मेरा कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और न ही मैं चुनाव लड़ने की इच्छा रखता हूँ : पूर्व न्यायाधीश रंजन गोगोई

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने रविवार को उन अटकलों को खारिज कर दिया कि वह असम में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे.

नयी दिल्ली (ब्यूरो):

पूर्व न्यायाधीश रंजन गोगोई को लेकर विपक्ष ने दुष्प्रचार अभियान छेड़ रखा है। इसी कड़ी में आज दावा किया गया कि वे असम के अगले विधानसभा चुनावों में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। मीडिया से बातचीत में गोगोई ने इसका खंडन किया है। इससे पहले बीजेपी भी इन दावों को नकार चुकी है।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “मेरा कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और न ही मैं चुनाव लड़ने की इच्छा रखता हूँ। किसी ने भी मुझसे इस तरह की संभावनाओं का ज़िक्र नहीं किया है।” इसके अलावा उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा की सदस्यता स्वीकार करने का यह मतलब नहीं है कि वह राजनीति में शामिल होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सदन अपने विचार रखने का माध्यम है, यहाँ सदस्यों को अपनी बात कहने की पूरी स्वतंत्रता है। यही कारण था कि मैंने राज्यसभा का प्रस्ताव स्वीकार किया। इसका राजनीति या चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।

दरअसल असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता तरुण गोगोई ने कहा था, “भाजपा राम मंदिर के फैसले की वजह से रंजन गोगोई से बहुत खुश है। नतीजतन मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया। वह (रंजन गोगोई) राज्यसभा के प्रस्ताव को ठुकरा भी सकते थे, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति के लालच में ऐसा नहीं किया।”

इसके अलावा उन्होंने कहा था, “मैंने सूत्रों से सुना था कि भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की सूची में रंजन गोगोई का नाम सबसे आगे है। इस बात की पूरी उम्मीद है कि असम के आगामी विधानसभा चुनावों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश भाजपा के मुख्यमंत्री प्रत्याशी हो सकते हैं।”

इनका जवाब देते हुए गोगोई ने कहा, “मैं अपनी मर्ज़ी से राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित किया गया हूँ। यह एक ज़रिया है लोकतांत्रिक मंच पर अपना नज़रिया रखने का और इसकी वजह से मैं नेता नहीं बन जाता हूँ।” उन्होंने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोगों को यह भी नहीं पता कि राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होना और किसी राजनीतिक दल से चुने जाने पर सदन का सदस्य बनना अलग-अलग बात है।  

इससे पहले असम की भाजपा इकाई ने कॉन्ग्रेस नेता के दावों को मनगढ़ंत और झूठा बताया था। असम भाजपा के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने कहा, “जब लोग बूढ़े हो जाते हैं तब वह इस तरह की निरर्थक बातें करने लगते हैं। हम तरुण गोगोई के बयान को इस श्रेणी में ही रखना चाहते हैं। मैं कई मुख्यमंत्रियों से पहले मिल चुका हूँ लेकिन तरुण गोगोई जैसी बेबुनियादी बातें कोई और नहीं करता है। उनकी इस बात में बिलकुल भी सच्चाई नहीं है। न जाने किस आधार पर उन्होंने इतना बड़ा दावा कर दिया।”    

कांग्रेस के बागी: सचिन आखिरी नहीं

  • राजस्थान में संकट में आई गहलोत की सरकार
  • कांग्रेस में उभर रहा युवा नेताओं का असंतोष
  • सिंधिया और हिमंता बिस्वा की राह पर पायलट

डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम सिंधिया के इस्तीफ़े को कांग्रेस के लिए ख़तरे की घंटी बताया था। उस समय भी कहा गया था कि, “ऐसा नहीं है कि सिंधिया से पहले कोई कांग्रेस नेता बीजेपी में शामिल नहीं हुआ. असम के हिमंता बिस्वा सरमा को देखिए. कांग्रेस ने उन्हें तवज्जो नहीं दी और अब वो बीजेपी में जाकर चमक रहे हैं. अब सिंधिया के इस्तीफ़े से कांग्रेस के अन्य युवा नेताओं के भी ऐसा क़दम उठाने की आशंका है.”

आज हम फिर दोहराते हैं कि सचिन आखिरी नहीं हैं, मिलिंद देवड़ा, आरपीएन सिंह और जितिन प्रसाद जैसे युवा नेताओं को पार्टी ने कोई अहम भूमिका नहीं दी है. ऐसे में उनमें असंतोष आना स्वाभाविक है। कांग्रेस के कई नेता बीच-बीच में पार्टी की अप्रभावी कार्यशैली और नेतृत्व की कमी का मुद्दा उठाते रहते हैं। ज़ाहिर है, कांग्रेस के अपने नेताओं में भी कम असंतोष नहीं है।

Sachin Pilot , Jyotiraditya Scindia , RPN Singh Milind Deora Jitin Prasada during the swearing-in ceremony for the new ministers at Rashtrapati Bhavan on October 28, 2012 in New Delhi, India

सारिका तिवारी, चंडीगढ़ – 13 जुलाई :

सियासत में हमेशा ओल्ड गार्ड के साथ युवा जोश के सामंजस्य को कामयाबी की सबसे मजबूत कड़ी समझा जाता है. ये फॉर्मूला कई मौकों पर कारगर होते हुए भी देखा गया है. मौजूदा वक्त में राजनीतिक संकट से जूझ रही कांग्रेस के लिए भी अनुभव और युवा सोच ने मिलकर जीत की कई कहानियां लिखी हैं, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि युवा चेहरे ही पार्टी के साथ-साथ दिग्गज नेताओं की चूलें हिला रहे हैं.

ताजा उदाहरण सचिन पायलट का है. राजेश पायलट जैसे कांग्रेसी दिग्गज के बेटे सचिन पायलट 26 साल की उम्र में कांग्रेस से सांसद बने तो 35 साल की उम्र में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में जगह दी गई. इसके बाद 2014 में जब उनकी उम्र 37 साल थी तो पार्टी ने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान उनके हाथों में सौंप दी.

सचिन पायलट ने जी-तोड़ मेहनत की. पूरे प्रदेश में घूमकर तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार को एक्सपोज किया और अपने संगठन को मजबूती से आगे बढ़ाया. ये वो वक्त था जब अशोक गहलोत दिल्ली में राहुल गांधी के साथ देश की राजनीतिक बागडोर संभाले हुए थे. सचिन पायलट की मेहनत रंग लाई और 2018 में राजस्थान की जनता ने वसुंधरा सरकार उखाड़ फेंकी और कांग्रेस को सत्ता सौंप दी. हालांकि, जब जीत का सेहरा बंधने का नंबर आया तो अशोक गहलोत का तजुर्बा और प्रदेश व पार्टी में उनकी पकड़ सचिन पायलट की पांच साल की मेहनत पर भारी पड़ गई. तमाम खींचतान के बाद सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री पद पर राजी हुए, लेकिन दोनों में तालमेल नहीं बैठ पाया. अब बात यहां तक पहुंच गई है कि सचिन पायलट बगावत पर उतर आए हैं और गहलोत सरकार संकट में आ गई है.

सिंधिया ने दिखाई कांग्रेस को जगह

इसी साल मार्च महीने में जब देश में कोरोना वायरस का संक्रमण अपने पैर पसार रहा था और देश होली के जश्न में डूबा हुआ था, मध्य प्रदेश और देश की राजनीति का बड़ा फेस माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस को ऐसा गम दिया कि पार्टी को सरकार से हाथ धोना पड़ा. पिता माधवराव सिंधिया की मौत के बाद सिंधिया ने 2001 में कांग्रेस ज्वाइन की और चुनाव-दर चुनाव गुना लोकसभा से जीतते चले गए. 2007 में केंद्र की मनमोहन सरकार में सिंधिया को मंत्री बनाकर बड़ा तोहफा दिया गया. लेकिन 2018 में जब मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद पार्टी नेतृत्व ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया तो सिंधिया के अरमान टूट गए. इसका नतीजा ये हुआ कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी का साथ देकर कमलनाथ की सरकार 15 महीने के अंदर ही गिरा दी.

हिमंता बिस्वा सरमा ने नॉर्थ ईस्ट से बाहर कराया

सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के लिए उन राज्यों में चुनौती बनकर उभरे जहां मुख्य विरोधी बीजेपी हमेशा से मजबूत रही है. लेकिन पार्टी के एक और युवा चेहरे रहे हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस को जो नुकसान पहुंचाया वो ऐतिहासिक है. हिमंता बिस्वा सरमा कभी दिल्ली में बैठे कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच रखते थे. लेकिन 2015 में उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया. 1996 से 2015 तक हिमंता बिस्वा कांग्रेस में रहे और असम की कांग्रेस सरकार में मंत्रीपद भी संभाला.

कांग्रेस से हिमंता बिस्वा सरमा इतने नाराज हो गए कि उन्होंने बीजेपी में जाने का फैसला कर लिया. उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर उस वक्त गंभीर आरोप भी लगाए. इसके बाद 2016 असम विधानसभा चुनाव लड़ा और कैबिनेट मंत्री बने. इतना ही नहीं बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने हिमंता बिस्वा सरमा को नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक भी बना दिया. NEDA, नॉर्थ ईस्ट भारत के कई क्षेत्रीय दलों का एक गठबंधन है. नेडा के संयोजक रहते हुए हिमंता बिस्वा सरमा बीजेपी के लिए सबसे बड़े संकटमोचक के तौर पर उभरकर सामने आए. नॉर्थ ईस्ट की राजनीति में शून्य कही जाने वाली बीजेपी ने असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे राज्यों में सरकार बनाकर कांग्रेस का सफाया कर दिया. इसके अलावा नॉर्थ ईस्ट के अन्य राज्यों की सत्ता में भी बीजेपी का दखल बढ़ गया. हिमंता बिस्वा सरमा ने नॉर्थ ईस्ट की राजनीति में बीजेपी की बढ़त बनाने में अहम भूमिका अदा की.

इस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जहां कमलनाथ जैसे दिग्गज को कुर्सी से हटाने का काम किया, वहीं सचिन पायलट अब कांग्रेस के जमीनी नेताओं में शुमार अशोक गहलोत के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं. वहीं, हिमंता बिस्वा सरमा लगातार कांग्रेस को बड़ा आघात पहुंचा रहे हैं. यानी कांग्रेस के ये तीन युवा चेहरे रहे आज देश की इस सबसे पुरानी पार्टी के बड़े-बड़े दिग्गजों को सियासी धूल चटा रहे हैं.

मणिपुर में भाजपा स्थिर

नेशनल पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. जिसके बाद मणिपुर में अपनी सरकार को स्थिर रखने के लिए बीजेपी ने एक बार फिर क्षेत्रीय दल का समर्थन हासिल कर लिया. दरअसल मणिपुर में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार एनपीपी के चार और बीजेपी के तीन बागी विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद मुश्किल में आ गई थी.

नई दिल्‍ली(ब्यूरो):

मणिपुर में बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार पर चल रहे संकट के बीच बुधवार को दिल्‍ली में गृह मंत्री अध्‍यक्ष अमित शाह और बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से नेशनल पीपुल्‍स पार्टी के बागी विधायकों ने मुलाकात की. उनका नेतृत्‍व पार्टी चीफ और मेघालय के मुख्‍यमंत्री कोनराड संगमा ने किया. इस दौरान मणिपुर में चल रहे राजनीतिक संकट पर चर्चा की गई. यह जानकारी बीजेपी नेता और नॉर्थ ईस्‍ट डेमोक्रेटिक अलायंस के संयोजक हेमंत बिस्‍व सरमा ने दी.

नॉर्थ ईस्‍ट में बीजेपी के संकटमोचक कहे जाने वाले हेमंत बिस्‍व सरमा ने बताया कि एनपीपी मणिपुर में बीजेपी सरकार को समर्थन जारी रखेगी. हम विकास के लिए साथ मिलकर काम करेंगे. वहीं सूत्रों के मुताबिक अमित शाह से मुलाकात के बाद बीजेपी और एनपीपी के बीच समझौता हो गया है. कहा जा रहा है कि गुरुवार को एनपीपी विधायक राज्‍यपाल से मिलेंगे और सरकार को अपने समर्थन का दावा पेश करेंगे. ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि बीजेपी सरकार से समर्थन वापस लेने वाले एनपीपी के चारों विधायक वापस सरकार में लौट सकते हैं. सूत्रों ने बताया कि इसे लेकर बीजेपी आलाकमान को जानकारी दी गई है.

बता दें कि सरकार से समर्थन वापस लेकर कांग्रेस में शामिल हुए नेशनल पीपुल्‍स पार्टी के 4 विधायकों को चर्चा के लिए दिल्‍ली बुलाया गया था. इससे पहले हेमंत बिस्‍व सरमा ने रविवार को इंफाल पहुंचकर पूरे मामले को समझा था. उनके साथ एनपीपी प्रमुख और मेघालय के मुख्‍यमंत्री कोनराड संगमा भी थे. इस मामले पर हेमंत बिस्‍व सरमा का कहना था कि नॉर्थ ईस्‍ट डेमोक्रेटिक अलायंस और एनडीए के बीच समर्थन जारी रहेगा. हेमंत बिस्‍व सरमा ने कहा था कि मणिपुर के संबंध में घबराने की कोई जरूरत नहीं है. हम सभी विधायकों के साथ विचार विमर्श कर रहे हैं. सभी मुद्दों को मैत्रीपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा.

मणिपुर में बीजेपी की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार से उपमुख्यमंत्री वाई जॉय कुमार सिंह, आदिवासी एवं पर्वतीय क्षेत्र विकास मंत्री एन कायिशी, युवा मामलों और खेल मंत्री लेतपाओ हाओकिप और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एल जयंत कुमार सिंह ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था. ​एनपीपी से इस्तीफा देने के बाद इन चारों विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन देने का भी ऐलान किया था.

तेल के कुएं में लगी आग गांवों तक पहुंची

तिनसुकिया भारत के असम प्रदेश का एक छोटा सा शहर, तिनसुकिया जिले का प्रशासनिक मुख्यालय तथा नगर निगम बोर्ड है। यह असम राज्य का एक प्रमुख क्षेत्रीय व्यापारिक केंद्र भी है। यह असम कि राजधानी गुवाहाटी से 486 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर-पूर्व में और अरुणाचल प्रदेश की सीमा से 84 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। असम के व्यापारिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध इस नगर में असमिया और अन्य भाषाई विशेषकर हिंदीभाषी, बंगाली, नेपाली और सिख लोग रहते हैं। आज तिनसुकिया तेल के कुएं में लगी आग के कारण सुर्खियों में है।

  • पिछले दो हफ्ते से कुएं से गैस का रिसाव जारी
  • इसे रोकने के लिए घटनास्थल पर कई टीम मौजूद

दिल्ली(ब्यूरो):

असम के तिनसुकिया जिले में बघजान स्थित ऑयल इंडिया लिमिटेड के गैस के कुएं में आग लगने की खबर है. घटनास्थल पर नेशनल डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) की टीम पहुंच गई है. आग बुझाने का काम जारी है. पिछले कई दिनों से इस कुएं से गैस बाहर निकल रही थी. मंगलवार को अचानक इसमें आग लग गई. आग के लपटें दो किलोमीटर दूर से भी देखी जा सकती हैं.आग बुझाने के काम में वायुसेना की भी मदद ली जा रही है.

आग की इस घटना में ऑयल फील्ड के आसपास के कम से कम 30 मकान जल गए हैं. आग की लपटें काफी दूर से देखी जा रही हैं. एहतियात के तौर पर घटनास्थल के आसपास से 1610 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर हटा दिया गया है. आग बुझाने के लिए ऑयल इंडिया, ओएनजीसी के दमकल और तिनसुकिया व डिब्रूगढ़ जिले से कई फायर टेंडर की कई गाड़ियां वहां भेजी गई हैं. जिला प्रशासन के कई आला अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं.

एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर पहुंच कर आग बुझाने के काम में जुटी है. स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी है. आग की इस घटना में ओएनजीसी का एक कर्मचारी घायल हुआ है जिसे डिब्रूगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दाखिल कराया गया है.

सिलॉन्ग में रक्षा प्रवक्ता विंग कमांडर रत्नाकर सिंह ने कहा कि वायुसेना ने फायर टेंडर घटनास्थल पर भेजे हैं. रत्नाकर सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन की मदद में दमकल की 3 गाड़ियां भेजी गई हैं.

एक अधिकारी ने बताया कि पिछले 14 दिन से कुएं से गैस का रिसाव हो रहा था जिसमें मंगलवार को अचानक आग लग गई. आग बुझाने के लिए सिंगापुर से भी एक्सपर्ट बुलाए गए हैं. सिंगापुर की कंपनी अलर्ट डिजास्टर कंट्रोल के तीन एक्सपर्ट घटनास्थल पर मौजूद हैं. जिस वक्त आग लगी, उस समय कुएं से गैस रिसाव रोकने की कोशिश चल रही थी.

कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. दकमल की कई गाड़ियां घटनास्थल पर लगी हैं और आग बुझाने का काम चल रहा है. आग लगने की वजह का पता नहीं चल पाया है. प्रदेश के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना के बारे में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जानकारी दी है. मुख्यमंत्री ने गैस कुएं के आसपास फायर और इमरजेंसी सेवाएं लगाने का निर्देश दिया है. स्थिति नियंत्रण में रहे, इसके लिए सेना और पुलिस की टीम को भी लगाया गया है.

घटना के बारे में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार ने लोगों की सुरक्षा में पहले से ही कई कदम उठाए हैं. लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख सचिव और डीजीपी को निर्देश दिए गए हैं. एनडीआरएफ, अर्धसैनिक बल और जिला प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं. इस बारे में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से भी बात हुई है और उन्हे घटना की जानकारी दी गई है.

ऑयल इंडिया का बयान

ऑल इंडिया ने एक बयान में कहा है कि कुएं की सफाई चल रही थी, इसी दौरान उसमें आग लग गई. किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. ओएनजीसीएल के एक दमकलकर्मी को हल्की चोट आई है. आग बुझाने में दमकल की कई गाड़ियां लगी हैं. घटना को लेकर कुएं के आसपास लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था जिसके बाद असम सरकार के प्रमुख सचिव और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई. तिनसुकिया जिला प्रशासन से मांग की गई है कि सुरक्षा व्यवस्था कायम की जाए ताकि एक्सपर्ट प्लांट में आ सकें. आसपास रहने वाले ऑयल इंडिया और ओएनजीसी के कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर हटा दिया गया है. स्थिति एक बार सामान्य हो जाए, उसके बाद ‘अलर्ट’ और प्लांट के स्टाफ को वहां बुला लिया जाएगा.

इक जानवर की जान आज इन्सानों ने ली है तो ……… ?

सैम दीपक (पशु प्रेमी) पत्रकार

किसी शर्मनाक हरकत के लिए अक्सर कहा जाता है कि जानवर हो क्या? लेकिन केरल में जो हुआ उसके बाद अब शायद ये कहावत बदलनी पड़े जहां खाने की तलाश में शहर की ओर आई हथिनी को किसी ने अन्नानास के अंदर पटाखे रख कर खिला दिये। जैसे ही उसने उसे खाने की कोशिश की, उसके मुंह के भीतर धमाके होने लगे और दर्द से छटपटाती हुई वो जंगल की ओर भागी लेकिन यहां भी उसने इंसानियत (animal istinct) नहीं छोड़ी, इस दौरान वो वह जिस रास्ते और गांव से निकली उसने किसी घर को नहीं तोड़ा न किसी को नुकसान ही पहुंचाया और एक नदी में जाकर खड़ी हो गई और तीन दिन तक पानी में खड़ी रही और वहीं जान दे दी।

जब पोस्टमार्टम हुआ तो डॉक्टर भी खुद को रोने से नहीं रोक सके जब उन्होंने देखा कि वो हथिनी अकेली नहीं मरी है उसके पेट में एक नन्ही जान पल रही थी…दरअसल किसी क्रूर इंसान ने तीन जानें ली हैं हथिनी की, उसके बच्चे की और भरोसे की जो उसने हम इंसानों पर किया। वह हथिनी तीन दिन तक पानी में खड़ी रही और किसी को अपने पास नहीं आने दिया शायद वो जवाब चाह रही थी कि हमें जानवर कहने वालों क्या तुम सच में इंसान हो?

असम में एक सब्जी विक्रेता की पाँच लोगों ने निर्ममता से पीट-पीट कर हत्या कर दी

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

      असम में एक सब्जी विक्रेता की पाँच लोगों ने निर्ममता से पीट-पीट कर हत्या कर दी। यह वीभत्स हत्या असम के हाजो के पास मनाहकुची में हुई, जहाँ सनातन दास पर फैजुल अली और उसके दोस्तों ने जानलेवा हमला किया था।

     मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तेतेलिया गाँव के सनातन दास एक कारखाने में मजदूर के रूप में काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन के कारण फैक्ट्री बंद हो गई थी, इसलिए उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों से निपटने के लिए अपनी साइकिल पर सब्जियाँ बेचने का काम शुरू किया था।

            हाजो की सड़कों पर सब्जियाँ बेचने के क्रम में सनातन की साइकिल गलती से एक कार से टकरा गई। उस कार में फैजुल अली और लाजिल अली सवार थे। साइकिल के कार में टकराने से फैजुल और लाजिल को गुस्सा आ गया और उन दोनों ने गुस्से में आकर सनातन दास को पीटना शुरू कर दिया।

      इसके अलावा उन्होंने इलाके में सब्जियाँ बेचने को लेकर भी सनातन के साथ बहस की। वे अपनी कार पर आए मामूली खरोंच से इतने क्रोधित हो गए कि उन्होंने सनातन की पिटाई करने के लिए और लोगों को भी बुला लिया। जिसके बाद तीन और लोग, शब्बीर अली, यूसुब अली और फरजान अली मौके पर पहुँचे और उन दोनों के साथ मिलकर सनातन दास की पिटाई कर दी।

      सनातन दास को गंभीर रूप से घायल करने के बाद, अपराधी मौके से फरार हो गए। जल्द ही इलाके के लोगों ने उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन भर्ती होने के एक घंटे के भीतर उन्होंने दम तोड़ दिया।

      बताया जा रहा है कि फैजुल अली एक एजीपी नेता का भाई है। हाजो पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। साथ ही पुलिस ने दोषियों की तलाश भी शुरू कर दी है।

‘कोरोना योद्धाओं’ पर भारतीय सेना ने की पुष्पवर्षा

सरहद पर वतन के लिए जान न्यौछावर करने वाले रविवार को एक अलग ही तरह की सेवा पर हैं। आज वे उन योद्धाओं पर फूल बरसा रहे हैं, जो कोरोना की जंग में मैदान में अपनी जान की बाजी लगाकर मैदान में डटे हुए हैं। इन कोरोना योद्धाओं में डाक्टर, सभी स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी और पुलिस कर्मी शामिल हैं।

  • जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जताया आभार
  • महाराष्ट्र से लेकर बंगाल की खाड़ी तक दी गई सलामी
  • बंगाल की खाड़ी में INS जलशवा ने जताया आभार

डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम, चंडीगढ़ :

दिल्ली सहित मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, चेन्नई, राजस्थान, मध्य प्रदेश में कोरोना योद्धाओं के सम्मान में तीनों सेनाएं विभिन्न आयोजनों के जरिए उनका आभार व्यक्त किया।

चंडीगढ़ में भारतीय वायुसेना के विमान C-130 ने सुखना झील के ऊपर से फ्लाई पास्ट किया। आज तीनों सेनाएं ‘कोरोना योद्धाओं’ को उनकी सेवाओं के लिए आभार प्रकट किया।

जम्मू-कश्मीर: जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज(GMC) में भारतीय सेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति अपना आभार प्रकट करने के लिए बैंड बजाया

भारतीय वायु सेना (IAF) ने दिल्ली में वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज, सफदरजंग हॉस्पिटल के ऊपर से फ्लाई पास्ट करते हुए फूल बरसा कर कोरोना वॉरियर्स के प्रति आभार व्यक्त किया।

असम: गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल(GMCH) में ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताते हुए भारतीय वायुसेना ने बैंड बजाया और फ्लाईपास्ट किया गया। 

बिहार: भारतीय वायुसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ का आभार जताते हुए AIIMS पटना पर फूल बरसाए और फ्लाईपास्ट किया।

त्रि-सेवा प्रमुखों के प्रतिनिधि- मेजर जनरल आलोक काकेर, रियर एडमिरल मैकार्थी और एयर वाइस मार्शल पी.के. घोष ने आज राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में श्रद्धांजलि अर्पित की: दिल्ली

दिल्ली: नरेला क्वारंटाइन सेंटर में बैंड बजाकर ‘कोरोना योद्धाओं’ का आभार जताई भारतीय सेना।

दिल्ली: LNJP अस्पताल के नोडल ऑफीसर ने कहा कि भारतीय वायुसेना बहुत अच्छा काम कर रही है। हमारा जो सम्मान किया गया है इसके हम आभारी हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई को जीत गए हों। इससे हमारे हौंसले और भी बढ़ेंगे।

दिल्ली: भारतीय वायुसेना बहुत अच्छा काम कर रही है। हमारा जो सम्मान किया गया है इसके हम आभारी हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई को जीत गए हों। ये हमारे हौंसले को बढ़ाएगा: नोडल ऑफीसर, LNJP अस्पताल

दिल्ली: ये हमारे लिए गर्व की बात है क्योंकि राष्ट्र के लिए वो भी लड़ते हैं और राष्ट्र के लिए हम भी लड़ रहे हैं लेकिन वो हमारा सम्मान कर रहे हैं तो हम उन्हें सल्यूट करते हैं: कोरोना वॉरियर 

दिल्ली: भारतीय वायु सेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ को आभार प्रकट करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पर फूल बरसाए।

दिल्ली: भारतीय वायुसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताते हुए राम मनोहर लोहिया अस्पताल पर फूल बरसाए।

दिल्ली: भारतीय वायुसेना ने पुलिसकर्मियों का आभार प्रकट करने के लिए पुलिस युद्ध स्मारक पर फूलों की वर्षा की।

दिल्ली: भारतीय वायुसेना के चॉपर ने पुलिसकर्मियों का आभार प्रकट करने के लिए पुलिस युद्ध स्मारक पर फूलों की वर्षा की

दिल्ली: गंगा राम अस्पताल में बैंड बजाकर ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति अपना आभार जताती भारतीय सेना। आज तीनों सेनाएं अलग-अलग तरह से स्वास्थ्यकर्मियों और दूसरे अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के प्रति अपना आभार जता रही हैं।

मध्यप्रदेश: भोपाल के चिरायु अस्पताल में ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताते हुए स्वास्थ्यकर्मियों पर फूल बरसाए गए।

लेह: S.N.M. अस्पताल में कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ रहे कोरोना वॉरियर्स पर भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर ने फूल बरसा कर हवाई सलामी दी।

राजस्थान: भारतीय वायुसेना ने जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के ऊपर से फ्लाईपास्ट कर ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति अपना आभार जताया।

त्रिवेंद्रम: भारतीय वायुसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताने के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज पर फूल बरसाए

चेन्नई: भारतीय वायुसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताने के लिए राजीव गांधी सरकारी अस्पताल पर फूल बरसाए।

बेंगलुरु: भारतीय वायुसेना ने इस मुश्किल वक़्त में लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार प्रकट करने के लिए विक्टोरिया अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों पर फूल बरसाए। 

लखनऊ: भारतीय वायुसेना ने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMU) के ऊपर से फ्लाईपास्ट किया और ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार प्रकट करने के लिए फूलों की वर्षा की। 

मुंबई: INHS अश्विनी नौसैनिक अस्पताल में कार्यरत कोरोना वॉरियर्स के कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जुटे रहने के हौंसले के प्रति आभार प्रकट करने के लिए हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए गए।

मुंबई: मरीन ड्राइव से फ्लाई पास्ट करता भारतीय वायुसेना का विमान। आज तीनों सेनाएं अलग-अलग तरह से ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार प्रकट कर रही हैं|

भारतीय वायु सेना ने मेडिकल प्रोफेशनल्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स के कोरोना महामारी के खिलाफ सराहनीय काम के प्रति आभार प्रकट करने के लिए राजपथ के ऊपर से फ्लाईपास्ट किया: दिल्ली

गोवा: भारतीय नौसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताने के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज के ऊपर से फ्लाई पास्ट किया और स्वास्थ्यकर्मियों पर फूल बरसाए।

हरियाणा: कोरोना वॉरियर्स के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए पंचकूला सेक्टर-6 के सरकारी अस्पताल के बाहर आर्मी बैंड ने लयबद्ध होकर प्रस्तुति दी।

भारतीय वायुसेना आज सम्पूर्ण भारत में कोरोना वाररिओर्स पर फूल बरसाएगी

नई दिल्ली. 

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के अधिकारियों (Officers) ने सूचना दी है कि 9 फाइटर एयरक्राफ्ट (Fighter Aircraft), जिसमें 3 सुखोई-30 MKI (Sukhoi-20 MKI), 3 मिग-29 (MIG-29) और 3 जगुआर (Jaguar) शामिल हैं, 3 C-130J ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (Transport Aircraft) के साथ मिलकर COVID-19 वॉरियर्स (COVID-19 Warriors) के प्रति सम्मान दिखाने के लिए रविवार को राष्ट्रीय राजधानी के ऊपर उड़ान भरेंगे.

9 फाइटर प्लेन के जरिए श्रीनगर से ...

भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के अधिकारियों (Officers) ने यह भी बताया कि इसके कई सारे हेलिकॉप्टर भी अस्पतालों (Hospitals) के ऊपर फूलों की बारिश करेंगे.

प्लेन मेडिकल सप्लाई लेकर भी जाएंगे, जो एयरबेस पर की जाएंगी डिलीवर
भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के अधिकारियों ने यह भी बताया है, “दो C-130J सुपर हरक्यूलिस स्पेशल ऑपरेटर्स (C-130J Super Hercules Special Operators) ट्रांसपोर्ट रविवार सवेरे श्रीनगर से उड़ान भरेंगे और कोविड-19 वॉरियर्स (Covid-19 Worriers) के प्रति सम्मान का प्रदर्शन करने के लिए केरल में त्रिवेंद्रम (Thiruvananthapuram) तक जाएंगे. यह प्लेन उन आवश्यक मेडिकल सप्लाई (Medical Supply) को भी लेकर जाएंगे, जिन्हें किसी एयरबेस पर डिलीवर किया जाना है.”

CDS बिपिन रावत ने शुक्रवार को इस तरह से कोविड वॉरियर्स के सम्मान की बात कही थी
इससे पहले शुक्रवार को CDS बिपिन रावत ने कहा है कि कोविड-19 वॉरियर्स के सम्मान में श्रीनगर से त्रिवेंद्रम और डिब्रूगढ़ से कच्छ तक के अपने फ्लाईपास्ट के दौरान भारतीय वायुसेना, एयरक्राफ्ट से कुछ जगहों पर फूल बरसाएगी. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही थी.

इसे लेकर उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी विशेष गतिविधियां हैं, जिनका गवाह राष्ट्र को बनना चाहिए. उन्होंने बताया था कि इस अवसर पर एयर फोर्स श्रीनगर से त्रिवेंद्रम तक का फ्लाईपास्ट करेगी और ऐसा ही एक और फ्लाईपास्ट असम (Assam) के डिब्रूगढ़ से गुजरात (Gujarat) के कच्छ तक होगा. इसमें ट्रांसपोर्ट और फाइटर एयरक्राफ्ट दोनों ही शामिल होंगे. उन्होंने बताया था कि नौसेना की ओर से अपने युद्धपोतों को 3 मई को शाम को तटीय क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा. नौसेना के वॉरशिप पर भी रोशनी की जाएगी और उसके हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल अस्पतालों पर फूल बरसाने के लिए किया जाएगा.

मोदी के आवाहन पर भारत ने दिखाई एकता, की दीपावली

कोरोना के खिलाफ जंग में पीएम मोदी की अपील के बाद देशवासी आज रात 9 बजे 9 मिनट दीया, कैंडल, मोबाइल फ्लैश और टार्च जलाकर एकजुटता का परिचय देंगे. लोग दीया जलाने की तैयारी कर लिए हैं.

नई दिल्ली: 

कोरोना वायरस के खिलाफ पूरे देश ने एकजुट होकर प्रकाश पर्व मनाया. पीएम मोदी की अपील पर एकजुट होकर देश ने साबित कर दिया कि कोरोना के खिलाफ हिंदुस्तान पूरी ताकत से लड़ेगा. देश के इस संकल्प से हमारी सेवा में 24 घंटे, सातों दिन जुटे कोरोना फाइटर्स का भी हौसला लाखों गुना बढ़ गया. गौरतलब है कि पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में हैं. अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देश कोरोना के आगे बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं लेकिन भारत के संकल्प की वजह से देश में कोरोना संक्रमण विकसित देशों के मुकाबले कई गुना कम है.

Live Updates- 

  • कोरोना के खिलाफ एकजुट हुआ भारत, प्रकाश से जगमगाया पूरा देश
  • पीएम मोदी की अपील पर हिंदुस्तान ने किया कोरोना के खिलाफ जंग का ऐलान
  • कोरोना के खिलाफ जापान में जला पहला दीया,
  • कुछ देर बाद 130 करोड़ हिंदुस्तानी लेंगे एकजुटता का संकल्प

अमित शाह ने जलाए दीये

दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आवास पर सभी लाइट बंद करने के बाद मिट्टी के दीपक जलाए. 

योगी आदित्यनाथ ने जलाया दीया

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने दीया जलाकर एकता की पेश की मिसाल. दीए की रोशनी से बनाया ऊं.

अनुपम खेर ने जलायी मोमबत्ती

अनुप खेर ने दीया जलाकर दिया एकता का संदेश

बता दें कि पीएम मोदी ने शुक्रवार को अपील की थी कि पूरे देश के लोग रविवार रात 9 बजे घर की बत्तियां बुझाकर अपने कमरे में या बालकनी में आएं और दीया, कैंडिल, मोबाइल और टॉर्च जलाकर कोरोना के खिलाफ जंग में अपनी एकजुटा प्रदर्शित करें.

अरबी भाषा को पढ़ाना और धार्मिक पुस्तकें बांटना सरकार का काम नहीं है: हिमंत बिस्व सरमा

एक ओर जहां केजरिवाल, ममता बनर्जी, जगन रेड्डी, केरल सरकार और तो और ठाकरे मुस्लिम तुष्टीकरण से, मौलवियों इत्यादियों को मोटी तनख़्वाहें बाँट – बाँट कर, मदरसों को मुफ्त किताबें कापियाँ दे कर अपनी सरकरें बना/बचा रहे हैं और स्वयं को सेकुलर कह रहे हैं वहीं असम के शिक्षा मंत्री हेमंत बीस्व सरमा ने सही मायने में धर्मनिरपेक्षता की मिसाल दी है। उन्होने सरकारी सहायता से चलने वाले मदरसों और संस्कृत विद्यालयों को बंद कर वहाँ नियमित विद्यालयों को आरंभ करने की बात कही है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सरकारी सहायता से चलने वाले सभी मदरसों को बंद करने का फैसला लिया है। असम सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि उसने ऐसा धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने के लिए किया है। इसी के साथ असम सरकार के शिक्षा मंत्री ने कहा है कि राज्य में अरबी भाषा पढ़ाना और धार्मिक पुस्तकें बांटना सरकार का काम नहीं है।

असम के शिक्षा मंत्री सरमा ने इसपर कहा,

“हम राज्य के सभी सरकारी मदरसों को बंद कर रहे हैं, क्योंकि हमें लगता है कि अरबी भाषा को पढ़ाना और धार्मिक पुस्तकें बांटना सरकार का काम नहीं है। अगर किसी को ऐसा करना है तो वह अपने पैसे से कर सकता है, इसके लिए सरकार कोई फंड जारी नहीं करेगी”।

सरकार ने मदरसों के साथ-साथ सरकारी पैसे पर चलने वाले कुछ संस्कृत स्कूलों को भी बंद कर दिया है और इन सब को नियमित स्कूलों में बदल दिया जाएगा।

हिमंत बिस्व सरमा ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा “राज्य में अभी 1200 मदरसा और लगभग 200 ऐसे संस्कृत स्कूल हैं जो बिना किसी बोर्ड के चल रहे हैं। समस्या यह है कि इन मदरसों में पढ़ने वालों छात्रों को भी अन्य नियमित स्कूलों के छात्रों की तरह ही समान डिग्री दी जाती है। इसीलिए अब सरकार ने इन सब मदरसों और संस्कृत स्कूलों को नियमित करने का फैसला लिया है”।

यह फैसला न सिर्फ राज्य सरकार के हित में है बल्कि इससे छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित हो सकेगा, क्योंकि एक स्वतंत्र बोर्ड के तहत आने के कारण अब छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिल सकेगी और साथ ही ऐसे स्कूलों की जवाबदेही भी तय हो सकेगी। इसके अलावा राज्य सरकार ने ऐसा करके अपने यहां धर्मनिरपेक्षता को भी बढ़ावा दिया है। सालों तक देश में सेक्यूलरिज़्म के नाम पर मुस्लिमों का तुष्टीकरण करने की राजनीति की जाती रही है जिसे अब राज्य की भाजपा सरकार ने नकार दिया है।

सरकार एक सेक्युलर बॉडी होती है, जिसके लिए सभी धर्म एक समान होते हैं। ऐसे में सरकार किसी एक धर्म के प्रचार के लिए पैसे नहीं खर्च कर सकती। इसीलिए सरकार ने अपने पैसों पर चलने वाले मदरसों को लेकर यह फैसला लिया है। जिसे अपने धर्म का प्रचार अपने पैसे से करना है, उसका स्वागत है लेकिन सरकार की ओर से उन्हें एक भी रुपया नहीं दिया जाएगा।

सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है और असम सरकार ने देश की उन सरकारों के लिए एक उदाहरण पेश किया है जो सिर्फ अपनी राजनीति को चमकाने के लिए मुस्लिमों का तुष्टीकरण करती हैं। असम सरकार ने सही मायनों में एक सेक्युलर सरकार होने का प्रमाण दिया है।