हरक के कांग्रेस में शामिल होने से पहले विरोध शुरू, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा- ऐसे लोगों को दूर रखें

प्रदीप टम्टा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि ऐसे दलबदलू लोगों को पार्टी से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस तरह की जोड़तोड़ में विश्वास नहीं करते हैं। बावजूद इसके यदि शीर्ष नेतृत्व हरक सिंह को पार्टी में लेने का निर्णय लेता है, तो हम पार्टी से बाहर नहीं जाएंगे। पार्टी को भी निर्णय लेते समय 2016 में हुए अपराध का संज्ञान लेना चाहिए। माफी मांग लेने भर से कुछ नहीं हो जाता। इसकी क्या गारंटी है कि उन्होंने (हरक सिंह) जो पहले किया है, उसे फिर से नहीं दोहराएंगे।

डेमोक्रेटिक फ्रंट, उत्तराखंड(ब्यूरो) :

बीजेपी से निष्कासित पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत 6 साल बाद एक बार फिर से कांग्रेस में वापसी को बेकरार दिख रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से 100 बार माफ़ी मांगने की बात भी कही है। बावजूद इसके कांग्रेस आला कमान में हरक सिंह रावत की एंट्री को लेकर को बात अभी तक नहीं बन पायी है। मिल रही जानकारी के मुताबिक हरक सिंह रावत लगातार कांग्रेस के संपर्क में हैं। लेकिन हरीश रावत की वजह से उनकी जॉइनिंग पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका है। हरीश रावत ने हालांकि हरक सिंह रावत को माफ़ करने की बात तो कही, लेकिन साथ ही उन्हें अपराधी भी बता दिया।

भाजपा से निष्कासित पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की कांग्रेस में एंट्री से पहले ही विरोध शुरू हो गया है। केदारनाथ विधायक मनोज रावत के बाद राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने भी हरक को पार्टी में नहीं लिए जाने की बात कही है। अमर उजाला से बातचीत में सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि जो लोग आज हरक सिंह रावत को पार्टी में शामिल किए जाने की पैरवी कर रहे हैं, शायद वह वर्ष 2016 की घटना को भूल गए हैं, जब षड़यंत्र के तहत लोकतंत्र की हत्या की गई थी।

इस साजिश के शामिल डॉ. हरक सिंह रावत ने पांच साल सरकार में रहकर कभी भाजपा की गलत नीतियों की आलोचना नहीं की। लेकिन अब जब उन्हें पार्टी ने निकाल दिया है, तब उन्हें फिर कांग्रेस याद आ रही है। वह जानते हैं कि इस बार राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। इसलिए कांग्रेस पार्टी का रुख करना चाहते हैं। हम जनता को क्या जवाब देंगे।

टम्टा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि ऐसे दलबदलू लोगों को पार्टी से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस तरह की जोड़तोड़ में विश्वास नहीं करते हैं। बावजूद इसके यदि शीर्ष नेतृत्व हरक सिंह को पार्टी में लेने का निर्णय लेता है, तो हम पार्टी से बाहर नहीं जाएंगे। पार्टी को भी निर्णय लेते समय 2016 में हुए अपराध का संज्ञान लेना चाहिए। माफी मांग लेने भर से कुछ नहीं हो जाता। इसकी क्या गारंटी है कि उन्होंने (हरक सिंह) जो पहले किया है, उसे फिर से नहीं दोहराएंगे।

पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की कांग्रेस पार्टी में ज्वानिंग नहीं हो पाई है। कहा जा रहा है कि पूर्व सीएम हरीश रावत के कारण ऐसा हो रहा है। जबकि हरीश रावत का कहना है कि व्यक्तिगत तौर पर तो वह उन्हें (डॉ. हरक) बहुत पहले माफ कर चुके हैं, लेकिन यह मामला व्यक्तिगत नहीं है। उन्हें घाव लगा है, इसलिए हो सकता है, वह निष्पक्ष होकर निर्णय नहीं ले पाएं, लेकिन पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जो भी निर्णय लेगा, वह उसके साथ होंगे। 

डॉ. हरक सिंह के मुद्दे पर अमर उजाला से बातचीत करते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि इस मामले में वह पिक्चर में नहीं हैं। पार्टी का जो निर्णय होगा, वह उसे मान लेंगे। हरक सिंह रावत अगर यह कह रहे हैं कि मैंने माफी दे दी है तो यह हरीश रावत का व्यक्तिगत मामला नहीं है। वह तो इस बात को अपने मन से बहुत पहले ही हटा चुके हैं। बकौल हरीश, हमारे जीवन में यह घटना होनी थी, हो गई, हम इसे झेल रहे हैं। हम ही क्या, सभी उसका परिणाम झेल रहे हैं।

उस दौरान यदि तीन-चार माह और सरकार रहती तो काम करने के तमाम अवसर मिलते। लेकिन इन्होंने (हरक सिंह) ऐसा नहीं होने दिया। इन्होंने सरकार का एक प्रकार से पूरा एक वित्तीय वर्ष खत्म कर दिया। इस दौरान उत्तराखंड के विकास का जो नुकसान हुआ, उसका सवाल बड़ा है। लोकतंत्र का नुकसान हुआ, उसका भी सवाल है। इसके लिए आप (हरक सिंह) भले ही सर्वाजनिक रूप से बात करें या माफी मांगे, लेकिन यह पार्टी को देखना है कि इनके आने से फायदा है या नुकसान है। यह पार्टी को तय करना है, मैं इस मसले पर नहीं फंसना चाहता हूं। हरीश रावत ने आगे जोड़ा कि उन्हें घाव लगा था, इसलिए हो सकता है, वह निष्पक्ष तरीके से नहीं सोच पा रहे हों। वह इतना ही कहना चाहते हैं कि पार्टी के सामूहिक निर्णय में हरीश रावत का निर्णय भी शामिल होगा।

पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश जोशी की कांग्रेस भवन में मौजूदगी के दौरान रायपुर विधानसभा क्षेत्र के कुछ कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय भवन में डॉ. हरक सिंह रावत के विरोध में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। 

बताया जा रहा है कि प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ता दो माह पूर्व ही कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए महेंद्र नेगी गुरुजी के समर्थक थे। महेंद्र नेगी रायपुर से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। डॉ. हरक सिंह रावत के कांग्रेस में शामिल होने और रायपुर सीट से दावेदारी जताने की आशंका में उम्मीदवार पहले ही विरोध दर्ज करा देना चाहते हैं।

शायद यही वजह रही कि पर्यवेक्षक नियुक्त होने के बाद पहली बार कांग्रेस मुख्यालय भवन पहुंचे मोहन प्रकाश जोशी की मौजूदगी के समय विरोध दर्ज कराने का समय चुना गया। जिस वक्त पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश जोशी कांग्रेस भवन में पहली मंजिल पर बने वार रूम का निरीक्षण कर रहे थे, उसी वक्त कार्यालय प्रांगण में कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। 

हरक सिंह पुन: कॉंग्रेस में जाएँगे

प्रदेश की सियासत में उठापटक के प्रतीक माने जाने वाले कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत इस बार भाजपा के लिए किरकिरी का सबब बने हैं। नौ कांग्रेसी विधायकों के साथ हरक सिंह रावत 2016 में हरीश रावत का साथ छोड़ भाजपा में आने की वजह से चर्चा में आए थे। भाजपा ने न सिर्फ उन्हें कोटद्वार से टिकट देकर उम्मीदवार बनाया बल्कि कैबिनेट मंत्री से भी नवाजा। पूर्व मुख्य मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से उनके लगभग चार साल के कार्यकाल में हरक का छत्तीस का आंकड़ा बना रहा। 

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट – उत्तराखंड/चंडीगढ़ :

उत्तराखंड में भाजपा में खींचतान लगातार जारी है। कुछ दिन पहले कैबिनेट मीटिंग में इस्तीफा देने के बाद मना लिए गए वरिष्ठ मंत्री हरक सिंह रावत को पार्टी ने रविवार को बाहर का रास्ता दिखा दिया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय ने देर रात बयान जारी कर बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया है और इसकी जानकारी राज्यपाल को भी भेज दी है। वहीं, रावत को 6 साल के लिए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से भी बर्खास्त कर दिया गया है।

दावेदारों के पैनल के सिलसिले में दिल्ली में हुई पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने इसकी पुष्टि की। बताया जा रहा कि हरक परिवार के लिए तीन टिकट मांग रहे थे, जिसे केंद्रीय नेतृत्व ने खारिज कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना बेहतर समझा। हरक रविवार को ही विधायक उमेश शर्मा काऊ के साथ दिल्ली पहुंचे थे। हरक का कहना था कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे।

हरक सिंह रावत पिछले पांच साल से भाजपा को समय-समय पर असहज करते आए हैं। अब तक पार्टी वर्ष 2016 के राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान दिए गए सहयोग के लिए उनकी हर बात को मानती आई है। ऐसे में पार्टी संगठन के बीच से भी हरक के विरोध में सुर उभर रहे थे। अब जबकि विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है तो नाराज बताए जा रहे हरक ने पार्टी के सामने अपनी सीट बदलने के साथ ही पुत्रवधू के लिए लैंसडौन से टिकट समेत तीन टिकटों की मांग रख दी। हाल में उन्होंने केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रल्हाद जोशी से बंद कमरे में बातचीत की थी। तब पार्टी की ओर से साफ कर दिया गया था एक परिवार को एक ही टिकट दिया जाएगा।

अब चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरु होने से चंद घण्टे पहले उनकी कांग्रेस में वापसी की प्रबल संभावना को देखते हुए आखिरकार भाजपा को आखिरकार उनसे अपने रिश्ते फिर से परिभाषित करने पड़ गए हैं। इसी क्रम में सीएम पुष्कर सिंह धामी को उन्हें सरकार से बर्खास्त करने के साथ ही पार्टी ने भी उन्हें निलंबित कर दिया है। जबकि अब तक हर बार पार्टी उनकी मनोव्वल करती आ रही थी। हरक के तेवरों के आगे नरम पड़ती पार्टी के रवैये से भाजपा का मूल कैडर भी हैरान था, इस कारण पार्टी ने अब तकरीबन बेअसर हो चुकी इस कार्यवाही से अपने कैडर की भावनाओं पर मरहम लगाने का प्रयास किया है।

1991 पौड़ी से भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित
1991 कल्याण सिंह सरकार में सबसे युवा मंत्री बने
1993 में फिर पौडी सीट से निर्वाचित हुए
1995 विवादों के बीच भाजपा का साथ छोड़ा
1997 मायावती के नेतृत्व वाली बसपा में शामिल
1997 यूपी खादी ग्रामोद्योग में उपाध्यक्ष बने
2002 कांग्रेस से लैंसडाउन के विधायक बन
2002 तिवारी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने
2003 जेनी प्रकरण में इस्ती़फा देना पड़ा
2007 फिर से लैंसडाउन के विधायक बने
2007 में कांग्रेस से नेता विपक्ष बनाए गए
2012 रुद्रप्रयाग से विधायक निर्वाचित हुए
2016 कांग्रेस से इस्तीफा दिया, भाजपा में वापसी
2017 भाजपा से कोटद्वार से विधायक बने
2017 भाजपा सरकार में फिर मंत्री बनाए गए

2022 भाजपा सरकार से बर्खास्त किए गए

हरक सिंह शनिवार को एक बार फिर चर्चा में तब आए, जब वह प्रदेश भाजपा कार्यालय में कोर ग्रुप की बैठक में शामिल नहीं हुए। इसे उनकी तीन टिकट की मांग का समाधान न होने से पैदा नाराजगी से जोड़कर देखा गया। रविवार शाम को हरक अपनी पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं और विधायक उमेश शर्मा काऊ के साथ दिल्ली पहुंच गए। उन्होंने बताया था कि वह दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर अपनी बात रखेंगे।

दरअसल, रविवार शाम को विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन के संबंध में भाजपा नेता मंथन में जुटे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने देर रात बताया कि बैठक में हरक के विषय पर भी मंथन हुआ। इसके बाद पार्टी ने हरक को छह साल के लिए भाजपा से बर्खास्त करने का निर्णय ले लिया। उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने के संबंध में भी सरकार की ओर से राजभवन को सूचना भेज दी गई। राजभवन ने इसकी पुष्टि की है। उधर, देर रात यह जानकारी सामने आई कि हरक सिंह रावत सोमवार को विधिवत कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।

पूर्व कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत का कहना है कि भाजपा ने मेरे संबंध में जो निर्णय लिया है, उसकी जानकारी मुझे मीडिया से मिली। पार्टी ने मुझे अपनी बात रखने का अवसर भी नहीं दिया, जबकि मैं दिल्ली में ही मौजूद हूं। पार्टी नेताओं को इसकी जानकारी भी थी। अब सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद अगला कदम तय करूंगा।

हरक सिंह रावत कोटद्वार में मेडिकल कालेज के निर्माण को लेकर तकरीबन बीते दो महीने से मुखर थे। इस मामले में लग रही अड़चन से नाराज हरक सिंह रावत इस्तीफा देने की धमकी देते हुए बीती 24 दिसंबर को कैबिनेट बैठक छोड़कर चले गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री रावत की नाराजगी दूर करने को सक्रिय हुए। उन्होंने मेडिकल कालेज के संबंध में ठोस निर्णय के संकेत दिए। मान-मनुहार के प्रयास कामयाब हुए।

दिल्‍ली रवाना होने के दौरान हरक सिंह रावत के साथ देहरादून के रायपुर विधानसभा सीट से उमेश शर्मा काऊ भी हैं। बताया जा रहा है कि हरक सिंह रावत देर रात को कांग्रेस की अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने जा रहे हैं। कल यानी सोमवार को उनके कांग्रेस में शामिल होने की भी चर्चा चल रही है। हालांकि माना जा रहा है कि जिस तरह से हरक सिंह रावत ने भाजपा के समक्ष टिकटों की शर्त रखी थी, यद‍ि वह कांग्रेस के सामने भी यह शर्त रखते हैं तो यह कांग्रेस के लिए भी मुश्किल हो सकती है।

भाजपा के बदरीनाथ विधानसभा सीट से विधायक महेंद्र भट्ट ने ट्वीट कर कहा कि देर से ही सही पार्टी का अच्‍छा निर्णय। हरक सिंह रावत भाजपा से बर्खास्‍त हुए। मंत्रीमंडल से भी बर्खास्‍त।

माँ शाकंभरी देवी की जयंती, आइये जानें अधिक …….

जानिए की कौन हैं देवी शाकम्भरी और क्यों मनाये शाकम्भरी जयंती..????

आज ( सोमवार—17जनवरी 2022) शाकम्भरी जयंती है आज सूर्योदय से अत्यंत शुभ रवि योग रहेगा | आज दक्षिण भारत में मट्टू पोंगल नामक पर्व मनाया जायेगा |शाकम्भरी जयंती 15 जनवरी को देवी शाकम्भरी की याद में मनायी जाती है।देवी शाकम्भरी दुर्गा के अवतारों में एक हैं।ऐसी मान्यता है कि माँ शाकम्भरी मानव के कल्याण के लिये इसी दिन धरती पर आयी थी।

मां शाकम्भरी की महिमा के बाबत सत्य ही वर्णित है

शारणागत दीनात् परित्राण परायणे, सर्वस्यर्ति हरे देवी नारायणी नामोस्तुते।

       शाकम्भरी नवरात्री पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी से पूर्णिमा तक होती हैं। पौष माह की पूर्णिमा को ही पूराणों के अनुसार शाकम्भरी माताजी का प्रार्दुभाव हुआ था अतः पूर्णिमा के दिन शाकम्भरी जयन्ती (जन्मोत्सव) महोत्सव मनाया जाता हैं।



माँ शाकम्भरी देवी मन्दिर—भक्तों की श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का केन्द्र—-

प्राचीन समय की बात है – दुर्गम नाम का एक महान्‌ दैत्य था। उस दुष्टात्मा दानव के पिता राजारूरू थे। ‘देवताओं का बल देव है। वेदों के लुप्त हो जाने पर देवता भी नहीं रहेंगे, इसमें कोई संशय नहीं है। अतः पहले वेदों को ही नष्ट कर देना चाहिये’। यह सोचकर वह दैत्य तपस्या करने के विचार से हिमालय पर्वत पर गया। मन में ब्रह्मा जी का ध्यान करके उसने आसन जमा लिया। वह केवल वायु पीकर रहता था। उसने एक हजार वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की। उसके तेज से देवताओं और दानवों सहित सम्पूर्ण प्राणी सन्तप्त हो उठे। तब विकसित कमल के सामन सुन्दर मुख की शोभा वाले चतुर्मुख भगवान ब्रह्मा प्रसन्नतापूर्वक हंस पर बेडकर वर देने के लिये दुर्गम के सम्मुख प्रकट हो गये और बोले – ‘तुम्हारा कल्याण हो ! तुम्हारे मन में जो वर पाने की इच्छा हो, मांग लो। आज तुम्हारी तपस्या से सन्तुष्ट होकर मैं यहाँ आया हूँ।’ ब्रह्माजी के मुख से यह वाणी सुनकर दुर्गम ने कहा – सुरे, र! मुझे सम्पूर्ण वेद प्रदान करने की कृपा कीजिये। साथ ही मुझे वह बल दीजिये, जिससे मैं देवताओं को परास्त कर सकूँ।

दुर्गम की यह बात सुनकर चारों वेदों के परम अधिष्ठाता ब्रह्माजी ‘ऐसा ही हो’ कहते हुए सत्यलोक की ओर चले गये। ब्रह्माजी को समस्त वेद विस्मृत हो गये।

इस प्रकार सारे संसार में घोर अनर्थ उत्पन्न करने वाली अत्यन्त भयंकर स्थिति हो गयी। इस प्रकार का भीषण अनिष्टप्रद समय उपस्थित होने पर कल्याणस्वरूपिणी भगवती जगदम्बा की उपासना करने के विचार से ब्राह्मण लोग हिमालय पर्वत पर चले गये। समाधि, ध्यान और पूजा के द्वारा उन्होंने देवी की स्तुति की। वे निराहार रहते थे। उनका मन एकमात्र भगवती में लगा था। वे बोले – ‘सबके भीतर निवास करने वाली देवेश्वरी ! तुम्हारी प्रेरणा के अनुसार ही यह दुष्ट दैत्यसब कुछ करता है। तुम बारम्बार क्या देख रही हो ? तुम जैसा चाहो वैसा ही करने में पूर्ण समर्थ हो। कल्याणी! जगदम्बिके प्रसन्न हो जाओ, प्रसन्न हो जाओ, प्रसन्न हो जाओ! हम तुम्हें प्रणाम करते हैं।’

‘इस प्रकार ब्राह्मणों के प्रार्थना करने पर भगवती पार्वती, जो ‘भुवनेश्वरी’ एवं महेश्वरी’ के नाम से विखयात हैं।, साक्षात्‌ प्रकट हो गई। उनका यह विग्रह कज्जल के पर्वत की तुलना कर रहा था। आँखें ऐसी थी, मानों विकसित नील कमल हो। कमल के पुष्प पल्लव और मूल सुशोभित थे। सम्पूर्ण सुन्दरता का सारभूत भगवती का यह स्वरूप बड़ा ही कमनीय था। करोडो सूर्यों के समान चमकने वाला यह विग्रह करूण रस का अथाह समुद्र था। ऐसी झांकी सामने उपस्थित करने के पश्चात्‌ जगत्‌ की रक्षा में तत्पर रहने वाली करूण हृदया भगवती अपनी अनन्त आँखों से सहस्रों जलधारायें गिराने लगी। उनके नेत्रों से निकले हुए जल के द्वारा नौ रात तक त्रिलोकी पर महान्‌ वृष्टि होती रही। वे देवता व ब्राह्मण सब एक साथ मिलकर भगवती का स्तवन करने लगे।

देवी ! तुम्हें नमस्कार है। देवी ! तुमने हमारा संकट दूर करने के लिये सहस्रों नेत्रों से सम्पन्न अनुपम रूप धारण किया है। हे मात ! भूख से अत्यन्त पीडि त होने के कारण तुम्हारी विशेष स्तुति करने में हम असमर्थ हैं। अम्बे ! महेशानी ! तुम दुर्गम नामक दैत्य से वेदों को छुड़ा लाने की कृपा करो।

व्यास जी कहते हैं – राजन ! ब्राह्मणों और देवताओं का यह वचन सुनकर भगवती शिवा ने अनेक प्रकार के शाक तथा स्वादिष्ट फल अपने हाथ से उन्हें खाने के लिये दिये। भाँति-भाँति के अन्न सामने उपस्थित कर दिये। पशुओं के खाने योग्य कोमल एवं अनेक रस से सम्पन्न नवीन तृण भी उन्हें देने की कृपा की। राजन ! उसी दिन से भगवती का नाम ”शाकम्भरी” पड गया।

जगत में कोलाहल मच जाने पर दूत के कहने पर दुर्गम नामक स्थान दैत्य स्थिति को समझ गया। उसने अपनी सेना सजायी और अस्त्र शस्त्र से सुसज्जित होकर वह युद्ध के लिये चल पड़ा। उसके पास एक अक्षोहिणी सेना थी। तदनन्तर भगवती शिवा ने उससे रक्षा के लिये चारों ओर तेजोमय चक्रखड़ा कर दिया। तदनन्तर देवी और दैत्य-दोनों की लड़ाई ठन गयी। धनुष की प्रचण्ड टंकार से दिशाएँ गूँज उठी।

भगवती की माया से प्रेरित शक्तियों ने दानवों की बहुत बड़ी सेना नष्ट कर दी। तब सेनाध्यक्ष दुर्गम स्वयं शक्तियों के सामने उपस्थित होकर उनसे युद्ध करने लगा। दस दिनों में राक्षस की सम्पूर्ण अक्षोहिणी सेनाएँ देवी का द्वारा वध कर कदी गयी।

अब भगवती जगदम्बा और दुर्गम दैत्य इन दोनों में भीषण युद्ध होने लगा। जगदम्बा के पाँच बाण दुर्गम की छाती में जाकर घुस गये। फिर तो रूधिर वमन करता हुआ वह दैत्य भगवती परमेश्वरी के सामने प्राणहीन होकर गिर पड़ा।

देवगण बोले- परिवर्तनशील जगत की एकमात्र कारण भगवती परमेश्वरी! शाकम्भरी! शतलोचने! तुम्ळें शतशः नमस्कार है। सम्पूर्ण उपनिषदों से प्रशंसित तथा दुर्गम नामक दैत्य की संहारिणी एवं पंचकोश में रहने वाली कल्याण-स्वरूपिणी भगवती महेश्वर! तुम्हें नमस्कार है।

व्यासजी कहते हैं – राजन! ब्रह्मा, विष्णु आदि आदरणीय देवताओं के इस प्रकार स्तवन एवं विविध द्रव्यों के पूजन करने पर भगवती जगदम्बा तुरन्त संतुष्ट हो गयीं। कोयल के समान मधुरभाषिणी उस देवी ने प्रसन्नतापूर्वक उस राक्षस से वेदों को त्राण दिलाकर देवताओं को सौंप दिया। वे बोलीं कि मेरे इस उत्तम महात्म्य का निरन्तर पाठ करना चाहिए। मैं उससे प्रसन्न होकर सदैव तुम्हारे समस्त संकट दूर करती रहूँगी।

व्यासजी कहते हैं – राजन ! जो भक्ति परायण बड भागी स्त्री पुरूष निरन्तर इस अध्याय का श्रवण करते हैं, उनकी सम्पूर्ण कामनाएँ सिद्ध हो जाती हैं और अन्त में वे देवी के परमधाम को प्राप्त हो जाते हैं।

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यह मन्दिर उदयपुर खाटी (राजस्थान), जिला सीकर के निकट है तथा प्रकृति की अनुपम छटा लिये हुए सुन्दर मनोहर घाटी पर विद्यमान है जहाँ आज भी गंगा बहती है।
उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर से करीब 40 कि.मी. की दूरी पर शिवालिक की पर्वतमालाओं में स्थित आदिशक्ति विश्वकल्याणी मां शाकम्भरी देवी के प्राचीन सिद्धपीठ की छटा ही निराली है।

प्राकृतिक सौंदर्य व हरीतिमा से परिपूर्ण यह क्षेत्र उपासक का मन मोह लेता है तथा बरबस ही मस्तक उस जगतजननी के समक्ष श्रद्धा से झुक जाता है जो दस महाविद्याओं के विभिन्न स्वरूपों में एक सौ आठ नाम से वंदनीय हैं व दिव्य ज्योति रूप बनकर भौतिक जगत को प्रकाशित करती हैं। मां शाकम्भरी की महिमा से ही प्रकृति सुरक्षित है। वे न केवल प्राणियों की क्षुधा शांत करती हैं बल्कि प्रण-प्राण से रक्षा भी करती हैं। देवीपुराण के अनुसार शताक्षी, शाकम्भरी व दुर्गा एक ही देवी के नाम हैं।
नवरात्रि तथा दुर्गा अष्टमी के अलावा विभिन्न पुनीत अवसरों पर मां शाकम्भरी पीठ पर उपासकों का तांता लगा रहता है। हालांकि वर्षा ऋतु के दौरान यहां उपासकों को बाढ़ की सी स्थिति का सामना करना पड़ता है लेकिन भक्ति में शक्ति होने के कारण यहां सदैव भक्तों का जमावड़ा बना रहता है।

पुराण में वर्णित है कि इसी पवित्र स्थल पर मां जगदम्बा ने रक्तबीज का संहार किया था तथा सती का सिर भी इसी स्थल पर गिरा था। जनश्रुति है कि जगतजननी मां शाकम्भरी देवी की कृपा से उपासक के यहां खाद्य सामग्री की कमी नहीं रहती। शाक की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण वे शाकम्भरी देवी के नाम से लोको में जानी जाती हैं। श्री दुर्गा सप्तशती में वर्णित रूप के अनुसार मां शाकम्भरी देवी नीलवर्ण, नयन नीलकमल की भांति, नीची नाभि एवं त्रिवली हैं। कमल पर विराजमान रहने वाली मां शाकम्भरी देवी धनुष धारणी हैं। देवी पुराण में उनकी महिमा का वर्णन करते हुये उल्लेख किया गया है कि वे ही देवी शाकम्भरी हैं, शताक्षी हैं व दुर्गा नाम से जानी जाती हैं। यह भी सत्य है कि वे ही अनंत रूपों में विभक्त महाशक्ति हैं।

सिद्धपीठ मां शाकम्भरी देवी में मुख्य प्रतिमा मां शाकम्भरी के दाई ओर भीमादेवी व भ्रामरी तथा बायीं ओर शीताक्षी देवी प्रतिष्ठित हैं। मंदिर प्रांगण में ही भैरव आदि देवों के लघु मंदिर स्थापित हैं। सिद्धपीठ के समीप ही दस महाविधाओं में से एक मां छिन्न-मस्ता का प्राचीन मंदिर है। पुराण के अनुसार जब राक्षसों के अत्याचारों से पीडि़त देवतागण शिवालिक पर्वतमालाओं में छिप गये तथा उनके द्वारा जगदम्बा की स्तुति करने पर मातेश्वरी ने इसी स्थल पर प्रकट होकर उन्हें भयमुक्त किया व उनकी क्षुधा मिटाने हेतु साग व फलादि का प्रबंध किया। इसी कारण वह शाकम्भरी नाम से प्रसिद्ध हुईं। तत्पश्चात् वह शुम्भ-निशुम्भ राक्षसों को रिझाने के लिये सुंदर रूप धारण कर शिवालिक पहाड़ी पर आसन लगाकर बैठ गयीं। इसी स्थल पर मां जगदम्बा ने शुम्भ-निशुम्भ, रक्तबीज व महिषासुर आदि दैत्यों का संहार किया व भक्त भूरेदेव को आशीर्वाद दिया। सिद्धपीठ के समीपस्थ स्थित भूरेदेव के मंदिर से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है। मां की असीम अनुकम्पा से वर्तमान में भी सर्वप्रथम उपासक भूरेदेव के दर्शन करते हैं तत्पश्चात पथरीले रास्ते से गुजरते हुये मां शाकम्भरी देवी के दर्शन हेतु जाते हैं। जिस स्थल पर माता ने रक्तबीज नामक राक्षस का वध किया था, वर्तमान में उसी स्थल पर मां शाकम्भरी का सिद्धपीठ गौरव से मस्तक ऊंचा किये खड़ा है।

पंजाब कांग्रेस और अकाली दल में रहे नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है

देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव-2022 का बिगुल बज चुका है| एक तरफ जहां राजनीतिक पार्टियां चुनाव की तैयारी कर रही हैं तो वहीं दूजी ओर इन राजनीतिक पार्टियों के अंदर नेताओं के इधर से उधर जाने का सिलसिला भी खूब देखा जा रहा है| अबतक भिन्न-भिन्न पार्टियों के कई नेता एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जा चुके हैं| इधर, यह तस्वीर पंजाब में कुछ ज्यादा देखी जा रही है| पंजाब कांग्रेस और अकाली दल से संबंध रखने वाले कई छोटे-बड़े नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं| वहीं, एक बार फिर से मंगलवार को पंजाब कांग्रेस और अकाली दल में रहे नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है|

किन नेताओं ने ज्वाइन की बीजेपी…

बतादें कि, देश की राजधानी दिल्ली में स्थित पार्टी कार्यालय में पंजाब के कई नेताओं ने भाजपा को ज्वाइन किया| बीजेपी नेता व केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत सहित पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं का स्वागत किया| जिन नेताओं ने बीजेपी को ज्वाइन किया – उनमें पूर्व में कांग्रेस नेता और दो बार विधायक रहे अरविंद खन्ना, यूथ अकाली दल में रहे गुरदीप सिंह गोशा, अमृतसर में पूर्व पार्षद रहे धर्मवीर सरीन और एक अन्य नामी हस्ती कंवर सिंह टोहरा जैसे नाम शामिल हैं| इसके अलावा इनके साथ ही और कई लोगों ने भी बीजेपी की सदस्य्ता ली|

गजेंद्र शेखावत का बड़ा बयान…

इस दौरान गजेंद्र शेखावत ने कहा कि पंजाब में बीजेपी की अहमियत बढ़ रही है| लोग बीजेपी में आने को उत्साहित हो रहे हैं| गजेंद्र शेखावत ने पीएम मोदी की सुरक्षा चूक पर बात करते हुए कहा कि यह एक साजिश थी और यह एक काला अध्याय है| लेकिन बीजेपी या पीएम मोदी इससे पीछे नहीं हटने वाले| गजेंद्र शेखावत ने कहा कि कौन कहता है कि फिरोजपुर रैली में लोग नहीं आ रहे थे| गजेंद्र शेखावत ने कहा कि 1000 बसों का इंतजाम किया गया था, लोग पीएम मोदी को सुनने के लिए आतुर थे मगर कुछ साजिशों ने इसे सफल नहीं होने दिया| गजेंद्र शेखावत ने कहा कि पीएम मोदी के साथ जो हुआ उसे लेकर पंजाब, खासकर फिरोजपुर की जनता में गुसा है|

आआपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व पर करोड़ों में टिकट बेचने के आरोप लगाए हैं

  • अगर पंजाब के युवाओं और पंजाबियों को आआपा के केंद्रीय नेतृत्व ने धोखा दिया तो हम सड़कों पर उतरेंगे: गुरतेज सिंह पन्नू
  • आआपा नेताओं ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए टिकट के लिए गलत लोगों को चुनने को लेकर पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बगावत कर दी है।

डेमोक्रेटिक फ्रंट(ब्यूरो), चंडीगढ़ :

पंजाब विधानसभा चुनाव में आआपा (आम आदमी पार्टी) पर करोड़ों रुपए लेकर टिकट बेचने के इल्जाम लग रहे हैं। और ये आरोप लगाने वाला विरोधी पार्टी के लोग नहीं, बल्कि आआपा के ही कार्यकर्ता हैं। चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता करते हुए आआपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व पर करोड़ों में टिकट बेचने के आरोप लगाए हैं। साथ ही माँग की है कि पार्टी को अ

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल फ़िलहाल कोरोना से पीड़ित हैं और हाल ही में उन्होंने चंडीगढ़ में नगरपालिका चुनाव में अच्छे प्रदर्शन बनने के बाद वहाँ विजय यात्रा निकाली थी। आरोप लगे थे कि कोरोना के लक्षण आने के बावजूद उन्होंने रैलियाँ की और लोगों से मिलते-जुलते रहे। अब उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के अपनी ही पार्टी की पोल खोल रहे हैं। करोड़ो रुपए लेकर टिकट बेचने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यही है उनकी ‘बदलाव’ वाली राजनीति?

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चंडीगढ़ में AAP से कम सीटें होने के बावजूद भाजपा अपना मेयर बनाने में कामयाब रही, जिसके लिए भी आआपा कार्यकर्ता पार्टी के अंदरूनी कलह को दोषी ठहरा रहे हैं। ‘शिरोमणि अकाली दल (SAD)’ ने भी आआपा पर टिकट बेचने के आरोप लगाए हैं। पार्टी के प्रवक्ता दिलजीत सिंह चीमा ने कहा कि चुनाव आयोग को इस मामलों का संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने का आदेश देना चाहिए। आआपा ने अपने पैम्प्लेट्स में अन्य दलों से पैसे लेकर उसे वोट देने की सलाह लोगों को दी है। अब यह नीति खत्म कर देना चाहिए। पार्टी के मोहाली जिला के युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष गुरतेज सिंह पन्नू और उपाध्यक्ष शीरा भाणबौरा ने प्रेस वार्ता करते हुए अपनी बात रखी।

चीमा ने कहा, “ये स्पष्ट है कि पार्टी के टिकट्स बेच कर अरविन्द केजरीवाल खुद को अमीर बना रहे हैं। आआपा यही मॉडल हर जगह फॉलो कर रही है, इसीलिए जहाँ-जहाँ वो चुनाव लड़ रही है वहाँ टिकट्स बेचे जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये करोड़ों रुपए का घोटाला है, जिसकी पोल उच्च-स्तरीय जाँच के बाद ही खुल सकती है। वो चुनाव में अमीरों पर दाँव लगा रहे हैं। उनका दिल्ली मॉडल पूर्णरूपेण फ्लॉप है, इसीलिए पंजाब की जनता को दिखाने के लिए उनके पास कुछ नहीं है।”

नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में वे केजरीवाल और आप की दिल्ली इकाई के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करेंगे।

आआपा नेताओं ने उन 13 उम्मीदवारों की सूची भी पेश की, जिन्हें निर्वाचन क्षेत्रों में योग्य टिकट उम्मीदवारों की अनदेखी कर टिकट दिया गया है। नेताओं ने कहा कि इनमें से ज्यादातर लोग हाल ही में अन्य पार्टियों से आप में शामिल हुए थे और उद्योगपति हैं न कि आम लोग। नेताओं ने केजरीवाल और राघव चड्ढा से पूछा है कि किस आधार पर इन लोगों को टिकट दिया गया है?

S.NoName ConstituencyParty
1Kulwant SinghMohali SAD
2Sukhjinder Singh Lalli MajhitiaMajhitiaCongress
3Dinesh DhallJalandhar NorthCongress
4Amit Ratan KotfattaBathinda RuralSAD
5Sheetal AngralJalandhar WestBJP
6Raman BehlGurdaspurCongress
7Jagroop Singh SekhwaQuadianSAD
8Ranjit RanaBhulathCongress
9Gurmeet KhudianLambiCongress
10Madan Lal BaggaLudhiana NorthSAD
11Laddi DhosDharamkotCongress
12Inderjit Kaur MannNakodarSAD
13Vibooti SharmaPathankotCongress

बता दें कि हाल ही में प्रेस क्लब में राघव चड्ढा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कॉन्ग्रेस के पूर्व पार्षद दिनेश ढल को पार्टी में शामिल करवाया जाना था, लेकिन टिकट बँटवारे को लेकर विवाद हो गया। इस दौरान पंजाब के सह-प्रभारी के खिलाफ ‘राघव चड्ढा चोर है’ के नारे लगाए गए। बात यहीं तक रहती तो गनीमत होती, लेकिन मामला इतना बढ़ गया कि लोगों के बीच जमकर मारपीट भी हो गई। टिकट बँटवारे को लेकर करीब 45-50 मिनट हुए बवाल के बाद राघव चड्ढा को पिछले दरवाजे से बाहर भागना पड़ा।

विधानसभा चुनाव 2022

चुनाव के दौरान कोरोना के खतरे को देखते हुए चुनाव आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने एक बैठक की थी। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई थी कि मतदाताओं और कर्मचारियों का पूर्ण टीकाकरण अनिवार्य किया जाए। इस बार चुनाव में सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। किसी भी तरीके से आपत्तिजनक पोस्ट पर कार्रवाई की जाएगी। राज्यों की सीमाओं पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट – चंडीगढ़ :

इस साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। जिन राज्यों में चुनाव होंगे वो हैं- उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं और वर्तमान में भाजपा की नेतृत्व वाली योगी आदित्यनाथ की सरकार है। गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में भी बीजेपी की सरकार है। जबकि पंजाब में कांग्रेस की सरकार है। इस बार इन चुनावों में आम आदमी पार्टी भी कांग्रेस और बीजेपी को टक्कर दे सकती है।

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। बता दें कि 2022 में इन पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। उत्तर प्रदेश में 403, पंजाब में 117, उत्तराखंड में 70, मणिपुर में 60 और गोवा में 40 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि ये चुनाव कोविड-19 से सुरक्षा को देखते हुए बड़ी तैयारी के साथ कराए जाएँगे। बूथों की संख्या बढ़ेगी। वहाँ मास्क और सैनिटाइजर उपलब्ध रहेंगे।

पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में 14 फरवरी को एक ही चरण में सभी विधानसभा सीटों का मतदान निपटा लिया जाएगा। 10 मार्च को चुनाव परिणाम जारी किए जाएँगे। उत्तर प्रदेश में 7 चरणों में चुनाव होंगे – फरवरी में 10, 14, 20, 23 और 27 को, जबकि मार्च में 3 और 7 को। मणिपुर में 27 फरवरी और 3 मार्च को चुनाव कराए जाएँगे। रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक कोई चुनाव प्रचार नहीं होगा। इस तरह 10 फरवरी, 2022 से चुनाव शुरू हो जाएगा।

सभी विधानसभाओं में एक ऐसा पोलिंग बूथ होगा, जो केवल महिलाओं के लिए होगा। ECI ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ सभी राज्यों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ भी बैठकें की हैं। जमीनी परिस्थिति को जानने-समझने के बाद चुनाव के तारीखों का ऐलान किया गया। इन 5 राज्यों में 24.9 लाख युवा ऐसे हैं, जो पहली बार वोट देंगे। कुल 18.34 करोड़ लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 8.55 करोड़ महिलाएँ हैं। 80 की उम्र से ऊपर के बुजुर्गों, दिव्यांगों और कोरोना मरीजों के लिए पोस्टल बैलेट्स की सुविधा होगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा वोटर भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों को ऑनलाइन नामांकन भरने की सुविधा भी दी जाएगी। चुनाव में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत के लिए ‘cVIGIL’ एप के जरिए लोग शिकायत कर सकते हैं। घोषणा की गई है कि शिकायत के 100 मिनट के भीतर ECI अधिकारी वहाँ पहुँच जाएँगे। तारीखों के ऐलान के साथ ही आदर्श आचार संहिता भी लागू हो जाएगी। सभी पोलिंग बूथों पर EVM एवं VVPAT का इस्तेमाल होगा। सभी चुनाव अधिकारियों/कर्मचारियों को ‘फ्रंटलाइन वर्कर’ के रूप में गिना जाएगा और उन्हें कोरोना की तीसरी (Precautionary) डोज दी जाएगी।

CEC सुशील चंद्रा ने इस दौरान “यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है” पंक्ति का भी इस्तेमाल किया। साथ ही 15 जनवरी, 2021 तक किसी भी राजनीतिक पार्टी को फिजिकल रैली की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद स्थिति की समीक्षा कर आगे के नियम बताए जाएँगे। कोई भी रोडशो, साइकिल-बाईक यात्रा या पदयात्रा और जुलूस भी अगले आदेश तक नहीं निकाले जा सकेंगे। 7 चरणों में सभी 5 राज्यों के चुनाव निपटा लिए जाएँगे।

कोरोना का सुविधानुसार उपयोग कितना सार्थक

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम, चंडीगढ़

सरकारों ने 1 जनवरी को नए महामारी से संबंधित प्रतिबंध लगाए, जिससे केंद्र शासित प्रदेशों और कई राज्यों में स्थित सभी रेस्तरां और भोजनालयों को उनकी कुल क्षमता के आधे से संचालित करने का आदेश दिया गया। साथ ही जिन लोगों को कोविड 19 वैक्सीन की दोनों खुराक का टीका नहीं लगाया गया है, उन्हें भोजनालयों, साथ ही विवाह स्थलों और भोजों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जबकि इस 18 वर्ष से कम आयु की जनसंख्या को पाबंदी के दायरे से बाहर रखा गया है। वो भी तभी तक जब तक इस आयुवर्ग का सरकारों द्वारा टीकाकरण आरम्भ नहीं हो जाता।

ऐसा दोहरा रवैया सरकारें क्यों कर रही हैं आम लोगों की समझ से परे है। क्या बच्चे कोविड वायरस कैरियर या संक्रमित नहीं हो सकते?

हरियाणा और चंडीगढ़ में मॉल में केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश दिया जा रहा है जिनका टीकाकरण हो चुका है ।

गुड़गांव के एक बड़े मॉल के प्रबंधक ने बताया कि वे केवल उन लोगों को अनुमति दे रहे हैं जिन्होंने दोनों खुराक ली हैं। 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को उनकी आईडी की जांच के बाद प्रवेश की अनुमति है, लेकिन 12 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रवेश की अनुमति नहीं थी लेकिन अब जब 18 वर्ष से कम आयुवर्ग के टीकाकरण करने की व्यवस्था में विलम्ब हो रहा है इसलिए इस आयुवर्ग के लोगों पर से पाबन्दी हटा दी गई है।

इसी तरह देखा जाए तो नाईट कर्फ्यू भी मज़ाक सा लगता है रात के कर्फ्यू पर डब्ल्यूएचओ में मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने कहा नीति निर्माताओं को अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करना चाहिए। “रात के कर्फ्यू जैसी चीजें, जिसके पीछे कोई विज्ञान नहीं है को छोड़ साक्ष्य-आधारित उपाय करने चाहिए । नाइटलाइफ़ वाले शहरों में इस तरह के प्रतिबंधों को उचित ठहराया जा सकता है।

लेकिन कहीं और अर्थव्यवस्था या सामान्य जीवन को प्रभावित न करते हुए आंशिक लॉकडाउन की छाप बनाने के अलावा इसका कोई मतलब नहीं है। इसने पुलिस को देर से भोजन करने वालों को परेशान करने और पहले से ही व्यस्त अवकाश क्षेत्र का गला घोंटने के लिये पास दे दिया है।

इस तरह के आंशिक लॉकडाउन के साथ समस्या यह है कि उन्हें दुनिया भर में बिना किसी वैज्ञानिक तर्क के लागू किया जाता है। कुछ सिद्धांत हैं जो सुझाव देते हैं कि कोविड की बूंदें सर्दियों में रात के तापमान में जीवित नहीं रह सकती हैं, लेकिन वे निर्णायक रूप से स्थापित नहीं हुई हैं।

इस तरह के निर्देश नेताओं को सूर्यास्त से पहले बड़ी चुनावी रैलियां करने का लाइसेंस देते हैं। मास्किंग, पब्लिक डिस्टेंसिंग और हाथों को बार-बार सैनिटाइज करने के सभी कोविड प्रोटोकॉल को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया जाता है, मंच पर नेताओं के साथ भी, मास्क लगाने के उदाहरण का नेतृत्व करने में विफल। यह बिहार में पहली लहर और बंगाल और अन्य जगहों पर दूसरी लहर के दौरान हुआ। टेम्पलेट अब दोहराया जा रहा है, जब तीसरी लहर अभी शुरू हुई है।

निष्पक्ष अंपायर की भूमिका निभाने की चुनाव आयोग की क्षमता का शीघ्र ही परीक्षण किया जाएगा जब वह फरवरी के आसपास चुनाव होने वाले पांच राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू करेगा। दूसरी लहर के दौरान भी चुनाव हो जाने तक कोविड के मामले ऑन रिकॉर्ड नहीं रखे गए थे । देखें क्या इस बार भी चुनाव आयोग इस बार इधर-उधर खिसकने का जोखिम उठाएगा?

जहां तक ​​रात के कर्फ्यू का सवाल है, आइए हम खुद को मूर्ख न बनाएं।

‘उत्तराखंड जनहित मंच ‘ के प्रधान पद के लिये चन्दरकान्त शर्मा जी को चुना गया

उत्तराखंड जनहित मंच की कार्यकारिणी चुनी

संवाददाता, डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम, कालका :

उत्तराखंड जनहित मंच की कार्यकारिणी चुनी गई के नव नियुक्त महासचिव सतेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि चन्दरकान्त शर्मा की अध्यक्षता में एक बैठक की गई जिस में समय की मांग को देखते हूऐ एक संगठन की स्थापना करनी चाहिये कि उत्तराखंड से जो भी प्रवासी रोजगार के लिये यहाँ आ कर बसे है, उन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन परेशानियों को कैसे हल करे। इसके लिये एक संगठन की आवश्कता है। इसलिए एक संगठन बनाया गया। जिसका नाम उत्तराखंड जनहित मंच रखा गया।

महासचिव सतेन्द्र सिंह रावत ने बताया की आज बैठक में “उत्तराखंड जनहित मंच ” के प्रधान पद के लिये चन्दरकान्त शर्मा, उप- प्रधान पद के लिये रविंदर पुरोहित, महासचिव पद के लिए सतेन्द्र सिंह रावत, उप -सचिव पद के लिये हितेश शर्मा, कोषाध्यक्ष पद के लिये सोहन लाल रणकोटी, उप कोषाध्यक्ष पद के लिये अजय सिंह बिष्ट, प्रचार सचिव पद के लिये महेंद्र सिंह, उप प्रचार सचिव पद के लिये जगदीश पुरोहित, मीडिया प्रभारी पड़ के लिऐ दीपक थपलियाल जी को चुना गया।

” उत्तराखंड जनहित मंच ” के नव नियुक्त प्रधान चन्दरकान्त शर्मा का कहना है कि ” उत्तराखंड जनहित मंच ” का कार्य ” उत्तराखंड के प्रवासियों के जनहित में कार्य करना है।

CDS की घटक दुर्घटना पर धर्म विशेष के लोगों ने हंसी मचाई

CDS बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर के क्रैश होने की खबर बताई गई थी। अब किसी की दुर्घटना पर इस तरह के रिएक्शन देने वाले लोगों की मानशिकता पर हैरानी होती है। हालांकि गौर करने वाली बात ये भी है कि खबर पर हंसने वाले लोग एक ख़ास धर्म से जुड़े हुए हैं। 

‘पुरनूर’ कोरल, चंडीगढ़/नयी दिल्ली :

तमिलनाडु के कुन्नूर में आर्मी का एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। बताया जा रहा है कि इस हेलीकॉप्टर में सीडीएस बिपिन रावत भी सवार थे।बताया जा रहा है कि मौसम की खराबी के वजह से ये हादसा हुआ है। खबरों की मानें तो  हेलिकॉप्टर में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत और अपनी पत्नी के साथ सवार थे। बताया जा रहा है कि कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। हालांकि अब इस हादसे को लेकर जहां हर कोई स्तब्ध है। वहीं कुछ लोग सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे रिएक्शन दे रहे हैं जैसे कोई दुश्मन इस दुर्घटना में घायल हुआ हो.. आखिर ये लोग कौन हैं? और ऐसा रिएक्शन क्यों दे रहे हैं ये बड़ा सवाल है।

जनरल बिपिन रावत का हैलीकॉप्टर क्रैश होने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर जश्न मनाना शुरू कर दिया है। इस दुर्घटना में उनकी पत्नी की मौत की पुष्टि हुई थी। इस दुखद दुर्घटना वाली खबर पर ‘हाहा’ का रिएक्शन दिया जा रहा है, जो परेशान करने वाला है। NDTV की खबर पर तो एक-दो नहीं, बल्कि खबर लिखे जाने तक 116 ऐसे लोग थे जिन्होंने ‘हाहा’ का रिएक्शन देकर जश्न मनाया। नीचे दी गई तस्वीर में आप उनके बारे में देख सकते हैं:

फेसबुक पर ANI की खबर पर भी कई लोगों ने ऐसा ही रिएक्शन देकर जश्न मनाया। ANI ने हैलीकॉप्टर क्रैश होने के बाद धू-धू कर जलते उसके पार्ट-पुर्जों की तस्वीरें शेयर की थी और बताया था कि कैसे लोग आग बुझाने में लगे हुए हैं। खबर लिखे जाने तक 24 लोगों ने यहाँ भी ‘हाहा’ का रिएक्शन दिया था।

सबसे पहले देखिए वायु सेना का बयान।  वायु सेना ने कहा है, ”सीडीएस जनरल बिपिन रावत को लेकर जा रहा IAF Mi-17V5 हेलिकॉप्टर, तमिलनाडु के कुन्नूर के पास आज दुर्घटना का शिकार हो गया।  दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं। ”

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी इस खबर के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने आशा जताई कि हैलीकॉप्टर में सवार जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी सहित बाकी सभी लोग सुरक्षित होंगे। हालाँकि, इस पोस्ट पर भी ‘हाहा’ का रिएक्शन देने वाले खबर लिखे जाने तक एक दर्जन की संख्या में पहुँच चुके थे।

तमिलनाडु के कुन्नूर में भारतीय वायुसेना का हैलीकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें CDS (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) जनरल बिपिन रावत समेत 14 लोग सवार थे। भारतीय वायुसेना और नीलगिरि के प्रशासन ने पुष्टि की है कि अब तक 5 शव बरामद किए जा चुके हैं। ये हैलीकॉप्टर कोयम्बटूर से सुलुर की ओर उड़ान भर रहा था, जहाँ जनरल बिपिन रावत को लेकर कॉलेज में लेक्चर सीरीज के लिए जाना था। सुलुर से उन्हें राजधानी दिल्ली के लिए उड़ान भरना था।

स्थानीय लोगों ने भी धू-धू कर जलते हुए चॉपर से आग बुझाने में मदद की। इसकी कई तस्वीरें भी सामने आई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल लगातार इस घटना पर नजर बनाए हुए हैं और घायलों को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली लाए जाने पर मंथन चल रहा है। बताया जा रहा है कि अचानक मौसम खराब होने के कारण ये दुर्घटना हुई।हालाँकि, शक्तिशाली इंजन वाला ये हैलीकॉप्टर सियाचिन सहित कठिन परिस्थितियों में भी उड़ान भरता है। एयर एम्बुलेंस भेजा गया है।

तमिलनाडु में Mi सीरीज का एक भारतीय सेना का हैलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। CDS (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) बिपिन रावत भी उसमें सवार थे। उनके साथ उनके कुछ स्टाफ और परिवार के लोग भी इसमें सवार थे। ये दुर्घटना नीलगिरि जिले के कुन्नूर में बुधवार (8 दिसंबर, 2021) को हुई है। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हैलीकॉप्टर से धुआँ निकलते हुए देखा जा सकता है और उसके पुर्जे अलग-अलग हो गए हैं। पानी डाल कर आग को बुझाया गया।

कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उस हैलीकॉप्टर में सवार थे। कोयम्बटूर और सुलुर के बीच हुए इस हादसे के बाद भारतीय सेना रेसकर ऑपरेशन चला रही है। भारतीय सेना ने इस घटना के कारणों की जाँच के लिए भी आदेश दे दिए हैं। जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित इसमें कुल 14 लोग सवार थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि 80% जली हुई दो बॉडीज को नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया है। उन्होंने बताया कि निचले इलाके में कुछ और बॉडीज पड़े हुए देखे जा सकते हैं।

आसपास के सभी बसों के अगल-बगल के इलाकों में भारतीय सेना सर्च एवं रेसुए ऑपरेशन चला रही है। तीन लोगों को बचा भी लिया गया है। ये सभी गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें इलाज के लिए वेलिंग्टन कैंटोनमेंट के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चौथे व्यक्ति के लिए तलाश जारी है। ये हैलीकॉप्टर Mi-17V5 मॉडल का था। इस हैलीकॉप्टर में एक ब्रिगेडियर रैंक का अधिकारी, एक अन्य अधिकारी और दो पायलट भी मौजूद थे। घटनास्थल पर स्थानीय लोग, भारतीय सेना के जवान और कई पुलिसकर्मी भी मौजूद हैं।

CDS जनरल बिपिन रावत 1958 – 2021

हेलीकॉप्‍टर में चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ, जनरल बिपिन रावत भी सवार थे। भारतीय वायुसेना का एक हेलीकॉप्‍टर तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया है। ट्वीट में कहा गया है, ‘वायुसेना के Mi-17V5 हेलीकॉप्‍टर,जिसमें सीडीएस जनरल बिपिन रावत सवार थे आज कूनूर (तमिलनाडु ) के निकट दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया।

‘पुरनूर’ कोरल, चंडीगढ़/नयी दिल्ली :

भारत के चीफ ऑफ़ आर्मी डिफेन्स स्टाफ (CDS) विपिन रावत का आज 8 दिसंबर,2021 को हेलीकाप्टर दुर्घटना में निधन हो गया। वो 64 वर्ष के थे। जनरल रावत सहित 14 लोगों को कोयम्बटूर से सुलुर ले जा रहा भारतीय वायुसेना का हेलीकाप्टर कुन्नूर में क्रैश हो गया। सेना ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री समेत तमाम हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। उनके निधन से देश भर में दुःख की लहर दौड़ गई है।

तमिलनाडु के कुन्नूर में आज हुए हेलिकॉप्टर हादसे में उनकी, पत्नी और 11 अन्य अफसरों के साथ मौत हो गई। भारतीय वायुसेना ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य लोगों की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत की पुष्टि की है।

तमिलनाडु में दुर्घटनाग्रस्त हुए सैन्य हेलिकॉप्टर में 14 लोग सवार थे। इनमें CDS जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत, ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, एनके गुरसेवक सिंह, एनके जितेंद्र कुमार, एल/नायक विवेक कुमार, एल/नायक बी साई तेजा, हवलदार सतपाल शामिल थे। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दुर्घटना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को ब्रीफ किया है। वहीं, दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए भारतीय वायु सेना ने जाँच के आदेश दिए हैं।

जनरल बिपिन रावत के निधन पर पीएम मोदी ने दुख जताते हुए ट्वीट किया, ‘जनरल बिपिन रावत एक उत्कृष्ट सैनिक थे. एक सच्चे देशभक्त, उन्होंने हमारे सशस्त्र बलों और सुरक्षा तंत्र के आधुनिकीकरण में बहुत योगदान दिया। सामरिक मामलों पर उनकी अंतर्दृष्टि और दृष्टिकोण असाधारण था. उनके निधन से मुझे गहरा दुख पहुंचा है, शांति.’

हादसे के बारे में रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरी जानकारी दी है वहीं इस हादसे के बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कल (गुरुवार) संसद में बयान देंगे। वायुसेना ने कहा कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। वायुसेना का एमआई-17वीएच हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी को तमिलनाडु में सैन्य विमान दुर्घटनास्थल पर भेजा. रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक चल रही है।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत वायुसेना के एमआई-17वीएच हेलीकॉप्टर से बुधवार दोपहर करीब तीन बजे निर्धारित लेक्चर देने के लिए कुन्नूर जिले के वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज जा रहे थे। हेलिकॉप्टर ने सुलूर एयरबेस से उड़ान भरी थी और वेलिंग्टन जा रहा था। इस दौरान हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. सेना ने दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दे दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्घटनास्थल से अब तक सभी शव बरामद किए गए हैं। वहीं 14 में से 13 के मौत का भी दावा किया जा रहा है। साथ ही 1 घायल को हॉस्पिटल ले जाया गया है। हेलिकॉप्टर में सवार अन्य लोग ब्रिगेडियर एल.एस. लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, नायक गुरसेवक सिंह, नायक जितेंद्र कुमार, नायक विवेक कुमार, नायक बी. साई तेजा, हवलदार सतपाल और पायलट शामिल थे।

वहीं तमिलनाडु के फॉरेस्ट मिनिस्टर के अलावा वायुसेना प्रमुख सहित कई अधिकारी और नेता घटनास्थल पर मौजूद हैं।

बता दें कि जनरल रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी में हुआ था। जनरल रावत के परिवार की पृष्ठभूमि भी सेना से जुड़ी है। उनके पिता लक्षमण सिंह रावत भी सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे। वहीं उनकी माता नामी राजनेता और उत्तरकाशी से पूर्व विधायक किशन सिंह परमार की बेटी थीं। जनरल रावत की आरम्भिक शिक्षा कैरेबियन हॉल देहरादून से हुई थी। उनकी उच्च शिक्षा शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल से पूरी हुई।