असफलता सफलता के स्तंभ हैं

डेमोक्रेटिक फ्रंट, श्री मुक्तसर साहिब :

जसविंदर पाल शर्मा

            थोड़ी सी भी असफलता कोई मायने नहीं रखती। वास्तव में सफलता की राह असफलताओं से घिरी होती है। प्रत्येक असफलता के साथ व्यक्ति सफलता के निकट आता जाता है और प्रत्येक पतन के साथ व्यक्ति ऊँचा उठता जाता है। असफलताओं के बारे में बात करना विरोधाभासी और विरोधाभासी लग सकता है और सफलता के साथ-साथ गिरता है और उच्चतर होता है। लेकिन यह एकदम सच है। प्रत्येक असफलता व्यक्ति को सफलता के करीब ले आती है क्योंकि प्रत्येक असफलता के भीतर सफलता का एक पाठ छिपा होता है।

            बच्चे का पहला कदम देखें। वह एक कदम आगे बढ़ता है लेकिन फिर दूसरे पर गिर जाता है और ठोकर खा जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चा कभी भी चलना नहीं सीखेगा क्योंकि वह शुरुआत में ही लड़खड़ा गया था। बल्कि उसकी ठोकर यह सुनिश्चित करती है कि वह जल्द ही न केवल चलना बल्कि दौड़ना भी सीख जाएगा। आकाश में एक पक्षी को देखो, वह कैसे फड़फड़ाता है, फड़फड़ाता है और विफल हो जाता है। इसके पंख कांपते हैं क्योंकि यह उड़ने का पहला प्रयास करता है। यह कोशिश करता है और विफल रहता है। लेकिन हार नहीं मानता। और अंत में एक और प्रयास के साथ, यह अपने पंख फैलाता है और उस अनंत नीला नीले आकाश में चला जाता है जो इसके छोटे से महत्वपूर्ण प्रयासों की सराहना करता प्रतीत होता है।

            दीवार पर चढ़ने की कोशिश करने वाली चींटी की कहानी अक्सर कही जाती है। यह कुछ इंच रेंगता है और गिरता है। लेकिन फिर कोशिश करता है। दरअसल, चींटी दीवार की चोटी तक पहुंचने की कोशिश में असीमित कोशिश करती रहती है। देखने वाला ऊब जाता है, थक जाता है और दिल हार जाता है। लेकिन चींटी नहीं करती। यह तब तक कोशिश करता रहता है जब तक कि यह शीर्ष पर न पहुंच जाए।

            इतिहास भी ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जहां असफलताओं की एक श्रृंखला से गुजरने के बाद ही सफलता मिली। किसी भी महान व्यक्तित्व के जीवन की कहानी को देखने के लिए यह देखना होगा कि चांदी की थाली में सफलता कभी नहीं मिलती है। वास्तव में सफलता का स्वाद चखने से पहले कई बार प्रयास करना पड़ता है।

            महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल सहित भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को असंख्य बार असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लक्ष्य को सबसे ऊपर रखा और इसलिए, भारत स्वतंत्र हुआ। महान वैज्ञानिक थॉमस एल्वा एडिसन बिजली के बल्ब का आविष्कार करने से पहले 10,000 बार असफल हुए। स्टीव जॉब्स को उसी कंपनी से बाहर कर दिया गया था जिसे उन्होंने शुरू किया था। लेकिन वह एक शुरुआत की तरह फिर से शुरू करने की संभावना से उत्साहित था।

            हालाँकि, आज के समय में, हम पाते हैं कि एक टोपी की बूंद पर लोगों का दिल टूट रहा है। परीक्षा के फोबिया और साथियों के दबाव के शिकार हो जाते हैं छात्र। हर किसी को अपने आप से बहुत उम्मीदें होती हैं, जो पूरी न होने पर उन्हें अवसाद और यहां तक ​​कि आत्महत्या तक ले जाती है। यह महसूस करना महत्वपूर्ण है कि असफलता दुनिया का अंत नहीं है। उठने और चमकने के भरपूर अवसर होंगे।

हर घर तिरंगा आजादी का अमृत महोत्सव के नेतृत्व में एक अभियान

स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में एक राष्ट्र के रूप में ध्वज को सामूहिक रूप से घर लाना न केवल तिरंगे से हमारे व्यक्तिगत संबंध का एक कार्य है बल्कि यह राष्ट्र-निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बन जाता है। आजादी के अमृत महोत्सव में हर घर तिरंगा अभियान 13 से 15 अगस्त, 2022 तक आयोजित किया जाएगा।

हमारे देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस पर हर घर में तिरंगा फहराया जा रहा है। आइए जानते हैं हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बारे में।

जसविंदर पाल शर्मा, डेमोक्रेटिक फ्रंट, श्री मुक्तसर साहिब पंजाब :

झंडा किसी देश का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक होता है। इसी तरह, भारत का राष्ट्रीय ध्वज भारत के लिए सर्वोच्च महत्व का प्रतीक है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज देश के सम्मान, देशभक्ति और स्वतंत्रता का प्रतीक है। यह भाषा, संस्कृति, धर्म, जाति आदि में अंतर के बावजूद भारत के लोगों की एकता को दर्शाता है। सबसे विशेष रूप से, भारतीय ध्वज एक क्षैतिज आयताकार तिरंगा है। इसके अलावा भारत के झंडे में केसरिया, सफेद और हरा रंग होता है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास

15जिसे तिरंगा भी कहते हैं, तीन रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज है। इसकी अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी।इसे 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व 22 जुलाई, 1947 को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था

1921 में महात्मा गांधी द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को ध्वज का प्रस्ताव दिया गया था। इसके अतिरिक्त, ध्वज को पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किया गया था। झंडे के केंद्र में एक पारंपरिक चरखा था। फिर केंद्र में एक सफेद पट्टी को शामिल करने के लिए डिजाइन में एक संशोधन किया गया। यह संशोधन अन्य धार्मिक समुदायों के लिए भी हुआ और चरखे की पृष्ठभूमि बनाने के लिए भी।

रंग योजना के साथ सांप्रदायिक जुड़ाव से बचने के लिए, विशेषज्ञों ने तीन रंगों को चुना। सबसे खास यह कि ये तीन रंग केसरिया, सफेद और हरा थे। केसरिया रंग साहस और बलिदान का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा सफेद रंग शांति और सच्चाई का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा, हरा रंग विश्वास और बहादुरी का प्रतीक है।
आजादी से कुछ दिन पहले विशेष रूप से गठित संविधान सभा ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। निर्णय यह था कि भारतीय ध्वज सभी समुदायों और पार्टियों को स्वीकार्य होना चाहिए। हालांकि, भारतीय ध्वज के रंगों में कोई बदलाव नहीं आया। हालांकि, चरखे को अशोक चक्र से बदल दिया गया था। इसके अलावा, यह अशोक चक्र कानून के शाश्वत चक्र का प्रतिनिधित्व करता है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन

ध्वज का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है तो उसे इस प्रकार फहराया जाएगा कि जब वक्ता का मुँह श्रोताओं की ओर हो तो ध्वज उनके दाहिने ओर हो। ध्वज किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए। फटा या मैला ध्वज नहीं फहराया जाता है।

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नियमों में कहा गया है कि जब दो झंडे किसी पोडियम के पीछे की दीवार पर क्षैतिज रूप से फैले होते हैं, तो उनके झंडे एक दूसरे के सामने होने चाहिए। साथ ही केसर की पट्टियां ऊपर होनी चाहिए। जब फ्लैग डिस्प्ले एक छोटे फ्लैगपोल पर होता है, तो माउंटिंग दीवार के कोण पर होनी चाहिए। साथ ही, कोण ऐसा है कि उसमें से झंडा लिपटा हुआ है। जब एक पार किए गए कर्मचारी पर झंडे दिखाई देते हैं, तो लहराते हुए एक दूसरे की ओर होना चाहिए।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल कभी भी टेबल, लेक्चर, पोडियम या इमारतों को ढंकने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। जब ध्वज को घर के अंदर प्रदर्शित किया जाता है, तो यह हमेशा दाहिनी ओर होना चाहिए। इसका कारण प्राधिकरण की स्थिति है। इसके अतिरिक्त, ध्वज हमेशा वक्ता के दाहिने हाथ पर होना चाहिए जब ध्वज वक्ता के सामने प्रदर्शित होता है। सबसे विशेष रूप से, जब भी ध्वज प्रदर्शित किया जाता है, तो इसे पूरी तरह से बढ़ाया जाना चाहिए।
अंत में, भारत का राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश का गौरव है। इसके अलावा, भारत का झंडा देश की संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करता है। सबसे विशेष रूप से, राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हुए देखना हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी का क्षण होता है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज निश्चित रूप से भारत के प्रत्येक नागरिक से बहुत सम्मान का पात्र है।

जीवन में संतुलन बहुत उपयोगी है

जीवन में समता यानी संतुलन बहुत जरूरी है, लेकिन अधिकांश लोगों का जीवन असंतुलित बना हुआ है। हमने एक ऐसी मानसिक स्थिति का निर्माण कर रखा है कि सुख की स्थिति आने पर हम खुशी से उछल जाते हैं और दुख की स्थिति में मानो मुरझा जाते हैं जबकि हमें हर स्थिति में एक सा रहना चाहिए।

जसविंदर पाल शर्मा, डेमोक्रेटिक फ्रंट, श्री मुक्तसर साहिब पंजाब  :

इस तेजी से भागती आधुनिक दुनिया में संतुलित जीवन बनाए रखना कठिन होता जा रहा है। इसके अलावा, लोग यह भूल जाते हैं कि जीवन हमें उन सभी अच्छी चीजों के बदले में बहुत कुछ देता है जो हमें देती हैं। संतुलन पर यह लेख उपयोगी है, जीवन में संतुलन बनाए रखने के महान महत्व की व्याख्या करेगा।

संतुलन बनाए रखने का महत्व

इस आधुनिक युग में रहते हुए लोगों ने खुद को कम आंकने की यह नकारात्मक आदत विकसित कर ली है। इसके अलावा, बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि वास्तव में संतुलित जीवन क्या है। फलस्वरूप ऐसे व्यक्तियों के जीवन में तनाव आ जाता है।

संतुलित जीवन को परिभाषित करना कठिन है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह काफी व्यक्तिगत है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होता है। हालांकि, संतुलित जीवन की एक सामान्य परिभाषा एक ऐसा जीवन जीना है जिसमें रिश्तों, काम, भावनात्मक कल्याण और शारीरिक स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए संतुलन बनाए रखा जाता है।

एक संतुलित जीवन का एक अच्छा उदाहरण एक कामकाजी महिला का होगा जो घर में पत्नी और मां होने की भूमिका भी निभाती है। ऐसी महिला को अपनी भूमिकाओं को ठीक से निभाने के लिए अपने पेशेवर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा, यह उनके काम और निजी जीवन में एक साथ सफलता हासिल करने की उनकी इच्छा से प्रेरित है।

जीवन में संतुलन बनाए रखने का एक शानदार तरीका यह है कि जीवन में हर कदम की योजना बनाई जाए, चाहे वह पेशेवर हो या व्यक्तिगत। हर काम में शत-प्रतिशत देने की आदत डालनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि स्वास्थ्य की उपेक्षा न हो, इसलिए इस पर विशेष ध्यान दें।

जब स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की बात आती है तो संतुलित आहार आवश्यक है। इस प्रकार, व्यक्ति को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और विटामिन का उचित संतुलन बनाए रखना चाहिए। इसके अलावा, अच्छे स्वास्थ्य के लिए आहार में साग और फलों की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।

समय प्रबंधन

जब जीवन में संतुलन बनाए रखने की बात आती है तो समय प्रबंधन कारक एक बड़ी भूमिका निभाता है। आधुनिक दुनिया में, कार्य-जीवन वास्तव में व्यस्त हो गया है। नतीजतन, लोग या तो अपने प्रियजनों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने में विफल रहते हैं या उनके पास अपने लिए कोई व्यक्तिगत समय नहीं होगा।

दरअसल, ज्यादातर लोग खुद को समझा लेते हैं कि उनके पास परिवार के सदस्यों और दोस्तों के लिए समय नहीं है। इसके अलावा, समय प्रबंधन के इस अस्वास्थ्यकर तरीके के कारण, लोग अपने शौक और यहां तक ​​कि उन चीजों की भी उपेक्षा करते हैं जो उन्हें खुशी देती हैं। नतीजतन, यह ऐसे लोगों के जीवन में तनाव, चिंता और अवसाद को जोड़ता है।

संतुलन पर निबंध का निष्कर्ष उपयोगी है

प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। इसके अलावा, संतुलन ऐसा होना चाहिए कि जीवन के विभिन्न तत्व प्राथमिकताओं और इच्छाओं की पूर्ण पूर्ति की सुविधा प्रदान करें। सबसे विशेष रूप से, लोगों को जीवन में संतुलन बनाए रखना चाहिए अन्यथा वे शरीर, मन और आत्मा के महत्वपूर्ण संतुलन को खो सकते हैं।

सफाई व्यवस्था में फर्जी हाजिरी, सफाई पर पार्षद व लोग जागें

करणीदानसिंह राजपूत,  डेमोक्रेटिक फ्रंट, सूरतगढ़  –  29 जुलाई  :

नगरपालिकाओं की सफाई व्यवस्था पर आवाजें उठती रही है और गंदगी कचरे के ढेरों की तस्वीरें छपती रही हैं।सोशल मीडिया पर सवाल उठते रहे हैं। 

अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी  दो चार बार वार्डों का निरीक्षण करते हैं और अस्थायी सी सस्पेंशन की कार्यवाही करके एवं निर्देश देकर ठंडे है जाते हैं। निरीक्षण और कार्यवाही कुछ दिन बाद हवा हो जाते हैं।

सफाई कर्मचारी कई बार तो पांच सात दिन नहीं आते और जमादार भी नहीं आए तब किसको कहा जाए? वार्ड पार्षद को कहा जाता है तो कोई ठोस जवाब नहीं मिलता बल्कि वह भी निराशा वाला जवाब देता है।

स्थानीय निकाय के निदेशालय जयपुर से स्पष्ट आदेश है कि सफाई कर्मचारी की हाजिरी वहीं लगेगी जहां उसकी फील्ड में ड्युटी होगी। यदि ऐसा नहीं होगा तो वेतन नहीं मिलेगा। एकदम स्पष्ट आदेश है। लेकिन इनका पालन भ्रष्टाचार और अनियमितता की भेंट चढा दिया जाता है।

कुछ सफाईकर्मी की हाजिरी तो फील्ड में लगती है और वे सुबह नगरपालिका कार्यालय खुलने के समय भीतर आते हैं और शाम को कार्यालय बंद होने पर बाहर निकलते हैं। नगरपालिका कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे इसके गवाह होंगे। वैसे यह अन्य कई प्रकार से भी प्रमाणित हो सकता है। जब एक सफाई कर्मचारी सुबह से शाम तक नगरपालिका कार्यालय में रहता है और सदा रहता है तो यह तो स्पष्ट है कि सरकारी आदेश के अनुसार वह फील्ड में ड्युटी पर हाजिर नहीं है। उसकी हाजिरी फर्जी लगाई जा रही है और वेतन भी गलत दिया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी किनकी है जो बिना काम के वेतन देते हैं। 

हाजिरी प्रमाणित करने वाला फील्ड में हाजिर दिखाने वाला सफाईनिरीक्षक और जमादार। इसके अलावा अधिशासी अधिकारी जो सरकार के आदेशों का पालन नहीं कर रहा। अधिशासी अधिकारी को मालुम होता है कि सफाई कर्मचारी सुबह से शाम तक और सदा नगरपालिका कार्यालय में मौजूद है। अधिशासी अधिकारी उसे कार्यालय में मौजूद क्यों रख रहा है? अधिशासी अधिकारी को यह मालुम है कि फील्ड में कार्यस्थल पर हाजिरी फर्जी लग रही है तो वेतन दिए जाने के लिए हाजिरी के दस्तावेज फर्जी तैयार होते हैं। इस फर्जकारी का जिम्मेदार और सरकारी कोष को नुकसान पहुंचाने वाले सभी दोषी होते हैं। अधिशासी अधिकारी सफाई निरीक्षक जमादार तीन तो स्पष्ट रूप में दोषी। 

अब एक और सवाल कि कर्मचारी की जगह दूसरा व्यक्ति काम करे। सफाई कर्मचारी अपने परिवार के सदस्य को भेजे जिसको जानकारी नहीं और वह कुछ देर बाद लौट जाए। सफाई कर्मचारी अपने वेतन में से आधे या और कम पर किसी को लगाए। वह भी कुछ समय फील्ड में रहे और लौट जाए। मतलब वहां सफाई नहीं हो रही। अधिशासी अधिकारी के समक्ष यह बातें रखी जाती है तो वह टालमटोल करते हैं।

इसका एक हल है कि सख्ती से कार्यवाही हो। उसकी बड़ी जिम्मेदारी स्वास्थ्य निरीक्षक की है कि वह फर्जी हाजिरी नहीं लगाए। फील्ड में ड्युटी पर हो उसी की हाजिरी लगाए।  नगरपालिका में नियुक्त कर्मचारी ही ड्युटी पर काम करे। असली कर्मचारी के अलावा किसी अन्य को काम पर नहीं लगाए।

जमादारों के पास एक डायरी हो जिसमें वे अपने प्रतिदिन का निरीक्षण लिखें। 

* गलियों व सड़कों पर कचरा फेंकने वालों पर,गोबर सड़कों के किनारे ढेर लगाने वालों पर कार्यवाही लिखित में हो और जुर्माने का प्रावधान हो।

* नालों पर अतिक्रमण व पक्के निर्माण से दुकानदारी,घरों के आगे नालों पर सड़कों के ऊपर तक बनाए रैंप से सफाई नहीं होती। स्वास्थ्य निरीक्षक एक एक सड़क और गली,बाजार की रिपोर्ट सफाई कर्मचारी व जमादार से तैयार करवाए और वह हर गली सड़क बाजार की अलग अलग फाईनल करके कार्यवाही के लिए अधिशासी अधिकारी को दे। अधिशासी अधिकारी इस पर कार्यवाही नहीं करेगा तो वह किसी भी प्रकार के नुकसान और दुर्घटना का पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। 

* इतना होने पर ही शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार हो सकता है।

**पार्षदों और शहर की संस्थाओं और जागरूक लोगों को नगरपालिका प्रशासन को यह सब या और भी अपनी ओर से लिखित में देना चाहिए और तुरंत देना चाहिए।

पत्रकारिता में करियर के अवसर

पत्रकारिता के क्षेत्र में एक सफल करियर के रूप में किसी भी व्यक्ति को जिज्ञासु दृढ़ इच्छा शक्ति वाला, सूचना को वास्तविक, संक्षिप्त तथा प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने की अभिरुचि रखने वाला, किसी के विचारों को सुव्यवस्थित करने तथा उन्हें भाषा तथा लिखित-दोनों रूपों में स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करने में कुशल होना चाहिए। दबाव में कार्य करने के दौरान भी नम्र एवं शांत चित्त बने रहना एक अतिरिक्त योग्यता होती है। जीवन के सभी क्षेत्रों से व्यक्तियों का साक्षात्कार लेते समय पत्रकार को व्यावहारिक, आत्मविश्वासपूर्ण तथा सुनियोजित रहना चाहिए। उसे प्रासंगिक तथ्यों को अप्रासंगिक तथ्यों से अलग करने में सक्षम होना चाहिए। अनुसंधान तथा सूचना की व्याख्या करने के लिए विश्लेषण कुशलता होनी चाहिए।

जसविंदर पाल शर्मा, डेमोक्रेटिक फ्रंट, श्री मुक्तसर साहिब पंजाब :

एक पेशे के रूप में पत्रकारिता इन दिनों जोर पकड़ रही है। सूचना का विस्फोट होता है। हम सूचना के तेज प्रवाह के साथ तेजी से बदलती दुनिया में रह रहे हैं। बड़ी संख्या में पत्रिकाएँ और पत्रिकाएँ सामने आई हैं। आज, हमारे पास समाचारों में व्यापार करने वाली कई समाचार एजेंसियां ​​हैं और देश में पत्रकारों के दो से अधिक संघ हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों में पत्रकारिता के नियमित पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं। कई विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर पर मास कम्युनिकेशन को एक विषय के रूप में पेश किया जा चुका है। पत्रकारिता का पेशा अब बहुत सारे सक्षम और प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित करता है।

                पत्रकारिता के लिए एक विशेष दिमाग की जरूरत होती है। एक पेशे के रूप में पत्रकारिता की पहली आवश्यकता समसामयिक घटनाओं या दिन-प्रतिदिन की घटनाओं में गहरी रुचि है। एक नवोदित पत्रकार को देश और विदेश में चल रहे राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक आंदोलनों को समझना चाहिए। उसे समसामयिक घटनाओं में सक्रिय रुचि लेनी चाहिए और उचित परिप्रेक्ष्य विकसित करने के लिए इतिहास और भूगोल की अच्छी समझ होनी चाहिए। वास्तव में एक पत्रकार को एक पढ़ा-लिखा और पढ़ा-लिखा व्यक्ति होना चाहिए। उसके पास एक अच्छी तरह से भंडारित दिमाग होना चाहिए। उसे जागना, सतर्क और सक्रिय रहना है। उसके पास एक ध्वनि स्मृति होनी चाहिए। उसके पास एक विश्लेषणात्मक दिमाग होना चाहिए।

                एक पत्रकार को समय-समय पर होने वाली घटनाओं के प्रति मौलिक सोच रखनी चाहिए। उसे घटनाओं की व्याख्या, व्याख्या और टिप्पणी करनी होती है। उसे विस्तार से पढ़ना चाहिए और तथ्यों को आत्मसात करना चाहिए। एक पत्रकार के पास करने के लिए एक महान कार्य है। उसे लोगों के सामने तथ्य पेश करने चाहिए। वह एक शिक्षक है। उसे जनमत बनाना और बनाना है। उसके पास सोचने का एक स्वतंत्र तरीका होना चाहिए। उसके पास अपने दृढ़ विश्वास का साहस होना चाहिए। उसे किसी या किसी संगठन के प्रति पक्षपाती या पूर्वाग्रही नहीं होना चाहिए। उसके पास मानव मन में अंतर्दृष्टि होनी चाहिए। उसे लोगों के बीच रहना चाहिए और उनके रहन-सहन का अध्ययन करना चाहिए। एक अच्छा पत्रकार अपने अंदर दिमाग और दिल के इन सभी गुणों को समेट लेता है।

एक पत्रकार को इस तथ्य को नहीं भूलना चाहिए कि उसे एक महत्वपूर्ण सामाजिक कर्तव्य निभाना है। जनता को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के संबंध में उचित रूप से शिक्षित करना उनका परम कर्तव्य है। साथ ही, उसे एक और सभी के सामने, दैनिक जीवन के तथ्यों को बिना पूर्वाग्रह या रुचि के प्रस्तुत करना होगा। वह जो लिख रहा है उससे अपने निजी पूर्वाग्रहों को दूर रखना होगा। उसे सत्ता में बैठे लोगों द्वारा शोषण किए जाने से बचना चाहिए। राजनीतिक दबदबे या धन की ताकत को किसी पत्रकार को किसी गुप्त मकसद से लिखने के लिए डराना या मजबूर नहीं करना चाहिए। इसके लिए बहुत साहस, दृढ़ विश्वास और देशभक्ति और मानवतावाद की सच्ची भावना की आवश्यकता होती है।

                पत्रकारिता आज युवा पुरुषों और महिलाओं के लिए व्यापक अवसर प्रदान करती है। यह एक विकासशील और विस्तारित पेशा है। भारत में पत्रकारिता के पेशे का भविष्य बहुत अच्छा है। मल्टी-चैनल टीवी कार्यक्रमों के मद्देनजर, पत्रकारिता कई युवाओं के लिए एक बड़ा वादा रखती है और महिला बेईमान व्यक्तियों के लिए नहीं है। कुछ पत्रिकाएं तथ्यों को विकृत करती हैं और चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हैं। वे निराधार अफवाहें फैलाते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो बदनामी या गाली-गलौज पर पनपते हैं और वे अश्लीलता और अश्लीलता में आनंद लेते हैं। इसे “पीली पत्रकारिता” के रूप में जाना जाता है। अनुचित व्यवहार में लिप्त ऐसे पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वास्तव में एक पेशे के रूप में पत्रकारिता नए आधारों को तोड़ सकती है और इस क्षेत्र में कई युवा पुरुषों और महिलाओं को आकर्षित कर सकती है।

                पत्रकारिता एक नेक और चुनौतीपूर्ण पेशा है। लेकिन कुछ पत्रकार अपना कर्तव्य निभाने में विफल रहते हैं। रचनात्मक लेखन में अच्छे उद्यमी युवा लड़के-लड़कियों को पत्रकारिता को पेशे या शौक के रूप में अपनाना चाहिए।

 Punjab100 Dream of sending 100 needy girls of Punjab to country’s top management institutes in 3 years Sony Goyal of Bathinda cherished

 Dream of stopping brain drain from Punjab
 Dream to see maximum women in top management/leadership of the country
Chandigarh
The development of humanity is incomplete without women empowerment, the number of women leading in India is only 5%.Only 3000 children from Punjab appear in IIM exam every year, while the number of students who appear for IELTS is 600000.
Soni Goyal of Bathinda has started the *Punjab 100* project with the aim of providing free  expert coaching for  admission to the graduate girls of Punjab in top management colleges of the country, whose free registration is being done till 17th June. There will be an eligibility test on June 19 and free training for these girls will be held for 9 months from July; These girls will prepare themselves for IIM Entrance Exam CAT by solving 10000 practice questions in these 9 months.Domicile of Punjab state or graduate girls studying in Punjab are eligible for Punjab 100.Soni Goyal, an old student of IIM Ahmedabad, has dream of achievement of  the girls of his state Punjab at  a place in the top leadership of the country which will be fulfilled in about 3 years.

Vivek Atre releases book of English poems written by 12 year old Prisha

Panchkula. Former IAS officer Vivek Atre today released a book of English poems composed by Prisha Sharma, a 12 year old girl from Panchkula. Prisha’s book was released in a simple program in the premises of JP Toddler School, Sector 10. Addressing on this occasion, Atre said,I am amazed and astounded by the special talent that young Prisha has for writing and the poetic word. All of 12 years of age, she is a surprising package of creativity and verve. Her parents are obviously extremely supportive of her creative art as all parents should be, but only rare ones are.The mettle of her poetry lies in the simplicity of her language and the directness of her message. Poems such as “The Things I love” and “My wonderful Life” are reflective of her perceptive and grateful mind, well beyond her years.My best wishes to Prisha for her poetic tryst with destiny. May many young poets and writers take heart from her example and surge ahead in the literary world The need for young people to read more and write more has never been more pressing. I am sure that Prisha and rare gems of her ilk will be torchbearers of the written world in the years to come.

Rashifal

राशिफल, 16 मई 2022

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति के बारे में जानने के लिए उसकी राशि ही काफी होती है। राशि से उस या अमूक व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य के बारे में जानना आसान हो जाता है। इतना ही नहीं, ग्रह दशा कोअपने विचारों को सकारात्मक रखें, क्योंकि आपको ‘डर’ नाम के दानव का सामना करना पड़ सकता है। नहीं तो आप निष्क्रिय होकर इसका शिकार हो सकते हैं। आपका कोई पुराना मित्र आज कारोबार में मुनाफा कमाने के लिए आपको सलाह दे सकता है, अगर इस सलाह पर आप अमल करते हैं तो आपको धन लाभ जरुर होगा। घरेलू मामलों पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। आपकी ओर से की गयी लापरावाही महंगी साबित हो सकती है। आपके प्रिय/जीवनसाथी का फ़ोन आपका दिन बना देगा।

aries
मेष/aries

16 मई 2022:  

आज आपकी सेहत पूरी तरह अच्छी रहेगी। अपने धन का संचय कैसे करना है यह हुनर आज आप सीख सकते हैं और इस हुनर को सीख कर आप अपना धन बचा सकते हैं। बच्चे और परिवार दिन का केंद्र-बिंदु रहेंगे। समय, कामकाज, पैसा, यार-दोस्त, नाते-रिश्ते सब एक ओर और आपका प्यार एक तरफ़, दोनों आपस में खोए हुए – कुछ ऐसा मिज़ाज रहेगा आपका आज। कार्यक्षेत्र में आपके प्रतिद्वन्द्वियों को अपने ग़लत कामों का फल मिलेगा। दिन को कैसे अच्छा बनाया जाए इसके लिए आपको अपने लिए भी समय निकालना सीखना होगा। जीवनसाथी के साथ यह एक बढ़िया दिन गुज़रने वाला है।

अपनी व्यक्तिगत समस्या के निश्चित समाधान हेतु समय निर्धारित कर ज्योतिषाचार्य से संपर्क करे, दूरभाष : 8194959327

वृष/Taurus

16 मई 2022:  

शारीरिक बीमारी के सही होनी की काफ़ी संभावनाएँ हैं और इसके चलते आप शीघ्र ही खेल-कूद में हिस्सा ले सकते हैं। जिन लोगों नेे अतीत में अपना धन निवेश किया था आज उस धन से लाभ होने की संभावना बन रही है। दिन के दूसरे हिस्से में कुछ दिलचस्प और रोमांचक काम करने के लिए बढ़िया वक़्त है। प्यार बहार की तरह है; फूलों, रोशनी और तितलियों से भरा हुआ। आज आपका रोमानी पहलू उभरकर आएगा। कार्यक्षेत्र में किसी विशेष व्यक्ति से आपकी मिलाक़ात हो सकती है। यात्रा करना फ़ायदेमंद लेकिन महंगा साबित होगा। एक बढ़िया जीवनसाथी के साथ जीवन वाक़ई अद्भुत लगता है और आज आप इस बात का अनुभव कर सकते हैं।

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मिथुन/Gemini

16 मई 2022:  

नफ़रत की भावना महंगी पड़ सकती है। यह न केवल आपकी सहन-शक्ति घटाती है, बल्कि आपके विवेक को भी ज़ंग लगा देती है और रिश्तों में हमेशा के लिए दरार डाल देती है। जो लोग अपने करीबियों या रिश्तेदारों के साथ मिलकर बिजनेस कर रहे हैं उन्हें आज बहुत सोच समझकर कदम रखने की जरुरत है नहीं तो आर्थिक नुक्सान हो सकता है। आपसी संवाद और सहयोग आपके और आपके जीवनसाथी के बीच रिश्ते को मज़बूत बनाएगा। आज का दिन रोमांस से भरपूर होने की पूरी संभावना है। नई परियोजनाओं और कामों को अमली जामा पहनाने के लिए बेहतरीन दिन है। आज घर के लोगों के साथ बातचीत करते दौरान आपके मुंह से कोई ऐसी बात निकल सकती है जिससे घर के लोग नाराज हो सकते हैं। इसके बाद घर के लोगों को मनाने में आपका काफी समय जा सकता है। अपने जीवनसाथी के चलते आप महसूस करेंगे कि स्वर्ग धरती पर ही है।

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कर्क/Cancer

16 मई 2022:  

प्रभावशाली लोगों का सहयोग आपके उत्साह को दोगुना कर देगा। आज अगर आप दूसरों की बात मानकर निवेश करेंगे, तो आर्थिक नुक़सान तक़रीबन पक्का है। लोगों के साथ ठीक तरह से पेश आएँ, ख़ास तौर पर उनके साथ जो आपसे प्यार करते हैं और आपका ख़याल रखते हैं। दूसरों को ख़ुशियाँ देकर और पुरानी ग़लतियों को भुलाकर आप जीवन को सार्थक बनाएंगे। आपको पता लग सकता है कि आपके बॉस आपसे इतने रूखेपन से क्यों बात करते हैं। वजह जानकर आपको वाक़ई तसल्ली होगी। जब आपको लगता है कि आपके पास घर वालों या अपने दोस्तों के लिए टाइम नहीं है तो आपका मन खराब हो जाता है। आज भी आपकी मन स्थिति ऐसी ही रह सकती है। आपका जीवनसाथी आपकी कमज़ोरियों को सहलाएगा और आपको सुखद अनुभूति देगा।

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Leo
सिंह/Leo

16 मई 2022:  

झगड़ालू स्वभाव को क़ाबू में रखें, नहीं तो रिश्तों में कभी न मिटने वाली खटास पैदा हो सकती है। इससे बचने के लिए अपने नज़रिए में खुलापन अपनाएँ और पूर्वाग्रहों को छोड़ें। अपने धन का संचय कैसे करना है यह हुनर आज आप सीख सकते हैं और इस हुनर को सीख कर आप अपना धन बचा सकते हैं। आपसी संवाद और सहयोग आपके और आपके जीवनसाथी के बीच रिश्ते को मज़बूत बनाएगा। आज अपने ख़ूबसूरत कामों को दिखाने के लिए आपका प्रेम पूरी तरह खिलेगा। नयी योजनाओं को शुरू करने के लिए बढ़िया दिन है। शाम के वक्त आज आप किसी करीबी के घर वक्त बिताने जा सकते हैं लेकिन इस दौरान आपको उनकी कोई बात बुरी लग सकती है और आप तय समय से पहले वापस लौट सकते हैं। यह शादीशुदा ज़िन्दगी के सबसे ख़ास दिनों में से एक है। आपको प्रेम की गहराई का अनुभव करेंगे।

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कन्या/Virgo

16 मई 2022:  

दूसरों के साथ ख़ुशी बांटने से सेहत और खिलेगी। अगर आप अपनी रचनात्मक प्रतिभा को सही तरीक़े से इस्तेमाल करें तो वह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगी। घरेलू काम थका देने वाला होगा और इसलिए मानसिक तनाव की वजह भी बन सकता है। आप साथ में कहीं घूमने-फिरने जाकर अपने प्रेम-जीवन में नयी ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। सहकर्मियों के साथ काम करते वक़्त युक्ति और चतुरता की ज़रूरत होगी। वक्त सेे हर काम को पूरा करना ठीक होता है अगर आप ऐसा करते हैं तो आप अपने लिए भी वक्त निकाल पाते हैं। अगर आप हर काम को कल पर टालते हैं तो अपने लिए आप कभी समय नहीं निकाल पाएंगे। जो यह समझते हैं कि शादी सिर्फ़ सेक्स के लिए होती है, वे ग़लत हैं। क्योंकि आज आपको सच्चे प्यार का एहसास होगा।

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Libra
तुला/Libra

16 मई 2022:  

आज का दिन ऐसे काम करने के लिए बेहतरीन है, जिन्हें करके आप ख़ुद के बारे में अच्छा महसूस करते हैं। व्यापारियों को आज व्यापार में घाटा हो सकता है और अपने व्यापार को बेहतर बनाने के लिए आपको पैसा खर्च करना पड़ सकता है। कुछ लोग जितना कर सकते हैं, उससे कई ज़्यादा करने का वादा कर देते हैं। ऐसे लोगों को भूल जाएँ जो सिर्फ़ गाल बजाना जानते हैं और कोई परिणाम नहीं देते। प्यार-मोहब्बत की नज़रिए से बेहतरीन दिन है। प्यार का मज़ा चखते रहें। आज के दिन कार्यालय का माहौल बढ़िया बना रहेगा। जो लोग घर सेे बाहर रहते हैं आज वो अपने सारे काम पूरे करके शाम के समय किसी पार्क या एकांत जगह पर समय बिताना पसंद करेंगे। आज आपको रंग ज़्यादा चटख नज़र आएंगे, क्योंकि फ़िजाओं में प्यार का ख़ुमार चढ़ रहा है।

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वृश्चिक/Scorpio

16 मई 2022:  

आज आपके पास अपनी सेहत और लुक्स से जुड़ी चीज़ों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय होगा। आर्थिक रुप से आज आप काफी मजबूत नजर आएंगे, ग्रह नक्षत्रों की चाल से आज आपके लिए धन कमाने के कई मौके बनेंगे. माता-पिता के साथ अपनी ख़ुशियाँ साझा करें। उन्हें महसूस करने दें कि आपके लिए उनकी कितनी अहमियत है, इससे उनका अकेलेपन का एहसास अपने आप ख़त्म हो जाएगा। हमारी ज़िंदगी का क्या फ़ायदा, अगर हम एक-दूसरे का जीवन आसान न बना सकें। कोई अच्छी ख़बर या जीवनसाथी/प्रिय से मिला कोई संदेश आपके उत्साह को दोगुना कर देगा। आप लम्बे समय से दफ़्तर में किसी से बात करना चाह रहे थे। आज ऐसा होना मुमकिन है। आपका व्यक्तित्व और लोगों से थोड़ा अलग है आप अकेले वक्त बिताना पसंद करते हैं। आज आपको अपने लिए वक्त तो मिलेगा लेकिन ऑफिस की कोई समस्या आपको सताती रहेगी। अगर आप अपने जीवनसाथी से स्नेह की आशा रखते हैं, तो यह दिन आपकी आशाओं को पूरा कर सकता है।

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धनु/Sagittarius

16 मई 2022:  

अपनी क्षमताओं को पहचानें, क्योंकि आपके अन्दर ताक़त की नहीं बल्कि इच्छा-शक्ति की कमी है। ऐसा लगता है आप जानते हैं कि लोग आपसे क्या चाहते हैं- लेकिन आज अपने ख़र्चों को बहुत ज़्यादा बढ़ाने से बचें। पारिवारिक परेशानियों को हल करने में आपका बच्चों जैसा मासूम बर्ताव अहम किरदार अदा करेगा। आपका प्रिय आज रोमांटिक मूड में होगा। किसी लघु या मध्यावधि पाठ्यक्रम में दाखिला लेकर अपनी तकनीकी क्षमताओं में निखार लाएँ। अपने काम से आराम लेकर आज आप कुछ समय अपने जीवनसाथी के साथ बिता सकते हैं। आपका जीवनसाथी बिना जाने कुछ ऐसा ख़ास काम कर सकता है, जिसे आप कभी भुला नहीं पाएंगे।

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मकर/Capricorn

16 मई 2022:  

शारीरिक बीमारी के सही होनी की काफ़ी संभावनाएँ हैं और इसके चलते आप शीघ्र ही खेल-कूद में हिस्सा ले सकते हैं। आपका पैसा तभी आपके काम आएगा जब आप उसको संचित करेंगे यह बात भली भांति जान लें नहीं तो आपको आने वाले समय में पछताना पड़ेगा। मुसीबत के वक़्त परिवार से आपको मदद और सलाह हासिल होगी। आप दूसरों के तजुर्बों से कुछ सबक़ सीख सकते हैं। यह आपके आत्मविश्वास की मज़बूती के लिए बहुत ज़रूरी है। प्यार-मोहब्बत के मामले में दबाव बनाने की कोशिश न करें। बिना गहराई से समझे-बूझे किसी व्यावसायिक/क़ानूनी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर न करें। आपकी संप्रेषण अर्थात कम्यूनिकेशन की क्षमता प्रभावशाली साबित होगी। जीवनसाथी के ख़राब स्वास्थ्य की वजह से आपका कामकाज प्रभावित हो सकता है।

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कुम्भ/Aquarius

16 मई 2022:  

कुछ तनाव और मतभेद आपको चिड़चिड़ा और बेचैन बना सकते हैं। आर्थिक तंगी से बचने के लिए अपने तयशुदा बजट से दूर न जाएँ। परिवार के सदस्यों की ज़रूरतों को तरजीह दें। उनके सुख-दुःख के भागीदार बनें, ताकि उन्हें महसूस हो कि आप वाक़ई उनका ख़याल रखते हैं। थोड़े बहुत टकराव के बावजूद भी आज आपका प्रेम जीवन अच्छा रहेगा और आप अपने संगी को खुश रखने में कामयाब होंगे। साझीदार से संवाद क़ायम करना बहुत कठिन सिद्ध होगा। आपका आकर्षक और चुम्बकीय व्यक्तित्व सभी के दिलों को अपनी तरफ़ खींचेगा। आज आप अपने जीवनसाथी से काफ़ी आत्मीय बातचीत कर सकते हैं।

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मीन/Pisces

16 मई 2022:  

हृदय-रोगियों के लिए कॉफ़ी छोड़ने का सही समय है। अब इसका ज़रा भी इस्तेमाल दिल पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। आज के दिन धन हानि होने की संभावना है इसलिए लेन-देन से जुड़े मामलों में जितना आप सतर्क रहेंगे उतना ही आपके लिए अच्छा रहेगा। आपकी परेशानी आपके लिए ख़ासी बड़ी हो सकती है, लेकिन आस-पास के लोग आपके दर्द को नहीं समझेंगे। शायद उन्हें लगता हो कि इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। दोस्ती में प्रगाढ़ता के चलते रोमांस का फूल खिल सकता है। अहम लोगों से बातचीत करते वक़्त अपने आँख-कान खुले रखिए, हो सकता है आपके हाथ कोई क़ीमती बात या विचार लग जाए। दिल के करीबी लोगों के साथ आपका वक्त बिताने का मन करेगा लेकिन आप ऐसा कर पाने में सक्षम नहीं हो पाएंगे। शादिशुदा ज़िन्दगी के तमाम मुश्किल दिनों के बाद आप और आपका हमदम फिर प्यार की गर्माहट महसूस कर सकते हैं।

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गांधी और ‘CWC’ की आँख की किरकरी थे ‘शहीद भगत सिंह’

मोहन दास कर्मचंद गांधी ने कभी भी दिल से भगत सिंह की फांसी को रद्द करवाने का प्रयास नहीं किया।  18 फरवरी 1931 को उन्होंने खुद अपने एक लेख में ये माना था कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) कभी नहीं चाहती थी कि जब गांधी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच समझौते के लिए बातचीत शुरू हो तो इसमें भगत सिंह की फांसी को रद्द करवाने की शर्त जोड़ी जाए।  महात्मा गांधी ने ये जानते हुए भी उस समय भगत सिंह का खुल कर साथ नहीं दिया कि अंग्रेजी सरकार ने उनके खिलाफ एकतरफा मुकदमा चलाया था। वायसराय लॉर्ड इरविन ये भी कहा था कि “अगर गांधी इस पर उन्हें विचार करने के लिए कहते हैं, तो वो इस पर सोचेंगे।”

डेमोक्रेटिक फ्रंट :

सारिका तिवारी,

23 मार्च 1931 को महान क्रान्तिकारी भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम हरि राजगुरु को ब्रिटिश सरकार द्वारा लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी की सजा दी गई थी।  भगत सिंह कहते थे कि बम और पिस्तौल से क्रान्ति नहीं आती, क्रान्ति की तलवार विचारों की सान पर तेज़ होती है।  वो भारत को अंग्रेजों की बेड़ियों से आजाद देखना चाहते थे लेकिन आजादी से 16 साल 4 महीने और 23 दिन पहले ही उन्हें फांसी दे दी गई और उन्होंने भी हंसते हुए अपनी शहादत को गले लगा लिया।  इसी सिलसिले में ये जानना भी जरूरी है कि भगत सिंह, महात्मा गांधी की आंखों में चुभने क्यों लगे थे?

महात्मा गांधी का हुआ था विरोध

      भगत सिंह की फांसी से सिर्फ 18 दिन पहले ही महात्मा गांधी ने 5 मार्च 1931 को भारत के तत्कालीन Viceroy Lord Irwin के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे इतिहास में Gandhi-Irwin Pact कहा गया।  इस समझौते के बाद महात्मा गांधी का जमकर विरोध हुआ, क्योंकि उन पर यह आरोप लगा कि उन्होंने Lord Irwin के साथ इस समझौते में भगत सिंह की फांसी को रद्द कराने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया।  जबकि वो ऐसा कर सकते थे।

      महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ वर्ष 1930 में जो सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया था, वो कुछ ही महीनों बाद काफी मजबूत हो गया था।  इस आन्दोलन के दौरान ही महात्मा गांधी ने 390 किलोमीटर की दांडी यात्रा निकाली थी और उन्हें 4 मई 1930 को गिरफ्तार कर लिया गया था।

25 जनवरी 1931 को जब महात्मा गांधी को बिना शर्त जेल से रिहा किया गया, तब वो ये बात अच्छी तरह समझ गए थे कि अंग्रेजी सरकार किसी भी कीमत पर उनका आंदोलन समाप्त कराना चाहती है।  और इसके लिए वो उनकी सारी शर्तें भी मान लेगी।  और फिर 5 मार्च 1931 को ऐसा ही हुआ।

समझौते के दौरान नहीं हुई चर्चा

      वायसराय लॉर्ड इरविन ने गांधी-इरविन पैक्ट के तहत नमक कानून और आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुए नेताओं को रिहा करने पर अपनी सहमति दी तो महात्मा गांधी अपना आंदोलन वापस लेने को राजी हो गए।  लेकिन इस समझौते में यानी इस दौरान भगत सिंह की फांसी का कहीं कोई जिक्र नहीं हुआ।  1996 में आई किताब The Trial of Bhagat Singh में वकील और लेखक A.G. Noorani लिखते हैं कि महात्मा गांधी ने अपने पूरे मन से भगत सिंह की फांसी के फैसले को टालने की कोशिश नहीं की।  वो चाहते तो ब्रिटिश सरकार पर बने दबाव का इस्तेमाल करके तत्कालीन वायसराय को इसके लिए राजी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. 1930 और 1931 का साल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में काफी अहम साबित हुआ।

वो भगत सिंह का दौर था

      ये वो समय था, जब देश में लोगों की ज़ुबान पर महात्मा गांधी का नहीं बल्कि शहीद भगत सिंह का नाम था।  लोगों को ऐसा लगने लगा था कि महात्मा गांधी देश को अंग्रेजों से आजाद तो कराना चाहते हैं लेकिन इसके लिए वो अंग्रेजों के बुरे भी नहीं बनना चाहते।  जबकि भगत सिंह का मकसद बिल्कुल साफ था।  वो अंग्रेजों को किसी भी कीमत पर देश से भगाना चाहते थे।  और बड़ी संख्या में लोगों का प्यार और समर्थन भी उन्हें मिल रहा था।

       23 March को जब लाहौर सेंट्रल जेल में भगत सिंह को फांसी की सजा दी गई, तब इससे कुछ ही घंटे पहले महात्मा गांधी ने लॉर्ड इरविन (Lord Irwin) को एक चिट्ठी लिखी थी इसमें उन्होंने लिखा था कि ब्रिटिश सरकार को फांसी की सजा को कम सजा में बदलने पर विचार करना चाहिए।  उन्होंने लिखा था कि इस पर ज्यादातर लोगों का मत सही हो या गलत लेकिन लोग फांसी की सजा को कम सजा में बदलवाना चाहते हैं।  उन्होंने ये लिखा था कि अगर भगत सिंह और दूसरे क्रान्तिकारियों को फांसी की सजा दी गई तो देश में आंतरिक अशांति फैल सकती है।  लेकिन उन्होंने इस चिट्ठी में कहीं ये नहीं लिखा कि भगत सिंह को फांसी की सजा देना गलत होगा।  उन्हें बस इस बात का डर था कि लोग इसके खिलाफ हैं और अगर ये सजा दी गई तो हिंसा जैसा माहौल बन सकता है।  महात्मा गांधी इस चिट्ठी में बताया कि वायसराय लॉर्ड इरविन ने पिछली बैठक में अपने फैसले को बदलने से मना कर दिया था।  लेकिन उन्होंने ये भी कहा था कि अगर गांधी इस पर उन्हें विचार करने के लिए कहते हैं, तो वो इस पर सोचेंगे।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी क्या चाहती थी?

      महात्मा गांधी ने कभी भी दिल से भगत सिंह की फांसी को रद्द करवाने का प्रयास नहीं किया।  18 फरवरी 1931 को उन्होंने खुद अपने एक लेख में ये माना था कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) कभी नहीं चाहती थी कि जब गांधी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच समझौते के लिए बातचीत शुरू हो तो इसमें भगत सिंह की फांसी को रद्द करवाने की शर्त जोड़ी जाए।  महात्मा गांधी ने ये जानते हुए भी उस समय भगत सिंह का खुल कर साथ नहीं दिया कि अंग्रेजी सरकार ने उनके खिलाफ एकतरफा मुकदमा चलाया था।

अंग्रेजों की पुख्ता साजिश और दिखावा

      भगत सिंह को फांसी की सजा ब्रिटिश पुलिस अफसर John Saunders की हत्या के लिए हुई थी।  लेकिन इस मामले में अंग्रेजी सरकार मुकदमा शुरू होने से पहले ही भगत सिंह के खिलाफ अपना फैसला सुना चुकी थी।  इसके लिए तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने 1 मई 1930 को एक अध्यादेश पास किया था।  जिसके तहत हाई कोर्ट के तीन जजों का स्पेशल Tribunal बनाया गया जिसका मकसद था भगत सिंह को जल्दी से जल्दी फांसी की सजा देना।  बड़ी बात ये थी कि इन तीनों जजों के फैसले को भारत की ऊपरी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी।  अपील के लिए सिर्फ एक विकल्प दिया गया था जो काफी मुश्किल था।  इसमें इंग्लैंड की Privy Council में ही इस फैसले को चुनौती देने की छूट थी।  यानी ये विकल्प पूरी तरह दिखावटी था।

महात्मा गांधी सब जानते थे फिर भी चुप रहे

      इसके अलावा जब भगत सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाया जा रहा था।  तब उनके वकील राम कपूर ने अदालत से 457 गवाहों से सवाल पूछने की इजाजत मांगी थी।  लेकिन उन्हें सिर्फ पांच लोगों से ही सवाल पूछने की मंजूरी मिली।  यानी भगत सिंह के खिलाफ एकतरफा मुकदमा चला और ब्रिटिश सरकार ने न्याय के सिद्धांत का भी गला घोंट दिया।  और इस तरह 7 अक्टूबर 1930 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा सुना दी गई।  लेकिन इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि महात्मा गांधी ये सारी बातें जानते थे. उन्हें पता था कि अंग्रेजी सरकार भगत सिंह को मौत की सजा देने के लिए बेकरार है।  लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी भगत सिंह की फांसी रद्द करवाने के लिए कोई आन्दोलन, कोई हड़ताल नहीं की।

महात्मा गांधी को दिखाए गए थे काले झंडे

      और ये बात उस समय के भारत के लोगों को काफी चुभ रही थी।  और यही वजह है कि इस फांसी के तीन दिन बाद जब 26 मार्च 1931 को कराची में कांग्रेस का अधिवेशन शुरू हुआ, उस समय महात्मा गांधी के फैसले से नाराज लोगों ने उन्हें काले झंडे दिखाने शुरू कर दिए।  माना जाता है कि महात्मा गांधी इस विरोध से बचने के लिए ट्रेन में भगत सिंह के पिता को अपने साथ ले गए थे।  और उन्होंने इस अधिवेशन के दौरान एक प्रस्ताव में भगत सिंह के भी कुछ विचारों को शामिल करने पर अपनी सहमति दी थी, जिससे उनके खिलाफ नाराजगी कम हो सके।

साभार’डीएनए”

Petrol-Diesel के लिए जेब ढीली करने को हो जाइए तैयार

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है। पेट्रोल-डीजल की भारी कीमतों का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। पर रोजमर्रा की वस्तुओं पर इसका प्रभाव तत्काल पड़ता है जैसे सब्जियां, दालें, मसाले, दूध-मक्खन, ब्रेड आदि। तेल के दामों की मार कितनी तीखी होगी, यह चुनाव के नतीजों पर भी निर्भर करेगा। यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें पिछले सात सालों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।

डेमोक्रेटिक फ्रंट, नयी दिल्ल:

पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर सताना शुरू करेंगी। क्‍योंकि कच्‍चे तेल का दाम रिकॉर्ड स्‍तर पर चल रहा है और विधानसभा चुनाव भी खत्‍म होने वाले हैं। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी अगले सप्ताह फिर से शुरू होने की आशंका है। यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल कीमतों में 100 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से पैदा हुए 9 रुपये प्रति लीटर के अंतर को पाटने के लिए होगी। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 2014 के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं।

मोदी सरकार का यह शगल बन चुका है कि विधानसभा चुनावों से पहले पेट्रोल-डीजल के दामों में घट-बढ़ को रोक दो। यह हैरानी की बात है कि पिछले सवा तीन महीने से पेट्रोल डीजल के दाम स्थिर हैं जबकि इनके दाम रोजाना सुबह छह बजे तेल विपणन वितरक कंपनियां तय करती हैं। पेट्रोल-डीजल के डी-कंट्रोल के बाद से मोदी सरकार को यह हक नहीं कि दैनिक स्तर पर पेट्रोल- डीजल के दामों को प्रभावित कर सके। वह केवल पेट्रोल-डीजल पर करों को घटा-बढ़ाकर इनके दामों को प्रभावित कर सकती है। 2017 से सरकार ने करों में लगातार वृद्धि की है। इस अवधि में दो ऐसे अवसर आए जब पेट्रोल-डीजल पर करों में कटौती की गई है।

अब तय है कि 7 मार्च को विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल की भारी कीमत वृद्धि से तगड़ा झटका लगने वाला है। इसे रोकने के लिए मोदी सरकार करों में कटौती कर कोई राहत देगी, इसकी उम्मीद बेमानी है क्योंकि मोदी सरकार ने कोविड काल में भी पेट्रोल-डीजल में करों में भारी वृद्धि में शर्म महसूस नहीं हुई।

जब से मोदी सरकार केन्द्र पर काबिज हुई है, पेट्रोल- डीजल के करों में 250 से 800 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। इसकी पृष्ठभूमि जान लेना जरूरी है, तभी आपको मोदी सरकार के कसाई सरीखे व्यवहार का एहसास हो पाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब-तब कच्चे तेल के दाम कम हुए, मोदी सरकार नेबड़ी बेरहमी से अपनी झोली भरने में कसर नहीं छोड़ी और किस्म-किस्म के करों के जरिये जनता पर नया बोझ थोपती चली गई। 2013 में यूपीए सरकार के समयअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 113 डॉलर प्रति बैरल हो गए थे और तब पेट्रोल की बाजार कीमत थी 65 रुपये प्रति लीटर के करीब। फरवरी, 2016 में इसके दाम लगातार गिरके 31 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गए लेकिन पेट्रोल की कीमत थी करीब 62 रुपये प्रति लीटर

कोविड काल के भयावह दृश्यों को कौन भूल सकता है। करोड़ों की संख्या में प्रवासी मजदूर पैदल चलकर अपने गांवों तक जाने को मजबूर थे। लाखों परिवारों नेअपने प्रियजनों को खो दिया था। तालाबंदी के दौरान करोड़ों लोग अपनी जीविका से हाथ धो बैठे थे। ऐसी स्थिति में अन्य देशों की तरह मोदी सरकार को भी पीड़ित लोगों की नकद सहायता का व्यापक बंदोबस्त करना चाहिए था। पर किया उल्टा। मार्च 2020 से मार्च 1, 2021 की अवधि में पेट्रोल पर 12.92 और डीजल पर 15.97 रुपये प्रति लीटर के शुल्क बढ़ा दिए। ऐसा ‘राक्षसी’ कृत्य तो कोविड के दौरान किसी भी देश ने नहीं किया होगा।

2014-2015 में पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस से मोदी सरकार को 74,158 करोड़ रुपये का कर-राजस्व मिला जो मार्च, 2020 से जनवरी, 2021 के दरम्यान बढ़कर 2.95 लाख करोड़ रुपये हो गया, यानी तीन गुना से अधिक। यह जानकारी खुद केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा को दी! 2014-15 में पेट्रोल और डीजल पर शुल्क 9.48 और 3.54 रुपये थे जो जनवरी, 21 तक बढ़कर क्रमश: 32.90 और 31.80 रुपये हो गए।

सबसे ज्यादा टैक्स भारत में

दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल पर सबसे ज्यादा टैक्स भारत में है जहां प्रति व्यक्ति आय बहुत कम है। प्रति व्यक्ति आय की 2017 की 190 देशों की सूची में भारत 122वें पायदान पर है। पर देश में मोदी सरकार की निर्मम पेट्रोल-डीजल नीति ने कृषि की कमर ही तोड़ कर रख दी। इनके अत्यधिक महंगे होने से मांग लगातार कमजोर बनी हुई है। इससे पर्याप्त नया निवेश नहीं हो पा रहा है और रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं। 2014 में पेट्रोल-डीजल के बीच कीमत अंतर 24 रुपये था जो अब घटकर 8.74 रुपये रह गया है। जून, 2020 में देश में पहली बार डीजल पेट्रोल से महंगा हो गया। जैसे-जैसे डीजल के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई, पेट्रोल-डीजल की कीमत का अंतर कम होता गया। इससे खेती और किसानों के हालात बिगड़ते चले गए।

गिरने वाली है गाज

मोदी सरकार का परम विश्वास है कि चुनावों से पहले पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहेंगे, तो उसे लोगों को भरमाकर वोट लेने में सहूलियत रहेगी। पिछले साल मार्च-अप्रैल में प. बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के पहले भी पेट्रोल-डीजल के दाम मोदी सरकार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए स्थिर करा दिए थे। और अब जैसे ही उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हुई तो फिर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर करा दिया गया। देश में पिछले सवा तीन महीनों से पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं जिसका लाभ चुनावों में बीजेपी उठाना चाहती है। चुनावों की खातिर मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल के करों में 3 नवंबर को 5 और 10 रुपये की कटौती की थी। तब से इनके दाम स्थिर बने हुए हैं।

अब 10 मार्च को चुनाव नतीजों के बाद पेट्रोल-डीजल के दामों में भारी कीमत वृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बहुत बढ़ गए हैं। 30 नवंबर, 2021 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल थी जो आजकल 92-93 डॉलर है, यानी 17-18 डॉलर की बढ़ोतरी।

यूक्रेन समस्या और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्त मौद्रिक नीति की संभावना की तलवार का कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। मोदी सरकार के पेट्रोल-डीजल की निर्मम नीति को देखते हुए प्रधानमंत्री से किसी राहत की उम्मीद करना बेकार है।

आवश्यक वस्तुओं पर पड़ेगा प्रभाव

पाकिस्तान में हाल ही में पेट्रोल-डीजल के दामों में करीब 12 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। इससे हाहाकार मच गया और इमरान सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जब भी पेट्रोल- डीजल के दामों में भारी वृद्धि होती है, महंगाई के एक नए चक्र को जन्म मिलता है। भारतीय रुपये में भी आकलन करें तो कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तकरीबन 8-10 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है। भारत में जनता पर कितनी तीखी मार होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत वृद्धि टुकड़ों में होगी या एक साथ।

पेट्रोल-डीजल की भारी कीमत वृद्धि का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। पर रोजमर्रा की वस्तुओं पर इसका प्रभाव तत्काल पड़ता है जैसे सब्जियां, दालें, मसाले, दूध-मक्खन, ब्रेड आदि। विर्निमित वस्तुओं पर प्रभाव पड़ने में थोड़ा समय लगता है। आवाजाही और उत्पादन लागत बढ़ने से इसका असर चैतरफा होता है। पेट्रोल-डीजल की कीमत वृद्धि की मार कितनी तीखी होगी, यह विधानसभा के नतीजों पर भी निर्भर करेगा।

साभार : राजेश रपरिया