महाराष्ट्र में 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की अनुशंसा पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यपाल की अनुशंसा पत्र पर मुहर लगा दी है. साल 1980 के बाद महाराष्ट्र में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा है. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मंगलवार को राजनीतिक पार्टियों को चौंकाते हुए, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा वाली एक रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी थी. 

दिल्ली:

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की अनुशंसा पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यपाल की अनुशंसा पत्र पर मुहर लगा दी है. साल 1980 के बाद महाराष्ट्र में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा है. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मंगलवार को राजनीतिक पार्टियों को चौंकाते हुए, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा वाली एक रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी थी.

राजभवन की ओर से घोषणा के अनुसार, ‘महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी इस बात से संतुष्ट हैं कि चूंकि राज्य सरकार को संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता. उन्होंने इस बाबत संविधान के अनुच्छेद 356 के प्रावधानों पर विचार करने के बाद आज एक रिपोर्ट दाखिल की है.’

इससे पहले राजभवन के सूत्रों ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के कयास को खारिज कर दिया था, इसके महज एक घंटे बाद ही यह अनुशंसा की गई है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने अपने मीडिया ब्रीफिंग में बताया था कि राजभवन ने इस तरह की अफवाहों को हवा दी थी.

राज्यपाल का यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब राकांपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था और मंगलवार रात 8.30 बजे तक इस बाबत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया था.

मालूम हो कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी+शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला था, लेकिन मुख्यमंत्री के पद को लेकर दोनों के बीच हुई लड़ाई के चलते सरकार नहीं बन पाई. इसके बाद राज्यपाल कोश्यारी ने नंबर एक पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. इसके बाद राज्यपाल ने बारी-बारी से नंबर दो शिवसेना और नंबर तीन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को सरकार बनाने का मौका दिया, लेकिन ये दोनों भी बहुमत का आंकड़ा जुटाने में असफल रहे हैं. इसके बाद राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा कर दी थी. विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं.

संजय निरूपम की राह पर संजय राऊत

संजय राउत का बड़बोलापन महाराष्ट्र में गठबंधन के रिश्तों के लिए खतरा बनता जा रहा है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे तक इस मसले में कुछ नहीं बोल रहे, लेकिन राउत बार हैं कि मानते ही नहीं. आखिर वह ये सब किसी के इशारे पर तो नहीं कर रहे है. हाल ही में उन्होंने शरद पवर से मुलाकात की थी उसके बाद से वह हस्पताल में दाखिल हैं।

नई दिल्ली: 

जैसे-जैसे दिन बीतता जा रहा है महाराष्ट्र की सियासत और भी दिलचस्प होती जा रही है. प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी, और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन विराजमान होगा? इस सवाल का हर कोई बड़ी ही बेसब्री से इंतजार कर रहा है. जोड़-तोड़ और आंकड़ों को अपने पक्ष में करने का खेल चल रहा है. बहुमत से दूर भाजपा ने माननीय राज्यपाल के
सरकार बनाने के न्योते को विनम्रता से माना कर दिया है, तो वहीं शिवसेना ने बहुमत का जादुई आंकड़ा अपने पक्ष में होने का दावा कर दिया है. जो भी हो, संजय राउत दिन कुछ ऐसी बातें कर रहे हैं, जो शिवसेना-भाजपा के रिश्तों में खटास पैदा करने का काम कर रहे हैं.

संजय राउत कैसे दोनों पार्टियों के बीच के रिश्तों में दरार डालने की कोशिश कर रहे हैं इसक 5 अहम सबूत आपको बताते हैं.

सबूत नंबर 1

ये दावा कितना सच्चा?

महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा गठबंधन की मुश्किलें बढ़ाते दिख रहे राउत ने एक बार फिर अजीबो-गरीब दावा कर दिया. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि हमारे पास बहुमत का आंकड़ा है. अभी हमारे पास 170 विधायकों का समर्थन है, जो 175 तक पहुंच सकता है. उन्होंने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ ये बोला कि ‘मैं आपको बता रहा हूं और मैं दावे के साथ कहता हूं. जल्द ही आपको पता चल जाएगा.’

मुलाकात हुई, क्या बात हुई?

संजय राउत जिस भरोसे के साथ बहुमत का दावा कर रहे है. उससे ऐसे संकेत जा रहे हैं कि पार्टी की ओर से कोई ना कोई खिचड़ी तो पक रही है. गुरुवार को संजय राउत एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से मिले थे. आज भी उन्होंने शरद पवार की जमकर तारीफ की है. जिसके बाद आज एनसीपी ने भी शिवसेना को समर्थन के संकेत दिए हैं. राउत ने कहा कि ‘शरद पवार साहब महाराष्ट्र के लिए देश के लिए हमेशा एक बड़े अनुभवी नेता रहे हैं. हमने उसको देखा है, बाला साहेब के बाद या बालासाहेब थे तब भी उनका हमेशा आदर किया है. आज भी उनके जैसा बड़ा अनुभवी कद वाला नेता नहीं है. हम जब भी चाहें उनका मार्गदर्शन भी लेते हैं.’ राऊत यहीं नहीं रुके उन्होंने इसके साथ ही प्रदेश के हालात का जिक्र करते हुए ये तक कह दिया कि ‘महाराष्ट्र में आज की जो स्थिति है परिस्थिति है जो चक्रव्यूह बना है ऐसा आपको लगता है. जो पेंच पड़ा है. उसके लिए अगर हम पवार साहब का मार्गदर्शन लेते हैं तो उसमें कुछ गलत नहीं है.’ और तब ही से वह अस्पताल में हैं और उनकी अंजिओप्लास्टी होने की भी खबर है।

सबूत नंबर 3

सामना के जरिए हमला

शिवसेना प्रवक्ता और सामना के एडिटर जितना मीडिया के माध्यम से भाजपा पर हमलावर हो रहे हैं. उतना ही उनके संपादन में छप रही पत्रिका में भाजपा के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में बीजेपी पर बड़े आरोप लगाए. शिवसेना ने साफ कर दिया है कि वो पिछली बार की तरह जल्दबाजी नहीं दिखाएगी और बीजेपी के सामने घुटने नहीं टेकेगी.

इसबार सामना में क्या लिखा?

शिवसेना ने सामना में लिखा है कि ‘कलियुग ही झूठा है. सपने में दिया गया वचन पूरा करने के लिए राजा हरिश्चंद्र ने राजपाट छोड़ दिया. पिता द्वारा सौतेली मां को दिए गए वचन के कारण श्रीराम ने राज छोड़कर वनवास स्वीकार कर लिया. उसी हिंदुस्तान में दिए गए वचन से विमुख होने का ‘कार्य’ भारतीय जनता पार्टी ने पूरा कर दिया. ये सब एक मुख्यमंत्री पद के कारण हो रहा है और राज्य में सरकार बनाने की प्रक्रिया अधर में लटकी है.’

शिवसेना ना सिर्फ भाजपा पर झूठ बोलने का आरोप लगा रही है बल्कि अनैतिक तरीके से सरकार बनाने की कोशिश करने की तोहमत भी मढ़ रही है. सामना में ये भी लिखा है कि चुनाव से पहले ‘युति’ करते समय क्या करार हुआ था, वो महत्वपूर्ण है. श्री फडणवीस पहले निर्धारित शर्तों के अनुरूप शिवसेना को ढाई साल मुख्यमंत्री पद देने को तैयार नहीं हैं. पदों का समान बंटवारा ऐसा रिकॉर्ड पर बोले जाने का सबूत होने के बावजूद बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस पलटी मारते हैं और पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग की मदद से सरकार बनाने के लिए हाथ की सफाई दिखा रहे हैं. ये लोकतंत्र का कौन-सा उदाहरण है?

सबूत नंबर 4

कहीं इतिहास तो नहीं दोहरा रहा?

संजय राउत के ये तेवर इतिहास के एक पन्ने को याद दिलाने का काम कर रहा है. कई साल पहले की बात है, साल 1993 में संजय निरुपम शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादक बनाए गए थे. कुछ बीतने के बाद उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर बागी तेवर अपना लिए. हालात ये हो गए थे कि हर कोई समझ ही नहीं पा रहा था, कि सामना में पार्टीलाइन के अलग बातें क्यों छप रही हैं. अप ऐसे में उस वक्त निरुपम को शिवसेना ने निकाल दिया था. संजय राउत के अलावा पार्टी का कोई बड़ा नेता आजकल इतनी बड़ी बातें नहीं बोल रहा है. लेकिन राउत हैं कि कभी अजीबो-गरीब पोस्टर साझा करते हैं. जिसमें शिवसेना पार्टी का निशान हाथ में कमल लिए गले में एनसीपी के निशान का माला पहना हुआ है. सिर्फ भाजपा पर ही नहीं, बल्कि पार्टी अध्यक्ष शाह को लेकर भी राउत ने सवाल खड़ा कर दिया. तो क्या राउत के तेवर इतिहास दोहराने का काम कर रहा है.

सबूत नंबर 5

ऐसा कहने वाले राउत कौन होते हैं?

संजय राउत भाजपा पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं. जिनती शिवसेना नहीं भड़क रही है, उद्धव और अन्य नेता नहीं बोल रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा राउत का पारा चढ़ा हुआ है. राउत ने अब किसी भी फॉर्मूले पर बातचीत करने से इंकार कर दिया है. उनका कहना है कि अब बात होगी तो सिर्फ मुख्यमंत्री पद पर होगी वरना शिवसेना अपने दम पर बहुमत हासिल कर मुख्यमंत्री बनाएगी. संजय राउत ने कहा कि ‘क्या शिवसेना बाजार में बैठी है? हमने बात की है मुख्यमंत्री पद की और मुख्यमंत्री पद पर ही चर्चा होगी. अगर नहीं होती है तो शिवसेना अपनी ताकत पर अपना मुख्यमंत्री बनाकर दिखाएगी.’

राउत ने ऐसा तो बोल दिया कि शिवसेना अपनी ताकत पर अपना मुख्यमंत्री बनाकर दिखाएगी, और चर्चा नहीं होगी. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब पार्टी हाईकमान ने इसपर चुप्पी साध रखी है. हर कोई इस बात का इंतजार कर रहा है कि उद्धव ठाकरे और अमित शाह के बीच बात होगी तो उसमें क्या निकलकर आएगा. तो ये सब बोलने वाले संजय राउत कौन होते हैं?

एनसीपी को मिला सरकार बनाने का न्योता

महाराष्ट्र में बीजेपी के बाद शिवसेना भी सरकार बनाने में नाकाम रही है. इसके बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने तीसरे नंबर की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को सरकार बनाने का न्योता भेजा है. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें राज्यपाल का न्योता मिला है.

चंडीगढ़:

महाराष्ट्र में बीजेपी के बाद शिवसेना भी सरकार बनाने में नाकाम रही है. इसके बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने तीसरे नंबर की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को सरकार बनाने का न्योता भेजा है. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें राज्यपाल का न्योता मिला है. वे शाम आठ बजे तक राज्यपाल से भेंट कर बताएंगे कि वे सरकार बनाने में सक्षम हैं या नहीं. मालूम हो कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा 105 सीटें आई हैं. वहीं शिवसेना को 56 और एनसीपी के 54 विधायक हैं. कांग्रेस के 44 विधायक हैं.

एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि सरकार बनाने के लिए हमें राज्यपाल का न्योता पत्र मिला है. हम कांग्रेस से बातचीत के बाद सरकार बनाने के किसी नतीजे पर पहुंचेंगे. शिवसेना को यह मौका मिला था, लेकिन वे राज्यपाल को बहुमत के आंकड़े को लेकर संतुष्ट नहीं कर पाए. कांग्रेस नेताओं की शरद पवार से मुलाकात के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा.

शिवसेना को राज्यपाल ने नहीं दिया वक्त

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात के बाद कहा, ‘हमसे कहा गया था कि 24 घंटे भीतर बताइए कि आप सरकार बनाएंगे या नहीं. हालांकि हमने 48 घंटे का वक्त मांगा था. हमने राज्यपाल से मिलकर उन्हें कह दिया है कि शिवसेना (Shiv Sena) सरकार बनाने को तैयार है. हमने राज्यपाल महोदय से कहा है कि हम सरकार तो बनाएंगे, लेकिन स्थाई सरकार के लिए हम सहयोगियों से अभी भी बातचीत कर रहे हैं.’

गवर्नर ने भाजपा और शिव सेना को 24 – 24 घंटे का समय दिया था जो कि अब राष्ट्रवादी कॉंग्रेस पार्टी के पाले में गया है। काँग्रेस और एनसीपी अपने बड़े द्श्मन भाजपा के बदले छोटे दुश्मन शिवसेना का साथ देने को तयार थे। कयास यह भी लगाए जा रहे थे कि अजित पवार माननीय राज्यपाल से मिल कर शिवसेना को समर्थन कि बात कहेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब कॉंग्रेस एनसीपी का मानना है कि किसी भी तरह दोबारा चुनाव नहीं होने चाहिए, सबसे बड़ा कारण राम मंदिर पर आया फैसला और मोदी के पक्ष में लहर है। यदि दोबारा चुनाव होते हैं तो तो शायद भाजपा इसका पूरा पूरा फायदा उठा ले जिससे कॉंग्रेस एक बार फिर सत्ता से दूर हो जाये।

राज्यपाल से मिलकर लौटे आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनको समर्थन करने वाली पार्टियों की अपनी प्रक्रिया होने के कारण उन्हें अभी तक समर्थन का पत्र नहीं मिला है. आदित्य ने कहा राज्यपाल ने उन्हें और समय देने से मना कर दिया है, लेकिन उनके सरकार बनाने के दावे को खारिज नहीं किया है. आदित्य ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार बनाने की कोशिश जारी रखेंगे.

उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अभी डील फाइनल नहीं हुई है. बातचीत का दौर जारी है. इसके अलावा कांग्रेस ने लिखित बयान जारी कर भी यही बात कही है. 


ओवैसी पर बरसे उद्धव ठाकरे

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज का दिन स्वर्ण अक्षरों से लिखने वाला दिन है न्याय देवता को प्रणाम. इतने दिनों से राम की कहानियां सुन रहे थे, आज विवाद खत्म हुआ है. सभी समाज का धन्यवाद. आज सभी को बालासाहेब की याद आ रही होगी. उन्होंने पहले कहा था कि गर्व से कहो हम हिन्दू है. मैं आडवाणी से मिलूंगा

चंडीगढ़:

अयोध्या विवाद मामले में 70 सालों तक चली कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों तक लगातार चली सुनवाई के बाद शनिवार को ऐतिहासिक फैसला आ गया. फैसला विवादित जमीन पर रामलला के हक में सुनाया गया. फैसले में कहा गया कि राम मंदिर विवादित स्थल पर बनेगा और मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन अलग से दी जाएगी. अदालत ने कहा कि विवादित 02.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन रहेगी. केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज का दिन स्वर्ण अक्षरों से लिखने वाला दिन है. न्याय देवता को प्रणाम. इतने दिनों से राम की कहानियां सुन रहे थे, आज विवाद खत्म हुआ है. सभी समाज का धन्यवाद. आज सभी को बालासाहेब की याद आ रही होगी. उन्होंने पहले कहा था कि गर्व से कहो हम हिन्दू है. मैं आडवाणी से मिलूंगा.”

ठाकरे ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को करारा जवाब देते हुए कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट नहीं है. दरअसल, ओवैसी ने फैसले पर नाखुशी जाहिर की है. उन्होंने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च है, लेकिन अचूक नहीं है. उन्होंने अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसले को तथ्यों के ऊपर आस्था की एक जीत बताया. वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या पर पुनर्विचार याचिका नहीं दाखिल करेगा. मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी फैसले पर संतुष्ट हैं.

ठाकरे ने यह भी कहा कि वह 24 नवंबर को अयोध्या जाएंगे. उन्होंने आगे कहा, “आनंद है, सभी को होना चाहिए, इससे किसी को तकलीफ नहीं होना चहिए. शिवनेरी जहां शिवाजी का जन्म हुआ है, वहां की मिट्टी लेकर गया था. एक साल के भीतर काम हुआ, अभी शिवनेरी जाकर नमन करूंगा. जिन लोगों की उस वक्त जान गई, उन लोगों को नमन करता हूं.” 

राम मंदिर पर आए फैसले ने ओवैसी के बिगड़े बोल

नई दिल्ली: 

अयोध्या मामला:

अयोध्या भूमि विवाद को लेकर पांच जजों की पीठ ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित ढांचे पर अपना एक्सक्लूसिव राइट साबित नहीं कर पाया. कोर्ट ने विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को देने का फैसला सुनाया, तो मुसलमानों को दूसरी जगह जमीन देने के लिए कहा है. AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने फैसला आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है. ओवैसी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, “मैं कोर्ट के फैसले से संतुष्‍ट नहीं हूं. सुप्रीम कोर्ट वैसे तो सबसे ऊपर है, लेकिन अपरिहार्य नहीं है. हमें संविधान पर पूरा भरोसा है, हम अपने अधिकार के लिए लड़ रहे हैं, हमें खैरात के रूप में 5 एकड़ जमीन नहीं चाहिए. हमें इस पांच एकड़ जमीन के प्रस्‍ताव को खारिज कर देना चाहिए. हम पर कृपा करने की जरूरत नहीं है.”

ओवैसी ने आगे कहा, ”अगर मस्जिद वहां पर रहती तो सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला लेती. यह कानून के खिलाफ है. बाबरी मस्जिद नहीं गिरती तो फैसला क्या आता है. जिन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराया, उन्हें ट्रस्ट बनाकर राम मंदिर बनाने का काम दिया गया है.”

सुप्रीम कोर्ट के पांचों जजों की सहमति से फैसला सुनाया गया है. फैसला पढ़ने के दौरान पीठ ने कहा कि ASI रिपोर्ट के मुताबिक नीचे मंदिर था. CJI ने कहा कि ASI ने भी पीठ के सामने विवादित जमीन पर पहले मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं. CJI ने कहा कि हिंदू अयोध्या को राम जन्म स्थल मानते हैं. हालांकि, ASI यह नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी. मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि वहां दोनों ही पक्ष पूजा करते थे. रंजन गोगोई ने कहा कि ASI की रिपोर्ट के मुताबिक खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनी थी. साथ ही सबूत पेश किए हैं कि हिंदू बाहरी आहते में पूजा करते थे.

साथ ही CJI ने कहा कि सूट -5 इतिहास के आधार पर है जिसमें यात्रा का विवरण है. सूट 5 में सीतार रसोई और सिंह द्वार का जिक्र है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए शांतिपूर्ण कब्जा दिखाना असंभव है. CJI ने कहा कि 1856-57 से पहले आंतरिक अहाते में हिंदुओ पर कोई रोक नहीं थी. मुसलमानों का बाहरी आहते पर अधिकार नहीं रहा.

अयोध्या मामले में फैसला कल सुबह 10:30 बजे, सारे देश में सुरक्षा के कड़े इंतेज़ाम

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट कल सुबह यानी 9 नवंबर को फैसला सुनाएगा. पांच जजों की पीठ यह फैसला सुनाएगी.
सूत्रों ने कहा कि न्यायाधीशों ने राज्य के अधिकारियों से पूछा कि कानून और व्यवस्था को बनाए रखने और इसे मजबूत करने के लिए क्या उन्हें किसी भी तरह की मदद की जरूरत है?

चंडीगढ़: 

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट कल सुबह यानी 9 नवंबर को फैसला सुनाएगा. पांच जजों की पीठ यह फैसला सुनाएगी. अयोध्या मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है. इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ यह फैसला सुनाएगी. यह भारत का सबसे पुराना मामला है. अयोध्या मामले में पक्षकार और पंच निर्वाणी अणी अखाड़े के परमाध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास ने कहा, ‘माहौल कोई बिगाड़ ही नहीं सकता है, हम लोग अयोध्यावासी सब मिलकर राम मंदिर का निर्माण करेंगे. इस पर कोई विचार न करे कोर्ट क्या कह रहे हैं. लड़ना होगा तो हम ही लड़ेंगे. यहां पर जो हो, एक धार्मिक व्यवस्था को जो व्यापार नहीं मिल रहा है उसपर ध्यान ना दें.’

वहीं इस मामले में मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, ‘हमारी अपील है, लोग शांति बनाए रखें. हम लोग साथ होंगे आज हम पूरी दुनिया को संदेश दे रहे हैं. हम भारत के वासी हैं, जो फैसला कोर्ट करेगा वह हम मानेंगे. हम हिन्दुस्तान को बड़ा देखना चाहते हैं. हमारे यहां कोई विवाद नहीं है, किसी के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं, तमाम साधू और मुस्लिम साथ दिखाई पड़ते हैं. पूरी दुनिया देख रही है हम एक हैं. यहां जात नहीं पूछी जाती है, यहां इंसानियत देखी जाती है, ये हमारे घर भी आते हैं और हम भी जाते हैं हम शान्ति चाहते हैं. सब रख रखाव सरकार के हाथ में है.’

यहां आपको बता दें कि अयोध्या जमीन विवाद के फैसले से पहले एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के साथ अति गोपनीय बैठक की. ऐसा मना जा रहा है कि बैठक में प्रदेश में कानून-व्यवस्था का न्यायाधीश ने जायजा लिया. सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी, डीजीपी ओम प्रकाश सिंह और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के साथ अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही पीठ के पांच न्यायाधीशों में से अन्य दो न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण भी मौजूद रहे.

अयोध्या मामले पर फैसला कभी भी आ सकता है, इसलिए बैठक में राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर केंद्रित चर्चा की गई. एक सूत्र ने कहा, ‘न्यायधीशों और राज्य अधिकारियों के बीच बैठक सुबह 11.30 बजे शुरू हुई और दोपहर 1 बजे खत्म हुई.’

सूत्रों ने कहा कि न्यायाधीशों ने राज्य के अधिकारियों से पूछा कि कानून और व्यवस्था को बनाए रखने और इसे मजबूत करने के लिए क्या उन्हें किसी भी तरह की मदद की जरूरत है?

अब फिल्म शूटिंग की मंजूरी मिलना होगा आसानऑनलाइन आवेदन के बाद सात दिन में मिल जाएगी मंजूरी

हरियाणा में फिल्म पॉलिसी के संबंध में सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक ने की राज्य के अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंगअब फिल्म शूटिंग की मंजूरी मिलना होगा आसानऑनलाइन आवेदन के बाद सात दिन में मिल जाएगी मंजूरी

कोरल,पंचकूला, 8 नवम्बर

हरियाणा में फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार ने फिल्म शूटिंग की मंजूरी के लिए ऑनलाइन सेंट्रल पोर्टल तैयार किया है। इस पोर्टल पर आवेदन के बाद सात कार्यदिवस के अंदर-अंदर फिल्म की मंजूरी प्रदान की जाएगी। इसी संबंध में सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक समीरपाल सरों ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी नगराधीश, डीआईपीआरओ तथा डीआईओ को दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने बताया कि इसके लिए जिलो में नगराधीश को नोडल अधिकारी बनाया गया है तथा डीआईपीआरओ सदस्य सचिव होंगे। सभी को जल्द की यूजर आईडी दी जाएगी जिसके माध्यम से उन्हें इस प्रक्रिया को पूरा करना है।

सरों ने स्पष्ट किया कि आवेदन करने वाले को कहीं भी व्यक्तिगत रूप से हाजिर नहीं होना है। उसे केवल ऑनलाइन पीआर हरियाणा की वेबसाइट पर फिल्म सैल पर जाकर आवेदन करना है। आवेदन के सात दिन के बाद मंजूरी पत्र भी उसे ऑनलाइन ही उपलब्ध हो जाएगा।उन्होंने बताया कि आवेदन में संबंधित 18 विभागों को अपने-अपने स्तर पर ऑनलाइन ही सारी कार्यवाही करनी है। अगर कहीं मंजूरी नहीं दी जा सकती तो उसका कारण बताकर उसे रद्द किया जा सकता है लेकिन बिना कारण कोई भी आवेदन रद्द नहीं किया जा सकता।

निर्माता को मिल सकती है 1 से 3 करोड़ तक की प्रोत्साहन राशिपंचकूला। सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक समीरपाल सरो ने बताया कि कोई फिल्म निर्माता हरियाणा की पृष्ठभूमि पर फिल्म बनाता है या हरियाणा के युवाओं को कलाकार के तौर रखता है अथवा अन्य तकनीकी स्टाफ के तौर पर उनसे काम लेता है तो उसे प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए भी इसी साइट पर आवेदन करना होगा। यह राशि एक करोड़ से लेकर तीन करोड़ तक हो सकती है।

इस संबंध में पीआर हरियाणा की वेबसाइट पर फिल्म पॉलिसी दी गई है। उसमें हर प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर 2018 को हरियाणा फिल्म पॉलिसी को कैबिनेट से मंजूरी के बाद गुरुग्राम से लांच किया गया था। इसमें कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिससे फिल्म निर्माताओं को हरियाणा में फिल्म बनाने के लिए आकर्षित किया जा सके। राज्य में हरियाणा फिल्म प्रमोशन बोर्ड बनाया गया है। इस बोर्ड के चेयरमैन हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के निवासी मशहूर फिल्म निर्माता सतीश कौशिक हैं।

पिंजोर-कालका और पंचकूला में हैं कई अच्छी लोकेशन

सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक समीरपाल सरो ने बताया कि फिल्म निर्माताओं के लिए हरियाणा राज्य में लगभग 40 स्थान ऐसे हैं जो फिल्म के लिहाज से बहुत ही आकर्षक हैं। इन क्षेत्रों में पंचकूला जिले में फिल्माकन के लिए मनोरम स्थानों की भरमार है। मोरनी और टीकर ताल की छटा देखते ही बनती है। मोरनी स्थित ऐतिहासिक नाहन के राजा के किले का सुदंर जीर्णोधार किया गया है। किले से सुदूर फैली घाटियां बहुत ही सुदंर लगती है। और कश्मीर सा नजार प्रस्तुत करती हैं। टीकर ताल भी डल झील जैसा सुदंर लगता है। यहाँ पर म्यूज्यिम से लेकर मनोंरंजन तक के सभी साधन उपलब्ध है। पिंजोर के बाग की छटा में कई लेयर की चटानों से इस बाग का सांैर्दय अप्रतिम नजर आता है। सुदंर पिंजोर से लेकर नारनौल तक ऐतिाहासिक धरोहरों से लेकर समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाले इस प्रदेश की तरफ आने वाले समय में फिल्म उद्योग बहुत अधिक संख्या में युवाओं के रोजगार के अवसर पर उपलब्ध कराएगा। 

मुझे फड़णवीस और अमित शाह के आशीर्वाद की जरूरत नहीं. इनके सच झूठ के सर्टिफ़िकेट की जरूरत नहीं: उद्धव ठाकरे

“बाला साहेब को वचन दिया है मैं शिवसेना का मुख्यमंत्री बनाऊंगा. शिवसेना का सीएम बनाने के लिए मुझे फड़णवीस और अमित शाह के आशीर्वाद की जरूरत नहीं. इनके सच झूठ के सर्टिफ़िकेट की जरूरत नहीं.’  उद्धव ठाकरे

चंडीगढ़: 

देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफा देने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. ठाकरे ने अपने संबोधन में साफ कहा कि हमें शिवसेना का मुख्यमंत्री बनाने के लिए फड़णवीस और बीजेपी अध्यक्ष शाह के आशीर्वाद की जरूरत नहीं है. मुझें दुख है कि शिवसेना पर गलत आरोप लगाए गए. 

शिवसेना चीफ ठाकरे ने कहा, “कुछ समय पहले मैंने कार्यवाहक सीएम देवेंद्र फडणवीस की प्रेस कॉन्फ्रेंस सुनी. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने कार्य गिनाए. विकास का काम उन्होंने अकेले नहीं किया, हम साथ थे. दुख है गलत आरोप लगाया गया. लोकसभा चुनाव के वक्त अमित शाह और फड़णवीस मेरे पास आए थे, मैं दिल्ली नहीं गया. चर्चा शुरू हुई उपमुख्यमंत्री पद की बात हुई तो मैंने कहा थ उपमुख्यमंत्री पद लेने के लिए लाचार नही हूं.”  

उन्होंने आगे कहा, “बाला साहेब को वचन दिया है मैं शिवसेना का मुख्यमंत्री बनाऊंगा. शिवसेना का सीएम बनाने के लिए मुझे फड़णवीस और अमित शाह के आशीर्वाद की जरूरत नहीं. इनके सच झूठ के सर्टिफ़िकेट की जरूरत नहीं.’ 

इससे पहले, शिवसेना प्रवक्ता ने राउत ने अगर हम चाहे तो सरकार बना सकते हैं, शिवसेना का मुख्यमंत्री बन सकता है. फडणवीस के बयान पर चुटकी लेते हुए राउत ने कहा, “अगर मुख्यमंत्री जी यह कहते हैं कि फिर एक बार उनकी सरकार आएगी मैं उनको शुभकामना देता हूं. लोकतंत्र में जिसके पास बहुमत है, वह सरकार बनाते हैं.”

संजय राऊत ने फड़नवीस के इस्तीफे पर तंज़ कसा

“अगर मुख्यमंत्री जी यह कहते हैं कि फिर एक बार उनकी सरकार आएगी मैं उनको शुभकामना देता हूं. लोकतंत्र में जिसके पास बहुमत है, वह सरकार बनाते हैं. मुख्यमंत्री होता है विरोध करने का कोई कारण नहीं है. मैं भी कहता हूं कि मेरी पार्टी की तरफ से अगर हम चाहे तो सरकार बना सकते हैं, शिवसेना का मुख्यमंत्री बन सकता है. ” संजय राऊत

चंडीगढ़:

शिवसेना नेता संजय राउत ने देवेंद्र फड़णवीस के बयान पर पलटवार किया है. राउत ने कहा कि एनसीपी नेता शरद पवार से मिलने के बाद पत्रकारों से कहा कि मैंने और पवार साहब ने फड़णवीस की पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस सुनी है. जहां तक उनका इस्तीफा है तो वो परंपरा के मुताबिक देना होता है. शिवसेना की तरफ से प्रधानमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर कोई बयानबाजी नहीं हुई.

राउत ने कहा, “ढाई ढाई साल का फॉर्मूला तय नहीं हुआ है, ये बात मुझे नहीं पता लेकिन उद्धव ठाकरे साहेब कह रहे हैं कि तय हुआ था. नितिन गडकरी उस वक़्त मौजूद नहीं थे. अगर मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि बीजेपी की सरकार फिर आएगी तो हम उन्हें शुभकामना देते हैं. हम चाहें तो सरकार बना सकते हैं और शिवसेना का मुख्यमंत्री भी बन सकता है.”  

राउत ने पत्रकारों से कहा, “हमारा इतना ही कहना था जो मुख्यमंत्री साहब बोल रहे थे कि 50-50 की बातें नहीं हुई थी, 2.5 साल का फॉर्मूला तय नहीं होता. मुझे मालूम है कि इस बारे में उद्धव साहब का कहना है कि सरकार से बातचीत हुई थी, यह इनकी कमिटमेंट है. गडकरी साहब उस वक्त नहीं थे, जब चर्चा हुई तब गडकरी साहब मातोश्री में मौजूद नहीं थे.” 

राउत ने फड़णवीस के बयान पर चुटकी लेते हुए कहा, “अगर मुख्यमंत्री जी यह कहते हैं कि फिर एक बार उनकी सरकार आएगी मैं उनको शुभकामना देता हूं. लोकतंत्र में जिसके पास बहुमत है, वह सरकार बनाते हैं. मुख्यमंत्री होता है विरोध करने का कोई कारण नहीं है. मैं भी कहता हूं कि मेरी पार्टी की तरफ से अगर हम चाहे तो सरकार बना सकते हैं, शिवसेना का मुख्यमंत्री बन सकता है.

उधर, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर दोहराया कि शिवसेना के साथ कभी भी 50-50 फॉर्मूले पर बात नहीं हुई थी. उन्होंने कहा, “हम लोग महारष्ट्र में गठबंधन में  लड़े  थे. सामूहिक रूप से हम सरकार बना सकते हैं. पहले दिन ही शिवसेना ने कह दिया कि और विकल्प खुल गए हैं. हमारे सबसे लंबा गठबंधन है. मुझे अभी भी लगता है कि मिलकर दोनों सरकार बनाएंगे. मेरी अमित जी से बात हुई. उन्होंने भी 50-50 की  बात पर कहा कि ये लोकसभा के लिए कहा था, बाकी विधानसभा के लिए कहा कि उसको अभी छोड़ दो. तो कोई वादा नहीं किया. मै चाहता हूं कि गठबंधन का मार्ग खुले तो बीजेपी इसका समर्थन करेगी.”

फड़नवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा

मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को अपना इस्तीफा सौंपा. महाराष्ट्र मे सरकार बनाने को लेकर शिवसेना की ओर से शुक्रवार तक कोई पेशकश न मिलने की हालत में फड़णवीस ने इस्तीफा दिया. दरअसल 9 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है.

इस्तीफा देने के बाद फड़णवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. हमने 5 साल तक महाराष्ट्र के विकास के लिए काम किया है. उन्होंने आगे कहा, “मै प्रधानमंत्री मोदी जी का धन्यवाद करता हूं. सभी हमारे साथ काम करने वाले मंत्रियों और साथियों का शुक्रिया करता हूं. मैने किसानों की हितकारी योजनाओं पर पूरी ईमानदारी से काम किया. सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया और नई योजनाओं का क्रियान्वयन किया.” 

फड़णवीस ने कहा, “विधानसभा में महायुती करके हम चुनाव में गए. शिवसेना -बीजेपी सहयोगी दल को इसमें सफलता मिली. 160 से जादा सीटे गठबंधन को मिली. 105 सीटे बीजेपी को मिली हैं. हम सबसे बड़े दल बने हैं. हमारा स्ट्राईक रेट जादा रहा है. जो सीटें लड़ी हैं, उसमें से 70 फिसदी सीट हमने जीती.” 

फड़णवीस ने कहा, “उद्धव ठाकरे ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह था कि सरकार बनाने के सभी विकल्प खुले हैं. हम महायुती गठबंधन से जीत के आए थे, फिर भी उन्होंने कहा कि सभी विकल्प खुले हैं. हमने तो पहले ही कहा कि की हम ‘महायुति’ की सरकार बनाएंगे. मेरे सामने कभी की ढाई ढाई साल का सीएम पद का विषय नहीं था.”  

फड़णवीस ने कहा, “बाला साहेब ठाकरे हमारे लिए पूज्यनीय हैं. हमने चुनाव लड़ते वक्त उद्धव ठाकरे के खिलाफ भी कभी टिप्पणी नहीं की. हमारे नेता पीएम मोदी के खिलाफ शिवेसना टीका-टिप्पणी करती रही है. केंद्र और राज्य में सरकार मे सहयोगी पक्ष रहना और हमारे शीर्ष नेतृत्व पर टिप्पणी करना सही नहीं है.” 

राज्य में एक बार फिर बीजेपी सरकार बनाने के आश्वासन के साथ फड़णवीस ने कहा, “मैं यह बात एक बार फिर से साफ तौर पर ऑन रिकॉर्ड रखना चाहता हूं कि सरकार बनाने के लिए हम तोड़फोड़ की राजनीति बिल्कुल नहीं करेंगे. अगली सरकार महाराष्ट्र मे बीजेपी की बनेगी ये तय है. विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप बेबुनियाद हैं.” 

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बयान दिया था कि जरूरत पड़ने पर मैं मध्यता करने को तैयार हूं. गडकरी ने कहा कि फिफ्टी-फिट्टी पर कोई बात नहीं हुई थी. जरूरत पड़ी तो मध्यस्थता को तैयार हूं. उधर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने फिर दोहराया कि उनकी पार्टी नहीं झुकेगी.