आम आदमी पार्टी का साथ , अब विधायक कुलजीत रंधावा के PA की चौकी इंचार्ज से पैसे मांगने की ऑडियो वायरल

विक्रम धवन का दावा है कि उसके पास इस आरोप से संबंधित अन्य दस्तावेज भी हैं जो वह समय आने पर दिखाएंगे। यह आडियो रिकार्डिग दैनिक जागरण के पास भी है। डेराबस्सी विधायक कुलजीत रंधावा से जब इस बारे बात की गई तो उन्होंने कहा कि विक्रम धवन का दिमागी संतुलन ठीक नहीं है। वह पहले भी सीएम विंडो पर ऐसी बेबुनियाद शिकायतें डालता रहता है। वह हमारी पार्टी का ही कार्यकर्ता है, लेकिन वह ऐसी हरकतें करता रहता है। जहां तक आरोप की बात है यह सरासर झूठ है। किसी ने भी बरमा सिंह से पैसे नहीं मांगे।

नरेश शर्मा भारद्वाज, डेमोक्रेटिक फ्रंट, जालंधर/चंडीगढ़ :

विवादों से आम आदमी पार्टी का चोली दामन का नाता है अब डेराबस्सी से आम आदमी पार्टी के विधायक कुलजीत रंधावा के pa नितिन लूथरा ने बलटाना पुलिस चौकी इंचार्ज से एक लाख रुपए की रिश्वत माँगने की रिकॉर्डिंग खूब वायरल हो गयी है। रुपए न देने पर चौकी इंचार्ज बर्मा सिंह का तबादला कर दिया गया है।इसकी शिकायत आम आदमी पार्टी के ही नेता विक्रम धवन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की एंटी करप्शन हेल्पलाइन नंबर 95012-00200 पर भेजी है। इस संबंध में विधायक कुलजीत रंधावा ने कहा, ‘मेरे किसी आदमी ने कोई पैसा नहीं मांगा। अगर मेरे वर्कर के पैसे मांगने की बात साबित होती है तो मैं उस पर पर्चा दर्ज करवाकर कार्रवाई कराऊंगा।

विक्रम धवन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा जारी किए गए एंटी क्रप्शन हेल्पलाइन नंबर (9501200200) पर विधायक रंधावा व उसके पीए नितिन लूथरा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। विक्रम धवन की यह शिकायत नंबर (2 एमजेएम 29) रजिस्टर्ड कर ली गई है। इससे पहले भी आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला पर भी रिश्वत लेने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। सिंगला इन दिनों जमानत पर हैं।

शिकायकर्ता विक्रम धवन बलटाना स्थित वार्ड नंबर-4 से आम आदमी पार्टी के इंचार्ज हैं। विक्रम ने कहा कि जब बरमा सिंह बलटाना चौकी इंचार्ज थे तो उनका एक मामला थाने में विचाराधीन था। इस बीच बरमा सिंह को अचानक चौकी इंचार्ज से हटाकर जीरकपुर थाने में लगा दिया गया। इस बाबत विक्रम धवन ने बरमा सिंह को अपने केस का स्टेटस जानने के लिए उनसे फोन पर संपर्क किया। विक्रम के अनुसार संपर्क करने पर चौकी इंचार्ज बरमा सिंह ने उसे कहा कि उससे विधायक कुलजीत रंधावा के पीए नितिन लूथरा ने एक लाख रुपये मांगे थे, जब उसने नहीं दिए तो उसका तबादला करवा दिया गया। इस बातचीत को विक्रम धवन ने रिकार्ड कर लिया। इसके बाद उन्होंने एंटी क्रप्शन नंबर पर शिकायत और यह रिकार्डिंग सुबूत के तौर पर भेज दी।

विक्रम धवन का दावा है कि उसके पास इस आरोप से संबंधित अन्य दस्तावेज भी हैं जो वह समय आने पर दिखाएंगे। यह आडियो रिकार्डिग दैनिक जागरण के पास भी है।

डेराबस्सी विधायक कुलजीत रंधावा से जब इस बारे बात की गई तो उन्होंने कहा कि विक्रम धवन का दिमागी संतुलन ठीक नहीं है। वह पहले भी सीएम विंडो पर ऐसी बेबुनियाद शिकायतें डालता रहता है। वह हमारी पार्टी का ही कार्यकर्ता है, लेकिन वह ऐसी हरकतें करता रहता है। जहां तक आरोप की बात है यह सरासर झूठ है। किसी ने भी बरमा सिंह से पैसे नहीं मांगे।

वहीं विधायक के पीए नितिन लूथरा ने कहा कि विक्रम धवन ने जो शिकायत दी है वह झूठी है। अगर उसने यह शिकायत दी है और उसके पास अगर कोई प्रूफ है तो वह उसे दिखाए। अगर उसने शिकायत की है तो मैं भी हायर अथारिटी में उसके खिलाफ शिकायत करूंगा। आरोप कोई भी किसी पर भी लगा सकता है। अगर उसकी शिकायत होगी तो अपना दिमागी संतुलन ठीक ना होने का बहाना बना देता है।

वहीं पूर्व बलटाना चौकी इंजार्ज बरमा सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मेरी तबियत ठीक नहीं है। मुझे बुखार है। मैं अभी बात नहीं कर पाऊंगा।

कांग्रेस के तीन नेताओं द्वारा दिए गए बयान ‘बदनाम करने वाली प्रकृति के और दुर्भावनापूर्ण इरादे से दिए गए फर्जी प्रतीत होते हैं : दिल्ली उच्च न्यायालय

उच्च न्यायालय ने कहा कि कांग्रेस के तीन नेताओं द्वारा दिए गए बयान “बदनाम करने वाली प्रकृति के और दुर्भावनापूर्ण इरादे से दिए गए फर्जी प्रतीत होते हैं, जिनका मकसद जानबूझ कर ईरानी को ‘व्यापक सार्वजनिक उपहास’ का पात्र बनाना और भाजपा नेता व उनकी बेटी के नैतिक चरित्र व सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना था।” उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी कांग्रेस के तीन नेताओं के खिलाफ महिला एवं बाल विकास मंत्री ईरानी द्वारा दायर दीवानी मानहानि के मुकदमे में अपने समक्ष पेश किये गए दस्तावेजों पर गौर करते हुए की। उच्च न्यायालय का 29 जुलाई का यह आदेश सोमवार को अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। अदालत ने अपने आदेश में दीवानी मानहानि मामले में कांग्रेस के तीन नेताओं को समन जारी किए थे।

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, गोवा/नई दिल्ली :

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की ओर से गोवा बार विवाद मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश की एक कॉपी आज अपलोड हुई है। इसके अनुसार कोर्ट ने दस्तावेजों के आधार पर ये माना है कि केंद्रीय मंत्री ईरानी या उनकी बेटी के नाम पर किसी बार का लाइसेंस नहीं है, न ही वे किसी रेस्‍त्रां या बार की मालिक हैं। कोर्ट ने ये भी माना कि उनकी बेटी ने कभी भी लाइसेंस के लिए आवेदन ही नहीं दिया है।

वहीं गोवा सरकार की ओर से दिए गए शो कॉज नोटिस में भी स्मृति ईरानी और उनकी बेटी के नाम पर जारी नहीं किया गया है। कोर्ट के अनुसार पहली नजर में ये लगता है कि याचिकाकर्ता स्मृति ईरानी ने जो कागजात पेश किए हैं वो उनका पक्ष मजबूत करते हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में ये कहा कि अगर कांग्रेस नेताओं द्वारा किया गया ट्वीट/पोस्ट को सोशल मीडिया पर रहने देते हैं तो उससे स्मृति ईरानी और उनके परिवार की छवि को गहरा नुकसान पहुंचेगा।

इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर आपत्तिजनक ट्वीट व पोस्ट को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री इरानी ने मानहानि मुकदमे दायर किया है। इरानी ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दीवानी मानहानि मुकदमा दायर कर दो करोड़ रुपये का हर्जाना की मांग की है।

याचिका पर कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं को निर्देश दिया कि 24 घंटे के भीतर इरानी और उनकी बेटी के खिलाफ लगाए गए ट्वीट, री-ट्वीट, पोस्ट, वीडियो और फोटो हटाने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर, फेसबुक और यू-ट्यूब को स्वयं सामग्री को हटाने को कहा है।

तुच्छ राजनीति के लिए 18 साल की लड़की को बदनाम कर रहे हैं- स्मृति इरानी

स्मृति ने कहा कि, “कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा है कि मेरी बेटी को शो कॉज नोटिस भेजा जाए। मैं पूछती हूं कि जो पेपर वह दिखा रहे थे उसमें क्या मेरी बेटी का नाम है? कांग्रेस नेता जय राम रमेश ने कहा है कि वह आरटीआई के आधार पर मेरी बेटी पर आरोप मढ़ रहे हैं। क्या आरटीआई के उस आवेदन में मेरी बेटी का नाम है? क्या उसके जवाब में मेरी बेटी का नाम है?”

  • सोनिया, राहुल गांधी की ओर से लूट पर मेरे रुख के चलते कांग्रेस में बौखलाहट: स्मृति ईरानी
  • ‘गांधी परिवार के खिलाफ मेरे रूख के कारण मेरी बेटी को निशाना बनाया’
  • स्मृति ईरानी ने कांग्रेस को किसी भी गलत काम का सबूत दिखाने की चुनौती दी

नई दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट, नयी दिल्ली :  

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के इस आरोप को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए शनिवार को खारिज कर दिया कि उनकी बेटी गोवा में एक अवैध बार चलाती है। ईरानी ने दावा किया, “नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी की ‘‘5,000 करोड़ रुपये की लूट’’ पर उसकी मां के मुखर रुख के कारण एक कॉलेज छात्रा (केंद्रीय मंत्री की बेटी) को निशाना बनाया गया है।”

ईरानी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “कांग्रेस ने उनकी बेटी के चरित्र पर प्रहार किया और उसे ‘‘क्षत विक्षत‘‘ किया।” उन्होंने विपक्षी दल कांग्रेस को किसी भी गलत काम का सबूत दिखाने की चुनौती दी।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बेटी पर अवैध बार चलाने के आरोपों पर सफाई दी है। शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने कहा कि यह झूठ है और इसके लिए वो कांग्रेस से कोर्ट में जवाब मांगेंगी।

उन्होंने कहा कि उनकी बेटी कॉलेज स्टूडेंट है, वो कोई बार नहीं चलाती। कांग्रेस मुझे और मेरी बेटी को बदनाम कर रही है।

अमेठी सांसद और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने उनकी बेटी को अपमानित किया है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पेपर दिखाकर कहा कि मेरी बेटी बार चलाती है। यह सब कांग्रेस नेतृत्व के आदेश पर हो रहा है।

स्मृति ने यह भी कहा कि कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा है कि मेरी बेटी को शो कॉज नोटिस भेजा जाए। मैं पूछती हूं कि जो पेपर वह दिखा रहे थे उसमें क्या मेरी बेटी का नाम है? कांग्रेस नेता जय राम रमेश ने कहा है कि वह आरटीआई के आधार पर मेरी बेटी पर आरोप मढ़ रहे हैं। क्या आरटीआई के उस आवेदन में मेरी बेटी का नाम है? क्या उसके जवाब में मेरी बेटी का नाम है?

ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने हंसते हुए कहा, ‘मैं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करती हूं। हां, मैं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करती हूं और करती रहूंगी। मैं कांग्रेस के नेताओं से कोर्ट में जवाब मांगूंगी।’

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि स्मृति ईरानी की बेटी जोइश ईरानी गोवा में सिली सोल्स कैफे एंड बार नाम से जो रेस्टोरेंट चलाती हैं, उसका लाइसेंस अवैध है। इसके मालिकों ने शराब के लाइसेंस को जिसके नाम से रिन्यू कराया, उसकी 13 महीने पहले मौत हो चुकी है। इस संबंध में वकील एरेज रोड्रिग्ज ने शिकायत की थी।

गोवा कांग्रेस बोली- हमारे विधायकों को तोड़ने की कोशिश हो रही, माइकल लोबो को नेता प्रतिपक्ष पद से हटाया

गोवा में कांग्रेस विधायकों के भाजपा में शामिल होने के रुख पर चर्चा के बीच नेता प्रतिपक्ष माइकल लोबो पर बड़ी कार्रवाई की गई है। उन्हें तत्काल प्रभाव से नेता प्रतिपक्ष के पद से हटा  दिया गया।  गोवा में AICC प्रभारी दिनेश गुंडू राव ने कहा, गोवा में पार्टी को कमजोर करने के लिए भाजपा के साथ मिलकर हमारे ही कुछ नेताओं ने साजिश की थी। वे विधायकों को तोड़ना चाहते थे। इसमें हमारे नेता प्रतिपक्ष माइकल लोबो और दिगंबर कामत शामिल थे। बता दें कि दिगंबर कामत पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता हैं।

सारिका तिवारी,डेमोक्रेटिक फ्रंट,चंडीगढ़/गोवा :

महाराष्ट्र संकट के बाद अब गोवा में सियासी हलचल तेज हो गई है। यहां से कांग्रेस विधायकों में टूट की खबरें आ रही हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के नौ विधायक भाजपा में शामिल हो सकते हैं। गोवा में कांग्रेस के 11 विधायक हैं। यदि 9 विधायक भाजपा में आते हैं तो कांग्रेस के पास केवल दो विधायक रह जाएंगे। इस बीच कांग्रेस ने सख्ती दिखाते हुए माइकल लोबो को तुरंत गोवा के नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) के पद से हटा दिया। 

एआईसीसी गोवा प्रभारी दिनेश गुंडू राव ने बताया कि हमारे कुछ नेताओं ने बीजेपी के साथ मिलकर यह साजिश रची थी कि गोवा में कांग्रेस पार्टी को कमजोर किया जाए और दलबदल का प्रयास किया जाए। इस साजिश का नेतृत्व हमारे ही दो नेताओं एलओपी माइकल लोबो और दिगंबर कामत ने किया था। 

माइकल लोबो (दाएं) इसी साल जनवरी में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे।

इधर, गोवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने आरोप लगाया है कि पार्टी के विधायकों को भाजपा में शामिल होने के लिए 40 करोड़ रुपए की पेशकश की गई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक चोडनकर ने बताया कि बिजनेसमैन और कोयला माफियाओं द्वारा कांग्रेस विधायकों को फोन किया जा रहा है।

भाजपा ने जिन विधायकों से संपर्क किया है, उन्होंने कांग्रेस के गोवा प्रभारी दिनेश गुंडू राव से इस बात का खुलासा किया। हालांकि BJP ने आरोपों को खारिज कर दिया है। BJP प्रदेश अध्यक्ष सदानंद तनावडे ने कहा कि कांग्रेस का आरोप निराधार है।

कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव ने विधायकों के नाराज होने की बात का खंडन किया है।

कांग्रेस ने इन खबरों का खंडन किया है। गोवा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गिरीश चोडनकर ने भास्कर को कन्फर्म किया कि हमारा एक भी विधायक भाजपा में शामिल नहीं होने जा रहा। ये सिर्फ अफवाहें हैं। शनिवार को जो विधायक होटल में इकट्‌ठा हुए थे, वे सोमवार से शुरू हो रहे सत्र की चर्चा के लिए जुटे थे।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस में नाराज विधायकों को मनाने की कोशिश जारी है। AICC गोवा प्रभारी दिनेश गुंडू राव विधायकों को मनाने में जुटे हुए हैं। हालांकि गुंडू राव ने कहा कि कल हमने गोवा में CLP की बैठक की थी। पार्टी के सभी विधायक एक साथ हैं। BJP हमारे विधायकों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इस बात का खंडन किया है कि कांग्रेस के कुछ विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।

इससे पहले 2019 में भी कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक BJP में शामिल हुए थे। इसमें नेता विपक्ष चंद्रकांत कावलेकर भी शामिल थे। गोवा के सीएम प्रमोद सावंत ने कांग्रेस के सभी बागी विधायकों को BJP में शामिल करवाया था। कांग्रेस से जो विधायक टूट सकते हैं, उनमें दिगंबर कामत, माइकल लोबो, संकल्प अमोनकर, केदार नायक और राजेश फलदेसाई का नाम सामने आ रहा है।

2019 में BJP जॉइन करते ही चंद्रकांत कावलेकर को डिप्टी सीएम बनाया गया था।

गोवा विधानसभा में 40 सीटें हैं। कांग्रेस के पास 11 और भाजपा के पास 20 विधायक हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी के 2, निर्दलीय 3 विधायक हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी गोवा जा रहे हैं।​​​

गोवा विधानसभा चुनाव 2022 में राज्य में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था। BJP को राज्य की कुल 40 में से 20 सीटें मिली थीं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 21 है। इस तरह गोवा में बीजेपी पूर्ण बहुमत से महज एक कदम दूर रह गई। हालांकि भाजपा नेताओं ने निर्दलीय के सहयोग से राज्य में सरकार बना ली थी।

प्रमोद सावंत लगातार दूसरी बार गोवा के मुख्यमंत्री बने।

गोवा विधानसभा में 40 सीटें हैं। कांग्रेस के पास 11 और भाजपा के पास 20 विधायक हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी के 2, निर्दलीय 3 विधायक हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी गोवा जा रहे हैं।​​​

गोवा विधानसभा चुनाव 2022 में राज्य में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था। BJP को राज्य की कुल 40 में से 20 सीटें मिली थीं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 21 है। इस तरह गोवा में बीजेपी पूर्ण बहुमत से महज एक कदम दूर रह गई। हालांकि भाजपा नेताओं ने निर्दलीय के सहयोग से राज्य में सरकार बना ली थी।

सर्वोच्च न्यायाल्य ने 30 को विधान सभा में अपनी ताकत दिखाने को कहा उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट पहले ही मैदान छोड़ दिया है

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, पंचकुला/गोवा, मुंबई :

महाराष्ट्र के सियासी संकट में भारतीय जनता पार्टी की भी एंट्री हो गई है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सामने फ्लोर टेस्ट की मांग की थी। जिस पर राज्यपाल की ओर से 30 जून को उद्धव ठाकरे को बहुमत साबित करने के लिए कहा है। ऐसी स्थिति में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बहुमत का फैसला सिर्फ सदन के पटल पर हो सकता है। उधर, गुवाहाटी में ठहरे बागी विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे गोवा के लिए रवाना हो गए हैं। शिंदे ने ऐलान किया है कि वो 30 जून को मुंबई पहुंचेंगे। उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट पहले ही मैदान छोड़ दिया है।

30 जुलाई को फदनवीस लेंगे शपथ – सूत्र

  • सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। महाराष्ट्र विधानसभा में कल यानी गुरुवार को फ्लोर टेस्ट होगा। सीएम उद्धव ठाकरे को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा।
  • गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले उद्धव ठाकरे ने इमोशनल कार्ड खेला है। उन्होंने कहा कि मैंने आपको अपना माना था। जिन लोगों को सबकुछ दिया उन्होंने धोखा दिया और जिन्हें कुछ नहीं मिला, वो हमारे साथ हैं।
  • सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी फ्लोर टेस्ट की इजाजत दे दी है। राज्यपाल जी का भी धन्यवाद। राज्यपाल ने एक खत पर ऐक्शन लिया और फ्लोर टेस्ट के लिए कहा। बागियों की नाराजगी किस बात की है। शिवसैनिकों को नोटिस भेजा जा रहा है। सूरत, गुवाहाटी जाकर नाराजगी जाहिर की जा रही है। 
  • उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के सीएम के पद से इस्तीफा दे दिया है। उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट पहले ही मैदान छोड़ दिया है।
  • कांग्रेस ने मंत्रिमंडल से निकलने की पेशकश की है। बागियों को अपने संदेश में सीएम उद्धव ने कहा कि हो सकता है कल फ्लोर टेस्ट में आप जीत जाएं लेकिन आपको याद रखना चाहिए कि आपके पास कितनी संख्या है मुझे इससे मतलब नहीं है। आप कल जाकर बताएं कि बालासाहेब ने आपको कितना बढ़ाया और आपने बालासाहेब के बेटे को नीचे लाने का पुण्य किया है। 

उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद से बी इस्तीफा देने की बात की।

कपिल सिब्बल हाथ छोड़ कर हुए साइकल सवार, अब रजाया सभा जाने की तैयारी

दिल्ली पुलिस ने लगाया अपहरण का आरोप, हरियाणा पुलिस ने छुड़ाया, पंजाब पुलिस पहुंची कोर्ट

इधर, BJP नेता तजिंदर बग्गा की गिरफ्तारी के बाद कवि कुमार विश्वास ने CM भगवंत मान को एक गहरी नसीहत दी है| कुमार विश्वास ने इशारों-इशारों में केजरीवाल को असुरक्षित तानाशाह और दुर्योधन बताया है| दरअसल, कुमार ने ट्वीट करते हुए लिखा- ”प्रिय छोटे भाई भगवंत मान,  खुद्दार पंजाब ने 300  साल में, दिल्ली के किसी असुरक्षित तानाशाह को अपनी ताक़त से कभी नहीं खेलने दिया। पंजाब ने तुम्हारी पगड़ी को ताज सौंपा है किसी बौने दुर्योधन को नहीं। पंजाब के लोगों के टैक्स के पैसों व उनकी पुलिस का अपमान मत करो। पगड़ी सम्भाल जट्टा….” इसके साथ ही बाद में कुमार ने एक चौपाई भी लिखी जिसमें उन्होंने कहा- “स्वारथु सुकृत न श्रम वृथा ,देखी बिहंग बिचार, बाज पराए पाणि पर तू पच्छीनु न मार..।”

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, नई दिल्ली/ चंडीगढ़: 

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्‍गा को आज यानी शुक्रवार को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। तजिंदर सिंह बग्गा की गिरफ्तारी पर दिल्‍ली से लेकर हरियाणा तक सियासी बवाल मचा. तजिंद। पाल सिंह बग्गा की गिरफ्तारी के बाद मोहाली जाने के क्रम में पंजाब पुलिस की टीम को हरियाणा में रोक लिया गया। कुरुक्षेत्र में हरियाणा पुलिस की टीम ने पंजाब पुलिस को रोका, और बग्गा की गिरफ्तारी के संबध में काफी समय तक पूछताछ की। इसके बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम भी कुरुक्षेत्र के थानेसर पुलिस स्टेशन पहुंची, जहां बग्गा को रखा गया था। अब खबर है कि दिल्ली पुलिस की टीम बग्गा को लेकर राजधानी के लिए रवाना हो गई है. बता दें कि दिल्ली में पंजाब पुलिस के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज हो गया है। इस तरह से बग्गा की गिरफ्तारी पर दिल्ली से लेकर कुरुक्षेत्र तक सियासी महाभारत जारी है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में पंजाब पुलिस द्वारा भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को गिरफ्तार किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया है। इस मामले में राजधानी के जनकपुरी थाने केस दर्ज किया गया है, जिसमें पंजाब पुलिस पर बग्गा के अपहरण का आरोप है।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 365, 342, 392, 295/34 के तहत मामला दर्ज किया है।

आईपीसी की धारा 452 : उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गृह-अतिचार के लिए दंड का निर्धारण भारतीय दंड संहिता में धारा 452 के तहत किया गया है | यहाँ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 452 में ऐसा अपराध करने पर – 7 साल कारावास + आर्थिक दंड से दण्डित होगा ।

आईपीसी की धारा 365 : भारतीय दंड संहिता की धारा 365 के अनुसार, जो भी कोई किसी व्यक्ति का गुप्त और अनुचित रूप से सीमित / क़ैद करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण करेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

आईपीसी की धारा 342 : भारतीय दंड संहिता की धारा 342 के अनुसार, जो भी कोई किसी व्यक्ति को ग़लत तरीके से प्रतिबंधित करेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या एक हजार रुपए तक का आर्थिक दण्ड या दोनों से दण्डित किया जाएगा। किसी व्यक्ति को ग़लत तरीके से प्रतिबंधित करना।

आईपीसी की धारा 392 : जो कोई लूट करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, और यदि लूट राजमार्ग पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच की जाए, तो कारावास चौदह वर्ष तक का हो सकेगा ।

आईपीसी की धारा 295 : किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना अपराध माना गया है , इसके लिए दंड का निर्धारण भारतीय दंड संहिता में धारा 295 के तहत किया गया है | यहाँ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295 में ऐसा अपराध करने पर – 2 वर्ष कारावास, या आर्थिक दण्ड, या दोनों दिए जा सकते है ।

दिल्ली बीजेपी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को शुक्रवार (6 मई, 2022) को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। बताया जाता है कि करीब एक दर्जन गाड़ियों में पंजाब पुलिस के करीब 50 पुलिसकर्मियों ने इस काम को अंजाम दिया। बग्गा की कथित अवैध गिरफ्तारी की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में भाजपा नेता और समर्थक जनकपुरी थाने पहुँच गए।

ऑनलाइन दैनिक समाचार पत्र द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में जनकपुरी थाने के बाहर बड़ी संख्या में बीजेपी नेता नजर आए। बता दें कि जब भी किसी एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में कोई ऑपरेशन करती है तो प्रोटोकॉल के तहत ये जरूरी होता है कि स्थानीय पुलिस को पहले इसके बारे में बताया जाय। हालाँकि, अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि स्थानीय पुलिस को सूचित किया था या नहीं।

बीजेपी समर्थकों का कहना था कि क्या इसीलिए केजरीवाल पुलिस की कमान अपने हाथ में चाहते थे। बीजेपी नेताओं ने कहा कि बग्गा एक नेता हैं, एक उम्मीदवार हैं और भाजपा में राजनीतिक पदों पर हैं, वह आतंकवादी नहीं हैं। पंजाब पुलिस ने उनके साथ इस तरह का व्यवहार करते हुए उन्हें केवल इसलिए गिरफ्तार किया, क्योंकि उन्होंने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान जारी किया था।

इस मामले में दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने बग्गा कि गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने बग्गा के पिता के साथ मारपीट की। गुप्ता ने आगे कहा, “तेजिंदर बग्गा को पंजाब पुलिस ने अवैध रूप गिरफ्तार किया है। उन्होंने उन्हें पगड़ी तक नहीं पहनने दिया। उनके पिता द्वारा तजिंदर बग्गा के साथ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई गई थी। केजरीवाल की हिटलर जैसी हरकत की कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। पंजाब पुलिस केजरीवाल के निर्देश पर काम कर रही है।”

तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया था, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

बग्गा के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिसवाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

हालाँकि, पंजाब पुलिस को हरियाणा पुलिस ने रोक लिया है। हरियाणा की पुलिस बग्गा समेत पंजाब पुलिस को पूछताछ के लिए सदर थाना पिपली ले गई है। वहीं दिल्ली पुलिस भी बग्गा को वापस लाने के लिए कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हो चुकी है। इस बीच हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने दो टूक कहा है कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को दिल्ली पुलिस को ही सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी का अपहरण हुआ है तो उसे रोकना हमारी जिम्मेदारी है। वहीं बताया जा रहा है कि पंजाब पुलिस भी कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।

वहीं अभी यह खबर आ रही है कि बग्गा को लेकर दिल्ली पुलिस वापस आ रही है।

हिमाचल में AAP पर AAP ने चलाया ‘झाड़ू’, प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी समेत 3 बड़े नेता BJP में शामिल हुए

आम आदमी पार्टी के नेताओं के भाजपा में शामिल हो जाने से प्रदेश में भाजपा का कुनबा और बढ़ गया है। हिमाचल विधान सभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। AAP के हिमाचल के प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी और संगठन मंत्री भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस मौके पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि, प्रदेश में भाजपा और मजबूत हुई है। आने वाले विधानसभा चुनावों में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) से असंतुष्ट इन नेताओं के भाजपा में शामिल होने से प्रदेश में पार्टी की ताकत बढ़ी है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

आम आदमी पार्टी को हिमाचल विधान सभा चुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका लगा है। AAP पार्टी के हिमाचल के प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री ने भाजपा में शामिल हो गए हैं। AAP के प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी, संगठन महामंत्री सतीश ठाकुर समेत कई नेता भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हो गए हैं। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने तीनों नेताओं को नड्डा के आवास पर शुक्रवार देर रात भाजपा में शामिल करवाया। अनुराग ने ट्वीट कर इसकी जानकारी शेयर की। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने तीनों नेताओं को नड्डा के आवास पर शुक्रवार देर रात भाजपा में शामिल करवाया। अनुराग ने ट्वीट कर इसकी जानकारी शेयर की।

AAP के महासचिव सतीश ठाकुर और ऊना जिला प्रमुख इकबाल सिंह के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से दिल्ली में भाजपा की सदस्यता लेने के बाद केसरी ने कहा कि केजरीवाल पार्टी नेताओं से मिलते तक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में रैली के दौरान केजरीवाल ने स्थानीय नेताओं की तरफ देखा भी नहीं।

बकौल केसरी, “हिमाचल प्रदेश में हम पार्टी के लिए 8 वर्षों से पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम कर रहे थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने मंडी में रैली और रोड शो के दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी की। राज्य के AAP कार्यकर्ताओं ने इस अनदेखी को अपना अपमान माना और पार्टी छोड़ दी।”

मंडी में रोड शो के दौरान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने को लेकर केसरी ने कहा कि जो दिन-रात पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, उन लोगों की तरफ केजरीवाल ने देखा तक नहीं। रोड शो के दौरान केवल अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मुख्य आकर्षण थे।

अनुराग ठाकुर ने अपने अगले ट्वीट में लिखा है, “आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की नीति व नेतृत्व में विरोधी भी आस्था जता रहे हैं, क्योंकि उपेक्षा की, उत्पीड़न की, प्रताड़ना की नहीं बल्कि सबका साथ, सबका विकास सबका विश्वास के मूलमंत्र के साथ जोड़ने में भरोसा रखते हैं।”

भाजपा के साथ आए इन नेताओं ने हिमाचल प्रदेश से आने वाले भाजपा के कद्दावर नेता अनुराग सिंह ठाकुर और जेपी नड्डा (JP Nadda) के साथ मिलकर काम करने और भाजपा को मजबूत करने का आश्वासन दिया है।

आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। हिमाचल प्रदेश में फिलहाल भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और इस बार आम आदमी पार्टी वहां पूरी ताकत से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंडी जिले में रोड शो किया और कहा कि पंजाब की तरह हिमाचल प्रदेश में भी इस बार बदलाव होगा। वहीं, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी अरविंद केजरीवाल से घबराई हुई है और इसलिए चुनाव से पहले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को हटाकर अनुराग ठाकुर को सीएम बना सकती है।

गोवा में कॉंग्रेस को बड़ा झटका, दिगंबर कामत भाजपा  में शामिल हो सकते हैं

गोवा में कांग्रेस 10 साल से सत्ता में नहीं है। जबकि कामत तीन साल तक नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। उन्हें गोवा में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है। वह पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह राणे की सरकार में ऊर्जा मंत्री थे। 2005 में वे कांग्रेस में शामिल हुए और 2007 में वे सीएम बने। कामत पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगे हैं। 2007 से 2012 के बीच, जब वह सीएम थे, तब जस्टिस एमबी शाह आयोग ने उन पर 35,000 करोड़ रुपये के खनन घोटाले का आरोप लगाया था। 2014 में भी उनसे इस संबंध में पूछताछ की गई थी।

पणजी/नयी दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट – 06 अप्रैल :

गोवा  में कांग्रेस  के बड़े नेता दिगंबर कामत भाजपा  ज्वॉइन कर सकते हैं। सूत्रों के हवाले से ये जानकारी मिली है। दिगंबर कामत ने ही साल 2000 की शुरुआत में गोवा में मनोहर पर्रिकर की सरकार को उखाड़ फेंका था और राज्य में कांग्रेस के मुख्यमंत्री बने थे। दिगंबर कामत फिलहाल राज्य में कांग्रेस के विधायक हैं।  दिगंबर कामत, कांग्रेस और भाजपा  दोनों ही पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। विज्ञान में स्नातक दिगंबर कामत गोवा के बेहद कुशल राजनीतिज्ञ माने जाते हैं। वैसे दिंगबर कामत पेशे से बिजनेसमैन और रियल एस्टेट डेवलपर रहे हैं.। उनके परिवार में पत्नी आशा कामत और दो बच्चे हैं।

सात बार के विधायक, कामत 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों में सीएम पद के लिए कांग्रेस में सबसे आगे थे। 68 वर्षीय ने अपने गढ़ मडगांव से चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की।

2017 में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद, कांग्रेस ने इस साल के विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन किया। पिछली बार सरकार बनाने के लिए ग्रैंड ओल्ड पार्टी को पछाड़ने वाली भाजपा ने 40 सदस्यीय सदन में 28 सीटों के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता सुनिश्चित की।

दिगंबर कामत ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी। 1994 में जब कांग्रेस ने दिगंबर कामत को चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया गया, तो वह पार्टी की सदस्यता त्याग बीजेपी से जुड़ गए। एक लंबे समय के बाद 2005 में दिगंबर कामत कांग्रेस में पुन: शामिल हुए और सर्वसम्मति से विधानसभा के नेता चुने गए। 2007 के विधासभा चुनाव में जब कांग्रेस को जीत हासिल हुई, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप राणे और राज्य के कांग्रेस मुखिया रवि नाइक के बीच हुए समझौते के बाद दिगंबर कामत को मुख्यमंत्री बनाया गया था। वहीं साल 2019 में जब भाजपा सरकार बनाने में कामयाब रही तो दिगंबर कामत गोवा विधानसभा में विपक्ष के नेता बने।

वर्तमान में, भाजपा के पास 20 विधायक हैं और 21 के बहुमत के लिए सिर्फ एक की जरूरत है। अब तक एमजीपी और तीन निर्दलीय ने समर्थन दिया है।

कांग्रेस की कलह फिर सामने आई, विश्वबंधु राय ने सोनिया गांधी को भेजा पत्र

महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों का कहना है कि गठबंधन सरकार की तो छोड़िये यदि हमारे मंत्री ही हमारी नहीं सुनेंगे तो आगामी चुनावों में पार्टी कैसे अच्छा प्रदर्शन कर पाएगी। इकॉनामिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इन विधायकों ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर तुरंत दखल देने की मांग की है, ताकि चीजें बिगड़ने से पहले संभल जाए। विधायकों ने कहा कि कांग्रेस के मंत्री हमारी चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और वे हमसे तालमेल नहीं बना रहे हैं। 

  • विधानसभा में कांग्रेस के 44 विधायक हैं, इनमें से 25 विधायकों ने नाराजगी जताई है
  • कांग्रेस के लिए यह खतरे का संकेत माना जा रहा है, नाराज विधायकों ने सोनिया गांधी को लेटर लिखा है
  • इन 14 के अलावा 30 विधायक हैं, उनमें से 25 विधायकों ने नाराजगी जताई है

मुंबई/नयी दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

महाराष्‍ट्र  कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है। राज्‍य के विधायकों की नाराजगी और उनके कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी  से मिलने का समय मांगे जाने के बाद अब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य विश्वबंधु राय ने भी सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। उन्‍होंने राज्‍य में कांग्रेस की स्थिति को लेकर संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्‍होंने कहा कि जैसा नुकसान पार्टी को पंजाब में हुआ, वैसा ही महाराष्‍ट्र में होने वाला है। महाराष्‍ट्र प्रभारी पार्टी के अंदरूनी असंतोष से अनजान रहते हैं। एनसीपी के साथ-साथ हमारे मंत्रियों से भी कई विधायक नाराज चल रहे हैं।

कॉन्ग्रेस के 25 विधायकों ने महाराष्ट्र सरकार में अपनी ही पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ शिकायत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मिलने का समय माँगा है। इन कॉन्ग्रेस विधायकों का कहना है कि पार्टी के मंत्री भी उनकी बात नहीं सुनते। उनकी चिंताओं का जवाब नहीं देते हैं। विधायकों ने सोनिया गाँधी को भेजे पत्र में उनसे हस्तक्षेप करने और चीजों को सही करने का आग्रह किया है।

कुछ विधायकों ने ET से कहा है कि महाविकास अघाड़ी सरकार के मंत्री, विशेष रूप से कॉन्ग्रेस के मंत्री, उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। उनमें से एक ने कहा, “अगर मंत्री विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में काम को लागू करने के अनुरोधों की अनदेखी करते हैं, तो पार्टी चुनावों में अच्छा प्रदर्शन कैसे करेगी?”

पार्टी में कोऑर्डिनेशन की कमी का संकेत देते हुए विधायकों ने कहा कि उन्हें पिछले सप्ताह ही पता चला कि कॉन्ग्रेस के प्रत्येक मंत्री को पार्टी विधायकों से जुड़े मसलों का तरीके से समाधान करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत हर मंत्री के जिम्मे तीन पार्टी विधायक आते हैं। एक कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा, “हमें इसके बारे में तब पता चला जब एचके पाटिल ने हाल ही में एक बैठक की थी। इसमें बताया गया कि कॉन्ग्रेस मंत्रियों को तीन-तीन विधायक आवंटित किए गए हैं। राज्य मे एमवीए की सरकार बनने के कुछ महीने बाद ही ऐसा किया गया था। लेकिन हमें इसके बारे में सरकार बनने के ढाई साल बाद पता चल रहा है। अब भी कोई नहीं जानता कि कौन सा मंत्री हमसे जुड़ा हुआ है।”

इसके अलावा कॉन्ग्रेस के विधायकों का यह भी कहना है कि इस तरह की परिस्थिति के कारण राज्य में पार्टी एनसीपी से भी पिछड़ रही है। विधायकों ने चिट्ठी में लिखा है कि एनसीपी के नेता और उद्धव सरकार में डिप्टी सीएम अजित पवार लगातार अपनी पार्टी के विधायकों से मिलते हैं, उनकी बात सुनते हैं और योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था भी कराते हैं। उन्होंने ये भी लिखा है कि एनसीपी लगातार कॉन्ग्रेस पर निशाना साधती है। अगर अभी कदम नहीं उठाया गया, तो कॉन्ग्रेस बाकी राज्यों की तरह महाराष्ट्र में हाशिए पर चली जाएगी। विधायकों ने कहा कि पंजाब में पार्टी की हार के बाद तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर पार्टी का महाराष्ट्र में ऐसा ही रवैया रहता है तो पंजाब जैसा परिणाम आ सकता है। बता दें कि हालिया विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में करारी हार मिली है।