सोनिया गांधी द्वारा विपक्ष की बैठक

‘क्रूर मज़ाक’ यह शब्द आज इसी हफ्ते में दूसरी बार सुनाई दिया। इससे पहले रायबरेली से कॉंग्रेस विधायिका अदिति सिंह ने अपनी ही पार्टी की बसों की राजनीति पर यह शब्द कहा था जिसके परिणाम स्वरूप उन्हे कॉंग्रेस पार्टी के कई पदों से हाथ धोना पड़ा। नया शब्द था तो प्रयोग लाजिमी था आज यह शब्द सोनिया जी ने प्रधान मंत्री के कार्यों पर चस्पा कर दिया। आज कॉंग्रेस की कार्यकारिणी अध्यक्षा ने भारत सरकार के खिलाफ विपक्ष को लामबंद कर मोदी को घेरने की चेष्टा भर की। फिर भी 22 क्षेत्रीय नेताओं ने भाग लिया। यह नेता 22 राज्यों से भले ही न हों परंतु 22 दलों से अवश्य ही संबंध रखते हैं। कोरोना के चलते यह बैठक संचार के नए माध्यमों से ली गयी थी। इस बैठक का एक परोक्ष मुद्दा था राहुल और प्रियंका को विपक्षी दलों मे सर्वमान्य बनाना। यहीं पर कॉंग्रेस धता खा गयी। हिन्दी भाषी क्षेत्रीय दलों के सर्वेसर्वाओं को आने वाले समय में खुद का राहुल या प्रियंका के जी हजूर क्षत्रप होने का आभास भी नहीं देना था अत: हिन्दी भाषी अधिकतम विपक्षी नेताओं ने इस बैठक से किनारा किया। इस बैठक से एक बात और साफ हो गयी कि सोनिया गांधी भी विपक्ष की सर्वमान्य नेता नहीं हैं।

नयी दिल्ली/चंडीगढ़ – 22 मई

”केंद्र सरकार ने खुद के लोकतांत्रिक होने का दिखावा करना भी छोड़ दिया है और इसके मन में गरीबों-मजदूरों के मन में किसी भी तरह की दया और करुणा का भाव नहीं है. सरकार की ओर से घोषित किए गए आर्थिक पैकेज में सुधारों के नाम पर केवल दिखावा ही किया गया है.” यह बात कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने शु्क्रवार को विपक्षी पार्टियों के साथ पहली ऑनलाइन बैठक के दौरान कही. बैठक में कोरोना वायरस संकट पर चर्चा हुई. कोविड-19 महामारी से निपटने में पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के तौर तरीके की आलोचना करते हुए कांग्रेस प्रमुख ने कहा, “सारी शक्ति अब एक कार्यालय, पीएमओ में केंद्रित हैं.” उन्‍होंने कहा कि “संघवाद की भावना हमारे संविधान का अभिन्न अंग है लेकिन इसे भुला दिया गया है. इस बात के कोई संकेत नहीं है कि संसद के दोनों सदनों या स्थायी समितियों को कब मिलने के लिए बुलाया जाएगा.” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बैठक में शामिल हुए लेकिन मायावती की बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (आआपा) के अरविंद केजरीवाल इससे नदारद रहे. इन तीनों ही पार्टियों के कांग्रेस से अपने सियासी मसले हैं. इस दौरान सोनिया गांधी ने पीएम के आर्थिक पैकेज को देश के साथ ‘क्रूर मजाक’ की तरह बताया.

सोनिया गांधी ने कहा कि कोरोना को 21 दिन में खत्म करने की पीएम का दावा धराशायी हुआ। सरकार के पास लॉकडाउन को लेकर कोई योजना नहीं था। सरकार के पास करोना संकट से बाहर निकलने की कोई नीति नहीं थी। लगातार लॉकडाउन का कोई फायदा नहीं हुआ, नतीजे खराब ही निकले

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना टेस्ट और पीपीई किट के मोर्चे पर भी सरकार विफल रही है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई, लॉकडाउन के नाम पर क्रूर मजाक हुआ। सभी शक्तियां पीएमओ के पास हैं, वो कर्मचारियों और कंपनियों के हितों की सुरक्षा करें।

सोनिया गांधी ने बैठक में कहा कि कोरोना संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत में उम्मीद जताई थी कि इस पर 21 दिन में काबू पा लिया जाएगा, जबकि उनकी धारणा गलत साबित हो गई। उन्होंने कहा कि सरकार न सिर्फ लॉकडाउन के मानदंडों को लेकर अनिश्चित थी, बल्कि उसके पास इससे निकलने की भी कोई रणनीति नहीं थी। इस क्रमिक लॉकडाउन के नतीजे भी खास नहीं देखने को मिले।

सोनिया गांधी ने कहा कि कोरोना टेस्ट और टेस्टिंग किट के आयात पर भी झटका लगा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नकदी गरीबों को हस्तांतरित की जानी चाहिए, सभी परिवारों को मुफ्त अनाज दिया जाना चाहिए, प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों में वापस जाने के लिए बसों और ट्रेनों की व्यवस्था की जानी चाहिए।

सोनिया ने कहा कि कर्मचारियों और नियोक्ताओं की सुरक्षा के लिए सरकार को वेतन सहायता और मजदूरी संरक्षण निधि स्थापित करना चाहिए। सोनिया गांधी ने पीएसयू को बेचने को हरी झंडी देने की आलोचना की और श्रम कानूनों को बहाल करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सभी शक्तियां अब एक कार्यालय, पीएमओ में केंद्रित हो गई है। संघवाद की भावना जो हमारे संविधान का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे भुला दिया गया है। संसद के दोनों सदनों या स्थायी समितियों को बैठक करने के लिए बुलाया जाएगा या नहीं…इसका कोई संकेत दिख नहीं रहा।

बैठक में नहीं शामिल हुईं ये पार्टियां

इस बैठक में विपक्ष के कई क्षेत्रीय शामिल हुए। इस बैठक में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, सीताराम येचुरी, तेजस्वी यादव, डीएमके के एमके स्टालिन, और शिवसेना के संजय राउत जैसे नेता शामिल हुए। गैर बीजेपी राज्यों के कई मुख्यमंत्री भी बैठक में शामिल हुए। मगर इस बैठक से सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी हिन्दी भाषी दलों ने दुरी बना ली।

ध्यान भटका कर सामरिक शक्ति बढ़ा रहा चीन

कोरोना महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वहीं, अमेरिका लगातार चीन पर कोरोना वायरस को दुनियाभर में फैलाने का आरोप लगाते हुए कई प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे रहा है। कई देशों ने चीन में अपनी कंपनियों को बंद करने का निर्णय लिया है। ऐसे में चीन की अर्थव्‍यवस्‍था पर आने वाले समय काफी प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है। कोरोना महामारी के कारण पहले ही चीन के बजट घाटे में भी अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है। वैसे बता दें कि साल 1990 के बाद ऐसा पहली बार है, जब चीन आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य तय नहीं का रहा है। बताया जा रहा है कि बढ़ता बजट और राजकोषीय घाटा चीन के लिए अब परेशानी का सबब बनता जा रहा है। इसलिए जीडीपी के लिए कोई लक्ष्य नहीं रखा गया है।

नई दिल्ली/बीजिंग: 

दुनिया के बड़ा सिरदर्द बन चुका चीन कोरोना के बाद

  • क्या दुनिया को किसी और मुसीबत में डालने की तैयारी कर रहा है?
  • क्या चीन ने दुनिया को कोरोना से विश्वयुद्ध के बाद किसी और युद्ध में झोंकने की तैयारी कर दी है?
  • क्या चीन चाहता है ये दुनिया शांति से रहने लायक ही न बचे?

ये तमाम बातें इसलिए कही जा रही हैं क्योंकि चीन ने कोरोना काल में भी अपने रक्षा बजट को 6.6 प्रतिशत बढ़ा दिया है। चीन ने अपना रक्षा बजट बढ़ाकर 179 अरब डॉलर कर दिया. अमेरिका के बाद सबसे अधिक सैन्य खर्च करने वाला चीन दुनिया का दूसरा देश है. चीन का रक्षा बजट भारत के मुकाबले तीन गुना है. पिछले साल चीन का रक्षा बजट 177.6 अरब डॉलर था. 

रक्षा बजट बढ़ाकर महायुद्ध की तैयारी में ड्रैगन! 

चीन ने 2020 के लिए रक्षा बजट में 6.6 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी का ऐलान किया है. कोरोना महासंकट के बाद भी चीन इस वर्ष 180 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च करेगा. रक्षा बजट से एयर‍क्राफ्ट कैरियर, परमाणु सबमरीन और स्‍टील्‍थ फाइटर जेट का निर्माण दुनिया के दूसरे देश आर्थिक मंदी के बीच रक्षा बजट पर खर्च कम कर रहे हैं. अमेरिका के बाद चीन सबसे ज्‍यादा पैसा रक्षा पर खर्च कर रहा है. 

चीन ने ये भी माना कि कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्‍यवस्‍था संकट के दौर से गुजर रही है, इसके बावजूद चीन ने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है. अब सवाल उठता है कि कोरोना काल में चीन के बजट बढ़ाने की असली वजह क्या है? क्या अमेरिका से बढ़ते हुए खतरे के बाद चीन अमेरिका से युद्ध की तैयारी कर रहा है. 

फिलहाल चीन को जो रक्षा बजट सामने आया है, उसके बारे में विशेषज्ञों को चिंता है क्योंकि माना जाता है चीन रक्षा के लिए जितने बजट को खर्च करने की बात करता है. उसका रक्षा बजट उससे कहीं ज्यादा होता है चीन ने इस बार भी कहा है कि रक्षा बजट में बढ़ोत्‍तरी का ज्‍यादातर पैसा सैनिकों की स्थिति सुधारने में खर्च किया जाएगा रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन बहुत कुछ छिपा रहा है.  

ड्रैगन छिपाता है अपना असली रक्षा बजट

चीन का वास्‍तविक रक्षा बजट बताए गए रक्षा बजट से बहुत ज्‍यादा है. बजट में कई चीजों को शामिल नहीं किया जाता है. चीन ने पिछले साल का रक्षा बजट 178 अरब डॉलर बताया था. लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले साल चीन का वास्‍तविक रक्षा बजट 220 अरब डॉलर था

चीन अगर अपने रक्षा बजट को बढ़ा रहा है तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह दक्षिण चीन सागर में अपनी पकड़ को और ज्‍यादा मजबूत करने का मकसद चीन पश्चिम प्रशांत महासागर और हिंद महासागर में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है. चीन के भारी रक्षा व्यय के चलते भारत और कई अन्य देशों को अपना रक्षा व्यय बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है, ताकि शक्ति संतुलन कायम रखा जा सके.

इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस एंड एनालिसिस (आईडीएसए) के अनुसार भारत का रक्षा बजट 2020 में 66.9 अरब अमेरिकी डॉलर था. इस तरह चीन का ताजा रक्षा बजट भारत के मुकाबले 2.7 गुना अधिक है. चीन का भारत, जापान और वियतनाम जैसे पड़ोसी मुल्कों से सीमा विवाद है. ऐसे में चीन के रक्षा बजट में यह बढ़ोत्तरी काफी मायने रखती है.

चल रहा है बस आरोप-प्रत्यारोप का खेल…… भुगतना तुझे ही पड़ेगा जनता, झेल सके तो झेल…

सुशील पंडित

मेरे किसी भी लेख की या मेरी स्वंम की अवधारणा किसी राजनैतिक पार्टियों को छोटा या बड़ा साबित करना नहीं है। क्योंकि शास्त्रों में लिखा है। हर कोई व्यक्ति, दल, जाति, धर्म व समुदाय अपने कर्मों से छोटा या फिर बड़ा होता है।

रही बात हमारी सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था की बात! ये दोनों भी कुशल या विफल राजनीति पर ही निर्भर करती है।

आज बात करते हैं आरोप-प्रत्यारोप रूपी चक्की के विषय पर जिसके दोनों पाट(हिस्से) सत्ता पक्ष व विपक्ष से निर्मित है। इसमें पिस्ता क्या है आम आदमी की भावनाओं, अपेक्षाओं रूपी आनाज परन्तु यह कोई नई बात नहीं है अब यह स्वाभाविक हो चुका है। जहाँ पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, पूरे विश्व में त्राहिमाम की स्थिति है वहीं कुछ राजनैतिक दलों में एक दूसरे के ऊपर आरोप लगाने का सिलसिला निरन्तर जारी है।

मौजूदा सरकार के द्वारा लॉक डाउन के चतुर्थ चरण की घोषणा की गई है। प्रथम चरण से लेकर अब तक राष्ट्र के हित को ध्यान में रखते हुए अलग अलग घोषणाएं भी की जा रही है और हमें लगता है कि अगर सभी घोषणाओं पर  धरातल के पटल से वास्तविक स्वरूप में आम जनता व सर्व वर्ग के लिए कार्य किया जाए तो हमारा राष्ट्र हर विपदा का सामना भली भांति करने में सक्षम है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जिस प्रकार राष्ट्र चिंतन में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति अटकलें खड़ी कर रही है उस दृष्टि से समाज का हर वर्ग चिंतित हैं। हम कब तक जाति, धर्म, समुदायों तथा राजनीति का बहरूपिया किरदार लेकर राष्ट्र निमार्ण की नींव को निर्बल करने में अपनी नकारात्मक ऊर्जा का संचार करते रहेंगे।

आम आदमी आज दोराहे पर खड़ा है कोविड19 के चलते सभी प्रकार के व्यवसाय आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे हैं सभी छोटी बड़ी फैक्ट्रियों में कार्य ठप्प होने की वजह से मालिक और कर्मचारी असमंजस की स्थिति में है। निजी संस्थानों के स्वामी व सेवक भी मौजूदा हालात में विषम परिस्थितियों गुजर रहे हैं। किसानों को उनकी परम्परागत फसलों के अलावा अन्य फसलों जैसे विभिन्न प्रकार की सब्जियों की उपज में लागत मूल्य के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। इन सभी बिंदुओ को ध्यान में रखते हुए मेरा जन साधारण की ओर से यह सुझाव व अनुरोध सभी राजनैतिक दलों व धार्मिक सगठनों व जातिगत आधार पर परिणाम रहित बहस करने वालों से है कि एक दूसरे पर आरोप लगाने का समय भविष्य में भी आएगा एक दूसरे को नीचा दिखाने की स्वर्णिम बेला भी शायद आपको मिल ही जाएगी लेकिन अभी नही क्योंकि इस समय सभी की दृष्टि जन साधारण पर है ये ही समय है अपने आप को अच्छा साबित करने का भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है किसी को नही पता लेकिन हम अपना वर्तमान सर्वहितकारी बनाएंगे तो स्वाभाविक है भविष्य राष्ट्र का स्वर्णिम होगा।

“कोरोना से डर नहीं लगता साहब…भूख से लगता है”……

समाज की वास्तविक स्थिति देखी तो यह प्रतीत हुआ कि किस लोकतंत्र की छाया में बैठ कर हमारा सम्पूर्ण समाज सविधान की चादर ओढ़े, सामाजिक समरसता के गीत गुनगुना रहा था। मैं किसी राजनैतिक पार्टी या धर्म विशेष की बात नहीं करना चाहता क्योंकि इनके बारे में बात करना इन प्रतिकूल परिस्थितियों में अंधे से रास्ता पूछने जैसा होगा।

सुशील पंडित, यमुनानगर

कोविड19 के प्रकोप ने सम्पूर्ण मानव जाति का परिदृश्य ही बदल कर रख दिया है। यह जो भी विकट समस्या महामारी के रूप में हमारे सामने मुँह खोले खड़ी है इसकी तो शायद हम में से किसी ने भी कल्पना भी नहीं की होगी।

सुशील पंडित

 जो भी वर्तमान में चल रहा है इससे यह तो बिल्कुल स्पष्ट हो चुका है कि हम सभी अभी तक एक ऐसा भ्रम से सराबोर  जीवन व्यतीत कर रहे थे जो वास्तविकता से कोसों दूर है। आज जब समाज की वास्तविक स्थिति देखी तो यह प्रतीत हुआ कि किस लोकतंत्र की छाया में बैठ कर हमारा सम्पूर्ण समाज सविधान की चादर ओढ़े, सामाजिक समरसता के गीत गुनगुना रहा था। मैं किसी राजनैतिक पार्टी या धर्म विशेष की बात नहीं करना चाहता क्योंकि इनके बारे में बात करना इन प्रतिकूल परिस्थितियों में अंधे से रास्ता पूछने जैसा होगा। आज जब मैं अपनी रिपोटिंग के दौरान फील्ड में कार्य कर रहा था तो मैने देखा बहुत अधिक संख्या में लोग पैदल अपनी मंजिल की तलाश में चले जा रहे थे। जब मैंने उन्हें ध्यान से देखा तो प्रतीत हुआ वो तो सभी हिंदुस्तानी ही थे और शायद हमारे लोकतंत्र में भी बराबर के भागीदार, कुछ के थके-मांदे चहरो से तो सविधान भी पसीना बन कर टपक रहा था। और हाँ कुछ बच्चे भी थे, शायद हमारे देश के भविष्य में बनने वाले डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, व उच्च अधिकारी आदि पर अफ़सोस भूखे, थके और सहमे हुए थे। मातृशक्ति भी इस अंजान, परिणामरहित संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही थीं। सभी के मन में एक ही प्रश्न था कि ये सब क्या हो रहा है? और क्यों हो रहा है?

मैं एक पत्रकार होने से पहले आम इंसान हूँ इसलिए उनमें से एक को पूछ बैठा, आप कहा से हो? उस गरीब के जवाब ने मुझे भी झकझोर कर रख दिया कहने लगा साहब भारत से ही हूँ क्या आप भी फ़ोटो लेने आए हो? और मैं स्तब्ध रह कर उस व्यक्ति(मजदूर) को देखता रहा क्योंकि उसकी बात का जवाब शायद मेरे पास नही था। इससे पहले मैं कुछ और बात करता उस हैरान परेशान श्रमिक ने मार्मिक शब्दों में कहा “साहब कोरोना से डर नहीं लगता, भूख से लगता है” जाहिर सी बात है यह बात उसने किसी बड़ी वजह से ही कही होगी। एक ओर शासन प्रशासन प्रवासी मजदूरों की जरूरतें पूरी करने की क़वायद में लगी है चाहें वो बड़े बड़े बजट के माध्यम से या फिर राजनीतिज्ञों के मुखारबिंद से डिबेट्स में सीना चौड़ा करके कहे गये आम आदमी के कानों में रस घोलने वाले शब्दों के माध्यम से। परन्तु अफ़सोस धरातल पर अब शून्य ही नजर आ रहा है। सभी श्रमिकों में मौजूदा हालात को लेकर असमंजस की स्तिथि बनी हुई है। इन प्रतिकूल परिस्थितियों की आंच में विपक्षी दलों के द्वारा भी ओछी राजनीति की रोटियां खूब सेकी जा रही है। बहरहाल जो भी हो मेरा यानि हर उस आम आदमी का यही प्रश्न है कि क्या कमी है और कहा कमी है अगर है तो उसे सुधारने का मौका सभी गलती करने वालों के पास शायद है अभी। हमारे देश में कोरोना जैसी महामारी ने अभी दस्तक दी है और मैं परमपिता परमात्मा से यह प्रार्थना भी करता हूँ कि अब बस और नही क्योंकि यहाँ शासन अभी पूरी तरह से परिपूर्ण नही हैंं जो रोते हुए लोगों के आँसू पोंछ सके। और न ही यह सतयुग है कि जो दो चार सच्चे नेताओं की देशभक्ति से सभी पीड़ाओ को पल भर में समाप्त कर दे।

किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था ही वहाँ के सामाजिक जीवन की व्यवस्था को सुनिश्चित करती है। वर्तमान परिवेश में जो भी चल रहा है उसका निदान करना किसी भी विशेष राजनैतिक दल या विशेष समाज के हाथ में नही है लेकिन आपसी सामंजस्य स्थापित करके ही इस महामारी से लड़ने में हम सक्षम हो सकते हैं। हमें सभी की भावनाओं का आदर करना होगा वो चाहे इस देश का गरीब मजदूर हो या फिर राष्ट की अर्थव्यवस्था मजबूत करने वाला व्यपारी क्योंकि अगर लोकतंत्र है तो हम है और स्वस्थ लोकतंत्र में सामजिक समानता का अधिकार सभी को है। भविष्य के गर्भ में क्या है ये शायद किसी को नही पता। बहरहाल जो भी चल रहा है उसका सामना तो हम करेंगें और दूसरों को भी करने के लिए प्रेरित करने का सकारात्मक प्रयास करेंगे। अब बहुत हुआ किसी धर्म जाति पर कटाक्ष करने के यह खेल जो सिर्फ और सिर्फ इस दोगली राजनीति की उपज है।बुजुर्ग अक्सर कहते “शत्रु तब पहचानिए जब सुख हो निकट, मित्र तब जानिए जब परिस्थिति हो विकट ” भूतकाल तो चला गया जो हुआ नहीं पता परन्तु वर्तमान व भविष्य में अपने विवेक का प्रयोग करके स्वंम का और स्वस्थ, सुदृढ़,और सच्चे राष्ट्र का निर्माण करने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

“कोरोना की ललकार, आम आदमी करे पुकार, धरातल के पटल पर हो विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार”

देश में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की मुहिम चल रही है। पाकिस्‍तान प्रायोजित आतंकवाद का साथ देने वाले चीन से भारत को सारे साझे तोड़ लेने के लिए भारतीय परिदृश्‍य मचल पड़ा है। ऐसा वाकया सोशल साइट्‌स पर देखने को मिल रहा है। चीन के प्रति गुस्सा ठीक है, लेकिन अतिउत्साह में लोग विदेशी ब्रण्ड्स के खिलाफ मोर्चा खोल बैठे हैं। जब हमारे नयों ने स्वदेश अपनाने की बात की तो वह ‘मेक इन इंडिया’ को नहीं भूले थे। जिन वस्तुओं का उत्पाद भारत में हो रहा है फिर चाहे वह किसी भी कंपनी को हों (आज के परिवेश में चीनी कोंपनियों को छोड़ कर) आप उसे स्वदेशी ही मानें। क्योंकि उसके उत्पाद में भारतीय कामगारों का पसीना शामिल है। हाँ उसी कंपनि के विदेशी उत्पादों के बारे में निर्णय लेने को आप स्वतंत्र हैं। इसी आशय पर प्रकाश डालता हमारे सहयोगी सुशील पंडित का यह लेख।

सुशील पंडित, यमुनानगर – 18 मई:

सुशील पंडित

ऐसा क्यों होता है कि जब भी परिस्थितिया विषम होती है तो हम अच्छा सोचने लगते हैं। क्या अच्छे हालात में अच्छा सोचना गलत है? पत्रकार होने की दृष्टि से मैं वर्तमान शासन के बारे में या तो बहुत अच्छा लिखता या शायद कुछ भी न लिखता। लेकिन बात है आम आदमी की मनोदशा की जो वर्तमान  में असमंजस की स्थिति में है।

बात है स्वदेशी अपनाने की बहुत ही सराहनीय प्रयास है लेकिन अपनाया तो उसे जाता है जिसे कभी ठुकराया हो या आजमाया ही न हो मेरा सरोकार है सिर्फ़ आम आदमी से जो जीवन के आरम्भ से लेकर अंत तक स्वदेश भावना लेकर ही अपना जीवन व्यतीत करने में विश्वास रखता है। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने का पाठ पढ़ाने की जरूरत तो उन लोगों या घरानों को हैं जो मुँह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। जिन्हें स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने में हीनता का आभास होता है।

कोई भी सत्ता हो स्वदेशी आंदोलन पर जोर देकर खुद को देश प्रेम का प्रतीक बनाने की होड़ में लगी है। स्वतंत्रता संग्राम में भी गांधी जी ने “स्वदेशी अपनाओ” का नारा दिया था जो सफल भी रहा लेकिन ज्ञात हो परिस्थितिया उस समय भी प्रतिकूल थी अंग्रेजी हकूमत की वजह से और आज भी अर्थव्यवस्था के कारण। ये खेल तो बहुत लंबे समय से चल रहा है। जिसमें जीत जब भी हुई तो वो थी विदेशी वस्तुओं की। ये इतने विचार हमारे शासकों के मन में सामान्यतः क्यो नही आते। क्या ये सच में हमारी राष्ट्र की जरुरत है या फिर सभी सत्ताधारियों का खेल?

आम इंसान किसी दल,जाति, धर्म विशेष का नही होता उसे तो सिर्फ अपेक्षा होती है तो देश के राजा से और ये परम्परा तो आदि काल से चली आ रही है राजा का दायित्व बनता है कि वह प्रजा की जायज़ अपेक्षाओं पर खरा उतरने की हर संभव कोशिश करें। देश के हर आम नागरिक की सोच यहीं है कि वो स्वदेशी वस्तुओं का भोग अपने बजट में रह कर सरलता से कर सकें लेकिन जब बात आती है भारत के खास नागरिक तो आप सभी मुझे से कही अधिक जानते हैं। किसी भी सरकार का स्वदेशी अपनाओ का ढ़िढोरा पीटना और धरातल पर रह कर इसे गभीरता से सभी के लिए समान रूप से लागू करना ये दोनों इस समस्या के अलग अलग पहलू है। क्योंकि सरकार कोई भी रही हो या वर्तमान में हो, कथनी और करनी में जमीन आसमान का नही आसमान और पाताल का अंतर है परंतु वो कहते हैं उम्मीद पर दुनिया क़ायम है बस उसी उम्मीद पर हर बार आम नागरिक  राजनीतिक दलों के प्रतिनिधयों से अपेक्षा लगाए उसी मोड़ पर खड़ा रहता है जहाँ वह आरम्भ से खड़ा है…. और बस…. वहीं खड़ा है।

मेवात से हिंदुओं का पलायन, गहरी नींद में खट्टर

हरियाणा के मेवात क्षेत्र को कट्टरवादियों ने बहुत पहले ही ‘बंगलादेश’ बना दिया है। बंगलादेश में करीब 8 प्रतिशत हिन्दू रह गए हैं, यही स्थिति मेवात की भी हो गई है। जबकि 1947 में बंगलादेश में करीब 30 प्रतिशत और मेवात में भी लगभग 30 प्रतिशत हिन्दू थे। अब पूरे मेवात को ‘पाकिस्तान’ की शक्ल देने देने का प्रयास तेजी से हो रहा है। आज हरियाणा के मेवात में हिन्दुओं के साथ वह सब हो रहा है जो बंगलादेश या पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ होता है। हिन्दू लड़कियों और महिलाओं का अपहरण, उनका मतान्तरण और फिर किसी मुस्लिम के साथ जबरन निकाह। हिन्दुओं को जबरदस्ती मुसलमान बनाना। हिन्दू व्यापारियों से जबरन पैसे की वसूली करना। मंदिरों और श्मशान के भूखंडों पर कब्जा करना। बंगलादेशी घुसपैठियों को बसाना। हिन्दुओं को झूठे मुकदमों में फंसाना। हिन्दुओं के यहां डाका डालना। कोढ़ में खाज यह कि प्रशासन द्वारा भी हिन्दुओं की उपेक्षा आम बात हो गयी है। इस कारण मेवात के हिन्दू मेवात से पलायन कर रहे हैं। मेवात के सभी 508 गांव लगभग हिन्दू-विहीन हो चुके हैं। किसी- किसी गांव में हिन्दुओं के दो-चार परिवार ही रह गए हैं। यदि सेकुलर सरकारों का रवैया नहीं बदला तो यहां बचे हिदू भी पलायन कर जाएंगे। फिर इस इलाके को पाकिस्तान बनने से कोई रोक नहीं सकता है।

सारिका तिवारी, चंडीगढ़

Sarika Tiwari,
Editor: demokratikfront.com

हरियाणा के मेवात से हिंदू समुदाय की पलायन पर अखबारों में एक रिपोर्ट छप रही है लगभग 75 से 100 शब्दों की। बस विश्व हिंदू परिषद ने पिछले दिनों एक समिति बनाई जिसमें जनरल बक्शी स्वामी धर्मदेव और वकील चंद्रकांत शर्मा शामिल थे। समिति ने ओट में बताया गत 25 वर्षों से मेवात से भारी संख्या में हिंदू पलायन कर गए हैं। वीएचपी के संयुक्त सचिव डॉ सुरेंद्र जैन की माने तो उन्होंने मेवात को हिंदुओं का कब्रिस्तान ही कह दिया, क्योंकि आए दिन हिंसा की घटनाएं सामने आ रही है। धर्म परिवर्तन के लिए दबाव आए दिन सुनने में आ रहा है, कभी किसी लड़के की शिखा काटने का प्रयास और विरोध करने पर उसके घर पर भारी संख्या में समुदाय विशेष के लोगों द्वारा हल्ला बोल कर ना केवल लड़के को अधमरा करना बल्कि उसकी मां के साथ भी मारपीट करना आम है। इतना ही नहीं प्रशासन और पुलिस इतने पंगु हैं कि पहले तो रिपोर्ट दर्ज ही नहीं हुई बाद में किसी तरह मामला दर्ज हुआ तो दबाव बनाकर सम्झौता करवाया गया। उसके अगले ही दिन लठियों से दो हिन्दू युवाओं पर जान लेवा हमला किया गया जिनमें से एक अभी भी अस्पताल में दाखिल है। उसकी स्थिति नाज़ुक बनी हुई है। इससे साफ झलकता है कि पुलिस और प्रशासन अपना कर्तव्य पालन करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। या तो किसी प्रभाव के अंतरगर्त अपना काम नहीं कर पा रहे या स्वयं दोनों मशीनरियाँ ऐसी गतिविधियों में संलिप्त हैं।

गोहत्यारों पर नहीं होती कड़ी कार्रवाई

गोकशी के मामलों में भी जब पुलिस को सूचना दी जाती है तो पुलिस अपराधियों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करती है। उदाहरण के लिए 28 अप्रैल को पुन्हाना में गो तस्करों की गोली से रघुवीर नामक एक मजदूर मारा गया। लेकिन इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने के बजाए पुलिस इसकी लीपापोती में लगी है। मजदूर का परिवार भुखमरी के कगार पर है, परन्तु मुआवजे की बात तो दूर, उसकी कोई परवाह नहीं की जा रही है। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में जहां हिन्दू परिवार गिने चुने हैं, वहां हिंदुओं की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही अपेक्षित सुरक्षा बल मौजूद है। इसके अतिरिक्त, लॉक डाउन के चलते जहां हिन्दू व्यावसायी लॉक डाउन के नियमों का पालन करते हुए जब अपने प्रतिष्ठान चला रहे होते हैं, तो वहां के स्थानीय अधिकारी केवल हिंदुओं का गैर कानूनी चालान करते हैं, जबकि मुस्लिमों द्वारा चलाये जा रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठान लॉक डाउन की धज्जियां उड़ाकर, बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप के धड़ल्ले से चल रहे हैं। 500 मकानों वाले गांव कुलैटा (नगीना ) में जहां केवल 10 मकान हिंदुओं के हैं वहां हिन्दुओं का घर से निकलना दूभर हो रहा है। बहू-बेटियां भी सुरक्षित नहीं हैं। इतना ही नहीं, सरकारी स्कूलों में हिन्दुओं के बच्चों को नमाज पढ़ने के लिये बाध्य किया जाता है,जहां पर कर्मचारी मुस्लिम बहुल हैं।

इस सबके बीच पुन्हाना के पास नई गांव से कन्वर्जन की साजिशों का भी पता चला। यहां के एक हिन्दु युवक को मुस्लिम बनाया गया और अब उसकी मां को भी इस्लाम अपनाने के लिये प्रताड़ित किया जा रहा है। यह भी बात सामने आई है कि गांव उटावड़ में कुख्यात आतंकवादी हाफिज सईद द्वारा दिए गए पैसों से एक बड़ी मस्जिद बनाई गयी जो सलमान नाम के व्यक्ति के माध्यम से बनवाई गयी। इस समय यह सलमान किसी अन्य मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की गिरफ्त में है। कुल मिलाकर हरियाणा के इस जिले में मुसलमानों का इतना आतंक व खौफ है, जिसके चलते हिन्दुओं का जीना दूभर हो रहा है। इन्हीं कारणों के चलते हिन्दू पलायन तक को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में यह समिति हिन्दू समुदाय की सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार को जागरूक करते हुए अपील करती है कि सरकार हिन्दुओं की सुरक्षा का उचित प्रबन्ध करे ताकि उनमें एक विश्वास उत्पन्न हो सके। पीड़ितों से चर्चा करते समय एक ही बात सामने आई कि वे प्रशासन पर विश्वास खो बैठे हैं। इसलिये उनमें से कुछ लोग पलायन की सोच रहे हैं। ऐसी स्थिति घातक है। इन परिस्थितियों को वर्तमान हरियाणा सरकार ही ठीक कर सकती है। इसलिए यह रिपोर्ट हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल जी को भेज दी गई है। विश्व हिंदू परिषद विश्वास करती है कि मुख्यमंत्री महोदय इस रिपोर्ट की अनुशंसाओं को अति शीघ्र लागू करके मेवात को राष्ट्र विरोधी व हिंदू विरोधी गतिविधियों से मुक्त कराएंगे।

जुलाई 2018 को 8 लोगों द्वारा एक बकरी के साथ गैंगरेप करने की घटना को कोई भूला तो नहीं होगा?

समिति ने कुछ अनुशंसा भी की हैं जो इस प्रकार हैं—

  • क्षेत्र के समस्त पुलिस प्रशासन को बदल कर इनकी जगह कर्मठ व किसी दबाव में न झुकने वाले अधिकारियों को लाया जाये।
  •  जिस क्षेत्र में हिन्दुओं पर अत्याचार होते हैं, वहां के थानाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए।
  • मेवात में मदरसों,—मस्जिदों और मजारों से चल रही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की एनआईए से जांच कराई जाए। हवाला के रास्ते आतंकवादियों का पैसा मस्जिदों के बनाने और अवैध हथियारों के जखीरे खड़ा करने में हो रहा है, यह भी जांच में शामिल हो।
  • पुलिस पर अविश्वास के कारण वहां पर अर्ध सैनिक बलों की उपस्थिति आवश्यक है। अतः मुस्लिम बहुल इलाकों मे अर्ध सैनिक बलों का केन्द्र बनना चाहिये, चाहे उसके लिये भूमि अधिग्रहण करनी पड़े।
  •  हिंदुओं की व्यक्तिगत, सामाजिक व धार्मिक सम्पत्ति पर अवैध कब्जों की जांच होनी चाहिये और उनको जिहादियों के चंगुल से अविलम्ब मुक्त कराना चाहिए।

मुख्यमंत्री को परिषद की ओर से यह रिपोर्ट सौंपी गई। सुरेन्द्र जैन चाहते हैं कि मुख्यमंत्री जल्दी से जल्दी रिपोर्ट का संगयानलेते हुए उचित कार्रवाई करें और समिति की सिफारिशों जिसमें वर्तमान अधिकारियों और कर्मियों को तुरंत प्रभाव से हटाकर दूसरे अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त किया जाए। इतना ही नहीं समिति ने सिफ़ारिश की है कि मेवात के संवेदनशील माहौल को देखते हुए यहां सीआरपीएफ़ और बीएसएफ को तैनात किया जाए।

भई यह तो रही विश्व हिंदू परिषद की मांग, जिन मसलों पर सुरेन्द्र जैन बात कर रहे हैं यह समस्याएं और घटनाएं आर एस एस के घटक दल भाजपा के राज मैं ही हुई है।

मुख्यमंत्री हो या गृह मंत्री दोनों के पास इस विषय पर बात करने का समय नहीं, मान ले अपने किसी खास या चहेते पत्रकार से इस विषय पर बात करें भी तो आम दिनों की तरह एक ही जवाब उम्मीद की जा सकती है या तो उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं या इस पर जांच चल रही है इस पर वह सामने आएगी भी या नहीं यह आने वाले समय के शोध का विषय रहेगा।

अब बात करते हैं कि क्यों प्रशासन ऐसे व्यक्ति जो कि इस तरह की घोर हिंसा में संलिप्त हैं के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करता या इन पर कोई राजनीतिक दबाव जो कि अपने वोट बैंक को संजोकर रखने के लिए तथाकथित अपिजमेंट नीति का प्रयोग करते हैं? राजनेताओं के हाथ की कठपुतली बने अखबार और चैनल क्यों सच को उजागर होने नहीं देते? एक समुदाय विशेष के कुछ गिने-चुने लोगों द्वारा हिंसा फैलाने या वारदातों को अंजाम देने को मात्र कुछ शब्दों तक समेट कर रख दिया जाता है जबकि मेवात के इलाके में पिछले दिनों इस तरह की हिंसा और सांप्रदायिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के बारे में बोलने और लिखने वाले पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया और उसे ना केवल पुलिस ने गिरफ्तार करने की पूरी तैयारी कर ली थी। और कुछ लोगों ने उसके घर पर भी हमला किया। चलो कुछ सोच कर पुलिस ने गिरफ्तारी तो नहीं की लेकिन उसकी शिकायत पर हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई इससे बड़ी विडंबना यह है की पत्रकार संगठनों या उनके पदाधिकारी साथ देना तो दूर घटनाक्रम क निंदा करने के लिए आगे नहीं आए।

अब बात करें ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग की चाहे रिपोर्ट जनता के सामने आने की बात हो रिपोर्ट दर्ज करने के बाद दोनों ही मामलों में रिपोर्ट औंधे मुंह गिरी दिखाई पड़ती हैं। मीडिया की दिलचस्पी तथाकथित अल्पसंख्यक समुदाय मैं ही है चाहे मुजफ्फरनगर का हो या शामली का मामला, मीडिया ने क्षेत्र को अपनी छावनी बना लिया था और ग्राउंड ज़ीरो से रेपोर्टिंग हो रही थी। इतना ही नहीं मिडीया इस तरह से रिपोर्टिंग करता है की जैसे चाहता हो कि घटना क्रम जितनी जल्दी हो सके जनसाधारण के मानस पटल से साफ हो जाए।

पलायन बंगाल से भी हो रहा है, आसनसोल के दंगों के बाद से यह पलायन जारी है, लेकिन अखबार और चैनल मालदा, उत्तरी दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद और टेलिनपरा की खबर बाहर नहीं आने देते। ममता बनर्जी के आने के बाद ही से यह घटना विषम रूप लेती जा रही है। देश में संचार माध्यमों की भरमार है लेकिन संचार के विषय का चुनाव देश हित के लिए नहीं बिजनेस हाउस और राजनीतिक हाउसेस के लिए किया जाता है फॉर सेल के बोर्ड तो भले ही से हट गए हैं लेकिन घरों के बाहर लटकते ताले देखकर तीन दशक पहले के कश्मीर को यहां जीवंत करते हैं।

जारी है:-

चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में हाथी लूट रहे हैं लॉकडाउन के मज़े

कोशिक खान, छछरौली:

चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में चंचल, लक्ष्मी, लिली, मोती व लक्ष्मी2 चल रहे लाॅकडाउन में शोर शराबे से दूर शांत वातावरण में केला व कद्दु खाकर  इंजाय कर रही है। रूटीन की डाइट के साथ मौसमी फल खाकर लाॅक डाउन में मस्ती कर रही हैं। फलों में इस समय इनको कद्दू और केला दिया जा रहा है। मॉर्निंग वॉक के बाद नाश्ता देने के लिए चिंघाडकर सायरन बजाना शुरू कर देती है। जिससे अंदाजा लग जाता है कि चंचल एंड फ्रेंड की टोली को अब नाश्ता चाहिए। प्रत्येक हाथी को नाश्ते में 10 किलो सीजनल फ्रूट और शाम की फीडिंग में भी 10 किलो फ्रूट दिया जाता है। इसके साथ रूटीन मे 2 क्विंटल 50 किलो ग्रीन ग्रास के साथ 10 किलो खिचड़ी भी दी जाती है।हाथी पुनर्वास केंद्र के मैनेजर आशीष बतूरा ने जानकारी देते हुए बताया कि सुबह 6:00 बजे सभी हाथी मॉर्निंग वॉक के लिए निकल पड़ते हैं। यह मॉर्निंग वॉक करीब 3 घंटे तक चलती है। उसके बाद वापस आने पर प्रत्येक हाथी को 10 केजी सीजनल फ्रूट दिए जाते हैं। उसके कुछ समय के बाद खिचड़ी दी जाती है। जिसमें प्रत्येक हाथी को 5 किलो खिचड़ी दी जाती है जो कि गर्मी व सर्दी मौसम के हिसाब से बनाई जाती है। गर्मी में गेहूं की खिचड़ी और सर्दी में बाजरे की खिचड़ी दी जाती है। उसके बाद हाथियों की फुट नेल ट्रीमिंग की जाती है।

फुट नेल ड्रीमिंग करना बहुत ही जरूरी होती है। हाथी की पूरी सेहत उसके पैरों के ऊपर डिपेंड होती है। इसलिए जरूरी है कि हाथी के नाखून को ट्रीमिंग करके एक सुरक्षात्मक शेप दी जाती है ताकि नाखून के नीचे चलते समय पत्थर ना आए। हाथी के नाखूनों की सफाई इसलिए भी जरूरी है कि हाथी के पूरी बॉडी का पसीना उसके नाखूनों की जड़ों से ही बाहर निकलता है। इसलिए उस जगह को पूरी तरह से साफ रखा जाता है। नेल ट्रीमिंग करने के बाद हाथी को नहलाया जाता है।

शाम को फ्रूट व खिचड़ी देने के बाद रात को 2 क्विंटल 50 किलो प्रत्येक हाथी को ग्रीन ग्रास जिसमें गन्ना, चैरी, बांस दिया जाता है। जिसको वह पूरी रात तक धीरे-धीरे खाता रहता है। स्वस्थ हाथी 24 घंटे में सिर्फ चार पांच घंटे की नींद लेता है। उन्होंने बताया कि इस समय लॉक डाउन की वजह से घूमने वाले नहीं आ रहे इसलिए हाथी भी अपनी मस्ती में मस्त हैं। हाथी पुनर्वास केंद्र में इस समय पांच मादा हाथी हैं। जिनको फीडिंग नेल ट्रीमिंग बाथिंग उनके महावत द्वारा कराई जा रही है। उनके स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। जिनका हर साल खून टेस्ट और पैरों के एक्स-रे भी समय-समय पर कराए जाते हैं।

आज का राशिफल

Aries

13 मई 2020: आप किसी नतीजे या फैसले का इंतजार कर रहे हैं तो शांति रखें, सब ठीक हो जाएगा. अपने नियमित काम से हटकर कुछ करने की कोशिश करेंगे तो सफल रहेंगे. मेहनत से सफलता मिलने के योग हैं. कोई बड़ा फायदा भी हो सकता है. मनचाहे कामों को पूरे करने के लिए आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है. परिवार के साथ समय बिताने की कोशिश करेंगे. बिजनेस के लिहाज से आज का दिन अच्छा है.

Taurus

13 मई 2020: अपनी राय और बातों से आप ज्यादातर लोगों पर प्रभाव जमा सकते हैं. अपने से छोटे लोगों की टेंशन हो सकती है. उलझे हुए काम सुलझाने के लिए स्थितियां आपके फेवर में हो सकती हैं. आपके सोचने के तरीके में बदलाव हो सकता है. दोस्तों से समय पर मदद मिल सकती है. घर परिवार के काम निपटाने में भी मन लगेगा.

Gemini

13 मई 2020: रोजमर्रा का कामकाज निपटाने के लिए एक्स्ट्रा कोशिश करें. अपनी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखें. अपने समय और धैर्य का पूरा इस्तेमाल करें. आज इसकी जरूरत होगी. अपने ही दम पर और शांत मन से जो काम करेंगे, उसमें आपको सफलता मिल सकती है. पॉजिटिव रहने की कोशिश करें.

Cancer

13 मई 2020: लव लाइफ में गलतफहमियां हो सकती हैं. किसी मामले में लापरवाही न करें. जॉब और बिजनेस में लापरवाही या जल्दबाजी न करें. सोचे हुए काम पूरे होने में थोड़ा समय लग सकता है. आज किसी भी काम में आपको मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है. कर्क राशि वाले लोग आज सेहत के मामले में लापरवाह न रहें.

Leo

13 मई 2020: पैसा कमाने की कोशिश में सफलता मिल सकती है. एक्स्ट्रा काम में किसी की मदद मिल सकती है. पुराने कुछ मामलों में अनबन खत्म हो सकती है. दूसरों का नजरिया समझने की कोशिश करें. आपको किसी अच्छी खबर का इंतजार रहेगा.

Virgo

13 मई 2020: आज का दिन अच्छा है. अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करेंगे तो फायदा होगा. किसी नई महिला मित्र के साथ कुछ ज्यादा बातचीत हो सकती है. ऐसे लोगों से मदद मिलने के भी योग हैं. प्रेम जताने के लिए दिन ठीक है. समय पर काम पूरे हो सकते हैं. किसी के मेंटल सपोर्ट से आपकी मानसिक स्थिति में संतुलन रहेगा.

Libra

13 मई 2020: अपने हालातों को बदलने की कोशिश कर सकते हैं. हिम्मत और दिमाग से बिगड़ी हुई स्थिति को संभालने में बहुत हद तक सफल भी हो सकते हैं. अच्छे व्यवहार के कारण कुछ लोगों की मदद मिल सकती है. रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है. कुछ खास काम निपटाने में आप सफल हो सकते हैं. काम में भी मन लगेगा. आपको संयम में रहना होगा.

Scorpio

13 मई 2020: बहुत से काम आसानी से पूरे हो सकते हैं और आपका अच्छा असर लोगों पर होगा. जो काम और बातें अटक रही हैं उनके लिए कोई बीच का रास्ता भी निकल सकता है. कामकाज में सफलता के योग बन रहे हैं. आप बहुत सारा काम निपटाने की कोशिश कर सकते हैं. जीवनसाथी से मदद मिल सकती है. आप घर के मामले सुलझा लेंगे. सबसे विनम्र होकर बात करें. आज आपको बुजुर्गों का आशीर्वाद भी मिल सकता है.

Sagittarius

13 मई 2020: आज ऐसे काम पूरे हो सकते हैं जिनके बारे में आप पिछले कुछ दिनों से प्लानिंग कर रहे हैं. लंबे समय से अधूरी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं. अपनी कोशिशों में आप सफल रहेंगे. कुछ नया सीखने को मिलेगा. नए स्थान पर भी जा सकते हैं. आप मीठा बोलकर सारे काम पूरे करवा सकते हैं. आज आपको किस्मत का साथ भी मिल सकता है. दूसरों की जरूरतों और मूड का अंदाज आप आसानी से लगा सकेंगे. अपने आप पर भरोसा रखें.

Capricorn

13 मई 2020: बेरोजगार लोगों को नौकरी मिल सकती है. उन मामलों को टाल दें जिनको निपटाने में आप परेशान हो रहे हैं. जरूरी काम निपटाने में कुछ लोगों की मदद मिल सकती है. बड़ा कदम उठाने के पहले अच्छी तरह विचार कर लें. किसी अनुभवी से भी सलाह लें. शारीरिक परेशानियां खत्म हो सकती हैं. बिजनेस में अच्छी स्थिति बन सकती है. कोशिश करने पर रुका हुआ पैसा मिल सकता है.

Aquarius

13 मई 2020: आपके लिए दिन सामान्य रहेगा. परेशानी में खुद को संभाल लें. विवाद के मामलों से खुद को दूर रखने की कोशिश करें. कुछ विवादों में समझौते हो सकते हैं. पैसों के क्षेत्र में प्रगति होगी. पुराने अटके कामों में भी गति आ सकती है. आपको कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है.

Pisces

13 मई 2020: रोजमर्रा और पार्टनरशिप के काम समय से पूरे हो सकते हैं. दोस्तों और भाइयों की मदद मिलने के योग बन रहे हैं. किसी तरह का कन्फ्यूजन खत्म हो सकता है. आज पैसों और अन्य मामलों में फायदे वाला दिन है. आज आप कामकाज में व्यस्त रहेंगे. आपके सामने कई जिम्मेदारी वाले काम भी आ सकते हैं. मानसिक तौर पर आप सक्रिय रहेंगे. रोजमर्रा के कामकाज में बदलाव की कोशिश हो सकती है. अपने कामकाज में सुधार करने का दिन है.

rashifal

आज का राशिफल

Aries

09 मई 2020: आपका आकर्षक बर्ताव दूसरों का ध्यान आपकी तरफ़ खींचेगा।जल्दबाज़ी में निवेश न करें- अगर आप सभी मुमकिन कोणों से परखेंगे नहीं तो नुक़सान हो सकता है।आज आप अपने चारों तरफ़ के लोगों के बर्ताव के चलते खीज महसूस करेंगे।आज आप इश्क़ की चाशनी ज़िन्दगी में घुलती हुई महसूस करेंगे।अपने काम और प्राथमिकताओं पर ध्यान एकाग्र करें।सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है।अपने जीवनसाथी के स्नहे से भीगकर आप ख़ुद को राजसी महसूस कर सकते हैं।आपके परिजन अपने साथ आपको किसी जगह ले जाएंगे। हालाँकि शुरुआत में आपकी कुछ ख़ास दिलचस्पी नहीं होगी, लेकिन बाद में आप उस अनुभव का भरपूर लुत्फ़ उठाएंगे।

Taurus

09 मई 2020: बेचैनी की कसमसाहट आपको परेशान कर सकती है। इससे बचने के लिए टहलने निकलें और ताज़ा हवा में गहरी साँसें लें। साथ ही सकारात्मक सोच भी बहुत मददगार रहेगी।ऐसा लगता है आप जानते हैं कि लोग आपसे क्या चाहते हैं- लेकिन आज अपने ख़र्चों को बहुत ज़्यादा बढ़ाने से बचें।कुछ लोगों के लिए- परिवार में किसी नए का आना जश्न और उल्लास के पल लेकर आएगा।प्यार की ताक़त आपको प्यार करने की वजह देती है।पेशेवर तौर पर आज का दिन सकारात्मक रहेगा। इसका भरपूर उपयोग करें।यात्रा करना फ़ायदेमंद लेकिन महंगा साबित होगा।जीवनसाथी की मासूमियत आपके दिन को ख़ास बना सकती है।आज का दिन किसी भी धार्मिक स्थल के लिए समर्पित करना अपनी मानसिक शांति बनाए रखने का सर्वश्रेष्ठ साधन हो सकता है।

Gemini

09 मई 2020: खुला हुआ सामान न खाएँ, नहीं तो सेहत डांवाडोल हो सकती है।होशियारी से निवेश करें।किसी ऐतिहासिक इमारत के आस-पास सैर-सपाटे की योजना बनाएँ। इससे बच्चों और परिवार के सदस्यों को ज़रूरी ताज़गी मिलेगी।आप अनुभव करेंगे कि आपके प्रिय का आपके प्रति प्यार वाक़ई बहुत गहरा है।काम पर लोगों के साथ मेलजोल में समझ और धैर्य से सावधानी बरतें।आज कुछ ऐसा दिन है जब चीजें उस तरह नहीं होंगी, जैसी आप चाहते हैं।आपका प्यार, आपका जीवनसाथी आपको कोई ख़ूबसूरत तोहफ़ा दे सकता है।आज छुट्टी के दिन किसी मल्टीप्लेक्स में जाकर कोई अच्छी फ़िल्म देखने से बढ़िया और क्या हो सकता है।

Cancer

09 मई 2020: परिवार वालों के साथ आपका रुख़ा बर्ताव घर का माहौल तनावपूर्ण बना सकता है। आपको दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए, जैसा आप दूसरों से अपने लिए चाहते हैं।लम्बे अरसे को मद्देनज़र रखते हुए निवेश करें।बच्चों की उनसे जुड़े मामलों में मदद करना आवश्यक है।प्यार के नज़रिए से देखें तो आज आप जीवन के रस का भरपूर आनन्द लेने में सफल रहेंगे।दफ़्तर में आपको कुछ उबाऊ काम करना पड़ सकता है।गप्पबाज़ी और अफ़वाहो से दूर रहें।आज आपका जीवनसाथी आपकी वजह से दुःखी महसूस कर सकता है।आज का दिन थोड़ा उबाऊ सकता है, इसलिए कोई रचनात्मक कार्य करके दिन को रोचक बना सकते हैं।

Leo

09 मई 2020: किसी ऊँचे और ख़ास इंसान से मिलते समय घबराएँ नहीं और आत्मविश्वास बनाए रखें। यह सेहत के लिए उतना ही ज़रूरी है, जितना काम-धंधे के लिए पैसा।ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्च करने और चालाकी-भरी आर्थिक योजनाओं से बचें।आपकी दिलचस्प रचनात्मकता आज घर के वातावरण को सुखद बनाएगी।अपने प्रिय के लिए बदले की भावना से कुछ हासिल नहीं होगा- बजाय इसके आपको दिमाग़ शांत रखना चाहिए और अपने प्रिय को अपनी सच्चे जज़्बात से परिचित कराना चाहिए। अतीत में किया गया काम आज परिणाम और पुरुस्कार लेकर आएगा।अगर आप ख़रीदारी पर जाएँ तो ज़रूरत से ज़्यादा जेब ढीली करने से बचें।अगर आप वैवाहिक तौर पर लंबे समय से कुछ नाख़ुश हैं, तो आज के दिन आप हालात बेहतर होते हुए महसूस कर सकते हैं।बहुत सारे मेहमानों की आवभगत आपका मूड ख़राब कर सकती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि आप कई पुराने दोस्तों से मिल सकते हैं।

Virgo

09 मई 2020: भावी माताओं को सेहत को लेकर थोड़ी ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है।होशियारी से निवेश करें।घर और काम पर दबाव आपको ग़ुस्सैल और बेचैन बना सकता है।अगर आप हुक़्म चलाने की कोशिश करेंगे, तो आपके और आपके प्रिय के बीच काफ़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।आज के दिन आप कार्यक्षेत्र में आलोचनाओं का शिकार हो सकते हैं।आज आप नए विचारों से परिपूर्ण रहेंगे और आप जिन कामों को करने के लिए चुनेंगे, वे आपको उम्मीद से ज़्यादा फ़ायदा देंगे।आपके वैवाहिक जीवन में शारीरिक सुख के नज़रिए से कुछ ख़ूबसूरत परिवर्तन हो सकता है।अपनी रचनाधर्मिता को नया आयाम देने के लिए अच्छा दिन है। कुछ ऐसे विचार आ सकते हैं जो वाक़ई ज़बरदस्त और सृजनात्मक हों।

Libra

09 मई 2020: भागमभाग भरे दिन के बावजूद आपकी सेहत पूरी तरह दुरुस्त रहेगी।अचानक आए अप्रत्याशित ख़र्चे आपके ऊपर आर्थिक तौर पर बोझ डाल सकते हैं।घरेलू मोर्चे पर समस्या खड़ी हो सकती है, इसलिए तोल-मोल कर ही बोलें।आपको उदार और स्नेह से भरे प्यार का तोहफ़ा मिल सकता है।आपको अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा मौक़ा मिलेगा।भरपूर रचनात्मकता और उत्साह आपको एक और फ़ायदेमंद दिन की ओर ले जाएंगे।रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी न होने से आपके वैवाहिक जीवन में तनाव संभव है। खाना, साफ़-सफ़ाई या कोई और घरेलू चीज़ इसका कारण हो सकती है।अगर आज कुछ ज़्यादा करने को नहीं है तो किसी लाइब्रेरी में समय बिताना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

Scorpio

09 मई 2020: किसी भी तरह के द्वन्द्व या विरोध से बचें, क्योंकि आपकी सेहत पर इसका बुरा असर होगा।आर्थिक मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की ज़रूरत है।लोग आपको आशाएँ और सपने देंगे, लेकिन असल में सारा दारोमदार आपके प्रयासों पर रहेगा।अपने प्रिय के साथ ख़रीदारी करने जाते समय ज़्यादा आक्रामक व्यवहार न करें।साझीदारी और व्यापार में हिस्सेदारी वग़ैरह से दूर रहें।अपने ज़बरदस्त आत्मविश्वास का फ़ायदा उठाएँ, बाहर निकलें और कुछ नए सम्पर्क व दोस्त बनाएँ।वैवाहिक जीवन के उजले पहलू का अनुभव करने के लिए अच्छा दिन है।अपने साथी के लिए कोई बेहतरीन पकवान बनाना आपके फीके पड़े रिश्तों में गर्मजोशी भर सकता है।

Sagittarius

09 मई 2020: मानसिक और नैतिक शिक्षा के साथ शारीरिक शिक्षा भी लें, केवल तभी सर्वांगीण विकास संभव है। याद रखें कि एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ दिमाग़ निवास करता है।आकस्मिक मुनाफ़े या सट्टेबाज़ी के ज़रिए आर्थिक हालात सुदृढ़ होंगे।बच्चों के साथ बातचीत और कामकाज में आप कुछ परेशानियाँ महसूस करेंगे।प्यार-मुहब्बत के मामले में अपनी ज़ुबान पर क़ाबू रखें, नहीं तो परेशानी में पड़ सकते हैं।आपकी अतिरिक्त काम करने की क्षमता उन लोगों को चौंका देगी, जिनका प्रदर्शन आपसे कमतर है।आपके हँसने-हँसाने का अन्दाज़ आपकी सबसे बड़ी पूंजी साबित होगा।अपने जीवनसाथी की वजह से आपको मानसिक अशान्ति का सामना करना पड़ सकता है।समय मुफ़्त ज़रूर है पर बेशक़ीमती भी है, इसलिए अपने अधूरे कार्यों को निपटाकर आप आने वाले कल के लिए निश्चिंत हो सकते हैं।

Capricorn

09 मई 2020: आज के दिन आप बिना झंझट विश्राम कर सकेंगे। अपनी मांसपेशियों को आराम देने के लिए तैल से मालिश करें।आप पैसा बना सकते हैं, बशर्ते आप अपनी जमा-पूंजी पारम्परिक तौर पर निवेश करें।रिश्तेदार आपके दुःख में भागीदार बनेंगे। अपनी परेशानियाँ उनसे बांटने में हिचकिचाएँ नहीं। निश्चित तौर पर आप उन्हें हल करने में सफल रहेंगे।आज आप आनन्द का अनुभव करेंगे।आज आपके बॉस का बढ़िया मिज़ाज पूरे कार्यालय के माहौल को अच्छा बना देगा।छुपे हुए दुश्मन आपके बारे में अफ़वाहें फैलाने के लिए अधीर होंगे।आपको महसूस होगा कि शादी के वक़्त किए गए सारे वादे सच्चे हैं। आपका जीवनसाथी ही आपका हमदम है।आज वह दिन है जब आप पूरी तरह से आराम करना चाहते हैं, लेकिन लगता है कि आपके परिजनों की कुछ और ही योजना है। इसलिए तैयार रहें और खीझें नहीं, नहीं तो पूरा सप्ताहांत ख़राब हो सकता है।

Aquarius

09 मई 2020: ख़ुद को किसी रचनात्मक काम में लगाएँ। मानसिक शांति के लिए आपकी खाली बैठने की आदत ख़तरनाक साबित हो सकती है।वे निवेश-योजनाएँ जो आपको आकर्षित कर रहीं हैं, उनके बारे में गहराई से जानने की कोशिश करें- कोई भी क़दम उठाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर ले लें।मुमकिन है कि माता-पिता आपकी बात को ग़लत तरह से समझें, क्योंकि आपने अपनी बात भली-भांति उनके सामने न रखी हो। सुनिश्चित करें कि आपकी बात उन्हें ठीक तरीक़े से समझ में आए।किसी के साथ ज़रूरत से जल्दी दोस्ती करने से बचें, क्योंकि इसके चलते आपको बाद में पछताना पड़ सकता है।पर्यटन क्षेत्र आपको बढ़िया करिअर दे सकता है। यह समय अपनी महत्वाकांक्षा को समझने और उसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने का है। सफलता आपका बेताबी से इंतज़ार कर रही है।वक़ील के पास जाकर क़ानूनी सलाह लेने के लिए अच्छा दिन है।यह दिन आपके जीवनसाथी के रूमानी पहलू को भरपूर तरीक़े से दिखाएगा।अगर आप अपने मन की सुनें, तो यह दिन ख़रीदारी के लिहाज़ से उम्दा है। आपको कुछ अच्छे कपड़ों और जूतों की ज़रूरत भी है।

Pisces

09 मई 2020: गर्भवती महिलाओं को चलते-फिरते समय ख़ास ख़याल रखने की ज़रूरत है। अगर संभव हो तो ऐसे लोगों से दूर रहें जो धूम्रपान करते हैं, क्योंकि इससे पैदा होने वाले शिशु को नुक़सान हो सकता है।केवल एक दिन को नज़र में रखकर जीने की अपनी आदत पर क़ाबू करें और ज़रूरत से ज़्यादा वक़्त व पैसा मनोरंजन पर ख़र्च न करें।अगर आप सामूहिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे, तो आप नए दोस्त बना सकते हैं।किसी से अचानक हुई रुमानी मुलाक़ात आपका दिन बना देगी। आपके बॉस किसी भी बहाने में दिलचस्पी नहीं ज़ाहिर करेंगे- इसलिए निगाहों में बने रहने के लिए अपना काम अच्छी तरह से करें।यात्रा और शिक्षा से जुड़े काम आपकी जागरुकता में वृद्धि करेंगे।जीवनसाथी से अच्छी बातचीत हो सकती है; आप महसूस करेंगे कि आप-दोनों में कितना प्यार है।आधुनिक दौर का मंत्र है – जमकर काम करें और उससे भी ज़्यादा जमकर पार्टी करें। लेकिन इतना भर याद रखें कि ज़रूरत से ज़्यादा पार्टी भी सेहत को नासाज़ कर सकती है।

पानीपत में 10 कोरोना पोस्टिव पाए गए, जिनमें 4 पत्रकार

मनोज त्यागी, पानीपत:

29 अप्रैल को हुए टेस्ट में 4 पत्रकारों के पोसिटिव पाये जाने से पत्रकार समुदाय में खलबली मच गयी है लॉकडाउन के दौरान अपने कर्तव्यों के पालन में कहीं किसी जगह यह पत्रकार कोरोना संक्रामण से टकरा गए और अब स संकर्मण से जूझ रहे हैं।

जतिन,आशु,नीरज,दीपक के नामपत्रकारों की सूची में पानीपत प्रशाशन के हाथ पांव फूले, ढूंढा जा रहा है कि यह पत्रकार कौन है व किस मीडिया से है। चार पत्रकारों सहित 10 पॉजिटिव केस मिले। जिसमें 3 प्रिंट के व एक लोकल यूट्यूब चैनल का फोटोग्राफर शामिल है।

सबसे अधिक चिंता की बात है इनके संक्रामण स्रोत का पता लगाना।