कपिल सिब्बल हाथ छोड़ कर हुए साइकल सवार, अब रजाया सभा जाने की तैयारी

The 161″ Birth Anniversary Of Gurudev Rabindranath Tagore celebrated 

Koral ‘Purnoor’, Demokretic Front,Chandigarh :

Bangiya Sanskritik Sammilaini Chandigarh celebrated the 161″ Birth Anniversary Of Gurudev Rabindranath Tagore at its premises at Banga Bhawan , Sector 35. The celebration started with the lighting of the ceremonial Lamp.

The President of the organisation, Anindu Das welcomed all and elaborated on the importance of the life and work of the great poet in the life of Bengalis in particular and humanity in general. The cultural Team of the Sammilani sang the opening song which was followed by individual songs by the artist who sang melodious world famous Rabindra Sangeet. The Vice President (Cultural) Bhabani Pal said that the drama Dabotar Grash’, which was performed by the children and the adult alike is based on the blind belief prevailing in the society at that time. Gurudev who stood firmly against such practices beautifully brought out the message in the famous poem, which was converted into a drama and performed under the direction of Subhashish Neogi, a well know theatre personality of the tri city.

The General Secretary of BSS Prabal Syam said that the “Geti Alokha”, a song based dance was on the theme of not limiting oneself to his/her identity but to embrace the whole world as one and spread the message of love and compassion. This year the programme was special as it is the Golden Jubilee Year of the organisation which will culminate with a grand show on 30th July 2022.

कांग्रेस और प्रशांत किशोर में बनते-बनते बिगड़ गई बात

बीते सोमवार को जब कांग्रेस के आला नेताओं की बैठक शुरू हुई तो यह उम्मीद की जा रही थी कि अब इस सवाल का जवाब मिल जाएगा कि राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल होंगे या नहीं। लेकिन जब बैठक समाप्त हुई तो यह स्पष्ट हो गया कि फ़िलहाल इस जवाब के लिए कुछ और वक़्त इंतज़ार करना होगा। हालाँकि ना तो यह सवाल नया है और ना ही यह टाल-मटोल. पिछले साल भी कांग्रेस पार्टी और प्रशांत किशोर के बीच बात बनते-बनते बिगड़ गई थी। बात इस क़दर बिगड़ गई थी कि पीके ने कांग्रेस नेतृत्व तक पर सवाल उठा दिए थे।

नई दिल्ली(ब्यूरो) डेमोक्रेटिक फ्रंट :  

कांग्रेस ने जानेमाने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर लंबी मंत्रणा के बाद मंगलवार को कहा कि किशोर को ‘विशेषाधिकार प्राप्त कार्य समूह -2024’ का हिस्सा बनकर पार्टी में शामिल होने की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। पिछले कई दिनों से प्रशांत किशोर की ओर से दिए गए सुझावों और उनके पार्टी से जुड़ने की संभावना को लेकर कांग्रेस के भीतर लगातार मंथन हो रहा था। प्रशांत किशोर ने पिछले दिनों कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष पार्टी को मजबूत करने और अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में विस्तृत प्रस्तुति दी थी। उनके सुझावों पर विचार करने के लिए सोनिया गांधी ने आठ सदस्यीय समिति का गठन किया था।

कांग्रेस औैर प्रशांत किशोर के बीच बात बिगड़ने के पीछे मुख्य तौर तीन वजहें मानी जा रही हैं। पहली बात यह कि कांग्रेस चाहती थी कि प्रशांत किशोर सिर्फ कांग्रेस के लिए काम करें, जबकि उनकी संस्था आईपैक हाल ही में तेलंगाना में केसीआर के साथ भी काम करने के लिए तैयार हो गई है। इसके अलावा प्रशांत किशोर महासचिव का पद और अहमद पटेल जैसा दर्जा चाह रहे थे, जबकि कांग्रेस उन्हें Empowered Action Group 2024 में  शामिल करने भर के लिए तैयार थी। प्रशांत किशोर इस भूमिका में नहीं उतरना चाहते थे बल्कि कांग्रेस में अहम परिवर्तन करने और सुझाव देने के रोल में खुद को लाने की बात कर रहे थे। तीसरा, कांग्रेस प्रशांत किशोर के सांगठनिक फेरबदल के प्रस्ताव को भी अपनाने के लिए तैयार नहीं थी। प्रशांत किशोर का एक प्रस्ताव यह भी था कि ‘गांधी’ के बजाय किसी और को अध्यक्ष बनाया जाए। इस पर भी कांग्रेस में सहमति नहीं थी।

पीके की हर लाइन गौर करने वाली है। उन्‍होंने पार्टी में शामिल होने से इनकार की बात कहते हुए राय भी दी है। किशोर ने इसमें कहा है कि कांग्रेस को उनसे ज्‍यादा लीडरशिप की जरूरत है। यह कहने के पीछे किशोर का स्‍पष्‍ट मैसेज है। उन्‍होंने साफ किया है कि कांग्रेस का मौजूदा नेतृत्‍व उसे मुश्किलों से बाहर नहीं निकाल सकता है। एक तरह से उन्‍होंने गांधी परिवार की नेतृत्‍व क्षमता पर हमला भी किया है। पिछले कुछ चुनावों में यह बात साफ तौर पर देखी भी जा चुकी है।

प्रशांत किशोर ने अपनी राय जताते हुए पार्टी में सामूहिक इच्‍छाशक्ति की भी जरूरत पर बल दिया है। निश्चित तौर पर कांग्रेस आज पूरी तरह से बिखरी हुई दिखती है। शायद एक के बाद एक पराजय इसकी बड़ी वजह है। हर चुनाव से पहले पार्टी के अंदर से विरोध के सुर सुनाई देने लगते हैं। बेशक दूसरी पार्टियों में भी नेता दल बदलते हैं, लेकिन कांग्रेस में ये हालात बेकाबू से दिखते हैं। पंजाब इसका हालिया उदाहरण है। अमरिंदर और सिद्धू की आपसी रस्‍साकशी में किस तरह से पार्टी को नुकसान हुआ। पार्टी में टीमवर्क का स्‍पष्‍ट अभाव दिखता है। कांग्रेस को इस पर काम करने की जरूरत है।

किशोर ने पार्टी में परिवर्तनकारी सुधारों की बात कही है। उनके मुताबिक, इसी के जरिये कुछ गहरी जड़ें जमा चुकी समस्‍याओं का समाधान किया जा सकता है। इस तरह उन्‍होंने पार्टी में बदलाव की ओर इशारा किया है। काफी समय से पार्टी में अध्‍यक्ष पद के चुनाव लंबित हैं। सोनिया गांधी अंतरिम अध्‍यक्ष बनी हुई हैं। इससे बाहर भी गलत मैसेज जाता है। यह बीजेपी को उस पर हमला करने का मौका देता है। वह वंशवादी के टैग से चिपकी हुई दिखती है। नेतृत्‍व और छवि में बदलाव कर कांग्रेस को इसका फायदा हो सकता है।

राहुल, प्रियंका या सोनिया, कोई भी कांग्रेस की नैया पार लगा पाने में सफल साबित नहीं हुआ। प्रियंका गांधी को तो कांग्रेस ‘ब्रह्मास्‍त्र’ मानती थी। लेकिन, यूपी सहित पांच राज्‍यों के चुनाव में पार्टी ने इस ब्रह्मास्‍त्र का भी इस्‍तेमाल कर लिया। हार पर हार के बावजूद पार्टी पर गांधी परिवार की पकड़ बनी हुई है। जब कभी गांधी परिवार को चुनौती दी जाती है तो पार्टी के अंदर ही हंगामा शुरू हो जाता है। ऐसा करने वाले नेता हाशिये पर चले जाते हैं। जी-23 इसका उदाहरण है। यह पार्टी में सुधारों की पुरजोर पैरवी करता रहा है। यहां तक नेतृत्‍व में बदलाव की मांग करते हुए इसने पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी को चिट्ठी तक लिखी थी।

कांग्रेस की कलह फिर सामने आई, विश्वबंधु राय ने सोनिया गांधी को भेजा पत्र

महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों का कहना है कि गठबंधन सरकार की तो छोड़िये यदि हमारे मंत्री ही हमारी नहीं सुनेंगे तो आगामी चुनावों में पार्टी कैसे अच्छा प्रदर्शन कर पाएगी। इकॉनामिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इन विधायकों ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर तुरंत दखल देने की मांग की है, ताकि चीजें बिगड़ने से पहले संभल जाए। विधायकों ने कहा कि कांग्रेस के मंत्री हमारी चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और वे हमसे तालमेल नहीं बना रहे हैं। 

  • विधानसभा में कांग्रेस के 44 विधायक हैं, इनमें से 25 विधायकों ने नाराजगी जताई है
  • कांग्रेस के लिए यह खतरे का संकेत माना जा रहा है, नाराज विधायकों ने सोनिया गांधी को लेटर लिखा है
  • इन 14 के अलावा 30 विधायक हैं, उनमें से 25 विधायकों ने नाराजगी जताई है

मुंबई/नयी दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

महाराष्‍ट्र  कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है। राज्‍य के विधायकों की नाराजगी और उनके कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी  से मिलने का समय मांगे जाने के बाद अब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य विश्वबंधु राय ने भी सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। उन्‍होंने राज्‍य में कांग्रेस की स्थिति को लेकर संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्‍होंने कहा कि जैसा नुकसान पार्टी को पंजाब में हुआ, वैसा ही महाराष्‍ट्र में होने वाला है। महाराष्‍ट्र प्रभारी पार्टी के अंदरूनी असंतोष से अनजान रहते हैं। एनसीपी के साथ-साथ हमारे मंत्रियों से भी कई विधायक नाराज चल रहे हैं।

कॉन्ग्रेस के 25 विधायकों ने महाराष्ट्र सरकार में अपनी ही पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ शिकायत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मिलने का समय माँगा है। इन कॉन्ग्रेस विधायकों का कहना है कि पार्टी के मंत्री भी उनकी बात नहीं सुनते। उनकी चिंताओं का जवाब नहीं देते हैं। विधायकों ने सोनिया गाँधी को भेजे पत्र में उनसे हस्तक्षेप करने और चीजों को सही करने का आग्रह किया है।

कुछ विधायकों ने ET से कहा है कि महाविकास अघाड़ी सरकार के मंत्री, विशेष रूप से कॉन्ग्रेस के मंत्री, उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। उनमें से एक ने कहा, “अगर मंत्री विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में काम को लागू करने के अनुरोधों की अनदेखी करते हैं, तो पार्टी चुनावों में अच्छा प्रदर्शन कैसे करेगी?”

पार्टी में कोऑर्डिनेशन की कमी का संकेत देते हुए विधायकों ने कहा कि उन्हें पिछले सप्ताह ही पता चला कि कॉन्ग्रेस के प्रत्येक मंत्री को पार्टी विधायकों से जुड़े मसलों का तरीके से समाधान करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत हर मंत्री के जिम्मे तीन पार्टी विधायक आते हैं। एक कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा, “हमें इसके बारे में तब पता चला जब एचके पाटिल ने हाल ही में एक बैठक की थी। इसमें बताया गया कि कॉन्ग्रेस मंत्रियों को तीन-तीन विधायक आवंटित किए गए हैं। राज्य मे एमवीए की सरकार बनने के कुछ महीने बाद ही ऐसा किया गया था। लेकिन हमें इसके बारे में सरकार बनने के ढाई साल बाद पता चल रहा है। अब भी कोई नहीं जानता कि कौन सा मंत्री हमसे जुड़ा हुआ है।”

इसके अलावा कॉन्ग्रेस के विधायकों का यह भी कहना है कि इस तरह की परिस्थिति के कारण राज्य में पार्टी एनसीपी से भी पिछड़ रही है। विधायकों ने चिट्ठी में लिखा है कि एनसीपी के नेता और उद्धव सरकार में डिप्टी सीएम अजित पवार लगातार अपनी पार्टी के विधायकों से मिलते हैं, उनकी बात सुनते हैं और योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था भी कराते हैं। उन्होंने ये भी लिखा है कि एनसीपी लगातार कॉन्ग्रेस पर निशाना साधती है। अगर अभी कदम नहीं उठाया गया, तो कॉन्ग्रेस बाकी राज्यों की तरह महाराष्ट्र में हाशिए पर चली जाएगी। विधायकों ने कहा कि पंजाब में पार्टी की हार के बाद तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर पार्टी का महाराष्ट्र में ऐसा ही रवैया रहता है तो पंजाब जैसा परिणाम आ सकता है। बता दें कि हालिया विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में करारी हार मिली है।

“भाजपा को वोट दिया तो बंगाल में रहना मुश्किल कर देंगे”, TMC विधायक नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती

भाजपा समर्थकों को धमकी देते हुए उनके भाषण का वीडियो भी वायरल हुआ है। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर उनका ये बयान शेयर करते हुए निशाना साधा है। नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती इस वीडियो में कहते दिख रहे हैं, “कट्टर भाजपा समर्थक, जिन्हें प्रभावित नहीं किया जा सकता – उन्हें धमकाया जाना चाहिए। उन्हें बता दीजिए कि अगर उन्होंने अपना वोट डाला, तो हम यही समझेंगे कि उन्होंने भाजपा को ही वोट दिया है।” गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में बीजेपी के कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या का मामला सामने आया था। मृतक कार्यकर्ता का नाम कलाचंद कर्मकारथा और उनकी उम्र 55 साल थी। वह बीजेपी के बूथ कमेटी के सचिव भी थे। पश्चिम बंगाल में शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को एक बार फिर से हिंसक वारदात की खबर सामने आई है। इसमें बीजेपी के 5 से 7 कार्यकर्ता घायल बताए जा रहे हैं। 

नई दिल्ली. 

पश्चिम बंगाल के आसनसोल लोकसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह बीजेपी के समर्थकों को खुलेआम धमकी दे रहे हैं। धमकी देने वाले विधायक का नाम नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती है। नरेंद्र नाथ पांडवेश्वसर से तृणमूल के विधायक हैं. इस वायरल वीडियो में नरेंद्र नाथ बीजेपी समर्थकों से कहते हैं कि वे चुनाव के दिन बाहर न आएं, न ही वोट डालें। अगर ऐसा किया तो इसका खतरनाक परिणाम भुगतने होंगे. इस वायरल वीडियो के बाद तृणमूल और बीजेपी में ठन गई है। बाबुल सुप्रीयो के आसनसोल लोकसभा से इस्तीफा देने के बाद यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।

उन्होंने आगे धमकाया, “जब चुनाव ख़त्म हो जाएगा, उसके बाद भाजपा समर्थक अपने रिस्क पर राज्य में रहेंगे। हाँ, अगर उन्होंने वोट ही नहीं डाला तो हम समझेंगे कि उन्होंने हमारा समर्थन किया है। तभी वो पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्वक रह पाएँगे। तब आप लोग अपने कारोबार और नौकरियाँ यहाँ रह के कर सकते हैं। स्पष्ट है?” शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि कैसे नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती का विधानसभा क्षेत्र आसनसोल लोकसभा में ही आता है, जहाँ दो हफ़्तों में चुनाव होने हैं।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती पहले पंडाबेश्वर के TMC ब्लॉक अध्यक्ष हुआ करते थे, ठीक वैसे ही जैसे बीरभूम हिंसा के आरोप में वहाँ के ब्लॉक अध्यक्ष अनुरूल हक़ को गिरफ्तार किया गया है। नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती बर्दवान जिला परिषद के सदस्य भी रहे हैं। 2016 में CISF ने उन्हें पिस्तौल रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। कोलकाता के नेताजी सुभाष अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वो गिरफ्तार हुए थे। आर्म्स एक्ट में उन पर कार्रवाई हुई थी। भाजपा ने चुनाव आयोग से उनके भाषण को लेकर संज्ञान लेने का आग्रह किया है।

बंगाल विधानसभा में मारपीट, BJP-TMC विधायक भिड़े,

बीजेपी के विधायकों ने इल्जाम लगाया है कि वे बीरभूम हिंसा के मामले में विधानसभा में चर्चा कराना चाहते थें, जिसके बाद टीएमसी के विधायकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और साथ-साथ मारपीट और धक्कामुक्की भी की। हाथापाई के मामले में स्पीकर ने कार्रवाई करते हुए भाजपा के पांच विधायकों को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया। जिन नेताओं को सस्पेंड किया गया है, उनमें शुभेंदु अधिकारी, मनोज तिग्गा, नराहरी महतो, शंकर घोष, दीपक बरमन का नाम शामिल है।

डेमोक्रैटिक फ्रंट, कोलकाता :

  • पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीरभूम नरसंहार को लेकर हंगामा
  • घायल विधायक असित मजूमदार अस्पताल ले जाए गए
  • टीएमसी और बीजेपी के विधायकों के बीच कहासुनी
  • झगड़ा हाथापाई तक पहुंचा, जमकर मारपीट
  • विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष नेता सुवेंदु समेत पांच विधायकों को किया सस्पेंड

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद जगह-जगह हो रही हिंसा को लेकर ममता बनर्जी सरकार निशाने पर है। अब भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस का झगड़ा विधानसभा तक पहुंच गया है। सोमवार को बंगाल विधानसभा के अंदर बीजेपी और टीएमसी विधायकों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस मारपीट में बीजेपी विधायक असित मजूमदार घायल हो गए और मनोज तिग्गा के कपड़े फाड़े गए।असित मजूमदार को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इधर इस घटना के लेकर बीजेपी, टीएमसी की ममता सरकार पर हमलावर हो गई है। उधर विधानसभा स्पीकर ने सुवेंदु अधिकारी समेत पांच विधायकों को सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंड होने वाले विधायकों में शुभेंदु अधिकारी, मनोज तिग्गा, नराहरी महतो, शंकर घोष, दीपक बरमन का नाम शामिल है. इनको अगले आदेश तक के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज सुबह से ही विपक्ष ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान की मांग शुरू कर दी। इसी को लेकर टीएमसी के विधायक भड़क उठे और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते ये बहस मारपीट में बदल गई। भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि वे बीरभूम में हुई कथित हत्याओं पर चर्चा चाहते थे, जिस पर हंगामे के बाद टीएमसी विधायकों ने धक्कामुक्की-मारपीट की। बाद में स्पीकर ने कार्रवाई करते हुए पांच विधायकों को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया। जिन नेताओं को सस्पेंड किया गया है, उनमें शुभेंदु अधिकारी, मनोज तिग्गा, नराहरी महतो, शंकर घोष, दीपक बरमन का नाम शामिल है। इसके बाद विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में लगभग 25 भाजपा विधायकों ने विधानसभा से वॉकआउट किया और दावा किया कि सदन के अंदर तृणमूल कांग्रेस के विधायकों द्वारा उनकी पार्टी के कई विधायकों के साथ मारपीट की गई।

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मारपीट की घटना और स्पीकर द्वारा सस्पेंड किए जाने के फैसले पर टीएमसी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “सदन का आखिरी दिन होने के चलते हमने राज्य के कानून व्यवस्था पर चर्चा की मांग की। ऐसा न होने के बाद संवैधानिक तरीके से विरोध किया जिसके बाद सिविल ड्रेस पहने पुलिस कर्मी और TMC के विधायकों ने हमारे (भाजपा के) विधायकों को मारा।” उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस, उनके गुंडे और पुलिस के खिलाफ हमारा मार्च है। इसको लेकर हम स्पीकर के पास भी जाएंगे। बंगाल में जो हालत है उसको लेकर केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।”

अधिकारी ने कहा, ‘‘विधायक, सदन के भीतर भी सुरक्षित नहीं है…तृणमूल के विधायकों ने सचेतक मनोज तिग्गा सहित हमारे कम से कम 8-10 विधायकों के साथ मारपीट की, क्योंकि हम कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान की मांग कर रहे थे।’’

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के नेता एवं राज्य के मंत्री फिरहाद हकीम ने पत्रकारों से कहा कि भाजपा, विधानसभा में अराजकता फैलाने के लिए नाटक कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘ सदन में हमारे कुछ विधायक घायल हो गए हैं। हम भाजपा के इस कृत्य की निंदा करते हैं।’’

कॉंग्रेस ने पश्चिम बंगाल में की अनुच्छेद 355 की मांग

लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने पत्रकारों से कहा कि इन परिस्थितियों में पार्टी पश्चिम बंगाल में अनुच्छेद 355 लागू करने के पक्ष में है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और ‘पुलिस मंत्री’ ममता बनर्जी ‘‘स्थिति को काबू में करने में बुरी तरह नाकाम’’ रही हैं। संविधान का अनुच्छेद 355 आपात स्थिति से संबंधित है, जिसके तहत केंद्र बाह्य आक्रमण या आंतरिक अशांति से किसी राज्य की रक्षा करने के लिये हस्तक्षेप कर सकता है।

कोल्कोत्ता(ब्यूरो), डेमोरेटिक फ्रंट :

पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति चरमरा जाने का आरोप लगाते हुए रविवार को राज्य में अनुच्छेद 355 (Article 355) लागू करने की मांग की. चौधरी ने फरवरी में छात्र नेता अनीस खान की रहस्यमय मौत की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए हावड़ा में कदमताला से एस्प्लेनेड इलाके तक एक ‘पदयात्रा’ का नेतृत्व कर रहे थे.

संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशान्ति से प्रत्येक राज्य की संरक्षा करे और प्रत्येक राज्य की सरकार का इस संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाया जाना सुनिश्चित करे।

चौधरी फरवरी में छात्र नेता अनीस खान की रहस्यमय मौत की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए हावड़ा में कदमताला से एस्प्लेनेड इलाके तक एक ‘पदयात्रा’ का नेतृत्व कर रहे थे।

बहरामपुर से सांसद चौधरी ने दावा किया, ‘‘पश्चिम बंगाल में एक के बाद एक घटना हो रही है। छात्र नेता अनीस खान को उसके घर की तीसरी मंजिल से धक्का दिया गया और जांच में असली दोषियों को बचाया जा रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘फिर बीरभूम जिले के रामपुरहाट में बर्बर घटना हुई, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत आठ लोगों को जलाकर मार डाला गया। झालदा नगरपालिका से हमारे पार्षद तपन कंडू को नजदीक से गोली मारी गयी लेकिन कोई उचित जांच नहीं की गयी है। ये सभी घटनाएं राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति ध्वस्त होने और सत्तारूढ़ टीएमसी की मिलीभगत का संकेत देती हैं।’’

लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने पत्रकारों से कहा कि इन परिस्थितियों में पार्टी पश्चिम बंगाल में अनुच्छेद 355 लागू करने के पक्ष में है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और ‘पुलिस मंत्री’ ममता बनर्जी ‘‘स्थिति को काबू में करने में बुरी तरह नाकाम’’ रही हैं।

संविधान का अनुच्छेद 355 आपात स्थिति से संबंधित है, जिसके तहत केंद्र बाह्य आक्रमण या आंतरिक अशांति से किसी राज्य की रक्षा करने के लिये हस्तक्षेप कर सकता है।

चौधरी ने पश्चिम बंगाल में अनुच्छेद 355 लागू करने के मुद्दे के संबंध में ‘‘केंद्रीय नेतृत्व की चुप्पी’’ के लिए भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा।

एक अन्य सवाल के जवाब में सांसद ने कहा कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बाद ईंधन की कीमत में कई बार वृद्धि के मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा।

कांग्रेस नेता ने बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर उनसे पश्चिम बंगाल में अनुच्छेद 355 लागू करने का अनुरोध किया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार काम करे।

CBI जांच के लिए ‘आम सहमति’ को नकारने वाला मेघालया 9वाँ राज्य है

जिन राज्य सरकारों ने सीबीआई को जनरल कंसेंट यानी आम सहमती दे रखी है, उन राज्यों में सीबीआई किसी भी मामले में बगैर राज्य सरकार की अनुमति के छापेमारी और गिरफ्तारी कर सकती है। वहीं, जिन राज्यों ने जनरल कंसेंट वापस ले लिया है उनमें सीबीई को कार्रवाई के लिए पहले राज्य सरकार से इजाजत लेनी होती है।

नई दिल्ली: 

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि पंजाब, महाराष्ट्र, और पश्चिम बंगाल सहित 9 राज्यों ने अपने यहां किसी मामले की सीबीआई जांच के लिए आम सहमति वापस ले ली है। उन्होंने यह भी बताया कि 2019 से 2022 फरवरी तक राज्यों द्वारा 101 मामलों में सीबीआई जांच की अनुमति दी गई है।  हाल ही में मेघालय ने राज्य में किसी मामले की जांच के लिए सीबीआई को दी जाने वाली आम सहमति वापस ले ली थी।

इससे पहले मिजोरम और गैर-राजग शासित सात राज्यों-महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और केरल ने सीबीआई जांच के लिए आम सहमति वापस ले ली थी।

मेघालय में सत्तारूढ़ गठबंधन में भाजपा साझेदार है जहां नेशनल पीपुल्स पार्टी के नेता कोनराड संगमा मुख्यमंत्री हैं।

एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों ने समिति को बताया कि इन आठ राज्यों में अनेक मामलों में जांच के लिए 150 अनुरोध लंबित हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इनमें बैंक धोखाधड़ी, जालसाजी और धन के गबन से संबंधित मामले शामिल हैं।

सीबीआई के निदेशक सुबोध जायसवाल और एजेंसी के अन्य शीर्ष अधिकारियों ने वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील मोदी की अध्यक्षता वाली कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय पर संसदीय स्थायी समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा।

समिति के सूत्रों ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा कि जब कुछ सदस्यों ने सीबीआई से आम सहमति वापस लेने के बारे में पूछा तो एजेंसी के अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि अब तक नौ राज्यों ने आम सहमति वापस ली है जिनमें सबसे ताजा मामला मेघालय का है।

 BJP पर हमलावर ममता बनर्जी,’…कोई छींक दे तो कोर्ट चले जाते हैं’

बेनर्जी ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि उन्हें जिले का अपना दौरा एक दिन के लिए स्थगित करना पड़ा क्योंकि ”अन्य राजनीतिक दल पहले से ही वहां जुटे हुए हैं।’ विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता घटनास्थल पर जाते समय ‘लंगचा’ (पड़ोसी बर्दवान जिले के शक्तिगढ़ क्षेत्र में बनने वाली मिठाई) का स्वाद लेने के लिए रुक गए।”

कॉलकत्ता/नयी दिल्ली(ब्यूरो) :

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में टीएमसी नेता की हत्या के बाद हिंसा फैल गई. यहां गुस्साई भीड़ ने करीब एक दर्जन घरों को आग के हवाले कर दिया। इस हिंसा में 8 लोगों की जलकर मौत हो गई। मरने वालों में 3 महिलाएं और 2 बच्चे भी शामिल हैं. बंगाल में हुई इस हिंसा पर राजनीति भी छिड़ गई है। बीजेपी ने ममता सरकार के खिलाफ मोरचा खोल दिया है। बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल आज बीरभूम जा रहा है. इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सामने आई हैं और उन्होंने कहा है कि वो खुद कल बीरभूम जाएंगी। उन्होंने कहा कि जिन्हें बीरभूम जाना है जाएं, किसी को रोका नहीं जाएगा क्योंकि ये बंगाल है यूपी नहीं। हमें हाथरस जाने से रोका गया, बंगाल में किसी को छींक भी आ जाए तो बीजेपी कोर्ट चली जाती है।

ममता खुद कल रामपुरहाट का दौरा करेंगी। इससे पहले उन्होंने कहा कि उन्हें हमारे राज्य के लोगों की चिंता है। बनर्जी ने कहा, “सरकार हमारी है, हमें अपने राज्य के लोगों की चिंता है। हम कभी नहीं चाहेंगे कि किसी को तकलीफ हो। बीरभूम, रामपुरहाट की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने तुरंत ओसी, एसडीपीओ को बर्खास्त कर दिया है। मैं कल रामपुरहाट जाऊंगी।” 

राज्यपाल पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ”यहां एक लाट साहब बैठे हैं और हर बार बयान दे रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में हालात खराब हैं।” पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने बुधवार को बीरभूम हिंसा पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फटकार लगाई और कहा कि यह टकराव के असंवैधानिक रुख पर फिर से विचार करने का समय है ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों को बहाल किया जा सके और लोगों को दमनकारी ‘डर’ और पीड़ा से राहत मिल सके। 

धनखड़ की टिप्पणी बनर्जी के पत्र के जवाब में आई जिसमें उन्होंने राज्यपाल से “अनुचित बयान देने से परहेज करने और प्रशासन को बीरभूम हिंसा की निष्पक्ष जांच करने की अनुमति देने का आग्रह” किया था। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि बनर्जी डायवर्सन रणनीति अपना रही हैं।

बीरभूम घटना पर HC ने बंगाल सरकार से माँगी रिपोर्ट, 24 घंटे का समय

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में टीएमसी के पंचायत नेता भादू शेख पर 4 बदमाशों ने बम से हमला कर दिया था। इस घटना में उनकी बाद में मौत हो गई थी। इसके बाद TMC नेताओं के एक गुट ने इलाके में हिंसा को अंजाम देना शुरू कर दिया। उन्होंने शक के आधार पर कई घरों को आग लगा दी गई, जिससे एक ही घर में जिंदा जलकर 8 लोगों की मौत हो गई।  भारी तनाव को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्‍या में अतिरिक्‍त पुलिस बलों को तैनात किया गया है।

डेमोक्रेटिक फ्रंट,नयी दिल्ली/ कोलकत्ता :

पश्चिम बंगाल में 8 लोगों को जिंदा जलाए जाने के घृणित अपराध मामले में बंगाल हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए बुधवार (23 मार्च 2022) को सुनवाई की। राज्य की ओर से पेश वकील ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि जाँच के लिए कदम उठा लिए गए हैं। फॉरेंसिंक टीम भी पड़ताल कर रही है। रिपोर्ट 1-2 दिन में आ जाएगी।

राज्य वकील ने कोर्ट से अपील की कि इस केस को पहले ही दिन किसी और एजेंसी को न दिया जाए। उन्होंने अपनी तरह से कहा घटना का सारा सच सामने जल्द से जल्द आना चाहिए। चाहे जो करना पड़े। इस सुनवाई में सीबीआई ने भी कोर्ट को कहा कि वो ये केस लेने के लिए तैयार हैं। कोर्ट ने सुनवाई में चश्मदीद का नाम किसी कीमत पर न खोलने की बात की।

बार एंड बेंच के ट्वीट के अनुसार, सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस मामले में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज ही यही है कि इसमें पुलिस की भूमिका है। ऐसे में पुलिस को स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए निर्देश जारी करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने मामले में हर पक्ष को सुनकर कहा कि निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए और याचिकाओं को पंजीकृत किया गया है। घटना के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाया गया है और कानून के हिसाब से उन्हें सजा दी जाएगी।

सुनवाई में बताया गया कि घटना के दो चश्मदीद थे। इनमें एक की मृत्यु हो गई और दूसरा नाबालिग है जिसे बचाने की सुरक्षित रखने की जरूरत है। याचिकाकर्ता की माँग है की सीएफएसएल दिल्ली की फॉरेंसिंक टीम को सबूत जुटाने के लिए बुलाया जाना चाहिए क्योंकि गठित की गई एसआईटी पर गंभीर संदेह है।

याचिका में उल्लेख है कि इस एसआईटी का एक सदस्य ज्ञानवंत सिंह भी है जिस पर साल 2007 में रिजवानुर रहमान नामक व्यक्ति के हत्या के आरोप हैं। वहीं अगला संजय सिंह है जिसे ईसीआई ने 2021 में चुनाव में हस्तक्षेप करने पर हटा दिया था। याचिका में दावा है कि जो भी एसआईटी गठित होती है उसमें इस ज्ञानवंत सिंह को जरूर शामिल किया जाता है।

दलीलों में कोर्ट के सामने ये भी कहा गया कि चश्मदीदों को पहले ही धमकी मिलने लगी है कि उन्होंने अपना गाँव तक छोड़ना शुरू कर दिया है। कोर्ट से स्थानीयों के लिए सुरक्षा की माँग की। कोर्ट ने इस पर आदेश दिए कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए इंतजाम हों, उनकी विश्वास बहाली के लिए कदम उठाए जाएँ। कोर्ट ने माना कि डीजीपी जैसे अधिकारी बिन जाँच के बयान दे रहे हैं कि मामले में कोई राजनैतिक कोण नहीं है, जो कि बिलकुल गलत है।

पूरे मामले में पक्षों की दलील सुन कोर्ट ने राज्य सरकार को जाँच का मौका दिया है। कोर्ट ने कल 2 बजे तक इस संबंध में रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि डिस्ट्रिक्ट जज की देखरेख में घटनास्थल पर पर्याप्त मेमोरी वाले कैमरे लगाए जाएँ और अगले आदेश तक इलाके की रिकॉर्डिंग की जाए। इसके अलावा दिल्ली से सीएफएसएल की टीम स्पॉट पर जाए और जरूरी सामग्रजी जुटा कर बिना देरी के जाँच करे।

बता दें कि अब इस मामले की सुनवाई कल यानी कि 24 मार्च को 2 बजे होगी। कोर्ट ने इन 24 घंटों (24 मार्च को 2 बजे तक के बीच) में राज्य को रिपोर्ट तैयार करने का समय दिया है और बाकी आदेशों का पालन करने को कहा है। कोर्ट ने ये भी सुनिश्चित करने को कहा है कि चश्मदीदों पर किसी तरह धमकाया न जाए और न ही कोई उन्हें प्रभावित करे। कोर्ट ने कहा कि सच जरूर सामने आना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के बीरभूम के रामपुरहाट में टीएमसी नेता भादू शेख की बम हमले मौत के बाद हिंसा मचाई गई। उपद्रवियों ने टीएमसी नेता की मौत का बदला लेने के लिए इलाके के कई घरों को आग में झोंका जिसमें दावा है कि कुल 12 लोग जलकर मर गए। वहीं पुलिस मृतकों की संख्या 8 बताने में लगी है। सामने आए विजुअल्स बेहद परेशान करने वाले हैं जिसमें पुलिस घर के अंदर से मृतकों के कंकाल निकाल रही है। लोग इतना डरे हैं कि उन्होंने अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाना शुरू कर दिया है। स्थानीयों का कहना है कि वो भय से अपने घरों को छोड़ रहे हैं। पुलिस ने उन्हें किसी तरह की सुरक्षा नहीं दी। अगर दी होती तो ये सब नहीं होता।