“माखन चोरी बाल लीला तो मिठाई चोरी अपराध कैसे।” किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र

मिठाई चोरी पर जज ने कहा- “माखन चोरी बाल लीला तो मिठाई चोरी अपराध कैसे।” मामले की एफआईआर करने वाले हरनौत प्रखंड के चेरो थानाध्यक्ष को चेताते हुए कहा कि छोटे-मोटे अपराध में किशोर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से बचें। उसे समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। वहीं उन्होंने केस दर्ज कराने वाली महिला को भी बच्चों के प्रति सहिष्णु व सहनशील बनने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अगर उसका अपना बेटा मिठाई, मोबाइल या पैसे चुराता तो क्या पुलिस को सौंप देती या उसे समझाती।

नालंदा:

यदि कोई बच्चा भूख से अकुला कर गरीबी के कारण मिठाई चुरा कर खाने को मजबूर है तो यकीन जानिए यह समाज की असफलता है। समाज को अपने दोहरे चरित्र पर एक बार चिंतन अवश्य करना चाहिए। बिहार के हरनौत में एक ऐसा ही मामला सामने आया जब नालंदा के दंडाधिकारी ने उदाहरणबना दिया सुलझाया।

ननिहाल आए 15 वर्षीय किशोर के विरुद्ध मिठाई व मोबाइल चोरी मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने किशोर को रिहा कर दिया। किशोर की दर्द भरी दास्तां सुनकर जज ने न सिर्फ रिहाई दी, बल्कि आरा की जिला बाल संरक्षण इकाई को बच्चे का उचित मूल्यांकन करते हुए देखभाल योजना से लाभ दिलाकर अपराध से रोकने का निर्देश दिया है। महज 15 दिनों में इस मामले की सुनवाई पूरी की गयी। 

मामला बिहार के नालंदा जिले के हरनौत थाना क्षेत्र के चेरो ओपी के एक गाँव से जुड़ा हुआ था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार घटना सात सितंबर की थी। बच्चे ने कोर्ट में भूख लगने की वजह से मिठाई चुरा कर खाने और गेम खेलने के लिए मोबाइल फोन लेने की बात स्वीकार की। इसके बाद प्रधान दंडाधिकारी ने बच्चे को आरोप मुक्त करते हुए आरा जिला बाल संरक्षण इकाई को उसकी उचित देखभाल का निर्देश दिया।

प्रधान दंडाधिकारी ने कहा, “भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी बाल लीला तो मिठाई चोरी अपराध कैसे।” साथ ही मामले में FIR दर्ज करने वाले चेरो थानाध्यक्ष को चेताते हुए कहा कि छोटे-मोटे अपराध में किशोर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से बचें। उसे समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने केस दर्ज कराने वाली महिला को भी बच्चों के प्रति सहिष्णु और सहनशील बनने की नसीहत दी। कहा कि अगर उसका अपना बेटा मिठाई, मोबाइल या पैसे चुराता तो वह उसे पुलिस को सौंप देती या उसे समझाती।

आरोपित किशोर भोजपुर जिले के आरा का रहने वाला है। घटना के समय वह अपने ननिहाल हरनौत आया हुआ था। गुरुवार (23 सितंबर, 2021) को किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र ने मामले की सुनवाई करते हुए किशोर से पूरे मामले पर पूछताछ की। इस दौरान किशोर काफी डरा और सहमा हुआ था। जब उसे समझाया गया तो वह फफक-फफक कर रोने लगा। रोते हुए अपने परिवार की स्थिति बयाँ की।

किशोर के पिता रोग ग्रस्त हैं। वहीं माँ मानसिक रूप से विक्षिप्त है। परिवार की आमदनी का कोई साधन नहीं है। घटना के समय वह ननिहाल में था। मामा और नाना की भी मौत हो चुकी है। वह काफी भूखा था और पड़ोस की मामी के घर चला गया। वहाँ भूख मिटाने के लिए फ्रीज में रखी मिठाई खा ली। बालपन के कारण फ्रीज पर रखा मोबाइल लेकर गेम खेलने लगा। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि शिकायतकर्ता ने मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पुलिस के समक्ष पेश किया।

प्रधान दंडाधिकारी ने कहा कहा कि सनातन संस्कृति में भगवान श्रीकृष्ण को दूसरों के घर से माखन खाने और हांडी फोड़ने की बातें कही गई है। इसे हमारी संस्कृति ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला बताई। वहीं आज भूख के कारण एक किशोर के मिठाई चुराने को अपराध कैसे माना जाये। सरकारी अभियोजन पदाधिकारी ने भी बच्चे को सुधार के लिए एक अवसर दिए जाने का समर्थन किया। इस फैसले पर किशोर न्याय परिषद की सदस्य उषा कुमारी ने भी सहमति दी।

देश दहलाने के पाक के मंसूबे का पर्दाफाश, दाउद इब्रहीम का नाम फिर आया सामने

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि आतंकियों के टारगेट पर आने वाला त्योहार नवरात्र, दशहरा और दीपावली था। उन्होंने बताया कि अंडरवर्ल्ड से आतंकियों की फंडिंग हुई है। स्पेशल सेल ने ऑपरेशन में 6 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने अपना यह ऑपरेशन दिल्ली, महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश में चला इन्हें गिरफ्तार किया है। इस संबंध में उनको 15 अगस्त से पहले इनपुट मिले थे। इसी के बाद पुलिस ने अपनी पड़ताल शुरू की। काफी समय से पुलिस इस मॉड्यूल पर अपनी नजर बनाए हुए थी, मगर जब सूचना कन्फर्म हो गई तब इन लोगों को पकड़ा गया। अब आगे इनके पूछताछ चल रही है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो) :

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान समर्थित एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए पाक प्रशिक्षित दो आतंकवादियों सहित कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने मंगलवार को बताया कि स्पेशल सेल ने कई राज्यों में चले इस ऑपरेशन में विस्फोटक और हथियार बरामद किए गए हैं। इन सभी छह लोगों को दिल्ली, यूपी और महाराष्ट्र से पकड़ा गया है। गिरफ्तार आतंकियों में दो की शिनाख्त ओसामा और जीशान के रूप में हुई है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि इन दोनों आतंकियों की ट्रेनिंग पाकिस्तान में हुई थी। इन आतंकियों के अंडरवर्ल्ड से भी संबंध बताए जा रहे हैं।

इस गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल क स्पेशल सीपी नीरज ठाकुर ने बताया कि आशंका है कि इस ग्रुप में 14-15 लोग शामिल हैं और यह भी हो सकता है कि उन्हें भी यहीं ट्रेनिंग मिली हो। ऐसा लगता है कि यह ऑपरेशन को बॉर्डर के आसपास से ही ऑपरेट किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस की तरफ से जानकारी दी गई है कि इन्होंने 2 टीमें बनाई थी। एक टीम को दाउद इब्राहिम का भाई अनीष इब्राहिम को-ऑर्डिनेट कर रहा था। इस काम था कि बॉर्डर से हथियार जुटाकर पूरे भारत में हथियार पहुंचाए। दूसरी टीम के पास हवाला के जरिए फंड जुटाने का काम था। 

जानकारी के अनुसार, इन आतंकियों की गिरफ्तारी के लिए मल्टी स्टेट ऑपरेशन चलाया गया था। पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेने वाले दोनों आतंकियों में एक का नाम ओसामा और दूसरे का जीशान कमर है। इसके अलावा पकड़े गए 4 अन्य आरोपियों का नाम मोहम्मद अबु बकर, जान मोहम्मद शेख, मोहम्मद आमिर जावेद और मूलचंद लाला है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये सभी देश में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए साजिश रच रहे थे। साथ ही कई नामचीन हस्तियों को निशाना बनाने वाले थे, और देश का माहौल बिगाड़ना चाहते थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पकड़े गए आतंकियों में से एक का काम आने वाले फेस्टिवल सीजन में IED प्लांट करना था। नवरात्रि और रामलीला के दौरान भीड़ भरे इलाके इनके निशाने पर थे। आतंकियों से भारी मात्रा में विस्फोटक, हथियार और हाई क्वालिटी पिस्टल बरामद किए गए हैं।

एक कथित ‘हिंदू विरोधी’ विज्ञापन के वायरल होने के बाद ट्विटर ने एक बार फिर #BoycottMyntra को ट्रेंड करते देखा।

व्यापार/वाणिज्य डेस्क चंडीगढ़:

@hindutvaoutloud नाम के एक इंस्टाग्राम पेज ने उन सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बारे में एक पोस्ट किया, जिन्होंने ‘हिंदू-विरोधी’ उत्पाद और विज्ञापन डाले हैं। स्लाइड की शुरुआत एक विज्ञापन से होती है जिसमें भगवान कृष्ण को मिंत्रा पर लंबी साड़ी के लिए ऑनलाइन खरीदारी करते देखा जा सकता है क्योंकि पृष्ठभूमि में ‘द्रौपदी चीरहरण’ होता है।

विज्ञापन से नाराज कई लोगों ने ट्विटर पर शॉपिंग वेबसाइट Myntra का बहिष्कार किया।

हालांकि, उन्होंने जो कुछ याद किया वह “www.scrolldroll.com” एक छोटे से फ़ॉन्ट में लिखा गया था।

इस विज्ञापन ने 2016 में विवाद खड़ा कर दिया जब लोगों ने मान लिया कि यह Myntra का एक विज्ञापन है। हालाँकि, यह स्क्रॉलड्रोल की एक पोस्ट थी, जो यह जानना चाहता था कि अगर देवता 21वीं सदी की तकनीक का उपयोग करते तो क्या होता।

उस समय, मिंत्रा ने भी एक ट्वीट कर पुष्टि की थी कि यह विज्ञापन उनके द्वारा प्रकाशित नहीं किया गया था। स्क्रॉलड्रोल ने पहले इस विज्ञापन की जिम्मेदारी ली थी

हालाँकि, विज्ञापन 2021 में एक बार फिर ट्विटर पर वायरल हो गया है, जो हिंदुओं को नाराज कर रहा है जो न केवल Myntra का बहिष्कार कर रहे हैं बल्कि Flipkart को अनइंस्टॉल भी कर रहे हैं।

क्यों झूठ बोलते हो साहब चरखे से आज़ादी आई थी

“मैं बहुत गरीब हूँ , मेरे पास मेरी भारत माँ को देने के लिए कुछ नहीं था सिवा मेरे प्राणों के, जिसे आज मैं दे रहा हूँ”….“खुदीरामबोस” ऐसे देश प्रेमी,स्वदेशी प्रेमी क्रांतिकारी, जिसने 18वर्ष 8 महीने 8 दिन की अल्पायु में शहादत दी, आज पुण्यतिथि पर भावपूर्ण स्मरण, “जय हिंद” “जय भारत” 8 जून, 1908 को उन्हें अदालत में पेश किया गया और 13 जून को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। 11 अगस्त, 1908 को उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया। जब जज ने फैसला पढ़कर सुनाया तो खुदीराम बोस मुस्कुरा दिए। जज को ऐसा लगा कि खुदीराम सजा को समझ नहीं पाए हैं, इसलिए मुस्कुरा रहे हैं। कन्फ्यूज होकर जज ने पूछा कि क्या तुम्हें सजा के बारे में पूरी बात समझ आ गई है। इस पर बोस ने दृढ़ता से जज को ऐसा जवाब दिया जिसे सुनकर जज भी स्तब्ध रह गया। उन्होंने कहा कि न सिर्फ उनको सिर्फ फैसला पूरी तरह समझ में आ गया है, बल्कि समय मिला तो वह जज को बम बनाना भी सिखा देंगे।

स्वतन्त्रता संग्राम/इतिहास, डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम – चंडीगढ़ :

आजादी की लड़ाई का इतिहास क्रांतिकारियों के त्याग और बलिदान के अनगिनत कारनामों से भरा पड़ा है। क्रांतिकारियों की सूची में ऐसा ही एक नाम है खुदीराम बोस का, जो शहादत के बाद इतने लोकप्रिय हो गए कि नौजवान एक खास किस्म की धोती पहनने लगे जिनकी किनारी पर ‘खुदीराम’ लिखा होता था।

11 अगस्त, आज ही के दि‍न खुदीराम बोस देश की आजादी के लि‍ए शहीद हुए थे। आइए, उनकी वीर गाथा के बारे में जानें और उन्‍हें याद करें। कुछ इतिहासकार उन्हें देश के लिए फांसी पर चढ़ने वाला सबसे कम उम्र का देशभक्त मानते हैं।

खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में त्रैलोक्यनाथ बोस के घर हुआ था। खुदीराम को आजादी हासिल करने की ऐसी लगन लगी कि 9वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर वे स्वदेशी आंदोलन में कूद पड़े। इसके बाद वे रिवॉल्यूशनरी पार्टी के सदस्य बने और ‘वंदेमातरम्’ लिखे पर्चे वितरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में चले आंदोलन में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया। उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के चलते 28 फरवरी 1906 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन वे कैद से भाग निकले। लगभग 2 महीने बाद अप्रैल में वे फिर से पकड़े गए। 16 मई 1906 को उन्हें रिहा कर दिया गया।

6 दिसंबर 1907 को खुदीराम ने नारायणगढ़ रेलवे स्टेशन पर बंगाल के गवर्नर की विशेष ट्रेन पर हमला किया, परंतु गवर्नर बच गया। सन् 1908 में खुदीराम ने दो अंग्रेज अधिकारियों वाट्सन और पैम्फायल्ट फुलर पर बम से हमला किया लेकिन वे भी बच निकले। खुदीराम बोस मुजफ्फरपुर के सेशन जज किंग्सफोर्ड से बेहद खफा थे जिसने बंगाल के कई देशभक्तों को कड़ी सजा दी थी।उन्होंने अपने साथी प्रफुल्लचंद चाकी के साथ मिलकर किंग्सफोर्ड को सबक सिखाने की ठानी। दोनों मुजफ्फरपुर आए और 30 अप्रैल 1908 को सेशन जज की गाड़ी पर बम फेंक दिया लेकिन उस गाड़ी में उस समय सेशन जज की जगह उसकी परिचित दो यूरोपीय महिलाएं कैनेडी और उसकी बेटी सवार थीं।

किंग्सफोर्ड के धोखे में दोनों महिलाएं मारी गईं जिसका खुदीराम और प्रफुल चंद चाकी को काफी अफसोस हुआ। अंग्रेज पुलिस उनके पीछे लगी और वैनी रेलवे स्टेशन पर उन्हें घेर लिया। अपने को पुलिस से घिरा देख प्रफुल चंद चाकी ने खुद को गोली से उड़ा लिया जबकि खुदीराम पकड़े गए। मुजफ्फरपुर जेल में 11 अगस्त 1908 को उन्हें फांसी पर लटका दिया गया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 19 साल थी।

देश के लिए शहादत देने के बाद खुदीराम इतने लोकप्रिय हो गए कि बंगाल के जुलाहे एक खास किस्म की धोती बुनने लगे। इतिहासवेत्ता शिरोल ने लिखा है- ‘बंगाल के राष्ट्रवादियों के लिए वह वीर शहीद और अनुकरणीय हो गया। विद्यार्थियों तथा अन्य लोगों ने शोक मनाया। कई दिन तक स्कूल बंद रहे और नौजवान ऐसी धोती पहनने लगे जिनकी किनारी पर खुदीराम लिखा होता था।’

भाजपा और कांग्रेस चाहे जितनी कोशिशें कर लें अरविंद केजरीवाल को बदनाम नहीं कर सकती: योगेश्वर शर्मा

  • योगेश्वर शर्मा ने कहा: राजनीति छोडक़र तीसरी लहर से निबटने का इंतजाम करना चाहिए
  • भाजपा और कांग्रेस देश को गुमराह करने के लिए माफी मांगे

पंचकूला,26 जून:

आम आदमी पार्टी का कहना है कि  केंद्र की भाजपा सरकार और जगह जगह चारों खाने चित्त हो रही कांग्रेस अरविंद केजरीवाल को बदनाम करने की लाख कोशिशें कर लें,सफल नहीं होंगी। पार्टी का कहना है कि दिल्ली के लोग जानते हैं कि केजरीवाल उनके लिए लड़ता है और उनकी खातिर इन मौका प्रस्त पार्टियों के नेताओं की बातें भी सुनता है। यही वजह है कि दिल्ली की जनता ने तीसरी बार भी उन्हें सत्ता सौंपी तथा भाजपा को विपक्ष में बैठने लायक और कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ा। आने वाले दिनों में यही हाल इन दोनों दलों का पंजाब मेें भी होने वाला है। इसी के चलते अब दोनों दल आम आदमी पार्टी व इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल को निशाना बना रहे हैं।  पार्टी का कहना है कि अब तो इस मामले के लिए बनाई गई कमेटी  के अहम सदस्य एवं एम्स के प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि अब तक फाइनल रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे यह कहना जल्दबाजी होगी कि दिल्ली ने दूसरी लहर के पीक के वक्त जरूरी ऑक्सीजन की मांग को चार गुना बढक़र बताया। उन्होंने कहा कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है, ऐसे में हमें जजमेंट का इंतजार करना चाहिए। ऐसे में अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाने वाले भाजपा एवं कांग्रेस के नेता जनता को गुमराह के करने के लिए देश से माफी मांगे।
 आज यहां जारी एक ब्यान में आप के उत्तरी हरियाणा के सचिव योगेश्वर शर्मा ने कहा कि भाजपा और कांग्रेसी नेताओं को शर्म आनी चाहिए कि वे उस अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगा रहे हैं जो अपने लोगों के लिए दिन रात एक करके काम करता है और उसने कोरोनाकाल में भी यही किया था। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में कोविड की दूसरी लहर जब अपने चरम पर थी तो यहां ऑक्सीजन की मांग में भी बेतहाशा वृद्धि हो गई थी। चाहे सोशल मीडिया देखें या टीवी चैनल हर जगह लोग अप्रैल और मई माह में ऑक्सीजन की मांग कर रहे थे। कई अस्पताल और यहां तक कि मरीजों के तीमारदार भी ऑक्सीजन की मांग को लेकर कोर्ट जा पहुंचे थे। उन्होंने कहा है कि अरविंद केजरीवाल ठीक ही तो कह रहे हैं कि उनका गुनाह यह है कि वह दिल्ली के  2 करोड़ लोगों की सांसों के लिए लड़े और वह भी उस समय जब  भाजपा और कांग्रेस के नेता चुनावी रैली कर रहे थे। तब भाजपा के दिल्ली के सांसद अपने घरों में छिपे बैठे थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ठीक ही तो दावा किया है कि जिस रिपोर्ट के आधार पर अरङ्क्षवद केजरीवाल को बदनाम किया जा रहा है, वह है ही नहीं। है तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दरअसल भाजपा का आईटी सैल अरङ्क्षवद केजरीवाल के पंजाब दौरे के बाद से ही बौखलाया हुआ है, क्योंकि पंजाब में उसका आधार खत्म हो चुका है और आप पंजाब के साथ साथ अब गुजरात में भी सफलता के परचम फैला रही है। पंजाब व गुजरात में भाजपा के लोग आप का दामन थाम रहे हैं। ऐसे में उसे व कांग्रेस को आने वाले विधानसभा चुनावों में अगर किसी से खतरा है तो वह अरङ्क्षवद केजरीवाल और उनकी पार्टी आप से है। उन्होंने कहा कि ये पार्टियां और उनके नेता उन लोगों को झूठा बताकर उनका अपमान कर रहे हैं जिन लोगों ने अपनों को खोया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश में अपने पोस्टर लगवाने के बजाये कोविड-19 की तीसरी लहर के खतरे से निपटने की तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए।  उन्होंने प्रधानमंत्री को सचेत किया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हैं, इसलिए यह आराम का वक्त नहीं है, बल्कि सरकार को अग्रिम प्रबंध करने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न हो कि जिस तरह केंद्र सरकार के दूसरी लहर से पहले के ढीले व्यवहार के कारण हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, वैसा ही तीसरी लहर के बाद हो। उन्होंने सरकार को वायरस के बदलते स्वरूप की तुरंत वैज्ञानिक खोज कर विशेषज्ञों की राय के अनुसार सभी इंतजाम करने को कहा। उन्होंने कहा कि अपनी नाकामियों का ठीकरा अरविंद केजरीवाल पर फोडऩे से काम नहीं चलेगा। काम करना होगा क्योंकि देश के लोग देख रहे हैं कि कौन काम कर रहा है और कौन ऐसी गंभीर स्थिति में भी सिर्फ राजनीति कर रहा है।

स्वतंत्र भारत के इतिहास का काला अध्याय ‘आपातकाल’

46 साल पहले भारत ने आपातकाल का अनुभव किया भारतीय इतिहास का काला अध्याय राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से निपटने के बजाय भारत पर इमरजेंसी ठोक देना और लोकतांत्रिक शक्तियों का दमन करना ज्यादा आसान लगा। ऐसा भी नहीं था कि 25 जून की रात अचानक से आपातकाल की घोषणा कर दी गई थी। इसके पीछे एक बड़ी रणनीति थी. देश की जनता पर आपातकाल थोपने का मकसद सत्ता में बने रहना का तो था ही इससे भी अधिक खतरनाक मंशा तत्कालीन हुकुमत की थी। हमें उस पक्ष पर भी  चर्चा करनी चाहिए, जिसके कारण देश के लोकतंत्र को एक परिवार ने बंदी बना लिया। दरअसल लोकतंत्र की हत्या करके ही जो चुनाव जीता हो उसे लोकतंत्र का भान कैसे रह जाएगा ? लोकतंत्र की उच्च मर्यादा की उम्मीद उनसे नहीं की सकती, जो जनमत की बजाय धनमत और शक्ति का दुरुपयोग करके सत्ता पर काबिज होने की चेष्टा करें।

सारिका तिवारी,(inputs by) पुरनूर – चंडीगढ़ 26 जून:

देश में आपातकाल की नींव इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले से पड़ गई थी जिसमें अदालत ने राजनारायण के पक्ष और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ अपना फैसला सुनाया था। अदालत के फैसले से पहले 12 जून 1975 की सुबह इंदिरा गांधी अपने असिस्टेंट से पूछती हैं। आज तो रायबरेली चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आना है। इस पर वहां मौजूद इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी कहते हैं, “आप बेफिक्र रहिए।” संजय का तर्क था कि इंदिरा की सांसदी को चुनौती देने वाले संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राजनारायण के वकील भूषण नहीं थे। जबकि इंदिरा के वकील एसी खरे ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि फैसला उनके ही पक्ष में आएगा। कांग्रेसी खेमा पूरी तरह से आश्वस्त था, लेकिन उस दिन जो हुआ वो इतिहास बन गया। जस्टिस जगमोहन सिन्हा ने इंदिरा के खिलाफ अपना फैसला सुना दिया। जज ने इंदिरा गांधी को चुनावों में धांधली करने का दोषी पाया और रायबरेली से सांसद के रूप में चुनाव को अवैध घोषित कर दिया। साथ ही इंदिरा के अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई। हाईकोर्ट से मिले इंदिरा को झटके के बाद कांग्रेसी खेमा स्तब्ध रह गया तो राज नारायण के समर्थक दोपहर में दिवाली मनाने लगे।

पार्टी की अस्थिरता को दरकिनार कर स्वयं का वर्चस्व की रक्षा हेतु उस समय की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को संविधान की धारा 352 के तहत राष्ट्र आपात काल घोषित करना पड़ा। कहीं नौकरशाही और सरकार के बीच का संघर्ष, कभी विधान पालिका और न्यायपालिका के बीच विवाद, केशवानंद भारती और गोरखनाथ केस इन विवादों के साक्ष्य हैं। इससे पहले के चुनाव देखें तो कांग्रेस लगातार आज ही की तरह अपने ही अंतर कलह की वजह से सीटे गवाती रही। कई हिस्सों में बटी कांग्रेस का कांग्रेस (आर) इंदिरा के हिस्से आया जब इंदिरा गांधी ने कम्युनिस्ट पार्टी से मिलकर सरकार बनाई पार्टी का यह हाल हो गया था कि सिंडिकेट के दिग्गज भी अपनी सीटें ना बचा पाए। इंदिरा गांधी के कट्टर विरोधी मोरारजी देसाई ने पार्टी छोड़ी और इंदिरा को कमजोर करने में जुट गए। दूसरी और नीलम संजीवा रेड्डी, कामराज, निजा लिंगप्पा पूरी तरह से इंदिरा विरोधी थे। निजालिंगप्पा ने इंदिरा को पार्टी तक से निकाल दिया था।

इमरजेंसी के जो बड़े कारण बने वह है महंगाई, इंदिरा की कई मनमानियां, विद्यार्थियों का असंतोष, जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में रेलवे की हड़ताल, जयप्रकाश नारायण का ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा।

सुब्रह्मण्यम स्वामी, ‘जिंदा या मुर्दा’

इमरजेंसी के दौरान इंदिरा ने बहुत मनमानियां की निरंकुश ढंग से अपने विरोधियों को कुचला, जॉर्ज फर्नांडिस तो कई साल जेल में ही रहे। उन्होंने तो चुनाव भी जेल से लड़ा सुब्रह्मण्यम स्वामी के ‘जिंदा या मुर्दा’ के वारंट जारी किए गए अखबारों पर अंकुश लगाया गया कि वह जनता की बात जनता तक ना पहुंचा पाएँ। लेकिन कुछ अखबारों ने पोस्ट खाली छोड़ कर सरकार का विरोध भी किया।

इस सब में संजय गांधी अपने मित्रों के साथ पूरी तरह से सक्रिय होकर उतरे मनमानीयों के लिए। कुछ नवनियुक्त पुलिस अधिकारी जिनमें किरण बेदी, गौतम कौल और बराड़ आदि भी शामिल थे, इन्होंने एक बार इन पर लाठीचार्ज भी किया जिसका खामियाजा इन्हे आपातकाल के हटने के बाद भी कई वर्षों तक भुगतना पड़ा। पड़ा। कई वर्षों तनख्वाह के बिना नौकरी की।

इमरजेंसी की मियाद खत्म होने संविधान में संशोधन किया गया संविधान की प्रस्तावना में सेक्यूलर शब्द शामिल किए गए सबसे बड़ी बात इस संशोधन में यह की गई के न्यायपालिका संसद द्वारा पारित किसि भी कानून को गलत नहीं ठहरा सकती।

आपातकाल की काली रात 19 महीने लंबी थी और इस लंबे वक्त तक देश का लोकतंत्र कोमा में रहा। जनता के अधिकार, लिखने बोलने की आजादी सब आपातकाल की जंजीरों में जकड़ी हुई थी। आपातकाल के दौरान इंदिरा के बेटे संजय गांधी की हनक थी। जबरन नसबंदी जैसे तानाशाही फैसलों ने जनता को परेशान कर दिया था। जनवरी के महीने में आपातकाल हटाने के फैसले के साथ-साथ राजराजनीतिक बंदियों को रिहा करने के आदेश दिए गए और आम चुनाव की घोषणा की गई। इंदिरा को लगने लगा था कि वो प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएंगी, लेकिन जनता ने कुछ और ही सोच रखा था। 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई। इंदिरा गांधी.. संजय गांधी समेत तमाम नेता हारे और हार गई तानाशाही…
यह थी 1975 की इमरजेंसी और उसके परिणाम

चिराग तले बगावत

लोजपा में बगावत की शुरुआत रविवार को ही हो गई थी। रविवार को ही खबरें आईं कि लोजपा के छह में से पांच सांसदों ने लोकसभा अध्‍यक्ष से मिलकर अपने नए नेता को चुन लिये जाने की सूचना दी है। दिवंगत नेता राम‍ विलास पासवान के छोटे भाई पशुपति कुमार पारस को लोजपा संसदीय दल का नया नेता चुना गया था। इसे लोकसभा अध्‍यक्ष ने भी मान्‍यता दे दी है। अब पार्टी पर कब्‍जे को लेकर बागी गुट ने कदम आगे बढ़ा दिए हैं। बागी गुट ने जल्‍द ही राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाए जाने की बात कही है। इसमें पार्टी के नए राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष का चुनाव किया जाएगा। ऐसी उम्‍मीद जताई जा रही है कि पशुपति कुमार पारस को ही नया राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष भी चुना जाता है। लोजपा के स्‍थापना काल के बाद 25 वर्षों से अधिक समय तक राम विलास पासवान खुद ही पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष रहे। उन्‍होंने खुद ही चिराग को नया राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनाने की घोषणा की थी।

सरिका तिवारी, नयी दिल्ली/ पटना/ चंडीगढ़ :

लोजपा संसदीय दल के नेता बने पशुपति कुमार पारस ने मंगलवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। इस बैठक में चिराग पासवान को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने की अनुशंसा कर दी। इसके तुरंत बाद चिराग पासवान ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में पांचों सांसदों (पशुपति कुमार पारस, प्रिंस राज, वीणा देवी, चंदन सिंह और महबूब अली कैसर) को लोजपा से हटाने की अनुशंसा कर दी।

लोजपा नेता राजू तिवारी ने इस संबंध में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आज राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई और इस बैठक में पांचों सांसदों को पार्टी से हटाए जाने का फैसला लिया गया। इससे पहले चिराग ने अपने अधिकारिक ट्वीटर हैंडल पर चाचा के नाम इस साल 29 मार्च को लिखी पांच पन्‍नों की एक भावुक चिट्ठी शेयर की। इसके साथ लिखे संक्षिप्‍त संदेश में वह अपने चाचा पशुपति कुमार पारस पर जमकर बरसे। चिराग ने लिखा-पार्टी मां समान है और मां के साथ धोखा नहीं करना चाहिए।

इस दौरान चिराग ने अपने चाचा पशुपति पारस को लिखी 29 मार्च 2021 की पुरानी चिट्ठी भी ट्विटर पर सार्वजनिक कर दी है। इस चिट्ठी में उन्होंने साफ लिखा है कि ‘2019 में रामचंद्र चाचा के निधन के बाद से ही आपमें बदलाव देखा और आज तक देखते आ रहा हूं। चाचा के निधन के बाद प्रिंस की जिम्मेदारी चाची ने मुझे दे दी और कहा कि आज से मैं ही प्रिंस के लिए पिता समान हूं। प्रिंस को आगे बढ़ाने के लिए उसको प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मैंने दी। सबलोग इस फैसले से खुश थे लेकिन मुझे तब पीड़ा हुई जब आप इस फैसले के विरोध में नाराज हो गए और आपने प्रिंस को मिली नई जिम्मेवारी के लिए उसे शुभकामना देना भी उचित नहीं समझा।’

गौरतलब है कि लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के छह लोकसभा सदस्यों में से पांच ने दल के मुखिया चिराग पासवान को संसद के निचले सदन में पार्टी के नेता के पद से हटाने के लिए हाथ मिला लिया है और उनकी जगह उनके चाचा पशुपति कुमार पारस को इस पद के लिए चुन लिया है।

रणनीतिकार ने चिराग को डुबोया
लोजपा सांसद चिराग पासवान को इस हश्र में लाने वाले उनके तथाकथित चुनावी रणनीतिकार हैं। पार्टी दायरे की चर्चाओं पर गौर करें तो लोजपा में अचानक प्रकट होकर दिन-रात चिराग के साथ साए के तौर पर रहने वाले इस शख्स की तूती ऐसी बोलती थी कि कोई इसके सामने कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर सकता। दल हो या परिवार, सबकी अनदेखी कर चिराग केवल इसकी ही बात सुनते रहे। बताया जाता है कि चिराग आंख मूंदकर इस पर भरोसा करते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि विधानसभा चुनाव में अकेले अपने दम चुनाव लड़ने की सलाह भी इसी शख्स ने दी थी। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भी चिराग से अगर कोई पार्टी नेता मिलना चाहता, अपनी बात कहना चाहता तो पहले इसी शख्स से अनुमति लेनी पड़ती। इसी शख्स से दल के छोटे-बड़े सभी नेता आजिज आ चुके थे। पांच सांसदों की बगावत में इस शख्स का भी बड़ा योगदान माना जाता है।  

पहले चुनाव को छोड़ बाकी सबमें पिछड़ती रही लोजपा
गठन के बाद लोक जनशक्ति पार्टी अपने पहले चुनाव को छोड़कर कभी भी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। खासकर बिहार विधानसभा चुनाव में वह दो बार अकेले और बाकी समय कई दलों के साथ चुनाव लड़ चुकी है पर उसे अपने कोर वोटर से अधिक मत हासिल नहीं हो सके हैं। लोजपा की स्थापना 2000 में रामविलास पासवान (अब दिवंगत) ने की थी। पार्टी ने पहला चुनाव 2004 के लोकसभा का लड़ा। 12 राज्यों में 40 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली लोजपा को बिहार की मात्र चार सीटों पर जीत हासिल हुई। लोजपा को 10.02 फीसदी ही मत हासिल हुए। साल 2005 के फरवरी में हुए चुनाव में पार्टी ने पहली बार विधानसभा के चुनावी मैदान में ताल ठोकी। अकेले अपने दम पर चुनावी मैदान में 178 सीटों पर उतरी लोजपा को 29 सीटें हासिल हुईं। यही नहीं पार्टी के खाते में 12.62 फीसदी वोट भी आए जो अब तक का सबसे अधिक है। तब रामविलास पासवान बंगले (पार्टी का चुनाव चिह्न) की चाभी को सत्ता की चाभी से जोड़कर दंभ भरते रहे, लेकिन संयोग ऐसा रहा कि उस समय किसी की भी सरकार नहीं बन सकी। 

बागी गुट के लिए आसान है रास्‍ता

उम्‍मीद है कि पशुपति कुमार पारस के नेतृत्‍व में बागी गुट नए राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष के चुनाव में आसानी से बाजी मार लेगा। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान अपनी नीति को लेकर चिराग पार्टी के ज्‍यादातर नेताओं से नाराजगी मोल ले चुके हैं। उनकी पार्टी का बिहार में अब न तो एक भी विधायक है और न हीं विधान पार्षद। पार्टी के पास बिहार में केवल छह सांसद ही बचे हैं, जिनमें एक चिराग बिल्‍कुल अकेले खड़े दिख रहे हैं। हालांकि आसार इस बात के भी हैं कि पार्टी दो गुटों में बंट जाए।

कल पटना पहुंच रहे हैं पारस

पारस ने बताया कि बुधवार को वे पटना पहुंच रहे हैं और यहीं पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी करेंगे। पार्टी के संसदीय दल के नेता पद और अब राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से बेदखल किए जाने के बाद चिराग पासवान ने भी मंगलवार की शाम दिल्ली स्थित 12 जनपथ सरकारी आवास पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर आगे की रणनीति पर लंबी मंत्रणा की।

गंगा जयंती : 18 मई

जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती (वैशाख शुक्ल सप्तमी) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन ‘गंगा दशहरा’ (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाने से सभी पाप नष्ट हो जाते है और मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होता है।

गंगा जयंती हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है. वैशाख शुक्ल सप्तमी के पावन दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई इस कारण इस पवित्र तिथि को गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष 2021 में यह जयन्ती 18 मई को मनाई जाएगी.

गंगा जयंती के शुभ अवसर पर गंगा जी में स्नान करने से सात्त्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त होता है. वैशाख शुक्ल सप्तमी का दिन संपूर्ण भारत में श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया जाता है यह तिथि पवित्र नदी गंगा के पृथ्वी पर आने का पर्व है गंगा जयंती. स्कन्दपुराण, वाल्मीकि रामायण आदि ग्रंथों में गंगा जन्म की कथा वर्णित है.

भारत की अनेक धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में दर्शाया गया है. अनेक पवित्र तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं. गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र नदी के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है. लोग गंगा के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा रखते हैं तथा मृत्यु पश्चात गंगा में अपनी राख विसर्जित करना मोक्ष प्राप्ति के लिये आवश्यक समझते हैं. लोग गंगा घाटों पर पूजा अर्चना करते हैं और ध्यान लगाते हैं.

गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में उसका होना आवश्यक माना गया है. गंगाजल को अमृत समान माना गया है. अनेक पर्वों और उत्सवों का गंगा से सीधा संबंध है मकर संक्राति, कुंभ और गंगा दशहरा के समय गंगा में स्नान, दान एवं दर्शन करना महत्त्वपूर्ण समझा माना गया है. गंगा पर अनेक प्रसिद्ध मेलों का आयोजन किया जाता है. गंगा तीर्थ स्थल सम्पूर्ण भारत में सांस्कृतिक एकता स्थापित करता है गंगा जी के अनेक भक्ति ग्रंथ लिखे गए हैं जिनमें श्रीगंगासहस्रनामस्तोत्रम एवं गंगा आरती बहुत लोकप्रिय हैं.

गंगा जन्म कथा

गंगा नदी हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और अनेक धर्म ग्रंथों में गंगा के महत्व का वर्णन प्राप्त होता है गंगा नदी के साथ अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं जो गंगा जी के संपूर्ण अर्थ को परिभाषित करने में सहायक है.  इसमें एक कथा अनुसार गंगा का जन्म भगवान विष्णु के पैर के पसीनों की बूँदों से हुआ गंगा के जन्म की कथाओं में अतिरिक्त अन्य कथाएँ भी हैं. जिसके अनुसार गंगा का जन्म ब्रह्मदेव के कमंडल से हुआ.

एक मान्यता है कि वामन रूप में राक्षस बलि से संसार को मुक्त कराने के बाद ब्रह्मदेव ने भगवान विष्णु के चरण धोए और इस जल को अपने कमंडल में भर लिया और एक अन्य कथा अनुसार जब भगवान शिव ने नारद मुनि, ब्रह्मदेव तथा भगवान विष्णु के समक्ष गाना गाया तो इस संगीत के प्रभाव से भगवान विष्णु का पसीना बहकर निकलने लगा जिसे ब्रह्मा जी ने उसे अपने कमंडल में भर लिया और इसी कमंडल के जल से गंगा का जन्म हुआ था.

गंगा जयंती महत्व

शास्त्रों के अनुसार बैशाख मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ही गंगा स्वर्ग लोक से शिव शंकर की जटाओं में पहुंची थी इसलिए इस दिन को गंगा जयंती और गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है.  जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती (वैशाख शुक्ल सप्तमी) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन ‘गंगा दशहरा’ (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है इस दिन मां गंगा का पूजन किया जाता है.  गंगा जयंती के दिन गंगा पूजन एवं स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का क्षय होता है. मान्यता है कि इस दिन गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है. विधिविधान से गंगा पूजन करना अमोघ फलदायक होता है.

पुराणों के अनुसा गंगा विष्णु के अँगूठे से निकली हैं, जिसका पृथ्वी पर अवतरण भगीरथ के प्रयास से कपिल मुनि के शाप द्वारा भस्मीकृत हुए राजा सगर के 60,000 पुत्रों की अस्थियों का उद्धार  करने के लिए हुआ था  तब उनके उद्धार के लिए राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या कर माता गंगा को प्रसन्न किया और धरती पर लेकर आए। गंगा के स्पर्श से ही सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार संभव हो सका  इसी कारण गंगा का दूसरा नाम भागीरथी पड़ा.

रेलगाड़ियां बन्द करने की बजाय फेरे कम करने का अग्रिम सुझाव

पिछले महीने तक लग रहा था कि महामारी से तबाह हुई भारत की अर्थव्यवस्था संभल रही है। इस रिकवरी को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की विकास दर 10 से 13 प्रतिशत के बीच बढ़ने की भविष्वाणी की थी। लेकिन अप्रैल में कोरोना वायरस की दूसरी भयावह लहर के कारण न केवल इस रिकवरी पर ब्रेक लगा है बल्कि पिछले छह महीने में हुए उछाल पर पानी फिरता नज़र आता है। रेटिंग एजेंसियों ने अपनी भविष्यवाणी में बदलाव करते हुए भारत की विकास दर को दो प्रतिशत घटा दिया है। अब जबकि राज्य सरकारें लगभग रोज़ नए प्रतिबंधों की घोषणाएं कर रही हैं तो अर्थव्यवस्था के विकास में बाधाएं आना स्वाभाविक है। बेरोज़गारी बढ़ रही है, महंगाई के बढ़ने के पूरे संकेत मिल रहे हैं और मज़दूरों का बड़े शहरों से पलायन भी शुरू हो चुका है।

करणीदान सिंह, श्रीगंगानगर:

भारत एक बार फिर कोरोना संक्रमण की गिरफ़्त में आ गया। कोरोना संक्रमण की यह दूसरी लहर बहुत ज़्यादा ख़तरनाक साबित हो रही है और इसने भारत के शहरों को बुरी तरह जकड़ लिया है। कोरोना की इस दूसरी लहर में मध्य अप्रैल तक हर दिन संक्रमण के लगभग एक लाख मामले आने लगे। रविवार को भारत में कोरोना संक्रमण के 2,70,000 केस दर्ज किए गए थे और 1600 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी. एक दिन में यह संक्रमण और मौतों का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था।

ऐसे में रेल परिवहन पर बड़ा असर पड़ रहा है। प्रवासी श्रमिकों की घर वापीसी ने यह मुश्किलें और भी बढ़ा दी है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए रेलवे ने कई रेलगाड़ियों की आवाजाही बंद करने के सुझाव/ निर्देश दिये हैं।

कोरोना की दूसरी लहर का रेल यात्रीभार पर काफी असर महसूस किया जा रहा हैं। जेडआरयूसीसी सदस्य भीम शर्मा ने रेलवे अधिकारियों को अग्रिम सुझाव भेजा हैं कि किसी भी ट्रेन को पूर्णतः बंद करने की बजाय उसके फेरों में कमी करके संचालन जारी रखा जाना चाहिये। अगर किसी दैनिक ट्रैन का यात्रीभार कम आंका जा रहा हैं तो उसे त्रि-साप्ताहिक या द्वि साप्ताहिक के रूप में चलाया जाना चाहिये। किसी भी ट्रेन का संचालन पूरी तरह से बन्द करना उचित नही होगा।

भूराबाल साफ करते करते, आया ब्राह्मणों कि शरण में यादव परिवार

‘भूराबाल साफ करो’ ऐसा नारा है जिस पर तीन दशकों के बाद भी चर्चा जारी है। बिहार से निकले इस नारे ने देश का ध्यान अपनी ओर खूब खींचा। दिलचस्प तो ये है कि जिस शख्स पर इस नारे को देने का आरोप लगा उसने इसे कभी माना नहीं। सनद रहे कि ‘भूराबाल साफ करो’ से मतलब था सवर्ण जातियों को खत्म करो. भूराबाल शब्द का भू भूमिहार से आया था, रा राजपूत से, बा का मतलब ब्राह्मण था और ल का अर्थ था लाला यानि कायस्थ।

पटना/नयी दिल्ली:

चारा घोटाला के चार मामलों में पिछले कई सालों से जेल की सजा काट रहे बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का पूरा परिवार भगवान की शरण में है। उसकी जमानत याचिका पर शनिवार (अप्रैल 17, 2021) को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई भी होनी है। उससे पहले उसके बेटे और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और वासुकीनाथ धाम में प्रार्थना की। तेज प्रताप नवरात्र कर रहे हैं। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल बतौर अधिवक्ता लालू की तरफ से दलीलें पेश करेंगे।

CBI लालू यादव को जमानत देने के विरोध में है और वो भी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। उच्‍च न्‍यायालय में जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में सूचीबद्ध इस मामले में शुक्रवार को ही सुनवाई होनी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए अदालत का आज सैनिटाइजेशन किया जाना है, इसीलिए इसे 1 दिन आगे बढ़ा दिया गया। इधर तेजस्वी यादव मंदिर-मंदिर घूम कर अपने पिता के लिए प्रार्थनाएँ कर रहे हैं।

इसी दौरान उन्होंने कामाख्या मंदिर में भी अपने पिता के लिए पूजा-अर्चना कराई। खास बात ये है कि इसके लिए उन्हें उन्हीं ब्राह्मणों की ज़रूरत पड़ी, जिन्हें उनके पिता भला-बुरा कहते थे। सितम्बर 2015 में बिहार विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व-मुख्यमंत्री ने इसे अगड़ी बनाम पिछड़ी जाति का जंग करार दिया था। उसने इसे महाभारत की लड़ाई बताते हुए यादवों को होश में रह कर एकता बनाए रखने की सलाह दी थी।

लालू यादव ने जोर देते हुए कहा था कि यादवों को खास कर के ब्राह्मणों के खिलाफ एकजुट रहने की ज़रूरत है। साथ ही उसने RSS को भी ब्राह्मणों की टीम करार दिया था। उसने अपने परिवार के पारंपरिक गढ़ यादव बहुल राघोपुर में ये बातें कही थीं, जो वैशाली जिले में पड़ता है। इस रैली में मंच पर मौजूद छोटू छलिया नामक गायक ने ‘सवर्ण बनाम पिछड़े’ के कई गाने भी गए थे। लालकृष्ण आडवाणी का रथ रोकने की बात की गई।

लालू ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘राघोपुर मेरी जगह है। गंगा किनारे इस पवित्र स्थान से ही मैंने कैंपेन की शुरुआत की है। मैं यदुवंशियों की रखवाली करना चाहता हूं क्योंकि बाहरी ताकतों से खतरा है। लालू ने कहा, ‘यादव सो जाए तो पुआल, जाग जाए को शेर। अब जाग जाओ क्योंकि यह महाभारत है।’

ध्यान देने वाली बात ये है कि उस दौरान जिन चुनावी रैलियों में लालू यादव बार-बार मोकामा के जिस विधायक अनंत सिंह को गिरफ्तार करवाने का क्रेडिट लेकर वाहवाही लूटता था, वही अनंत सिंह आज राजद में हैं और पार्टी ने उन्हें कई जिम्मेदारियाँ भी दी थीं। अब लालू यादव जेल में है। CBI का तर्क है कि 7 साल की आधी सज़ा पूरी होने में अभी 3 साल बाकी है, ऐसे में उसे जमानत नहीं दी जा सकती है।

कुछ दिन पहले लालू यादव की बेटी रोहिणी सिंह ने भी लिखा था, “रमज़ान का पाक महीना शुरू हो रहा है! इस साल हमने भी फैसला किया है कि पूरे महीने अपने पापा के सेहतयाबी और सलामती के लिए रोज़े रखूँगी! पापा की हालत में सुधार हो और जल्दी न्याय मिल सके, इसकी भी दुआ करूँगी! साथ ही मुल्क में अमन चैन हो, इसलिए ईश्वर/अल्लाह से कामना करूँगी।” इस पर लोगों ने उनकी क्लास भी लगाई थी।