोपी ज़मानत पर बाहर आ चुके हैं. इस लिस्ट में तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद कुणाल घोष, ममता बनर्जी सरकार के पूर्व परिवहन मंत्री मदन मित्रा, तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद श्रृंजॉय बोस, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी और तृणमूल कांग्रेस के नेता रजत मजूमदार और तृणमूल कांग्रेस के सांसद तापस पॉल हैं. इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के नेता मतंग सिंह भी जेल से बाहर आ चुके हैं . यानी इस घोटाले में बहुत बड़े बड़े लोगों के नाम शामिल हैं. अब आपको Rose Valley घोटाले के बारे में बताते हैं. 
 
ये घोटाला भी सारदा घोटाला की तरह ही हुआ था. ये करीब 17 हज़ार करोड़ रुपये का घोटाला है. इस घोटाले में लोगों से किश्तों में पैसे लिए जा रहे थे. और उन्हें ये भरोसा दिया जा रहा था कि उन्हें मकान दिए जाएंगे और विदेश यात्राएं करवाई जाएंगी. निवेशकों के पास ये भी विकल्प था कि अगर वो चाहें तो सारी किश्त जमा होने के बाद अच्छे खासे ब्याज़ पर अपने पैसे वापस भी ले सकते हैं. इसका मास्टरमाइंड था गौतम कुंडू जो इस Rose Valley Group का चेयरमैन था. लेकिन पैसा जमा होने के बाद लोगों को ना तो पैसे मिले और ना ही विदेश यात्राएं. केन्द्र सरकार ने दखल दिया. और निवेशकों को उनका पैसा लौटाने का आदेश दिया. लेकिन इस स्कीम में पैसा लगाने वाले लोगों को उनका पैसा आज तक वापस नहीं मिला. 
 
हमने आज ऐसे बहुत से लोगों से बात की है, जिन्हें आज भी अपना पैसा वापस मिलने की आस है. सबसे बड़ा विरोधाभास ये है कि इस पूरे मामले में ममता बनर्जी, सारदा और Rose Valley घोटाले के पीड़ितों के साथ अन्याय कर रही हैं. CBI इस मामले के दोषियों पर कार्रवाई करना चाहती है. लेकिन ममता बनर्जी CBI की कार्रवाई के खिलाफ़ ही धरना दे रही हैं और इसे सत्याग्रह बता रही हैं. जबकि असलियत में ये सत्याग्रह नहीं, बल्कि सत्ताग्रह है.