भाजपा की चुनावी घोषणा: वोट दो मुफ्त में वैक्सीन लो

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आज अपना विजन डॉक्यूमेंट जारी किया है. इस विजन डॉक्यूमेंट में बीजेपी ने वादा किया कि हर बिहारवासियों को फ्री में कोरोना का टीका लगाया जाएगा. बीजेपी के इस वादे पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) समेत कई विपक्षी दलों ने निशाना साधा.

पटना(ब्यूरो): 

बिहार चुनाव के लिए अपना संकल्प पत्र जारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सवालों के घेरे में आ गई है. दरअसल, पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में कहा है कि दोबारा सत्ता में आने पर बिहार के लोगों को फ्री में कोरोना की वैक्सीन दी जाएगी. ऐसे में अब विपक्षी पार्टियां सवाल उठा रही हैं कि क्या कोरोना का टीका बीजेपी का है या पूरे देश पर इसका हक होगा? बिहार में वैक्सीन से वोट का ‘सौदा’ आखिर क्यों? इसे लेकर आप क्या सोचते हैं #WhyVoteForVaccine पर ट्वीट कर अपनी राय हमें बताएं.  सफाई में

बताया गया की जिस प्रकार बंगाल में ममता बेनर्जी ने आयुष्मान भारत का और किसानों को वार्षिक दर पर दिये जाने वाले रुपये 6000/= का मानदेय अपने राज्य में नहीं देने दिया, ठीक उसी प्रकार कोरोना वैक्सीन का 70 प्रतिशत केंद्र सरकार और 30%

भाजपा का संकल्पपत्र

बिहार चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को संकल्प पत्र ‘आत्मनिर्भर बिहार का रोडमैप 2020-25′ जारी किया. जिसमें कोरोना वायरस का नि:शुल्क टीका लगाने, तीन लाख शिक्षकों की नियुक्ति करने सहित शिक्षा, चिकित्सा एवं अन्य क्षेत्रों में 19 लाख नए रोजगार देने, महिलाओं के लिए सूक्ष्म वित्तपोषण की नई योजना लाने और बिहार को सूचना प्रौद्योगिकी का केंद्र बनाने सहित 11 संकल्प व्यक्त किए गए हैं.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भाजपा का यह संकल्प पत्र जारी किया जिसे ‘आत्मनिर्भर बिहार का रोडमैप 2020-25′ का नाम दिया गया है. इसके तहत पांच सूत्र, एक लक्ष्य, 11 संकल्प रखे गए हैं. इसके साथ ही पार्टी ने ‘भाजपा है, तो भरोसा है’ का नारा भी दिया है. इस दौरान भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, नित्यानंद राय, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. सीतारमण ने संवाददाताओं से कहा कि बिहार एक ऐसा राज्य है जहां सभी नागरिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील और अच्छी तरह से सूचित हैं और वे उन वादों को जानते और समझते हैं जिन्हें पार्टी करती है.

उन्होंने कहा, ‘हमने भरोसे को आधार मानकर संकल्प पत्र तैयार किया है. हमारे हर संकल्प पत्र में वादे को पूरा करने की प्रतिबद्धता होती है. इसलिये जब कभी हमारे घोषणापत्र के बारे में पूछा जाता है तब हम उन्हें विश्वास के साथ जवाब दे सकते हैं कि हमने जो वादा किया था, उसे पूरा करते हैं.’ वित्त मंत्री ने कहा कि जब तक कोरोना वायरस का टीका नहीं आता है, तब तक मास्क ही टीका है, लेकिन जैसे ही टीका आ जायेगा तो भारत में उसका उत्पादन बड़े स्तर पर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि जब टीका तैयार हो जायेगा तब हर बिहारवासी को कोरोना वायरस का टीका निः शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा. भाजपा की वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब हम विकास की बात करते हैं तब 1990 से 2005 के 15 साल के शासनकाल और 2005 से 2020 के शासनकाल की तुलना करें तो स्थिति स्पष्ट होगी.

उन्होंने कहा कि बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)सरकार के पिछले 15 वर्षों के शासन में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) तीन प्रतिशत से बढ़कर 11.3 प्रतिशत हो गया है. बिहार का बजट 2005 के 23 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये हो गया है, कृषि विकास दर दो प्रतिशत से बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई, बिजली उत्पादन 22 प्रतिशत से बढ़कर अब 100 प्रतिशत हो गया और प्रति व्यक्ति आय में भी काफी वृद्धि दर्ज की गई. सीतारमण ने कहा कि 2005 से पहले के औद्योगिक उत्पादन का सतत आंकड़ा नहीं मिला है क्योंकि पूर्व की सरकार की प्राथमिकता औद्योगिक विकास नहीं था. राजग सरकार के दौरान प्रदेश की औद्योगिक विकास दर 17 प्रतिशत हो गई है.

भाजपा के संकल्प पत्र में कहा गया है कि आने वाले एक वर्ष में राज्य के सभी प्रकार के विद्यालय, उच्च शिक्षा के विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों में तीन लाख नए शिक्षकों की नियुक्ति करेंगे. इसमें 10 हजार चिकित्सों सहित कुल एक लाख लोगों को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के अवसर देने, बिहार में मेडिकल, इंजीनियरिंग सहित तकनीकी शिक्षा को हिंदी भाषा में उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त किया गया है. भाजपा ने कहा है कि कोरोना वायरस का टीका तैयार होने पर हर बिहारवासी को कोरोना का निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा.

Webinar on “Digital Economy- Growth Opportunities for Youth (NEP 2020- A Great Enabler)” Organised at PU

Chandigarh, 22/10/2020:

A webinar on “Digital Economy- Growth Opportunities for Youth (NEP 2020- A Great Enabler)” was organised by Central Placement Cell, Panjab University in collaboration with University Business School(UBS) and University Institute of Applied Management and Sciences (UIAMS) on 21st October 2020.

Prof Raj Kumar, Vice-Chancellor, Panjab University enlightened the students about how to be innovative and to be job providers not job seekers. He also emphasised the importance of NEP 2020 in creating new job opportunities and the initiatives taken by University in making its students future ready.

The keynote speaker was Mr. Antarpreet Singh , Director, Digital Learning, ISB having 35 years of diverse experience. He acquainted the students how digitalization is important for every business as well as education.  He highlighted the significance of digital transformation and how it will  lead to creation of new job opportunities.He shared that Man-Machine dynamics will define new job roles. Eighty five percent job roles will vanish in next ten years and emphasised the need for retraining and reinventing. After that, he explained how New Education Policy 2020 will provide skill-based education and will be empowering youth to be future-ready.

The session started with introduction by Dr. Amandeep Singh Marwaha ,Associate Director, CPC followed by welcome note by Prof. Meena Sharma, Director, Central Placement Cell

and explained the significance of digital technology in reinventing our products, refining our services and shaping the way we live and work. Dr. Meenakshi Malhotra, Chief Coordinator, UBS highlighted the importance of New Education Policy. More than 190 participants including faculty, research scholars, alumni and students attended it.

Examination Schedule for Semester Examinations for the session December 2020 (Theory)

Chandigarh October 22, 2020

It is notified for information of the public in General and students in particular that the Examination Schedule for Semester Examinations for the session December 2020 (Theory) will be as under:

All UG & PG Classes (i.e. 1st, 3rd , 5th , 7th & 9th Semester (Regular & Reappear) 
  ODD SEMESTERCommence-ment Date**  Without late Fee.**With late fee of Rs.2,075/-**With late fee of Rs.6,075**With late fee of Rs11,075/-**With late fee of Rs.  22,075/-**
For regular/Reappear/ Private candidates of all Colleges/Deptt./  To be notified later on  10.11.2020  17.11.2020  24.11.2020  1.12.2020  8.12.2020

(Students can also visit the University website www.puchd.ac.in  for information)

कॉंग्रेस का हाथ PFI के साथ

सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्ग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्थगित कर दिया है। इस याचिका में केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक कप्पन की रिहाई की माँग की गई थी। बता दें कि सिद्दीक कप्पन, उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए चार पीएफआई सदस्यों में से एक है। ये लोग यूपी में हाथरस मामले को लेकर जाति आधारित अशांति और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की योजना बनाई थी।

  • अतीकुर्रहमान, आलम, केरल के सिद्दीक कप्पन (जो कि कथित तौर पर पत्रकार है) और मसूद अहमद के पास गिरफ्तारी के दौरान 6 स्मार्टफोन, एक लैपटॉप व ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम के पैम्फ़्लिट पाए गए थे और ये लोग शांति भंग करने के लिए हाथरस जा रहे थे।
  • राहुल गाँधी ने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में कथित पत्रकार व PFI सदस्य सिद्दीक कप्पन (Siddique Kappan) के परिवार से मिलकर उनकी मदद का आश्वासन दिलाया है।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

  • सांसद : राहुल गांधी
  • आरोपी : राहुल गाँधी ने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में कथित पत्रकार व PFI सदस्य सिद्दीक कप्पन 
  • आरोप : यूपी में हाथरस मामले को लेकर जाति आधारित अशांति और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की योजना बनाई थी
  • वकील : राहुल गाँधी की कॉंग्रेस केनेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल

राहुल गाँधी ने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में कथित पत्रकार व PFI सदस्य सिद्दीक कप्पन परिवार से मिलकर उनकी मदद का आश्वासन दिलाया है। केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक को हाथरस मामले के मद्देनजर उत्तर प्रदेश जाते समय टोल प्लाजा से गिरफ्तार किया गया था। उस पर PFI से जुड़े होने और जातीय हिंसा फ़ैलाने की कोशिश के आरोप हैं। सिद्दीक कप्पन इस वक्त उत्तर प्रदेश की मथुरा अस्थायी जेल में बंद है।

सूचना के अनुसार, आज कालापेट्टा के रेस्ट हाउस में कप्पन के घरवालों ने राहुल गाँधी से मुलाकात की। इस समय कॉन्ग्रेस पूर्व अध्यक्ष वहाँ दौरे पर गए हुए हैं। परिवार ने इस मुलाकात में राहुल गाँधी से पूरे मामले में हस्तक्षेप की माँग करके पत्रकार की जल्द रिहाई करवाने की गुहार लगाई।

कॉन्ग्रेस सांसद से मुलाकात के बाद कप्पन की पत्नी रेहानथ ने बताया कि राहुल गाँधी उनके पति को रिहा कराने के लिए हर तरह से तैयार हो गए हैं। कथित पत्रकार की पत्नी ने यह भी कहा कि उनके पति को पुलिस ने हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया था और अब वह उनके लिए चिंतित हैं क्योंकि वकील भी उनसे नहीं मिल पा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि हाथरस जाते हुए पिछले दिनों सिद्दीक कप्पन के साथ 3 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था। उसके ख़िलाफ़ संगीन अपराध करने की मंशा रखने के शक में सीआरपीसी की धारा 151 के तहत मामला दर्ज हुआ था। बाद में यह केस राजद्रोह और आतंकवाद रोधी कानून के तहत दर्ज कर लिया गया। 7 अक्टूबर को इन चारों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और अब उनकी हिरासत फिर बढ़ा दी गई है।

ज्ञात हो कि 6 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए चारों आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए (दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), आईपीसी की 295 ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करने से भावनाओं को अपमानित करने का इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया था। fIR में बताया गया था कि अतीकुर्रहमान, आलम, केरल के सिद्दीकी कप्पन (जो कि कथित तौर पर पत्रकार है) और मसूद अहमद के पास गिरफ्तारी के दौरान 6 स्मार्टफोन, एक लैपटॉप व ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम के पैम्फ़्लिट पाए गए थे और ये लोग शांति भंग करने के लिए हाथरस जा रहे थे।

यहाँ बता दें कि राहुल गाँधी द्वारा कप्पन की रिहाई पर हस्तक्षेप की बात सामने आते ही उनपर सवाल उठने लगे हैं। यूपी सीएम के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा,

फ्रांस की ‘The Grand Mosque of Pantin’ पर जड़ दिया ताला

नयी दिल्ली/ Overseas Desk:

फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक इतिहास के शिक्षक सैमुअल की सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने अभिव्यक्ति की आज़ादी की पढ़ाई के दौरान छात्रों को पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाया था। इस वारदात के बाद घृणा फैलाने वालों और इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच फ्रांस ने पेरिस के बाहर स्थित एक मस्जिद को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। ‘The Grand Mosque of Pantin’ पर ताला जड़ दिया गया है।

ये मस्जिद फ्रांस की राजधानी पेरिस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित एक सबअर्ब में स्थित है, जो बाकी इलाकों से थोड़ा पिछड़ा हुआ है। इस मस्जिद ने अपने फेसबुक पेज पर शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या से पहले एक वीडियो जारी कर उनके खिलाफ घृणा फैलाई थी। प्रशासन ने मस्जिद के बाहर इसे बंद किए जाने का नोटिस चस्पा दिया है। फ्रांस में मजहब के आधार पर कट्टर शिक्षा देने वालों और देश की सुरक्षा में संभावित खतरा पैदा करने वाले विदेशियों पर कार्रवाई हो रही है।

इस मस्जिद को 6 महीने के लिए बंद किया गया है और बताया गया है कि ‘आतंकवादी घटनाओं से बचाव के एकमात्र कारण’ के लिए ऐसा किया गया है। फ्रांस के ‘Seine-Saint-Denis’ विभाग ने ये नोटिस जारी किया। ये भी पता चला है कि हत्यारा उस अभिभावक से संपर्क में था, जो शिक्षक के खिलाफ घृणा अभियान चला रहा था। साथ ही हमास के पक्ष में आए हुए पहले के एक आदेश को भी रद्द कर दिया गया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि देशवासी कार्रवाई चाहते हैं और सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है। हत्यारे ने व्हाट्सप्प पर उस अभिभावक से चैट किया था, जिसकी बेटी ने पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाने वाले शिक्षक की शिकायत की थी। इसके बाद उस अभिभावक ने इसे ‘पोर्नोग्राफी’ बताते हुए उन्हें बरखास्त करने की माँग के साथ विरोध में समर्थन जुटाना शुरू कर दिया था। हत्यारा अब्दुल्लाख भी पुलिस की गोली से मारा गया।

इस हत्याकांड के कुछ ही सप्ताह पहले फ्रेंच राष्ट्रपति ने ‘इस्लामी अलगाववाद’ के कारण चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस्लाम एक ऐसा मजहब है, जो पूरी दुनिया में ही संकटकाल से गुजर रहा है, सिर्फ फ्रांस में ही ऐसा नहीं है। फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड ने कहा कि देश ‘अंदर के दुश्मनों’ से लड़ रहा है। फ्रांस में सक्रिय हमास का समर्थन करने वाले समूह को भंग कर दिया गया है। उसके मुखिया अब्देलहकीम से पुलिस पूछताछ कर रही है।

वहीं अब मस्जिद के प्रबंधक मोहममद हेंनीचे ने अब वीडियो शेयर करने को लेकर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि ये वीडियो सिर्फ मुस्लिम छात्रों की चिंताओं के लिए शेयर किया गया था। साथ ही दावा किया कि इस्लाम में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। अब ‘Sorbonne’ विश्वविद्यालय में बुधवार (अक्टूबर 21, 2020) को उक्त शिक्षक को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिसमें राष्ट्रपति मैक्रों, पीड़ित परिवार और 400 अतिथि उपस्थित रहेंगे।

मंगलवार को संसद में भी इस घटना के कारण एक मिनट का मौन रखा गया। ‘Conflans-Sainte-Honorine’ में उसी दिन शाम को हजारों लोगों ने जमा होकर ‘मैं भी सैमुअल’ का नारा लगा आकर इस्लामी कट्टरपंथियों का विरोध किया। ‘शार्ली हेब्दो’ के अगले अंक में ‘सिर कटा हुआ गणतंत्र’ नाम से एक शीर्षक भी आने वाला है। इसके संपादकीय में बताया जाएगा कि कैसे ये हत्यारे लोकतंत्र का गला काटना चाहते हैं।

ज्ञात हो कि उधर वहाँ के 4 NGO ने ट्विटर के खिलाफ भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हेट स्पीच पर लगाम लगाने में विफल रहने के कारण उसे कोर्ट में घसीटा गया है। हत्यारे का सन्देश और शिक्षक के मृत शरीर के साथ तस्वीर ट्विटर पर डाली गई थी, जिससे वहाँ के कई संगठन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से खफा हैं। हत्यारे ने अपने ट्विटर अकाउंट से भी आपत्तिजनक चीजें डाली थीं। वहाँ के ये NGO सरकार के साथ खड़े हैं।

21 अक्तूबर: अखिल भारतीय जनसंघ स्थापना दिवस

कोरल ‘पुरनूर’, चंडीगढ़ – 21 अक्तूबर:

21 अक्टूबर 1951 को नई दिल्ली में महान् बलिदानी डॉ0 श्यामाप्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता तथा पंडित मौलीचन्द्र शर्मा, वैध गुरूदत्त, लाला योधरज, प्रो0 बलराज मधोक आदि देशभक्तों की सहभागिता में स्थापित भारतीय जनसंघ स्वतंत्र भारत का पहला राष्ट्रवादी-यथार्थवादी राजनीतिक दल हैं जिसने संसद के अन्दर और बाहर नेहरूवाद का विकल्प और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संखनाद किया। भारत में अभारतीय शासन के विकल्प के रूप में भारतीय राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक नीतियों की आधुनिक सन्दर्भों में व्याख्या और अनुप्रयोग के आग्रही एवं देश की एकता-अखण्डता के विश्वनीय वाहक के रूप में जनसंघ का उदय हुआ था।

भारत का जनसंघ का इतिहास :

अखिल भारतीय जनसंघ भारत का एक पुराना राजनैतिक दल है जिससे 1980 में भारतीय जनता पार्टी बनी। इस दल का आरम्भ श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में की गयी थी। इस पार्टी का चुनाव चिह्न दीपक था। इसने 1952 के संसदीय चुनाव में 3 सीटें प्राप्त की थी जिसमे डाक्टर मुखर्जी स्वयं भी शामिल थे।

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लागू आपातकाल (1975-1976) के बाद जनसंघ सहित भारत के प्रमुख राजनैतिक दलों का विलय कर के एक नए दल जनता पार्टी का गठन किया गया। आपातकाल से पहले बिहार विधानसभा के भारतीय जनसंघ के विधायक दल के नेता लालमुनि चौबे ने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में बिहार विधानसभा से अपना त्यागपत्र दे दिया। जनता पार्टी 1980 में टूट गयी और जनसंघ की विचारधारा के नेताओं नें भारतीय जनता पार्टी का गठन किया। इसके पश्चात प्रोफेसर बलराज मधोक ने भारतीय जनसंघ का नाम अखिल भारतीय जनसंघ करके चुनाव आयोग में रजिस्टर कराया और भारतीय राजनीति में अखिल भारतीय जनसंघ के नाम से संसदीय चुनाव प्रणाली में भाग लिया।

‘अखिल भारतीय जनसंघ’ के संस्थापक प्रो.बलराज मधोक ने देश में प्रखर राष्ट्रवादी और हिन्दुत्ववादी राजनीति की नींव रखी। भारतीय जनसंघ के साथ ही उन्होंने 1951 में आरएसएस की स्टूडेंट ब्रांच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना की। इसके साथ ही उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ और इस दौरान लंबे समय तक लखनऊ उनकी राजनीतिक कर्मभूमि रहा। जनसंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने लखनऊ में पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक रखी। उसके बाद जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर उन्होंने 1989 में यहीं से चुनाव भी लड़ा। लखनऊ में उनके साथ काम करने वाले ऐसे ही कुछ नेताओं और बुद्धिजीवियों को उनकी बेवाकी और स्पष्ट राजनीतिक सोच के संस्मरण अब भी याद हैं।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक प्रो.मधोक के लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी से राजनीतिक मतभेद रहे। आडवाणी जब राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो 1973 में उन्हें भारतीय जनसंघ से निकाल दिया गया। बाद में भारतीय जनता पार्टी बनी तो उसमें शामिल हुए, हालांकि उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ‘अखिल भारतीय जनसंघ’ पार्टी बनाई लेकिन वह सफलता नहीं हो सकी। उसके बाद बीजेपी ने 1989 में जनता दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। लखनऊ से जनता दल के मांधाता सिंह को संयुक्त प्रत्याशी बनाया गया। मधोक मांधाता सिंह के खिलाफ निर्दलीय लड़े। उन्हें हिंदूवादियों का समर्थन मिला और माना जा रहा था कि वह जीत जाएंगे। इसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने एक लाइन का बयान दिया-‘मधोक हमारे प्रत्याशी नहीं हैं।’ और पूरा चुनावी रुख पलट गया, मधोक हार गए।
पूर्व सांसद लालजी टंडन बताते हैं कि जनसंघ की स्थापना के समय से आखिरी समय तक मेरा उनसे जुड़ाव रहा। वह जीवन भर मूल्यों पर आधारित राजनीति करते रहे। वह जब भी लखनऊ आते, मेरी मुलाकात होती थी। उनकी अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यसमिति यहां चौक स्थित धर्मशाला में हुई। तब मैं उनके काफी करीब रहा। कश्मीर को बचाने में उनका खासा योगदान है। मैं अटलजी और मधोकजी के बीच कुछ दूरियां रहीं लेकिन मैं दोनों के काफी करीब रहा। एक बार यह स्थिति आ गई कि उन्हें जनसंघ से अलग होना पड़ा लेकिन उसके बाद भी वह लिखकर अपने राष्ट्रवादी विचार रखते रहे। जिन विषयों पर आज के नेता संकोच करते हैं, उन पर भी उन्होंने प्रखर विचार रखे। वह राजनीतिक तौर पर भले ही अलग रहे हों लेकिन वह कभी मूल विचारधारा से नहीं हटे।

राष्ट्रधर्म के संपादक आनंद मिश्र अभय बताते हैं कि मधोक जी से मेरा संपर्क 1997 में हुआ जब मकर संक्रांति पर ‘सनातन भारत’ विशेषांक निकाला। राष्ट्रधर्म में उनका लेख छापा तो उनके करीबी महेश चंद्र भगत ने सराहा। भगत जी ने ही मेरे बारे में उनको बताया। मधोक जी जब लखनऊ आए तो मुझे मिलने बुलाया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में साथ ही बैठा लिया। इसी दौरान वह बोल गए कि अटल जी अब तक के सबसे खराब प्रधानमंत्री हैं। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उनसे बेहतर नेता और कौन है? इस पर उन्होंने कहा कि यह बीजेपी का सिरदर्द है। मैंने कहा, यह बीजेपी का सिरदर्द है तो आप क्यों इसे अपना बना रहे हैं? … और प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म हो गई। यह उनकी सहजता ही थी कि इसके बाद भी उन्होंने बुरा नहीं माना। बाद में मैंने उनसे कहा कि आपने इतिहास पढ़ा है, पढ़ रहे हैं, गढ़ रहे हैं और इतिहास को जी रहे हैं। क्यों नहीं आप संस्मरण लिखते। उसके बाद ही उन्होंने संस्मरणों पर आधारित पुस्तक लिखी। कश्मीर समस्या के समाधान पर उन्होंने एक लेख भी भेजा जो उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा के विपरीत था। मैंने वह लेख छापा नहीं और उनसे आग्रह किया कि इसे कहीं और भी न भेजें। इससे आपकी छवि धूमिल होगी। मेरी यह बात उन्होंने मानी भी और अपनी विचारधारा के अनुसार ही लिखते रहे।

सही समय पर लिया गया पंजाब सरकार का सही फैसला

चंडीगढ़: 

केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर पंजाब-हरियाणा में विरोध प्रदर्शन के बीच मंगलवार को इस कानून के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया गया. प्रस्ताव पेश करने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा, “मैं इस्तीफा देने से नहीं डरता.” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “मुझे अपनी सरकार के बर्खास्त होने का डर नहीं है, लेकिन मैं किसानों को परेशान या बर्बाद नहीं होने दूंगा.”

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंहने केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ मंगलवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया. नए कृषि कानूनों के खिलाफ बुलाए विशेष विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सदन के नेता ने प्रस्ताव पेश किया. मुख्यमंत्री ने केन्द्र के कृषि कानूनों के खिलाफ तीन विधेयक भी पेश किए. 

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा पेश किए तीन विधेयक, किसान उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विशेष प्रावधान एवं पंजाब संशोधन विधेयक 2020, आवश्यक वस्तु (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) विधेयक 2020 और किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) विधेयक 2020 हैं. 

सिंह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि राज्य का विषय है, लेकिन केन्द्र ने इसे नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे काफी ताज्जुब है कि आखिर भारत सरकार करना क्या चाहती है.”

कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020, कृषक (सशक्तीरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 विधेयक हाल ही में संसद में पारित हुए थे. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के इन्हें मंजूरी देने के बाद अब ये कानून बन चुके हैं. कृषि राज्यों पंजाब और हरियाणा में किसान केन्द्र के इन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

मोक ड्रिल : एनडीआरएफ़ टीम ने बचाए भूकंप में फंसे लोग

पंचकूला 20 अक्तूबर:

उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा ने जिला सचिवालय के सभागार में माॅक ड्रिल के बाद अधिकारियों की बैठक लेकर भूकम्प को लेकर विस्तार से फीड बैक ली और उनके सुझाव आमंत्रित किए।

उपायुक्त नेे कहा कि सभी विभागाध्यक्ष अपने सिस्टम को अलर्ट रखें ताकि भूकम्प आने पर तुरन्त सम्पर्क किया जा सके। उन्होंने कहा कि सिविल डिफेंस कार्यालय में जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए ओर उसका दूरभाष नम्बर भी प्रसारित किया जाए। इसके लिए स्टाफ की रोस्टर अनुसार डयूटी लगाई जाए। होम गार्ड में रैस्क्यू टीम का गठन किया जाए। फायर विभाग में तीन चार लाईने दूरभाष हेतू शामिल की जाए ताकि आसानी से जानकारी हासिल हो सके।
उपायुक्त ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को जिला सचिवालय भवन, अस्पताल आदि का तकनीकी रूप से परीक्षण करने के निर्देश दिए ताकि यह पता चल सके की यह भवन किस लेवल तक के भूकम्प को आसानी से झेल सकता है। इसके अलावा इन भवनों के एमरजेंसी निकासी ओर कोरिडोर बालकाॅनी भी खाली होनी चाहिए।

सैक्टर 1 स्थित जिला सचिवालय में एनडीआरएफ व जिला प्रशासन के सहयोग से भूकम्प को लेकर माॅक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस माॅक ड्रिल में उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा व एनडीआरएफ गाजियाबाद के डिप्टी कमाण्डेंट कुलेश आनन्द ने सभी विभागों के सहयोग से रेसक्यू आपरेशन किया गया। माॅक ड्रिल के दोरान आपातकाल सायरन बजते ही भवन को खाली कर दिया गया और सभी विभागाध्यक्षों ने इंसीडेंट कमाण्डर को अवगत करवाया। अचानक आए भूकम्प में 15 व्यक्ति मलबे में दब गए। उन्हें निकालने के लिए रैस्क्यू किया गया। एनडीआरएफ की टीम ने 8 व्यक्तियों को सकुशल निकाल लिया लेकिन दो व्यक्तियों की कैज्यूलटी हो गई। इसके अलावा सैक्टर 5 स्थित परेड ग्राउंण्ड मेें स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ राहत कैम्प बनाया गया।

बैठक में अवगत करवाया कि आगजनी की घटना होने पर ग्राउण्ड पर लेटकर निकलना चाहिए। क्योंकि धूंआ नीचे से तीन फीट ऊंचाई पर रहता है ओर कोई भी दुर्घटना नहीं होती। इसके लिए विशेषकर महिलाओं  एवं स्वंय सहायता समूहों के प्रतिनिधियों को भी प्रशिक्षण करवाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि माॅक ड्रिल में जनता को शामिल किया जाए ताकि वे भी संवेदनशील हो सके।

एनडीआरएफ के डिप्टी कमाण्डेंट कुलेश आनन्द  ने कहा कि यह हमारी सब की जरूरत है। इसलिए हमें अपनी डयूटी व दायित्वों के प्रति सजग ओर सचेत रहना चाहिए। इसके अलावा जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन एक्शन प्लान बना होना चाहिए जिसमें आवश्यक दिशा निर्देशों के बारे में विस्तार से जानकारी हो ताकि रैस्क्यू के दौरान जान व माल की कम से कम हानि हो।

बैठक में एसडीएम कालका ने माॅक ड्रिल को सार्थक करने पर सभी का आभार जताया ओर हमेशा इस तरह की आपदा से निपटने के लिए तत्पर रहने का आहवान किया। नगराधीश धीरज चहल, जिला राजस्व अधिकारी नरेश कुमार, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी कंवर दमन सिंह, सचिव रैडक्रास, सविता अग्रवाल सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे ओर अपने अपने सुझाव दिये।

फोटो कैप्शन- माॅक ड्रिल के दौरान रोप वे से पीड़ित को निकालते, प्राथमिक उपचार के लिए ले जाते व करते हुए। भूकम्प के दौरान उपयोग किए जाने वाले उपकरणों का अवलोकन करते हुए उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा व डिप्टी कमाण्डेंट कुलेश आनन्द के साथ प्रशासनिक अधिकारी।

भाजपा के जातीय ध्रूवीकरण के षड्यंत्र को निष्फल और नाकामयाब करने में आगे आयें वोटर : चंद्रमोहन

पचकुलां  20 अक्टूबर:

हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा कि बरोदा उपचुनाव के दौरान वहां की जनता भारतीय जनता पार्टी के  जातीय ध्रूवीकरण के षड्यंत्र को निष्फल और नाकामयाब करने के लिए उत्सुक हैं।  भाजपा बड़ोदा के मतदाताओं को जींद उपचुनाव की तर्ज़ पर  विकास के नाम पर धोखा देने का प्रयास कर रही है, लेकिन उसके प्रयास  कभी भी सफल नहीं होंगे।

                     ‌               चन्द्र मोहन ने ‌याद दिलाया कि किस प्रकार जींद के उपचुनाव के दौरान लोगों को विकास के नाम पर लोगों को बरगलाने का कुचक्र चलाया गया और मतदाताओं को भ्रमित करके उनके वोट हासिल किए गए। चुनाव जीतने के पश्चात उन घोषणाओं को ठण्डे बस्ते में डाल कर लोगों का अपमान किया गया। यही कारण है कि जींद के भाजपा के विधायक डॉ मिड्डा ने भाजपा  सरकार के दावों को झूठा करार देते हुए कहने पर विवश होना पड़ा कि जींद में विकास गायब है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार बरोदा उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री खट्टर ने हल्के के विकास का जुमला गढ़ने के लिए विवश होना पड़ा। मतदाताओं को हर समय बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता है।

                         ‌               उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के खिलाफ लोगों में और विशेषकर किसानों और श्रमिकों और गरीबों में रोष फैल रहा है। उसकी परिणति भाजपा के उम्मीदवार योगेश्वर दत्त की हजारों वोटों से पराजय के रूप में सामने आएगी। हरियाणा भाजपा में जिस प्रकार से भगदड़ मची हुई है। उससे जनता का ही नहीं अपितु भाजपा नेताओं का विश्वास भी डगमगाया हुआ है। उन्होंने कहा कि योगेश्वर दत्त की पत्नी शीतल शर्मा को भी भाजपा पर विश्वास नहीं रहा। इस लिए उन्हें कहना पड़ा कि  जिस प्रकार से भाजपा में  नेता पार्टी छोड़ रहे हैं तो आप भाजपा को मत देखो अपितु मुझ पर भरोसा और यकीन रखे। इससे स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है कि उम्मीदवार की पत्नी को भी  भाजपा  पर विश्वास नहीं है तो आम जनता कैसे विश्वास करेगी।

                          ‌          उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार इन्दु राज नरवाल को जिस प्रकार से बड़ोदा की जनता का असीम प्यार और सहयोग मिल रहा है और कांग्रेस पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता एक जूट होकर कन्धे से कन्धा मिलाकर चल रहें हैं ‌‌। उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस प्रत्याशी की विजय कम से कम 50000 वोटों से होगी और जीत का एक नया इतिहास रचा जायेगा। उन्होंने कहा कि वे भी प्रचार करने के लिए बड़ोदा जायेंगे। उन्होंने सभी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से अपील की है कि भाजपा के धनबल और बाहुबल का मुकाबला करने के लिए एक जूट होकर  बड़ोदा की जनता इस धरती पर एक नया इतिहास रचने का प्रयास करेगी और इस उपचुनाव में हार के पश्चात खट्टर सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। हरियाणा में जिस प्रकार से निराशा का माहौल है उससे स्पष्ट है कि भाजपा-जजपा गठबंधन  का धराशाई होना सुनिश्चित है। उन्होंने बड़ोदा के मतदाताओं  से अपील की है कि वे भाजपा के झांसे में न  आएं और अपने अपमान का बदला लेने के लिए  भाजपा के उम्मीदवार की जमानत जब्त करवाने का काम करें।         

मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ने घर मे घुसकर महिला से की मारपीट

राहुल भारद्वाज सहारनपुर:

सहारनपुर थाना जनकपुरी का पूरा मामला एक मानसिक रूप से बीमार युवक मोहित को लेकर था जिसने एक महिला के साथ घर में घुसकर मार पिटाई की थी महिला की शिकायत के बाद थाना जनकपुरी प्रभारी ने पुलिस टीम को भेज मानसिक रूप से रोगी युवक मोहित को थाने लेकर आ गई थी लेकिन मानसिक रूप से बीमार युवक की हालत को बिगड़ता देख पुलिस ने उसे सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया था,इसी को लेकर महिला ने थाने पहुंचकर हंगामा किया और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को भी बुला लिया, जबकि युवक की मां से जब मीडिया ने बात की तो उसका भी यही कहना था कि मेरा बेटा मोहित मानसिक रूप से बीमार है और उसका इलाज चल रहा है जबकि पीड़ित महिला का यह कहना था अगर यह मानसिक रूप से बीमार है तो इसे अस्पताल भेजना चाहिए जिससे यह दूसरी घटना ना कर सके जिसके बाद पुलिस ने दोबारा से उस मानसिक रूप से बीमार युवक को हिरासत में ले लिया है,और उसके बाद महिला और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं सीओ 2 के समझाने पर अपना धरना समाप्त किया।