गंगा दशहरा 2019

हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार गंगा दशहरा का पर्व 12 जून 2019 यानी बुधवार के दिन मनाया जाएगा। गंगा दशहरा के दिन ही ईक्षवाकू वंश के राजा भागीरथ के प्रयास से मां गंगा धरती पर प्रकट हुई थी। मां गंगा की इस दिन विधिवत पूजा का विधान है। ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि के दिन यह पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। गंगा दशहरा के दिन दान और स्नान को अधिक महत्व दिया जाता है। अगर आप भी गंगा दशहरा के दिन मां गंगा की पूजा- अर्चना करना चाहते हैं और आपको गंगा की पृथ्वी पर उत्पत्ति, गंगा जल के फायदे और गंगा दशहरा पर स्नान के महत्व के बारे में नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो चलिए जानते हैं गंगा जल के फायदे और गंगा दशहरा पर स्नान के महत्व के बारे में…

गंगा का भूलोक पर उतरना

  • राजा दशरथ के पूर्वजों में राजा सगर हुए थे। सगर के पिता का नाम असित था। वे अत्यंत पराक्रमी थे। हैहय, तालजंघ, शूर और शशबिन्दु नामक राजा उनके शत्रु थे। उनसे युद्ध करते-करते राज्य त्यागकर उन्हें अपनी दो पत्नियों के साथ हिमालय भाग जाना पड़ा। वहां कुछ काल बाद उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी दोनों पत्नियां गर्भवती थीं। उनमें से एक का नाम कालिंदी था। कालिंदी की संतान नष्ट करने के लिए उसकी सौत ने उसको विष दे दिया। कालिंदी अपनी संतान की रक्षा के निमित्त भृगुवंशी महर्षि च्यवन के पास गयी। महर्षि ने उसे आश्वासन दिया कि उसकी कोख से एक प्रतापी बालक विष के साथ (स+गर) जन्म लेगा। अत: उसके पुत्र का नाम सगर पड़ा।
  • सगर अयोध्या नगरी के राजा हुए। वे संतान प्राप्त करने के इच्छुक थे। उनकी सबसे बड़ी रानी विदर्भ नरेश की पुत्री केशिनी थी। दूसरी रानी का नाम सुमति था। दोनों रानियों के साथ राजा सगर ने हिमवान के प्रस्त्रवण गिरि पर तप किया। प्रसन्न होकर भृगु मुनि ने उन्हें वरदान दिया कि एक रानी को वंश चलाने वाले एक पुत्र की प्राप्ति होगी और दूसरी के साठ हज़ार वीर उत्साही पुत्र होंगे। बड़ी रानी के एक पुत्र और छोटी ने साठ हज़ार पुत्रों की कामना की। केशिनी का असमंजस नामक एक पुत्र हुआ और सुमति के गर्भ से एक तूंबा निकला जिसके फटने पर साठ हज़ार पुत्रों का जन्म हुआ। असमंजस बहुत दुष्ट प्रकृति का था। अयोध्या के बच्चों को सताकर प्रसन्न होता था। सगर ने उसे अपने देश से निकाल दिया। कालांतर में उसका पुत्र हुआ, जिसका नाम अंशुमान था। वह वीर, मधुरभाषी और पराक्रमी था।
  • राजा सगर ने विंध्य और हिमालय के मध्य यज्ञ किया। सगर के पौत्र अंशुमान यज्ञ के घोड़े की रक्षा कर रहे थे। जब अश्ववध का समय आया तो इन्द्र राक्षस का रूप धारण कर घोड़ा चुरा ले गये। सगर ने अपने साठ हज़ार पुत्रों को आज्ञा दी कि वे पृथ्वी खोद-खोदकर घोड़े को ढूंढ़ लायें। जब तक वे नहीं लौटेंगे, सगर और अंशुमान दीक्षा लिये यज्ञशाला में ही रहेंगे। सगर-पुत्रों ने पृथ्वी को बुरी तरह खोद डाला तथा जंतुओं का भी नाश किया। देवतागण ब्रह्मा के पास पहुंचे और बताया कि पृथ्वी और जीव-जंतु कैसे चिल्ला रहे हैं। ब्रह्मा ने कहा कि पृथ्वी विष्णु भगवान की स्त्री हैं वे ही कपिल मुनि का रूप धारण कर पृथ्वी की रक्षा करेंगे। सगर-पुत्र निराश होकर पिता के पास पहुंचे। पिता ने रुष्ट होकर उन्हें फिर से अश्व खोजने के लिए भेजा। हज़ार योजन खोदकर उन्होंने पृथ्वी धारण करने वाले विरूपाक्ष नामक दिग्गज को देखा। उसका सम्मान कर फिर वे आगे बढ़े। दक्षिण में महापद्म, उत्तर में श्वेतवर्ण भद्र दिग्गज तथा पश्चिम में सोमनस नामक दिग्गज को देखा। तदुपरांत उन्होंने कपिल मुनि को देखा तथा थोड़ी दूरी पर अश्व को चरते हुए पाया। उन्होंने कपिल मुनि का निरादर किया, फलस्वरूप मुनि के शाप से वे सब भस्म हो गये। बहुत दिनों तक पुत्रों को लौटता न देख राजा सगर ने अंशुमान को अश्व ढूंढ़ने के लिए भेजा। वे ढूंढ़ने-ढूंढ़ते अश्व के पास पहुंचे जहां सब चाचाओं की भस्म का स्तूप पड़ा था। जलदान के लिए आसपास कोई जलाशय भी नहीं मिला। तभी पक्षीराज गरुड़ उड़ते हुए वहां पहुंचे और कहा कि ‘ये सब कपिल मुनि के शाप से हुआ है, अत: साधारण जलदान से कुछ न होगा। गंगा का तर्पण करना होगा। इस समय तुम अश्व लेकर जाओ और पिता का यज्ञ पूर्ण करो।’ उन्होंने ऐसा ही किया।
  • सगर के बाद उनके पौत्र अंशुमान राजा हुए थे। अंशुमान अपने पुत्र दिलीप को राज्य-भार सौंप कर गंगा को पृथ्वी पर लाने की चिंता में ग्रस्त थे। उन्होंने घोर तपस्या करते हुए शरीर त्याग किया। राजा दिलीप गंगा को पृथ्वी पर लाने का कोई मार्ग नहीं सोच पाये और बीमार होकर स्वर्ग सिधार गये।
  • भगीरथ पुत्रहीन थे। उन्होंने राज्यभार अपने मन्त्रियों को सौंपा और स्वयं गोकर्ण तीर्थ में जाकर घोर तपस्या करने लगे। ब्रह्मा के प्रसन्न होने पर उन्होंने दो वर माँगे—एक तो यह कि गंगा जल चढ़ाकर भस्मीभूत पितरों को स्वर्ग प्राप्त करवा पायें और दूसरा यह कि उनको कुल की सुरक्षा करने वाला पुत्र प्राप्त हो। ब्रह्मा ने उन्हें दोनों वर दिये, साथ ही यह भी कहा कि गंगा का वेग इतना अधिक है कि पृथ्वी उसे संभाल नहीं सकती। शंकर भगवान की सहायता लेनी होगी। ब्रह्मा के देवताओं सहित चले जाने के उपरान्त भगीरथ ने पैर के अंगूठों पर खड़े होकर एक वर्ष तक तपस्या की। शंकर ने प्रसन्न होकर गंगा को अपने मस्तक पर धारण किया। गंगा को अपने वेग पर अभिमान था। उन्होंने सोचा था कि उनके वेग से शिव पाताल में पहुँच जायेंगे। शिव ने यह जानकर उन्हें अपनी जटाओं में ऐसे समा लिया कि उन्हें वर्षों तक शिव-जटाओं से निकलने का मार्ग नहीं मिला।
  • भगीरथ ने फिर से तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर उसे बिंदुसर की ओर छोड़ा। वे सात धाराओं के रूप में प्रवाहित हुईं। ह्लादिनी, पावनी और नलिनी पूर्व दिशा की ओर; सुचक्षु, सीता और महानदी सिंधु पश्चिम की ओर बढ़ी। सातवीं धारा राजा भगीरथ की अनुगामिनी हुई। राजा भगीरथ गंगा में स्नान करके पवित्र हुए और अपने दिव्य रथ पर चढ़कर चल दिये। गंगा उनके पीछे-पीछे चलीं। मार्ग में अभिमानिनी गंगा के जल से जह्नुमुनि की यज्ञशाला बह गयी। क्रुद्ध होकर मुनि ने सम्पूर्ण गंगा जल पी लिया। इस पर चिंतित समस्त देवताओं ने जह्नुमुनि का पूजन किया तथा गंगा को उनकी पुत्री कहकर क्षमा-याचना की। जह्नु ने कानों के मार्ग से गंगा को बाहर निकाला। तभी से गंगा जह्नुसुता जान्हवी भी कहलाने लगीं। भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर गंगा समुद्र तक पहुँच गयीं। भगीरथ उन्हें रसातल ले गये तथा पितरों की भस्म को गंगा से सिंचित कर उन्हें पाप-मुक्त कर दिया। ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर कहा—“हे भगीरथ, जब तक समुद्र रहेगा, तुम्हारे पितर देववत माने जायेंगे तथा गंगा तुम्हारी पुत्री कहलाकर भागीरथी नाम से विख्यात होगी। साथ ही वह तीन धाराओं में प्रवाहित होगी, इसलिए त्रिपथगा कहलायेगी।’’

गंगा जल के फायदे

1.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा जल के स्पर्श मात्र से ही किसी भी चीज का शुद्धिकरण हो जाता है।
2.गंगा जल कई प्रकार की औषोधियों में भी प्रयोग होता है।
3.शास्त्रों के अनुसार अगर किसी मरते हुए व्यक्ति के गंगा की बूंदे डालने से उसके सभी पाप धूल जाते हैं।
4. गंगा जल का विशेष गुण है। उसका कभी न खराब होना । गंगा जल सालों तक खराब नहीं होता
5.शास्त्रों के अनुसार पूजा में गंगा जल का विशेष प्रयोग किया जाता है।

गंगा दशहरा पर स्नान महत्व

गंगा दशहरा पर स्नान को विशेष महत्व दिया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन पवित्र गंगा जी में डुबकी लगाने से मनुष्य अपने जीवन के सभी पाप और कष्ट से मुक्त हो जाता है। इसके अलावा गंगा दशहरा अगर आपको कोई ऐसा रोग है जो ठीक न हो और वह गंगा दशहरा के दिन कोई रोगी गंगा नदी में स्नान कर लेता है तो उसे उस रोग से मुक्ति मिल जाती है।

गंगा दशहरा पर किया गया स्नान मनुष्य के जन्म – जन्मांतर के पाप को धो देता है। माना जाता है अगर आप गंगा दशहरा के दिन किसी तीर्थ पर जाते हैं तो आपको इस दिन भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होगी।शास्त्रों में एक और चीज वर्णित है कि अगर आप गंगा जी में स्नान नहीं कर पाते तो अपने नहाने के पानी में इस दिन नहाने के पानी में गंगा जल डालकर स्नान कर सकते हैं।

इस दिन किया गया स्नान मनुष्य के जन्मों के पाप को धो देता है। इस दिन अगर आप किसी तीर्थ पर भी जाते हैं तो आपको इसका लाभ अवश्य मिलेगा और अगर आप गंगा जी में स्नान नहीं कर पाते तो अपने नहाने के पानी में इस दिन नहाने के पानी में गंगा जल डालकर स्नान कर सकते हैं।

पाँच महीने पुरानी जीत छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भाजपा के हाथों गंवाई

12 दिसम्बर 2018 को आए छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनावों में कांग्रेस ने 90 सीटों में सबसे ज्यादा 68 सीटों पर जीत दर्ज की। 15 सालों तक सत्ता संभालने वाली भाजपा 15 पर ही सिमट गई लेकिन महज़ 6 महीनों ही में छत्तीसगढ़ के लोगों का कांग्रेस से मोह भंग हो गया लगता है तभी तो लोक सभा चुनावों में 11 में से 9 सीटें भाजपा के खाते में गईं वह भी तब जब प्रदेश में सरकार काँग्रेस की है।

  • कांग्रेस को एक सीट की बढ़त, लेकिन मुख्यमंत्री और गृहमंत्री नहीं बचा सके अपना ‘दुर्ग’
  • भाजपा के सुनील सोनी ने रायपुर और दुर्ग से विजय बघेल ने दर्ज की रिकॉर्ड मतों से जीत 
  • वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 11 में से कांग्रेस को एक, भाजपा को मिली थीं 10 सीटें

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के बाद पहली बार कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट पर जीत हासिल की है. छत्तीसगढ़ में इस लोकसभा चुनाव में 11 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने नौ सीटों पर तथा कांग्रेस ने दो सीटों पर जीत दर्ज की. राज्य में पहली बार कांग्रेस ने दो सीटें जीती है और सत्ताधारी दल के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पार्टी ने पहली बार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट पर विजय प्राप्त की है.

छत्तीसगढ़ के 11 लोकसभा सीटों में सरगुजा, रायगढ़, कांकेर और बस्तर अनुसूचित जनजाति के लिए तथा जांजगीर चांपा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. राज्य के निर्माण के बाद वर्ष 2004, 2009 तथा वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 11 में से एक सीट पर ही जीत दर्ज की थी. पार्टी को 2004 में महासमुंद, 2009 में कोरबा और वर्ष 2014 में दुर्ग सीट पर जीत हासिल हुई थी जबकि भारतीय जनता पार्टी ने अन्य 10 सीटें जीती थी. इस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को दो सीटों बस्तर और कोरबा से जीत मिली है जिसमें बस्तर सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है.

पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 वर्ष से सत्ता में रहे भारतीय जनता पार्टी को बड़ी शिकस्त दी थी. कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में 68 सीटों पर तथा भाजपा को 15 सीटों पर जीत मिली थी. विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद कांग्रेस को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव में भी वह जीत दोहराएगी. कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति सीटों पर जीत हासिल करने के लिए सुरगजा लोकसभा क्षेत्र में प्रेमनगर विधानसभा सीट से विधायक खेलसाय सिंह को, रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र में धर्मजयगढ़ विधानसभा सीट से विधायक लालजीत सिंह राठिया को तथा बस्तर लोकसभा क्षेत्र से चित्रकोट के मौजूदा विधायक दीपक बैज को चुनाव मैदान में उतारा था. 

कांग्रेस ने कांकेर लोकसभा सीट से नए चेहरे बीरेश ठाकुर पर भरोसा जताया था, लेकिन इनमें से केवल बस्तर सीट से दीपक बैज ही चुनाव जीत सके. दीपक बैज ने भाजपा के बैदूराम कश्यप को 38982 मतों से पराजित किया. छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की आबादी लगभग 32 फीसदी है और राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को आदिवासियों का साथ जरूरी होता है. राज्य के आदिवासी विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस के साथ थे वहीं लोकसभा में वे भाजपा के साथ हो गए.

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक देश के अन्य हिस्सों की तरह यहां भी जाति ने नहीं बल्कि राष्ट्रवाद और मोदी प्रभाव ने काम किया जिसके तहत पांच महीने के अंतराल में ही भाजपा को यहां एक बार फिर जश्न मनाने का मौका मिल गया.

गृह मंत्रालय की केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों को चौकन्ना रहने के आदेश

कुशवाहा, महागठबंधन के नेताओं ओर आम आदम पार्टी के भारद्वाज द्वारा नतीजे अनुरूप न आने पर गृह युद्ध छिड़ने की धमकी दिये जाने पर, गृह मंत्रालय ने अनुकूल नतीजे न मिलने पर हिंसा भड़काने को आतुर दलों का नाम लिए बिना एक अलर्ट जारी किया है। मंत्रालय का कहना है कि कुछ पक्षों द्वारा किए गए हिंसा भड़काने के आह्वान को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के लिए मतगणना से एक दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिंसा की आशंका के मद्देनजर बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अलर्ट कर दिया. मंत्रालय का कहना है कि कुछ पक्षों द्वारा किए गए हिंसा भड़काने के आह्वान को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. 

मंत्रालय ने एक बयान में यह भी कहा कि उसने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कानून एवं व्यवस्था तथा शांति बनाये रखने के लिए कहा है.

बयान में कहा गया है,‘गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को कल मतगणना के सिलसिले में देश के अलग..अलग हिस्सों में हिंसा भड़कने की आशंका के संबंध में अलर्ट किया है.’  मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साथ ही यह भी कहा गया है कि वे स्ट्रांग रुम और मतगणना स्थलों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठायें.

इसमें कहा गया है,‘यह विभिन्न पक्षों की ओर से मतगणना वाले दिन हिंसा भड़काने और बाधा उत्पन्न करने के लिए किए गए आह्वान और दिये गए बयानों के संबंध में किया गया है.’’ 

एक अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली है कि कुछ संगठन और व्यक्तियों ने, विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा में, कुछ बयान दिये हैं जिससे हिंसा उत्पन्न होने की आशंका है और इससे मतगणना प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती है.’’ 

लोकसभा चुनाव सात चरणों में 11 अप्रैल से 19 मई तक हुए थे. मतगणना गुरुवार को होगी.

प्रियंका वाड्रा द्वारा अपमानित नीलम मिश्रा ने दल बल सहित छोड़ी कांग्रेस

एक होती है नूरा कुश्ती इस कुश्ती में दो भिड़ने वाले पहलवान आपस ही में तय कर लेते हैं की कोई भी चित्त नहीं होगा या फिर कौन चित्त होगा। हम नूरा कुश्ती पहले भी समाजवादी परिवार में होती देख चुके हैं। अब गठबंधन और कांग्रेस में भी नूरा कुश्ती ही चल रही है। अभी हाल ही में बदोही में भी यही कुश्ती एक बार फिर दोहराई गयी, जहां जिले की कांग्रेस अध्यक्ष नीलम मिश्रा ने कांग्रेस छोड़ दी ओर गठबंधन के उम्मीदवार के हित में जुट गयी। इसे कहते हैं तेल गिरा तो कड़ाही में। एक ओर बात जो सामने आ रही है वह है नामदारों का अपने कार्यर्ताओं के प्रति रवैया। अभी सैम पित्रोदा के दिल्ली में सिक्ख कत्लेआम पर दिये गए ब्यान “हुआ तो हुआ” थमा नहीं की प्रियंका वादरा आ महिलाओं के लिए दिया गया यह बयान। जानते हैं पूरा मामला

भदोही: लोकसभा चुनाव 2019  के छठवें चरण में रविवार को सात राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हुआ. इस दौरान उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की कांग्रेस अध्यक्ष नीलम मिश्रा ने पूर्वी यूपी की प्रभारी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. नीलम मिश्रा ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने भदोही से एक बाहरी व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया है. इस बारे में जब हमने प्रियंका गांधी से बात की तो उन्होंने कई अपमानजनक बातें कहीं.  

आरोप है कि शुक्रवार को यहां हुई चुनावी सभा के बाद उन्होंने प्रियंका से शिकायत की थी कि भदोही से पार्टी के प्रत्याशी रमाकांत यादव लगातार जिला कांग्रेस कमेटी की उपेक्षा कर रहे हैं। यहां तक कि रैली में पार्टी पदाधिकारियों को घुसने तक नहीं दिया जा रहा है। 

इसपर प्रियंका गांधी ने कथित रुप से नीलम मिश्रा क सबके सामने डांटना शुरु कर दिया और कहा कि ‘अगर आप लोग अपमानित महसूस कर रहे हैं तो करते रहिए’। 

नीलम मिश्रा ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी से शनिवार को इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि भदोही से रमाकांत यादव को उम्मीदवार बनाया गया है. वह बाहरी व्यक्ति हैं और हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं. उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका था. नीलम ने दावा किया कि इस बारे में एक बैठक के दौरान हमने प्रियंका गांधी से बात करने की कोशिश भी की थी. लेकिन, प्रियंका गांधी नाराज हो गईं और हमारे लिए कई अपमानजनक बातें कहीं.   

बताते चलें कि रमाकांत यादव को चुनाव आयोग का नोटिस भी मिल चुका है. चुनाव आयोग ने अपने आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में जनता को बताने के लिए कहा था, जिसके लिए उम्मीदवारों को छोटे या बड़े अखबारों में इसे प्रकाशित करवाना था, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार रमाकांत यादव ने इसकी अनदेखी की थी. मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला निर्वाचन आयोग ने यादव को नोटिस भेजा था

ईसी ने राहुल को नोटिस दिया, 48 घंटे में देना होगा जवाब

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आदिवासियों के कानून पर दिए बयान को लेकर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में राहुल गांधी से 48 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया है.

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आदिवासियों के कानून पर दिए बयान को लेकर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में राहुल गांधी से 48 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया है. राहुल ने कहा था, “कानून में आदिवासियों को गोली से मारने की बात है. आदिवासियों को गोली से मारा जा सकेगा.”  कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 23 अप्रैल को शहडोल की रैली में ये बयान दिया था. 
 
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा था, “अब नरेंद्र मोदी ने नया कानून बनाया है. आदिवासियों के लिए नया कानून बनाया है. उसमें एक लाइन लिखी है कि आदिवासियों को गोली से मारा जा सकेगा. कानून में लिखा है कि आदिवासियों पर आक्रमण होगा, आपकी जमीन छीनते हैं, जंगल लेते हैं, जल लेते हैं और फिर कहते हैं कि आदिवासियों को गोली मारी जा सकेगी.” 

आयोग ने गांधी को नोटिस का जवाब देने के लिए 48 घंटे का वक्त दिया है. इस अवधि में जवाब नहीं देने की सूरत में आयोग अपनी तरफ से कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगा. एक विशेष संदेशवाहक के जरिए उन्हें नोटिस दिया गया है.

गढ़चिरौली पर नक्सली हमला 15 शहीद

गढ़चिरौली : महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक बड़ा नक्सली हमला हुआ है. इस हमले में सीआरपीएफ के 15 जवान शहीद हो गए हैं. सीआरपीएफ जवानों को ले जा रही गाड़ी का ड्राइवर भी मारा गया है. नक्सलियों ने आईडी ब्लास्ट कर पेट्रोलिंग के लिए जा रही गाड़ी को उड़ा दिया है. ये सभी जवान नक्सल विरोधी सी-60 ग्रुप के सदस्य थे.

घटनास्थल पर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के भी गोलीबारी भी हुई. पुलिस के जवानों ने भी नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया. ज्ञात हो कि गाड़ी में 16 जवान सवार थे. आईजी शेलार शरद ने जवानों के शहीद होने के खबर की पुष्टि की है. आईडी ब्लास्ट काफी जोरदार था. इस ब्लास्ट में गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए. 24 घंटे के अंदर यह दूसरा नक्सली हमला है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नक्सली हमले की निंदा की है. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. शहीद जवानों के परिजनों के साथ मेरी संवेदना है. मैं बहादुर जवानों को सलाम करता हूं.

Strongly condemn the despicable attack on our security personnel in Gadchiroli, Maharashtra. I salute all the brave personnel. Their sacrifices will never be forgotten. My thoughts & solidarity are with the bereaved families. The perpetrators of such violence will not be spared.5,7872:32 PM – May 1, 2019

रामदास आठवले ने नक्सली हमले की निंदा करते हुए कहा कि नक्सलियों को खत्म करने की आवश्यक्ता है. नक्सलवादी लोगों की मांग से तो हम सहमत हैं, लेकिन उन्होंने जो मार्ग अपनाया है उससे किसी का भला होने वाला नहीं है. 

घटनास्थल पर सीआरपीएफ और पुलिस की टीम पहुंच चुकी है. ज्ञात हो कि आज महाराष्ट्र अपना स्थापना दिवस मना रहा है. इस दिन नक्सली हिंसी की दूसरी घटना है. बीती रात नक्सलियों ने 50 गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया. सड़क निर्माण में जुटी कंपनी के लगभग 50 वाहनों को निशाना बनाया गया.

नक्सलियों ने यहां कुरखेडा तालुका के दानापुर इलाके में इस वारदात को अंदाज दिया था. बताया जा रहा है कि रात के 11 से 3 बजे के बीच नक्सलियों ने यह अग्निकांड किया था. दरअसल इस इलाके में रास्तों की मरम्मत और नए रास्ते बनाने का काम चल रहा था. जिसके लिए जेसीबी और सीमेंट से लदे ट्रक रास्ते पर खड़े थे. स्थानीय पुलिस ने बताया था कि यह नक्सली प्रभावित इलाका है. जब काम शुरू हुआ तब कोई भी विरोध नही हुआ था. अचानक बीती रात नक्सलियों नें एक-एक कर 50 से भी ज़्यादा गाड़ियां फूंक दी. 

#UPDATE Official sources: 10 security personnel have lost their lives in an IED blast by Naxals in Gadchiroli. #MaharashtraANI✔@ANI#UPDATE Maharashtra: 10 security personnel injured in an IED blast by naxals in Gadchiroli. The blast was executed by naxals on a police vehicle which was carrying 16 security personnel.1542:11 PM – May 1, 2019

महाराष्ट्र पुलिस के नक्सलरोधी अभियान के आईजी शरद शेलार ने कहा कि नक्सलियों ने क्यूआरटी कमांडो को ले जा रहे वाहन को निशाना बनाया। घटनास्थल पर सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां रवाना की गई हैं।

क्या है सी 60 कमांडो

नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए 1992 में सी-60 फोर्स तैयार की गई थी। इसमें पुलिस फोर्स के 60 जवान शामिल होते हैं। यह काम गढ़चिरौली के तब के एसपी केपी रघुवंशी ने किया था। सी-60 में शामिल पुलिस के जवानों को गोरिल्ला युद्ध के लिए तैयार किया जाता है। इनकी ट्रेनिंग हैदराबाद, बिहार और नागपुर में होती है। 

अभी गढ़चिरोली के धमाके की गूंज भी शांत नहीं हुई की राजनीति शुरू हो गयी है.

R भारत के प्रवक्ता आलोक वर्मा से छत्तीस गढ़ में नक्सलियों के छूट जाने और चार्जशीट न होने या फिर ढुलमुल चार्जशीट दायर करने से उनके छूटने की वजह पूछने पर कांग्रेस प्रवक्ता रमेश वर्लीयान ने कहा कि नक्सली कोई देश के दुश्मन नहीं हैं, उन्हे ठीक से डील (deal) नहीं किया गया इसीलिए वह हिंसा का रास्ता अपनाते हैं। उन्होने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी ने इतने साल क्या किया?

जबकि नकसलवाद 1969 में आज़ादी के मात्र 22 वर्ष बाद उभरा था और यह ततकालीन सरकार की कुनीतियों के कारण शोषित वर्ग का दंश था।

भारत में नक्सलवाद की बड़ी घटनाएं

  • 2007 छत्तीसगढ़ के बस्तर में 300 से ज्यादा विद्रोहियों ने 55 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट पर ‌उतार दिया था।
  • 2008 ओडिसा के नयागढ़ में नक्सलवाद‌ियों ने 14 पुलिसकर्मियों और एक नागरिक की हत्या कर दी।
  • 2009 महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में हुए एक बड़े नक्सली हमले में 15 सीआरपीएफ जवानों की मौत हो गयी।
  • 2010 नक्सलवादियों ने कोलकाता-मुंबई ट्रेन में 150 यात्रियों की हत्या कर दी।
  • 2010 पश्चिम बंगाल के सिल्दा केंप में घुसकर नक्सलियों ने 24 अर्द्धसैनिक बलों को मार गिराया।
  • 2011 छत्तीसगढ के दंतेवाड़ा में हुए एक बड़े नक्सलवादी हमले में कुल 76 जवानों की हत्या कर दी जिसमें सीआरपीएफ के जवान समेत पुल‌िसकर्मी भी शामिल थे।
  • 2012 झारखंड के गढ़वा जिले के पास बरिगंवा जंगल में 13 पुलिसकर्मीयों को मार गिराया।
  • 2013 छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने कांग्रेस के नेता समेत 27 व्यक्तियों को मार गिराया।

नकसलवाद पर पहले भी कांग्रेस ए बयान आते रहे हैं राज बब्बर नक्सलवादियों को क्रांतिकारी कहते हैं। मतलब भारत के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का उन्हे अधिकार है।

लोकतन्त्र के महापर्व के 3सरे चरण की 117 सीटों पर मतदान आज

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में मंगलवार को 15 राज्यों की 117 सीटों पर मतदान होगा. तीसरे चरण की 117 सीटों में से बीजेपी का लक्ष्य अपनी 62 सीटों को बचाने का होगा. पार्टी ने 2014 मे इन सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं विपक्षी दल बीजेपी से ये सीटें छीनना चाहेंगे. यह चरण बीजेपी और कांग्रेस के लिए काफी अहम है.  

नई दिल्ली: देश में सात चरणों में हो रहे लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में मंगलवार को 15 राज्यों की 117 सीटों पर मतदान होगा. इस चरण के साथ गुजरात, केरल, गोवा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, असम, दादर नागर हवेली और दमन-दीव की सभी लोकसभा सीटों पर मतदान पूरा हो जाएगा. तीसरे चरण की 117 सीटों में से बीजेपी का लक्ष्य अपनी 62 सीटों को बचाने का होगा जहां पार्टी ने 2014 मे जीत हासिल की थी. इसलिए यह चरण बीजेपी के लिए काफी अहम है.

तीसरे चरण में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों दलों के प्रमुख चुनाव मैदान में हैं. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव में उतर हैं. वह गांधीनगर से पार्टी के प्रत्याशी हैं, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस चरण में केरल के वायनाड संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार हैं. पिछले चुनाव में इनमें से 16 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे, जबकि अन्य सीटें बीजद (6), माकपा (7), राकांपा (4), समाजवादी पार्टी (3), शिवसेना (2), राजद (2), एआईयूडीएफ (2), आईयूएमएल (2), लोजपा (1), पीडीपी (1), आरएसपी (1), केरल कांग्रेस-एम (1), भाकपा (1), स्वाभिमानी पक्ष (1), तृणमूल कांग्रेस (1) और निर्दलीय (3) की झोली में गई थीं.

गुजरात में बीजेपी की परीक्षा
इस बार बीजेपी की परीक्षा उसका गढ़ रहे गुजरात में होगी. प्रदेश की सभी 26 लोकसभा सीटों पर अज मतदान होगा. इसके अलावा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी की परीक्षा होगी जहां पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में उसका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था. बीजेपी ने इस चरण में मतदान वाली सीटों पर 2014 में गुजरात की सभी 26 सीटों, कर्नाटक की 14 में से 11 सीटों और उत्तर प्रदेश की 10 सीटों में से आठ पर, छत्तीसगढ़ की सात में से छह सीटों पर, महाराष्ट्र की 14 में से छह सीटों पर, गोवा की दोनों सीटों पर और असम, बिहार, दादर नागर हवेली और दमन-दीव की एक-एक सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी के सामने अपनी सीटों को बचाए रखने की चुनौती है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य होने के कारण बीजेपी इस बार भी गुजरात की सभी सीटों पर जीत हासिल करने की उम्मीद लगाए बैठी है. लेकिन, कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में बीजेपी को कड़ी चुनौती थी, इसलिए कांग्रेस भी 10 से 15 सीटों पर इस बार जीत की उम्मीद कर रही है. गुजरात के तीन युवा नेता हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी ने विधानसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की पकड़ मजबूत बनाने में मदद की थी, लेकिन इस बार वे चुनाव की दौड़ में शामिल नहीं हैं. पाटीदार नेता पटेल पिछले महीने कांग्रेस में शामिल हुए, लेकिन दंगा से संबंधित मामले में अभियुक्त होने के कारण वे चुनाव नहीं लड़ पाए, जबकि ठाकोर ने इसी महीने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया. 

तय होगी यादव परिवार की किस्मत
समाजवादी पार्टी का गढ़ रहे मैनपुरी, बदायूं और संभल लोकसभा क्षेत्रों में मंगलवार को मतदान होने जा रहा है और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन होने के बाद इन क्षेत्रों में सपा की संभावना को मजबूती मिली है. यह भी एक राय है कि कांग्रेस भी बीजेपी का ही वोट काटेगी. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव फिरोजाबाद से अपने भतीजे व सपा उम्मीदवार अक्षय यादव के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं और वह सपा-बसपा गठबंधन के विरोध में लोगों को वोट करने कह रहे हैं. सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ रहे हैं.

कर्नाटक में बीजेपी को मिल रही कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन से कड़ी चुनौती
कर्नाटक में मंगलवार को जिन 14 सीटों पर मतदान हो रहा है, वहां बीजेपी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन उसे कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है. उधर, बीजेपी को उत्तर प्रदेश में भी तीसरे चरण में यादव बहुल इलाके में कड़ी चुनौती मिल रही है. 

महाराष्ट्र में तीसरे चरण में बारामती, माधा, कोल्हापुर और सतारा समेत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के गढ़ में मतदान हो रहा है. राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की पुत्री सुप्रिया सुले बारामती से चुनाव मैदान में हैं. छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने अपनी सभी मौजूदा सांसदों को बदल दिया है. पार्टी को प्रदेश में 15 साल बाद पिछले साल सत्ता में वापस आई कांग्रेस से चुनौती मिल रही है. 

मधेपुरा में इस बार त्रिकोणीय संघर्ष
बिहार में इस चरण में जिन क्षेत्रों में चुनाव हो रहा है उनमें से बीजेपी को 2014 में सिर्फ एक सीट पर जीत मिली थी और पार्टी इस बार भी इनमें से एक ही सीट पर चुनाव लड़ रही है, जबकि बीजेपी की सहयोगी पार्टी जनता दल (युनाइटेड) तीन सीटों पर और लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) एक सीट पर चुनाव लड़ रही है. वहीं, महागठबंधन में शामिल आरजेडी तीन सीटों पर जबकि कांग्रेस और विकासशील इन्सान पार्टी (वीआईपी) एक-एक सीट पर चुनाव लड़ रही हैं. मुख्य मुकाबला मधेपुरा में है जहां वर्तमान सांसद पप्पू यादव (पिछली बार राजद के टिकट पर) इस बार अपने ही दल जन अधिकार पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं और उनके खिलाफ आरजेडी उम्मीदवार शरद यादव चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि एनडीए में शामिल जेडीयू के टिकट पर दिनेश चंद्र यादव चुनाव मैदान में हैं. मधेपुरा में इस बार त्रिकोणीय संघर्ष है. 

क्या पुरी में खिलेगा कमल
ओडिशा के पुरी लोकसभा क्षेत्र में भी त्रिकोणीय संघर्ष है जहां तीन प्रमुख दलों के प्रवक्ताओं के बीच लड़ाई है. वर्तमान सांसद और बीजू जनता दल (बीजद) प्रवक्ता पिनाकी मिश्र का मुकाबला बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा से है, जबकि कांग्रेस के मीडिया सेल अध्यक्ष सत्यप्रकाश नायक भी चुनावी मैदान में हैं. असम में चार लोकसभा क्षेत्रों में मंगलवार को मतदान होगा जहां कांग्रेस और ऑल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) को नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर बीजेपी के विरोध का लाभ मिलने की उम्मीद है.

केरल में राहुल गांधी वायनाड लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं. प्रदेश की 20 लोकसभा सीटों में से आठ पर पार्टी ने 2014 में जीत दर्ज की थी और उसके सहयोगियों ने भी कुछ सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी भी केरल में चार सीटों पर जीत की उम्मीद लगा रही है. पश्चिम बंगाल में बहुकोणीय संघर्ष है जहां तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), कांग्रेस अपने-अपने दावे ठोंक रहे हैं.

योगी से मिले रवि किशन प्राप्त किया जीत का आशीर्वाद

नई दिल्ली : भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता और गोरखपुर सीट से लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशी रवि किशन ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर आम चुनाव में विजय के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया. 

योगी से मुलाकात के बाद रवि किशन ने कहा, ‘गोरखपुर में कोई चुनौती नहीं है क्योंकि बाबा गोरक्षनाथ और योगी आदित्यनाथ का आशीर्वाद है.  इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किये गये कार्यो का भी आशीर्वाद है. पूरी दुनिया की निगाह इन चुनावों पर है.’ उन्होंने कहा, ‘हर घर जाउंगा, हर दरवाजा खटखटाउंगा. समाज के विभिन्न वर्गों के लिए सरकार की ओर से चलायी गयी कल्याण योजनाओं और परियोजनाओं के बारे में सबको बताउंगा. विपक्ष अपने निहित स्वार्थ के चलते कई चीजें जनता को भुलवाना चाहता है इसलिए हम हर दरवाजे जाएंगे.’ 

लोकसभा के इस बार के चुनाव को महत्वपूर्ण बताते हुए रवि किशन ने कहा कि यह ग्राम प्रधान का चुनाव नहीं है बल्कि यह प्रधानमंत्री चुनने के लिए हो रहा चुनाव है.  यह एक ओर नि:स्वार्थ प्रधानमंत्री तो दूसरी ओर वंशवादी पार्टियों के गठबंधन के बीच का संघर्ष है. यह आतंकवाद के खिलाफ चुनाव है. उन्होंने दावा किया कि अगर भाजपा विरोधी गठबंधन सत्ता में आया तो वह देश को विभाजित कर देगा. 

गोरखपुर सीट 1991 से भाजपा के पास है. खुद योगी यहां से पांच बार सांसद रह चुके हैं लेकिन जब वह प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उपचुनाव में यह सीट प्रवीण निषाद के खाते में चली गयी. निषाद सपा के टिकट पर लडे़ थे और उन्हें बसपा का समर्थन हासिल था. गोरखपुर में 19 मई को मतदान होना है. रवि किशन आज ही गोरखपुर पहुंचकर भाजपा कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और चुनाव प्रचार की शुरूआत करेंगे. 

8th All-India Women Artists’ Contemporary Art Exhibition, 2019

Purnoor, Chandigarh

8th All-India Women Artists’ Contemporary Art Exhibition, 2019 was inaugurated by Shri Dinkar Gupta, IPS. Director General of Police  at the Galleries of Fine Arts Museum, Punjab University, Chandigarh,here today.

He gave away the following awards:

4 Professional Category: 

Rs 50,000/- KavitaMehrotra (from Lukhnow Uttar Pradesh)  for ‘Exist of Life’

Rs 45,000/- Neha Jaiswal (from Allahabad, UP ) for Paturkar ‘Campanion’

Rs 40,000/- PreetiDhaniya (from Panchkula, Haryana) for ‘Bounded Precious Time’

Rs 35,000/- VarshaMithunNiranjan (from Solapur, Maharashtra ) for ‘Good Morning’

4 Student Category : 

Rs. 25,000/- AratiMaurya (from Khairaghar, Chattisgarh ) for ‘Qurisity-3′

Rs. 25,000/- Reetu (from Khairaghar, Chattisgarh )for ‘Emergence’

Rs 20,000/-  Agomoni Sen (from Ranchi, Jharkhand ) for ‘Inward Lookingl’

Rs 20,000/-  PriyaSisodiya  (from Hyderabad, Telangana ) for ‘3 Generations’

KavitaMehrotra lives in lukhnow Uttar pradesh

Armed with a master’s degree in fine arts, Kavita is a talented young artist from Lucknow. She has participated in many National and International shows, exhibitions and has received admiration for her solo show” oozy of Formative Art”. An immensely gifted artist Kavita is sure to leave a mark on your creative mind and heart.

Exist of Life

Etching with Dry paint 60 cm x 46 cm

Neha Jaiswal lives in Allahabad, UP

Hailing from Allahbad, home for many renowned artists, Neha had  been a brilliant students in both academics and arts.  Neha has participated in many National art activities over the years. With many awards under her belt she wants to paint the world with her creativity.  Neha has also hosted 2 solo exhibitions which received great rave reviews from the world of art.

Campanion

Etching 49 cm x 50 cm

Preeti Dhaniya lives in Panchkula, Haryana

The effervescent Preeti hails from Panchkula, Haryana. She has been actively participating in various shows, exhibitions in Haryana, Chandigarh, Shimla on a regular basis. Preeti has been awarded by All India Fine Arts and crafts society for hew wonderful work in sculpting. A motivated artist,she has done some astounding work and has many achievements to her credit

Bounded Precious Time

Wood 99 cm x 49 cm x 11 cm

Varsha Mithun Niranjan lives in Solapur, Maharashtra

A talented young artist from Sholapur, has been a recipient of special jury award at 123rd All India Annual Art Exhibition in 2015. Her dedication and love for art reflects from all the work she firmly believes in the language of her craft. She has won accolades for her work at the 52nd Maharashtra State art exhibition and Camal art Foundation Western Region Art Exhibition.

Good Morning

Oil and acrylic 36 cm x 48 cm

Arati Maurya lives in Khairaghar, Chattisgarh

Pursuing her  M.F.A. (Graphics) , talented and ambitious Arati has many achievements under her belt.  She has been awarded at the Annual Art Exhibition , BHU .  This young artist is determined to follow her dreams and carve a niche for herself.

Qurisity-3

Woodcut 30″ x 48″

Reetu lives in Khairaghar, Chattisgarh

Having won the Zonal Art Award 2017-18, by State Lalit kala Academy, U.P Reetu has proved her mettle in the field of art. With numerous participations, awards and a solo show; “Astitva” An Exhibition of paintings and graphics prints under her belt , she has  been winning high accolades. Her stupendous work which celebrates her versatility and creativity is sure to take her places.

Emergence

Woodcut 90 cm x 120 cm

Agomoni Sen lives in Ranchi, Jharkhand

Hailing from Ranchi Agomani has done her Masters in Fine arts from Visva Bharti, Kala BhavanaShantiniketan. An artist who lets her work speak for her, Agomoni is immensely talented and determined to follow her dreams.

Inward Looking

Acrylic on Canvas 48″ x 36″

Priya Sisodiya lives in Hyderabad, Telangana

PriyaSisodiya is a fiercely motivated young artist hailing from Hyderabad. She is doing final year of her BFA degree course from Sri Venkateswara College of Fine Arts, Hyderabad. Her work is a reflection of nature, tender softness and inclined love towards girl child. Seeking inspiration from every existing thing as almighty’s expression her work is a reflection of her soul.

3 Generations

Wood Cut On Paper 33″x24″

Art Critic

All India Women Artists Contemporary Art Exhibition 2019

Professor Seema Bawa

Art Historian, Critic and Curator

Painting a World of their Own

Ah, well, do I wish that we lived in a world where gender didn’t figure so prominently? Of course. Do I even think about myself as a woman when I go to make art? Of course not.’

    -Judy Chicago

‘Ah, well, do I wish that we lived in a world where gender didn’t figure so prominently? Of course. Do I even think about myself as a woman when I go to make art? Of course not.’ Judy Chicago

Chicago’s views on her own art practice with a concomitant awareness about gender imbalance and on the overt patriarchy that informs social and cultural behavior is very telling; given that Chicago has brought a critical feminist gaze to the gender construct of masculinity, exploring how prevailing definitions of power have affected the world in general — and men in particular, in the way artists view their own work process. 

The role of the subversive artist, particularly the woman artist, becomes significant in the exhibitions of Artscapes; which is holding the eighth edition of All-India Women Artists Contemporary Art Exhibition, that encourage women artists to simultaneously engage with creativity and contemporary concerns.

The continuous commitment to the cause of projecting and encouraging women artists through competition, selection and subsequent display can be seen in the larger context of feminist art movements in India and abroad. Through such movements the artist as both an activist with a creative soul and also as a symbol of resistance and subversion of dominant ideology is brought center-stage. Thus, Art enters into fields of political and social activism, becoming one of the catalysts for struggle for visibility, validity and assertion of value. Women artists all over have taken up the issues of oppression, race, colour, and gender. They have succeeded in privileging a special position for women within the larger discourse of cultural practice. Women in art have brought to the fore an agenda that can be differentiated from the largely androcentric art practice. They have done this not merely by questioning and resisting patriarchy but also by endorsing an agenda of their own.  

Mainstream art criticism seeks to contain the dichotomy between the woman artist’s richer albeit different lived-world through “placing” or labeling it. There is an inherent inequality and bias embedded in the very language that we use in common as well as academic discourse, where there is a very conscious emphasis on the gender of the creator when referring to women who write, sing, paint, or run for political office as specifically “women writers”, “women singers”, “women painters”, and “women politicians”. Exhibition of works of “male artists” are only mentioned as “artists” without emphasizing the gender. Thus, on the one hand men are seen to be the norm and women an aberration and therefore need to be labelled and /or valorised. On the other hand, women artists, writers, etc., become categories representative of all women while men are perceived to be unique individuals.  This aspect predicates the felt need by women artistes to on the one hand recover a space of their own within the discourse of art and on the other mainstream it from the margins as unique painterly works. To appreciate the polyphony of inherent in these works, we have to be aware of and be sensitive to the heterogeneity of backgrounds, styles and genres the women artists’ represent. The artists in the current show have a larger canvas to work with, especially given the competition format, that allows for a wide array of genres, styles, mediums and sensibilities at play.

This brings us to a significant question regarding as to whether women artist have a world of their own to paint and sculpt qua women artists’ art practice.  Perhaps the training and the technique belong to a shared space of both men and women, where gender is insignificant and at this level it is skill that takes front stage. However, the lived experience, the fears, insecurities, dis-privileging are definitely gendered and at some level do pervade the Weltanschauung of women as artists. The space painted is often personal, with a deep emotive content that seems to somehow be ‘smaller’ but more dense or “thicker”. 

The concern with women’s’ art and artist is entangled with the discourse of the individual artefact and its meanings that occurred during ‘the transition from modernism to postmodernism, which was also that from the concept of the artist as a bohemian to the artist as a social thinker; from the microcosm of the studio to society.’       

This can be seen in the works of women artists in India who despite a lack of a formal engagement with the feminist movements, have been carving out and recovering spaces as their own. The feminisation of themes, the experimentations with style, uniqueness of sensibility, are all hallmarks of women’s art as can be seen in the current show. This is not to suggest that art produced and conceptualised by women artists is homogenous and monolithic- it is in fact, just the opposite- diverse and vibrant, mirroring the diversity of artists themselves. From the self to the family and from there on to larger social issues and concerns that inform women’s lives and worlds are the tropes within which artists such as PriyaSisodiya’s and Shobha Nagar’s work.

One way to for the viewer to recover the depth of the works could be to examine women’s engagement with art in both historical and critical terms and to relate these with contemporary art practice. Given the colonial discourse within which easel and academy art developed, it is not surprising that traditional arts, which were the forte of women, got marginalised, trivialised and pushed into the background.

Most of traditional arts, be it painting the alpana and the kolam on the floor, or the elaborate paintings on the bridal chamber of Mithila, were and are still done by women, be it in the folk or the tribal style. Neha Jaiswal’s etching Companion uses this style to excavate the notion of nascent violence perpetrated against women by patriarchal societies. 

Contemporary art practice by women tends to locate the female and the feminine in the self where there is an increasing concern with the body as the site within which feminine identity is framed. The works of Agomoni Sen and AratiMauraya highlight this, especially the latter where the woman is gazing at her reflection in the mirror and inviting the viewer to become part of this self-conscious engagement with the self.

Indeed one observes a preponderance of figurative works in the selection. One wonders if abstraction is gender neutral or can we read some degree of feminisation in terms of colours and compositions. We hope that subsequent shows of women artists by Artscape shall be able to provide some insights into the processes and practices that go into making of women’s painted worlds. 

The Event

Since its inception in 2011, Artscapes has become an integral part of creativity and cognition at the national level. We have envisioned the main objective of working towards the development of women artists through our various art activities. Apart from art exhibition, other art activities are also organized from time to time. It is very important to understand and know the efforts of Artscapes for society. Promotion of originality and innovation, which is the sensory nature of the challenges of aesthetical beauty and fantasies, has always been a part of our norms. Artscapes in a way represents feminism  through almost all of its art programmes, wherein women artists get to come together and share their expressions. This overall involvement of women is introduced and displayed through their artworks, which combines both uncompromising human and artistic values in it. It is a demonstration of unique creativity, thus also including cooperation within competition. Artscpaes fosters and encourages both folk art and modern contemporary art concepts. It gives away awards to the best creative works and collects and preserves many of them too as encouragement.

Artscapes works on the fundamental aspect of art and culture. It provides an opportunity and support in priority to explore, research and project various forms and mediums of artistic expressions. We leave the interpretation of creativities on the viewers regardless of the debate of professional or academic qualities of the artworks, in order to make them share their own true experiences and expressions of joy and Rasa to the society themselves. Primarily our goal is to continue displaying artworks surrounding the centralization of women’s existence in the context of culture, aesthetics, social, economic and human values. Artscapes happens to be a medium through which we  represent the artistic interpretation of organisational arrangements in between the artist and the society. We try to showcase the art originated and inspired by the insights of women’s entity it its purest and true sense. It indeed is a matter of sensitivity and thoughtfulness. All the events and activities of Artscapes, majorly this particular All India Contemporary Women Artists Art exhibition is organised annually to support their vital contribution and resurrection of their existence through art as a means of voicing out. In this way, we accept and present various means of defining the identity of Indian art such as painting art, sculpture, art and art. Through this event we display the art of rural and urban contemporary women providing them an equal and similar platform. This makes our Indian multi-cultural unity and integrity more precious, prestigious, developed and empowered!

Through our All India Contemporary Women Artists Art Exhibition 2019, it is our humble effort to present the powerful and creative spirit of women artists working in all the parts of the country to art lovers, critics, students and viewers. About 170 artworks are included in the exhibition through the process of juried selection. By honoring the prize and honorable citation during the inaugural ceremony of the exhibition, we strive to convert the nature of women’s thinking, power, respect and equality into the empowerment.

Kanimozhi house raided IT officials said it was ‘false tip’

CHENNAI: 

Amid allegations of a huge cash-for-votes racket in Tamil Nadu, officials of the Income Tax department visited the house of DMK leader Kanimozhi this evening to “verify allegations of cash being stashed there,” sources said.  Kanimozhi, DMK lawmaker and the sister of party chief MK Stalin, is the candidate for the Tuticorin seat. It was alleged that “lots of cash” was stashed on the first floor of her house in Thoothukudi, sources said. IT sources, however, said later that it was a “false tip” and they drew a blank. No case has been registered.

“Crores and crores of rupees are kept in the house of Tamilisai Soundararajan’s (state BJP chief) residence, why no raids there? Modi is using IT, CBI, judiciary and now Election Commission to interfere in the elections. They are doing this as they fear losing,” DMK chief Stalin said.

Elections for the state’s 39 Lok Sabha seats and 18 assembly seats will be held on Thursday, during the second phase.

In the run-up to the polls, a string of raids have been held in the state, in which around Rs. 500 crore — in illegal cash and gold — has been seized.

Today, in a first, election for the Vellore Lok Sabha seat was cancelled following recovery of huge cash from alleged associates of DMK candidate Kathir Anand, the son of DMK treasurer Durai Murugan.

On March 30, tax officials raided Durai Murugan’s residence and allegedly seized Rs. 10.50 lakh. Two days later, they claimed to have seized Rs. 11.53 crore from a cement godown belonging to an associate of the DMK leader.

Last week, tax department officials conducted searches at 18 locations in the state. The list of sites included state capital Chennai, Namakkal and Tirunelveli. Most of the searches were on properties owned by opposition leaders.

Tax raids on opposition leaders have become one of the key issues in the ongoing elections, with most leaders accusing the BJP of targeting political rivals through government agencies.

DMK spokesperson A Saravanan called it “a murder of democracy and a sick joke”. He added, “This is not an embarrassment for us, but this will backfire and the sympathy this would generate will make the DMK win all seats”.

Though 204 crore unaccounted cash has been recovered in Tamil Nadu ahead of polls, the Income Tax officials have not named any political party or candidates with regard to the remaining 190 crore cash.

A senior officer told newsmen “We are investigating their political affiliation”.