वामपंथियों के इतिहास पर भरी पड़ा राम लल्ला का अस्तित्व

इसमे विचारणीय प्रश्न यह है कि इस सर्वेक्षण को रोमिला थापर और इरफान हबीब जैसे वामपंथि झुठला रहे थे और इसका मजाक बना रहे थे तो इनके लिखे साहित्य कितने विश्वसनीय है ?
अब जब विवाद का निस्तारण हो चुका है सभी पक्ष संतुष्ट है पूरे देश के नागरिक सम्मान कर रहे है केन्द्र सरकार का दायित्व है कि शीघ्र ही इस फैसले का ट्रस्ट बनाकर क्रियान्वयन करे

दिनेश पाठक अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर। विधि प्रमुख विश्व हिन्दु परिषद

आखिर देश का बहुप्रतिक्षित निर्णय एक ऐतिहासिक निर्णय के रुप मे सामने आ ही गया ! देश की सरकारों और अदालतों ढुलमुल रवैये से परिचित देश की जनता के सामने मुख्यन्यायधीश रंजन गोगोई ने न्यायपालिका की समृद्ध ,बृहद एवं सम्मानजनक छवि पेश की राम जन्मभूमि के निर्णय से देश के आमजन मे न्यायपालिका के प्रति आस्था मे अकल्पनीय वृद्धि हुई है !

1949 से लम्बित प्रकरण रामजन्म भूमी बाबरी मस्जिद का सत्तर साल बाद उस समय निपटारा हो गया जब देश की सर्वोच्च अदालत ने शनिवार 9 नवम्बर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया ।

माननीय मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के अन्य सदस्य माननीय न्यायाधीश गण जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस चन्द्रचूड, जस्टिस ए नजीर ने चालीस दिन लगातार चली सुनवाई को निर्णय तक पहुंचा कर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुये रामलला को अयोध्या मे विरजमान कर दिया। देश के लिये सबसे अच्छी खबर इस निर्णय मे यह रही कि निर्णय बहुमत से नही सर्वमत से आया पीठ के किसी भी सदस्य ने किसी भी मुद्दे पर अपने सहयोगी न्यायाधीश से असहमति नही जताई सबने पूरा निर्णय एकमत होकर दिया जो इस निर्णय को ऐतिहासिक बनाता है जो न्यायपालिका के लिये एक लैणडमार्क निर्णय होगा ।

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बिल्कुल अन्तिम है और देश के हर नागरिक को इसका सम्मान करना चाहिये हालांकि कोई भी पक्ष इसका रिव्यू कर सकता है जिसे सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही सुन सकता है ।

इस ऐतिहासिक फैसले सबसे बडी बात यह रही कि न्यायालय ने इसका फैसला आस्था पर न करके मामले के तथ्य और सबूतो के आधार किया जिस कारण फैसला सर्वानुमति से आया ! इस फैसले मे तथ्यो का गहराई से विश्लेषण किया सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली स्थान पर नही बनी इसके नीचे कोई ढांचा था लेकिन वो ढाचा इस्लामिक नही था इसके लिये सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्यो को सही माना जिसने अपने सर्वेक्षण मे बाबरी मस्जिद ने नीचे धर्मिक ढांचा माना और इस सर्वेक्षण को सुप्रीम कोर्ट नकार नही सका। इसमे विचारणीय प्रश्न यह है कि इस सर्वेक्षण को रोमिला थापर और इरफान हबीब जैसे वामपंथि झुठला रहे थे और इसका मजाक बना रहे थे तो इनके लिखे साहित्य कितने विश्वसनीय है ?

सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यो को देखते हुये यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर अपना निर्बाद अधिकार को साबित नही कर पाया इस बात के भी सबूत नही मिले कि ब्रिटिश काल मे 18 वीं सदी तक नमाज वहां पढ़ी जाती थी लेकिन हिन्दुओ ने पूजा करना नही छोडा। इस तरह न्यायलय ने तथ्यो का गहराई से विश्लेषण कर 1885 मे संत रघुवरदास द्वारा फैजाबाद की जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक 134 वर्ष पुराने विवाद का अंत मुख्य न्यायाधीश ने अपनी सेवानिवृत की तारीख से आठ दिन पहले एक निश्चित समय सीमा मे रहते सब कुछ छोडकर कर दिया। इसके लिये सभी पांचो न्यायाधीश श्रद्धा और नमन के पात्र है जिनकी दृढ इच्छा शक्ति के चलते सैकडो बर्षो से चले आ रहे तनाव के माहौल को शांत कर दिया। इस कार्य मे जितना श्रेय न्याये को है उतना ही विवाद से समबन्धित पक्षकारों का उनके वकीलों का और उत्तर प्रदेश और केन्द्र सरकार को भी जाता है जिन्होंने इस विवाद के निपटारे को अंजाम तक पहुचाने मे न्यायालय का सहयोग किया ! विशेषकर केन्द्र की भाजपा सरकार का। क्योकि विवाद बहुत पुराना था बहुत सरकारे बनी क ई प्रधानमंत्री आसीन हुये लेकिन किसी सरकार ने कभी ऐसी इच्छा शक्ति नही दिखाई कि इस विवाद का निपटारा हो क्योकि नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक सारे प्रधानमंत्री को एक डर था कि यदि इसका फैसला आता है तो उसके बाद एक समुदाय उनसे नाराज हो जायेगा साथ ही यह भी डर था कि फैसले के बाद देश मे क्या हालात होंगे जिसके चलते कोई सरकार नही चाहती थी कि इसका फैसला हो।

लेकिन पहली बार देश मे ऐसी सरकार आई जिसका नेतृत्व नरेन्द्र मोदी कर रहे है और सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र सरकार ने पूरा सहयोग तो किया ही दोनो को एक दूसरे पर यकीन था केन्द्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट पर कि वो इसका फैसला कर सकती है एवं सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र सरकार पर कि वो फैसले के बाद स्थिति को संभाल लेगी जैसे कि कश्मीर मे संभाला।

अब जब विवाद का निस्तारण हो चुका है सभी पक्ष संतुष्ट है पूरे देश के नागरिक सम्मान कर रहे है केन्द्र सरकार का दायित्व है कि शीघ्र ही इस फैसले का ट्रस्ट बनाकर क्रियान्वयन करे

अब देश में होंगे 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर अब राज्य नहीं

इतिहास के पटल पर आज 31 अक्तूबर का दिन खास तौर पर दर्ज़ हो गया जब आज आधी रात से  जम्मू कश्मीर का राज्य के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया ।

यह पहला मौका है जब एक राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया हो। आज आधी रात से फैसला लागू होते ही देश में राज्यों की संख्या 28 और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या नौ हो गई है।

आज जी सी मुर्मू और आर के माथुर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रथम उपराज्यपाल के तौर पर बृहस्पतिवार को शपथ लेंगे।

श्रीनगर और लेह में दो अलग-अलग शपथ ग्रहण समारोहों का आयोजन किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल दोनों को शपथ दिलाएंगी।

सरकार ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला किया था, जिसे संसद ने अपनी मंजूरी दी। इसे लेकर देश में खूब सियासी घमासान भी मचा। 

भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में जम्मू-कश्मीर को दिया गया विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने की बात कही थी और मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के 90 दिनों के भीतर ही इस वादे को पूरा कर दिया। इस बारे में पांच अगस्त को फैसला किया गया।


सरदार पटेल की जयंती पर बना नया इतिहास 


सरदार पटेल को देश की 560 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय का श्रेय है। इसीलिए उनके जन्मदिवस को ही इस जम्मू कश्मीर के विशेष अस्तित्व को समाप्त करने के लिए चुना गया।
देश में 31 अक्टूबर का दिन राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। आज पीएम मोदी गुजरात के केवडिया में और अमित शाह दिल्ली में अगल-अलग कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। कश्मीर का राज्य के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया। इसके साथ ही दो केंद्रशासित प्रदेशों का दर्जा मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया है। नए केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अस्तित्व में आए हैं।

 जम्मू और कश्मीर में आतंकियों की बौखलाहट एक बार फिर सामने आई है. आतंकियों ने कुलगाम में हमला किया है, जिसमें 5 मजदूरों की मौत हो गई है. जबकि एक घायल है. मारे गए सभी मजदूर कश्मीर से बाहर के हैं. जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से घाटी में ये सबसे बड़ा आतंकी हमला है. आतंकियों की कायराना हरकत से साफ है कि वे कश्मीर पर मोदी सरकार के फैसले से बौखलाए हुए हैं और लगातार आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं.

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने कहा कि सुरक्षा बलों ने इस इलाके की घेराबंदी कर ली है और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चल रहा है. अतिरिक्त सुरक्षा बलों को बुलाया गया है. माना जा रहा है कि मारे गए मजदूर पश्चिम बंगाल के थे.

ये हमला ऐसे समय हुआ है जब यूरोपियन यूनियन के 28 सांसद कश्मीर के दौरे पर हैं. सांसदों के दौरे के कारण घाटी में सुरक्षा काफी कड़ी है. इसके बावजूद आतंकी बौखलाहट में किसी ना किसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं. डेलिगेशन के दौरे के बीच ही श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर के कुछ इलाकों में पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं.

जम्मू एवं से अनुच्छेद-370 हटने के बाद यूरोपीय संघ के 27 सांसदों के कश्मीर दौरे को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा सवाल उठाने पर भारतीय जनता पार्टी ने जवाब दिया है. पार्टी का कहना है कि कश्मीर जाने पर अब किसी तरह की रोक नहीं है. देसी-विदेशी सभी पर्यटकों के लिए कश्मीर को खोल दिया गया है, और ऐसे में विदेशी सांसदों के दौरे को लेकर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं है.

भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा, ‘कश्मीर जाना है तो कांग्रेस वाले सुबह की फ्लाइट पकड़कर चले जाएं. गुलमर्ग जाएं, अनंतनाग जाएं, सैर करें, घूमें-टहलें. किसने उन्हें रोका है? अब तो आम पर्यटकों के लिए भी कश्मीर को खोल दिया गया है.’शहनवाज हुसैन ने कहा कि जब कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटा था, तब शांति-व्यवस्था के लिए एहतियातन कुछ कदम जरूर उठाए गए थे, मगर हालात सामान्य होते ही सब रोक हटा ली गई. उन्होंने कहा, ‘अब हमारे पास कुछ छिपाने को नहीं, सिर्फ दिखाने को है.’

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘जब कश्मीर में तनाव फैलने की आशंका थी, तब बाबा बर्फानी के दर्शन को भी तो रोक दिया गया था. यूरोपीय संघ के सांसद कश्मीर जाना चाहते थे. वे पीएम मोदी से मिले तो अनुमति दी गई. कश्मीर को जब आम पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है तो विदेशी सांसदों के जाने पर हायतौबा क्यों? विदेशी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर जाने से पाकिस्तान का ही दुष्प्रचार खत्म होगा.’

आठ दिन और छ्ह फैसले

सारिका तिवारी, चंडीगढ़ 31-अक्टूबर:

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई नवंबर की 17 तारीख को रिटाइर हो रहे हैं  उन्हें छह महत्त्वपूर्ण मामलों में फैसला सुनाना है। सुप्रीम कोर्ट में इस समय दिवाली की छुट्टियां चल रही हैं और छुट्टियों के बाद अब काम 4 नवंबर को शुरू होगा।

अयोध्या बाबरी मस्जिद मामला, राफल समीक्षा मामला , राहुल पर अवमानना मामला, साबरिमाला , मुख्य न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न का मामला और आर टी आई अधिनियम पर फैसले आने हैं।

अयोध्या-बाबरी मस्जिद का मामला इन सभी मामलों में सर्वाधिक चर्चित है अयोध्या-बाबरी मस्जिद का मामला। पांच जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई पूरी कर चुकी है और 16 अक्टूबर को अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा। इस पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ही कर रहे हैं। इस विवाद में अयोध्या, उत्तर प्रदेश में स्थित 2 .77 एकड़ विवादित जमीन पर किसका हक़ है, इस बात का फैसला होना है। हिन्दू पक्ष ने कोर्ट में कहा कि यह भूमि भगवान राम के जन्मभूमि के आधार पर न्यायिक व्यक्ति है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना था कि मात्र यह विश्वास की यह भगवान राम की जन्मभूमि है, इसे न्यायिक व्यक्ति नहीं बनाता। दोनों ही पक्षों ने इतिहासकारों, ब्रिटिश शासन के दौरान बने भूमि दस्तावेजों, गैज़ेट आदि के आधार पर अपने अपने दावे पेश किये है। इस सवाल पर कि क्या मस्जिद मंदिर की भूमि पर बनाई गई? आर्किओलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट भी पेश की गई।

 रफाल समीक्षा फैसला मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में एसके कौल और केएम जोसफ की पीठ के 10 मई को रफाल मामले में 14 दिसंबर को दिए गए फैसले के खिलाफ दायर की गई समीक्षा रिपोर्ट पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह मामला 36 रफाल लड़ाकू विमानों के सौदे में रिश्वत के आरोप से संबंधित है। इस समीक्षा याचिका में याचिकाकर्ता एडवोकेट प्रशांत भूषण और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने मीडिया में लीक हुए दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट में तर्क दिया कि सरकार ने फ्रेंच कंपनी (Dassault) से 36 फाइटर जेट खरीदने के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण सूचनाओं को छुपाया है। कोर्ट ने इस मामले में उन अधिकारियों के विरुद्ध झूठे साक्ष्य देने के सन्दर्भ में कार्रवाई भी शुरू की जिन पर यह आरोप था कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को गुमराह किया है। 10 अप्रैल को अदालत ने इस मामले में द हिन्दू आदि अखबारों में लीक हुए दस्तावेजों की जांच करने के केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों को दरकिनार कर दिया था। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि ये दस्तावेज सरकारी गोपनीयता क़ानून का उल्लंघन करके प्राप्त किए गए थे, लेकिन पीठ ने इस प्रारंभिक आपत्तियों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि साक्ष्य प्राप्त करने में अगर कोई गैरकानूनी काम हुआ है तो यह इस याचिका की स्वीकार्यता को प्रभावित नहीं करता।

राहुल गांधी के “चौकीदार चोर है” बयान पर दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा रफाल सौदे की जांच के लिए गठित मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ मीनाक्षी लेखी की अवमानना याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रखा। राहुल गांधी ने रफाल सौदे को लक्ष्य करते हुए यह बयान दिया था कि “चौकीदार चोर है।” कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी इस टिपण्णी के लिए माफी मांग ली थी।

सबरीमाला समीक्षा फैसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने सबरीमाला मामले में याचिकाकर्ताओं को एक पूरे दिन की सुनवाई देने के बाद समीक्षा याचिका पर निर्णय को फरवरी 6 को सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोगोई की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति खानविलकर, न्यायमूर्ति नरीमन, न्यायमूर्ति चंद्रचूड और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की संविधान पीठ ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में ट्रावनकोर देवस्वोम बोर्ड, पन्दलम राज परिवार और कुछ श्रद्धालुओं ने 28 दिसंबर 2018 को याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी थी। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में अपनी दलील में यह भी कहा था कि संवैधानिक नैतिकता एक व्यक्तिपरक टेस्ट है और आस्था के मामले में इसको लागू नहीं किया जा सकता। धार्मिक आस्था को तर्क की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता। पूजा का अधिकार देवता की प्रकृति और मंदिर की परंपरा के अनुरूप होना चाहिए। यह भी दलील दी गई थी कि फैसले में संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत ‘अस्पृश्यता’ की परिकल्पना को सबरीमाला मंदिर के सन्दर्भ में गलती से लाया गया है और इस क्रम में इसके ऐतिहासिक सन्दर्भ को नजरअंदाज किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई के अधीन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने 4 अप्रैल को सीजेआई कार्यालय के आरटीआई अधिनियम के अधीन होने को लेकर दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल ने दिल्ली हाईकोर्ट के जनवरी 2010 के फैसले के खिलाफ चुनौती दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सीजेआई का कार्यालय आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2(h) के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’है। वित्त अधिनियम 2017 की वैधता पर निर्णय ट्रिब्यूनलों के अधिकार क्षेत्र और स्ट्रक्चर पर डालेगा प्रभाव राजस्व बार एसोसिएशन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रखा। इस याचिका में वित्त अधिनियम 2017 के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जिनकी वजह से विभिन्न न्यायिक अधिकरणों जैसे राष्ट्रीय हरित अधिकरण, आयकर अपीली अधिकरण, राष्ट्रीय कंपनी क़ानून अपीली अधिकरण के अधिकार और उनकी संरचना प्रभावित हो रही है। याचिकाकर्ता की दलील थी कि वित्त अधिनियम जिसे मनी बिल के रूप में पास किया जाता है, अधिकरणों की संरचना को बदल नहीं सकता।

यौन उत्पीडन मामले में सीजेआई के खिलाफ साजिश मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के खिलाफ यौन उत्पीडन के आरोपों की साजिश की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति एके पटनायक ने की और जांच में क्या सामने आता है, इसका इंतज़ार किया जा रहा है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, आरएफ नरीमन और दीपक गुप्ता की पीठ ने न्यायमूर्ति पटनायक को एडवोकेट उत्सव बैंस के दावों के आधार पर इस मामले की जांच का भार सौंपा था। उत्सव बैंस ने कहा था कि उनको किसी फ़िक्सर, कॉर्पोरेट लॉबिस्ट, असंतुष्ट कर्मचारियों ने सीजेआई के खिलाफ आरोप लगाने के लिए एप्रोच किया था। ऐसा समझा जाता है कि न्यायमूर्ति पटनायक ने इस जांच से संबंधित अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।


जो काँग्रेस राहुल की नहीं सुनती भला वो जनता की क्या सुनेगी

सरिका तिवारी, 15 अक्टूबर – पंचकुला :

भाजपा पर कटाक्ष करते अवतरित हुए राहुल गांधी ने सत्ता आसीन भाजपा को निष्क्रिय बताते हुए कहां की जनसाधारण कर अदा करते करते कर्जदार हो गया है। कड़ी भर्त्सना झेलने के बाद चुनाव पटल से ओझल हुए राहुल यकायक महाराष्ट्र में आरोप प्रत्यारोप लेकर आ धमके। महाराष्ट्र में हालांकि कांग्रेस न तो अपने आपको टीका पा रही है और ना ही फडणवीस का कोई विकल्प है फिर भी विपक्ष खिसियानी बिल्ली की तरह खंबा नोच रहा है या यूं कहा जाए कि अपना ही सर नोच रहा है।

अब तो महाराष्ट्र पहुंच ही गए हैं तो एक आध दिन में हरियाणा में भी चरण पड़ेंगे बेड़ा तो खैर क्या ही पार आएंगे या फिर रही सही साख का भी बंटाधार करेंगे।

युवराज अपने चहेते रणदीप सुरजेवाला के चुनाव क्षेत्र में तो जरूर ही पहुंचेंगे जबकि पहले ही अमित शाह वहां अपना सिक्का उछाल चुके हैं अब जानना यह है युवराज के मार्गदर्शक रहे रणदीप क्या यह चाहेंगे कि कि उनके चुनाव में उनके बगल में प्रचार के लिए राहुल खड़े हो ?
यकीनन संदीप सुरजेवाला यह सीट जीतना चाहते हैं और अपनी तमाम मेहनत राहुल गांधी के बयानों को स्पष्ट करने में नहीं लगाना चाहेंगे ।

दोनों राज्यों में विपक्ष मूर्छित है ही है लेकिन ऐसा नहीं के स्कोर जीवंत नहीं किया जा सकता था। कांग्रेसी दिग्गजों से नाराज राहुल विदेश यात्रा पर चले गए थे ए एन जी ,डीएलएफ जैसे घोटालों में संलिप्त दिग्गज दामाद जी को बचाने में लगे हैं और राहुल की एक भी नहीं सुन जा रही । जो काँग्रेस राहुल की नहीं सुन रही भला वो जनता की क्या सुनेगी अब फैसला जनता के हाथ।

सशक्त हिन्दू – सशक्त भारत

रामचंद्र अग्रवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता

कुछ समय पहले पूज्य शंकराचार्य जी से मैंने पूछा था कि भारतीय समाज में कई जातियों व संप्रदाय हैं ऐसे हालात में देश में एकता कैसे लाई जा सकती है तो उन्होंने जवाब दिया था कि यदि वर्ण व्यवस्था पुन: कर्म प्रधान हो जावे जैसा के प्राचीन भारत में थी तो जातिगत भेदभाव समाप्त हो जाएगा व सांप्रदायिक एकता भी आ जावेगी। यदि माता-पिता अपने बेटे बेटियों की शादी के लिए match स्वयं के व्यवसाय या बेटे – बेटी के व्यवसाय के हिसाब से देखना चालू कर दें तो वर्ण व्यवस्था पुन: कर्म प्रधान हो सकती है। एक डॉक्टर लड़के के विवाह के समय डॉक्टर लड़की को preference दी जावे चाहे वह किसी भी जाति या संप्रदाय की हो तो इस तरह से वर्ण व्यवस्था को पुन: कर्मप्रधान बनाया जा सकता है। देश का अरबपति तबका परिवार के बच्चों के रिश्ते करते समय जातिगत विचार नहीं रखता यही बात जब उच्च शिक्षित वर्ग में भी है। विदेशों में जो भारतीय रहते हैं उनकी कोशिश यही रहती है कि बच्चों का रिश्ता किसी भारतीय परिवार में हो जावे, चाहे जाती कुछ भी हो। रिश्ते करते समय अनुकूलता व परिचित होने पर ज्यादा ध्यान होना चाहिए।

कई संपन्न व शिक्षित मुस्लिम परिवार भी ऐसा अनुभव करते हैं कि मुसलमान रहते हुए ज्यादा तरक्की नहीं कर सकते इसलिए यह हिंदू धर्म अपनाने को तैयार हैं लेकिन हिंदू समाज में इनके बच्चों की शादियां नहीं हो पाती। शिक्षक मुस्लिम युवतियों से मुस्लिम युवक निकाह नहीं करना चाहते क्योंकि यह सुधारवादी विचार रखती हैं, कश्मीर में कई मुसलमान भी बेटियों की शादी हिंदू युवकों से करना चाहते हैं क्योंकि आतंकवाद के कारण वहां के युवकों का कोई भविष्य नहीं है। यदि हिंदू समाज इनको अपनाना चालू कर देवें तो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत इन युवतियों की शादी हिंदू युवकों से संभव है। इसके लिए जगह-जगह मैरिज ब्यूरो बनाए जावें। जहां कोई हिंदू युवक किसी मुस्लिम युवती से विवाह करता है तो ऐसे मामले में इन जोड़ों के सम्मान का ध्यान हिंदू संगठनों को रखना होगा अन्यथा वह युवक भी मुसलमान बन जावेगा। यदि कई मुस्लिम परिवारों को सामूहिक रूप से हिंदू बनाया जाए तो इनके बच्चों के रिश्ते करने में कठिनाई नहीं होगी वहीं अकेलापन भी महसूस नहीं होगा। जब यह बड़े लोग हिंदू बन जाएंगे तो इनका अनुसरण करके कई मध्यम व गरीब लोग भी हिंदू बन जाएंगे देश को आज नुसरत जहां जैसी महिलाओं की जरूरत है जो मुस्लिम युवतियों को कट्टरवाद से छुटकारा दिला सकती है।

इस समय यूरोप अमेरिका वह विश्व में कई देशों में मुसलमानों को नफरत की नजर से देखा जाता है इस कारण इनमें से कई इस्लाम छोड़कर अन्य धर्म अपनाने को तैयार हैं। इस्लाम एकेश्वरवाद में विश्वास करता है वह मूर्ति पूजा में यकीन नहीं करता। आर्य समाज द्वारा प्रसारित वैदिक धर्म में भी यही बात है। आर्य समाज के महान संत स्वामी श्रद्धानंद जी ने शुद्धि आंदोलन चलाकर लाखों मुसलमानों व ईसाइयों को हिंदू बनाया था लेकिन बाद में आंदोलन कमजोर पड़ गया। फिर से अन्य धर्म मानने वालों को हिंदू बनाने का कार्य किया जावे तो विश्व के करोड़ों मुसलमान हिंदू धर्म अपना लेंगे। किंतु मुसलमान आर्य समाज से परिचित ही नहीं है जो कि मुसलमानों में क्रांतिकारी सुधार लाने में सक्षम है इससे वेदों की वाणी पुन: गुंजायमान होगी।

इस्लाम केवल मजहब ही नहीं वरन एक राजनैतिक आंदोलन भी है जिसका मकसद यह है कि पूरे विश्व में केवल इस्लाम धर्म हो व सभी देशों में मुसलमानों का शासन हो। मुस्लिम धर्म शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि यदि कोई भी मुसलमान किसी गैर मुस्लिम को प्रेरित करके मुसलमान बना दे तो ऐसे प्रेरक के सभी गुनाह खुदा माफ कर देता है उसे जन्नत मिलती है, इस कारण प्रत्येक मुसलमान इस्लाम का प्रचारक हो जाता है। इस कारण कई मुसलमान यह सोचते हैं कि कितने भी अपराध कर लो फिर बाद में किसी को भी मुसलमान बना दो तो सारे पाप धुल जाएंगे व मरने के बाद स्वर्ग मिल जाएगा। यह एक अंधविश्वास है। क्योंकि कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है यह अंधविश्वास समाप्त किया जाना जरूरी है अंधविश्वासों को खत्म करने के लिए सलमान रुश्दी, अनवर शेख, तस्लीमा नसरीन जैसे लेखकों की किताबों का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए जिससे इस्लाम व मोहम्मद साहेब की सच्चाई की जनता को जानकारी हो सकेगी।

भारत में प्रतिवर्ष 400000 से जायदा हिंदू लड़कियां लव जिहाद का शिकार हो रही हैं। मुस्लिम युवकों ने इस तरह का एक बड़ा अभियान चला रखा है। ऐसे युवकों को इनके परिवार व समाज का पूर्ण सहयोग है जबकि इन लड़कियों को हिंदू समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है जिसके कारण नहीं लड़कियों का कोई रक्षक नहीं रहता और मुसलमानों द्वारा इनके कई तरह से शोषण किया जाता है। सुना है कि कुछ लड़कियों को बेच दिया जाता है, वहीं गुर्दे आंखें लीवर हार्ट इत्यादि अंग ऐसे मरीजों में प्रत्यारोपित कर दिए जाते हैं जिनको इन अंगों की जरूरत है। इसलिए बहिष्कृत लड़कियों का पता करके इन्हें पुन: अपने समाज से जोड़ा जावे। जिन लड़कियों का निकाह हो चुका है उनके निकाह का पंजीकरण कराकर उन्हें पुन: हिन्दू बनाया जा सकता है। यदि हिंदू ना भी बने तो इस पंजीयन से यह दंपत्ति शरीयत के दायरे से निकल जाएंगे। लेकिन ऐसी लड़कियों की जानकारी तभी संभव है जब बुर्का प्रथा समाप्त हो। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कई आतंक कारी वह अपराधी पुरुष भी बचने के लिए बुर्का पहन लेते हैं। ऐसी लड़कियों को तलाश करने के लिए हिंदू महिलाओं को आगे आना होगा ऐसी लड़कियों की मदद से मुस्लिम समाज में कई सुधार लाए जा सकते हैं।

जिस किसी भी हिंदू परिवार की लड़की मुस्लिम परिवार में चली गई हो ऐसे हिंदू परिवारों की जानकारी एकत्रित की जानी चाहिए। फिर इन हिंदू परिवारों को भी प्रेरित करना चाहिए कि जिस मुस्लिम परिवार में हिंदू लड़की गई है उसी मुस्लिम परिवार या उसके रिश्तेदारों मित्रों पड़ोसी की लड़की किसी भी हिंदू परिवार में आजावे। इस तरह की क्रॉस रिलेशनशिप भी कानून में मान्य है ऐसा होने से जो हिंदू लड़की चले गई उसकी भी रक्षा करना सुगम हो जावेगा लव जिहाद के मामलों की रोकथाम तभी संभव है जबकि लड़की के परिवार के अलावा संपूर्ण हिंदू समाज भी निगरानी करें। जहां भी कोई हिंदू लड़की किसी मुस्लिम लड़के के साथ दिखे यदि हम उस लड़के से नाम वह लड़की से उसके पिता का नाम इत्यादि पूछना चालू कर देना तो उनके पास कोई स्कूटर मोटरसाइकिल या अन्य वाहन है तो उसका नंबर नोट कर लेना तो इससे भी रोक होना चालू हो जाएगा।

मुस्लिम समाज में शरिया कानून के कारण महिलाओं को निर्दोष होते हुए भी कई परेशानियां उठानी पड़ती है। तलाक के बाद ऐसा पुरुषों ने अपनी तलाकशुदा पत्नी से निकाह करना चाहे तो पहले उस महिला को किसी अन्य पुरुष से निकाह करना होगा व शारीरिक संबंध भी बनाने होंगे. इसके बाद जब दूसरा पति उसे उसे तलाक दे देवें तभी वह महिला अपने पूर्व पति से विवाह कर सकती है। यदि मुस्लिम दंपतियों को निकाह का पंजीयन स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत करवाने को प्रेरित किया जावे तो महिलाओं को कई परेशानियां नहीं झेलनी पड़ेगी। जो मुसलमान शरीयत के दायरे में रहना चाहते हैं उनके लिए दंड व्यवस्थाएं भी इस्लामी यदि इस्लामी कानून के अनुसार कर दी जावे तो भारत के आधे से अधिक मुसलमान शरीयत छोड़ने को तैयार हो जाएंगे। इसके लिए इंडियन पीनल कोड की धारा 4 में भी संशोधन करना पड़ेगा इससे मुसलमानों द्वारा किए जाने वाले अपराध बिल्कुल कम हो जाएंगे।

यदि मुस्लिम समाज की अनपढ़ लड़कियों व महिलाओं को इतना सा शिक्षित भी कर दिया जाए कि वह हिंदी का अखबार वह किताबें पढ़ सकें तो यह मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम समाज के पुरुषों को कट्टरपंथियों के चुंगल में नहीं फंसने देंगी। व जो पहले से फंसे हुए हैं उन्हें भी निकालने के लिए प्रयास करेंगी, क्योंकि कट्टरवाद के कारण इन महिलाओं को भारी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। मदरसों में ऐसी शिक्षा देना जरूरी है कि इनमें राष्ट्रीयता की भावना आवे व अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णुता भी। शिक्षा वैज्ञानिक सोच विकसित करने व अंधविश्वास खत्म करने वाली हो।

बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्ला ईरान के थे। उनका मानना था कि संपूर्ण विश्व एक देश होना चाहिए, व संपूर्ण मानव जाति बिना किसी धार्मिक भेदभाव व शांति व प्रेम के साथ – साथ रहे। बहाई धर्म का लोटस टेंपल दिल्ली में है इनका मानना है कि मुस्लिम धर्म ग्रंथों में यह भी वर्णन आता है कि ऐसा पैगंबर आवेगा जो विश्व में इस तरह की एकता लाने का प्रयास करेगा। भारत के मुसलमानों को बहाई धर्म की तरफ प्रेरित किया जा सकता है। भारत में मुसलमानों के अलावा अन्य कई भी बहाई धर्म मानते हैं इनमें विवाह की दशा में स्पेशल मैरिज एक्ट लागू होता है।

इस्लामिक आतंकवाद पूरे विश्व में फैल रहा है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र (UNO) को भी विश्व के देशों में जहां पर भी कॉमन सिविल कोड नहीं है इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। जिससे मुसलमान व अन्य भी कट्टरपंथियों के चुंगल से निकल सके। जिन देशों में कॉमन सिविल कोड नहीं है उन पर कई आर्थिक प्रबंध लगाकर उन्हें समान नागरिक संहिता के लिए बाध्य किया जा सकता है। शरिया मानने वाले मुसलमानों को गैर मुस्लिम देशों में आने पर प्रतिबंध लगाया जावे। कोई भी देश तब तक धर्मनिरपेक्ष नहीं कहा जा सकता जब तक के वहां समान नागरिक संहिता ना हो। क्योंकि इसके अभाव में कोई भी व्यक्ति बिना खुद की पहचान बदले बिना खुद के समाज से अलग हुए अपने जन्मजात धर्म के अलावा अन्य धर्म नहीं अपना सकता। वह एक से अधिक धर्मों की उपासना भी नहीं कर सकता। फिर इस्लाम में तो किसी भी सुधार की भी मनाही है। वह सुधारको के लिए कठोर यातनाएं भी हैं। भारत में जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती तब तक स्पेशल मैरिज एक्ट व इंडियन सकसेशन एक्ट से ही काम चलाना होगा।

भारतीय उपमहाद्वीप में 95 प्रतिशत मुसलमान ऐसे हैं जिनके पूर्वज हिंदू थे, लेकिन उन्हें उस समय के मुस्लिम शासकों ने बलपूर्वक मुसलमान बनाया था। यदि यह लोग आज हिंदू होते तो अधिक शिक्षित व संपन्न होते। क्योंकि इस्लाम में जमाने के हिसाब से कोई भी सुधार नहीं हुए हैं। मुसलमानों को यह समझना चाहिए के मोहम्मद साहब का कार्य क्षेत्र केवल मक्का मदीना के आसपास के क्षेत्रों तक सीमित था। व उनकी सोच का दायरा केवल वहां के समाज का सुधार जो उस समय संभवत वही तक था। विश्व के अन्य देशों में उस समय भी कई उत्कृष्ट धर्म व्यवस्थाएं थी जिनसे मोहम्मद साहब अपरिचित थे। हिंदू कोई धर्म नहीं वरन एक जीवन शैली है, जिसका आधार यह है कि एक ही ईश्वर तक पहुंचने के लिए सभी धर्म अलग-अलग रास्ते हैं।
“एकम सत विप्रा: बहुधा वदन्ति”
सभी धर्मों में कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं जिनमें समय के हिसाब से सुधार होना चाहिए। यदि विश्व के मुसलमान भी मानने लग जाए तो वह स्वयं की रूचि के अनुसार कई धर्मों की उपासना पद्धतियों का भी लाभ भी ले सकेंगे, जिससे उनका संपूर्ण विकास हो सकेगा। इसके लिए सुधारवादी मुसलमानों को संगठन “राष्ट्रीय मुस्लिम मंच” से जोड़ने का काम हिंदुओं को भी करना होगा। अन्य कई नए सुधारवादी संगठन भी बनाने होंगे जिससे इस समाज के लिए कई प्रकार के सुधारात्मक कार्यक्रम चलाया जा सके।

विदेशों में हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी प्रेम से रहते हैं, क्योंकि दोनों में बोलचाल के अलावा भी कई सामान्यताएं हैं। वैसे भी 1947 का भारत विभाजन अंग्रेजों की एक चाल थी जिससे दोनों देश लड़ते रहें वह कभी तरक्की न कर सकें। दोनों जर्मनी पूर्वी व पश्चिमी मिलकर एक हो सकते हैं तो भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश भी एक हो सकते हैं। जिससे कश्मीर समस्या, आतंकवाद व भारत में बांग्लादेशियों की समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाएंगी। दोनों देशों का रक्षा खर्च भी कम हो जावेगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश में सेना ने सत्ता का स्वाद चख रखा है इसलिए बिना भारत की मदद के वहां लोकतंत्र रह भी नहीं सकता। पाकिस्तान और बांग्लादेश की जनता को भी भारत में विलय हेतु प्रयास करना चाहिए जिससे इन दोनों देशों का आर्थिक विकास संभव है।

भारतीय राजनेताओं को यह समझना चाहिए कि इस्लाम पाकिस्तान की ताकत है। जिसके कारण पाकिस्तानियों में ना केवल भारत के खिलाफ एकता है बल्कि राष्ट्रीयता की भावना भी है। इस्लाम के कारण पाकिस्तानियों को विदेशों में वहां के मुसलमानों का सहयोग आसानी से मिल जाता है व उन देशों का भी जहां भी मुसलमान हैं। परवेज मुशर्रफ ने एक दफे कहा था कि पाकिस्तान की असली ताकत वहां की सेना नहीं बल्कि हिंदुस्तान में रहने वाले वह मुसलमान हैं जिनका पाकिस्तान पर प्रेम है। व जिनके कारण पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद भारत में पनप रहा है। जिहाद के नाम पर पाकिस्तान मामूली खर्चे पर भारत के खिलाफ आतंकवादी तैयार कर लेता है। जो फिदायीन हमलों के लिए भी तैयार रहते हैं। अब यह एक अंतरराष्ट्रीय बीमारी बन गई है जो महामारी का रूप लेती जा रही है। जिहाद को धर्मयुद्ध समझना भी अंधविश्वास ही है।

आलेख में छपे विचार लेखक के निजी विचार हैं, डेमोक्रेटिकफ्रंट. कॉम इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।

सोनीपत जिले में अपनी राजनीतिक परिसंपत्ति को बचा पाना कठिन रहेगा कांग्रेस के लिए

भारतीय जनता पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने लोकसभा चुनाव से पहले रोहतक सीट का जिक्र करते हुए कहा था कि पिछले चुनाव में हमने एक गलती की कि जाट के खिलाफ जाट को ही मैदान में उतार दिया मतलब दीपेंद्र सिंह हुड्डा के मुकाबले ओमप्रकाश धनखड़ को मैदान में लाना गलती थीl उनका कहना था कि यह गलती इस बार नहीं करेंगे और गलती सुधारते हुए उन्होंने जाट के खिलाफ गैर जाट ब्राह्मण उम्मीदवार के रूप में डॉ अरविंद शर्मा को मैदान में उतारा और दीपेंद्र सिंह हुड्डा को हराने का काम किया यही रणनीति अब बरोदा में कार्यान्वित करने की योजना है

धर्मपाल वर्मा (पंचकुला) :

यद्यपि अभी हरियाणा विधानसभा के लिए कांग्रेस पार्टी की टिकटें बटी नहीं है परंतु अभी से कयास लगाए जा रहे हैं कि बेशक भाजपा अपने आज के विधायकों में से एक तिहाई की टिकट काटने का फैसला ले ले परंतु कॉन्ग्रेस शायद एक भी सीटिंग एमएलए की टिकट न काट सकेगी इसे अटल मानकर ही भाजपा अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में लगी है परंतु जो होगा नवरात्रों में होगा अभी चल रहे भारी दिनों में राजनेता कोई नया काम करने को तैयार नहीं है।

आज कांग्रेस के ज्यादातर विधायक पुराने रोहतक जिले के रोहतक झज्जर और सोनीपत जिलों में ही हैं जिनकी संख्या है 10 ,जबकि यहां कुल सीटें 15 है। इस समय सोनीपत जिले में 6 में से 5 विधायक कांग्रेस के हैं और हालात ऐसे बन रहे हैं कि अगला चुनाव शायद ही कोई विधायक जीत पाए। सोनीपत में तो खास जरूरत इस बात की है कि कांग्रेस कुछ नए और प्रगतिशील उम्मीदवार मैदान में लेकर आएगी तो ही सकारात्मक परिणाम सामने आ पाएंगे जैसे उम्मीदवार भाजपा दे रही है वैसे कांग्रेस को देने चाहिए ऐसा यहां के लोग व्यक्तिगत चर्चा में कहने लगे है।

आप यह मानकर चलें कि भाजपा सोनीपत पर खास फोकस करके इसलिए चल रही है कि वह यहां भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हाशिए पर ले जाना चाहती है वह चाहती है कि आरंभ में ही यह चर्चा शुरू हो जाए कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा तो सोनीपत में ही कमजोर हैं इसीलिए भाजपा ने सोनीपत में भी बरोदा पर फोकस करने का संकेत दिया है जिसे आसानी से समझा जा सकता है इस सीट को भाजपा हारी हुई सीट मानकर चल रही है वही दूसरी चर्चा शुरू हो जाए तो इससे लोगों की राय बदलनी शुरू हो जाती है।

उसके लिए पूरी नीति तैयार है। यहां जेजेपी एक भी सीट पर जीतने की स्थिति में नजर नहीं आ रही है परंतु जानकार यह दावा कर रहे हैं कि यह पार्टी भाजपा की बी टीम है जिसका काम भाजपा के हाथों कांग्रेस को हराना है। कुछ लोग तो इस पार्टी को वोट काटो पार्टी तक कहने लग गए हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विरुद्ध लोकसभा में सोनीपत से उतरे दिग्विजय सिंह चौटाला को 50000 तक सीमित कर विशेष तौर पर जाट मतदाताओं ने यह संदेश देने की कोशिश की थी कि सोनीपत में भी जाट मतदाताओं की पसंद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही है।

मानकर चलें कि अब भी इस क्षेत्र में हुड्डा का असर सबसे ज्यादा है परंतु यह भी सच्चाई है कि यह असर जाट जाटों में ज्यादा है गैर जाट तो कांग्रेस से फड़के हुए हैं।

यही एक सोच है जिसके तहत भारतीय जनता पार्टी के लोग गैर जाटों के ध्रुवीकरण के लिए इसी हलके के बड़े और राजनीतिक गांव भैंसवाल कला से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय पहलवान योगेश्वर दत्त को बरोदा से टिकट देने की योजना पर काम कर रहे हैंl

भारतीय जनता पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने लोकसभा चुनाव से पहले रोहतक सीट का जिक्र करते हुए कहा था कि पिछले चुनाव में हमने एक गलती की कि जाट के खिलाफ जाट को ही मैदान में उतार दिया मतलब दीपेंद्र सिंह हुड्डा के मुकाबले ओमप्रकाश धनखड़ को मैदान में लाना गलती थीl उनका कहना था कि यह गलती इस बार नहीं करेंगे और गलती सुधारते हुए उन्होंने जाट के खिलाफ गैर जाट ब्राह्मण उम्मीदवार के रूप में डॉ अरविंद शर्मा को मैदान में उतारा और दीपेंद्र सिंह हुड्डा को हराने का काम किया यही रणनीति अब बरोदा में कार्यान्वित करने की योजना है और कांग्रेस इससे तभी पार पा सकती है जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद बरोदा से चुनाव लड़े. इससे जिले की अन्य सीटों पर भी असर पड़ सकता है। परंतु इस समय जो हालात हैं वे कांग्रेस के लिए पूरी तरह से चुनौतीपूर्ण है।

सिद्धू का सामान्य ज्ञान सिफर: ब्रह्म महिंदरा

चंडीगढ़:

पूर्व क्रिकेटर और पंजाब के कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू कैप्‍टन अमरिंदर सिंह कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद चौतरफा घिर गए हैैं। विरोधी उनके इस्‍तीफे के अंदाज पर सवाल कर रहे हैं और उन पर तीखे हमले कर रहे हैं। विरोधियों के साथ कैबिनेट सहयोगियों ने भी उन पर निशाना साधा है। पंजाब के एक वरिष्‍ठ मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि सिद्धू इतने बुद्धू नहीं हैं कि उनको इस्‍तीफे को लेकर प्रोफाइल का पता नहीं हो। एक अन्‍य मंत्री ने भी इसी तरह का सवाल उठाया है। कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा व अन्‍य दलों के नेताओं ने भी सिद्धू पर निशाने साधे हैं। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी और पंजाब एकता पार्टी सिद्धू के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

वरिष्‍ठ मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने कहा- नाट्यशास्त्र के राजा सिद्धू इतने बुद्धू कि उन्हें प्रोटोकाल का पता नहीं

राहुल गांधी को इस्तीफा भेजने पर कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने सिद्धू को नाट्यशास्त्र का महारथी करार दिया। बह्म मोहिंद्रा ने कहा, क्‍या नाट्यशास्‍त्र के राजा सिद्धू इतने बुद्धू हैं कि उन्हें प्रोटोकाल का पता नहीं है। सिद्धू को इस्तीफा सीधा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भेजना चाहिए था न कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को।

इस्‍तीफा सिद्धू की नाटकबाली, इसके लिए ट्विटर उचित मंच नहीं : चन्नी

ब्रह्म माहिंद्रा के साथ ही कैबिनेट मंत्री चरणजीत सिंह चन्‍नी ने भी सिद्धू के इस्तीफे को नाटकबाजी बताया। उन्‍होंने कहा कि सिद्धू पहले इस्तीफे को ट्विटर पर डालते हैं और बाद में कहते हैं कि वह मुख्यमंत्री को भी अपना इस्तीफा भेज रहे हैं। जब उन्होंने 10 जून को इस्तीफा दे दिया था तो फिर इसकी घोषणा करने में 34 दिन क्यों लगा दिए? इसके अलावा इस्‍तीफा देने के लिए ट्विटर उचित मंच नहीं है।

दोनों मंत्रियों ने कहा कि सिद्धू ने 40 दिनों तक बिजली विभाग न संभाल कर काम अधर में लटकाए रखा। उन्होंने इस तथ्य का भी संज्ञान नहीं लिया कि धान की बिजाई के लिए बिजली महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने रवैये से होनेवाले दुष्प्रभाव की परवाह नहीं की। उन्हें केवल अपने लिए नहीं बल्कि राज्य और अपने लोगों के साथ-साथ उस पार्टी की तरफ भी सोचना चाहिए जिसने उन्हें इतना कुछ दिया था

इस्तीफा महज ड्रामेबाजी है : सुखबीर बादल

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष एवं फिरोजपुर से सांसद सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि सिद्धू का इस्तीफा महज ड्रामेबाजी है। कांग्रेस प्रधान को इस्तीफा देने का मतलब नहीं। यह तो केवल औपचारिकता की गई है। इससे स्पष्ट हो गया है कि सिद्धू ने कांग्रेस को ब्लैकमेल करने तथा अपनी मर्जी के अनुसार झुकाने के लिए एक माह पहले इस्तीफे का यह ड्रामा किया था। इससे यह भी साबित होता है कि सिद्धू एक बहुत बड़ा अवसरवादी है, जो हमेशा अपने ही फायदे के बारे में सोचता है। 

इस्तीफा उसे दिया जिसने खुद इस्तीफा दिया हुआ है : चुग

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव तरुण चुग का कहना है कि नवजोत सिद्धू ने इस्तीफा भी उसे दिया जिसने खुद ही इस्तीफा दिया हुआ है। यह एक राजनीतिक ड्रामेबाजी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह अब तक सिद्धू का इस्तीफा आने का इंतजार क्यों कर रहे हैं, उन्हें तो सिद्धू को कैबिनेट से बर्खास्त कर देना चाहिए।

सिद्धू को बिजली माफिया को नंगा करना चाहिए था : आप

आम आदमी पार्टी विधायक दल के नेता हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सिद्धू को तुरंत भ्रष्ट कांग्रेस पार्टी छोड़ देनी चाहिए। दस सालों के माफिया राज समेत बेअदबियों के मामलों पर सिद्धू का बादलों के विरुद्ध बेबाकी के साथ बोलना मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को रास नहीं आ रहा था। सिद्धू के बढ़ते राजनैतिक कद को कैप्टन अपनी कुर्सी के लिए भी खतरा समझने लगे थे। बेहतर तो यह होता कि सिद्धू प्राइवेट थर्मल कंपनियों के साथ किए महंगे और नाजायज शर्तों वाले समझौते रद करते और बादलों के बिजली माफिया को नंगा करते।

सच उजागर करने की कीमत चुकाई : खैहरा

पंजाबी एकता पार्टी के अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैहरा ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन और बादलों के गठजोड़ का सच उजागर करने की कीमत चुकाई है। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर सिद्धू की लोकप्रियता बढ़ रही थी जो कैप्टन अमरिंदर सिंह को नहीं भा रही थी।

सिद्धू की कोठी पर पसरा सन्नाटा

अमृतसर। दूसरी ओर, नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे का खुलासा हाेने के बाद उनकी कोठी पर सन्नाटा पसरा है। अंदर लगी सिद्धू परिवार और सिक्योरिटी की गाडिय़ों से कयास लगाए जाते रहे कि वह घर पर ही हैं, लेकिन इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की।

सिद्धू निवास के बैक साइड पर उनका सियासी कार्यालय भी है, जहां विधानसभा हलका पूर्वी ही नहीं, बल्कि शहर भर से लोग अपना काम करवाने आते हैं। सिद्धू समर्थकों और करीबियों का भी जमावड़ा आफिस में लगा रहता है, लेकिन कोठी के सारे गेट सबके लिए बंद थे। सिक्योरिटी में तैनात मुलाजिम ही कुछ बोल रहे थे। इतना ही नहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या सिद्धू घर पर हैं, तो वह अंदर चले गए। सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर और उनके करीबियों के मोबाइल फोन या तो बंद मिले या फिर उन्होंने उठाया ही नहीं।

हताशा में सिद्धू खेमे के नेता

सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनके साथ ही भाजपा में सक्रिय कई नेता कांग्रेस में आ गए थे। अब कांग्रेस द्वारा उन्हें हाशिये पर डाले जाने के बाद सिद्धू खेमा भी सियासी हताशा में हैं। करीबियों की सिद्धू के सियासी करियर पर निगाह है, क्योंकि उनका सियासी करियर उन पर ही निर्भर करता है।

Indeed a Very Positive Budget, Sets Indian Economy rolling to new heights

Mazboot Budget for Mazboot Nagrik
“यकीन हो तो रास्ता निकलता है, हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है”

CA. Keshav R Garg

It is indeed a Mazboot Budget for Mazboot Nagrik. The maiden budget by first full time lady finance minister has set the tone for the growth of Indian Economy for next 5 years. It seems that day is not far when India will see its peak growth under the regime of very talented, humble and grounded finance minister. From village to cities, youth to old, MSME to Large Caps everyone has been touched in this well sought budget of newly elected government.

As far as a common man is concerned a number of initiatives have been introduced. We cannot just talk about tax benefits but those benefits as well which make life of common man easy. The government has introduced the concept of NCMC Transport card which will cater for all transport needs all across the country be it metros, buses, toll tax etc. Not only it will help in transportation but in case of emergencies, one can withdraw cash from ATM as well with the help of this card. Additional Tax benefit of Rs. 1.5 lakh each for purchase of electric vehicle and affordable house has also been granted. PAN Card shall no more be required for filing of ITR, it can simply be done with the help of Aadhaar Number. Both can now be used inter-changeably. Also a pre-filled income tax return form shall be made available for the Salaried class.

There had been special focus on start-ups in this budget. The Finance minister assured that the issue of angel investor and its investment shall now be resolved. There shall be no scrutiny on start-ups in respect of their valuation by the income tax department.Exemption from capital gains have been introduced where a persons sells his house and invests that money in a start-ups. Further aTV channel specifically for start-ups is set to be introduced which will help them hand holding in relation to fund raising and initial hiccups.

For bigger corporate house tax rate has been reduced from 28% to 25% where the annual turnover does not exceed Rs. 400 crores. Faceless E-assessment system shall be introduced from 2019 where the cases for scrutiny shall be selected from central repository without providing the details of officer to the taxpayer. This will be huge measure to reduce corruption. For super-rich an additional surcharge of 3% to 7% has been introduced in align with the government to reduce income gaps. Also a TDS of 2% has been introduced if one withdraws cash more than Rs. 1 crore in a financial year. This is in lieu to curb cash transactions.

Apart from above various measures such as Social Stock exchangeloan against Corporate bonds100% FDIs in various sectors,Government investment in banksInsurance Schemes for small traders/business units are all meant to increase the inflow of funds in the Indian economy. The additional resources of funds will certainly boost the business activities being carried out in every nook and corner of the country. FM dint even forget visually impaired, she announced introduction of special Rupee coins for them. Even for students New Education Policy to promote Study in India set to roll out. 

Government has brought huge changes as far as indirect taxes are concerned. A Sabka Vishwas (Legacy Dispute Resolution Scheme, 2019) has been introduced to square off service tax and central excise matters pending as on 30.06.2019. This is to off-load the burden of Pre-GST litigations from the department as well as from taxpayers. The person can pay 70%/50% of the tax dues where the amount is less than 50 lakhs/more than 50 lakhs respectively. No penalty/late fees shall be charged under this scheme. Further to provide relief to taxpayers and to settle ever going debate, CGST Act 2017 has been amended to provide that interest shall be charged on net cash liability instead of Gross Tax liability under GST. Further GST Act has been changed in order to effect the various taxpayer friendly decisions taken by 35th GST Council Meeting.

We at KRG Legal feel that this budget is really positive. It not only sets the tone for future growth of our country but also towards more transparent and compliant nation. With lesser interaction with tax officials, transparency is set to increase in the interest of taxpayers. The Legacy scheme/one-time settlement was a demand pending since long which has now been fulfilled. On the similar lines, states must also come out with such scheme. We also feel that this budget is achievable and has been prepared keeping in view the ground realities. We congratulate our Lady Finance Minister for her masterstroke and look forward to more such constructive work in future as well.

“Yakin ho to raasta nikalta hai, hawa ki aut lekar bhi chirag jalta hai”

गाँव के शहरीकरण ने बढ़ाया जल संकट

सारिका तिवारी

विलंबित मानसून, पिछले वर्ष की कमी मानसून से पहले, और भूजल के स्तर में गिरावट ने संकट को बढ़ा दिया है। जलाशयों के दो-तिहाई भाग में असामान्य जल स्तर चल रहा है। बढ़ते तापमान, खराब शहरी नियोजन, जिसके परिणामस्वरूप भराव, और निर्माण, आर्द्रभूमि, योजना प्रक्रिया में हाइड्रोलॉजिकल योजनाओं के प्रति कुल उपेक्षा और पारंपरिक जल संरक्षण ज्ञान के दुरुपयोग ने इस खतरनाक स्थिति में योगदान दिया है।

स्थिति और खराब हो जाएगी, 2030 तक पानी की मांग दोगुनी होने की उम्मीद है, अगर युद्धस्तर पर पानी से निपटना तुरंत नहीं लिया जाता है। पानी की कमी का आर्थिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों के लिए खतरनाक प्रभाव है। यह कई सामाजिक लाभों के साथ-साथ लड़कियों के साथ, विशेष रूप से ग्रामीण भारत में पानी लाने के लिए स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होने पर घड़ी को वापस कर देगा। यह स्वच्छता क्रांति को भी बाधित करेगा।

रविवार को अपने रेडियो संबोधन में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तियों, समुदायों और कंपनियों को एक साथ आने के लिए कहा। जल दक्षता को बढ़ावा देने और अपव्यय को कम करने के लिए सरकार के हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। इस भयावह संकट के लिए कोई चांदी की गोली नहीं है। यदि लोग जल संकट की तीव्रता का एहसास करने में विफल रहते हैं, तो भारत का सामना करना पड़ रहा है ।

अब चेन्नई को ही देखें तो वस्तुतः सूखा चला गया है, जबकि शहरी और ग्रामीण भारत के कई अन्य हिस्से पानी के संकट से जूझ रहे हैं। पानी की बर्बादी न तो नई है और न ही तमिलनाडु की राजधानी तक सीमित है।

अध्ययनों से पता चलता है कि अगले साल तक लगभग 20 शहर शहरों में भूजल से बाहर हो जाएंगे। जलवायु परिवर्तन, आक्रामक भूमि उपयोग परिवर्तन, अनुचित शहरी नियोजन और निर्माण ने देश में जल आपातकाल में योगदान दिया है। इस संकट को हल करने के लिए सभी हितधारकों – लोगों, उद्योग, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और सरकारों द्वारा सभी स्तरों पर मजबूत नीतिगत रूपरेखा और ठोस प्रयास की आवश्यकता होगी।

शुरुआत के लिए, भारत सरकार को जल संरक्षण, जल निकायों के संरक्षण, वितरण नेटवर्क को टक्कर देने और नए आवास में वर्षा जल संचयन को एक अनिवार्य विशेषता बनाना चाहिए।

भारत में फसलों के लिए भय, पाँच साल में जून रहा सबसे अधिक खुश्क

सारिका तिवारी, चंडीगढ़

मौसम विभाग ने कहा, भारत में पांच साल में सूखा पड़ा, मौसम विभाग ने कहा कि फसलों और व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए आशंका बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, मानसून की बारिश औसत से एक तिहाई कम थी, हालांकि कुछ राज्यों में, जिनमें गन्ना भी शामिल है, जो उत्तर प्रदेश के उत्तरी राज्य में बढ़ रहा है, वे 61 प्रतिशत कम थे, भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों से पता चला है।

भारत की कृषि योग्य भूमि का लगभग 55% हिस्सा वर्षा आधारित है, और कृषि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का लगभग 15% हिस्सा बनाती है, जो पहले से ही मंदी का शिकार है।

विश्लेषकों ने कहा कि अगर अगले दो से तीन सप्ताह में बारिश में सुधार नहीं होता है, तो भारत को संकट का सामना करना पड़ सकता है। किसानों को उपभोक्ता से लेकर उपभोक्ता सामान तक सब कुछ बेचने वाली कंपनियाँ असुरक्षित होंगी।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि किसानों ने 28 जून को 14.7 मिलियन हेक्टेयर में फसलें लगाई थीं।