जो देश को ही ‘खाना’ चाहे वह ‘अन्नदाता’ नहीं हो सकता

‘अन्नदाता आंदोलन’ में शरजील इमाम की आमद के बाद आंदोलन की नियत स्पष्ट होती नज़र आ रही है। आंदोलनकारी युवा किसान हों या समझदार किसान नेता टिकैत सभी इस टुकड़े – टुकड़े गिरोह के नए झंडाबरदार हैं जो देश के टुकड़े चाहने वाले लोगों को न केवल अपना आदर्श मानते हैं अपितु उनके लिए पीड़ित भी हैं। उन्हे जेल में देख इनका दिल भर आता है, और ‘आंदोलनकारी अन्नदाता’ इन देश द्रोह के आरोपियों की न केवल रिहाई की मांग करता है अपितु उन पर दर्ज़ हुए मुकद्दमों को भी खारिज करने की बात करता है। ‘आंदोलनकारी अन्नदाता’ को क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह के बयान से भी कोई आपत्ति नहीं है चाहे इस आंदोलन में लगभग 65% हिन्दू किसान ही हैं। भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इन्दिरा गांधी के हत्यारे होने का दंभ पाले हुए अन्नदाता अब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ठोक देने की बात करते हुए तनिक भी नहीं घबराता है। क्या यह वाकयी किसान आंदोलन है, क्या यह वाकयी अन्नदाता हैं?

नयी दिल्ली:

एक तरफ दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों से केंद्र सरकार लगातार संवाद कर रही है, दूसरी ओर इस ‘आंदोलन’ से लगातार ऐसी तस्वीर सामने आ रही हैं जो इसके असल मंशा पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। चाहे वह खालिस्तानी ताकतों की घुसपैठ हो या फिर उमर खालिद और शरजील इमाम के लिए ताजा-ताजा दिखा समर्थन।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसानों के नाम पर क्या हो रहा है? ये किसी से नहीं छिपा है। कुछ ऐसा ही ठीक एक साल पहले हुआ था। पिछले साल शाहीन बाग में सीएए विरोध के नाम पर इसी तरह समुदाय विशेष के लोगों का जमावड़ा हुआ था। तब भी दिल्ली की सड़कों को लोकतंत्र के नाम पर ब्लॉक किया गया था और इस बार भी हाल कुछ यही है।

अंतर यदि है तो बस ये कि पिछले साल दिल्ली में हुए प्रदर्शन कट्टरपंथ की जमीन पर भड़के थे। मगर, इस बार सारा खेल राजनैतिक पार्टियों का है। ‘मासूम’ किसानों को ऐसे कानून के ऊपर विपक्षी पार्टियों द्वारा बरगलाया जा रहा है जिसमें निहित प्रावधानों को लागू करने की घोषणाएँ वह एक समय में खुद कर चुके हैं। स्थिति ये है कि धरने पर बैठा कोई शख्स सरकार की सुनने को बिलकुल राजी नहीं है, वह सिर्फ एक माँग पर अड़े हैं कि कानून को निरस्त किया जाए। 

मगर अब धीरे-धीरे यह प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित लगने से ज्यादा खतरे की घंटी नजर आने लगा है। वही खतरे की घंटे जिसे शाहीन बाग के दौरान हम नजरअंदाज करते रहे और अंत में उसका भीषण रूप हमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के रूप में देखने को मिला।

आज किसानों के प्रोटेस्ट में प्रदर्शनकारियों के हाथ में शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे तमाम आरोपितों की तस्वीर थी। जाहिर है किसानों के इस प्रदर्शन से इनका कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन तब भी इन पोस्टरों के साथ आई प्रदर्शन की तस्वीर इस ओर इशारा करती है कि शाहीन बाग का वामपंथी-कट्टरपंथी गिरोह सक्रिय है।

प्रश्न उठता है कि बिना वजह आखिर कोई किसान महिला अपने प्रदर्शन में उस शरजील इमाम को रिहा क्यों करवाना चाहेगी जो अपने भाषण में असम को भारत से काटने की बात कह रहा था? इन महिलाओं को क्या मतलब है उस उमर खालिद से जो ट्रंप के आने पर दिल्ली में दंगे करवाना चाहता था और उसके लिए पहले से गुपचुप ढंग से बैठकें कर रहा था?  जाकिर नाइक से मिलने वाले खालिद सैफी से आखिर किसान प्रदर्शन का क्या लेना-देना? अर्बन नक्सलियों से कृषि कानून का क्या संबंध?

आज सामने आई तस्वीर ने साफ कर दिया कि पिछले दिनों इस प्रदर्शन की मंशा पर उठे सवाल निराधार नहीं थे। खालिस्तानियों का समर्थन पाकर भी इस पर कोई स्पष्टीकरण न देने वाले किसान नेता अब रेलवे ट्रैक्स को ब्लॉक करने की धमकियाँ तक दे चुके हैं। पिछले दिनों इसी प्रोटेस्ट के मंच से युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने हिंदुओं के ख़िलाफ़ जहर उगला था।

योगराज ने खुलेआम कहा था, “जिस सरकार की आप बात कर रहे हैं केंद्र की, आपको पता है कि ये कौन हैं? ये वही हैं, जो अपनी बेटियों की डोली हाथ जोड़ कर मुगलों के हवाले कर देते थे।” योगराज के शब्द थे:

इसके अलावा हमारे तथाकथित अन्नदाताओं ने अपनी माँगे मनवाने के लिए खुलेआम पिछले दिनों मीडिया के सामने ये तक कह दिया था कि इंदिरा को ठोका, मोदी को भी ठोक देंगे

क्या संवैधानिक ढंग से हो रहे किसी प्रदर्शन में ऐसी बातें निकल कर सामने आती हैं? योगराज के हिंदू घृणा से भरे बयान पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया इंदिरा ठोक दी वाले बयान पर किसी ने मलाल नहीं किया। इसके बदले सरकार को अलग से धमकाया जा रहा है कि ट्रैक ब्लॉक होंगे

आजादी संग्राम में सिखों के बलिदान को आज कोई नहीं भुला रहा, कोई इस बात से इंकार नहीं कर रहा कि हिंदुओं के परेशानी के समय में सिख हमेशा उनके साथ रहे, कोई उनकी बहादुरी को नहीं ललकार रहा, लेकिन आप अपने विवेक पर फैसला कीजिए कि आखिर आज प्रदर्शन में शामिल किसान यूनियन के लोग सरकार की बातें सुनने को तैयार नहीं है। क्यों जिद पर अड़े हैं। क्यों बताया जा रहा है कि पहले से वह लोग 4 महीने का राशन लेकर आए हैं?

किसान आंदोलन में उमर खालिद और शरजील इमाम के पोस्टर का पहुँचना बताता है कि मुद्दों के नाम दिल्ली वालों को एक बार फिर भटकाया जा रहा है। शाहीन बाग के छद्म एजेंडे के बेनकाब होने के बाद अब वही ताकतें कृषि कानून के विरोध नाम रोटी सेंकने की कोशिश में हैं। प्रदर्शनों पर, गुरुद्वारों पर नमाज पढ़ने के लिए समुदाय विशेष को जगह देख कर नया प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है।

साभार : जयन्ती मिश्रा

विजय माल्या की बढ़ीं मुश्किलें, फ्रांस में 14.34 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त

केंद्र सरकार विजय माल्या को प्रत्यर्पित कराने की कोशिश में भी जुटी हुई है. विजय माल्या का प्रत्यर्पण अनुरोध काफी पहले ब्रिटेन भेजा गया था. यूके की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट (Westminster Magistrates’ Court) ने 10 दिसंबर, 2018 को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी विजय माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश दिया था. फैसले में कोर्ट ने लिखा था कि आरोपी माल्या के खिलाफ दर्ज मामलों में उसके शामिल होने के पुख्ता सबूत हैं. इसके बाद उसने ब्रिटेन के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का रुख किया लेकिन उसे वहां से भी राहत नहीं मिली.

नयी दिल्ली:

किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के मालिक और भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या पर प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. शुक्रवार को ईडी ने फ्रांस में विजय माल्या की 1.6 मिलियन यूरो की प्रॉपर्टी को जब्त किया है. विजय माल्या पर कार्रवाई करने के बाद ईडी ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘ईडी के आग्रह पर विजय माल्‍या की 32 अवेन्‍यू फोच (FOCH), फ्रांस की संपत्ति को फ्रेंच अथॉरिटी ने जब्‍त किया है.’

फ्रांस में जब्‍त की गई प्रापर्टी की कीमत 1.6 मिलियन यूरो (करीब 14.34 करोड़ रुपये) आंकी गई है. जांच में यह बात सामने आई है कि किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के बैंक खाते से विदेश में बड़ी रकम निकाली गई.

उल्लेखनीय है कि भारतीय कारोबारी विजय माल्या नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक के बैंक कर्ज धोखाधड़ी मामले में आरोपी है. इस वक्त वो ब्रिटेन में रह रहा है. माल्या के प्रत्यर्पण के लिए भारत ने कुछ माह पहले यूनाइटेड किंगडम (UK) सरकार से आग्रह किया था. भारत सरकार ने कहा था कि वह विजय माल्या के जल्द प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटिश सरकार के संपर्क में है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने मांगी थी रिपोर्ट
बीते मई महीने में माल्या ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में मनी लांड्रिंग एवं हजारों करोड़ की धांधली के मामले में भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपनी अपील हार गया था. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने केंद्र से कहा था कि वह ब्रिटेन में भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या को भारत को प्रत्यर्पित किए जाने सबंधी कार्रवाई पर छह सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दायर करे. न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा था कि भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के बाद मामले की सुनवाई यूनाइटेड किंगडम में उसके खिलाफ “गुप्त कार्यवाही” के कारण नहीं हो रही थी. 31 अगस्त को पुनर्विचार याचिका खारिज होने और सजा की पुष्टि होने के बाद माल्या अपने खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाला था.

गुपकार गैंग के उदय के बाद घाटी में बढ़ी आतंकी गतिविधियां, नगरोटा में 4 आतंकी ढेर

गुपकार गैंग के उदय के बाद जम्मू और काश्मीर में आतंकवाद एक बार फिरसक्रिय हो गया है. सूत्रों की मानें तो जहां दक्षिण काश्मीर में सेना ने स्थानीय और सीमा पार के आतंकियों पर लगाम लगाई थी वही अब गुपकार गैंग की शह पर जम्मू काश्मीर में पाँव पसार रहे हैं. सुरक्षा बलों ने आतंकियों को चारों ओर से घेर लिया. करीब ढाई घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने चारों आतंकियों का सफाया कर दिया. मारे गए आतंकियों के पास बड़ी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किया गया. फिलहाल आतंकियों की शिनाख्त नहीं हो पाई है. पुलिस उनके पुराने इतिहास का पता लगाने में जुटी है.

  • गाड़ी चेकिंग के दौरान आतंकियों ने की फायरिंग
  • कश्मीर में आतंकियों के ट्रक से जाने की सूचना
  • ट्रक पर जम्मू-कश्मीर का नंबर, एनकाउंटर जारी

श्रीनगर(ब्यूरो). 

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान जारी है. खुफिया जानकारी के बाद नगरोटा में सुरक्षा कड़ी की गई और  हर नाके पर आने जाने वाले वाहनों की जांच शुरू की गई. इस दौरान सुरक्षा बलों ने बान टोल प्लाजा के पास एक नाका लगाया था. 

वाहनों की जांच के दौरान आतंकवादियों के एक समूह ने सुरक्षा बलों पर सुबह 5 बजे फायरिंग शुरू कर दी. फायरिंग के बाद आतंकी जंगल की तरफ भागने लगे. फिर मुठभेड़ शुरू हो गई. सूत्रों ने बताया कि एनकाउंटर में 4 आतंकवादी मारे गए हैं. एनकाउंटर के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद है.

माना जा रहा है कि 3-4 आतंकवादी ट्रक के जरिये जम्मू-श्रीनगर हाईवे के रास्ते कश्मीर जाने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकियो को घेर लिया और फिर एनकाउंटर शुरू हो गया. इस घटना के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ लगे नगरोटा में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

गोलीबारी में एसओजी के जवान हुए घायल

बहरहाल, सुरक्षा बलों ने बताया कि गाड़ी चेकिंग के दौरान आतंकियों ने फायरिंग करनी शुरू कर दी. सुरक्षा बलों को कश्मीर में आतंकियों के ट्रक से जाने की सूचना थी. इसकी जांच करने के लिए हाइवे पर नाका लगाकर गाड़ियों की जांच शुरू की गई थी. जिस ट्रक रोका गया है उस पर जम्मू-कश्मीर का नंबर लगा हुआ है. अभी एनकाउंटर जारी है. हाइवे बंद है. आतंकियों के ट्रक से भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद किया गया है.

इससे पहले 6 नवंबर 2020 को दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के मेज पंपोर इलाके में आतंकियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ हुई थी. मुठभेड़ अगले दिन सुबह तक चली. इस एनकाउंटर में एक आतंकी को मार गिराया गया है. वहीं, एक को सरेंडर करने के पर मजबूर भी किया. इस एनकाउंटर के दौरान दो स्थानीय लोग भी घायल हो गए, जिसमें एक की मौत हो गई.

जो बायडेन की मदद से अनुच्छेद-370 को वापस लायेंगे: युवा कॉंग्रेस नेता जहाँ जेब सिरवाल

कॉंग्रेस की सबसे बड़ी परेशानि उन मुद्दों को लेकर है जिन मुद्दों क मोदी सरकार ने सहज ही निपटा दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री नहरु का दिया हुआ काश्मीर विवाद भी उनही में से एक है। कॉंग्रेस को आज भी भारत में काश्मीर को ले कर ‘दो विधान दो निशान दो परधान चाहिए’, वह धारा 370 के हटाये जाने के विरोध में है। इस पार्टी के नये पुराने सभी नेता भारतीय संसद मे पारित हुए मोदी सरकार के किसी भी प्रस्ताव को असंवैधानिक मानती है। धारा 370 पर कॉंग्रेस आज भी यदा कदा बयान देते रहते हैं। ताज़ा मामला जहाँ जेब सिरवाल का है जो युवा कॉंग्रेस नेता हैं ओर उन्हे जो बायडेन से बहुत उम्मीद है। ज़ेब सिरवाल को यकीन है कि नव निर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति काश्मीर में एक बार फिर धारा 370 बहाल करवाने में मदद करेंगे।

जम्मू/ चंडीगढ़:

जम्मू कश्मीर की स्थानीय पार्टियों का भारत-विरोधी रुख तो जगजाहिर है, लेकिन अब कॉन्ग्रेस पार्टी भी फ़ारूक़ अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती जैसे नेताओं के सुर में सुर मिला रही है। कम से कम जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस नेताओं के बयान देख कर तो यही लगता है। ताज़ा मामला है जहाँ जेब सिरवाल का, जो प्रदेश में कॉन्ग्रेस के चर्चित नेताओं में से एक हैं। वो अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन की मदद से अनुच्छेद-370 को वापस लाने का दावा कर रहे हैं।

अमेरिका में ‘डेमोक्रेटिक पार्टी’ के जो बायडेन और ने वहाँ के पदस्थ राष्ट्रपति व ‘रिपब्लिकन पार्टी’ के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प को हरा दिया है और कमला हैरिस उनकी डिप्टी के रूप में चुनी गई हैं। कॉन्ग्रेस नेता जहाँजेब सिरवाल ने भी इन दोनों नेताओं को जीत की बधाई दी लेकिन इस दौरान वो अपना भारत-विरोधी रवैया उजागर करना नहीं भूले। कॉन्ग्रेस के युवा नेता ने इसे व्यक्तिगत जीत न होकर एक ‘विचारधारा की जीत’ करार दिया।

उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि जहाँ तक भारत और जम्मू-कश्मीर की बात है, उनकी जीत से यहाँ सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इतना तो साफ है उनकी जीत से इस्लामोफोबिया में कमी आएगी। बता दें कि ये कट्टरपंथी नेता इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ आवाज़ उठाने को भी ‘इस्लामोफोबिया’ कहते हैं। कमोबेश पूरी दुनिया में इस्लामी कट्टरपंथियों का लगभग यही रुख है और वो आतंकवाद की निंदा तक नहीं करते।

इसी तरह कॉन्ग्रेस के युवा नेता जहाँजेब सिरवाल ने कहा कि जो बायडेन के पुराने बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि वो भारत सरकार पर दबाव बनाएँगे और सरकार अनुच्छेद-370 और 35-ए को फिर से वापस लाएगी और इन्हें लागू करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अलोकतांत्रिक तरीके से अनुच्छेद-370 को हटाया था और इसे वापस लाने से ‘इस्लामोफोबिया’ में कमी आएगी।

इससे पहले जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह ने ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल (LAC)’ पर चीन के आक्रामक रवैये के लिए भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के फैसले को जिम्मेदार बताया था। ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ के अध्यक्ष ने कहा था कि चीन ने कभी भी अनुच्छेद 370 को लेकर भारत सरकार के फैसले को स्वीकार नहीं किया है। साथ ही उन्होंने उम्मीद भी जताई थी कि चीन की मदद से फिर से अनुच्छेद 370 को वापस लाया जा सकेगा।

उन्हीं के नक्शेकदम और चलते हुए जम्मू कश्मीर की एक अन्य पूर्व-मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा था कि जब तक उनका झंडा (जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा) वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह दूसरा झंडा (तिरंगा) नहीं उठाएँगी। मुफ्ती ने कहा था कि उनका झंडा ‘डाकुओं’ ने ले लिया है। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा और वो कश्मीर को पुराना दर्जा दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगी।

करतारपुर साहिब का प्रबंधन पीएसपीजीसी से ले कर आईएसआई की ईटीपीबी को सौंपा

भारत ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा का प्रबंध एवं देखरेख का काम एक गैर सिख संस्था को सौंपे जाने के पाकिस्तान के फैसले का कड़ा विरोध करते हुए आज पाकिस्तान सरकार का आह्वान किया कि वह सिखों की भावनाओं के विरुद्ध इस मनमाने फैसले को वापस ले. बयान में कहा गया, ”पाकिस्तान का यह एकतरफा निर्णय निंदनीय है और करतारपुर साहिब कॉरीडोर खोले जाने की भावना और सिख समुदाय के धार्मिक ख्यालों के विरुद्ध है. ऐसे कदम पाकिस्तानी सरकार और धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों एवं कल्याण के लंबे चौड़े दावों की असलियत उजागर करते ह.’

  • पाकिस्‍तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी देख रही थी करतारपुर साहिब का मैनेजमेंट
  • पाकिस्‍तान ने प्रॉजेक्‍ट मैनेजमेंट यूनिट बनाकर PSGPC से छीन लिया यह अधिकार
  • अब एक ट्रस्‍ट प्रॉपर्टी बोर्ड के हाथों में है करतारपुर साहिब गुरुद्वारे का प्रबंधन
  • विदेश मंत्रालय ने किया कड़ा विरोध, कहा- फैसला सिखो की भावनाओं के खिलाफ

नई दिल्‍ली

भारत ने सिखो के सबसे महत्‍वपूर्ण धर्मस्‍थल, करतारपुर साहिब गुरुद्वारे का प्रबंधन एक गैर-सिख संस्‍था को सौंपने का कड़ा विरोध किया है. पाकिस्‍तान ने इस इवैक्‍यूई ट्रस्‍ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) को गुरुद्वारे का मैनेजमेंट सौंपा है. अबतक इसका प्रबंधन पाकिस्‍तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (PSGPC) के पास था. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कदम से पाकिस्‍तान के धार्मिक अल्‍पसंख्‍यकों के हितों की रक्षा के ‘बड़े-बड़े दावों की पोल खुल’ गई है. भारत ने पाकिस्‍तान से कहा है कि वह अपना यह फैसला वापस ले क्‍योंकि पवित्र करतारपुर साहिब के मामलों को संभालने का जिम्‍मा सिख अल्‍पसंख्‍यक समुदाय का है.

दुनिया के सामने आया पाकिस्तान का असली रूप

बता दें कि पिछले साल नवंबर में करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान खुद को दुनिया का सबसे दरियादिल शख्स साबित करने पर तुले थे. लेकिन महज 1 साल में ही उनकी दरियादिली की हकीकत दुनिया देख रही है.

सिखों के पवित्र स्थल पर ISI का कंट्रोल !

जानकारी के मुताबिक करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के रख रखाव का काम पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति से छीन कर Project Management Unit को सौंपा गया है. इस यूनिट में कुल 9 लोग शामिल हैं और यह पाकिस्तान के Evacuee Trust Property Board यानी ETPB से जुड़ी है. खास बात है कि गुरुद्वारे के रख रखाव के लिए बनाए गई इस यूनिट में एक भी सिख सदस्य नहीं है.

मो. तारिक खान को यूनिट का अध्यक्ष बनाया गया

जानकारी के मुताबिक Project Management Unit का सीईओ मो. तारिक खान को बनाया गया है. पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी किए गए नए आदेश में प्रोजेक्ट बिजनेस प्लान का भी जिक्र है. यानी कि इमरान खान सरकार अब गुरुद्वारे से भी पैसा कमाने की जुगत कर रही है. ETPB को पूरे तरीके से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई कंट्रोल करती है.

पाकिस्तान के हृदय परिवर्तन की पोल खुली
करतारपुर गुरुद्वारे का प्रबंधन सिख समुदाय से छीन कर मुस्लिम कमेटी को देने के फैसले से सिखों के लिए पाकिस्तान के ह्रदय परिवर्तन की भी पोल खुल गई. इस गुरुद्वारे में देश-दुनिया के लाखों सिखों की आस्था बसती है. उस आस्था का पाकिस्तान के दिल में कितना सम्मान है, वो फैसले ने साफ कर दिया है. क्योंकि गुरुद्वारे के रख रखाव के लिए बनाए गए नए संस्थान में एक भी सिख सदस्य नहीं है.

नए प्रबंधन बोर्ड का आईएसआई के साथ कितना गहरा संबंध है, इसका अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि इसका पहला अध्यक्ष आईएसआई चीफ जावेद नासिर था. अब करतारपुर बॉडी को मोहम्मद तारिक खान हेड कर रहे हैं.

पंजाब में अलगाववादी भावना भड़काने की साजिश!

दरअसल हुकूमत में आने के कुछ ही हफ्ते बाद जब पाक पीएम इमरान ने अचानक करतारपुर कॉरिडोर को खोलने की बात कही थी तभी से भारत के कई सुरक्षा विशेषज्ञों ने पड़ोसी देश की इस दरियादिली को लेकर शंका जाहिर की थी. करतारपुर साहिब का प्रबंधन सिख समुदाय से छीन कर ISI से ताल्लुक रखने वाले संगठन को देने के फैसले ने इस शंका को मजबूत कर दिया है. सवाल है कि करतारपुर कॉरिडोर को खोलने के पीछे पाकिस्तान का असली मकसद पंजाब में अलगाववादी भावनाओं को भड़काना तो नहीं है.

करतारपुर पर पाकिस्तान की ‘काली सोच’ बेनकाब?   

पाकिस्तान के बड़बोले रेल मंत्री शेख रशीद ने पिछले साल करतारपुर साहिब के उद्घाटन के बाद कहा था कि,’इंडियन मीडिया ने जिस तरह फजलुर्रहमान के धरने को कवरेज दी है. जिस तरह से इंडिया की मीडिया ने जनरल कमर जावेद बाजवा दिखाया, एक ऐसे सिपहलालार को जिसने करतारपुर कोरिडार का ऐसा ज़ख्म लगाया कि सारी जिंदगी हिन्दुस्तान याद रखेगा. सिखों के अंदर पाकिस्तान के लिए एक नए जज्बात प्यार मोहब्बत और खुशदिली की फिजा पैदा की गई.”

पाकिस्तान की आतंकी सोच का पक्का इलाज कब? 

दरअसल पाकिस्तानी हुक्मरान और उनकी फौज के दिमाग में हर समय भारत विरोधी साजिशें लगातार चलती रहती हैं. पाकिस्तान अब इस गलियारे से जरिए खालिस्तानी कट्टरपंथियों का इस्तेमाल पंजाब में शांति और सद्भाव का माहौल बिगाड़ने के लिए करेगा. उसके गंदे इरादे जाहिर हो चुके हैं.

भारत ने फैसले को वापस लेने की मांग की

पाकिस्तान के इस फैसले की भारत सरकार ने निंदा की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि,’ भारत करतारपुर गुरुद्वारे पर लिए गए पाकिस्तान के फैसले की निंदा करता है. इस फैसले से सिख समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं. पाकिस्तान का असली चेहरा एक बार सामने आ गया है. जहां वो अल्पसंख्यकों के हितों की बात करता हैं, करतारपुर का प्रबंधन सिख समुदाय से लेना एक गलत फैसला है. हमारी मांग हैं कि पाकिस्तान करतारपुर साहिब के लिए इस फैसले को फौरन वापस ले.’

‘अल्लाह के वास्ते’ विंग कमांडर को छोड़ दो: पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी

‘अल्लाह के वास्ते’ विंग कमांडर को छोड़ दो बलकोट स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी एफ़ – 16 को गिरने वाले विंग कमांडर अभिनंदन जब अपना प्लेन क्रैश होने के बाद पकस्तान के हाथों पड़ गए थे तब उन्हे छ्दाने के भारत सरकार के दबाव में आई पाकिस्तान सरकार की आंतरिक आपात बैठकों के गंभीर मुद्दों को उजागर करते हुए पाकिस्तानी सांसद ने अपनी संसद में ब्यान दिया। यह चर्चा न बैठकों के बारे में है जिनमें हिस्सा लेने की पाकिस्तानी ‘वज़ीर – ए- आजमइमरान खान की हिम्मत जवाब दे चुकी थी और बाजवा की रूह तक कांप चुकी थी, वह भारत के हौसलों से डर चुके थे।

इस्लामाबाद/नयी दिल्ली(ब्यूरो):

पाकिस्तानी राजनीतिक दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग एन (पीएमएल-एन) के एक सांसद ने भारतीय वायु सेना के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सांसद ने पाकिस्तान की संसद में दावा किया कि इमरान खान ने भारत के हमले के डर से मार्च 2019 अभिनंदन को रिहा किया था। सांसद के मुताबिक़ अभिनंदन की रिहाई नहीं होने पर भारत पकिस्तान पर हमले के लिए तैयार बैठा था।

पीएमएल-एन के नेता अयाज सादिक ने पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली में इस मुद्दे पर खुलासा किया। उन्होंने कहा, “विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक अहम बैठक में कहा था कि अगर हम विंग कमांडर अभिनंदन को नहीं छोड़ते हैं तो भारत 9 बजे तक हम पर हमला कर देगा।” पाकिस्तानी सांसद के इस बयान का वीडियो फ़िलहाल पूरे सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि वह पाकिस्तानी सरकार और सेना के भय की वास्तविकता बता रहे हैं। 

इसके बाद पाकिस्तानी सांसद अयाज सादिक ने कहा कि इस घटना के ठीक बाद विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पीएमएल-एन, पीपीपी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के अलावा अन्य नेताओं और अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बारे में बात करते हुए अयाज सादिक ने कहा, “मुझे बहुत अच्छे से याद है कि बैठक के दौरान सेना प्रमुख बाजवा कमरे में दाखिल हुए थे। उस दौरान बेहद घबराए हुए थे, वह पसीना-पसीना थे और उनके पैर तक काँप रहे थे।” 

फिर अयाज सादिक ने कहा, “पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस बैठक में शामिल होने से साफ़ मना कर दिया था और विदेश मंत्री कुरैशी ने तो सेना प्रमुख से गुजारिश करते हुए कहा था कि अल्लाह के वास्ते अभिनंदन को छोड़ दो नहीं तो भारत की सेना 9 बजे तक हमला कर देगी।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सादिक ने यहाँ तक कहा कि विपक्ष ने उस वक्त अभिनंदन समेत कई अन्य मुद्दों पर पाकिस्तान की सरकार का समर्थन किया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वह आगे से नहीं कर पाएँगे। 

गुज़रे साल फरवरी के दौरान भारतीय सेना ने बालाकोट में स्थित आतंकवादी कैम्प पर एयर स्ट्राइक किया था। इसके ठीक बाद पाकिस्तानी सेना ने भी अपने विमान भारत पर हमले के लिए भेजे थे, जिसे भारतीय वायु सेना ने खदेड़ दिया था। तब इस एयर-फाइट में विंग कमांडर अभिनंदन ने मिग-21 से पाकिस्तानी वायु सेना के विमान एफ़-16 को मार गिराया था। इसी कड़ी में वह पाकिस्तानी सीमा के भीतर चले गए थे और एक पाकिस्तानी मिसाइल से उनका प्लेन हिट हुआ था, जिसके कारण वो इजेक्ट कर पाकिस्तानी सीमा में गिरे थे। वहाँ की सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था और उनसे पूछताछ भी की थी। 

इसका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें देखा जा सकता है कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारी विंग कमांडर अभिनंदन को चाय के लिए पूछ रहे थे। इस वीडियो के ज़रिए पाकिस्तान यह दिखाने का प्रयास कर रहा था कि वह अभिनंदन की किस कदर खातिरदारी कर रहे हैं। भारत की तरफ से बरकरार रहे कड़े रवैये ने पाकिस्तान को झुकने के लिए मजबूर किया था, नतीजतन पाकिस्तान ने अभिनंदन को रिहा किया था। 1 मार्च 2019 को विंग कमांडर अभिनंदन अटारी वाघा बॉर्डर से भारत आए थे।    

फ्रांस में नीस शाहर के नोट्रे डेम पर ‘अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए’ आतंकी हमला

पैगंबर कार्टून विवाद में फ्रांस में टीचर की गला काटकर हत्‍या के बाद अब इसी तरह एक और हत्‍या का मामला सामने आया है। फ्रांस के एक चर्च में एक हमलावर ने एक महिला का गला काट दिया और दो अन्‍य लोगों की चाकू मारकर निर्मम तरीके से हत्‍या कर दी। यह घटना फ्रांस के नाइस शहर में हुई है। शहर के मेयर ने इस खौफनाक घटना को आतंकवाद करार दिया है।

पेरिस :

फ्रांस के नीस शहर में स्थित कैथेड्रल चर्च में एक आतंकवादी घटना हुई है। इस आतंकी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में अभी तक 3 लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह घटना 29 अक्टूबर 2020 की सुबह 9 बजे नीस शाहर के नोट्रे डेम (Notre Dame) चर्च के पास हुई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मामले पर कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने हमलावर को गिरफ्त में ले लिया है।

इस घटना पर ट्वीट करते हुए शहर के मेयर क्रिश्चन एसट्रोसी (Christian Estrosi) ने कहा, “मैं पुलिस के साथ घटनास्थल पर पहुँच गया हूँ। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जाँच भी शुरू कर दी है। अभी तक जितनी जानकारी सामने आई है उसके आधार पर इसे आतंकवादी हमला कहा जा सकता है।” इसके अलावा मेयर ने अपने ट्वीट में घटनास्थल की तमाम तस्वीरें भी साझा की।

इसके बाद फ्रांस के मंत्री गेराल्ड डरमनिन (Gerald Dermanin) ने भी इस घटना पर ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि लोग घटनास्थल पर इकट्ठा होने से बचें क्योंकि पुलिस वहाँ जाँच कर रही है। हमले के ठीक बाद एक बैठक भी बुलाई गई थी, जिसमें आम लोगों से निवेदन किया गया कि वह जारी किए गए दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करें। इस मुद्दे पर शहर के मेयर और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक के बाद आगे की कार्यप्रणाली तय होगी। 

गौरतलब है कि 16 अक्टूबर को पेरिस में इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी की कट्टरपंथी हमले में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने अपनी कक्षा में छात्रों को पैगंबर का विवादित कैरिकेचर दिखाया था। इसके बाद ही एक 18 साल के मुस्लिम युवक ने उन पर हमला बोल दिया और उनका सिर कलम कर दिया। इस घटना की निंदा करते हुए फ्रांस समेत पूरी दुनिया में शिक्षक के समर्थन में आवाजें उठने लगीं।

फ्रांस ने इस्लाम के सामने घुटने न टेकने का ऐलान किया। फ्रांस के ऑसिटैन क्षेत्र (Occitanie region) के दो टाउन हॉल मोंटपेलियर (Montpellier) और टूलूज़ (Toulouse) के बाहर शिक्षक सैम्युएल पैटी को याद करते हुए और अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करने के लिए पैगम्बर मोहम्मद के उन कार्टूनों का 4 घंटे तक प्रदर्शन किया गया, जिनको लेकर शार्ली एब्दो के कर्मचारियों का 2015 में नरसंहार किया गया था। सबसे पहले इन कार्टूनों का प्रकाशन शार्ली हेब्दो पत्रिका में ही किया गया था।

काश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए तुर्की दृढ़ करेगा पाकिस्तान के हाथ

पुलवामा हमले के बाद जिस तरह से भारत ने पलटवार करते हुए बालाकोट में आतंकी शिविरों को निशाना बनाया था, उससे पाकिस्तान को होश फ़ाख्ता हो गए थे. चूंकि वो अपनी आदत से बाज आने वाला नहीं था इसलिए उसने अपनी तैयारी तभी से शुरू भी कर दी थी. बालाकोट स्ट्राइक के तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने चीन के सामने मिसाइल सिस्टम दिए जाने की गुहार लगाई थी. खुफिया रिपोर्ट में ये साफ हुआ की पाकिस्तान ने मल्टिपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम A-300 बैटरी देने के लिए चीन से दरख्वास्त की थी. तुर्की अब खुलकर कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की मदद कर रहा है. बता दें कि चीन के बाद अब तुर्की ने भी पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई शुरू कर दी है. साथ ही पाकिस्तान को हर मुद्दे पर समर्थन दे रहा तुर्की अब उसे हथियार के साथ-साथ पैसों से भी मदद कर रहा है. 

नई दिल्ली: 

तुर्की अब खुलकर कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की मदद कर रहा है. बता दें कि चीन के बाद अब तुर्की ने भी पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई शुरू कर दी है. साथ ही पाकिस्तान को हर मुद्दे पर समर्थन दे रहा तुर्की अब उसे हथियार के साथ-साथ पैसों से भी मदद कर रहा है. 

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान तुर्की से पैर्मीटर सर्वेलांस रडार सिस्टम लेने जा रहा है. रैटीनार PTR-X पैर्मीटर सर्वेलांस रडार सिस्टम की खास बात ये है कि ये पोर्टेबल है यानी कि इस सिस्टम को दो लोग आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं और इसे चलाने के लिए सिर्फ एक आदमी की जरूरत होगी. ये सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमैटिक तरीके से बड़े इलाके को स्कैन कर सकती है. इसके इस्तेमाल से लगातार दूरबीनों और कैमरे की मदद से निगरानी करने की कोई जरूरत नहीं होगी.

पाकिस्तान तुर्की से इस सिस्टम को इसलिए ले रहा है क्योंकि एलओसी पर भारतीय सेना के मजबूत ग्रिड के चलते उसके घुसबैठ की कोशिशें नाकाम हो रही हैं. ऐसे में इस रडार के जरिए वो उन इलाकों को स्कैन करने की कोशिश करेगा और ये पता लगाएगा कि कहां से घुसबैठ करना में आसानी होगी. पाकिस्तान इस सिस्टम की मदद के भारत में घुसबैठ के नए रूट खोजने की कोशिश करेगा. 

इसके अलावा तुर्की ने कश्मीर के लिए पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक मदद दी है. इसकी प्लानिंग पाकिस्तान और तुर्की ने पिछले साल के आखिर से ही शुरू कर दी थी जब पाकिस्तान सेना के आला अधिकारी तुर्की गए थे. कश्मीर के युवाओं को तुर्की में स्कॉलर्शिप और प्रोग्राम के बहाने पाकिस्तान अपना एजेंडा पूरा कर रहा है. तुर्की  ने कश्मीर में कई NGO को भी काफी पैसा दिया है.

फ्रांस की ‘The Grand Mosque of Pantin’ पर जड़ दिया ताला

नयी दिल्ली/ Overseas Desk:

फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक इतिहास के शिक्षक सैमुअल की सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने अभिव्यक्ति की आज़ादी की पढ़ाई के दौरान छात्रों को पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाया था। इस वारदात के बाद घृणा फैलाने वालों और इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच फ्रांस ने पेरिस के बाहर स्थित एक मस्जिद को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। ‘The Grand Mosque of Pantin’ पर ताला जड़ दिया गया है।

ये मस्जिद फ्रांस की राजधानी पेरिस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित एक सबअर्ब में स्थित है, जो बाकी इलाकों से थोड़ा पिछड़ा हुआ है। इस मस्जिद ने अपने फेसबुक पेज पर शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या से पहले एक वीडियो जारी कर उनके खिलाफ घृणा फैलाई थी। प्रशासन ने मस्जिद के बाहर इसे बंद किए जाने का नोटिस चस्पा दिया है। फ्रांस में मजहब के आधार पर कट्टर शिक्षा देने वालों और देश की सुरक्षा में संभावित खतरा पैदा करने वाले विदेशियों पर कार्रवाई हो रही है।

इस मस्जिद को 6 महीने के लिए बंद किया गया है और बताया गया है कि ‘आतंकवादी घटनाओं से बचाव के एकमात्र कारण’ के लिए ऐसा किया गया है। फ्रांस के ‘Seine-Saint-Denis’ विभाग ने ये नोटिस जारी किया। ये भी पता चला है कि हत्यारा उस अभिभावक से संपर्क में था, जो शिक्षक के खिलाफ घृणा अभियान चला रहा था। साथ ही हमास के पक्ष में आए हुए पहले के एक आदेश को भी रद्द कर दिया गया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि देशवासी कार्रवाई चाहते हैं और सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है। हत्यारे ने व्हाट्सप्प पर उस अभिभावक से चैट किया था, जिसकी बेटी ने पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाने वाले शिक्षक की शिकायत की थी। इसके बाद उस अभिभावक ने इसे ‘पोर्नोग्राफी’ बताते हुए उन्हें बरखास्त करने की माँग के साथ विरोध में समर्थन जुटाना शुरू कर दिया था। हत्यारा अब्दुल्लाख भी पुलिस की गोली से मारा गया।

इस हत्याकांड के कुछ ही सप्ताह पहले फ्रेंच राष्ट्रपति ने ‘इस्लामी अलगाववाद’ के कारण चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस्लाम एक ऐसा मजहब है, जो पूरी दुनिया में ही संकटकाल से गुजर रहा है, सिर्फ फ्रांस में ही ऐसा नहीं है। फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड ने कहा कि देश ‘अंदर के दुश्मनों’ से लड़ रहा है। फ्रांस में सक्रिय हमास का समर्थन करने वाले समूह को भंग कर दिया गया है। उसके मुखिया अब्देलहकीम से पुलिस पूछताछ कर रही है।

वहीं अब मस्जिद के प्रबंधक मोहममद हेंनीचे ने अब वीडियो शेयर करने को लेकर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि ये वीडियो सिर्फ मुस्लिम छात्रों की चिंताओं के लिए शेयर किया गया था। साथ ही दावा किया कि इस्लाम में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। अब ‘Sorbonne’ विश्वविद्यालय में बुधवार (अक्टूबर 21, 2020) को उक्त शिक्षक को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिसमें राष्ट्रपति मैक्रों, पीड़ित परिवार और 400 अतिथि उपस्थित रहेंगे।

मंगलवार को संसद में भी इस घटना के कारण एक मिनट का मौन रखा गया। ‘Conflans-Sainte-Honorine’ में उसी दिन शाम को हजारों लोगों ने जमा होकर ‘मैं भी सैमुअल’ का नारा लगा आकर इस्लामी कट्टरपंथियों का विरोध किया। ‘शार्ली हेब्दो’ के अगले अंक में ‘सिर कटा हुआ गणतंत्र’ नाम से एक शीर्षक भी आने वाला है। इसके संपादकीय में बताया जाएगा कि कैसे ये हत्यारे लोकतंत्र का गला काटना चाहते हैं।

ज्ञात हो कि उधर वहाँ के 4 NGO ने ट्विटर के खिलाफ भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हेट स्पीच पर लगाम लगाने में विफल रहने के कारण उसे कोर्ट में घसीटा गया है। हत्यारे का सन्देश और शिक्षक के मृत शरीर के साथ तस्वीर ट्विटर पर डाली गई थी, जिससे वहाँ के कई संगठन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से खफा हैं। हत्यारे ने अपने ट्विटर अकाउंट से भी आपत्तिजनक चीजें डाली थीं। वहाँ के ये NGO सरकार के साथ खड़े हैं।

भारत ने चीन के बहानों को किया खारिज

चीनी मामलों के जानकारों  का कहना है कि पीएलए, लद्दाख में भारतीय बुनियादी ढांचे को बढ़ाने पर इसलिए चिंतित है क्योंकि यह पाकिस्तान के लिए अरबों डॉलर के पाकिस्तान आर्थिक गलियारे, या CPEC के लिए एक सैन्य खतरा पैदा कर सकता है, जो कि खुंजेर दर्रा और पाकिस्तान से होकर गुजरता है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

भारत ने चीन की उस दावे को खारिज कर दिया है कि जिसमें ड्रैगन ने कहा कि 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बुनियादी ढांचों को अपग्रेड करने के कारण दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। भारत ने कहा है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) पहले से ही वहां मौजूद है और सीमा के उस पार सड़कों और संचार नेटवर्क का निर्माण जारी है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सोमवार को उद्घाटन किए गए पुल एलएसी से दूर हैं और ये पुल नागरिकों की आवाजादी और सैन्य रसद पहुंचाने में मदद करेंगे। दूसरा, चीन ने कभी भी चल रही सैन्य-कूटनीतिक वार्ता में भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के मुद्दे को नहीं उठाया है। तीसरा, एलएसी के करीब सड़क, पुल, ऑप्टिकल फाइबर, सोलर-हीटेड हट्स और मिसाइल तैनाती के बारे में पीएलए का क्या कहना है?” उन्होंने कहा कि भारत केवल एलएसी के किनारे पर ही कोई निर्माण कर रहा है और इसके लिए हमें चीनी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

सैन्य कमांडरों के अनुसार, PLA ने गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स में सुरक्षित संचार के लिए ऑप्टिकल फाइबर खींचा है, पंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर आगे के सैनिकों के लिए सौर गर्म कंटेनरों को पहुंचाने के लिए भारी-लिफ्ट क्रेन का इस्तेमाल किया है और एक अस्पताल भी बनाया है।

हालांकि, चीन पर नजर रखने वालों के अनुसार, पीएलए लद्दाख में भारतीय बुनियादी ढांचे के अपग्रेड करने की खबर से इसलिए चिंतित है, क्योंकि यह पाकिस्तान के लिए अरबों डॉलर के पाकिस्तान आर्थिक गलियारे या CPEC के लिए एक सैन्य खतरा पैदा कर सकता है, जो कि खुंजेर दर्रा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है। यह समझा जाता है कि चीन ने CPEC को लेकर अपने सभी मौसम सहयोगी के पाकिस्तान को अपनी चिंताओं से अवगत कराया है, क्योंकि भारत ने बीजिंग को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र और पीओके का शोषण करने पर बहुत सख्त आपत्ति जताई है।