आप झंडे उठाकर खालिस्तान के नारे लगाओ फिर भी हम भागने वाले नहीं है, पहले भी शहादत दी है: बिट्टू

‘आप झंडे उठाकर खालिस्तान के नारे लगाओ, फिर भी हम भागने वाले नहीं है। पहले भी शहादत दी है. हम पर बड़ी प्लानिंग के तहत हमला किया गया है, मारने की प्लानिंग थी। हम लोगों पर कातिलाना हमला किया गया है. हमारी पगड़ी पर हमला किया गया. लाठी से हमला हुआ। हम जाने वाले नहीं है. कुछ लोग हैं, इनसे सरकार और एजेंसी निपट लेंगी. 26 जनवरी को जो होना था वो आज ही एक्सपोज हो गया. उनके हाथ में झंडे थे, वो किसानों के झंडे नहीं थे.’ यह शब्द सिंघू बार्डर पर पहुंचे स्वर्गीय पूर्व मुख्य मंत्री सरदार बेअंत सिंह ए पौत्र और वर्तमान में लुधियाना से कॉंग्रेस पार्टी के सांसद रावनीत सिंह बिट्टू के हैं। सनद रहे सरदार बेअंत सिंह आतंक ग्रस्त पंजाब के वह मुख्य मंत्री थे जिनहोने पंजाब से आतंकवाद को नष्ट करने में काफी हद तक सफलता पा ली थी,उन्हे खलिस्तान समर्थक आतंकियों ने कार बंब से मार दिया था। रावनीत सिंह बिट्टू ने अपने लिए भी इसी संदर्भ में यह बात कही है। हो भी सकता है कि स्व॰ बेअंत सिंह के बाद अब उनही के पौत्र पर भी हमला हुआ हो। रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, हम खालिस्तानी झंडे और नारे लगाने वालों से भयभीत नहीं होंगे। वे (हमला करने वाले) तथाकथित नक्सली, खालिस्तानी या 2020 के लोग (रेफरेंडम 2020) हैं।” उन्होंने आगे दावा किया कि
उपद्रवी लोगों को किसान आंदोलन स्थल पर खालिस्तानी झंडा लहराने और फहराने के लिए 1 करोड़ 80 लाख रुपए ऑफर किए जा रहे हैं।

नयी दिल्ली/चंडीगढ़ :

दिल्ली में पिछले दो महीने से किसानों की ओर से केंद्र सरकार के जरिए लाए गए कृषि कानूनों को विरोध किया जा रहा है. दिल्ली बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं. इस बीच सांसद रवनीत सिंह बिट्टू सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे, जहां उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा है. इसके साथ ही उन पर हमला किए जाने की बात भी सामने आई है.

किसानों की ओर से पिछेल 60 दिनों से बॉर्डर पर कृषि कानूनों का विरोध किया जा रहा है। किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों को वापस ले. इस बीच पंजाब के लुधियाना से कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर विरोध का सामना करना पड़ा है. इसके साथ ही बिट्टू को कथित रूप से अपमानित करने की बात भी सामने आई है। बित्त को यान माँ बहन की गालियां देते हुए भी सुना जा सकता है।

‘मारने की प्लानिंग’

बिट्टू ने कहा, ‘आप झंडे उठाकर खालिस्तान के नारे लगाओ, फिर भी हम भागने वाले नहीं है. पहले भी शहादत दी है. ।हम पर बड़ी प्लानिंग के तहत हमला किया गया है, मारने की प्लानिंग थी. हम लोगों पर कातिलाना हमला किया गया है. हमारी पगड़ी पर हमला किया गया. लाठी से हमला हुआ. हम जाने वाले नहीं है. कुछ लोग हैं, इनसे सरकार और एजेंसी निपट लेंगी. 26 जनवरी को जो होना था वो आज ही एक्सपोज हो गया. उनके हाथ में झंडे थे, वो किसानों के झंडे नहीं थे।’

कांग्रेस सांसद रवनीत बिट्टू ने कहा कि हम किसान नेताओं की बैठक में भाग लेने गए थे. वहां कुछ लोग हम पर घात लगाए बैठे थे, लोग लाठी और अन्य हथियारों से लैस थे. हम अब कोई कदम नहीं उठाने जा रहे हैं क्योंकि किसानों का आंदोलन अभी भी जारी है. ऐसे तत्वों को झंडे लहराने के लिए 1 करोड़ से लेकर 80 लाख रुपये तक दिए जाते हैं और मैं वैसे भी एक टारगेट हूं।

ट्रैक्टर रैली पर अड़े किसान बाद में सरकार के प्रस्ताव पर मनन के लिए माने

कॉंग्रेस की सियासी खेती जारी है। किसान नेताओं ने बैठक के बारे में भविष्य वाणी कर दी थी की आ भी कोई नतीय नहीं निकलेगा, हम जाएँगे घूम फिर कर आजाएंगे नयी तारीख लेकर। किसान नेता टिकैत ने भी टीवी चैनल पर धमकी दे डाली कि यदि किसान रैली को रोका गया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।(अभी – अभी) किसान नेताओं ने सरकार के प्रस्ताव पर मनन करने की बात कह कर 24 घंटों के बाद पुन: मिलने की बात कह कर बैठा खत्म की।

  • किसान-सरकार में 10वें दौर की बातचीत खत्म
  • एक बार फिर बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकला
  • ट्रैक्टर रैली पर कोर्ट का दखल देने से इनकार
  • किसानों की मांग- तीनों कानून वापस लिए जाएं

नाय दिल्ली:

किसान संगठन और सरकार के बीच 10वें दौर की बातचीत खत्म हो गई है। सरकार ने किसानों को प्रस्ताव दिया कि एक निश्चित समय के लिए कानून पर रोक लगा दी जाए और एक कमेटी का गठन किया जाए, जिसमें सरकार और किसान दोनों हो, लेकिन किसान संगठन इस प्रस्ताव पर नहीं राजी हुए।ऐसे में एक बार फिर बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकला।

आज गुरु गोबिन्द सिंह कि जयंती कि बधाई से बैठक शुरू हुई। बैठक में चाय से पहले सरकार द्वारा किसानों को तोहफे के तौर पर कहा गया कि हम (यानि सरकार) कृषि स्धार क़ानूनों को 18 महीनों के लिए स्थगित करेंगे। किसान नेताओं को साथ ही यह प्रस्ताव भी दिया गया कि आप अपनी ही एक कमेटी बना लें और सरकार से संवाद कर उनके अनुसार(किसानों के) कृषि सुधार बिल में जो खामियाँ हैं उन्हें दूर करें। किसानों नेताओं से आग्रह किया गया की आप इस बात को मान कर, वृद्धों और बालकों को आंदोलन स्थल से वापिस भेजें। किसान नेताओं ने चाय के अर्ध विराम के पश्चात आ कर कहा की ट्रैक्टर रैली तो होगी। और इसी से साबित हो गया की आज की वार्ता में भी किसान नेताओं की मर्ज़ी समाधान की नहीं है।

ट्रैक्टर रैली निकालने के सवाल पर भड़के किसान नेता, देने लगे धमकी

ट्रैक्टर रैली निकाले जाने के सवाल पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भड़क उठे। इतना ही नहीं उन्होंने सरकार को धमकी देते हुए कहा कि हम रैली निकालेंगे, किसमें हिम्मत है जो हमें रोके। राकेश टिकैत ने कहा कि हम ट्रैक्टर रैली निकाल कर रहेंगे। हमें कौन रोकेगा। दिल्ली भी किसानों की है और गणतंत्र दिवस भी किसानों का है। राकेश टिकैत ने कहा कि पुलिस हमें क्यों रोकेगी, हम ट्रैक्टर पर आ रहे हैं और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार हमसे सिर्फ बात कर रही है लेकिन फैसला नहीं ले रही है। सरकार एनआईए के नोटिस भेज रही है। यदि ऐसा रहा तो हम एनआईए ऑफिस के सामने भी धरना देंगे।

बैठक के खत्म होते होते आंदोलन के बड़े धडे के किसान नेताओं द्वारा 24 घंटे बाद एक सकारात्मक प्रस्ताव के साथ वापिस आने की बात की जाएगी।

ग्राहक से किसी भी तरह से साइबर धोखाधड़ी के लिए सिर्फ बैंक जिम्मेदार होगा, ग्राहक नहीं : NCDRC

कार्ड, पिन और सीवीवी नम्बर के बिना जो फ्रॉड (Fraud) होता है तो ऐसे केस में बैंक (Bank) की जिम्मेदारी होती है और वो ग्राहक को 45 दिन के भीतर रुपये वापस करेगा. लेकिन शर्त वही है कि आपको 3 दिन में शिकायत दर्ज करानी होगी. ऑनलाइन फ्रॉड (Online fraud) से बचने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और साइबर एक्सपर्ट की सभी सलाह उस वक्त बेमानी हो गईं जब बिना सीवीवी, पिन या ओटीपी (OTP) के बैंक खाते से 79 हज़ार रुपये निकल गए. फ्रॉड बिना ओटीपी और पिन के हुआ है यह बात खुद बैंक ने अपने मैसेज में कबूल की है. हैरत की बात यह है कि नए नियम के मुताबिक रविवार को कस्टमर केयर काम नहीं करेगा तो क्रेडिट कार्ड (Credit Card) को ब्लॉक कराने का रास्ता भी बंद हो गया. रविवार को पूरे दिन भटकने के बाद पीड़ित ने सोमवार को बैंक (Bank) खुलने पर अपने साथ हुए इस फ्रॉड की जानकारी दी.

नई दिल्ली(ब्यूरो):

अगर किसी व्यक्ति के बैंक खाते से किसी हैकर द्वारा या किसी अन्य कारण से पैसे निकाल कर धोखाधड़ी की जाती है और इसमें ग्राहक की लापरवाही नहीं है। ऐसे मामले में बैंक प्रबंधन जिम्मेदार है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (National Consumer Disputes Redressal Commission) ने इस संदर्भ में एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग के जज सी विश्वनाथ ने क्रेडिट कार्ड की हैकिंग की वजह से एक एनआरआई महिला से हुई धोखाधड़ी के मामले में बैंक प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने एचडीएफसी बैंक द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए आदेश दिया है कि पीड़ित महिला को 6110 अमेरिकी डॉलर (तकरीबन 4.46 लाख रुपए) 12% ब्याज के साथ वापस लौटाए। आयोग ने बैंक प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह पीड़िता को मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे के तौर पर 40 हजार रुपए और केस खर्च के 5 हजार रुपए भी दे। आयोग के जज सी विश्वनाथ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि बैंक ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाया कि पीड़ित महिला का क्रेडिट कार्ड किसी अन्य ने चोरी कर लिया था। महिला का दावा है कि उसके खाते से पैसे किसी हैकर ने निकाले हैं और बैंक के इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग सिस्टम में खामी है। आयोग ने कहा कि आज के डिजिटल युग में क्रेडिट कार्ड की हैकिंग की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

ऐसे में खाते से रुपए निकाले जाने के मामले में बैंक प्रबंधन जिम्मेदार

यह था पूरा मामला : लॉस एंजेल्स में रह रही अपनी बेटी जेसना जोस के लिए ठाणे के एक व्यक्ति ने मुंबई स्थित एचडीएफसी बैंक से एक प्री-पेड फोरेक्स प्लस डेबिट कार्ड 2007 में लिया था। 19 दिसंबर 2008 को जेसना के पिता से बैंक ने 310 डॉलर की निकासी की कन्फर्मेशन मांगी। इस पर पिता ने बैंक को बताया कि ऐसा कोई ट्रांजेक्शन नहीं किया गया है। अगले दिन बैंक ने बताया कि 14 से 20 दिसंबर के बीच 6 हजार डॉलर की निकासी की गई है। इस पर जेसना ने लॉस एजेंल्स में शिकायत दर्ज कराई कि किसी ने हैकिंग कर उसके खाते से रुपए निकाले हैं। जेसना ने ठाणे, महाराष्ट्र की जिला उपभोक्ता फोरम में भी शिकायत की और मुआवजा मांगा था। फोरम ने जेसना के पक्ष में निर्णय सुनाया। इसे बैंक ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी थी लेकिन दोनों ने ही जिला फोरम के फैसले को बरकरार रखा।

खाते में जमा राशि की सुरक्षा बैंक की जिम्मेदारी

आयोग ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक पूर्व में दिए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पहला मूल प्रश्न यह है कि क्या बैंक को किसी व्यक्ति (खाताधारक को छोड़कर) के कारण या खाते से हुई अवैध निकासी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसका जवाब हां में है। अगर बैंक किसी का खाता खोलता है तो बैंक, व्यक्ति की धनराशि की सुरक्षा करने के लिए जिम्मेदार होता है। किसी भी प्रणालीगत विफलता, चाहे वह उनकी ओर से हो या किसी अन्य की ओर से, (खाताधारक को छोड़ कर) ग्राहक जिम्मेदार नहीं है बल्कि बैंक प्रबंधन जिम्मेदार है। इसलिए मौजूदा मामले में भी महिला के खाते से अवैध रूप से रुपयों के निकालने व धोखाधड़ी के मामले में ग्राहक के नुकसान की भरपाई बैंक को ही करनी होगी।

कृषि क़ानूनों को वापिस लेने की मांग की अमित शाह ने खारिज, लिखित प्रस्ताव देगी सरकार, किसान विचार करें

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल जारी है. दिल्ली बॉर्डर पर 13 दिनों से किसानों का आंदोलन चल रहा है. आज गृह मंत्री अमित शाह और 13 किसान नेताओं की मुलाकात हुई. सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेने से इनकार कर दिया है. किसान नेता हनन मुल्ला के मुताबिक, सरकार कल लिखित में प्रस्ताव देगी, जिसपर किसान विचार करेंगे.

नई दिल्ली: 

नए कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार को राष्ट्रव्यापी भारत बंदके बाद किसान यूनियन के कुछ नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. गृह मंत्री और किसान नेताओं के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के गेस्ट हाउस में बैठक हुई. इस बैठक में कृषि सचिव और दूसरे अधिकारी भी शामिल हुए. हालांकि बैठक में शामिल होने आए किसान नेता रुलदू सिंह नाराज होकर वापस सिंघु बॉर्डर लौट गए. उन्होंने कहा कि सरकार हमें बैठक के लिए कंफ्यूज कर रही है. 

बता दें कि 9 दिसंबर (बुधवार) को किसान नेताओं और सरकार के बीच छठे दौर की वार्ता होने वाली है. ऐसे में वार्ता से ठीक पहले अमित शाह के साथ किसान नेताओं की ये बैठक काफी अहम मानी जा रही है.   

अमित शाह से बातचीत ‘शुभ संकेत’

भारत बंद के बाद भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अमित शाह के साथ बैठक को शुभ संकेत माना है. उन्होंने कहा कि तमाम किसानों के साथ हम अमित शाह से मुलाकात करेंगे. और कृषि कानून को लेकर चल रहे मसले को सुलझने की कोशिश करेंगे. उन्होंने आगे कहा था कि हम सिंघु बॉर्डर जा रहे हैं और फिर वहां से गृह मंत्री की बैठक में जाएंगे.

5 दौर की वार्ता के बाद भी नहीं सुलझा मसला

गौरतलब है कि विज्ञान भवन में बीते शनिवार को किसान नेताओं के साथ हुई 5वें दौर की वार्ता पहले हुई थी. जिसमें मोदी सरकार के तीनों मंत्रियों नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और सोम प्रकाश का मिजाज भले ही नरम रहा हो, लेकिन किसान नेता मांगों को लेकर मुखर रहे थे. यहां तक कि जब बात नहीं बनी तो किसान नेताओं ने बायकाट की चेतावनी भी दे डाली. और Yes/No का प्लेकार्ड खेला था. किसान नेताओं ने मंत्रियों से कहा, ‘सरकार कानून वापस लेगी या नहीं, यस या नो में जवाब दीजिए.’ 

किसानों भारत बंद कॉंग्रेस का फ्लॉप शो, अमित शाह ने किसानों को मिलने का समय दिया

कृषि कानूनों के खिलाफ आज किसानों ने भारत बंद बुलाया था। जैसे ही भारत बंद की मियाद खत्म हुई, तब आंदोलन से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार शाम 7 बजे किसान नेताओं से मुलाकात करेंगे। भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने ये जानकारी दी है। ये मुलाकात तब हो रही है जब बुधवार यानी कल किसान नेताओं और सरकार के बीच छठे दौर की बातचीत होनी है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

पूरे देश में कॉन्ग्रेस सहित सभी विपक्षी दल मिल कर अराजकता का माहौल बनाने की चाहत में ‘किसान आंदोलन’ के जरिए मोदी सरकार को अस्थिर करने के प्रयास में लगे हुए हैं और इसीलिए ‘भारत बंद’ बुलाया गया। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों को बातचीत के लिए बुलाया है, जिसके बाद सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है। मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) की शाम 7 बजे राकेश टिकैत समेत अन्य किसान नेताओं से अमित शाह मुलाकात करेंगे।

राकेश टिकैत इसके लिए दिल्ली रवाना भी हो चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि 13-14 प्रतिनिधि आज शाम 7 बजे केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। बताया जा रहा है कि टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर खुलवा दिया है। साथ ही, वह अन्य किसान संघों से बात करने के लिए सिंघू सीमा रवाना हो गए हैं।

कई राज्यों में भारत बंद का कोई असर नहीं है और लोगों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें खुली रखी हैं। त्रिपुरा में भी सभी दुकानें व बाजार खुले रहे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। दक्षिण भारत में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने उपद्रव किया। पुडुचेरी में DMK और कॉन्ग्रेस ने मिल कर विरोध प्रदर्शन किया।

जहाँ तक दिल्ली की बात है, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (लॉ एंड ऑर्डर) सतीश गोलचा ने बताया है कि राजधानी में सबकुछ सामान्य है और शांति-व्यवस्था बनी हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि यातयात सामान्य है और बाजार खुले हैं। हालाँकि, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली सदर बाजार में भी चहल-पहल रही। वहीं मुंबई में यातायात पूर्ववत रहा। यहाँ दुकानें खुली रहीं और लोग काम पर भी गए।

जयपुर में जब लोगों ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की बात नहीं मानी तो वो भाजपा कार्यालय को ही घेरने पहुँच गए, जहाँ दोनों पार्टियों के लोगों के बीच हाथापाई भी हुई। पुलिस के समझाने के बाद NSUI के लोग शांत हुए। उन्होंने पीएम मोदी का पुतला भी फूँका। गाजीपुर में यूपी-दिल्ली सीमा पर जाम लगा रहा। चंडीगढ़ में किसान संगठनों ने हाइवे ब्लॉक कर दिया। सभी विपक्षी दल अपनी राजनीतिक फसल काटने के लिए बेताब दिखे।

यह भी पढ़ें : किसान आंदोलन हाईजैक करने आई भीम आर्मी को किसानों ने खदेड़ा

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस और वामपंथी कार्यकर्ताओं ने उपद्रव कर के अराजकता का माहौल पैदा कर दिया। राजस्थान में कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट का दावा है कि 24 राजनीतिक दलों ने इस भारत बंद का समर्थन किया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे बौखलाए हुए विपक्ष की साजिश बताया। पंजाब में बंद का थोड़ा-बहुत असर देखने को मिला, लेकिन पूरे भारत में लोगों ने इसे समर्थन नहीं दिया और ये फ्लॉप दिख रहा है।

उधर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को आयोजित भारत बंद के दौरान भीम आर्मी के नेता-कार्यकर्ता किसानों के आंदोलन में उन्हें समर्थन देने पहुँचे और उनके साथ विरोध प्रदर्शन के इरादे से बाहर निकले। लेकिन, वहाँ उन्हें किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। यूपी गेट पर किसानों के धरने में पहुँचे भीम आर्मी के नेताओं को किसानों ने भगा दिया। पुलिस ने भी लाठियाँ चटकाईं और भीम आर्मी के लोगों को किसानों ने खदेड़ दिया।

विजय माल्या की बढ़ीं मुश्किलें, फ्रांस में 14.34 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त

केंद्र सरकार विजय माल्या को प्रत्यर्पित कराने की कोशिश में भी जुटी हुई है. विजय माल्या का प्रत्यर्पण अनुरोध काफी पहले ब्रिटेन भेजा गया था. यूके की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट (Westminster Magistrates’ Court) ने 10 दिसंबर, 2018 को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी विजय माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश दिया था. फैसले में कोर्ट ने लिखा था कि आरोपी माल्या के खिलाफ दर्ज मामलों में उसके शामिल होने के पुख्ता सबूत हैं. इसके बाद उसने ब्रिटेन के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का रुख किया लेकिन उसे वहां से भी राहत नहीं मिली.

नयी दिल्ली:

किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के मालिक और भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या पर प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. शुक्रवार को ईडी ने फ्रांस में विजय माल्या की 1.6 मिलियन यूरो की प्रॉपर्टी को जब्त किया है. विजय माल्या पर कार्रवाई करने के बाद ईडी ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘ईडी के आग्रह पर विजय माल्‍या की 32 अवेन्‍यू फोच (FOCH), फ्रांस की संपत्ति को फ्रेंच अथॉरिटी ने जब्‍त किया है.’

फ्रांस में जब्‍त की गई प्रापर्टी की कीमत 1.6 मिलियन यूरो (करीब 14.34 करोड़ रुपये) आंकी गई है. जांच में यह बात सामने आई है कि किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के बैंक खाते से विदेश में बड़ी रकम निकाली गई.

उल्लेखनीय है कि भारतीय कारोबारी विजय माल्या नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक के बैंक कर्ज धोखाधड़ी मामले में आरोपी है. इस वक्त वो ब्रिटेन में रह रहा है. माल्या के प्रत्यर्पण के लिए भारत ने कुछ माह पहले यूनाइटेड किंगडम (UK) सरकार से आग्रह किया था. भारत सरकार ने कहा था कि वह विजय माल्या के जल्द प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटिश सरकार के संपर्क में है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने मांगी थी रिपोर्ट
बीते मई महीने में माल्या ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में मनी लांड्रिंग एवं हजारों करोड़ की धांधली के मामले में भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपनी अपील हार गया था. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने केंद्र से कहा था कि वह ब्रिटेन में भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या को भारत को प्रत्यर्पित किए जाने सबंधी कार्रवाई पर छह सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दायर करे. न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा था कि भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के बाद मामले की सुनवाई यूनाइटेड किंगडम में उसके खिलाफ “गुप्त कार्यवाही” के कारण नहीं हो रही थी. 31 अगस्त को पुनर्विचार याचिका खारिज होने और सजा की पुष्टि होने के बाद माल्या अपने खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाला था.

एमडीएच मसालों वाले महाशय जी नहीं रहे वह 98 साल के थे

महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 में पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था और यहीं से उनके व्यवसाय की नीव पड़ी थी. कंपनी की शुरुआत एक छोटी सी दुकान से हुई, जिसे उनके पिता ने विभाजन से पहले शुरू किया था. हालांकि 1947 में देश के विभाजन के समय उनका परिवार दिल्ली आ गया था. दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने एक टांगा खरीदा, जिसमें वह कनॉट प्लेस और करोल बाग के बीच यात्रियों को लाने और ले जाने का काम करते थे. गरीबी से तंग आकर उन्होंने अपना तांगा बेच दिया और 1953 में चांदनी चौक में एक दुकान किराए पर ली. इसके बाद उन्होंने महाशिया दी हट्टी (MDH) नाम का दुकान खोला और मसालों का व्यापार का व्यापार शुरू किया. जैसे-जैसे लोगों को पता चला कि सियालकोट की देगी मिर्च वाले अब दिल्ली आ गए हैं, उनका कारोबार फैलता चला गया.

नयी दिल्ली:

मसालों की कंपनी महाशय दी हट्टी (MDH) के मालिक धर्मपाल गुलाटी का निधन हो गया है। धर्मपाल गुलाटी 98 वर्ष के थे। धर्मपाल गुलाटी कोरोना संक्रमित हो गए थे लेकिन वो उससे उबर चुके थे। इसके बाद हार्ट अटैक से उनका निधन 3 दिसंबर 2020 को सुबह 5:38 पर हुआ। महाशय दी हट्टी (MDH) के मालिक धर्मपाल गुलाटी को व्यापार और उद्योग खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। सियालकोट में इनके पिताजी की मसालों की एक छोटी सी दुकान थी, जिसका नाम महाशय दी हट्टी था। इसी महाशय दी हट्टी से नाम आया M – महाशय D – डी H – हट्टी यानि MDH

मसालों के इतने बड़े व्यापार को स्थापित करने वाले धर्मपाल गुलाटी सिर्फ चौथी तक पढ़े थे। पाँचवीं में फेल होने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी।

देश के विभाजन के बाद 27 सितम्बर 1947 को इनका परिवार भारत आकर दिल्ली में रहने लगा। दिल्‍ली आकर इन्‍होंने न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन से कुतुब रोड और करोल बाग से बड़ा हिन्दू राव तक तांगा चलाने का काम किया।

तांगा चलाने वाले धर्मपाल गुलाटी ने कुछ पैसे बचा कर मसालों का काम करोल बाग से शुरू किया। 1953 में इन्होंने एक दूसरी दुकान चांदनी चौक में ली। और 1959 में इन्‍होंने दिल्‍ली के कीर्ति नगर में मसालों की एक फैक्‍ट्री लगा दी। इसके बाद MDH ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

पंजाब के किसान प्रदर्शनकारियों से मिलने को अमित शाह ने संभाली कमान

अमित शाह ने कहा कि पंजाब की सीमा से लेकर दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर रोड पर अलग-अलग किसान यूनियन की अपील पर आज जो किसान भाई अपना आंदोलन कर रहे हैं, उन सभी से मैं अपील करना चाहता हूं कि भारत सरकार आपसे चर्चा के लिए तैयार है. गृह मंत्री ने ये भी कहा कि अगर किसान 3 दिसंबर से पहले बात करना चाहते हैं तो सरकार इसके लिए भी तैयार है. 

चंडीगढ़/ नयी दिल्ली :

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे और पंजाब-हरियाणा से दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों से गृह मंत्री अमित शाह ने अपील की है। गृह मंत्री ने कहा, “मैं प्रदर्शनकारी किसानों से अपील करता हूँ कि भारत सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है। कृषि मंत्री ने उन्हें 3 दिसंबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। सरकार किसानों की हर समस्या और माँग पर विचार करने के लिए तैयार है।”

अमित शाह ने ANI से बातचीत में कहा, “कृपया शांतिपूर्ण तरीके से अपने आंदोलन को जारी रखें। हम आपसे जरूर बात करेंगे। सरकार आपसे हमेशा बात करने के लिए तैयार है। एक बार जब आप अपना आंदोलन उस मैदान पर स्थानांतरित कर देंगे, तो भारत सरकार आपसे अगले दिन बात करने के लिए तैयार है। यदि किसान संघ 3 दिसंबर से पहले चर्चा करना चाहते हैं, तो मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि जैसे ही आप अपना विरोध प्रदर्शन मैदान पर स्थानांतरित कर देंगे, हमारी सरकार अगले दिन आपकी चिंताओं को दूर करने के लिए वार्ता करेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं सभी से अपील करना चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस आपकी मदद करने के लिए तैयार है और आप बुराड़ी के मैदान में अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रख सकते हैं। दिल्ली पुलिस एक बड़े मैदान में आप सभी को स्थानांतरित करने के लिए तैयार है। आपको शौचालय की सुविधा प्रदान की जाएगी, पीने का पानी, एम्बुलेंस आपको प्रदान किया जाएगा। किसानों से अनुरोध है कि वो राष्ट्रीय राजमार्गों पर न बैठें। कई स्थानों पर, किसान इस ठंड में अपने ट्रैक्टरों और ट्रोलियों के साथ रह रहे हैं।”

गृह मंत्री ने कहा कि अगर किसान चाहते हैं कि भारत सरकार जल्द बात करे, 3 दिसंबर से पहले बात करे, तो मेरा आपको आश्वासन है कि जैसी ही आप निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित हो जाते हैं, उसके दूसरे ही दिन भारत सरकार आपकी समस्याओं और माँगों पर बातचीत के लिए तैयार है।

बता दें कि किसान सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग कर रहे हैं। वे सड़क पर उतरे हैं। पंजाब की सीमा से लेकर दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर उनका आंदोलन जारी है। किसानों की माँग है कि उन्हें जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी जाए। लेकिन सरकार उन्हें दिल्ली के बुराड़ी स्थित निरंकारी ग्राउंड पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी है। किसान इस पर राजी नहीं हैं। वे सिंधु बॉर्डर पर डटे हैं। इस प्रदर्शन में खालिस्तान समर्थक, पीएफआई और कॉन्ग्रेस के लिंक सामने आए हैं।

पांच में से एक भारतीय युवक रीढ़ की समस्या से पीडि़त : डा. अनिल ढींगरा

दिन में लगातार 2 घंटे एक ही पोजीशन में बैठना रीढ़ की हड्डी के लिए खतरनाक : डा. राजीव गर्ग
हे-होल स्पाइन सर्जरी 97-98 प्रतिशत कामयाब

पंचकूला, 28 नवंबर:

रीढ़ की हड्डी की समस्याएं तथा बिना चीर फाड़ के आप्रेशन की तकनीकों संबंधी जागरूकता पैदा करने के लिए पारस अस्पताल पंचकूला के डाक्टरों की टीम ने पत्रकारों को संबोधित किया। इसमें अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डा. अनिल ढींगरा तथा कंसलटेंट डा. राजीव गर्ग शामिल थे।
डा. अनिल ढींगरा ने पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए 20-30 वर्ष की उम्र वर्ग का देश का हर पांचवा नौजवान रीढ़ की हड्डी की समस्या से पीडि़त हैं। यह समस्या पहले बुजुर्गों में देखी जाती थी। उन्होंने बताया कि बीते समय दौरान नौजवानों में रीढ़ की हड्डी की समस्याओं में 60 प्रतिशत इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि नौजवानों की जीवन शैली में बदलाव, अधिक वजन, विटामिन डी, बी-12, कैल्शियम तथा प्रोटीन की कमी नौजवानों में इस समस्या का मुख्य कारण है।

डा. ढींगरा ने बताया कि लंबा समय लगातार एक ही पोजीशन में बैठने तथा गलत पोजीशन में बैठने से भी रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है, जिससे पीठ तथा गर्दन में बहुत जयादा दर्द होता है। उन्होंने बताया कि रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढऩे से भारत में रीढ़ की सर्जरी की नवीनतम तकनीकें इजाद हुई हैं। डा. ढींगरा ने बताया कि किसी समय आप्रेशन से तीन महीनों के लिए बिस्तर पर आराम (बैड रेस्ट) के लिए कहा जाता था, जो अब प्रगती करके एक दिन के आराम तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि ऐसी की-होल (छोटा सुराख) सर्जरी तकनीक से ही संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि जो मरीज दवाईयों या फिजियोथैरेपी आदि से ठीक नहीं होते तथा जिनके हाथों-पैरों में कमजोरी तथा सुन्नापन महसूस होता है, उनके लिए ऐसी सर्जरी की सिफारिश की जाती है, जिसमें चीर-फाड़ नहीं करनी पड़ती।

डा. राजीव गर्ग ने इस मौके संबोधन करते हुए कहा कि हमारी रीढ़ की हड्डी, छोटे छोटे मनकों से बनी होती है, जिनमें छोटी-छोटी डिस्कें होती हैं, जो किसी भी तरह के झटके को सहन करने का काम करती है। दुरूस्त पोजीशन में ना बैठने तथा रीढ़ की हड्डी पर लगातार दबाव पडऩे से यह डिस्कें खुशक रहने लग जाती हैं, जिस कारण डिस्क में दरारें आने तथा सुखमना नाड़ी (स्पाइनल कोर्ड) पर दबाव पड़ता है। इससे टांगों तथा कमर में बहुत तेज दर्द होता है। डा. गर्ग ने बताया कि हम अपनी जीवन शैली बदलकर इस समस्या से बच सकते हैं।

पारस अस्पताल के फैसलिटी डायरेक्टर आशीष चड्ढा ने बताया कि इस अस्पताल में रीढ़ की हड्डी के इलाज के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल के पास हर तरह की न्यूरो सर्जरी के लिए सभी आध्ुानिक सामान तथा मशीनें मौजूद हैं।

केंद्र सरकार द्वारा तीन कृषि सुधार बिलों का विरोध कर रहे किसानों की आवाज को दबाने के लिए कुत्सित प्रयास कर रही है : चंद्रमोहन

पंचकूला 26 नवंबर:

हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा कि  हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार द्वारा तीन  कृषि सुधार बिलों का विरोध कर रहे किसानों की आवाज को दबाने के लिए कुत्सित प्रयास कर रही है और आज संविधान दिवस के अवसर पर, जिस प्रकार से दिल्ली कूच कर रहे किसानों पर  आंसू गैस के गोले और कड़कती ठंड में पानी की बौछार डलवा कर उन्हें प्रताड़ित कर रही है उससे प्रदेश में भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार का असली चेहरा बेनकाब हो गया है।       

चन्द्र मोहन ने कहा कि हमारे देश भक्तों और महान शूरवीरों ने अपने प्राणों की आहुति इस लिए नहीं दी थी कि, संविधान दिवस के अवसर पर देश के अन्नदाता किसान और असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रर्मिकों और बेरोजगार युवाओं को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए केन्द्र सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध करने के लिए हड़ताल और विरोध का सहारा लेने पर विवश होना पड़ें। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि क्या अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से इस देश के किसानों को अपनी बात गुगीं-बहरी सरकार को जगाने के लिए दिल्ली जाने का अधिकार नहीं है।  

         ‌         उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से रात के अंधेरे में उग्रवादियों की तरह किसान नेताओं को गिरफ्तार किया गया और अवैध तरीके से उन्हें  नजरबंद किया गया है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए देश का पेट पालने वाले  किसान मजदूर महत्वपूर्ण नहीं है अपितु उसके लिए कारपोरेट घराने महत्वपूर्ण हैं,जिनको लाभ पहुंचाने के लिए उनके  इशारों पर यह सरकार काम कर  रही। है।  उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से निहत्थे और निरपराध  किसानों पर बर्बरतापूर्ण और बेरहमी पूर्वक तरीके से आंसू गैस  के गोले और पानी की बौछार  इस सर्दी के मौसम में छोड़ी गई और लाठियां भांजी गई , उसने अंग्रेजी हुकूमत की याद ताजा कर दी है।   

                  चन्द्र मोहन ने कहा कि  गठबंधन सरकार का यह फैसला आने वाले समय में उनके कफ़न में आखरी  कील साबित होगा। उन्होंने कहा कि अपनी फसल के उचित दाम मांगना अगर अपराध है, तो मैं भी इसका दोषी हूं, क्योंकि एक किसान होने के नाते मुझे संविधान ने यह अधिकार दिया है कि मैं  अपनी फसल  को  उचित मूल्य पर बेच सकूं‌। इसका मुझे अधिकार है । कोई भी कानून किसी पर जबरदस्ती  तरीके से थोपा नहीं जा सकता है।

   ‌              उन्होंने किसानों की  वकालत करते हुए कहा कि किसानों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज को उठाने से दिल्ली जाने से रोकने की बजाय  उनकी जायज मांगों को पूरा करते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के बारे में अलग से कानून बना कर उनकी वेदनाओं ओर कष्ट को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, केन्द्र सरकार को अड़ियल रवैया त्याग कर तीनों क़ृषि कानूनों को तुरंत वापिस लेना चाहिए, ताकि किसानों के हितों पर डाका डालने से उन्हें बचाया जा सके।