मुस्लिम कट्टरपंथियों ने उस्मानाबाद में किया प्रदर्शन, रोकने गए पुलिसकर्मियों को किया घायल

पुलिस ने बुधवार को बताया कि यह घटना विजय चौक इलाके में मंगलवार को रात करीब साढ़े 10 बजे हुई और हिंसक भीड़ को रोकने की कोशिश के दौरान चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। उस्मानाबाद शहर पुलिस थाना के निरीक्षक सुरेश बुधवंत ने बताया, ‘भीड़ ने विजय चौक इलाके में एक पोस्टर, एक पुलिस वाहन और एक ऑटो-रिक्शा को क्षतिग्रस्त कर दिया। भीड़ को रोकने की कोशिश करते समय एक अधिकारी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में 43 नामजद और 150 से 170 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

उस्मानाबाद/पुणे/नयी दिल्ली :

कट्टरपंथी मुगल आक्रान्ता औरंगजेब को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की गई थी, जिसमें उसकी आलोचना की गई है। इसके बाद महाराष्ट्र के उस्मानाबाद में लगभग 150 कट्टरपंथियों की अनियंत्रित भीड़ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर गई। इस हंगामे में चार पुलिसकर्मी घायल हो गए।

घटना मंगलवार रात साढ़े 10 बजे विजय चौक इलाके की है। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने एक फेसबुक पोस्ट पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए वाहनों पर पथराव किया और बैनर और होर्डिंग तोड़ डाले।

इस बीच हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में इंस्पेक्टर सुर्वे सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। उस्मानाबाद सिटी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सुरेश बुधवंत ने पीटीआई को बताया, “भीड़ ने विजय चौक इलाके में एक होर्डिंग, एक पुलिस वाहन और एक ऑटो-रिक्शा में तोड़फोड़ की। भीड़ को रोकने की कोशिश में एक अधिकारी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हो गए।”

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 333 (लोक सेवक को गंभीर चोट पहुँचाना), 353 (हमला या लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए आपराधिक बल) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम के तहत 44 लोगों के खिलाफ नामजद और 150 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

उस्मानाबाद के एक स्थानीय न्यूज पोर्टल ‘उस्मानाबाद लाइव‘ के अनुसार, यह सब मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा शुरू किया गया, जब उन लोगों ने नवरात्रि के दौरान चौक पर फहराए गए एक हिंदू धार्मिक ध्वज को हटाकर वहाँ अपने धार्मिक त्योहार के दिन अपना झंडा लगा दिया। इससे दोनों समूहों के बीच तनाव पैदा हो गया, जिसके बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट के बहाने कट्टरपंथियों की भीड़ ने पथराव और तोड़फोड़ किया।

हमने पहले भी बताया था कि कट्टरपंथी इस्लामिस्ट किस तरह से हमले, हत्या, आगजनी और बर्बरता को सही साबित करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। फिर चाहे फेसबुक पोस्ट को लेकर बेंगलुरू में हुआ दंगा हो या फिर बांग्लादेश में हिंदुओं पर टारगेटेड अटैक। हर बार कट्टरपंथी फेसबुक पोस्ट के बहाने अपनी हिंसा को सही ठहराने की कोशिश करते हैं।

नाबालिग द्वारा झूठा अपहरण और बलात्कार का मुकदमा दर्ज करा सरकार से मुआवजे के रुप मे प्राप्त की गई धनराशि वापस करने का आदेश

एक नाबालिग लड़की, जिसने दो पुरुषों द्वारा बलात्कार की शिकायत की थी, के अदालत में मुकर जाने के बाद, एक विशेष अदालत ने हाल के एक आदेश में उसे राज्य सरकार से प्राप्त किसी भी मौद्रिक मुआवजे को वापस करने का निर्देश दिया, इसे “एक बेईमान व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक धन का दुरुपयोग” कहा। “।

मुंबई/जयपुर :

मुंबई की एक अदालत ने एक नाबालिग पिडिता द्वारा दो अभियुक्तों के खिलाफ झूठी अपहरण और बलात्कार की एफ आई आर दर्ज करवा कर सरकार से मुआवजे के रुप मे प्राप्त धनराशि को लौटाने का आदेश दिया है। न्यायधीश बघेल ने कहा कि अगर उसे इस तरह की सहायता मिली है तो इस अदालत का दायित्व है कि वह सरकार को इस तथ्य से अवगत कराएं कि प्राथमिकी स्वयं शिकायतकर्ता द्वारा गलत तथ्यों पर गलत तरीके से दर्ज की गई है जैसा कि उसकी गवाही से पता चलता है

न्यायाधीश बघेले ने पीड़िता द्वारा महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुआवजे के रूप में प्राप्त की गई धनराशि को जप्त कर लौटाने का आदेश दिया है तथा आरोपित आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया

नाबालिग बालिका ने 4 मई 2016 को एक एफ आई आर दर्ज कराई की ऑटो रिक्शा में जाते समय दो युवकों ने उसका अपहरण किया और उसके साथ बलात्कार किया जिसे लेकर पुलिस ने आईपीसी की धारा 363 366 376 376d पोक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान किया तथा शिकायतकर्ता पीड़िता के 164 सीआरपीसी के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज करवाएं तत्पश्चात बालिका न्यायालय के सामने अपने पूर्व में किए गए कथन से मुकर गई और कहा कि इस तरह की मेरे साथ कोई घटना नहीं हुई जिसे लेकर न्यायालय ने यह आदेश दिया है

हालांकि अभियोजन पक्ष ने पीड़िता बालिका शिकायतकर्ता के खिलाफ झूठी गवाही देने के लिए न्यायालय को कार्रवाई करने का अनुरोध किया जिसे न्यायालय ने पीड़िता बालिका शिकायतकर्ता की उम्र को ध्यान में रखते हुए अभियोजन पक्ष का अनुरोध खारिज कर दिया।

यकीनन ‘वीर’ ही थे सावरकर

राजनाथ सिंह द्वारा दिया गया बयान कि वीर सावरकर ने मोहनदास करमचंद गांधी के कहने पर माफी मांगी थी अथवा माफी के लिए अंग्रेज़ हुकूमत को पत्र लिखा था। इस बात ने देश भर में अनर्गल राजनैतिक बहस छिड़ गईहाई।टीवी चैनल हों या प्रबुद्ध समाचार पत्र सभी इस बहस को दिखा एसएनए अथवा पढ़ा रहे हैं। जब हम उस काल खंड को दहते हैं तो हैरान होते हैं कि जहां सावरकर को दिन में 10 किलो तेल निकालना होता था और उन्हें यह त पता नहीं था कि दो कोठरी छोड़ कर उनका भाई कैद काट रहा है वह पत्र लिख पाये। कोल्हू में बैल कि जगह जुतना और फिर विमर्श पत्र लिखना क्या ही अचंभा है। अब कॉंग्रेस सावरकर को लेकर इतनी दुविधाग्रस्त क्यों है? रत्नगिरी में रहते हुए सावरर दलित बस्तियों में जाने का, सामाजिक कार्यों के साथ साथ धार्मिक कार्यों में भी दलितों के भाग लेने का और सवर्ण एवं दलित दोनों के लिए पतितपावन मंदिर की स्थापना का निश्चय लिया था। जिससे सभी एक स्थान पर साथ साथ पूजा कर सके और दोनों के मध्य दूरियों को दूर किया जा सके। यह भी एक कारण हैं कि कांग्रेस सावरकर की विरोधी बन कर खड़ी हो रही है, वरना 90 के दशक तक तो ऐसा देखने में नहीं आता था। उससे पहले भारत सरकार जब की कांग्रेस सत्तासीन थी ने सावरकर पर डाक टिकट भी जारी किया था। सत्ता के लाले पड़ने पर कॉंग्रेस हमेशा से झूठ सच की राजनीति करती आई है, इस मामले में भी यही हुआ।

राज वशिष्ठ, चंडीगढ़:

मेरे मन में प्रश्न उठता है कि, क्या मोहनदास गांधी कभी पर्यटन के लिए भी कालापानी गए थे? यदि नहीं गए थे तो वीर सावरकर ने गांधी से विमर्श कब किया? साथ ही एक बात और उठती है कि वीर सावरकर को क्या ही अनुमति थी कि वह पत्र व्यवहार कर सकें? क्या हमारी अथवा नयी पीढ़ी को पता भी है कि सावरकर को काला पानी कि सज़ा क्यों हुई थी? क्या उनके उस अपराध के पश्चात भी अंग्रेज़ सरकार उन्हें कागज कलाम पदाने कि हिम्मत जुटा पाती?

इन प्रश्नों के उत्तर खोजना कोई पुआल में सुई ढूँढने जैसा नहीं है। बस थोड़े से प्रयास की आवश्यकता है।

सबसे पहले पहली बात की सावरकर को सज़ा क्यों हुई?

सावरकर को सज़ा देने की पृष्ठ भूमि अंग्रेज़ सरकार बहुत पहले ही से तय कर चुकी थी। सावरकर की 1901 में प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंध का गौरव प्राप्त करती अत्यंत विचारोतेजक पुस्तक ‘1857 का सावतंत्र्य समर’। इस पुस्तक के प्रकाशन की संभावना मात्र से अंग्रेज़ हुकूमत थर्रा गयी थी। फिर भी इस प्स्त्का का गुप्त प्रकाशन एम वितरण हुआ। अंग्रेजों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस पुस्तक को नष्ट करने में कोई कोर कसर न छोड़ी।

वीर सावरकर को लंदन में रहते हुए दो हत्याओं का आरोपी बनाया गया। पहली, 1 जुलाई 1909 को मदन लाल ढींगरा द्वारा कर्नल विलियम हट वायली की हत्या जिसका अंग्रेजों ने सूत्रधार वीर दामोदर सावरकर को ठहराया। दूसरी 1910 में हुई नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए नासिक षडयंत्र काण्ड के अंतर्गत इन्हें साल 1910 में इंग्लैंड में गिरफ्तार किया गया। 8 अप्रैल,1911 को काला पानी की सजा सुनाई गई और सैल्यूलर जेल (काला पानी) पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया। मुक़द्दमा अंग्रेजों द्वारा अङ्ग्रेज़ी अदालत में चलाया गया और बाकी प्रबुद्ध विचाराओं की भांति इन्हे भी काले पानी की सज़ा सुना दी गयी। इन्हें 25 – 25 वर्ष की दो कारावासों का दंड दिया गया था जिसका अर्थ है की वह अपने आगामी जीवन के 50 वर्ष काला पानी में कोल्हू अथवा अंग्रेज़ मुलाजिमों की बग्घी में जुते रहते।

अब दूसरे प्रश्न पर, क्या मोहन दस करमचंद गांधी कभी अंडेमान राजनैतिक पर्यटन के लिए भी गए थे, तो उत्तर है ‘नहीं’। फिर गांधी – सावरकर कहाँ मिले?

गांधी सावरकर पहली बार इंग्लैंड में मिले थे, अक्तूबर 1906 में मिले थे। यह एक बहुत ही संक्षिप्त सी मुलाक़ात थी। दूसरी मुलाक़ात 24 अक्तूबर 1909 को इंडिया हाउस लंदन में हुई। तब तक वीर सावरर किसी भी आक्षेप को नहीं झेल रहे थे। अब यह प्रश्न कहाँ से उठा की गांधी ने सावरकर को दया याचिका डालने की सलाह कब और कहाँ दी?

इस बाबत व‍िक्रम संपत ने अपनी क‍िताब ‘Echoes from a Forgotten Past, 1883-1924’ में ल‍िखा है क‍ि व‍िनायक दामोदर सावरकर के छोटे भाई नारायण दामोदर सावरकर ने 1920 में एक चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्‍होंने अपने भाई के धुर व‍िरोधी व‍िचारधारा वाले मोहनदास करमचंद गांधी को खत ल‍िखा। छह खतों में से यह पहला खत ल‍िखा गया था 18 जनवरी, 1920 को। इसमें उन्‍होंने सरकारी माफी की योजना के तहत अपने दोनों बड़े भाइयों को जेल से र‍िहा करवाने के संबंध में मदद व सलाह मांगी थी।

नारायण सावरकर ने अपने पत्र में लिखा था कि कल (17 जनवरी) मुझे भारत सरकार द्वारा जानकारी मिली कि सावरकार बंधुओं को उन लोगों में शामिल नहीं किया गया है, जिन्हें रिहा किया जा रहा है। ऐसे में अब साफ हो चुका है कि भारत सरकार उन्हें रिहा नहीं करेगी। अपने पत्र में उन्होंने महात्मा गांधी से सुझाव मांगा था कि ऐसी परिस्थितियों में आगे क्या किया जा सकता है। इस चिट्ठी का जिक्र, कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी के 19वें वॉल्यूम के पेज नंबर 384 पर किया गया है।

नारायण सावरकर की इस चिट्ठी का जवाब महात्मा गांधी ने 25 जनवरी 1920 को दिया था, जिसमें उन्होंने सलाह दी थी कि राहत प्रदान करने की एक याचिका तैयार करें, जिसमें तथ्यों के जरिए साफ करें कि आपके भाई द्वारा किया गया अपराध पूरी तरह से राजनीतिक था। उन्होंने अपने जवाब में यह भी लिखा कि वह अपने तरीके से इस मामले में आगे बढ़ रहे हैं। गांधी द्वारा दिए गए इस जवाब का उल्लेख कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी के 19वें संस्करण में भी देखा जा सकता है।

अंग्रेजों से माफी मांगने का। इस मामले पर गांधी ने सावरकर को ‘चतुर’ बताते हुए कहा था कि ‘उन्होंने (सावरकर ने) स्थिति का लाभ उठाते हुए क्षमादान की मांग की थी, जो उस दौरान देश के अधिकांश क्रांतिकारियों और राजनीतिक कैदियों को मिल भी गई थी। सावरकर जेल के बाहर रहकर देश की आजादी के लिए जो कर सकते थे वो जेल के अंदर रहकर नहीं कर पाते।’

गांधी जी के इस कथन से इतना तो साफ है कि सावरकर अंग्रेजों के सामने झुके नहीं थे, बल्कि आगे की लड़ाई के लिए चतुराई दिखाई थी। खैर, बात करते हैं सावरकर से जुड़े तमाम पहलुओं की जो उनपर राय बनाने से पहले जानना जरूरी है।

भक्ति – अध्यातम ही नहीं अपितु व्यापार वाणिज्य से भी परिपूर्ण करते हैं शारदीय नवरात्रे

माँ भगवती

धर्म संस्कृति डेस्क, चंडीगढ़:

पित्र पक्ष में अपने पित्रों को तृप्त कर खुशी खुशी विदा करते हैं वहीं से शारदीय नवरात्रों का उल्लास त्योहारों की एक निरंतर लड़ी के आगमन की सूचना भी लाता है। आषाढ़ मास की आखिरी मूलाधार के पश्चात दक्षिणायन होते रश्मीरथी आर्याव्रत की भूमि पर अपनी उग्र उष्णता कम कर सौम्य होते जाते हैं मानों वह भी नवरात्रों में माँ भगवती का स्वागत कर रहे हों।

शारदीय नवरात्रि केवल मात्र शक्ति पूजन ही नहीं है, यह धन – धन्य से परिपूर्ण करने वाला समय है। जहां एक ओर हम माता के नौं रूपों की भक्ति करते हैं वहीं हमरे खलिहानों को भरने का समय भी होता है। नयी फसलें ज्वार , बाजरा , धान , मक्का , मूंग , सोयाबीन , लोबिया , मूंगफली , कपास , जूट , गन्ना , तम्बाकू , आदि से हमारे व्यापार – वाणिज्य में नवप्राणों का उत्सर्ग होता है। नया धान आने से कुटाई छनाई (शेल्लर उद्योग) गतिमान होता है वहीं गुड शक्कर और खांडसेरी की भट्टियाँ भी जल उठतीं हैं। चहुं ओर उल्लास का साम्राज्य दिखाई पड़ता है।

आज अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि (07 अक्तूबर) से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है। शारदीय नवरात्र का व्रत सभी महिलाएं और पुरुष कर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति खुद व्रत ना कर सके तो वह अपनी पुत्र या ब्राम्हण को अपना प्रतिनिधि बनाकर व्रत को पूर्ण करवा सकता है।

देश दहलाने के पाक के मंसूबे का पर्दाफाश, दाउद इब्रहीम का नाम फिर आया सामने

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि आतंकियों के टारगेट पर आने वाला त्योहार नवरात्र, दशहरा और दीपावली था। उन्होंने बताया कि अंडरवर्ल्ड से आतंकियों की फंडिंग हुई है। स्पेशल सेल ने ऑपरेशन में 6 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने अपना यह ऑपरेशन दिल्ली, महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश में चला इन्हें गिरफ्तार किया है। इस संबंध में उनको 15 अगस्त से पहले इनपुट मिले थे। इसी के बाद पुलिस ने अपनी पड़ताल शुरू की। काफी समय से पुलिस इस मॉड्यूल पर अपनी नजर बनाए हुए थी, मगर जब सूचना कन्फर्म हो गई तब इन लोगों को पकड़ा गया। अब आगे इनके पूछताछ चल रही है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो) :

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान समर्थित एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए पाक प्रशिक्षित दो आतंकवादियों सहित कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने मंगलवार को बताया कि स्पेशल सेल ने कई राज्यों में चले इस ऑपरेशन में विस्फोटक और हथियार बरामद किए गए हैं। इन सभी छह लोगों को दिल्ली, यूपी और महाराष्ट्र से पकड़ा गया है। गिरफ्तार आतंकियों में दो की शिनाख्त ओसामा और जीशान के रूप में हुई है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि इन दोनों आतंकियों की ट्रेनिंग पाकिस्तान में हुई थी। इन आतंकियों के अंडरवर्ल्ड से भी संबंध बताए जा रहे हैं।

इस गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल क स्पेशल सीपी नीरज ठाकुर ने बताया कि आशंका है कि इस ग्रुप में 14-15 लोग शामिल हैं और यह भी हो सकता है कि उन्हें भी यहीं ट्रेनिंग मिली हो। ऐसा लगता है कि यह ऑपरेशन को बॉर्डर के आसपास से ही ऑपरेट किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस की तरफ से जानकारी दी गई है कि इन्होंने 2 टीमें बनाई थी। एक टीम को दाउद इब्राहिम का भाई अनीष इब्राहिम को-ऑर्डिनेट कर रहा था। इस काम था कि बॉर्डर से हथियार जुटाकर पूरे भारत में हथियार पहुंचाए। दूसरी टीम के पास हवाला के जरिए फंड जुटाने का काम था। 

जानकारी के अनुसार, इन आतंकियों की गिरफ्तारी के लिए मल्टी स्टेट ऑपरेशन चलाया गया था। पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेने वाले दोनों आतंकियों में एक का नाम ओसामा और दूसरे का जीशान कमर है। इसके अलावा पकड़े गए 4 अन्य आरोपियों का नाम मोहम्मद अबु बकर, जान मोहम्मद शेख, मोहम्मद आमिर जावेद और मूलचंद लाला है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये सभी देश में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए साजिश रच रहे थे। साथ ही कई नामचीन हस्तियों को निशाना बनाने वाले थे, और देश का माहौल बिगाड़ना चाहते थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पकड़े गए आतंकियों में से एक का काम आने वाले फेस्टिवल सीजन में IED प्लांट करना था। नवरात्रि और रामलीला के दौरान भीड़ भरे इलाके इनके निशाने पर थे। आतंकियों से भारी मात्रा में विस्फोटक, हथियार और हाई क्वालिटी पिस्टल बरामद किए गए हैं।

ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर का ASI द्वारा सर्वेक्षण पर अलाहबाद उच्च न्यालय की रोक

भारत में बने इस मंदिर के जीर्णोद्धार का उल्लेख सतयुग में मिलता है जब सत्यवादी महाराज हरिश्चंद्र ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था फिर विरामी संवत के प्रारम्भिक वर्षों में महाराजा विक्रमादित्य ने करीब 2050 विकर्मी संवत के वरशूँ पूर्व करवाया था। मुगल काल के दिनों में महारानी अहल्या बाई होल्कर ने सान 1780 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था जिसका मौजूदा स्वरूप हमें दहने को मिलता है। 1664 में मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को तोड़कर उसके अवशेषों पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था जिसकी वास्तविकता जानने के लिए मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण कराना जरूरी है। मंदिर पक्ष का दावा है की मस्जिद परिसर की खुदाई के बाद मंदिर के अवशेषों पर तामीर मस्जिद के सबूत अवश्य मिलेंगें. इस लिए एएसआई सर्वेक्षण किया जाना बेहद जरूरी है। मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण से यह साफ हो सकेगा की मस्जिद जिस जगह तामीर हुई है वह जमीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई है या नहीं।

प्रयागराज/चंडीगढ़ :

वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद की जमीन का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने के सिविल कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने गुरुवार को रोक लगा दी है। जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच ने सर्वेक्षण पर रोक लगाते हुए सभी पक्षों से 2 हफ्ते में नए सिरे से जवाब दाखिल करने को कहा है। तब तक के लिए निचली अदालत के फैसले पर रोक लगी रहेगी। अदालत ने 1991 में दायर मुख्य मुकदमे की कार्यवाही पर भी अगली सुनवाई तक रोक लगाई है। अगली सुनवाई 8 नवंबर को होगी। अदालत के फैसले से मुस्लिम पक्षकारों को फौरी राहत मिली है।

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद व यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की याचिका पर स्टे का फैसला देते हुए अदालत ने वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के आदेश को निराधार बताया। अदालत ने कहा, रिकार्ड से यह स्पष्ट है कि इस अदालत ने सभी लंबित याचिकाओं पर निर्णय 15 मार्च 2021 को सुरक्षित रख लिया था। निचली अदालत को इस बात की पूरी जानकारी थी। इसे ध्यान में रखते हुए निचली अदालत को आगे सुनवाई कर सर्वेक्षण का आदेश नहीं देना चाहिए था, बल्कि इस अदालत के समक्ष लंबित याचिकाओं पर फैसला आने का इंतजार करना चाहिए था।

8 अप्रैल 2021 को वाराणसी के सीनियर डिवीजन सिविल जज ने वाद मित्र की याचिका पर पुरातात्विक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। एएसआई से खुदाई कराकर सर्वेक्षण के जरिए हकीकत का पता लगाने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाने को कहा था। मुस्लिम पक्षकारों ने सिविल जज के इस आदेश पर असहमति जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मस्जिद की इंतजामिया कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने इस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 31 अगस्त को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था।

यह है पूरा मामला

ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा पाठ करने का अधिकार देने आदि को लेकर वर्ष 1991 में मुकदमा दायर किया गया था। मामले में निचली अदालत व सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ 1997 में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट से कई वर्षों से स्टे होने से वाद लम्बित रहा। 10 दिसंबर 2019 में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने सिविल जज सीनियर डिविजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) आशुतोष तिवारी की अदालत में आवेदन देकर अपील की थी कि ढांचास्थल के पुरातात्विक सर्वेक्षण के लिए निर्देशित किया जाये। दावा किया कि ढांचा के नीचे काशी विश्वनाथ मंदिर के पुरातात्विक अवशेष हैं। 

अपील में कहा गया कि मौजा शहर खास स्थित ज्ञानवापी परिसर के 9130, 9131, 9132 रकबा नं. एक बीघा 9 विस्वा लगभग जमीन है। उक्त जमीन पर मंदिर का अवशेष है। 14वीं शताब्दी के मंदिर में प्रथमतल में ढांचा और भूतल में तहखाना है। इसमें 100 फुट गहरा शिवलिंग है। भारत में बने इस मंदिर के जीर्णोद्धार का उल्लेख सतयुग में मिलता है जब सत्यवादी महाराज हरिश्चंद्र ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था फिर विरामी संवत के प्रारम्भिक वर्षों में महाराजा विक्रमादित्य ने करीब 2050 विकर्मी संवत के वरशूँ पूर्व करवाया था। मुगल काल के दिनों में महारानी अहल्या बाई होल्कर ने सान 1780 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।

यह भी कहा गया कि 100 वर्ष तक 1669 से 1780 तक मंदिर का अस्तित्व ही नहीं रहा बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास के विभागाध्यक्ष एएस अल्टेकर ने बनारस के इतिहास में लिखा है कि प्राचीन विश्वनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग 100 फीट का था। अरघा भी 100 फीट का बताया गया है। लिंग पर गंगाजल बराबर गिरता रहा है, जिसे पत्थर से ढक दिया गया। यहां शृंगार गौरी की पूजा-अर्चना होती है। तहखाना यथावत है। यह खुदाई से स्पष्ट हो जाएगा। 

सिविल कोर्ट ने सर्वेक्षण का आदेश दिया

वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) आशुतोष तिवारी की अदालत ने पुरातात्विक सर्वेक्षण का आदेश देते हुए पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने का भी निर्देश दिया। कहा है कि इसमें दो अल्पसंख्यक जरूर हों। सर्वेक्षण सम्बंधित कार्य एएसआई की ओर से नियुक्त आब्जर्वर की निगरानी में होगा। 

मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण का किया विरोध

विपक्षीगण अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के अधिवक्ता रईस अहमद अंसारी, मुमताज अहमद और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के अभय यादव व तौफीक खान ने पक्ष रखा कि जब मंदिर तोड़ा गया तब ज्योतिर्लिंग उसी स्थान पर मौजूद था, जो आज भी है। उसी दौरान राजा अकबर के वित्तमंत्री टोडरमल की मदद से स्वामी नरायन भट्ट ने मंदिर बनवाया था जो उसी ज्योतिर्लिंग पर बना है। ऐसे में ढांचा के नीचे दूसरा शिवलिंग कैसे आया। ऐसे में खुदाई नहीं होनी चाहिए। 
 रामजन्म भूमि की तर्ज पर पुरातात्विक रिपोर्ट मंगाने की स्थितियां विपरीत थीं। उक्त वाद में साक्षियों के बयान में विरोधाभास होने पर कोर्ट ने रिपोर्ट मंगाई थी। जबकि यहां अभी तक किसी का साक्ष्य हुआ ही नहीं है। अभी प्रारम्भिक स्टेज पर है। ऐसे में साक्ष्य आने के बाद विरोधाभास होने पर रिपोर्ट मांगी जा सकती है। सिर्फ साक्ष्य एकत्र करने के लिए रिपोर्ट नही मंगाई जा सकती है।

एक कथित ‘हिंदू विरोधी’ विज्ञापन के वायरल होने के बाद ट्विटर ने एक बार फिर #BoycottMyntra को ट्रेंड करते देखा।

व्यापार/वाणिज्य डेस्क चंडीगढ़:

@hindutvaoutloud नाम के एक इंस्टाग्राम पेज ने उन सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बारे में एक पोस्ट किया, जिन्होंने ‘हिंदू-विरोधी’ उत्पाद और विज्ञापन डाले हैं। स्लाइड की शुरुआत एक विज्ञापन से होती है जिसमें भगवान कृष्ण को मिंत्रा पर लंबी साड़ी के लिए ऑनलाइन खरीदारी करते देखा जा सकता है क्योंकि पृष्ठभूमि में ‘द्रौपदी चीरहरण’ होता है।

विज्ञापन से नाराज कई लोगों ने ट्विटर पर शॉपिंग वेबसाइट Myntra का बहिष्कार किया।

हालांकि, उन्होंने जो कुछ याद किया वह “www.scrolldroll.com” एक छोटे से फ़ॉन्ट में लिखा गया था।

इस विज्ञापन ने 2016 में विवाद खड़ा कर दिया जब लोगों ने मान लिया कि यह Myntra का एक विज्ञापन है। हालाँकि, यह स्क्रॉलड्रोल की एक पोस्ट थी, जो यह जानना चाहता था कि अगर देवता 21वीं सदी की तकनीक का उपयोग करते तो क्या होता।

उस समय, मिंत्रा ने भी एक ट्वीट कर पुष्टि की थी कि यह विज्ञापन उनके द्वारा प्रकाशित नहीं किया गया था। स्क्रॉलड्रोल ने पहले इस विज्ञापन की जिम्मेदारी ली थी

हालाँकि, विज्ञापन 2021 में एक बार फिर ट्विटर पर वायरल हो गया है, जो हिंदुओं को नाराज कर रहा है जो न केवल Myntra का बहिष्कार कर रहे हैं बल्कि Flipkart को अनइंस्टॉल भी कर रहे हैं।

NIRF 2021 लिस्ट जारी

भारत के टॉप कॉलेज और यूनिवर्सिटी की सूची कुल 11 कैटेगरीज में जारी की गई है। इनमें यूनिवर्सिटी, मैनेजमेंट, कॉलेज, फार्मेसी, मेडिकल, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, अटल रैंकिंग ऑफ इंस्टीट्यूट ऑन इनोवेशन अचीवमेंट्स (ARIIA 2021), लॉ एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट्स और ऑवरऑल शामिल हैं। आधिकारिक वेबसाइट nirfindia.org पर पूरी सूची देख सकते हैं। आइए जानते हैं कैटेगरी वाइज टॉप भारत के टॉप विश्वविद्याल और महाविद्याल कौन से हैं।

  • NIRF रैंकिंग 2021 लिस्ट जारी।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की घोषणा।
  • कुल 11 कैटेगरी में जारी हुई एनआईआरएफ रैंकिंग लिस्ट।

नयी दिल्ली (ब्यूरो):

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से हर वर्ष नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) रैंकिंग जारी की जाती है। देश के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, मैनेजमेन्ट और फार्मेसी संस्थानों की रैंकिंग के लिए एनआईआरएफ संस्था बनाई है। इससे पूर्व रैकिंग के लिए कोई सरकारी संस्था नहीं थी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को वर्ष 2021 की एनआईआरएफ रैंकिंग (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) जारी कर दी। इस वर्ष भी ओवरऑल कैटेगरी में आईआईटी मद्रास को देश का बेस्ट शैक्षणिक संस्थान चुना गया है। वहीं आईआईएससी बेंगलुरु दूसरे और आईआईटी बॉम्बे तीसरे स्थान पर हैं। बेस्ट यूनिवर्सिटी कैटेगरी में आईआईएससी बेंगलुरु पहले, जेएनयू दूसरे और बीएचयू तीसरे पायदान पर हैं। इस वर्ष रैंकिंग फ्रेमवर्क में टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट्स की कैटेगरी भी शामिल की गई है। इस कैटेगरी में इस वर्ष आईआईएससी बेंगलुरु पहले, आईआईटी मद्रास दूसरे और आईआईटी बॉम्बे तीसेर स्थान पर रहे।

  • मिरांडा हाउस, दिल्ली
  • लेडी श्री राम कॉलेज ऑफ वुमेन, दिल्ली
  • लोयोला कॉलेज, चेन्नई
  • सेंट जेवियर कॉलेज, कोलकाता
  • रामकृष्ण मिशन विद्यामंदिर, हावड़ा
  • पीएसजीआर कृष्णम्मल कॉलेज फॉर वूमेन, कोयंबटूर
  • प्रेसिडेंसी कॉलेज, चेन्नई
  • सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली
  • हिंदू कॉलेज, दिल्ली
  • श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली

गौरतलब है कि साल 2016 में एनआईआरएफ लिस्ट 4 श्रेणियों में तैयार की गई थी, जो साल 2019 में बढ़कर 9 हो गए. इस साल एनआईआरएफ इंडिया रैंकिंग 2021 की घोषणा कुल दस श्रेणियों के लिये की गई है. इसमें विश्वविद्यालय, प्रबंधन, कॉलेज, फार्मेसी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्‍चर, ARIIA (नवाचार उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग) और लॉ जैसी कैटगरीज शामिल हैं.

पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ ईडी ने जारी किया लुक आउट नोटिस

पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अपने खिलाफ जारी प्रवर्तन निदेशालय के समन को रद्द करने की मांग की करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटकटाया था। लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने देशमुख द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। गुरुवार को जब मामला पहली बार सामने आया, तो जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे ने बिना कोई कारण बताए याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. देशमुख ने बुधवार को याचिका दायर कर अपना बयान दर्ज करने के लिए ईडी के समन को रद्द करने, मुंबई क्षेत्र के बाहर के अधिकारियों को शामिल करने वाली एक एसआईटी का गठन करने, इलेक्ट्रॉनिक मोड में अपना बयान दर्ज कराने, एक अधिकृत एजेंट के माध्यम से उपस्थिति और निर्देश के रूप में अन्य राहत देने की मांग की थी।

पुणे/चंडीगढ़:

कुछ महीने पहले तक राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता अनिल देशमुख महाराष्ट्र के गृहमंत्री हुआ करते थे। पुलिसकर्मियों को वसूली का टारगेट देने का आरोप लगने के बाद उन्हें उद्धव ठाकरे की सरकार से इस्तीफा देना पड़ा था। अब मीडिया रिपोर्टों में उनके देश छोड़ भागने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कई समन की अनदेखी कर चुके देशमुख के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लुकआउट नोटिस जारी किया है।

ईडी को आशंका है कि देशमुख देश छोड़कर भाग सकते हैं। दरअसल, इस तरह के नोटिस एक साल के लिए या जारी करने वाली एजेंसी द्वारा उन्हें वापस लेने तक वैध होते हैं। ईडी की तरफ से देशमुख को अब तक पाँच समन भेजा गया है, लेकिन उन्होंने इन सभी को नजरअंदाज कर दिया। ईडी का कहना है कि देशमुख को मुंबई में विभिन्न ऑर्केस्ट्रा और बार मालिकों से 4 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध रिश्वत मिली थी और इसे उन्होंने श्री साईं शिक्षण संस्था नामक एक संगठन के माध्यम से कानूनी धन के रूप में दिखाने की कोशिश की थी।

इससे पहले केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व मंत्री के खिलाफ जाँच को प्रभावित करने की कोशिश करने के आरोप में देशमुख के वकील आनंद डागा को गिरफ्तार किया था। कहा जाता है कि सीबीआई के एक अधिकारी ने रिश्वत में आईफोन 12 प्रो लेकर देशमुख को क्लीनचिट देने वाली एक गोपनीय रिपोर्ट को उनके वकील से साझा कर दिया था।

इसी सिलसिले में दिल्ली की एक अदालत ने 2 सितंबर को डागा और आरोपी सब-इंस्पेक्टर अभिषेक तिवारी को दो दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा था। सीबीआई द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में कहा गया है, “यह विश्वसनीय रूप से पता चला है कि जाँच और जाँच से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों का अनधिकृत व्यक्तियों के सामने खुलासा किया। सब-इंस्पेक्टर अभिषेक तिवारी पड़ताल के दौरान नागपुर के एक वकील आनंद दिलीप डागा के संपर्क में आए और तब से लगातार उनके संपर्क में हैं।”

जाँच के दौरान सीबीआई ने पाया कि तिवारी 28 जून को जाँच के सिलसिले में पुणे गए थे। प्राथमिकी में कहा गया है, “पता चला है कि वकील आनंद डागा ने अभिषेक तिवारी से मुलाकात की और जांँच से संबंधित विवरण उपलपब्ध कराने के बदले में उन्हें एक आईफोन 12 प्रो दिया। यह भी पता चला है कि उन्होंने नियमित अंतराल पर डागा से अवैध परितोषण लिया था।”

सीबीआई ने आरोप लगाया कि तिवारी ने व्हाट्सएप के जरिए मामले से संबंधित दस्तावेजों को डागा को भेजा। लीक हुए दस्तावेजों को विभिन्न समाचार संगठनों को भेजा गया था। हालाँकि दस्तावेजों में देशमुख को क्लीनचिट का सुझाव दिया गया था, लेकिन पूर्व मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जब दस्तावेज़ प्रेस में लीक हुए थे तो इसकी प्रामाणिकता पर कई सवाल उठाए गए थे। सीबीआई ने देशमुख को क्लीनचिट देने से भी इनकार किया।

इससे पहले देशमुख ने दावा किया था कि वह कानूनी उपाय खत्म होने के बाद ही ईडी के सामने पेश होंगे। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया है और मामले की सुनवाई जल्द की जाएगी। हालाँकि, बाद में बताया गया कि शीर्ष अदालत ने पूर्व मंत्री को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया है, इसके बाद वह प्राथमिकी रद्द करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट चले गए।

ईडी को दिए जवाब में देशमुख ने दावा किया कि उनके खिलाफ प्राथमिकी अनुचित थी। पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा पूर्व मंत्री पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाने के बाद वह सीबीआई और ईडी की जाँच के दायरे में आए। हालाँकि देशमुख ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था।

महाराष्ट्र में राजनैतिक विरोधियों की निरंकुश गिरफ्तारिया और हिटलर मोदी है

भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के रायगढ़ में एक जनसभा में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने सोमवार को कहा था, ‘यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) को स्वतंत्रता का साल मालूम नहीं है। वह अपने भाषण के दौरान स्वतंत्रता के साल के बारे में पूछने के लिए पीछे घूम गए। अगर मैं वहां होता, तो उनको (उद्धव को) एक जोरदार चांटा मारता।’ नारायण राणे के इस बयान के बाद शिवसैनिकों ने जबरदस्त प्रदर्शन भी किया था। 

  • “हाय वे मोदी मर जा तूँ” किसान आंदोलन पर मोदी के खिलाफ जहर उगलते हुए।
  • “ये युवा आठ – छ: महीने बाद मोदी को डंडे से मारेंगे” राहुल गांधी एक रैली में तत्कालीन प्रधानमंत्री के खिलाफ अपने भाव नहीं छुपा पाये।
  • “योगी को उन्हीं की चप्पल से मारना चाहिए।” शायद राम मंदिर के कारण
  • “यह योगी तो गैस के गुब्‍बारे की तरह आया और सीधे चप्‍पल पहनकर महाराज के पास चला गया। मन कर रहा है कि उसी चप्‍पल से उसे मारूं।” उद्धव ठाकरे

दिल्ली/पुणे:

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर मोदी सरकार में अघोषित आपातकाल बताने वाले विपक्ष का मुंह नारायण राणे की गिरफ्तारी पर ऐसा बंद हुआ की वह अब विपक्ष पर आने वाले नए बयान पर ही खुलेगा। और फिर लोकतन्त्र खतरे में आ जाएगा। सत्तारूढ़ दल को व्यभचारी, लोकतन्त्र का ब्लाटकारी इत्यादि इत्यादि बताया जाएगा। ए बार फिर चौकीदार चोर है इसे युवा डंडे से मारेंगे बताया जाएगा। लेकिन महाराष्ट्र में कॉंग्रेस और एनसीपी के समर्थन से बनी शिव सेना की सरकार के कुकृत्यों को हमेशा की तरह नजरंदाज़ किया जाएगा। और यदि कॉंग्रेस से जवाब पूछा जाएगा तो वह यह कह कर पल्ला झाड लेंगे की हम तो बाहर से समर्थन कर रहे हैं। मोदी विरोध ठीक है कैंट यदि विपक्ष के किसी मुख्यमंत्री का विरोध किया तो लोकतन्त्र का हनन और विरोधी को जेल। नारायण राणे से अपनी निजी खुन्नस निकालने के लिए

बिगड़े बोलों पर इस समय महाराष्‍ट्र का तापमान चढ़ा हुआ है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे ने जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान एक विवादित बयान दे दिया था। उस पर शिवसेना इतनी भड़की कि राणे के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गईं। मंगलवार दोपहर उन्‍हें रत्‍नागिरी से अरेस्‍ट भी कर लिया गया। दिलचस्‍प है कि ठीक इसी तरह का बयान कुछ समय पहले उद्धव ठाकरे ने यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ को लेकर भी दिया था।

बात साल 2018 की है जब उद्धव ठाकरे ने शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माला चढ़ाते समय योगी आदित्‍यनाथ के खड़ाऊं पहनने पर ऐतराज किया था। उद्धव का मानना था कि ऐसा करके योगी ने शिवाजी महाराज का अपमान किया है। ठाकरे ने कहा था, ‘यह योगी तो गैस के गुब्‍बारे की तरह आया और सीधे चप्‍पल पहनकर महाराज के पास चला गया। मन कर रहा है कि उसी चप्‍पल से उसे मारूं।’

मुझे उद्धव से कुछ सीखने की जरूरत नहीं: योगी
इस समय तक बीजेपी और शिवसेना के र‍िश्‍तों में खटास आ गई थी। हालांकि योगी ने मामले को तूल ने देते हुए कहा था, ‘मेरे अंदर उनसे कहीं ज्‍यादा शिष्‍टाचार है, मुझे श्रद्धांजलि देना आता है। इस पर मुझे उनसे कुछ सीखने की जरूरत नहीं।’

लेकिन शायद उद्धव अपनी ही राजनाइटिक बाली चढ़ाने में लगे हुए है। उनके साथी दल उन्हें किसी भी कृत्य से रोक नहीं रहे। बल्कि मों समर्थन दे रहे हैं, जिससे उन्हें लगता है की शिवसेना ओर भाजपा में खटास बढ़ेगी। लेकिन म्पोडी की चुप्पी द्धव के प्रति नए नर्म रवैये को ही परिलिक्षित करती है।

और इधर राणे खाने की मेज़ से खाना छुदवाकर गिरफ्तार करलिए जाने के बाद जमानत पर हैं और हस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।