आज डाकटरों की देशव्यापी हड़ताल

ममता की भड़काई आग में सारे देश के जूनियर डाक्टर हड़ताल पर हैं। अभी तक कहीं कहीं सांकेतिक हड़ताल चल रही थी परंतु आज यानि 17 जून को आईएमए और दूसरे संगठनों ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। जो बात सिर्फ एक आश्वासन से दूर की जा सकती थी उसे पहले ममता ने सांप्रदायिक रंग दिया, फिर क्षेत्रीय मामला बनाया, धमकाया, इस्तीफे – निलंबन और तत्पश्चात अपनी सुरक्षा से भी जोड़ दिया। सब कुछ किया बस वही नहीं किया जो अति साधारण और अति आवश्यक था।

नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के साथ हुए व्यवहार के बाद हड़ताल का असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है. आज राजधानी दिल्ली में सफदरजंग, लेडी हार्डिंग, आरएमएल, जी टीबी, डॉ बाबासाहेब अंबेडकर, संजय गांधी मेमोरियल, दिन दयाल उपाध्याय अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे. डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने के कारण दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं और रूटीन ऑपरेशन प्रभावित होंगे. 

इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी

इन अस्पतालों में करीब 14,500 रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने से ओपीडी प्रभावित रहेंगी. वहीं ऑपरेशन थियेटर बंद रहने की वजह से पहले से निर्धारित ऑपरेशन नहीं हो पाएंगे. हालांकि ओपीडी में वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहेंगे. रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि इमरजेंसी में रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे. ताकि गंभीर मरीजों का इलाज प्रभावित न होने पाए. आइएमए की घोषणा के मद्देनजर दिल्ली के निजी अस्पतालों में भी ओपीडी सेवा प्रभावित होने की आशंका है. इससे हजारों मरीजों का इलाज प्रभावित होगा.

इन अस्पतालों में जाने से बचें

सफदरजंग, आरएमएल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, लोकनायक, जीबी पंत, जीटीबी, डीडीयू, संजय गांधी स्मारक अस्पताल, आंबेडकर अस्पताल, गुरु गो¨वद सिंह अस्पताल, हइबास, हिंदू राव, भगवान महावीर अस्पताल, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, रेलवे अस्पताल व महर्षि वाल्मीकि अस्पताल, एलबीएस. एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने अपना फैसला बदल लिया है और दोपहर 12 बजे से हड़ताल में शामिल होने के एलान किया है. इससे कार्डियक सेंटर व न्यूरो सेंटर में दोपहर दो बजे से होने वाली ओपीडी प्रभावित होगी.

दिल्ली के इन अस्पतालों के लिए जारी किया गया नंबर

यहां पहुंचने वाले मरीज़ हड़ताल से  अस्पताल में कौन-कौन सी स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुई है उसकी जानकारी हासिल कर सकते हैं..
1. सफदरजंग  :- 26165060, 26165032, 26168336
2. लेडी हार्डिंग :- 011 2336 3728
3. आरएमएल :-91-11-23404040
4. जी टीबी  :- 011 2258 6262
5. डॉ बाबासाहेब अंबेडकर:- 0120 245 0254
6. संजय गांधी मेमोरियल :-011 2792 2843 / 011 2791 5990
7.दिन दयाल उपाध्याय : 011 2549 4402

टीएमसी नेताओं के बच्चे डाक्टरों की हड़ताल के समर्थक

नई दिल्‍ली : पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक अस्‍पताल में तीमारदारों की ओर से डॉक्‍टरों संग की गई मारपीट के बाद शुरू हुई डॉक्‍टरों की हड़ताल पूरे देश में फैल गई है. देश के सबसे बड़े सरकारी अस्‍पताल एम्‍स के भी रेजीडेंट डॉक्‍टर भी इसमें शामिल हो गए हैं. डॉक्‍टरों की इस हड़ताल में कोलकाता के मेयर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता फरहाद हकीम की डॉक्‍टर बेटी भी शामिल हो गई है. उनकी बेटी शबा हकीम ने गुरुवार को डॉक्‍टरों की हड़ताल का समर्थन किया है. इसके साथ ही उन्‍होंने फेसबुक में एक पोस्‍ट लिखा. उसमें उन्‍होंने साफतौर पर कहा है कि मैं टीएमसी समर्थक हूं लेकिन इस मामले में नेताओं के ढुलमुल रवैया और उनकी ओर से साधी गई चुप्‍पी पर मैं शर्मिंदा हूं.

app-facebookShabba Hakimon Wednesday

For those who do not know Doctors in government and most private hospitals are boycotting OPD but are still working in emergency. Unlike other professions we can’t just decide not to work because at the end of the day we have humanity. 
If there was a bus or taxi strike not one taxi driver or bus driver would provide you with any service no matter how dire the situation. 
For those saying “Ono Rugider ki dosh?” Please question the government as in why the police officers post…See more

शबा हकीम ने कोलकाता के केपीसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से डॉक्‍टरी की पढ़ाई की है. शबा हकीम ने सोशल मीडिया में पोस्‍ट करते हुए डॉक्‍टरों को पश्चिम बंगाल में काम के समय अस्‍पताल में सुरक्षा उपलब्‍ध कराने की मांग की. बात दें कि इसके बाद शुक्रवार को ही खुद ममता बनर्जी के भतीजे आबेश बनर्जी भी डॉक्‍टरों की इस हड़ताल में शामिल हुए हैं. कोलकाता के केपीसी मेडिकल कॉलेज और अस्‍पताल में पढ़ने वाले आबेश बनर्जी ने डॉक्‍टरों की हड़ताल का समर्थन किया है और इस हड़ताल में शामिल हो गए हैं. 

पश्‍चिम बंगाल में मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के अल्‍टीमेटम के बाद डॉक्‍टरों की हड़ताल ने तूल पकड़ लिया है. इसी के चलते शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के 16 और डॉक्‍टरों ने अपना इस्‍तीफा दे दिया है. ये सभी डॉक्‍टर कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं.

डॉक्‍टरों की सुरक्षा की मांग और पश्चिम बंगाल की घटना के विरोध में डॉक्‍टरों का प्रतिनिधिमंडल ने आज स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मुलाकात की है. डॉक्‍टरों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात से पहले स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने डॉक्‍टरों से सांकेतिक हड़ताल कर मरीजों का इलाज जारी रखने की अपील की. उन्‍होंने कहा कि मैं सभी डॉक्‍टरों को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर है. 

Dr Dev D@neo_natal

Dr Abesh Banerjee, nephew of Mamata Banerjee at KPC hospital Kolkata!!#SaveTheDoctors https://twitter.com/Jb21bh/status/1139209543928258560 …

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#Jayanta Bhattacharya@Jb21bhAbesh Bannerjee, son of @MamataOfficial’s brother Kartik Bannerjee was leading the protest of the doctors of KPC College and Hospital.#BengalBurning,@trunilss,@prettypadmaja,#IndiaFirst, #TeamIndiaFirst510:09 PM – Jun 13, 2019Twitter Ads info and privacySee Dr Dev D’s other Tweets

 
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने यह भी कहा कि मैं पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी से अनुरोध करता हूं कि इस मामले को अपने सम्‍मान का मुद्दा न बनाएं. उन्‍होंने डॉक्‍टरों को कल अल्‍टीमेटम दिया था, इसीलिए डॉक्‍टर नाराज हो गए और उन्‍होंने हड़ताल कर दी. आज मैं इस मामले में ममता बनर्जी जी को लिखूंगा. साथ ही उनसे बात करने की भी कोशिश करूंगा.

ममता के चलते डाक्टरों की देशव्यापी हड़ताल

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी और डॉक्‍टरों के बीच हुए विवाद की आंच पूरे देश में फैल गई है. पश्चिम बंगाल के डॉक्‍टरों के साथ हुई मारपीट के बाद देशभर के डॉक्‍टर उनके समर्थन में आ गए हैं. इसके तहत राजधानी दिल्‍ली, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र और उत्‍तर प्रदेश के अधिकांश सरकारी और निजी डॉक्‍टर आज हड़ताल करेंगे. साथ ही कुछ मरीजों के इलाज के दौरान ही विरोध प्रदर्शन करेंगे. सनाद रहे कोलकाता के सरकारी अस्‍पताल सागर दत्‍ता मेडिकल कॉलेज और अस्‍पताल के 3 असिस्‍टेंट प्रोफेसर, 1 प्रोफेसर और 4 रेजिडेंट डॉक्‍टरों ने पद से इस्‍तीफा दे दिया है.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने दोपहर दो बजे तक काम पर लौटने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश को नहीं माना और कहा कि सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा संबंधी मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी. वहीं मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों पर बरसते हुए विपक्षी बीजेपी और सीपीएम पर उन्हें भड़काने तथा मामले को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया.

डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से कई सरकारी अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों अस्पतालों में तीसरे दिन भी आपातकालीन वार्ड, ओपीडी सेवाएं, पैथोलॉजिकल इकाइयां बंद रही. वहीं निजी अस्पतालों में भी चिकित्सकीय सेवाएं बंद रहीं. डॉक्टर कोलकाता में एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद भीड़ द्वारा अपने दो सहकर्मियों पर हमले के मद्देनजर प्रदर्शन कर रहे हैं. भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने घटना के खिलाफ तथा हड़ताली डॉक्टरों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए शुक्रवार को ‘अखिल भारतीय विरोध दिवस’ घोषित किया है.

विपक्ष ने गतिरोध के लिए बनर्जी पर हमला किया है और बीजेपी ने उनपर ‘हिटलर’ की तरह काम करने का आरोप लगाया. जब मुख्यमंत्री दोपहर में सरकारी एसएसकेएम अस्पताल पहुंची तो डॉक्टरों ने ‘हमें इंसाफ चाहिए’ के नारे लगाए. उन्होंने कहा, “मैं आंदोलन की निंदा करती हूं. कनिष्ठ चिकित्सकों का आंदोलन सीपीएम और बीजेपी का षड्यंत्र है.”  

बनर्जी के पास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का भी प्रभार है. उन्होंने चिकित्सकों को चार घंटे के भीतर काम पर लौटने को कहा था लेकिन बाद में समय-सीमा में संशोधन करके इसे अपराह्न दो बजे कर दिया. उन्होंने ऐसा नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि उन्हें छात्रावास खाली करने होंगे. बनर्जी की समय सीमा के बावजूद डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल जारी रखी. डॉक्टरों की एक टीम ने इस मुद्दे पर राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी से मुलाकात की. राज्यपाल ने भी उनसे हड़ताल खत्म करने की अपील की.

त्रिपाठी से भेंट के बाद राजभवन के बाहर एक जूनियर डॉक्टर ने कहा, “मांग पूरी होने तक हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे. हमारी मांगे साधारण हैं…उचित सुरक्षा मिले और सभी अस्पताल में सशस्त्र पुलिस बल तैनात हों तथा एनआरएस अस्पताल में शनिवार को हुए हमले में शामिल अपराधियों को गैर जमानती धाराओं में गिरफ्तार किया जाए.”

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो कहा, हमें उनसे उसकी उम्मीद नहीं थी. बहरहाल, बनर्जी ने आरोप लगाया कि बाहर के लोग चिकित्सीय कॉलेजों और अस्पतालों में व्यवधान डालने के लिए घुस आए हैं. उन्होंने बीजेपी पर हड़ताल को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “सीपीएम की मदद से बीजेपी हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर रही है. मैं उनके बीच प्रेम को देखकर स्तब्ध हूं.” बनर्जी ने कहा, “बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने और फेसबुक पर दुष्प्रचार चलाने के लिए उकसा रहे हैं.’’ 

एक फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने हड़ताल की वजह से मरीजों की खराब हालात को रेखांकित किया तथा दावा किया कि सरकार डॉक्टरों के साथ सहयोग कर रही है. उन्होंने एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में दो जूनियर डॉक्टरों को आई चोटों को दुर्भाग्यपूर्ण कहा. बनर्जी ने कहा कि इस बाबत पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और इलाज में लापरवाही की शिकायत पर भी जांच के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि कैंसर व गुर्दे के मरीज तथा दुर्घटना पीड़ित और दूर दराज से आए बच्चे इलाज नहीं मिलने की वजह से सबसे ज्यादा भुगत रहे हैं.

विपक्षी पार्टियों ने हड़ताली डॉक्टरों को कथित ‘धमकी’ देने के लिए मुख्यमंत्री की आलोचना की और स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर उनका इस्तीफा मांगा. बीजेपी नेता मुकुल रॉय ने आरोप लगाया कि बनर्जी अराजक बन गई हैं और ‘हिटलर’ की तरह काम कर रही है. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए माकपा की केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि बनर्जी की गतिरोध को खत्म करने में दिलचस्पी नहीं लगती है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा ने भी मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए.

स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री बनर्जी पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. मेरे पास डॉक्टरों के इस्तीफे की कोई रिपोर्ट नहीं है.’’

डॉक्टरों की हड़ताल की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बृहस्पतिवार को मरीजों और उनके तीमारदारों से संयम बरतने का अनुरोध किया और घटना की निंदा की. उन्होंने कहा कि कि वह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के समक्ष डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा उठाऐंगे. राष्ट्रीय राजधानी स्थित एम्स के रेजीडेंट डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार को सांकेतिक प्रदर्शन करते हुए अपने सिर पर पट्टियां बांधकर काम किया और शुक्रवार को काम का बहिष्कार करने का फैसला किया. इस बीच बनर्जी ने एसएसकेएम अस्पताल के हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर उनके दौरे के समय अपशब्द बोलने का आरोप लगायाा.

उन्होंने गुरुवार रात को एक बांग्ला समाचार चैनल से बातचीत में कहा, “मैं आपातकालीन विभाग में गयी थी जहां वे मुझसे बात कर सकते थे, लेकिन जब मैं वहां थी तो उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, वह मुझे अपशब्द बोलने जैसा था.” 

विखे पाटिल ने हाथ छोड़ कमल थामा

कांग्रेस से इस्‍तीफा देने वाले अब्‍दुल सत्‍तार के दावों पर यकीन करें तो पार्टी की मुश्‍किलें महाराष्‍ट्र और भी बढ़ने वाली हैं. उनका दावा है कि कांग्रेस के 8-10 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं, जो कभी भी पार्टी छोड़ सकते हैं.

मुंबई:

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार से हिचकोले खा रही महाराष्ट्र कांग्रेस को झटके पर झटके लग रहे हैं. महाराष्ट्र कांग्रेस के दिग्गज नेता और विधानसभा में नेता प्रति‍पक्ष राधाकृष्ण पाटिल ने इस्तीफा दे दिया है. उनके साथ ही पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार ने भी विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है. अब्‍दुल सत्‍तार के दावों पर यकीन करें तो कांग्रेस की मुश्‍किलें यहां और भी बढ़ने वाली हैं. उनका दावा है कि कांग्रेस के 8-10 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं, जो कभी भी पार्टी छोड़ सकते हैं.

राधाकृष्ण पाटिल ने बेटे को अहमदनगर सीट से लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं मिलने के बाद ही पार्टी छोड़ने के बारे में संकेत दे दिए थे. उन्होंने 25 अप्रैल को ही विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद छोड़ दिया था. लोकसभा चुनाव प्रचार में भी राधाकृष्ण विखे पाटिल ने हिस्सा नहीं लिया. उनके बेटे सुजोय पाटिल पहले ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं, क्योंकि उन्हें अहमदनगर से कांग्रेस का टिकट नहीं मिला था.

दरअसल अहमदनगर की सीट एनसीपी के कोटे में जा रही थी और एनसीपी किसी कीमत पर ये सीट छोड़ने को तैयार नहीं हुई. इससे  मायूस होकर सुजोय विखे पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने के बाद बीजेपी ज्वाइन कर ली थी. बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में सुजोय को अहमदनगर से अपना उम्मीदवार बनाया और उन्हें जीत भी मिली. तभी से ये कयास लगाए जा रहे थे कि राधाकृष्ण विखे पाटिल कभी भी कांग्रेस का हाथ झटक सकते हैं. आखिरकार मंगलवार को राधाकृष्ण विखे पाटिल ने अपना इस्तीफा विधासनभा के स्पीकर को सौंप दिया.

हालांकि राधाकृष्ण विखे पाटील ने अपने अगले कदम के बारे में बताया नहीं है, लेकिन जिस तरह इस्तीफा देने के बाद वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिले उससे साफ है कि उनके इरादे क्या हैं. सूत्रों की मानें तो राधाकृष्ण विखे पाटिल ना सिर्फ बीजेपी ज्वाइन करेंगे बल्कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल के विस्तार में भी उन्हें जगह मिल सकती है.

इधर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं. हालांकि उनके इस्तीफे पर कांग्रेस हाईकमान ने अभी तक कोई फैसला नहीं किया है. महाराष्ट्र में कुछ महीने बाद ही विधानसभा के चुनाव होने हैं. कुछ ही महीने पहले दिग्गज नेताओं के छोड़ने से पार्टी की मुश्किलें और बढ़ने वाली है. इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा.

अलगाववादी बयानों को लेकर घिरे ओवैसी

मोदी की रहनुमाई में भाजपा की इंकलाबी जीत की आँधी में तिनके की तरह उड़े विपक्ष के एक मुस्लिम अलगाववादी नेता ओवैसी ने मोदी के “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के बदले में मक्का मस्जिद में मुस्लिम बिरदरान को भड़काते हुए कहा की ‘मुसलमान यहाँ हिस्सेदार है न कि किरायेदार’ उनके इस बयान से उनकी हताशा ओर निराशा तो नज़र आती ही है साथ ही उनकी कुंठित सोछ जो उनके अपने ही समाज को ले कर है नज़र आती है, गहन निराशा में डूबे ओवैसी एक बार फिर अपने बयानों को लेकर घिर गए हैं।

Madhav Bhandar a file photograph

नई दिल्ली : ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के किरायेदार वाले बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया है. बीजेपी नेता माधव भंडारी ने असदुद्दीन ओवैसी पर हमला बोलते हुए कहा- उन्हें सोच समझकर बोलना चाहिए, उनको किसी ने किरायेदार नहीं कहा, लेकिन हिस्सेदारी की भाषा बोलेंगे तो वो 1947 में दे दी, तो मामला ही खत्म हो गया. 

क्या बोले थे ओवैसी
बता दें कि 1 जून को ओवैसी ने बीजेपी की जीत पर तंज कसते हुए कहा था, अगर कोई ये समझ रहा है कि हिंदुस्तान के वजीर-ए-आजम 300 सीट जीतकर हिंदुस्तान पर मनमानी करेंगे तो यह नहीं हो सकेगा.

उन्होंने कहा, वजीर-ए-आजम से हम कहना चाहते हैं, संविधान का हवाला देकर ओवैसी ने कहा कि मैं आपसे लडूंगा, मजलूमों के इंसाफ के लिए. उन्होंने कहा था कि हिंदुस्तान को आबाद रखना है, हम हिंदुस्तान को आबाद रखेंगे, हम यहां पर बराबर के शेहरी है, किरायेदार नहीं है, हिस्सेदार रहेंगे. 

कैलाश खेर ने मोदी की प्रचंड जीत पर राष्ट्र को समर्पित किया एक गीत

लोकसभा चुनाव 2019 में पीएम मोदी को म‍िली जीत पर बॉलीवुड से भी बधाइयां म‍िल रही हैं. बीजेपी के इस प्रचंड बहुमत पर गायक कैलाश खेर ने देशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए एक गाना उन्हें समर्पित किया है. कैलाश ने पहले भी मोदी को समर्पित गीत गाये हैं जो बहुत पसंद ईईए गए हैं।

मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा चुनाव 2019 में मि‍ली शानदार जीत पर उन्‍हें हर ओर से बधाइयां मिल रही हैं. बॉलीवुड भी इसमें पीछे नहीं है. सभी बॉलीवुड सितारे उन्‍हें इस जीत पर अपने अपने तरीके से बधाई दे रहे हैं. बीजेपी के इस प्रचंड बहुमत पर गायक कैलाश खेर ने देशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए एक गाना उन्हें समर्पित किया है. इस गीत को कैलाश खेर ने खास तौर पर ज़ी न्यूज़ के साथ साझा किया है.

कैलाश खेर का मानना है कि देशवासियों ने देश का नेतृत्व एक ऐसे व्यक्तित्व के हाथों में सौंपा है, जिसके बाद देश उन्नति की तरफ बढ़ेगा. वह कहते हैं कि‍ पीएम मोदी ने भारतवर्ष को एक नई ऊर्जा से भर दिया है. देश प्रेम, राष्ट्रप्रेम का भाव हर जनमानस के मन में है. यही वजह है कि ऐसे महान भारतवर्ष और भारतवासियों का आभार व्यक्त करते हुए मोदी जी के समर्थन में, उनका स्वागत करते हुए कैलाश खेर ने इस गाने को तैयार किया है, जिसके बोल इस प्रकार हैं.

है भारत का त्यौहार, त्यौहार देश का
दिल की गहराई से है, आभार देश का
गुणगान क्या करूँ मैं, जनता विशेष का
धन्यवाद, शुक्रिया, आभार देश का

जनता जनार्दन ने किया क्षीर सागर मंथन
अश्वमेध राजसूय महायज्ञ सम्पन्न
नतमस्तक कोटि कोटि जन जन को नमन
पुनरापी हो रहा है सतयुग का आगमन
मेरे राष्ट्र का उपहार उद्ग़ार देश का

ये ध्यान तप  समाधि का प्रभाव दिख रहा है
शिव स्वरूप साक्षात केदार दिख रहा है
निकला  गुफा से शंभू साकार दिख रहा है
सन्मार्ग प्रशस्त करता अवतार दिख रहा है
भारत का होता अब बेड़ा पार दिख रहा है

कैलाश खेर ने कहा, मैं मोदी जी को ढेर सारी शुभकामनाएं देता हूं. मुझे पूरी उम्मीद है कि मोदी जी भारत को एक नई ऊंचाइयों तक जरूर पहुंच जाएंगे. 

‘बुढ़ापे में अक्सर लोग सठिया जाते हैं’: पायल रोहतगी

बिग बॉस एक्स कंटेस्टेंट और एक्ट्रेस पायल रोहतगी का विवादों में रहना कोई नई बात नहीं है। वह अक्सर अपने ट्वीट्स को लेकर खबरों में रहती हैं। कभी गौहर खान से कहासुनी कभी उर्मिला मातोंडकर के धर्म पर सवाल तो कभी सोनी राजदान को देश छोड़ने के लिए कहना। अब स्वरा भास्कर के बाद पायल रोहतगी के निशाने पर आये हैं कमल हस्सन। कमल हासन के पहला आतंकवादी ‘हिंदू’ था वाले बयान पर उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है. इसी कड़ी में पायल रोहतगी ने भी कमल हासन को बुड्ढा बताते हुए कहा है कि साठ साल के बाद इंसान का दिमाग काम करना बंद कर देता है. 

नई दिल्ली : पायल रोहतगी का बॉलीवुड करियर तो ज्यादा चला नहीं लेकिन सोशल मीडिया पर पायल इन दिनों काफी एक्टिव हैं. पिछले दिनों से पायल अपनी बयानबाजी को लेकर खबरों में बनी हुई हैं. मक्कल नीधि मैयम (एमएनएम) के संस्थापक कमल हासन(Kamal Haasan) के पहला आतंकवादी ‘हिंदू’ था वाले बयान पर उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है. इसी कड़ी में पायल रोहतगी ने भी कमल हासन को बुड्ढा बताते हुए कहा है कि साठ साल के बाद इंसान का दिमाग काम करना बंद कर देता है. 

पायल रोहतगी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा कि एक हिंदू ने दूसरे हिंदू को मारा. इसे आप क़त्ल कह सकते हैं, आतंकवाद कैसे? आतंकवादी वो होते हैं जो अपने से अलग धर्म के लोगों को मारते हैं क्योंकि उनको वो दूसरे धर्म से नफ़रत होती है. बुढ़ापे में अक्सर लोग सठिया जाते हैं. कमल हासन अपना राजनीति करियर शुरू करने के लिए नाथूराम गोडसे को को भारत का पहला आतंकवादी कहते हैं. 

बता दें कि कमल हासन के अलावा पायल कई बॉलीवुड सेलेब्स को भी अपने निशाने पर लिए हुए हैं. पायल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘स्वरा आंटी खुद को फेमिनिज्म की समर्थक कहती हैं. साथ ही कांग्रेस, AAP और CPI उम्मीदवार कन्हैया कुमार को सपोर्ट कर रही हैं. गजब का समर्थन है. पायल ट्विटर पर खुलकर बीजेपी को सपोर्ट करती हैं और कांग्रेस पर हमले करने से पीछे भी नहीं हटती हैं. 

चुनाव आयोग ने खारिज की सर्वोच्च न्यायालय की सलाह

जिस याचिका को न्यायालय के सतर पर ही खारिज हो जाना चाहिए था उसे चुनाव आयोग त पहुंचाया गया। अगर याचिकाकारता की मानें तो भारत की आधी आबादी सोमवार और शुक्रवार का व्रत रखती है, इस लिहाज से सोमवार एवं शुक्रवार को भी चुनावों के नियमों में ढील दी जानी चाहिए। यह तो अच्छा हुआ की चुनाव आयोग ने तुष्टीकरण की नीति नहीं अपनाई।
एक य‍ाच‍िका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग वोट‍िंग के समय को सुबह 7 बजे की बजाए अलसुबह साढ़े 4 या 5 बजे से कर दे.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग से कहा कि ‘लू’ और रमजान को ध्यान में रखते हुये लोकसभा चुनाव के शेष चरणों का मतदान शुरू होने का समय सुबह सात बजे से पहले सवेरे पांच बजे करने के बारे में वह आवश्यक आदेश जारी करे. इस मांग को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है. इससे पहले प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष इस सिलसिले में एक याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया गया.

पीठ ने कहा था, ‘ चुनाव आयोग को आवश्यक आदेश जारी करने का निर्देश दिया जाता है. उपरोक्त संदर्भों में रिट याचिका का निपटारा किया जाता है.’ यह याचिका अधिवक्ता मोहम्मद निजामुद्दीन पाशा और असद हयात ने दायर की थी. इसके जरिए चुनाव के शेष चरणों में मतदान का समय सुबह सात बजे के बजाय दो से ढाई घंटे पहले, सुबह साढ़े चार या पांच बजे से करने का अनुरोध किया गया.

याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग को लोकसभा चुनाव के तहत पांचवें, छठे और सातवें चरण के मतदान के लिए मतदान का समय दो से ढाई घंटे पहले करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है. शेष तीन चरणों के तहत क्रमश: छह मई, 12 मई और 19 मई को मतदान होना है. याचिका में कहा गया है कि चुनाव के इन शेष चरणों के दौरान देश के कई हिस्सों में ‘लू’ चलने की परिस्थितियां मौजूद होंगी और रमजान का महीना भी रहेगा.

याचिका में कहा गया है कि रमजान का महीना छह मई से शुरू होने की संभावना है, जिस दिन पांचवें चरण का मतदान है. रमजान के दौरान मुसलमान रोजा रखते हैं. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने इस सिलसिले में सोमवार को आयोग को एक ज्ञापन दिया था लेकिन आयोग ने इसका जवाब नहीं दिया. इसमें यह भी कहा गया है कि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में प्रचंड ‘‘लू’’ चलने की चेतावनी दी है. इस दौरान चुनावी राज्यों – मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, झारखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में तापमान सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा हो जाता है.

याचिका में कहा गया है कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते मुसलमानों का घरों से बाहर निकलना और वोट देने के लिए कतार में खड़े रहना मुश्किल होगा. साथ ही सुबह की नमाज और सहरी करने के बाद ज्यादातर लोग (रोजा रखने वाले) आराम करते हैं.

सन्नी: “सबसे सीखना चाहता हूँ और मिल कर समस्याओं का सामना करना चाहता हूँ “

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए गुरुदासपुर में चुनाव प्रचार जोर पकड़ रहा है. अभिनेता सनी देओल ने अपने भाषणों से विरोधियों पर वार करना शुरू कर दिया है. अभिनेता से राजनेता बने सनी देओल ने गुरुवार को कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करना उनकी प्राथमिकता होगी. स्न्नी देओल को राजनीति की समझ हो या न हो उन्हे सही और गलत के बीच फर्क करना आता है।

गुरदासपुर: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए गुरुदासपुर में चुनाव प्रचार जोर पकड़ रहा है. अभिनेता सनी देओल ने अपने भाषणों से विरोधियों पर वार करना शुरू कर दिया है. अभिनेता से राजनेता बने सनी देओल ने गुरुवार को कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करना उनकी प्राथमिकता होगी. सनी देओल गुरदासपुर लोकसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार हैं. अभिनेता ने इस बात पर जोर दिया कि वह गुरदासपुर लोगों के लिए काम करने आए हैं और मुंबई लौटने का उनका कोई इरादा नहीं हैं.

सनी देओल उर्फ अजय सिंह देओल ने अभिनेता एवं गुरदासपुर से पूर्व बीजेपी सांसद विनोद खन्ना के कार्यकाल की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि वह इस सीमावर्ती सीट पर लोगों के वोट हासिल कर खन्ना के काम को आगे ले बढ़ाएंगे. सनी देओल ने पहली बार मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण हमारे युवा हैं. मैं उनके लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करना चाहता हूं.”

उन्होंने कहा कि वह किसानों के कल्याण के लिए काम करना चाहते हैं. अभिनेता ने कहा, “हमारा पंजाब से नाता है और खेती हमारे खून में है. मैं उनके सभी मुद्दों को समझना चाहता हूं और उनके कल्याण के लिए हर संभव कदम उठाना चाहता हूं.”

कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ ने बुधवार को देओल पर पंजाब के मुद्दों की कोई समझ ना होने का आरोप लगाया था और उनसे गुरदासपुर संसदीय क्षेत्र पर अपना दृष्टिकोण साझा करने को कहा था. जाखड़ ने कहा था, “राजनीति एक गंभीर काम है, कोई ‘टाइम पास’ नहीं.”
बीजेपी के दिवंगत सांसद विनोद खन्ना के कार्यों की सराहना करते हुए देओल ने कहा, “विनोद जी ने यहां 20 साल तक काम किया है और उन्होंने यहां बहुत काम किया है. उनके बाद मुझे यहां काम करने का मौका मिला है. मैं उसी तरह काम करना चाहता हूं जैसे खन्ना ने किया था. मेरा यहां के लोगों से नाता है और मैं कभी उनको निराश नहीं करूंगा. मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा.”
विनोद खन्ना ने 1998 में गुरदासपर सीट पर जीत हासिल की थी और 2017 में उनके निधन तक वह इस पर काबिज रहे. चुनाव के बाद मुंबई चले जाने की अटकलों पर उन्होंने कहा, “मैं यहां वापस जाने के लिए नहीं आया हूं.” कांग्रेस के सुनील जाखड़ अभी गुरुदासपुर से सांसद हैं, जिन्होंने 2017 उपचुनाव में जीत हासिल की थी. 2017 अप्रैल में विनोद खन्ना के निधन के बाद यहां चुनाव कराना आवश्यक हो गया था. गुरदासपुर सीट पर सातवें चरण में 19 मई को मतदान होगा.

ईसी ने राहुल को नोटिस दिया, 48 घंटे में देना होगा जवाब

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आदिवासियों के कानून पर दिए बयान को लेकर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में राहुल गांधी से 48 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया है.

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आदिवासियों के कानून पर दिए बयान को लेकर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में राहुल गांधी से 48 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया है. राहुल ने कहा था, “कानून में आदिवासियों को गोली से मारने की बात है. आदिवासियों को गोली से मारा जा सकेगा.”  कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 23 अप्रैल को शहडोल की रैली में ये बयान दिया था. 
 
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा था, “अब नरेंद्र मोदी ने नया कानून बनाया है. आदिवासियों के लिए नया कानून बनाया है. उसमें एक लाइन लिखी है कि आदिवासियों को गोली से मारा जा सकेगा. कानून में लिखा है कि आदिवासियों पर आक्रमण होगा, आपकी जमीन छीनते हैं, जंगल लेते हैं, जल लेते हैं और फिर कहते हैं कि आदिवासियों को गोली मारी जा सकेगी.” 

आयोग ने गांधी को नोटिस का जवाब देने के लिए 48 घंटे का वक्त दिया है. इस अवधि में जवाब नहीं देने की सूरत में आयोग अपनी तरफ से कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगा. एक विशेष संदेशवाहक के जरिए उन्हें नोटिस दिया गया है.