ईडी ने राहुल गांधी को कल फिर बुलाया है

अधिकारियों ने कहा कि उन्हें फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है और बयान दर्ज करने में काफी समय लग रहा है। गांधी अपनी बहन एवं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा के साथ ईडी मुख्यालय पहुंचे थे और उनसे पूर्वाह्न 11:30 बजे पूछताछ शुरू हुई। करीब चार घंटे के पूछताछ के सत्र के बाद वह करीब अपराह्न साढ़े तीन बजे करीब एक घंटे के लिये बाहर निकले। वह शाम करीब साढ़े चार बजे फिर से पूछताछ में शामिल हुए। केरल के वायनाड से सांसद गांधी ने सोमवार को संघीय एजेंसी के कार्यालय में 10 घंटे से अधिक समय बिताया था, जहां उनसे पूछताछ की गई और उनका बयान दर्ज किया गया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से आज ईडी ने करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। इससे पहले सोमवार को केंद्रीय एजेंसी ने राहुल गांधी से 10 घंटे तक पूछताछ की थी। 18 घंटे की पूछताछ के बाद अब ईडी ने राहुल गांधी को आगे की पूछताछ के लिए कल फिर से बुलाया है।

नई दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट, नयी दिल्ली : 

नेशनल हेराल्ड केस में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर दो दिनों तक लगातार पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने कल यानी बुधवार को भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पूछताछ के लिए बुलाया है। आज उनसे ईडी ने करीब 5 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सोमवार को भी ईडी ने करीब 10 घंटे तक सवाल-जवाब किए थे। आज सुबह राहुल गांधी अपनी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के साथ ईडी की दफ्तर पहुंचे थे।

अब उन्हें बुधवार को भी ईडी के सामने पेश होना होगा। दूसरी ओर मंगलवार को राहुल गांधी से करीब 8 घंटे की पूछताछ की गई। मंगलवार को पहले चरण की पूछताछ में राहुल से करीब 40 सवाल पूछे गए। इस दौरान राहुल गांधी के साथ उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी साथ थीं। पहेल चरण की करीब चार घंटे की पूछताछ के बाद दोपहर करीब 3.30 बजे राहुल ईडी ऑफिस से निकले। फिर एक घंटे बाद आगे की पूछताछ के लिए पहुंचे।

पहले दौर की पूछताछ के बाद राहुल गांधी को दोपहर करीब दो बजकर 10 मिनट पर भोजन के लिए ईडी मुख्यालय से बाहर जाने की इजाजत दी गई थी। भोजनावकाश के बाद वह दिन में करीब तीन बजकर 30 मिनट पर फिर ईडी के समक्ष पेश हुए। ईडी ने पहले राउंड में राहुल गांधी से करीब तीन घंटे पूछताछ की थी जबकि दूसरे दौर में उनसे साढ़े 5 घंटे बातचीत हुई। समझा जाता है कि राहुल गांधी ने धनशोधन रोकथाम कानून की धारा 50 के तहत अपना बयान लिखित रूप से दिया है।

सुबह में पूछताछ के लिए राहुल गांधी कांग्रेस मुख्यालय से ईडी दफ्तर पहुंचे। इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे और राहुल गांधी के प्रति अपना समर्थन जताया। राहुल गांधी का काफिला जब ईडी मुख्यालय पहुंचा तो गाड़ी में उनके बगल में प्रियंका गांधी भी बैठी हुईं थीं।

एजेंसी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत राहुल गांधी का बयान दर्ज किया था। अधिकारियों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और गांधी परिवार से पूछताछ ईडी की जांच का हिस्सा है, ताकि ‘यंग इंडियन’ और ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (एजेएल) के हिस्सेदारी पैटर्न, वित्तीय लेन-देन और प्रवर्तकों की भूमिका को समझा जा सके। ‘यंग इंडियन’ के प्रवर्तकों और शेयरधारकों में सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कुछ अन्य सदस्य शामिल हैं।

समझा जाता है कि मामले से जुड़े सहायक निदेशक स्तर के एक ईडी अधिकारी ने ‘यंग इंडियन’ की स्थापना, ‘नेशनल हेराल्ड’ के संचालन और धन के कथित हस्तांतरण को लेकर सवालों की सूची सामने रखी। ‘यंग इंडियन’ में कथित वित्तीय अनियमितताएं भी जांच के दायरे में हैं। कांग्रेस का कहना है कि उसके शीर्ष नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं तथा ईडी की कार्रवाई प्रतिशोध की राजनीति के तहत की जा रही है। उसने यह भी कहा है कि वह एवं उसका नेतृत्व झुकने वाले नहीं है।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सुरजेवाला ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों को निराधार करार देते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस एक राजनीतिक दल है और एक राजनीतिक दल किसी कंपनी में हिस्सेदारी नहीं खरीद सकता। इसलिए, ‘यंग इंडियन’ के नाम से एक गैर-लाभकारी कंपनी (नॉट फॉर प्रॉफिट कंपनी) को ‘नेशनल हेराल्ड’ एवं एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के शेयर दिए गए, ताकि 90 करोड़ रुपये का कर्ज खत्म हो सके।’’

आडवाणी ने सिखाया था राजधर्म, पर कॉंग्रेस ने इंदिरा की मानी

नेशनल हेरॉल्ड में कथित घोटाले को उजागर करने वाले बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी पहले जयललिता के सिपाही हुआ करते थे। उस वक्त स्वामी ने ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर जैन हवाला का गंभीर आरोप लगा दिया। 29 जून 1993 को स्वामी ने दावा किया कि हवाला कारोबारी सुरेंद्र जैन ने 1991 में आडवाणी को एक करोड़ रुपये दिए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि इस काले धन को कश्मीर में टेरर फंडिंग के इस्तेमाल किया गया है। 1996 में सीबीआई ने इस मामले में आडवाणी के खिलाफ FIR दर्ज की. मामले ने इतना तूल पकड़ा कि सड़क से संसद तक बीजेपी को घेरा जाने लगा। तब आडवाणी ने राजधर्म निभाते हुए लोकसभा से इस्तीफा दे दिया और कसम खाई कि अब बेगुनाही साबित करने के बाद ही संसद में कदम रखूंगा। आखिरकार वे इस मामले में बरी हुए और 1998 में फिर से जीतकर लोकसभा पहुंचे।

  • राहुल पर कार्रवाई से कांग्रेस बिफरी
  • राहुल गांधी इकलौते नेता नहीं हैं
  • आडवाणी ने सिखाया था राजधर्म
  • कभी मोदी से SIT ने 9 घंटे की थी पूछताछ
  • अमित शाह तो जेल गए, तड़ीपार भी हुए
  • राहुल गांधी को किस बात का डर है?

नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की ED के सामने आज भी पेशी है। इस मामले में ईडी ने राहुल को पूछताछ के लिए बुलाया है। राहुल गांधी पर ईडी की कार्रवाई कांग्रेसियों को जरा भी अच्छी नहीं लगी है। ईडी कार्रवाई के विरोध में पार्टी ने देशव्यापी प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। कल सुबह से ही देश के कई हिस्सों में कांग्रेसी कार्यकर्ता प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं। ऐसा नहीं है कि देश में पहली बार किसी राजनेता को जांच का सामना करना पड़ रहा हो। कांग्रेस सरकार में भी कई नेता इस तरह की जांचों का सामना कर चुके हैं, लेकिन तब किसी तरह का कोई प्रदर्शन नहीं देखने को मिले।

कांग्रेस पार्टी के दो प्रमुख चेहरे सोनिया गांधी और राहुल गांधी फिलहाल एक बड़ी मुसीबत में घिरे हुए हैं। सोनिया गांधी को तो 8 जून को ही पेश होना था, लेकिन कोरोनावायरस से ग्रस्त होने के कारण वह ईडी के सामने पेश नहीं हुई। उधर राहुल गांधी को भी 2 जून को ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन राहुल ने असमर्थता जताई थी, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें 13 जून को पेश होने के लिए समन भेजा है। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, क्योंकि कांग्रेस राहुल गांधी की पेशी के दौरान पूरे देश भर में बड़े स्तर पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। दरअसल राहुल गांधी की पेशी से पहले गुरुवार को कांग्रेस ने तमाम पार्टी महासचिवों, प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्षों की एक वर्चुअल बैठक बुलाई है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की ईडी के सामने पेशी के संदर्भ में भी चर्चा होगी।

यहां तक की चर्चा यह भी है कि कांग्रेस ने अपने तमाम सांसदों से 13 जून की सुबह दिल्ली में मौजूद रहने को भी कहा है। कुल मिलाकर कहें तो ईडी के सामने राहुल गांधी और सोनिया गांधी की पेशी को कांग्रेस एक बड़ा मुद्दा बनाना चाहती है, हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है इसके पहले जब इंदिरा गांधी पर मुसीबत आई पार्टी उनके लिए भी विक्टिम कार्ड खेलने के लिए तैयार हो गई थी। 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला हो या जीप घोटाले में इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी हुई हो, दोनों ही मौकों पर कांग्रेस ने खूब हंगामा मचाया था। कांग्रेस पार्टी आरोप लगा रही है यह सब कुछ ईडी प्रधानमंत्री मोदी के इशारे पर कर रही है। लेकिन कांग्रेस पार्टी जानती है कि एक वक्त ऐसा भी था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए एसआईटी के सामने 9 घंटे तक पूछताछ के लिए पेश होना पड़ा था। यह वही समय है जब कोंग्रेसी नेताओं ने हिन्दू आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था। मोदी को गुजरात में फैले दंगों के लिए आरोपित किया था। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। गुजरात में कॉंग्रेस बुरी तरह हारी थी, सूत्रों के अनुसार तभी से मोदी के खिलाफ चालें चली जा रहीं थी।

ईडी द्वारा राहुल गांधी और सोनिया गांधी को समन भेजे जाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन शुरू हो गया है। कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ता बुधवार से ही कांग्रेस मुख्यालय के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई से जुड़े सूत्रों के हवाले से तो यहां तक कहा गया है कि गुरुवार को पार्टी अपने तमाम महासचिवों, प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्षों के डिजिटल बैठक बुला रही है. सूत्रों के हवाले से कहा तो यह भी जा रहा है कि 13 जून की सुबह कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी सांसदों को दिल्ली में मौजूद रहने को कहा है। हालांकि अगर पार्टी की आधिकारिक लाइन को देखें तो उसके प्रवक्ता कह रहे हैं कि कांग्रेस कानून को मानने वाली पार्टी है और वह नियमों का अनुसरण करती है, इसलिए अगर राहुल गांधी और सोनिया गांधी को तलब किया गया है तो वह निश्चित तौर पर पेश होंगे।

1977 में 3 अक्टूबर को जब सीबीआई की टीम जीप घोटाले में इंदिरा गांधी को गिरफ्तार करने उनके आवास 12, वेलिंगटन क्रीसेंट पर पहुंची तो मानो हंगामा मच गया। तमाम कांग्रेस समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के नेतृत्व में आवास को घेर लिया, और नारेबाजी करने लगे। यह पूरा तमाशा घंटों तक चलता रहा। हालांकि बाद में इंदिरा गांधी सीबीआई की टीम के साथ जाने को तैयार हो गईं। लेकिन हंगामा इतना ज्यादा बढ़ गया था कि उन्हें जेल न ले जाकर फरीदाबाद के पास बडखल गेस्टहाउस में रखा गया और अगले दिन ही जब उन्हें मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो उन्हें जमानत मिल गई। इसी तरह 1978 में इंदिरा गांधी के पुत्र और उस वक्त कांग्रेस पार्टी में दूसरे नंबर के नेता संजय गांधी को फिल्म किस्सा कुर्सी का प्रिंट जलाने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। संजय गांधी को अदालत ने 1 महीने तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया था, जिसकी वजह से उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया था। इस गिरफ्तारी को लेकर भी तमाम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया था।

नेशनल हेरॉल्ड में कथित घोटाले को उजागर करने वाले बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी पहले जयललिता के सिपाही हुआ करते थे। उस वक्त स्वामी ने ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर जैन हवाला का गंभीर आरोप लगा दिया। 29 जून 1993 को स्वामी ने दावा किया कि हवाला कारोबारी सुरेंद्र जैन ने 1991 में आडवाणी को एक करोड़ रुपये दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस काले धन को कश्मीर में टेरर फंडिंग के इस्तेमाल किया गया है। 1996 में सीबीआई ने इस मामले में आडवाणी के खिलाफ FIR दर्ज की। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि सड़क से संसद तक बीजेपी को घेरा जाने लगा। तब आडवाणी ने राजधर्म निभाते हुए लोकसभा से इस्तीफा दे दिया और कसम खाई कि अब बेगुनाही साबित करने के बाद ही संसद में कदम रखूंगा। आखिरकार वे इस मामले में बरी हुए और 1998 में फिर से जीतकर लोकसभा पहुंचे।

गुजरात में 2002 में हुए दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक एसआईटी का गठन हुआ। एसआईटी ने उस वक्त गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से 9 घंटे तक पूछताछ की थी। लेकिन इस पूछताछ के दौरान ना तो बीजेपी समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने कोई हंगामा या प्रदर्शन किया और न ही तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर नाराजगी जाहिर की। उस वक्त पूछताछ के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए-

नरेंद्र मोदी कहते हैं, “दंगों की जांच के लिए जो एसआईटी की रचना की है, उस एसआईटी ने मुझको एक चिट्ठी लिखी थी, जिस चिट्ठी में 27 तारीख को मुझसे मिलने के लिए बताया था और आज 27 तारीख को मैं एसआईटी के सामने प्रस्तुत हूं। विस्तार से बातचीत उन्होंने मेरे से की है। उनको जो सवाल पूछने थे, मैंने पहले से ही कहा है भारत का संविधान, भारत का कानून सुप्रीम है और एक नागरिक के नाते एवं मुख्यमंत्री के नाते मैं भारत के संविधान से भारत के कानून से बंधा हुआ हूं। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता है। और आज मेरे व्यवहार ने, मेरे आचरण ने भांति-भांति की बातें फैलाने वालों को करारा जवाब दे दिया है। मैं आशा करता हूं इस प्रकार की बातें वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप बंद करेंगे। अभी भी कुछ लोगों को भ्रम रहते हैं, तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूं यह एसआईटी सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हैं, एसआईटी का जांच करने वाला जो दल है, जिसने आज मुझसे पूछताछ की है, इस पूरी व्यवस्था में गुजरात का कोई भी अफसर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पसंद किए हुए, नियुक्त किए गए अफसर हैं, इसलिए यह सीधा-सीधा सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन में काम कर रहा है और उन्हीं लोगों ने आज मेरे से पूछताछ की है।”

उस जांच के दौरान नरेंद्र मोदी से तकरीबन 100 सवाल किए गए थे और उन्होंने उन सभी सवालों के जवाब दिए थे. दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार उस एसआईटी के प्रमुख रहे आरके राघवन अपनी आत्मकथा ‘अ रोड वेल ट्रैवेल्ड’ में लिखा है कि इस जांच के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से एसआईटी ने तकरीबन 9 घंटे तक पूछताछ की थी. पूरे पूछताछ के दौरान नरेंद्र मोदी ने चाय तक नहीं पी थी. यहां तक कि वह पानी भी अपना खुद का लेकर आए थे. सबसे बड़ी बात कि जब एसआईटी ने उनसे कहा की पूछताछ एसआईटी के दफ्तर में ही होगी तो उसके लिए नरेंद्र मोदी बड़ी सहजता से मान गए.

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला तो सालों तक सुर्खियों में रहा। इस केस में बीजेपी नेता अमित शाह भी आरोपी बनाए गए थे। CID से लेकर CBI तक से इस मामले की जांच कराई गई। केस में गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह के ऊपर यह आरोप लगे थे कि उन्होंने मार्बल व्यापारियों के कहने पर सोहराबुद्दीन का फर्जी एनकाउंटर कराया था। शाह के ऊपर इस मामले में अपहरण, हत्या और सबूत मिटाने का आरोप लगाया गया था। जांच में सहयोग करते हुए जुलाई 2010 में अमित शाह ने आत्मसमर्पण किया और उनको जेल भेज दिया गया था। जेल जाने के तीन महीने बाद ही अक्टूबर 2010 में अमित शाह को जमानत दे दी गई हालांकि कोर्ट ने अमित शाह को जमानत देते हुए 2 साल तक गुजरात ना आने की शर्त रखी थी। सोहराबुद्दीन शेख के भाई नयाबुद्दीन शेख ने कोर्ट को बताया था कि CBI ने अपने मन से इस केस में अमित शाह के नाम को जोड़ा था। 2014 में वे इस मामले से बरी हुए।

कांग्रेस जिस तरह से इस मुद्दे को बड़ा बना रही है, उससे दो सवाल उठ रहे हैं।

एक- क्या कांग्रेसी गांधी परिवार को कानून और संविधान से भी ऊपर मानते हैं?

दूसरा- राहुल गांधी ईडी की पूछताछ से इतना घबरा क्यों रहे हैं?

देश में कानून सबके लिए बराबर है। किसी पर भी कोई आरोप लगता है तो उसे एक न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना ही पड़ता है, फिर राहुल गांधी क्यों स्पेशल ट्रीटमेंट चाहते हैं। यदि राहुल गांधी पर कोई आरोप लगा है तो उन्हें जांच का सामना करना चाहिए. जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. उनको संविधान और न्यायपालिका पर भरोसा होना चाहिए।

हिरासत में लिए जाने के बाद सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर बोला हमला

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को अधीर रंजन चौधरी, के सी वेणुगोपाल और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कांग्रेस के 459 कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को पुलिस के निर्देशों का पालन नहीं करने पर हिरासत में लिया। इसी के साथ दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि पुलिस कार्रवाई के दौरान विरोध कर रहे कांग्रेस नेताओं के साथ मारपीट और घायल होने के आरोपों की गंभीरता से जांच की जाएगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्विटर पर कहा, ” जब मोटे पुलिसकर्मी आप से टकराते हैं, तो आप यकीनन भाग्यशाली होते हैं कि एक संदिग्ध हेयरलाइन क्रैक मात्र होकर रह जाता है। डॉक्टरों ने कहा है कि अगर हेयरलाइन में कोई क्रैक है, तो यह लगभग 10 दिनों में खुद ही ठीक हो जाएगा। साथ ही उन्होंने ये जानकारी भी दी कि वह ठीक हैं और कल काम पर जाएंगे।”

नई दिल्ली(ब्यूरो) डेमोक्रेटिक फ्रंट, नयी दिल्ली :  

नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की राहुल गांधी से आज भी पूछताछ जारी है।  इधर, राहुल गांधी के पार्टी ऑफिस से ईडी दफ्तर के लिए निकलते वक्त कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारी प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस ने कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सुरजेवाला समेत कई कार्यकर्ताओं को अपनी हिरासत में ले लिया है, और उन्हें बस में भरकर दूसरी जगहों पर ले जाया जा रहा है। वहीं इस बीच, कांग्रेस ऑफिस के आसपास धारा 144 लगा दी गई है।

रणदीप सुरजेवला अब कॉंग्रेस के राष्ट्रिय नेता हैं। पिछले विधान सभा चुनाव हरियाणा में हारने के पश्चात वह हरियाणा से राज्य सभा चुनाव तक नहीं लड़े थे वह राज्य सभा चुनावों में राजस्थान से लड़ और राज्यसभा सांसद होने का अशोक गहलोत के कारण उनकी गोद में आ गिरा। वहीं दूसरी ओर बात करें पी॰ चिदम्बरम की तो अभी कुछ महीने पहले ही उनके बेटे को जो तमिलनाडू से सासद हैं, को ईडी ने गिरफ्तार किया और अब उनकी जमानत भी खारिज हो चुकी है, तो चिदम्बरम ने या तमिल कॉंग्रेस ने उनके लिए क्या किया?

कल दिल्ली पुलिस के अपने दफ्तरों में किसी भी प्रकार के धरने के लिए किसी को भी जाने नहीं दिया। वहीं कॉंग्रेस कार्यकर्ताओं ने थोड़ा ज़ोर दिखाया तो दिल्ली पुलिस ने उन्हे रोका तो कुछ धाकका मुक्की हुई, जहां चिदम्बरम ने अपने घायल होने की बात काही जिसे हर तरफ फैलाया जा रहा है। वहीं चिदम्बरम का ब्यान है की डॉक्टर ने कहा, अगर हेयरलाइन में कोई क्रैक है, तो यह लगभग 10 दिनों में खुद ही ठीक हो जाएगा। साथ ही उन्होंने ये जानकारी भी दी कि वह ठीक हैं और कल काम पर जाएंगे।”

चिदम्बरम के ब्यान से पता चलता है कि वह ठीक हैं और हस्पताल से निकाल चुके हैं, लेकिन इस बीच, कांग्रेस ऑफिस के आसपास धारा 144 लगा दी गई है। रणदीप सुरजेवाला ने हिरासत में लिए जाने के बाद मीडिया से बात करते हुए केन्द्र सरकार पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री को घसीटा जा रहा है. पूर्व गृह मंत्री की हड्डी तोड़ दी गई।” इससे पहले, कांग्रेस ने राहुल गांधी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए मंगलवार को दावा किया कि सरकार को पार्टी के पूर्व अध्यक्ष से परेशानी इसलिए है कि उन्होंने किसानों, नौजवानों, मजदूरों की आवाज उठाई तथा कोरोना संकट एवं सीमा पर चीन की आक्रमकता को लेकर मोदी सरकार को घेरा।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला भारतीय कानून के भी योद्धा हैं। वह बहुत बड़े वकील हैं, उन्होने सराकारी कार्यप्रणाली पर ही प्रश्न उठा डाले। सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जब कोई प्राथमिकी ही दर्ज नहीं है तो फिर पूछताछ के लिए कैसे बुलाया जा सकता है. यह पूरी कार्रवाई असंवैधानिक और प्रतिशोध की राजनीति से प्रेरित है।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘आखि़र भाजपा के निशाने पर राहुल गांधी और कांग्रेस ही क्यों? क्या ईडी की कार्रवाई जनता के मुद्दे उठाने वाली मुखर आवाज़ को दबाने का षडयंत्र है?’’ 

राहुल गांधी से ED की पूछताछ जारी, जांच एजेंसी ने कल फिर बुलाया

गौरतलब है कि राहुल गांधी आज सुबह 11:15 बजे ईडी के दफ्तर पहुंचे थे। इससे पहले वह अपने घर से प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस मुख्यालय पहुुंचे थे और फिर वहां से पैदल ही मार्च करते हुए ईडी दफ्तर तक आए। इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे। हालांकि पुलिस ने ईडी के दफ्तर तक सिर्फ राहुल गांधी और प्रियंका को ही जाने की परमिशन दी। भूपेश बघेल, अशोक गहलोत, रणदीप सुरजेवाला, पी. चिदंबरम समेत तमान नेताओं को बाहर ही रोक लिया गया। धोखाधड़ी की साजिश रचने, फंड का गबन करने… आदि-इत्यादि का आरोप राहुल गाँधी पर लगा है। ध्यान दीजिए सिर्फ आरोप लगा है, साबित नहीं हुआ है। क्या करना चाहिए ऐसे में? आरोप का सामना कीजिए। जो भी जाँच एजेंसी है, उसके सामने बिना झुके खड़े हो जाइए। जितना पूछा जाए, सब कुछ खोल कर बता दीजिए… लेकिन नहीं! अपने ही बाप-दादा के बनाए कानूनों-संस्थानों के खिलाफ खड़ा होना है इन्हें। “राहुल गाँधी झुकेगा नहीं, सत्य झुकेगा नहीं” वाला फिल्मी डायलॉग मारना है। नेता यंग हो ना हो, एंग्री यंग मैन बने रहना है।

  • एक तरफ जहां कांग्रेस नेताओं ने सड़क पर उतरकर मार्च किया तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने जोरदार निशाना साधा है।
  • सड़क पर मार्च की पुलिस की तरफ से इजाजत नहीं मिलने के चलते पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में लिया गया।

नई दिल्‍ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट, नयी दिल्ली: 

नैशनल हेरल्‍ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पूछताछ की। राहुल सुबह करीब 11.30 बजे APJ अब्दुल कलाम रोड स्थित ईडी के मुख्यालय पहुंचे। ED सूत्रों के हवाले से ANI ने बताया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट (PMLA) की धारा 50 के तहत गांधी का बयान दर्ज कराया गया। पहले राउंड में राहुल से तीन घंटे से ज्‍यादा तक पूछताछ चली। इसके बाद उन्‍हें लंच के लिए बाहर जाने दिया गया। राहुल इस दौरान अपनी बहन प्रियंका के साथ मां सोनिया गांधी को देखने सर गंगाराम अस्‍पताल पहुंचे। सोनिया को कोविड-19 से जुड़ी दिक्‍कतों के चलते रविवार को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। ईडी ने पूछताछ के लिए उन्‍हें भी तलब किया है।

राहुल से ईडी के सवाल-

  1. यंग इंडियन कंपनी बनाने का निर्णय किसका था? क्या आप उस बैठक में शामिल थे यदि शामिल थे तो डिटेल?
  2. आपने यंग इंडियन की शुरुआती कितनी बैठकों में भाग लिया? इस कंपनी में आप डायरेक्टर कैसे बने?
  3. आपने शेयर किस तरह से खरीदें?
  4. शेयर खरीद के लिए कोई पैसा दिया था?
  5. यदि दिया था तो किस बैंक खाते से किस तरह?
  6. राहुल गांधी से सवालों के पहले बंच में पूछा जाएगा कि आपके कितने बैंक अकाउंट हैं ?
  7. किस किस बैंक में एकाउंट है ?
  8. क्या कोई बैंक अकाउंट विदेश में भी है?
  9. यदि है तो उसकी जानकारी?
  10. आपकी जायदाद कहां कहां हैं? क्या विदेश में भी जायदाद हैं ? यदि हां तो उनकी डिटेल

इसस पहले, ईडी दफ्तर के लिए राहुल गांधी कांग्रेस मुख्यालय से थोड़ी दूर तक पैदल ही चले. पुलिस ने इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोक दिया। सुबह करीब 11 बजे राहुल गांधी का काफिला ईडी ऑफिस पहुंचा. इससे पहले, पार्टी के प्रस्तावित मार्च के मद्देनजर पुलिस ने कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और पार्टी मुख्यालय के आसपास धारा 144 लगा दी गई। मुख्य विपक्षी दल के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ईडी को बीजेपी का ‘इलेक्शन मैनेजमेंट डिमार्टमेंट’ करार दिया और आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने कांग्रेस के ‘सत्याग्रह’ को रोकने के लिए नयी दिल्ली के इलाके में अघोषित आपातकाल लगा दिया है।

पूछताछ में राहुल गांधी कई सवालों का जवाब देने में असमर्थ रहे। जिस कंपनी से एक करोड़ का लोन आया था, राहुल गांधी ने उस शेल कंपनी के प्रोपराइटर्स के बारे में जानकारी होने से इंकार किया। शाम तक हुई पूछताछ के दौरान कुछ सवालों के जवाब में राहुल ने कहा कि अपने लोगों से पूछ कर बताऊंगा। साथ ही कुछ दस्तावेज देने को भी कहा।

कांग्रेस ने आरोपों को निराधार बताया

कांग्रेस का कहना है कि उसके शीर्ष नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं तथा ईडी की कार्रवाई प्रतिशोध की राजनीति के तहत की जा रही है। उसने यह भी कहा है कि वह एवं उसका नेतृत्व झुकने वाले नहीं है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सुरजेवाला ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों को निराधार करार देते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस एक राजनीतिक दल है और एक राजनीतिक दल किसी कंपनी में हिस्सेदारी नहीं खरीद सकता. इसलिए, ‘यंग इंडियन’ के नाम से एक गैर-लाभकारी कंपनी (नॉट फॉर प्रॉफिट कंपनी) को ‘नेशनल हेराल्ड’ एवं एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के शेयर दिए गए, ताकि 90 करोड़ रुपये का कर्ज खत्म हो सके।’’

कॉंग्रेस नेताओं के बयान-

  1. रणदीप सुरजेवाला: केसी वेणुगोपाल पर जानलेवा हमला किया गया।
  2. अशोक गहलोत: शांतिपूर्ण मार्च से सरकार को दिक्कत क्या है?
  3. भूपेश बघेल: आप इस शरीर को नष्ट कर सकते हैं, लेकिन विचारों को कैद नहीं कर सकते।
  4. प्रमोद तिवारी: राहुल गांधी पर फर्जी केस लगाया गया।
  5. दिग्विजय सिंह: मोदी जब डरते हैं ED को आगे करते हैं।
  6. सचिन पायलट: केंद्र सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
  7. शिवसेना नेता संजय राउत: राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई गैरकानूनी है। जो भी BJP के खिलाफ बोलता है, उस पर कार्रवाई होती है।
  8. रॉबर्ट वाड्रा: राहुल गांधी तमाम निराधार आरोपों से बरी होंगे और सत्य की जीत होगी।
  9. कार्ति चिदंबरम: मुझे ED के नोटिस सबसे ज्यादा बार मिले हैं। मैं ED के मामलों में कांग्रेस का विशेषज्ञ हूं।

राहुल का ED से सवाल –

भाजपा नेताओं के ब्यान :

  1. स्मृति ईरानी: जो लोग जेल से बेल पर है, वो जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
  2. संबित पात्रा : कैसे भ्रष्टाचार भी ‘सत्याग्रह’ कर सकता है
  3. मुख्तार अब्बास नकवी : कांग्रेस और भ्रष्टाचार एक दूजे के लिए बने हैं इससे एक बात साफ है कि कितनी बुरी तरह से कांग्रेस पार्टी फैमिली फोटो फ्रेम में फिक्स हो चुकी है।
  4. हेमंत विस्वा शर्मा CM असम: राहुल गांधी ने अपने नाटक के जरिए साबित कर दिया है कि उन्होंने कुछ गलत किया है।
  5. अनुराग ठाकुर : समय-समय पर कांग्रेस पार्टी संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्न चिन्ह खड़े करती रही और जिन्होंने लंबे समय तक देश पर राज किया, उनके ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं आज वो जांच एंजेसियों से डर रहे हैं। 

कांग्रेस को पंजाब और चंडीगढ़ के बाद हरियाणा में बड़ा झटका लग सकता है

कांग्रेस को पंजाब के बाद हरियाणा में बड़ा झटका लग सकता है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की है। ये मुलाकात केवल दोनों नेताओं के बीच हुई है, इस दौरान कोई अन्य नेता उपस्थित नहीं था। बीजेपी ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अब कुलदीप बिश्नोई को तय करना है कि कांग्रेस में मिल रहीं उपेक्षा के बाद भी वो किसके साथ रहना चाहते हैं। दरअसल, कुलदीप बिश्नोई पार्टी से प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पार्टी से नाराज चल रहे हैं। ये नाराजगी अब कांग्रेस पर भारी पड़ती हुई दिखाई दे रही है।

सारिका तिवारी राजनैतिक विशेषज्ञ, डेमोक्रेटिक फ्रंट, पंचकुला :

राज्य सभा चुनावों से पहले सियासी गलियारों में उथल-पुथल मची हुई हैं। वही सूत्रों के अनुसार हरियाणा के सीएम खट्टर से कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने मुलाकात की।हालांकि इस मुलाकात को सिर्फ एक विधायक और मुख्यमंत्री के बीच की ही बता रहे है। बीजेपी के मुताबिक बिश्नोई को तय करना है कि वह किस पार्टी में रहना चाहते हैं, क्योंकि कांग्रेस में भी बिश्नोई की उपेक्षा देखी जा रही है।

राज्यसभा चुनाव में राजस्थान और हरियाणा की लड़ाई दिलचस्प होती जा रही है। दोनों ही जगहों पर कांग्रेस की चिंता बढ़ती ही जा रही है। पार्टी को क्रॉस वोटिंग का खतरा सता रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को सुरक्षित स्थान पर घेराबंदी कर ली है। इस बीच हरियाणा कांग्रेस के नेता और विधायक कुलदीप बिश्नोई ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कहा है कि वह किसी के दबाव में आकर वोट नहीं करने जा रहे हैं।

हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों पर 10 जून को होने वाले मतदान से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। हरियाणा से कांग्रेस के 31 में से 28 विधायक गुरुवार दिल्ली पहुंचे। आदमपुर के विधायक कुलदीप बिश्नोई हाईकमान के बुलावे के बावजूद नहीं आए।

कुलदीप की नाराजगी से बढ़ी चिंताएं
कांग्रेस के पास हरियाणा में 31 विधायक हैं, लेकिन कुलदीप बिश्नोई की नाराजगी के कारण कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ गई है। कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष न बनाए जाने से नाराज चल रहे हैं और इसी कारण पार्टी मीटिंग में नहीं पहुंच रहे। अगर 10 जून को कुलदीप ने कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन के पक्ष में मतदान नहीं किया तो कांग्रेस के पास महज 30 विधायक रह जाएंगे।

कांग्रेस को आशंका है कि इन 30 में से भी कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। ऐसे में अजय माकन की जीत कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है।

कुलदीप बिश्नोई ने कहा, ‘मैं एक मजबूत कांग्रेसी रहा हूं और मैं किसी और से बात नहीं कर रहा हूं। राहुल गांधी से मिलने से पहले कोई फैसला नहीं करूंगा। तब तक मैं कांग्रेस के किसी मंच पर खड़ा नहीं होऊंगा। मैंने राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग पर फिलहाल फैसला नहीं किया है। मैं अपनी मर्जी से वोट करूंगा, किसी के दबाव में नहीं।”

हालांकि, बिश्नोई ने रणदीप सुरजेवाला की तारीफ की है। उन्होंने कहा, ”सुरजेवाला बहुत अच्छे राजनेता हैं, ऐसे व्यक्ति का राज्यसभा में होना जरूरी है। मैं राजस्थान के सभी कांग्रेस नेताओं से अनुरोध करता हूं कि वे सब कुछ भूलकर उनकी योग्यता के आधार पर उन्हें वोट दें।”

90 विधायकों वाली हरियाणा विधानसभा में राज्य सभा की 2 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। कांग्रेस ने यहां से अजय माकन को टिकट दिया है। वहीं भाजपा ने कृष्णलाल पंवार को प्रत्याशी बनाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा के बेटे कार्तिकेय शर्मा ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया है। हरियाणा में राज्यसभा सीट जीतने कांग्रेस के पास 31 विधायक हैं, लेकिन कार्तिकेय शर्मा की दावेदारी ने पेंच फंसा दिया है।

कार्तिकेय के ससुर कुलदीप शर्मा हरियाणा कांग्रेस पार्टी से विधायक हैं। गुरुवार को केंद्रीय नेतृत्व ने सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया था। उसके बाद सभी लोगों को रायपुर रवाना किया गया। सभी विशेष विमान से देर शाम रायपुर एयरपोर्ट पहुंचे। 

भाजपा के पास 40 व कांग्रेस के पास अपने 31 विधायक हैं। 31 विधायकों के समर्थन से कांग्रेसी प्रत्याशी की जीत तय है, लेकिन कांग्रेस को खतरा क्रॉस वोटिंग से है। ऐसा इसलिए कि कहीं 2016 की तरह की अप्रत्याशित घटना यानी पेनकांड न हो जाए। कोई विधायक अपना वोट रद्द ना करवा ले।

कार्तिकेय के पास भाजपा, जजपा, निर्दलीय और गोपाल कांडा का समर्थन है। हालांकि यह सभी मिलकर 31 तक नहीं पहुंचते हैं और गिनती में 28 ही बनते हैं, लेकिन कांग्रेस में जिस तरीके से पार्टी के अंदर ही कई नेताओं में नाराजगी चल रही है, उसे देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि कार्तिकेय उलटफेर कर सकते हैं। 

राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी की उम्मीदवारों की सूची

बीते दिनों उदयपुर में कांग्रेस के चिंतन शिविर में तमाम फैसले किए गए थे। इनमें से युवाओं पर दांव लगाना भी एक अहम फैसला था। यह अलग बात बात है कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस अपने ही लिए तमाम फैसले लागू नहीं कर सकेगी। इसकी एक बड़ी वजह यही है कि कांग्रेस पार्टी के पास राज्यसभा सीट कम और दावेदार कहीं ज्यादा हैं। इसके साथ ही पार्टी को एकजुट रखने के लिए आलाकमान पर कई वरिष्ठ नेताओं को राज्यसभा भेजने का भी दबाव है। ऐसे में पार्टी के लिए युवा नेताओं को राज्यसभा भेजना आसान नहीं होगा। दूसरी तरफ जिन राज्यों में कांग्रेस ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई है, वह भी राज्यसभा चुनाव को लेकर आंखे तरेर रहे हैं।

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़/नयी दिल्ली :

कांग्रेस ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। 10 नामों की जो सूची जारी की गई है, उसमें छत्तीसगढ़ से राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का नाम है। वहीं, हरियाणा से अजय माकन, कर्नाटक से जयराम रमेश, मध्य प्रदेश से विवेक तन्खा, महाराष्ट्र से इमरान प्रतापगढ़ी, राजस्थान से रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद तिवारी का नाम है। तमिलनाडु से पी चिदंबरम के नाम का ऐलान हुआ है।

10 उम्मीदवारों की सूची में कांग्रेस पार्टी ने अजय माकन को हरियाणा से, जयराम रमेश को कर्नाटक से, पी चिदंबरम को तमिलनाडु से, प्रमोद तिवारी, रणदीप सुरजेवाला और मुकुल वासनिक को राजस्थान, विवेक तन्खा को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाया है। वहीं, इमरान प्रतापगढ़ी को महाराष्ट्र से और राजीव शुक्ला को छत्तीसगढ़ से उम्मीदवार घोषित किया है।

बीजेपी ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए 16 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। इनमें केंद्रीय मंत्रियों पीयूष गोयल और निर्मला सीतारमण को महाराष्ट्र और कर्नाटक से उम्मीदवार बनाया गया है। इन 16 उम्मीदवारों में से छह उत्तर प्रदेश से हैं।

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अखिलेश ने हिंदू धर्म का उड़ाया मजाक, कहा- ज्ञानवापी मामला BJP बढ़ा रही है

एक तरफ अदालत में ज्ञानवापी को लेकर बहस जारी है कि वो मस्जिद है या फिर मंदिर है, दावे अपने-अपने हैं और इन दावों को झुठलाने और सही साबित करने के लिये वार और पलटवार भी किया जा रहा है। जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई जारी है, तो वहीं सियासत भी तेज हो चुकी है। हालांकि अखिलेश यादव से उनकी पार्टी के लोग ही सहमत नहीं दिख रहे। अखिलेश ने आगे कहा कि “मुख्यमंत्री योगी जी गरीबों की दुकान हटाना चाहते है, होर्डिंग हटाना चाहते है। पहले गरीब को राशन दिया। अब उनकी महंगे दाम में वसूली करना चाहते है। प्रदेश में बिजली कटौती जारी है। इसके बीच लोगों के घरों में बिजली का बिल पहुंचने लगा है। बिजली का बिल न देने पर उन्हें धमकाया जा रहा है।” समाजवादी पार्टी की नेता रूबीना खानम ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाना गलत है।

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, अयोध्याजी/ नयी दिल्ली :  

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अखिलेश यादव जो यादवों के प्रतिनिधि हिन्दू धर्म के बारे में जो सोचते हैं वही उनके बयानों में सामने आता है। वाराणसी के ज्ञानवापी सर्वे पर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि हिंदू धर्म में में कहीं पर भी पत्थर रख दो, एक लाल झंडा रख दो, पीपल के पेड़ के नीचे तो मंदिर बन गया। अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके उन्होंने इशारों ही इशारों में बाबरी मस्जिद को लेकर भी बड़ी बात कह दी। उन्होंने कहा कि एक समय था जब रात के समय मूर्तियां रख दी गई थी। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद से सियासी राज छिड़ा हुआ है। भाजपा ने इसे समाजवादी पार्टी की तुष्टिकरण की राजनीति बताया।

सिद्धार्थनगर से लौटते समय अखिलेश अयोध्या में रुके थे, यहां पर उन्होंने एक होटल में प्रेस कांफ्रेंस की। कहा कि देश में महंगाई बढ़ी है, वह भाजपा ने बढ़ाई है। भाजपा ज्ञानवापी का मुद्दा जानबूझकर उठा रही है। अभी तक एक योजना चला रही थी, कि वन नेशन वन राशन, लेकिन अब योजना चला रही है कि वन नेशन वन उद्योगपति। सभी का ध्यान ज्ञानवापी मस्जिद की ओर करके भाजपा उद्योगों को बेच रही है।

अखिलेश ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के बहाने सरकार गेहूं को विदेश भेजकर कुछ लोगों को फायदा पहुंचा रही है। सभी ने निर्यात पर रोक लगाए जाने का समाचार पढ़ा और सुना होगा, लेकिन गेहूं विदेश भेजने का नहीं सुना होगा। देश के बंदरगाहों पर खड़े हजारों ट्रक गेहूं रोक के बावजूद भी विदेश भेज दिए गए।

अखिलेश यादव ने कहा कि अयोध्या जैसे पवित्र स्थान पर 5 साल की बच्ची से रेप होता है। वहां बुलडोजर नहीं चलाया गया। केवल गरीब पर चलता है। एक व्यक्ति सब्जी लेने गया था, उस पर भी बुलडोजर चल गया। अखिलेश ने बिजली को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री गरीबों की दुकान हटाना चाहते है, होर्डिंग हटाना चाहते हैं। पहले गरीब को राशन दिया। अब उनकी महंगे दाम में वसूली करना चाहते है। प्रदेश में बिजली कटौती जारी है।

उधर ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जमीयत उलेमा ए हिन्द (महमूद मदनी ग्रुप) ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बयान जारी कर कहा है कि ऐसे मामलों को लेकर सार्वजनिक प्रदर्शन करने से बचना होगा।

उलेमा, वक्ताओं और गणमान्य व्यक्तियों और टीवी पर बहस करने वालों से अपील है कि वह टीवी डिबेट और बहस में भाग लेने से परहेज करें। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए सार्वजनिक डिबेट में भड़काऊ बहस और सोशल मीडिया पर भाषणबाजी किसी भी तरह से देश और मुसलमानों के हित में नहीं है।

मौलाना महमूद मदनी

प्रेस नोट में लिखा है कि ज्ञानवापी मस्जिद जैसे मुद्दे को सड़क पर न लाया जाए और सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रदर्शनों से बचा जाए। इस मामले में मस्जिद इंतेजामिया कमेटी एक पक्षकार के रूप में विभिन्न अदालतों में मुकदमा लड़ रही है। उनसे उम्मीद है कि वे इस मामले को अंत तक मजबूती से लड़ेंगे। देश के अन्य संगठनों से अपील है कि वे इसमें सीधे हस्तक्षेप न करें। जो भी सहायता करनी है, वह अप्रत्यक्ष रूप से इंतेजामिया कमेटी की की जाए।

बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर मंगलवार को मौलाना राबे हसन नदवी के नेतृत्व में आपातकालीन बैठक की थी। उस बैठक में बोर्ड से जुड़े देशभर के 45 सदस्य शामिल हुए थे, जिसमें तय हुआ कि बाबरी मस्जिद की तरह देश की दूसरी मस्जिदों को हाथ से नहीं जाने देंगे, वो चाहे काशी की ज्ञानवापी मस्जिद हो या फिर मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद।

सपा प्रमुख ने केंद्र पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश में उद्योगपतियों को बड़ी-बड़ी चीजें बेची जा रही हैं। कंपनियाँ बिक रही हैं, बैंक मर्ज हो रहे हैं, एलआईसी का निजीकरण हो रहा है, एयरपोर्ट बिक रहे हैं, राज्य का गेहूँ विदेशों में बेचा जा रहा है… अखिलेश के अनुसार, ज्ञानवापी का मामला इन्हीं सब मामलों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया है।

वह वर्तमान सरकार पर ‘फूट डालो राज करो’ वाली नीति पर चलने का इल्जाम मढ़ते हैं। वह कहते हैं कि अंग्रेजों ने जिस तरह से डिवाइड एंड रूल किया उसी तरीके से भाजपा भी यही नियम अपना रही है। ये सिद्धांत कई साल पुराना जिसे अंग्रेज इस्तेमाल करते थे। जनता के साथ इतना अन्याय और उत्पीड़न कभी नहीं हुआ, जितना इस सरकार में हो रहा है। ये सरकार केवल डरा कर धर्म और जाति के नाम पर डरा रही है।

‘सती अनुसूया’ जयंती

भगवान विष्णु के अवतार दत्तात्रेय के जन्म के बारे में कथा के अनुसार सती अनुसूया की कोख से ब्रह्मा जी के अंश से चंद्रमा, विष्णु जी के अंश से दत्तात्रेय और शिव जी के अंश से दुर्वासा मुनि ने जन्म लिया था।

डेमोक्रेटिक फ्रंट, धर्म डेस्क, चंडीगढ़ – 20 अप्रैल :

सती अनुसुया को पतिव्रता धर्म के लिए जाना जाता है। इस वर्ष इनकी जयंती 20 अप्रैल 2022 को मनाई जाएगी। देवी अनुसुईया की पवित्रता और उनका साध्वी रुप सभी विवाहित महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत रहा है। देवी अनुसुईया जयंती के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा आरती की जाती है। विवाहित महिलाएं इस दिन के व्रत का पालन कर, सती अनुसुईया के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेती है। देवी अनुसुईया प्रसन्न होकर अपने भक्तों के दुख दूर करती हैं और उन्हें अखंड सौभाग्यवती होने का वर देती है। भारत वर्ष के उतराखंड राज्य में देवी अनुसुईया का एक प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह वहीं स्थान है जहां माता देवी की परीक्षा त्रिदेवों ने ली थी। माता अनुसुईया के जन्मदिवस के अवसर पर स्त्रियां अपने वैवाहिक स्त्री धर्म का पालन करते हुए सती अनुसुईयां जयंती का पूजन करती है।

यह माना जाता है कि उत्तराखंड में स्थित माता अनुसुईया के मंदिर में रात्रि में जप और जागरण करने की परंपरा है। इस मंदिर में निसंतान दंपत्ति जप और जागरण कर पूजा अर्चना कर संतान कामना करते है। यह जप-तप, अनुष्ठान शनिवार की रात्रि में करने का प्रावधान है। इस मंदिर को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है कि इस मंदिर में त्रिदेव माता की परीक्षा लेने के लिए बालक रुप में आए थे और तीनों देवों ने देवी से भोजन कराने की प्रार्थना की। देवी ने अपने सतीत्व से त्रिदेवों को पहचान लिया, इससे त्रिदेव असली रुप में आ गए। माता अनुसुईया से भगवान शिव दुर्वासा के रुप में मिले थे।

दक्ष प्रजापति की चौबीस कन्याओं में से एक थी अनुसूया जो मन से पवित्र एवं निश्छल प्रेम की परिभाषा थीं इन्हें सती साध्वी रूप में तथा एक आदर्श नारी के रूप में जाना जाता है. अत्यन्त उच्च कुल में जन्म होने पर भी इनके मन में कोई अंह का भाव नहीं था.

इनका संपूर्ण जीवन ही एक आदर्श रहा है. पौराणिक तथ्यों के आधार की यदि बात की जाए तो माता सीता जी भी इनके तेज से बहुत प्रभावित हुई थी तथा उनसे प्राप्त भेंट को सहर्ष स्वीकार करते हुए नमन किया. अनुसूया जी का विवाह ब्रह्मा जी के मानस पुत्र परम तपस्वी महर्षि अत्रि जी के साथ हुआ था. अपने सेवा तथा समर्पित प्रेम से इन्होंने अपने पति धर्म का सदैव पालन किया.

कहा जाता है कि देवी अनसुया बहुत पतिव्रता थी जिस कारण उनकी ख्याती तीनों लोकों में फैल गई थी. उनके इस सती धर्म को देखकर देवी पार्वती, लक्ष्मी जी और देवी सरस्वती जी के मन में द्वेष का भाव जागृत हो गया था. जिस कारण उन्होंने अनसूइया कि सच्चाई एवं पतीव्रता के धर्म की परिक्षा लेने की ठानी तथा अपने पतियों शिव, विष्णु और ब्रह्मा जी को अनसूया के पास परीक्षा लेने के लिए भेजना चाहा.

भगवानों ने देवीयों को समझाने का पूर्ण प्रयास किया किंतु जब देवियां नहीं मानी तो विवश होकर तीनो देवता ऋषि के आश्रम पहुँचे. वहां जाकर देवों ने सधुओं का वेश धारण कर लिया और आश्रम के द्वार पर भोजन की मांग करने लगे. जब देवी अनसूया उन्हें भोजन देने लगी तो उन्होंने देवी के सामने एक शर्त रखी की वह तीनों तभी यह भोजन स्वीकार करेंगे जब देवी निर्वस्त्र होकर उन्हें भोजन परोसेंगी. इस पर देवी चिंता में डूब गई वह ऎसा कैसे कर सकती हैं. अत: देवी ने आंखे मूंद कर पति को याद किया इस पर उन्हें दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई तथा साधुओं के वेश में उपस्थित देवों को उन्होंने पहचान लिया. तब देवी अनसूया ने कहा की जो वह साधु चाहते हैं वह ज़रूर पूरा होगा किंतु इसके लिए साधुओं को शिशु रूप लेकर उनके पुत्र बनना होगा.साधुओं का अपमान न हो इस डर से घबराई अनुसूइया ने पति का स्मरण कर कहा कि यदि मेरा पतिव्रत्य धर्म सत्य है तो ये तीनों साधु 6 मास के शिशु हो जाएं। इस बात को सुनकर त्रिदेव शिशु रूप में बदल गए जिसके फलस्वरूप माता अनसूइया ने देवों को अनुसूइया ने माता बनकर त्रिदेवों को स्तनपान  भोजन करवाया. इस तरह तीनों देव माता के पुत्र बन कर रहने लगे.

इस पर अधिक समय बीत जाने के पश्चात भी त्रिदेव देवलोक नहीं पहुँचे तो पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती जी चिंतित एवं दुखी हो गई  तब नारद ने त्रिदेवियों को सारी बात बताई। त्रिदेवियां ने अनुसूइया से क्षमा याचना की। तब अनुसूइया ने त्रिदेव को अपने पूर्व रूप में ला दिया। प्रसन्नचित्त त्रिदेवों ने देवी अनुसूइया को उनके गर्भ से पुत्र रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। तब ब्रह्मा अंश से चंद्र, शंकर अंश से दुर्वासा व विष्णु अंश से दत्तात्रेय का जन्म हुआ।

इस पर तीनों देवियों ने सती अनसूइया के समक्ष क्षमा मांगी एवं अपने पतियों को बाल रूप से मूल रूप में लाने की प्रार्थना की ऐस पर माता अनसूया ने त्रिदेवों को उनका रूप प्रदान किया और तभी से वह मां सती अनसूइया के नाम से प्रसिद्ध हुई. स्त्रियां मां सती अनसूया से पतिव्रता होने का आशिर्वाद पाने की कामना करती हैं. प्रति वर्ष सती अनसूइया जी जयंती का आयोजन किया जाता है. इस उत्सव के समय मेलों का भी आयोजन होता है. रामायण में इनके जीवन के विषय में बताया गया है जिसके अनुसार वनवास काल में जब राम, सीता और लक्ष्मण जब महर्षि अत्रि के आश्रम में जाते हैं तो अनुसूया जी ने सीता जी को पतिव्रत धर्म की शिक्षा दी थी

हिमाचल में AAP पर AAP ने चलाया ‘झाड़ू’, प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी समेत 3 बड़े नेता BJP में शामिल हुए

आम आदमी पार्टी के नेताओं के भाजपा में शामिल हो जाने से प्रदेश में भाजपा का कुनबा और बढ़ गया है। हिमाचल विधान सभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। AAP के हिमाचल के प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी और संगठन मंत्री भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस मौके पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि, प्रदेश में भाजपा और मजबूत हुई है। आने वाले विधानसभा चुनावों में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) से असंतुष्ट इन नेताओं के भाजपा में शामिल होने से प्रदेश में पार्टी की ताकत बढ़ी है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

आम आदमी पार्टी को हिमाचल विधान सभा चुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका लगा है। AAP पार्टी के हिमाचल के प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री ने भाजपा में शामिल हो गए हैं। AAP के प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी, संगठन महामंत्री सतीश ठाकुर समेत कई नेता भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हो गए हैं। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने तीनों नेताओं को नड्डा के आवास पर शुक्रवार देर रात भाजपा में शामिल करवाया। अनुराग ने ट्वीट कर इसकी जानकारी शेयर की। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने तीनों नेताओं को नड्डा के आवास पर शुक्रवार देर रात भाजपा में शामिल करवाया। अनुराग ने ट्वीट कर इसकी जानकारी शेयर की।

AAP के महासचिव सतीश ठाकुर और ऊना जिला प्रमुख इकबाल सिंह के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से दिल्ली में भाजपा की सदस्यता लेने के बाद केसरी ने कहा कि केजरीवाल पार्टी नेताओं से मिलते तक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में रैली के दौरान केजरीवाल ने स्थानीय नेताओं की तरफ देखा भी नहीं।

बकौल केसरी, “हिमाचल प्रदेश में हम पार्टी के लिए 8 वर्षों से पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम कर रहे थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने मंडी में रैली और रोड शो के दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी की। राज्य के AAP कार्यकर्ताओं ने इस अनदेखी को अपना अपमान माना और पार्टी छोड़ दी।”

मंडी में रोड शो के दौरान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने को लेकर केसरी ने कहा कि जो दिन-रात पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, उन लोगों की तरफ केजरीवाल ने देखा तक नहीं। रोड शो के दौरान केवल अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मुख्य आकर्षण थे।

अनुराग ठाकुर ने अपने अगले ट्वीट में लिखा है, “आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की नीति व नेतृत्व में विरोधी भी आस्था जता रहे हैं, क्योंकि उपेक्षा की, उत्पीड़न की, प्रताड़ना की नहीं बल्कि सबका साथ, सबका विकास सबका विश्वास के मूलमंत्र के साथ जोड़ने में भरोसा रखते हैं।”

भाजपा के साथ आए इन नेताओं ने हिमाचल प्रदेश से आने वाले भाजपा के कद्दावर नेता अनुराग सिंह ठाकुर और जेपी नड्डा (JP Nadda) के साथ मिलकर काम करने और भाजपा को मजबूत करने का आश्वासन दिया है।

आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। हिमाचल प्रदेश में फिलहाल भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और इस बार आम आदमी पार्टी वहां पूरी ताकत से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंडी जिले में रोड शो किया और कहा कि पंजाब की तरह हिमाचल प्रदेश में भी इस बार बदलाव होगा। वहीं, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी अरविंद केजरीवाल से घबराई हुई है और इसलिए चुनाव से पहले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को हटाकर अनुराग ठाकुर को सीएम बना सकती है।