36 राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में कोई देरी नहीं होगी : राजदूत इमैनुएल लेनिन

भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना की आपातकालीन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 36 लड़ाकू राफेल विमान के लिए सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहला राफेल जेट विमान फ्रांस के एक एयरबेस पर आठ अक्तूबर को प्राप्त किया था।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

            भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनिन ने कहा कि भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में कोई देरी नहीं होगी और जिस समय सीमा को तय किया गया था उसका सख्ती से पालन किया जाएगा। 

फ्रांस कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों से जूझ रहा है और यूरोप से सबसे प्रभावित देशों में से एक है। देश में एक लाख 45 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित पाए गए हैं जबकि 28,330 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसी आशंकाएं थीं कि राफेल विमानों की आपूर्ति में महामारी के कारण देर हो सकती है। 
        
      भारत ने फ्रांस के साथ सितंबर 2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एक अंतर सरकारी समझौता करीब 58,000 करोड़ रुपये की लागत से किया था। लेनिन ने बताया, ”राफेल विमानों के कॉन्ट्रैक्ट का अब तक बिल्कुल सही तरीके से सम्मान किया गया है और वास्तव में कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक अप्रैल के अंत में फ्रांस में भारतीय वायु सेना को एक नया विमान सौंपा भी गया है।”

      रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 अक्टूबर को फ्रांस में एक हवाई अड्डे पर पहला राफेल जेट विमान प्राप्त किया था। राजदूत ने कहा, ”हम भारतीय वायुसेना की पहले चार विमानों को यथाशीघ्र फ्रांस से भारत ले जाने की व्यवस्था करने में मदद कर रहे हैं। इसलिए, यह कयास लगाए जाने के कोई कारण नहीं हैं कि विमानों की आपूर्ति के कार्यक्रम की समयसीमा का पालन नहीं हो पाएगा।”

गीता में कई मूल मंत्र है जिनसे की इस आपदा की घड़ी में हर पहलू पर नियंत्रण रखा जा सकता है: प्रोफ॰ दीप्ति

पंचकूला 24 मई:

      उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन की शुरुआत में प्रथम टेक्निकल सेशन में डॉक्टर रितु सिंह चैहान नेशनल प्रोफेशनल ऑफिसर डब्ल्यूएचओ नई दिल्ली ने कोविड-19 से संबंधित संवेदनशील मैसेजिंग व उससे जुड़े पहलुओं पर विस्तार से अवगत करवाया।   

उन्होंने कहा कि आज के समय में जागरूक होना आवश्यक है मगर उस जागरूकता का सही इस्तेमाल करना उससे भी ज्यादा आवश्यक है। इसलिए हमें इनसे ज्ञान अर्जित कर स्कूल स्तर पर भी शिक्षकों को अवगत करवाया जाना चाहिए। 

      डिप्टी डायरेक्टर उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा डॉ हेमंत वर्मा ने सभी का स्वागत किया। द्वितीय टेक्निकल सेशन में सीडीएलयू सिरसा की  प्रोफेसर दीप्ति धर्मानी ने उच्चतर शिक्षा संस्थान भगवत गीता की मदद से किस तरह कोविड-19 को हरा सकते हैं। इन पहलूओं पर बारीकि से प्रकाश डाला। प्रोफेसर दीप्ती ने कहा की गीता में कई सारे मूल मंत्र है जिनसे की इस आपदा की घड़ी में हर पहलू पर नियंत्रण रखा जा सकता है। 

      तीसरे टेक्निकल सेशन में रिटायर्ड आईएएस विवेक अत्रे ने कहा कि यह मोटिवेशनल स्पीकर की प्रेरणा ही सफलता की कुंजी है। इस पर विस्तार अपने विचार व्यक्त किए।  उन्होंने कई सारे व्यक्तिगत उदाहरण देकर प्रतिभागियों को सफल बनने की प्रेरणा दी। प्रैक्टिकल सेक्शन 4 में लेडी इरविन कॉलेज नई दिल्ली डॉ अपर्णा खन्ना ने गेम बाइ गेम, इस विषय पर प्रकाश डालकर उन्होंने विस्तार से दिखाया कि कैसे हम छात्रों को कोविड-19 की घड़ी में गेम्स के द्वारा व्यस्त रख सकते हैं। उन्होंने कई विस्तार से उदाहरण भी देकर समझाया। इसके उपरांत डॉक्टर बलदेव कुमार, प्रोफेसर प्रोमिला बतरा, डॉ आभा खेतरपाल, डॉ रीता कालरा इन सभी ने कोविड-19 से जुड़े तथ्य एवं सत्य पर पैनल डिस्कशन की जिसे डॉ अंजू मनोचा ने मॉडरेट किया।  डिप्टी डायरेक्टर डॉ हेमंत वर्मा ने सभी प्रतिभागी व अतिथि गणों का आभार जताया। 

लॉकडाउन में भुखमरी के कगार पर सेक्स वर्कर्स की जमात

वेश्यावृत्ति या प्रॉस्टिट्यूशन आज के जमाने में कोई नई बात नहीं है। वर्तमान समय में इस बारे में सभी को पता है। समाज में इसका चलन काफी लंबे समय से ही रहा है। हालांकि लोग इसके बारे में खुलकर बात करने या इसे स्वीकारने से हमेशा से ही कतराते रहे हैं। प्राचीनकाल में यानि कि राजा-महाराजाओं के जमाने में भी ऐसा हुआ करता था। यानि मोटे तौर पर यह समझ लें कि वेश्यावृत्ति हमेशा से ही विभिन्न समाजों का अभिन्न अंग रहा है। आज जहां कोरोना से सारा देश त्रस्त है लोग कम धंधे के लिए लॉकडाउन खुलने का इंतज़ार कर रहे हैं वहीं देश भर में रह रही वेश्याओं को अपने आज और आने वाले कल की भी चिंता सता रही है। लॉकडीपीडबल्यूएन की स्थिति में रोज़ कमाओ रोज़ खाओ वाली कमाई तो बंद हो ही गयी थी लेकिन आने वाले समय में वाइरस के भय से धंधा चौपट ही रहेगा।

अंग्रेजों के समय ‘नाच गर्ल्स'(nautch girls)

सारिका तिवारी, चंडीगढ़

Sarika Tiwari,
Chief Editor,
demokratikfront.com

देश में सिर्फ कोरोना का संकट नहीं है बल्कि लॉकडाउन के चलते बहुत से लोगों का व्यापार ठप हो गया है। दिहाड़ी मजदूरी करने वाले से लेकर रोजाना कमाने वालों की स्थिति लॉकडाउन के चलते खराब हो गई है। इनमें सेक्स वर्क्स भी शामिल हैं जिनके काम रुकने के कारण भुखमरी के हालात हो गए हैं। कोरोना के कारण देश में लॉकडाउन की घोषणा हो गई जिसके बाद इनके पास एक भी ग्राहक नहीं पहुंच रहे। ऐसे में इनकी आमदनी बिल्कुल रुक गई है एक एक दिन काटना पहाड़ हो गया है।

सैलरी के इंतजार में हैं सेक्स वर्करों के बच्चे

राजस्थान के अजमेर जिले की एक सेक्स वर्कर नमिता (बदला नाम) अपने परेशानी की बात बताती हैं। नमिता कहती है- हमारा पेशा ऐसा है जिसमें रोज कमाने खाने की स्थिति होती है। घर में किसी को नहीं पता की हम सेक्स वर्कर हैं। सबको ये ही लगता है की हम कमाने के लिए ऑफिस में काम करने जाते हैं। जब सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी तो घर पर सबको लगने लगा की हम काम पर नहीं जाएंगे तो भी हमें पैसे मिलेंगे।

हमारे बच्चे भी परेशान है। रोज पूछते हैं की आपकी सैलरी कब आएगी? क्या जवाब दूं उन्हें कि तुम्हारी मां एक सेक्स वर्कर है? मेरी मजबूरी थी इस पेशे में आना। क्या खिलाती बच्चों को? पति शराबी है और घर के खर्चों से उसे कोई मतलब नहीं। घर का खर्च चलाने के लिए मुझे ये काम करना पड़ता है। लॉकडाउन के चलते ये काम भी बंद हो गया है और पैसे भी नहीं आ रहे।

sex workers

नमिता अपने धंधे के बारे में बताते हुए कहती हैं की लोगों के अंदर इस वायरस का डर है, मुझे नहीं लगता की 6-7 महीने तक कोई भी हमारे पास आएगा। ये डर तो अब हमारे लिए भी है की जो व्यक्ति हमारे पास आएगा, पता नहीं वो कहां का है। ये परेशानी सिर्फ नमिता की नहीं है बल्कि उसकी जैसी और कितनी ही सेक्स वर्कर हैं जो इन दिनों अपना खर्चा ना चला पाने के चलते परेशान हैं। नमिता की तरह ही इस पेशे से जुड़ी लाखों सेक्स वर्कर्स की ये ही समस्या है। ऊपर से लॉकडाउन बढ़ने के संकेतों ने इनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है।

लॉकडाउन ने पैदा कर दिए भुखमरी के हालात

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में 30 लाख सेक्स वर्कर्स हैं जिनमें से नमिता एक है। वहीं ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 2 करोड़ सेक्स वर्कर है, जो इस पेशे से जुड़ी हुई हैं। दिल्ली की एक सेक्स वर्कर का कहना है की जल्दी ये लॉक डाउन नहीं खुला तो हमारे परिवार को भुखमरी झेलनी पड़ेगी। सरकार ने रातों रात लॉकडाउन कर दिया। हमें इतना भी समय नहीं मिला की हम आने वाले दिनों की तैयारी कर सकें।

सेक्स वर्कर्स देश की एक वो बड़ी आबादी है जो देश में मौजूद होने के बाद भी सरकार की मदद की तमाम योजनाओं में शामिल नहीं हैं। हजारों सेक्स वर्कर्स को सरकारी राशन इसलिए नहीं मिल पाता क्योंकि इनके पास राशन कार्ड नहीं हैं। इनके कमाने का जरिया ऐसा है जो इस लॉकडाउन की स्थिति में बिल्कुल भी संभव नहीं हैं। इन गलियों में काम करने वाली कितनी ही सेक्स वर्कर्स एचआईवी पॉजिटिव भी हैं और दूसरी बीमारियों से पीड़ित हैं पर इनके पास अस्पताल जाने तक के पैसे नहीं रह गए है।

कर्नाटक के कोलार जिले में रहने वाली सेक्स वर्कर भी इसी दुख से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि हम जिस एरिया में रहते हैं वहां 3 हजार सेक्स वर्कर रहती है जिसमें 80 प्रतिशत स्ट्रीट बेस्ड हैं और होम बेस्ड केवल 20 प्रतिशत हैं। लॉकडाउन मे सबसे ज्यादा नुकसान स्ट्रीट बेस्ड वर्कर को हुआ है। इनके लिए एक समय के खाने की व्यवस्था करना भी बहुत मुश्किल हो गया है। सरकार इन पर कोई ध्यान नहीं दे रही।

बहुत चर्चित हैं ये रेड लाइट एरिया

देश में बहुत से रेड लाइट एरिया हैं जो हमेशा चर्चा रहते हैं। एशिया का सबसे बड़ा रेडलाइट एरिया सोनागाछी को माना जाता है। ये कोलकाता का बहुत ही चर्चित एरिया है। यहां कम से कम तीन लाख महिलाएं इस धंधे से जुड़ी हैं। दूसरे नंबर पर मुंबई का कमाठीपुरा है जहां पर दो लाख से अधिक सेक्स वर्कर हैं। इसके बाद दिल्ली का जीबी रोड, आगरा का कश्मीरी मार्केट, ग्वालियर का रेशमपुरा, पुणे का बुधवार पेठ भी काफी चर्चित है।

पुणे का बुधवार पेठ

ये सेक्स वर्कर सिर्फ देश के बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं। छोटे शहरों में वाराणसी का मडुआडिया, मुजफ्फरपुर का चतुर्भुर्ज स्थान, आंध्र पद्रेश के पेड्डापुरम व गुडविडा, सहारनपुर का नक्काफसा बाजार, इलाहाबाद का मीरगंज, नागपुर का गंगा जमुनी और मेरठ का कबाड़ी बाजार इन सेक्स वर्करों के एरिया के लिए जाना जाता है। यहां रहने वाली कुछ सेक्स वर्कर दूसरे शहरों में पलायन कर चुकी हैं तो कुछ इन्हीं बंद गलियों में पड़े अपना दिन बिता रही हैं। इनके पास ना तो रहने का सही इंतजाम है औऱ ना ही खाने पीने का सामान मौजूद है।

सेक्स वर्करों को नहीं मिलता कोई सरकारी लाभ

ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर संगठन से जुड़ी रहने वाली कुसुम सेक्स वर्करों के हक और अधिकारों को लिए काम करती है। कुसुम बताती हैं की होम बेस्ड सेक्स वर्कर्स को बहुत परेशानिया हैं। जीबी रोड पर कुछ सेक्स वर्कर के पास स्वयं सेवी संस्थाएं पहुंचकर मदद भी कर रही हैं, लेकिन इन सेक्स वर्कर के बारे में तो कोई कुछ जानता भी नहीं है। इनकी तो गिनती करना भी मुश्किल है। अगर सिर्फ एक कॉलोनी की बात करें तो लगभग 500 महिलाएं होम बेस्ड सेक्स वर्कर्स हैं।

सेक्स वर्कर का कारोबार भी तीन हिस्सों में बंटा है। पहला है ब्रोथल, दूसरा होम बेस्ड जहां महिलाएं घर पर ही अपने ग्राहक खुद तय करती हैं। तीसरा है स्ट्रीट बेस्ड और ब्रोकर बेस्ड- यानी की वो जो दलालों के सहारे काम करती हैं।कुसुम ने बताया कि ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर संगठन इन्हीं सेक्स वर्कर की आवाज उठाता है। कुसुम ने बताया की हमारा संगठन जितना हो सकता है उतना राशन इन सेक्स वर्करों तक पहुंचा रहा है, लेकिन ये राशन भी कितने दिन तक चलेगा कुछ कहा नहीं जा सकता। कुछ सेक्स वर्कर किराए के कमरों में रहती हैं। उनके लिए किराया देना भी मुश्किल हो रहा है।

कुसुम जिस संगठन से जुड़ी है उसें देशभर की लगभग पांच लाख सेक्स वर्कर जुड़ी हैं। ये संगठन 16 राज्यों में काम करता है इस संगठन में कई राज्यों से 108 कम्यूनिटी बेस्ड संगठन जुड़े हैं। इस संगठन की संयुक्त सचिव सुल्ताना बेगम राजस्थान के अजमेर जिले में 580 रजिस्टर्ड सेक्स वर्कर के लिए आवाज उठाती हैं। उनका कहना है कि जितनी भी महिलाएं इस पेशे से जुड़ी है उनमें 60-70 प्रतिशत लोगों के परिवार को पता ही नहीं है कि वो क्या काम करती हैं। परिवारों को बस इतना पता है की वो जहां काम करती हैं उन्हें वहां पैसा तो मिलेगा ही। इस समय इनकी परेशानी बढ़ गई है क्योंकि खर्चा चलाने का और कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

आगे के महीनों में और बिगड़ सकते हैं हालात

आगे सुल्ताना कहती हैं कि इन सेक्स वर्करों को लोग बहुत अमीर समझते हैं, पर उनकी तकलीफ बस वहीं जान सकती है। इनके काम को काम का दर्जा नहीं मिला इसलिए सरकार की किसी योजना का फायदा भी इन्हें नहीं मिलता। लॉकडाउन में हमारी सरकार से गुजारिश है की इनकी सरकार जल्द से जल्द मदद करे वरना इनका परिवार भूखा मर जाएगा।

ऑल इंडिया नेटवर्क सेक्स वर्कर संगठन के को ऑर्डिनेट अमित कुमार बताते हैं कि देश में कोरोना जब शुरु हुआ तो जीबी रोड दिल्ली में रहने वाली करीब 60 फिसदी सेक्स वर्कर्स अपने घर जा चुकी थीं। अब वहां 40 फिसदी औरतें ही बची हैं। जिनकी कोठा मालकिन खाने का इंतजाम तो कर रही है, लेकिन किराए में कोई छूट नहीं दी है। अभी ये महिलाएं दोगुने कीमत पर ब्याज लेकर अपना काम चला रही हैं।

अमित ने लॉकडाउन हटने के 5-6 महीने के बाद की स्थिति का भी अनुमान लगा लिया है। उनका मानना है की जब सामान्य होने के बाद भी उनके किराए, राशन और पलायन की समस्या बनी रहेगी। जो घर जा चुकी हैं वो कोरोना के डर से वापस नहीं आने वाली। जो यहां रह गईं हैं उन्हें जल्दी ग्राहक नहीं मिलेंगे। लॉकडाउन के चलते इनकी स्थिति बहुत खराब हो गई है और इनका पेट भरने वाला भी कोई नहीं है।

इस्राइल में चीनी राजदूत डू वेई की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु

यरुशलम: 

इजराइल में चीन के राजदूत रविवार को तेल अवीव में अपने घर में मृत पाए गए. इजराइल के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी. मौत की कोई वजह नहीं बताई गई है और इजराइली पुलिस ने कहा कि वह मामले की छानबीन कर रही है. कोरोना वायरस वैश्विक महामारी संकट के बीच डू वेई को फरवरी को राजदूत नियुक्त किया गया था. वह पहले यूक्रेन में चीन के राजदूत थे. उनके परिवार में पत्नी और एक बेटा है तथा दोनों इजराइल में नहीं थे. मौत से दो दिन पहले उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की उन टिप्पणियों की आलोचना की थी जिसमें इजराइल में चीन के निवेश की निंदा की गई और चीन पर कोरोना वायरस के बारे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था.

इज़राइल में तीन चुनावों के बाद अब सरकार बनना तय
गतिरोध और बिना किसी स्पष्ट नतीजे के तीन बार हुए चुनावों और डेढ़ साल तक कार्यवाहक सरकार रहने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार रविवार को अंतत: शपथ ले रही है. शपथ से पहले भी हालांकि तीन दिनों तक मंत्री पद को लेकर उनकी लिकुड पार्टी के अंदर काफी खींचतान चलती रही. सप्ताहांत पर नेतन्याहू और उनके विरोधी से सहयोगी बने बेनी गांट्ज ने नई सरकार के गठन के लिये साथ आने की घोषणा की. नई सरकार में इज़राइल के इतिहास में सबसे ज्यादा 36 मंत्रियों और 16 उप मंत्रियों के होने की उम्मीद है.

नेतन्याहू और पूर्व सेना प्रमुख गांट्ज ने पिछले महीने कहा था कि वे कोरोना वायरस संकट और गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिये अपने मतभेदों को दरकिनार कर साथ आ रहे हैं.

सत्ता साझेदारी के विवादित समझौते के तहत सरकार गठन के पहले 18 महीने नेतन्याहू प्रधानमंत्री रहेंगे और उसके बाद अगले 18 महीने सरकार की बागडोर गांट्ज के हाथों में होगी. दोनों पक्षों के समान संख्या में मंत्री होंगे और अन्य प्रमुख मुद्दों पर वीटो करने की परोक्ष शक्ति भी.

आलोचक ऐसे समय में सरकार में इतने मंत्री बनाए जाने की आलोचना कर रहे हैं जब कोरोना वायरस के कारण बेरोजगारी दर बढ़कर 25 प्रतिशत पहुंच गई है.

नेतन्याहू के खेमे में कई छोटे दल भी शामिल हैं और ऐसे में लिकुड पार्टी के पदाधिकारियों को देने के लिये उनके पास सीमित संख्या में मंत्रीपद हैं और ऐसे में गुरुवार को निर्धारित शपथ ग्रहण समारोह से पहले पार्टी के नाराज वरिष्ठ सदस्यों के हल्के विरोध का भी उन्हें सामना करना पड़ा. यह मामला समय पर नहीं सुलझा पाने के कारण नेतन्याहू ने पार्टी के अंदरूनी संकट के समाधान के लिए शपथ ग्रहण टालने को कहा था.

सत्ता के लिये हुई साझेदारी की वजह से गांट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी पहले ही बंट गई है कि उसने नेतन्याहू के साथ काम नहीं करने के अपने मुख्य चुनावी वादे से समझौता कर लिया. नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार का आरोप है और उन्हें मुकदमे का सामना करना है.

दोनों पार्टियों में यह समझौता होने से पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि उसके पास इसे रोकने का कोई कानूनी आधार नहीं है.

आलोचनाओं के बावजूद गांट्ज की दलील है कि नेतन्याहू से हाथ मिलाना देश को लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक गतिरोध और इज़राइल को एक बार फिर खर्चीले चुनाव में ढकेलने से रोकने का एक मात्र रास्ता था. इज़राइल में अगर फिर चुनाव की नौबत आती तो लगभग एक साल में चौथा चुनाव होता.

गांट्ज नई सरकार में रक्षा मंत्री होंगे जबकि उनके साथी सेवानिवृत्त पूर्व सेना प्रमुख गाबी अस्केनाजी विदेश मंत्री बनाए जाएंगे. लिकुड पार्टी में नेतन्याहू के शीर्ष सहयोगी निवर्तमान विदेश मंत्री इज़राइल काट्ज वित्त मंत्री बनाए जाएंगे.

आलोचना की एक मुख्य वजह “वैकल्पिक प्रधानमंत्री” का नवसृजित पद है. यह गांट्ज से पद बदलने के बाद भी नेतन्याहू को कार्यालय में बने रहने और भ्रष्टाचार के मुकदमे और संभावित अपील प्रक्रिया पर नजर रखने में मदद करेगा.

इस बात को लेकर भी लोगों में संदेह है कि क्या नेतन्याहू मोलभाव के अपने पक्ष को बरकरार रखते हुए अंतत: गांट्ज को पद सौंपेंगे.

इसके बाद भी नया पद माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री को मिलने वाली सभी सुविधाओं से युक्त होगा जिसमें आधिकारिक आवास और सबसे महत्वपूर्ण कानून से यह छूट कि प्रधानमंत्री के आधिकारिक पद पर नहीं रहने वाले व्यक्ति को आरोप लगने पर इस्तीफा देना होता है.

नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार, विश्वास भंग और घूस लेने के कई आरोप हैं.

ट्रम्प ने दी चीन को धमकी, कहा हर रिश्ता तोड़ देंगे

  • कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच चीन से खफा हुआ अमेरिका, दी धमकी
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी चीन को धमकी, कहा- हर रिश्ता हम तोड़ देंगे
  • पिछले कई हफ्तों से राष्ट्रपति पर चीन के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ रहा है

डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए चीनी स्टॉक मार्केट से अरबों डॉलर के अमेरिकी पेंशन निधि निवेश को वापस लेने का ऐलान कर दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनियाभर में कोरोना वायरस के फैलने के मद्देनजर चीन से सारे रिश्ते तोड़ने की गुरुवार को धमकी दी। जानलेवा संक्रमण ने दुनियाभर में तकरीबन तीन लाख लोगों की जान ले ली है, जिनमें 80,000 से ज्यादा अमेरिकी शामिल हैं। ट्रंप ने एक न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि कई चीजें हैं जो हम कर सकते हैं। हम सारे रिश्ते तोड़ सकते हैं। साथ ही उन्होने चीन के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए चीनी स्टॉक मार्केट से अरबों डॉलर के अमेरिकी पेंशन निधि निवेश को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने पुष्टि की है कि उनके प्रशासन ने चीन से अरबों डॉलर के अमेरिकी पेंशन निधि निवेश वापस लेने की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है. ट्रंप के इस कदम से चीन के स्टॉक मार्केट को भारी नुकसान हो सकता है।

पिछले कई हफ्तों से राष्ट्रपति पर चीन के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ रहा है। सांसदों और विचारकों का कहना है कि चीन की निष्क्रियता की वजह से वुहान से दुनियाभर में कोरोना वायरस फैला है। एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से फिलहाल बात नहीं करना चाहते हैं। हालांकि, उनके चिनफिंग से अच्छे रिश्ते हैं।

‘…लेकिन चीन ने इस बात को नहीं माना’
ट्रंप ने कहा कि चीन ने उन्हें निराश किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने चीन से बार-बार कहा कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वुहान की प्रयोगशाला जाने की इजाजत दी जाए, लेकिन उसने इसे नहीं माना।

इससे पहले अमेरिका ने चीन पर बौद्धिक संपदा और अनुसंधान कार्य से जुड़ी जानकारियां चोरी करने का भी आरोप लगाया गया था. ‘फॉक्स बिजनेस न्यूज’ पर जब ट्रम्प से उन खबरों के बारे में पूछा गया कि क्या अमेरिका ने चीनी निवेश से अरबों डॉलर की अमेरिकी पेंशन निधि निकाली हैं, तो राष्ट्रपति ने कहा, ‘अरबों डॉलर, अरबों … हां, मैंने इसे वापस ले लिया’

एक अन्य सवाल में, राष्ट्रपति से पूछा गया कि क्या वह अमेरिकी शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होने के लिए चीनी कंपनियों को सभी शर्तों का पालन करने के लिए मजबूर करेंगे? ट्रंप ने कहा, ‘हम इस मामले पर बहुत करीब से ध्यान दे रहे हैं। यह बहुत आश्चर्यजनक है, लेकिन इस मामले में एक समस्या है. मान लीजिए कि हम ऐसा (शर्तों का पालन करने के लिए मजबूर) करते हैं, ठीक है? तो फिर वे क्या करेंगे? वे लंदन या किसी अन्य स्थान पर इसे सूचीबद्ध कराने जाएंगे।’

कमाई साझा नहीं करती चीनी कंपनियां

आरोप है कि अलीबाबा जैसी चीनी कंपनियों को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन वे उस तरह कमाई की जानकारी साझा नहीं करते, जिस तरह कोई अमेरिकी कंपनी करती है। इस बीच, कुछ समाचार रिपोर्टों के अनुसार, चीन उन अमेरिकी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है, जिन्होंने कोरोना वायरस प्रकोप से निपटने में लापरवाही बरतने को लेकर चीन के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाली मांग संबंधी प्रस्ताव सीनेट में पेश किया है। कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद अमेरिका और चीन के संबंध बिगड़ गए हैं। अमेरिका ने कोरोना वायरस से निपटने में चीन के रुख पर निराशा व्यक्त की है। कोरोना वायरस अब तक अमेरिका में 80,000 से अधिक लोगों की जान ले चुका है।

कोरोना के बाद अब आण्विक हथियारों की दौड़ में चीन

चीन और पाकिस्तान दो ऐसे देश हैं जो कभी अपने अजेंडे से इतर काम नहीं करते। पाकिस्तान का काम आतंकवाद का पोषण करना है जिसमें वह हमेशा बेशर्मी दिखाता आया है और अब तो उसे अपने आका चीन का वरदहस्त प्राप्त है और दूसरी तरफ चीन है वह विश्व की सबसे बड़ी प्रभावशाली अर्थव्यवस्था और वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है और इसके लिए वह कुछ भी करेगा। चीन के उत्कोच से संयुक्त राष्ट्र भी झुक चुका है और कोरोना की मार से बड़े बड़े राष्ट्र घुटनों पर हैं, ऐसे में यदि कोई भी राष्ट्र चीन के विरुद्ध खड़ा होगा तो वह संयुक्त राष्ट्र और चीन की मार झेलने के लिए तैयार रहे।

चीन के उत्कोच से संयुक्त राष्ट्र भी झुक चुका है

नई दिल्ली: 

मुसीबत के वक्त ही नायकों और खलनायकों की पहचान होती है. इस वक्त दुनिया कोरोना की मुसीबत से जुझ रही है लेकिन कोरोना से विश्वयुद्ध के दौरान भी कुछ देश ऐसे हैं जो विनाशकारी हथियारों से युद्ध लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. यही हैं दुनिया के वो खलनायक जो कोरोना काल में भी युद्ध काल की तैयारी में जुटे हैं. इस देशों में सबसे उपर है चीन जिसने पहले दुनिया में कोरोना फैलाया और जब दुनिया कोरोना की वैक्सीन खोज रही है तब चीन एटमी परीक्षण कर रहा है.  

दुनिया के लिए चीन की खुराफातें मुसीबत बनती जा रही हैं. पहले चीन की वुहान लैब से कोरोना वायरस लीक के बाद दुनिया पर महामारी की मुसीबत टूटी और अब जिस वक्त पूरी दुनिया चीन से निकले वायरस के खिलाफ विश्वयुद्ध लड़ रही है. उस वक्त का इस्तेमाल भी चीन अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कर रहा है. यानि ताकत बढ़ाने और ताकत दिखाने का ड्रैगन का नशा कोरोना काल में भी कम नहीं हो रहा और ताकत का यही नशा चीन को दुनिया की नजरो में खलनायक बना रहा है. 

कोरोना आपातकाल में चीन का एटमी परीक्षण!

एक तरफ दुनिया कोरोना की वैक्सीन बनाने की तैयारी में जुटी है. कहीं पर जानवरों तो कहीं पर मानवों पर टीके का परीक्षण किया जा रहा है लेकिन इस मुश्किल वक्त में चीन एटमी परीक्षण कर रहा है. ये खबर अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही काफी बढ़ चुके तनाव को और ज्यादा बढ़ा सकती है. 

अमेरिका के गृह विभाग ने चीन पर परमाणु परीक्षण का आरोप लगाया है. आरोप है कि चीन ने जमीन के नीचे परमाणु परीक्षण किए हैं. चीन कम तीव्रता वाले परमाणु बम तैयार कर रहा है. अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने चीन पर यह आरोप लगाया है कि चीन ऐसे ब्लास्ट्स को लेकर बनाए गए समझौते के पालन की बात करता है लेकिन फिर भी उसने कम तीव्रता के परमाणु बम के परीक्षण किए हैं. चलिए अब आपको अमेरिका के आरोपों के पीछे की वजह भी बताते है. इस इलाके को देखिए. ये चीन की लोप नुर टेस्ट साइट है जहां पर चीन परमाणु परीक्षण करता है. कभी यहां पर एक बड़ा तालाब हुआ करता था लेकिन चीन ने अपनी नापाक इरादों के लिए तालाब को सुखाकर यहां परमाणु परीक्षण करने शुरू कर दिए. 

क्यों बढ़ा चीन पर अमेरिका का शक? 

चीन लोप नूर टेस्ट साइट पर सालभर से तैयारी कर रहा है. लोप नुर टेस्ट साइट में बड़े स्तर पर खुदाई की गई है. न्यूक्लियर परीक्षण को लेकर चीन पारदर्शिता नहीं बरत रहा है. जिन कम तीव्रता वाले परमाणु बमों के परीक्षण का शक जताया गया है, उन पर चीन और पाकिस्तान साथ में काम कर रहे हैं और इनसे किसी छोटे इलाके को निशाना बनाना आसान होता है. 

पाकिस्तान के FATF के ब्लैक लिस्ट में जाने का खतरा बढ़ गया है

नई दिल्ली: 

पूरी दुनिया इस समय मानवता को बचाने में जुटी है और कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जुटी है, लेकिन पाकिस्तान इस मुश्किल की घड़ी में भी अपने पुराने ही एजेंडे पर चल रहा है. पाकिस्तान ने अपने आतंक की फैक्ट्री से चुपके से करीब 4 हजार आंतकियों के नाम हटा दिए हैं.

पाकिस्तान की लिस्ट से गायब हुए आंतकियों में मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड जकी उर रहमान लखवी भी है. लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर जकी उर रहमान लखवी समेत कई बड़े आतंकियों का नाम इस सूची से बड़ी सफाई से गायब कर दिया गया है.

पाकिस्तान ने ये साजिश ऐसे समय में रची है जब जून में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की बैठक में पाकिस्तान के भाग्य का फैसला होने जा रहा है. पाकिस्तान फिलहाल FATF के ग्रे लिस्ट में है और अगर पाकिस्तान आतंकवाद पर लगाम नहीं लगा पाता है तो उसे जल्द ही ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा.

इससे पहले इसी साल फरवरी में एफएटीएफ ने कहा था कि उसकी ओर से दिए गए 27 कार्यों में अभी भी 13 को पाकिस्तान पूरा नहीं कर पाया है, हालांकि पाकिस्तान ने दुनिया को भरोसा दिलाया था कि वो आतंक पर लगाम लगाएगा.

वैसे पाकिस्तान FATF के सामने पहले भी चालबाजी दिखा चुका है. फरवरी में FATF की बैठक से ठीक पहले ये ऐलान कर दिया था कि ग्लोबल आंतकी मसूद अजहर लापता है, हांलांकि बाद में पाकिस्तान का ये झूठ बेनकाब हो गया और ये पता चल गया था कि वो बहावलपुर में ISI के संरक्षण में ही छिपा हुआ था.

पाकिस्तान पहले भी आतंक के खिलाफ लड़ाई में दुनिया की आंखों में धूल झोंकने का काम कर चुका है, लेकिन चीन जैसे कुछ मित्र देशों की वजह से हर बार वो अपने उपर होने वाली कड़ कार्रवाई से बच जाता है. लेकिन जिस तरह से पाकिस्तान बार बार दुनिया के भरोसे को ध्वस्त कर रहा है. उससे पाकिस्तान के FATF के ब्लैक लिस्ट में जाने का खतरा बढ़ गया है.

कोरोना : त्रासदी के साथ अवसर भी @ भारत

      ऐसा माना जा रहा  है कि साल 2020 की शुरुआत ही कोरोना नामक वायरस का मानव पर हमले से हुई और  चीन के  एक शहर वुहान मे चमगादड़ से यह वायरस इन्सान के शरीर मे आया है यह  अत्यंत चिंता  एवं  खोज का विषय तो है ही पर   सवाल चीन की नियत पर  भी उठ रहा है कि  कंही  I विश्व शक्ति बनने की दौड़ मे कभी चीन तो यह नहीं कर रहा है  । विश्व शक्ति बनने के इस  विनाशकारी खेल मे कई बार अमरीका और पूर्व सोवियत संघ रूस आमने सामने आ चुके थे  पर क्या हासिल हुआ यह  सर्व विदित  है

इस  महामारी  से भारत भी अछूता नहीं है 

      पर आशावादी नजरिये से आज के इस लेख क़े माध्यम से मैं आप का ध्यान  भारत के लिए यह  कोरोना   त्रासदी  क़े साथ अवसर   के तौर पर भी  दिलाना चाहूँगा

प्रो . महिपाल सिंह
पूर्व अकादमिक सलाहकार  
अंसल यूनिवर्सिटी

      अगर  आप आकड़ो के हिसाब से देखे तो यह प्रतीत होता है की भारत सब से कम प्रभावित होने वाले देशो मे शुमार  है, पर साथ ही स्वास्थ्य  सेवाओं के  मापदंडो मे बहुत ही निम्न स्तर पर  है। वही दूसरी और  बेहतरीन स्वास्थय  सेवाओं के बावजूद   यूरोप, अमरीका, ग्रेट ब्रिटेन  जैसे विकसित देश  इस ला – इलाज बीमारी का सामना करने मे लगभग विफल साबित हो रहे  है।

      सभी देशो क़े सामने जो सबसे बड़ा  सवाल खड़ा हो रहा है वो ये कि  आज की  दुनिया चीन पर कितनी निर्भर हो गई है,  सिर्फ इस लिए कि चीनी  सामान सस्ता होता  है  तो हम खुद  क्यों उत्पादन  करे? लगभग दुनिया क़े सभी देशो ने अपने  संसाधनों को किनारे कर क़े पूरी तरह  से अपने   उद्योगों  और श्रमशक्ति को  विराम अवस्था मे डाल दिया है।

       परन्तु  जब  कोविड 19   क़े कारण चीन मे प्रोडक्शन लाइन रुक गई  तो सारी दुनिया क़े बाजार संकट मे आ गए और विश्व प्रसिद्ध स्टॉक एक्सचेंज  ‘वाल स्ट्रीट’ तक  में सन 1929 क़े क्रैश से भी तेज गिरावट दर्ज की  गई।   ब्रितानी   पाउंड 35 साल के  निम्न सत्र पर आ गया क्यों कि ब्रिटेन, यूरोप और अमेरिका तथा भारत सहित विकासशील देशो मे बेचे जाने वाली 95 % एंटीबायोटिक दवा चीन उपलब्ध करवाता है।  यह तो  मात्र एक वस्तु का उदाहरण है ऐसी अनेको वस्तुओ  के लिए दुनिया के देश पूर्णतया चीन पर निर्भर हो चुके है।

       अब   भारत क़े पास मैन्युफैक्चरिंग  क्षेत्र मे चीन की जगह लेने का भरपूर अवसर है,  दुनिया के  देशो  के  लिए दवाओं से लेकर स्मार्टफोन  तक  अनेको वस्तुओ की सप्लाई चेन टूट गई है।  इस कारण अफोर्डेबल मैन्युफैक्चरिंग क़े लिए  चीन का विकल्प ढूंढा जा रहा है, बल्कि जापान जैसे कुछ विकसित देशो ने तो चीन मे कार्यरत अपनी कम्पनियों   पलायन कर   दूसरे विकासशील देशो मे उद्योग स्थापित करने की सलाह  तक दे दी है  अब इस   अवसर को भांपते हुए  भारत ने समझदारी भरे कदम उठाये तो यह मौका उनके हाथ लग सकता है। बस शर्त भारत की राजनैतिक इच्छा शक्ति  स्मार्ट अफसरशाही  तथा वर्क फोर्स को ज़्यादा सक्ष्म  और स्किल्ड हो। साथ साथ  अपने हितो को ध्यान मे रख कर विदेशी कम्पनीओ क़े लिए राह और भी आसान बनानी होगी,  तभी आप हर हाथ को काम देने क़े सपने को साकार कर सकते हैं। तब तक सामान  क्षेत्रीय विकास की नीति बना कर प्रवासी मजदूरों की समस्या से निजात  पाई जा सकती है और सही  मे मायनो मे  जी डी पी और प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाया जा  सकता  है।

      गौरतलब है कि  भारत के पास  सिर्फ मलेरिया से लड़ने की सब से सस्ती  एक दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोकुनीन  है और दुनिया क़े सब मुल्को मे सबसे अधिक भारत मे बनाई जाती है  विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO तथा विकसित देशो के डॉक्टर  इस  दवाई को  कोरोना क़े इलाज मे सब से ज़्यादा कारगर  बता रहे  है

   और विश्व शक्ति  समझने वाले ये  देश आप से इस दवा को  लेने क़े लिए मिन्नत कर रहे है और अपने करोडो  नागरिको  की जिंदगी बचाने  के लिए  उम्मीद भरी नजरो  से आप की तरफ    देख रहे है  अमरीका जहा आप का दिल से शुक्रिया अदा  कर रहा है वही ब्राजील के राष्ट्रपति इस दवा को  हनुमान जी  की संजीवनी बूटी की  संज्ञा दे रहे है तो जरा कल्पना करो आज आप क़े पास  वेंटीलेटर मास्क तथा मानव रक्षक दवाओं का भंडार और  बनाने की क्षमता और कौशल होता तो आप आज अरबो खरबो का व्यापर कर चुके होते और दुनिया मे आप की साख  भी बढ़ती।

      इस आपदा से  यह भी  जगजाहिर  हो गया की हमारे देश का  स्वास्थ्य  तंत्र कितना लचर  है और हॉस्पिटलों  मे  जीवन रक्षक  मेडिकल उपकरण जैसे  मास्क, वेंटिलेटर्स आदि की कमी की बहुत ही  भयावह तस्वीर सामने आई है,  हम कितने सजग है और किन किन  उपकरणों का अपने देश मे निर्माण करते  है और क्या नहीं  तथा   ऐसी वस्तुओ के लिए हम करोडो डॉलर इम्पोर्ट पर खर्च करते है  जो हम अपने कौशल के बल पर देश मे ही निर्माण कर सकते है  यह सही  वक्त है इन अवसरों को  निर्माण मे बदलने का

      देश की राज्य सरकारों  और केंद्रीय सरकार को  साहस जुटाना  होगा वस्तुओ क़े निर्माण  और अनुसन्धान का  उपभोक्तावादी सोच से ऊपर उठ कर निर्माता की सोच बनानी होगी आज यह भी निश्चित हो चुका है की दुनिया को भारत  से कौन सी वस्तुए चाहिए। आज  विश्व समुदाय  हमारी  प्रतीक्षा कर रहा है  

      जैसा की विश्व सतर पर अनुमान लगाया जा रहा है की अगर इस कोरोना बीमारी की उत्पत्ति और प्रसार मे चीन की कुटिल नीयत  शामिल है तो विश्व समुदाय अपने  लाखो  निर्दोष नागरिको  की मौतों  का बदला जरूर लेगा और परिणाम स्वरूप   बहुत ही जबरदस्त आर्थिक प्रतिबंद चीन पर लगाए जा  सकते है  तब तो भारत की पौ बारह हो सकती है

       मेरा अनुमान है की वो समय आ गया है की आप “मेक इन इंडिया” के साथ “मेक बाय इंडिया” का सपना भी साकार कर सकते है उस क़े पीछे एक और सटीक दलील यह  है की  चीन क़े अलग थलग  पड़ने पर  सिर्फ  भारत क़े  पास ही मैनपावर और उद्योगिक इंफ़्रा, निवेश के लिए अनुकूल माहौल मौजूद है जो स्वयं  भारत की घरेलू  जरुरत  और  विश्व की वस्तु निर्माण कंपनियों की जरूरतों को  पूरा कर सकती है।  ऐसी परिस्थितियों  के सन्दर्भ  मे  भगवान श्री कृष्ण ने  विश्व प्रसिद्ध गीता उपदेश मे यही बताया था  की अवसर सिर्फ  अवसर होता है उस क़े साथ कोई किन्तु परन्तु  मत करो  बल्कि जितना जल्दी हो  सके उसका फायदा उठाना चाहिए

            भारत मे अपार सम्भावनाओ के मद्दे नजर   कुछ  क्षेत्रों जैसे कृषि (फल, फूल, मसाले) प्रसंस्करण क्षेत्र, फार्मा क्षेत्र, केमिकल, पेट्रोकेमिकल, आयुर्वेदिक दवा, एक्सपोर्ट, ऑटो पार्ट्स निर्माण, टाइल एवं सेरेमिक उत्पाद, इंटीरियर, हाउस होल्ड गुड्स, डायमंड स्टोन क्राफ्टिंग, वुड एंड प्लास्टिक फर्नीचर गुड्स, मेडिकल औजार  जैसे  डाइलिसिस मशीन, वेंटिलेटर्स, मॉनिटर और सहायक साजो सामान  के स्व देशी  निर्माण  के लिए क्रन्तिकारी विश्व निर्माता नीति बना कर  समयबद्ध और  चरणबद्ध   तरीके से  लागू कर क़े दुनिया क़े सामने मिसाल पेश कर सकते है 

मौलाना साद का मरकज़ एक बड़े षड्यंत्र का सूत्रधार हो सकता है

  • मरकज के खातों में आई थी काफी रकम, बैंक ने किया था अलर्ट
  • हवाला के जरिए ट्रांसफर का शक, क्राइम ब्रांच 17 दिन बाद भी मौलाना तक नहीं पहुंच सकी
  • मरकज के लेन-देन के मामले की जांच ईडी और इनकम टैक्स को सौंपी जा सकती है
  • जांच एजेंसी मौलाना समेत सात आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार हाथ-पांव मार रही है

जमातियों के जरिये देश में कोरोना फैलाने के बाद से मौलाना साद फरार है लेकिन पुलिस के शिकंजे से दूर रहना उसके लिए ज्यादा दिनों तक संभव नहीं हो पाएगा. पुलिस ने मौलाना साद के जुर्मों का हिसाब करना शुरू कर दिया है. मौलाना साद ने सिर्फ देश में कोरोना वायरस फैलाया बल्कि इसके लिए हवाला के जरिये विदेशों से फंडिंग हासिल की. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक, मरकज कार्यक्रम से पहले मौलाना साद के एकाउंट में बड़ी रकम आई.

नई दिल्ली(ब्यूरो):

 मौलाना साद ने सिर्फ देश में कोरोना वायरस फैलाया बल्कि इसके लिए हवाला के जरिये विदेशों से फंडिंग हासिल की. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक, मरकज कार्यक्रम से पहले मौलाना साद के एकाउंट में बड़ी रकम आई. मौलाना साद के चार्टर एकाउंटेंट से एक बैंक ने पूछताछ की थी. 2005 के बाद हवाला के जरिये मरकज के खाते में बड़ी रकम आई. सऊदी अरब और बाकी देशों से खाने-पीने के नाम पर कैश आना शुरू हुआ. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मरकज को नोटिस जारी कर जानकारी मांगी है. निजामुद्दीन मरकज में ज्यादातर फंडिंग हवाला के जरिये हो रही थी. 

जमातियों के जरिये देश में कोरोना फैलाने के बाद से मौलाना साद फरार है लेकिन पुलिस के शिकंजे से दूर रहना उसके लिए ज्यादा दिनों तक संभव नहीं हो पाएगा. पुलिस ने मौलाना साद के जुर्मों का हिसाब करना शुरू कर दिया है. हम आपको पुलिस की कार्रवाई के बारे में बताएंगे लेकिन उससे पहले जमात के हवाला कनेक्शन पर बड़े खुलासे जानिए: 

सबसे बड़ा खुलासा ये है कि मरकज कार्यक्रम से पहले मौलाना साद के खाते में बड़ी रकम आई. 2005 के बाद हवाला के जरिये मरकज के खाते में इतनी बड़ी रकम आई थी. सऊदी अरब और बाकी देशों से खाने-पीने के नाम पर कैश आना शुरू हुआ. सूत्रों के मुताबिक निजामुद्दीन मरकज में ज्यादातर फंडिंग हवाला के जरिये हो रही थी. ये खुलासे दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आए हैं. निजामुद्दीन के एक बैंक अधिकारी ने मौलाना साद के चार्टर एकाउंटेंट से पूछताछ  भी की है. 

साद के खिलाफ ED ने दर्ज किया केस

तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद के खिलाफ अब प्रवर्तन निदेशालय ने भी केस दर्ज कर लिया है. साद के खिलाफ ये केस मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में दर्ज किया गया है. बुधवार को ही दिल्ली पुलिस ने मौलाना साद पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया था. इससे पहले, तबलीगी जमात के मौलाना साद की मुश्किलें पहले से ही बढ़ती हुई नजर आ रही थीं. बुधवार को ही दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम निजामुद्दीन मरकज पहुंची थी. क्राइम ब्रांच ने मरकज से दो रजिस्टर और CPU भी बरामद किए. दिल्ली पुलिस ने

– मौलाना साद और जमात के बाकी आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है. 
– इस धारा के तहत कम से कम दस साल या उम्रकैद तक की सज़ा का प्रावधान है. 

इससे पहले, मौलाना साद पर महामारी कानून के तहत केस दर्ज किए गए थे. इस बीच मौलान साद के ससुराल तक कोरोना वायरस पहुंच गया है.  यूपी के सहारनपुर में साद की ससुराल है, जहां पर उसके दो रिश्तेदार कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. साद के ये दोनों रिश्तेदार लॉकडाउन से पहले निजामुद्दीन के एक होटल में रुके थे.  

कुल मिलाकर मौलाना साद की मुश्किलें हर ओर से अब बढ़ती ही नजर आ रही हैं. शुरुआत से ही पहले पुलिस की चेतावनी को नजरअंदाज करना और फिर अब नोटिस के बाद भी पुलिस से छिपना ये बता रहा है कि मरकज की आंड़ में कैसे मौलाना साद कोरोना के जरिए देश में साजिश रचने का काम कर रहा था. 

चीन की जीडीपी वर्ष 2020 की पहली तिमाही में यह 6.8 प्रतिशत घट गई

बीजिंग: 

चीन की जीडीपी में 1976 की विनाशकारी सांस्कृतिक क्रांति के बाद से अब तक की सबसे बड़ी गिरावट आई है. वर्ष 2020 की पहली तिमाही में यह 6.8 प्रतिशत घट गई. इस दौरान कोरोना वायरस महामारी का मुकाबला करने के लिए उठाए गए अप्रत्याशित उपायों के चलते दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थम सी गई थी.

चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) ने शुक्रवार को कहा कि 2020 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में चीन का सकल घरेलू उत्पाद 20,650 अरब युआन (लगभग 2910 अरब डॉलर) रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 6.8 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है.

एनबीएस के आंकड़ों के मुताबिक इस तिमाही के पहले दो महीनों में 20.5 फीसदी की कमी आई. इस तरह तीसरे महीने में अपेक्षाकृत कुछ सुधार आया.

चीन की अर्थव्यवस्था में 2019 में 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी. अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध के कारण यह वृद्धि दर पिछले 29 वर्षों में सबसे कम थी, लेकिन छह प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर रही थी.

पिछले साल दिसंबर में चीन के वुहान शहर से सामने आए कोरोना वायरस ने चीन और दुनिया को बुरी तरह प्रभावित किया है और ताजा आंकड़ों से साफ है कि इसके चलते चीन की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा, जो पहले से ही सुस्ती के दौर में चल रही थी.