कुलदीप बिश्नोई के बेटे को BJP ने दिया टिकट, उपचुनाव के लिए घोषित किए 3 उम्मीदवारों के नाम

भाजपा ने तेलंगाना की मुनुगोडे विधानसभा सीट से कोमातिरेड्डी राजगोपाल रेड्डी को टिकट दिया है। वहीं, उत्तर प्रदेश की गोला गोरकनाथ विधानसभा सीट से अमन गिरी को मैदान में उतारा है। साथ ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले कुलदीप बिश्नोई के बेटे को हरियाणा की आदमपुर सीट से टिकट दिया है। मालूम हो कि यह उपचुनाव हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के छोटे बेटे बिश्नोई के लिए काफी मायने रखता है, क्योंकि यह सीट पिछले 5 दशकों से उनके परिवार का गढ़ रही है।

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  • कुलदीप बिश्नोई ने इस्तीफा देने के बाद आदमपुर सीट खाली हो गई थी.
  • यूपी के गोला गाकरननाथ सीट से भाजपा ने अम​न गिरि को उतारा
  • हरियाणा की आदमपुर सीट से कुलदीप बिश्नोई के बेटे को चुना
  • तेलंगाना की मुनुगोडे़ सीट से कोमातिरेड्डी रोजगोपाल रेड्डी

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़ :  

हरियाणा में हिसार के आदमपुर उपचुनाव के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुएकुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई को पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि कुलदीप बिश्नोई ने इस्तीफा देने के बाद आदमपुर सीट खाली हो गई थी।

जानकारी के अनुसार, भाजपा ने आदमपुर के अलावा, अन्य राज्यों में उपचुनाव के लिए तीन सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। अहम बात यह है कि इस सीट से बीते चुनाव में कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस की तरफ से लड़े थे। उन्होंने दिवंगत टिकटॉक गर्ल सोनाली फोगाट को हराया था। सोनाली की हाल ही में गोवा में हत्या कर दी गई थी। हाल ही में कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा जनता पार्टी का दामन थामा था और अब वह अपने बेटे को टिकट दिलाने में कामयाब रहे हैं। 1968 से लेकर 1982 तक भजन लाल आदमपुर सीट से विधायक रहे हैं। उनके अलावा उनकी पत्नी जसमा देवी भी यहां से चुनाव लड़ चुकी हैं।  कुलदीप बिश्नोई और उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई भी यहां से चुनकर विधानसभा तक पहुंच चुके हैं. अब भव्य बिश्नोई चुनाव लड़ेंगे।

पंचकूला में BJP की बैठक में शामिल हुए कुलदीप बिश्नोई, भाजपा से टिकट मिलने को लेकर कही बड़ी बात - kuldeep bishnoi opens up on getting bjp ticket in adampur byelection

वहीं, आम आदमी पार्टी (आआपा) ने आदमपुर सीट पर अगले महीने होने वाले उपचुनाव में सत्येंद्र सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। भाजपा में रह चुके सिंह पिछले महीने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में हरियाणा के हिसार में आप में शामिल हो गए थे। मालूम हो कि यह उपचुनाव हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के छोटे बेटे बिश्नोई के लिए काफी मायने रखता है, क्योंकि यह सीट पिछले 5 दशकों से उनके परिवार का गढ़ रही है।

भाजपा ने लखीमपुर खीरी की गोला गोकर्णनाथ सीट से पार्टी के दिवंगत विधायक अरविंद गिरी के बेटे अमन गिरी को मैदान में उतारा है। पिछले दिनों अरविंद गिरी के निधन की वजह से ही यह सीट खाली हुई थी। इस सीट पर पिछले चुनाव में अरविंद गिरी को टक्‍कर देने वाले विनय तिवारी को समाजवादी पार्टी ने दोबारा मौका दिया है।

2012 में परिसीमन के बाद बनी 139 गोला गोकर्णनाथ विधानसभा सीट पर पहली बार हुए चुनाव में सपा की ओर से विनय तिवारी ने जीत हासिल की थी। विनय 2000 में खुद और 2006 में पत्नी रेखा तिवारी को नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ा चुके हैं, लेकिन हार हाथ लगी। इस साल सम्‍पन्‍न हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर बीजेपी के अरविंद गिरि ने विनय तिवारी को 29,294 वोटों के अंतर से हराया था। 

तेलंगाना की मुनुगोड़े विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होना है। बीजेपी ने यहां से कोमातिरेड्डी राज गोपाल रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, राज्य की सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में कुसुकुंतला प्रभाकर रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की विज्ञप्ति के मुताबिक, मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने सर्वे रिपोर्ट, कार्यकर्ताओं के साथ लगाव और क्षेत्र में जमीनी पकड़ के आधार पर रेड्डी को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है।

कांग्रेस विधायक कोमातिरेड्डी राज गोपाल रेड्डी के 2 अगस्त को पद से इस्तीफा देने के बाद मुनुगोड़े में उपचुनाव जरूरी हो गया था। कोमातिरेड्डी भाजपा में शामिल हो गए थे और अब वह भाजपा के उम्मीदवार के रूप में ही चुनाव लड़ने जा रहे हैं। कांग्रेस ने उपचुनाव में पलवई सरवंती को मैदान में उतारने का फैसला किया है। बता दें कि सभी 7 सीटों पर 3 नवंबर को मतदान होना है और नतीजे 6 नवंबर को आएंगे।

पीएफआई और RSS बराबर, इसपर भी लगाओ बैन : कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल

                        उर्दू अखबार ‘इंकलाब’ ने एक जुलाई 2018 को रिपोर्ट छापी थी जिसमें बताया गया था कि राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ मुलाकात के दौरान कहा था कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है इस रिपोर्ट को पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा खारिज करने पर उसी अखबार में कांग्रेस के अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रमुख नदीम जावेद का इंटरव्यू छपा है, जिसमें कांग्रेस नेता ने एक तरह से यह पुष्टि की है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी बताया था। साथ ही कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह भी 2018 में RSS के खिलाफ विवादित बयान दे चुके हैं। झाबुआ में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अभी तक जितने भी हिंदू आतंकी सामने आए हैं, सब RSS से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा था कि संघ के खिलाफ जांच की जाए और फिर कार्रवाई होनी चाहिए। आज कॉंग्रेस की सनातन धर्मी लोगों के प्रति नफरत फिर सामने आई जब केरल से कांग्रेस सांसद और लोकसभा में मुख्य सचेतक कोडिकुन्निल सुरेश आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है और कहा है कि पीएफआई पर बैन लगाना कोई उपाय नहीं है।  

  • भारत सरकार ने पीएफआई को पांच साल के लिए बैन कर दिया
  • पीएफआई पर बैन को लेकर कांग्रेस सांसद ने उठाया सवाल
  • कांग्रेस सांसद सुरेश ने कहा कि आरएसएस पर भी बैन लगना चाहिए

राजविरेन्द्र वसिष्ठ, डेमोक्रेटिक फ्रंट चंडीगढ़/ नयी दिल्ली

            समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मल्लपुरम में कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल ने कहा. “हम आरएसएस पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग करते हैं।  पीएफआई पर बैन कोई उपाय नहीं है। आरएसएस भी पूरे देश में हिंदू साम्प्रदायिकता फैला रहा है। आरएसएस और पीएफआई दोनों समान हैं, इसलिए सरकार को दोनों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। केवल पीएफआई पर ही बैन क्यों?”

            गौरतलब है कि पीएफआई के अलावा, आतंकवाद रोधी कानून ‘यूएपीए’ के तहत ‘रिहैब इंडिया फाउंडेशन’ (आरआईएफ), ‘कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया’ (सीएफ), ‘ऑल इंडिया इमाम काउंसिल’ (एआईआईसी), ‘नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन’ (एनसीएचआरओ), ‘नेशनल विमेंस फ्रंट’, ‘जूनियर फ्रंट’, ‘एम्पावर इंडिया फाउंडेशन’ और ‘रिहैब फाउंडेशन’(केरल) को भी प्रतिबंधित किया गया है।

            कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह भी 2018 में RSS के खिलाफ विवादित बयान दे चुके हैं। झाबुआ में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अभी तक जितने भी हिंदू आतंकी सामने आए हैं, सब RSS से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा था कि संघ के खिलाफ जांच की जाए और फिर कार्रवाई होनी चाहिए।


            PFI पर बैन लगने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री गिरिराज सिंह ने ट्वीट किया है। सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा- बाय बाय PFI। वहीं असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा- मैं भारत सरकार की ओर से PFI पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का स्वागत करता हूं। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ है कि भारत के खिलाफ विभाजनकारी या विघटनकारी डिजाइन से सख्ती से निपटा जाएगा।

           12 सितंबर को कांग्रेस ने अपने ट्विटर अकाउंट से खाकी की एक निक्कर की तस्वीर शेयर की। इसमें लिखा- देश को नफरत से मुक्त कराने में 145 दिन बाकी हैं। हालांकि, संघ ने भी इसका तुरंत विरोध किया और संगठन के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने कहा था कि इनके बाप-दादा ने संघ का बहुत तिरस्कार किया, लेकिन संघ रुका नहीं। 

           भारत में आजादी के बाद 3 बार बैन लग चुका है। पहली बार 1948 में गांधी जी की हत्या के बाद बैन लगा था। यह प्रतिबंध करीब 2 सालों तक लगा रहा। संघ पर दूसरा प्रतिबंध 1975 में लागू आंतरिक आपातकाल के समय लगा। आपातकाल खत्म होने के बाद बैन हटा लिया गया।

वहीं तीसरी बार RSS पर 1992 में बाबरी विध्वंस के वक्त बैन लगाया गया। यह बैन करीब 6 महीने के लिए लगाया गया था।

           RSS की स्थापना साल 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ में सर संघचालक सबसे प्रमुख होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक करोड़ से ज्यादा प्रशिक्षित सदस्य हैं। संघ परिवार में 80 से ज्यादा समविचारी या आनुषांगिक संगठन हैं। दुनिया के करीब 40 देशों में संघ सक्रिय है।

           मौजूदा समय में संघ की 56 हजार 569 दैनिक शाखाएं लगती हैं. करीब 13 हजार 847 साप्ताहिक मंडली और 9 हजार मासिक शाखाएं भी हैं। संघ में सर कार्यवाह पद के लिए चुनाव होता है। संचालन की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है।

वहीं PFI के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को लेकर SDPI  ने कहा है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों को गलत तरीके से इस्तेमाल कर रही है और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है।  

एक तरफ जहां पीएफआई के खिलाफ इस कार्रवाई पर संगठन से सहानुभूति रखने वाला पक्ष केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहा है तो दूसरी ओर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने इस कदम का स्वागत किया है।  PFI पर बैन को लेकर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “देश गृह मंत्री अमित शाह के फैसले की सराहना कर रहा है, हम उनका धन्यवाद करते हैं और इस निर्णय का स्वागत करते हैं इसका विरोध करने वालों भारत स्वीकार नहीं करेगा और सख्त जवाब देगा।”

                पीएफआई को लेकर सांप्रदायिक हिंसा के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में संभावनाएं है कि बैन जैसी बड़ी कार्रवाई के बाद पीएफआई के कार्यकर्ता सामाजिक माहौल खराब करने की कोशिश कर सकते हैं जिसके चलते पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की गई है. दिल्ली से लेकर तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में सुरक्षा एजेंसियां चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं।  

                आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए छापेमारी की थी जिसमें संगठन के खिलाफ अहम सबूत मिले थे और विदेशी फंडिंग तक की बातें सामने आईं थीं। इसके चलते मंगलवार देर रात मोदी सरकार ने इस संगठन को बैन करने का ऐलान कर दिया जो कि संगठन के लिए एक बड़ा झटका है।

एक नए नेशनल क्रिकेट बोर्ड ‘इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट’ की शुरुआत हैदराबाद में हुई

  • पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान पद्मश्री दिलीप वेंगसरकर ने स्कूली क्रिकेटरों के लिए बनी,’इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट’ की विधिवत घोषणा की है

डेमोक्रेटिक फ्रंट संवाददाता, हैदराबाद :

            एक नए नेशनल क्रिकेट बोर्ड ‘इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट’ (ISBC )की शुरुआत की गई।आईएसबीसी एक गैर-लाभकारी संगठन है,जोकि पूरे भारत में युवा क्रिकेट प्रतिभाओं की तलाश और प्रशिक्षित करेगी,खास करके ग्रामीण इलाकों में छुपी और होनहार प्रतिभाओं को नया भविष्य और मौका देगी। जिसकी घोषणा के लिए हैदराबाद के होटल ताज कृष्णा में सोमवार १२ सितंबर २०२२ को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था। जिसकी घोषणा और बोर्ड की जानकारी भारतीय क्रिकेट के दिग्गज, पूर्व कप्तान,मुख्य चयनकर्ता तथा इस बोर्ड के मुख्य सलाहकार पदमश्री दिलीप वेंगसरकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर बोर्ड के फाउंडर व सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका,अध्यक्ष अंकेश राठौर, सेक्रेटरी पदम राज पारख तथा बोर्ड के सभी पदाधिकारी व सदस्यों ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और कार्यक्रम को सफल बनाया।

             इस अवसर पर बोर्ड के फाउंडर व सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका ने कहा,” आईएसबीसी ने स्कूली क्रिकेटरों को तैयार करने में प्रवेश किया है।2011 में तेलंगाना के ग्रामीण क्रिकेटरों के लिए क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ तेलंगाना (CAT) द्वारा ‘तेलंगाना स्कूल प्रीमियर लीग'(TSPL) 5120 स्कूली क्रिकेटरों के साथ एक बड़ी सफलता थी ,जिसके तहत तेलंगाना राज्य के 31 जिलों ने टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और 550 मैच हुए। जिसमें ग्रामीण कुछ असाधारण क्रिकेट प्रतिभाओं को देखा और उनको विकसित करने के लिए ‘इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट” का आज शुरुवात की है। “

                   पूर्व क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर ने इस अवसर बोर्ड के लोगो का धन्यवाद किया और कहा,” यह एक अच्छी पहल है।इससे हमारे युवा पीढ़ी के बच्चों को एक अच्छा अवसर व प्लेटफार्म मिलेगा। अच्छे व टैलेंट लोगों को सही दिशा मिलेगी,खासकर के जो ग्रामीण इलाकों में छुपी और वंचित प्रतिभाएं है,उनको सुनहरा मौका मिलेगा।”

         अध्यक्ष अंकेश राठौर ने कहा,“भारत को स्कूली क्रिकेटरों को तैयार करने के लिए एक संगठित ढांचे की जरूरत थी,जो कि आईएसबीसी पूरा करेगा।”

         सेक्रेटरी पदम राज पारख ने कहा,” हमें 19 देशों का एक स्कूली समूह बनाकर खुशी हो रही है, जिसके तहत हम 2023 के अंततक में “स्कूल वर्ल्ड कप” आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।”

          आईएसबीसी 2023/24 के लिए जुलाई/अगस्त के महीने से क्रिकेट गतिविधियां शुरू करेगा।के बाद दिसंबर 2022 में अनुसूची और भागीदारी की घोषणा की जाएगी। आईएसटीएल (ISTL )के तहत शैक्षिक छात्रवृत्तियां होंगी,भारत और विदेश में आईसीसी स्तर की अकादमियों में विशेषज्ञ क्रिकेट प्रशिक्षण शुरू करेगा।इन सदस्यों को सर्वसम्मति से आईएसबीसी के लिए चुना गया,जोकि 3 साल की अवधि के लिए है।

अध्यक्ष अंकेश राठौर (राजस्थान), उपाध्यक्ष संध्या अग्रवाल (मध्य प्रदेश),वाई सुदर्शन बाबू (आंध्र प्रदेश),संग्राम लोंकर (महाराष्ट्र),सचिव पदम राज पारख (राजस्थान),संयुक्त सचिव मोहम्मद युसूफ (तमिलनाडु),डॉ. एस सेंथिल कुमार (तमिलनाडु),कोषाध्यक्ष डी. श्रीनिवास रेड्डी (आंध्र प्रदेश),कार्यकारी समिति जयेश गांधी (महाराष्ट्र),वर्षा शर्मा (मध्य प्रदेश),टी श्रीनिवास रेड्डी (आंध्र प्रदेश), सीएच विजय कुमार (आंध्र प्रदेश),अमित बोकाडिया (राजस्थान),अध्यक्ष :- अभिषेक आवला (तेलंगाना),,संस्थापक-सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका (तेलंगाना), प्रमुख संरक्षक भाजपा राज्यसभा सांसद डॉ के लक्ष्मण, संरक्षक जैतारण से भाजपा विधायक श्री अविनाश जी गेहलोत इत्यादि है।

Sanjay

पहले आज़ाद अब G-23 ग्रुप के नेताओं का इस्तीफा भी शुरू हो गया

कांग्रेस के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद ने आज खुलकर पार्टी छोड़ने पर बात की और उसमें सुधार को लेकर सुझाव भी दिए। आजाद ने कहा कि ‘बीमार’ कांग्रेस को दुआ नहीं, दवा की जरूरत है, लेकिन उसका इलाज ‘कंपाउंडर’ कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले होने के कांग्रेस के आरोप पर भी उन्होंने पलटवार किया और राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा कि जो संसद में भाषण देने के बाद प्रधानमंत्री से गले मिले, वह मोदी के साथ मिले या नहीं? उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की नींव कमजोर हो गई है और वह कभी भी बिखर सकती है। आजाद ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेतृत्व आंतरिक चुनाव के नाम पर धोखा दे रहा है।  शुक्रवार को गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफा देते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा था।आजाद ने 5 पन्नों की चिट्ठी में लिखा- राहुल गांधी ने पार्टी में एंट्री के साथ ही सलाह के मैकेनिज्म को तबाह कर दिया। खासतौर पर जनवरी 2013 में उनके उपाध्यक्ष बनने के बाद तो पार्टी में यह सिस्टम पूरी तरह बंद हो गया।

सीनियर नेता गुलाम नबी के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब G-23 ग्रुप के नेताओं का इस्तीफा भी शुरू
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के इस्‍तीफे के बाद पार्टी में मचा घमासान
  • आजाद के समर्थन में जम्‍मू कश्‍मीर के 5 पूर्व कांग्रेस विधायकों ने पार्टी से द‍िया इस्तीफा
  • जीएम सरूरी, हाजी अब्दुल रशीद, मोहम्मद अकरम, अमीन भट, गुलजार अहमद वानी ने छोड़ा हाथ

सारिका तिवारी, राजनैतिक विश्लेषक, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़ – 29 अगस्त :

सीनियर नेता गुलाम नबी के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब G-23 ग्रुप के नेताओं का इस्तीफा भी शुरू हो गया है। तेलंगाना के कद्दावर नेता एमए खान ने भी इस्तीफा दे दिया है। खान ने भी इस्तीफा देते हुए कांग्रेस की बर्बादी के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया है। खान कांग्रेस में बागी G-23 ग्रुप के सक्रिय सदस्य थे और 2008 से लेकर 2020 तक राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।

‘कांग्रेस में किराएदार नहीं बल्किहिस्सेदार है’ : मनीष तिवारी

G-23 के सदस्य और पंजाब से सांसद मनीष तिवारी ने शनिवार को कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तिवारी ने कहा कि हाईकमान समझौता करने के मूड में नहीं था, इसलिए गुलाम नबी पार्टी छोड़ के चले गए हैं। तिवारी ने आगे कहा कि मैं किराएदार नहीं हूं, मैं इस घर को बनाने वाला हूं, इसलिए पार्टी छोड़ कर नहीं जाऊंगा।

वहीं शनिवार को आजाद के आवास पर कांग्रेस नेता आनंद शर्मा पहुंचे और दोनों के बीच करीब 2 घंटे तक बातचीत हुई। शर्मा भी पिछले हफ्ते हिमाचल कांग्रेस के स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके हैं। अटकलें लगाई जा रही है कि आनंद शर्मा भी कांग्रेस से आजाद हो सकते हैं।

कांग्रेस के ल‍िए सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। आजाद के इस्‍तीफे के बाद जम्‍मू कश्‍मीर कांग्रेस में भगदड़ मच गई है। गुलाम नबी आजाद के समर्थन में पांच पूर्व कांग्रेस विधायकों ने पार्टी की सदस्‍यता से इस्तीफा दे दिया है। इसमें कांग्रेस के पूर्व व‍िधायक जीएम सरूरी, हाजी अब्दुल रशीद, चौधरी मोहम्मद अकरम, मोहम्मद अमीन भट और गुलजार अहमद वानी के नाम शाम‍िल हैं। आजाद और इतने पूर्व व‍िधायकों के इस्तीफे को पहले से ही समस्याओं का सामना कर रही कांग्रेस पार्टी पर एक और आघात माना जा रहा है। पहले ही कई बड़े नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं जिसमें कपिल सिब्बल, अश्विनी कुमार आदि शामिल हैं।

आजाद ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेतृत्व आंतरिक चुनाव के नाम पर धोखा दे रहा है। उन्होंने राहुल गांधी पर ‘‘अपरिपक्व और बचकाने’’ व्यवहार का आरोप भी लगाया था। कठुआ के बानी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक मलिक और दो पूर्व एमएलसी (कठुआ से सुभाष गुप्ता और डोडा से शाम लाल भगत) ने पार्टी आलाकमान को अलग-अलग अपना इस्तीफा भेजा। 

आजाद के कांग्रेस छोड़ने के ऐलान के बाद अब तक जम्मू-कश्मीर में पांच नेताओं जीएम सरूरी, हाजी अब्दुल राशिद, मोहम्मद अमीन भट, गुलजार अहमद वानी और चौधरी मोहम्मद अकरम ने भी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इनमें सरूरी को छोड़कर बाकी सब पूर्व विधायक हैं।

आजाद के करीबी सहयोगी और पूर्व मंत्री जी एम सरूरी ने कहा, “हमें मलिक, गुप्ता और भगत से (समर्थन के) पत्र मिले हैं।” एक सूत्र ने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद, पूर्व मंत्री अब्दुल मजीद वानी, मनोहल लाल शर्मा और घरू राम व पूर्व विधायक बलवान सिंह ने भी दिल्ली में आजाद से मुलाकात की और कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद मंगलवार को उनके प्रति अपनी वफादारी की घोषणा कर सकते हैं।

इसके अलावा कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई को रविवार को एक और झटका लगा जब उसके वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ताज मोहिउद्दीन ने पार्टी छोड़ दी और गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व वाले मोर्चे में शामिल हो गए। हालांकि, मोहिउद्दीन ने साफ किया कि आजाद के नेतृत्व वाला समूह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ कोई समझौता नहीं करेगा लेकिन नेशनल कांफ्रेंस या पीडीपी के साथ गठबंधन करेगा। मोहिउद्दीन ने यहां प्रेस वार्ता में बताया, “ आज, मैंने कांग्रेस अध्यक्ष और महासचिव और अन्य को पत्र लिख कर कहा कि मैं कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता सहित उन सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं जो मेरे पास थे।” उन्होंने कहा कि वह आजाद के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल होंगे।

शुक्रवार को गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफा देते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा था।आजाद ने 5 पन्नों की चिट्ठी में लिखा- राहुल गांधी ने पार्टी में एंट्री के साथ ही सलाह के मैकेनिज्म को तबाह कर दिया। खासतौर पर जनवरी 2013 में उनके उपाध्यक्ष बनने के बाद तो पार्टी में यह सिस्टम पूरी तरह बंद हो गया।

सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को साइड लाइन कर दिया गया और गैर-अनुभवी चापलूसों का नया ग्रुप बन गया, जो पार्टी चलाने लगा।

महाराष्ट्र में बड़ा सस्पेंस खत्म, वोटिंग से पहले MVA के समर्थन में आई AIMIM

महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी बड़ा सस्पेंस खत्म हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने महाविकास अघाड़ी सरकार का समर्थन करने का ऐलान किया है। इस बात की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने शुक्रवार को दी है। राज्य में AIMIM के दो विधायक हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 6 सीटों पर मतदान होना है। यहां सात उम्मीदार मैदान में हैं। जलील ने मुंबई स्थित ट्राइडेंट होटल में शिवसेना नेताओं एकनाथ शिंदे, अनिल परब, अनिल देसाई, अरविंद सावंत और पार्टी पदाधिकारी मिलिंद नारवेकर से मुलाकात की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्यसभा के दो वोट के बदले में शिवसेना मंत्री सभी शर्तें मानने तैयार हो गए हैं।

  • हिन्दू हृदय सम्राट बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे ने कॉंग्रेस के म्मीदवार को जिताने के लिए असदुद्दीन ओवैसी का हाथ थामा

चार राज्यों की 16 राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान होगा। इस बीच बड़ा अपडेट यह भी है कि महाराष्ट्र में भाजपा को हराने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने महाविकास अघाड़ी को समर्थन देने का ऐलान किया है। AIMIM महाराष्ट्र अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने कहा कि भाजपा को हराने के लिए हमारी पार्टी AIMIM ने महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव में महा विकास अघाड़ी (MVA) को वोट देने का फैसला किया है। AIMIM महाराष्ट्र के 2 विधायकों को कांग्रेस उम्मीदवार इमरान प्रतापगढ़ी के समर्थन में वोट

एआईएमआईएम की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने कहा है कि उनकी पार्टी राज्य में महाविकास अघाड़ी (MVA) को वोट देगी। हमारे दो विधायकों को कांग्रेस प्रत्याशी इमरान प्रतापगढ़ी को वोट देने को कहा गया है। 

उन्होंने आगे जानकारी दी कि मदद के बदले सरकार के सामने कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। AIMIM सांसद ने कहा, ‘हमने हमारे विधायकों के क्षेत्र धुलिया और मालेगांव में विकास से जुड़ी कुछ शर्तें रखी हैं। साथ ही MPSC में अल्पसंख्यक सदस्य को नियुक्त करने और महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड की आय को बढ़ाने की भी मांग की है।’

असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ गुरुवार को दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज हुई

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपने खिलाफ दर्ज़ FIR पर कहा है कि “मुझे FIR का एक अंश मिला है. यह मेरी देखी हुई पहली प्राथमिकी है, जो यह स्पष्ट नहीं कर रही है कि अपराध क्या है.। हम इससे भयभीत नहीं होंगे। जहां तक मेरे खिलाफ एफआईआर की बात है, हम अपने वकीलों से सलाह लेंगे और जरूरत पड़ने पर इसका समाधान करेंगे। अभद्र भाषा की आलोचना करने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने की तुलना नहीं की जा सकती।”

नयी दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट – 9 जून :

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ गुरुवार को दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज हुई। भड़काऊ भाषण देने के मामले में दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में स्वामी यति नरसिम्हानंद का भी नाम है। ओवैसी पर आरोप है कि उन्होंने बुधवार को भड़काऊ भाषण दिया। स्वामी यति नरसिम्हानंद डासना देवी मंदिर के पुजारी हैं। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशन यूनिट स्पेशल सेल के अधीन काम करती है। यह यूनिट साइबर क्राइम के सभी जटिल एवं संवेदनशील मामलों को देखती है। नफरत भरे एवं भड़काऊ भाषण देने के मामले में IFSO ने कई लोगों के खिलाफ के मामले दर्ज किए हैं। 

ओवैसी ने एक अन्य ट्वीट में कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि दिल्ली पुलिस में यति, नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के खिलाफ मामलों को आगे बढ़ाने का साहस नहीं है। यही वजह है कि मामले में देरी और कमजोर प्रतिक्रिया जारी है। वास्तव में यति ने मुसलमानों के खिलाफ नरसंहार को बढ़ावा देने और इस्लाम का अपमान करके अपनी जमानत की शर्तों का बार-बार उल्लंघन किया है।

दिल्ली पुलिस पर भड़के ओवैसी

ओवैसी के मुताबिक दिल्ली पुलिस शायद हिंदुत्ववादी कट्टरपंथियों को ठेस पहुंचाए बिना इन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने का तरीका सोचने की कोशिश कर रही थी। दिल्ली पुलिस “दोनों पक्षवाद” या “संतुलन-वाद” सिंड्रोम से पीड़ित है। एक पक्ष ने खुले तौर पर हमारे पैगंबर का अपमान किया है, जबकि दूसरे पक्ष का नाम BJP समर्थकों को समझाने और ऐसा दिखाने के लिए दिया गया है कि दोनों पक्षों में अभद्र भाषा थी. मेरे मामले में एफआईआर यह भी नहीं कह रही है कि आपत्तिजनक क्या था।

हमने नूपुर शर्मा, नवीन कुमार जिंदल और असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ सोशल मीडिया पर उनकी कथित अपमानजनक टिप्पणियों के संबंध में दो प्राथमिकियां दर्ज की हैं। इन्होंने अन्य धर्मों के लोगों की भावनाओं को आहत किया है। इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

मालूम हो कि बीते दिनों पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी करने के कारण भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी प्रवक्ता नुपुर शर्मा को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही दिल्ली मीडिया सेल के प्रमुख नवीन जिंदल को निष्कासित कर दिया था।

इसके इसके बाद नुपुर शर्मा ने मंगलवार को कहा था कि वे पार्टी के निर्णय को स्वीकार करती हैं और उसका सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा था कि मैं संगठन में व्यवहारिक रूप से पली-बढ़ी हूं। मैं उनके निर्णय को स्वीकार करती हूं और उसका सम्मान करती हूं।

वहीं, नवीन कुमार जिंदल ने मंगलवार को दावा किया कि उन्हें व उनके परिजनों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। जिंदल ने एक जून को मुहम्मद साहब पर विवादित ट्वीट किया था, जिसके बाद उनपर सोशल मीडिया पर हमला हो रहा है।

गैंगरेप में AIMIM नेता के बेटे के शामिल होने के सबूत देने वाले भाजपा विधायक रघुनंदन राव पर पीड़िता की फोटो और वीडियो शेयर का लगा आरोप, केस दर्ज़

तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक रघुनंदन राव पर  जुबली हिल्स में सामूहिक दुष्कर्म की 17 वर्षीय पीड़िता की पहचान का खुलासा करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।  नाबालिग पीड़िता के वीडियो और तस्वीरें कथित रूप से जारी करने के लिए राव पर भारतीय दंड संहिता की 228 ए (पीड़ित की पहचान का खुलासा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। छह जून को दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि चार जून को तेलंगाना राज्य के दुब्बक निर्वाचन क्षेत्र के विधायक माधवनेनी रघुनंदन राव ने भाजपा राज्य कार्यालय, कट्टेलमंडी में एक किशोरी के सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।  रघुनंदन राव ने इस दौरान घटना से संबंधित तस्वीरें और वीडियो मीडिया को जारी किए जिसमें नाबालिग पीड़िता की पहचान का खुलासा हुआ, जबकि जांच जारी है।

डेमोक्रेटिक फ्रंट, हैदराबाद/नयी दिल्ली :

हैदराबाद में गैंगरेप की शिकार हुई नाबालिग की फोटो शेयर करने पर बीजेपी के विधायक एम. रघुनंदन राव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। हैदराबाद में 28 मई को नाबालिग के साथ कार में बलात्कार किया गया था। यह कार तेलंगाना में सरकार चला रही टीआरएस के एक विधायक की थी।  नाबालिग के साथ 5 लोगों ने बलात्कार किया था जिसमें से तीन किशोर हैं। विधायक एम. रघुनंदन राव के खिलाफ पुलिस में दी गई शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने नाबालिग की कुछ फोटो और एक वीडियो क्लिप को शेयर कर उसकी पहचान को उजागर कर दिया है। यह कानूनन अपराध है। 

पुलिस अधिकारी ने कहा कि मामला सोमवार देर रात दर्ज किया गया और कानूनी राय लेने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 4 जून को तेलंगाना के दुब्बक से विधायक रघुनंदन राव ने भाजपा प्रदेश कार्यालय, कट्टेलमंडी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित ​की थी। इस दौरान उन्होंने घटना से संबंधित एक वीडियो क्लिप और तस्वीरें शेयर की थी। आरोप है कि इसमें नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर हुई है।

मामला दर्ज होने के बाद विधायक ने कहा कि वह केवल गैंगरेप मामले में AIMIM नेता के बेटे की संलिप्तता के सबूत सार्वजनिक करना चाहते हैं। पुलिस विधायक के बेटे को क्लीन चिट दे रही है, इसलिए उन्होंने वह वीडियो क्लिप जारी किया। उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा कि वह मामले का सामना करने के लिए तैयार हैं। पेशे से वकील राव ने दावा किया कि वह उचित समय आने पर अपने पास मौजूद सभी सबूतों को अदालत में पेश करेंगे।

गौतलब है कि यह घटना 28 मई 2022 की है। तब 17 साल की पीड़िता पार्टी के बाद अपने घर लौट रही थी। उसी वक्त हैदराबाद के जुबली हिल्स इलाके में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 323 और पॉक्सो एक्ट की धारा 9 और 10 के तहत मामला दर्ज किया था।

रिपोर्ट की मानें तो आरोपितों ने पहले पीड़िता से उसके घर छोड़ने की बात कही थी। बाद में एक पार्क की हुई कार के अंदर उसके साथ मारपीट की गई और फिर बारी-बारी से सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान दूसरे आरोपित कार के बाहर पहरा दे रहे थे। भाजपा प्रवक्ता के कृष्णसागर राव ने हैदराबाद पुलिस पर AIMIM और TRS के राजनीतिक दबाव में जाँच करने का आरोप लगाया था।

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‘कोनसीमा’ जिले बदलकर ‘बीआर आंबेडकर कोनासीमा’ जिला वहाँ के लोगों को बर्दाश्त नहीं, दंगे भड़के

आंध्र प्रदेश के आमलापुरम में मंगलवार को हिंसक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। ये विरोध प्रदर्शन कोनसीमा जिले का नाम बदलने को लेकर हुआ। दरअसल, आंध्र प्रदेश के नवगठित जिले कोनासीमा का नाम बदलकर बीआर आंबेडकर कोनासीमा जिला कर दिया गया है। जिले का नाम बदले जाने से गुस्साये लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने लाठीचार्ज के बावजूद भी प्रदर्शनकारियों ने अमलापुरम शहर में आगजनी की घटना हुई। राज्य के परिवहन मंत्री पी विश्वरूप के घर में आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि कोनसीमा के मूल नाम को न बदला जाए।

आंध्र प्रदेश के अमलापुरम में मंगलवार को हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। जिसके बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कोनसीमा जिले का नाम नहीं बदलने की मांग को लेकर पुलिस के साथ झड़प की और परिवहन मंत्री पी विश्वरूप के घर में आग लगा दी। स्थिति नियंत्रण से बाहर होता देख पुलिस ने मंत्री और उनके परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला।

प्रदर्शंकारी कोनासीमा जिले का नाम डॉ बीआर अंबेडकर कोनासीमा जिला रखने का विरोध कर रहे थे। क्षेत्र में उस समय तनाव बढ़ गया जब कोनासीमा जिला साधना समिति के सदस्य क्लॉक टॉवर सेंटर पर विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए। जल्द ही हालात खराब हो गए और प्रदर्शनकारियों ने पथराव करना शुरू कर दिया और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। जब पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में करने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

उल्लेखनीय है कि चार अप्रैल को पूर्वी गोदावरी जिले से अलग कर कोनासीमा जिले का गठन किया गया था। पिछले सप्ताह राज्य सरकार ने कोनासीमा जिले का नाम बदलकर बीआर आंबेडकर कोनासीमा जिला करने की प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर लोगों से आपत्ति आमंत्रित की थी। इस पृष्ठभूमि में कोनासीमा साधना समिति ने नाम बदलने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और जिले का नाम यथावत कोनासीमा रहने देने की मांग की।

समिति ने मंगलवार को जिलाधिकारी हिमांशु शुक्ला को जिले का नाम बदलने के खिलाफ ज्ञापन देने का प्रयास करते हुए प्रदर्शन का आयोजन किया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की जिससे प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और अंतत: शांत रहने वाले अमलापुरम में आगजनी की घटना हुई।

सोनिया गांधी के आवास पर प्रशांत किशोर की 3 दिनों में दूसरी बैठक, मिशन 2024की तैयारियों के लिए पार्टी के शीर्ष नेता भी रहे मौजूद

प्रशांत किशोर के साथ बैठक में अन्य नेताओं के साथ बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास की मौजूदगी को लेकर भी जो खबरें आ रही है उसके मुताबिक कांग्रेस का वहां नया अध्यक्ष चुनना है ऐसे में पार्टी इस काम में भी पीके की टीम की मदद लेकर फैसला लेना चाह रही है ताकि जमीनी स्तर से लोगों की राय के बाद किसी का जिम्मेदारी सौंपी जाए। कांग्रेस के पूर्व नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 1999 में बेटी महबूबा मुफ्ती के साथ पीडीपी का गठन किया था। पार्टी गठन के महज 3 साल बाद पीडीपी सत्ता में आई। मुप्ती मोहम्मद सईद राज्य के सीएम बने। महज 16 सीटें जीतने वाली सईद की पार्टी को उनकी पुरानी पार्टी कांग्रेस का समर्थन मिला। दोनों पार्टियों में समझौते के तहत पहले चीन साल सईद और बाद में 3 साल कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद सीएम रहे। 2008 में पीडीपी ने कांग्रेस से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस का समझौता हुआ। 

  • सोनिया गांधी के आवास पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक
  • राहुल गांधी, अंबिका सोनी समेत प्रशांत किशोर भी मौजूद हैं
  • प्रशांत किशोर के कांग्रेस से जुड़ने के बारे में भी मंथन हो सकता है

नई दिल्ली(ब्यूरो) डेमोक्रेटिक : 

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के घर पर सोमवार को बड़ी बैठक हुई। पिछले तीन दिनों के भीतर यह दूसरा मौका  है जब प्रशांत किशोर 10 जनपथ पहुंचे और  कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के अलावा दिग्गज नेता अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, जयराम रमेश और मुकुल वासनिक मौजूद थे।  इस बार की बैठक की अहम बात यह रही की इस मीटिंग में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी मौजूद नहीं थे। पार्टी के लिहाज से महत्त्वपूर्ण बैठक होने के बाद भी राहुल विदेश दौरे पर चले गए, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा मौजूद रहीं।

मार्च में, प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी। हालांकि इस पर आधिकारिक रूप से कुछ भी नहीं कहा गया था लेकिन शनिवार की मीटिंग में पीके के मौजूद होने की खबर से चर्चा तेज हो गई कि पीके कांग्रेस में जा रहे हैं। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव पर बड़े प्लान के तहत पार्टी प्रशांत किशोर को साथ लाना चाहती है। किशोर उसी प्लान का हिस्सा हैं जिसके तहत कांग्रेस पार्टी उद्योगपति, लेउवा पाटीदार के नेता नरेश पटेल को साथ लाकर सीएम कैंडिडेट प्रोजेक्ट करना चाह रही है।

वैसे, प्रशांत किशोर कांग्रेस लीडरशिप की आलोचना करते रहे हैं। पिछले साल लखीमपुर खीरी घटना के दौरान जब प्रियंका गांधी को लखीमपुर जाते समय हिरासत में लिया गया तो प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया था कि दुर्भाग्यवश सबसे पुरानी पार्टी में लंबे समय से घर कर चुकी समस्याओं और ढांचागत कमजोरियों का कोई त्वरित समाधान नहीं है।

चुनाव रणनीतिकार यह भी कह चुके हैं कि कांग्रेस का नेतृत्व किसी व्यक्ति का दैवीय अधिकार नहीं है खासकर जब पार्टी पिछले 10 वर्षों में 90 फीसदी से ज्यादा चुनाव हार गई हो। उन्होंने ट्वीट करते विपक्ष के नेतृत्व का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होने की बात कही थी। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का शर्मनाक प्रदर्शन रहा। प्रशांत किशोर ने तब कहा कि असली लड़ाई 2024 में लड़ी जाएगी और तभी इसके नतीजे आएंगे। साहेब इसे अच्छी तरह से जानते हैं। इसलिए चुनाव नतीजों के जरिए विपक्ष के खिलाफ एक मनोवैज्ञानिक धारणा बनाने की कोशिश हो रही है। इस झूठे नैरेटिव में नहीं फंसना चाहिए।

गैर-कांग्रेसी विपक्ष की बात करने वाले तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव ने हाल में इस बात की पुष्टि की थी कि वह बीजेपी के खिलाफ सभी पार्टियों को साथ लाने के लिए प्रशांत किशोर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

इस बीच केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केवी थॉमस ने सोमवार को कहा कि केपीसीसी की राजनीतिक मामलों की बैठक में आमंत्रित नहीं किया जाना उन्हें पार्टी से बाहर किए जाने के कदम का संकेत है। थॉमस हाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के 23वें सम्मेलन में भाग लेने के लिये अनुशासनात्मक जांच का सामना कर रहे हैं। थॉमस ने कहा कि 2018 से उन्हें पार्टी से बाहर करने के लिये कदम उठाए जाते रहे हैं और उन्हें केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) की बैठक में आमंत्रित नहीं किए जाने से यह स्पष्ट हो गया है।