मैं और मेरा परिवार 1999 तक बूथ लूट कर ही चुने जाते रहे: किर्ति आज़ाद

भाजपा सांप्रदायिक पार्टी,
सनद रहे भागवत झा आज़ाद कांग्रेस के दिग्गज नेता थे और बिहार के मुख्यमंत्री भी रहे हैं जीके लिए किर्ति ने मान की बूथ लूटे जाते रहे हैं
दरभ्ंगा से सीट न मिलने पर भाजपा छोड़ी और अब अलाकमान ही चुनाव लड़ने न लड़ने का निर्णय लेंगे

मुकेश कुमार, दरभंगा : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) छोड़ कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर पहली बार दरभंगा पहुंचे सांसद कीर्ति आजाद का कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया. स्वागत कार्यक्रम के दौरान अफरातफरी की स्थिति भी उत्पन्न हो गई. सभा स्थल पर बनाया गया मंच टूट गया. इस दौरान बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा भी मौजूद थे. मंच टूटने से सभी नेता और कार्यकर्ता जमीन पर गिर गए. राहत की बात यह रही की इसमें किसी भी नेता को ज्यादा चोटें नहीं आई.

स्वागत कार्यक्रम के दौरान अपनी नई नवेली पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कीर्ति आजाद ने कुछ ऐसा कहा कि लोग कुछ देर के लिए सोचने को मजबूर हो गए.

उन्होंने अपनी पत्नी पूनम आजाद को कांग्रेसी परिवार की बेटी बताते हुए कहा, ‘उस दौर में नागेंद्र बाबा (नागेंद्र झा) और डॉ साहब (जगन्नाथ मिश्र) के लिए बूथ लूटा करते थे. उस समय तो लूटा जाता था, लेकिन आज के समय में कोई गड़बड़ी नहीं है. मेरे पिता भागवत झा आजाद के लिए भी बूथ लूटा जाता था. 1999 में मेरे लिए भी लूटा गया था बूथ. उस समय इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) नहीं आयी थी. 

इससे पहले दरभंगा पहुंचने पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने कीर्ति आजाद जमकर स्वागत किया. रोड शो के दौरान उनके साथ मदन मोहन झा भी साथ रहे. रोड शो के बाद वह दरभंगा स्थित कांग्रेस दफ्तर पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को संबोधित भी किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि यह हमारी यह वापसी है. उन्होंने खुद को जन्म से कांग्रेसी बताया. साथ ही उन्होंने बीजेपी को सबसे बड़ा साम्प्रदायिक पार्टी करार दिया.
लगातार दरभंगा से अपनी दावेदारी पेश करने वाले कीर्ति आजाद यूं तो कल तक किसी भी सूरत में दरभंगा से चुनाव लड़ने की बात कह रहे थे, लेकिन कांग्रेस ज्वाइन करते हीउनके सुर थोड़े बदले जरूर हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने की इच्छा हमने पार्टी के आलाकमान को बता दिया हैं, लेकिन पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे जरूर पूरा करेंगे. वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि कीर्ति आजाद के कांग्रेस में आने से बहुत फायदा होगा.

छतीसगढ़ की तरह बिहार में भी महागठबंधन में पीछे छूटते वामदल

  • लोकसभा चुनाव में वामदलों को सीट देने में लालू यादव की कोई रुचि नहीं है.
  • कमलाकांत मिश्र ‘मधुकर’ की बेटी ने भी मोतिहारी सीट को लेकर भेंट करने की कोशिश की थी लालू नहीं मिले
  • कन्हैया कुमार का राजनाइटिक भविष्य तो यहीं तय हो गया की बेगूसराय सीट पर उन्हे अपने दम पर ही लड़ना होगा क्योंकि राज्य परिषद की उनकी उम्मीदवारी पर भी ग्रहण लगता दीख पड़ता है।
  • बिहार की भूमि पर राजनीतिक रूप से सक्रिय तीनों वाम दल क्रमशः सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन अगले महाभारत में अकेले(अपने दम खम पर) चुनाव लड़ेंगे

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार की लोकप्रियता के सहारे बिहार में खुद को पुर्नजीवित करने की वामदलों, खासकर सीपीआई और सीपीएम, की रणनीति दम तोड़ती नजर आ रही है. भरोसेमंद सूत्र का कहना है कि आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि महाभारत 2019 में सीपीआई और सीपीएम की भागीदारी की उन्हें कोई जरूरत नहीं है.

सीपीआई के एक कद्दावर नेता ने भी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, ‘लोकसभा चुनाव में हमलोगों को सीट देने में लालू यादव की कोई रुचि नहीं है. वो नहीं चाहते हैं कि वामदल फिर से बिहार में जिंदा होकर अपने पैरों पर चल सकें.’

पिछले दो सप्ताह से बिहार के वामदलों के कई शीर्ष नेता लालू यादव से मिलने का अथक प्रयास कर रहे हैं. यहां तक कि सीपीआई के मूर्धन्य नेता रहे कमलाकांत मिश्र ‘मधुकर’ की बेटी ने भी मोतिहारी सीट को लेकर भेंट करने की कोशिश की थी. लेकिन आरजेडी सुप्रीमो ने उन सभी से मिलने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

सीपीआई के राज्य सचिव सत्य नारायण सिंह ने बातचीत में स्वीकार किया, ‘लालू यादव से मिलने के लिए बीते दो शनिवार को हमलोगों ने अर्जी लगाई थी लेकिन सफलता नहीं मिली’.

इसी बीच सीपीआई की बेगूसराय जिला कार्यकारिणी ने 16 फरवरी को सर्वसम्मति से कन्हैया कुमार का नाम चुनाव लड़ने के लिए फाइनल करके राज्य परिषद को भेज दिया है. समझा जाता है कि इस सप्ताह कन्हैया कुमार के अलावा और 4 सीटों के लिए उम्मीदवारों का नाम राज्य परिषद अनुमोदन करके नेशनल एक्जिक्यूटिव कमेटी को अंतिम मुहर लगाने के लिए भेज देगी.

स्टेट सेक्रेटरी सत्यनारायण सिंह तथा सीपीआई राष्ट्रीय परिषद के सदस्य राम नरेश पांडेय ने बतौर पर्ववेक्षक बेगूसराय जिला परिषद की बैठक में शिरकत की थी. सत्यनाराण सिंह का कहना है कि किसी सूरत में बेगूसराय लोकसभा सीट से सीपीआई लड़ेगी. कन्हैया कुमार ही उम्मीदवार होंगे. वैसे कुछ दिन पहले बयान जारी कर जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष ने कहा है कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे.

कन्हैया कुमार को बेगूसराय सीट से उम्मीदवार बनाए जाने और वामदलों को महागठबंधन में उचित स्थान देने के सवाल पर सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी तथा सीपीआई नेता डी राजा भी क्रमशः जनवरी 12 और 19 को रांची जेल में लालू यादव से मुलाकात कर चुके हैं. सूत्र बताते हैं कि डी राजा ने आरजेडी सुप्रीमो से रिक्वेस्ट की कि बेगूसराय को जोड़कर कम से कम तीन सीट सीपीआई के लिए छोड़ दें. उसी तरह सीताराम येचुरी ने बिहार के राजनीतिक क्षितिज पर आईसीयू में सांस ले रही अपनी पार्टी के लिए दो लोकसभा सीटों की मांग की है.

महागंठबधन से जुड़े एक नेता का कहना है, ‘हमारे कुनबे में चुनावी जंग में भागीदारी के लिए उसी पार्टी और नेता को तरजीह दी जाती है जिसके घर में या तो ‘लक्ष्मी’ का वास हो या फिर पॉकेट में वोट का जखीरा हो. जगजाहिर है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में बिहार में वाम दलों के पास इन दोनों संसाधनों में से कोई पर्याप्त मात्रा में मौजूद नहीं है.

हां, सीपीआई (एमएल) लिबरेशन यानी माले के पीछे अच्छा खासा जन समर्थन है. इसीलिए हमारे नेता लालू यादव के दिल में इनके प्रति स्नेह का भाव है. हो सकता है कि आरा की लोकसभा सीट माले के खाते में चली जाए. 1989 चुनाव में माले के रामेश्वर प्रसाद ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था. माले का अपना मजबूत आधार वोट है.’

चारा घोटाले में सजा काट रहे लालू यादव प्रत्येक शनिवार को तीन लोगों से मुलाकात करते हैं. 16 फरवरी को आरजेडी चीफ अपने छोटे बेटे और बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव से मिले. काफी देर तक बातचीत हुई. लेकिन अर्जी लगने के बाद भी वामदलों के नेताओं से मिलने से मना कर दिया.

tejaswi yadav

कयास लग रहा है कि आरजेडी सुप्रीमो ने तेजस्वी यादव को आरजेडी कोटे से किस सीट पर कौन व्यक्ति चुनाव लड़ेगा इसकी सूची दे दी है. यह भी चर्चा में है कि जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने उत्तराधिकारी पुत्र को यह भी बता दिया है कि महागठबंधन में शामिल कांग्रेस, रालोसपा, वीआईपी, बीएसपी और हम सेकुलर पार्टियों को कौन सीटें दी जाएंगी.

बहरहाल, महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों की बटवारे की घोषणा इस महीने के अंतिम सप्ताह में की जानी की पूरी संभावना है. वैसे आरजेडी के एक नेता ने बताया कि एनडीए की सूची आने तक हमलोगों द्वारा इंतजार किया जा सकता है. जो भी हो, लेकिन एक बात तो लगभग क्लियर हो गई है कि वामदलों के लिए महागठबंधन में कोई जगह नहीं है.

ऐसी परिस्थति में बिहार की भूमि पर राजनीतिक रूप से सक्रिय तीनों वाम दल क्रमशः सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन अगले महाभारत में एकला तलवार भाजेंगे. कुछ सीटों पर आपसी तालमेल कर सकते हैं. वैसे जानकारी के लिए पड़ोसी राज्य झारखंड में भी महागठबंधन ने वामदलों को लोकसभा की कुल 14 सीटों में से एक सीट भी नहीं दी है, जिसे लेकर वामदलों में नाराजगी है.

वामदल की नाराजगी को दूर करने के लिए झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार ने 16 फरवरी को कहा, ‘विधानसभा चुनाव में हमलोग लेफ्ट पार्टियों को उचित जगह और सम्मान देंगे.’

अखिलेश के सचिव को आयोजन में शामिल न होने की बात बता दी गयी थी: विश्वविद्यालय कुलसचिव

अखिलेश यादव का इलाहाबाद जाने का निर्णय पूर्णतया राजनीति से प्रेरित जान पड़ता है। अखिलेश के सचिव गंगा राम को लिखे गए पत्र के अनुसार विषविद्यालय अपने पूर्व के कटु अनुभवों के आधार पर यह निर्णय ले रहा है। इसके उपरांत भी अखिलेश उस कार्यक्र्म में जाने की जिद करते हैं और साथ ही साथ माया, ममता और नायडू के बयान का समय भी इसको प्रायोजित ही लगता है।

लखनऊ: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को उन्हें इलाहाबाद जाने से रोकने को लेकर केंद्र तथा प्रदेश की बीजेपी सरकारों पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मिली-भगत के कारण ही लखनऊ हवाईअड्डे पर पुलिस और खुफिया विभाग के अफसरों ने उन्हें विमान पर चढ़ने से रोक दिया.

अखिलेश ने इस घटना के बाद आरोप लगाया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में सपा समर्थित प्रत्याशी के हाथों अपने उम्मीदवार की हार से तिलमिलायी प्रदेश की बीजेपी सरकार ने मुझे छात्रसंघ कार्यक्रम में शामिल होने से रोक दिया. प्रदेश सरकार मुझे हवाई अड्डे पर नहीं रोक सकती थी, यह काम केंद्र सरकार का है. मुझे लगता है कि दिल्ली (केंद्र) की सरकार भी इसमें मिली हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि रात में स्थानीय अभिसूचना इकाई और पुलिस के कुछ अफसरों ने उनके घर की रेकी (टोह) की. मंगलवार सुबह साढ़े छह बजे तीन अधिकारी उनके घर के पास बैठा दिये गये.

वहीं, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने इस मामले पर कहा कि अखिलेश यादव के निजी सचिव को सोमवार को ही पत्र लिखकर सूचना दे दी गई थी. सामने आए पत्र के अनुसार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने वार्षिक समारोह आदि कार्यक्रमों में नेताओं को आमंत्रित नहीं करने की बात कही है.

अखिलेश ने कहा कि स्थानीय पुलिस हवाई अड्डा परिसर में नहीं जा सकती क्योंकि उसकी सुरक्षा और प्रबंध किसी दूसरे बल के पास है. इसके बावजूद अफसर वहां पहुंचे और मुझे हवाई जहाज में चढ़ने से रोक दिया. मुझे रोकने वाले अफसर के पास कोई लिखित आदेश भी नहीं था. सपा अध्यक्ष ने कहा, ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि मैं अराजकता और हिंसा फैलाने जा रहा था. मैं सन्यासी योगी से पूछना चाहता हूं कि अगर मेरे राजनीतिक जीवन में मेरे ऊपर एक भी धारा लगी हो तो बताएं.’ 

मीर रिजवान बने राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव, पार्टी के कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल

सहरसा :- राष्ट्रीय जनता दल के नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के निर्देश पर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सह समस्तीपुर विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने राजनपुर निवासी मीर रिजवान को उनके कार्य, कुशलता, कर्मठता, संघर्षशीलता और ईमानदारी को देखते हुए बिहार प्रदेश महासचिव (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ)के पद पर मनोनीत किया है। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मीर रिजवान के प्रदेश कमिटी मे आने से राष्ट्रीय जनता दल और मजबूत होगा। नव मनोनीत प्रदेश महासचिव मीर रिजवान ने राष्ट्रीय जनता दल के नेता प्रति सह पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव और प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इस्लाम शाहीन को पार्टी के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेवारी देने पर उनका आभार प्रकट करते हुए कहा कि पार्टी को बूथ स्तर पर मजबूती और राजद के विचारधारा को विस्तार करने के साथ साथ समाज के अंतिम व्यक्ति के हक और हकुक की कराई लरना मेरी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने इस नई जिम्मेवारी के लिए अभिभावक तुल्य पूर्व मंत्री सह महिषी विधायक डॉ० प्रो० अब्दुल गफूर, पूर्व मंत्री सह प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, सहरसा विधायक अरुण कुमार यादव को धन्यवाद देते हुए आभार जताया। इधर मीर रिजवान के मनोनयन पर पार्टी के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। मौके पर राजद जिलाध्यक्ष मो० जफर आलम, युवा राजद जिलाध्यक्ष गोविंद दास ताँती, छत्री यादव, भारत यादव, अजय सिंह, शिवशंकर विक्रांत, सुमन सिंह, मुकेश यादव, बजरंग गुप्ता, ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानु, दिलीप यादव, जग्गा यादव, जाकिर अली, मोज्ज्मिल आलम, दीपक राज सहित अन्य दर्जनों लोगों ने खुशी व्यक्त किया।

राहुल की रैली में नहीं मिला सम्मान, कांग्रेस के नाराज विधायक बना रहे नई रणनीत‍ि

ब‍िहार में नाराज विधायकों ने सदानंद सिंह के आवास पर बैठक की.  अब व‍िधायक आगे की योजना पर सोच विचार कर रहे हैं.

पटना: राहुल गांधी यूपी में रोड शो के जरिये जनाधार पाने की भले कोशि‍श कर रहे हों, लेकिन बि‍हार में उनकी पार्टी के नेता उनसे ही खुश नहीं हैं. पटना में हुई उनकी रैली ने कांग्रेस के कई विधायकों को नाराज कर दिया है. राहुल गांधी की रैली में सम्मान नहीं मिल पाने से कांग्रेस के कई विधायक नाराज हैं और भविष्य की रणनीति को लेकर फैसला करने में जुट गये हैं.

कांग्रेस 3 फरवरी को पटना के गांधी मैदान में हुई जनआकांक्षा रैली को सफल बता रही है. राहुल भले ही बिहार की रैली में लोगों का दिल जीत लेने का दंभ भर रहे हों, लेकिन हकीकत ये है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस रैली के कारण अपने विधायकों का विश्वास खो दिया है. आलम ये है कि रैली की व्यवस्था से नाराज पार्टी के तीन सीनियर विधायकों ने सोमवार को गुप्त बैठक की और आगे की रणनीति तय की. कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता  सदानंद सिंह के आवास पर विधायकों की बैठक हुई. बैठक में विधायक अवधेश सिंह, विधायक अजित शर्मा भी मौजूद थे.

बैठक को लेकर सदानंद सिंह ने कहा कि पास देने में गडबडी हुई है. यहां तक की प्रोटोकॉल का भी ख्याल नहीं रखा गया. प्रोटोकॉल के मुताबिक कांग्रेस विधायकों को राहुल गांधी के आते और जाते उनसे मिलवाया जाना चाहिए था. लेकिन ये व्यवस्था नहीं हो पाई. संगठन स्तर कहीं न कहीं चूक हुई है. बैठक में शामिल पार्टी के सीनियर लीडर विधायक अवधेश सिंह ने कहा कि रैली सफल रही. लोग बड़ी तादाद में राहुल गांधी को सुनने गांधी मैदान पहुंचे थे. लेकिन जो व्यवस्था होनी चाहिए थी वह नहीं हो सकी.

विधायक भी राहुल गांधी से नहीं मिल सके. व्यवस्था में कहीं न कहीं कमी रही. वहीं विधायक अजित शर्मा ने कहा कि रैली में ऐसे लोगो को पास और मंच दिया गया, जिसके पास 1 वोट नही था. एमएलए एमएलसी राहुल गांधी से मिल तक नहीं सके. सारे विधायक रैली को सफल बनाने में जुटे थे, यही वजह रही कि उस वक्त इन मुद्दों को तरजीह नहीं दी गई,  लेकिन मामला बेहद गंभीर है कि आखिर पार्टी के विधायक और एमएलसी को क्यों नजरअंदाज किया गया.

राजीव कुमार से पूछताछ जारी अब कुनाल घोष की बारी

केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष से भी रविवार को शिलॉन्ग में पूछताछ करेगी

शारदा चिटफंड घोटाले मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ की. उनसे यह पूछताछ पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में की गई. हजारों करोड़ रुपए के शारदा चिटफंड स्कैम में सबूतों को नष्ट करने में भूमिका को लेकर राजीव कुमार सीबीआई के निशाने पर हैं.

इसके अलावा अब सीबीआई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व सांसद कुणाल घोष से भी पूछताछ करने वाली है. सीबीआई उनसे रविवार को शिलॉन्ग में ही सवाल-जवाब करेगी.
मेघालय में सीबीआई के जरिए तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद कुणाल घोष से पूछताछ की जाएगी. यह पूछताछ शिलॉन्ग के सीबीआई ऑफिस में 10 फरवरी को की जाएगी. इसके अलावा राजीव कुमार से एक बार फिर शारदा चिटफंड मामले में सीबीआई के जरिए 10 फरवरी को पूछताछ की जाएगी. यह पूछताछ भी शिलॉन्ग में ही होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बीते मंगलवार को राजीव कुमार को सीबीआई के सामने पेश होने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा था कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर ‘शारदा चिटफंड घोटाले’ से जुड़े मामलों की जांच में सीबीआई के साथ ‘विश्वसनीय रूप से’ सहयोग करें. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.

राजीव कुमार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफी करीबी हैं

रिपोर्ट्स में बताया गया था कि कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्टेट क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट के साथ मिलकर 80-100 सवालों की एक लिस्ट तैयार की थी. जो सीबीआई के अधिकारी राजीव कुमार से पूछे जाने हैं.

ममता के साथ धरने पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ होगी प्रशासनिक कार्यवाही


इसके अलावा चूक करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मेडल उतारने के बारे में भी चर्चा की जा रही है.

4 फरवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जरिए धरना बुलाया गया. जिसमें कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार भी मौजूद थे. राजीव कुमार की मौजूदगी पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने कार्रवाई का आदेश दिया. वहीं कोलकाता में विरोध प्रदर्शन स्थल पर पांच अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारी भी शामिल थे.

गृह मंत्रालय के जरिए पश्चिम बंगाल सरकार से राजीव कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने को कहा था. पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को संबोधित एक पत्र में कहा गया था कि कुमार ने ऑल इंडिया सर्विस (कंडक्ट) नियम, 1968 /AIS (अनुशासन और अपील) नियम 1969 का उल्लंघन किया था.

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा अधिकारियों के जरिए धरने पर खास ध्यान देते हुए पश्चिम बंगाल सरकार से अधिकारियों से एक्शन लेने के लिए कहा है. केंद्र सरकार ने ऑल इंडिया सर्विस रूल के तहत धरना देने के लिए राज्य सरकार से कठोर कार्रवाई करने के लिए कहा है. सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने कथित तौर पर सभी पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की ठानी है.

चूक करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मेडल उतारने के बारे में भी चर्चा की जा रही है. केंद्र सरकार सूची में शामिल अफसरों के नाम भी हटा सकती है और उन्हें केंद्र सरकार में सेवा देने से एक निश्चित अवधि के लिए रोक सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी का दौरा करेंगे

एक हफ्ते में राज्य में मोदी की तीसरी रैली होगी. हालांकि उनकी रैली स्थल के लिए मंजूरी को लेकर भी भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं

नई दिल्ली/चुराभंडार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी का दौरा करेंगे जहां वह राष्ट्रीय राजमार्ग-31 डी के फलाकाता-सलसलाबाड़ी खंड को चार लेन किये जाने की आधारशिला रखेंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग का यह 41.7 किलोमीटर लंबा खंड पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में आता है और इसे करीब 1938 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा. बयान में कहा गया कि मोदी जलपाईगुड़ी में हाई कोर्ट की नयी सर्किट बेंच का भी उद्घाटन करेंगे.

वहीं जलपाईगुड़ी के चुराभंडार से आई खबर के मुताबिक मोदी शुक्रवार को यहां एक सार्वजनिक रैली को भी संबोधित करेंगे. यह एक हफ्ते में राज्य में मोदी की तीसरी रैली होगी. हालांकि उनकी रैली स्थल के लिए मंजूरी को लेकर भी भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं.

यह ममता बनर्जी के सारदा चिट फंड घोटाले में कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से सीबीआई की “राजनीति से प्रेरित” पूछताछ के विरोध में धरना खत्म करने के तीन दिन बाद हो रही है. यहां भाजपा सूत्रों के मुताबिक मोदी जिले में इस मंच का इस्तेमाल बनर्जी के आरोपों का “माकूल” जवाब देने के लिये कर सकते हैं और चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भी भरेंगे.

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश देने के अलावा हमें उम्मीद है कि मोदी जी तृणमूल कांग्रेस के असंवैधानिक धरने का भी समुचित जवाब देंगे.” भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनावों में राज्य की 42 सीटों में से सिर्फ दो सीटें जीती थीं, लेकिन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इस बार यहां से 23 सीटें जीतने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. भाजपा के दूसरे नेताओं के मामलों की तरह ही पार्टी को जलपाईगुड़ी में प्रधानमंत्री की सभा के लिये स्थल तलाशने में दिक्कत हुई.

जलपाईगुड़ी के सरकारी कॉलेज और उससे सटे स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के मैदान के लिए मंजूरी नहीं मिलने के बाद पार्टी को जलपाईगुड़ी शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर खेती की जमीन को किराये पर लेकर सभा के आयोजन के लिये बाध्य होना पड़ा. भाजपा की राज्य इकाई के महासचिव राजू बनर्जी ने आरोप लगाया कि स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेता बस संचालकों को चेतावनी दे रहे हैं कि भगवा पार्टी के समर्थकों को अपनी गाड़ियों में रैली स्थल पर न ले जाए. तृणमूल कांग्रेस के विधायक सौरव चक्रबर्ती ने हालांकि इन आरोपों को “निराधार” करार दिया.

ममता से टूटे 17 लाख परिवार

निवेशक ने कहा, ‘हम मांग करेंगे कि सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए और ठगे गए निवेशकों को पैसा लौटाया जाए.’

बताया जाता रहा है की शारदा चिटफंड घोटाले में 17 लाख निवेशकों का पैसा डूबा, और अब उनके इंसाफ की उम्मीद भी। यह मामला पैसे – राजनीति से कुछ अलग है। यकीन नहीं होता की ममता बैनर्जी राजनैतिक रूप से इतनी अपरिपक्व हो सकतीं थीं, जितना उन्होने अपने आप को दर्शा दिया। उन्होने अपने इस कदम से यह जाता दिया की उन्हे 17 लाख परिवारों की न कोई चिंता थी न है और न ही अब इन 17 लाख परिवारों के वोट की भी उन्हे लेश मात्र आवश्यकता है।

विभिन्न चिटफंड कंपनियों के हाथों धोखाधड़ी के शिकार हुए निवेशकों और एजेंटों ने सोमवार को कहा कि सीबीआई अधिकारियों को कोलकाता के पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करने से रोकने के पश्चिम बंगाल के कदम से वे ठगा-सा महसूस कर रहे हैं. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर करोड़ों रुपए के इस घोटाले के पीछे की सच्चाई को छिपाने का प्रयास करने का आरोप लगाया.

चिटफंड कंपनियों से परेशान लोगों के संगठन चिट फंड सफरर्स फोरम के संयोजक आसिम चटर्जी ने कहा कि कोलकाता के पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से पूछताछ की सीबीआई की कोशिश पर राज्य सरकार और केंद्र के बीच टकराव न केवल निंदनीय है बल्कि सच्चाई को छिपाने की कोशिश भी है.

फोरम के एक अन्य संयोजक जयंत हलधर ने कहा कि फोरम जल्द ही चिटफंट कंपनियों के हाथों ठगे गए निवेशकों की रैली करेगा.

उन्होंने कहा, ‘हम मांग करेंगे कि सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए और ठगे गए निवेशकों को पैसा लौटाया जाए.’

ठगे गए निवेशक बीसू ने कहा, ‘मै एक चिटफंट कंपनी में एजेंट और निवेशक दोनों था. मुझे करीब 30 लाख रुपए का चूना लगा दिया गया. अब जब सीबीआई इस घोटाले के पीछे की सच्चाई ढूंढने का प्रयास कर रही है तब राज्य सरकार उसे रोकने की कोशिश कर रही है.’ उन्होंने कहा, ‘हम ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.’

उन्होंने आश्चर्य प्रकट किया कि राज्य सरकार शीर्ष पुलिस अधिकारी से पूछताछ को रोकने के लिए इतनी आतुर क्यों है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने बार बार कहा है कि उसी की सरकार है जिसने चिट फंड मालिकों को गिरफ्तार कराया.

बिहार पुलिस दिल्ली में गिरफ्तार

अभी बंगाल के सीबीआई V/s बंगाल पोलिस के प्रकरण का पटाक्षेप हुआ भी नहीं की दिल्ली में बिहार पुलिस के साथ यही घटना घट गयी।
ये घटना बिहार के सुपौल जिले के थाना इलाके के चकला निर्मली मोहल्ला का है जहां दिल्ली के रोहिणी स्थित के एन काटजू थाने के दो पुलिस एक लड़की के अपहरण के मामले की जांच करने सुपौल आए थे. 

सुपौल: अपहरण के एक मामले में दिल्ली पुलिस बिहार आई तो थी आरोपी को गिरफ्तार करने लेकिन खुद गिरफ्तार हो गई. जी हां, ये घटना बिहार के सुपौल जिले के थाना इलाके के चकला निर्मली मोहल्ला का है जहां दिल्ली के रोहिणी स्थित के एन काटजू थाने के दो पुलिस एक लड़की के अपहरण के मामले की जांच करने सुपौल आए थे. 

सोमवार सुबह अपहृत लड़की और आरोपी लड़के का सुराग नहीं मिला और चकला निर्मली स्थित एक मकान से उसे धर दबोचा गया. इसी बीच मोहल्ले के काफी लोग वहां पहुंच गए और देखा की कार्रवाई के दौरान दिल्ली पुलिस नशे में थी. इस बात की जानकारी मोहल्लों वालोम ने तत्काल उत्पाद विभाग को दे दी गई. 

वहीं, मौके पर पहुंची उत्पाद अधीक्षक और उत्पाद इंस्पेक्टर ने जब दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल मुकेश कुमार का ब्रेथ ऐनालाईजर किया तो नशे में होने की पुष्टि हुई. फिलहाल उत्पाद विभाग ने दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल मुकेश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत मे जेल भेज दिया है.

हांलांकि, इस दौरान दिल्ली पुलिस कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात मुकेश कुमार की जांच के दौरान उत्पाद विभाग को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. कांस्टेबल ब्रेथ एनालाइजर मुंह मे डालना नहीं चाह रहा था जिसे लेकर उत्पाद विभाग के जवानों के साथ कई बार हाथापाई भी हो गई. करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद उत्पाद विभाग को सफलता मिली और कॉन्स्टेबल का जांच किया गया.

आपको बता दें कि दिल्ली के रोहिणी की रहने वाली एक नाबालिग लड़की के अपहरण की शिकायत उसके पिता ने इसी साल जनवरी महीने में रोहिणी थाने मे मामला दर्ज करवाया था. जिसे लेकर दिल्ली पुलिस सुपौल पहुंची इधर. वहीं, अपहृत लड़की का कहना है की उसका किसी ने अपहरण नहीं किया है. वो मधेपुरा जिले बिहारीगंज के रहने वाले एक लड़के से प्यार करती थी और उससे कोर्ट मैरेज करके खुशी-खुशी सुपौल में किराए के मकान में उसके साथ रह रही थी. 

वहीं, आरोपी अपरहरणकर्ता राजा का कहना है कि वो लड़की से प्यार करता था और लड़की के कहने पर उसे लेकर भागा. वहीं, जिस घर में किराए के घर में दोनों रह रहे थे उस घर के मकान मालिक का कहना है कि घर लेने से पहले उन्होंने दिखाया कि उनकी कोर्ट मैरिज हो चुकी है और प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं. आज जानकारी मिली कि दिल्ली पुलिस उन्हें पकड़ने आई है.

वहीं, उत्पाद विभाग के इंस्पेकटर प्रकाश राम ने बताया कि हंगामा होने पर वो मौके पर पहुंचे और उत्पाद विभाग द्वारा ब्रेथ एनालाइजर लगा कर जांच किया गया तो दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल की नशे में होने की पुष्टि हुई जिसे हिरासत में लिया गया है.

इधर दिल्ली पुलिस के अधिकारी का कहना है कि वो एक लड़की के अपहरण के केस की वजह से यंहा पहुंचे थे. दोनों यहां मिले हैं मगर अधिकारी कांस्टेबल के शराब के नशे में नहीं होने की बात की.