पांचवी स्कंदमाता

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥

आज है शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन। आज स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता का अर्थ है स्कंद अर्थात भगवान कार्तिकेय की माता। इन्हें दुर्गा सप्तसती शास्त्र में ‘चेतान्सी’ कहकर संबोधित किया गया है। देवी स्कंदमाता विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति हैं। इन्हें वात्सल्य की देवी  भी कहा जाता है।  ऐसी मान्यता है कि मां स्कंदमाता संतान का आशीर्वाद देने वाली हैं। 

मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्‍कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

स्कंदमाता का स्वरूप

स्कंदमाता का स्वरूप बेहद निराला है. उनकी चार भुजाएं हैं, स्कंदमाता ने अपने दो हाथो में कमल का फूल पकड़ रखा है. उनकी एक भुजा ऊपर की ओर उठी हुई है जिससे वह भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. एक हाथ से उन्होंने अपनी गोद में बैठे पुत्र स्कंद को पकड़ रखा है. माता कमल के आसन पर विराजमान हैं. जिसके कारण स्कंदमाता को पद्मासना भी कहा जाता है. इनका आसन सिंह है.

हर कठिनाई को दूर करती हैं स्कंदमाता

शास्त्रों में मां स्कंदमाता की आराधना का काफी महत्व बताया जाता है. इनकी उपासना से भक्तों की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है. सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक तेज और कांतिमय हो जाता है. अगर मन को एकाग्र करके स्कंदमाता की पूजा की जाए तो भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं होती है.

स्नेह की देवी स्कंदमाता

कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति कहा जाता है. स्कंदमाता को अपने पुत्र स्कंद से बेहद प्रेम है. जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ा तब स्कंदमाता ने सिंह पर सवार होकर दुष्टों का नाश किया. स्कंदमाता को अपना नाम अपने पुत्र का साथ जोड़ना बेहद पसंद है. इसके कारण इन्हें स्नेह और ममता की देवी भी कहा जाता है.

स्कंदमाता का भोग

नवरात्रि की पंचमी तिथि को मां भगवती को केले का भोग लगाना चाहिए. यह प्रसाद ब्राह्मण या किसी भूखे को देना चाहिए. ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है.

स्कंदमाता का मंत्र

मां स्कंदमाता का वाहन शेर है. स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए.

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्वनीम्।।
धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्।
अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्॥
प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥

स्तोत्र

नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।
समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥
शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।
ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रीन्तिभास्कराम्॥
महेन्द्रकश्यपार्चिता सनंतकुमाररसस्तुताम्।
सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलादभुताम्॥
अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।
मुमुक्षुभिर्विचिन्तता विशेषतत्वमुचिताम्॥
नानालंकार भूषितां मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।
सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेन्दमारभुषताम्॥
सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्रकौरिघातिनीम्।
शुभां पुष्पमालिनी सुकर्णकल्पशाखिनीम्॥
तमोन्धकारयामिनी शिवस्वभाव कामिनीम्।
सहस्त्र्सूर्यराजिका धनज्ज्योगकारिकाम्॥
सुशुध्द काल कन्दला सुभडवृन्दमजुल्लाम्।
प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरं सतीम्॥
स्वकर्मकारिणी गति हरिप्रयाच पार्वतीम्।
अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥
पुनःपुनर्जगद्वितां नमाम्यहं सुरार्चिताम्।
जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवीपाहिमाम्॥

कवच

ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मघरापरा।
हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥
श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।
सर्वांग में सदा पातु स्कन्धमाता पुत्रप्रदा॥
वाणंवपणमृते हुं फ्ट बीज समन्विता।
उत्तरस्या तथाग्नेव वारुणे नैॠतेअवतु॥
इन्द्राणां भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी।
सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥

संतान प्राप्ति हेतु लौंग व कपूर में अनार के दाने मिलाकर मां स्कन्द माता को आहुति दें।

विवाह बाधा को दूर करने के लिए 11 कपूर के टुकड़े और 21 लौंग के जोड़े व पांच हल्दी की गांठें चावल में मिलाकर मां को आहुति दें।

केले का भोग लगाए 

अलसी का भोग अर्पण करने से घर सुख शांति व समृद्धि बनी रहती है। 

नीला रंग पहनें व मां को सुनहरी चुन्नी व चूड़ियां अर्पण करें।

मां की आराधना पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

चौथी कुष्माण्डा सुखधाम

ब्रह्मांड को उत्पन्न करनेवाली मां कुष्मांडा

कु का अर्थ है ‘कुछ’, ऊष्मा का अर्थ है ‘ताप और अंडा का अर्थ है ब्रह्मांड या सृष्टि। शास्‍त्रों के अनुसार संसार में फैले अंधकार को देवी कूष्‍मांडा ने अपनी दिव्‍य मुस्‍कान से दूर कर दिया था। मां कूष्‍मांडा सिंह की सवारी करती हैं जो धर्म का प्रतीक है। देवी के हाथ में एक अमृत कलश है जिससे वह अपने भक्‍तों को दीर्घायु और उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य का वरदान प्रदान करती हैं।

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे।

नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है। इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करना चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है। 

मां कूष्‍मांडा की पूजन विधि

मां कूष्‍मांडा के पूजन में हरे रंग के वस्‍त्र धारण करें। पूजन के दौरान देवी कूष्‍मांडा को हरी इलायची, सौंफ और कुम्‍हड़ा अर्पित करें। इसके पश्‍चात् देवी कूष्‍मांडा का स्‍मरण करते हुए ‘ऊं कूष्‍मांडा देव्‍यै नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करें। माता रानी के आगे घी का दीया जलाएं और माता रानी सहित अन्‍य सभी देवी-देवताओं को तिलक लगाएं। मां कूष्‍मांडा की आरती करें और उन्‍हें प्रसाद का भोग लगाएं। देवी कूष्‍मांडा को प्रसाद का भोग लगाने के बाद किसी ब्राह्मण को दान दें और उसके पश्‍चात् स्‍वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।

मां कूष्‍मांडा का प्रसाद

कहते हैं जो भी भक्‍त नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा को उनका प्रिय भोग अर्पित करता है उसे देवी की खास कृपा की प्राप्‍ति होती है। देवी कूष्‍मांडा को प्रसाद में मालपुए का भोग पसंद होता है। मालपुए का भोग लगाने से देवी कूष्‍मांडा आपकी प्रार्थना को शीघ्र पूरा करती हैं।

मां कूष्‍मांडा का ध्‍यान मंत्र :-

सुरासम्‍पूर्णकलशं रूधिराप्‍लुतमेव च।
दधानाहस्‍तपद्याभ्‍यां कूष्‍मांडा शुभदास्‍तु मे।।

मां कूष्‍मांडा के पूजन का महत्‍व

नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्‍मांडा के पूजन से मनुष्‍य के शरीर का अनाहत चक्र जागृत होता है जिससे रोग और शोक का नाश होता है। देवी कूष्‍मांडा के पूजन से बुद्धि और बल का विकास होता है। जो लोग अपनी तार्किक क्षमता या बुद्धि का विकास करना चाहते हैं वे नवरात्र के चौथे दिन कूष्‍मांडा देवी की आराधना करें।

देवी कूष्‍मांडा को प्रसन्‍न करने के लिए कंठस्‍थ कर नवरात्रि के चौथे दिन इस श्‍लोक का जाप करें :-

या देवी सर्वभूतेषू मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्‍स्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नम:।।

अर्थात् : हे मां! आप सर्वत्र विराजमान हैं और कूष्‍मांडा के रूप में प्रसिद्ध अम्‍बे आपको मेरा कोटि-कोटि प्रणाम। हे मां! मुझे मेरे सब पापों से मुक्‍ति दें।

देवी कूष्‍मांडा अपने भक्‍तों को कभी निराश नहीं करती हैं।

तीसरी चंद्रघंटा शुभनाम

नवरात्री का तीसरा दिन माता चंद्रघंटा रूप की पूजा

तृतीय दुर्गा : श्री चंद्रघंटा

नवरात्री तीसरा दिन माता चंद्रघंटा की पूजा विधि

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैयुता।
प्रसादं तनुते मद्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

माँ दुर्गा की तृतीय शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि विग्रह के तीसरे दिन इन का पूजन किया जाता है। माँ का यह स्वरूप शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी लिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय है. चेहरा शांत एवं सौम्य है और मुख पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही होती है। इनके दस हाथ हैं। दसों हाथों में खड्ग, बाण आदि शस्त्र सुशोभित रहते हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने वाली है। इनके घंटे की भयानक चडंध्वनि से दानव, अत्याचारी, दैत्य, राक्षस डरते रहते हैं। नवरात्र की तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्त्व है। इस दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में प्रविष्ट होता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक को अलौकिक दर्शन होते हैं, दिव्य सुगन्ध और विविध दिव्य ध्वनियाँ सुनायी देती हैं। ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं । माँ चन्द्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं । इनकी अराधना सद्य: फलदायी है। इनकी मुद्रा सदैव युद्ध के लिए अभिमुख रहने की होती हैं, अत: भक्तों के कष्ट का निवारण ये शीघ्र कर देती हैं । इनका वाहन सिंह है, अत: इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेत-बाधादि से रक्षा करती है । दुष्टों का दमन और विनाश करने में सदैव तत्पर रहने के बाद भी इनका स्वरूप दर्शक और अराधक के लिए अत्यंत सौम्यता एवं शान्ति से परिपूर्ण रहता है।

इनकी अराधना से प्राप्त होने वाला सदगुण एक यह भी है कि साधक में वीरता-निर्भरता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होता है। उसके मुख, नेत्र तथा सम्पूर्ण काया में कान्ति-गुण की वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य, अलौकिक, माधुर्य का समावेश हो जाता है। माँ चन्द्रघंटा के साधक और उपासक जहाँ भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शान्ति और सुख का अनुभव करते हैं। ऐसे साधक के शरीर से दिव्य प्रकाशयुक्त परमाणुओं का दिव्य अदृश्य विकिरण होता है। यह दिव्य क्रिया साधारण चक्षुओं से दिखलायी नहीं देती, किन्तु साधक और सम्पर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव भलीभांति कर लेते हैं साधक को चाहिए कि अपने मन, वचन, कर्म एवं काया को विहित विधि-विधान के अनुसार पूर्णत: परिशुद्ध एवं पवित्र करके उनकी उपासना-अराधना में तत्पर रहे । उनकी उपासना से हम समस्त सांसारिक कष्टों से विमुक्त होकर सहज ही परमपद के अधिकारी बन सकते हैं । हमें निरन्तर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखते हुए साधना की ओर अग्रसर होने का प्रयत्न करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए परम कल्याणकारी और सदगति देने वाला है। माँ चंद्रघंटा की कृपा से साधक की समस्त बाधायें हट जाती हैं।

माता के सिर पर अर्ध चंद्रमा मंदिर के घंटे के आकार में सुशोभित हो रहा जिसके कारण देवी का नाम चन्द्रघंटा हो गया है। अपने इस रूप से माता देवगण, संतों एवं भक्त जन के मन को संतोष एवं प्रसन्न प्रदान करती हैं। मां चन्द्रघंटा अपने प्रिय वाहन सिंह पर आरूढ़ होकर अपने दस हाथों में खड्ग, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र,धनुष, भरे हुए तरकश लिए मंद मंद मुस्कुरा रही होती हैं। माता का ऐसा अदभुत रूप देखकर ऋषिगण मुग्ध होते हैं और वेद मंत्रों द्वारा देवी चन्द्रघंटा की स्तुति करते हैं। समस्त भक्त जनों को देवी चंद्रघंटा की वंदना करते हुए कहना चाहिए

या देवी सर्वभूतेषु चन्द्रघंटा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

अर्थात देवी ने चन्द्रमा को अपने सिर पर घण्टे के सामान सजा रखा है उस महादेवी, महाशक्ति चन्द्रघंटा को मेरा प्रणाम है, बारम्बार प्रणाम है. इस प्रकार की स्तुति एवं प्रार्थना करने से देवी चन्द्रघंटा की प्रसन्नता प्राप्त होती है।

देवी चंद्रघंटा पूजा विधि

देवी चन्द्रघंटा की भक्ति से आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है। जो व्यक्ति माँ चंद्रघंटा की श्रद्धा एवं भक्ति भाव सहित पूजा करता है उसे मां की कृपा प्राप्त होती है जिससे वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान प्राप्त करता है। मां के भक्त के शरीर से अदृश्य उर्जा का विकिरण होता रहता है जिससे वह जहां भी होते हैं वहां का वातावरण पवित्र और शुद्ध हो जाता है, इनके घंटे की ध्वनि सदैव भक्तों की प्रेत-बाधा आदि से रक्षा करती है तथा उस स्थान से भूत, प्रेत एवं अन्य प्रकार की सभी बाधाएं दूर हो जाती है। जो साधक योग साधना कर रहे हैं उनके लिए यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इस दिन कुण्डलनी जागृत करने हेतु स्वाधिष्ठान चक्र से एक चक्र आगे बढ़कर मणिपूरक चक्र का अभ्यास करते हैं। इस दिन साधक का मन मणिपूर चक्र में प्रविष्ट होता है । इस देवी की पंचोपचार सहित पूजा करने के बाद उनका आशीर्वाद प्राप्त कर योग का अभ्यास करने से साधक को अपने प्रयास में आसानी से सफलता मिलती है।

तीसरे दिन की पूजा का विधान भी लगभग उसी प्रकार है जो दूसरे दिन की पूजा का है। इस दिन भी आप सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवता, तीर्थों, योगिनियों, नवग्रहों, दशदिक्पालों, ग्रम एवं नगर देवता की पूजा अराधना करें फिर माता के परिवार के देवता, गणेश , लक्ष्मी , विजया, कार्तिकेय , देवी सरस्वती, एवं जया नामक योगिनी की पूजा करें फिर देवी चन्द्रघंटा की पूजा अर्चना करें।

चन्द्रघंटा की मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।

चन्द्रघंटा की ध्यान

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

चन्द्रघंटा की स्तोत्र पाठ

आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥

चन्द्रघंटा की कवच

रहस्यं श्रुणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघन्टास्य कवचं सर्वसिध्दिदायकम्॥
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोध्दा बिना होमं।
स्नानं शौचादि नास्ति श्रध्दामात्रेण सिध्दिदाम॥
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥

चंद्रघंटा : चंद्र घंटा अर्थात् जिनके मस्तक पर चंद्र के आकार का तिलक है।

दूसरी ब्रह्मचारीणी मन भावे

         भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया।
        मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं।

         पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।
कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।
          कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा -हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं।
        मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए।

नई दिल्लीः 

पूरे देश में इन दिनों शारदीय नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. 9 दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व पर हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है, जिसमें दूसरे दिन तप की देवी मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है. मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला और बाएं हाथ में कमण्डल होता है. शास्त्रों के अनुसार देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं. ब्रह्मचारिणी का अर्थ, तप का आचरण करने वाली होता है. हजारों वर्षों तक तपस्या करने के चलते इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा. इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. इसलिए माता ब्रह्मचारिणी का स्वरुप एक तपस्विनी का है. देवी दुर्गा के इस द्वितीय रूप को सभी विद्याओं का ज्ञाता माना जाता है. मान्यता है कि माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से निर्बुद्धियों को बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है .

ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा विधि-

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए सबसे पहले घर की शुद्धि करें और फिर खुद भी स्नान करें. इसके बाद जिस स्थान पर देवी मां विराजमान हैं उस जगह की शुद्धिकरण करें. फिर देवी की फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शक्कर, घी और शहद से स्नान कराएं. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में फूल लेकर प्रार्थना करें. घी और कपूर मिलाकर देवी की आरती करें. देवी को प्रसाद अर्पित करें. प्रसाद के बाद आचमन करें और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें. अंत में क्षमा प्रार्थना करें.

इस मंत्र का जाप करें

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां ब्रह्मचारिणी का भोग

नवरात्रि के दूसरे दिन दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, सफेद मिठाई, फल, मिश्री आदि का भोग लगाना चाहिए. इस दिन मां को दूध और दही का भोग लगाने का भी बड़ा महत्व है जिससे उम्र लम्बी होने की मान्यता है. इस भोग से देवी ब्रह्मचारिणी प्रसन्न हो जाएंगी.

शास्त्रों में कहा गया है कि जो कोई भी माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करता है उसे सिद्धि, एकाग्रता, सदाचार, विजय और ज्ञान की शक्ति प्राप्त होती है. शास्त्रों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी को माता पार्वती का अवतार माना जाता है. बता दें नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा होती है.

पहली शैलपुत्री कहलावे

नवरात्रि 2019 शुभ महूरत समय सारिणी :

29 सितंबर रविवार से शुरू हो रहे नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि को मुख्‍य नवरात्रि माना जाता है। हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार यह नवरात्रि शरद ऋतु में अश्विन शुक्‍ल पक्ष से शुरू होती हैं और पूरे नौ दिनों तक चलती हैं। मां दुर्गा इस बार सर्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि योग में हाथी पर सवार होकर रविवार को हमारे घर पधारेंगी। फिर 9 दिन बाद घोड़े पर विदा होंगी। घट स्थापना प्रतिपदा तिथि रविवार को सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिद्धि योग में होगी। विद्वान पंडितों के अनुसार 29 सितंबर, 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर के दिन दो-दो योग रहेंगे। इन योगों में नवरात्र पूजा काफी शुभ रहेगी।

कलश स्थापना ( घट स्थापना ) की विधि एवं शुभ मूहुर्त का समय

आचार्यों ने बताया कि नवरात्रि में कलश स्‍थापना का विशेष महत्‍व है। कलश स्‍थापना को घट स्‍थापना भी कहा जाता है। नवरात्रि की शुरुआत घट स्‍थापना के साथ ही होती है। घट स्‍थापना शक्ति की देवी का आह्वान है। पंडित विवेक गैरोला ने बताया कि सुबह स्नान कर साफ-सुथरे कपड़े पहनें। पूजा का संकल्प लें। मिट्टी की वेदी पर जौ को बोएं, कलश की स्थापना करें, गंगा जल रखें। इस पर कुल देवी की प्रतिमा या फिर लाल कपड़े में लिपटे नारियल को रखें और पूजन करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि कलश की जगह पर नौ दिन तक अखंड दीप जलता रहे।

शुभ मूहुर्त का समय

शुभ समय – सुबह 6.01 से 7.24  बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त- 11.33 से 12.20 तक 

पूरे 9 दिन होगी आराधना

नवरात्र 9 दिनों का होता है और दसवें दिन देवी विसर्जन के साथ नवरात्र का समापन होता है। लेकिन, ऐसा हो पाना दुर्लभ संयोग माना गया है, क्योंकि कई बार तिथियों का क्षय हो जाने से नवरात्र के दिन कम हो जाते हैं। लेकिन, इस बार पूरे 9 दिनों की पूजा होगी और 10वें दिन देवी की विदाई होगी। यानी 29 सितंबर से आरंभ होकर 7 अक्तूबर को नवमी की पूजा होगी और 8 को देवी विसर्जन होगा।

नवरात्र में इन नौ देवियों का पूजन

: पहले दिन- शैलपुत्री
: दूसरे दिन- ब्रह्मचारिणी
: तीसरे दिन- चंद्रघंटा
: चौथे दिन- कुष्मांडा
: पांचवें दिन- स्कंद माता
: छठे दिन- कात्यानी
: सातवें दिन- कालरात्रि
: आठवें दिन- महागौरी
: नवें दिन- सिद्धिदात्री

किस दिन कौनसा योग

: 29 सितंबर- सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिद्धि योग
: 1 अक्टूबर- रवि योग
: 2 अक्टूबर- रवि योग व सर्वार्थ सिद्धि योग
: 3 अक्टूबर- सर्वार्थसिद्धि योग
: 4 अक्टूबर- रवि योग
: 6 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्धि योग
: 7 अक्टूबर- सर्वार्थसिद्धि योग व रवि योग
ये सभी योग व्यापार और खरीदारी के लिए शुभ हैं।

कलश स्थापना के दिन शुक्र का उदय होना बेहद शुभ फलदायी 

इस बार कलश स्थापना के दिन ही सुख समृद्धि के कारक ग्रह शुक्र का उदय होना बेहद शुभ फलदायी है। शुक्रवार का संबंध देवी लक्ष्मी से है। नवरात्र के दिनों में देवी के सभी रूपों की पूजा होती है। शुक्र का उदित होना भक्तों के लिए सुख-समृद्धि दायक है। धन की इच्छा रखने वाले भक्त नवरात्र के दिनों में माता की उपासना करके अपनी आर्थिक परेशानी दूर कर सकते हैं। इस दिन बुध का शुक्र के घर तुला में आना भी शुभ फलदायी है।

ज्योतिषाचार्यों ने कहा कि शारदीय नवरात्र इस बार कई संयोग लेकर आएं हैं। जिससे भक्तों को शुभ फल की प्राप्ति होगी। वहीं इस बार पूरे नौ दिन मां अंबे की पूजा-अर्चना होगी, जबकि दसवें दिन मां को विधि-विधान के साथ विदाई दी जाएगी। ऐसा दुर्लभ संयोग लंबे समय बाद बना है।

चार सर्वार्थ सिद्धि योग 

इस साल की नवरात्र इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार 4 सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। ऐसे में साधकों को सिद्धि प्राप्त करने के पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं। 29 सितंबर, 2, 6 और 7 अक्तूबर को भी यह शुभ योग बन रहा है।

संयोग में होगा कलश स्थापना 

रविवार को नवरात्र का प्रारंभ इस बार कलश स्थापना के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और द्विपुष्कर नामक शुभ योग में होगा। ये सभी घटनाएं नवरात्र का शुभारंभ कर रहे हैं। इसी दिन भक्त 10 दिनों तक माता की श्रद्धा भाव से पूजा का संकल्प लेकर घट स्थापना करेंगे।

दो सोमवार होना भी फलदायी

इस बार नवरात्र का आरंभ रविवार को हो रहा है और इसका समापन मंगलवार को होगा। ऐसे में नवरात्र में दो सोमवार और दो रविवार आएंगे। पहले सोमवार को देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी और अंतिम सोमवार को महानवमी के दिन सिद्धिदात्री की पूजा होगी। नवरात्र में दो सोमवार का होना शुभ फलदायी माना गया है।

पहले दिन ऐसे करें मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है।
चौकी पर मां शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा को स्थापित करे और इसे बाद कलश कि स्थापना करें। कलश के ऊपर नारियल और पान के पत्ते रख कर स्वास्तिक जरूर बनाएं। इसके बाद कलश के पास अंखड ज्योति जला कर ‘ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:’ मंत्र का जाप करें और फिर सफेद फूल मां को अर्पित करें। इसके बाद मां को सफेद रंग का भोग लगाएं। जैसे खीर या मिठाई आदि। अब माता कि कथा सुने और आरती करें। शाम को मां के समक्ष कपूर जरूर जलाएं।

 मंत्र

1. ऊँ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:
2. वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
3. वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्। वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥
4. या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ मां

शारदीय नवरात्र 2019

नवरात्र यानी 9 विशेष रात्रियां। इस समय शक्ति के 9 रूपों की उपासना का श्रेष्ठ काल माना जाता है। ‘रात्रि’ शब्द सिद्धि का प्रतीक है। विक्रम संवत के पहले दिन अर्थात चै‍त्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से 9 दिन यानी नवमी तक नवरात्र होते हैं। स‍िद्धि और साधना की दृष्टि से से शारदीय नवरात्र को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। इस नवरात्र में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति के संचय के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग-साधना आदि करते हैं। मुख्यत: शक्ति की उपासना आदिकाल से चली आ रही है। वस्तुत: श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के अंतर्गत देवासुर संग्राम का विवरण दुर्गा की उत्पत्ति के रूप में उल्लेखित है। समस्त देवताओं की शक्ति का समुच्चय जो आसुरी शक्तियों से देवत्व को बचाने के लिए एकत्रित हुआ था, उसकी आदिकाल से आराधना दुर्गा-उपासना के रूप में चली आ रही है।

एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में कुल चार नवरात्र होते हैं। इन चार नवरात्र में दो प्रत्यक्ष और दो गुप्त नवरात्र होते हैं। आषाढ़ और माघ के नवरात्र गुप्तनवरात्र की श्रेणी में रखे गए हैं। चैत्र और आश्विन माह के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से नवमी के नवरात्र को विशेष मान्यता है। चैत्र में गौरी स्वरूप और आश्विन में दुर्गा स्वरूप की पूजा का विधान है। 

नवरात्र गुप्त तंत्र साधकों और संन्यासियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। शारदीय नवरात्र में इस वर्ष देवी दुर्गा का आगमन हाथी पर और वापसी घोड़े पर होगी। देवी आगमन और गमन दोनों ही संकट की चेतावनी है। 

दुर्गाशप्तशती कहा गया है कि देवी के दोनों ही वाहन प्राकृतिक आपदाओं के प्रतीक हैं। पं. विष्णुपति त्रिपाठी के अनुसार इसका यह तात्पर्य नहीं है कि आगमन और विदाई दोनों ही अमंगलकारी हैं, अपितु इसका अभिप्राय यह है कि हम भविष्य के संकटों के प्रति वर्तमान से ही सचेत हो जाएं और उसका सामना करने के लिए हम प्रत्येक स्तर पर स्वयं को तैयार करें।

आश्विन शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि का पर्व शारदीय नवरात्र के रूप में मनाया जाता है। यह व्रत उपवास , आद्यशक्ति माँ जगदम्बा के पूजा,अर्चना,जप ध्यान का पर्व है।

देवी भागवत में आता है कि विद्या, धन, एवं पुत्र के अभिलाषी को नवरात्र व्रत का अनुष्ठान अवश्य करना चाहिए। जिसका राज्य छीन गया हो , ऐसे नरेश को पुन : गद्दी पर बिठाने की क्षमता भी इस व्रत में है। नवरात्र में प्रतिदिन देवी-पूजन, हवन व कुमारी पूजन करें तथा ब्राह्मण को भोजन करायें तो नवरात्र- व्रत पूरा होता है ऐसी उक्ति है।

नवरात्र के दिनों में भजन कीर्तन गा कर, वाद्य बजा कर और नाचकर बड़े समारोह के साथ उत्सव मनाना चहिए। भूमि पर शयन एवं यथाशक्ति कन्याओं को भोजन कराना चाहिए किन्तु एक वर्ष व उससे कम उम्र की कन्या नहीं लेनी चाहिए। २ से १० वर्ष तक की कन्या को ही लिया जा सकता है।

देवी भागवत में कहा गया है कि दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करने वाली भगवती भद्रकाली का अवतार अष्टमी तिथि को हुआ था। मनुष्य यदि नवरात्र में प्रतिदिन पूजन करने में असमर्थ हो तो अष्टमी के दिन विशेष रूप से पूजन करना चाहिए।

यदि कोई नवरात्र के उपवास न कर सकता हो तो सप्तमी,अष्टमी और नवमी तीन दिन उपवास करके देवी की पूजा करने से वह सम्पूर्ण नवरात्र के उपवास के फल को प्राप्त कर सकता है।

नवरात्र पर जागरण

नवरात्र पर उत्तम जागरण वह हैजिसमें-

1) शास्त्र-अनुसार चर्चा हो ।

2) भक्तिभाव से युक्त माँ का कीर्तन हो।

3) वाद्य , ताल आदि से युक्त सात्विक संगीत हो ।

4) सात्विक नृत्य हो , ऐसा नहीं कि डिस्को या अन्य कोई पाश्चात्य नृत्य किया ।

5) माँ जगदम्बा पर नजर हो , ऐसा नहीं कि किसी को गन्दी नजर से देखा।

6) मनोरंजन भी सात्विक हो।

आश्विन नवरात्र मेला 29 सितंबर से 7 अक्तूबर

श्री माता मनसा देवी व काली माता मंदिर पर लगने वाले नवरात्र मेलो के सभी प्रबंध पूरे-उपायुक्त

पंचकूला, 28 सितंबर-

29 सितंबर से 7 अक्तूबर तक चलने वाले आश्विन नवरात्र मेला के आयोजन के लिए श्री माता मनसा देवी व काली माता मंदिर कालका में सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर लिये गये है। उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा ने बताया कि मेले में व्यवस्था बनाये रखने के लिये पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात करने के साथ साथ दोनों स्थानों पर ड्यूटी मैजिस्ट्रेट भी तैनात किये गये है। 

उपायुक्त ने बताया कि मेले में सफाई व्यवस्था पर विशेष बल देने और पाॅलिथीन का प्रयोग रोकने के लिये अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये गये है। मेले के दौरा पाॅलीथिन का प्रयोग करने, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, बेचे जा रहे पदार्थों के नापतोल के मामले में किसी प्रकार की शिकायत मिलने पर अथवा आदेशों की उल्लंघना पर नियमानुसार कार्रवाही करने के लिये भी कहा गया है। उन्होंने मेले में आने वाले श्रद्धालुओं से भी अनुरोध किया है कि वे सफाई व्यवस्था बनाये रखने में मेला प्रशासन का सहयोग करें।

उपायुक्त ने कहा कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये मंदिर में आने जाने के लिये तीन-तीन रास्ते बनाये गये है ताकि दर्शन के समय अधिक भीड़ न हो और श्रद्धालु सुविधाजनक तरीके से माथा टेक सके। हरियाणा राज्य परिवाहन विभाग और सी.टी.यू. द्वारा यात्रियों के लिए विशेष बसेें चलाई जायेंगी। श्रीमाता मनसा देवी श्राईंन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम.एस. यादव ने बताया कि यात्रियांे कि सुविधा के लिए स्वच्छ पेयजल के साथ-साथ शौचालय की भी व्यवस्था की गई है। नगर निगम द्वारा मोबाईल शौचालयांे के साथ-साथ जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा मेला परिसर में अस्थाई शौचालयों की व्यवस्था की गई है।

  उन्होंने कहा कि मेले में चिकित्सा सुविधा के लिए स्वास्थय विभाग द्वारा मोबाईल डिस्पेंसरी की सुविधा रखी गई है तथा मेला परिसर में प्रतिदिन फोगिंग भी करवाई जाएगी। इसके अतिरिक्त सामान्य अस्पताल सेक्टर 6 तथा सेक्टर 4 एमडीसी की डिस्पेंसरी में 6-6 अतिरिक्त बैड लगाने के लिए भी निर्देश दिये गए हैं। इसके साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सूचना एवंज न संपर्क विभाग की ओर से सूचना केन्द्र भी स्थापित किया गया है। 

PROVISIONAL LIST OF NOMINATIONS FOR THE OFFICE BEARERS

Korel, Chandigarh – 30.8.2019

        (Based on the information supplied by the Panjab University Teaching Departments)

         Any mistake or omission in the name/s may be brought to the notice of this Office immediately.

        No request for any correction or addition shall be entertained after 12.30 P.M. on 31.8.2019.

PRESIDENT                                                             DEPARTMENT

TANIYA BHATTI                                                     CENTRE FOR PUBLIC HEALTH

MAHAVIR SHARMA                                              UIAMS

ANKIT BINDRA                                                      UIAMS

SACHIN                                                                     UIAMS

SACHIN                                                                     BIOPHYSICS

NIRMAL SINGH                                                      ECONOMICS

CHETAN                                                                    URDU

MANMEHAR KAUR                                               BIOTECHNOLOGY

DIVYANSH SHARMA                                            DR. SSBUICET

RAHUL KUMAR                                                      ANTHROPOLOGY

DHEERAJ THAKUR                                                            GEOGRAPHY

GAGANDEEP SINGH                                             UIPS

SUKHDEV SINGH                                                   SCHOOL OF PANJABI STUDIES

SUKHMAN SINGH                                                  CENTRE FOR SOCIAL WORK

AJAY NAIN                                                              LAWS

JASPREET KAUR                                                    LAWS

PARAS RATTAN                                                      LAWS

PRIYA GARG                                                           CHEMISTRY

MOHIT KUMAR                                                       DENTAL SCIENCE

GAURAV DUHAN                                                  UILS

KUMAR GAUTAM                                                  UILS

PRAVESH BISHNOI                                                           UILS

KAWALPREET SINGH                                           UIET

NIKHIL NARMETA                                                 UIET

MANJEET SINGH                                                    UIET

ROHIT SHARMA                                                     UIET

AKHIL GOURA                                                       UIET

SHIVAM SHARMA                                                 UIET

VICE-PRESIDENT                                                 DEPARTMENT

TANIYA BHATTI                                                     CENTRE FOR PUBLIC HEALTH

DIVYA CHOPRA                                                     UIAMS

SACHIN                                                                     UIAMS

SHUBHAM SEWAL                                                 UIAMS

SACHIN                                                                     BIOPHYSICS

HARLEEN KAUR                                                    GEOLOGY

NIRMAL SINGH                                                      ECONOMICS

MANMEHAR KAUR                                               BIOTECHNOLOGY

DIVYANSH SHARMA                                            DR. SSBUICET

RAHUL KUMAR                                                      ANTHROPOLOGY

CHINMEY ABBHI                                                   ANTHROPOLOGY

DHEERAJ THAKUR                                                            GEOGRAPHY

PRITHVIJEET SINGH THAKUR                           GEOGRAPHY

JASVINDER                                                              UNIVERSITY BUSINESS SCHOOL

GAGANDEEP SINGH                                             UIPS

RAHUL SHARMA                                                   UIPS

AJAY NAIN                                                              LAWS

JASPREET KAUR                                                    LAWS

MANNAT NAINTA                                                  LAWS

SHABANA ANSARI                                                            LAWS                                    

RAMANDEEP MARKAN                                       CHEMISTRY

MOHIT KUMAR                                                       DENTAL SCIENCE

GAURAV DUHAN                                                  UILS

BHUPESH BANSAL                                                            UILS

PRACHI KAURA                                                     UIET

ROHIT SHARMA                                                     UIET

SECRETARY                                                           DEPARTMENT

TANIYA BHATTI                                                     CENTRE FOR PUBLIC HEALTH

MAHAVIR SHARMA                                              UIAMS

ANKIT BINDRA                                                      UIAMS

SACHIN                                                                     UIAMS

SIMRAN SOOD                                                        UIAMS

KRITIKA RANA                                                      UIAMS

SACHIN                                                                     BIOPHYSICS

HARLEEN KAUR                                                    GEOLOGY

SEHAJPREET SINGH                                              PHILOSOPHY

NIRMAL SINGH                                                      ECONOMICS

RAMANPREET KAUR                                            HISTORY

MANMEHAR KAUR                                               BIOTECHNOLOGY

MANPREET SINGH MAHAL                                 GANDHIAN AND PEACE STUDIES

DIVYANSH SHARMA                                            DR. SSBUICET

DHEERAJ THAKUR                                                            GEOGRAPHY

PRITHVIJEET SINGH THAKUR                           GEOGRAPHY

PARTH                                                                       UNIVERSITY BUSINESS SCHOOL

GAGANDEEP SINGH                                             UIPS

RAHUL SHARMA                                                   UIPS

AJAY NAIN                                                              LAWS

JASPREET KAUR                                                    LAWS

MANNAT NAINTA                                                  LAWS

BENAZIR KHURSHID                                            LAWS

SACHIN SINGHAL                                                 LAWS

RAMANDEEP MARKAN                                       CHEMISTRY

MOHIT KUMAR                                                       DENTAL SCIENCE

GAURAV DUHAN                                                  UILS

PARTH KHULLAR                                                  UIET

SUKHCHAIN SINGH                                              UIET

TEGBIR SINGH                                                        UIET

ROHIT SHARMA                                                     UIET

SHIVAM SHARMA                                                 UIET

JOINT SECRETARY                                             DEPARTMENT

TANIYA BHATTI                                                     CENTRE FOR PUBLIC HEALTH

DIVYA CHOPRA                                                     UIAMS

SACHIN                                                                     UIAMS

SHUBHAM SEWAL                                                 UIAMS

PRIYA RANI                                                                        UIAMS

SACHIN                                                                     BIOPHYSICS

HARLEEN KAUR                                                    GEOLOGY

NIRMAL SINGH                                                      ECONOMICS

MANMEHAR KAUR                                               BIOTECHNOLOGY

MANPREET SINGH MAHAL                                 GANDHIAN AND PEACE STUDIES

DIVYANSH SHARMA                                            DR. SSBUICET

CHINMEY ABBHI                                                   ANTHROPOLOGY

DHEERAJ THAKUR                                                            GEOGRAPHY

PRITHVIJEET SINGH THAKUR                           GEOGRAPHY

PARTH                                                                       UNIVERSITY BUSINESS SCHOOL

JASVINDER                                                              UNIVERSITY BUSINESS SCHOOL

KARMBIR SINGH                                                   PHYSICAL EDUCATION

SHVETA                                                                    PHYSICAL EDUCATION

GAGANDEEP SINGH                                             UIPS

RAHUL SHARMA                                                   UIPS

AJAY NAIN                                                              LAWS

JASPREET KAUR                                                    LAWS

MANNAT NAINTA                                                  LAWS

SHABANA ANSARI                                                            LAWS

RAMANDEEP MARKAN                                       CHEMISTRY

MOHIT KUMAR                                                       DENTAL SCIENCE

GAURAV DUHAN                                                  UILS

ROHIT SHARMA                                                     UIET

राहुल गांधी ‘राजनैतिक अपरिपक्वता’ का परिचय देते हैं: सत्यापल मलिक

सत्यपाल मलिक बोले – जनता धारा 370 का समर्थन करने के लिए कॉन्ग्रेस को माफ नहीं करेगी। जिस वक्त देश में चुनाव आएगा, विरोधियों को कुछ कहने की जरूरत नहीं होगी। वे सिर्फ कह देंगे कि ये 370 के हिमायती हैं तो लोग जूतों से मारेंगे।

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी कश्मीर मसले पर लगातार घिरते ही जा रहे हैं। हालाँकि एक ट्वीट में कश्मीर को भारत का अंदरूनी मामला बताकर अपने बिखेरे हुए रायते को उन्होंने समेटने की कोशिश की थी। लेकिन, इससे उनके बयान पर विवाद थमता नहीं दिख रहा। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ‘पॉलिटिकल जुवेनाइल’ जैसा बर्ताव कर रहे हैं और आर्टिकल 370 का समर्थन करने के कारण चुनाव के वक्त लोग उन्हें जूते मारेंगे।

मलिक ने कहा कि राहुल गाँधी ने कश्मीर पर बचकाना बयान दिया है। राजनीतिक रूप से राहुल गाँधी अभी बच्चे हैं और एक ‘पॉलिटिकल जुवेनाइल’ की तरह बर्ताव कर रहे हैं। साथ ही कहा कि कॉन्ग्रेस ने आज तक जम्मू-कश्मीर पर अपना रुख साफ नहीं किया है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मलिक ने कहा “राहुल गाँधी एक परिपक्व नेता की तरह व्यवहार नहीं कर रहे हैं। मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि जब उनके नेता संसद में कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बता रहे थे, तब राहुल को जिम्मेदार नेता की तरह उन्हें रोकना चाहिए था और खुद खड़े होकर बोलना चाहिए था कि कश्मीर पर कॉन्ग्रेस की राय वही है जो पूरे देश की है। लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए।”

Student’s Election Schedule Announced

Korel,Chandigarh August 27, 2019

            Dr. Jagat Bhushan, Dean Student Welfare, Panjab University, Chandigarh announced the schedule for the forthcoming Student Council Elections of PU campus as well as Affiliated Colleges of PU on 6th September 2019 for the Academic Session 2019-20. DSW informed that the Lyngdoh Commission Guidelines will be applicable from today onwards.

The detailed schedule is as under:

30.8.2019 9.30 a.m. to 10.30 a.m. Filing of nominations
30.8.2019 10.35 a.m. Scrutiny
30.8.2019 12.00 Noon Display of list  of candidates on Notice Board of the concerned Department
30.8.2019 12.30 p.m. to 1.30 p.m. Filing of objections
30.8.2019 Latest by 2.30 p.m. Sending provisional list of candidates and objections, if any to the DSW Office
31.8.2019 10.00 a.m. Display of the list of approved candidates
31.8.2019 10.30 a.m. to 12.00 Noon Withdrawals
31.8.2019 12.30 p.m. Sending final list to DSW Office
31.8.2019 2.30 p.m. Display of the final list of candidates
6.9.2019 9.30 a.m. onwards ELECTIONS