असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि मिया संग्रहालय के फंडिंग की जांच की जाएगी

            सीएम बिस्व सरमा ने कहा किराज्य के बुद्धिजीवियों को इस पर विचार करना चाहिए। जब मैंने मिया शायरी के खिलाफ आवाज उठाई तो उन्होंने मुझे सांप्रदायिक कहा। अब मिया कविता, मिया स्कूल, मिया संग्रहालय यहां हैं। कार्यालय खुलने के बाद मामले पर सरकार कार्रवाई करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, ‘मियाँ’शब्द का इस्तेमाल उन मुस्लिमों के लिए किया जाता है जो बंगाल से माइग्रेट कर गए थे और 1890 के दशक के अंत में असम में बस गए। अंग्रेजों ने उन्हें कथित तौर पर व्यावसायिक खेती के लिए उन्हें खरीदा था।

   

डेमोक्रेटिक फ्रंट, असम/नयी दिल्ली (ब्यूरो) :

                 असम के गोलपारा जिला में मिया म्यूजियम का उद्घाटन किया गया है। जिसके बाद इसको लेकर काफी विवाद बढ़ गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संग्रहालय के फंडिंग को लेकर सवाल उठाया है। इसके बाद जिला प्रशासन ने संग्राहलय को सील कर दिया है। मिया संग्रहालय के दरवाजे पर एक नोटिस चस्पा किया गया है।

            असम के गोलपारा जिला प्रशासन ने मंगलवार को ‘मियाँ संग्रहालय’ को सील कर दिया। आरोप है कि संग्रहालय ने भूमि और संपत्ति कानूनों का उल्लंघन किया है। अधिकारियों के अनुसार, ‘संग्रहालय’ एक घर के अंदर है, जिसे प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) फंड का उपयोग करके बनाया गया था। संग्रहालय का उद्घाटन 23 अक्टूबर को दपकरभिता गाँव में किया गया था।

            वहीं पूर्वोत्तर के पत्रकार हेमंत कुमार नाथ ने कहा, “उपायुक्त, गोलपारा, असम ने गाँव दपकरभिता के मोहर अली पुत्र सोमेश अली के घर को सील कर दिया। यह एक प्रधानमंत्री आवास योजना घर था। यह वही घर था जहाँ 23 अक्टूबर को एक निजी ‘मियाँ संग्रहालय’ का उद्घाटन किया गया था।”

प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई से एक दिन पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संग्रहालय की फंडिंग पर सवाल उठाया था।

संग्रहालय के बारे में बोलते हुए, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “मुझे समझ में नहीं आता कि यह किस तरह का संग्रहालय है। संग्रहालय में उन्होंने जो हल रखा है, उसका उपयोग असमिया लोग करते हैं, यहाँ तक कि मछली पकड़ने के लिए उपयोग की जाने वाली वस्तुएँ भी असमिया समुदाय से हैं। इसमें नया क्या है? ‘लुंगी’ को छोड़कर वहाँ रखी गई हर चीज असमिया लोगों की है। उन्हें यह साबित करना होगा कि नंगोल (हल) का उपयोग केवल मिया लोग करते हैं, अन्य नहीं। अन्यथा, मामला दर्ज किया जाएगा।”

सरमा ने कहा, “संग्रहालय में केवल पारंपरिक वस्तुएँ हैं जो पूरे असमिया समाज की संस्कृति को दर्शाती हैं न कि मियाँ समुदाय की।”

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “राज्य के बुद्धिजीवियों को इस पर विचार करना चाहिए। जब मैंने मियाँ शायरी के खिलाफ आवाज उठाई तो उन्होंने मुझे सांप्रदायिक कहा। अब मियाँ कविता, मियाँ स्कूल, मिया संग्रहालय यहाँ हैं… सरकार कार्यालय खुलने के बाद मामले पर कार्रवाई करेगी।”

इससे पहले, राज्य में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने संग्रहालय खोलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी, जिन्होंने जिले में ‘प्रवासी मुसलमानों की संस्कृति’ को प्रदर्शित करने का दावा किया था। डिब्रूगढ़ के भाजपा विधायक प्रशांत फुकन संग्रहालय के खिलाफ आवाज उठाने वालों में सबसे पहले थे। उन्होंने कहा था, “मैं राज्य सरकार से इस संग्रहालय को बंद करवाने का अनुरोध करता हूँ।” भाजपा विधायक शिलादित्य देव ने भी संग्रहालय स्थापित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

रिपोर्टों के अनुसार, ‘मियाँ’शब्द का इस्तेमाल उन मुस्लिमों के लिए किया जाता है जो बंगाल से माइग्रेट कर गए थे और 1890 के दशक के अंत में असम में बस गए। अंग्रेजों ने उन्हें कथित तौर पर व्यावसायिक खेती के लिए उन्हें खरीदा था।

अंतरात्मा की आवाज सुन कई विधायकों ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में की ‘क्रॉस वोटिंग’

झारखंड और गुजरात में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक और हरियाणा तथा ओडिशा में कांग्रेस विधायक हैं जिन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट किया। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के विधायक ने राज्य से संबंधित मुद्दों का समाधान न होने का हवाला देते हुए राष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार किया। असम में, ऑल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) विधायक करीमुद्दीन बरभुइयां ने दावा किया कि राज्य के करीब 20 कांग्रेस विधायकों ने सोमवार को मुर्मू को वोट दिया।

  • राष्ट्रपति चुनाव में अंतरात्मा की आवाज सुन कई विधायकों ने मुर्मू के पक्ष क्रॉसवोटिंग की है
  • असम में एआईयूडीएफ के विधायक करीमुद्दीन बरभुइयां ने दावा किया कि राज्य के करीब 20 कांग्रेस विधायकों ने राष्ट्रपति चुनाव में मुर्मू को वोट दिया है
उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में ‘क्रॉस वोट’ किया

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़/ नई दिल्ली :

राष्ट्रपति चुनाव के पहले से ही विपक्ष बिखरा हुआ नजर आ रहा था। अब खबर आ रही है कि अलग-अलग राज्यों के कई विधायकों ने कहा है कि उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में अपनी पार्टी लाइन का पालन नहीं कर एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में ‘क्रॉस वोट’ किया है। क्रॉस वोटिंग में झारखंड और गुजरात में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक और हरियाणा तथा ओडिशा के कांग्रेस विधायक शामिल हैं। विधायकों ने कहा है कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट किया है। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के विधायक ने राज्य से संबंधित मुद्दों का समाधान न होने का हवाला देते हुए राष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार किया। असम में, ऑल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक करीमुद्दीन बरभुइयां ने दावा किया कि राज्य के करीब 20 कांग्रेस विधायकों ने राष्ट्रपति चुनाव में मुर्मू को वोट दिया है।

उधर उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी में फूट की खबर सामने आई है। पार्टी के विधायक शहजिल इस्लाम ने द्रौपदी मुर्मू को वोट दिया। बता दें कि कॉन्ग्रेस और सपा ने आधे-अधूरे विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया था। बरेली के भोजीपुरा से विधायक शहजिल इस्लाम ने इसके बाद ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी’ के अध्यक्ष और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव से भी मुलाकात की।

उत्तर प्रदेश में, शिवपाल सिंह यादव ने भी दावा किया कि वह कभी भी यशवंत सिन्हा का समर्थन नहीं करेंगे, क्योंकि उन्होंने एक बार उनके भाई और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव पर ‘आईएसआई एजेंट’ होने का आरोप लगाया था। पिछले महीने राज्यसभा चुनाव में हरियाणा में ‘क्रॉस वोटिंग’ करने वाले कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में भी अपने विवेक के अनुसार मतदान किया।

राष्ट्रपति चुनाव में मतदान गुप्त मतदान के माध्यम से होता है और पार्टियां अपने सांसदों और विधायकों को व्हिप जारी नहीं कर सकती हैं। ओडिशा में कांग्रेस विधायक मोहम्मद मोकीम ने सोमवार को यह घोषणा कर हलचल पैदा कर दी कि उन्होंने राजग उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। विधानसभा में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद, कटक-बाराबती विधानसभा क्षेत्र के विधायक मोकीम ने कहा कि उन्होंने अपनी ‘‘अंतरात्मा की आवाज’’सुनी।

खुद शिवपाल यादव ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया। सपा गठबंधन में शामिल ओमप्रकाश राजभर की ‘सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP)’ ने भी मुर्मू के ही समर्थन का ऐलान किया था। शिवपाल यादव ने पहले ही एक पत्र लिख कर अखिलेश यादव को कहा था कि सपा विधायकों को यशवंत सिन्हा को वोट नहीं देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यशवंत सिन्हा ने कभी सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को ‘ISI एजेंट’ कहा था।

वहीं असम में AIUDF के नेता करीमुद्दीन ने कहा कि कॉन्ग्रेस क्रॉस वोटिंग कर रही है और ये आँकड़ा 20 से अधिक भी हो सकता है। वहीं कॉन्ग्रेस के एक अन्य बागी नेता कुलदीप बिश्नोई ‘अंतरात्मा की आवाज़’ सुनते हुए द्रौपदी मुर्मू को वोट करने की बात कही। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में भी फूट की खबर सामने आ रही है, लेकिन पार्टी इसे नकार रही है। पश्चिम बंगाल में TMC का दावा है कि 9 भाजपा विधायकों ने यशवंत सिन्हा के लिए वोट डाला।

मनीष सिसोदिया पर असम के सीएम की पत्नी ने दर्ज कराया 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस महीने की शुरुआत में पीपीई किट के कांट्रैक्ट को लेकर असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ भ्रष्टाचार की बात कही थी। सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा और बेटे के बिजनेस पार्टनर्स की फर्मों को 2020 में बाजार दरों से अधिक पर पीपीई किट की आपूर्ति के लिए सरकारी ठेके दिए थे।

नई दिल्ली:(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट, नयी दिल्ली :  

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ मानहानि का एक और मुकदमा दर्ज हुआ है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 30 जून को कामरूप (ग्रामीण) में सीजेएम कोर्ट के समक्ष दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया है। इससे पहले सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा ने भी मनीष सिसोदिया के खिलाफ सिविल जज कोर्ट में 100 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।


दरअसल, आम आदमी पार्टी (आआपा) के नेता मनीष सिसोदिया ने 4 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि भारत 2020 में जब कोविड महामारी से जूझ रहा था, तब असम के स्वास्थ्य मंत्री रहे हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी पत्नी और बेटे के व्यापारिक साझेदारों की कंपनियों को पीपीई किट की आपूर्ति करने के लिए ठेके दिये थे। हालांकि, असम सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का परिवार महामारी के दौरान पीपीई किट की आपूर्ति में कथित कदाचार में शामिल था।

सरमा के वकील देवोजीत सैकिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरमा ने खुद पर लगे इन आरोपों को निराधार बताते हुए सिसोदिया के खिलाफ यह मुकदमा दर्ज करवाया है।

सिसोदिया ने सरमा पर कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान असम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों को बाजार से अधिक कीमतों पर पीपीई किट्स की आपूर्ति करने का आरोप लगाया था।

सिसोदिया के खिलाफ यह मुकदमा कामरूप ग्रामीण जिले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में बृहस्पतिवार को दर्ज किया गया। मामले को शिकायतकर्ता का प्रारंभिक बयान दर्ज करने के लिए 22 जुलाई को सूचीबद्ध किया गया है।

सरमा पर आरोप है कि उनकी पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के स्वामित्व वाली कंपनी जेसीबी इंडस्ट्रीज ने कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान असम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों को ‘‘बाजार से अधिक कीमत’’ पर पीपीई किट्स की आपूर्ति करवाई की थी।

सरमा के वकील देवोजीत सैकिया ने कहा, “मनीष सिसोदिया ने चार जून को नयी दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान उनके मुवक्किल हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने विशेष रूप से दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सरमा की पत्नी के सह-स्वामित्व वाली कंपनी से अधिक कीमत पर पीपीई किट की खरीद की थी। यह खरीद 2020 में कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान की गई थी। उस समय सरमा असम के स्वास्थ्य मंत्री थे।”

सैकिया ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा, “सरमा ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से व्यथित होने और बाद में मामले पर कोई स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करने का फैसला किया है।”

उन्होंने दावा किया कि जेसीबी इंडस्ट्रीज ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को ये पीपीई किट दान में दिए थे।

ईडी के समन पर भड़के संजय राउत, कहा- चाहे गर्दन काट लो, नहीं जाऊंगा गुवाहाटी

ED के समन पर भी राउत की प्रतिक्रिया आ गई है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मुझे अभी मालूम पड़ा कि ईडी ने समन भेजा है। अच्छा है। महाराष्ट्र में बड़ा घटनाक्रम चल रहा है। हम सब बालासाहेब ठाकरे के शिवसैनिक बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं। हमें रोकने के लिए यह सारी कारस्तानी की जा रही है। मेरी गर्दन भी काट लो तो भी मैं गुवाहाटी का मार्ग स्वीकार नहीं करूंगा। आओ मुझे गिरफ्तार करो। जय हिंद’टी का रास्ता नहीं अपनाऊँगा।” इसके साथ ही उन्होंने लिखा था, “मुझे गिरफ्तार करो! जय हिन्द!” वहीं, मराठी भाषा में लिखे गए अपने ट्वीट में उन्होंने बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस को भी टैग किया था।

महाराष्ट्र (ब्यूरो)। डेमोक्रेटिक फ्रंट, मुंबई :

महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। श‍िवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खास स‍िपहसालार संजय राउत की मुश्‍क‍िल बढ़ गई है। प्रवर्तन न‍िदेशालय (ED) ने पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत के ख‍िलाफ समन जारी क‍िया है। ईडी ने संजय राउत को 28 जून, मंगलवार को पूछताछ के ल‍िए तलब किया है।

वहीं ED के समन पर भी राउत की प्रतिक्रिया आ गई है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मुझे अभी मालूम पड़ा कि ईडी ने समन भेजा है। अच्छा है। महाराष्ट्र में बड़ा घटनाक्रम चल रहा है। हम सब बालासाहेब ठाकरे के शिवसैनिक बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं। हमें रोकने के लिए यह सारी कारस्तानी की जा रही है। मेरी गर्दन भी काट लो तो भी मैं गुवाहाटी का मार्ग स्वीकार नहीं करूंगा। आओ मुझे गिरफ्तार करो। जय हिंद’

पात्रा चॉल की जमीन को लेकर 1,034 करोड़ रु. के घोटाले की बात कही है।

ED ने 1,034 करोड़ रुपए के पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में महाराष्ट्र के बिजनेसमैन और राउत के करीबी प्रवीण राउत को फरवरी में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद इस केस में संजय राउत का नाम भी जुड़ा। 5 अप्रैल को ED ने इसी मामले में राउत के अलीबाग वाले प्लॉट के साथ दादर व मुंबई में एक-एक फ्लैट को भी कुर्क कर लिया था।

जब ED ने प्रवीण को पकड़ा तो संजय राउत का नाम सामने आया। प्रवीण शिवसेना सांसद संजय राउत का दोस्त है। प्रवीण की पत्नी ने संजय राउत की पत्नी वर्षा को 83 लाख रुपए का कर्ज भी दिया था, जिसका इस्तेमाल राउत परिवार ने दादर में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया था। जब जांच शुरू हुई तो वर्षा ने 55 लाख रुपए प्रवीण की पत्नी को लौटा दिए।

पात्रा चॉल मामले में गिरफ्तार हुए प्रवीण शिंदे और संजय राउत की पत्नी वर्षा के बीच बड़ी रकम के लेन-देन की बात कही गई थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिस एचडीआईएल ने ये दोनों जमीन घोटाले किए थे, उसके डायरेक्टर प्रवीण राउत, सारंग वधावन, राकेश वधावन हैं। प्रवीण राउत और सारंग को 2020 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। तब दोनों से पूछताछ में शिवसेना सांसद संजय राउत का कनेक्शन सामने आया था। बता दें कि प्रवीण राउत शिवसेना सांसद संजय राउत के दोस्त हैं।

गौरतलब है कि 5 अप्रैल, 2022 को पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में ED ने शिवसेना सांसद संजय राउत पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्ति कुर्क कर ली थी। इस कार्रवाई के तहत जाँच एजेंसी ने राउत के अलीबाग स्थित आठ प्लॉट और दादर में एक फ्लैट को कुर्क किया था।

इसी मामले में ED ने प्रवीण राउत से जुड़ी करोड़ों की संपत्ति को भी कुर्क किया था। ED ने 11 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की थी। इसमें पालघर में प्रवीण राउत से जुड़ी संपत्ति करीब 9 करोड़ रुपए की है। जबकि 2 करोड़ की कीमत वाले दादर में फ्लैट और अलीबाग में प्लॉट संजय राउत की पत्नी का बताया जाता है।

Haryana wins gold medal in Gatka

  • Haryana also wins silver medals in single individual women’s and men’s categories in Gatka

Koral ‘Purnoor’, Demokretic Front, Panchkula, June 6 :

In the ongoing Khelo India Youth Games in Panchkula, Haryana won gold medal in Gatka today and also won silver medals in single individual women and men in Gatka itself.

Haryana won the gold medal in the under-18 single stick team event of Gatka. This team consisted of Inderjit Singh, Krish and Jashanpreet Singh.

Similarly, in the individual men’s category of Gatka, Waris Preet Singh won the silver medal. Arjneet Kaur won silver medal in singel stick individual women’s category.

असम के सीएम सरमा का मनीष सिसोदिया पर पलटवार, कहा- मानहानि का मुकदमा करूंगा

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने शनिवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। पहले भी अरविंद केजरीवाल ने किस किस पर आरोप लगाए थे, फिर मानहानी का मुक़द्दमा होने पर माफी मांगते फिरे। अब सीसोदिया आरोप लगा रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिसोदिया ने कहा “तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सरमा ने 2020 में पीपीई किट की आपूर्ति के लिए अपनी पत्नी और बेटे के बिजनेस पार्टनर्स की फर्मों को सरकारी ठेके दिए थे, जब देश भर में कोविड -19 महामारी फैल रही थी।” सिसोदिया का बयान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर एक ट्वीट शेयर करने के बाद आया है। केजरीवाल ने ट्वीट किया था कि जल्द ही एक शीर्ष भाजपा नेता के खिलाफ एक बड़ा खुलासा किया जाएगा। बता दें कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है।

दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया

दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर बड़ा आरोप लगाया। इस पर सीएम सरमा की ओर से पलटवार किया गया है। 

उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी ने लोगों की जान बचाने के लिए करीब 1500 पीपीई किट दान की थी। एक बार मुझे दिल्ली के मुर्दाघर से एक असम के कोविड पीड़ित का शव लेने के लिए सात दिनों तक इंतजार करना पड़ा था। मैं आपके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर करूंगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि कोरोना महामारी के दौरान जब हिमंत बिस्वा सरमा असम के स्वास्थ्य मंत्री थे, तब उन्होंने राज्य के कोरोना पीड़ित का शव लेने के लिए मनीष सिसोदिया से संपर्क किया था। इस दौरान सात दिनों तक सिसोदिया या उनके दफ्तर की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। 

इससे पहले मनीष सिसोदिया ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एक वेबसाइट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री सरमा ने कोरोना काल में भ्रष्टाचार किया। मामला 2022 का है, जब वर्तमान सीएम राज्य में स्वास्थ्य मंत्री थे। उन्होंने कहा कि उस समय पीपीई किट खरीदने के ठेके उन्होंने बेटे के सहयोगियों और पत्नी को दिए। उन्होंने सवाल किया कि अब भाजपा बताए कि ऐसे मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई कब करेगी?

कपिल सिब्बल हाथ छोड़ कर हुए साइकल सवार, अब रजाया सभा जाने की तैयारी

असम, नगालैंड, मणिपुर के कुछ हिस्सों से हटा सेना को स्पेशल पावर देने वाला कानून, लंबे समय से थी हटाने की मांग

3 राज्यों में AFSPA का दायरा घटा: असम, नगालैंड, मणिपुर के कुछ हिस्सों से हटा सेना को स्पेशल पावर देने वाला कानून, लंबे समय से थी हटाने की मांग भारत सरकार ने दशकों बाद नगालैंड, असम और मणिपुर राज्यों में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत अशांत क्षेत्रों का दायरा कम करने का फैसला किया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दशकों बाद पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड, असम और मणिपुर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत अशांत क्षेत्रों का दायरा कम करने का फैसला किया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार (31 मार्च 2022) को सिलसिलेवार तीन ट्वीट कर यह जानकारी दी। गृहमंत्री ने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक अहम फैसला लिया गया है। भारत सरकार ने दशकों बाद नागालैंड, असम और मणिपुर राज्य में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत अशांत क्षेत्रों का दायरा कम करने का निर्णय लिया है।”

नयी द्ल्लि(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

भारत सरकार ने दशकों बाद नगालैंड, असम और मणिपुर राज्यों में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA) के तहत अशांत क्षेत्रों का दायरा कम करने का फैसला किया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट में यह जानकारी दी है। शाह ने लिखा- AFSPA के इलाकों का दायरा घटाने में सरकार के शांति लाने के लिए किए जा रहे प्रयास मददगार रहे हैं। इन इलाकों में उग्रवाद पर भी नियंत्रण बढ़ा है। कई समझौतों के कारण सुरक्षा के हालात और विकास ने भी कानून हटाने में मदद की।

पिछले साल दिसंबर में नगालैंड में सेना के हाथों 13 आम लोगों के मारे जाने और एक अन्य घटना में एक व्यक्ति के मारे जाने के बाद असम में अफ्सपा (सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम ) हटाने की मांग ने जोर पकड़ लिया था। यह एक्ट मणिपुर में (इंफाल नगर परिषद क्षेत्र को छोड़ कर), अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग, लोंगदिंग और तिरप जिलों में, असम से लगने वाले उसके सीमावर्ती जिलों के आठ पुलिस थाना क्षेत्रों के अलावा नगालैंड और असम में लागू है। केंद्र सरकार ने जनवरी की शुरुआत में नगालैंड में इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया था।

उन्होंने लिखा, “अफस्पा (AFSPA) के इलाकों में सरकार के शांति लाने के लिए किए जा रहे प्रयास मददगार रहे हैं। इन इलाकों में उग्रवाद पर भी नियंत्रण बढ़ा है। कई समझौतों के कारण सुरक्षा के हालात और विकास ने भी कानून हटाने में मदद की।” इसके बाद वह (अमित शाह) अपने अंतिम ट्वीट में पीएम मोदी को धन्यवाद करते हुए लिखते हैं, “पीएम मोदी की प्रतिबद्धता के कारण हमारा पूर्वोत्तर क्षेत्र, जो दशकों से उपेक्षित था, अब शांति, समृद्धि और अभूतपूर्व विकास के एक नए युग का गवाह बन रहा है। मैं इस महत्वपूर्ण अवसर पर पूर्वोत्तर के लोगों को बधाई देता हूँ।”

सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को केवल अशांत क्षेत्रों में ही लागू किया जाता है। पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की सहूलियत के लिए 11 सितंबर 1958 को यह कानून पास किया गया था। 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने लगा तो यहाँ भी 1990 में अफस्पा लागू कर दिया गया था। अशांत क्षेत्र कौन-कौन से होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है। आसान शब्दों में अफस्पा कानून को ऐसे समझे। यह किसी भी राज्य या किसी भी क्षेत्र में तभी लागू किया जाता है, जब राज्य या केंद्र सरकार उस क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ अर्थात डिस्टर्बड एरिया एक्ट (Disturbed Area Act) घोषित कर देती है। इस कानून के लागू होने के बाद ही वहाँ सेना या सशस्त्र बल भेजे जाते हैं। कानून के लगते ही सेना या सशस्त्र बल को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार मिल जाता है।

इस एक्ट को सबसे पहले अंग्रेजों के जमाने में लागू किया गया था। उस वक्त ब्रिटिश सरकार ने भारत छोड़ो आंदोलन को कुचलने के लिए सैन्य बलों को विशेष अधिकार दिए थे। आजादी के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने भी इस कानून को जारी रखने का फैसला लिया। फिर वर्ष 1958 में एक अध्यादेश के जरिए AFSPA को लाया गया और तीन महीने बाद ही अध्यादेश को संसद की स्वीकृति मिल गई। इसके बाद 11 सितंबर 1958 को AFSPA एक कानून के रूप में लागू हो गया।

इस कानून को लागू करने के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि इसे उन इलाकों में लागू किया जाता है, जिनमें उग्रवादी गतिविधियाँ होती रहती हैं। भारत और म्यांमार की सीमा के दोनों तरफ कई अलगाववादी विद्रोही संगठनों के ठिकाने हैं। नागालैंड के अलावा मणिपुर में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी सक्रिय है, जो सेना पर हमले करती रहती है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी अलगाववादी संगठन सक्रिय है। इन संगठनों से निपटने और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सेना को अफस्पा के तहत विशेष अधिकार दिए गए।

AFSPA को असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों में लागू किया गया था। लेकिन, समय-समय पर परिस्थितियों को देखते हुए हटा भी दिया जाता है। मणिपुर में अफस्फा के खिलाफ इरोम चानू शर्मिला ने 16 साल तक अनशन किया था। नवंबर 2000 में आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला के सामने एक बस स्टैंड के पास दस लोगों को सैन्य बलों ने गोली मार दी थी। इस घटना का विरोध करते हुए उस वक्त 29 वर्षीय इरोम ने भूख हड़ताल शुरू कर दी थी, जो 16 साल तक चली। अगस्त 2016 में उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करके राजनीति में आने का फैसला किया और चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें नोटा (NOTA) से भी कम वोट मिले थे। बताया जाता है कि उन्हें सिर्फ 90 वोट मिले थे, जबकि 143 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था।

गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ समझौता, 50 साल पुराने असम-मेघालय सीमा विवाद का अंत

ऐसी जानकारी है कि दोनों मुख्यमंत्रियों ने सीमा विवाद को लेकर गृह मंत्री अमित शाह को जो सिफारिशें सौंपी थीं, उसके मुताबिक कुल 36.79 वर्ग किलोमीटर ज़मीन में से असम अपने पास लगभग आधी यानी 18.51 वर्ग किलोमीटर विवादित भूमि रखेगा और बाकी 18.28 वर्ग किलोमीटर ज़मीन मेघालय को देगा। 31 जनवरी को दोनों राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों ने गृह मंत्री अमित शाह को एक समझौता पत्र विचार के लिए सौंपा था। गृह मंत्रालय ने मतभेद वाले 12 क्षेत्रों में से छह पर विवाद हल करने के लिए जनवरी में असम और मेघालय के बीच हुए सीमा समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 29 मार्च की तारीख तय की थी। असम और मेघालय के बीच चल रहा 50 साल पुराना विवाद अब सुलझ गया है।  असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अंतर्राज्यीय सीमा मुद्दों के समाधान के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

  • गृह मंत्री अमित शाह ने इसे पूर्वोत्तर के लिए ‘ऐतिहासिक दिन’ करार दिया
  • असम और मेघालय ने छह स्थानों पर सीमा विवाद को सुलझाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए: अमित शाह
  • असम-मेघालय सीमा के 6 शेष क्षेत्रों में विवाद जल्द ही हल हो जाएंगे: गृह मंत्री

नयी दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट:

असम-मेघालय सीमा विवाद: पिछले 50 सालों से चल रहा असम और मेघालय के बीच का सीमा विवाद अब खत्म हो गया है। राजधानी दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री ने इससे जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर किया। मंगलवार को गृह मंत्रालय में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा पहुंचे और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सीमा विवाद से जुड़े समझौते को अंतिम रुप दिया। इस दौरान दोनों राज्यों के प्रमुख सचिव और अन्य अफसर भी मौजूद थे। समझौते के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि दोनों राज्यों के बीच विवाद के 12 बिन्दुओं में से 6 पर सहमति बन गई है और बाकी पर जल्द सहमति बनाई जाएगी।

आपको बता दें कि असम-मेघालय के बीच कुल 884.9 किलोमीटर का बॉर्डर है जिसमें 12 विवादित क्षेत्र है। इनमें से 6 पर सहमति बन गई है, जो कुल विवादित हिस्से का 70 फीसदी है। दोनों मुख्यमंत्रियों ने सीमा विवाद को लेकर गृह मंत्री अमित शाह को जो सिफारिशें सौंपी थीं, उसके मुताबिक कुल 36.79 वर्ग किलोमीटर ज़मीन में से असम अपने पास लगभग आधी यानी 18.51 वर्ग किलोमीटर विवादित भूमि रखेगा और बाकी 18.28 वर्ग किलोमीटर ज़मीन मेघालय को देगा।

जानकारी के मुताबिक 31 जनवरी को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गृह मंत्री अमित शाह को एक समझौता पत्र विचार के लिए सौंपा था। पूर्वोत्तर के इन दोनों राज्यों ने 12 विवादित स्थानों में से छह में सीमा विवाद को सुलझाने के लिए इसी साल 29 जनवरी को एक अंतर-राज्य सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। तब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ संयुक्त बैठक की थी और तय किया गया कि 29 मार्च को होनेवाली अगली बैठक में इस सीमा विवाद समझौते को अंतिम रूप देने को लेकर फ़ैसला लिया जाएगा। उम्मीद है कि इस समझौते से इस दोनों राज्यों के बीच चली आ रही दशकों पुरानी दुश्मनी और हिंसक झड़पों का अंत हो जाएगा।

क्या सरकार बनने पर उत्तराखंड में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ लागू कर पाएंगे पुष्कर सिंह धामी ?

यूनिफॉर्म सिविल कोड या समान नागरिक संहिता का मतलब है विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम होना। दूसरे शब्दों में कहें तो परिवार के सदस्यों के आपसी संबंध और अधिकारों को लेकर समानता होना। जाति-धर्म-परंपरा के आधार पर कोई रियायत ना मिलना। इस वक़्त हमारे देश में धर्म और परंपरा के नाम पर अलग नियमों को मानने की छूट है। जैसे – किसी समुदाय में पुरुषों को कई शादी करने की इजाज़त है तो कहीं-कहीं विवाहित महिलाओं को पिता की संपत्ति में हिस्सा न देने का नियम है।

देहरादून(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता की जो घोषणा की थी, अब दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद धामी इस पर काम करेंगे। सोमवार को विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू करेंगे।

पुष्कर सिंह धामी की इस घोषणा से विपक्षी दलों के सामने इसको काटने या राजनीतिक मैदान में इस पर अपनी राय रखने का अधिक मौका नहीं मिल पाएगा। समान नागरिक संहिता भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में शामिल रही है। ऐसे में पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर सरकार बनने की स्थिति में इसकी घोषणा कर बड़ा खेल किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जल्द से जल्द समान नागरिक संहिता लागू करने से राज्य में सभी वर्ग के लोगों के लिए समान अधिकारों को बढ़ावा मिलेगा। यह सामाजिक सद्भाव को बढ़ाएगा। लैंगिक न्याय को बढ़ावा देगा। महिला सशक्तिकरण को मजबूत करेगा। राज्य की असाधारण सांस्कृतिक-आध्यात्मिक पहचान और पर्यावरण की रक्षा करने में मदद करेगा।

सीएम धामी ने कहा कि प्रदेश में नई भारतीय जनता पार्टी के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी। कमेटी तमाम मसलों पर बात करेगी। समान नारिक संहिता के तहत सभी लोगों के लिए विवाह, तलाक, जमीन, संपत्ति और विरासत के संबंध में एक समान कानून व्यवस्था का लाभ मिलेगा। इसमें धर्म या आस्था से कोई मतलब नहीं होगा। पुष्कर सिंह धामी ने इसके साथ ही चुनावी मैदान में एक नई बहस को छेड़ दिया है। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से उठने वाला समान नागरिक संहिता का यह मामला निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनाव के मैदान में भी एक बड़े मुद्दे के रूप में दिख सकता है।

पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हम जो घोषणा कर रहे हैं, वह हमारी पार्टी का संकल्प है। भाजपा की नई सरकार बनते ही इसे पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘देवभूमि’ की संस्कृति और विरासत को अक्षुण्ण रखना हमारा परम कर्तव्य है। हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। खटीमा में उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता उन लोगों के सपनों को साकार करने की दिशा में एक कदम होगा, जिन्होंने हमारे संविधान को बनाया। संविधान की भावना को मजबूत किया। यह सभी नागरिकों के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड प्रदान करने वाले अनुच्छेद 44 की दिशा में भी एक प्रभावशाली कदम होगा।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अगली सरकार बनने की स्थिति में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बनने वाली कमेटी के बारे में भी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि नई भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद न्यायविदों, सेवानिवृत लोगों, प्रबुद्ध लोगों और अन्य विशेषज्ञों को मिलाकर एक कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी प्रदेश के लोगों के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड का ड्राफ्ट तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को समान नागरिक अधिकार देने का प्रयास किया जा रहा है। यूनिफॉर्म सिविल कोड के बनने से नागरिकों को समान अधिकारों का बल मिलेगा।