सुशांत सिंह की मौत/ आत्म हत्या/ हत्या के मामले की जांच अब सीबीआई को

सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)को सौंप दी गई है.केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बिहार सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की थी. केंद्र ने स्वीकार किया और जांच को CBI के हवाले कर दिया.

नई दिल्ली (ब्यूरो) – 05 अगस्त:

सुशांत सिंह राजपूत केस में बिहार सरकार ने मंगलवार को सीबीआई जांच की सिफारिश केंद्र को भेजी थी. अब केंद्र ने बिहार सरकार की ये सिफारिश मंजूर कर ली है. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील ने बताया कि उन्होंने सुशांत केस की जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी है. अब इस केस की सीबीआई जांच करेगी. बता दें, लंबे समय से सोशल मीडिया पर इस केस की सीबीआई से जांच कराने की मांग हो रही थी.

सुशांत केस की होगी सीबीआई जांच

केंद्र सरकार के वकील SG तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मामले की जांच सीबीआई से कराने की बिहार सरकार की सिफारिश मान ली गई है. रिया की तरफ से वकील श्याम दीवान ने कहा है कि एसजी की तरफ से जो कहा गया, यहां वह मामला नहीं है, ऐसे में अदालत रिया की याचिका पर गौर करे. श्याम दीवान (रिया के वकील) ने सभी मामले पर रोक लगाने की मांग की. श्याम दीवान ने कहा कि एफआईआर ज्यूरिसडिक्शन के मुताबिक नहीं है. ऐसे में अदालत पूरे मामले पर रोक लगाए.

बिहार पुलिस मुंबई पहुंची और खुद जाकर पूछताछ करने लगी. जबकि उनके क्षेत्राधिकार में यह नहीं आता, जबकि मुंबई पुलिस पहले से पूरी कार्रवाई कर रही है. रिया के वकील श्याम दीवान ने कहा बिहार में दर्ज FIR को मुम्बई ट्रांसफर किया जाना चाहिए. श्याम दीवान ने दलील देते हुए कहा कि सुशांत की मौत के मामले में मुंबई पुलिस अब तक 59 लोगों की गवाही दर्ज कर चुकी है.

जस्टिस ऋषिकेश राय ने कहा कि सुशांत काफी टैलेंटेड और उभरते हुए कलाकार थे और उनकी रहस्यमयी तरीके से मौत हो जाना चौंकाने वाला है. जस्टिस ऋषिकेश राय ने कहा कि यह जांच का विषय है.

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की 14 जून को मौत हो गई. उन्होंने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी. सुशांत की मौत के बाद से हर कोई सीबीआई जांच की मांग कर रहा था.

संस्मरण : सन 1992 की अयोध्या जी की यात्रा

5 अगस्त 2020 को जब राम मंदिर का शिलान्यास किया आ रहा है तो 1992 के आरसेवकों को अपने बीते दिनों की याद आह्लादित कर रही है। शास्त्री देवशंकर ने अपने संस्मरणों को डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम से सांझा किया।

शास्त्री देवशंकर चौबीसा, उदयपुर:

सन 1992 में मेरी पोस्टिंग सागवाड़ा में थी, वहां हम कनकमल जी भाईसाहब के सानिध्य में कार सेवा के लिए रवाना हुए। सागवाड़ा से हम बस द्वारा बांसवाड़ा के स्वयंसेवकों को साथ लेते हुए रतलाम पहुंचे। रतलाम से हमने रात को ट्रेन पकड़ी थी, जैसे ही ट्रेन में चढ़े ऐसा लगा कि जितने भी कारसेवक आ रहे थे, वह सभी अपने परिवार के लोग हैं, जगह नहीं थी, ऊपर-नीचे खचाखच ट्रेन भरी हुई थी। मैं जब ट्रेन के ऊपर सवारियों को बैठे हुए देखता तो ऐसा लगता है कि कैसे बैठते होंगे, परन्तु जब मैं स्वयं ट्रेन के ऊपर बैठा तो रामलला के भक्तो के मध्य बहुत ही आनंददायक माहौल था। “जय श्री राम” के नारे और गीतों को गाते हुए अयोध्याजी पहुंचे।

कनक जी के सानिध्य में हमने अपना अभियान जारी रखा, जैसा जैसा निर्देश मिलता रहा वैसे हम कार्य करते रहें। प्रातः काल से लेकर के विभिन्न संतो, महंतों और नेताओं के भाषण चल रहे थे और उनको सुन रहे थे और यह तय हुआ था कि सबसे पहले कौन जाएगा, सबसे आगे कौन खड़ा रहेगा, इसके लिए रात्रि में बैठक भी हुई थी। ऐसी स्थिति में जिस दिन ढांचा गिरा उस दिन ना तो भूख लग रही थी ओर ना ही प्यास लग रही थी, केवल एक ही लक्ष्य था और उसके लिए हम सभी वहां मैदान में डटे हुए थे। हमारी जरूरत पड़ जाए और हम भगवान श्रीराम और देश के लिए काम आये।

शाम को 5:00 बजे राष्ट्रपति शासन लग गया था। वहां ऐसी स्थिति में रात को पता चला कि सुबह जल्दी उठते ही सुबह 4:00 बजे हमको उठा दिया गया और कहा कि यहां अयोध्याजी में कर्फ्यू लग चुका है तुरंत जितना जल्दी हो सकता है अयोध्याजी खाली करने के आदेश मिले। साथ ही पुलिस की घोषणा भी हो रही थी कि आप तुरंत अयोध्याजी खाली करें। लेकिन प्रातः कालीन 4:00 बजे अपना आवास छोड़कर के निकले थे पुलिस वालों ने हमको रोका, परंतु माइक से मजिस्ट्रेट घोषणा की, कि जो कारसेवक घर की तरफ जा रहे हैं उन्हें किसी प्रकार से परेशान नहीं किया जाए और हमने वहाँ से ट्रेन पकड़ी। बाराबंकी में मुस्लिमों ने ट्रेन को रोका और पथराव किया। परन्तु हमारे साथ कुछ ऑर्मी के जवान थे, उन्होंने मुकाबला किया हवाई फायरिंग कर उन लोगों को भगाया । फिर धीरे से ट्रेन रवाना हुई ऐसे करते-करते हम घर पहुंचे।

जो हमने उठाया था एक लक्ष्य लेकर पहुंचे थे वह कल साकार होता दिख रहा है, भगवान श्रीराम का जन्म स्थान पर इस भव्य मंदिर के निर्माण के लिए 1992 में जो कुछ किया था वह अपनी आंखों से होता हुआ हम देख रहे हैं ।

मां तो मां होती है

।।कविता।।

मां तो मां होती है
मां तो मां होती है चाहे किसी गरीब कि या अमीर कि हो।
मां का जिस घर मे आदर होता है उस घर मैं खुशिया कम नहीं होती मां का हाथ जिसके सिर पर होता
उस पर बुरे साये काअसर नही होता।
मां कि दुआएं जहा होती है ,
वहां अमगंल नही होता है।
मां जिस घर मै होती वह घर स्वर्ग से कम नहीं होता।
मां का आशीर्वाद हो साथ वहां जीवन मे कोई कष्ट नहीं आता।
मां तो मां होती हैं चाहे रकं कि या राजा की हो।
मां हसते हसते निवाला बच्चे को खिलाती है।
चाहे वह भुख से तडप रही हो।
मां पुजा मे भी भगवान से बच्चों के लिए ही दुआ मांँगती है ।
मां तो मां होती है मां से बडा कोई ईश्वर नहीं ।
मां के सामने तो ईश्वर भी झुका है
तो हम किया है।
मां के प्रेम को पाने के लिए तो, ईश्वर ने भी जन्म मरण को पाया।
तो हम तो बडे़ भाग्यशाली हैं,
कि हमें ईश्वर के रूप में मां मिली।
मां तो मां होतीहै मां तो मां होती है।

अपनी लेखनी
अधिवक्ता भावना नागदा
(अपनी मां को समर्पित)

गुजरे जमाने की मशहूर अदाकारा कुमकुम का निधन वह 86 वर्ष की थीं

नई दिल्ली: 

गुजरे जमाने की फेमस अदाकारा कुमकुम (Kumkum) का निधन हो गया है. वह 86 साल की थीं. बताया जा रहा है कि कुमकुम लंबे समय से बीमार चल रही थीं जिसके चलते उनके निधन हो गया. इस खबर के आने के बाद से बॉलीवुड में शोक की लहर है. उनके निधन पर मशहूर एक्टर जगदीप के बेटे नावेद जाफरी ने ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है, ‘हमनें एक और रत्न खो दिया. मैं बचपन से इन्हें जानता था. वह हमारे लिए परिवार थीं. एक अच्छी इंसान. भगवान आपकी आत्मा को शांति दे, कुमकुम आंटी.’

बॉलीवुड डायरेक्टर अनिल शर्मा ने भी उनके निधन पर ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा, ‘कल की खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्री. जिन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दीं, जिन्होंने बेहतरीन गाने दिए, आज उनका निधन हो गया, भगवान उनकी आत्मा को शांति दे, मेरी हार्दिक संवेदना. उनके परिवार के लिए प्रार्थना करें.’

अभिनेत्री कुमकुम ने अपने करियर में लगभग 115 फिल्मों में काम किया. उन्हें मिस्टर एक्स इन बॉम्बे (1964), ‘मदर इंडिया’ (1957), ‘सन ऑफ इंडिया’ (1962), ‘कोहिनूर’ (1960), ‘उजाला’, ‘नया दौर’, ‘श्रीमान फंटूश’, ‘एक सपेरा एक लुटेरा’ में शानदार अभिनय के लिए जाना जाता है. वह अपने दौर के कई स्टार्स के संग काम कर चुकी थीं, जिनमें किशोर कुमार और गुरु दत्त का भी नाम शामिल है.

राशिफल-28-जुलाई-2020

Aries

28 जुलाई 2020 रक्तचाप के मरीज़ों को ख़ास ख़याल रखने और दवा-दारू करने की ज़रूरत है. साथ ही उन्हें कॉलेस्ट्रोल को क़ाबू में रखने की कोशिश भी करनी चाहिए. ऐसा करना आगे काफ़ी लाभदायक सिद्ध होगा. वे आर्थिक लाभ, जो आज मिलने वाला था टल सकता है. परिवार के सदस्य आपके नज़रिये का समर्थन करेंगे. किसी से तभी दोस्ती करें जब उसके बारे में पूरी जानकारी कर लें और उसे भली-भांति समझ लें. यह दिन आपके धैर्य की परीक्षा ले सकता है, कार्यक्षेत्र में हिम्मत न हारें. अगर आप अपनी चीज़ों का ध्यान नहीं रखेंगे, तो उनके खोने या चोरी होने की संभावना है. आपको अपने जीवनसाथी की ओर से ख़ास तोहफ़ा मिल सकता है. किसी ऐसे इंसान के साथ समय बिताना जिसका साथ आपको बहुत पसंद न हो, आपकी खीझ की वजह हो सकता है. इसलिए सोच-समझकर फ़ैसला करें कि आप किसके साथ बाहर जाने वाले हैं.

Taurus

28 जुलाई 2020 : आपका प्रबल आत्मविश्वास और आज के दिन का आसान कामकाज मिलकर आपको आराम के लिए काफ़ी वक़्त देंगे. दूसरों को प्रभावित करने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्चा न करें. परिवार के सदस्य सहयोगी होंगे, लेकिन उनकी काफ़ी सारी मांगें होंगी. व्यक्तिगत मार्गदर्शन आपके रिश्ते में सुधार लाएगा. आप ख़ुद को ऊर्जा से सराबोर महसूस कर रहे होंगे. इस ऊर्जा का प्रयोग कामकाज में करें. यात्रा और शिक्षा से जुड़े काम आपकी जागरूकता में वृद्धि करेंगे. ग़लतफ़हमी के लंबे दौर के बाद इस शाम आपको जीवन साथी के प्यार का तोहफ़ा नसीब होगा. आप कुछ समय अपने व्यक्तित्व को निखारने में लगा सकते हैं, क्योंकि आकर्षक व्यक्तित्व का आत्म-निर्माण में अहम योगदान होता है.

Gemini

28 जुलाई 2020 : अगर मुमकिन हो तो लंबे सफ़र पर जाने से बचें, क्योंकि लंबी यात्राओं के लिए अभी आप कमज़ोर हैं और उनसे आपकी कमज़ोरी और बढ़ेगी. बैंक से जुड़े लेन-देन में काफ़ी सावधानी बरतने की ज़रूरत है. जिन्हें आप चाहते हैं, उनके साथ उपहारों का लेन-देन करने के लिए अच्छा दिन है. आज अचानक किसी से रोमांटिक मुलाक़ात हो सकती है. दफ़्तर के काम में व्यवधान पड़ने की काफ़ी सम्भावना है. ख़र्चों को लेकर जीवनसाथी से तनातनी संभव है. सोशल मीडिया पर ज़रूरत से ज़्यादा वक़्त गुज़ारना न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी अच्छा नहीं है.

Cancer

28 जुलाई 2020 : ज़्यादा पेट भरकर खाने से और मदिरा-सेवन से बचें. मनोरंजन और ऐशोआराम के साधनों पर ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्च न करें. आपको कोई अच्छी ख़बर मिल सकती है, जो न केवल आपको बल्कि आपके परिवार को भी रोमांचित कर देगी. आपको अपने रोमांच को नियंत्रित रखने की ज़रूरत है. आपका प्रिय को आपसे भरोसे और वादे की ज़रूरत है. कामकाज के दौरान कोई अच्छा मित्र काफ़ी व्यवधान डाल सकता है. कुछ लोगों के लिए आकस्मिक यात्रा दौड़-भाग भरी और तनावपूर्ण रहेगी. वैवाहिक जीवन में चीज़ें हाथ से निकलती हुई मालूम होंगी. आज परिवार या मित्रों के साथ समय व्यतीत होगा. मुमकिन है कि आप झुंझलाहट या ख़ुद को फंसा हुआ महसूस करें.

Leo

28 जुलाई 2020 : आपकी ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहेगा. आपको अपने अटके कामों को पूरा करने में इसका इस्तेमाल करना चाहिए. अतिरिक्त धन को रियल एस्टेट में निवेश किया जा सकता है. नवयुवकों को स्कूल प्रोजेक्ट की बाबत कुछ राय लेने की ज़रूरत हो सकती है. कामकाज में व्यस्तता के चलते रोमांस को दरकिनार होना पड़ेगा. आज कार्यालय में आपको कुछ अच्छा समाचार सुनने को मिल सकता है. टैक्स और बीमे से जुड़े विषयों पर ग़ौर करने की ज़रूरत है. शादीशुदा ज़िंदगी के मोर्चे पर हालात वाक़ई थोड़े मुश्किल रहे हैं,लेकिन अब आप सुधरते हालात महसूस कर सकते हैं. जब आपके पास ज़्यादा खाली समय हो, तो नकारात्मक विचार आपको ज़्यादा परेशान करते हैं. अतः सकारात्मक पुस्तकें पढ़ें, कोई मनोरंजक फ़िल्म देखें या मित्रों के साथ समय व्यतीत करें.

Virgo

28 जुलाई 2020 : आप ख़ुद को ऊर्जा से सराबोर महसूस करेंगे, लेकिन काम का बोझ आप में खीज पैदा करेगा. प्राप्त हुआ धन आपकी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं होगा. आपका मज़ाकिया स्वभाव आपके चारों ओर के वातावरण को ख़ुशनुमा बना देगा. पुरानी यादों को ज़ेहन में ज़िंदा कर दोस्ती को फिर से तरोताज़ा करने का वक़्त है. कामकाज में कोई भारी ग़लती हो सकती है, अगर आप बीच-बीच में सोशल मीडिया चलाना बंद नहीं करेंगे तो. भरपूर रचनात्मकता और उत्साह आपको एक और फ़ायदेमंद दिन की ओर ले जाएंगे. आज आपको ऐसा अनुभव होगा कि आपके जीवनसाथी के द्वारा आपको नीचा दिखाया जा रहा है. जहां तक सम्भव हो इसे नजरअंदाज करें. अकेलापन कई बार काफ़ी दिक़्क़त भरा हो सकता है, ख़ास तौर से उन दिनों में जब कि आपके पास ज़्यादा कुछ करने के लिए न हो. इससे छुटकारा पाने की कोशिश करें और अपने दोस्तों के साथ थोड़ा समय व्यतीत करें. 

Libra

28 जुलाई 2020 : जो धुंध आपके चारों तरफ़ छाई हुई है और आपकी प्रगति को बाधित कर रही है, उससे बाहर निकलने का समय है. दिन के दूसरे हिस्से में आर्थिक तौर पर फ़ायदा होगा. आम परिचितों से व्यक्तिगत बातों को बांटने से बचें. आज आपकी मुस्कान बेमानी है, हंसी में वो खनक नहीं है, दिल धड़कने में आना-कानी कर रहा है, क्योंकि आप किसी ख़ास के साथ की कमी महसूस कर रहे हैं. आपको बढ़िया परिणामों को पाने के लिए अपनी तरफ़ से बेहतरीन प्रयास करने की आवश्यकता है. छुपे हुए दुश्मन आपके बारे में अफ़वाहें फैलाने के लिए अधीर होंगे. अपने जीवनसाथी से किसी भी बारे में शिकायत न करें, क्योंकि उनका मिज़ाज पहले से ही ख़राब है. इसके चलते दिन ख़राब हो सकता है. किसी अनचाहे मेहमान के आने से आपका दिन बेकार गुज़रने की सम्भावना है.

Scorpio

28 जुलाई 2020 :

आपकी सकारात्मक सोच पुरस्कृत होगी, क्योंकि आप अपनी कोशिशों में क़ामयाबी पा सकते हैं. अगर आप अपनी रचनात्मक प्रतिभा को सही तरीक़े से इस्तेमाल करें तो वह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगी. पारिवारिक उत्तरदायित्व में वृद्धि होगी, जो आपको मानसिक तनाव दे सकती है. आज प्रेम-संबंधों में अपने स्वतंत्र विवेक का इस्तेमाल कीजिए. कार्यक्षेत्र में आज आप अपने काम में प्रगति देखेंगे. अचानक यात्रा के कारण आप आपाधापी और तनाव का शिकार हो सकते हैं. यह समय जीवन में आपको वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद देगा. संभव है कि आध्यात्मिकता की ओर तीव्र खिंचाव महसूस हो. साथ ही मुमकिन है कि किसी धर्मगुरू के प्रवचन सुनने का योग बने या फिर कोई आध्यात्मिक पुस्तक पढ़ें.

Sagittarius

28 जुलाई 2020 : ज़रूरत से ज़्यादा खाने से बचें और सेहतमंद रहने के लिए नियमित व्यायाम करें. आपके मन में जल्दी पैसे कमाने की तीव्र इच्छा पैसा होगी. संपत्ति को लेकर विवाद खड़े हो सकते हैं. संभव हो तो इसे ठंडे दिमाग़ से सुलझाने की कोशिश करें. क़ानूनी दख़ल फ़ायदेमंद नहीं रहेगा. रोमांस के लिहाज़ से रोमांचक दिन है. शाम के लिए कोई ख़ास योजना बनाएं और जितना हो सके, इसे उतना रूमानी बनाने की कोशिश करें. आज किए गए निवेश काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होंगे, लेकिन आपको भागीदारों से विरोध का सामना करना पड़ सकता है. अगर आप ख़रीदारी पर जाएं तो ज़रूरत से ज़्यादा जेब ढीली करने से बचें. जीवन साथी का बिगड़ता स्वास्थ्य आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है. स्वयं के लिए अच्छा समय निकालना बढ़िया रहेगा. आपको इसकी सख़्त ज़रूरत भी है. अगर आप अपने मित्रों को इसमें सहभागी बनाएं, तो आनंद दोगुना हो जाएगा.

Capricorn

28 जुलाई 2020 : ठूंस-ठूंस कर खाने और ज़्यादा कैलोरी की चीज़ें खाने से बचिए. ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्च करने और चालाकी-भरी आर्थिक योजनाओं से बचें. कुल मिलाकर फ़ायदेमंद दिन है. लेकिन आप समझते थे जिस पर आप आंखें बंद करके यक़ीन कर सकते हैं, वह आपके भरोसे को तोड़ सकता है. किसी से तभी दोस्ती करें जब उसके बारे में पूरी जानकारी कर लें और उसे भली-भांति समझ लें. तब तक कोई वादा न करें, जब तक कि आप पूरी तरह उसे पूरा करने में सक्षम न हों. यात्राओं से तुरंत लाभ तो नहीं होगा, लेकिन इसके चलते अच्छे भविष्य की नींव रखी जाएगी. विवाह एक दैवीय आशीर्वाद है और आज आप इसका अनुभव कर सकते हैं. किसी ऐसे शख़्स का फ़ोन आ सकता है जिससे आप बहुत लंबे समय से बात करना चाहते थे. बहुत-सी पुरानी यादें ताज़ा हो जाएंगी और आप समय में पीछे लौट जाएंगे.

Aquarius

28 जुलाई 2020 : अपने विचार और ऊर्जा को उन कामों में लगाएं, जिनसे आपके सपने हक़ीक़त का रूप ले सकते हैं. सिर्फ़ ख़याली पुलाव पकाने से कुछ नहीं होता है. अभी तक आपके साथ समस्या यह है कि आप कोशिश करने की बजाय केवल इच्छा करते हैं. इस बात में सावधानी बरतें कि आप किसके साथ आर्थिक लेन-देन कर रहे हैं. क़रीबी पारिवारिक सदस्य आपको झुंझलाहट और जलन का अनुभव कराएंगे, बहस या झगड़े में उलझने की बजाय शांति से यह बताएं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं. उपहार/भेंट वग़ैरह भी आज आपके प्रिय का मूड बदलने में नाकाम रहेंगे. आपके काम की गुणवत्ता देखकर आपके वरिष्ठ आपसे प्रभावित होंगे. मुमकिन है कि आपके अतीत से जुड़ा कोई शख़्स आज आपसे संपर्क करेगा और इस दिन को यादगार बना देगा. बिजली कटौती या फिर किसी अन्य वजह से आपको सुबह तैयार होने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन जीवनसाथी की ओर से इससे निबटने में काफ़ी मदद मिलेगी. दोस्त अकेलापन दूर करने के सबसे अच्छे माध्यमों में से एक हैं. दोस्तों के साथ समय बिताकर आज के दिन आप बेहतरीन चीज़ में समय निवेश कर सकते हैं.

Pisces

28 जुलाई 2020 : जो धुंध आपके चारों तरफ़ छाई हुई है और आपकी प्रगति को बाधित कर रही है, उससे बाहर निकलने का समय है. अचानक नए स्रोतों से धन मिलेगा, जो आपके दिन को ख़ुशनुमा बना देगा. ऐसे लोगों को संभालने में काफ़ी दिक़्क़त होगी, जो आपको नीचे खींचने की कोशिश करते हैं. अपने प्रिय के लिए बदले की भावना से कुछ हासिल नहीं होगा. बजाय इसके आपको दिमाग़ शांत रखना चाहिए और अपने प्रिय को अपनी सच्चे जज़्बात से परिचित कराना चाहिए. आज आप नए प्रोजेक्ट को शुरू करेंगे जो पूरे परिवार के लिए समृद्धि लेकर आएगा. शहर से बाहर यात्रा ज़्यादा आरामदेह नहीं रहेगी, लेकिन आवश्यक जान पहचान बनाने के लिहाज़ से फ़ायदेमंद साबित होगी. आपसे कोई बड़ी ग़लती सम्भव है, जो वैवाहिक जीवन के लिए ख़राब हो सकती है. संभव है कि आज आपकी जीभ को भरपूर मज़ा मिले.

तुलसी जयंती पर विशेष

तुलसी-तुलसी सब कहें, तुलसी वन की घास।
हो गई कृपा राम की तो बन गए तुलसीदास।।

चंडीगढ़ – धर्म संस्कृति:

सम्पूर्ण भारतवर्ष में गोस्वामी तुलसीदास के स्मरण में तुलसी जयंती मनाई जाती है. श्रावण मास की सप्तमी के दिन तुलसीदास की जयंती मनाई जाती है. इस वर्ष यह 27 जुलाई 2020 के दिन गोस्वामी तुलसीदास जयंती मनाई जाएगी. गोस्वामी तुलसीदास ने सगुण भक्ति की रामभक्ति धारा को ऐसा प्रवाहित किया कि वह धारा आज भी प्रवाहित हो रही है. गोस्वामी तुलसीदास ने रामभक्ति के द्वारा न केवल अपना ही जीवन कृतार्थ किया वरन सभी को श्रीराम के आदर्शों से बांधने का प्रयास किया. वाल्मीकि जी की रचना ‘रामायण’ को आधार मानकर गोस्वामी तुलसीदास ने लोक भाषा में राम कथा की रचना की।

तुलसीदास जी जिनका नाम आते ही प्रभु राम का स्वरुप भी सामने उभर आता है. तुलसीदास जी रामचरित मानस के रचियेता तथा उस भक्ति को पाने वाले जो अनेक जन्मों को धारण करने के पश्चात भी नहीं मिल पाती उसी अदभूत स्वरुप को पाने वाले तुलसीदास जी सभी के लिए सम्माननीय एवं पूजनीय रहे. तुलसीदास जी का जन्म संवत 1589 को उत्तर प्रदेश के बाँदा ज़िला के राजापुर नामक ग्राम में हुआ था. इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था.

” लाज न आई आपको दौरे आएहु नाथ”

तुलसीदास जी ने अपने बाल्यकाल में अनेक दुख सहे युवा होने पर इनका विवाह रत्नावली से हुआ, अपनी पत्नी रत्नावली से इन्हें अत्याधिक प्रेम था परंतु अपने इसी प्रेम के कारण उन्हें एक बार अपनी पत्नी रत्नावली की फटकार “अस्थि-चर्म मय देह मम तापै ऐसी प्रीति, अस जो होति श्रीराम मह तो ना होति भव भीति।।” ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी और तुलसी जी राम जी की भक्ति में ऎसे डूबे कि उनके अनन्य भक्त बन गए. बाद में इन्होंने गुरु बाबा नरहरिदास से दीक्षा प्राप्त की.

नरहरि बाबा ने तुलसीदास को तराशा और उसका नाम रामबोला रखा। उसे वे अयोध्या ले गए और उनका यज्ञोपवीत-संस्कार कराया। बिना सिखाये ही बालक रामबोला ने गायत्री-मंत्र का उच्चारण किया, जिसे देखकर सब लोग चकित हो गए। इसके बाद नरहरि स्वामी ने वैष्णवों के पांच संस्कार कर रामबोला को राममंत्र की दीक्षा दी और अयोध्या ही में रहकर उन्हें विद्याध्ययन कराने लगे।

बालक रामबोला की बुद्धि बड़ी प्रखर थी। एक बार गुरुमुख से जो सुन लेते थे, उन्हें वह कंठस्थ हो जाता था। वहां से कुछ दिन बाद गुरु-शिष्य दोनों शूकरक्षेत्र (सोरों) पहुंचे। वहां श्री नरहरि जी ने तुलसीदास को रामचरित सुनाया। कुछ दिन बाद वह काशी चले आये। काशी में शेषसनातन जी के पास रहकर तुलसीदास ने पंद्रह वर्ष तक वेद-वेदांग का अध्ययन किया।

इधर उनकी लोकवासना कुछ जाग्रत हो उठी और अपने विद्यागुरु से आज्ञा लेकर वे अपनी जन्मभूमि को लौट आये। वहां आकर उन्होंने देखा कि उनका परिवार नष्ट हो चुका है। उन्होंने विधिपूर्वक अपने पिता आदि का श्राद्ध किया और वहीं रहकर लोगों को भगवान राम की कथा सुनाने लगे।

अपने दीर्घकालीन अनुभव और अध्ययन के बल पर तुलसी ने साहित्य को अमूल्य कृतियों से समृद्ध किया, जो तत्कालीन भारतीय समाज के लिए तो उन्नायक सिद्ध हुई ही, आज भी जीवन को मर्यादित करने के लिए उतनी ही उपयोगी हैं। तुलसीदास द्वारा रचित ग्रंथों की संख्या 39 बताई जाती है। इनमें रामचरित मानस, कवितावली, विनयपत्रिका, दोहावली, गीतावली, जानकीमंगल, हनुमान चालीसा, बरवै रामायण आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

तुलसीदास जी संस्क्रत भाषा के विद्वान थे अपने जीवनकाल में उन्होंने ने अनेक ग्रंथों की रचना की तुलसीदास जी रचित श्री रामचरितमानस को बहुत भक्तिभाव से पढ़ा जाता है, रामचरितमानस जिसमें तुलसीदास जी ने भगवान राम के चरित्र का अत्यंत मनोहर एवं भक्तिपूर्ण चित्रण किया है. दोहावली में तुलसीदास जी ने दोहा और सोरठा का उपयोग करते हुए अत्यंत भावप्रधान एवं नैतिक बातों को बताया है. कवितावली इसमें श्री राम के इतिहास का वर्णन कवित्त, चौपाई, सवैया आदि छंदों में किया गया है.

रामचरितमानस के जैसे ही कवितावली में सात काण्ड मौजूद हैं. गीतावली सात काण्डों वाली एक और रचना है जिसमें में श्री रामचन्द्र जी की कृपालुता का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया है. इसके अतिरिक्त विनय पत्रिका कृष्ण गीतावली तथा बरवै रामायण, हनुमान बाहुक,  रामलला नहछू, जानकी मंगल, रामज्ञा प्रश्न और संकट मोचन जैसी कृत्तियों को रचा जो तुलसीदास जी की छोटी रचनाएँ रहीं. रामचरितमानस के बाद हनुमान चालीसा तुलसीदास जी की अत्यन्त लोकप्रिय साहित्य रचना है. जिसे सभी भक्त बहुत भक्ति भाव के साथ सुनते हैं.

तुलसीदास जी ने उस समय में समाज में फैली अनेक कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया अपनी रचनाओं द्वारा उन्होंने विधर्मी बातों, पंथवाद और सामाज में उत्पन्न बुराईयों की आलोचना की उन्होंने साकार उपासना, गो-ब्राह्मण रक्षा, सगुणवाद एवं प्राचीन संस्कृति के सम्मान को उपर उठाने का प्रयास किया वह रामराज्य की परिकल्पना करते थे. इधर उनके इस कार्यों के द्वारा समाज के कुछ लोग उनसे ईर्ष्या करने लगे तथा उनकी रचनाओं को नष्ट करने के प्रयास भी किए किंतु कोई भी उनकी कृत्तियों को हानि नहीं पहुंचा सका.

आज भी भारत के कोने-कोने में रामलीलाओं का मंचन होता है. उनकी इनकी जयंती के उपलक्ष्य में देश के कोने कोने में रामचरित मानस तथा उनके निर्मित ग्रंथों का पाठ किया जाता है. तुलसीदास जी ने अपना अंतिम समय काशी में व्यतित किया और वहीं विख्यात घाट असीघाट पर संवत‌ 1680 में श्रावण कृष्ण तृतीया के दिन अपने प्रभु श्री राम जी के नाम का स्मरण करते हुए अपने शरीर का त्याग किया.

आज लोक गीत मान कर गाये जाते हैं शिव कुमार बटालावी के गीत

कोरल ‘पुरनूर’ चंडीगढ़ – 23 जुलाई:

जन्मदिवस पर विशेष: पंजाबी के विद्यापति ‘शिव कुमार बटालवि’

शिव बटालवि

अमृता के ‘बिरह के सुल्तान’ लोक संस्कृति के पुरोधा भी हैं

शिव के गीत भारत पाकिस्तान में घर घर गली गली महफिल महफिल इस क़दर मशहूर हैं सभी आम – ओ – खास उनको लोक गीत ही समझकर गाते सुनते हैं लट्ठे दी चादर , ईक मेरी अख कासनी, जुगनी, म्धानियाँ हाय ओह … आदि  जैसे गीत हमारी संस्कृति का हिस्सा  ही नहीं बल्कि पंजाबी को द्निया में अहम स्थान दिलाने के श्रेय के भी अधिकारी है शिव पंजाब का विद्यापति है।

‘इक कुड़ी जिहदा नाम मोहब्बत गुम है’ उनकी शाहकार रचना  में भावनाओं का उभार, करुणा, जुदाई और प्रेमी के दर्द का बखूबी चित्रण है।

शिव कुमार बटालवी के गीतों में ‘बिरह की पीड़ा’ इस कदर थी कि उस दौर की प्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम ने उन्हें ‘बिरह का सुल्तान’ नाम दे दिया। शिव कुमार बटालवी यानी पंजाब का वह शायर जिसके गीत हिंदी में न आकर भी वह बहुत लोकप्रिय हो गया। उसने जो गीत अपनी गुम हुई महबूबा के लिए बतौर इश्तहार लिखा था वो जब फ़िल्मों तक पहुंचा तो मानो हर कोई उसकी महबूबा को ढूंढ़ते हुए गा रहा था

वे 1967 में वे साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले सबसे कम उम्र के साहित्यकार बन गये। साहित्य अकादमी (भारत की साहित्य अकादमी) ने यह सम्मान पूरण भगत की प्राचीन कथा पर आधारित उनके महाकाव्य नाटिका ‘लूणा’ (1965) के लिए दिया, जिसे आधुनिक पंजाबी साहित्य की एक महान कृति माना जाता है और जिसने आधुनिक पंजाबी किस्सा गोई की एक नई शैली की स्थापना की।

        शिव कुमार का जन्म 23 जुलाई 1936 को गांव बड़ा पिंड लोहटिया, शकरगढ़ तहसील (अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में) राजस्व विभाग के ग्राम तहसीलदार पंडित कृष्ण गोपाल और गृहिणी शांति देवी के घर में हुआ। भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार गुरदासपुर जिले के बटाला चला आया, जहां उनके पिता ने पटवारी के रूप में अपना काम जारी रखा और बाल शिव ने प्राथमिक शिक्षा पाई। लाहौर में पंजाबी भाषा की क़िताबें छापने वाले प्रकाशक ‘सुचेत क़िताब घर’ ने 1992 में शिव कुमार बटालवी की चुनिंदा शायरी की एक क़िताब ‘सरींह दे फूल’ छापी.

5 फ़रवरी 1967 को उनका विवाह गुरदासपुर जिले के किरी मांग्याल की ब्राह्मण कन्या अरुणा से हुआ  और बाद में दंपती को दो बच्चे मेहरबां (1968) और पूजा (1969) हुए। 1968 में चंडीगढ़ चले गये, जहां वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जन संपर्क अधिकरी बने, वहीं अरुणा बटालवी पुंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के पुस्तकालयमें कार्यरत रहीं। आज शिव कुमार बटालवी का परिवार केनेडा में रहता है।

ग्रामीण क्षेत्रों मे रहने वाले किसानों ओर बाकी लोगों के संपर्क में आए ओर उन्हीं की बातें अपने लेखन में ढाली उनको जानने वाले लोग उनकी जीवन शैली और दिनचर्या के बारे में बताते हैं के वो राँझे की सी जिंदगी जीते थे वह ऐसे कवि थे जो कि अपनी रचना को स्वयं लयबद्ध करते थे।

        बटालवी की नज्मों को सबसे पहले नुसरत फतेह अली खान ने अपनी आवाज दी. नुसरत ने उनकी कविता ‘मायें नी मायें मेरे गीतां दे नैणां विच’ को गाया था. इसके बाद तो जगजीत सिंह – चित्रा सिंह, रबी शेरगिल, हंस राज हंस, दीदार सिंह परदेसी और सुरिंदर कौर जैसे कई गायकों ने बटालवी की कविताएं गाईं. उस शायर के लिखे हुए गीत – अज्ज दिन चढ्या, इक कुड़ी जिद्दा नां मुहब्बत, मधानियां, लट्ठे दी चादर, अक्ख काशनी आदि आज भी न केवल लोगों की जुबां पर हैं बल्कि बॉलीवुड भी इन्हें समय समय पर अपनी फिल्मों को हिट करने के लिए यूज़ करता आ रहा है. नुसरत फतेह अली, महेंद्र कपूर, जगजीत सिंह, नेहा भसीन, गुरुदास मान, आबिदा, हंस राज हंस….

     “असां ते जोबन रुत्ते मरना…” यानी “मुझे यौवन में मरना है, क्यूंकि जो यौवन में मरता है वो फूल या तारा बनता है, यौवन में तो कोई किस्मत वाला ही मरता है” कहने वाले शायर की ख़्वाहिश ऊपर वाले ने पूरी भी कर दी. मात्र छत्तीस वर्ष की उम्र में शराब, सिगरेट और टूटे हुए दिल के चलते 7 मई 1973 को वो चल बसे. लेकिन, जाने से पहले शिव ‘लूणा’ जैसा महाकाव्य लिख गये, जिसके लिए उन्हें सबसे कम उम्र में साहित्य अकादमी का पुरूस्कार दिया गया. मात्र इकतीस वर्ष की उम्र में. ‘लूणा’ को पंजाबी साहित्य में ‘मास्टरपीस’ का दर्ज़ा प्राप्त है और जगह जगह इसका नाट्य-मंचन होता आया है.

शिव को राजनीतिक चुनोतियों का भी सामना करना पड़ा  उन्होने पंजाबी ओर हिन्दी को हिन्दू – सिक्ख में बँटते भी देखा ओर इस बात का पुरजोर विरोध भी किया, अपनी मातृभाषा को इस तरह बँटते देखना असहनीय था।  लोगों के दोहरे व्यवहार और नकलीपन की वजह से उन्होंने कवि सम्मेलनों में जाना बंद कर दिया था. एक मित्र के बार-बार आग्रह करने पर वे 1970 में बम्बई के एक कवि सम्मलेन में शामिल हुए थे. मंच पर पहुँचने के बाद जब उन्होंने बोला तो पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया. उन्होंने बोला कि आज हर व्यक्ति खुद को कवि समझने लगा है, गली में बैठा कोई भी आदमी कवितायें लिख रहा है. इतना बोलने के बाद उन्होंने अपनी सबसे प्रसिद्ध रचना ‘इक कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत है, गुम है’ सुनाई. इस पूरे पाठ के दौरान हॉल में सन्नाटा बना रहा. सच कहा जाए तो शिव कुमार कभी दुःख से बाहर निकल ही नहीं पाए. उन्हें हर समय कुछ न कुछ काटता ही रहा.

एक साक्षात्कार के दौरान शिव ने कहा आदमी, जो है, वो एक धीमी मौत मर रहा है. और ऐसा हर इंटेलेक्चुअल के साथ हो रहा है, होगा.”

The Quick brown fox नहीं यह है एक वर्णमाला का सम्पूर्ण वाक्य ‘क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोटौठीडढण:।’

अजय नारायण शर्मा ‘अज्ञानी’, चंडीगढ़:

संस्कृत भाषा का कोई सानी नहीं है। यह अत्यंत वैज्ञानिक व विलक्षण भाषा है जो अनंत संभावनाएं संजोए है।

अंग्रेजी में
A QUICK BROWN FOX JUMPS OVER THE LAZY DOG
यह एक प्रसिद्ध वाक्य है। अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर इसमें समाहित हैं। किन्तु इसमें कुछ कमियाँ भी हैं, या यों कहिए कि कुछ विलक्षण कलकारियाँ किसी अंग्रेजी वाक्य से हो ही नहीं सकतीं। इस पंक्ति में :-

1) अंग्रेजी अक्षर 26 हैं और यहां जबरन 33 का उपयोग करना पड़ा है। चार O हैं और A,E,U,R दो-दो हैं।
2) अक्षरों का ABCD.. यह स्थापित क्रम नहीं दिख रहा। सब अस्तव्यस्त है।

अब संस्कृत में चमत्कार देखिये!

क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोटौठीडढण:।
तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।।

अर्थात्– पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनहार कौन? राजा मय कि जिसको शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं।

आप देख सकते हैं कि संस्कृत वर्णमाला के सभी 33 व्यंजन इस पद्य में आ जाते हैं। इतना ही नहीं, उनका क्रम भी यथायोग्य है।

एक ही अक्षर का अद्भुत अर्थ विस्तार।
माघ कवि ने शिशुपालवधम् महाकाव्य में केवल “भ” और “र”, दो ही अक्षरों से एक श्लोक बनाया है-

भूरिभिर्भारिभिर्भीभीराभूभारैरभिरेभिरे।
भेरीरेभिभिरभ्राभैरूभीरूभिरिभैरिभा:।।

अर्थात् धरा को भी वजन लगे ऐसे वजनदार, वाद्य यंत्र जैसी आवाज निकालने वाले और मेघ जैसे काले निडर हाथी ने अपने दुश्मन हाथी पर हमला किया।

किरातार्जुनीयम् काव्य संग्रह में केवल “न” व्यंजन से अद्भुत श्लोक बनाया है और गजब का कौशल प्रयोग करके भारवि नामक महाकवि ने कहा है –

न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नाना नना ननु।
नुन्नोSनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नन्नुनन्नुनुत्।।

अर्थ- जो मनुष्य युद्ध में अपने से दुर्बल मनुष्य के हाथों घायल हुआ है वह सच्चा मनुष्य नहीं है। ऐसे ही अपने से दुर्बल को घायल करता है वो भी मनुष्य नहीं है। घायल मनुष्य का स्वामी यदि घायल न हुआ हो तो ऐसे मनुष्य को घायल नहीं कहते और घायल मनुष्य को घायल करें वो भी मनुष्य नहीं है।

अब हम एक ऐसा उदहारण देखेंगे जिसमे महायमक अलंकार का प्रयोग किया गया है। इस श्लोक में चार पद हैं, बिलकुल एक जैसे, किन्तु सबके अर्थ अलग-अलग –

विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणा विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणाः।
विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणा विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणाः।।

अर्थात् – अर्जुन के असंख्य बाण सर्वत्र व्याप्त हो गए जिनसे शंकर के बाण खण्डित कर दिए गए। इस प्रकार अर्जुन के रण कौशल को देखकर दानवों को मारने वाले शंकर के गण आश्चर्य में पड़ गए। शंकर और तपस्वी अर्जुन के युद्ध को देखने के लिए शंकर के भक्त आकाश में आ पहुँचे।

संस्कृत की विशेषता है कि संधि की सहायता से इसमें कितने भी लम्बे शब्द बनाये जा सकते हैं। ऐसा ही एक शब्द इस चित्र में है, जिसमें योजक की सहायता से अलग अलग शब्दों को जोड़कर 431 अक्षरों का एक ही शब्द बनाया गया है। यह न केवल संस्कृत अपितु किसी भी साहित्य का सबसे लम्बा शब्द है। (चित्र संलग्न है…)

संस्कृत में यह श्लोक पाई (π) का मान दशमलव के 31 स्थानों तक शुद्ध कर देता है।

गोपीभाग्यमधुव्रात-श्रुग्ङिशोदधिसन्धिग।
खलजीवितखाताव गलहालारसंधर।।

pi=3.1415926535897932384626433832792

श्रृंखला समाप्त करने से पहले भगवन श्री कृष्णा की महिमा का गान करने वाला एक श्लोक प्रस्तुत है जिसकी रचना भी एक ही अक्षर से की गयी है।

दाददो दुद्ददुद्दादी दाददो दूददीददोः।
दुद्दादं दददे दुद्दे दादाददददोऽददः॥

यहाँ पर मैंने बहुत ही काम उदाहरण लिए हैं, किन्तु ऐसे और इनसे भी कहीं प्रभावशाली उल्लेख संस्कृत साहित्य में असंख्य बार आते हैं। कभी इस बहस में न पड़ें कि संस्कृत अमुक भाषा जैसा कर सकती है कि नहीं, बस यह जान लें, जो संस्कृत कर सकती है, वह कहीं और नहीं हो सकता।

।। गुरु।।

अधिवक्ता भावना नागदा

गुरु वहीं जो आपको जीना सिखा दे।
और आपकी आपसे पहचान करा दे।

कविता

।। गुरु।।

गुरु वही जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है ।
हर बुराई को दूर करता है नयी राह दिखाता है ।
जीवन के घोर अंधेरो मे प्रकाश बन कर आता है।
गुरु वहीं जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है।
अज्ञान से महान ज्ञानी बनाए नई ऊर्जा और नया जीवन दे।
नाम बढें जग मे यही कामना करता है हृदय से।
गुरु वहीं जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है।
हीरे की तरह तराश दे मन मे एक विश्वास जगादे।
आपकी आप से पहचान कराये और जीना सिखा दे।
गुरु वहीं जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है।
सच और झूठ से साकार करा दे।
हमेशा दिखाए सच्चा मार्ग वो एक अच्छा इंसान बना दे।
गुरु वहीं जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है।
मुश्किलो से लड़कर आगे बढ़ जाओ वो इतना समझदार बना दे
बताये जीत जाना ही सब कुछ नहीं हारक जीत जाने का हुनर सिखा दे।
गुरु वहीं जो आपको जीना सिखा दे।
और आपकी आपसे पहचान करा दे।

: अधिवक्ता भावना नागदा
(अपने दादा,दादी मां -पिता गुरु को समर्पित)

क्या राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बाजी पलट दी है?

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बाजी पलट दी है. उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत से गहलोत सरकार पर छाए संकट के बाद फिलहाल छंटते नजर आ रहे हैं. सीएम आवास के अंदर गहलोत ने अपने समर्थक विधायकों की मीडिया के सामने परेड कराई है. गहलोत खेमे ने दावा किया है कि उनके पास 109 विधायक हैं. यानी बहुमत के आंकड़े 101 से ज्यादा विधायक उनके पास हैं. हालांकि, सचिन पायलट का कहना है कि उनके पास 25 विधायक हैं. लेकिन फिलहाल अशोक गहलोत की सरकार बचती नजर आ रही है. अब प्रियंका गांधी ने भी इस संकट को खत्म करने के लिए मार्चो संभाल लिया है. प्रियंका के अलावा राहुल गांधी समेत कुल 5 बड़े नेताओं ने पायलट से बात कर उन्हें समझाने की कोशिश की है.

राजस्थान (ब्यूरो)

सीएम अशोक गहलोत और डिप्‍टी सीएम सचिन पायलट के बीच सियासी मनमुटाव ने कांग्रेस आलाकमान की परेशानी बढ़ा दी है. तमाम प्रयासों के बावजूद सोमवार को सचिन पायलट (Sachin Pilot) की गैरमौजूदगी में ही राजस्‍थान कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई. इस बीच, सूत्रों के हवाले से यह खबर सामने आई है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) अब इस सियासी संकट को निपटाने के लिए सामने आई हैं. उनके दखल पर नाराज पायलट से फिर से बातचीत शुरू हुई है, ताकि हालात को सामान्‍य किया जा सके. जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस कार्यालय से सचिन पायलट के उतारे गए होर्डिंग्‍स को फिर से लगा दिए गए हैं. बताया जाता है कि राजस्‍थान के राजनीतिक घटनाक्रम से कांग्रेस आलाकमान बेहद चिंतित है.

इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर बुलाई गई विधायक दल की बैठक में 100 से ज्यादा विधायकों के पहुंचने के बाद दो दिन से चल रहे सियासी घटनाक्रम का पटाक्षेप होता दिखा. सीएम गहलोत ने 10 से ज्यादा निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाकर मीडिया को संकेत दिया कि उनकी सरकार सुरक्षित है. हालांकि इस बैठक में सचिन पायलट और उनके कुछ समर्थक विधायक शामिल नहीं हुए. पायलट के करीबी सूत्रों ने यह दावा भी किया था कि उनके गुट को 25 MLA का समर्थन हासिल है. उन्‍होंने स्‍पष्‍ट रूप से कहा था कि सीएम गहलोत की अध्यक्षता में होने वाली विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होंगे. बहरहाल, बदलते घटनाक्रम के बीच अब डिप्टी सीएम सचिन पायलट को मनाने की कवायद फिर से शुरू हो गई है.

आपको बता दें कि कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे ने आज सुबह मीडिया के साथ बातचीत में प्रदेश की सरकार को अस्थिर करने का आरोप भारतीय जनता पार्टी के ऊपर लगाया था. पांडे ने कहा था कि बीजेपी की साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा. राजस्थान कांग्रेस के सब विधायक एकजुट हैं. उन्होंने कहा था कि बीजेपी हर राज्य में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी सरकारों को अस्थिर करने की साजिश रच रही है. वह कर्नाटक और मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान में भी ऐसी घटनाएं दोहराना चाहती है, लेकिन इसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा.