राज्यपाल की चिट्ठी पर मुख्यमंत्री ने एक ही मारा लेकिन सॉलिड मारा : शिवसेना

कोरोना लॉकडाउन की वजह से बंद पड़े धार्मिक स्थलों को खोलने के लिए बीजेपी ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महाराष्ट्र में सिद्धिविनायक मंदिर समेत अन्य मंदिरों को खोलने की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का मंगलवार को मुंबई में प्रदर्शन जारी है। इस बीच महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा और मंदिरों को खोलने को कहा है। कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसा कि आप अचनाक सेक्युलर कैसे हो गए? जबकि आप इस शब्द से नफरत करते थे। कोश्यारी की चिट्ठी पर उद्धव ठाकरे का भी जवाब आया है। उद्धव ठाकरे ने चिट्ठी के जवाब में कहा है कि मुझे हिन्दुत्व पर आपसे सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।  लेकिन दूसरी ओर अगले साल मुंबई में निकाय चुनाव भी होने हैं। एक सीनियर बीजेपी नेता का कहना है कि ये चुनाव एक तरीके से अगले विधानसभा चुनाव का मिनी रेफेरेंडम होगा। इस चुनाव में बीजेपी और शिवसेना की लोकप्रियता का अंदाजा लग जाएगा। मंदिरों को लगातार बंद रखने का मुद्दा शिवसेना को चुनाव में भारी पड़ेगा।

मुंबई(ब्यूरो):

महाराष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे गए खत पर बवाल मच चुका है। मंदिरों को न खोलने के लिए गवर्नर ने उद्धव ठाकरे को सेकुलरिजम पर स्टैंड की याद दिलाई है। सीएम उद्धव ने भी कह दिया कि उन्हें किसी से हिंदुत्व का पाठ सीखने की जरूरत नहीं। महाराष्ट्र सरकार ने मंदिर नहीं खोले। लेकिन सरकार के इस कदम से बीजेपी को यह उम्मीद जग चुकी है कि वो हिंदुत्व के मुद्दे पर शिवसेना को घेर सकती है।

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही उद्धव ठाकरे कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार की अगुआई कर रहे हैं लेकिन समय-समय पर हिंदुत्व के एजेंडे को दोहराते भी रहते हैं। इससे उनकी दोनों सहयोगी पार्टियों को परेशानी भी होती है। गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे राम मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम का भी हिस्सा बनना चाहते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का शिलान्यास किया था। अब यह भी कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे अगले नवंबर महीने में अयोध्या की यात्रा कर सकते हैं। पर पालघर में हुई साधुओं की निर्मम हत्या और उसकी संदेहास्पद जांच के बाद क्या उद्धव ठाकरे को अयोध्या के संत समाज द्वारा स्वीकार भी जाएगा?

‘सामना’ के लेख से शिव सेना ने किया राज्यपाल कोशियारी पर तीखा हमला :

शिवसेना ने सामना में लिखा है, ‘’राज्यपाल के पद पर आसीन व्यक्ति को कैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, यह भगत सिंह कोश्यारी ने दिखा दिया है। श्रीमान कोश्यारी कभी संघ के प्रचारक या बीजेपी के नेता रहे भी होंगे; लेकिन आज वे महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के राज्यपाल हैं, लगता है वे इस बात को अपनी सुविधानुसार भूल गए हैं। महाराष्ट्र के बीजेपी के नेता रोज सुबह सरकार की बदनामी करने की मुहिम शुरू करते हैं। यह समझा जा सकता है; लेकिन उस मुहिम की कीचड़ राज्यपाल अपने ऊपर क्यों उड़वा लेते हैं? बीजेपी महाराष्ट्र में सत्ता गंवा चुकी है। यह बड़ी पीड़ा है; लेकिन इससे हो रहे पेटदर्द पर राज्यपाल द्वारा हमेशा लेप लगाने में कोई अर्थ नहीं। यह पीड़ा आगामी चार साल तो रहने ही वाली है। लेकिन बीजेपी का पेट दुख रहा है इसलिए संवैधानिक पद पर विराजमान व्यक्ति को भी प्रसव पीड़ा हो, ये गंभीर है. लेकिन उस प्रसव पीड़ा का मुख्यमंत्री ठाकरे ने उपचार किया है।’’

हर कुछ समय अंतराल पर हिंदुत्व की बात करते हैं उद्धव

टाइम्स ऑफ इंडिया पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक एक बीजेपी विधायक का कहना है-उद्धव चाहते हैं कि वह हर कुछ समय पर हिंदुत्व की बात कर बीजेपी की काट निकाल सकते हैं। लेकिन ये उनका धोखा है। वो एक ही समय में दो राग नहीं गा सकते। अगर उन्होंने कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई है तो उनको ‘सेकुलर’ एजेंडे पर बने रहना चाहिए। और हिदुत्व पर सिर्फ जुगलबाजी करने से बाज आना चाहिए।’

अगले साल निकाय चुनाव होगा मिनी रेफरेंडम, घेरने की तैयारी में बीजेपी

इन सबके बीच अगले साल मुंबई में निकाय चुनाव भी होने हैं। एक सीनियर बीजेपी नेता का कहना है कि ये चुनाव एक तरीके से अगले विधानसभा चुनाव का मिनी रेफेरेंडम होगा। इस चुनाव में बीजेपी और शिवसेना की लोकप्रियता का अंदाजा लग जाएगा। मंदिरों को लगातार बंद रखने का मुद्दा शिवसेना को चुनाव में भारी पड़ेगा।

तनिष्क प्रतिष्ठान पर हमले की झूठी खबर फैला कर फंसा एनडीटीवी

एनडीटीवी चैनल हमेशा से प्रोपोगैंडा और फेक न्यूज़ फैलाने के लिए कुख्यात रहा है, एनडीटीवी अनगिनत बार फेक न्यूज़ फैलाते पकड़ा गया है लेकिन हर बार इसपर कोई कार्यवाही नहीं होती थी, लेकिन इस बार एनडीटीवी  तनिष्क विज्ञापन मामलें पर फेक न्यूज़ पर फैलाकर बुरी तरीके से फंस गया है, गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जड़ेजा ने केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

गांधीनगर/ नयी दिल्ली(ब्यूरो):

तनिष्क द्वारा विज्ञापन वापस लेने के बाद वामपंथी मीडिया चैनल एनडीवी ने ब्रेकिंग चलाते हुए दावा किया कि विवाद के चलते गुजरात के गाँधीधाम में तनिष्क के एक स्टोर पर हमला हुआ है।एनडीटीवी के मुताबिक, हमलावरों की भीड़ ने कथित तौर पर स्टोर मैनेजर को माफी पत्र लिखने के लिए कहा था।

अब गुजरात के गृहमंत्री ने इसका खंडन करते हुए कहा, “NDTV द्वारा गाँधीधाम (गुजरात) के तनिष्क स्टोर पर हमले की फैलाई गई खबरें पूर्णतः झूठ और फ़र्ज़ी हैं। यह बिलकुल ही गलत मंशा से गुजरात में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा भड़काने के उद्देश्य से किया गया कार्य है। मैंने इन लोगों पर मामला दर्ज करने को कहा है और फेक न्यूज चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।”

बता दें कि इससे पहले कच्छ के IPS ऑफिसर ने भी इस खबर को पूरी तरह से खंडन किया था। उन्होंने इस खबर को प्रोपेगेंडा के तहत चलाई जाने वाली खबर बताया। उन्होंने कहा था, “मीडिया चैनल दिखा रहे हैं कि तनिष्क शॉप पर हमला हुई है, दंगा हुआ है या चोरी हुआ है, तो ये यब गलत न्यूज है, फेक न्यूज है। ये एक प्रोपेगेंडा के हिसाब से चल रहा है। इसलिए इस तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।” उन्होंने बताया कि शोरूम के मालिक भी इस बारे में बात करना चाहते हैं।

NDTV की रिपोर्ट में कहा गया था कि गुजरात के गाँधीधाम में तनिष्क स्टोर पर हमला हुआ है। हमला होने के बाद स्टोर मैनेजर के माफी पत्र में कथित तौर पर सेक्युलर विज्ञापन प्रसारित करके हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए कच्छ जिले के लोगों से माफी माँगवाई गई।

NDTV के इस झूठ का भांडाफोड़से पहले मशहूर ट्विटर हैंडल “The Skin Doctor” द्वारा किया गया . उन्होंने जिस शो रूम में हिंसा की झूठी खबर NDTV द्वारा चलाई जा रही थी उस शो रूम को सीधा कॉल करके उसकी रिकॉर्डिंग twitter पर पोस्ट कर दी

तनिष्क के विज्ञापन में एक हिंदू महिला की गोदभराई की रस्म को दिखाया गया था। इस लड़की की शादी मुस्लिम परिवार में हुई थी। इसमें हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार सभी रस्मों रिवाजों को हिंदू धर्म के हिसाब से करता दिखाया गया था। 

विज्ञापन को लव जिहाद को बढ़ावा देने के आरोप लगने और सोशल मीडिया पर तनिष्क के बहिष्कार की अपीलों के बाद कंपनी ने विज्ञापन को वापस ले लिया। कुछ इसी तरह का विवाद होली के दौरान सर्फ एक्सेल के एक विज्ञापन को लेकर भी हुआ था।

मुंबई में वेस्टर्न पावर ग्रिड फेल

मुंबई टाउनशिव में बिजली की आपूर्ति करने वाली कंपनी बेस्ट ने बताया है कि शहर को बिजली की आपूर्ति करने वाले प्लांट का ग्रिड फेल हो गया है। इस कारण शहर के पूर्वी, पश्चिमी, उपनगर और ठाणे के कुछ हिस्सों में बिजली गुल हो गई है। इस कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

मुंबई(ब्यूरो) – 12 अक्तूबर:

मुंबई महानगरीय क्षेत्र में ग्रिड फेल हो गई है. मुंबई टाउनशिप में बिजली की आपूर्ति करने वाली कंपनी बेस्ट (BEST) ने कहा कि बिजली की आपूर्ति करने वाले प्लांट से ग्रिड फेल हो गई है. मुंबई के पूर्वी, पश्चिमी, उपनगर और ठाणे के कुछ हिस्से में बिजली गुल हो गई है. इसके कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रिड फेल होने का असर लोकल पर भी पड़ा है.

बेस्ट इलेक्ट्रिसिटी की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि टाटा कडुना में ग्रिड फेल होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है. असुविधा के लिए खेद है. हालांकि, बेस्ट की ओर से बताया नहीं गया है कि कब तक बिजली आपूर्ति फिर से शुरू हो पाएगी. बांद्रा, कोलाबा, माहिम इलाके में सुबह 10 बजे से ही बिजली गुल है.

कब फेल हु्आ ग्रिड
पूरे मुंबई में 10 बजकर 15 मिनट पर बिजली गुल गई है. बताया जा रहा है कि कलवा स्थित टाटा पावर के सेंट्रल ग्रिड के फेल होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई है. मुंबई में बिजली की बहाली में एक घंटे का समय लग सकता है. ग्रिड फेल होने के कारण मुंबई सिटी और उसके उपनगर में बिजली नहीं है. सेंट्रल, ईस्टर्न और वेस्टर्न लाइन पर ट्रेन सेवा बाधित है.

360 मेगावाट की आपूर्ति प्रभावित

मुंबई प्रणाली को बिजली की आपूर्ति के लिए लाइनों और ट्रांसफार्मर (कलावा-पडग़े और खरगर आईसीटी) पर कई ट्रिपिंग है. मुंबई में 360 मेगावाट की आपूर्ति प्रभावित हुई है. पूरे मुंबई में बिजली गुल है. बिजली की आपूर्ति को फिर से शुरू करने के लिए काम किया जा रहा है.

जहां-तहां खड़ी है मुंबई लोकल

ग्रिड फेल होने का असर मुंबई लोकल पर भी पड़ा है. जहां-तहां लोकल खड़ी है. इस वजह से लोग लोकल को छोड़कर पैदल ही अपने गंतव्य की ओर निकल चुके हैं. रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (सीपीआरओ) ने कहा कि ग्रिड फेल होने के कारण मुंबई लोकल ट्रेन की सेवा बाधित हुई है. बिजली की आपूर्ति शुरू होने के बाद लोकल की सेवा फिर से शुरू हो जाएगी.

प्रधान मंत्री को गुस्सा क्यों आता है??

कृषि कानून को लेकर पंजाब समेत विभिन्न जगहों पर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां कृषि कानून को ‘किसान विरोधी’ करार देते हुए सरकार की आलोचना कर रही हैं. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को ट्रैक्टर जलाकर विरोध प्रदर्शित किया गया. विरोध प्रदर्शन करने वाले पंजाब यूथ कांग्रेस के बताए जा रहे हैं. पीएम मोदी ने इस घटना को लेकर किसी पार्टी का नाम लिए बिना विपक्ष पर निशाना साधते हुए किसानों को अपमानित करने का आरोप लगाया. पीएम मोदी ने कहा, “आज जब केंद्र सरकार, किसानों को उनके अधिकार दे रही है, तो भी ये लोग विरोध पर उतर आए हैं. ये लोग चाहते हैं कि देश का किसान खुले बाजार में अपनी उपज नहीं बेच पाए. जिन सामानों की, उपकरणों की किसान पूजा करता है, उन्हें आग लगाकर ये लोग अब किसानों को अपमानित कर रहे हैं.” पीएम मोदी ने कहा कि पिछले महीने ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया है। ये लोग पहले सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर का विरोध कर रहे थे, फिर भूमिपूजन का विरोध करने लगे। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कृषि कानूनों के अजीबोगरीब विरोध के परिप्रेक्ष्य में कहा कि हर बदलती हुई तारीख के साथ विरोध के लिए विरोध करने वाले ये लोग अप्रासंगिक होते जा रहे हैं।

  • सरकार ने चारों दिशाओं में एक साथ काम आगे बढ़ाया : PM
  • ये लोग अपने जांबाजों से ही सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांग रहे थे : मोदी
  • आज तक इनका कोई बड़ा नेता स्टैच्यू ऑफ यूनिटी नहीं गया : प्रधानमंत्री

चंडीगढ़ – 29 सितंबर:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड में नमामि गंगे प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करने के बाद अपने सम्बोधन में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि क़ानूनों को लेकर कॉन्ग्रेस को आईना दिखाया और जनता को समझाया कि कैसे वो हर उस चीज का विरोध करते हैं, जिसे जनता की भलाई के लिए लाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान राम मंदिर और योग दिवस को भी याद किया, जिसका कॉन्ग्रेस ने विरोध किया था।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की पहल पर जब पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही थी, तो भारत में ही बैठे ये लोग उसका विरोध कर रहे थे। उन्होंने याद दिलाया कि जब सरदार पटेल की सबसे ऊँची प्रतिमा का अनावरण हो रहा था, तब भी ये लोग इसका विरोध कर रहे थे। पीएम नरेंद्र मोदी ने बताया कि आज तक इनका कोई बड़ा नेता स्टैच्यू ऑफ यूनिटी नहीं गया है। सरदार वल्लभभाई पटेल कॉन्ग्रेस के ही नेता थे।

कॉन्ग्रेस पार्टी अक्सर योग दिवस का मजाक बनाती रही है। जिस चीज ने दुनिया भर में भारत को नई पहचान दी, पार्टी उसका विरोध करती है। राहुल गाँधी ने सेना की ‘डॉग यूनिट’ के एक कार्यक्रम की तस्वीर शेयर कर के इसे ‘न्यू इंडिया’ बताते हुए न सिर्फ योग का बल्कि सेना का भी मजाक उड़ाया था। तभी पूर्व-सांसद और अभिनेता परेश रावल ने कहा था कि ये कुत्ते राहुल गाँधी से ज़्यादा समझदार हैं। सेना के डॉग्स के योगासन का मजाक बनाने वाले राहुल गाँधी की खूब किरकिरी हुई थी।

इसी तरह कॉन्ग्रेस ने अपनी ही पार्टी के नेता सरदार वल्लभभाई पटेल की ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ का विरोध किया, जिसके कारण न सिर्फ भारत का मान बढ़ा बल्कि केवडिया और उसके आसपास के क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर आए। कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस स्टेचू के निर्माण को ‘चुनावी नौटंकी’ और ‘राजद्रोह’ करार दिया था। राहुल गाँधी ने दावा कर दिया था कि सरदार पटेल के बनाए सभी संस्थाओं को मोदी सरकार बर्बाद कर रही है।

पीएम मोदी ने मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) को कहा कि पिछले महीने ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया है। ये लोग पहले सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर का विरोध कर रहे थे, फिर भूमिपूजन का विरोध करने लगे। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कृषि कानूनों के अजीबोगरीब विरोध के परिप्रेक्ष्य में कहा कि हर बदलती हुई तारीख के साथ विरोध के लिए विरोध करने वाले ये लोग अप्रासंगिक होते जा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी कृषि कानूनों के विरोध के लिए एक ट्रैक्टर को 20 सितम्बर को अम्बाला में जला रही है तो फिर 28 सितम्बर को उसी ट्रैक्टर को दिल्ली के इंडिया गेट के पास राजपथ पर जला कर सुर्खियाँ बटोर रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह धरना दे रहे हैं। सोनिया गाँधी राज्यों को क़ानून बना कर केंद्र के क़ानूनों को बाईपास करने के ‘फर्जी’ निर्देश दे रही है। जबकि अधिकतर किसानों ने भ्रम और झूठ फैलाए जाने के बावजूद इन क़ानूनों का स्वागत किया है।

राम मंदिर मुद्दे की याद दिलाना भी आज के परिप्रेक्ष्य में सही है क्योंकि इसी कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2009 में सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा था कि भगवान श्रीराम का कोई अस्तित्व नहीं है। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और अधिवक्ता कपिल सिब्बल तो राम मंदिर की सुनवाई टालने के लिए सारे प्रयास करते रहे। वहीं दिसंबर 2017 में पीएम नरेंद्र मोदी ने उनसे पूछा था कि कॉन्ग्रेस बाबरी मस्जिद चाहती है या राम मंदिर?

इसी कॉन्ग्रेस ने जब राम मंदिर के शिलान्यास के बाद जनता के मूड को भाँपा तो वो राम मंदिर के खिलाफ टिप्पणी करने से बचने लगी। कोई पार्टी नेता इसके लिए राजीव गाँधी को क्रेडिट देने लगा। प्रियंका गाँधी बयान जारी कर के इसका समर्थन करने लगीं। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल रामायण कॉरिडोर बनाने लगे। कमलनाथ हनुमान चालीसा पढ़ने लगे। तभी तो आज पीएम ने कहा – ये विरोध के लिए विरोध करते हैं

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि चार साल पहले का यही तो वो समय था, जब देश के जाँबाजों ने सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए आतंक के अड्डों को तबाह कर दिया था। लेकिन ये लोग अपने जाँबाजों से ही सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँग रहे थे। सर्जिकल स्ट्राइक का भी विरोध करके, ये लोग देश के सामने अपनी मंशा, साफ कर चुके हैं। देखा जाए तो एक तरह से सारे विपक्षी दलों ने सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध किया था।

नवम्बर 2016 में मोदी सरकार ने भारतीय सेना को सर्जिकल स्ट्राइक के लिए हरी झंडी दिखा कर इतिहास को बदल दिया। पहली बार भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाक़े में घुस कर आतंकियों को मारा लेकिन राहुल गाँधी इसे ‘खून की दलाली’ बताते हुए कहते रहे कि सरकार ‘सैनिकों के खून’ के पीछे छिप रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी के लोग सबूत माँगने में लगे थे। कइयों ने तो पाकिस्तान वाला सुर अलापना शुरू कर दिया था।

पीएम मोदी ने कहा कि देश ने देखा है कि कैसे डिजिटल भारत अभियान ने, जनधन बैंक खातों ने लोगों की कितनी मदद की है। जब यही काम हमारी सरकार ने शुरू किए थे, तो ये लोग इनका विरोध कर रहे थे। देश के गरीब का बैंक खाता खुल जाए, वो भी डिजिटल लेन-देन करे, इसका इन लोगों ने हमेशा विरोध किया। उन्होंने कहा कि आज जब केंद्र सरकार, किसानों को उनके अधिकार दे रही है, तो भी ये लोग विरोध पर उतर आए हैं।

बकौल पीएम मोदी, ये लोग चाहते हैं कि देश का किसान खुले बाजार में अपनी उपज नहीं बेच पाए। जिन सामानों की, उपकरणों की किसान पूजा करता है, उन्हें आग लगाकर ये लोग अब किसानों को अपमानित कर रहे हैं। बता दें कि किसानों को सरकार के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों को अपनी उपज बेचने के लिए मिली आज़ादी का विरोध समझ से परे है। इसके लिए सीएए विरोध जैसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।

अमित शाह बता चुके हैं कि जिस पार्टी ने अपनी सरकार रहते अनाजों की खरीद में भी अक्षमता दिखाई लेकिन मोदी सरकार ने इस मामले में रिकॉर्ड बनाया, इसके बावजूद वो किसानों को भ्रमित करने में लगे हुए हैं। एमएसपी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है, उलटा उसे बढ़ाया गया है। बावजूद इसके किसानों को भाजपा के खिलाफ ऐसे ही भड़काया जा रहा है, जैसे लॉकडाउन में मजदूरों को भड़काया गया था।

पीएम मोदी ने ये भी याद दिलाया कि भारतीय वायुसेना के पास राफेल विमान आये और उसकी ताकत बढ़ी, ये उसका भी विरोध करते रहे। उन्होंने कहा कि वायुसेना कहती रही कि हमें आधुनिक लड़ाकू विमान चाहिए, लेकिन ये लोग उनकी बात को अनसुना करते रहे। हमारी सरकार ने सीधे फ्रांस सरकार से राफेल लड़ाकू विमान का समझौता कर लिया तो, इन्हें फिर दिक्कत हुई। आज अम्बाला से लद्दाख तक वायुसेना का परचम लहरा रहा है।

राफेल मुद्दे पर ज्यादा कुछ याद दिलाने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि पूरा 2019 का लोकसभा चुनाव ही इसी पर लड़ा गया था। जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस पोषित मीडिया संस्थानों द्वारा एक के बाद एक झूठ फैलाया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट और कैग से क्लीन-चिट मिलने के बावजूद राफेल को लेकर झूठ फैलाया गया। वही कॉन्ग्रेस अब राफेल का नाम नहीं लेती क्योंकि जब 5 राफेल की पहली खेप भारत आए तो जनता के उत्साह ने सब साफ़ कर दिया। 2019 का लोकसभा चुनाव हारे, सो अलग।

कॉंग्रेस शासित प्रदेश केंद्र के कृषि बिलों को निष्क्रिय करने हेतु अपने बिल लाएँ : सोनिया गांधी

कॉंग्रेस कृषि बिलों को लेकर आर पार की लड़ाई को उतर चुकी है। देश में जहां भी भाजपा की सरकारें हैं वहाँ तो प्रदर्शन हो ही रहे हैं कॉंग्रेस अपनी पार्टी द्वारा शासित प्रदेशों में भी हर प्रकार से धरणे प्रदर्शन कर रही है यह, कवायद उप्चुनावों तक ही रहती है या फिर आगे भी जाएगी यह देखना होगा। दूसरी ओर ऐसा लगता है कि भाजपा ने अपने हाथों ही से किसान बिल ला कर सत्ता की चाबी कॉंग्रेस के हाथ में दे दी। अब उपचुनावों के नतीजे ही भाजपा के आगे की राह तय करेंगे जो कि आसान नहीं जान पड़ती। सनद रहे कि देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को कृषि और किसानों से जुड़े बिलों को मंजूरी दे दी है। मगर, विपक्ष अब भी कृषि विधेयकों को वापस लेने की मांग पर डटा हुआ हैं। इस बीच कांग्रेस ने कांगेस शासित प्रदेशों में कृषि संबंधी कानूनों को अप्रभावी बनाने के लिए एक रणनीति पर विचार किया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारों से कहा है कि वे अपने यहां अनुच्छेद 254(2) के तहत बिल पास करने पर विचार करें जो केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि विधेयकों को निष्क्रिय करता हो।

चंडीगढ़ (ब्यूरो):

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी शासित राज्यों को इस कानून को निष्प्रभावी बनाने के लिए कानूनी उपाय ढूंढने के लिए कहा है। वहीं केरल से कांग्रेस के एक सांसद ने नये किसान कानून के तमाम प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुये सोमवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। कांग्रेस के तमाम बड़े नेता इसे लेकर केंद्र पर निशाना साध रहे हैं।

देश के अलग अलग हिस्सों में कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता जहां प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं पार्टी के बड़े नेता मुखर हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे किसानों के लिए मौत का फरमान बताया है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ऐलान किया कि हम केंद्र सरकार के नए कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। कृषि एक राज्य का विषय है। कृषि बिल हमें बिना पूछे पारित कर दिया गया है। यह पूरी तरह असंवैधानिक है।

उधर, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कृषि कानून को लेकर जब आप अपनी मंत्री को नहीं समझा पाए तो किसानों को क्या समझाएंगे। सचिन पायलट ने सवालिया लहजे में कहा, इस कानून की मांग किसने की थी? या तो किसान कहते कि हमारी ये मांग है तो आप उसकी मांग को पूरा करते। जब आप अकाली दल की कैबिनेट मंत्री को समझा नहीं पाए। आप किसानों को क्या समझा पाएंगे।

‘कृषि कानूनों को निष्प्रभावी बनाने के लिए खोजें उपाय’

एक तरफ जहां विरोध प्रदर्शन जारी है वहीं कानूनी तोड़ ढूंढने की कवायद भी जारी है। सोनिया गांधी ने कांग्रेस शासित प्रदेशों की सरकारों से कहा कि वे केंद्र सरकार के ‘कृषि विरोधी’ कानून को निष्प्रभावी करने के लिए अपने यहां कानून पारित करने की संभावना पर विचार करें। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान के अनुसार, सोनिया ने कांग्रेस शासित प्रदेशों को नसीहत दी है कि वे संविधान के अनुच्छेद 254 (ए) के तहत कानून पारित करने के संदर्भ में गौर करें।

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वेणुगोपाल ने कहा कि यह अनुच्छेद इन ‘कृषि विरोधी एवं राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने वाले’ केंद्रीय कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य विधानसभाओं को कानून पारित करने का हक देता है।

वेणुगोपाल ने दावा किया, ‘‘राज्य के इस कदम से कृषि संबंधी तीन कानूनों के अस्वीकार्य एवं किसान विरोधी प्रावधानों को दरकिनार किया जा सकेगा। इन प्रावधानों में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को समाप्त करने और कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) को बाधित करने का प्रावधान शामिल है। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस शासित प्रदेशों की ओर से कानून पास करने के बाद वहां किसानों को उस घोर अन्याय से मुक्ति मिलेगी जो मोदी सरकार और बीजेपी ने उनके साथ किया है।” गौरतलब है कि वर्तमान में पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकारें हैं। जबकि महाराष्ट्र और झारखंड में वह गठबंधन सरकार का हिस्सा है।

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केरल से कांग्रेस के सांसद ने नये किसान कानून को न्यायालय में दी चुनौती

वहीं केरल से कांग्रेस के सांसद ने नये किसान कानून के तमाम प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुये सोमवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। त्रिशूर संसदीय क्षेत्र से सांसद टीएन प्रथपन ने याचिका में आरोप लगाया है कि कृषक (सशक् तिकरण व संरक्षण) कीमत आश् वासन और कृषि सेवा पर करार , कानून, 2020, संविधान के अनुच्छेद 14 (समता) 15 (भेदभाव निषेध) और अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

याचिका में इस कानून को निरस्त करने का अनुरोध करते हुये कहा गया है कि यह असंवैधानिक, गैरकानूनी और शून्य है। इस कानून को रविवार को ही राष्ट्रपति ने अपनी संस्तुति प्रदान की है। प्रतापन ने अधिवक्ता जेम्स पी थॉमस के माध्यम से दायर याचिका में कहा है कि भारतीय कृषि का स्वरूप टुकड़ों वाला है जिसमें छोटी छोटी जोत वाले किसान है। यही नहीं, भारतीय कृषि की कुछ अपनी अंतर्निहित कमजोरियां हैं जिन पर किसी का वश नहीं है। इन कमजोरियों में भारतीय खेती का मौसम पर निर्भर रहना, उत्पादन को लेकर अनिश्चित्ता और बाजार की अस्थिरता है। इन समस्याओं की वजह से खेती निवेश और उपज के प्रबंधन दोनों ही मामलों में बहुत ही जोखिम भरी है। याचिका में कहा गया है कि भारतीय किसान की खेती मौसम पर निर्भर रहती है और वह अपनी आमदनी बढ़ाने के लिये अपनी उपज के मुद्रीकरण के बारे में नहीं सोच सकता है। इसमें कहा गया है कि इसकी बजाये, कृषि उपज विपणन समिति प्रणाली को सुदृढ़ करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य के प्रबंधन को प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

बता दें कि हाल ही में संपन्न मानसून सत्र में संसद ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को इन विधेयकों को स्वीकृति प्रदान कर दी, जिसके बाद ये कानून बन गए।

सरकार का दावा है कि नये कानून में कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से कृषि उत् पादों की बिक्री, फार्म सेवाओं, कृषि का कारोबार करने वाली फर्म, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जुड़ने के लिए सशक्त करता है। यही नहीं, यह कानून करार करने वाले किसानों को गुणवत्ता वाले बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करना, तकनीकी सहायता और फसल स्वास्थ्य की निगरानी, ऋण की सुविधा और फसल बीमा की सुविधा सुनिश्चित करता है।

नहर, ताज या पिरामिड की भांति एक स्मारक के रूप में प्रभावशाली है: आनंद महिंद्रा

पटना( ब्यूरो):

30 सालों तक लगातार फरसा और कुदाल चलाने की वजह से बिहार के लौंगी भुइयां को आज पूरा देश जान रहा है। बिहार के इस किसान के लगन और कड़ी मेहनत की ही देन है कि आनंद महिंद्रा ने उन्हें ब्रैंड न्यू ट्रैक्टर भेंट दिया है। बता दें कि लौंगी भुइयां ने 30 साल अकेले मेहनत कर अपने गांव और आसपास के लिए नहर खोद दी, जिसकी वजह से आज पहाड़ियों का पानी इस नहर की मदद से नीचे आ रहा है और 3 गांवों के 3000 लोगों को लाभ मिल रहा है।

दरअसल शनिवार को ट्विटर पर एक यूजर ने आनंद महिंद्रा को टैग कर के उन्हें लौंगी भुइयां की ज़रूरत के बारे में बताया था। इस ट्वीट में लिखा कि गया के लौंगी माँझी ने अपने ज़िंदगी के 30 साल लगा कर नहर खोद दी। उन्हें अभी भी कुछ नहीं चाहिए, सिवा एक ट्रैक्टर के। उन्होंने मुझसे कहा है कि अगर उन्हें एक ट्रैक्टर मिल जाए तो उनको बड़ी मदद हो जाएगी। जब यह ट्वीट वायरल हुआ तो आनंद महिंद्रा तक पहुँच गया और उन्होनें ट्वीट के जरिये लौंगी की मदद करने का आश्वासन दिया।

इसके बाद आनंद महिंद्रा की टीम लौंगी तक पहुंची और उन्हें शनिवार तक महिंद्रा की तरफ से ट्रैक्टर भेंट कर दिया गया। लौंगी को ट्रैक्टर के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ा। इसपर भुइयां का कहना है कि,” मैं बहुत खुश हूँ, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे ट्रैक्टर मिल जाएगा”।

क्या है लौंगी भुइयां की कहानी
बिहार के गया जिले में लुटुआ नाम की एक पंचायत पड़ती है। इसी पंचायत के एक छोटे से गांव कोठिलवा का 70 साल का यह बुजुर्ग जब अपनी 30 साल की मेहनत की कहानी सुनाता है तो सामने वाले की आंखें अचरज से फैल जाती हैं। आज से 3 दशक पहले यानी 1990 के दशक का बिहार। बिहारी सब रोजगार की तलाश में अपने गांवों को छोड़ शहरों की ओर पलायन शुरू कर चुका था। पलायन करने वालों में बड़ी संख्या तो ऐसी थी, जिसे राज्य ही छोड़ना पड़ा थाय़ इसी पलायन करने वालों में लौंगी भुइयां का एक लड़का भी था। करता भी क्या, जीवन के लिए रोजगार तो करना ही था क्योंकि गांव में पानी ही नहीं था तो खेती क्या खाक होती। आज से तीन दशक पहले जब ये सब हो रहा था तो लौंगी भुइयां बस अपने आसपास से बिछड़ रहे चेहरों को देख रहे थे। एक दिन बकरी चलाते हुए उन्होंने सोचा, अगर खेती मजबूत हो जाए तो अपनी माटी को छोड़कर जा रहे लोगों का जत्था शायद रुक जाए। पर खेती के लिए तो पानी चाहिए था।

उस दिन लौंगी भइयां ने जो फावड़ा कंधे पर उठाया, आज तीन दशक बाद जब गांव में पानी आ पहुंचा है तब भी ये फावड़ा उनके कंधे पर ही मौजूद है। हां इतना जरूर है कि गांव तक पानी आ पहुंचा है। 30 साल की अथक मेहनत के बीच यह शख्स बूढ़ा हो गया लेकिन गांव की जवानी को गांव में ही रुकने की व्यवस्था देने में कामयाब जरूर हो गया। इतनी बातों का सार यह है कि लौंगी भइयां अकेले दम पर फावड़े से ही 3 किलोमीटर लंबी नहर खोद पहाड़ी के पानी को गांव तक लेकर चला आया। अब जब बारिश होती है तो पहाड़ी से नीचे बहकर पानी बर्बाद नहीं होता बल्कि लौंगी भुइयां की बनाई हुई नहर के रास्ते गांव के तालाब तक पहुंचता है। 3 किलोमीटर लंबी यह नहर 5 फीट चौड़ी और 3 फीट गहरी है। बारिश के पानी के संरक्षण की सरकारी कोशिशों का हाल तो सरकार जाने लेकिन लौंगी भुइयां की इस सफल कहानी से आसपास के 3 गांवों के 3000 लोगों को लाभ मिला है।

बिहार चुनाव: ओवैसी ने ताल ठोंकी कहा,” मुस्लिम वोटरों पर किसी का अधिकार नहीं है”

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम वोटरों पर किसी का अधिकार नहीं है। ये कोई दावा करते हैं तो किस हैसियत से करते हैं, ये समझ में नहीं आता। ओवैसी ने कहा कि हम किसी एक धर्म की राजनीति नहीं करते। हम पर जो आरोप लगाया जाता है वो गलत हैं। AIMIM और समाजवादी जनता दल गठबंधन को UDSA एलायंस नाम दिया गया है। वहीं अलकायदा के 9 संदिग्ध की गिरफ्तारी पर ओवैसी ने कहा कि NIA द्वारा संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है. NIA जांच रही है कि वे कौन हैं। राजद  द्वारा भाव नहीं दिए जाने पर ओवैसी ने कहा कि हम तो ट्विंकल ट्विंकल लीटल स्टार हैं, लेकिन बिहार की जनता देख रही है कौन-कौन किसको भाव दे रहा है।

पटना (ब्यूरो):

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियां कमर कस चुकी है। इस चुनाव के लिए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी पार्टी को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। इस क्रम में अब एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक (एसजेडीडी) के बीच गठबंधन तय हो गया है। जिससे बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जानकारी देते हुए बताया कि बिहार चुनाव के लिए एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक के बीच गठबंधन तय हुआ है। यूडीएसए गठबंधन देवेंद्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा। ऐसी पार्टियां, जो साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ना चाहते हैं उनका स्वागत है। वहीं बिहार में यादव और मुस्लिम आरजेडी का वोट बैंक माना जाता है, ऐसे में एआईएमआईएम और एसजेडीडी के साथ आने से आरजेडी के वोट बैंक में सेंधमारी हो सकती है।

ओवैसी ने कहा कि हमारे बारे में पुराना रिकॉर्ड बताता है कि हम किसी से नहीं डरते हैं। हम चुनाव लड़ेंगे. लोकसभा में आरजेडी ने कितनी सीट जीती है। किशनगंज में अगर हमारी पार्टी नहीं खड़ी तो कांग्रेस वहां से नहीं जीत पाती। बीजेपी अगर जीत रही है तो उसकी जिम्मेदार आरजेडी है। हैदराबाद में मैंने बीजेपी को हराया, शिवसेना को हराया. महागठबंधन अब नहीं रहा।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कांग्रेस आज शिवसेना की गोद में बैठी है। कांग्रेस खुद को धर्मनिरपेक्षता का ठेकेदार समझती है। कांग्रेस की सोच सामंती है। कांग्रेस की गलत नीतियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

उम्मीदवारों का ऐलान

बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी पहले ही बिहार विधानसभा चुना 2020 लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। सितंबर महीने की शुरुआत में ओवैसी की पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया था। एआईएमआईएम 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का पहले ही ऐलान कर चुकी है।

अबकी बार- बंदर के हाथ में उस्तरा सरकार : रणदीप सुरजेवाला

कॉंग्रेस का कोई भी ब्यान विवादित नहीं होता वह हमेश ‘गांधी’ सुहाती ही कहते हैं, आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिन है.पूरे देश और दुनिया से प्रधानमंत्री मोदी को बधाई संदेश मिल रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने आज के दिन एक बार फिर से प्रधानमंत्री मोदी का अपमान किया. कांग्रेस नेता और प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सारी हद पार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की. रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना बंदर से करते हुए कहा- अबकी बार-बंदर के हाथ में उस्तरा सरकार. रोजगार के मुद्दे पर सुराजेवाला ने प्रधान मंत्री मोदी को घेरा तो एक नेता ने याद दिलाया की संसद में दिवंगत नेता अरुण जेटली ने कॉंग्रेस के शीर्ष परिवार के रोजगार और आमदनी के स्रोत पर प्रश्न चिन्ह उठाए थे. संसद में पूछे गए प्रश्न आज भी अनुत्तरित हैं. उन्होने इनकी अरबों की सम्पत्तियों के बाबत भी पूछा था.

नई दिल्ली:

 आज पीएम नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस है. पूरा देश आज उन्हें बधाइयां दे रहा है. ना सिर्फ पूरा देश बल्कि दुनिया का शायद ही कोई नेता हो जिसने पीएम मोदी को शुभकामनाएं न भेजी हों. रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन हों या आस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन,  फिनलैंड के पीएम से नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली तक, पूरी दुनिया मोदी-मोदी कर रही है. पूरी दुनिया ने मोदी के लिए ताली भेजी लेकिन कांग्रेस आज भी उन्हें गाली दे रही है. मौत का सौदागर से लेकर चायवाला तक और नीच से लेकर बंदर तक. राहुल की गाली गैंग गालियों का रिकॉर्ड बनाने की होड़ सी लगी हुई है.

राहुल की गलतियों पर ताली बजाने वाली कांग्रेस आज पीएम मोदी को गाली दे रही है. कांग्रेस पीएम मोदी को गाली देकर नया रिकॉर्ड बनाना चाहती है. ऐसा लगता है जैसे पीएम मोदी को गाली देना ही राहुल गांधी का एकमात्र रोजगार है. 

कांग्रेस ने किया पीएम का अपमान

गौरतलब है कि पूरे देश और दुनिया से पीएम मोदी को बधाई संदेश मिल रहे हैं लेकिन कांग्रेस ने आज के दिन एक बार फिर से पीएम मोदी का अपमान किया है. कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने सारी हद पार करते हुए सरकार चलाने को लेकर पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है. रणदीप सुरजेवाला ने पीएम मोदी की तुलना बंदर से की. सुरजेवाला ने कहा- अबकी बार-बंदर के हाथ में उस्तरा सरकार. 

सुरजेवाला ने कहा, ‘किसान की आय दुगनी होने बारे – पता नहीं. किसान की आय कब तक दुगनी होगी – पता नहीं. कोरोना से कृषक आय पर क्या असर – पता नहीं. कितने प्रवासी मजदूर मरे – पता नहीं. ये हैं मोदी सरकार के संसद में जबाब. इसीलिए तो देश कैसे चलाते हैं- इन्हें पता नहीं. अबकी बार- बंदर के हाथ में उस्तरा सरकार.’ 

रणदीप सुरजेवाल अपने नए प्राप्त दायित्व का निर्वाह कर रहे हैं. उन्हे शीर्ष परिवार को उत्तर भी देने हैं, फिर चाहे वह जनता के चुने हुए प्रधान मंत्री को बंदर या भाल ही यों न कहें. सनद रहे की यह वही राजनैतिक दल है जो अपने घटक मुख्यमंत्री को ‘तू’ कहने भर से घर तुड़वा देता है.

ये पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस द्वारा पीएम मोदी का अपमान किया गया है. कांग्रेस नेता अर्जुन मोडवाडिया ने इससे पहले पीएम मोदी की तुलना बंदर से की थी. 

बीजेपी ने दिया जवाब

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रणदीप सुरजेवाला के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘कांग्रेस दिवालिया राजनीतिक दल है. जनता ने भी इसको दिवालिया पार्टी घोषित कर दिया. बुद्धि से भी नेतृत्व पूरी तरह दिवालिया हो गया है. कांग्रेस का सांस्कृतिक परंपराओं से कोई लेना-देना नहीं है. कांग्रेस के पास नरेंद्र मोदी के खिलाफ और सरकार के पास खिलाफ कोई अवसर नहीं होता है, इसलिए वह राजनीति को हल्का करते हैं.’ 

उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से पूछना चाहता हूं कि वह भी सरकार में लंबे वक्त तक रहे. उनकी पार्टी ने बेरोजगारों के लिए क्या किया. 6 साल में रोजगार के जितने अवसर मोदी जी की सरकार में सृजित हुए हैं, वह किसी भी सरकार में नहीं हुए. सुरजेवाला का खुद का आधार तो हरियाणा में है नहीं, इसलिए वह इस तरह के हलके बयान दे रहे हैं. मैं उनके बयान की निंदा करता हूं.’ 

कार्टून सांझा करने पर नौसेना अधिकारी से की शिव सेना के गुंडों ने की मारपीट

आज तो हद ही हो गयी जब मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार शिव सेना के गुंडों ने एक पूर्व नोसेना के अधिकारी के साथ मार पीट की। उनकी गलती रौंगटे खड़े कर देने वाली है। एक कार्टूनिस्ट के बेटे के कार्टून को व्हाट्साप पर सांझा किया था। पुराने कार्टूनिस्ट बाबा साहब के बेटे उद्धव ठाकरे का। जिस महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ‘जी’ को ‘तू’ कहने पर कंगना रानौत पर एफ़आईआर हो सकती है, कंगना के समर्थन में पोस्ट डालने वाले को पकड़ने के लिए महाराष्ट्र पुलिस कोलकता तक जा सकती है उस महाराष्ट्र में खास कर म्ंबा देवी की नाक के नीचे मुंबई में कोई उद्धव का कार्टून…. । पिटाई तो होनी ही थी, हुई।

चंडीगढ़ :

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का व्यंग्यात्मक कार्टून ह्वाट्सएप के जरिए साझा करने से नाराज शिवसेना के दो शाखा प्रमुखों ने अपने पांच-छह समर्थकों के साथ सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी पर उनके घर में घुसकर हमला कर दिया। भाजपा विधायक अतुल भातखलकर का आरोप है कि उनके विधानसभा क्षेत्र में स्थित ठाकुर कांप्लेक्स रहने वाले मदन शर्मा पर शिवसैनिकों ने हमला किया और उनकी जान लेने की कोशिश की। शर्मा की आंख पर गंभीर चोट लगी है। साथ ही उनके पेट और पीठ पर भी काफी चोट आई है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कार्टून सोशल मीडिया में फॉरवर्ड करने पर मुंबई में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सेवानिवृत्त नेवी ऑफिसर मदन शर्मा पर हमला बोला। इस बात की जानकारी भाजपा विधायक अतुल भटखल्कर ने शुक्रवार (सितंबर 11, 2020) को घटना का वीडियो साझा करते हुए दी। भाजपा नेता ने बताया कि शिवसेना के 6-7 ‘गुंडों’ ने पूर्व नेवी अधिकारी मदन शर्मा पर हमला किया।

कांदिवली से भाजपा विधायक ने टाइम्स नाऊ से बात करते हुए कहा कि स्थानीय ‘शाखा प्रमुख’ ने पूर्व नेवी अधिकारी को संपर्क किया और उन्हें उनकी बिल्डिंग से नीचे आने को बोला। जैसे ही वो अपनी बिल्डिंग से नीचे उतरे, करीब 8 लोगों ने उन्हें सिर्फ़ इसलिए मारना शुरू कर दिया क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर उद्धव ठाकरे का कार्टून व्हॉट्सएप पर फॉरवर्ड किया था।

इस हमले में पूर्व नेवी अधिकारी की आँख बुरी तरह जख्मी हो गई। उसमें पड़ा लाल निशान तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है। भाजपा विधायक ने कहा, “मैं महाराष्ट्र सीएम, जो शिवसेना के प्रमुख हैं, उनसे कहना चाहता हूँ कि महाराष्ट्र के नागरिक उनकी गुंडागर्दी से डरते नहीं हैं और किसी कीमत पर वह शांत नहीं रहेंगे।”

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व नेवी अधिकारी की बेटी ने उनसे बात करते हुए बताया कि उनके पिता को व्हॉट्सएप पर एक मैसेज मिला था जिसे उन्होंने आगे फॉरवर्ड कर दिया। इसके बाद से ही उन्हें कई फोन आने लगे और कॉल पर नीचे बुलाया जाने लगा। पूर्व अधिकारी की बेटी के मुताबिक, जब उनके पिता उतर कर नीचे गए तो उन पर हमला हुआ।

पीड़ित पूर्व नौसेना अधिकारी ने भी मीडिया को बताया कि उन्हें मैसेज फॉरवर्ड करने के बाद से ही कॉल आ रहे थे और बार-बार उनसे नीचे उतर कर आने को कहा जा रहा था। उनके मुताबिक, जैसे ही वो नीचे उतरे, लोगों ने उन्हें मारना शुरू कर दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने आई थी। मगर वह अपने घर से बाहर ही नहीं निकले। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में उनकी मदद भाजपा विधायक अतुल भटखल्कर और रानी द्विवेदी कर रहे हैं। वरना वो जेल में होते।

रिपब्लिक टीवी की खबर के अनुसार, पूर्व अधिकारी का इलाज इस समय शताब्दी अस्पातल में चल रहा है। महाअघाड़ी सरकार के रवैए से नाराज होकर और असंतुष्टि जताते हुए पूर्व नेवी अधिकारी कहते हैं कि राज्य में में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाना चाहिए।

बता दें कि इस मामले के संबंध में पूर्व अधिकारी की बेटी ने संत नगर पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज करवाई है (कुछ रिपोर्ट्स में कांदिवली थाना बताया जा रहा है)। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर गुंडों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। इसके अलावा यह भी कहा है कि इतना सब के बावजूद पुलिस उनके पिता को गिरफ्तार करना चाहती है।

उल्लेखनीय है कि यह मामला सोशल मीडिया पर आने के बाद एक बार फिर से शिवसेना पर ऊँगलियाँ उठनी शुरू हो गई है। देवांग दवे ने लिखा, “सेवानिवृत्त नेवी अधिकारी मदन शर्मा को पीटना, जिन्होंने देश की रक्षा में सालों साल सीमा पर गुजारे, सिर्फ़ शिवसेना की मानसिकता का परिचायक है।”

वहीं, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना को बेहद दुखद और हैरान करने वाला बताया है। उन्होंने लिखा, “बेहद दुखद और हैरान करने वाली घटना। सेवानिवृत्त नेवी अधिकारी को बस इसलिए गुंडों ने पीटा क्योंकि उन्हें व्हॉट्सएप पर मैसेज फॉरवर्ड किया था। उद्धव ठाकरे कृपया ये गुंडाराज रोक दो। हम इन गुंडों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं।”

गौरतलब है कि आज शिवसैनिकों ने उद्धव ठाकरे का कार्टून फॉरवर्ड करने के नाम पर पूर्व नेवी अधिकारी को पीटा है। लेकिन उद्धव के पिता और शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे खुद कार्टूनिस्ट थे।

राऊत की गाली स्वीकार, कंगना के ‘तू’ पर FIR?

तू तड़ाक की भाषा पर तकरार कंगना राऊत पर एफ़आईआर, लेकिन यदि किसी मुख्यमन्त्री को ‘तू’ कहने पर प्राथम्की दर्ज़ हो सकती है तो राहुल गांधी तो सर – ए – आम देश के प्रधान मंत्री को चोर, खून की दलाली वाला इत्यादि इत्यादि कहा और मुख्य मंत्री रहते हुए केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी अमित शाह के बारे में कितने ही व्यक्तिगत आक्षेप लगाए तो उन पर कोई मुक़द्दमा क्यों नहीं किया गया? राहुल, सोनिया या फिर केजरीवाल अपवाद क्यों??

मुंबई(ब्यूरो):

मुंबई : अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ मुंबई के बिक्रोली थाने में केस दर्ज किया गया है. कंगना पर राज्य के सीएम उद्धव ठाकरे के खिलाफ तू और अपमानजनक टिप्पणी के कारण यह केस दर्ज किया गया है. कंगना द्वारा ट्विटर पर डाले गए वीडियो को हवाला देते हुए यह केस दर्ज किया गया है.

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार मुंबई के बिक्रोली थाने में कंगना के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. कंगना के खिलाफ मुंबई के वकील ने एफआईआर दर्ज कराया है, एफआईआर में कहा है कि एक चुने हुए सीएम के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी अपमानजनक है.

शिवसेना ने कार्रवाई से झाड़ा पल्ला -वहीं कंगना विवाद पर शिवसेना ने पल्ला झाड़ लिया है. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने कहा है कि कंगना पर हुई कार्रवाई से शिवसेना का कोई लेनादेना नहीं है. कंगना पर बीएमसी ने कार्रवाई की है.

कंगना ने उद्धव पर दोबारा किया ट्वीट – वहीं कार्रवाई के बाद कंगना रनौत ने शिवसेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कंगना रनौत ने ट्वीट कर लिखा है, ‘तुम्हारे पिताजी के अच्छे कर्म तुम्हें दौलत तो दे सकते हैं मगर सम्मान तुम्हें खुद कमाना पड़ता है, मेरा मुँह बंद करोगे मगर मेरी आवाज़ मेरे बाद सौ फिर लाखों में गूंजेगी, कितने मुँह बंद करोगे? कितनी आवाज़ें दबाओगे? कब तक सच्चाई से भागोगे तुम कुछ नहीं हों सिर्फ़ वंशवाद का एक नमूना हो.’

कंगना ने वीडियो जारी कर साधा था निशाना– बता दें कि बुधवार को कंगना ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किये गये एक वीडियो संदेश में शिवसेना प्रमुख एवं मुख्यमंत्री ठाकरे को संबोधित करते हुए कहा, उद्धव ठाकरे, तुझे क्या लगता है कि तूने फिल्म माफिया के साथ मिलके मेरा घर तोड़ के मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है…आज मेरा घर टूटा है कल तेरा घमंड टूटेगा, यह वक्त का पहिया है, याद रखना हमेशा एक जैसा नहीं रहता