मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ने घर मे घुसकर महिला से की मारपीट

राहुल भारद्वाज सहारनपुर:

सहारनपुर थाना जनकपुरी का पूरा मामला एक मानसिक रूप से बीमार युवक मोहित को लेकर था जिसने एक महिला के साथ घर में घुसकर मार पिटाई की थी महिला की शिकायत के बाद थाना जनकपुरी प्रभारी ने पुलिस टीम को भेज मानसिक रूप से रोगी युवक मोहित को थाने लेकर आ गई थी लेकिन मानसिक रूप से बीमार युवक की हालत को बिगड़ता देख पुलिस ने उसे सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया था,इसी को लेकर महिला ने थाने पहुंचकर हंगामा किया और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को भी बुला लिया, जबकि युवक की मां से जब मीडिया ने बात की तो उसका भी यही कहना था कि मेरा बेटा मोहित मानसिक रूप से बीमार है और उसका इलाज चल रहा है जबकि पीड़ित महिला का यह कहना था अगर यह मानसिक रूप से बीमार है तो इसे अस्पताल भेजना चाहिए जिससे यह दूसरी घटना ना कर सके जिसके बाद पुलिस ने दोबारा से उस मानसिक रूप से बीमार युवक को हिरासत में ले लिया है,और उसके बाद महिला और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं सीओ 2 के समझाने पर अपना धरना समाप्त किया।

बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग अनुचित नहीं लेकिन फैसला संविधान अनुसार: अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि राज्यपाल  की रिपोर्ट और संविधान को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन  लागू करने का फैसला किया जाएगा। अमित शाह ने एक ‘निजी चैनल’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि बंगाल में कानून व्यवस्था बिल्कुल चरमराई हुई है और सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि यहां पर विपक्षी नेताओं को मारा जा रहा है और लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। एक सवाल के जवाब में तो उन्होंने यहां तक कह दिया कि बीजेपी नेताओं की राष्ट्रपति शासन की मांग गलत नहीं है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ की रिपोर्ट और संविधान को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने का फैसला किया जाएगा. एक पत्रकार समूह के संपादक के साथ एक खास इंटरव्यू में शाह ने कहा, “मैं स्वीकार करता हूं कि पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था की स्थिति खराब है. जहां तक भारत सरकार के राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले लेने का संबंध है, हमें इसके लिए भारतीय संविधान और राज्यपाल ‘साहब’ की रिपोर्ट के माध्यम से इस पर विचार करने की जरूरत है.

शाह की यह टिप्पणी बीजेपी नेताओं कैलाश विजयवर्गीय और बाबुल सुप्रियो की ओर से राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग किये जाने के बाद आई है. शाह ने कहा, “राजनीतिक नेताओं के तौर पर इस मुद्दे पर उनका रुख तार्किक रूप से सही है. बंगाल में कानून और व्यवस्था की स्थिति खराब है.”

“हर जिले में बम बनाने के कारखाने हैं, स्थिति बेहद खराब और हिंसा अभूतपूर्व”

यह पूछे जाने पर कि क्या वे यह कह रहे हैं कि वर्तमान स्थिति राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए अनुकूल नहीं है, शाह ने कहा, “नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा. मैंने कुल मिलाकर यह कहा कि उनकी मांग में कुछ भी गलत नहीं है.”

बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति, राजनीतिक हत्याओं और विपक्षी नेताओं पर झूठे मामलों में मुकदमे दर्ज करने पर चिंता जताते हुए, शाह ने कहा, “देखिए, पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है. भ्रष्टाचार अपने चरम पर है. हर जिले में बम बनाने के कारखाने हैं. स्थिति बेहद खराब है और हिंसा अभूतपूर्व है. ऐसी स्थिति किसी अन्य राज्य में नहीं है. पहले ऐसी हिंसा केरल में होती थी, लेकिन वहां भी स्थिति अब नियंत्रण में है. यह स्थिति चिंताजनक है.”

डेरेक ओब्रायन ने बयान पर की तल्ख टिप्पणी

वहीं शाह की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्यसभा में टीएमसी संसदीय दल के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, ”मौत की गिनती ‘बढ़ाने की अपनी हताशा में, बीजेपी अब’ राजनीतिक हत्या ‘के रूप में टीबी या कैंसर से होने वाली मौत को भी गिनने की कोशिश कर रही है. वह पहले अपनी बंगाल इकाई में अंदर ही अंदर चल रही लड़ाई पर बात क्यों नहीं करते? उन्हें सीपीएम के दौर के बंगाल के इतिहास का अध्ययन करना चाहिए ताकि यह समझ सकें कि राज्य कितना आगे आ गया है. तृणमूल शांति और सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध है. हो सकता है कि अमित शाह जी को अपना ध्यान यूपी और गुजरात पर लगाना चाहिए. आखिरकार राजनीतिक हत्याएं’ एक ऐसा विषय है जिसे वे अच्छी तरह से जानते हैं.”

तृतीय नवरात्र माँ चंद्रघंटा – आसुरी शक्तियों से रक्षा करतीं हैं

नवरात्रि की तृतीया को होती है देवी चंद्रघंटा की उपासना। मां चंद्रघंटा का रूप बहुत ही सौम्य है। मां को सुगंधप्रिय है। उनका वाहन सिंह है। उनके दस हाथ हैं। हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र हैं। वे आसुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं। माँ चंद्रघंटा की आराधना करने वालों का अहंकार नष्ट होता है और उनको सौभाग्य, शांति और वैभव की प्राप्ति होती है।

धर्म/संस्कृति, पंचकूला:

नवरात्र के दूसरे दिन भी माता मनसा देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों का आनाजाना शुरू हो गया। कई श्रद्धालु तो रात से ही लाइन में लग गए और सुबह दर्शन करके गए। अबकी बार मंदिर कमेटी ने यहां घंटी बजाने और ढोल बजाने की इलेक्ट्रानिक व्यवस्था की है। शनिवार और रविवार को 34566 से ज्यादा भक्तों की भीड़ मंदिर में माता के दर्शन करने के लिए पहुंची। माता के मंदिर में जाने वाले परिवारों में से एक का कोरोना टेस्ट किया गया। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यहां सुविधा प्रदान की है।

नवरात्र के दूसरे दिन पंचकूला के माता मनसा देवी मंदिर में सुबह से भक्तों का आना लगा रहा। यहां शाम तक करीब दस हजार से ज्यादा लोगों ने माता के दर्शन किए। यहां मौजूद एक डॉक्टर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा मंदिर में प्रवेश करने से पहले एक परिवार के एक सदस्य का रैपिड एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है। इसका उद्देश्य है कि पता लगाया जा सके कि किसी परिवार का कोई व्यक्ति संक्रमित तो नहीं।

44 लाख 85 हजार 39 रुपये का आया चढ़ावा

माता मनसा देवी मंदिर और काली माता मंदिर कालका में श्रद्धालुओं ने नवरात्र के दूसरे दिन माता के चरणों में 21 लाख 5 हजार 152 रुपए की नकद चढ़ावा चढ़ाया। इसके अलावा 50 हजार 700 रुपये की राशि प्रसाद वितरण से एकत्रित हुई है। उपायुक्त एवं मुख्य प्रशासक मुकेश कुमार आहूजा ने बताया कि श्रद्धालुओं ने माता मनसा देवी मंदिर में 17 सोने के नग और 85 चांदी के नग और काली माता मंदिर में तीन सोने के नग और 62 चांदी के नग चढ़ाए हैं। सोने का वजन 18.946 ग्राम और चांदी का वजन 898.06 ग्राम है। उन्होंने बताया कि माता मनसा देवी में कुल 17 लाख 59 हजार 657 रुपये और काली माता मंदिर कालका में 3 लाख 45 हजार 495 रुपये की राशि चढ़ाई है। प्रसाद वितरण योजना में माता मनसा देवी मंदिर में 100 ग्राम में 27 हजार 950 रुपये और 200 ग्राम प्रसाद वितरण में 17400 रुपये जबकि काली माता मंदिर में 100 ग्राम प्रसाद वितरण में 2750 रुपये और 200 ग्राम प्रसाद वितरण में 2600 रुपये की राशि के साथ कुल 100 ग्राम प्रसाद वितरण में 30700 रुपये और 200 ग्राम वितरण प्रसाद में 20 हजार रुपये की राशि एकत्र हुई है। इसके साथ ही इंग्लैंड से पांच पौंड भी माता के चरणों में चढ़ाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कालका में अब तक लगभग 8 हजार और माता मनसा देवी मंदिर में करीब 34566 श्रद्धालुओं का आगमन हुआ है। दूसरे दिन तक 44 लाख 85 हजार 39 रुपये की राशि चढ़ाई गई है।

न्यायिक परीक्षा के लिए अधिवक्ता परिषद द्वारा निशुल्क कोचिंग का शुभारंभ

उदयपुर, राजस्थान(ब्यूरो) – 18 अक्तूबर :

आज दिनांक 18.10.2020 को अधिवक्ता परिषद, महिला टोली द्वारा न्यायिक सेवा की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु महारानी अहिल्याबाई होल्कर विधिक अनुशिक्षण कक्षाओ का शुभारंभ किया गया।

उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च न्यायालय से सेवानिवृत मा.न्यायाधीपति रामचंद्र सिंह झाला रहे, जिन्होने अपने संघर्ष, अनुभव आदि साझा कर विभिन्न प्रकार के संस्मरणो द्वारा मार्गदर्शन किया। वर्तमान मे न्यायिक सेवाओ मे महिलाओ के प्रतिनिधित्व को बताते हुये मेवाड क्षेत्र से भी उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व हो,उसके लिए मार्गदर्शन प्रदान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्ष पुर्व महापौर एवं प्रांत समन्वयिका श्रीमती रजनी डांगी रही,जिन्होने महारानी अहिल्या बाई के न्याय को बताते हुये उनकी ही प्रतिमुर्ति न्याय व्यवस्था मे स्थापित हो, ऐसी शुभकामनाएँ देते हुये प्रोत्साहन प्रदान किया।

वन्दना उदावत ने महिला टोली के प्रयास को सराहा और अजय चौबीसा ने महिला टोली के पूरे कोविड कल की सक्रियता को बताते हुये कोचिंग की आवश्यकता को बताया। महेंद्र जी ओझा ने भी अपने विचार साझा किये।

इस अवसर पर कोविड काल के दौरान आयोजित सात दिवसीय व्याख्यान माला के प्रतिभागियो को प्रमाण पत्र भी मा.न्यायाधीपति महोदय द्वारा दिये गये।

स्वागत उद्बोधन एवं कार्यक्रम परिचय के माध्यम से महिला प्रमुख एडवोकेट भूमिका चौबीसा ने बताया कि उक्त कोचिंग महिलाओ एवं विधि की छात्राओ के लिए पूर्ण रूप से निशुल्क करायी जा रही है, जिसे पाठ्यक्रम के विषयो के अनुरुप न्यायाधीशो, अधिवक्ताओ, प्रोफेसर आदि के मार्गदर्शन मे संचालित किया जायेगा।

उक्त कोचिंग को संचालित करने सम्बन्धी विशेष सहयोग एडवोकेट बृजेन्द्र जी सेठ द्वारा प्रदान किया जा रहा है,जिनका न्यायाधीपति महोदय द्वारा उपरणा ओढा कर अभिनंदन किया गया। धन्यवाद ज्ञापन महिला सह-प्रमुख भावना नागदा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन ऐडवोकेट मीनाक्षी माथुर ने किया।

नवरात्रि महत्व

सनातन धर्म के बहुत से ऐसे पर्व हैं जिनमें रात्रि शब्द जुड़ा हुआ है। जैसे शिवरात्रि और नवरात्रि। साल में चार नवरात्रि होती है। चार में दो गुप्त नवरात्रि और दो सामान्य होती है। सामान्य में पहली नवरात्रि चैत्र माह में आती है जबकि दूसरी अश्विन माह में आती है। चैत्र माह की नवरात्रि को बड़ी नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को छोटी या शारदीय नवरात्रि कहते हैं। आषाढ और माघ मास में गुप्त नवरात्रि आती है। गुप्त नवरात्रि तांत्रिक साधनाओं के लिए होती है जबकि सामान्य नवरात्रि शक्ति की साधना के लिए।

धर्म/संस्कृति डेस्क, चंडीगढ़:

1. नवरात्रि में नवरात्र शब्द से ‘नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध’ होता है। ‘रात्रि’ शब्द सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है। यही कारण है कि दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाने की परंपरा है। यदि, रात्रि का कोई विशेष रहस्य न होता तो ऐसे उत्सवों को रात्रि न कह कर दिन ही कहा जाता। जैसे- नवदिन या शिवदिन, परंतु हम ऐसा नहीं कहते हैं। शैव और शक्ति से जुड़े धर्म में रात्रि का महत्व है तो वैष्णव धर्म में दिन का। इसीलिए इन रात्रियों में सिद्धि और साधना की जाती है। (इन रात्रियों में किए गए शुभ संकल्प सिद्ध होते हैं।)

2. यह नवरात्रियां साधना, ध्यान, व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, तंत्र, त्राटक, योग आदि के लिए महत्वपूर्ण होती है। कुछ साधक इन रात्रियों में पूरी रात पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर आंतरिक त्राटक या बीज मंत्रों के जाप द्वारा विशेष सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, क्योंकि इस दिनों प्रकृति नई होना प्रारंभ करती है। इसलिए इन रात्रियों में नव अर्थात नया शब्द जुड़ा हुआ है। वर्ष में चार बार प्रकृति अपना स्वरूप बदलकर खुद को नया करती हैं। बदलाव का यह समय महत्वपूर्ण होता है। वैज्ञानिक दृष्‍टिकोण से देखें तो पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक वर्ष की चार संधियां होती हैं जिनमें से मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतुओं की संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं। ऐसे में नवरात्रि के नियमों का पालन करके इससे बचा भी जा सकता है।

3. वैसे भी रात्रि में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं। जैसे यदि आप ध्यान दें तो रात्रि में हमारी आवाज बहुत दूर तक सुनाई दे सकती है परंतु दिन में नहीं, क्योंकि दिन में कोलाहल ज्यादा होता है। दिन के कोलाहल के अलावा एक तथ्य यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें आवाज की तरंगों और रेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं।

4. रेडियो इस बात का उदाहरण है कि रात्रि में उनकी फ्रीक्वेंसी क्लियर होती है। ऐसे में ये नवरात्रियां तो और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इस समय हम ईथर माध्यम से बहुत आसानी से जुड़कर सिद्धियां प्राप्त कर सकते हैं। हमारे ऋषि-मुनि आज से कितने ही हजारों-लाखों वर्ष पूर्व ही प्रकृति के इन वैज्ञानिक रहस्यों को जान चुके थे।

5. रेडियो तरंगों की तरह ही हमारे द्वारा उच्चारित मंत्र ईथर माध्यम में पहुंचकर शक्ति को संचित करते हैं या शक्ति को जगाते हैं। इसी रहस्य को समझते हुए संकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपनी शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजकर साधन अपनी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि करने में सफल रहते हैं। गीता में कहा गया है कि यह ब्रह्मांड उल्टे वृक्ष की भांति हैं। अर्थात इसकी जड़े उपर हैं। यदि कुछ मांगना हो तो ऊपर से मांगों। परंतु वहां तक हमारी आवाज को पहुंचेने के लिए दिन में यह संभव नहीं होता है यह रात्रि में ही संभव होता है। माता के अधिकतर मंदिरों के पहाड़ों पर होने का रहस्य भी यही है।

माँ भगवती के जयघोष के साथ शारदीय नवरात्रों का शुभारंभ

सनातन धर्म के बहुत से ऐसे पर्व हैं जिनमें रात्रि शब्द जुड़ा हुआ है। जैसे शिवरात्रि और नवरात्रि। साल में चार नवरात्रि होती है। चार में दो गुप्त नवरात्रि और दो सामान्य होती है। सामान्य में पहली नवरात्रि चैत्र माह में आती है जबकि दूसरी अश्विन माह में आती है। चैत्र माह की नवरात्रि को बड़ी नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को छोटी या शारदीय नवरात्रि कहते हैं। आषाढ और माघ मास में गुप्त नवरात्रि आती है। गुप्त नवरात्रि तांत्रिक साधनाओं के लिए होती है जबकि सामान्य नवरात्रि शक्ति की साधना के लिए। आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है जो मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, विश्वास है कि मां ब्रह्मचारिणी की सच्‍चे मन से पूजा करने से भक्‍त को सदाचार, एकाग्रता, धैर्य, संयम और सहनशीलता प्राप्‍त होती है।

धर्म/ संस्कृति डेस्क, पंचकूला:

जय कारा ये शेरांवाली का – बोल साँचे दरबार की जय, जहड़ा माता दा जयकारा न लाये ओह महामाई दा चोर। माता के भावभक्ति में डूबे जयकारों के साथ मनसा देवी मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ने वाले भक्तों का जोश नवरात्र के पहले दिन खूब दिखाई दिया। टोकन लेकर मंदिर में दर्शन करने आए भक्तों ने अनुशासन के साथ मंदिर में प्रवेश किया और माता को शीश नवाया।

माता मनसा देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लग गया था। पुलिस द्वारा यहां करीब 15 नाके लगाए गए थे। माता मनसा देवी मंदिर में प्रवेश के लिए टोकन सिस्टम होने के बावजूद यहां पर औसतन 12 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची हुई थी। यहां पर हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के भक्त भी दर्शन करने पहुंचे थे। एक भक्त विकास गुप्ता ने बताया कि वह सुबह छह बजे ही यहां पहुंचे थे। कोविड के कारण अबकी बार यहां भक्तों की ज्यादा भीड़ नहीं दिखाई दे रही है।

23,79,887 लाख का चढ़ावा चढ़ा

माता मनसा देवी में पहले दिन 18,54,572 जबकि काली माता मंदिर में 5,25,315 रुपये का चढ़ावा चढ़ा। इसके साथ ही माता मनसा देवी मंदिर में 10.572 ग्राम का सोना और 638.397 ग्राम चांदी चढ़ाई गई। काली माता मंदिर में श्रद्धालुओं ने 2.96 ग्राम सोना और 432.67 ग्राम चांदी का चढ़ावा माता को भेंट किया।

कोरोना मुक्ति यज्ञ का किया आयोजन

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने माता मनसा देवी मंदिर स्थित यज्ञशाला में कोरोना मुक्ति यज्ञ किया। उन्होंने इस महामारी के खात्मे की कामना की। गुप्ता ने कहा कि वे जब भी माता के दरबार में मन्नत मांगने आए, वह हमेशा पूरी हुई है। इस मौके पर उनके साथ उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा, विधानसभा अध्यक्ष की पत्नी बिमला देवी, भाजपा के जिला प्रधान अजय शर्मा, महामंत्री हरेंद्र मलिक, पूर्व प्रधान दीपक शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमएस यादव, सचिव शारदा प्रजापति, वीरेंद्र राणा, कमल अवस्थी, बीबी सिंघल, सौरभ बंसल, सुरेश वर्मा, सुरेंद्र मनचंदा, संदीप यादव, वंदना गुप्ता, रेडक्रास सचिव सविता अग्रवाल, श्यामलाल बंसल, विशाल सेठ, बलकेश वत्स, जय कौशिक के साथ कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं पीएम नरेंद्र मोदी का अंधसमर्थक हूं और मैं उन्हें अपने नेता के रूप में सम्मान देता हूं’ : चिराग पासवान

चिराग पासवान ने कहा कि वो पीएम नरेंद्र मोदी के अंधसमर्थक हैं और उन्हें अपने नेता के रूप में सम्मान देते हैं. चिराग पासवान ने कहा कि हम अपने घोषणापत्र, अभियान सामग्री में पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.

बिहार/ नयी दिल्ली(ब्यूरो):

बिहार चुनाव से ठीक पहले एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ रही लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) को लेकर बीजेपी नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं. अब एलजेपी को बिहार चुनाव में ‘वोटकटवा’ कहने के मुद्दे पर एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान का दर्द सामने आया है. चिराग पासवान ने कहा है कि बीजेपी नेताओं की ओर से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किए जाने से वो दुखी हैं.

चिराग पासवान ने कहा, ‘बीजेपी के ‘वोटकटवा’ कहने से मैं निराश हूं. मैं निराश हूं कि बीजेपी के नेता वोटकटवा जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. मुझे पता है कि बीजेपी नेताओं पर दबाव है. मैं उनकी समस्या को समझ सकता हूं, वे बिहार के सीएम के दबाव में हैं. निश्चित रूप से हम बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के बयान से खुश नहीं हैं. लेकिन मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंधसमर्थक हूं.’

चिराग पासवान ने कहा, ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं पीएम नरेंद्र मोदी का अंधसमर्थक हूं और मैं उन्हें अपने नेता के रूप में सम्मान देता हूं.’ चिराग पासवान ने कहा कि हम अपने घोषणापत्र, अभियान सामग्री में पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.

इसके साथ ही चिराग पासवान ने कहा, ’10 नवंबर को सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा, जब बिहार में बीजेपी-एलजेपी गठबंधन के तहत वास्तविक डबल इंजन की सरकार बनेगी. मुझे पता है कि सीएम अपनी बिहार रैली के दौरान पीएम मोदी को मेरे खिलाफ बोलने के लिए मजबूर करेंगे.’

‘प्रभावित नहीं करेगी एलजेपी’

दरअसल, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बयान जारी करते हुए कहा कि एलजेपी बिहार के चुनाव में कोई प्रभाव नहीं डाल पाएगी. एलजेपी बिहार के चुनावों में सिर्फ एक वोटकटवा पार्टी बनकर रह जाएगी. प्रकाश जावड़ेकर ने स्पष्ट किया है कि बिहार में केवल चार पार्टियां (बीजेपी, जेडीयू, हम और वीआईपी) ही साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं.

एशिया की सबसे लंबी जोज़िला टनल देश को सामरिक महत्व का एक और तोहफा

इस सुरंग की नींव मई 2018 में ही रख दी गई थी। लेकिन टेंडर पाने वाली IL&FS दीवालिया हो गई। उसके बाद हैदराबाद की मेघा इंजिनियरिंग को 4,509.5 करोड़ रुपये में इसका ठेका मिलासरकार का दावा है कि वह प्रोजेक्‍ट की रीमॉडलिंग के जरिए 3,835 करोड़ रुपये बचा लेगी। पूरे प्रोजेक्‍ट की अनुमानित लागत 6,808.63 करोड़ रुपये है। जोजिला पास के नीचे करीब 3,000 मीटर की ऊंचाई पर यह सुंरग बनेगी। इसकी लोकेशन NH-1 (श्रीनगर-लेह) में होगी। जोजिला टनल का निर्माण-कार्य ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर चीन से पिछले पांच महीनों से टकराव चल रहा है. गड़करी ने कहा है कि इस टनल के बनने से श्रीनगर, द्रास, करगिल और लेह क्षेत्रों में हर मौसम के लिए कनेक्टिविटी स्थापित हो जाएगी।

  • सुरंग की लंबाई 14.15 किलोमीटर होगी, इसके अलावा 18.63 किलोमीटर लंबी एप्रोच रोड का निर्माण किया जाएगा, जिसे बनाने में 6809 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
  •  जो दूरी को तय करने में तीन घंटे लगते थे वो महज 15 मिनट में पूरी हो जाएगी।
  • सुरंग के निर्माण में 6 वर्ष का समय लगेगा, जबकि एप्रोच रोड को बनाने में 2.5 साल लगेंगे।

लद्दाख/जम्मू/ कश्मीर(ब्यूरो):

देश के इतिहास में एक पन्ना जुड़ने जा रहा है और 30 साल के लम्बे इंतज़ार के बाद अब भारत सरकार कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ने वाली टनल पर आज से काम शुरू करने जा रही है। इसकी नीव के लिए पहला विस्फोट सड़क परिवहन व राजमार्ग केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के द्वारा किया जाएगा। देश के लिए सामरिक अहमियत वाली इस 14.15 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण करने में 6808.63 करोड़ का कुल खर्च आएगा।

2015 में पीएम मोदी ने रखी थी आधारशिला

इस टनल को बनाने के लिए करीब तीस साल से मांग हो रही थी. साल 2005 में टनल बनाने के लिए प्रोजेक्ट की प्लानिंग शुरू हुई थी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट साल 2013 में बीआरओ यानि बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (Border Road Organisation) ने तैयार की थी. इसके बाद साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने इसकी आधारशिला रखी थी. इसके 5 साल बाद अब निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है.

देश को अटल टनल की सौगात देने के बाद केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर में सामरिक महत्व की एक और टनल का निर्माण शुरू करने जा रही है। केंद्रीय सड़क – परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए इस सुरंग के निर्माण के लिए पहला ब्लास्ट किया। सेना और सिविल इंजीनियरों की एक चोटी की टीम जोजिला-दर्रे के पहाड़ को काट कर इस सुरंग का निर्माण करेगी। 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खुद ट्वीट कर भारत सरकार के इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी है। बता दें कि टनल का निर्माण-कार्य ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर चीन से पिछले पांच महीनों से टकराव चल रहा है। गड़करी ने कहा है कि इस टनल के बनने से श्रीनगर, द्रास, करगिल और लेह क्षेत्रों में हर मौसम के लिए कनेक्टिविटी स्थापित हो जाएगी। इसके अलावा दोनों स्थानों के बीच यात्रा में लगने वाले समय में 3 घंटे 15 की कमी आएगी।

इस टनल के बनने से लैंड स्लाइड की आशंकाओं के बगैर नेशनल हाईवे वन पर श्रीनगर से लेह के बीच यात्रा की जा सकेगी। इस प्रोजेक्ट के तहत 14.15 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, इसके अलावा 18.63 किलोमीटर लंबी एप्रोच रोड का निर्माण किया जाएगा। इस तरह से पूरे प्रोजेक्ट में 32.78 किलोमीटर लंबा सड़क बनाया जाएगा। 

इस पूरे प्रोजेक्ट के निर्माण में 6808.63 करोड़ रुपये की लागत आएगी. सुरंग के निर्माण में 6 वर्ष का समय लगेगा, जबकि एप्रोच रोड को बनाने में 2.5 साल लगेंगे।

जोजिला टनल का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पूरा लेह-लद्दाख, करगिल-द्रास और सियाचिन सालों भर देश के बाकी हिस्सों से सड़क मार्ग से जुड़ा रहेगा। अभी इनमें से कई क्षेत्रों में सड़क मार्ग से कनेक्टिविटी साल के 6 महीने तक ही हो पाती है। सर्दियों के मौसम में यहां जाने वाली मौजूदा सड़कें बर्फ से ढक जाती हैं, लेकिन ये सुरंग इस समस्या को दूर कर देगी। इस नए सुरंग की मदद से इन इलाकों में सेना की मूवमेंट बेहद आसान हो जाएगी। 

जोजिला टनल केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगी। 

बता दें कि जोजिला दर्रा दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में से एक है। इस दुर्गम रास्ते में वाहन चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण और खतरे से भरा है।  

महबूबा के रिहा होते ही अब्दुल्ला ने अलापा धारा 370 का राग, 6 और दलों की जुगलबंदी

मुफ्ती और अब्दुल्ला की मौजूदा जुगलबंदी कुछ वैसी ही है, जैसी दो दिन पहले हमने पूरे बॉलीवुड में देखी. खुद को बचाने के लिए पूरे बॉलीवुड के सारे ग्रुप 70 वर्ष में पहली बार एकजुट हो गए. उसी तरह महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला की ये दोस्ती भी शायद अपना अस्तित्व बचाने के लिए है. ये अस्तित्व खत्म होने का डर है जो दोनों का पास पास ला रहा है. डर बड़े-बड़े दुश्मनों को भी एक साथ ला देता है. ये बैठक नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला द्वारा बुलाई गई है, जिसमें उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सज्जाद लोन समेत वो नेता शामिल हो रहे हैं, जिन्होंने चार अगस्त 2019 को साझा बयान जारी किया था. फारूक अब्दुल्ला के घर हो रही इस खास बैठक में शामिल होने के लिए पीडीपी मुखिया और राज्य की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती पहुंच चुकी हैं. पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई अन्य नेता भी पहुंचे हैं.

जम्मू / कश्मीर(ब्यूरो):

महबूबा मुफ्ती की रिहाई के बाद फारूक और उमर अब्दुल्ला उनके घर मिलने पहुंचे थे, ये तस्वीर भी ट्विटर पर पोस्ट की गई है. इस तस्वीर में जम्मू कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्री जिस लॉन में बैठे हुए हैं, वो महबूबा मुफ्ती का सरकारी आवास है. बतौर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इसी आवास में रहती थीं. वो सारी सुख सुविधाएं जो उन्हें उस समय मिलती थीं, वो आज भी उन्हें मिल रही हैं. महबूबा मुफ्ती की सुरक्षा में आज भी एसएसजी यानी स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप तैनात है. सुरक्षा और निवास पर होने वाला खर्च आज भी सरकारी खजाने से होता है.

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्विटर पर अपना एक बयान पोस्ट किया है. महबूबा मुफ्ती ने अपने इस ऑडियो संदेश में धारा 370 को दोबारा हासिल करने का ऐलान किया है. 434 दिन बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन की हिरासत से महबूबा मुफ्ती को मंगलवार रात रिहा किया गया था. रिहाई के दो घंटे बाद ही महबूबा मुफ्ती ने ब्लैक स्क्रीन करके एक ऑडियो संदेश ट्वीट किया. 

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए बहाल करवाने व राज्य के एकीकरण के लिए कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दलों ने आपस में हाथ मिला लिए हैं. नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूख अब्दुल्ला के  निमंत्रण पर उनके घर पर कश्मीरी राजनीतिक दलों की बैठक हो रही है.

महबूबा, सज्जाद लोन, यूसुफ तारिगामी बैठक में शामिल
जानकारी के मुताबिक महबूबा मुफ्ती, सज्जाद गनी लोन और कम्युनिस्ट नेता यूसुफ तारिगामी फारूख अब्दुल्ला के घर पहुंच चुके हैं. करीब एक साल घर में नजरबंद रहने के बाद महबूबा मुफ्ती दो दिन पहले रिहा हुई हैं. फारूख अब्दुल्ला के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनकी आगवानी की.

कांग्रेस के नेताओं ने फिलहाल साधी चुप्पी
कांग्रेस के नेताओं ने फिलहाल इस कवायद से दूरी बना रखी है. वहीं जम्मू का भी कोई राजनेता इस बैठक में शामिल नहीं है. इस बैठक के विरोध में बीजेपी कार्यकर्ता कई जगह विरोध कर रहे हैं. उनका आरोप है कि इस बैठक के जरिए कश्मीरी नेता फिर से प्रदेश में उपद्रव कराने की साजिश कर रहे हैं.

फारूख अब्दुल्ला ने पिछले साल बुलाई थी कश्मीरी दलों की बैठक
बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने से एक दिन पहले यानी 4 अगस्त 2019 को अपने गुपकार रोड़ वाले आवास पर कश्मीरी नेताओं की बैठक बुलाई थी. इस बैठक में कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और उसके विशेष दर्जे को संरक्षित करने के लिए वे मिलकर प्रयास करेंगे. इस प्रस्ताव पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अलावा पीडीपी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और कुछ छोटे दल शामिलों ने भी हस्ताक्षर किए. नेशनल कांफ्रेंस ने इस बैठक के बाद हुई घोषणा को गुपकार घोषणा करार दिया था.

बदले माहौल में राजनीति की नई राह तलाश रहे हैं फारूख-महबूबा
करीब एक साल नजरबंदी में रहने के बाद अब फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और मेहबूबा मुफ्ती बाहर आ चुके हैं. ऐसे में जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली और राज्य के एकीकरण के मुद्दे पर फारूख और महबूबा मुफ्ती ने हाथ मिला लिए हैं. फारूख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 बहाल करने की मांग को लेकर चीन से समर्थन मांगने की भी बात कर चुके हैं. जिसके लिए उनकी पूरे देश में आलोचना हो रही है. आज की बैठक में वे अपनी धुर विरोधी महबूबा मुफ्ती के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर में अपनी नई राजनीति की राह तैयार कर सकते हैं.

इस पूरे मामले पर एक राष्ट्रिय चैनल के संपादक ने कुछ सवाल पूछे हैं जो ज़ाहिर सी बात है अनुत्तरित ही रहेंगे:

  1. पहला प्रश्न : जो आप सोच रहे होंगे कि अब्दुल्ला और मुफ्ती जैसे लोगों के रहते बाहरी दुश्मनों की क्या जरूरत है? जब अपने ही देश में ऐसे लोग मौजूद हैं तब हमें चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों की क्या जरूरत है?
  2. दूसरा प्रश्न: ये है कि ऐसे देश विरोधी बयान देने की आजादी कब तक मिलती रहेगी. जब किसी सांसद को आपकी बात पसंद नहीं तो वो आपके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे देता है. अदालत के फैसले पर कोई टिप्पणी कर देता है तो उस पर अवमानना का आरोप लग जाता है लेकिन ऐसे लोग जो भारत देश के खिलाफ बोलते हैं उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती. उनके खिलाफ सड़क से संसद तक कोई आवाज क्यों नहीं उठाता?
  3. तीसरा प्रश्न: ये है कि जब फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने संविधान की शपथ लेकर जम्मू कश्मीर पर शासन किया था. तब क्या इन्होंने राष्ट्रहित में सारे निर्णय लिए होंगे? ये बहुत बड़ा प्रश्न है क्योंकि जम्मू कश्मीर एक संवेदनशील राज्य है, जहां आए दिन आतंकवादी हमले होते हैं, एनकाउंटर होते हैं. क्या जम्मू कश्मीर में सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों को राज्य सरकार का पूरा सहयोग मिलता रहा होगा? महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला के हाल के बयानों के बाद क्या उनके फैसलों की जांच की जानी चाहिए?
  4. चौथा प्रश्न है जब फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे राजनेता संसद के फैसले को पलटने की बात खुलेआम करते हैं. तब इनकी संसद सदस्यता रद्द क्यों नहीं की जाती. इन नेताओं की पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द क्यों नहीं किया जाता. महबूबा मुफ्ती इस समय पीडीपी यानी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष हैं और फारूक अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के सबसे बड़े नेता. पार्टी की कमान भले ही उन्होंने अभी बेटे उमर अब्दुल्ला को दे रखी है लेकिन पार्टी के निर्णयों पर आखिरी मुहर उन्हीं की होती है?

इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमने कुछ कानूनी जानकारों से बात की है उनके मुताबिक,

  • कोई भारतीय नागरिक इस तरह के बयानों के खिलाफ देश में कहीं भी एफआईआर दर्ज करा सकता है.
  • हमारे चुने हुए प्रतिनिधि चाहें सांसद हो या विधायक वो भी ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ एफआईआर कर सकते हैं. ऐसे बयान आईपीसी की धारा 124 ए यानी देशद्रोह के दायरे में आते हैं.
  • -इस तरह के बयानों पर हमारी संसद क्या एक्शन ले सकती है?

Representation of people act 1951 यानी जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत संसद एक प्रस्ताव ला सकती है. जिसके तहत फारूक अब्दुल्ला जैसे सांसद की सदस्यता रद्द की जा सकती है. चुनाव आयोग से ऐसी पार्टियों की सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की जा सकती है.

सुखदेव व् आलमजीत को नंदा फोबिआ हो गया है इसलिए वो बौखला कर रोजाना प्रेस कॉन्फ्रेंस करता रहता है : अमित नंदा

प्रतिष्ठित बिल्डर ने मान के साथी सुखदेव के आरोपों से इनकार किया. नंदा ने कहा की सुखदेव व् आलमजीत को नंदा फोबिआ होगया है इसलिए वो बौखला कर रोजाना प्रेस कॉन्फ्रेंस करता रहता है 

चंडीगढ़  –

एक प्रमुख रियाल्टार समूह एम् एम् डी इंफ्रास्ट्रक्चर  ने आज सुखदेव सिंह के आरोपों का खंडन किया, एक पूर्व पुलिसकर्मी कथित सामाजिक कार्यकर्ता सुखदेव और  आलमजीत सिंह मान के सहयोगी है  कि उन्होंने चंडीगढ़ अंबाला  राष्ट्रीय हाइवे पर  सिंहपुरा में एक प्रमुख स्थान पर एक व्यावसायिक स्थल के संबंध में उनसे 20 लाख का ड्राफ्ट दिया है , जबकि वो २० लाख का ड्राफ्ट सुखदेव ने आलमजीत मान को दिया है । आलमजीत सिंह  मान ने जब २००९ में एम् एम् डी को रजिस्ट्री करवाई है तब उस ड्राफ्ट का जिक्र रजिस्ट्री में नहीं है क्यों की ये सुखदेव और आलम जीत  की मिलीभगत है , अब दस साल बाद उस जमीन को वापिस हथियाने की कोशिश है 

अमित नंदा ने आज आलमजीत मान , सुखदेव सिंह व् आम जनता को खुला चैलेन्ज देते हुए कहा की अमित नंदा के खिलाफ इस प्रॉपर्टी के केस को छोड़कर यदि कोई भी शिकायत या मामला दिखा दिया जाये तो वो अपने हिस्से की सारी जमीन दान दे देंगे , आलमजीत सिंह मान द्वारा उनकी जमीन हथियाने के लिए उनके खिलाफ जगह जगह जीरकपुर की जमीन के कभी चंडीगढ़ , कभी पंचकूला , डेराबस्सी में , खन्ना  में व् जीरकपुर में झूठे मामले दर्ज कराए गए हैं , ये मुकदमे या तो मानयोग हाई कोर्ट द्वारा क्वैश क्र दिए गए हैं या फिर स्टे कर दिए गए हैं या फिर पुलिस द्वारा कैंसिल कर दिए गए हैं , आलमजीत सिंह अपने साथियों द्वारा बार बार प्रेस कांफ्रेंस करके सभी को भर्मित करता है क्योंकि इस जमीन में इसके खिलाफ भी ४२० धरा के २ मुकदमें दर्ज हैं जिनमें वह अंतरिम जमानत पर बहार है और जो भी पुलिस कर्मी इसके खिलाफ करवाई करता है या इसके कहने पे नहीं चलता तो यह उनके खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके या झूठे मुकदमे डालकर उनको बदनाम करता है .

MMDI के प्रबंध निदेशक अमित नंदा ने मीडिया मामला साफ़ करते हुए   बताया कि सुखदेव सिंह द्वारा डेरा बस्सी और चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बार-बार आरोप लगाया गया कि उन्होंने 2008-09 में 20 लाख रुपये का चेक दिया था, जबकि 10,750 वर्ग गज साइट में उनका हिस्सा संयुक्त रूप से था। उनके द्वारा मान के साथ पूरी तरह से झूठ और आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध तथ्यों पर आधारित नहीं था।

नंदा ने कहा कि चूंकि मामला सब- जुडिसेड  था, इसलिए वे बहस में नहीं पड़े, लेकिन चूंकि सुखदेव सिंह मान के इशारे पर बार-बार आरोपों को विभिन्न प्लेटफार्मों पर लगा रहे थे, इसलिए उन्हें तथ्यों के साथ आप सब के सामने  आने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने कहा कि सुखदेव सिंह ने एमएमडीआई या इसके किसी भी निदेशक को सिंहपुरा भूमि में चेक या कैश के माध्यम से अपने हिस्से के रूप में 20 लाख रुपये का भुगतान करने के किसी भी दस्तावेजी सबूत पेश  करना चाहिए तभी  उनका इल्जाम साबित होगा ।

नंदा ने कहा कि 20 लाख रुपये का चेक, जिसके बारे में सुखदेव सिंह आरोप लगा रहे हैं, उनके सहयोगी मान के नाम पर था, जो खुद सिंहपूरा  के जमीन विवाद के सिलसिले में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में 2019 से अंतरिम जमानत पर हैं।

दिसंबर 2009 में की गई साइट की रजिस्ट्री में सुखदेव सिंह का कोई संदर्भ नहीं है और न ही 20 लाख रुपये के उनके चेक भुगतान का कोई विवरण है।उन्होंने कहा कि अगर सुखदेव सिंह दावा करते हैं (उन्हें 20 लाख रुपये का चेक दिया गया है) तथ्यों पर आधारित है, तो उन्होंने 2009 से 2019 तक 10 साल तक चुप्पी साधे रखी और निचली अदालत के निर्देश मिलने के बाद मार्च 2019  में ही  जब उन्होंने पहली बार डेरा बस्सी पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी । बाद में MMDI और इसके निदेशकों ने सत्र न्यायालय से स्टे प्राप्त किया जिसे सुखदेव सिंह ने आज तक चुनौती नहीं दी। नंदा ने कहा कि उन्होंने जुलाई 2019 में उच्च न्यायालय से उनके खिलाफ  एफआईआर की जांच पर रोक लगा दी है।

उन्होंने कहा कि सुखदेव सिंह का आरोप है कि उनकी प्राथमिकी पर कोई जांच नहीं की जा रही है और अदालत की अवमानना की जा रही है क्योंकि इस पर रोक है इसलिए  पुलिस इसमें  आगे  कैसे बढ़ सकती है।लेकिन इसके बावजूद मान के इशारे पर सुखदेव सिंह बार-बार कई जगहों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे ताकि उन्हें और उनके ग्रुप एमएमडीआई को बदनाम किया जा सके, जिसके लिए वे जल्द ही उचित कार्रवाई करने के लिए अपने वकीलों से सलाह लेंगे। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करना उप-न्यायाधीशों के मामले में अदालत की अवमानना करना है।

उन्होंने कहा कि सुखदेव सिंह और मान ने हाल ही में वर्तमान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ राजनीतिक मंच साझा किया है और उनके राजनीतिक संबंधों के कारण उन्हें परेशान करना और उन्हें बदनाम करना है। लेकिन वे न्यायिक प्रणाली में विश्वास करते हैं.

 नंदा ने कहा कि सुखदेव सिंह और आलमजीत सिंह मान सिंह की 10,750 वर्ग गज जमीन हड़पना चाहते हैं, जो 2009 से उनके नाम पर पहले से ही पंजीकृत है, जिसमें सुखदेव सिंह के 20 लाख रुपये के चेक का कोई उल्लेख नहीं है।

उन्होंने कहा कि सुखदेव सिंह को 2018 में मोहाली में पंजीकृत दो एफआईआर हैं  और 2019 में तलवंडी साबो में नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा धोखाधड़ी (420 आईपीसी) आदि दर्ज की गई है, जिन्होंने शिकायत की है कि पूर्व पुलिसकर्मी ने उन्हें भर्ती करने के लिए उनसे पैसे लिए थे। पुलिस जो वह ऐसा करने में विफल रही।

नंदा ने कहा कि सुखदेव सिंह 2008-09 में केवल एक कांस्टेबल थे, जब उन्होंने 20 लाख रुपये का भुगतान करने का दावा किया था। वह आलमजीत सिंह मान के इशारे पर उन पर आरोप लगा रहे हैं, जिनके साथ उनका सिंहपुरा की जमीन पर विवाद है।उन्होंने कहा कि मान ने संयुक्त रूप से 2008-09 में एनएच पर सिंहपुरा में 10,750 वर्ग गज की जगह 13.58 करोड़ रुपये में खरीदी थी, जिसमें उनका 47.5 प्रतिशत हिस्सा था और बाकी मान के पास था।

रजिस्ट्री, फर्द  और गिरदावरी सहित विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड में जमीन संयुक्त नामों से दर्ज है, नंदा ने कहा कि हालांकि, धोखाधड़ी के माध्यम से मान ने उन पर पांच मामले दर्ज किए, जिसमें आरोप लगाया कि वे उनके साथ कानून के मालिक हैं।

इन मामलों को दर्ज करने के समय मान ने इस तथ्य को छुपाया कि एमएमडीआई सिंहपुरा भूमि में संयुक्त मालिक था और वह एकमात्र मालिक नहीं था। जांच के बाद, जिसके दौरान उन्होंने यह साबित करने के लिए विभिन्न दस्तावेज प्रस्तुत किए कि वे संयुक्त भूमि के मालिक थे, मान द्वारा दायर किए गए मामलों को या तो खारिज कर दिया गया था या रोक दिया गया था। इतना ही नहीं, उनकी सहमति के बिना या उन्हें शामिल करते हुए, मान ने धोखे से सिंहपुरा की जमीन का एक हिस्सा एनएच के साथ किसी और को बेच दिया, नंदा ने कहा कि 2012 में उनके पक्ष में डिक्री आदेश जारी किया गया था ताकि वे साबित करने के लिए विभिन्न दस्तावेज जमा कर सकें। प्रधान भूमि में उनका 47.5 प्रतिशत हिस्सा था।