2 – DG कोरोना के खिलाफ DRDO का नया हथियार

कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की जंग लगातार जारी है. इस बीच रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की ओर से शुभ समाचार देश को मिला है और डीआरडीओ ने एंटी-कोविड मेडिसन, 2 डीजी (2-DG) लॉन्च कर दी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोमवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम में 2 डीजी की पहली खेप को रिलीज की।

नई दिल्ली(ब्यूरो): 

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से एंटी-कोविड मेडिसिन, 2 डीजी (2-DG) लॉन्च कर दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस दवा की पहली खेप को रिलीज की।

पाउडर फॉर्म में उपलब्ध है दवा

डीआरडीओ के अनुसार, ‘2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज’ दवा को इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS) द्वारा हैदराबाद की डॉक्टर रेड्डी लैब के साथ मिलकर तैयार किया है। हाल ही में क्लीनिकल-ट्रायल में पास होने के बाद ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इस दवा को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। बताया जा रहा है कि ये दवाई सैशे में उपलब्ध होगी. यानी मरीजों को इसे पानी में घोलकर पीना होगा।

इस दवा से ऑक्सीजन लेवल रहेगा मेंटेन

अधिकारियों का कहना है कि ग्लूकोज पर आधारित इस दवा के सेवन से कोरोना मरीजों को ऑक्सजीन पर ज्यादा निर्भर नहीं होना पड़ेगा। साथ ही वे जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे। क्लीनिक्ल-ट्रायल के दौरान भी जिन कोरोना मरीजों को ये दवाई दी गई थी, उनकी RT-PCR रिपोर्ट जल्द निगेटिव आई है। उन्होंने बताया कि ये दवा सीधा वायरस से प्रभावित सेल्स में जाकर जम जाती है और वायरस सिंथेसिस व एनर्जी प्रोडक्शन को रोककर वायरस को बढ़ने से रोक देती है। इस दवा को आसानी से उत्पादित किया जा सकता है. यानी बहुत जल्द इसे पूरे देश में उपलब्ध कराया जा सकेगा।

देशभर में कोरोना के 24 घंटे में 281386 नए केस आए सामने

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटे में भारत में 2 लाख 81 हजार 286 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए है, जबकि इस दौरान 4106 लोगों की जान गई। इसके बाद भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 2 करोड़ 49 लाख 65 हजार 463 हो गई है, जबकि 2 लाख 74 हजार 390 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, देशभर में पिछले 24 घंटे में 3 लाख 78 हजार 741 लोग ठीक हुए, जिसके बाद कोविड-19 से ठीक होने वाले लोगों की संख्या 2 करोड़ 11 लाख 74 हजार 76 हो गई है। इसके साथ ही देशभर में एक्टिव मामलों में भी गिरावट आई है और देशभर में 35 लाख 16 हजार 997 लोगों का इलाज चल रहा है।

डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉक्टर अनंत नारायण ने बताया, ‘सीसीएमबी हैदराबाद में हमने इसका पहला टेस्ट किया था, उसके बाद हमने ड्रग कंट्रोल से कहा कि क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दें। ट्रायल में हमने देखा है कि कोरोना पेशेंट को काफी फायदा हुआ. टेस्टिंग के बाद फेज 2 सही से किया और फेज 3 में हमने बहुत बड़े पैमाने पर प्रयोग किया।’

डीआरडीओ ने डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज के साथ मिल बनाई दवा

कोरोना की इस दवा को डीआरडीओ के Institute of Nuclear Medicine and Allied Sciences यानी INMAS ने हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज के साथ मिलकर तैयार किया है।

इस दवा से 7 दिन में ठीक हो जाएंगे मरीज

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि 2-डीजी एक जेनेरिक मॉलीक्यूल है और ग्लुकोज से मिलती जुलती है, इसलिए इसका उत्पादन आसान होगा और ये दवा देश में बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराई जा सकेगी। डॉक्टर अनंत नारायण ने कहा, ‘इस ड्रग को हम जल्द से जल्द मार्किट में लाने का काम कर रहे है. यह दवा पाउडर के रूप में आता है पानी में घोल कर दिया जाता है। इसको दिन में 2 बार सुबह-शाम देने के बाद मरीज लगभग सात दिन में लोग ठीक हो रहे है।

ऑक्सीजन की किल्लत से मिलेगी राहत

इस दवा के बाजार में आने से एक और बड़ी राहत मिलेगी. अभी जो ऑक्सीजन की मारा-मारी है, दावा है कि इस दवा के मिलने के बाद ये समस्या बहुत हद तक कम होगी साथ ही ये दवा कोविड से संक्रमित मरीजों की अस्पताल में दाखिले की संख्या को भी कम करेगी. यानी मरीज घर पर रहकर ही डॉक्टर की सलाह से ये दवा लेकर ठीक हो जाएंगे।

भारतीय पुरातत्व विभाग को काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद के विवादित स्थल पर सर्वेक्षण कराने की मंजूरी

रिपोर्ट्स के अनुसार मामले में वादी पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि 1991 में दायर याचिका में मांग की गई थी कि मस्जिद ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर मंदिर का एक अंश है. जहां हिन्दू आस्थावानों को पूजा-पाठ, दर्शन और मरम्मत का अधिकार है। स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर के पक्षकार पंडित सोमनाथ व्यास और अन्य ने याचिका दायर की थी।

  • भारतीय पुरातत्व विभाग को काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद के विवादित स्थल पर सर्वेक्षण कराने की मंजूरी
  • वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के आवेदन को स्वीकार कर लिया
  • सर्वेक्षण के दौरान मुस्लिम समुदाय से संबंधित लोगों को विवादित स्थल पर नमाज अदा करने से रोका नहीं जाएगा

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के पक्ष में फैसला देते हुए कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर का रडार तकनीक से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मंजूरी दे दी है। सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट आशुतोष तिवारी की अदालत ने गुरुवार को लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के आवेदन को स्वीकार कर लिया।

अदालत में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजयशंकर रस्तोगी की तरफ से वर्ष 1991 से लंबित इस प्राचीन मुकदमे में आवेदन दिया था। जिसमें कहा गया कि मौजा शहर खास स्थित ज्ञानवापी परिसर के आराजी नंबर 9130, 9131, 9132 रकबा एक बीघे नौ बिस्वा जमीन का पुरातात्विक सर्वेक्षण रडार तकनीक से करके यह बताया जाए कि जो जमीन है, वह मंदिर का अवशेष है या नहीं। साथ ही विवादित ढांचे का फर्श तोड़कर देखा जाए कि 100 फीट ऊंचा ज्योतिर्लिंग स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ वहां मौजूद हैं या नहीं। दीवारें प्राचीन मंदिर की हैं या नहीं।

काशी

रडार तकनीक से सर्वेक्षण से जमीन के धार्मिक स्वरूप का पता चल सकेगा। वाद मित्र रस्तोगी की दलील थी कि 14वीं शताब्दी के मंदिर में प्रथम तल में ढांचा और भूतल में तहखाना है, जिसमें 100 फीट ऊंचा शिवलिंग है, यह खुदाई से स्पष्ट हो जाएगा। मंदिर हजारों वर्ष पहले 2050 विक्रम संवत में राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था। फिर सतयुग में राजा हरिश्चंद्र और वर्ष 1780 में अहिल्याबाई होलकर ने जीर्णोद्धार कराया था। उन्होंने यह भी कहा था कि जब औरंगजेब ने मंदिर पर हमला किया था तो उसके बाद 100 वर्ष से ज्यादा समय तक यानी वर्ष 1669 से 1780 तक मंदिर का अस्तित्व ही नहीं था।

सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता अभय नाथ यादव ने कहा कि दावे के अनुसार, जब मंदिर तोड़ा गया, तब ज्योतिर्लिंग उसी स्थान पर मौजूद था, जहां आज है। उसी दौरान राजा अकबर के वित्तमंत्री टोडरमल की मदद से नरायन भट्ट ने मंदिर बनवाया था, जो उसी ज्योतिर्लिंग पर बना है। ऐसे में विवादित ढांचा के नीचे दूसरा शिवलिंग कैसे आ सकता है। इसलिए खुदाई नहीं होनी चाहिए।

रामजन्म भूमि की तरह पुरातात्विक रिपोर्ट मंगाए जाने पर कहा था कि स्थितियां विपरीत हैं। वहां साक्षियों के बयान के बाद विरोधाभास होने पर कोर्ट ने रिपोर्ट मंगाई थी, जबकि यहां के मामले में अभी तक किसी का साक्ष्य हुआ ही नहीं है। ऐसे में साक्ष्य आने के बाद विरोधाभास होने पर कोर्ट रिपोर्ट मंगा सकती है। दलील दी कि साक्ष्य एकत्र करने के लिए रिपोर्ट नहीं मंगाई जा सकती। यह भी कहा कि विवादित ढांचा खोदे जाने से शांतिभंग भी हो सकती है।

कोर्ट का दायित्व है कि वहां शांति बनी रहे। इसी तरह से सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड से मिलती-जुलती दलीलें अंजुमन इंतजामिया कमेटी की ओर से भी पेश की गई। अदालत में लार्ड विश्वेश्वरनाथ की तरफ से अमरनाथ शर्मा, सुनील रस्तोगी, रितेश राय, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से रईस अहमद खान, अफताब अहमद व मुमताज अहमद और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से तौफीक खान कोर्ट में मौजूद थे।

भारती मठ सहित जगन्नाथ पुरी की 315॰337 एकड़ भूमि बेच चुकी राज्य सरकार अब जगन्नाथ भगवान की 35,272 एकड़ जमीन बेचने की तैयारी में

सनातन धर्म की संस्थाओं को पहले तो सरकार द्वारा अधिग्रहण किया जाता है फिर उन्हे उसी क्षेत्र में कमजोर कर उनकी हजारों एकड़ भूमि का विक्रय कर दिया जाता है। यह सिलसिला ओड़ीशा में धड़ल्ले से चल रहा है और अब जगन मोहन रेड्डी की सरकार आने के पश्चात तो यह कार्य और भी द्रुत गति से चल पड़ा है, पहले तो पुरी के धाम में कई गिरिजे ओर मस्जिदोन के स्थापित होने की बातें सुनने में आयीं। सूत्रों की मानें तो सरकारी बोर्ड द्वारा संचालित यह काम बहुत ही शांति पूर्वक किए जा रहे हैं। सरकार पहले ही कटक शहर में भारती मठ भवन सहित जगन्नाथ की 315.337 एकड़ जमीन बेच चुकी है और जमीन की बिक्री से अर्जित 11.20 करोड़ रुपये मंदिर कॉर्पस फंड में जमा किए गए हैं।

भुवनेश्वर: 

राज्य सरकार ने ओडिशा और छह अन्य राज्यों में भगवान जगन्नाथ से संबंधित 35,272 एकड़ जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू की है, कानून मंत्री प्रताप जेना ने मंगलवार को विधानसभा को बताया।

भाजपा विधायक मोहन चरण मांझी के एक प्रश्न के लिखित उत्तर देते हुए, जेना ने कहा कि तत्कालीन राज्यपाल बीडी शर्मा की अध्यक्षता में गठित एक समिति की सिफारिशों के अनुसार, सरकार मंदिर की 35,272.235 एकड़ भूमि की संपत्ति बेचने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है

जेना ने कहा कि भगवान जगन्नाथ ओडिशा के 30 में से 24 जिलों में फैले 60,426.943 एकड़ के मालिक हैं। जिसमें से, मंदिर प्रशासन 34,876.983 एकड़ में राइट्स ऑफ राइट्स (RoR) तैयार कर सकता है। मंत्री ने विधानसभा को बताया, “आयोग की सिफारिश के अनुसार, राज्य सरकार की अनुमोदित नीति (समन नीति) के अनुसार जमीन बेचने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।”

इस बीच, सरकार पहले ही कटक शहर में भारती मठ भवन सहित जगन्नाथ की 315.337 एकड़ जमीन बेच चुकी है और जमीन की बिक्री से अर्जित 11.20 करोड़ रुपये मंदिर कॉर्पस फंड में जमा किए गए हैं।

इसी तरह, ओडिशा के बाहर छह राज्यों में पहचान की गई 395.252 एकड़ जमीन को बेचने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस उद्देश्य से जिला कलेक्टरों को पत्र लिखा है।

सूत्रों ने कहा कि 12 वीं सदी के मंदिर में पश्चिम बंगाल में अधिकतम 322.930 एकड़ और महाराष्ट्र में 28.218 एकड़, मध्य प्रदेश में 25.110 एकड़, आंध्र प्रदेश में 17.020 एकड़, छत्तीसगढ़ में 1.700 एकड़ और बिहार में 0274 एकड़ जमीन है। मंत्री ने कहा कि बाघा क्षेत्र में लगभग 100 एकड़ की पहचान की गई है और सरकार प्रत्येक वर्ष शेयरधारियों से धान की मात्रा एकत्र कर रही है। इस उद्देश्य के लिए एक खामारी बाघा में लगी हुई है, जबकि एक अन्य खामारी डोहियन में लगी हुई है, जो क्षेत्र में स्थित जमीन जायदादों की देखभाल के लिए है, उन्होंने कहा, दोचियान क्षेत्र से एकत्र धान भी हर साल बेचा जाता है।

इसके अलावा, खुरदा में स्थित 582.255 एकड़ जमीन लीज के आधार पर ओडिशा काजू डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (OCDC) को दी गई है। बदले में, सरकार को हर साल निगम से 3 लाख रुपये मिल रहे हैं, मंत्री ने कहा।

सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों ने 30 साल से अधिक समय तक श्रीमंदिर की जमीन पर कब्जा किया है, उन्हें मंदिर की जमीन को कब्जे में लेने के लिए प्रति एकड़ 6 लाख रुपये देने होंगे। जिन लोगों ने श्रीमंदिर भूमि का अधिग्रहण 30 साल से कम समय के लिए किया है, लेकिन 20 से अधिक वर्षों के लिए भूखंड खरीदने के लिए प्रति एकड़ 9 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।

इसके अलावा, जिन व्यक्तियों ने 20 साल से कम समय के लिए मंदिर के भूखंडों पर कब्जा कर लिया है, लेकिन 12 साल से अधिक के लिए प्रति एकड़ 15 लाख रुपये का भारी भुगतान करना होगा, स्रोत ने कहा।

कानून मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सुधार लाने और जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी विभिन्न घटनाओं की जांच के लिए चार आयोगों का गठन किया है। पैनल न्यायमूर्ति बीके पात्रा आयोग, बीडी शर्मा की अध्यक्षता वाली समिति, न्यायमूर्ति पीके मोहंती आयोग और न्यायमूर्ति बीपी दास आयोग हैं। उन्होंने कहा कि आयोगों द्वारा की गई विभिन्न सिफारिशों को लागू करने के लिए, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति की मंजूरी के बाद मंदिर के मुख्य प्रशासक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।

सद्दाम गद्दाफ़ी की चुनावी प्रक्रिया बता कर अपनी ही पार्टी का सच बता बैठे राहुल

राहुल ने यहां तक कहा कि सद्दाम हुसैन और गद्दाफी जैसे लोग भी चुनाव आयोजित कराते थे और जीत जाते थे. लेकिन तब ऐसा कोई फ्रेमवर्क नहीं था, उन्हें मिले वोट की रक्षा कर सके. राहुल अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आशुतोष के साथ चर्चा कर रहे थे। इस दौरान राहुल ने कहा कि कि हमें किसी दूसरे देश की संस्था से लोकतंत्र को लेकर सर्टिफिकेट नहीं चाहिए लेकिन उन्होंने जो कहा, वो बिल्कुल सही है। भारत में इस वक्त जितना हमने सोचा है, हालात उससे ज्यादा बदतर हैं। राहुल इस ब्यान को देते समय अपनी ही पार्टी की पोल खोल रहे थे। पार्टी अध्यक्ष के तौर पर जब उन्होने अपनी ही पार्टी के आंतरिक चुनाव लड़े थे तब ऊनके ही एक रिश्तेदार शहजाद पूनावाला ने उनके विरोध में नामांकन भरा था। आज शहजाद पूनावाला अपनी ही पार्टी से निकाल दिये गए। यही वह मॉडल है जिसकी चर्चा राहुल कर रहे थे। लें अपनी ही पार्टी के इस चरित्र को वह नहीं पहचान पाते। हर समय अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश की बात कराते हैं, लेकिन उतनी ही आज़ादी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलते गरियाते पाये जाते हैं, निर्भीकता से। क्या यह दोहरे माप दंड नहीं?

  • सद्दाम-गद्दाफ़ी इन्दिरा के थे अच्छे दोस्त सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए राहुल
  • चुनाव मतलब सिर्फ यह नहीं कोई जाए और बटन दबाकर मताधिकार का इस्तेमाल कर दे
  • साल 2016 से 2020 के बीच 170 से अधिक कांग्रेसी विधायकों ने पार्टी छोड़ दी
  • नहीं दिख रहा दम, पांच चुनावी राज्यों में गठबंधन के सहारे चुनावी मैदान में कांग्रेस

सरीका, चंडीगढ़:/नयी दिल्ली:

राहुल गाँधी ने ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को दिए अपने हालिया इंटरव्यू में भारतीय जनता पार्टी पर पर ये कहकर निशाना साधा कि सद्दाम हुसैन और मोहम्मद गद्दाफी ने भी तो चुनाव जीता था। केंद्र सरकार को लेकर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि सद्दाम हुसैन और गद्दाफी को भी वोट की जरूरत नहीं थी, उन्होंने सत्ता पर कब्जा करने के लिए चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया था।

दरअसल, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पिछले दिनों वी-डेम इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के हवाले से देश के लोकतांत्रिक न होने को लेकर दावे किए थे। इसी पर ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आशुतोष वार्ष्णेय ने उनकी टिप्पणी पर सवाल किए, जिसके जवाब में राहुल गाँधी ने उक्त बात कही।

हालाँकि, राहुल की बात पर गौर देने से पहले ये जानना दिलचस्प है कि जिस गद्दाफी का उन्होंने उदाहरण दिया, वह सन् 1969 में लीबिया में सैन्य तख्तापलट होने के कारण नेता चुना गया था। उसने शासन पाने के लिए ब्रिटिश समर्थित नेता इदरीस को सत्ता से उखाड़ फेंका था, न कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से कुर्सी पर अधिकार पाया था।

इसी तरह से सद्दाम हुसैन को साल 2003 में अमेरिकी फोर्स ने पकड़ा था। साल 2006 में वह मानवता के विरुद्ध किए गए अपराधों का दोषी पाया गया था। इसके बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई थी।

अब जाहिर है कि ऐसे तानाशाहों का नाम लेकर राहुल गाँधी पूरे मामले में सिर्फ़ और सिर्फ विदेशी चीजों को घुसाकर अपनी बात को दमदार साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, इसके अतिरिक्त उनकी बातों का और कोई मतलब नहीं है।

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस और शिशु मंदिर सिर्फ़ भारत को तोड़ने के लिहाज से बने हैं और इनका इस्तेमाल जनता से पैसे लेने के लिए किया जाता है। एक और चौंकाने वाले बयान में उन्होंने दावा किया कि आरएसएस की विचारधारा और रणनीति मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड के समान है।

संसद सत्र में बंद हुए माइक वाली घटनाओं को उदाहरण देते हुए राहुल गाँधी मानते हैं कि भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल करके सत्ता हथियाई है। उनके मुताबिक, केंद्र के पास नए आइडिया के लिए कोई भी कोना नहीं है। सबसे हास्यास्पद बात यह है कि 5 लाख आईटी सेल सदस्यों को हायर करने के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष आरोप लगाते हैं कि भारत में फेसबुक का हेड भाजपाई है। वह गलत ढंग से चुनावी नैरेटिव को कंट्रोल करता है।

इस सब के बाद राहुल गांधी ट्रोल भी हुए:

एक दैनिक समाचार पत्र के अनुसार सोनिया गांधी के बेटे राहुल ने जिस सद्दाम हुसैन का हवाला दिया है, उसका भारत और खासकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बेहतरीन संबंध था। साल 1975 में इंदिरा गांधी इराक गईं तो सद्दाम हुसैन ने उनका सूटकेस उठा लिया। अखबार के अनुसार इंदिरा गांधी जब रायबरेली से लोकसभा चुनाव वे हार गईं तो सद्दाम ने उन्हें इराक की राजधानी बगदाद में स्थाई आवास की पेशकश कर दी। इतना ही नहीं, सद्दाम के नेतृत्व वाली बाथ सोशलिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशनों में शामिल हुआ करते थे। ऐसे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स लताड़ लगा रहे हैं।

टीआरएस नेता ने कार से निकाल कर वकील दंपति की हत्या की

इस पूरे प्रकरण का एक और पहलू है। एक मामला था, जिसमें हिरासत के दौरान मृत्यु हुई थी। इसकी जाँच के लिए वकील दंपत्ति ने याचिका दायर की थी। इस संबंध में उन्होंने पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया था। इस मामले में जी वामन राव और जी नागमणि ने खुद को ख़तरा बताया था। वकील दंपत्ति के एक मित्र का कहना था कि दोनों ने ज़मीन से जुड़े घोटालों में कई स्थानीय नेताओं के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। मृतक जी वामन राव के पिता किशन राव ने ही रामागिरी पुलिस थाने में इस मामले को लेकर एफ़आईआर दर्ज कराई। 

तेलंगाना/ नयी दिल्ली:

तेलंगाना के पेडापल्ली जिले स्थित हाइवे पर मंगलवार की दोपहर वकील दंपत्ति जी वामन राव (52) और जी नागमणि (48) की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। अब इस मामले में कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। हत्या में टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) नेता कुंता श्रीनिवास का नाम सामने आया है।

एफ़आईआर के मुताबिक़ घटना के पहले आरोपित वेल्दी वसंथा राव ने टीआरएस नेता कुंता श्रीनिवास और अक्कापका कुमार के साथ मिल कर वकील दंपत्ति की हत्या का षड्यंत्र रचा। इसके पीछे की वजह ये थी कि वो कथित तौर पर गुंजापडूगू गाँव में पेदम्मा मंदिर और अवैध घर का निर्माण करवा रहा था।

ज़ोन आईजी वाई नागी रेड्डी के मुताबिक़ टीआरएस नेता कुंता श्रीनिवास का मंदिर निर्माण को लेकर वामन राव से विवाद था। वामन राव के ड्राइवर ने भी बयान दिया, जिसके मुताबिक़ वामन राव ने टीआरएस नेता का नाम लिया था। फिलहाल पुलिस इस मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें 3 का नाम एफ़आईआर में मौजूद है।

पति-पत्नी दोनों ही तेलंगाना हाईकोर्ट में वकालत करते थे। दरअसल मंगलवार को जी वामन राव और उनकी पत्नी जी नागमणि अपनी कार में मंथानी कोर्ट से हैदराबाद जा रहे थे। कलवाचर्ला गाँव के नज़दीक बदमाशों ने जबरन उनका रास्ता रोका। इसके बाद उन्होंने वकील दंपत्ति पर धारदार हथियार से हमला कर दिया और उनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए।

घायल वकील दंपत्ति को पेडापल्ली स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ दोनों की मृत्यु हो गई। फ़िलहाल टीआरएस नेता कुंता श्रीनिवास को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। 

इस पूरे प्रकरण का एक और पहलू है। एक मामला था, जिसमें हिरासत के दौरान मृत्यु हुई थी। इसकी जाँच के लिए वकील दंपत्ति ने याचिका दायर की थी। इस संबंध में उन्होंने पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया था। इस मामले में जी वामन राव और जी नागमणि ने खुद को ख़तरा बताया था।

वकील दंपत्ति के एक मित्र का कहना था कि दोनों ने ज़मीन से जुड़े घोटालों में कई स्थानीय नेताओं के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। मृतक जी वामन राव के पिता किशन राव ने ही रामागिरी पुलिस थाने में इस मामले को लेकर एफ़आईआर दर्ज कराई। 

किशन राव ने एफ़आईआर में कहा है कि उनके बेटे और बहू की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह जमीन से जुड़े कई घोटालों को उजागर करने वाले थे। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए किशन राव ने कहा:

किरण बेदी के हटते ही कॉंग्रेस ने बांटे लड्डू

राहुल गांधी के दौरे से ए दिन पहले पुडुचेरी में कॉंग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गयी है। काँग्रेस राज्यपाल के नाम पर किरन बेदी का इस्तीफा मांगे उससे पहले ही राष्ट्रपति महोदय ने किरण बेदी को राज्यपाल के पद से मुक्त कर दिया, खबर मिलते ही कॉंग्रेस खेमे में एक लहर दौड़ पड़ी और वह लड्डू बांटने लगे। लेकिन मज़े की बात यह है की भाजपा के इस मास्टर स्ट्रोक को कॉंग्रेस न तो समझ पाई न ही उसे पास इसका कोई तोड़ है। किरण बेदी को हटा कर भाजपा ने कॉंग्रेस से एक चुनावी मुद्दा छीन लिया। पुद्द्चेरी में राज्य पाल किरण बेदी एक बड़ा चुनावी मुद्दा थीं। जो अब नहीं रहीं। कॉंग्रेस लड्डुओं ए स्वाद में यहाँ चूक गयी। अब नयी राज्यपाल का अतिरिक्त भार तमिल साई सुंडेरराजन को दिया गया है जो पहले तमिल नाडु में भाजपा की प्रदेशाध्यक्ष हुआ करतीं थीं। सनद रहे की पुद्दुचेरी में तमिल नडू की राजनीति का पूरा पूरा असर रहता है। विश्लेषकों की मानें तो भाजपा के 14 विधाया हैं कॉंग्रेस से छटके 4 विधाया भी भाजपा का दमन थाम सकते हैं। उपचुनाव जो जल्दी ही होने वाले हैं, के पश्चात भाजपा की सरकार बनना तय माना जा रहा है। उधर किरण बेदी यदि चुनाव लड़तीं हैं तो भाजपा उनका स्वागत करेगी। वैसे किरण बेदी को ले कर भाजपा के पास और भी विकल्प है, वह किरण को बतौर राज्यपाल पंजाब, हरियाणा महाराष्ट्र भी भेज सकती है।

सरिया तिवारी, पुड्डुचेरी/चंडीगढ़ :

पुडुचेरी में हाल के दिनों में कॉन्ग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई है। ऐसा लग रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश का राजनीतिक ड्रामा अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों तक यूँ ही चलता रहेगा। अब केंद्र सरकार ने उप-राज्यपाल किरण बेदी को अपने पद से हटा दिया है। उनकी जगह तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदरराजन को पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

तमिलसाई पहले तमिलनाडु में भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष हुआ करती थीं। मंगलवार (फरवरी 16, 2021) की रात राष्ट्रपति भवन की इस अधिसूचना के बाद घटनाक्रम तेज़ी से बदलने लगा। राष्ट्रपति भवन ने कहा है कि जब तक पुडुचेरी के उप-राज्यपाल के रूप में अगली नियुक्ति नहीं की जाती, तमिलसाई सुंदरराजन अतिरिक्त प्रभार संभालती रहेंगी। भाजपा के एक यूनिट के कुछ नेताओं ने भी किरण बेदी के कामकाज से आपत्ति जताई थी।

किरण बेदी को मई 2016 में उप-राज्यपाल बनाया गया था, ऐसे में उनका कार्यकाल पूरा होने को मात्र 3 महीने ही बचे हुए थे। कॉन्ग्रेस पार्टी ने लगातार पुडुचेरी में ये बात फैलाई थी कि किरण बेदी के कामकाज से जनता नाराज़ है और वो चुनी हुई सरकार के ऊपर हावी हैं। स्थानीय भाजपा यूनिट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को 3 बार याचिका भेज कर किरण बेदी को हटाने की माँग की थी।

किरण बेदी ने पुडुचेरी में ट्रैफिक नियमों में सख्ती की थी और हेलमेट न पहनने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया था। गरीबों को अनाज के बदले ‘डायरेक्ट बेनेफिर ट्रांसफर (DBT)’ पर जोर दिया गया था। प्रदेश सरकार ने जब सरकारी स्कूल के बच्चों को प्रदेश के इंजीनियरिंग/मेडिकल कॉलेजों में 10% आरक्षण देने का फैसला लिया तो किरण बेदी ने इसे नकार दिया था। कॉन्ग्रेस इन बातों से नाराज थी।

किरण बेदी के हटाए जाने की खबर के साथ ही प्रदेश भर में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़ कर अपनी ख़ुशी जताई। कॉन्ग्रेस के दफ्तरों में जश्न मनाया गया। खुद मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी ने नेताओं के बीच मिठाई बाँट कर जश्न मनाया।

सीएम नारायणसामी ने कुछ दिनों पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से किरण बेदी को हटाने की माँग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि बेदी प्रदेश सरकार की विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं पर ब्रेक लगा रही हैं।

वी नारायणसामी ने इस फैसले के तुरंत बाद एक प्रेस बैठक बुलाई और उसमें कहा कि ये न सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी, बल्कि पुडुचेरी की जनता की भी जीत है। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में किरण बेदी के लगातार हस्तक्षेप के बाद जनता के अधिकार सुरक्षित नहीं रह गए थे। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी की जनता ने किरण बेदी को ‘एक बड़ा सबक सिखाया’ है। किरण बेदी अब तक इस मामले में खामोश ही हैं।

किरण बेदी के हटाए जाने की खबर के साथ ही प्रदेश भर में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़ कर अपनी ख़ुशी जताई। कॉन्ग्रेस के दफ्तरों में जश्न मनाया गया। खुद मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी ने नेताओं के बीच मिठाई बाँट कर जश्न मनाया।

सीएम नारायणसामी ने कुछ दिनों पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से किरण बेदी को हटाने की माँग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि बेदी प्रदेश सरकार की विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं पर ब्रेक लगा रही हैं।

वी नारायणसामी ने इस फैसले के तुरंत बाद एक प्रेस बैठक बुलाई और उसमें कहा कि ये न सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी, बल्कि पुडुचेरी की जनता की भी जीत है। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में किरण बेदी के लगातार हस्तक्षेप के बाद जनता के अधिकार सुरक्षित नहीं रह गए थे। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी की जनता ने किरण बेदी को ‘एक बड़ा सबक सिखाया’ है। किरण बेदी अब तक इस मामले में खामोश ही हैं।

एक और अटकल ये लगाई जा रही है कि किरण बेदी सक्रिय राजनीति में वापसी कर सकती हैं, इसीलिए उन्हें हटाया गया है। पिछले साढ़े 4 वर्षों से भी अधिक समय के अपने कार्यकाल में उन्होंने पुडुचेरी में बतौर उप-राज्यपाल प्रतिदिन जनसंपर्क को प्राथमिकता दी है। ये बात नारायणसामी के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी गूँजी। नारायणसामी ने कहा कि अगर वो भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में आती हैं तो उनका स्वागत है।

नारायणसामी ने कहा कि हमने न जाने कितने ही उपवास किए और धरने दिए, तब जाकर केंद्र सरकार की अब नींद खुली है। उन्होंने कहा कि अब पुडुचेरी की जनता खुश है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी ने इसे भाजपा का ड्रामा बताते हुए कहा कि पार्टी को पता था कि अगर बेदी इस पद पर रहतीं तो भाजपा को वोट नहीं मिलते। अब सभी की नजरें राहुल गाँधी पर हैं, जो 4 दिनों के चुनावी कैम्पेन के लिए आज पुडुचेरी पहुँच रहे हैं। कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया संयोजक ने बेदी और संघ/भाजपा के लिए काम करने के आरोप लगाए।

बता दें कि पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गई है क्योंकि पार्टी के एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी (Velu Narayanasamy) सरकार ने एक विधायक के जाने से बहुमत खो दिया है। विधायक ए जॉन कुमार ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को विधानसभा से अपना इस्तीफा स्पीकर वीपी शिवाकोलुन्थु को सौंप दिया है। कॉन्ग्रेस यहाँ DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के साथ गठबंधन बना कर सत्ता में है।

इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तन लेने के पश्चात दलित नहीं ले सकेंगे जातिगत आरक्षण का लाभ

हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था है, हिन्द धर्म 4 वर्णों में बंटा हुआ है, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वेश्या एवं शूद्र। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात पीढ़ियों से वंचित शूद्र समाज को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए संविधान में आरक्षण लाया गया। यह आरक्षण केवल (शूद्रों (दलितों) के लिए था। कालांतर में भारत में धर्म परिवर्तन का खुला खेल आरंभ हुआ। जहां शोषित वर्ग को लालच अथवा दारा धमका कर ईसाई या मुसलिम धर्म में दीक्षित किया गया। यह खेल आज भी जारी है। दलितों ने नाम बदले बिना धर्म परिवर्तन क्यी, जिससे वह स्वयं को समाज में नचा समझने लगे और साथ ही अपने जातिगत आरक्षण का लाभ भी लेते रहे। लंबे समय त यह मंथन होता रहा की जब ईसाई समाज अथवा मुसलिम समाज में जातिगत व्यवस्था नहीं है तो परिवर्तित मुसलमानों अथवा इसाइयों को जातिगत आरक्षण का लाभ कैसे? अब इन तमाम बहसों को विराम लग गया है जब एकेन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद सिंह ने सांसद में स्पष्ट आर दिया कि इस्लाम या ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले दलितों के लिए आरक्षण की नीति कैसी रहेगी।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले दलितों को चुनावों में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा वह आरक्षण से जुड़े अन्य लाभ भी नहीं ले पाएँगे। गुरुवार (11 फरवरी 2021) को राज्यसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने यह जानकारी दी। 

हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म स्वीकार करने वाले अनुसूचित जाति के लोग आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के योग्य होंगे। साथ ही साथ, वह अन्य आरक्षण सम्बन्धी लाभ भी ले पाएँगे। भाजपा नेता जीवी एल नरसिम्हा राव के सवाल का जवाब देते हुए रविशंकर प्रसाद ने इस मुद्दे पर जानकारी दी। 

आरक्षित क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की पात्रता पर बात करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, “स्ट्रक्चर (शेड्यूल कास्ट) ऑर्डर के तीसरे पैराग्राफ के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।” इन बातों के आधार पर क़ानून मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि इस्लाम या ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले दलितों के लिए आरक्षण की नीति कैसी रहेगी। 

क़ानून मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संसदीय या लोकसभा चुनाव लड़ने वाले इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति को निषेध करने के लिए संशोधन का प्रस्ताव मौजूद नहीं।    

आंध्र में हिन्दू मंदिरों पर हमले जारी, या यह सरकारी तुष्टीकरण की अगली सीढ़ी है ?

पिछले कुछ समय से आंध्र प्रदेश में लगातार हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ सामने आ रही हैं। कहीं मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है, तो कहीं रथों को आग में जलाकर राख किया जा रहा है। 27 सितंबर को चित्तूर जिले में एक शिव मंदिर पर हमला किया गया और मंदिर में स्थित नंदी की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर में नंदी की मूर्ति को 26 और 27 सितंबर की रात कुछ बदमाशों ने तोड़ा। मूर्ति के टुकड़े पास रखी कुर्सी पर बिखरे हुए पाए गए थे।“जिस समय अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण चल रहा है, हमारे राज्य में भगवान राम की मूर्ति को नष्ट कर दिया गया है। मूर्ति के सिर को अलग करना एक पागल व्यक्ति का कार्य नहीं हो सकता है। यह धार्मिक उन्मादियों का कृत्य है।”

विशाखापत्तनम/नयी दिल्ली :

एक तरफ आंध प्रदेश की सरकार पर मुस्लिमों और ईसाइयों के तुष्टिकरण के आरोप लग रहे हैं, दूसरी तरफ हिंदू मंदिरों पर हमले रुक नहीं रहे। ताजा घटना में प्रदेश के विजयनगरम जिले के नेल्लीमरला मंडल में एक पहाड़ी पर स्थित मंदिर में अज्ञात उपद्रवियों ने भगवान राम की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया।

मूर्ति रामतीर्थम गाँव के पास पहाड़ी की चोटी पर स्थित बोडिकोंडा कोदंडाराम मंदिर में विराजमान थी। कथित तौर पर उपद्रवी ताला तोड़ मंदिर के गर्भगृह में घुसे और और स्वामी कोदंडारामुडु का सिर काटकर अलग कर दिया।

बताया जाता है कि यह मूर्ति 400 साल पुरानी थी। इसके साथ ही मंदिर में माता सीता और लक्ष्मण की भी मूर्तियाँ विराजमान हैं। मुख्य मंदिर पहाड़ी की तलहटी में है। जिस मंदिर में मूर्ति क्षतिग्रस्त की गई वह पहाड़ी की चोटी पर है। एक ही पुजारी दोनों मंदिरों में नियमित अनुष्ठान करते हैं। यह घटना तब सामने आई जब पुजारी मंगलवार (दिसंबर 29, 2020) सुबह मंदिर में नियमित अनुष्ठान करने के लिए पहुँचे।

मंगलवार की सुबह, पुजारियों को रामतीर्थम में बोडिकोंडा पहाड़ी पर प्राचीन सीता लक्ष्मण कोदंडाराम मंदिर के दरवाजे खुले मिले और गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति का सिर धड़ से अलग दिखा। मंदिर के कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। बुधवार को क्षतिग्रस्त किए गए हिस्से को पास के तालाब में प्रवाहित कर दिया गया।

जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को एक बयान में कहा, “जिस समय अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण चल रहा है, हमारे राज्य में भगवान राम की मूर्ति को नष्ट कर दिया गया है। मूर्ति के सिर को अलग करना एक पागल व्यक्ति का कार्य नहीं हो सकता है। यह धार्मिक उन्मादियों का कृत्य है।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को लेकर लापरवाह है। इसकी वजह से ही यह घटना हुई है। उन्होंने पूछा कि मंदिर पर लगातार हो रहे हमले पर मुख्यमंत्री जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं? वे चुप क्यों हैं?

पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुँचकर सबूत इकट्ठे किए और अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें बनाई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जाँच सभी संभावित एंगल से की जा रही है।

TNM से बात करते हुए, जिला पुलिस अधीक्षक (SP) राजा कुमारी ने कहा, “घटना सोमवार को मंदिर के बंद होने के बाद हो सकती है। यह कल (मंगलवार) हमारे संज्ञान में आई। अज्ञात बदमाशों ने भगवान राम की मूर्ति का सिर अलग कर दिया। अभी तक आरोपित का पता नहीं चला है। टीमें मामले पर काम कर रही हैं।”

मूर्ति के क्षतिग्रस्त होने के पीछे के मकसद के बारे में पूछे जाने पर एसपी ने कहा, “यह घटना दुर्घटना की तरह नहीं दिख रही है, बल्कि इरादन किया गया कृत्य जान पड़ता है। हालाँकि, फिलहाल हम इस बारे में निष्कर्ष नहीं निकाल सकते हैं कि इसके पीछे क्या इरादे थे।”

घटना की जानकारी मिलने के बाद टीडीपी के स्थानीय नेता एस.रविशेखर और अन्य लोगों ने मंदिर में जाकर पहाड़ी पर धरना दिया। उन्होंने सरकार से उपद्रवियों पर कार्रवाई करने और मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करने की माँग की। वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष आर.पावनी और अन्य लोगों ने भी मंदिर का दौरा किया और धरना दिया। उन्होंने भी घटना की निंदा की और सरकार से अपराधियों का पता लगाने और मंदिर की सुरक्षा करने की माँग की।

दूसरी तरफ, नेल्लीमारला के विधायक बी.पला नायडू ने मंदिर का दौरा किया और स्थिति की समीक्षा की। रामतीर्थम परिक्षेत्र परिषद के अध्यक्ष श्रीनिवासानंद स्वामी ने भी मंदिर का दौरा किया और कहा कि इसकी अपमानजनक घटना से भक्तों की भावनाएँ आहत हुई है। सरकार को इस मुद्दे पर तेजी से काम करना चाहिए और जनता में विश्वास पैदा करना चाहिए। राज्य के सभी मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से आंध्र प्रदेश में लगातार हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ सामने आ रही हैं। कहीं मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है, तो कहीं रथों को आग में जलाकर राख किया जा रहा है। 27 सितंबर को चित्तूर जिले में एक शिव मंदिर पर हमला किया गया और मंदिर में स्थित नंदी की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर में नंदी की मूर्ति को 26 और 27 सितंबर की रात कुछ बदमाशों ने तोड़ा। मूर्ति के टुकड़े पास रखी कुर्सी पर बिखरे हुए पाए गए थे।

ग्रेटर हैदराबाद निगम चुनावों में भाजपा की 4 से 49 पर छलांग, ओवैसी ने अपनी जमीन तो बचा ली लेकिन केसीआर का किला ध्वस्त हो गया

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में पहली बार इतना जोर-शोर दिखा. बीजेपी ने तो इस चुनाव में अपने राष्ट्रीय नेताओं जैसे गृह मंत्री अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को प्रचार के लिए उतार दिया था. चुनाव प्रचार के दौरान AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी काफी बयानबाजी की .GHMC Election 2020 में कुल 74,44,260 मतदाता हैं, जबकि कुल 1,122 उम्मीदवार अपनी किस्मत को आजमा रहे थे.

  • ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत
  • बीजेपी को 49 सीटों पर मिली जीत
  • तेलंगाना की जनता का आभार: अमित शाह

नयी दिल्ली/हैदराबाद:

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. देश के सबसे बड़े नगर निगम में से एक ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के चुनाव में बीजेपी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 49 सीटों पर सीट हासिल की है. वहीं, केसीआर की पार्टी टीआरएस को 56 और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को 43 सीटों पर जीत मिली. हालांकि इस बार किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है 150 वार्डों वाले ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 75 है. 

बीजेपी की जीत पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया है. उन्होंने कहा कि तेलंगाना की जनता ने पीएम मोदी पर भरोसा जताया. तेलंगाना की जनता का आभार. आपको बता दें इस चुनाव के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत लगा दी थी. 

अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे बीजेपी के स्टार प्रचारकों ने निगम के चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार किया था. दोनों ही नेताओं ने हैदराबाद में रोड शो किया था और असदुद्दीन ओवैसी पर जमकर निशाना साधा था. 

बीजेपी बाजीगर बनकर उभरी

नगर निगम के चुनाव में बीजेपी बाजीगर बनकर उभरी है. इस शानदार जीत के बाद सवाल उठता है कि क्या दक्षिण के दुर्ग का दूसरा दरवाजा बीजेपी के लिए जल्द ही खुलनेवाला है. क्या कर्नाटक के बाद बीजेपी दक्षिण के दूसरे राज्यों में भी सत्ता के शिखर पर पहुंचने में कामयाब हो जाएगी. चुनाव तो वैसे नगर निगम का था लेकिन रोमांच किसी लोकसभा-विधानसभा चुनाव से कम नहीं. बीजेपी ने ताकत झोंकी तो नतीजे भी गवाही देने लगे. दक्षिण के दुर्ग में दूसरा दरवाजा खोलने की बीजेपी की रणनीति काम कर गई.

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम का सियासी रसूख ही कुछ ऐसा है कि इस दुर्ग में जगह बनाना बीजेपी के लिए जरुरी था. यह नगर निगम 4 जिलों में है, जिनमें हैदराबाद, मेडचल-मलकजगिरी, रंगारेड्डी और संगारेड्डी शामिल हैं. पूरे इलाके में 24 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं तो तेलंगाना की 5 लोकसभा सीटें आती हैं.

यही वजह है कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में केसीआर से लेकर बीजेपी, कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी तक ने दिन रात एक कर दिया, लेकिन पिछली बार हाशिये पर खड़ी बीजेपी ने इस बार कमाल कर दिया. बीजेपी के शानदार परफॉर्मेंस का असर ये होगा कि दक्षिण में कर्नाटक के बाद तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में पैर पसारने में बीजेपी को राहत रहेगी जहां बीजेपी अबतक कामयाबी के लिए बरसों से जी-तोड़ मेहनत कर रही है.  

केसीआर का किला ध्वस्त 

जश्न भले ही टीआरएस खेमे में है लेकिन झटका भी उसे ही लगा है. ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में केसीआर की पार्टी वैसे तो सबसे बड़े प्लेयर बनकर उभरी है लेकिन चुनाव ओवैसी बनाम बीजेपी हो गया. बीजेपी ने इस चुनाव के जरिए दक्षिण के सियासी समंदर की गहराई नापी. वहां की फिजां में लोगों का मूड भांपा. दक्षिण भारत में लोकतांत्रिक विस्तार का तापमान जाना. 

चुनाव प्रचार में ही ओवैसी और बीजेपी जिस तरह एक दूसरे पर प्रहार कर रहे थे उससे लगने लगा था कि टीआरएस के लिए इस बार बहुमत हासिल करना आसान नहीं होगा. ओवैसी ने अपनी जमीन तो बचा ली लेकिन केसीआर का किला ध्वस्त हो गया.

क्यों अहम है हैदराबाद नगर निगम चुनाव

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) देश के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक है. यह नगर निगम 4 जिलों में है, जिनमें हैदराबाद, मेडचल-मलकजगिरी, रंगारेड्डी और संगारेड्डी शामिल हैं. पूरे इलाके में 24 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं तो तेलंगाना की 5 लोकससभा सीटें आती हैं. यही वजह है कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में केसीआर से लेकर बीजेपी, कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी तक की साख दांव पर लगी हुई है. 

46 फीसदी से अधिक मतदान

इस बार 46.55% मतदान हुआ. 2009 के हैदराबाद नगर निगम चुनाव में 42.04 फीसदी तो 2016 में हुई नगर निगम चुनाव में 45.29 फीसदी लोगों ने ही वोट डाले थे. हालांकि पिछले 2 चुनाव से ज्यादा इस बार वोटिंग दर्ज की गई.

पिछले चुनाव में टीआरएस को मिला था बहुमत

2016 में हुए ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव की बात करें तो टीआरएस ने 150 वार्डों में से 99 वार्ड में जीत हासिल की थी, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को 44 वार्ड में जीत मिली थी. जबकि बीजेपी महज तीन नगर निगम वार्ड में जीत दर्ज कर सकी थी और कांग्रेस को महज दो वार्डों में ही जीत मिली थी.

हैदराबाद को भाग्यनगर बनाने के लिए आया हूं, ओवैसी के गढ़ में गरजे योगी

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग पूछ रहे थे कि क्या हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर किया जाएगा?  मैंने कहा- क्यों नहीं, बीजेपी के सत्ता में आने के बाद जब फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या हो गया, इलाहाबाद का नाम प्रयागराज हो गया तो फिर हैदराबाद का नाम भाग्यनगर क्यों नहीं हो सकता है.” उन्होंने आगे कहा कि ”मैं जानता हूं कि यहां कि सरकार एक तरफ जनता के साथ लूट खसोट कर रही है तो वहीं, AIMIM के बहकावे में आकर बीजेपी कार्यकर्ताओं  का उत्पीड़न कर रही है.” उन्होंने कहा कि इन लोगों के खिलाफ नई लड़ाई लड़ने के लिए आप लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए भगवान श्री राम की धरती से मैं स्वंय यहां आया हूं.”

हैदराबाद/दिल्ली:

बिहार विधानसभा में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी की निगाह अब तेलंगाना तथा पश्चिम बंगाल पर भी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मोर्चे पर हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ शनिवार को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में निकाय चुनाव (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपिल कॉर्पोरेशन) में मलकजगिरी इलाके में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में सभा के साथ एक रोड शो किया। 

एक दर्जन राज्यों में चुनाव प्रचार कर चुके योगी

विधानसभा की तैयारी में बीजेपी:

हैदराबाद निकाय चुनाव में चार प्रमुख पार्टियां हिस्सा ले रही हैं, टीआरएस, कांग्रेस,AIMIM और बीजेपी, मगर असली जंग बीजेपी और AIMIM के बीच ही दिख रही है. अब सवाल उठता है कि बिहार में AIMIM एऩडीए गठबंधन का स्पीकर चुनने में सहयोग देती है तो फिर यहां तल्खी क्यों हैं? दरअसल, बीजेपी को लगता है कि कर्नाटक के बाद तेलंगाना ही वो राज्य है, जहां वो अपनी पैठ बना सकती है.यहां कांग्रेस कमजोर है, चंद्रबाबू नायडू से लोग खफा हैं, टीआरएस मजबूत जरूर है,लेकिन अगर बीजेपी ओवैसी को उन्हीं के गढ़ में मात देने में सफल होती है तो विधानसभा चुनावों के लिए उसकी ताकत और बढ़ेगी. ऐसे में माना जा रहा है कि निकाय चुनावों में बीजेपी का दम असल में विधानसभा चुनावों की आगामी तैयारी है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेलंगाना के रोड शो में शनिवार (नवंबर 28, 2020) को भारी भीड़ उमड़ी। सीएम योगी आदित्यनाथ हैदराबाद में एक दिसंबर को होने वाले निकाय चुनाव (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपिल कॉर्पोरेशन) भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में रोड शो तथा जनसभा करने के लिए हैदराबाद में हैं। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज शाम को हैदराबाद के मलकजगिरी क्षेत्र में एक रोड शो किया। इस दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे लगे और साथ ही सुपरहिट फिल्म बाहुबली का गाना ‘जियो रे बाहुबली’ भी रोड शो में बजता दिखा। सीएम योगी के रोड शो के में- ‘आया आया शेर आया…. राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की’, योगी-योगी, जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम के भी गगनभेदी नारे लगाए गए।

रोड शो के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करते हुए हैदराबाद और तेलंगाना के लोगों को जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने की पूरी आजादी दी।”

CM योगी ने कहा, “बिहार में, AIMIM के एक नव-निर्वाचित विधायक ने शपथ ग्रहण के दौरान ‘हिंदुस्तान’ शब्द का उच्चारण करने से इनकार कर दिया। वे हिंदुस्तान में रहेंगे, लेकिन जब हिंदुस्तान के नाम पर शपथ लेने की बात आती है, तो वे संकोच करते हैं। यह AIMIM का असली चेहरा दिखाता है।”

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव के लिए मतदान एक दिसंबर को होगा। सीएम योगी ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के 150 वार्डों के लिए होने वाले चुनावों में प्रचार किया। सीएम योगी आदित्यनाथ के हैदराबाद में चुनाव प्रचार को एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी को सीधी चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य मुकाबला BJP-TRS में, कांग्रेस तीसरी पार्टी

ओवैसी ने यहाँ पर चुनाव में 51 प्रत्याशी उतारे हैं। हैदराबाद नगर निगम चुनाव में भी असदुद्दीन ओवैसी ने पुराने हैदराबाद के इलाके की सीटों पर अपनी पार्टी के प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें से पाँच टिकट हिंदुओं को दिए गए हैं। ओवैसी के 10 फीसदी प्रत्याशी हिंदू समुदाय के हैं। ओवैसी की पार्टी के हिंदू समुदाय के प्रत्याशी उन सीटों पर हैं, जहाँ पर हिंदू-मुस्लिम आबादी करीब-करीब बराबर यानी 50-50 फीसदी है और यहाँ विधानसभा सीट पर भी ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के विधायकों का कब्जा है।

गौरतलब है कि सीएम योगी के रोड शो से पहले ओवैसी ने कहा था कि अगर बीजेपी सर्जिकल स्ट्राइक करेगी तो एक दिसंबर को वोटर्स डेमोक्रेटिक स्ट्राइक करेंगे। ओवैसी ने किसानों के मुद्दे पर भी केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया था दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के ऊपर ठंड में पानी डाला गया, यह सरकार हर मोर्चे पर फेल है।