‘ओवैसी, जिन्ना की तरह अलगवाद और अतिवाद की भाषा बोलते हैं’ तेजस्वी सूर्या

बीजेपी नेता ने कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति लगातार भारत के ख़िलाफ़ बोलते हैं और केसीआर हैदराबाद को ही तुर्की की राजधानी इस्तांबुल जैसा बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि वो लोग AIMIM के साथ गठबंधन में हैं, वो पाकिस्तान जैसा हैदराबाद चाहते हैं। तेजस्वी सूर्या ने कहा कि बंगाल में भी युवा मोर्चा किसी से डरेगा नहीं और लगातार लोगों से मिलेगा. बीजेपी सांसद ने कहा कि तेलंगाना में भाजपा की सफलता तमिलनाडु, केरल जैसे राज्यों में पार्टी के लिए फायदेमंद होगी।

तेलंगाना/ नयी दिल्ली:

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा का ध्यान अब दक्षिण के राज्यों पर है। तेलंगाना में होने वाले नगर निगम चुनावों के लिए वहाँ जोर-शोर से प्रचार चल रहा है। भाजपा के सांसद तेजस्वी सूर्या ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा है।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह हास्यास्पद है कि अकबरुद्दीन और असदुद्दीन ओवैसी विकास की बात कर रहे हैं। उन्होंने पुराने हैदराबाद में विकास की अनुमति नहीं दी। उन्होंने केवल रोहिंग्या मुसलमानों के प्रवेश को अनुमति दी। ओवैसी को दिया गया हर वोट भारत के ख़िलाफ़ और भारत से जुड़े हर फैसले के ख़िलाफ़ है।”

भाजपा नेता ने कहा, ” वे (असदुद्दीन ओवैसी) केवल इस्लाम, अलगाववाद और कट्टरपंथ की भाषा बोलते हैं, जिसे मोहम्मद अली जिन्ना भी बोला करते थे।”

तेजस्वी सूर्या ने हैदराबाद में प्रचार करते हुए कहा, “ये सिर्फ एक निगम चुनाव नहीं है, अगर आप यहाँ ओवैसी को वोट देते हैं तो वे महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, यूपी जैसे राज्यों में मजबूत होते हैं।” उन्होंने केसीआर पर निशाना साधते हुए कहा कि वो हैदराबाद को इस्तांबुल बनाना चाहते हैं।

उन्होंने केसीआर के लिए कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति लगातार भारत के खिलाफ बोलते हैं और केसीआर हैदराबाद को ही तुर्की की राजधानी इस्तांबुल जैसा बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि वे AIMIM के साथ गठबंधन में हैं। वे पाकिस्तान जैसा हैदराबाद चाहते हैं।

ओवैसी ने भी साधा भाजपा पर निशाना

तेजस्वी सूर्या के इस बयान से पहले ओवैसी ने भी कल मीडिया से बात करते हुए भाजपा पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था “अगर आप किसी भी बीजेपी नेता को नींद से जगाएँगे और कुछ नाम लेने को कहेंगे तो वो कहेंगे- ओवैसी। इसके बाद आतंकवाद और पाकिस्तान का नाम लेंगे। बीजेपी को इसपर बात करनी चाहिए कि उन्होंने 2019 के बाद से तेलंगाना, खासकर हैदराबाद को क्या आर्थिक सहायता दी है।”

उन्होंने हैदराबाद बाढ़ का मुद्दा उठाते हुए कहा था, “”हैदराबाद में बाढ़ आई थी। मोदी सरकार ने उस वक्त हैदराबाद को क्या आर्थिक मदद दी? वो अब इस चुनाव को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उस वक्त उन्होंने कोई मदद नहीं दी थी। यहाँ ऐसा नहीं चलेगा, जनता जानती है।”

महबूबा के रिहा होते ही अब्दुल्ला ने अलापा धारा 370 का राग, 6 और दलों की जुगलबंदी

मुफ्ती और अब्दुल्ला की मौजूदा जुगलबंदी कुछ वैसी ही है, जैसी दो दिन पहले हमने पूरे बॉलीवुड में देखी. खुद को बचाने के लिए पूरे बॉलीवुड के सारे ग्रुप 70 वर्ष में पहली बार एकजुट हो गए. उसी तरह महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला की ये दोस्ती भी शायद अपना अस्तित्व बचाने के लिए है. ये अस्तित्व खत्म होने का डर है जो दोनों का पास पास ला रहा है. डर बड़े-बड़े दुश्मनों को भी एक साथ ला देता है. ये बैठक नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला द्वारा बुलाई गई है, जिसमें उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सज्जाद लोन समेत वो नेता शामिल हो रहे हैं, जिन्होंने चार अगस्त 2019 को साझा बयान जारी किया था. फारूक अब्दुल्ला के घर हो रही इस खास बैठक में शामिल होने के लिए पीडीपी मुखिया और राज्य की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती पहुंच चुकी हैं. पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई अन्य नेता भी पहुंचे हैं.

जम्मू / कश्मीर(ब्यूरो):

महबूबा मुफ्ती की रिहाई के बाद फारूक और उमर अब्दुल्ला उनके घर मिलने पहुंचे थे, ये तस्वीर भी ट्विटर पर पोस्ट की गई है. इस तस्वीर में जम्मू कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्री जिस लॉन में बैठे हुए हैं, वो महबूबा मुफ्ती का सरकारी आवास है. बतौर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इसी आवास में रहती थीं. वो सारी सुख सुविधाएं जो उन्हें उस समय मिलती थीं, वो आज भी उन्हें मिल रही हैं. महबूबा मुफ्ती की सुरक्षा में आज भी एसएसजी यानी स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप तैनात है. सुरक्षा और निवास पर होने वाला खर्च आज भी सरकारी खजाने से होता है.

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्विटर पर अपना एक बयान पोस्ट किया है. महबूबा मुफ्ती ने अपने इस ऑडियो संदेश में धारा 370 को दोबारा हासिल करने का ऐलान किया है. 434 दिन बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन की हिरासत से महबूबा मुफ्ती को मंगलवार रात रिहा किया गया था. रिहाई के दो घंटे बाद ही महबूबा मुफ्ती ने ब्लैक स्क्रीन करके एक ऑडियो संदेश ट्वीट किया. 

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए बहाल करवाने व राज्य के एकीकरण के लिए कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दलों ने आपस में हाथ मिला लिए हैं. नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूख अब्दुल्ला के  निमंत्रण पर उनके घर पर कश्मीरी राजनीतिक दलों की बैठक हो रही है.

महबूबा, सज्जाद लोन, यूसुफ तारिगामी बैठक में शामिल
जानकारी के मुताबिक महबूबा मुफ्ती, सज्जाद गनी लोन और कम्युनिस्ट नेता यूसुफ तारिगामी फारूख अब्दुल्ला के घर पहुंच चुके हैं. करीब एक साल घर में नजरबंद रहने के बाद महबूबा मुफ्ती दो दिन पहले रिहा हुई हैं. फारूख अब्दुल्ला के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनकी आगवानी की.

कांग्रेस के नेताओं ने फिलहाल साधी चुप्पी
कांग्रेस के नेताओं ने फिलहाल इस कवायद से दूरी बना रखी है. वहीं जम्मू का भी कोई राजनेता इस बैठक में शामिल नहीं है. इस बैठक के विरोध में बीजेपी कार्यकर्ता कई जगह विरोध कर रहे हैं. उनका आरोप है कि इस बैठक के जरिए कश्मीरी नेता फिर से प्रदेश में उपद्रव कराने की साजिश कर रहे हैं.

फारूख अब्दुल्ला ने पिछले साल बुलाई थी कश्मीरी दलों की बैठक
बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने से एक दिन पहले यानी 4 अगस्त 2019 को अपने गुपकार रोड़ वाले आवास पर कश्मीरी नेताओं की बैठक बुलाई थी. इस बैठक में कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और उसके विशेष दर्जे को संरक्षित करने के लिए वे मिलकर प्रयास करेंगे. इस प्रस्ताव पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अलावा पीडीपी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और कुछ छोटे दल शामिलों ने भी हस्ताक्षर किए. नेशनल कांफ्रेंस ने इस बैठक के बाद हुई घोषणा को गुपकार घोषणा करार दिया था.

बदले माहौल में राजनीति की नई राह तलाश रहे हैं फारूख-महबूबा
करीब एक साल नजरबंदी में रहने के बाद अब फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और मेहबूबा मुफ्ती बाहर आ चुके हैं. ऐसे में जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली और राज्य के एकीकरण के मुद्दे पर फारूख और महबूबा मुफ्ती ने हाथ मिला लिए हैं. फारूख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 बहाल करने की मांग को लेकर चीन से समर्थन मांगने की भी बात कर चुके हैं. जिसके लिए उनकी पूरे देश में आलोचना हो रही है. आज की बैठक में वे अपनी धुर विरोधी महबूबा मुफ्ती के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर में अपनी नई राजनीति की राह तैयार कर सकते हैं.

इस पूरे मामले पर एक राष्ट्रिय चैनल के संपादक ने कुछ सवाल पूछे हैं जो ज़ाहिर सी बात है अनुत्तरित ही रहेंगे:

  1. पहला प्रश्न : जो आप सोच रहे होंगे कि अब्दुल्ला और मुफ्ती जैसे लोगों के रहते बाहरी दुश्मनों की क्या जरूरत है? जब अपने ही देश में ऐसे लोग मौजूद हैं तब हमें चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों की क्या जरूरत है?
  2. दूसरा प्रश्न: ये है कि ऐसे देश विरोधी बयान देने की आजादी कब तक मिलती रहेगी. जब किसी सांसद को आपकी बात पसंद नहीं तो वो आपके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे देता है. अदालत के फैसले पर कोई टिप्पणी कर देता है तो उस पर अवमानना का आरोप लग जाता है लेकिन ऐसे लोग जो भारत देश के खिलाफ बोलते हैं उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती. उनके खिलाफ सड़क से संसद तक कोई आवाज क्यों नहीं उठाता?
  3. तीसरा प्रश्न: ये है कि जब फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने संविधान की शपथ लेकर जम्मू कश्मीर पर शासन किया था. तब क्या इन्होंने राष्ट्रहित में सारे निर्णय लिए होंगे? ये बहुत बड़ा प्रश्न है क्योंकि जम्मू कश्मीर एक संवेदनशील राज्य है, जहां आए दिन आतंकवादी हमले होते हैं, एनकाउंटर होते हैं. क्या जम्मू कश्मीर में सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों को राज्य सरकार का पूरा सहयोग मिलता रहा होगा? महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला के हाल के बयानों के बाद क्या उनके फैसलों की जांच की जानी चाहिए?
  4. चौथा प्रश्न है जब फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे राजनेता संसद के फैसले को पलटने की बात खुलेआम करते हैं. तब इनकी संसद सदस्यता रद्द क्यों नहीं की जाती. इन नेताओं की पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द क्यों नहीं किया जाता. महबूबा मुफ्ती इस समय पीडीपी यानी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष हैं और फारूक अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के सबसे बड़े नेता. पार्टी की कमान भले ही उन्होंने अभी बेटे उमर अब्दुल्ला को दे रखी है लेकिन पार्टी के निर्णयों पर आखिरी मुहर उन्हीं की होती है?

इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमने कुछ कानूनी जानकारों से बात की है उनके मुताबिक,

  • कोई भारतीय नागरिक इस तरह के बयानों के खिलाफ देश में कहीं भी एफआईआर दर्ज करा सकता है.
  • हमारे चुने हुए प्रतिनिधि चाहें सांसद हो या विधायक वो भी ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ एफआईआर कर सकते हैं. ऐसे बयान आईपीसी की धारा 124 ए यानी देशद्रोह के दायरे में आते हैं.
  • -इस तरह के बयानों पर हमारी संसद क्या एक्शन ले सकती है?

Representation of people act 1951 यानी जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत संसद एक प्रस्ताव ला सकती है. जिसके तहत फारूक अब्दुल्ला जैसे सांसद की सदस्यता रद्द की जा सकती है. चुनाव आयोग से ऐसी पार्टियों की सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की जा सकती है.

बिहार चुनाव: ओवैसी ने ताल ठोंकी कहा,” मुस्लिम वोटरों पर किसी का अधिकार नहीं है”

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम वोटरों पर किसी का अधिकार नहीं है। ये कोई दावा करते हैं तो किस हैसियत से करते हैं, ये समझ में नहीं आता। ओवैसी ने कहा कि हम किसी एक धर्म की राजनीति नहीं करते। हम पर जो आरोप लगाया जाता है वो गलत हैं। AIMIM और समाजवादी जनता दल गठबंधन को UDSA एलायंस नाम दिया गया है। वहीं अलकायदा के 9 संदिग्ध की गिरफ्तारी पर ओवैसी ने कहा कि NIA द्वारा संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है. NIA जांच रही है कि वे कौन हैं। राजद  द्वारा भाव नहीं दिए जाने पर ओवैसी ने कहा कि हम तो ट्विंकल ट्विंकल लीटल स्टार हैं, लेकिन बिहार की जनता देख रही है कौन-कौन किसको भाव दे रहा है।

पटना (ब्यूरो):

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियां कमर कस चुकी है। इस चुनाव के लिए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी पार्टी को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। इस क्रम में अब एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक (एसजेडीडी) के बीच गठबंधन तय हो गया है। जिससे बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जानकारी देते हुए बताया कि बिहार चुनाव के लिए एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक के बीच गठबंधन तय हुआ है। यूडीएसए गठबंधन देवेंद्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा। ऐसी पार्टियां, जो साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ना चाहते हैं उनका स्वागत है। वहीं बिहार में यादव और मुस्लिम आरजेडी का वोट बैंक माना जाता है, ऐसे में एआईएमआईएम और एसजेडीडी के साथ आने से आरजेडी के वोट बैंक में सेंधमारी हो सकती है।

ओवैसी ने कहा कि हमारे बारे में पुराना रिकॉर्ड बताता है कि हम किसी से नहीं डरते हैं। हम चुनाव लड़ेंगे. लोकसभा में आरजेडी ने कितनी सीट जीती है। किशनगंज में अगर हमारी पार्टी नहीं खड़ी तो कांग्रेस वहां से नहीं जीत पाती। बीजेपी अगर जीत रही है तो उसकी जिम्मेदार आरजेडी है। हैदराबाद में मैंने बीजेपी को हराया, शिवसेना को हराया. महागठबंधन अब नहीं रहा।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कांग्रेस आज शिवसेना की गोद में बैठी है। कांग्रेस खुद को धर्मनिरपेक्षता का ठेकेदार समझती है। कांग्रेस की सोच सामंती है। कांग्रेस की गलत नीतियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

उम्मीदवारों का ऐलान

बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी पहले ही बिहार विधानसभा चुना 2020 लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। सितंबर महीने की शुरुआत में ओवैसी की पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया था। एआईएमआईएम 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का पहले ही ऐलान कर चुकी है।

हंगामेदार होगा इस बार का मानसून सत्र, क्या एकजुट विपक्ष चलने देगा संसद?

कोविड-19 महामारी के बीच संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू हो रहा है और इस बार सदन की बैठक के लिए कई बदलाव भी किए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आठ सितंबर को पार्टी के रणनीति समूह की बैठक बुलाई है। विपक्षी नेता चाहते हैं कि समान सोच वाले दलों को संसद में सरकार को घेरने के लिए एक दूसरे के साथ मिलकर तालमेल से काम करना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे और झामुमो के हेमंत सोरेन जेईई/नीट और जीएसटी मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों की हालिया बैठक के दौरान यह विचार व्यक्त कर चुके हैं।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

विपक्षी दल संसद में सरकार को कोरोना से निपटने, अर्थव्यवस्था और राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति, चीन के साथ सीमा पर गतिरोध जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर एक साथ मिलकर घेरने पर विचार कर रहे हैं। सूत्रों ने इस बारे में बताया है। 

14 सितंबर से शुरू हो रहा है मानसून सत्र

उन्होंने बताया कि विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा संसद के दोनों सदनों में सरकार के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोलने के लिए इस सप्ताह बैठक कर एक संयुक्त रणनीति बनाने की संभावना है। कोविड-19 महामारी के बीच संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस बार सदन की बैठक के लिए कई बदलाव भी किए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आठ सितंबर को पार्टी के रणनीति समूह की बैठक बुलाई है। 

विपक्षी नेता चाहते हैं कि समान सोच वाले दलों को संसद में सरकार को घेरने के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर तालमेल से काम करना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे और झामुमो के हेमंत सोरेन जेईई/नीट और जीएसटी मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों की हालिया बैठक के दौरान यह विचार व्यक्त कर चुके हैं। 

एक बार बैठक कर चुकी है कांग्रेस

कांग्रेस की रणनीति बनाने वाला समूह एक बार बैठक कर चुका है और इस दौरान सत्र में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा की गई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को संप्रग के सहयोगियों और समान सोच वाले दलों से संपर्क करने को कहा गया है ताकि संसद के बाहर और भीतर सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखायी जाए। 

तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने पूर्व में कहा था कि समान सोच वाले विपक्षी दल संसद में एक साथ काम करेंगे और जनता के मुद्दों को उठाएंगे। उन्होंने कहा था कि संसद में ऐसे दलों के बीच आपसी तालमेल होगा। सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने रविवार को कहा कि विपक्ष की संयुक्त रणनीति के लिए विचार-विमर्श चल रहा है। 

विपक्षी नेताओं की जल्द ही बैठक होगी

सीपीआई नेता डी राजा ने भी कहा कि इस संबंध में विपक्षी नेताओं की जल्द ही बैठक होगी। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बढ़े तनाव के संबंध में विपक्ष इस पर सरकार से जवाब की मांग करेगा। देश में कोविड-19 के बढ़ रहे मामलों को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। फेसबुक को लेकर भी संसद में गर्मागर्म बहस हो सकती है। 

नीट समेत कई अन्य परीक्षाएं कराने का मुद्दा भी उठाया जा सकता है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच परीक्षाएं आयोजित कर सरकार ने छात्रों के जीवन को खतरे में डाला है। कांग्रेस हालिया समय में सरकार द्वारा जारी अध्यादेश का भी विरोध कर सकती है। 

स्वस्थ्य संबंधी कुछ शर्तो के साथ जगन्नाथ रथ यात्रा होगी

पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ रथयात्रा की इजाजत दी. मंदिर प्रबंधन समिति, राज्य सरकार और केंद्र सरकार आपस में तालमेल कर रथयात्रा का आयोजन करवाएंगे. कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का पालन करते हुए ऐसा किया जाएगा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पुरी में कोरोना के केसों की संख्‍या में बढ़ोतरी हो तो राज्‍य सरकार के पास रथ यात्रा रोकने की आजादी होगी. इससे पहले कॉलरा और प्लेग के दौरान भी रथ यात्रा सीमित नियमों और श्रद्धालुओं के बीच हुई थी. चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट केवल पुरी में यात्रा के बारे में विचार कर रहा है और ओडिशा में कहीं अन्‍य जगह पर नहीं. 

नयी दिल्ली(ब्यूरो) – 22 जून:

सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा पर अपने पिछले आदेश में लगाई गई रोक को हटा लिया है। यानी कल (23 जून 2020 को) पुरी में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक व ऐतिहासिक रथ यात्रा निकलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए मंदिर कमिटी, राज्य व केंद्र सरकार को समन्वय बना कर करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज (22 जून, 2020) ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा पर रोक संबंधी आदेश में संशोधन करने के अनुरोध पर सुनवाई की। केंद्र की ओर से मामले का विशेष उल्लेख सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया। उन्होंने यहाँ कुछ प्रतिबंधों के साथ रथयात्रा की अनुमित देने का अनुरोध किया।

जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह रथयात्रा सदियों पुरानी है और इसे रोकना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कोर्ट के समक्ष इस मामले में कुछ शर्तों और हिदायतों के साथ पूर्व के आदेश में संशोधन का आग्रह किया।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामले का उल्लेख करते हुए सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “यह कई करोड़ लोगों की आस्था का मामला है। अगर भगवान जगन्नाथ को कल बाहर नहीं लाया गया तो परंपरा के मुताबिक उन्हें अगले 12 साल तक बाहर नहीं निकाला जा सकता है।” इस पीठ में दोपहर बाद मुख्य न्यायधीश भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ गए।

सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस रथयात्रा में कवल उन लोगों का चयन होगा, जिनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया हो और वे भगवान जगन्नाथ मंदिर में सेवायत के रूप में काम कर रहे हों। उन्होंने बताया कि भीड़ को रोकने के लिए राज्य सरकार कर्फ्यू लगा सकती है। हालातों को देखते हुए कदम उठाए जा सकते हैं और जन भागीदारी के बिना रथ यात्रा आयोजित हो सकती है।

वहीं, ओडिशा सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी केंद्र की दलील का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर याचिकाकर्ता पूरे एहतियात के साथ रथयात्रा आयोजित करते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। जिसके बाद जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वह सभी मामलों की सुनवाई के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श लेकर आदेश में संशोधन के मामले पर विचार करेंगे।

इसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया नागपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मामले पर सुनवाई के लिए जुड़े। 18 जून के आदेश के मामले में संशोधन की माँग वाले मामले की अध्यक्षता इसके बाद CJI ने ही की।

गौरतलब है कि इससे पहले 18 जून को कोरोना वायरस की महामारी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 23 जून को पुरी (ओडिशा) के जगन्नाथ मंदिर में होने वाली वार्षिक रथ यात्रा पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर हमने इस साल रथयात्रा की इजाजत दे दी तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।

इसके बाद पुरी के राजा गजपति दिब्यसिंह ने शनिवार (जून 20, 2020) को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिख कर रथ यात्रा को अनुमति देने के लिए अपने आदेश को संशोधित करने के लिए तत्काल सुप्रीम कोर्ट का रूख करने की अपील की थी। वहीं भाजपा ने भी दिब्यसिंह देब के प्रस्ताव के अनुसार कदम उठाने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार को पुरी शंकराचार्य से भी चर्चा करनी चाहिए।

यहाँ बता दें कि भुवनेश्वर के ओडिशा विकास परिषद एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर कर इस मामले को उठाया था। उन्होंने अपनी दायर में कहा ता कि रथयात्रा से कोरोना फैलने का खतरा हो सकता है। इसमें कहा गया था कि अगर लोगों की सेहत को ध्यान में रखकर कोर्ट दीपावली पर पटाखे जलाने पर रोक लगा सकता है तो फिर रथयात्रा पर रोक क्यों नहीं लगाई जा सकती?

बाला साहब की शिवसेना मनाएगी टीपू सुल्तान की पुण्यतिथि

हम जिन बातों का प्राण दे कर विरोध करते हैं समय आने पर उनही बातों को चुपचाप मान लेते हैं।

महाराष्ट्र और कर्नाटक के विवादित 12 पंचायत क्षेत्रों और 865 गांवों में आज भी मराठा वीर शिवाजी की शौर्य गाथा गायी जाती है। इस क्षेत्र में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो वीर शिरोमणि शिवाजी की तुलना टीपू सुल्तान से कर लज्जित महसूस न हो। लेकिन सत्ता की लालसा इंसान को कहाँ से कहाँ ले जा सकती है, सत्ता की चाहत में इंसान कितना बदल सकता है, अगर इसका जीवंत उदाहरण देखना है तो एक बार महाराष्ट्र की ओर नजर दौड़ा लीजिए. वो महाराष्ट्र जहाँ के मुख्यमंत्री शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे हैं जिन्होंने कांग्रेस तथा एनसीपी के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई है. सरकार बनाने के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना वो भी करती हुई नजर आ रही है, जिसका ज्वलंत विरोध बाला साहेब करते थे.

17 नवंबर, 2012 को श्रद्धेय बाला साहेब ठाकरे का निधन हुआ था। उस दिन उनके सम्‍मान में मुंबई जैसे ठहर गई थी। भारतीय राजनीति में प्रबल हिन्‍दुत्‍व प्रवर्तकों में बाला साहेब का नाम बड़े सम्‍मान से लिया जाता है। हालांकि वे चुनाव कभी नहीं लड़े, फिर भी राजनीति में उनका दखल जबरदस्‍त था। भारत के इतिहास में संभवत: वह पहले व्‍यक्ति थे, जिन्‍हें मुसलमानों के विरुद्ध बोलने पर वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया था। आज उन्‍हीं की संतान और पार्टी नेता सत्‍ता के लोभ में उनके आदर्शों और मूल्‍यों को मुंह चिढ़ा रहे हैं।

खबर के मुताबिक़, शिवसेना की तरफ से उस टीपू सुल्तान को श्रद्धांजलि दी गई है, जिस टीपू सुल्तान ने अनगिनत हिंदुओं का कत्लेआम किया था तथा शिवसेना उस टीपू सुल्तान को हिन्दू संहारक कहती थी. दरअसल सोशल मीडिया पर शिवसेना नेता का एक पोस्टर सामने आया है जिसमें वह टीपू सुल्तान को उसकी मौत वाले दिन पर श्रद्धांजलि दे रहा है. ये पोस्टर सामने आते ही हिंदूवादी कार्यकर्ता शिवसेना की जबरदस्त आलोचना कर रहे हैं तथा कह रहे हैं कि उद्धव राज में बाला साहेब की शिवसेना अब पूरी तरह से बदल चुकी है.

रामटेक से शिवसेना सांसद कृपाल तुमाने ने हाल ही में टीपू सुल्‍तान जयंती का बैनर बनवाया। इस पर तुमाने ने पार्टी का नाम तो लिखवाया ही, बाला साहेब का चित्र भी लगाया। जिस पार्टी की नींव आक्रांताओं के विरोध पर रखी गई हो, जो छत्रपति शिवाजी महाराज को प्रेरणास्रोत मानती हो, उसी ने आक्रांताओं को अपना आदर्श और राजा घोषित कर दिया! 20-30 साल की अपनी राजनीतिक यात्रा में शिवसेना इस स्थिति में पहुंच गई, यह देख कर बाला साहेब की आत्‍मा को बहुत कष्‍ट हो रहा होगा। भारत की संस्‍कृति को ध्‍वस्‍त कर इस्लामिक जिहाद के सिपहसालारों को महिमामंडित कर मुसलमानों का वोट हासिल करने का यह प्रपंच हालांकि नया नहीं है, पर अभी तक यह कांग्रेस और वामपंथी दलों तक ही सीमित था। जिस टीपू सुल्तान को शिवसेना ने अपना नया आदर्श चुना है, उसके बारे में सभी को जानना चाहिए।

याद कीजिये वो समय जब शिवसेना कांग्रेस पार्टी के साथ सत्ता में नहीं थी तब वह टीपू सुल्तान को लेकर क्या सोचती थी. शिवसेना टीपू सुल्तान के कुकृत्यों पर प्रहार करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ती थी. 2015 में शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत ने टीपू सुल्तान और हिंदवा सूर्य छत्रपति शिवाजी के बीच तुलना पर कठोर स्वरों में कहा था, “टीपू सुल्तान एक निर्दयी शासक था जिसने हिंदुओं का जनसंहार किया और जिसका इस्लाम के अलावा किसी भी दूसरे धर्म के अस्तित्व में विश्वास नहीं था. उसने मंदिर और गिरिजाघर ध्वस्त कराए. और वे कहते हैं कि वह एक अच्छा शासक था?”

ऐसा था टीपू सुल्‍तान

टीपू सुल्तान ने 17 वर्षों के शासनकाल में दक्षिण के लगभग सभी बड़े नगरों को नष्‍ट कर दिया। इनमें कोडागु (कुर्ग), कालीकट (कोझिकोड), मालाबार भी शामिल थे। उसने 1788 में कुर्गनगर में भी तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी, मंदिर तोड़ डाले और समूचे नगर को वीरान कर दिया। वह हिन्‍दुओं का बलात् कन्‍वर्जन भी कराता था। कुर्नूल के नवाब को लिखे उसके पत्र से इसकी पुष्टि होती है।

बर्बरता की पराकाष्‍ठा

कालीकट के विनाश का वर्णन अनेक पुर्तगाली, जर्मन, ब्रिटिश मिशनरियों और सेना के अधिकारियों ने अपने संस्‍मरणों में किया है। इन्‍होंने लिखा है कि कैसे 30,000 आक्रांता आगे-आगे लोगों को मारते हुए बढ़ते थे और पीछे से 30,000 की सेना लेकर हाथी पर सवार टीपू हिन्‍दुओं को हाथियों के पैरों से बांध कर मार डालता था। बच्चों को माताओं के गले में लटका कर और माताओं को पेड़ से लटका कर मार डाला जाता था। टीपू के राज में पुरुषों को इस्लाम में कन्‍वर्ट किया जाता था और बेटियों का जबरन मुसलमानों से निकाह करा दिया जाता था। चारों ओर मौत का भयंकर दृश्य होता था । मिशनरी गुनसेट लिखता है, ‘टीपू ने कालीकट को जमीन में मिला दिया था।‘

कांग्रेस ने शुरु कि आक्रांता का महिमामंडन

ऐसे बर्बर आक्रांता का कोई महिमामंडन करेगा तो किसी भी स्वाभिमानी देश भक्त का खून उबलेगा। लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि महिमामंडन की शुरुआत कैसे हुई। 70 के दशक में कांग्रेस ने तुष्टिकरण की नीति के तहत टीपू सुलतान पर एक डाक टिकट जारी किया। भगवन गिडवानी ने ‘द सोर्ड ऑफ टीपू सुल्‍तान’ नामक उपन्‍यास लिखकर इस फैसले को न्‍यायोचित बताया। इसके बाद गिरीश कर्नाड ने “टीपू विनाकाणा सुगालु” (The Dreams of Tipu Sultan) नामक नाटक लिखा। नई पीढ़ी इसे ही सच मानती है। आज के सूचना माध्यमों पर इनके द्वारा रचित-कल्पित टीपू पुराण ही हावी हैं।

गिडवानी ने अपने उपन्‍यास में टीपू को महान देशभक्त, कुशल रणनीतिकार ,हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक , मंदिरों का उद्धारक घोषित किया। 1799 की श्रीरंगपट्टनम की अंतिम लड़ाई में टीपू के मरने तक पूरे राज्‍य में केवल दो मंदिरों में पूजा होती थी। उसने दक्षिण की प्रमुख भाषा कन्नड़ को हटाकर फारसी को राजभाषा बना दिया। उसके मरने के बाद कर्नल विलियम को 22,000 हस्‍तलिखित पत्र मिले। इनमें हिन्‍दुओं को काफिर और विधर्मी बताया गया है। पूरे देश में केवल कन्नड़ मुसलमान ही ऐसा है जो अपनी मातृभाषा कन्नड़ नहीं बोल सकता। इसका पूरा श्रेय गिडवानी के टीपू को ही जाता है। आज भी कन्नड़ में बलपूर्वक घुसाए गए शब्द जैसे- खाता, खिरडी , खानसुमरी, गुदास्ता, तख़्त ,जमाबन्दी, अमलदार आदि चलन में हैं। टीपू ने मुहम्मद के जन्म से आरम्भ कर कैलेंडर बनवाया था, जिसके महीनों के नाम अरबी शब्दों से शुरू होते थे।

देशभक्‍त नहीं था

कुछ लोग कहते हैं कि टीपू ने मंदिरों के पास महल बनाया, जो हिन्दुओं के प्रति उसका सम्‍मान दर्शाता है। लेकिन सच यह है कि मुसलमान मंदिर के पास अपना महल या मस्जिद भाईचारे की भावना से नहीं बनाता है। वह मंदिर आने वालों को यह बताना चाहता है कि तुम्हारा भगवान है ही नहीं, केवल अल्लाह है। धिम्‍मी हिन्‍दुओं को यही समझने की जरूरत है। टीपू को देशभक्त व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बताने वालों को यह पता होना चाहिए कि उसने अंग्रेजों के विरुद्ध केवल इसलिए लड़ाई लड़ी, क्‍योंकि वह फ्रांसिसियों का आधिपत्य स्वीकार कर चुका था। उसने फ्रांस से संधि की थी कि जीतने के बाद आधा राज्‍य टीपू और आधा फ्रांसिसियों का होगा। टीपू द्वारा 2 अप्रैल, 1797 को फ्रांस की सेना को दिए गए आमंत्रण में इसका स्पष्ट उल्लेख है। यह ब्रिटिश अभिलेखागार में आज भी उपलब्ध है।

जब मराठा साम्राज्य उत्कर्ष पर था, तब भयभीत टीपू ने 1797 में अफगान शासन जमनशाह को भारत पर उत्‍तर की ओर से आक्रमण करने के लिए पत्र लिखा था। इसमें उसने स्‍वयं दक्षिण से आक्रमण करने की बात लिखी है। वह भारत से इस्‍लाम के दुश्‍मन काफिरों को खत्‍म करना चाहता था। यह पत्र उसे कट्टरपंथी घोषित करने के लिए उपयुक्‍त है। अंग्रेजों से अपने साम्राज्‍य को बचाने के लिए दुश्मन से हाथ मिलाकर अंग्रेजों से लड़ने वाले एक क्रूर आक्रांता को स्वतंत्रता सेनानी बताया जा रहा है तो मराठों, मेवाड़ के राजपूतों , गोरखाओं को यह सम्मान क्यों नहीं दिया गया? क्योंकि वे देश की अस्मिता व हिन्‍दुओं के सम्मान के लिए लड़े थे ? वीर सावरकर से शुरू कर आज शिवसेना टीपू सुल्‍तान तक पहुंच गई है। वह दिन दूर नहीं, जब इसके सहयोगी उसे छत्रपति शिवाजी महाराज को भी दूर कर देंगे।

एलजी पॉलिमर कंपनी में गैस रिसाव, एक बच्चे समेत 6 लोगों की मौत

  • एलजी पॉलिमर कंपनी में गैस रिसाव
  • गांवों में चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन

बताया जा रहा है कि आरआर वेंकटपुरम में स्थित विशाखा एलजी पॉलिमर कंपनी से खतरनाक जहरीली गैस का रिसाव हुआ है. इस जहरीली गैस के कारण फैक्ट्री के तीन किलोमीटर के इलाके प्रभावित हैं. फिलहाल, पांच गांव खाली करा लिए गए. सैकड़ों लोग सिर दर्द, उल्टी और सांस लेने में तकलीफ के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं.

विशाखापट्टनम​: आज तड़के करीब 2:30 बजे एक फार्मा कंपनी के प्लांट में गैस लीक होने से एक बच्चे समेत 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है. 1000 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है. इस गैस लीक से 3 किमी. का इलाका प्रभावित हुआ है. एहतियातन 6 गांवों को खाली करा लिया गया है.

जानकारी के अनुसार, विशाखापट्टनम के आर.आर. वेंकटपुरम गांव में एल.जी पॉलिमर उद्योग में रासायनिक गैस लीक हो गई. इस कारण वहां मौजूद लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने हालात का जायजा लेने के लिए आपदा प्रबंधन की बैठक बुलाई है.

  पीएम मोदी ने ट्ववीट कर लिखा, ‘मैंने विशाखापट्टनम की स्थिति के बारे में  MHA (गृह मंत्रालय) और NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) के अधिकारियों से बात की है जिस पर कड़ी नज़र रखी जा रही है. मैं विशाखापट्टनम में सभी की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रार्थना करता हूं.’ पीएम नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के सीएम वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी से बातचीत की है. उन्होंने सभी मदद और सहायता का आश्वासन दिया.

गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर बताया है कि इस घटना पर नजर रखी जा रही है. अमित शाह ने ट्वीट किया, ‘विशाखापट्टनम में हुई घटना परेशान करने वाली है. NDMA के अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों से बात की। हम स्थिति पर लगातार और बारीकी से नजर रख रहे हैं. मैं विशाखापट्टनम के लोगों के अच्छे होने की प्रार्थना करता हूं.’

ऐसी स्थिति में क्या बरतें सावधानी
– दौड़ना बिलकुल नहीं चाहिए
– मुंह के ऊपर गीला कपड़ा रखना चाहिए
– मरीज को लिटाकर लंबी-लंबी सांस दिलवानी चाहिए, यदि वो सांस न ले पाए तो ऑक्सीजन की सहायता लेनी चाहिए

बताया जा रहा है कि जब गैस लीक हुई तब लोगों को घबराहट होनी शुरू हुई और सांस लेने में दिक्कत हुई. अभी गैस लीक होने की वजह का पता नहीं चल सका है.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने घटना के बारे में जानकारी ली है और जिला कलेक्टर को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि प्रभावित लोगों को उचित इलाज मिले.

मोदी के आवाहन पर भारत ने दिखाई एकता, की दीपावली

कोरोना के खिलाफ जंग में पीएम मोदी की अपील के बाद देशवासी आज रात 9 बजे 9 मिनट दीया, कैंडल, मोबाइल फ्लैश और टार्च जलाकर एकजुटता का परिचय देंगे. लोग दीया जलाने की तैयारी कर लिए हैं.

नई दिल्ली: 

कोरोना वायरस के खिलाफ पूरे देश ने एकजुट होकर प्रकाश पर्व मनाया. पीएम मोदी की अपील पर एकजुट होकर देश ने साबित कर दिया कि कोरोना के खिलाफ हिंदुस्तान पूरी ताकत से लड़ेगा. देश के इस संकल्प से हमारी सेवा में 24 घंटे, सातों दिन जुटे कोरोना फाइटर्स का भी हौसला लाखों गुना बढ़ गया. गौरतलब है कि पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में हैं. अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देश कोरोना के आगे बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं लेकिन भारत के संकल्प की वजह से देश में कोरोना संक्रमण विकसित देशों के मुकाबले कई गुना कम है.

Live Updates- 

  • कोरोना के खिलाफ एकजुट हुआ भारत, प्रकाश से जगमगाया पूरा देश
  • पीएम मोदी की अपील पर हिंदुस्तान ने किया कोरोना के खिलाफ जंग का ऐलान
  • कोरोना के खिलाफ जापान में जला पहला दीया,
  • कुछ देर बाद 130 करोड़ हिंदुस्तानी लेंगे एकजुटता का संकल्प

अमित शाह ने जलाए दीये

दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आवास पर सभी लाइट बंद करने के बाद मिट्टी के दीपक जलाए. 

योगी आदित्यनाथ ने जलाया दीया

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने दीया जलाकर एकता की पेश की मिसाल. दीए की रोशनी से बनाया ऊं.

अनुपम खेर ने जलायी मोमबत्ती

अनुप खेर ने दीया जलाकर दिया एकता का संदेश

बता दें कि पीएम मोदी ने शुक्रवार को अपील की थी कि पूरे देश के लोग रविवार रात 9 बजे घर की बत्तियां बुझाकर अपने कमरे में या बालकनी में आएं और दीया, कैंडिल, मोबाइल और टॉर्च जलाकर कोरोना के खिलाफ जंग में अपनी एकजुटा प्रदर्शित करें.

नहीं तो कभी न पकड़े जाते जमात के कारनामे

निजामुद्दीन में तबलीगी जमात द्वारा आयोजित किए गए कार्यक्रम से कम से कम 7,600 भारतीय और 1,300 विदेशी लोगों के जुड़े होने की जानकारी सामने आई है. बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन पश्चिम इलाके में स्थित एक मरकज में 13 मार्च से 15 मार्च तक कई सभाएं हुईं थीं, जिनमें सऊदी अरब, इंडोनेशिया, दुबई, उज्बेकिस्तान और मलेशिया समेत अनेक देशों के मुस्लिम धर्म प्रचारकों ने भाग लिया था. देशभर के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों की संख्या में भारतीयों ने भी इसमें हिस्सा लिया था. उन सभाओं में भाग लेने वाले कुछ लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण फैल गया है. इस घटना के सामने आने के बाद देश के अन्य राज्यों में भी मरकज़ के धार्मिक सभा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है. मामला सामने आने के बाद पूरे इलाके सील कर दिया गया है, जिसमें तबलीग-ए-जमात का मुख्यालय और आवास शामिल हैं. इलाके के उन होटलों को भी सील कर दिया गया है जिनमें जमात के लोग ठहरे थे. मरकज़ से लोगों को अस्पतालों और क्वारंटाइन केंद्रों में भेज दिया गया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों का पांचवां हिस्सा इसी सभा से जुड़ा हुआ है. इसके अलावा कुल 53 लोगों की मौत में से कम से कम 15 लोग इस आयोजन से जुड़े हुए थे.

नई दिल्ली: 

देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) रोकने में सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे तबलीगी जमात के बारे में लगातार खबरें आ रही है. राजधानी दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में 1 से 15 मार्च के बीच 2000 से अधिक लोग तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के आयोजन में हिस्सा लेने पहुंचे थे. लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद ये कहां गायब हो गए? आपके मन में भी सवाल होगा कि आखिर इस बारे में पता कैसे चला?

खुलासे का तेलंगाना कनेक्शन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि तबलीगी जमात के सदस्यों में भंयकर रूप से फैले कोरोना वायरस के बारे में और भी देर हो जाती. लेकिन सौभाग्य से तेलंगाना में कुछ इंडोनेशियाई नागरिक मिले जो कोरोना वायरस से संक्रमित थे. काफी गहन पूछताछ के बाद जानकारी मिली कि बड़ी संख्या में तबलीगी जमात के सदस्य हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में मौजूद हैं. लेकिन सटीक जानकारी नहीं होने की वजह से दिल्ली सरकार के स्वास्थ्यकर्मी भवन में दाखिल नहीं हो पाए. इसी बीच तेलंगाना में फिर कुछ और पॉजिटिव मामले सामने आए. इन सभी पॉजिटिव लोगों का दिल्ली के मरकज से कनेक्शन था. इसी के बाद ही पुलिस की मदद से मरकज से लोगों को बाहर निकाला जा सका. 

इस संस्थान ने की सरकार की मदद

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार के अधिकारी मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद से ही मरकज भवन में घुसने की कोशिश करते रहे. लेकिन दरवाजे पर ही यह कह कर वापस भेज दिया जाता कि यहां कोई सदस्य नहीं है. इस बीच पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) की भूमिका अहम रही. इस संस्था ने अपने सदस्यों की मदद से सभी संक्रमित लोगों के घरों में फोन कर मरकज में मौजूद लोगों की सटीक जानकारी जुटाई. भवन में भारी संख्या में लोगों के मौजूद होने के पुख्ता जानकारी के बाद ही पुलिस व स्वास्थ्य अधिकारी मरकज के भीतर दाखिल हो पाए.

ये है पूरा घटनाक्रम

  • 18 मार्च को तेलंगाना में 9 इंडोनेशियाई नागरिक जांच में कोरोना वायरस पॉजिटिव मिले
  • तेलंगाना सरकार के NCDC को मरकज का लिंक बताया गया
  • 20 मार्च NCDC के निर्देश पर मरकज में अधिकारी भेजे गए, लेकिन उन्हें घुसने नहीं दिया गया
  • 21 और 22 मार्च को फिर से तेलंगाना में चार कोरोना वायरस संक्रमित मिले, इनका भी मरकज कनेक्शन था
  • दूसरे दिन दिल्ली सरकार की टीम फिर निजामुद्दीन पहुंची, लेकिन भवन में कोई नहीं है कहकर दरवाजा नहीं खोला गया
  • 24 मार्च को फिर तबलीगी जमात के 7 सदस्य तेलंगाना में कोरोना वायरस संक्रमित मिले
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने PHFI से मदद मांगी, संस्था ने फोन के जरिए सदस्यों से मरकज में मौजूद लोगों की अहम जानकारी जुटाई
  • दिल्ली सरकार व दिल्ली पुलिस ने मिलकर सभी तबलीगी जमात सदस्यों को मरकज से बाहर निकाला

गाँजे का तस्कर पंचकुला से गिरफ्तार

पंचकूला बिग ब्रेकिंग: कपिल नागपाल:

आंध्र प्रदेश से पंचकूला तक ट्रेन के माध्यम से लेकर आता था गांजा खिलौनों वाले बोरों में गांजा भर कर लेकर आता था ऊपर खिलौने नीचे गांजा भर कर लेकर आता था चढ़ा क्राइम ब्रांच पंचकूला की टीम के हत्थे पंचकूला स्थित पिंजोर के पास गांव बक्शीवाला में जंगल में क्राइम ब्रांच की 19 की टीम ने रेड मारकर तीन कट्टे गांजा बरामद की जिसकी जब तोल किया तो 62 किलो गांजा निकला। जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 5 लाख है। आरोपी का नाम सोनू है। और पंजाब के मकुआ थाना होशियारपुर का रहने वाला है। आरोपी सोनू यह गांजा आंध्र प्रदेश से ट्रेन के माध्यम से लेकर आता था। आरोपी सोनू जब यह गांजा लेकर आता था तो ऊपर खिलौने रख देता था बोरी के नीचे गांजा छुपाकर लता था लोगों को यह पता चलता था कि यह एक खिलौना व्यापारी है।

आरोपी सोनू को आज पंचकूला कोर्ट में पेश किया जहां कोर्ट ने दो 9 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा। क्राइम ब्रांच की टीम आरोपी सोनू को आंध्रप्रदेश लेकर जाएगी जहां से आरोपी सोनू गांजा खरीद कर पिंजोर एरिया में सप्लाई करता था।