पाकिस्तान ने मुंबई हमले के सबूतों का क्या किया? : निर्मला सीतारमण

पुलवामा हमले पर मंगलवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने बताया कि भविष्य में पुलवामा आतंकी हमले जैसी किसी भी घटना से बचने के लिए प्रयास किए जाएंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि मंत्रालय जमीनी स्तर पर और जानकारी इकट्ठा कर रहा है.

गौरतलब है कि मंगलवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी पुलवामा हमले पर बयान जारी किया था. इमरान ने इस हमले में पाकिस्तान का हाथ होने से साफ इनकार किया. इमरान के बयानों पर पलटवार करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे पर अभी कुछ कहना नहीं चाहती हैं क्योंकि उनके शब्द देश के गुस्से और आक्रोश को जताने के लिए बहुत कम होंगे.

पहले भी दे चुके हैं उन्हें सबूत, क्या किया उनका?

पुलवामा हमले की जवाबी कार्रवाई से संबंधित सवाल पर सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पहले ही साफ कर चुके हैं कि सेना को पूरी आजादी दे दी गई है कि वो जब चाहे जैसे चाहे सही समय पर कार्रवाई करें.View image on Twitter

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Defence Minister Nirmala Sitharaman: Prime Minister has already said that forces have been given freedom to respond at any given time and as they see fit. #PulwamaTerrorAttack2887:24 PM – Feb 19, 201986 people are talking about thisTwitter Ads info and privacy

निर्मला सीतारमण ने कहा कि मुंबई हमले पर न सिर्फ ये सरकार बल्कि पूर्व की सरकारें भी पाकिस्तान को डोजियर और सबूत दे चुकी हैं. इसी के साथ उन्होंने सवाल किया कि इन पर पाकिस्तान ने अब तक क्या कदम उठाया है. गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर भारत सबूत देगा तो वह कार्रवाई करेंगे.

सेना का मनोबल मजबूत है

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘भारत में कानून की उचित प्रक्रिया के बाद, अदालतों से संपर्क किया गया और मुंबई के हमलावरों को उचित प्रक्रिया के तहत दंडित भी किया गया. जबकी पाकिस्तान में निचली अदालतों ने तक अपना काम किया है. पाकिस्तान के पास दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है.’

Defence Minister Nirmala Sitharaman: In India following due process of law, courts have been approached & Mumbai attackers have been given due process and been punished too. In Pakistan not even the first court is doing its job. There is nothing for Pakistan to show.ANI@ANIDefence Minister Nirmala Sitharaman: Since the Mumbai attack not just this government but earlier government too sent dossiers after dossiers and evidence. What action has Pakistan taken on them?2517:35 PM – Feb 19, 2019Twitter Ads info and privacy85 people are talking about this

सीतारमण से सुरक्षा बलों के मनोबल से संबंधित सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सेना के मनोबल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, वो अपना काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. जिस तरीके से भारतवासियों ने प्रतिक्रियाएं दी हैं उससे वो (सेना) काफी प्रोत्साहित हैं.

शिवाजी भोंसले उर्फ़ छत्रपति शिवाजी महाराज

संकलन: राजविरेन्द्र वशिष्ठ

छत्रपति शिवाजी भोसले

शिवाजी भोंसले उर्फ़ छत्रपति शिवाजी महाराज एक भारतीय शासक और मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। शिवाजी ने आदिलशाही सल्तनत की अधीनता स्वीकार ना करते हुए उनसे कई लड़ाईयां की थी। शिवाजी को हिन्दूओं का नायक भी माना जाता है। शिवाजी महाराज एक बहादुर, बुद्धिमान और निडर शासक थे। धार्मिक कार्य में उनकी काफी रूचि थी। रामायण और महाभारत का अभ्यास वह बड़े ध्यान से करते थे। वर्ष 1674 में शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ और उन्हें छत्रपति का ख़िताब मिला।

माँ जीजाबाई की गोद में बालक शिवा

शिवाजी महाराज का जन्म 19 फ़रवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। इनके पिता का नाम शाहजी भोसलें और माता का नाम जीजाबाई था। शिवनेरी दुर्ग पुणे के पास है। उनकी माता ने उनका नाम भगवान शिवाय के नाम पर शिवाजी रखा। उनकी माता भगवान शिवाय से स्वस्थ सन्तान के लिए प्रार्थना किया करती थी। शिवाजी के पिताजी शाहजी भोंसले एक मराठा सेनापति थे, जो कि डेक्कन सल्तनत के लिए कार्य किया करते थे। शिवाजी के जन्म के समय डेक्कन की सत्ता तीन इस्लामिक सल्तनतों बीजापुर, अहमदनगर और गोलकोंडा में थी। शिवाजी अपनी माँ जीजाबाई के प्रति बेहद समर्पित थे। उनकी माँ बहुत ही धार्मिक थी। उनकी माता शिवाजी को बचपन से ही युद्ध की कहानियां तथा उस युग की घटनाओं के बारे में बताती रहती थीं, खासकर उनकी माँ उन्हें रामायण और महाभारत की प्रमुख कहानियाँ सुनाती थीं। जिन्हें सुनकर शिवाजी के ऊपर बहुत ही गहरा असर पड़ा था। इन दो ग्रंथो की वजह से वो जीवनपर्यन्त हिन्दू महत्वो का बचाव करते रहे। इसी दौरान शाहजी ने दूसरा विवाह किया और अपनी दुसरी पत्नी तुकाबाई के साथ कर्नाटक में आदिलशाह की तरफ से सैन्य अभियानो के लिए चले गए। उन्होंने शिवाजी और जीजाबाई को दादोजी कोंणदेव के पास छोड़ दिया। दादोजी ने शिवाजी को बुनियादी लड़ाई तकनीकों के बारे में जैसे कि- घुड़सवारी, तलवारबाजी और निशानेबाजी सिखाई।

कोंडना पर हमला

शिवाजी महाराज ने वर्ष 1645 में, आदिलशाह सेना को बिना सूचित किए कोंड़ना किला पर हमला कर दिया। इसके बाद आदिलशाह सेना ने शिवाजी के पिता शाहजी को गिरफ्तार कर लिया। आदिलशाह सेना ने यह मांग रखी कि वह उनके पिता को तब रिहा करेगा जब वह कोंड़ना का किला छोड़ देंगे। उनके पिता की रिहाई के बाद 1645 में शाहजी की मृत्यु हो गई। पिता की मृत्यु के बाद शिवाजी ने फिर से आक्रमण करना शुरू कर दिया।

वर्ष 1659 में, आदिलशाह ने अपने सबसे बहादुर सेनापति अफज़ल खान को शिवाजी को मारने के लिए भेजा। शिवाजी और अफज़ल खान 10 नवम्बर 1659 को प्रतापगढ़ के किले के पास एक झोपड़ी में मिले। दोनों के बीच एक शर्त रखी गई कि वह दोनों अपने साथ केवल एक ही तलवार लाए गए। शिवाजी को अफज़ल खान पर भरोसा नही था और इसलिए शिवाजी ने अपने कपड़ो के नीचे कवच डाला और अपनी दाई भुजा पर बाघ नख (Tiger’s Claw) रखा और अफज़ल खान से मिलने चले गए। अफज़ल खान ने शिवाजी के ऊपर वार किया लेकिन अपने कवच की वजह से वह बच गए, और फिर शिवाजी ने अपने बाघ नख (Tiger’s Claw) से अफज़ल खान पर हमला कर दिया। हमला इतना घातक था कि अफज़ल खान बुरी तरह से घायल हो गया, और उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद शिवाजी के सैनिकों ने बीजापुर पर आक्रमण कर दिया।

शिवाजी ने 10 नवम्बर 1659 को प्रतापगढ़ के युद्ध में बीजापुर की सेना को हरा दिया। शिवाजी की सेना ने लगातार आक्रमण करना शुरू कर दिया। शिवाजी की सेना ने बीजापुर के 3000 सैनिक मार दिए, और अफज़ल खान के दो पुत्रों को गिरफ्तार कर लिया। शिवाजी ने बड़ी संख्या में हथियारों ,घोड़ों,और दुसरे सैन्य सामानों को अपने अधीन कर लिया। इससे शिवाजी की सेना और ज्यादा मजबूत हो गई, और मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे मुगल साम्राज्य का सबसे बड़ा खतरा समझा।

मुगलों के शासक औरंगजेब का ध्यान उत्तर भारत के बाद दक्षिण भारत की तरफ गया। उसे शिवाजी के बारे में पहले से ही मालूम था। औरंगजेब ने दक्षिण भारत में अपने मामा शाइस्ता खान को सूबेदार बना दिया था। शाइस्ता खान अपने 150,000 सैनिकों को लेकर पुणे पहुँच गया और उसने वहां लूटपाट शुरू कर दी। शिवाजी ने अपने 350 मावलो के साथ उनपर हमला कर दिया था, तब शाइस्ता खान अपनी जान बचाकर भाग खड़ा हुआ और शाइस्ता खान को इस हमले में अपनी 3 उँगलियाँ गंवानी पड़ी। इस हमले में शिवाजी महाराज ने शाइस्ता खान के पुत्र और उनके 40 सैनिकों का वध कर दिया। शाइस्ता खान ने पुणे से बाहर मुगल सेना के पास जा कर शरण ली और औरंगजेब ने शर्मिंदगी के मारे शाइस्ता खान को दक्षिण भारत से हटाकर बंगाल का सूबेदार बना दिया।

सूरत की लूट जहां शिवाजी को 132 लाख की संपत्ति हासिल हुई

इस जीत के बाद शिवाजी की शक्ति और ज्यादा मजबूत हो गई थी। लेकिन कुछ समय बाद शाइस्ता खान ने अपने 15,000 सैनिकों के साथ मिलकर  शिवाजी के कई क्षेत्रो को जला कर तबाह कर दिया, बाद में शिवाजी ने इस तबाही का बदला लेने के लिए मुगलों के क्षेत्रों में जाकर लूटपाट शुरू कर दी। सूरत उस समय हिन्दू मुसलमानों का हज पर जाने का एक प्रवेश द्वार था। शिवाजी ने 4 हजार सैनिकों के साथ सूरत के व्यापारियों को लूटने का आदेश दिया, लेकिन शिवाजी ने किसी भी आम आदमी को अपनी लूट का शिकार नहीं बनाया।

शिवाजी महाराज को आगरा बुलाया गया जहां उन्हें लागा कि उनको उचित सम्मान नहीं दिया गया है। इसके खिलाफ उन्होंने अपना रोष दरबार पर निकाला और औरंगजेब पर छल का आरोप लगाया। औरंगजेब ने शिवाजी को कैद कर लिया और शिवाजी पर 500 सैनिकों का पहरा लगा दिया। हालांकि उनके आग्रह करने पर उनकी स्वास्थ्य की दुआ करने वाले आगरा के संत, फकीरों और मन्दिरों में प्रतिदिन मिठाइयाँ और उपहार भेजने की अनुमति दे दी गई थी। कुछ दिनों तक यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा। एक दिन शिवाजी ने संभाजी को मिठाइयों की टोकरी में बैठकर और खुद मिठाई की टोकरी उठाने वाले मजदूर बनकर वहा से भाग गए। इसके बाद शिवाजी ने खुद को और संभाजी को मुगलों से बचाने के लिए संभाजी की मौत की अफवाह फैला दी। इसके बाद संभाजी को मथुरा में एक ब्राह्मण के यहाँ छोड़ कर शिवाजी महाराज बनारस चले गए। औरंगजेब ने जयसिंह पर शक करके उसकी हत्या विष देकर करवा डाली। जसवंत सिंह ( शिवाजी का मित्र) के द्वारा पहल करने के बाद सन् 1668 में शिवाजी ने मुगलों के साथ दूसरी बार सन्धि की। औरंगजेब ने शिवाजी को राजा की मान्यता दी। शिवाजी के पुत्र संभाजी को 5000 की मनसबदारी मिली और शिवाजी को पूना, चाकन और सूपा का जिला लौटा दिया गया, लेकिन, सिंहगढ़ और पुरन्दर पर मुग़लों का अधिपत्य बना रहा। सन् 1670 में सूरत नगर को दूसरी बार शिवाजी ने लूटा, नगर से 132 लाख की सम्पत्ति शिवाजी के हाथ लगी और लौटते वक्त शिवाजी ने एक बार फिर मुगल सेना को सूरत में हराया।

सन 1674 तक शिवाजी के सम्राज्य का अच्छा खासा विस्तार हो चूका था। पश्चिमी महाराष्ट्र में स्वतंत्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के बाद शिवाजी ने अपना राज्याभिषेक करना चाहा, परन्तु ब्राहमणों ने उनका घोर विरोध किया। क्योंकि शिवाजी क्षत्रिय नहीं थे उन्होंने कहा की क्षत्रियता का प्रमाण लाओ तभी वह राज्याभिषेक करेगा। बालाजी राव जी ने शिवाजी का सम्बन्ध मेवाड़ के सिसोदिया वंश से समबंद्ध के प्रमाण भेजे जिससे संतुष्ट होकर वह रायगढ़ आया और उन्होंने राज्याभिषेक किया। राज्याभिषेक के बाद भी पुणे के ब्राह्मणों ने शिवाजी को राजा मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद शिवाजी ने अष्टप्रधान मंडल की स्थापना कि। विभिन्न राज्यों के दूतों, प्रतिनिधियों के अलावा विदेशी व्यापारियों को भी इस समारोह में आमंत्रित किया गया। इस समारोह में लगभग रायगढ़ के 5000 लोग इकट्ठा हुए थे। शिवाजी को छत्रपति का खिताब दिया गया। उनके राज्याभिषेक के 12 दिन बाद ही उनकी माता का देहांत हो गया। इस कारण फिर से 4 अक्टूबर 1674 को दूसरी बार उनका राज्याभिषेक हुआ। दो बार हुए इस समारोह में लगभग 50 लाख रुपये खर्च हुए। इस समारोह में हिन्दू स्वराज की स्थापना का उद्घोष किया गया था।

शिवाजी के परिवार में संस्कृत का ज्ञान अच्छा था और संस्कृत भाषा को बढ़ावा दिया गया था। शिवाजी ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने किलों के नाम संस्कृत में रखे जैसे कि- सिंधुदुर्ग, प्रचंडगढ़, तथा सुवर्णदुर्ग। उनके राजपुरोहित केशव पंडित स्वंय एक संस्कृत के कवि तथा शास्त्री थे। उन्होंने दरबार के कई पुराने कायदों को पुनर्जीवित किया एवं शासकिय कार्यों में मराठी तथा संस्कृत भाषा के प्रयोग को बढ़ावा दिया।

शिवाजी एक कट्टर हिन्दू थे, वह सभी धर्मों का सम्मान करते थे। उनके राज्य में मुसलमानों को धार्मिक स्वतंत्रता थी। शिवाजी ने कई मस्जिदों के निर्माण के लिए दान भी दिए था। हिन्दू पण्डितों की तरह मुसलमान सन्तों और फ़कीरों को बराबर का सम्मान प्राप्त था। उनकी सेना में कई मुस्लिम सैनिक भी थे। शिवाजी हिन्दू संकृति का प्रचार किया करते थे। वह अक्सर दशहरा पर अपने अभियानों का आरम्भ किया करते थे।

शिवाजी, भारतीय नौसेना के पितामह

शिवाजी ने काफी कुशलता से अपनी सेना को खड़ा किया था। उनके पास एक विशाल नौसेना (Navy) भी थी। जिसके प्रमुख मयंक भंडारी थे। शिवाजी ने अनुशासित सेना तथा सुस्थापित प्रशासनिक संगठनों की मदद से एक निपुण तथा प्रगतिशील सभ्य शासन स्थापित किया। उन्होंने सैन्य रणनीति में नवीन तरीके अपनाएं जिसमें दुश्मनों पर अचानक आक्रमण करना जैसे तरीके शामिल थे।

अष्टप्रधान

शिवाजी को एक सम्राट के रूप में जाना जाता है। उनको बचपन में कुछ खास शिक्षा नहीं मिली थी, लेकिन वह फिर भी भारतीय इतिहास और राजनीति से अच्छी तरह से परिचत थे। शिवाजी ने प्रशासकीय कार्यों में मदद के लिए आठ मंत्रियों का एक मंडल तैयार किया था, जिसे अष्टप्रधान कहा जाता था। इसमें मंत्रियों प्रधान को पेशवा कहते थे, राजा के बाद सबसे ज्यादा महत्व पेशवा का होता था। अमात्य वित्त मंत्री और राजस्व के कार्यों को देखता था, और मंत्री राजा के दैनिक कार्यों का लेखा जोखा रखता था। सचिव दफ्तरी काम किया करता था। सुमन्त विदेश मंत्री होता था जो सारे बाहर के काम किया करता था। सेनापति सेना का प्रधान होता था। पण्डितराव दान और धार्मिक कार्य किया करता था। न्यायाधीश कानूनी मामलों की देखरेख करता था।

शिवाजी और अष्टप्रधान

मराठा साम्राज्य उस समय तीन या चार विभागों में बटा हुआ था। प्रत्येक प्रान्त में एक सूबेदार था जिसे प्रान्तपति कहा जाता था। हरेक सूबेदार के पास एक अष्टप्रधान समिति होती थी। न्यायव्यवस्था प्राचीन प्रणाली पर आधारित थी। शुक्राचार्य, कौटिल्य और हिन्दू धर्मशास्त्रों को आधार मानकर निर्णय दिया जाता था। गाँव के पटेल फौजदारी मुकदमों की जाँच करते थे। राज्य की आय का साधन भूमिकर था, सरदेशमुखी से भी राजस्व वसूला जाता था। पड़ोसी राज्यों की सुरक्षा की गारंटी के लिए वसूले जाने वाला सरदेशमुखी कर था। शिवाजी अपने आपको मराठों का सरदेशमुख कहा करते थे और इसी हैसियत से सरदेशमुखी कर वसूला जाता था।

शिवाजी महाराज ने अपने पिता से स्वराज की शिक्षा हासिल की, जब बीजापुर के सुल्तान ने उनके पिता को गिरफ्तार कर लिया था तो शिवाजी ने एक आदर्श पुत्र की तरह अपने पिता को बीजापुर के सुल्तान से सन्धि कर के छुड़वा लिया। अपने पिता की मृत्यु के बाद ही शिवाजी ने अपना राज-तिलक करवाया। सभी प्रजा शिवजी का सम्मान करती थी और यही कारण है कि शिवाजी के शासनकाल के दौरान कोई आन्तरिक विद्रोह जैसी घटना नहीं हुई थी। वह एक महान सेना नायक के साथ-साथ एक अच्छे कूटनीतिज्ञ भी थे। वह अपने शत्रु को आसानी से मात दे देते थे।

शिवाजी के सिक्के

एक स्वतंत्र शासक की तरह उन्होंने अपने नाम का सिक्का चलवाया। जिसे “शिवराई” कहते थे, और यह सिक्का संस्कृत भाषा में था।

3 अप्रैल, 1680 में लगातार तीन सप्ताह तक बीमार रहने के बाद यह वीर हिन्दू सम्राट सदा के लिए इतिहासों में अमर हो गया, और उस समय उनकी आयु 50 वर्ष थी। शिवाजी महाराज एक वीर पुरुष थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन मराठा, हिन्दू साम्राज्य के लिए समर्पित कर दिया। मराठा इतिहास में सबसे पहला नाम शिवाजी का ही आता है। आज महाराष्ट्र में ही नहीं पूरे देश में वीर शिवाजी महाराज की जयंती बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाई जाती है।

मनसे ने एफ़एम चैनलों को पाकिस्तानी कलाकारों के गीत संगीत न बजने की दी सलाह

मुंबई: जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने मुंबई के निजी एफएम चैनलों से कहा है कि वे पाकिस्तानी कलाकारों के गीत नहीं बजाएं. राज ठाकरे की पार्टी के एक नेता ने परिधानों के अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों से भी कहा है कि वे पाकिस्तान में बने कपड़े नहीं बेचें. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की महासचिव शालिनी ठाकरे ने कहा कि आतंकवादी हमले के मद्देनजर पार्टी ने यह निर्णय किया है. उन्होंने कहा, ‘‘अगर ये एफएम चैनल पाकिस्तानी कलाकारों का संगीत नहीं रोकते हैं तो उन्हें इसका नतीजा भुगतने को तैयार रहना चाहिए.’’

मनसे नेता अखिल चित्रे ने परिधानों के अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों को लिखा है और उनसे कहा है कि वे पाकिस्तान में पूरी तरह बने अथवा आंशिक रूप से बने कपड़े नहीं बेचें. उन्होंने कहा, ‘‘हमें पाकिस्तान में बने कपड़े खरीदने की आवश्यकता नहीं है. मैंने कपड़ों के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों को ईमेल भेजा है और उनसे इसे रोकने को कहा है.

अगर वे इसका पालन नहीं करते हैं तो उन्हें इसका परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा.’’ मनसे की सिने शाखा ने शनिवार को संगीत कंपनियों से कहा था कि वे पाकिस्तानी गायकों के साथ काम न करें. हाल ही में भूषण कुमार की टी सीरीज ने पाकिस्तानी गायकों राहत फतह अली खान और अतिफ असलम के साथ करार किया था. उरी में 2016 में हुए आतंकवादी हमले के बाद मनसे ने भारत में काम कर रहे पाकिस्तानी कलाकारों को देश छोड़ने को कहा था. 

सोनी ने सिधु को पुलवामा पर दिये बयान के कारण शो से किया बाहर

पुलवामा हमले के बाद नवजोत सि‍ंह सिद्धू ने पाकिस्‍तान से बातचीत करने का पक्ष लिया है. इसके बाद से ही उनका विरोध बढ़ता जा रहा है. सोनी टीवी ने उन्‍हें अपने शो से कुछ समय के लिए बाहर कर दिया है, उनकी जगह अर्चना पूर्ण सिंह के आने की

सिद्धू की बाजवा से डाली गलबहियाँ कांग्रेस को बहुत रास आ रहीं थीं, कांग्रेस ने जन॰ बाजवा से गले मिलने और वहाँ पाकिस्तान में आतंकवादी लोगों से मिलने पर सिद्धू का पक्ष लिया था और सिद्धू भी बहुत जोश में आ कर बोले थे ई उन्हे उनके कैप्टन यानि राहुल गांधी ने भेजा था। जबकि कैप्टन अंरिंदर ने उन्हे कड़े शब्दों में समझाया था। परंतु सिद्धू का पाकिस्तानी प्रेम कम ही नहीं हो रहा। जिस जन॰ बाजवा को वह गले मिले थे उसी बाजवा ने अपने संरक्षण में पल रहे आतंकी संगठन जैश की मदद से पुलवामा पर कायरता पूर्वक घातक हमला किया जिसमें 44 जवान शहीद हो गए। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जन॰ बाजवा को जहां ललकारा वहीं सिद्धू ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी। अब भारतीय जन मानस सिद्धू को ही पाकिस्तान जा कर बसने की सलाह दे रहा है।

नई दिल्‍ली : जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 40 जवानों की शहादत ने पूरे देश को गुस्‍से से भर दिया है. ऐेसे में पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बयान ने लोगों के गुस्‍से को और भड़का दिया है. दरअसल सिद्धू ने कहा कि ऐसे वक्‍त में भी पाकिस्‍तान से बातचीत जारी रखनी चाहिए. किसी एक व्‍यक्‍ति के लिए पूरे देश को जिम्‍मेवार नहीं माना जा सकता. इसके बाद ही देश में सिद्धू को ले‍कर विरोध बढ़ता जा रहा है.

इसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर मांग उठाई कि सिद्धू को कपिल शर्मा के शो से बाहर कर दिया जाए. कई दर्शकों ने तो कपिल के शो का बहिष्‍कार करने की मांग भी की. इसके बाद खबरें आईं कि फिलहाल सिद्धू को कपिल के शो से बाहर कर दिया गया है. अब ट्विटर सिद्धू को पंजाब केबिनेट से भी बाहर करने की मांग उठ रही है

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ANI Digital@ani_digital

Navjot Singh Sidhu has been sacked from ‘The Kapil Sharma Show’ after his controversial comments on Pulwama terror attack, a source told ANI.

Read @ANI story | https://www.aninews.in/news/entertainment/out-of-box/navjot-singh-sidhu-removed-from-the-kapil-sharma-show20190216163948/ …1,1154:45 PM – Feb 16, 2019389 people are talking about thisTwitter Ads info and privacy

ट्व‍िटर पर #SackSidhuFromPunjabCabinet ट्रेंड कर रहा है. दिल्‍ली बीजेपी के प्रवक्‍ता तेजिंदर पाल सिंह बग्‍गा ने मांग की है कि सिद्धू को कैप्‍टन अम‍रिंदर सिंह तुरंत मंत्र‍िमंडल से बाहर करें. खुद पंजाब के मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह पाकिस्‍तान को मुंहतोड़ जवाब देने की वकालत कर चुके हैं.

Tajinder Pal Singh Bagga@TajinderBagga

I demand @capt_amarinder Sahab to#SackSidhuFromPunjabCabinet . RT if you agree14.3K2:45 PM – Feb 16, 2019Twitter Ads info and privacy14.3K people are talking about this

Snehil Singh @snehils1994

सिन्धु के साथ सिद्धू का भी कुछ किया जाए । #SiddhuThrownOut #SackSidhuFromPunjabCabinet34:50 PM – Feb 16, 2019Twitter Ads info and privacySee Snehil Singh ‘s other Tweets

Santosh Ghuge@GhugeSantosh1

अब वक्त आ गया है।सिद्धू को हमेशा के लिये पाक से शांती वार्ता के लीये पाकिस्तान भेजने का। इतना बडबोला नेता तो पाक के काम आयेगा #SackSidhuFromPunjabCabinet14:51 PM – Feb 16, 2019Twitter Ads info and privacySee Santosh Ghuge’s other Tweets

Satya@Satya94537134

भारत की यही पुकार
Sidhu जाए cabinet से बाहर।
#SackSidhuFromPunjabCabinet14:43 PM – Feb 16, 2019Twitter Ads info and privacySee Satya’s other Tweets

Anurag Ankit@ImAnuragAnkit

👍

“आतंकवाद का देश होता है.” सोनी TV ने सिद्धू को करेक्ट कर दिया है #SackSidhuFromPunjabCabinet114:42 PM – Feb 16, 2019Twitter Ads info and privacySee Anurag Ankit’s other Tweets

पुलवामा हमला : पंजाब के मंत्री ने विरोध में रद्द किया पाकिस्तान का दौरा
चंडीगढ़: सिद्धू भले कुछ कहते रहें, लेकिन उनके ही मंत्र‍िमंडल के सहयोगी पंजाब के मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने पुलवामा आतंकी हमले के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए पाकिस्तान का अपना दौरा रद्द कर दिया है. पशुपालन और श्रम मंत्री 18-20 फरवरी को लाहौर के पशु एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘इंटरनेशनल बफेलो कांग्रेस’ में हिस्सा लेने के लिए जाने वाले थे.

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि पुलवामा में सीआरपीएफ कर्मियों पर नृशंस हमले के खिलाफ सख्त विरोध दर्ज कराने के लिए यह फैसला किया गया है. मंत्री ने कहा कि सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए राज्य के किसानों के साथ उन्हें पाकिस्तान जाना था. इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि आने वाले हैं.

मंत्री ने कहा कि सीआरपीएफ काफिले पर नृशंस हमले से उन्हें बहुत धक्का लगा है और शहीद जवानों के परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए पाकिस्तान के अपने दौरे को रद्द करने का फैसला किया है. पंजाब विधानसभा ने भी आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है और सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव पारित किया गया.

JP Atray Memorial Cricket: RBI Mumbai V/s Minerva Academy

Today the match between RBI Mumbai & Minerva Academy, Chandigarh was inaugurated by Dr.K.P. (IPS) DGP of Haryana alongwith Sh. Mukul Kumar (IAS), DC, Panchkula, Sh.Kamaldeep Goyal (IPS) DCP of Panchkula. Sh.Vivek Atray (IAS) & Convenor of the Tournament & Sh.Sushil Kapoor Organising Secretary gave the details above the 24th Edition of All India JP Atray Memorial Cricket Tournament organised by Punjab Cricket Association & recognised by BCCI. The match was reduced to 30 overs a side because of a wet patch on the wickets.

लोकसभा में बजट सत्र के छठे दिन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पीएम मोदी ने जवाब दिया.

नई दिल्ली: लोकसभा में पीएम मोदी ने गुरुवार को विपक्ष के सवालों का जवाब दिया. लोकसभा में बजट सत्र के छठे दिन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पीएम मोदी ने जवाब दिया. पीएम मोदी ने विपक्षी सांसदों को एक हैल्दी कॉप्टीशन के लिए भी बधाई दी. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पहली बार वोट डालने जा रही युवा पीढ़ी को भी भविष्य की शुभकामनाएं दीं. इस मौके पर उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा.

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, कांग्रेस मुक्त भारत का नारा मेरा नहीं है. ये तो महात्मा गांधी ने बहुत पहले ही कह दिया था. हम उनका ये सपना जरूर पूरा करेंगे. पीएम मोदी ने कहा, लोकतंत्र में आलोचना जरूरी होती है. आप मोदी की आलोचना कीजिए, बीजेपी की आलोचना कीजिए. लेकिन विपक्ष मोदी और बीजेपी की आलोचना करते करते करते देश की आलोचना करने लगते हैं. इस पर जब टोकाटाकी हुई तो पीएम मोदी ने कहा कि आप लोग ही हैं जो विदेश में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झूठे आरोप लगाते हैं.
पीएम मोदी ने कहा, पहले कभी नहीं हुआ जब देश की सेना पर उंगली उठाई गई. देश में चाहे किसी की भी सरकार रही हो, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि कभी भी किसी भी सरकार ने सेना पर सवाल उठाए हों. पीएम मोदी ने कहा, जब बात बजट की हो रही है, उस समय आप ईवीएम का रोना रो रहे हैं. कांग्रेस हम पर संस्थानों को खत्म करने का आरोप लगा रही है. लेकिन खुद उसने क्या किया. संस्थानों को कांग्रेस धमकाती है. न्यायपालिका को कांग्रेस धमकाती है. सीजेआई के खिलाफ महाभियोग कौन चलाना चाहता था. सेना पर आरोप किसने लगाए.

पीएम मोदी ने कहा, देश में आपातकाल कांग्रेस ने थोपा. लेकिन कहते हैं मोदी संस्थाओं को बर्बाद कर रहा है. सेनाध्यक्ष को गुंडा कांग्रेस ने कहा, और कहते हैं मोदी संस्थाओं को बर्बाद कर रहा है. आज खड़गे जी ने कहा कि मोदी जी जो बाहर बोलते हैं, वही राष्ट्रपति ने यहां कहा. इसका तात्पर्य है कि आप मानते हैं की आप बाहर कुछ और अंदर कुछ बोलते हैं और हम हमेशा सच बोलते हैं वो संसद हो या कोई जनसभा. जो कहते हैं कि ये अमीरों की सरकार है, तो मैं कहता हूं कि देश के गरीब ही मेरे अमीर हैं। गरीब ही मेरा इमान है, वही मेरी जिंदगी हैं, उन्ही के लिए जीता हूं, उन्हीं के लिए यहां आया हूं

महागठबंधन पर निशाना
पीएम मोदी ने अपने जवाब में महागठबंधन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, देश देख चुका है मिलावट खतरनाक है. अब तो महा मिलावट आने वाली है. उन्होंने कहा, इधर चुनाव की आहट हुई, उधर महा मिलावट होने लगी.

पीएम मोदी ने गिनाई अपनी उपलब्धि
कांग्रेस ने 2004, 2009 और 2014 में अपने मैनीफेस्टो में कहा कि तीन साल के अंदर हर घर में बिलजी पहुंचाएंगे. गरीबी हटाओ की तरह हर घर में बिजली पहुंचाएंगे के वादे को भी कांग्रेस आगे बढ़ाती रही. कांग्रेस के 55 वर्षों में देश में स्वच्छता कवरेज केवल 38% था,  हमारे 55 महीनों में बढ़कर 98% हो गया है. हमने अपने कार्यकाल में अधिक गति से काम किया है.

राफेल पर दिया जवाब
पीएम मोदी ने राफेल पर जवाब देते हुए कहा, इससे पहले देश में कभी भी सौदे बिना दलाली के पूरे हुए ही नहीं. अब कांग्रेस किस की शह पर ये सब कर रही है. उन्होने कहा, हम घोटालों के 3-3 राजदार पकड़कर लाए. दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में एक तरफ हमारे खिलाड़ी पदक जीतने के लिए मेहनत कर रहें थे और कांग्रेस के लोग अपनी वेल्थ बना रहें थे.

हम पर आरोप लगाए जा रहे हैं. लेकिन हम उन लोगों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जो लूटकर भाग गए हैं. जो लोग देश से भाग गए हैं, वो ट्विटर पर रो रहे हैं कि मैं तो 9 हजार करोड़ रुपये लेकर निकला था, लेकिन मोदी जी ने मेरे 13 हजार करोड़ जब्त कर लिए.

‘‘ जिस दिन ‘प्रधान सेवक’ नरेंद्र मोदी राजनीति से संन्यास ले लेंगे, मैं भी भारतीय राजनीति को अलविदा कह दूंगी. ‘: स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी ने कहा, ‘मेरी 15 वर्षीय बेटी अपने 10वीं के बोर्ड (इम्तिहान) और मेरा बेटा जो 12वीं में है अपने बोर्ड की तैयारी कर रहा है. मेरा मतलब है कि 2019 हम में से किसी के लिए भी आसान नहीं है’

पुणे: केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस दिन राजनीति से संन्यास लेंगे, उस दिन वह भी राजनीति को अलविदा कह देंगी. हालांकि, स्मृति ने कहा कि मोदी अभी कई बरस तक राजनीति में रहेंगे.

उन्होंने ‘वर्ड्स काउंट महोत्सव’ में एक परिचर्चा के दौरान यह कहा. जब एक श्रोता ने उनसे पूछा कि वह कब ‘प्रधान सेवक’ बनेंगी. दरअसल, इस शब्द का इस्तेमाल मोदी खुद के लिए करते हैं.

केंद्रीय मंत्री ने इस पर जवाब दिया, ‘‘ कभी नहीं. मैं राजनीति में बेहतरीन नेताओं के साथ काम करने के लिए आई हूं और इस मामले में मैं बेहद सौभाग्यशाली रही हूं कि मैंने दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज नेता के नेतृत्व में काम किया और अब मोदी जी के साथ काम कर रही हूं.’

उन्होंने कहा, ‘‘ जिस दिन ‘प्रधान सेवक’ नरेंद्र मोदी राजनीति से संन्यास ले लेंगे, मैं भी भारतीय राजनीति को अलविदा कह दूंगी. ‘

कहा था आसान नहीं रहने वाला ये साल
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एक कार्यक्रम में कुछ दिनों पहले कहा था कि  2019 कोई आसान साल नहीं होगा. हालांकि‍ अपनी बात को स्‍पष्‍ट करते हुए उन्‍होंने कहा था कि, वह इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि 2021 में वह भारतीय महिला विज्ञान कांग्रेस के उद्घाटन में हिस्सा ले पायेंगी. ‘भारतीय महिला विज्ञान कांग्रेस 2021’ के उद्घाटन कार्यक्रम के लिए स्मृति ईरानी को आमंत्रित किया गया है.  

स्मृति ईरानी ने कहा, ‘मेरी 15 वर्षीय बेटी अपने 10वीं के बोर्ड (इम्तिहान) और मेरा बेटा जो 12वीं में है अपने बोर्ड की तैयारी कर रहा है. मेरा मतलब है कि 2019 हम में से किसी के लिए भी आसान नहीं है’

स्मृति ईरानी ने कहा कि 2020-21 के लिए भारतीय महिला विज्ञान कांग्रेस की नवनिर्वाचित अध्यक्ष विजय लक्ष्मी सक्सेना ने 2021 के सत्र के लिए उन्हें आमंत्रित किया है. उन्होंने कहा कि ‘मैं नहीं जानती कि 2021 में मेरे होने की वैज्ञानिक संभावनाएं क्या हैं, इसके बावजूद मैं पूरे सम्मान और विनम्रता से उनके आमंत्रण को स्वीकार करती हूं.

अयोध्या गोलीकांड: तत्कालीन एसएचओ का दावा, ‘मौत का आंकड़ा कम दिखाने को दफनाई गईं कारसेवकों की लाशें’

साभार अर्श अग्रवाल के फकेबुक वाल से

जिस देश में देश द्रोहीयों, आतंकवादियों, दहशतगर्दों ज्धन्य अपराध करने वालों को मौत की सज़ा देने के बाद उचित संस्कार की परंपरा रही है वहीं तत्कालीन मुलायम सरकार ने कारसेवकों को उचित अंतिम संस्कार की बात तो दूर उनकी पहचान तक को खत्म कर दिया। हिन्दू कारसेवकों को उनकी पहचान के साथ दफना दिया गया। यह खुलासा एक निजी टीवी चैनल पर तत्कालीन एसएचओ बहादुर सिंह ने किया ।

अयोध्या गोलीकांड में कारसेवकों की मौत को लेकर आंकड़ों पर हमेशा संशय रहा है। हालांकि एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में तत्कालीन एसएचओ और राम जन्मभूमि थाने के प्रभारी वीर बहादुर सिंह ने बताया है कि मौत का आंकड़ा कम दिखाने के लिए कई कारसेवकों की लाशों को दफनाया गया था।


अयोध्‍या गोलीकांड के बारे में एक टीवी चैनल ने बड़े खुलासे का दावा किया तत्कालीन एसएचओ ने बताया कि कारसेवकों के मौत का आंकड़ा ज्‍यादा उन्‍होंने कहा कि आंकड़े नहीं पता हैं, लेकिन काफी संख्या में लोग मारे गए थे

अयोध्या में 1990 में यूपी की मुलायम सिंह सरकार के दौरान कारसेवकों पर पुलिस की गोलीबारी के मामले में एक टीवी चैनल ने बड़े खुलासे का दावा किया है। चैनल ने अपने स्टिंग में एक तत्कालीन अधिकारी से बात की। रामजन्मभूमि थाने के तत्कालीन एसएचओ वीर बहादुर सिंह ने बताया कि कारसेवकों के मौत का जो आंकड़ा बताया गया था, उससे ज्यादा कारसेवकों की मौत हुई थी।
राम जन्मभूमि थाने के तत्कालीन एसएचओ वीर बहादुर सिंह ने इस टीवी चैनल से बातचीत में बताया, ‘घटना के बाद विदेश तक से पत्रकार आए थे। उन्हें हमने आठ लोगों की मौत और 42 लोगों के घायल होने का आंकड़ा बताया था। हमें सरकार को रिपोर्ट भी देनी थी तो हम तफ्तीश के लिए श्मशान घाट गए, वहां हमने पूछा कि कितनी लाशें हैं जो दफनाई जाती हैं और कितनी लाशों का दाह संस्कार किया गया है, तो उसने बताया कि 15 से 20 लाशें दफनाई गई हैं। हमने उसी आधार पर सरकार को अपना बयान दिया था। हालांकि हकीकत यही थी कि वे लाशें कारसेवकों की थीं। उस गोलीकांड में कई लोग मारे गए थे। आंकड़े तो नहीं पता हैं, लेकिन काफी संख्या में लोग मारे गए थे।’
टीवी चैनल के इस सवाल पर कि कई लोग अपनों के बारे में पूछते हुए अयोध्या तक आए होंगे, उन्हें क्या बताया जाता था। पूर्व एसएचओ ने बताया, ‘हम उन्हें बताते थे कि ये लाशें (जिन्हें दफनाया गया है) उनके परिवार के सदस्यों की नहीं हैं।’
मुलायम सिंह यादव भी कई मौकों पर इस गोलीकांड को सही ठहराते रहे हैं। उन्होंने हमेशा कहा है, ‘हमने देश की एकता के लिए गोली चलवाई थी। आज जो देश की एकता है उसी वजह से है। हमें इसके लिए और भी लोगों को मारना पड़ता तो सुरक्षाबल मारते।’
क्या हुआ था 30 अक्टूबर 1990 के दिन?
बता दें कि वीएचपी के आह्वान पर साल 1990 के अक्टूबर महीने में लाखों कारसेवक अयोध्या में इकट्ठा हुए थे। उद्देश्य था कि विवादित स्थल पर मस्जिद को तोड़कर मंदिर का निर्माण किया जाए। जब हजारों की संख्या में लोग विवादित स्थल के पास की एक गली में इकट्ठा हुए उसी वक्त सामने से पुलिस और सुरक्षाबलों ने गोली चला दी। इसमें कई लोग गोली से तो कई लोग भगदड़ से मारे गए और घायल हुए। हालांकि मौतों के आंकड़े कभी स्पष्ट नहीं हुए, ऐसे में तत्कालीन अधिकारी का यह खुलासा हैरान करने वाला है।

अविवादित ज़मीन ‘न्यास’को लौटाई जाये ताकि निर्माण आरंभ हो: केंद्र सरकार

केंद्र का कहना है कि राम जन्मभूमि न्यास से 1993 में जो 42 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी सरकार उसे मूल मालिकों को वापस करना चाहती है.

नई दिल्‍ली : अयोध्‍या विवाद पर केंद्र की मोदी सरकार ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाते हुए  सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है. इसमें मोदी सरकार ने कहा है कि 67 एकड़ जमीन सरकार ने अधिग्रहण की थी. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है. सरकार का कहना है कि जमीन का विवाद सिर्फ 2.77 एकड़ का है, बल्कि बाकी जमीन पर कोई विवाद नहीं है. इसलिए उस पर यथास्थित बरकरार रखने की जरूरत नहीं है. सरकार चाहती है जमीन का कुछ हिस्सा राम जन्भूमि न्यास को दिया जाए और सुप्रीम कोर्ट से इसकी इजाजत मांगी है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह अपने 31 मार्च, 2003 के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश में संशोधन करे या उसे वापस ले. केंद्र सरकार ने SC में अर्जी दाखिल कर अयोध्या की विवादित जमीन को मूल मालिकों को वापस देने की अनुमति देने की अनुमति मांगी है. इसमें 67 एकड़ एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिसमें लगभग 2.77 एकड़ विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि का अधिग्रहण किया था.

केंद्र का कहना है कि राम जन्मभूमि न्यास से 1993 में जो 42 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी सरकार उसे मूल मालिकों को वापस करना चाहती है. केंद्र ने कहा है कि अयोध्या जमीन अधिग्रहण कानून 1993 के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसमें उन्‍होंने सिर्फ 0.313 एकड़ जमीन पर ही अपना हक जताया था, बाकि जमीन पर मुस्लिम पक्ष ने कभी भी दावा नहीं किया है.

अर्जी में कहा गया है कि इस्माइल फारुकी नाम के केस के फैसले में सुप्रीमकोर्ट ने कहा था कि सरकार सिविल सूट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद विवादित भूमि के आसपास की 67 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने पर विचार कर सकती है. केंद्र का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है और इसके खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है, गैर-उद्देश्यपूर्ण उद्देश्य को केंद्र द्वारा अतिरिक्त भूमि को अपने नियंत्रण में रखा जाएगा और मूल मालिकों को अतिरिक्त जमीन वापस करने के लिए बेहतर होगा.

बता दें कि अयोध्‍या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 29 जनवरी को सुनवाई होनी थी, लेकिन इसके लिए बनाई गई जजों की बेंच में शामिल जस्‍ट‍िस बोबड़े के मौजूद न होने पर अब ये सुनवाई आगे के लिए टल गई है. अभी इस मामले में सुनवाई के लिए तारीख भी तय नहीं हुई है. इससे पहले पीठ के गठन और जस्‍ट‍िस यूयू ललित के हटने के कारण भी सुनवाई में देरी हुई थी.

इससे पहले 25 जनवरी को अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए चीफ जस्‍ट‍िस रंजन गोगोई ने नई बेंच का गठन कर दि‍या था. इस बैंच में CJI रंजन गोगोई के अलावा एसए बोबडे, जस्टिस चंद्रचूड़, अशोक भूषण और अब्दुल नज़ीर शामि‍ल हैं. पिछली बैंच में कि‍सी मुस्‍ल‍िम जस्‍ट‍िस के न होने से कई पक्षों ने सवाल भी उठाए थे.

इससे पहले बनी पांच जजों की पीठ में जस्‍ट‍िस यूयू ललित शामि‍ल थे, लेकिन उन पर मुस्‍लि‍म पक्ष के वकील राजीव धवन ने  सवाल उठाए थे. इसके बाद वह उस पीठ से अलग हो गए थे. इसके बाद चीफ जस्‍ट‍िस ने नई पीठ गे गठन का फैसला किया था. वहीं अयोध्‍या में राम मंदिर निर्माण की मांग कर रहे साधु-संतों की ओर से प्रयागराज में चल रहे कुंभ में परम धर्म संसद का आगाज सोमवार को हो चुका है. स्‍वामी स्‍वरूपानंद सरस्‍वती के नेतृत्‍व में 30 जनवरी तक प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में परम धर्म संसद का आयोजन होगा.

वहीं साधु और संतों ने इस संबंध में बड़ा ऐलान भी किया हुआ है. उनका कहना है कि राम मंदिर सविनय अवज्ञा आंदोलन के जरिये बनाया जाएगा. प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में इस समय साधु और संतों का जमावड़ा लगा हुआ है. यहां विश्‍व हिंदू परिषद (विहिप) की धर्म संसद से पहले शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती परम धर्म संसद का आयोजन कर रहे हैं. यह परम धर्म संसद कुंभ में 28, 29 और 30 जनवरी तक चलेगी. इसमें राम मंदिर निर्माण के लिए चर्चा और रणनीति बनेगी. बता दें कि विश्‍व हिंदू परिषद 31 जनवरी को राम मंदिर मुद्दे पर धर्म संसद का आयोजन कर रही है.

इस बार राजपथ पर शास्त्रीय संगीत से बनाई ‘शंखनाद’ सुनाई देगी


डॉ. तनूजा नाफडे

इस बार राजपथ पर ब्रिटिश जमाने से बजाई जाने वाली मार्शल ट्यून की जगह ‘इंडियन ट्यून’ होगी

नई दिल्ली: यह ‘रिपब्लिक डे’ यादगार रहेगा. ब्रिटिश जमाने से बजाई जाने वाली मार्शल ट्यून की जगह ‘इंडियन ट्यून’ होगी. इस बार राजपथ पर शास्त्रीय संगीत से बनाई ‘शंखनाद’ यह धुन सुनाई देगी. नागपुर की डॉ. तनूजा नाफडे ने यह धुन तैयार की. आर्मी के जवान ही अब तक म्यूज़िक बनाते रहे हैं लेकिन भारतीय धुन बनाने के लिए पहली बार सेना के बाहर के व्यक्ति को यह काम दिया, फिर जाकर डॉ नाफडे ने धुन रच दी.

दरअसल इंडियन आर्मी में अब तक वेस्टर्न म्यूजिक की धुन गुंजती थी. जवानों को वेस्टर्न म्यूज़िक का ही ट्रेनिंग दिया जाता रहा. अब तक ब्रिटिश म्यूज़िक को लेकर ही इंडियन बैंड के गाने तैयार किए गए लेकिन महार रेजिमेंट में सबसे पहले यह बात सामने आई. तभी जनरल ओक ने डॉ. तनूजा नाफडे से संपर्क किया और इंडियन ट्यून बनाने की बात की. 

रिटायर्ड ब्रिगेडियर विवेक सोहेल ने ‘देश को आंच न आए’ यह गाना तैयार किया और उसकी धुन डॉ नाफडे ने रची. यही धुन अब पूरी सेना के लिए ख़ास बन गई. यह धुन सेना के तरफ़ से राजपथ पर सुनाई देगी. डॉ. तनुजा नाफडे ने कहा कि यह धुन बनाना मेरे लिए बड़ी चुनौती थी. शास्त्रीय संगीत और वेस्टर्न हार्मनी को मिलाकर धुन बनाई है. इंडियन आर्मी के लिए मेरा संगीत के माध्यम से कुछ तो योगदान रहा यह मेरे लिए गर्व की बात है.

यह धुन बनाने के लिए 36 कलाकार की ज़रूरत थी. डॉ नाफडे ने सभी कलाकार से लगातार अभ्यास करवाया. डॉ नाफडे ने कहा कि सेना में वेस्टर्न धुन बनाने वाले कलाकार हैं. उन्हे शास्त्रीय संगीत सिखाना मुश्किल काम था लेकिन सेना के जवान ने जल्दी से धुन पकड़ ली और कम वक़्त में यह तैयार भी हो गई.