कमाल आर खान ने मोदी से पाकिस्तानी हिंदुओं को भारत बुलाने की अपील की

बॉलीवुड एक्टर कमाल आर खान ने भारत सरकार को संबोधित करते हुए एक ट्वीट किया है, जिसने देखते ही देखते सबका खूब ध्यान खींचा है.

  1. बॉलीवुड एक्टर ने ट्वीट कर किया भारत सरकार से अनुरोध
  2. पाकिस्तानी हिंदुओं और सिखों को लेकर की बात
  3. ट्वीट सोशल मीडिया पर हुआ वायरल

नई दिल्ली: पाकिस्तान में इस्लाम के अलावा अन्य धर्म मानने वालों पर होने वाले लगातार अत्याचारों की खबर से बॉलीवुड के एक एक्टर का मन भर आया है. उन्होंने अब मोदी सरकार से पाकिस्तान के गैर इस्लामिक लोगों के लिए भारतीय नागरिकता देने की अपील कर डाली है. इसी अपील के चलते आज वह ट्विटर पर छाए हुए हैं. 

बॉलीवुड एक्टर कमाल आर खान हमेशा ही ट्विटर पर एक्टिव रहते हैं. वह हर समसामयिक मुद्दे पर और हर हालिया रिलीज फिल्म पर अपनी राय जरूर देते हैं. लेकिन अब KRK एक नई वजह से चर्चा में हैं. एक समय में पीएम मोदी का विरोध करने वाले KRK ने मोदी सरकार से एक मानवीय अपील की है. देखिए यह ट्वीट…

इस ट्वीट में KRK ने भारत सरकार को संबोधित करते हुए एक भावुक संदेश लिखा है. उन्होंने अपने इस ट्वीट में लिखा है, “मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि पाकिस्तान में रह रहे हिंदू, सिख और ईसाई धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता दें जिससे वह यहां आराम से रह सकें. वह पाकिस्तान जैसे देश में शांति से नहीं रह सकते हैं.”

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब KRK अपने ट्वीट को लेकर चर्चा में हैं. इसके पहले भी बीते दिनों उन्होंने कश्मीर के लिए पाकिस्तान से बॉर्डर पर लड़ने की इच्छा जताई थी. जिसके बाद कई लोगों ने उन्हें ट्रोल भी किया था तो कुछ ने उनकी तारीफ भी की थी.

गौरतलब है कि कमाल आर खान ने फिल्म ‘देशद्रोही‘ से बतौर हीरो बॉलीवुड में कदम रखा था. फिल्म तो फ्लॉप हुई लेकिन सलमान के शो ‘बिग बॉस 3’ में आने के बाद वह सबकी नजरों में आ गए. अब वह अपने फिल्म रिव्यूज को लेकर काफी चर्चा में रहते हैं. हाल ही में उनका ‘साहो’ फिल्म का रिव्यू जमकर वायरल हुआ था.

मर्जर के बाद पीएनबी बना भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैंक

नई दिल्ली: 

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बैंकों के मर्जर का ऐलान किया. प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक को मर्ज किया जा रहा है. मर्जर के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक हो जाएगा, जिसका बिजनेस 17.95 लाख करोड़ का होगा.

केनरा और सिंडिकेट बैंक का भी मर्जर किया जाएगा. देश में अब सिर्फ 12 सरकारी बैंक होंगे. 4 बड़े सरकारी बैंकों में 6 छोटे बैंकों का मर्जर किया जाएगा. विलय के बाद PNB देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक हो जाएगा

कैनरा बैंक में सिंडीकेट बैंक का मर्जर होगा यह देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक बनेगा. इस बैंक का बिजनेस 15.20 लाख करोड़ का होगा. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का मर्जर होगा. मर्जर के बाद यह देश का पांचवा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक होगा.

इंडियन और इलाहाबाद बैंक का मर्जर होगा यह देश का सातवां सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा, जिसकी पूंजी 8.08 लाख करोड़ रुपये होगी. वित्तमंत्री ने कहा कि बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक का किसी का मर्जर नहीं किया जाएगा. बैंक ऑफ इंडिया का बिजनेस 9.3 लाख करोड़ और सेंट्रल बैंक का बिजनेस 4.68 लाख करोड़ का होगा.

प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रमुख बातें
1. वित्त मंत्री ने कहा कि हम बहुत तेजी से 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की तरफ बढ़ रहे हैं.
2. 8 सरकारी बैंकों ने रेपो रेट लिंक प्लान लॉन्च किए हैं.
3. NBFCs की राहत के लिए कई कदम उठाए.
4 NBFCs ने लिक्विडिटी के लिए PSBs से करार किया: वित्त मंत्री
5. क्रेडिट ग्रोथ के लिए आज का कदम महत्वपूर्ण: वित्त मंत्री
6. फाइनेंशियल सेक्टर के लिए मजबूत नींव की जरूरत. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकारी बैंकों की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं: इसके अलावा बैंकों ने लोन रिकवरी में रिकॉर्ड बनाया है.

5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के सपने को लेकर वित्तमंत्री ने कहा कि 2017 में देश की अर्थव्यवस्था 2.6 ट्रिलियन डॉलर थी. 2024 में हम 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगे.बैंकिंग सेक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि हाल-फिलहाल जितने फैसले लिए गए हैं उससे NPA में भारी कमी आई है. वित्त वर्ष 2018-19 में लोन रिकवरी 1,21,076 करोड़ था. साथ ही NPA का स्तर 7.90 लाख करोड़ पर पहुंच गया है. पहले बैंकों पर 8.86 लाख करोड़ के NPA का बोझ था.

मल्टीलेवल मार्केटिंग घोटाले क्यूनेट में नामचीन कलाकारों को नोटिस, 70 गिरफ्तार

हैदराबाद: बहुस्तरीय (मल्टीलेवल) मार्केटिंग घोटाले क्यूनेट के संबंध में साइबराबाद पुलिस ने 38 मामले दर्ज करते हुए कुल 70 लोगों को गिरफ्तार किया है. साइबराबाद पुलिस आयुक्त वी.सी. सजनार ने मंगलवार को बताया कि ये मामले ग्रेटर हैदराबाद को कवर करने वाले तीन पुलिस आयुक्तों में से एक साइबराबाद पुलिस कमिश्नरेट में आने वाले अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज किए गए हैं. उन्होंने कहा कि विहान डायरेक्ट सेलिंग प्राइवेट लिमिटेड (क्यूनेट) और इसके प्रमोटरों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कई मामले दर्ज किए गए थे.

अनिल कपूर, बोमन ईरानी सहित शाहरुख खानसमेत कई एक्टरों को नोटिस

पुलिस ने कंपनी के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए अभिनेता अनिल कपूर, शाहरुख खान, बोमन ईरानी, जैकी श्रॉफ, विवेक ओबेरॉय, पूजा हेगड़े और अल्लू सिरीश को भी नोटिस दिया है. अनिल कपूर, शाहरुख खान और बोमन ईरानी ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से नोटिस का जवाब दिया है. वहीं अन्य बॉलीवुड हस्तियों से जवाब का इंतजार किया जा रहा है. सजनार के कहा कि तीनों बॉलीवुड कलाकारों की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जा रहा है. पुलिस प्रमुख ने कहा, ‘इस योजना के शीर्ष 500 प्रमोटरों को भी नोटिस दिए गए हैं और उनके जवाबों का इंतजार है.’

उन्होंने कहा कि यह भारत के क्यूआई समूह की एक फ्रेंचाइजी विहान की ओर से धोखाधड़ी का मामला है, जो क्यूनेट के नाम से मार्केटिंग करती है. पुलिस के अनुसार, विहान को पहले गोल्ड क्वेस्ट एंड क्वेस्ट नेट के नाम से जाना जाता था. यह क्यूआई समूह के स्वामित्व वाली हांगकांग स्थित एक प्रत्यक्ष बिक्री या बहु-स्तरीय विपणन (मल्टी लेवल मार्केटिंग) कंपनी है. पुलिस के अनुसार, वे सॉफ्टवेयर कर्मचारियों, बेरोजगार युवाओं और गृहणियों को निशाना बना रहे थे.

विहान को बंद करने की प्रक्रिया शुरू

कार्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने कहा कि विहान को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. वहीं सजनार ने लोगों से अपील की है कि वे क्यूनेट में शामिल न हों और विहान को कोई भुगतान न करें.

उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) बेंगलुरु ने विहान को बंद करने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की बेंगलुरु बेंच में याचिका दायर की थी. उन्होंने कहा कि आरओसी ने कंपनी अधिनियम-2013 के विभिन्न उल्लंघनों के लिए विहान के खिलाफ अभियोग चलाया था. कंपनी से जुड़े 12 लोगों के खिलाफ निदेशक और प्रमोटर के रूप में लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है.

ई-कॉमर्स की आड़ में भारत के बाहर भेजे कए करोड़ों रुपए

फाइनेंशियल फ्रॉड्स विक्टिम्स वेलफेयर एसोसिएशन ने दावा किया कि डायरेक्ट सेलिंग और ई-कॉमर्स की आड़ में कंपनी ने 20 हजार करोड़ रुपये भारत से बाहर भेजे हैं.

इस बीच क्यूनेट ने आरोपों से इनकार किया है. उसने रिपोर्ट को आधारहीन के साथ तथ्यों व व्यापार की समझ के बिना तैयार किया गया बताया. क्यूनेट ने कहा कि उन्होंने न्यायिक फोरम में इस रिपोर्ट को चुनौती दी है.

क्यूनेट एक ई-कॉमर्स आधारित प्रमुख एशियाई डायरेक्ट सेलिंग कंपनी है, जो होम केयर, पर्सनल केयर, स्किन केयर, हेल्थ फूड सप्लीमेंट्स, घड़ियां और हॉलिडे पैकेज की श्रेणियों में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मार्केटिंग करती है. क्यूनेट भारत में अपने सब फ्रेंचाइजी के माध्यम से काम करती है.

राज ठाकरे की प्रवर्तन निदेशालय में पेशी आज

साल 2003 में मनोहर जोशी के बेटे उन्मेश जोशी ने राज ठाकरे और राजन शिरोडकर के साथ मिलकर अपनी कम्पनी कोहिनूर सिटीएनएल के जरिए कोहिनूर मिल खरीदी. पूरी डील 421 करोड़ में तय हुई थी जिसमें सभी पार्टनर बराबर के हिस्सेदार थे.

मुंबई: कोहिनूर इमारत मामले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरेकी पूछताछ से पहले महाराष्ट्र पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. ताजा जानकारी के मुताबिक राज ठाकरे प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर में पेश होने के लिए अपने दादर स्थित घर से निकल चुके हैं. गौरतलब है कि राज ठाकरे को गुरुवार को 11 बजे प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर में हाजिर होना है. इसी के मद्देनजर मुंबई पुलिस ने गुरुवार को एमएनएस के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही उनके घर की तरफ आने वाले दोनों तरफ के रास्ते पर पुलिस ने बैरिकेडिंग की है ताकि इस दौरान समर्थकों का जमावड़ा न हो सके.

एक तरफ जहां मुम्बई पुलिस ने मनसे के कार्यकर्ताओं को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान उद्दंडता करने वालों पर कार्यवाही की जाएगी तो वहीं दूसरी तरफ खुद राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं को निदेश दिए हैं कि वो उनके घर पर या प्रवर्तन निदेशालय में इकट्ठा न हो. ताजा जानकारी के मुताबिक राज ठाकरे के ईडी दफ्तर में पेशी को लेकर मुंबई के 4 पुलिस थानों की हद में धारा 144 लगाई गई है, जिसमें मरीन ड्राइव, एमआरए मार्ग, आज़ाद मैदान और दादर पुलिस स्टेशन का एरिया शामिल है.

प्रवर्तन निदेशालय कोहिनूर मिल खरीदने के मामले में हुए फण्ड रेगुलरटीज के तहत पीएमएलए के तहत मामले की जांच कर रही है. साल 2003 में मनोहर जोशी के बेटे उन्मेश जोशी ने राज ठाकरे और राजन शिरोडकर के साथ मिलकर अपनी कम्पनी कोहिनूर सिटीएनएल के जरिए कोहिनूर मिल खरीदी. पूरी डील 421 करोड़ में तय हुई थी जिसमें सभी पार्टनर बराबर के हिस्सेदार थे.

आपको बता दें कि इस डील में ILFS 225 करोड़ रुपये इक्विटी के तौर पर निवेश किए और कोहिनूर सिटीएनएल को फंड भी किया. लेकिन, साल 2008 में ILFS ने अपने 225 करोड़ के इक्विटी शेयर्स महज 90 करोड़ में बेच दिए जिसके चलते 135 करोड़ का लोन डिफाल्ट हुआ. कुछ समय बाद राज ठाकरे ने भी इस शेयर होल्डिंग पैटर्न में अपने शेयर बेच दिए और डील से निकल गए और लोन डिफॉल्ट की रकम कर्ज के तौर पर चुकाई नहीं गई. इसी वजह से ILFS अब सन्देह के घेरे में है.

इस मामले में प्रवर्तन निर्देशालय ILFS के ईक्विटी पैटर्न, कोहिनूर सिटीएनएल के शेयर होल्डिंग पैटर्न में उन्मेश जोशी, राजन शिरोडकर के साथ मुख्य रूप से राज ठाकरे के एक्चुअल इन्वेस्टमेंट, फण्ड ट्रांजेक्शन और नुकसान में बेचे गए इक्विटी शेयर्स के कारणों और सहित शेयर होल्डिंग पैटर्न की जांच के लिए राज ठाकरे से पूछताछ करना चाहती है. इसके साथ ही ILFS के निवेश, नुकसान और लोन डिफॉल्ट सहित कोहिनूर सिटीएनएल के करोड़ों की हेराफेरी के इस मामले में पहले ही उन्मेश जोशी से पूछताछ चल रही है.


राज ठाकरे को IL&FS मामले में ईडी मुख्यालय में पेश होने को कहा

सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे को गुरुवार को ईडी मुख्यालय में पेश होने को कहा गया है.  सूत्रों के मुताबिक एक मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के दौरान ईडी को पता चला कि कोहिनूर बिल्डिंग का इस्तेमाल पैसों को डाइवर्ट करने के लिए हुआ था. कोहिनूर बिल्डिंग में निवेश और शेयर होल्डिंग राजठाकरे और राजन शिरोडकर ने 421 करोड़ में डील की थी. इस डील के बारे में ईडी को IL&FS स्कैम की जांच के दौरान पता चला था.

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे को गुरुवार को ईडी मुख्यालय में पेश होने को कहा गया है. राज ठाकरे से ईडी कल सुबह 10.30 बजे पूछताछ करेगी. बताया जा रहा है कि कल सिर्फ राज ठाकरे से ही प्रवर्तन निदेशालय पूछताछ करेगी. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी के बेटे उन्मेश जोशी को कल ईडी पूछताछ के लिए नहीं बुलाएगी. सूत्रों के मुताबिक ईडी ने राज ठाकरे को कोहिनूर बिल्डिंग मामले में पूछताछ के लिए 22 अगस्त को बुलाया है. 

सूत्रों के मुताबिक एक मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के दौरान ईडी को पता चला कि कोहिनूर बिल्डिंग का इस्तेमाल पैसों को डाइवर्ट करने के लिए हुआ था. कोहिनूर बिल्डिंग में निवेश और शेयर होल्डिंग राजठाकरे और राजन शिरोडकर ने 421 करोड़ में डील की थी. इस डील के बारे में ईडी को IL&FS स्कैम की जांच के दौरान पता चला था.

ईडी अब राजठाकरे और उन्मेष जोशी से पूछताछ करके ये पता लगाने की कोशिश करेगी कि कोहिनूर बिल्डिंग और IL&FS स्कैम के बीच क्या संबंध है और आखिरकार किस तरीके और रुट से करोड़ों रुपयों को डाइवर्ट किया गया है. शिवसेना नेता मनोहर जोशी के बेटे उन्मेष जोशी और अन्य दो सहयोगियों ने मिलकर एक कंसोर्टियम गठित किया था.

इसमें il&fs ग्रुप ने भी 225 करोड़ रुपए का निवेश किया था. इसके बाद साल 2008 में इसने भारी नुकसान उठाते हुए कंपनी ने अपने शेयर को महज ₹90 करोड़ में सरेंडर कर दिया. अपना शेयर सरेंडर करने के बाद भी il&fs ने कोहिनूर स्क्वॉयर टॉवरों का निर्माण करने वाली कोहिनूर सिटीएनएल को एडवांस लोन दिया जिसे कथित तौर पर कोहिनूर सिटीएनएल चुका नहीं पाया.

इसके बाद साल 2011 में कोहिनूर सिटीएनएल कंपनी ने अपने कुछ संपत्तियां बेचकर ₹500 करोड़ का लोन चुकाने के एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया. इस समझौते के बाद il&fs ने कोहिनूर सिटीएनएल को 135 करोड़ रुपए का और लोन दिए जाने का आईडी ने जांच में पाया है. इस मामले में ईडी कोहिनूर सीटीएनएल के एक बड़े अधिकारी का बयान रिकॉर्ड कर चुकी है. 

छगन भुजबल थाम सकते हैं शिवसेना का दामन

सूत्रों का कहना है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और छगन भुजबल के बीच हाल ही में इस मामले को लेकर बातचीत हुई है.

Political Leader Chhagan Bhujbal and Bal Thackarey. Express archive photo

मुंबई: महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं द्वारा लगातार दल-बदल किया जा रहा है. इस दल-बदल से सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को उठाना पड़ा रहा है. इन सबके बीच खबर है कि एनसीपी के कद्दावर नेता छगन भुजबल जल्द ही शिवसेना में शामिल हो सकते हैं. सूत्रों की मानें तो, महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बड़े ओबीसी नेता छगन भुजबल का शिवसेना में जाना तय माना जा रहा है.

सूत्रों का कहना है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और छगन भुजबल के बीच हाल ही में इस मामले को लेकर बातचीत हुई है. बता दें कि बीते कुछ समय से छगन भुजबल ने एनसीपी की बैठकों और रैलियों से दूरी बना रखी है. इसी को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि छगन भुजबल जल्द शिवसेना में शामिल हो सकते हैं. 

Political Leader Chhagan Bhujbal and Bal Thackarey. Express archive photo

गौरतलब है कि नासिक के निफाड में हुई एनसीपी की शिवस्वराज्य यात्रा में छगन भुजबल गैरहाजिर रहे थे. उसी समय छगन भुजबल अपने चुनाव क्षेत्र के कार्यक्रमों में व्यस्त थे. छगन भुजबल ने 1991 में शिवसेना का साथ छोड़ एनसीपी प्रमुख शरद पवार का हाथ थाम लिया था और कांग्रेस में शामिल हुए थे.

भाजपा का दामन थाम सकते हैं एनसीपी-काँग्रेस के कई नेता

हाल ही में एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बेहद करीबी पूर्व मंत्री मधुकरराव पिचड समेत 3 एनसीपी विधायक पार्टी छोडकर बीजेपी में शामिल हुए थे. शरद पवार ने कहा कि राजनीति में बुरा वक्त आता रहता है. लेकिन, उसकी फिक्र के बजाय उससे लड़ने और उबरने की हिम्मत की जरुरत होती है. वहीं, कांग्रेस विधायक भाई जगताप का कहना है कि आया राम-गया राम राजनीति में चलता रहता है.

मुंबई: महाराष्ट्र मे कांग्रेस और एनसीपी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं. दोनों ही पार्टियों के कई नेता पार्टी छोड़ बीजेपी और शिवसेना का दामन थामने की तैयारी में हैं. बीजेपी ने दावा दोहराया है कि दोनों दलों के करीब पचास विधायक सत्तारुढ़ दलों में जल्द शामिल हो रहे हैं. उधर कांग्रेस के नेता संजय निरुपम ने भी खुलासा किया है कि कांग्रेस के कुछ नेता बीजेपी मेँ शामिल होने की तैयारी में हैं. वहीं, पार्टी मेँ बगावत बढ़ऩे का खतरा भांपकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को मुंबई में पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की और पार्टी को सियासी झटकों से उबारने की तरकीबें तलाशी. 

एनसीपी प्रमुख शरद पवार अपनी पार्टी मेँ फूटते बगावत के सुरों को दबाने की तरकीबें तलाशने मे जुटे हैं. पार्टी नेताओं के दूसरे दलों का दामन थामने से रोकने की कवायद में पवार ने शनिवार सुबह मुंबई मेँ अपने घर पर पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी मेँ फूटते बागी सुर को दबाने की कोशिश की. पिछले ही दिनों पवार के बेहद करीबी पूर्व मंत्री मधुकरराव पिचड समेत 3 एनसीपी विधायक पार्टी छोडकर बीजेपी में शामिल हुए थे. वहीं, कई और नेता पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं. 

एनसीपी से ज्यादा बुरा हाल कांग्रेस पार्टी का है. महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी के कई विधायक बीजेपी और शिवसेना में जाने की तैयारी में हैं. मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने ट्वीट कर खुद इस बात का खुलासा किया है कि कांग्रेस में कई लोग बीजेपी में शामिल होने की कोशिश में लगे हैं. निरुपम ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव से पहले भी उनकी पार्टी के नेता पार्टी छोड़ बीजेपी मेँ प्रवेश की जुगत मेँ लगे थे. वहीं, एनसीपी में मची भगदड़ और बिखराव पर शरद पवार बार-बार ये कहते नहीं थक रहे हैं कि पार्टी इन सियासी झटकों से जल्द एकबार फिर उबरेगी.   

शरद पवार ने कहा कि राजनीति में बुरा वक्त आता रहता है. लेकिन, उसकी फिक्र के बजाय उससे लड़ने और उबरने की हिम्मत की जरुरत होती है. वहीं, कांग्रेस विधायक भाई जगताप का कहना है कि आया राम-गया राम राजनीति में चलता रहता है. उधर, महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री गिरीशमहाजन ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी के पचास से ज्यादा विधायक बीजेपी में शामिल होने वाले हैं.
 
288 विधायकों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी और कांग्रेस के विधायकों की फौज हर दिन घटती जा रही है. आये दिन दोनो पार्टियों के विधायक सत्तारुढ़ दलों का दामन थाम रहे हैं. सूबे में काग्रेस को हाल में तगडा झटका तब लगा था, जब महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थामा. इसके साथ ही विखे पाटिल, देवेंद्र फडणनवीस की कैबिनेट में हाउसिंग मिनिस्टर भी बन बैठे. उसके बाद से ही कांग्रेस विधायकों की बीजेपी में शामिल होने की होड़ मच गई. बताया जा रहा है कि मुंबई से एक कांग्रेस विधायक और नासिक जिले से एक कांग्रेस विधायक जल्द पार्टी छोडने की तैयारी में है.

एनसीपी को भी जोर के सियासी झटके लगे हैं. एनसीपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री मधुकरराव पिचड और उनके विधायक बेटे वैभव पिचड, पूर्व मंत्री गणेश नाइक के बेटे संदीप नाईक, पूर्व मंत्री सचिन अहीर, सातारा से एनसीपी विधायक शिवेँद्र राजे और मुंबई से कांग्रेस के विधायक कालीदास कोलंबकर पिछले दिनों ही सत्तारुढ़ दलों का दामन थाम चुके हैँ. इन नेताओं के पार्टी मे शामिल होने से बीजेपी ने सूबे के उन इलाकों मे अपनी सियासी जमीन और मजबूत कर ली है. जहां पार्टी थोडी कमजोर थी. महाराष्ट्र में अक्तूबर महीने में विधानसभा के चुनाव हैं और चुनाव से पहले एनसीपी और कांग्रेस की नीँद उड़ी हुई है.

टीएमसी, एनसीपी और सीपीआई खो सकतीं हैं राष्ट्रिय दल का ओहदा

निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के मुताबिक किसी राजनीतिक पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा तभी मिलता है जब उसके उम्मीदवार लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार या अधिक राज्यों में कम से कम छह प्रतिशत वोट हासिल करें. ऐसी पार्टी के लोकसभा में भी कम से कम चार सांसद होने चाहिए. साथ ही कुल लोकसभा सीटों की कम से कम दो प्रतिशत सीट होनी चाहिए और इसके उम्मीदवार कम से कम तीन राज्यों से आने चाहिए.

नई दिल्ली : 

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) से राष्ट्रीय पार्टी का तमगा छिन सकता है. आज तीनों पार्टियों पर चुनाव आयोग अपना फैसला सुना सकता है. पिछले दिनों चुनाव आयोग ने तीनों पार्टिय़ों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि इनके प्रदर्शन के आधार पर क्यों न इनका राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खत्म कर दिया जाए.

निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के मुताबिक किसी राजनीतिक पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा तभी मिलता है जब उसके उम्मीदवार लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार या अधिक राज्यों में कम से कम छह प्रतिशत वोट हासिल करें. ऐसी पार्टी के लोकसभा में भी कम से कम चार सांसद होने चाहिए. साथ ही कुल लोकसभा सीटों की कम से कम दो प्रतिशत सीट होनी चाहिए और इसके उम्मीदवार कम से कम तीन राज्यों से आने चाहिए.

मौजूदा वक्त में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), बीएसपी, सीपीआई, माकपा, कांग्रेस, एनसीपी और नेशनल पीपल्स पार्टी ऑफ मेघायल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है. हालिया लोकसभा चुनाव में एनसीपी, तृणमूल कांग्रेस, भाकपा का प्रदर्शन इस कसौटी पर अच्छा नहीं माना जा रहा है, इसलिए इन पर राष्ट्रीय दर्जा खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है.

यूएपीए बिल राज्यसभा में पास

  • गैर-कानूनी गतिविधि निवारण संशोधन (यूएपीए) विधेयक, 2019 बिल राज्यसभा में भी पास हुआ
  • इसमें गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का प्रावधान, विपक्षी दल इसके विरोध में
  • गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- कब तक संगठनों पर प्रतिबंध लगाएंगे, एक के बाद दूसरा सामने आ जाता है
मैं भरोसा दिलाता हूं कि आप कुछ नहीं करोगे तो कुछ नहीं होगा : अमित शाह

नई दिल्ली. आतंकी गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए मोदी सरकार संशोधित यूएपीए बिल लेकर आई है। शुक्रवार को यह विधेयक राज्यसभा में भी पास हो गया। चर्चा के दौरान कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने विधेयक में संशोधन का विरोध किया। दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर आतंकवाद से समझौता करने का आरोप लगाया। गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें जवाब देते हुए कहा, ”दिग्विजय सिंह जी कह रहे हैं कि मुझे ही आतंकी घोषित कर दो। आपका गुस्सा जायज है, वे क्योंकि अभी-अभी चुनाव हारे हैं। लेकिन मैं भरोसा दिलाता हूं कि आप कुछ नहीं करोगे तो कुछ नहीं होगा।”

संशोधित बिल में सरकार ने गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति विशेष को आतंकी घोषित करने का प्रावधान शामिल किया है। दिग्विजय ने कहा कि हमें भाजपा की मंशा पर संदेह है। कांग्रेस ने कभी आतंकवाद से समझौता नहीं किया, इसीलिए यह कानून लेकर आए थे। आतंकवाद से समझौता करने वाले आप लोग हैं। भाजपा सरकार ने ही पहले रुबैया सईद और फिर मसूद अजहर को छोड़ा था।

कानून का दुरुपयोग के आरोप लगाने से पहले अपना इतिहास देखिए

गृह मंत्री ने कहा, ”इमरजेंसी के दौरान क्या हुआ था? मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया और विपक्ष के सभी नेताओं को जेल में डाल दिया था। 19 महीने तक देश में लोकतंत्र को खत्म कर दिया गया और अब आप (कांग्रेस) हम पर कानून के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं। कृपया अपना इतिहास भी देख लीजिए। जब हम विपक्ष में थे तो 2004, 2008 और 2013 में हमने यूपीए सरकार के यूएपीए बिल को समर्थन दिया था। क्योंकि हमें लगता था कि आतंकवाद से लड़ने के लिए यह जरूरी था।”

हम सिर्फ व्यक्ति को आतंकी घोषित करने के विरोध में: कांग्रेस

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा, ”अगर विधेयक के संशोधन को देखें तो लगता है कि यह एनआईए को ताकतवर बनाएगा। लेकिन इसमें किसी व्यक्ति का नाम आतंकी की सूची में हटाने और जोड़ने का प्रावधान है। हम इसी का विरोध कर रहे हैं न कि गैर-कानूनी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बने कानून का। 2008 में जब मैंने गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली तो आतंकवाद का सामना करने के लिए तीन स्तंभ- एनआईए, नेटग्रिड और एनसीटीसी बनाए थे। आज हमारे पास सिर्फ एक स्तंभ है। आपने एनआईए को छोड़कर बाकी दो के लिए क्या किया?”

कब तक संगठनों पर ही रोक लगाते रहेंगे: गृह मंत्री

अमित शाह ने चिदंबरम को जवाब दिया, ”आपने पूछा कि आतंकी गतिविधियों में लिप्त संगठनों पर प्रतिबंध है तो किसी व्यक्ति को विशेष को आतंकी घोषित करने की क्या जरूरत है। हमने संशोधन में ऐसा प्रावधान रखा है क्योंकि एक संगठन पर रोक लगाई जाती है तो कुछ व्यक्तियों के द्वारा दूसरा खड़ा कर दिया जाता है। कब तक हम संगठनों पर ही रोक लगाते रहेंगे?

एनआईए को पहले से ज्यादा अधिकार, इसलिए विरोध

बिल में नए प्रावधान जोड़े गए हैं। इसमें सबसे बड़ा प्रावधान यह है कि एनआईए अब आतंकी के समर्थकों को भी आतंकी घोषित कर उनकी संपत्ति जब्त कर सकेगी। यही नहीं, अब आतंकी संगठन के साथ-साथ उस व्यक्ति को भी आतंकी घोषित किया जा सकेगा, जो किसी न किसी रूप से आतंक को बढ़ावा दे रहा होगा। उसकी संपत्ति जब्त करने के लिए एनआईए को उससे संबंधित राज्य की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।

किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने के 4 आधार होंगे

1. जो व्यक्ति आतंकी घटना को अंजाम देगा या इसमें सहयोग देगा।
2. जो व्यक्ति किसी आतंकी घटना की तैयारी कर रहा होगा।
3. जो देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कृत्य करेगा।
4. जो व्यक्ति किसी भी तरह से आतंकवाद से जुड़ा हुआ पाया जाएगा।

विपक्ष ने लोकसभा में चर्चा के दौरान वॉकआउट किया था

लोकसभा में 24 जुलाई को बिल पर बहस के दौरान विपक्ष ने इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजनी की मांग करते हुए वॉकआउट किया था। चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सरकार लड़ती है। कौन-सी पार्टी सत्ता में हैं और बिल कौन लेकर आया, उससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए। आतंकवाद के खात्मे के लिए कड़े कानून की जरूरत है। कांग्रेस सरकार बिल लाती है तो सही, लेकिन हम संशोधन कर रहे हैं तो इसमें गलत क्या है? हम आतंकवाद को खत्म करना चाहते हैं, संशोधित कानून से राज्यों की शक्ति कम नहीं होगी। यह कानून 1967 में कांग्रेस सरकार लेकर आई। इसके बाद आप ही ने इसमें तीन संशोधन किए।

कार्ति ओर पी चिदम्बरम की गिरफ्तारी पर रोक 9 अगस्त तक बढ़ी

कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अब तक सरकारी अनुमति न लेने पर जांच एजेंसी सीबीआई और ईडी को फटकार लगाई थी. इस अग्रिम जमानत का ईडी और सीबीआई विरोध कर रही है. ईडी और सीबीआई का कहना है कि उसे जांच आगे बढ़ाने और आरोपियों से पूछताछ करने के लिए हिरासत चाहिए ऐसे में आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटाया जाए

नई दिल्लीः एयरसेल-मैक्सिस डील मामले में दिल्ली की राॅउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी पर अब रोक 9 अगस्त तक बढ़ा दी है.गुरुवार को सुनवाई के दौरान चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि कार्ति को सीबीआई और ईडी जब भी पूछताछ के लिए बुलाएगी वो जाएंगे. पी चिदम्बरम और कार्ति चिदम्बरम दोनों सांसद है. दोनों के खिलाफ कभी भी साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का मामला नहीं आया है.

आपको बता दें कि कोर्ट इस समय कार्ति और पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा है और इस अग्रिम जमानत का ईडी और सीबीआई विरोध कर रही है. ईडी और सीबीआई का कहना है कि उसे जांच आगे बढ़ाने और आरोपियों से पूछताछ करने के लिए हिरासत चाहिए ऐसे में आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटाया जाए.

कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अब तक सरकारी अनुमति न लेने पर जांच एजेंसी सीबीआई और ईडी को फटकार लगाई थी.कोर्ट ने जांच एजेंसियों को फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर मामले की अगली सुनवाई तक चार्जशीट में दर्ज नामों के खिलाफ सरकार से कार्रवाई के लिए इजाज़त नहीं मिली तो अदालत जांच एजेंसियों की तरफ से दायर चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लेगी.पिछली सुनवाई में पी चिदंबरम पर मुकद्दमा चलाने के लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी थी.

पी चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ ईडी और सीबीआई की ओर से दायर चार्जशीटपर पटियाला हाउस कोर्ट को संज्ञान लेना है. ईडी और सीबीआई ने कार्ति और पी चिदंबरम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.

एयरसेल-मैक्सिम केस में दायर हुई थी चार्जशीट

एयरसेल-मैक्सिस मामले में सीबीआई ने पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी.चार्जशीट में कहा गया था कि पी. चिदंबरम ने वित्त मंत्री रहते हुए अपनी पावर का गलत इस्तेमालकिया.उनकेखिलाफ आईपीसी की धारा 120B और पीसी एक्ट की धारा 7, 1213 (2) के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है.दरअसल, इस मामले में कुल 18 लोगों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी.जबकि ईडी ने कार्ति चिदंबरम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.