चोरी व धोखाधड़ी के मामलों के विरोध में एक दिन के लिए बंद रही अनाज मंडी

-विधायक गोपाल कांडा के नाम गोबिंद कांडा को सौंपा अल्टीमेटम पत्र
-एक सप्ताह के बाद जिलाभर में मंडिय़ों होंगी पूर्ण रूप से बंद

सतीश बंसल सिरसा:

 अनाज मंडी में बढ़ते चोरी व धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस द्वारा कोई भी कार्रवाई न करने के विरोध में  गत दिवस  शनिवार क़ो अनाज मंडी सिरसा पूर्ण रूप से बंद रही। दि आढ़तियान एसोसिएशन अनाज मंडी सिरसा के प्रधान हरदीप सरकारिया व फूड ग्रेन एसोसिएशन के प्रधान गौरव गोयल के संयुक्त तत्वावधान में विभिन्न व्यापारी व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि अनाज मंडी के शैड के नीचे शामिल हुए और पुलिस की कार्यप्रणाली पर रोष जाहिर किया।
इस दौरान पत्रकारोंं से बातचीत करते हुए दि आढ़तियान एसोसिएशन  अनाज मंडी सिरसा के प्रधान हरदीप सरकारिया ने कहा कि  मंडी को पूर्ण रूप से बंद रखा गया है, क्योंकि सिरसा पुलिस अनाज मंडी में बढ़ते चोरी के मामलों में अंकुश लगाने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि  पुलिस अधीक्षक कार्यालय में अल्टीमेटम पत्र भी सौंपा गया था लेकिन  उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकारिया ने बताया कि अनाज मंडी में पिछले तीन वर्ष में चोरी के जितने भी मामले हुए है, उनमें मुकद्दमा दर्ज करने के अतिरिक्त पुलिस प्रशासन ने कुछ भी नहींं किया। इसी के विरोध स्वरूप मंडी बंद रखी गई लेकिन अगर एक सप्ताह में पुलिस प्रशासन ने कोई भी कार्रवाई नहीं की, तो जिला सिरसा की समस्त मंडिय़ों को बंद किया जाएगा। इसके बाद सभी ने विधायक गोपाल कांडा के नाम गोबिंद कांडा को पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की। इस एक दिवसीय बंद में होशियारीलाल शर्मा,  हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल से जिलाध्यक्ष हीरालाल शर्मा, कॉटन मिल एसोसिएशन से सुशील मित्तल व गुरचरण गर्ग, भारतीय किसान एकता के प्रदेशाध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख सहित हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल, सिरसा कॉटन एसोसिएशन, पेस्टीसाइड एसोसिएशन, सिरसा ऑयल यूनियन, सिरसा सीड्स प्रोड्यूसर एसोसिएशन, राइस मिल एसोसिएशन, किरयाणा मर्चेंट्स, जिला स्वर्णकार संघ,  शू मर्चेंट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का पूर्ण रूप से समर्थन रहा। इस मौके पर फ्रूड ग्रेन एसोसिएशन के महासचिव दीपक तायल व सचिव मुकेश गोयल, आढ़तियान एसोसिएशन उप प्रधान सुधीर ललित, कीर्ति गर्ग, अमर सिंह भाटीवाल, महासचिव कश्मीरचंद कंबोज, कोषाध्यक्ष रविंद्र बजाज, वरिष्ठ आढ़ती मनोहर मेहता, पूर्व प्रधान रुलीराम गांधी, विजय चौधरी, सुरेंद्र मिचनाबादी, पूर्व सचिव विरेंद्र माहेश्वरी,  सहित काफी संख्या में आढ़ती मौजूद थे।

ऑड इवन फैसले के खिलाफ विभिन्न ट्रेड एसोसिएशनों ने लिखा पत्र

-व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष बोले, ऑड इवन फॉर्मूला व्यापारियों को मंजूर नहीं…
सिरसा:

हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के नेतृत्व में विभिन्न ट्रेड एसोसिएशनों होलसेल क्लॉथ मर्चेंट्स, किरयाणा मर्चेंट्स, हलवाई यूनियन, होलसेल गुडखंडसारी, इलैक्ट्रॉनिक्स डीलर, एफएमसीजी डिस्ट्रिब्यूटर, आरा मशीन एवं टिंबर, क्लॉथ मर्चेंट्स, बर्तन भंडार विक्रेता संघ, रेडीमेड एवं  हौजरी विक्रेता संघ, सिरसा मोबाइल रिटेलर्स, शू मर्चेंट्स, आर्यन मर्चेंट्स डीलर, ऑटो मार्केट, ट्यूबवैल एंड मशीनरी स्टोर्स, जिला स्वर्णकार संघ, पेंट्स, पेस्टीसाइड फिड एवं फर्टीलाइजर डीलर, बिस्कुट एंड ब्रेकरी, टेलर्स, सिरसा फोटोग्राफर, वूडन एवं मोल्डीड फर्नीचर, शू मर्चेंट्स, होलसेल शू डीलर, इलैक्ट्रीकल डीलर, सिरसा बुक सेलर एवं स्टेशनरी, कन्फैक्शनरी, जनरल मर्चेंट्स, बारबर एवं सैलून, पान भंडार संघ, होटल एंड गेस्ट हाउस इत्यादि ने प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन से मांग की है कि सिरसा जिला में ऑड इवन सिस्टम को खत्म करते हुए संपूर्ण रूप से बाजारों खोले जाए। इस संबंध में मुख्यमंत्री हरियाणा, मुख्य सचिव हरियाणा, गृह मंत्री हरियाणा, कमिश्नर हिसार, डीसी सिरसा को लिखे पत्र में जिलाध्यक्ष हीरालाल शर्मा ने कहा है कि कोविड संक्रमण को खत्म करने के लिए सरकार ने ऑड इवन लागू किया था लेकिन इससे संक्रमण खत्म होने की बजाए बढऩे की संभावना ज्यादा है, क्योंकि इस फॉर्मूल से बाजारों में अनावश्यक तौर पर भीड़ एकत्रित होती है। इस फैसले से दुुकानदारों को आर्थिक तौर पर भी नुकसान झेलना पड़ रहा है, क्योंकि पिछले लॉकडाउन से लोगों का व्यापार खत्म हो गया था और अब सरकार द्वारा 2021 में लगाए गए लॉकडाउन से भी आर्थिक नुकसान हो रहा है। सरकार व प्रशासन के ऑड इवन फैसले से दुकानदारों में सरकार व प्रशासन के प्रति रोष पनप रहा है। अब तक सरकार ने जो भी गाइडलाइन्स दी है, उसका पालन हुआ है। ऑड-इवन की व्यवस्था दुकानदारों के हक में नहीं है, इसलिए इसे तुरंत प्रभाव से वापिस लिया जाए।

स्वामी रामदेव ने आईएमएफ़और फार्मा कंपनियों से पूछे 25 प्रश्न

एलोपैथी और एलोपैथिक चिकित्सकों पर की गई योग गुरु बाबा रामदेव की टिप्पणी से उठा तूफान फिलहाल शांत होता नजर नहीं आ रहा है। रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्ष वर्धन के कड़े पत्र के बाद बाबा रामदेव ने भले ही खेद व्यक्त करते हुए अपने वक्तव्य को वापस ले लिया हो, लेकिन सोमवार को उन्होंने फिर से एलोपैथी पर सवाल उठाए हैं। यहां तक कहा है कि, अगर एलोपैथी सर्वशक्तिमान और सर्वगुण संपन्न है तो फिर एलोपैथिक चिकित्सकों को बीमार ही नहीं होना चाहिए। बाबा ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) और फार्मा कंपनियों के नाम खुला पत्र जारी कर 25 सवाल दागे हैं। पतंजलि योगपीठ के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने इस तरह का पत्र जारी किए जाने किए जाने की पुष्टि की।

  • बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने IMA और फार्मा इंडस्ट्री से पूछे ये 25 सवाल
  • ‘बिना ऑक्सीजन सिलिंडर के ऑक्सीजन बढ़ने की कोई दवा है?’
  • पतंजलि ने पूछा कि एलोपैथी के डॉक्टर तो बीमार होने ही नहीं चाहिए?

स्वस्थय डेस्क, चंडीगढ़ :

सोमवार को बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने एक खुला पत्र जारी किया गया जिसमें आइएमए और फार्मा कंपनी से 25 प्रश्न पूछे गए हैं। बाबा रामदेव ने इस पत्र में हेपटाइटिस, लीवर सोयराइसिस, हार्ट एनलार्जमेंट,शुगर लेवल 1 और 2,फैटी लीवर,थायराइड,ब्लॉकेज,बाईपास,माइग्रेन,पायरिया,अनिद्रा,स्ट्रेस,ड्रग्स एडिक्शन,गुस्सा,आदि पर स्थायी इलाज को लेकर सवाल पूछे हैं।

‘बिना ऑक्सीजन सिलिंडर के ऑक्सीजन बढ़ने की कोई दवा है?’

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बाबा रामदेव ने कोरोना के समय ऑक्सीजन प्रयोग होने को लेकर फार्मा कंपनी से सवाल किया। बाबा रामदेव ने पूछा कि क्या फार्मा कंपनी पर ऐसी कोई दवा है जिससे कोरोना संक्रमण के मरीज का बिना ऑक्सीजन सिलिंडर के ऑक्सीजन बढ़ जाए।

स्वामी रामदेव ने IMA और फार्मा इंडस्ट्री से पूछे ये 25 सवाल

  1. ऐलोपैथी के पास हाइपरटेंशन (बीपी) व उसके कॉम्प्लिकेशंस के लिए निर्दोष स्थायी समाधान क्या है?
  2. ऐलोपैथी के पास टाईप-1 व टाईप- 2 डायबिटीज व उसके कॉम्प्लिकेशंस के लिए पर्मानेंट सॉल्यूशन क्या है?
  3. ऐलोपेथी के पास फैटी लिवर, लीवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस को क्योर करने के लिए मेडिसिन क्या है जैसे आपने टीबी व चेचक आदि का स्थायी समाधान खोजा है वैसे ही लिवर की बीमारियों का समाधान खोजिए, अब तो ऐलोपैथी को 200 साल हो गए हैं।
  4. फार्मा इंडस्ट्री में हार्ट के ब्लॉकेज को रिवर्स करने का उपाय क्या है, बिना बाईपास के, बिना ऑपरेशन के व एंजियोप्लास्टी के स्थायी समाधान क्या हैं?
  5. फार्मा इंडस्ट्री में इनलार्ज हार्ट और इंजेक्शन फेक्शन कम होने पर बिना पेसमेकर लगाए, कौन सा इलाज है जिससे हार्ट का साइज और फंक्शन नॉर्मल हो जाए। कैसे उसे रिवर्स कर सकते हैं, बिना पेसमेकर के उसका निर्दोष इलाज क्या है?
  6. कॉलेस्ट्रॉल के रोगियों में कॉलेस्ट्रॉल ट्राइग्लिसराइड्स कम करने का और लीवर पर साइड इफेक्ट रहित एलोपैथी में इलाज क्या है?
  7. क्या फार्मा इंडस्ट्री के पास सिरदर्द और माइग्रेन का कोई परमानेंट सॉल्यूशन है, जिसके बार-बार सिरदर्द और माइग्रेन ना हो। एक बार दवा खाए और परमानेंट सिरदर्द, माइग्रेन बंद हो जाए।
  8. फार्मा इंडस्ट्री में आंखों का चश्मा उतारने का और हीयरिंग ऐड हट जाए, इसका कोई निर्दोष इलाज बता दे?
  9. पायरिया होने पर जिससे कि दांत हिलना बंद हो जाए, मसूड़े मजबूत हो जाए ऐसी कोई निर्दोष दवाई बताएं?
  10. एक आदमी का रोज कम से कम आधा से 1 किलो वजन कम हो जाए बिना सर्जरी के बैरियाट्रिक सर्जरी और लापोसेक्शन के, बिना किसी छेड़छाड़ के, दवाई खाए और वजन घट जाए, क्या फार्मा इंडस्ट्री में कोई ऐसी दवा है?
  11. सोरायसिस, सोरायटिक अर्थरायटिस व सफेद दाग का कोई निर्दोष स्थायी समाधान बताएं?
  12. मॉडर्न मेडिकल साइंस में एंक्लोजिंग स्पौंडिलोसिस का स्थायी समाधान क्या है? आरए फैक्टर पॉजिटिव को नेगेटिव करने का उपाय क्या है?
  13. ऐलोपैथी के पास पार्किसन का निर्दोष स्थायी समाधान क्या है?
  14. साइड इफेक्ट रहित कब्ज, गैस, ऐसीडिट का फार्मा इंडस्ट्री के पास स्थायी समाधान क्या है?
  15. अनिद्रा, लोगों को नींद नहीं आती है, क्योंकि आपकी दवा 4 से 6 घंटे तक ही असर करती है, वह भी साइड इफेक्ट के साथ, ऐलोपैथी में इसका कोई सॉल्यूशन?
  16. स्ट्रेस हार्मोंस कम करने के लिए और हैपी या गुड हार्मोंस बढ़ाने के लिए, जिससे आदमी तनावमुक्त और प्रसन्न हो जाए। फार्मा इंडस्ट्री इसकी कोई दवा बताएं?
  17. इन्फर्टिलिट में बिना कृत्रिम साधनों, जो बहुत पेनफुल होती है, ऐलोपैथी में ऐसी कोई दवाई बताएं जिससे समस्या का समाधान हो जाए। जिससे बिना टेस्ट ट्यूब बेबी, आईवीएफ के नैचुरल तरीके से संतान हो जाए और व्यक्ति लाखों रुपये की लूट से बच जाए।
  18. फार्मा इंडस्ट्री में ऐजिंग प्रॉसेस को रिवर्स करने वाली को निर्दोष दवा बताएं।
  19. ऐलोपैथ में बिना साइड इफेक्ट के हीमोग्लोबिन बढ़ाने का निर्दोष तरीका बताए।
  20. आदमी बहुत हिंसक, क्रूर और हैवानियत कर रहा है, उसके इंसान बनाने वाली ऐलोपैथ में कोई दवा बताएं।
  21. आदमी के सारे ड्रग्स अडिक्शन, नशा छूट जाए, ऐसी कोई ऐलोपैथी में दवा बताएं।
  22. ऐलोपैथी और आयुर्वेद के आपस में झगड़े खत्म करने की फार्मा इंडस्ट्री के पास कोई दवा हो तो बताएं।
  23. फार्मा इंडस्ट्री में कोरोना पेशेंट को बिना ऑक्सिजन सिलिंडर ऑक्सिजन बढ़ाने का कोई उपाय बताएं।
  24. पायरिया होने पर जिससे कि दांत हिलना बंद हो जाए, मसूड़े मजबूत हो जाए ऐसी कोई निर्दोष दवाई बताएं?
  25. ऐलोपैथ सर्वशक्तिमान और सर्वगुण संपन्न है तो फिर ऐलोपैथी के डॉक्टर तो बीमार नहीं होने चाहिए।

व्यापारिक प्रतिष्ठानों बंद करने के समय संबंधी निर्देश पारित

पंचकूला:

पंचकूला के जिला मजिस्ट्रेट और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के चेयरमैन व उपायुक्तमुकुल कुमार ने जिले में कोविड -19 महामारी के कारण उत्पन्न हुई मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 30 के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला पंचकूला में जन स्वास्थ्य के हित में दुकानों को बंद करने के समय को विनियमित करने का निर्णय लेते हुए आदेश जारी किए है।

आज जारी किए गए आदेशों के तहत बाजारों में सभी दुकानों / वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को केवल शाम 6:00 बजे तक संचालित करने की अनुमति होगी। सभी रेस्त्रां / हलवाई की दुकानें / खाने पीने की दुकानें/ बेकरीज़ / कन्फेक्शनरीज़ / कैफ़े और इस तरह के अन्य सेवा प्रदाता जैसे रेहड़ी और फूड वैन केवल शाम 06:00 बजे तक खुले रहेंगे। शाम 06:00 बजे के बाद ऑनसाइट डाइनिंग पर भोजन की सुविधा नहीं होगी। हालांकि, पैकिंग और होम डिलीवरी सेवा को लेने की अनुमति शाम 09:30 बजे तक रहेगी।

इसी प्रकार, विशेष रूप से डेयरी और संबंधित उत्पादों की दुकानें यानी पनीर, दही, घी आदि की दुकानें शाम 09:30 बजे तक खुली रहेंगी। विक्रेताओं / फेरीवालों, किराने की दुकानों, अंडा / मांस की दुकानों सहित सभी फलों और सब्जियों की दुकान शाम 08:00 बजे तक काम कर सकती है। केमिस्ट की दुकानें, पंजीकृत मेडिकल प्रतिष्ठानों के आपातकालीन ओपीडी और पेट्रोल पंप चौबीसों घंटे खुले रह सकते हैं। ऐसे ही, 65 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति, सह-रुग्णता अर्थात को-मोरबिटी वाले व्यक्ति, गर्भवती महिलाओं और 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आवश्यक कार्य और स्वास्थ्य उद्देश्यों को पूरा करने के अलावा घर पर ही रहने की सलाह दी गयी है। कोविड-19 प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय निर्देश और सामान्य निवारक उपाय जैसे कि फेस मास्क का उपयोग, बार-बार हाथ धोना और सभी सार्वजनिक स्थानों पर सोशल डिस्टनसिंग का पालन किया जाएगा।

आदेशों में कहा गया है कि यह प्रायः देखा गया है कि सब्ज़ी मंडी में सामान्य निवारक मानदंड जैसे कि (मास्क का उपयोग, सोशल डिस्टनसिंग आदि) और व्यक्तिगत स्वच्छता उपायों का पालन नहीं किया जा रहा है। सभी एसडीएम/ इंसिडेंट कमांडरों और ई.ओ., एम.सी. कालका और सचिवों, मार्केट कमेटियों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है कि सब्ज़ी मंडी में सोशल डिस्टनसिंग और व्यक्तिगत स्वच्छता मानदंडों का कड़ाई से पालन किया जाए। प्रत्येक व्यक्ति अनिवार्य रूप से मास्क पहने और मंडी में अधिक भीड़ नहीं होनी चाहिये। सभी संबंधित हितधारकों / आम जनता को गृह मंत्रालय / स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,भारत सरकार के साथ-साथ हरियाणा सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किये गये निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

आदेशों के अंतर्गत कमिश्नर, नगर निगम, पंचकुला, पुलिस उपायुक्त, पंचकुला, सभी एसडीएम, सभी एसएचओ, ईओ, एमसी कालका, संबंधित बीडीपीओ और ड्यूटी मजिस्ट्रेट-एवं-इंसिडेंट कमांडर इन निर्देशों को कड़ाई से लागू करेंगे और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 से 60 के अनुसार इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे।

वीटा बूथ आवंटन में हो रही धांधली, चेहतों को आवंटित किए जा रहे हैं वीटा बूथ : चंद्रमोहन

पंचकूला 22 अप्रैल:

हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा है कि वीटा बूथ आवंटन में बड़ी धांधली हो रही है। भाजपा के कार्यकर्ताओं को यह बूथ आवंटित किए जा रहे हैं, जबकि पॉलिसी के मुताबिक आवंटन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही। पिछले कुछ दिनों में देखने में आया है कि भाजपा के कई कार्यकर्ताओं को शहर की बेहतरीन जगहों पर वीटा बूथ आवंटित कर दिये गए। जबकि बूथ जरूरतमंद लोगों को दिए जाने  चाहिए थे। इन बूथों का उद्घाटन भी स्वयं हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने ही किया है, जिससे स्पष्ट है कि यह बूथ भाजपा के कार्यकर्ताओं के हैं और मिलीभगत के साथ बूथ आवंटित हो रहे हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने आरोप लगाया है कि कई परीवार ऐसे है उनमै ऐक ही परीवार मैं दो दो सदस्यों को विटा बुथ आवंटित किए गए हैं उन बुथो का किराया मात्र 1100/ लगभग है जब की कई बुथ मालिकों ने तो आगे ज़्यादा किराए पर (Sublet) उप किरायेदारों को दे दिये है जब के उसी मार्केट मैं अगर हम बुथ किराये पर लै तो उस का किराया 30000/ से कम पर नही  मिलेगा मुख्यमंत्री मनोहर लाल कह रहै है उनकी सरकार पारदर्शी तरीक़े से काम कर रही है जब की यहाँ तो कानुन की धजीआं उड़ाई जा रहीं है 
 चंद्रमोहन ने कहा कि माता मनसा देवी कॉम्प्लेक्स स्वासतीक विहार सेक्टर 5,सेक्टर 2,4,7, 8, 9, 10, 11-15 चौक, सेक्टर 19, सेकटर 20,सेक्टर 28 सहित इत्यादि इत्यादि  अन्य जगहों पर बने वीटा बूथों में अधिकतर भाजपा कार्यकर्ताओं के हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा कि वीटा बूथ आवंटित करने से पहले समाचार पत्रों में विज्ञापन देना होता है और उसके बाद अन्य फॉर्मेलिटी पूरी करनी होती हैं।

चंद्रमोहन ने आरोप लगाया कि कुछ ही वीटा बूथों की जानकारी ही विज्ञापन के माध्यम से दी जाती है और पता चला है कि भाजपा के चहेते हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में अधिकारियों से मिलीभगत करके शहर के नामी जगहों पर जगह अलाट करवा लेते हैं और उसके बाद वीटा विभाग में जाकर उस जगह पर अपना बूथ अलॉट करवा लेते हैं, जो कि एक बड़ा घोटाला है। जो वीटा बूथ आम आदमी को मिलने चाहिए, वह भाजपा द्वारा अपने चहेतों को बांटे जा रहे हैं । चन्द्रमोहन ने आरोप लगाया है के पचकुलां के मास्टर प्लान (हुड्डा विभाग) मैं ईतने बुथ खोलने का कोई प्रावधान नहीं है जब की विटा बुथ , हैंडी केप, व बेरोज़गारों, के देने चाहिए थे चंद्रमोहन ने हरीयाणा सरकार से मांग की है कि अब तक शहर में अलोट किए गए बूथों की निष्पक्ष ऐजंसी से जांच करवाई जाए , ताकि पता चले कि कितने वीटा बूथों का विज्ञापन दिया गया और कितने बिना विज्ञापन अलॉट कर दिए गए।

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बैंक अधिकारी संघ द्वारा AIBOC और AISBOF, महासचिव रहे कॉमरेड शांता राजू को भावभीनी श्रद्धांजलि

चंडीगढ़:

कोविड -19 दिशानिर्देशों का पालन करते हुऐ भारतीए स्टेट बैंक अधिकारी संघ के सदस्यों ने , विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम अयोजित करके कॉमरेड शांता राजू , जो कि AIBOC और AISBOF, महासचिव रहे , को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। श्री शांता राजू दिनांक 12-04-2021 को कोविड -19 महामारी से ग्रसित होकर हमें अलविदा कहते हुए स्तब्ध कर गए। उनका अधिकारी वर्ग के विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू करवाने में विशेष योगदान रहा। बैंक अधिकारियों के ट्रेड यूनियन आंदोलन के एक दिग्गज नेता, कॉमरेड शांता राजू ने बैंक अधिकारियों के आंदोलन की सफलता में अपने सूक्ष्म, दृढ़ नेतृत्व और समर्पण का परिचय दिया । उनका ट्रेड यूनियन कैरियर शानदार रहा ।

वह अधिकारी डायरेक्टर के रूप में भारतीय स्टेट बैंक के केंद्रीय बोर्ड में दो कार्यकाल के लिए चुने गए । कामरेड शांता राजू ने अपने धैर्य और दृढ़ संकल्प को तब प्रदर्शित किया गया जब उन्होंने पेंशन मुद्दे पर अप्रैल, 2006 में एसबीआई में अनिश्चितकालीन हड़ताल की, जिसमें अंततः सफलता हासिल की। उन्होंने नैचर (नेशनल एकेडमी ऑफ ट्रेड यूनियन रिसर्च एंड एजुकेशन) के गठन में अग्रणी भूमिका निभाई, जो AIBOC के विभिन्न सहयोगी संगठनों के सदस्यों और कार्यकर्ताओं को कैडर डेवलपमेंट प्रोग्राम्स, लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम्स और अनुशासनात्मक मामलों को संभालने के कौशल प्रदान करने का प्रशिक्षण देता है। वह एसबीआई पेंशनर्स एसोसिएशन (कर्नाटक) के अध्यक्ष भी रहे । अधिकारी समुदाय उनके कार्यकाल के दौरान प्राप्त उपलब्धियों, मार्गदर्शन और समर्थन के लिए उनका हमेशा ऋणी रहेगा।

नए सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना: उपायुक्त प्रदीप कुमार

सतीश बंसल सिरसा, 19 अप्रैल।
                    उपायुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि आत्म निर्भर भारत अभियान के अंतर्गत भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा असंगठित क्षेत्र व ईनफोरमल रूप में कार्य कर रहे खाद्य प्रसंस्करण सूक्ष्म इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) आरंभ की गई है। योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के कार्यकाल के दौरान 2 लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को फॉर्मल सेक्टर में लाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का लाभ प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। योजना के अंतर्गत अधिकतम 10 लाख रुपये तक की अनुदान सहायता से परियोजना लागत की 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड अनुदान सहायता का प्रावधान है।
                    उन्होंने बताया कि यह योजना में खाद्य प्रसंस्करण में नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने एवं बढ़ावा देने के लिए सिरसा जिला में वन-डिस्ट्रिक-वन-उत्पाद के तहत किन्नु उत्पाद का चयन किया गया है। इसके अतिरिक्त असंगठित क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण में काम कर रहे सूक्ष्म उद्यम जैसे आम, आलू, लीची, टमाटर, साबूदाना, किन्नू, भुजिया, पेठा, पापड़, अचार, मोटे अनाज आधारित उत्पाद, मत्स्य / पॉल्ट्री उत्पाद तथा पशुचारा इत्यादि के लिए भी लाभ लेने के पात्र होंगे।
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र मापदंड :
                    जिला एमएसएमई केंद्र के सहायक निदेशक गुरप्रताप सिंह ने बताया कि वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए एक परिवार से केवल एक व्यक्ति पात्र होगा। आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक हो तथा कम से कम 8वीं कक्षा तक की शैक्षणिक योग्यता रखता हो। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में ऋण प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट एमओएफपीआई डॉट एनआईसी डॉट इन पर आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर जिला उद्योग केंद्र, सिरसा में जिला एमएसएमई केंद्र का कार्यालय स्थापित किया गया है तथा इस योजना के तहत आवेदकों को सभी प्रकार की सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से डिस्ट्रिक रिसोर्स पर्सन की भी नियुुक्ति की गई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए इच्छुक प्रार्थी जिला उद्योग केंद्र स्थित जिला एमएसएमई सैंटर कार्यालय के दूरभाष नंबर 01666-247650 व कर्मचारी रोहित कुमार (94669-24075) व सतिंद्र सिंह (70154-26599) से संपर्क स्थापित कर सकते है

कहीं माध्यम वर्ग को समाप्त करने कि साज़िश तो नहीं कोरोना?

कोरोना के बढ़ते हुए मामलों को देख कर राजनैतिक कार्यक्रमों में जहां भीड़ होती है उनकी विवेचना और उन पर रोक की कार्रवाई न करके केवल बाजार बंद लॉकडाउन कर्फ्यू पर निर्णय हो जाता है।

 सोशल साइट पर और ग्रुपों में संचालक समाजसेवा करने वालों द्वारा ऐसा माहौल बनाया जाता है कि लॉकडाउन हो जाए। बड़ी तत्परता से ऐसे समाचार प्रसारित किए जाते हैं कि लॉक डाउन होने का हव्वा खड़ा हो जाए।

 सबसे बड़ा प्रश्न है कि:

  • क्या बाजार में दुकानदार व्यवसायी कोरोना रोग फैलाने में है? 
  • क्या उनके बाजार खोलने से कोरोना फैल रहा है? आखिर यह समीक्षा क्यों नहीं हो रही?

 प्रशासनिक अधिकारी जब बैठक करता है तब व्यापारियों के अगुआ नेता हां में हां मिलाते हुए बाजार बंद का निर्णय,कम समय तक खोलने का निर्णय कर बैठते हैं। ये प्रतिनिधि उपखंड में बैठक में 5- 7 ही होते हैं। 15:20 मिनट की बैठक में यह निर्णय हो जाता है। 

व्यापारियों ने दुकानदारों ने आपस में बैठकर कभी चर्चा की?कोरोना रोगी जिस किसी शहर में मिले हैं तो उनकी हिस्ट्री देखी गई? क्या उस हिस्ट्री में दुकान से या बाजार से कोरोनावायरस फैलना सामने आया?

व्यापारी प्रतिनिधि हां में हां मिलाते हुए बंद का,लोक डाउन कर्फ्यू निर्णय कर लेते हैं। व्यापारियों ने कभी भी उपखंड अधिकारी को लिखित में यह क्यों नहीं दिया कि केवल व्यापार पर अंकुश लगाया जाता है। राजनीतिक रैलियों चाहे वह किसी भी पार्टी की हो उन पर रोक क्यों नहीं है? उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं है? यह समीक्षा क्यों नहीं हो रही कि दुकानदार व्यापारी कोरोना फैलाते हैं या नहीं फैलाते? इसकी समीक्षा होनी चाहिए। रेलें,बसें चल रही है जिनमें भीड़ होती है। वहां कोरोना फैलने का खतरा अधिक है। यहां तक कि चिकित्सालयों में रजिस्ट्रेशन के लिए कतारों में,प्रचार रैलियों को झंडी दिखाने में,कोरोनावारियों को सम्मानित करने के फोटोशूट,मंत्रियोंअधिकारियों को भेंट ज्ञापन में कोई सोशल डिस्टेंस नहीं होता।

हिंदुस्तान में पिछले 1 साल से व्यापार बहुत बुरी हालत के अंदर है। दुकानदार व्यापारी जिनसे लाखों करोड़ों लोग परिवार पलते हैं। उनके कर्मचारी पलते हैं। वे सभी लोकडाउन और बंद से बेहाल हो जाते हैं। बाजार खुलते हैं तो अनेक प्रकार के कार्य भी मजदूरी और रोजगार साथ साथ चलते हैं। बाजार बंद होने से मजदूरी करने वाले रेहड़ी,थड़ी,खोमचे  लगाने वाले भी प्रभावित होते हैं। 

 हिंदुस्तान में अधिकतर बल्कि कहना चाहिए कि 90% व्यापारी दुकानदार मध्यम वर्गीय और कम आय वाले परिवारों से जुड़े हुए हैं। बंद से उनकी रोजी रोटी पर संकट आता है तो मध्यमवर्गीय परिवारों के हर प्रकार के कार्य रुक जाते हैं। अच्छा खासा परिवार जमीन पर आ पड़ता है। 

उसे घर चलाने के लिए और दुर्भाग्य से कोई बीमारी हो जाए तो कर्जा भी लेना पड़ जाता है।

 यहां स्पष्ट रूप से कहा जाना चाहिए कि शासन और प्रशासन दुकानदारों पर अंकुश लगाने के लिए आगे रहने की प्रवृति और सोच बंद करे। 

राजनीतिक रैलियों पर राजनेताओं के कार्यक्रमों की भीड़ पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाता।

 बाजार में जो लोग मास्क के बिना घेरे में आते हैं उन पर तो जुर्माना लग जाता है लेकिन रैलियों की भीड़ पर किसी प्रकार का कोई जुर्माना नहीं लगता। आज तक शासन प्रशासन ने रैलियां निकालने वाले नेताओं के विरुद्ध कोई मुकदमे दर्ज नहीं किए और किसी को गिरफ्तार नहीं किया। 

ये सारे सवाल व्यापारी नेताओं को लिखित में शासन प्रशासन को देना चाहिए। 

आखिर अकेले व्यापारी और दुकानदार ही क्यों बंद और जुर्माने के शिकार किए जाते रहें जब उनकी कोई गलती नहीं है। 

उनकी कोई भूल भी नहीं है तो हमेशा सरकार का कड़ा निर्णय व्यापारियों पर ही लागू क्यों होता है? 

व्यापारी संगठनों को सोशल मीडिया चलाने वाले स्थानीय ग्रुप वालों से भी सीधा सवाल करना चाहिए और मिलना चाहिए कि वह ग्रुपों में केवल व्यापारियों के पीछे ही हाथ धो करके क्यों पड़े रहते हैं? व्यापार बंद कराने से दुकानें बंद कराने से सोशल मीडिया वालों को क्या लाभ है? यह कौनसी समाजसेवा है? 

स्थानीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के विरुद्ध ग्रुपों में क्यों नहीं लिखते? व्यापारी ही उनको कमजोर नजर आते हैं इसलिए जब चाहे व्यापारियों के विरुद्ध माहौल बनाना शुरू कर दिया जाता है? 

व्यापारी नेताओं को शासन प्रशासन के सामने सीधा एक ही सवाल करना चाहिए कि देश में कानून सबके लिए बराबर है।  उनके अनुसार ही कार्रवाई हो। राजनीतिक रैलियों की राजनेताओं द्वारा भीड़ इकट्ठी करने की छूट है तो व्यापारी तो केवल अपनी दुकान करता है जिसके अंदर भीड़ नहीं होती। शासन प्रशासन से बात करने के लिए लिखित में देने के लिए वे प्रतिनिधि भेजे जाने चाहिए जो मुंह के ताला लगाए और हाथ बांधे हों। सरकार धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाने से भी कतराती है यह साबित हो रहा है। 

सरकार के पास नौकरियां जरूरत के अनुसार है नहीं और होती भी नहीं है। लोग निजी क्षेत्रों में रोजी रोटी पाते हैं। 

कोरोना से बचाव के लिए तय गाइड लाईन का सख्ती से पालन हो और उस पर शासन प्रशासन को जोर लगाना चाहिए।

साभार : करणीदानसिंह राजपूत

ट्रेड फेयर की अनुमति को लेकर आयोजकों ने जिला प्रशासन से की अपील

  • आयोजक बोले, हमारे करीब 10 लाख रुपये खर्च हो गए, हम कहां जाए
  • कल 19 अप्रैल को डीसी से मिलकर पुन: लगाएंगे गुहार

सतीश बंसल सिरसा:

 जीटीएम कॉलोनी के ग्राउंड में लगने जा रहे ट्रेड फेयर पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। प्रशासन के इस निर्णय से रोषित ट्रेड फेयर आयोजकों ने आज ट्रेड फेयर स्थल पर पत्रकार वार्ता करते हुए अपनी व्यथा बताई। पत्रकार वार्ता में आयोजक रणधीर बांसल ने बताया कि 10 अप्रैल को कई जगहों से एनओसी लेने के बाद एसडीएम कार्यालय सिरसा ने ट्रेड फेयर लगाने की अनुमति प्रदान की थी। इसके बाद ट्रेड फेयर आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू की गई। तैयारियां जब अंतिम चरण में पहुंची, तो प्रशासन ने कोविड 19 का हवाला देते हुए परमिशन रद्द कर दी। इससे उन्हें करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है और इस आयोजन से 150 परिवारों का आर्थिक संचालन होना था, वह भी बर्बाद हो जाएगा। आयोजकों ने जिला प्रशासन से मीडिया के माध्यम से अपील करते हुए कहा कि एक बार उन्हें ट्रेड फेयर लगाने की इजाजत दी जाए। प्रशासन जो भी दिशा-निर्देश एवं शर्तें लागू करेगा, वे उसे पूरा करेंगे।

इसके लिए लिखित में ऐफिडेविट भी देने को हम तैयार है। अगर हमसे गलती होती है या हम उन दिशा निर्देशों या शर्तों की पालना नहीं करेंगे, तो हम पर कानूनी कार्रवाई भी प्रशासन करने के लिए पूरी तरह से अधिकृत होगा। आयोजकों ने बताया कि कोविड-19 की हिदायतों की पालना करवाने के लिए गेट पर 6 सिक्योरिटी गार्ड व मेले के अंदर बहुत से कर्मी तैनात होंगे, जो केवल इस पर ध्यान देंगे कि मास्क सभी ने पहना हो व सोशल डिस्टेंस की पालना हो। इसके अतिरिक्त अगर मेले में निर्धारित लोगों से ज्यादा संख्या होती है, तो आने वाले लोगों की एंट्री बैन कर दी जाएगी। आयोजकों ने कहा कि कल 19 अप्रैल को डीसी सिरसा से मिलकर पुन: गुहार लगाई जाएगी।

इस मौके पर पवन कुमार व सन्नी सिंह भी मौजूद थे।

पंजाब का किसान DBT(डाइरेक्ट बेनिफ़िट ट्रांसफर से खुश

पंजाब के किसान कृषि कानूनों खिलाफ आंदोलन के बीच केंद्र सरकार के एक फैसले से खुश हैं। केंद्र सरकार ने फसलों की खरीद का भुगतान सीधे किसानों के खाते में ऑनलाइन पेमेंट करने के निर्देश दिए हैं। इससे राज्‍य के किसान खुश हैं। दरअसल पंजाब के किसान लंबे समय से फसल खरीद की सीधी अदायगी की मांग कर रहे थे। इस निर्देश से आढ़तियों में बेचैनी है और वे चाहते हैं कि किसान संगठन इसका विराेध करें। केंद्र सरकार ने पंजाब को हरियाणा के मॉडल को अपनाने की सलाह दी थी, जहाँ एमएसपी की रकम जमा कराने के लिए जमीनों की जगह उत्पादकों की जानकारी का इस्तेमाल किया गया है। अब से मंडी तक लाई गई फसलों की कीमत आधार कार्ड के जरिए अदा की जाएगी।

इस आदेश से आढ़तिया परेशान

  • केंद्र ने फसल बिक्री का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में करने को कहा है।
  • अब तक किसानों को एमएसपी (MSP) का भुगतान आढ़तियों के जरिए किया जाता रहा है।
  • हरियाणा में बीजेपी सरकार है, इसलिए यह फैसला लागू कर दिया है।
  • इस साल की खरीद प्रक्रिया के दौरान 100 फीसदी ऑनलाइन भुगतान होगा।
  • रबी मार्केटिंग सीजन 2020-21 में 23 प्रतिशत किसानों ने सीधे खाते में पैसे लिए थे।
  • -धान के सीजन में 67 प्रतिशत किसानों ने सीधे खाते में पैसे लिए.

‘पुरनूर’ कोरल, चंडीगढ़ – 18 अप्रैल :

पंजाब के किसानों के अनाज की कीमतें सीधे उनके खातों में आनी शुरू हो गई हैं। इसके लिए हाल ही में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने पंजाब सरकार से जमीनों का रिकॉर्ड माँगा था, ताकि किसानों के खातों में सीधे एमएसपी की रकम जमा की जा सके।

आढ़ती संगठन लगातार किसानों से बात करके उनके पक्ष में बयान देने को कह रहे हैं, लेकिन अभी तक बलबीर सिंह राजेवाल के अलावा किसी ने भी आढ़तियों के पक्ष में आवाज नहीं उठाई है। दरअसल ऐसा करना उनके लिए आसान नहीं है, क्योंकि लंबे समय से किसान ये मांग कर रहे हैं कि उन्हें उनकी फसल का भुगतान सीधा किया जाए न कि आढ़तियों के माध्यम से।

अमरिंदर सिंह सरकार ने केंद्र को जानकारी दी थी कि पंजाब के आधे किसान केवल फसलों के उत्पादक हैं, जमीनों के मालिक नहीं। इस पर केंद्र सरकार ने पंजाब को हरियाणा के मॉडल को अपनाने की सलाह दी थी, जहाँ एमएसपी की रकम जमा कराने के लिए जमीनों की जगह उत्पादकों की जानकारी का इस्तेमाल किया गया है। अब से मंडी तक लाई गई फसलों की कीमत आधार कार्ड के जरिए अदा की जाएगी।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक रवि भगत ने कहा कि परीक्षणों के बाद बड़ी संख्या में किसानों ने अपने बैंक खातों में एमएसपी भुगतान प्राप्त करने लगे हैं।

दरअसल केंद्र सरकार एफसीआई के खर्चों को कम करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उसमें आढ़तियों को दी जाने वाली 2.5 फीसदी आढ़त और सरकार को दिया जाने वाला तीन फीसदी देहाती विकास फंड पर अंकुश लगाना भी शामिल है। आढ़तियों को यह भी लग रहा है कि केंद्र सरकार उन्हें धीरे-धीरे फसल खरीद सिस्टम से बाहर करना चाहती है। साथ ही आढ़तियों ने एक अप्रैल से हड़ताल पर जाने का ऐलान भी किया है।

डायरेक्ट पेमेंट सिस्टम को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) दकौंडा के महासचिव और किसान नेता जगमोहन सिंह ने नई व्यवस्था को किसानों के जीवन में एक बड़ा दिन करार दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार है, जब दूसरों पर निर्भर हुए बिना ही किसानों के हाथों में पैसा आ रहा है।

सरकार की नई व्यवस्था से लोगों के चेहरों पर खुशी के भाव हैं। राजपुरा के निकट नीलपुर गाँव के रहने वाले दलीप कुमार (39 वर्ष) डायरेक्ट पेमेंट की व्यवस्था को बेस्ट बताते हुए कहते हैं, “यह सबसे अच्छी प्रणाली है। हमारे खाते में हमारी फसल का भुगतान हो रहा है, इससे बेहतर क्या हो सकता है?”

आगामी रबी विपणन सीजन 2021-22 में गेहूं की सरकारी खरीद 10 अप्रैल 2021 से शुरू होने जा रही है, लेकिन फसल के दाम का किसानों के खाते में सीधा भुगतान करने में जमीन के रिकॉर्ड को लेकर पेंच फंसा हुआ है। हालांकि देश के अन्य राज्यों ने फसलों की सरकारी खरीद में जमीन के रिकॉर्ड को दाखिल करने की व्यवस्था लागू करके फसल के दाम का सीधा भुगतान किसानों के खाते में करना शुरू कर दिया है, लेकिन पंजाब में अब तक किसानों को आढ़तियों के मार्फत ही भुगतान होता है। केंद्र सरकार का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद में किसानों की जमीन का रिकॉर्ड दाखिल करने और ऑनलाइन भुगतान होने से व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और असली किसानों को इसका फायदा मिलेगा, लेकिन पंजाब सरकार (Punjab Government) आगामी रबी सीजन में जमीन के रिकॉर्ड दाखिल करने की अनिवार्यता लागू करने को तैयार नहीं है. प्रदेश सरकार का कहना है कि इसके लिए उसे और समय की आवश्यकता है। केंद्र सरकार ने पंजाब को हरियाणा के मॉडल को अपनाने की सलाह दी थी, जहाँ एमएसपी की रकम जमा कराने के लिए जमीनों की जगह उत्पादकों की जानकारी का इस्तेमाल किया गया है। अब से मंडी तक लाई गई फसलों की कीमत आधार कार्ड के जरिए अदा की जाएगी। इसके बाद केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी थी कि वह एमएसपी का पैसा सीधे किसानों के खाते में भेजे, यदि सरकार किसानों के खाते में सीधे पैसा नहीं भेजती है तो राज्य में खाद्यान्न की खरीद बंद कर दी जाएगी। बता दें कि पंजाब सरकार आढ़तियों के जरिए एमसपी का पैसा देना चाहती थी। 

एक दैनिक समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, दलीप ने कहा कि वह बीते 15 साल के कृषि कर रहे हैं। उन्होंने मंडी के लिए 10 एकड़ में खेती की है। वह 40 एकड़ में खेती करते हैं और आने वाले दिनों में शेष गेहूँ खरीद के लिए ले जाएँगे। दलीप कहते हैं कि ऐसा पहली बार उनके साथ हो रहा है कि 1,975 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से एमएसपी उन्हें मिलेगी।

पुरानी व्यवस्था के बारे में दलीप बताते हैं, “पहले आढ़तिए हमें चेक दिया करते थे। फसल को मंडी में ले जाने के बाद सब कुछ एजेंट के हाथ में होता था। फसलों के लेनदेन में काफी समय लगता था, क्योंकि आढ़तिया हमेशा कुछ न कुछ बहाना बनाता ही रहता था। ताकि भुगतान को रोका जा सके।”

इससे पहले डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का भुगतान करने पर केंद्र और पंजाब सरकार में ठन गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी थी कि वह एमएसपी का पैसा सीधे किसानों के खाते में भेजे, यदि सरकार किसानों के खाते में सीधे पैसा नहीं भेजती है तो राज्य में खाद्यान्न की खरीद बंद कर दी जाएगी। बता दें कि पंजाब सरकार आढ़तियों के जरिए एमसपी का पैसा देना चाहती थी।