ऑक्सिजन संबंधी सरकार के जवाब पर राहुल गांधी का ‘खेला’ हो गया

सरकार ने कहा था कि ऑक्सीजन की कमी से किसी मौत की जानकारी नहीं है। इस बयान पर सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। पात्रा ने कहा है कि ये राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य राज्य का मसला है और राज्यों से जो डेटा मिलता है, उसके आधार पर हम जानकारी तैयार करते हैं।

नयी दिल्ली(ब्यूरो) :

राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं। ट्वीट करते हैं। सरकार को ‘घेरते’ हैं। बस मुद्दे या तो जनता से दूर होते हैं या फिर झूठ पर आधारित होते हैं। ये बात अलग है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मीडिया का एक बड़ा हिस्सा जेब में होने के कारण कोई उनका फैक्ट-चेक नहीं करता। उनकी ट्वीट पर ‘छेड़छाड़ वाला कंटेंट’ का लेबल नहीं लगाया जाता। अब उन्होंने ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों पर राजनीति खेली है। ऑक्सीजन की कमी से हुई हर एक मौत पर उन्हें केंद्र से आँकड़ा चाहिए, जबकि स्वास्थ्य राज्य का मुद्दा है।

राहुल गाँधी ने क्या कहा? राहुल गाँधी ने एक खबर ट्वीट की। PTI की इस खबर में लिखा था कि केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों को लेकर राज्यों ने अलग से कोई आँकड़ा नहीं दिया है। अब स्वास्थ्य मुख्यतः राज्य का मुद्दा है। कोरोना के आँकड़ों पर संक्रमितों की संख्या, रिकवर होने वालों की संख्या, मृतकों की संख्या – ये सब डेटा राज्य जुटा रहे थे।

राज्यों द्वारा ये आँकड़े केंद्र को भेजे जा रहे थे, जिन्हें सरकारी वेबसाइट पर अपलोड किया जाता था। इससे केंद्र सरकार को भी सहूलियत होती है कि किस राज्य में स्थिति गंभीर होने के कारण ज्यादा ध्यान देना है और किस राज्य में प्रबंधन ठीक है तो हस्तक्षेप की ज़रूरत न के बराबर है। राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार बैठक की। जहाँ स्थिति गंभीर होने की आशंका थी, उन राज्यों को चेताया भी।

‘राज्यों ने अलग से कोई आँकड़े नहीं दिए’ का अर्थ राहुल गाँधी ने क्या लगाया, अब वो देखिए। उन्होंने इसे ऐसे दिखाया जैसे केंद्र सरकार कह रही हो कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी मरीज की मौत ही नहीं हुई। अब राज्यों ने बताया ही नहीं, तो केंद्र को कैसे पता चलेगा? देश के हर राज्य में स्वास्थ्य मंत्रालय है, उनका पूरा का पूरा बजट है और हर साल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय उन्हें सहयोग देता है।

केंद्र योजनाएँ बनाता है और इसके लिए वित्त की व्यवस्था करता है, लेकिन इसे धरातल पर तब तक लागू नहीं किया जा सकता, जब तक राज्य व स्थानीय प्रशासन सहयोग न करे। अब ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं और दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने किस तरह अड़ंगा लगाया था, ये पता होना चाहिए। योजना के वहाँ लागू न होने से जनता को ही घाटा हुआ।

ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के सहारे अपनी राजनीति चमकाने की जुगत में लगे राहुल गाँधी को सवाल राज्यों से पूछना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई आँकड़ा क्यों नहीं दिया? पंजाब, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और तमिलनाडु – ये वो राज्य हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस ये तो सत्ता में है या सत्ता की साझीदार है। राहुल गाँधी इन पाँचों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहेंगे कि वो ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों का आँकड़ा केंद्र को भेजें?

वैसे मामला ये है कि राहुल गाँधी अगर कहें भी तो शायद ही कोई मानें। कुछ राज्यों की सरकारों का दावा राहुल गाँधी के दावे के विपरीत है तो कुछ राज्यों में उनके ही नेता उनकी नहीं सुनते। पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला अब तक स्वीकार नहीं किया है। महाराष्ट्र में उनका संगठन ‘एकला चलो रे’ का राग अलाप रहा है।

महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की बात करना यहाँ विशेष रूप से आवश्यक है। इन दोनों राज्यों का कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के आँकड़े को लेकर क्या कहना है। सबसे पहले बात छत्तीसगढ़ की। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने छत्तीसगढ़ को ‘ऑक्सीजन सरप्लस राज्य’ करार देते हुए कहा कि कोविड-19 आपदा की दूसरी लहर के दौरान राज्य में ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत ही नहीं हुई।

यहाँ उन्होंने आँकड़े देने-लेने की बात नहीं की, बल्कि सीधा ऐलान किया कि हुई ही नहीं। लेकिन, राहुल गाँधी इस पर ट्वीट कर के ऐसा नहीं लिखेंग – “सिर्फ़ ऑक्सीजन की ही कमी नहीं थी। संवेदनशीलता व सत्य की भारी कमी- तब भी थी, आज भी है।” मोदी सरकार के बयान को गलत संदर्भ में पेश कर और तोड़-मरोड़ कर उन्होंने यही चीन लिखी थी। देव ने कहा कि उन्होंने दिल्ली जैसे प्रदेशों के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के बारे में सुना, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं था।

अब बात महाराष्ट्र की, जहाँ तीन पहियों वाली सरकार में कॉन्ग्रेस भी शामिल है। ये अलग बात है कि शिवसेना और NCP से रोज उसके कुछ न कुछ मतभेद सामने आते रहते हैं। मई के मध्य में महाराष्ट्र की सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ को स्पष्ट रूप से कहा कि ऑक्सीजन शॉर्टेज की वजह से राज्य में किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। क्या इस पर राहुल गाँधी का कोई ‘संवेदनहीनता’ वाला ट्वीट आया?

अगर केंद्र सरकार को राज्य आज आँकड़े भेज देते हैं कि इतने मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई है, सरकार सदन और सुप्रीम कोर्ट को सूचित कर देगी। जो राज्य बताएँगे, सरकार उसे सार्वजनिक कर देगी। यही तो संघीय ढाँचा है, जहाँ मिलजुल कर काम होता है। ये कोई कॉन्ग्रेस का संगठन थोड़े है, जहाँ माँ और बेटा-बेटी जो यह दे, उसे ही अंतिम ब्रह्मवाक्य की तरह माना जाता है।

और ऑक्सीजन के मामले में दिल्ली सरकार को कोर्ट ने फटकारा, उसका क्या? सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई ऑडिट से खुलासा हुआ कि दिल्ली को ऑक्सीजन की जितनी आवश्यकता थी, उससे चार गुना से अधिक बढ़ा कर दिखाया गया। इस पर तो राहुल गाँधी चुप ही रहे। जिस केंद्र सरकार ने टैंकरों की व्यवस्था से लेकर ऑक्सीजन उत्पादन में वृद्धि के लिए जी-तोड़ प्रयास किया, उसे बदनाम करने में तो एक सेकेंड भी नहीं हिचके।

ये वही बात है कि वैक्सीन पर सवाल उठाने वाले वैक्सीन क्यों नहीं दिया पूछने लगे। ठीक वैसा ही है, जब ‘भाजपा की वैक्सीन’ कहने वाले नेता उसी वैक्सीन को लेने लगें। वही नीति है, जिसका पालन कर के गंगा किनारे वर्षों से चली आ रही परंपरा को कोरोना से जोड़ कर लाशों की राजनीति की जाए। ये चीजें आगे भी जारी रहेंगी और आरोप लगाने के लिए तोड़-मरोड़ का काम होता रहेगा। राहुल गाँधी भी जमीन से दूर, जनता से दूर, बैठ कर आराम से ट्वीट करते रहेंगे।

महाराष्ट्र में ‘पैगंबर मुहम्मद बिल’ के लिए बनाया जा रहा राजनैतिक दबाव

विचारणीय है कि ईश निंदा कानून की मांग वह समुदाय कर रहा है जिसे किसी के भी खिलाफ ‘फतवा’ पढ़ने की छूट है। ईशनिंदा कानून नहीं होने के बावजूद कट्टर मुस्लिमों को पैगंबर के कथित ‘अपमान’ के बदले के तौर पर हत्या और आगजनी करने से रोका नहीं गया। कई साल पहले पैगम्बर मुहम्मद को लेकर दिए गए बयान के बदले के तौर वर्ष 2019 में हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी के घर में घुसकर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। और दूसरी ओर कड़े कानून के अभाव में या फिर कहें की मौजूदा कानून में लचीले पन के कारण अकबरुद्दीन ओवैसी जैसे जहरीले बोल बोलने वाले, संसद – प्रधान मंत्री के साथ साथ हिन्दू देवी देवताओं पर अति अभद्र टिप्पणियाँ करने वाले लोग कानूनी कार्यवाही के ढुलमुल रवैये के कारण खुले में घूम रहे हैं। अब दूसरी बात यहाँ यह भी उठती है की इशनिन्दा कानून की मांग ‘महाराष्ट्र ही में क्यों उठी?

सरीका तिवारी, चंडीगढ़/ पुणे:

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पहले भी मुस्लिम तुष्टीकरण की कई हदें पार कर चुकी है। अब इस पैगंबर कानून को ला कर कहीं महाराष्ट्र में शरिया लागू करने की ओर एक कदम तो नहीं?

महाराष्ट्र में रज़ा अकादमी और तहफ़ुज़ नमूस-ए-रिसालत बोर्ड व प्रकाश अंबेडकर के नेतृत्व वाले वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) ने महाराष्ट्र सरकार पर ‘पैगंबर मुहम्मद बिल’ लाने के लिए दवाब बनाने की कोशिश की है। ताकि पैगंबर मुहम्मद समेत दूसरे धर्मों के प्रतीकों के खिलाफ ईशनिंदा कानून लाया जा सके।

एक राष्ट्रिय दैनिक में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिल के ड्राफ्ट को तैयार कर लिया गया है। इस बिल को ‘पैगंबर मुहम्मद बिल’ के रूप प्रमोट किया जा रहा है। इसका टाइटल ‘पैगंबर मुहम्मद और अन्य धार्मिक प्रमुखों की निंदा अधिनियम, 2021’ या ‘अभद्र भाषा (रोकथाम) अधिनियम, 2021’ रखा गया है।

महाराष्ट्र में अपना दबदबा रखने वाले मुस्लिम संगठन रज़ा अकादमी ने एक तरह से चेतावनी दी है कि ‘तहफ़ुज़ ए नमूस ए रिसालत’ विधेयक विधानसभा में पारित किया जाए। अन्यथा वो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

वहीं ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष मौलाना मोइन अशरफ कादरी (मोइन मियाँ) ने कहा, “यह हमारा सुझाव है, लेकिन सरकार इस बिल को जो नाम देना चाहे दे सकती है। हमारी माँग है कि हमारे पवित्र पैगंबर और सभी देवी-देवताओं और धर्मगुरुओं की निंदा, उपहास और अपमान को रोकने के लिए कड़ा कानून होना चाहिए। साम्प्रदायिक लड़ाइयाँ इसलिए हो रही हैं क्योंकि हमारा मौजूदा कानून उपद्रवियों को रोक पाने में असफल है।”

संविधान की धारा 295 (A) और ‘रंगीला रसूल’ का केस

भारत में ईशनिंदा से जुड़ा कोई कानून नहीं है। लेकिन, भारतीय दंड संहिता में एक कानून ऐसा है जो जानबूझकर किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वालों के खिलाफ जेल और जुर्माने का प्रावधान करता है। आईपीसी की धारा 295 (A) के तहत अगर आरोपित ने ‘जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से’ किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है तो उसे जुर्माने के साथ 3 साल तक की सजा हो सकती है।

इंडियन पीनल कोड की धारा 295 (A) का मामला बहुत ही दिलचस्प रहा है। इसकी शुरुआत वर्ष 1923 में गुलाम भारत में हुई थी। उस दौरान कट्टरपंथी मुस्लिमों ने भगवान श्री कृष्ण समेत दूसरे देवी देवताओं को लेकर अपमानजनक और अश्लील भाषा का इस्तेमाल करते हुए ‘कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी’ और ‘यूनिसेवी सादी का महर्षि’ नाम की दो अत्यधिक विवादित पुस्तकें प्रकाशित की। पहले में भगवान श्री कृष्ण तो दूसरे में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती को लेकर बहुत ही अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। खास बात ये है कि इस पुस्तक को एक अहमदी मुस्लिम ने लिखा था। उस समय तक धारा 295(A) अस्तित्व में नहीं था।

मुस्लिमों की इस हरकत के जवाब में महाशय राजपाल के करीबी दोस्त पंडित चामुपति लाल ने इस्लामिक पैगंबर मोहम्मद की एक छोटी सी जीवनी लिखी। ‘रंगीला रसूल’ के शीर्षक वाला यह छोटा पैम्फलेट पैगंबर मोहम्मद के जीवन पर एक व्यंग्यपूर्ण कहानी थी। इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए पंडित चामुपति ने महाशय राजपाल से वादा लिया कि वह कभी भी इसके लेखक के नाम को उजागर नहीं करेंगे।

यह पैम्फलेट ऐतिहासिक रूप से हदीसों के इतिहास पर आधारित था और पूरी तरह से सटीक था। लेकिन इससे लाहौर के मुस्लिम पूरी तरह से आक्रोशित हो उठे। यह ऐसा मामला था कि लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया और इसका पहला संस्करण बहुत ही जल्द बिक गया। इसके प्रकाशित होने के करीब एक महीने के बाद जून 1924 में महात्मा गाँधी ने अपने साप्ताहिक ‘यंग इंडिया’ जर्नल में इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि यह राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है।

इस मामले में लाहौर उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा था कि यह लेख मुस्लिम समुदाय को ‘आक्रोशित’ करने वाला था। कानूनी तौर पर इसका अभियोजन इसलिए संभव नहीं है, क्योंकि धारा 153 (A) के तहत लेखन विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी या नफरत का कारण नहीं बन सकता। कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिमों के आक्रोश ने तत्कालीन शाषकों को कानून बदलने और धारा 295 (A) लागू करने के लिए मजबूर कर दिया था।

घटना के बाद 6 सितंबर, 1929 को इल्म उद दीन नाम के एक 19 वर्षीय मुस्लिम बढ़ई ने अपनी दुकान के बाहरी बरामदे में बैठे हुए महाशय राजपाल की छाती पर आठ बार हमला किया। चोट लगने से महाशय राजपाल की मौत हो गई।

सबसे खास बात यह थी कि इल्म उद दीन खुद अनपढ़ था और उसने अपने जीवन में रंगीला रसूल या कोई दूसरी किताब नहीं पढ़ी थी। बावजूद इसके मुस्लिम संगठनों और मौलानाओं ने उसके अंदर इतनी नफरत भर दिया था कि उसने महाशय राजपाल की हत्या कर दी। उसे लगा कि राजपाल ने ‘ईशनिंदा’ की है।

जब इल्म उद दीन को हत्या का दोषी ठहराया गया था तो उर्दू कवि इकबाल और जिन्ना ने हत्या जैसे जघन्य अपराध को एक शानदार धार्मिक कार्य बताते हुए उसकी सराहना की थी।

हत्यारे इल्म उद दीन को धार्मिक नायक बताते हुए ‘गाजी’ के रूप में उसका महिमामंडन किया गया। पाकिस्तान में उसकी एक मजार भी है। मजार में वार्षिक उर्स आयोजित किया जाता है। वहाँ पर मुस्लिम ‘गाजी इल्म उद दीन’ को श्रद्धाँजलि देते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि ईशनिंदा कानून नहीं होने के बावजूद कट्टर मुस्लिमों को पैगंबर के कथित ‘अपमान’ के बदले के तौर पर हत्या और आगजनी करने से रोका नहीं गया। कई साल पहले पैगम्बर मुहम्मद को लेकर दिए गए बयान के बदले के तौर वर्ष 2019 में हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी के घर में घुसकर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी।

वर्ष 2020 में एक विधायक के रिश्तेदार ने कथित तौर पर मोहम्मद पैगंबर पर फेसबुक में टिप्पणी कर दी थी, जिसके बाद हिंसक भीड़ ने दो पुलिस स्टेशनों को आग लगा दी। इसी तरह से 2015 में फ्रेंच मैगजीन शार्ली हेब्दो के ऑफिस में घुसकर 12 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

दिल्ली में आआपा मेहरबान रोहिङिया पहलवान

पिछले साल 16 या 17 मई को एक हिन्दी दैनिक में प्रकाशित तोषी शर्मा की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, ये रोहिंग्या मुस्लमान दिल्ली की उस जमीन अवैध रूप से कब्जा कर बस गए हैं और साथ ही सारी सरकारी सुविधाओं का भी फायदा उठा रहे हैं। ओखला के विधायक और आआपा नेता अमानतुल्लाह ख़ान इस वक़्त उन सबके सबसे बड़े मददगार हैं, जिन्होंने रोहिंग्याओं को राशन-पानी से लेकर अन्य मदद मुहैया कराने के लिए दिन-रात एक की हुई है।

अब मूल प्रश्न यह है:

  • कि तोषी शर्मा कि इस रिपोर्ट पर आज तक क्या कार्यवाई हुई?
  • यदि केंद्र सरकार रोहंगिया को राष्ट्रिय सुरक्षा के लिए घाटा मानती है तो केंद्र ने अपने स्तर पर क्या कदम उठाए?
  • सूत्रों कि माने तो जब बंगाल चुनावों में घुसपैठियों कि मदद से चुनाव जीते जा सकते हैं तो दूसरे प्रदेशों में क्यों नहीं?
  • या रिपोर्ट अपने आप में प्रश्नों का पुलिंदा है

आज भी

  • दिल्ली पुलिस बेफिक्र, केंद्र ने बताया था रोहिंग्या को खतरा
  • रोहिंग्याओं की इस बस्ती में 300 से ज्यादा लोगों को सुविधाएं भी मिल रही हैं
  • आरोप: स्थानीय आआपा विधायक की मदद से बनवा लिए आधार-वोटर कार्ड

‘पुरनूर’ कोरल, चण्डीगढ़/नयी दिल्ली :

भारत में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमान किस तरह पूरे देश में पैर पसारते जा रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इससे राजधानी दिल्ली भी अछूती नहीं है। दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे मदनपुर खादर श्मशान घाट के सामने अवैध रूप से ये रह रहे हैं। यह अवैध बस्ती उत्तरप्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर बसाई गई है। हैरत की बात है कि इन्हें  बाकायदा सभी सरकारी सुविधाएं भी मिल रही हैं। लॉकडाउन में इन कैंपों में दिल्ली सरकार और ओखला विधायक अमानतुल्लाह खान की ओर से भरपूर राशन सामग्री मुहैया करवाई जा रही है। इस रोहिंग्या कैंप में चोरी की लाइट के साथ-साथ पानी के लिए अवैध तरीके से बोरिंग तक करवाया गया है। 

वहीं दूसरी ओर यहां आसपास की झुग्गियों में रह रहे प्रवासी मजदूरों के परिवार राशन को तरस रहे हैं। बता दें कि खुद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि रोहिंग्या मुसलमान भारत की सुरक्षा के लिए खतरा है और इन्हें सरकार देश से बाहर करना चाहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध कैंप से कालिंदी कुंज थाना पुलिस की मिली भगत से अवैध रूप से गांजा, स्मैक और अन्य मादक पदार्थों का धंधा चल रहा है। कई आरडब्ल्यूए दिल्ली पुलिस से इस अवैध बस्ती को हटाने के लिए गुहार लगा चुका है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जिस जमीन पर अवैध रोहिंग्याओं का कब्जा है वो करीब 5.2 एकड़ जमीन है। खसरा नंबर 612 की इस जमीन की कीमत अरबों रुपए है। जिस पर योजनाबद्ध तरीके से पुलिस संरक्षण के कारण अवैध रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों ने कब्जा कर रखा है।

योजनाबद्द तरीके से यूपी की जमीन पर बसाया: स्थानीय लोग

यूपी सिंचाई विभाग के आगरा कैनाल की जमीन पर ओखला विधायक अमानतुल्लाह खान पर योजनाबद्ध तरीके से बसाने का स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है। कंचन-कुंज के लोगों ने आरोप लगाया कि यहां अवैध तरीके से रह रहे रोहिंग्या पहले कंचन-कुंज में एक मुस्लिम नेता के खाली प्लाट में रह रहे थे। जहां 17 अप्रैल 2018 को साजिश के तहत झुग्गियों में आग लगाई गई। जिसके बाद इन्हें दिल्ली के बाहर यूपी सिंचाई की जमीन पर अवैध कब्जा करवाया गया है। इसके कैंप के आसपास अवैध बांग्लादेशियों को भी बसाया जा रहा है। ये रोहिंग्या इस इलाके में कई वर्षों से रह रहे हैं।  यमुना किनारे श्मशान घाट के किनारे कैंप में रह रहे अवैध रोहिंग्याओं की दिल्ली सरकार और स्थानीय विधायक अमानतुल्लाह खान की ओर से पूरी मदद करने का आरोप स्थानीय लोगों ने लगाया है। लोगों का आरोप है कि इस कैंप में करीब 300 से ज्यादा लोग रहते हैं। जो बिजली और पानी की चोरी करते हैं।

सरिता विहार एसीपी बोले- रोहिंग्या बैठे हैं तो क्या हुआ

इस बारे में सरिता विहार शर्मा ने एसीपी ढाल सिंह से भी बात की। उनका जवाब हैरान करने वाला था। जब उनसे पूछा गया कि यहां रोहिंग्या अवैध तरीके रह रहे हैं। इस बारे में स्थानीय लोग कई बार इन्हें हटाने के मांग कर चुके हैं। लेकिन दिल्ली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर एसीपी ढाल सिंह ने कहा कि रोहिंग्या रह रहे हैं तो क्या हुआ।  इधर, यहां अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को हटाने के लिए स्थानीय पार्षद संतोष देवी दिनेश टांक ने बताया कि दिल्ली पुलिस, पूर्व सांसद महेश गिरी, मौजूदा बीजेपी सांसद गौतम गंभीर और यूपी की योगी सरकार को लिखित में शिकायत दे चुकी हैं। लेकिन पुलिस और सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

पूर्व सांसद गिरी बोले-नहीं मिला था पुलिस का सहयोग 

दक्षिणी-पूर्वी दिल्ली से पूर्व भाजपा सांसद महेश गिरी ने इन रोहिंग्याओं को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस को लिखा था। लेकिन आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने उस समय विरोध किया था।  पूर्व सांसद महेश गिरी से एक हिन्दी दैनिक ने इस बारे में जानकारी के लिए फोन पर संपर्क किया। लेकिन उनके निजी सचिव से बात हुई। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय विधायक अमानतुल्लाह खान के संरक्षण में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को इस इलाके में योजनाबद्ध तरीके से बसाया जा रहा है। यहां तक कि इन रोहिंग्याओं के अमानतुल्लाह खान ने अपने लेटर हैड के जरिए आधार और वोटर कार्ड भी बनवाए हैं।   मदनपुर खादर ईस्ट में रह रहे जानकारों ने भास्कर से बताया कि कुछ रोहिंग्या परिवार सबसे पहले मदनपुर खादर एक्सटेंशन पार्ट वन में एक मुस्लिम व्यक्ति के घर में हॉल में रह रहे थे। फिर धीरे-धीरे अपने और लोगों को बुलाते रहे। जिसके बाद ये एक स्थानीय मुस्लिम नेता के विवादित खाली प्लाट में झुग्गियां बनाकर रहने लगे। 

  • हां, यहां पर रोहिंग्या अवैध तरीके से रह रहे हैं। लेकिन कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता हूं। ये मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए डीसीपी से बात कीजिए। – संजय सिन्हा, एसएचओ, कालिंदी कुंज
  • मेरी जानकारी में नहीं है, मैं पता करवाता हूं। जानकारी मिलने पर इस विषय में नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। चिन्मय बिस्वाल,डीसीपी, दक्षिणी पूर्वी दिल्ली
  • विभाग की जमीन से रोहिंग्याओं का कब्जा हटाने के लिए कार्ययोजना बनाकर लखनऊ भेजा जा चुका है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस के असहयोग के रवैये को लेकर गृह मंत्रालय को भी लिखा गया है। सरकार जमीन खाली करवाएगी।-देवेंद्र ठाकुर, एक्सईएन, हेडवर्क खंड आगरा नहर ओखला

साथियों के जाने का दु:ख है : मिलिंद

मिलिंद देवड़ा ने जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर ट्वीट कर कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व पर एक तरह से सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, मेरा मानना है कि कांग्रेस को अपनी पुरानी स्थिति पाने के लिए प्रयास करना चाहिए। देश की बड़ी पार्टी के तौर पर वह यह कर सकती है और करना ही चाहिए। हमारे पास अब भी ऐसे नेता हैं जिन्हें अगर सशक्त किया जाए और बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो वे नतीजे दे सकते हैं। मैं सिर्फ यह चाहता हूं कि काश ! मेरे कई मित्रों, सम्मानित साथियों और मूल्यवान सहयोगियों ने हमारा साथ नहीं छोड़ा होता।

  • जितिन प्रसाद के बाद मिलिंद देवड़ा ने बढ़ाई कांग्रेस की मुसीबत
  • देवड़ा ने गुजरात सरकार के कामकाज की ट्विटर पर की तारीफ
  • कांग्रेस के कई युवा नेताओं की नाराजगी के अटकलों को मिली हवा

सारिका तिवारी, चंडीगढ़:

कांग्रेस पार्टी में 20 साल गुजारने के बाद आखिरकार पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को बीजेपी का दामन थाम लिया। हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रहे प्रसाद को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के एक युवा ब्राह्मण नेता के तौर पर देखा जाता था। प्रसाद के जाने से एक बार फिर से कांग्रेस में कई युवा नेताओं की नाराजगी और पाला बदलने की अटकलों को हवा मिल गई है। सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा ऐसे नेताओं में शामिल हैं जिनकी नाराजगी की चर्चा इन दिनों हो रही है। इस बीच, मिलिंद देवड़ा ने गुजरात सरकार के कामकाज की तारीफ कर कांग्रेस की चिंता और बढ़ा दी है।

दरअसल, कोरोना महामारी की वजह से पिछले एक साल से गुजरात में होटल इंडस्‍ट्री, रेस्‍टोरेंट, रिजार्ट और वॉटर पार्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आर्थिक नुकसान को देखते हुए मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी ने उनका पिछले एक साल का प्रॉपर्टी टैक्‍स और बिजली बिल माफ करने का फैसला लिया है। कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर यह खबर शेयर करते हुए गुजरात सरकार की तारीफ की है। उन्‍होंने लिखा है- ‘दूसरे राज्‍यों के अनुकरण के लिए एक स्वागत योग्य कदम। यदि हम भारत के आतिथ्य क्षेत्र में और नौकरियों के नुकसान को रोकना चाहते हैं तो सभी राज्यों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।’

‘काश, हमारे साथियों ने साथ न छोड़ा होता’
दूसरी ओर, मिलिंद देवड़ा ने अपने पूर्व सहयोगी जितिन प्रसाद के बीजेपी में जाने पर भी प्रतिक्रिया जताई है। उन्‍होंने ट्विटर पर लिखा है- ‘मेरा मानना है कि कांग्रेस को अपनी पुरानी स्थिति पाने के लिए प्रयास करना चाहिए। देश की बड़ी पार्टी के तौर पर वह यह कर सकती है और करना ही चाहिए। हमारे पास अब भी ऐसे नेता हैं जिन्हें अगर सशक्त किया जाए और बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो वे नतीजे दे सकते हैं। मैं सिर्फ यह चाहता हूं कि काश मेरे कई मित्रों, सम्मानित साथियों और मूल्यवान सहयोगियों ने हमारा साथ नहीं छोड़ा होता।’

दरक रही है कांग्रेस की युवा ब्रिगेड
गौरतलब है कि मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट कभी कांग्रेस की युवा ब्रिगेड माने जाते थे। उन्होंने केंद्र में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में भी काम किया था। सिंधिया और प्रसाद अब बीजेपी में हैं, जबकि पायलट और देवड़ा पार्टी में कुछ मुद्दों पर परेशान दिखते हैं और बार-बार सुधार की मांग करते हैं। जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस में सक्रिय नेतृत्व और संगठनात्मक चुनाव की मांग को लेकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी।

शनैश्चर जयंती 2021

नीलांजनं समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌॥

10 जून 2021 को शनैश्चर जयंती है. साढे साती, ढैया और कमजोर विंशोत्तरी के प्रभाव को कम करने के लिए शनिदेव के सहज उपाय कारगर सिद्ध होते हैं. ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनैश्चर जयंती मनाई जाती है. भाग्य के देवता न्यायाधिपति शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए लोग विभिन्न उपाय करते हैं.

धर्म/संस्कृति डेस्क, डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम :

कोरोना संक्रमण के बीच शनि जयंती 10 जून को आस्था व उल्लास के साथ मनाई जाएगी। इस मौके पर पुष्प और विद्युत सज्जा से सजे शनि मंदिरों में भगवान का तिल-तेल से अभिषेक होगा। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते भक्तों के बिना पूजा-अर्चना के साथ कोरोना मुक्ति के लिए प्रार्थना होगी।

शनिदेव की जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या को है. शनैश्चर जयंती को पिता सूर्य को ग्रहण लगने वाला है. यह ग्रहण भारत में अमान्य होगा. इसका सूतक भी भारतवर्ष में नहीं लगेगा. कंकणाकृति ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका, दक्षिण पश्चिम अफ्रीका, प्रशांत महासागर एवं आइसलैंड क्षेत्र में दिखाई देगा.
सूर्यग्रहण सर्वाधिक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है. इसका निर्माण सूर्य और पृथ्वी के चंद्रमा के आने पर होता है. अर्थात् तीनों एक सीध में होते हैं. सूर्यदेव की चाल से चंद्रमा और पृथ्वी को अपनी गति व्यवस्थित करना होती है. ऐसे में पृथ्वी पर अत्यावश्यक भौगोलिक सुधार होते हैं.
कंकणाकृति सूर्यग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लगता है. यह विशेषतः दृश्य क्षेत्र में मान्य होता है. शनिदेव की शनैश्चर जयंती के दिन ग्रहण होना विभिन्न राशियों के लिए भाग्य में आकस्मिक बदलावों का संकेतक है. शनिदेव भाग्यदाता ग्रह हैं. इन दिनों वे सूर्य के प्रभाव से उलटी चाल में हैं. ऐसे ग्रहण का आना शनिदेव के प्रभाव को अत्यधिक बढ़ाने वाला है. ग्रहण के दौरान ऐसे कार्याें से दूरी रखें जिनके कारक शनिदेव हैं. लोहे के सामान और औजारों को न छुएं. ऐसी भूमि क्षेत्र से दूरी रखें जो दलदली हो. भारी मशीनरी से बचाव रखना भी उचित होगा
शनिदेव न्याय के देवता हैं. ग्रहण के दौरान किसी को हानि न पहुंचाएं. ग्रहण के दौरान पाप-पुण्य का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है. ऐसे में कोई चूक न करें. शनिदेव और सूर्यदेव के मंत्रों का जाप कर सकते हैं. ग्रहण रात्रिकाल में रहेगा. रात्रि में हल्का भोजन लें. तनावमुक्त अवस्था में शयन पर जोर दें.

मेरे पर किए गए ट्वीट भ्रामक हैं और ‘देश की शांति और सद्भाव’ को नुकसान’ पहुँचा सकते हैं,सांसद संजय राउत ने धमकाया

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट को लगाई गुहार में राउत ने दावा किया था कि उन पर किए गए ट्वीट भ्रामक हैं और देश की ‘शांति और सद्भाव को नुकसान’ पहुँचा सकते हैं। यह दावा करते हुए कि ट्वीट्स अपमानजनक हैं और पाटकर के ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक किया जाना चाहिए, राउत ने कहा था कि यह आरोप ‘भारत और विशेष रूप से महाराष्ट्र राज्य में राजनीतिक और सामुदायिक समूहों के बीच भेदभाव पैदा कर सकते हैं।’

डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम स्टाफ

2015 में बायोपिक ‘बालकाडु’ प्रोड्यूस करने के बाद सुर्खियों में आई स्वप्ना पाटकर हाल ही में शिव सेना सांसद संजय राऊत के खिलाफ किए गए अपने ट्वीट से फिर सुर्खियों में आई। ये फिल्म शिवसेना चीफ बाला साहेब ठाकरे के जीवन पर आधारित थी। फिलहाल स्वप्ना​​​​​​​ बांद्रा के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में 2016 से काम कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने क्लीनिकल फीजियोलॉजी की फर्जी डिग्री बनवाई थी और इसी के आधार पर अस्पताल में नौकरी भी हासिल कर ली।

स्वप्ना पाटकर के खिलाफ 26 मई को उपनगरीय मुंबई के बांद्रा थाना में आईपीसी की धारा 419 (भेष बदलकर धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और 468 (धोखाधड़ी के मकसद से जालसाजी) के तहत प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया. उन्होंने बताया कि वह 2016 से बांद्रा (पश्चिम) में स्थित एक प्रमुख अस्पताल में नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिक के रूप में अभ्यास कर रही थीं.

39 वर्षीय पाटकर को क्लिनिकल साइकोलॉजी में पीएचडी की फर्जी डिग्री हासिल कर एक अस्पताल में नौकरी हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट में एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि 26 मई को मुंबई के बांद्रा थाना में आईपीसी की धारा 419 (भेष बदलकर धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और 468 (धोखाधड़ी के मकसद से जालसाजी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 51 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता गुरदीप कौर सिंह ने अप्रैल में एक सीलबंद लिफाफे में पाटकर की पीएचडी डिग्री से संबंधित दस्तावेजों का एक सेट एक गुमनाम स्रोत से प्राप्त करने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

दस्तावेजों के अनुसार 2009 में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा जारी किया गया पाटकर का पीएचडी प्रमाणपत्र वास्तव में फर्जी है। इससे पहले पाटकर की वकील आभा सिंह ने बताया था कि पुलिस बिना समन उन्हें उनके घर से उठा ले गई और एफआईआर की कॉपी तक नहीं दी। पाटकर ने राउत के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में स्टॉकिंग का मामला दर्ज कर रखा है।

पिछले दिनों राउत ने मुंबई के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक मामला दायर किया था। इसमें ट्विटर इंडिया और गूगल इंडिया को उन सभी ट्वीट और अन्य डिजिटल सामग्रियों को हटाने के लिए निर्देश देने की गुहार लगाई थी, जिसमें मराठी फिल्म निर्माता ने उनके खिलाफ आरोप लगाए हैं।

शिकायत में राउत ने दावा किया था कि उन पर किए गए ट्वीट भ्रामक हैं और देश की ‘शांति और सद्भाव को नुकसान’ पहुँचा सकते हैं। यह दावा करते हुए कि ट्वीट्स अपमानजनक हैं और पाटकर के ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक किया जाना चाहिए, राउत ने कहा था कि यह आरोप ‘भारत और विशेष रूप से महाराष्ट्र राज्य में राजनीतिक और सामुदायिक समूहों के बीच भेदभाव पैदा कर सकते हैं।’

गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल में पाटकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई थी। उन्होंने खुद को एक शिक्षित और सबल भारतीय महिला बताते हुए पत्र में लिखा था कि उन्हें सहानुभूति नहीं, इंसाफ चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया था कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के सह-संपादक संजय राउत पिछले 8 वर्षों से अपनी पार्टी के रुतबे और सिस्टम पर पकड़ का इस्तेमाल कर न सिर्फ उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, बल्कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित कर रहे हैं।

पाटकर ने बताया था कि राउत के इशारे पर पुलिस ने उन पर ‘धंधा करने’ का आरोप भी लगाया था। उन्होंने कहा था कि 2017 में खुद संजय राउत ने फोन पर धमकी दी और 2018 में कॉन्ट्रैक्ट पर आदमी रख कर उनका पीछा कराया गया। बकौल स्वप्ना, उनके सोशल मीडिया हैंडल्स को हैक कर कभी सुसाइड नोट तो कभी अश्लील सामग्रियाँ डाली गईं, लेकिन पुलिस ने साफ़ कह दिया कि संजय राउत के खिलाफ वो FIR दर्ज नहीं कर सकते।

पीएम को लिखे पत्र में कहा था कि ‘शिवसेना भवन’ की तीसरी मंजिल पर बुला कर उनके रिश्तेदारों से मारपीट की गई। उनसे संपर्क काटने को मजबूर किया गया। साथ ही सब ख़त्म करने के लिए 4 करोड़ रुपए की वसूली का प्रस्ताव रखने का आरोप भी लगाया गया था।

काँग्रेस की कथित ‘टूलकिट’ मामला पहुंचा सर्वोच्च न्यायालय

सोशल मीडिया पर मंगलवार (18 मई 2021) को एक दस्तावेज जम कर शेयर किया गया जिसके बारे में यह दावा किया गया कि ये ‘कॉन्ग्रेस का टूलकिट’ है। इसमें कुम्भ मेला को बदनाम करने, ईद का महिमामंडन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने और जलती चिताओं व लाशों की तस्वीरें शेयर कर भारत को बदनाम करने का खाका था। अब कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने स्वीकार किया कि टूलकिट के लीक हुए दो डॉक्यूमेंट्स में से एक ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के शोध विभाग द्वारा तैयार किया गया है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

कांग्रेस की ओर से कथित रूप से जारी किए गए ‘टूलकिट’ का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता वकील शशांक शेखर झा ने ‘टूलकिट’ के मामले की जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर, बीजेपी ने ‘टूलकिट’ को लेकर बुधवार को एक बार फिर कांग्रेस पर हमला बोला और दावा किया कि कांग्रेस सांसद के दफ़्तर में काम करने वाली सौम्या वर्मा ने ही इसे बनाया है। 

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा है कि कांग्रेस ने पूछा था कि इस टूलकिट को बनाने वाला कौन है। पात्रा ने दावा किया है कि सौम्या वर्मा कांग्रेस सांसद एमवी राजीव गौड़ा के दफ़्तर में काम करती हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या राहुल और सोनिया गांधी इस बात का जवाब देंगे कि सौम्या वर्मा कौन हैं। पात्रा ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा था कि कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे कोरोना के नए वैरिएंट को ‘मोदी स्ट्रेन’ या ‘इंडिया स्ट्रेन’ कह कर प्रचारित करें। 

कॉन्ग्रेस के कथित टूलकिट मामले के खिलाफ देश के शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई है। मामले को सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने और दुनिया में भारत की छवि बिगाड़ने का साजिश बताया गया है। याचिकाकर्ता वकील शशांक शेखर झा ने अंतरराष्ट्रीय साजिश का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से जाँच और दोष साबित होने पर कॉन्ग्रेस की मान्यता रद्द करने की माँग की है।

झा ने अपनी जनहित याचिका में निर्दिष्ट किया कि धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), आईपीसी की कई धाराओं और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13 के तहत किसी भी अपराध का खुलासा करने के लिए मामले की जाँच की जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश जारी होना चाहिए कि वह गाइडलाइंस बनाए कि कोई भी पार्टी, ग्रुप कोई भी ऐसा पोस्टर और बैनर नहीं लगाएगा जिसमें एंटी नेशनल सामग्री हो। साथ ही कोरोना से मरे लोगों के अंतिम संस्कार और शव न दिखाए जाएँ। साथ ही केंद्र सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी के बारे में निर्देश जारी किया जाए।

याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार मामले की जाँच कराए और जाँच में अगर कॉन्ग्रेस जिम्मेदार पाया जाता है और लोगों के जीवन को खतरे में डालता पाया गया और एंटी नेशनल हरकत करता पाया जाता है तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द हो। 

हालाँकि कॉन्ग्रेस ने ‘टूलकिट दस्तावेज़’ के निर्माण से स्पष्ट रूप से इनकार किया है, रिपोर्टों से पता चलता है कि लेखक वास्तव में एआईसीसी की सदस्य है। बता दें कि सौम्या वर्मा का नाम दस्तावेज़ के निर्माता के रूप में उभरा है। अब सौम्या ने लिंक्डइन सहित अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिलीट कर लिया है।

AICC के चेयरमैन राजीव गौड़ा ने स्वीकार किया कि टूलकिट के लीक हुए दो डॉक्यूमेंट्स में से एक ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के शोध विभाग द्वारा तैयार किया गया है। कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने ट्वीट करके यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि AICC ने ही सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर एक शोध पत्र तैयार किया। हालाँकि, गौड़ा ने कहा कि टूलकिट भाजपा द्वारा बनाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा ओरिजिनल डॉक्यूमेंट के लेखक का डाटा दिखा रही है और उसे फेक डॉक्यूमेंट से जोड़ रही है।

डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर टिप्पणी नहीं कर सकता है, वास्तव में लीक हुए मोदी विरोधी टूलकिट और सेंट्रल विस्टा ‘रिसर्च’ दस्तावेज़ दोनों के बीच समानताएँ हैं।

2 – DG कोरोना के खिलाफ DRDO का नया हथियार

कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की जंग लगातार जारी है. इस बीच रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की ओर से शुभ समाचार देश को मिला है और डीआरडीओ ने एंटी-कोविड मेडिसन, 2 डीजी (2-DG) लॉन्च कर दी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोमवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम में 2 डीजी की पहली खेप को रिलीज की।

नई दिल्ली(ब्यूरो): 

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से एंटी-कोविड मेडिसिन, 2 डीजी (2-DG) लॉन्च कर दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस दवा की पहली खेप को रिलीज की।

पाउडर फॉर्म में उपलब्ध है दवा

डीआरडीओ के अनुसार, ‘2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज’ दवा को इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS) द्वारा हैदराबाद की डॉक्टर रेड्डी लैब के साथ मिलकर तैयार किया है। हाल ही में क्लीनिकल-ट्रायल में पास होने के बाद ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इस दवा को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। बताया जा रहा है कि ये दवाई सैशे में उपलब्ध होगी. यानी मरीजों को इसे पानी में घोलकर पीना होगा।

इस दवा से ऑक्सीजन लेवल रहेगा मेंटेन

अधिकारियों का कहना है कि ग्लूकोज पर आधारित इस दवा के सेवन से कोरोना मरीजों को ऑक्सजीन पर ज्यादा निर्भर नहीं होना पड़ेगा। साथ ही वे जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे। क्लीनिक्ल-ट्रायल के दौरान भी जिन कोरोना मरीजों को ये दवाई दी गई थी, उनकी RT-PCR रिपोर्ट जल्द निगेटिव आई है। उन्होंने बताया कि ये दवा सीधा वायरस से प्रभावित सेल्स में जाकर जम जाती है और वायरस सिंथेसिस व एनर्जी प्रोडक्शन को रोककर वायरस को बढ़ने से रोक देती है। इस दवा को आसानी से उत्पादित किया जा सकता है. यानी बहुत जल्द इसे पूरे देश में उपलब्ध कराया जा सकेगा।

देशभर में कोरोना के 24 घंटे में 281386 नए केस आए सामने

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटे में भारत में 2 लाख 81 हजार 286 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए है, जबकि इस दौरान 4106 लोगों की जान गई। इसके बाद भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 2 करोड़ 49 लाख 65 हजार 463 हो गई है, जबकि 2 लाख 74 हजार 390 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, देशभर में पिछले 24 घंटे में 3 लाख 78 हजार 741 लोग ठीक हुए, जिसके बाद कोविड-19 से ठीक होने वाले लोगों की संख्या 2 करोड़ 11 लाख 74 हजार 76 हो गई है। इसके साथ ही देशभर में एक्टिव मामलों में भी गिरावट आई है और देशभर में 35 लाख 16 हजार 997 लोगों का इलाज चल रहा है।

डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉक्टर अनंत नारायण ने बताया, ‘सीसीएमबी हैदराबाद में हमने इसका पहला टेस्ट किया था, उसके बाद हमने ड्रग कंट्रोल से कहा कि क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दें। ट्रायल में हमने देखा है कि कोरोना पेशेंट को काफी फायदा हुआ. टेस्टिंग के बाद फेज 2 सही से किया और फेज 3 में हमने बहुत बड़े पैमाने पर प्रयोग किया।’

डीआरडीओ ने डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज के साथ मिल बनाई दवा

कोरोना की इस दवा को डीआरडीओ के Institute of Nuclear Medicine and Allied Sciences यानी INMAS ने हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज के साथ मिलकर तैयार किया है।

इस दवा से 7 दिन में ठीक हो जाएंगे मरीज

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि 2-डीजी एक जेनेरिक मॉलीक्यूल है और ग्लुकोज से मिलती जुलती है, इसलिए इसका उत्पादन आसान होगा और ये दवा देश में बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराई जा सकेगी। डॉक्टर अनंत नारायण ने कहा, ‘इस ड्रग को हम जल्द से जल्द मार्किट में लाने का काम कर रहे है. यह दवा पाउडर के रूप में आता है पानी में घोल कर दिया जाता है। इसको दिन में 2 बार सुबह-शाम देने के बाद मरीज लगभग सात दिन में लोग ठीक हो रहे है।

ऑक्सीजन की किल्लत से मिलेगी राहत

इस दवा के बाजार में आने से एक और बड़ी राहत मिलेगी. अभी जो ऑक्सीजन की मारा-मारी है, दावा है कि इस दवा के मिलने के बाद ये समस्या बहुत हद तक कम होगी साथ ही ये दवा कोविड से संक्रमित मरीजों की अस्पताल में दाखिले की संख्या को भी कम करेगी. यानी मरीज घर पर रहकर ही डॉक्टर की सलाह से ये दवा लेकर ठीक हो जाएंगे।

‘देवी’ अहल्या बाई होल्कर की तुलना क्षुद्र राजनैतिक लाभ के लिए अपनी प्रजा पर अत्याचार करने वाली नेत्री से नहीं होनी चाहिए: श्रीमंत भूषण सिंह राजे

अपने भड़काऊ, बेतुके और अनर्गल ब्यान देने के लिए कुख्यात संजय राऊत के हाथ ‘सामना’ की शक्ल में एक ऐसी दोधारी तलवार लग चुकी है जिसका प्रयोग वह यदा कदा करते ही रहते हैं। स्त्री सम्मान के प्रति उनके विचार कंगना राणावत को ले कर पहले ही सोशल मीडिया में प्रसारित हो चुके हैं। स्वयं को मराठी अस्मिता का पैरोकार मानने वाली शिवसेना के मुखपृष्ठ ‘सामना’ के संपादक राऊत इतिहास के पन्नों में जातिवाचक संज्ञा का रूप बन चुकीं ‘देवी’ अहल्याबाई होल्कर, की तुलना बंगाल की उस राजनैतिक नेत्री से की जिं पर न केवल भ्रष्टाचार आपित धर्मद्रोही होने तक के आरोप लग चुके हैं। बंगाल की मुसलिम तुष्टीकरण की पुरोधा ‘ममता बेनर्जी। राऊत के इस तुलनत्म्क लेख में मोदी विरोध कम लेकिन चाटुकारिता अधिक झलकती है। संजय राउत को पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जीत नजर आ रही है लेकिन भाजपा द्वारा 3 से बढाकर 77 सीटों तक पहुंचने का सफर दिखाई नहीं दे रहा है। भाजपा ने पूरे विपक्ष का सफाया कर उसके राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है। ऐसे में सवाल ये है की वे भाजपा की तुलना किससे करेंगे। राईट विंग द्वारा विपक्ष में मजबूत स्थान प्राप्त कर चुकी है, ये बात संजय राउत भूलना नहीं चाहिए।

सारिका तिवारी, चंडीगढ़:

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना ‘महान महिला शासक’ रानी अहिल्या बाई होलकर से किए जाने के बाद रानी के वंशजों में गुस्सा है। लेख को पढ़ने के बाद उनके एक परिजन श्रीमंत भूषण सिंह राजे होलकर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा है।

पत्र में राउत की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ये बेहद शर्मनाक है कि एक राष्ट्रीय नेता की तुलना आजकल के राजनेताओं से की जाए, वो भी टुच्चे फायदों के लिए। होलकर ने बताया कि अहिल्याबाई ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और जनता की सेवा में लगाया, उनकी तुलना एक ऐसी नेत्री से नहीं हो सकती जो राजनीति के लिए अपने लोगों पर अत्याचार करे।

पत्र में उन्होंने लिखा की ऐसी तुलना सिर्फ और सिर्फ वैचारिक क्षमता उजागर करती है। किसी को भी पहले अपनी योग्यता साबित करनी चाहिए और बाद में लोगों को उसका मूल्य तय करने देना चाहिए। 

संजय राउत का विश्लेषण

संजय राउत ने अपने संपादकीय में ममता बनर्जी को अहिल्याबाई होलकर के समतुल्य रखकर कॉन्ग्रेस के विपक्षी पार्टी होने पर कई सवाल उठाए थे। ऐसी तुलना करके राउत ने बताना चाहा था कि ममता बनर्जी एक उभरती हुई विपक्षी नेता है। 

बता दें कि इससे पहले संजय राउत विपक्षी नेता के तौर पर शरद पवार का नाम ले चुके हैं। उनका कहना था कि यूपीए को एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार अच्छे से दिशा दिखा पाएँगे।

अहिल्या बाई होलकर

उल्लेखनीय है कि शिवसेना के मुखपत्र में जिन अहिल्याबाई होलकर की तुलना तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी से की गई, वो एक महिला शासक थीं। उन्हें राजमाता या महारानी अहिल्याबाई होलकर भी कहा जाता था। वह न केवल एक योद्धा थीं, बल्कि पढ़ी लिखी, कई भाषा की जानकार और बोलियों में निपुण थीं। महेश्वर में 30 साल रहते हुए उन्होंने खुद को जनसेवा में समर्पित कर दिया था। इसके अलावा औद्योगीकरण को बढ़ावा और  धर्म शब्द का प्रसार करने का काम भी रानी अहिल्या द्वारा किया गया था।

ਕੋਵਿਡ -19 ਦੇ ਪ੍ਰੋਟੋਕਾਲ ਦੀ ਉਲੰਗਣਾ: ਜਿੱਮੀ ਸ਼ੇਰਗਿੱਲ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ

ਕਲਾਕਾਰ ਜਿੰਮੀ ਸ਼ੇਰਗਿੱਲ ਨੂੰ ਬੁੱਧਵਾਰ ਨੂੰ ਪੰਜਾਬ, ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਕੋਰੋਨਾ ਗਾਈਡਲਾਈਨ ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਵਿੱਚ ਗ੍ਰਿਫ਼ਤਾਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ। ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੰਗਲਵਾਰ ਨੂੰ ਉਸ ਨੂੰ ਫਿਲਮ ਦੀ ਸ਼ੂਟਿੰਗ ਲਈ ਚਲਾਨ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਸੀ। ਇਹ ਇਲਜਾਮ ਲਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅਦਾਕਾਰ ਜਿੰਮੀ ਸ਼ੇਰਗਿੱਲ ਦੀ ਸ਼ੂਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਸਮਾਜਕ ਦੂਰੀਆਂ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਹੋਰ ਨਿਯਮਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਜ਼ੋਰਾਂ-ਸ਼ੋਰਾਂ ਨਾਲ ਹਟਾਇਆ ਗਿਆ।

ਨਰੇਸ਼ ਸ਼ਰਮਾ ਭਾਰਦਵਾਜ, ਜਲੰਧਰ:

ਕੋਵਿਡ -19 ਦੇ ਪ੍ਰੋਟੋਕਾਲ ਦੀ ਉਲੰਗਣਾ ਕਰਨ ਦੇ ਦੋਸ਼ਾਂ ਹੇਤ ਪੰਜਾਬੀ ਫਿਲਮੀ ਹੀਰੋ ਜਿੱਮੀ ਸ਼ੇਰਗਿੱਲ ਨੂੰ ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਜਿੱਮੀ ਲੁਧਿਅਨਾ ਚ ਨਾਈਟ ਕਰਫਿਊ ਦੌਰਾਨ ਇਕ ਵੈਬ ਸੀਰੀਜ਼ ਦੀ ਸ਼ੂਟਿੰਗ ਕਰ ਰਹੇ ਸਨ.ਜਿਮੀ ਸ਼ੇਰਗਿੱਲ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਲੁਧਿਆਂ ਪੋਲਿਸ ਨੇ ਅਕਾਸ਼ ਦੀਪ ,ਮਨਦੀਪ ਤੇ ਈਸ਼ਵਰ ਖਿਲਾਫ ਵੀ ਮਹਾਮਾਰੀ ਐਕਟ ਹੇਠ ਪਰਚਾ ਦਰਜ਼ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਦੱਸ ਦੇਈਏ ਕਿ ਜਿੰਮੀ ਸ਼ੇਰਗਿੱਲ ਆਪਣੀ ਵੈੱਬ ਸੀਰੀਜ਼ ‘ਯੂਅਰ ਆਨਰ 2’ ਦੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਆਰੀਆ ਸਕੂਲ ਵਿਚ ਸ਼ੂਟਿੰਗ ਕਰ ਰਹੇ ਸਨ।

ਕਈ ਚਾਰ ਪਹੀਆ ਵਾਹਨ ਚਾਲਕਾਂ ਨੇ ਇੱਕ ਇੱਕ ਕਰਕੇ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਆਰੀਆ ਸਕੂਲ ਵਿੱਚ ਦਾਖਲ ਹੋਏ। ਜਦੋਂ ਅੰਦਰ ਵੇਖਿਆ ਗਿਆ ਤਾਂ ਪਤਾ ਲੱਗਿਆ ਕਿ ਇੱਕ ਪੰਜਾਬੀ ਫਿਲਮ ਦੀ ਸ਼ੂਟਿੰਗ ਚੱਲ ਰਹੀ ਹੈ। ਅਦਾਕਾਰ ਜਿੰਮੀ ਸ਼ੇਰਗਿੱਲ ਇਕ ਪੰਜਾਬੀ ਫਿਲਮ ਦੀ ਸ਼ੂਟਿੰਗ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਸੀ। ਆਰੀਆ ਸਕੂਲ ਨੂੰ ਸੈਸ਼ਨ ਕੋਰਟ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦਾ ਰੂਪ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਜਦੋਂ ਪੁਲਿਸ ਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪਤਾ ਲੱਗਿਆ ਤਾਂ ਏਸੀਪੀ ਵਰਿਆਮ ਸਿੰਘ ਪੁਲਿਸ ਪਾਰਟੀ ਨਾਲ ਉਥੇ ਪਹੁੰਚ ਗਏ। ਉਸਨੇ ਸ਼ੂਟਿੰਗ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿੱਤੀ। ਫਿਲਮ ਦੇ ਨਿਰਦੇਸ਼ਕ ਨੇ ਉਸਨੂੰ ਮਨਜ਼ੂਰੀ ਦੇ ਕਾਗਜ਼ਾਤ ਦਿਖਾਏ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਉਸਨੇ ਦੋ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਦੋ ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਦੇ ਚਲਾਨ ਕੀਤੇ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਵੀ ਸ਼ਾਮਲ ਹੈ, ਜਿਥੇ ਸਮਾਜਕ ਦੂਰੀਆਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਗਈ।

ਏਸੀਪੀ ਵਰਿਆਮ ਸਿੰਘ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਉਸਨੂੰ ਗੋਲੀ ਮਾਰਨ ਦੀ ਇਜਾਜ਼ਤ ਸੀ। ਸਮਾਜਿਕ ਦੂਰੀਆਂ ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਦੋ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦਾ ਚਲਾਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ. ਆਰੀਆ ਸਕੂਲ ਵਿਚ ਕਾਫ਼ੀ ਕਮਰੇ ਹਨ, ਹਰ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਪੰਜ ਤੋਂ ਛੇ ਲੋਕ ਸਨ. ਸ਼ੂਟਿੰਗ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਖਤਮ ਹੋ ਗਈ ਸੀ।

ਦੱਸਣਯੋਗ ਹੈ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵਲੋਂ ਸੂਬੇ ’ਚ ਵੱਧ ਰਹੇ ਕੋਰੋਨਾ ਕੇਸਾਂ ਨੂੰ ਦੇਖਦਿਆਂ ਲਾਕਡਾਊਨ ਲਗਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ। ਇਥੋਂ ਤਕ ਕਿ ਵਿਆਹ ਤੇ ਅੰਤਿਮ ਸੰਸਕਾਰ ’ਚ 20 ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਇਕੱਠੇ ਹੋਣ ਦੀ ਛੋਟ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ ਪਰ ਇਥੇ 100 ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਸਵਾਲੀਆ ਨਿਸ਼ਾਨ ਖੜ੍ਹੇ ਕਰਦੀ ਹੈ।