बाबर कोआक्रांता बताने पर भड़के ओवैसी और वामपंथी

दिल्ली यूनिवर्सिटी में नए सिलेबस के ड्राफ्ट में 20 से 30 फीसदी तक बदलाव किया गया है। इतिहास (ऑनर्स) के पहले पेपर ‘Idea of Bharat’ पढ़ाया जाएगा। ड्राफ्ट सिलेबस के तीसरे पेपर में सरस्वती-सिंधु सभ्यता को पढ़ाया जाएगा। वेदों में सरस्वती नदी का विस्तार से उल्लेख मिलता है। ‘भारत की सांस्कृतिक विरासत’ नाम से 12वां पेपर है। रामायण और महाभारत जैसे सांस्कृतिक विरासत का विषय शामिल हुआ। इस्लामिक शासकों के आगे आक्रमणकारी शब्द जोड़ने पर विवाद है। नए पाठ्यक्रम में आक्रमण शब्द का इस्तेमाल मुस्लिम शासकों जैसे बाबर के संबंध में किया गया है। भारत की सांस्कृतिक विरासत पढ़ किसकी बौखलाहट बढ़ी?

सरीका तिवारी, नयी दिल्ली/चंडीगढ़:

गुरु नानकदेव जी ने बाबर के आक्रमण और लोगों की दुर्दशा के समय भारत की तबाही का आँखों देखा उल्लेख किया और युद्ध की स्थिति का वर्णन किया:

ਖੁਰਾਸਾਨ ਖਸਮਾਨਾ ਕੀਆ ਹਿੰਦੁਸਤਾਨੁ ਡਰਾਇਆ।। (ਪੰਨਾ ੩੬੦) खुरासान खस्माना कीआ हिंदुस्तान डराइया। (पृष्ठ 360)

अर्थ: खुरासान के क्षेत्र को किसी को सौंपकर(हारकर), बाबर ने भारत पर हमला किया और उसे डराया।

ਪਾਪ ਕੀ ਜੰਞ ਲੈ ਕਾਬਲਹੁ ਧਾਇਆ ਜੋਰੀ ਮੰਗੈ ਦਾਨੁ ਵੇ ਲਾਲੋ।। ( पाप की जंज लै कबूलों धाया जोरी मांगे दान वे लालो।।)

ਸਰਮੁ ਧਰਮੁ ਦੁਇ ਛਪਿ ਖਲੋਏ ਕੂੜੁ ਫਿਰੈ ਪਰਧਾਨੁ ਵੇ ਲਾਲੋ।। (शर्म धर्म दुई छपी खलोए कूड़ू फिरे परधान वे लालो॥)

ਕਾਜੀਆ ਬਾਮਣਾ ਕੀ ਗਲ ਥਕੀ ਅਗਦੁ ਪੜੈ ਸੈਤਾਨੁ ਵੇ ਲਾਲੋ।। (ਪੰਨਾ ੭੨੨) (काजिया ब्राह्मणा की गल थकी अगदु पढ़े शैतान वे लालो॥)

अर्थात हे लालों, बाबर पाप की बारात ले कर काबुल से मार आत मचाता हुआ आया है और धिंगाजोरी से भारत को दहेज के रूप में मांग रहा है। शर्म और धर्म दोनों ही अलोप हो चुके हैं, अब झूठ की प्रधनगी है। क़ज़ियों और ब्राह्मणों के काम धंधे सब चौपट हो चुके हैं अब विवाह जैसी पवित्र रसम भी शैतान ही करवा रहा है।

गुरु जी के शब्दों में बाबर एक आक्रांता है बाबर की दरिंदगी का वर्णन गुरु जी ने अपनी कोमल वाणी में अत्यंत दुखी हो कर किया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) एक सांविधिक इकाई है, जो विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा से संबंधित सभी प्रकार के कार्यकलापों की एक जिम्मेदार संस्था है। यूजीसी ने हाल ही में बीए इतिहास के पाठ्यक्रम का एक ड्राफ्ट प्रकाशित किया, जो भारतीय इतिहास के सभी पहलुओं पर प्रकाश डालता है। यूजीसी के इसी प्रयास के कारण कई बुद्धिजीवी और नेता व्यथित हैं, जिनमें असदुद्दीन ओवैसी प्रमुख रूप से सम्मिलित हैं।

दि आइडिया ऑफ भारत

बीए इतिहास का पहला पेपर “आइडिया ऑफ भारत” पर आधारित है। यह भारतवर्ष की अवधारणा, भारतीय ज्ञान परंपरा, कला एवं साहित्य, धर्म, विज्ञान, जैन एवं बौद्ध साहित्य, भारतीय आर्थिक परंपरा एवं ऐसे ही अन्य टॉपिक्स को कवर करता है। इनमें वेद, उपनिषद, महान ग्रंथ, जैन एवं बौद्ध साहित्य, वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा, भारतीय अंक पद्धति एवं गणित, समुद्री व्यापार इत्यादि सम्मिलित है। 

ड्राफ्ट में बताया गया है कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्र प्राचीन भारत के नागरिकों के प्रारम्भिक जीवन और संस्कृति से परिचित होंगे एवं उस समाज की व्यवस्था, धर्म पद्धति एवं राजनैतिक इतिहास को जान सकेंगे। इस पाठ्यक्रम का एक उद्देश्य यह भी है कि छात्र भारत में लगातार हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों का भी अध्ययन कर सकें।

सिंधु-सरस्वती सभ्यता की व्याख्या

इस स्नातक कोर्स का तीसरा पेपर प्राचीन भारत के इतिहास लेखन एवं ऐतिहासिक स्रोतों की व्याख्या से संबंधित है। इसमें वैदिक काल, जैन और बौद्ध धर्म के उदय से संबंधित कई विषय हैं। इस खंड की सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इसमें सिंधु-सरस्वती सभ्यता के अस्तित्व से संबंधित सभी पहलुओं की व्याख्या की गई है। साथ ही हिंदुओं में भेद उत्पन्न करने के लिए प्रचलित की गई आर्य आक्रमण की थ्योरी को भी नकारा गया है।

आक्रांता अब आक्रांता ही कहा जाएगा

अभी तक स्नातक कार्यक्रमों की इतिहास की पुस्तकों में बाबर और तैमूरलंग जैसे आक्रमणकारियों के लिए आक्रांता अथवा आक्रमणकारी जैसे शब्द नहीं लिखे जाते थे किन्तु UGC ने इस ड्राफ्ट में इसे स्वीकार किया है।

बुद्धिजीवियों और नेताओं का विरोध

हालाँकि जब भी इतिहास में किसी भी प्रकार के सुधार की बात आती है तो कुछ राजनैतिक नेताओं और स्वघोषित बुद्धिजीवियों को यह सुधार आरएसएस का षड्यंत्र ही दिखाई देता है। वामपंथी पोर्टल टेलीग्राफ ने कुछ शिक्षकों और विद्यार्थियों का वक्तव्य छापा है कि वैदिक और हिन्दू धार्मिक ग्रंथों का उपयोग करके शिक्षा का भगवाकरण किया जा रहा है। इन “शिक्षकों और विद्यार्थियों” ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि “आइडिया ऑफ भारत” पर आधारित ने पाठ्यक्रम से “मुस्लिम शासनकाल की महत्ता” समाप्त हो जाएगी। 

टेलीग्राफ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज के एक अनजान विद्यार्थी का कथन छापा कि वह “आइडिया ऑफ भारत” के माध्यम से प्राचीन भारतीय सभ्यता के महिमामंडन से व्यथित है। दिल्ली विश्वविद्यालय के ही श्यामलाल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर जीतेंद्र मीणा जी भी व्यथित हैं कि नया पाठ्यक्रम सेक्युलर साहित्य के स्थान पर धार्मिक साहित्य का महिमामंडन करता है एवं मुगल इतिहास को दरकिनार कर देता है।

ऐसे मुद्दों पर ओवैसी कुछ न कहें, यह असंभव है। उन्होंने सीधे भाजपा पर यह आरोप लगा दिया कि भाजपा अपनी हिन्दुत्व की विचारधारा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने का कार्य कर रही है। ओवैसी ने एक ट्वीट में कहा कि शिक्षा प्रोपेगंडा नहीं है। भाजपा हिन्दुत्व की विचारधारा को पाठ्यपुस्तकों में शामिल कर रही है। माईथोलॉजी को स्नातक कार्यक्रमों में नहीं पढ़ाना चाहिए। ओवैसी ने ड्राफ्ट पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि पाठ्यक्रम मुस्लिम इतिहास को मलीन कर रहा है।

खालिस्तानी समर्थक 7 गुर्गे गिरफ्तार

नयी दिल्ली, 22 मार्च :

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने अमृतसर में हथगोले बरामद होने के सिलसिले में सात कथित खालिस्तानी गुर्गों के खिलाफ सोमवार को एक आरोप पत्र दाखिल किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

मोहाली में एनआईए की एक विशेष अदालत के समक्ष दाखिल आरोप पत्र में जजबीर सिंह सामरा, वरिन्दर सिंह चहल, कुलबीर सिंह, मनजीत कौर, तरणबीर सिंह, बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के एक गुर्गे कुलविंदरजीत सिंह और पाकिस्तान में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) के स्वयंभू प्रमुख हरमीत सिंह के नाम शामिल हैं।

अधिकारी ने बताया कि इनके खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूए (पी) अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

जून, 2019 में दर्ज किया गया यह मामला पंजाब पुलिस द्वारा एक बैग से दो हथगोले और एक मोबाइल फोन को जब्त किये जाने से जुड़ा है। पुलिस द्वारा नियमित जांच के दौरान बाइक सवार दो हमलावरों को रोके जाने के बाद उन्होंने अमृतसर के ग्रामीण क्षेत्र में एक बस अड्डे पर यह बैग फेंक दिया था।

अधिकारी ने बताया कि एनआईए ने मामले को अपने हाथों में लिया और जांच शुरू की। उन्होंने बताया कि जजबीर और वरिन्दर पाकिस्तान से तस्करी की गई हेरोइन की आपूर्ति में शामिल एक मादक पदार्थ-आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा थे।

पांच देशों के राजदूतों बोले भारत में पर्यटन की है आपार संभावनायें

  • पांच देशों के राजदूतों बोले भारत में पर्यटन की है आपार संभावनायें
  • पीएचडी चैंबर ने आयोजित किया दसवां इंटरनैश्नल हैरिटेज टूरिज्म कॉन्क्लेव
  • हरियाणा के गौरवशाली इतिहास को जानना चाहते हैं विदेशी

पंचकूला:

भारत की संस्कृति और धरोहर की छाप मात्र डोमेस्टिक टूरिज्म तक ही सीमित न रहकर समूचे विश्व में अपनी पहचान बना चुकी है। कोविड 19 से पूर्व वर्ष 2019 में देश में लगभग 11 मिलियन विदेशी पर्यटकों ने भारत में आकर इस देश की संस्कृति को करीब से जाना है। भारत में पर्यटन सबसे बड़ी सर्विस इंडस्ट्री में से एक है,जोकि देश की जीडीपी में लगभग 98 बिलियन अमेरिकी डालर्स का योगदान देता है।

यह विचार पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से पंचकूला के रामगढ़ फोर्ट में आयोजित दसवें अंतरराष्ट्रीय हैरिटेज टूरिज्म कॉन्क्लेव में शामिल हुए पांच देशों के राजदूत, कई प्रदेशों के पर्यटन विकास बोर्ड अधिकारियों तथा पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के आपसी मंथन में सामने आए।

इस कान्क्लेव में चैक गणराज्य के दूतावास के ऐम्बेसेडर महामहिम मिलन होवोरका, सैशिल्स गणराज्य के राजदूत थामस सिलबे पिल्ले, स्लोवाक गणराज्य के राजदूत ईवान लनकेरिक, स्लोवेनिया गणराज्य के राजदूत डाक्टर मरजन केनकन, वियतनाम गणराज्य के राजदूत फेम सान छाओ और इंडोनेश्यिा गणराज्य के चार्जडीएफेयर्स फ्रेडी पेई शामिल हुये जिन्होंने हरियाणा व चंडीगढ़ की खूबसूरती को जमकर सराहा। कोरोना महामारी के बाद देश में पर्यटन में और अधिक पर्यटन संभावानयें तलाशने की दृष्टि से यह आयोजन किया गया है। 

अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि कार्यक्रम को आयोजित करने का उद्देश्य पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देना और देश की सांस्कृति व कुदरती हैरिटेज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दिलाना है। देश की राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा का अपना एक गौरवशाली इतिहास है। जिसे विदेशों में बसे लोग जानना चाहते हैं।

कोनक्लेव के उद्घाटन सत्र पर भारत सरकार में पर्यटन मंत्रालय की अतिरिक्त महानिदेशक  रुपिन्दर बराड़ ने कहा कि दुनिया भर के देश इस समय महामारी से उबर रहे हैं। सामान्य मूल्यों और सांस्कृतिक हितधारकों के बीच संबंधों को मजबूत करने का मतलब है कि दोनों क्षेत्र समावेशी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। मंत्रालय ने आगे कदम उठाते हुए, आसियान जैसे संगठनों की भारी संख्या के साथ यूनेस्को के विरासत स्थलों और भारत के अन्य आकर्षण के केंद्रों के विकास और संवर्धन के लिए द्विपक्षीय/बहुपक्षीय सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

इससे पूर्व प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुये पीएचडी चैंबर के प्रधान संजय अग्रवाल ने बताया कि यह आयोजन कोरोना के प्रकोप के चलते वर्ष भर के वैबिनार व जूम बैठकों के बाद यह पहला आयोजन है। उन्होंने कहा कि इंटरनैश्नल यात्रा बाध्य होने के कारण घरेलू यात्रा को वर्ष 2021 की अगामी महीनों में मजबूत पकड़ प्राप्त होगी क्योंकि अधिकतर भारतीय अपने मातृभूमि को ओर करीब से जानने के लिये आतुर रहते हैं। उन्होंनें कहा कि सरकार की ओर से निवेश से लेकर समर्पित दृष्टिकोण, इंफ्रास्टक्चर और उद्योग पर ध्यान केन्द्रित करने के लिये अनोखी पहल, ग्राहकों को सुखद अनुभव प्रदान करवाने आदि कई मापदंडों से घरेलू पर्यटन को ओर अधिक मजबूती प्राप्त होगी। 

पीएचडी चैंबर में टूरिज्म कमेटी के चैयरमेन अनिल पराशर ने बताया कि कोरोना काल ने पर्यटन उद्योग गहरा आघात पहुंचाया है । सरकार के साथ साथ पर्यटन उद्योग के बिजनेस लीडर्स को इसके बाद पेश आ रही चुनौतियों को सांझे रुप से सामना करना होगा। इस दिशा में इनोवेशन, बेहतर मैनेजमेंट, प्रोमोशन और धरोहर को सरंक्षण अहम कड़ी साबित होंगें। 

कार्यक्रम के दौरान ऐसोसियेशन आफ डोमेस्टिक टूर आपरेटर्स आफ इंडिया के प्रेजीडेंट पीपी खन्ना, इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चरल हैरिटेज इनटैच की हरियाणा चैप्टर कन्वीनर डा. शिखा जैन, यूनाइटेड नेशन ग्लोबल कोम्पैक्ट नैटवर्क इंडिया की कार्यकारी बिदेशक शबनम सिद्दिकी, इंडियन हैरिटेज होटल्स ऐसोसियेशन के वरिष्ठ सदस्य जगदीप सिंह चंदेल, इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर पंकज पराशर सहित अन्य पर्यटन से जुड़े दिग्गजों ने इस अवसर पर अपने विचार रखे।

वियतनाम ने इंडिया – वियतनाम बिजनैस फोरम में उत्तर भारती के बिजनैस लीडर्स को दिया अपने देश में निवेश का न्यौता

चंडीगढ़, 11 मार्च, 2021:

वियतनाम में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के प्रयासो में, भारत में वियतनाम के राजदूत महामहिम फाम सान छाउ ने बल देते हुये कहा कि उनका देश उत्तरी भारत के निवेशकों को फ्री ट्रेड ऐग्रीमेंट (एफटीए) और आर्थिक सांझेदारी सहित कई फायदे प्रदान करनवाने में वचनबद्ध है। छाउ गुरुवार को पंचकुला स्थित होटल हाॅलीडे में एसोचैम द्वारा आयोजित ‘इंडिया – वियतनाम बिजनैस फोरम’ के दौरान बिजनैस लीडर्स को संबोधित कर रहे थे। 

छाउ अपने दूतावास के शिष्टमंडल के साथ वितयनाम के चंडीगढ़ स्थित होनरेरी काॅनसोलेट जनरल दविन्द्र सिंह थापर की मेजबानी में इस क्षेत्र में स्थानीय उद्यमियों को अपने  देश में निवेश के विकल्प तलाशने के साथ साथ वियतनाम को एक आदर्श पर्यटन स्थल प्रोजेक्ट करने की दिशा में चंडीगढ़ ट्राईसिटी के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। 

उन्होंनें बताया कि वियतनाम भारत व्यापार पिछले कुछ वर्षो में लगभग दस बिलियन अमेरिकी डालर्स तक बढ़ गये है जो कि दोनों देशों के बीच परस्पर आपसी विश्वास का प्रतीक है। उन्होंनें कहा कि वियतनाम में आर्कषक निवेश नीतियां, कई एफटीए समझौते, सीधी उड़ानों की शुरुआत, तेजी से आर्थिक विकास की दर, राजनीतिक स्थिरता, सस्ती लेबर और देश अनुकूल व्यापारिक वातावरण सहित ऐसी कई परिस्थितयां हैं जो भारतीय निवेश को न्यौता  देती हैं। उन्होंनें इस बात पर बल दिया कि भारतीय भागीदारों को दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझ को सुविधाजनक बनाने के लिये वियतनाम के साथ एक आपसी सहयोग स्थापित करने चाहिये।

इस अवसर पर वियतनामी दूतावास के ट्रेड काउंसलर बुई द्रुंग थुओंग ने बताया कि वर्ष 2000 में मात्र 200 मिलियन अमेरिकी डालर्स से नई दिल्ली और हनोई के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज होती गई है जो कि दिसंबर 2020 तक 10.04 बिलियन अमेरिकी डालर्स तक पहुंच गई है। इसमें भारत का वियतनाम के लिये निर्यात व्यापार लगभग 4.49 बिलियन अमेरिकी डालर्स का है जबकि वियतनाम से भारत का आयात व्यापार का योग करीब 5.55 बिलियन अमेरिकी डालर्स का है। 

भारत के लिये वियतनाम विश्व का 17वां सबसे ट्रेडिंग पार्टनर है जबकि आसियान देशों की दृष्टि से सिंगापुर, इंडोनेशिया और मलेशिया के बाद चैथा सबसे व्यापारिक भागीदार है। वहीं दूसरी ओर वियतनाम भी भारत के लिये विश्व में दसवां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर के रुप में उभरा है।

उन्होंनें बताया कि वियतनाम की फोरन इनवेस्टमेंट ऐजेंसी के आंकडों के अनुसार भारत के लगभग 898.65 मिलियन अमेरिकी डालर्स के व्यापक निवेश के साथ 294 परियोजनायें वियतनाम के लिये निरधारित की गई हैं जिससे की वियतनाम, भारत के लिये 26वां सबसे बड़ा निवेशक देश है। भारत के लिये निवेश के प्रमुख क्षेत्र उर्जा, खनिज, कृषि प्रसंस्करण, चीनी, चाय, काॅफी, ऐग्रो कैमिकल्स, आईटी और आॅटो उपकरण शामिल हैं। वियतनाम ने भी भारत में 28.55 मिलियन अमेरिकी डालर्स का अनुमानित निवेश के साथ छह परियोजनाओं को अंजाम दिया हुआ है जो कि फार्मा, आईटी और निर्माण सामग्री के क्षेत्र में प्राथमिक हैं।

कार्यक्रम में मौजूद चंडीगढ़ में वियतनाम के काॅनसोलेट जनरल दविंदर सिंह थापर ने उत्तर भारतीय प्रतिभा की उपयोगिता पर बल देते हुये बताया कि भारत में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का एक बहुत बड़ा पूल है जो कि वियतनाम की लगभग 100 मिलियन की जनसंख्या की दृष्टि से उद्योग की ओर नये आयाम देने में क्षमता रखते हैं। उन्होंनें कहा कि भारत का वियतनाम के साथ एक दीर्घकालिक विकास है जिसने वियतनाम के क्षमता निर्माण और समाजिक आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान दिया है। भारत भी आसियान फ्रेमवर्क के दायरे में वियतनाम को हर संभव सहायता प्रदान करता रहा है।

इस अवसर पर एसोचैम हिमाचल स्टेट कौंसिल के चेयरमैन जितेंद्र सोढी ने दोनों देशों के बीच बिजनेस फोरम की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि संयुक्त प्रयास व्यापार और वाणिज्य को गति देंगे। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक गठबंधन वेअतनाम में निवेश की प्रगति को नई दिशा देगा।

डोमिनिकन गणराज्य वैक्सीन पहंचने पर भावुक हुए पीएम स्केरिट

कोरोना वायरस महामारी को हराने के लिए भारत में वैक्सीनेशन अभियान शुरू हो चुका है। दुनिया कोरोना से लड़ सके इसीलिए भारत कई देशों को वैक्सीन दे रहा है। भारत कई देशों को फ्री में कोरोना वैक्सीन की सप्लाई कर रहा है। ऐसे में भारत की उदारता की प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है। भारत अब तक 15 से ज्यादा देशों को कोरोना वैक्सीन की खेप भेज चुका है। पहले कई पड़ोसी देशों को भारत निर्मित टीके दिए जा चुके हैं। अब मैत्री पहल के तहत ‘मेड इन इंडिया’ टीके बारबाडोस और डोमिनिका भी पहुंच गए हैं। वहीं डोमिनिका के पीएम वैक्सीन को लेकर इतने भावुक हो गए कि वह खुद कोरोना वैक्सीन उतारने पहुंच गए। Corona vaccine: 9 फरवरी को डोमिनिका के डगलस-चार्ल्स एयरपोर्ट पर भारत से वैक्सीन लेकर विमान पहुंचा। यह वैक्सीन पड़ोसी देश बारबाडोस के एयर नेशनल गार्ड के प्लेन से पहुंचीं. वैक्सीन को रिसीव करने के लिए खुद पीएम स्केरिट और उनके कैबिनेट सहयोगी मौजूद थे।

कोरोना वायरस महामारी को हराने के लिए भारत में वैक्सीनेशन अभियान शुरू हो चुका है। दुनिया कोरोना से लड़ सके इसीलिए भारत कई देशों को वैक्सीन दे रहा है। भारत कई देशों को फ्री में कोरोना वैक्सीन की सप्लाई कर रहा है। ऐसे में भारत की उदारता की प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है।

इसी कड़ी में भारत की वैक्सीन डोमिनिकन गणराज्य पहुँच गई है। वैक्सीन देश में पहुँचने के बाद डोमिनिकन गणराज्य के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट ने पीएम मोदी और भारत के लोगों को शुक्रिया कहा है।

वैक्सीन पहुँचने के बाद आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में डोमिनिकन पीएम रूजवेल्ट स्केरिट ने कहा, “मैं यह कहूँगा कि मुझे इस बात की कल्पना भी नहीं थी कि हमारी गुजारिशों पर इतनी जल्दी जवाब मिलेगा। कोई भी यह समझ सकता है कि इस तरह के गंभीर संकट में किसी भी देश के लिए अपनी ही रक्षा करना एक चुनौती है। ऐसी स्थिति में पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से किए प्रयासों के चलते यह संभव हुआ। उन्होंने मेरिट के आधार पर हमारी माँगों को स्वीकार किया और हमारे लोगों की समानता को स्वीकार किया।” उन्होंने बताया कि भारत द्वारा 35000 वैक्सीन यहाँ पहुँची है। इसके जरिए यहाँ की 72 हजार की आबादी में से आधे लोगों की जीवन रक्षा हो सकेगी।

वैक्सीन रिसीव करने खुद एयरपोर्ट पहुँचे प्रधानमंत्री

9 फरवरी को डोमिनिका के डगलस-चार्ल्स एयरपोर्ट पर भारत से वैक्सीन लेकर विमान पहुँचा। यह वैक्सीन पड़ोसी देश बारबाडोस के एयर नेशनल गार्ड के प्लेन से पहुँची। वैक्सीन को रिसीव करने के लिए खुद पीएम रूजवेल्ट स्केरिट और उनके कैबिनेट सहयोगी मौजूद थे। यही नहीं खुद पीएम और उनके कैबिनेट सहयोगियों ने दवाओं को प्लेन से उतारने में सहयोग किया। ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुई थी।

बता दें कि कोविड-19 टीकों के अलावा भारत विश्व स्तर पर डीपीटी, बीसीजी और मीजल्स टीकों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। हाल ही में वैक्सीन मैत्री अभियान के तहत भारत ने अफगानिस्तान को टीके उपलब्ध कराए थे और उसी दौरान बताया गया था कि कैरेबियाई देश बारबाडोस और डोमिनिका को भी कोरोना वैक्सीन की पहली खेप भेजी है।

अफग़ानिस्तान को जहाँ एयर इंडिया के विमान से रविवार को एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की पाँच लाख खुराक मुंबई से दिल्ली फिर काबुल भेजी गई। वहीं कैरेबियाई देश बारबाडोस और डोमिनिका को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित कोविडशील्ड वैक्सीन की एक-एक खेप आज भेजी गई। भारत ने पड़ोसी देशों समेत दुनिया के कुल 25 देशों को 24 मिलियन डोज उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। इन देशों में युगांडा, इक्वाडोर, निकारागुआ, मोरक्को और नामीबिया जैसे देश भी शामिल हैं।

LAC पर भारत और चीनी सैनिकों की झड़प

LAC पर चल रहे भारत और चीन के विवाद के बीच एक बार फिर सिक्किम में दोनों पक्षों में झड़प हुई है। कहा जा रहा है कि तीन दिन पहले चीन ने भारत की सीमा में घुस कर यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया, लेकिन तभी भारतीय सैनिकों ने उन्हें रोका और खदेड़ कर वापस उनके क्षेत्र में भेज दिया। इस दौरान ही झड़प भी हुई, जिसमें 20 चीनी सैनिक घायल हुए। वहीं भारत के भी 4 जवानों को चोटें आईं।

मीडिया खबरों के अनुसार, सिक्किम के नाकुला में यह झड़प हुई थी, जिसके कारण वहाँ हालात तनावपूर्ण हैं लेकिन स्थिति अब काबू में हैं। कहा जा रहा है कि झड़प के दौरान हथियारों का इस्तेमाल नहीं हुआ, मगर दोनों देशों के सैनिकों को चोटें आई हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय क्षेत्र के साथ सभी प्वाइंट पर मौसम की स्थिति खराब होने के बावजूद कड़ी चौकसी बरती जा रही है।

गौरतलब है कि भारत-चीन सैनिकों के बीच इस झड़प के बाद पूर्वी लद्दाख के मोल्डो में भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच बैठक हुई। करीब 15 घंटे चली इस बैठक का निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। लेकिन इसके जरिए तनाव को कम करने की अपील की गई। इसके अलावा यह भी खबर है कि चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख से अपने 10,000 सैनिकों को वापस बुला लिया है। हालाँकि कुछ सेना की तैनाती अब भी है इसलिए भारतीय जवान भी पीछे नहीं हुए हैं।

यहाँ बता दें कि साल 2017 में डोकलाम विवाद के बाद लद्दाख में पिछले साल भारत और चीनी सैनिक एक-दूसरे के सामने आए थे। 15 जून 2020 को गलवान घाटी पर हुई भिड़ंत के दौरान 20 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। वहीं 43 चीनी सैनिकों के भी मारे जाने की खबर सामने आई थी, लेकिन चीन ने मरने वाले सैनिकों की संख्या का खुलासा नहीं किया था।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल जून में LAC पर हुई हिंसा 1975 के बाद पहली ऐसी हिंसा थी जिसमें सैनिकों ने जान गॅंवाई। चीन ने भारतीय सेना पर हमला करने के लिए लाठी-ंडंडे, रॉड, हॉकी, ड्रैगन पंच, कंटीली तारों वाले हथियार आदि का इस्तेमाल किया था।

भारत द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन प्राप्त करने वाले पहले देशों में से एक होगा नेपाल

नई दिल्ली: 

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भारत पड़ोसी देशों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है। इसी बीच कोरोना वैक्सीन को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार ने नेपाल से बड़ा वादा किया है। मोदी सरकार ने नेपाल को आश्वासन दिया है कि वह भारत द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन प्राप्त करने वाले पहले देशों में से एक होगा। वैक्सीन आपूर्ति कार्यक्रम की घोषणा अगले हफ्ते हो सकती है।

नेपाल के विदेश मंत्री की यात्रा प्रभावी

नरेंद्र मोदी सरकार ने नेपाल को यह आश्वासन दिया है कि वह भारत द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन प्राप्त करने वाले पहले देशों में से होगा, जिसकी आपूर्ति कार्यक्रम की घोषणा अगले सप्ताह में की जाएगी। विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर के साथ संयुक्त आयोग की बैठक के लिए भापत यात्रा के दौरान नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली को यह आश्वासन दिया गया।

हालांकि नेपाल के प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली के राजनीतिक विरोधियों में शुमार ग्यावाली की यात्रा को कम प्रभावी आंका गया है, हकीकत यह है कि नई दिल्ली में नेपाली विदेश मंत्री के वार्ताकार उनके व्यावसायिकता और संयम से प्रभावित हुए। इसके साथ उन्होंने द्विपक्षीय संबंध का समर्थन किया था।

शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, ग्यावली 16 जनवरी को पीएम मोदी कोरोना टीकों की लॉन्चिंग कार्यक्रम में पूरी तरह से शामिल थे, इसलिए नेपाली विदेश मंत्री से मुलाकात नहीं कर सके। पीएम मोदी की पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, जो कि मोदी सरकार में नंबर-दो की हैसियत रखते हैं, से उनकी मुलाकात हुई।

यह समझा जाता है कि भारत नेपाल के अलावा भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में प्रतिबंधित उपयोग के लिए टीकों की आपूर्ति करके अपने दोस्तों की आपातकालीन आवश्यकताओं का ध्यान रखेगा।

सरकारी वार्ताकारों के अनुसार, ग्यावाली ने एस जयशंकर को नेपाल में भारतीय वैक्सीन प्राप्त करने के बारे में नेपाल के नियामक के साथ-साथ अनुमोदन प्राप्त करने के बारे में जानकारी दी। दोनों देश अब चिकित्सा मॉड्यूल के प्रशिक्षण पर चर्चा कर रहे हैं, जो प्रतिबंधित उपयोग की अवधि के दौरान नेपाली फ्रंट लाइन श्रमिकों का टीकाकरण करेगा। नेपाल में कोरोना के कुल 2,67,056 मामले हैं।

ग्यावली की यात्रा के दौरान दोनों पक्ष धीरे-धीरे हवाई और भूमि मार्ग संपर्क खोलने के लिए सहमत हुए, जो महामारी की चपेट में आ गया था। दोनों देश रक्सौल-काठमांडू रेलवे लाइन से संबंधित क्षेत्र स्थान सर्वेक्षण में तेजी लाने के लिए सहमत हुए। भारत-नेपाल ने जहां सैन्य सहयोग के लिए सेना द्वारा रक्षा सहयोग को गहरा करने का फैसला किया, वहीं राजनाथ सिंह ने ओली सरकार को मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण प्रदान करने की पेशकश की।

जो देश को ही ‘खाना’ चाहे वह ‘अन्नदाता’ नहीं हो सकता

‘अन्नदाता आंदोलन’ में शरजील इमाम की आमद के बाद आंदोलन की नियत स्पष्ट होती नज़र आ रही है। आंदोलनकारी युवा किसान हों या समझदार किसान नेता टिकैत सभी इस टुकड़े – टुकड़े गिरोह के नए झंडाबरदार हैं जो देश के टुकड़े चाहने वाले लोगों को न केवल अपना आदर्श मानते हैं अपितु उनके लिए पीड़ित भी हैं। उन्हे जेल में देख इनका दिल भर आता है, और ‘आंदोलनकारी अन्नदाता’ इन देश द्रोह के आरोपियों की न केवल रिहाई की मांग करता है अपितु उन पर दर्ज़ हुए मुकद्दमों को भी खारिज करने की बात करता है। ‘आंदोलनकारी अन्नदाता’ को क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह के बयान से भी कोई आपत्ति नहीं है चाहे इस आंदोलन में लगभग 65% हिन्दू किसान ही हैं। भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इन्दिरा गांधी के हत्यारे होने का दंभ पाले हुए अन्नदाता अब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ठोक देने की बात करते हुए तनिक भी नहीं घबराता है। क्या यह वाकयी किसान आंदोलन है, क्या यह वाकयी अन्नदाता हैं?

नयी दिल्ली:

एक तरफ दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों से केंद्र सरकार लगातार संवाद कर रही है, दूसरी ओर इस ‘आंदोलन’ से लगातार ऐसी तस्वीर सामने आ रही हैं जो इसके असल मंशा पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। चाहे वह खालिस्तानी ताकतों की घुसपैठ हो या फिर उमर खालिद और शरजील इमाम के लिए ताजा-ताजा दिखा समर्थन।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसानों के नाम पर क्या हो रहा है? ये किसी से नहीं छिपा है। कुछ ऐसा ही ठीक एक साल पहले हुआ था। पिछले साल शाहीन बाग में सीएए विरोध के नाम पर इसी तरह समुदाय विशेष के लोगों का जमावड़ा हुआ था। तब भी दिल्ली की सड़कों को लोकतंत्र के नाम पर ब्लॉक किया गया था और इस बार भी हाल कुछ यही है।

अंतर यदि है तो बस ये कि पिछले साल दिल्ली में हुए प्रदर्शन कट्टरपंथ की जमीन पर भड़के थे। मगर, इस बार सारा खेल राजनैतिक पार्टियों का है। ‘मासूम’ किसानों को ऐसे कानून के ऊपर विपक्षी पार्टियों द्वारा बरगलाया जा रहा है जिसमें निहित प्रावधानों को लागू करने की घोषणाएँ वह एक समय में खुद कर चुके हैं। स्थिति ये है कि धरने पर बैठा कोई शख्स सरकार की सुनने को बिलकुल राजी नहीं है, वह सिर्फ एक माँग पर अड़े हैं कि कानून को निरस्त किया जाए। 

मगर अब धीरे-धीरे यह प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित लगने से ज्यादा खतरे की घंटी नजर आने लगा है। वही खतरे की घंटे जिसे शाहीन बाग के दौरान हम नजरअंदाज करते रहे और अंत में उसका भीषण रूप हमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के रूप में देखने को मिला।

आज किसानों के प्रोटेस्ट में प्रदर्शनकारियों के हाथ में शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे तमाम आरोपितों की तस्वीर थी। जाहिर है किसानों के इस प्रदर्शन से इनका कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन तब भी इन पोस्टरों के साथ आई प्रदर्शन की तस्वीर इस ओर इशारा करती है कि शाहीन बाग का वामपंथी-कट्टरपंथी गिरोह सक्रिय है।

प्रश्न उठता है कि बिना वजह आखिर कोई किसान महिला अपने प्रदर्शन में उस शरजील इमाम को रिहा क्यों करवाना चाहेगी जो अपने भाषण में असम को भारत से काटने की बात कह रहा था? इन महिलाओं को क्या मतलब है उस उमर खालिद से जो ट्रंप के आने पर दिल्ली में दंगे करवाना चाहता था और उसके लिए पहले से गुपचुप ढंग से बैठकें कर रहा था?  जाकिर नाइक से मिलने वाले खालिद सैफी से आखिर किसान प्रदर्शन का क्या लेना-देना? अर्बन नक्सलियों से कृषि कानून का क्या संबंध?

आज सामने आई तस्वीर ने साफ कर दिया कि पिछले दिनों इस प्रदर्शन की मंशा पर उठे सवाल निराधार नहीं थे। खालिस्तानियों का समर्थन पाकर भी इस पर कोई स्पष्टीकरण न देने वाले किसान नेता अब रेलवे ट्रैक्स को ब्लॉक करने की धमकियाँ तक दे चुके हैं। पिछले दिनों इसी प्रोटेस्ट के मंच से युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने हिंदुओं के ख़िलाफ़ जहर उगला था।

योगराज ने खुलेआम कहा था, “जिस सरकार की आप बात कर रहे हैं केंद्र की, आपको पता है कि ये कौन हैं? ये वही हैं, जो अपनी बेटियों की डोली हाथ जोड़ कर मुगलों के हवाले कर देते थे।” योगराज के शब्द थे:

इसके अलावा हमारे तथाकथित अन्नदाताओं ने अपनी माँगे मनवाने के लिए खुलेआम पिछले दिनों मीडिया के सामने ये तक कह दिया था कि इंदिरा को ठोका, मोदी को भी ठोक देंगे

क्या संवैधानिक ढंग से हो रहे किसी प्रदर्शन में ऐसी बातें निकल कर सामने आती हैं? योगराज के हिंदू घृणा से भरे बयान पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया इंदिरा ठोक दी वाले बयान पर किसी ने मलाल नहीं किया। इसके बदले सरकार को अलग से धमकाया जा रहा है कि ट्रैक ब्लॉक होंगे

आजादी संग्राम में सिखों के बलिदान को आज कोई नहीं भुला रहा, कोई इस बात से इंकार नहीं कर रहा कि हिंदुओं के परेशानी के समय में सिख हमेशा उनके साथ रहे, कोई उनकी बहादुरी को नहीं ललकार रहा, लेकिन आप अपने विवेक पर फैसला कीजिए कि आखिर आज प्रदर्शन में शामिल किसान यूनियन के लोग सरकार की बातें सुनने को तैयार नहीं है। क्यों जिद पर अड़े हैं। क्यों बताया जा रहा है कि पहले से वह लोग 4 महीने का राशन लेकर आए हैं?

किसान आंदोलन में उमर खालिद और शरजील इमाम के पोस्टर का पहुँचना बताता है कि मुद्दों के नाम दिल्ली वालों को एक बार फिर भटकाया जा रहा है। शाहीन बाग के छद्म एजेंडे के बेनकाब होने के बाद अब वही ताकतें कृषि कानून के विरोध नाम रोटी सेंकने की कोशिश में हैं। प्रदर्शनों पर, गुरुद्वारों पर नमाज पढ़ने के लिए समुदाय विशेष को जगह देख कर नया प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है।

साभार : जयन्ती मिश्रा

विजय माल्या की बढ़ीं मुश्किलें, फ्रांस में 14.34 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त

केंद्र सरकार विजय माल्या को प्रत्यर्पित कराने की कोशिश में भी जुटी हुई है. विजय माल्या का प्रत्यर्पण अनुरोध काफी पहले ब्रिटेन भेजा गया था. यूके की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट (Westminster Magistrates’ Court) ने 10 दिसंबर, 2018 को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी विजय माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश दिया था. फैसले में कोर्ट ने लिखा था कि आरोपी माल्या के खिलाफ दर्ज मामलों में उसके शामिल होने के पुख्ता सबूत हैं. इसके बाद उसने ब्रिटेन के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का रुख किया लेकिन उसे वहां से भी राहत नहीं मिली.

नयी दिल्ली:

किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के मालिक और भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या पर प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. शुक्रवार को ईडी ने फ्रांस में विजय माल्या की 1.6 मिलियन यूरो की प्रॉपर्टी को जब्त किया है. विजय माल्या पर कार्रवाई करने के बाद ईडी ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘ईडी के आग्रह पर विजय माल्‍या की 32 अवेन्‍यू फोच (FOCH), फ्रांस की संपत्ति को फ्रेंच अथॉरिटी ने जब्‍त किया है.’

फ्रांस में जब्‍त की गई प्रापर्टी की कीमत 1.6 मिलियन यूरो (करीब 14.34 करोड़ रुपये) आंकी गई है. जांच में यह बात सामने आई है कि किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के बैंक खाते से विदेश में बड़ी रकम निकाली गई.

उल्लेखनीय है कि भारतीय कारोबारी विजय माल्या नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक के बैंक कर्ज धोखाधड़ी मामले में आरोपी है. इस वक्त वो ब्रिटेन में रह रहा है. माल्या के प्रत्यर्पण के लिए भारत ने कुछ माह पहले यूनाइटेड किंगडम (UK) सरकार से आग्रह किया था. भारत सरकार ने कहा था कि वह विजय माल्या के जल्द प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटिश सरकार के संपर्क में है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने मांगी थी रिपोर्ट
बीते मई महीने में माल्या ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में मनी लांड्रिंग एवं हजारों करोड़ की धांधली के मामले में भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपनी अपील हार गया था. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने केंद्र से कहा था कि वह ब्रिटेन में भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या को भारत को प्रत्यर्पित किए जाने सबंधी कार्रवाई पर छह सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दायर करे. न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा था कि भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के बाद मामले की सुनवाई यूनाइटेड किंगडम में उसके खिलाफ “गुप्त कार्यवाही” के कारण नहीं हो रही थी. 31 अगस्त को पुनर्विचार याचिका खारिज होने और सजा की पुष्टि होने के बाद माल्या अपने खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाला था.

गुपकार गैंग के उदय के बाद घाटी में बढ़ी आतंकी गतिविधियां, नगरोटा में 4 आतंकी ढेर

गुपकार गैंग के उदय के बाद जम्मू और काश्मीर में आतंकवाद एक बार फिरसक्रिय हो गया है. सूत्रों की मानें तो जहां दक्षिण काश्मीर में सेना ने स्थानीय और सीमा पार के आतंकियों पर लगाम लगाई थी वही अब गुपकार गैंग की शह पर जम्मू काश्मीर में पाँव पसार रहे हैं. सुरक्षा बलों ने आतंकियों को चारों ओर से घेर लिया. करीब ढाई घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने चारों आतंकियों का सफाया कर दिया. मारे गए आतंकियों के पास बड़ी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किया गया. फिलहाल आतंकियों की शिनाख्त नहीं हो पाई है. पुलिस उनके पुराने इतिहास का पता लगाने में जुटी है.

  • गाड़ी चेकिंग के दौरान आतंकियों ने की फायरिंग
  • कश्मीर में आतंकियों के ट्रक से जाने की सूचना
  • ट्रक पर जम्मू-कश्मीर का नंबर, एनकाउंटर जारी

श्रीनगर(ब्यूरो). 

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान जारी है. खुफिया जानकारी के बाद नगरोटा में सुरक्षा कड़ी की गई और  हर नाके पर आने जाने वाले वाहनों की जांच शुरू की गई. इस दौरान सुरक्षा बलों ने बान टोल प्लाजा के पास एक नाका लगाया था. 

वाहनों की जांच के दौरान आतंकवादियों के एक समूह ने सुरक्षा बलों पर सुबह 5 बजे फायरिंग शुरू कर दी. फायरिंग के बाद आतंकी जंगल की तरफ भागने लगे. फिर मुठभेड़ शुरू हो गई. सूत्रों ने बताया कि एनकाउंटर में 4 आतंकवादी मारे गए हैं. एनकाउंटर के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद है.

माना जा रहा है कि 3-4 आतंकवादी ट्रक के जरिये जम्मू-श्रीनगर हाईवे के रास्ते कश्मीर जाने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकियो को घेर लिया और फिर एनकाउंटर शुरू हो गया. इस घटना के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ लगे नगरोटा में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

गोलीबारी में एसओजी के जवान हुए घायल

बहरहाल, सुरक्षा बलों ने बताया कि गाड़ी चेकिंग के दौरान आतंकियों ने फायरिंग करनी शुरू कर दी. सुरक्षा बलों को कश्मीर में आतंकियों के ट्रक से जाने की सूचना थी. इसकी जांच करने के लिए हाइवे पर नाका लगाकर गाड़ियों की जांच शुरू की गई थी. जिस ट्रक रोका गया है उस पर जम्मू-कश्मीर का नंबर लगा हुआ है. अभी एनकाउंटर जारी है. हाइवे बंद है. आतंकियों के ट्रक से भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद किया गया है.

इससे पहले 6 नवंबर 2020 को दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के मेज पंपोर इलाके में आतंकियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ हुई थी. मुठभेड़ अगले दिन सुबह तक चली. इस एनकाउंटर में एक आतंकी को मार गिराया गया है. वहीं, एक को सरेंडर करने के पर मजबूर भी किया. इस एनकाउंटर के दौरान दो स्थानीय लोग भी घायल हो गए, जिसमें एक की मौत हो गई.