लालू यादव की स्थिति गंभीर, कई अंग फेल होने का खतरा, डर से दर्द की दवा नहीं दे रहे डॉक्टर

RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव दो दिनों से पटना के पारस अस्पताल में भर्ती हैं। रविवार को वो घर में ही सीढ़ियों से गिर गए थे। इसके बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। उन्हें सोमवार सुबह साढ़े तीन बजे पटना के पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आशिफ रहमान ने कहा है कि डॉक्टरों का पैनल लगातार उनकी निगरानी कर रहा है। उनकी सेहत स्थिर है। ऑब्जर्वेशन के लिए उन्हें ICU में विशेष निगरानी में रखा गया है। इधर, लालू के स्वास्थ्य को लेकर उनके परिवार के साथ ही सभी समर्थक भी चिंतित हैं।

बेटी रोहिणी ने भावुक होकर शेयर की अस्पताल के अंदर की तस्वीरें

पटना(ब्यूरो) डेमोक्रेटिक फ्रंट, पटना :  

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की स्थिति गंभीर है। पटना के पारस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। कंधे में फ्रैक्चर के चलते उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अब उनके शरीर के कई अंगों के एक साथ काम बंद करने (मल्टी ऑर्गन फेलियर) का खतरा मंडरा रहा है। डॉक्टर इस डर की वजह से उन्हें दर्द की दवाएं तक नहीं दे रहे हैं।

लालू यादव लंबे समय से किडनी के मरीज हैं। किडनी रोग के इलाज के लिए उन्हें दिल्ली एम्स में भी भर्ती कराया गया था। पारस अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम उनके स्वास्थ की गहन निगरानी कर रही है। हर अंग की बीमारी के लिए अलग डॉक्टर तैनात किए गए हैं। दर्द की दवा देने से उनके किडनी के फेल होने का खतरा है। फ्रैक्चर के इलाज के बाद डॉक्टर किडनी का इलाज करेंगे।

बता दें कि लालू यादव राबड़ी आवास में गिर गए थे। इसके चलते उन्हें कमर और कंधे में चोट लगी है। विशेषज्ञों के अनुसार किडनी के मरीज के लिए चोट और फ्रैक्चर का इलाज परेशानी भरा होता है। इलाज के दौरान कई अंगों के एक साथ फेल होने का खतरा रहता है। यही कारण है कि लालू यादव का इलाज कर रहे डॉक्टर बहुत अधिक सावधानी बरत रहे हैं। लालू यादव को आईसीयू में रखा गया है। 

लालू को देखने पारस हॉस्पिटल पहुंचे केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे। कहा कि डॉक्टरों के अनुसार उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। बाबा केदारनाथ से उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

लालू के अस्पताल में भर्ती होने के साथ ही उनके परिवार में भी मायूसी छाई है। सोमवार को दिन भर उनके दोनों बेटे तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव पटना के पारस अस्पताल में ही रहे। तेजस्‍वी ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि लालू यादव की स्थिति सामान्‍य है। इस बीच लालू की बेटी रोहिणी आचार्य जो कि सिंगापुर में हैं वह भी अपने पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। पिता का हाल चाल ले रहीं हैं। उन्होंने आज लालू यादव से वीडियो कॉल पर बात की। जिसकी भावुक कर देने वाली तस्‍वीर उन्‍होंने सोशल मीडिया पर पोस्‍ट की। जिसे देख कर लालू के चाहने वाले भी भावुक होते नजर आ रहे हैं।

गंगा दशहरा 2022

हर साल ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का शुभ पर्व मनाया जाता है। इस साल गंगा दशहरा 9 जून, गुरुवार को है। इस दिन मां गंगा की पूजा-अर्चना का विधान है। इस दिन घर के मुख्य दरवाजे में द्वार पत्र लगाने की भी परंपरा है। इस दिन हर व्यक्ति को अपने घर के मुख्य दरवाजे पर द्वार पत्र लगाना चाहिए। मान्यता है कि द्वार पत्र लगाने से बहुत अधिक लाभ होता है। मां गंगा का उद्गम स्थान गंगोत्री, उत्तराखंड में है। गंगा दशहरा के पावन दिन उत्तराखंड के हर घर के मुख्य दरवाजे में द्वार पत्र लगाने की परंपरा है।

डेमोक्रेटिक फ्रंट, धर्म/संस्कृति डेस्क, चंडीगढ़ :

सृष्टि के निर्माता ब्रह्माजी के कमंडल से राजा भागीरथ द्वारा देवी गंगा के धरती पर अवतरण दिवस को गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है। पृथ्वी पर अवतार से पहले गंगा नदी स्वर्ग का हिस्सा हुआ करती थीं। गंगा नदी को भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है, इस कारण उन्हें सम्मान से माँ गंगा अथवा गंगा मैया पुकारते हुए माता के समान पूजा जाता है।गंगा दशहरा के दिन भक्त देवी गंगा की पूजा करते हैं और गंगा में डुबकी लगाते हैं और दान-पुण्य, उपवास, भजन और गंगा आरती का आयोजन करते हैं। मान्यता है इस दिन मां गंगा की पूजा करने से भगवान विष्णु की अनंत कृपा प्राप्त होती है। हिन्दू धर्म में तो गंगा को देवी मां का दर्जा दिया गया है। यह माना जाता है कि जब मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं तो वह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी, तभी से इस तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है।  ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वर्तमान समय में भौतिक जीवन जी रहे मनुष्य से जाने अनजाने जो पाप कर्म हो जाते हैं उनकी मुक्ति के लिए मां गंगा की साधना करनी चाहिए। कहने का तात्पर्य है जिस किसी ने भी पापकर्म किये हैं और जिसे अपने किये का पश्चाताप है और इससे मुक्ति पाना चाहता है तो उसे सच्चे मन से मां गंगा की पूजा अवश्य करनी चाहिये। इस वर्ष लॉकडाउन और कोरोना को देखते हुए घर मे ही स्वच्छ जल में थोड़ा गंगा जल मिलाकर मां गंगा का स्मरण कर उससे भी स्नान कर सकते हैं।

दुनिया की सबसे पवित्र नदियों में एक है गंगा। गंगा के निर्मल जल पर लगातार हुए शोधों से भी गंगा विज्ञान की हर कसौटी पर भी खरी उतरी विज्ञान भी मानता है कि गंगाजल में कीटाणुओं को मारने की क्षमता होती है जिस कारण इसका जल हमेशा पवित्र रहता है। हमारी सनातन संस्कृति में गंगा को मां का स्थान दिया गया है। सदियों से समस्त मानव समाज इस मां रूपी पवित्र जल का उपयोग करता है और हमें इसके लिए अपनी गंगा मां का कृतार्थ होना चाहिए किन्तु पिछले कुछ वर्षों में हमारे देश में विकास के नाम पर जिन प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया गया है, उनमें गंगा नदी-जल के साथ कई प्रदूषित तत्व मिलाए गए और मिलाये जा रहें हैं।

हमें समझने की आवश्यकता है कि गंगा केवल जलधारा ही नहीं अपितु जनजीवन और लोक-संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। गंगा सभ्यताओं एवं संस्कृतियों के साथ-साथ विकास की भी जननी रही हैं। वर्तमान समय में जल संकट एक गंभीर समस्या है। देश के कई राज्यों में ग्रीष्मकालीन समय आते ही यह भयावह होने लगता है क्योंकि हमने अपनी बूँद-बूँद सहेजने वाली पूर्वजों की जल-संस्कृति को तिलांजलि दे दी है वर्तमान समय में जल की दोहरी समस्या है एक तो पर्याप्त मात्रा में पेयजल बचा नहीं है और जो बचा हुआ है उसका रूप-रंग और स्वाद तेजी से बदल रहा है और इन परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार एकमात्र इंसान है और हमें इस बात को गम्भीरता से समझना होगा।

ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा जल तत्व का कारक है यदि हम अपने दैनिक जीवन में जल को दूषित करेंगे, जल का संरक्षण नहीं करेंगे तो हमारा मन अशान्त और चित्त दूषित होगा और हमारा जीवन अशान्त होगा। इसलिए गंगा को प्रदूषण से बचाकर हम अपने कुंडली में चन्द्र ग्रह को मजबूत कर सकते हैं और अपने चित्त को प्रसन्न और स्वस्थ रह सकते हैं। गंगा दशहरा में हम सभी को यह संकल्प लेना होगा गंगा की सफाई, स्वच्छता में हम सभी पूर्ण सहयोग करेंगे क्योंकि गंगा की सफाई हेतु हम सबका एकीकृत होना वर्तमान की एक बड़ी ज़रूरत है। और सही मायने में यही मां गंगा की सच्ची सेवा और उपासना होगी।

‘यंग इंडियन’ 5 लाख से शुरू हुई थी आज 800 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति, क्यों सोनिया गांधी का ‘परिवार’ हैं ED के घेरे में?

नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के परिवार की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने जो अबतक इस मामले की पड़ताल की है, वह किसी मामूली सी कंपनी की प्रॉपर्टी में कल्पना से भी ज्यादा इजाफा का मामला है और शायद इसी वजह से सोनिया और राहुल गांधी की उलझनें बढ़ गई हैं और उन्हें अब ईडी अधिकारियों के सामने पेश होकर खुद को बेदाग साबित करना होगा। सोनिया को इस मामले में 8 जून को पेश होना है, जबकि राहुल को आज की तारीख दी गई थी, लेकिन विदेश में रहने की वजह से उन्होंने थोड़ी मोहलत मांगी है। लेकिन, जो खटकने वाली बात है वह ये कि गांधी परिवार की स्वामित्व वाली एक कंपनी की संपति सिर्फ एक दशक में 5 लाख रुपये से बढ़कर 800 करोड़ रुपये की कैसे हो गई ?

AJL दिल्ली

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़/ नयी दिल्ली: 

ED ने नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी को पूछताछ के लिए तलब किया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत कांग्रेस के दोनों नेताओं के बयान दर्ज करना चाहती है।

 दरअसल बात साल 2008 की है, जब नेशनल हेराल्ड अखबार को छापने वाले एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के मालिक कांग्रेस पार्टी ने इसकी खराब हालत को देखते हुए इसे बंद करने का फैसला किया था। तब कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली, मुंबई, पंचकुला, लखनऊ और पटना में प्राइम लोकेशन पर स्थित AJL की संपत्तियों को किराए पर देकर वाणिज्यिक विकल्प तलाशना शुरू कर दिया। इन शहरों में संपत्तियों का अधिग्रहण उन राज्यों में कांग्रेस सरकारों की मदद से किया गया था। बताया जा रहा कि इन सभी संपत्तियों को अखबारों के मुद्रण और प्रकाशन के विशिष्ट उद्देश्य के लिए मामूली रकम पर प्राप्त की गईं थीं।

इसके बाद सीन में आती है साल 2010 में सोनिया गांधी, ऑस्कर फर्नांडिस और कुछ करीबियों द्वारा बनाई नई कंपनी यंग इंडियन यंग इंडियन जब अस्तित्व में आई तब इसकी शेयर कैपिटल सिर्फ 5 लाख रुपये थी। इसके बाद कथित तौर पर कोलकाता स्थित एक शेल कंपनी से 1 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया गया था ताकि वह AJL और उसकी सभी संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए कांग्रेस पार्टी के साथ लेनदेन कर सके। आज सोनिया गांधी और उनके दो बच्चे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी यंग इंडियन के बहुसंख्यक शेयरधारक हैं।

AJL पंचकूला की कीमत 65 करोड़ रुपये

प्रवर्तन निदेशालय की प्रारंभिक जांच के अनुसार, गांधी परिवार द्वारा नियंत्रित कंपनी जिसकी शुरुआत महज 5 लाख रुपये से हुई थी, अब पूरे देश में 800 करोड़ रुपये की संपत्ति की मालिक है। वर्तमान में राजधानी नई दिल्ली में स्थित इसकी एक प्रमुख संपत्ति हेराल्ड हाउस में एक पासपोर्ट कार्यालय है। ED द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में AJL को आवंटित पंचकूला की जमीन की अनुमानित कीमत 65 करोड़ रुपये आंकी गई है। AJL और यंग इंडियन की डिटेल्स भी आयकर विभाग द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में यंग इंडियन द्वारा एजेएल के अधिग्रहण को चुनौती देने वाली 2017 की आकलन रिपोर्ट का हिस्सा है। हाई कोर्ट ने इनमक टैक्स विभाग के आरोपों को सही करार देते हुए उसे यंग इंडियन के बहुसंख्यक शेयरधारकों सोनिया और राहुल गांधी के आयकर रिटर्न को फिर से खोलने की अनुमति दी।

दरअसल, यंग इंडियन को सेक्शन 25 के तहत एक चैरिटेबल संस्था बनाई गई थी, जिसे टैक्स से छूट दी गई थी। गाँधी परिवार की कंपनी ने आयकर विभाग में इस छूट के लिए मार्च 2011 को आवेदन दिया था, जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस की सरकार थी और 9 मई 2011 को बिना किसी दिक्कत के इसे मंजूरी भी दे दी गई।

एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पंजीकृत होने के बावजूद यंग इंडियन ने पब्लिशिंग हाउस होने की आड़ में संपत्तियों का अधिग्रहण करना शुरू कर दिया। इसे वर्ष 2010-11 में भी टैक्स में छूट प्राप्त हुआ। यंग इंडियन अपनी बेशकीमती संपत्तियों पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रही है, जिसमें दिल्ली का हेराल्ड हाउस भी शामिल है। इसकी अनुमानित कीमत करोड़ों में है। आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने इसकी लीज इस आधार पर रद्द कर दिया था कि अखबार छापने की जगह इसका इस्तेमाल वित्तीय फायदे के लिए किया जा रहा है, जो कि लीज के नियमों का उल्लंघन है। 

AJL मुंबई

गाँधी परिवार ने इस आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज किया जा चुका है। पंचकूला की प्रॉपर्टी भी पहले ही ईडी जब्त कर चुकी है। सोनिया और राहुल गाँधी को प्रवर्तन निदेशालय अधिकारियों के सामने कंपनी की इन्हीं के बारे में बताना है। बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस, एजेएल द्वारा अधिग्रहित पहली संपत्तियों में से एक था। इमारत वर्तमान में भारत सरकार को किराए पर दी गई है, जो अपने परिसर में एक पासपोर्ट सेवा केंद्र चलाती है। आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने वर्तमान में सैकड़ों करोड़ की कीमत के आवंटन खंड के उल्लंघन का हवाला देते हुए अपनी लीज डीड रद्द कर दी है।

संपत्ति के कब्जे को लेकर गाँधी परिवार पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगने के बाद 2019 में ईडी ने पंचकूला में एजेएल द्वारा अधिग्रहित 65 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया। गाँधी परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला एजेएल के स्वामित्व वाली संपत्तियों के अधिग्रहण के बाद यंग इंडियन को ट्रांसफर किए जाने के बाद शुरू हुआ। ईडी ने जमीन की जानकारी का खुलासा करते हुए बताया कि प्लॉट नंबर सी-17, सेक्टर 6, पंचकूला को एजेएल को तत्कालीन हरियाणा के सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा ने 1982 में पहली बार आवंटित किया था।

कंपनी द्वारा वाणिज्यिक हितों के लिए भूमि का उपयोग करते पाए जाने के 10 साल बाद आवंटन रद्द कर दिया गया था। हालाँकि, वही जमीन कंपनी को 2005 में महज 59.39 लाख रुपए में आवंटित की गई थी। इसी तरह मई 2020 में ईडी ने मुंबई के बांद्रा में एजेएल की संपत्ति को कुर्क किया, जिसमें एक 9 मंजिला इमारत भी शामिल है। इसकी कीमत 16.38 करोड़ रुपए है। ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से संबंधित कुर्की आदेश एजेएल और उसके चेयरमैन-सह-मैनेजिंग डायरेक्टर रहे मोती लाल वोरा के खिलाफ जारी किया गया था।

 

कांग्रेस सुधरती नहीं है, खुद तो डूबेगी ही, हमको भी डूबो देगी : प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने कहा, “वैसे कांग्रेस के प्रति मेरा सम्मान बहुत है, लेकिन मौजूदा हालत पार्टी के लिए सही नहीं हैं।” निशाना साधते हुए प्रशांत ने कहा, “कांग्रेस पार्टी एक डूबती हुई नाव है।”  प्रशांत ने कहा, “2015 में बिहार में महागठबंधन का चुनाव कराया। 2017 में पंजाब चुनाव जीते। जगनमोहन रेड्डी के साथ आंध्र प्रदेश का इलेक्शन जीता। फिर अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली चुनाव जीता। 2021 में तमिनाडु और बंगाल इलेक्शन में विजय मिली। 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव हार गए। इसमें हम कांग्रेस के साथ थे।” इतना कहते ही प्रशांत ने हाथ जोड़ा और कहा, “इसके बाद तय कर लिया कि कांग्रेस के साथ काम नहीं करना है।”

Prashant Kishor, Congress, Vaishali, Hajipur, Jan Suraj Yatra, Bihar News, Bihar Politics- India TV Hindi
  • मैं 11 में से 10 चुनाव जीत गया, सिर्फ एक चुनाव में हार गया: प्रशांत किशोर
  • प्रशांत किशोर ने कहा कि कांग्रेस ने मेरा ट्रैक रिकॉर्ड खराब कर दिया
  • कांग्रेस सुधरती नहीं है, खुद तो डूबेगी ही, हमको भी डूबो देगी: प्रशांत किशोर

कोरल ‘पुरनूर’, डेमोक्रेटिक फ्रंट, नई दिल्ली/चंडीगढ़ :  

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस पर हल्के अंदाज में निशाना साधते हुए कहा, “उन्होंने चुनाव जीतने का मेरा रिकॉर्ड खराब कर दिया।” सक्रिय राजनीति में जाने का संकेत दे चुके प्रशांत ने यह भी कहा कि अब वे देश की सबसे पुरानी पार्टी के साथ काम नहीं करेंगे। पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने सोमवार को बिहार के वैशाली में कहा, “2011 से 2021 यानी 10 सालों तक, मैं 11 चुनावों से जुड़ा रहा और केवल एक चुनाव हार गया जो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ था। तब से, मैंने फैसला किया है कि मैं उनके (कांग्रेस) के साथ काम नहीं करूंगा क्योंकि उन्होंने मेरा ट्रैक रिकॉर्ड खराब कर दिया है।”

उन्होंने आगे कहा , “कांग्रेस के लिए बहुत सम्मान है, लेकिन उसकी वर्तमान व्यवस्था ऐसी है कि खुद तो डूबेगी ही हमको भी डुबा देगी।” भारतीय जनता पार्टी से लेकर कांग्रेस और कई क्षेत्रीय दलों तक, विभिन्न विचारधाराओं के राजनीतिक दलों के साथ काम कर चुके चुनाव रणनीतिकार ने 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को विजयी बनाने में एक अहम भूमिका निभाने के बाद पेशेवर चुनाव सलाहकार के तौर पर काम बंद करने की घोषणा की थी।

प्रधान मंत्री से मतभेद

प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर कोई यंग लड़का है, उसे सरकारी नौकरी मिले तो ठीक है। उसे भी सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए। मान लीजिए आप सिंचाई के जानकार हैं या फिर हम पहले पब्लिक हेल्थ के विशेषज्ञ थे। हम तो सरकार में हैं नहीं, लेकिन अगर सरकार मौका दे तो हम दो साल के लिए यहां आकर काम कर सकें। इसी बात को लेकर पीएम मोदी से मेरा मतभेद हो गया।

पीके ने कहा कि 2015 में नीतीश कुमार मिले। इन्होंने कहा कि आप बिहार में आकर काम कीजिए। इसलिए बिहार विकास मिशन करके एक योजना शुरू की गई थीं। उसमें कुछ यंग युवकों को नौकरी मिली, लेकिन जितना मैं चाहता था, उतना नहीं हुआ। इसके बाद मैं भी यहां से चला गया। 2015 में बिहार में महागठबंधन का चुनाव कराया। 2017 में पंजाब का चुनाव जीते। 2019 में जगन मोहन रेड्डी के साथ आंध्र प्रदेश का चुनाव जीता। 2020 में केजरीवाल के साथ दिल्ली का चुनाव जीते। 2021 में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का चुनाव जीते। 2017 में एक चुनाव उत्तर प्रदेश हार गए। इसलिए तय कर लिया कि कांग्रेस के साथ नहीं जाएंगे।

प्रशांत किशोर बड़ा बयान - 'खुद तो डूबेगी ही, मुझे भी डुबो देगी कांग्रेस'

भाजपा से बंगाल में शर्त

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में एक तरह से बीजेपी से शर्त लग गई थी। हमने कहा था कि बीजेपी ना केवल हारेगी बल्कि 100 के नीचे रोक देंगे। नहीं रोक पाए तो काम छोड़ देंगे। चुनाव परिणाम आया तो 77 पर बीजेपी को रोक दिए। भगवान का आशीर्वाद है। जब मेरी बात सही हो गई तो सोचा कि इस फिल्ड में बहुत हो गया, अब कुछ नया करते हैं।

प्रशांत किशोर जन सुराज यात्रा की शुरुआत करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रघुवंश प्रसाद सिंह के पैतृक निवास पहुंचे। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर जन सुराज यात्रा की शुरुआत की। जन सुराज यात्रा पर निकले प्रशांत किशोर ने कांग्रेस पर जमकर हमला किया। प्रशांत किशोर महनार में रघुवंश प्रसाद सिंह के घर पहुंच कर उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण किया और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। प्रशांत किशोर ने यहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी संवाद किया। प्रशांत किशोर छात्र छात्राओं के साथ भी संवाद किया और जन सुराज की सोच से अवगत कराया।

एक अन्य कार्यक्रम में प्रशांत किशोर सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के चैनपुर गांव पहुंचे जहां, दिव्यांग कल्याण संघ के अध्यक्ष जसवीर सिंह से मुलाकात की। प्रशांत किशोर वैशाली के 4 दिवसीय दौरे पर हैं। सोमवार को उनके दौरे का पहला दिन रहा। अगले 3 दिन दिन वह अन्य प्रखंडों और गांवों में जा कर समाज में अच्छा कार्य करने वाले लोगों से मुलाकात करेंगे और उनको जन सुराज की सोच से अवगत कराएंगे।

जमुई  जिले के सोनो प्रखंड के करमटिया में सोने का देश का सबसे बड़ा भंडार है, करीब 23 करोड़ टन सोना

केंद्रीय खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पिछले साल लोकसभा को बताया था कि भारत के सोने के भंडार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बिहार की है। एक लिखित जवाब में जोशी ने कहा था कि बिहार में 22.28 करोड़ टन स्वर्ण धातु है, जो देश के कुल स्वर्ण भंडार का 44 प्रतिशत है। केंद्रीय मंत्री ने कहा था, “नेशनल मिनरल इन्वेंटरी के अनुसार, देश में एक अप्रैल 2015 को प्राथमिक स्वर्ण अयस्क के कुल संसाधन 654.74 टन के साथ स्वर्ण धातु 50.18 करोड़ टन होने का अनुमान है और इसमें से बिहार के पास 22.28 करोड़ टन (44 प्रतिशत) अयस्क है जिसमें 37.6 टन धातु है।”

जमुई/पटना(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

अक्सर गरीब राज्य कहा जाने वाला बिहार अब जल्द मालामाल होने वाला है. दरअसल बिहार के जमुई  जिले के सोनो प्रखंड के करमटिया इलाके में सोने का देश का सबसे बड़ा भंडार है। यह बात हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि केंद्रीय खनन मंत्री प्रहलाद जोशी ने खुद इस बात पर मुहर लगा दी है। प्रहलाद जोशी ने खुलासा किया है कि जमुई में देश का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार है। अकेले 44 प्रतिशत सोना जमुई जिले के सोनो इलाके में है। अब ऐसे में इस बात पर मुहर लग जाने के बाद इस इलाके के लोगों का खुश होना तो लाजिमी है। इस शानदार खबर के बाद इस इलाके के लोग खुशी में झूम रहे हैं। यहां के स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि अब सिर्फ यहां के लोग नहीं बल्कि पूरा बिहार मालामाल होगा। अब जल्द ही यहां सोने का खनन शुरू होगा।

वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने बिहार के जमुई जिले में करीब 23 करोड़ टन (लगभग 222.88 मिलियन टन) सोने का सर्वेक्षण किया है। उन्होंने सोने के साथ-साथ करीब 37.6 टन खनिज अयस्क की भी सूचना दी है। इसी को देखते हुए नीतीश कुमार सरकार ने हाल ही में जमुई जिले के उस इलाके में सोने के खोज का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि इस मुद्दे पर केंद्र के साथ बातचीत चल रही है।

वैसे बिहार के इस क्षेत्र में सोने के भंडार को खोजने में कहा जा रहा है कि करीब 40 साल लग गए हैं। और यह संभव हुआ चींटियों की वजह से। इस इलाके में ऐसी किंवदंती है कि चालीस साल पहले इस क्षेत्र में एक विशाल बरगद का पेड़ था। सूरज की गर्मी और गर्मी से बचने के लिए चींटियाँ बरगद के पेड़ के नीचे घोंसला बनाना शुरू कर देती हैं। कहते हैं कि जब चीटियों ने मिट्टी को नीचे से उठाना शुरू किया, तो स्थानीय लोगों ने मिट्टी में पीले धातु के छोटे-छोटे कण मिले हुए देखे। तभी यह खबर इलाके के लोगों में फैल गई। कहते हैं वह खोज की शुरुआत है।

हालाँकि, जमुई के कई गाँवों के लोग ऐसी बाते कहते आए हैं। वहीं ग्रामीणों का यह भी कहना है कि आज से लगभग 15-16 साल पहले कोलाकाता से भी एक टीम आई थी, जिसने करमटिया में सोना होने की बात कही थी। इसके बाद में कई जाँच और सर्वे एजेंसियों ने भी जाँच कर जमुई जिले को सोने का बड़ा स्रोत बताया है।

बता दें कि बिहार के जमुई जिले में सोने के बड़े भंडार की चर्चा पिछले साल लोकसभा में केंद्रीय खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने की थी। उस समय भी मामला तेजी के साथ सुर्खियों में आया था। अब यहाँ से सोना निकालने के लिए बिहार सरकार की ओर से अनुमति देने का फैसला लिया जा रहा है। शनिवार को इस बाबत एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी।

रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के जमुई जिले में करमटिया, झाझा और सोनो में भारी मात्रा में सोना और खनिज होने के संकेत कई सालों से लोगों को मिलते आ रहे हैं। जिस पर मुहर राज्य का खान और भूविज्ञान विभाग भी लगा चुका है। वहीं बिहार का अब यह विभाग जमुई में सोने के भंडार की खोज के लिए जीएसआई और राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) सहित ऐसी खोज में लगी एजेंसियों के साथ भी विचार-विमर्श कर रहा है।

गौरतलब है कि भारत में सबसे अधिक सोना कर्नाटक राज्य में पाया जाता है। इस राज्य में कोलार सोने की खान भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख सोने की खानों में से एक है। हालाँकि, 2001 में सोने की यह खान बंद कर दी गई है।

डिंपल यादव नहीं जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजेंगे अखिलेश

राज्यसभा सीट के लिए पूर्व कांग्रेसी कपिल सिब्बल को समर्थन देने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन को पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत दिलाने में मदद करने के लिए एक बदले के रूप में देखा जा रहा है। दो साल से अधिक समय के बाद उनकी रिहाई हुई है। इसी तरह सपा के दूसरे राज्यसभा प्रत्याशी जावेद अली खान पर वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव का आशीर्वाद है। लेकिन, जयंत चौधरी की राह आसान नहीं है।

लखनऊ(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :  

पूर्व कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को समर्थन देने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव राष्ट्रिय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी को राज्य सभा भेजेंगे। जयंत चौधरी सपा और रालोद के संयुक्त प्रत्याशी होंगे। बता दें कि यूपी से राज्यसभा की 11 सीटों के लिए चुनाव होने हैं. मौजूदा संख्या बल के आधार पर समाजवादी पार्टी तीन सदस्यों को राज्य सभा भेज सकती है। कपिल सिब्बल और जावेद अली अपना नामांकन कर चुके हैं। तीसरे प्रत्याशी के तौर पर अब जयंत चौधरी नामांकन करेंगे। इससे पहले यह कयास लगाया जा रहा था कि डिंपल यादव राज्य सभा जा सकती है।

समाजवादी पार्टी की तरफ से तीसरी प्रत्याशी के रूप में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के नाम को लेकर चर्चा काफी तेज थी। हालांकि बुधवार को जब तीसरा नामांकन दाखिल नहीं हुआ, तो इस मामले में सस्पेंस गहरा हो गया। गुरुवार को जब जयंत चौधरी का नाम सामने आया, तो अब यह स्पष्ट हो गया कि सपा गठबंधन से तीसरा नाम कौन है।

रालोद प्रमुख और सपा के सहयोगी जयंत चौधरी अब खुद को मुश्किल में पा रहे हैं। चुनाव से पहले उन्हें एक सीट देने का वादा किया गया था, लेकिन डिंपल यादव सपा की तीसरी और अंतिम सीट के लिए एक गंभीर दावेदार बन गई हैं।

राज्यसभा चुनाव में सपा का समर्थन पाने के बाद कपिल सिब्बल ने कहा, ”हम मोदी सरकार का विरोध करने के लिए विपक्ष में रहकर गठबंधन बनाना चाहते हैं और 2024 में ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं कि मोदी सरकार की गलतियां लोगों तक पहुंचे।” वहीं, अखिलेश यादव ने सदन में मामले उठाने के लिए कपिल सिब्बल की दक्षता और उनकी कानूनी दक्षता की सराहना की।

आपको बता दें कि यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी और आरएलडी के बीच गठबंधन हुआ था। हालांकि, इसे चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। अगर आरएलडी के जयंत चौधरी राज्यसभा जाने से चूकते हैं तो दोनों दलों के गठबंधन पर भी इसका असर पड़ेगा।

सूत्रों की मानें तो जयंत चौधरी को अखिलेश यादव ने राज्यसभा भेजने का वादा किया था। अखिलेश चाहते थे कि जयंत सपा के सिंबल पर राज्यसभा जाएं, लेकिन जयंत राष्ट्रीय लोकदल के उम्मीदवार के तौर पर सपा का समर्थन चाहते हैं। आपको बता दें कि सपा के पास राज्यसभा की तीन सीटें हैं। कपिल सिब्बल और जावेद अली खान नामांकन भर चुके हैं। वहीं, तीसरे उम्मीदवार की बात करें तो वह डिंपल यादव हो सकती हैं।

कपिल सिब्बल हाथ छोड़ कर हुए साइकल सवार, अब रजाया सभा जाने की तैयारी

नौतपा – 2022

ज्योतिषाचार्यों की मानें तो सूर्य आज यानि 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसके बाद ये 08 जून तक इसी स्थिति रहेंगे। लेकिन नौतपा की समाप्ति 02 जून को हो जाएगी। 25 मई दिन बुधवार को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश होगा। सूर्य देव 08 जून दिन बुधवार को सुबह 06 बजकर 40 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र से बाहर हो जाएंगे।

राजविरेन्द्र वशिष्ठ, धर्म/संस्कृति डेस्क, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़:

ज्येष्ठ मास की ग्रीष्म ऋतु में नवतपा को अधिक गर्मी का संकेत माना जाता है। नवतपा शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से 9 नक्षत्रों तक यानी 9 दिनों तक रहता है। यह आवश्यक नहीं है कि नवतपा में अधिक गर्मी हो। आर्द्रा के 10 नक्षत्रों तक, जो सबसे अधिक गर्मी प्राप्त करता है, बाद में सूर्य उस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहता है और अच्छी वर्षा होती है। नौतपा की शुरुआत भी रोहिणी नक्षत्र से होगी। नवतपा में तेज हवा के साथ बवंडर और बारिश की संभावना रहती है। नौतपा समय की ग्रह स्थिति तेज हवा, बवंडर और बारिश का संकेत दे रही है। इस बार 25 मई से नौतपा शुरू होंगे और 2 जून तक रहेंगे।

नौतपा में बारिश होने से क्या होता है: देश में मानसून वक़्त से पहले सक्रीय हो गया है, जहां केरल में मानसून आने की तरीक 1 जून होती है वहीं 14 मई से ही यहां प्री मानसून का असर दिखाई देने लगा था, केरल, कर्नाटक, असम, बिहार जैसे दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का प्रकोप भी देखने को मिलने लगा है। मानसून के जल्दी सक्रीय होने से लोगों को भीषड़ गर्मी से राहत तो मिली है लेकिन बरसात के मौसम के लिहाज से यह अच्छा नहीं माना जा रहा है। नौतपा में भयंकर गर्मी पड़ती है और बरसात का मौसम ठीक इसका उल्टा होता है। लेकिन दोनों के बीच बहुत बड़ा कनेक्शन होता है। अगर नौतपा में बढ़िया से गर्मी पड़ती है तो ऐसा माना जाता है कि इस बार बरसात भी ताबड़तोड़ होगी, और अगर नौतपा में पानी बरस गया तो समझों वर्षा ऋतू में झमाझम पानी बरसते देखने के लिए आंखे बंजर हो जाएंगी।

ग्रहों और नक्षत्रों के प्रभाव में नवत्पा 25 मई से शुरू हो रहा है। नौतपा के दिनों में विवाह जैसी मांगलिक यात्रा में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ग्रहों की स्थिति को देखते हुए देश के पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में प्राकृतिक आपदाएं पैदा हो रही हैं। यह नौतपा 02 जून तक चलेगा। .नौतपा के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहता है। इसके फलस्वरूप सूर्य की सीधी किरणें पृथ्वी पर पड़ती हैं, इस दौरान अत्यधिक भीषण गर्मी देखी जा सकती है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि सूर्य की मौजूदा स्थिति अशुभ फल दे सकती है। वृष राशि वालों के लिए वर्तमान समय खराब है।

नौतपा में क्या करें और क्या नहीं —

नौतपा में क्या न करें –

  • चूंकि नौतपा के 09 दिनों में आंधी, तूफान की आशंकी होती है इसलिए इस दौरान ऐसे में शादी, मुंडन या अन्य मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए।
  • नौतपा में सूर्य की अपना प्रचंड रूप दिखाते हैं। इसलिए इस दौरान यात्रा करने से बचना चाहिए। अन्यथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ सकती हैं।
  • जहां तक संभव हो इस दौरान भोजन में तेल, मसाला, गरिष्ठ भोजन के सेवन से बचना चाहिए। इन दिनों ज्यादा भोजन करना भी हानिकारक है।
  • नौतपा के दौरान मांसाहार या तामसिक भोजन न करें। ये आपकी सेहत बुरा असर पड़ सकता है।

नौतपा में क्या करें –

  • आसानी से पच सके इसके लिए इस दौरान हल्का और सुपाच्य भोजन करें।
  • जहां तक हो सके, पानी का अधिक से अधिक सेवन करें। ताकि आप डिहाइड्रेशन का शिकार न हों।
  • ​जिस तरह इंसान को पानी की इस समय अधिक आवश्यकता होती है उसी तरह पशु—पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करें। इसलिए खुले में या छत पर खुले में पक्षियों के लिए दाना पानी रखें।
  • लोगों को ठंडा पानी पिलाने की व्यवस्था करें। इसके लिए घर के बाहर मिट्ठी के घड़े और पानी की व्यवस्था की जा सकती है। ज्योतिष शास्त्र में जेठ माह में जल का दान सबसे बड़ा दान माना गया है।
  • इस दौरान पेड़ पौधों को भी पानी की अधिक आवश्यकता होती है। इसलिए उनके लिए भी पर्याप्त पानी देते रहें। हरे पेड़ पौधों की सेवा करने से ग्रह दोष दूर होते हैं।
  • जल मात्रा से भरपूर फलों का दान इस महीने में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए जहां तक संभव हो पानी की अधिक मात्रा वाले फलों का दान जरूर करें। पंखे का दान भी अच्छा माना जाता है।

विरोध में हो या पक्ष में, अगले 20-30 साल तक BJP के इर्द-गिर्द घूमेगी भारतीय राजनीति : चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की बड़ी भविष्यवाणी

चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि आजादी के बाद के 50-60 सालों में राजनीति कांग्रेस के इर्दगिर्द घूमती थी। लेकिन आज इसके केंद्र में बीजेपी है। उनका कहना है कि आप साथ रहिए या विरोध में, अगले 20-30 साल तक राजनीति बीजेपी के इर्दगिर्द रहेगी। Express E.Adda में इंडियन एक्सप्रेस के कार्यकारी निदेशक अनंत गोयंका और नेशनल ओपिनियन एडिटर वंदिता मिश्रा के साथ बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि 1977 के दौर को छोड़कर आजादी के बाद से 1990 तक कांग्रेस ही राजनीति के केंद्र में रही। उस समय भी आज जैसा माहौल था। आप साथ रहिए या विरोध में, उस समय राजनीति का हर पैंतरा कांग्रेस की तरफ से था या फिर उसके विरोध में। कोई भी पार्टी पैन इंडिया अपनी पकड़ नहीं बना पा रही थी।

नई दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट : 

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी आगामी दो दशकों तक देश की राजनीति में प्रभावी बनी रहेगी और दूसरे दलों के लिए चुनावों में उसे हराना बहुत कठिन होगा। अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के साथ खास बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा है कि कांग्रेस को बिहार से सीखना चाहिए कि राजनीतिक विरोधी को चुनौती कैसे दी जाती है और विपक्ष में कैसे रहा जाता है। उनका इशारा बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से था।

प्रशांत किशोर ने इंटरव्यू में कहा, ‘1977 के दौर को छोड़कर आजादी के बाद से 1990 तक कांग्रेस पार्टी ही भारतीय राजनीति के केंद्र में रही। उस समय भी आज जैसा माहौल था.। आप साथ रहिए या विरोध में, उस समय राजनीति का हर पैंतरा कांग्रेस की तरफ से होता था। उस दौर में कोई दूसरी पार्टी पैन इंडिया अपनी पहुंच नहीं बना पा रही थी। आज के दौर में बीजेपी ने वह पकड़ बना रखी है।’

उन्होंने गिनाया कि कॉन्ग्रेस की चुनावी गिरावट तभी से चालू हो गई थी। उन्होंने कहा कि भारत में 60 करोड़ लोग रोज 100 रुपए से भी कम कमाते हैं, वहाँ विपक्ष को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि विपक्षी एकजुटता या गठबंधन मजबूत हो जाएगा। उन्होंने शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि चेहरा न होने के बावजूद आप नैरेटिव सही कर के चीजों को ठीक कर सकते हैं, एक मुद्दा चुन कर एकाध साल के लिए उस पर अड़े रह सकते हैं।

उन्होंने कहा कि क्या आपने कभी विपक्ष को पिछले कुछ वर्षों में आम लोगों या कोविड पीड़ितों की आवाज़ उठाते हुए देखा? साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से काम नहीं चलता। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए सही मैसेज होना चाहिए, जिसे एक सही मैसेंजर (चेहरे) द्वारा जनता को पहुँचाया जाए, इसके बाद पार्टी मिशनरी को इसे अभियान में बदलना होता है। इस दौरान उन्होंने अपनी अगली योजना की भी बात की।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में बदलाव के लिए वो जनता के बीच जाकर यात्रा करेंगे और जानेंगे कि क्या-क्या किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजद के काल में सामाजिक न्याय की बात कही जाती है, उसके बाद नीतीश कुमार के काल में आर्थिक विकास की बात कही जाती है – इन 30 वर्षों के बाद भी बिहार देश का सबसे गरीब और पिछड़ा राज्य है। उन्होंने कहा कि विकास के मानकों पर बिहार सबसे नीचे हैं, लेकिन लालू-नीतीश काल से आगे अग्रणी आने के लिए नई सोच और नए प्रयास की जरूरत है।

हालाँकि, उन्होंने माना कि ये किसी एक व्यक्ति के बाद की बात नहीं। उन्होंने कहा कि बिहार में कई लोग ऐसे हैं जो बदलाव के लिए क्या करना चाहिए, ये जानते हैं। उन्होंने कहा कि अगर लोग साथ आकर राजनीतिक पार्टी के गठन की बात करते हैं तो वो भी होगा, लेकिन ये प्रशांत किशोर का दल नहीं होगा बल्कि जो इसके संस्थापक साथ आएँगे – उनका होगा। उन्होंने खुद को कैटेलिस्ट बताते हुए कहा कि वो बस बदलाव लाने वालों को साथ लाना चाहते हैं, उन्हें नहीं पता कि नेता वो होंगे या कोई और।

उन्होंने बताया कि कहीं उन्होंने अपना चेहरा तक नहीं लगाया है, बल्कि महात्मा गाँधी को रखा है। उन्होंने बताया कि बिहार के 17-18 हजार लोगों तक वो पहुँचे हैं, जिनमें कई शिक्षक, पूर्व अधिकारी और समाजसेवी जैसे लोग हैं। उन्होंने कहा कि सह-संस्थापक के रूप में कितने लोगों को साथ लाया जा सकता है, ये वो सबसे मिल कर तय करेंगे। उन्होंने कहा कि 1000-1200 लोग साथ आकर पार्टी बनाएँगे। उन्होंने ये भी कहा कि राजनीतिक दल या पार्टी गाँधी का प्रयोग सही से नहीं कर रहे हैं।

अखिलेश ने हिंदू धर्म का उड़ाया मजाक, कहा- ज्ञानवापी मामला BJP बढ़ा रही है

एक तरफ अदालत में ज्ञानवापी को लेकर बहस जारी है कि वो मस्जिद है या फिर मंदिर है, दावे अपने-अपने हैं और इन दावों को झुठलाने और सही साबित करने के लिये वार और पलटवार भी किया जा रहा है। जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई जारी है, तो वहीं सियासत भी तेज हो चुकी है। हालांकि अखिलेश यादव से उनकी पार्टी के लोग ही सहमत नहीं दिख रहे। अखिलेश ने आगे कहा कि “मुख्यमंत्री योगी जी गरीबों की दुकान हटाना चाहते है, होर्डिंग हटाना चाहते है। पहले गरीब को राशन दिया। अब उनकी महंगे दाम में वसूली करना चाहते है। प्रदेश में बिजली कटौती जारी है। इसके बीच लोगों के घरों में बिजली का बिल पहुंचने लगा है। बिजली का बिल न देने पर उन्हें धमकाया जा रहा है।” समाजवादी पार्टी की नेता रूबीना खानम ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाना गलत है।

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, अयोध्याजी/ नयी दिल्ली :  

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अखिलेश यादव जो यादवों के प्रतिनिधि हिन्दू धर्म के बारे में जो सोचते हैं वही उनके बयानों में सामने आता है। वाराणसी के ज्ञानवापी सर्वे पर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि हिंदू धर्म में में कहीं पर भी पत्थर रख दो, एक लाल झंडा रख दो, पीपल के पेड़ के नीचे तो मंदिर बन गया। अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके उन्होंने इशारों ही इशारों में बाबरी मस्जिद को लेकर भी बड़ी बात कह दी। उन्होंने कहा कि एक समय था जब रात के समय मूर्तियां रख दी गई थी। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद से सियासी राज छिड़ा हुआ है। भाजपा ने इसे समाजवादी पार्टी की तुष्टिकरण की राजनीति बताया।

सिद्धार्थनगर से लौटते समय अखिलेश अयोध्या में रुके थे, यहां पर उन्होंने एक होटल में प्रेस कांफ्रेंस की। कहा कि देश में महंगाई बढ़ी है, वह भाजपा ने बढ़ाई है। भाजपा ज्ञानवापी का मुद्दा जानबूझकर उठा रही है। अभी तक एक योजना चला रही थी, कि वन नेशन वन राशन, लेकिन अब योजना चला रही है कि वन नेशन वन उद्योगपति। सभी का ध्यान ज्ञानवापी मस्जिद की ओर करके भाजपा उद्योगों को बेच रही है।

अखिलेश ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के बहाने सरकार गेहूं को विदेश भेजकर कुछ लोगों को फायदा पहुंचा रही है। सभी ने निर्यात पर रोक लगाए जाने का समाचार पढ़ा और सुना होगा, लेकिन गेहूं विदेश भेजने का नहीं सुना होगा। देश के बंदरगाहों पर खड़े हजारों ट्रक गेहूं रोक के बावजूद भी विदेश भेज दिए गए।

अखिलेश यादव ने कहा कि अयोध्या जैसे पवित्र स्थान पर 5 साल की बच्ची से रेप होता है। वहां बुलडोजर नहीं चलाया गया। केवल गरीब पर चलता है। एक व्यक्ति सब्जी लेने गया था, उस पर भी बुलडोजर चल गया। अखिलेश ने बिजली को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री गरीबों की दुकान हटाना चाहते है, होर्डिंग हटाना चाहते हैं। पहले गरीब को राशन दिया। अब उनकी महंगे दाम में वसूली करना चाहते है। प्रदेश में बिजली कटौती जारी है।

उधर ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जमीयत उलेमा ए हिन्द (महमूद मदनी ग्रुप) ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बयान जारी कर कहा है कि ऐसे मामलों को लेकर सार्वजनिक प्रदर्शन करने से बचना होगा।

उलेमा, वक्ताओं और गणमान्य व्यक्तियों और टीवी पर बहस करने वालों से अपील है कि वह टीवी डिबेट और बहस में भाग लेने से परहेज करें। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए सार्वजनिक डिबेट में भड़काऊ बहस और सोशल मीडिया पर भाषणबाजी किसी भी तरह से देश और मुसलमानों के हित में नहीं है।

मौलाना महमूद मदनी

प्रेस नोट में लिखा है कि ज्ञानवापी मस्जिद जैसे मुद्दे को सड़क पर न लाया जाए और सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रदर्शनों से बचा जाए। इस मामले में मस्जिद इंतेजामिया कमेटी एक पक्षकार के रूप में विभिन्न अदालतों में मुकदमा लड़ रही है। उनसे उम्मीद है कि वे इस मामले को अंत तक मजबूती से लड़ेंगे। देश के अन्य संगठनों से अपील है कि वे इसमें सीधे हस्तक्षेप न करें। जो भी सहायता करनी है, वह अप्रत्यक्ष रूप से इंतेजामिया कमेटी की की जाए।

बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर मंगलवार को मौलाना राबे हसन नदवी के नेतृत्व में आपातकालीन बैठक की थी। उस बैठक में बोर्ड से जुड़े देशभर के 45 सदस्य शामिल हुए थे, जिसमें तय हुआ कि बाबरी मस्जिद की तरह देश की दूसरी मस्जिदों को हाथ से नहीं जाने देंगे, वो चाहे काशी की ज्ञानवापी मस्जिद हो या फिर मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद।

सपा प्रमुख ने केंद्र पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश में उद्योगपतियों को बड़ी-बड़ी चीजें बेची जा रही हैं। कंपनियाँ बिक रही हैं, बैंक मर्ज हो रहे हैं, एलआईसी का निजीकरण हो रहा है, एयरपोर्ट बिक रहे हैं, राज्य का गेहूँ विदेशों में बेचा जा रहा है… अखिलेश के अनुसार, ज्ञानवापी का मामला इन्हीं सब मामलों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया है।

वह वर्तमान सरकार पर ‘फूट डालो राज करो’ वाली नीति पर चलने का इल्जाम मढ़ते हैं। वह कहते हैं कि अंग्रेजों ने जिस तरह से डिवाइड एंड रूल किया उसी तरीके से भाजपा भी यही नियम अपना रही है। ये सिद्धांत कई साल पुराना जिसे अंग्रेज इस्तेमाल करते थे। जनता के साथ इतना अन्याय और उत्पीड़न कभी नहीं हुआ, जितना इस सरकार में हो रहा है। ये सरकार केवल डरा कर धर्म और जाति के नाम पर डरा रही है।