जल जीवन मिशन के सुभाष चंद बिशनोई ने 27 दिनों में 730 किलोमीटर साइकल यात्रा की

पंचकुला:

पूर्व उप मुख्यमंत्री चन्द्रमोहन ने दि सुभाष चन्द्र बिश्नोई  को शुभकामनाएँ दी ओर जो उद्देश्य लेकर वो साइकल यात्रा कर रहें  है भूमिबचाओ,जल बचाओ,पर्यावरण बचाओ इस नेक काम की सराहना की ओर कहा हर तरह की मदद करने  को तयार है 

सुभाष चन्द्र बिश्नोई ने अभी तक 90 गाँव पूरे कर लिये हैं सिरसा व फ़तेहबाद की 730 km की यात्रा 27 दिन मै पुरी कर ली है 

सुभाष चन्द्र बिश्नोई ग्रामीण लोगों को,भूमि बचाओ,जल बचाओ,पर्यावरण बचाओ,के बारे लोगों को समझाते हैं ओर प्रावधान के नयेतरीक़े उन्हें बताते हैं साथ ही वह ग्रामीणों की समस्याओं का निपटारा भी कर रहे है नीति आयोग 2018 की रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुएकहा की न संभले तो पानी की एक एक बूँद के लिये मोहताज होना पड़ेगा एक दिन मै तिन गाँव पहुँचते हैं एक दो घंटे बिताकर उनकोपृथ्वी बचाने की सीख देते हैं आज से 550 वर्ष पूर्व बिश्नोई धर्म प्रवर्तक

गुरू जम्भेश्वर बिश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक थे। ये जाम्भोजी के नाम से भी जाने जाते है। इन्होंने 1508 में बिश्नोई पंथ की स्थापनाकी।इन्होंने भी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का यहीं संदेश दिया था , 36 वर्ष की सरकारी सर्विस के बाद 59 वर्षीय सुभाष बिश्नोईरिटायर्ड मंडी सुपरवाइज़र साइकल पर पृथ्वी (ग्लोब)उठाए घुम रहे हैं मक़सद है की पृथ्वी की सुरक्षा उनका कहना है की पृथ्वी तभीसुरक्षित होगी जब पानी पेड़ पोधे बचेंगे उनकी साइकल यात्रा 4 माह मैं क़रीब 90 गाँव पहुँची है

पीएम कोरोना पर मीटिंग ले रहे थे और अरविंद राजनीति खेल रहे थे, मांगनी पड़ी माफी

पीएम मोदी शुक्रवार को कोरोना (Coronavirus) से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक कर रहे थे. बैठक में सीएम अरविंद केजरीवाल दिल्ली के हालात की जानकारी पीएम नरेंद्र मोदी के सामने पेश कर रहे थे. सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश के सभी ऑक्सीजन प्लांटों का अधिग्रहण कर सेना के कंट्रोल में दे देना चाहिए. जिससे प्रभावित राज्यों को तुरंत ऑक्सीजन पहुंच सके. इसी बीच पीएम मोदी को उनकी तकनीकी टीम ने जानकारी दी कि सीएम अरविंद केजरीवाल इस इनहाउस मीटिंग को सोशल मीडिया पर लाइव टेलीकास्ट कर रहे हैं. इस पर पीएम मोदी नाराज हो गए

  • पीएम के साथ प्राइवेट बातचीत को रिकॉर्ड कर टेलीविजन पर दिखाया गया
  • केंद्र खुद अपने पास वैक्सीन नहीं रखती है बल्कि राज्यों को ही देती है
  • भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने केजरीवाल को घेरा

नयी दिल्ली/ चंडीगढ़:

देश में कोरोना महामारी के कारण हर जगह हालत बिगड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र ने इसी स्थिति को देखते हुए शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) को सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग की। इस बैठक में महाराष्ट्र, उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल के मुख्यमंत्री शामिल हुए।

बैठक में ऑक्सीजन आपूर्ति, रमेडेसिविर जैसी आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता पर बात हुई। इससे पहले पीएम अधिकारियों से मीटिंग कर स्थिति के बाबत उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट माँग चुके थे। बैठक में शामिल सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने सुझाव दिए। 

मसलन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पीएम मोदी के साथ चल रही बैठक में कहा कि केंद्र और राज्य को मिलने वाली वैक्सीन की कीमत एक होनी चाहिए। वहीं एक मई से 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लगने वाली वैक्सीन के लिए कोरोना के टीके की उपलब्धता को लेकर केंद्र राज्य सरकारों को एक्शन प्लान जारी करे।

लेकिन, इस बैठक के बाद जो बात चर्चा में आई, वह अरविंद केजरीवाल और हर मामले में राजनीति करने वाली उनकी आदत थी। दरअसल, इस बैठक में केजरीवाल ने लाचारों की तरह पहले पीएम मोदी से ऑक्सीजन को लेकर अपील की और बाद में क्लोज डोर मीटिंग की बातचीत पब्लिक कर दी।

इस हरकत के बाद सरकारी सूत्रों ने केजरीवाल पर राजनीति करने का आरोप मढ़ा। टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल ने पीएम से हुई अपनी बातचीत का प्रसारण कर दिया, जो कि नहीं होना था। बाकी लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं थी कि अरविंद केजरीवाल क्या कर रहे हैं। किसी को सूचना दिए बगैर पीएम के साथ हुई बैठक में अपनी बात का सीएम ने प्रसारण किया।

इसके अलावा, सीएम केजरीवाल की स्पीच भी पूर्णत: राजनीति से प्रेरित थी। ऐसा पहली बार हुआ है कि पीएम के साथ हुई ऐसी निजी बातचीच को प्रसारित कर दिया गया हो। टेलीविजन वाले भी नहीं समझ पाए कि आखिर ये फुटेज आ कहाँ से रही है। लेकिन केजरीवाल को मालूम था कि उनकी स्पीच सार्वजनिक हो रही है। 

केजरीवाल द्वारा की गई इस हरकत के बाद इसे विश्वास के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने अरविंद केजरीवाल को एक आपदा कहा है। मालवीय के अनुसार, केजरीवाल बिना तैयारी के पीएम के साथ बैठक में बैठते हैं। उन्हें चीजों की कोई जानकारी नहीं है कि राजधानी में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए पहले ही चीजें की जा रही हैं और टीकों की कीमत से भी वह बेखबर हैं। मालवीय का पूछना है कि आखिर ये शख्स दिल्ली को कैसे बचाएगा।

सीएम केजरीवाल ने इस बैठक में दिल्ली में हो रही ऑक्सीजन की कमी को उजागर कर राजनीति करनी चाही और इस तरह से ये दर्शाया कि उन्हें मदद नहीं मिल रही। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, केजरीवाल ने एक जगह कहा, “दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी कमी है। क्या अगर यहाँ कोई ऑक्सीजन प्रोड्यूसिंग प्लांट नहीं होगा तो दिल्ली को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। कृपया मुझे बताएँ कि जब दिल्ली आने वाला ऑक्सीजन सिलिंडर दूसरे राज्य में रोका जाए तो केंद्र सरकार से इस संबंध में किससे बात करें।”

बता दें कि केजरीवाल की इस नासमझी पर सरकारी सूत्रों ने उन पर निशाना साधा। सूत्रों ने कहा कि केजरीवाल ने जानबूझकर वैक्सीन की कीमत पर झूठ बोला। सीएम केजरीवाल ने एयरलिफ्ट की बात कही लेकिन वो नहीं जानते कि ये पहले से हो रहा है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि केजरीवाल एकदम निचले स्तर पर गिर गए हैं। उनका पूरा भाषण किसी समाधान के लिए नहीं बल्कि राजनीति खेलने और जिम्मेदारी से बचने के लिए था।

भाजपा नेता संबित पात्रा ने केजरीवाल की इस हरकत को घटिया राजनीति कहा। उन्होंने कहा कि क्लोज डोर मीटिंग को सार्वजनिक करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए। ताकि राजीनित में नंबर बढ़ाए जा सकें।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के हालात अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत बदतर हो रहे हैं। गुरुवार को यहाँ 26 हजार से ज्यादा केस आए हैं। कुल संक्रमितों की संख्या अब बढ़कर 956,348 हो गई और सबसे चिंताजनक बात ये है कि यहाँ संक्रमण दर रिकॉर्ड भी 36 प्रतिशत हो गया है, जिसके बाद कल राजधानी में 306 मृत्यु हुई।

हरियाणा में शुक्रवार शाम से कोरोना कर्फ्यू

हरियाणा में शुक्रवार शाम छह बजे से सभी बाजार बंद हो जाएंगे। गृहमंत्री अनिल विज ने यह आदेश जारी किया है। इसके अलावा सभी गैर-जरूरी समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। विज ने कहा है कि निर्धारित सीमा के भीतर किसी भी काम को यदि करना है तो आयोजनकर्ता को इसके लिए संबंधित एसडीएम से अनुमति लेनी होगी।

प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच हरियाणा सरकार धरने पर बैठे किसानों को कोरोना से बचाने की तैयारी में जुट गई है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरियाणा की सीमा पर बैठे किसानों के साथ एक बैठक करेंगे। इसमें उन्हें कोविड की जांच और वैक्सीनेशन के बारे में जानकारी दी जाएगी। किसान नेताओं की सहमति के बाद विभाग अपना काम शुरू करेगा।

अनिल विज ने कहा कि धरने पर बैठै किसानों को वैक्सीन लगवानी चाहिए। आंदोलन अपनी जगह है और सुरक्षा अपनी जगह है। सरकार की तरफ से डीसी व एसपी उनसे मिलने गए थे, लेकिन बात नहीं हो पाई। फिर से अधिकारी किसान नेताओं से मिलेंगे और बात करेंगे कि किसानों को वैक्सीन भी लग सके और उनका कोरोना टेस्ट भी हो सके।

स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि बहुत संख्या में लोग कोरोना के लक्षण आने के बावजूद जांच न करवाकर इधर-उधर से दवा लेकर खा रहे हैं। इस कारण संक्रमण ज्यादा फैल रहा है। सरकार ने आदेश जारी किए हैं कि जिसको भी कोरोना के लक्षण हैं, अगर वह किसी प्राइवेट डॉक्टर के पास जाता है तो डॉक्टर इलाज करने से पहले उसकी कोरोना जांच करवाएं। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही इलाज करें। यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो मरीज को कोरोना अस्पताल भेजें।  

इसी संदर्भ में आम जन आक्रोश भी झलका है। एक सोशल मीडिया यूसर मनोज कुमार ने ट्वीट कर कहा

“कमाल की सरकार है और कमाल के इनके मंत्री, जो काम का टाइम होता है उसी टाइम दुकान बन्द। पहले नोकरी से निकाल दिया अब छोटी सी दुकानदारी शुरू की थी उसकी भी ऐसी तैसी कर दो। मार दो आम आदमी को , कोरोना से नही मरेंगे तो तुम मार दोगे। हद हो गई तुम्हारी तो सीधे यही बोल दो ना के जहर खा लो”

गांधी खानदान द्वारा करोना महामारी की आड़ में लगातार मोदी जी पर दोषारोपण करना, उनके मानसिक दिवालियापन का जीता जागता उदाहरण है

पंचकूला, 22 अप्रैल:

 केंद्रीय जल शक्ति और सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, सेक्टर-1 पंचकूला में चल रहे वैक्सीनेशन कैंप में शिरकत की और बताया की गांधी खानदान द्वारा करोना महामारी की आड़ में लगातार मोदी जी पर दोषारोपण करना, उनके मानसिक दिवालियापन का जीता जागता उदाहरण है।

 कटारिया ने आज सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी पर करारा व तेज प्रहार करते हुए कहा की जिन जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है और जहां जहां कांग्रेस समर्थित सरकार है, उन राज्यों में कोविड-19 के मामले दिन रात बढ़ रहे हैं, अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार पर दोषारोपण कर रही है, जबकि महाराष्ट्र ने जैसी  असंवेदनशीलता दिखाई है उसका नतीजा है कि आज लगभग 40 से 50 प्रतिशत मामले एक ही राज्य में आ रहे हैं क्या यह हकीकत नहीं है कि पंजाब, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सरकार ने प्रेस रिलीज जारी कहा था कि हम कोरोना वैक्सीन नहीं लेंगे।

कटारिया ने कहा कि मोदी जी जितना देश के संघात्मक ढांचे को महत्व देते हुए कोऑपरेटिव फेडरेलिज्म की ओर ध्यान देते हैं, परिणामस्वरूप राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ 1 वर्ष में प्रधानमंत्री कई बैठक बुला चुके हैं, प्रधानमंत्री राज्यों को ऑक्सीजन सप्लाई,  वेंटिलेटर सप्लाई,  मास्क सप्लाई व दवाइयां सप्लाई करने को लेकर खुद समीक्षा कर रहे हैं, यह दर्शाता है की प्रधानमंत्री इस महामारी से कितनी कढ़ाई के साथ मुकाबला कर रहे हैं।

कटारिया ने कहा आईसीएमआर के मुताबिक जो लोग कोविड वैक्सीन की डोज ले रहे हैं, उनमें संक्रमण की दर बहुत कम है। इसलिए अधिक से अधिक लोग करोना कि वैक्सीन लगवाए और इस महामारी को दूर भगाने के लिए सरकार का साथ दें। अभी तक भारत में 13,01,19,310 लोगों को वैक्सिंग की डोज दी जा चुकी है।

वीटा बूथ आवंटन में हो रही धांधली, चेहतों को आवंटित किए जा रहे हैं वीटा बूथ : चंद्रमोहन

पंचकूला 22 अप्रैल:

हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा है कि वीटा बूथ आवंटन में बड़ी धांधली हो रही है। भाजपा के कार्यकर्ताओं को यह बूथ आवंटित किए जा रहे हैं, जबकि पॉलिसी के मुताबिक आवंटन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही। पिछले कुछ दिनों में देखने में आया है कि भाजपा के कई कार्यकर्ताओं को शहर की बेहतरीन जगहों पर वीटा बूथ आवंटित कर दिये गए। जबकि बूथ जरूरतमंद लोगों को दिए जाने  चाहिए थे। इन बूथों का उद्घाटन भी स्वयं हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने ही किया है, जिससे स्पष्ट है कि यह बूथ भाजपा के कार्यकर्ताओं के हैं और मिलीभगत के साथ बूथ आवंटित हो रहे हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने आरोप लगाया है कि कई परीवार ऐसे है उनमै ऐक ही परीवार मैं दो दो सदस्यों को विटा बुथ आवंटित किए गए हैं उन बुथो का किराया मात्र 1100/ लगभग है जब की कई बुथ मालिकों ने तो आगे ज़्यादा किराए पर (Sublet) उप किरायेदारों को दे दिये है जब के उसी मार्केट मैं अगर हम बुथ किराये पर लै तो उस का किराया 30000/ से कम पर नही  मिलेगा मुख्यमंत्री मनोहर लाल कह रहै है उनकी सरकार पारदर्शी तरीक़े से काम कर रही है जब की यहाँ तो कानुन की धजीआं उड़ाई जा रहीं है 
 चंद्रमोहन ने कहा कि माता मनसा देवी कॉम्प्लेक्स स्वासतीक विहार सेक्टर 5,सेक्टर 2,4,7, 8, 9, 10, 11-15 चौक, सेक्टर 19, सेकटर 20,सेक्टर 28 सहित इत्यादि इत्यादि  अन्य जगहों पर बने वीटा बूथों में अधिकतर भाजपा कार्यकर्ताओं के हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा कि वीटा बूथ आवंटित करने से पहले समाचार पत्रों में विज्ञापन देना होता है और उसके बाद अन्य फॉर्मेलिटी पूरी करनी होती हैं।

चंद्रमोहन ने आरोप लगाया कि कुछ ही वीटा बूथों की जानकारी ही विज्ञापन के माध्यम से दी जाती है और पता चला है कि भाजपा के चहेते हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में अधिकारियों से मिलीभगत करके शहर के नामी जगहों पर जगह अलाट करवा लेते हैं और उसके बाद वीटा विभाग में जाकर उस जगह पर अपना बूथ अलॉट करवा लेते हैं, जो कि एक बड़ा घोटाला है। जो वीटा बूथ आम आदमी को मिलने चाहिए, वह भाजपा द्वारा अपने चहेतों को बांटे जा रहे हैं । चन्द्रमोहन ने आरोप लगाया है के पचकुलां के मास्टर प्लान (हुड्डा विभाग) मैं ईतने बुथ खोलने का कोई प्रावधान नहीं है जब की विटा बुथ , हैंडी केप, व बेरोज़गारों, के देने चाहिए थे चंद्रमोहन ने हरीयाणा सरकार से मांग की है कि अब तक शहर में अलोट किए गए बूथों की निष्पक्ष ऐजंसी से जांच करवाई जाए , ताकि पता चले कि कितने वीटा बूथों का विज्ञापन दिया गया और कितने बिना विज्ञापन अलॉट कर दिए गए।

Sent from my iPhone

बैंक अधिकारी संघ द्वारा AIBOC और AISBOF, महासचिव रहे कॉमरेड शांता राजू को भावभीनी श्रद्धांजलि

चंडीगढ़:

कोविड -19 दिशानिर्देशों का पालन करते हुऐ भारतीए स्टेट बैंक अधिकारी संघ के सदस्यों ने , विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम अयोजित करके कॉमरेड शांता राजू , जो कि AIBOC और AISBOF, महासचिव रहे , को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। श्री शांता राजू दिनांक 12-04-2021 को कोविड -19 महामारी से ग्रसित होकर हमें अलविदा कहते हुए स्तब्ध कर गए। उनका अधिकारी वर्ग के विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू करवाने में विशेष योगदान रहा। बैंक अधिकारियों के ट्रेड यूनियन आंदोलन के एक दिग्गज नेता, कॉमरेड शांता राजू ने बैंक अधिकारियों के आंदोलन की सफलता में अपने सूक्ष्म, दृढ़ नेतृत्व और समर्पण का परिचय दिया । उनका ट्रेड यूनियन कैरियर शानदार रहा ।

वह अधिकारी डायरेक्टर के रूप में भारतीय स्टेट बैंक के केंद्रीय बोर्ड में दो कार्यकाल के लिए चुने गए । कामरेड शांता राजू ने अपने धैर्य और दृढ़ संकल्प को तब प्रदर्शित किया गया जब उन्होंने पेंशन मुद्दे पर अप्रैल, 2006 में एसबीआई में अनिश्चितकालीन हड़ताल की, जिसमें अंततः सफलता हासिल की। उन्होंने नैचर (नेशनल एकेडमी ऑफ ट्रेड यूनियन रिसर्च एंड एजुकेशन) के गठन में अग्रणी भूमिका निभाई, जो AIBOC के विभिन्न सहयोगी संगठनों के सदस्यों और कार्यकर्ताओं को कैडर डेवलपमेंट प्रोग्राम्स, लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम्स और अनुशासनात्मक मामलों को संभालने के कौशल प्रदान करने का प्रशिक्षण देता है। वह एसबीआई पेंशनर्स एसोसिएशन (कर्नाटक) के अध्यक्ष भी रहे । अधिकारी समुदाय उनके कार्यकाल के दौरान प्राप्त उपलब्धियों, मार्गदर्शन और समर्थन के लिए उनका हमेशा ऋणी रहेगा।

A delegation led by former CM met education minister regarding the exorbitant fee hike made by the private schools situated in Panchkula

Panchkula April 20:

 A Memorandum was submitted to the education minister, Haryana, Mr Kanwar pal Gujjar by a deligation led by former Deputy Chief Minister Mr Chander Mohan regarding the exorbitant fee hike made by the private school Institutions situated in Panchkula. Those who accompanied  in the deligation included, former president of Municipal Council Panchkula, Ravinder Rawal, congress leaders Shashi Sharma, Vijay Bansal, Priyanka Hooda and Sushama Khanna.

                      Mr Chander Mohan apprised that in the memorandum  the issue regarding steep hike made in the fee structure by the private schools of Panchkula had  been highlighted. He said that due to spread of  Covid-19 , the nationwide Lockdown was imposed in the country on  March 23, 2020 by the prime minister Mr Narender Modi and due to that all educational institutions had been closed down and students had to been forced to study by taking online classes during entire previous academic year and even some of the examinations for various classes were also conducted online.Some examinations were done away and students had been promoted  straight away into the next class in previous academic year.To cope with the situation, the parents had to incur a lot of money  for purchasing electronic equipments including amar phones and laptop to keep update online to their wards .instead of helping their students to come out of this pandemic phase the respective school management had chosen another way to loot the already financially burdened parents by making exorbitant increase not only in fees structure ,but in other heads also who were already facing  mental agony as some parents had lost their jobs. of their jobs due to Covid-19. Various private schools in Panchkula had increased the tuition fee and other charges manifold and even one school had increased tuition fees  upto140 per cent in this present academic year starting from 1April, 2021. The parents had been pressurized to deposit the arrears of the rebate given last year immediately and transfer certificates were not being issued to the students who seek admissions in other schools .They had to face a lot of difficulties.

                 Mr Chander Mohan told the education minister that  many senior Congress party leaders raise the issue of exhorbitant fees and other charges hike with the management of the schools, but all in  vain. Congress Party tried to approach managements of various schools but all  in vain.           He pointed out that  some concrete suggestions had been given in the memorandum to the education minister  which includes to overhaul the complete structure of our education system. The  parents should be included in the decision making process where the rights of students and parents could be affected. Most of the schools had been registered under a trust or society act and  don’t pay taxes. It was suggested that it should be made mandatory by the government to make account of these institutions public so that  transparency could be maintained at all levels. It had come to the notice that payment was not made to the teaching and non-teaching staff during Covid-19 and even defaulted in payment of their salaries to the retrenched staff but even though the schools were adamant to charge full fees for entire previous academic year . The parents were harased and mentally tortured to stop them  to fullfill the dreams of their childerns .

        He said it had been demanded that schools be directed that they should not prescribed the book published by the private publishers. The preference should be given to the books published by the NCERT and the SCERT for schools affiliated with the CBSE or the Haryana Board of School Education and a criteria should be fixed the school uniform also it had been advised in the memorandum that education department should intervene to redress the unethical of the   managements. So that students could get their basic right to get  education guaranteed under Art. 21-A of Constitution of India without undue burden on the parents especially in these hard times when service class and  businessmen were struggling for their existence.it had been advised to opt mecnisam  with regard to keep administrative control on these private schools which has been allotted lands on throwaway prices to build these institutions for providing quality education at affordable fee structures to the children especially to the poor  and the residents of this defacto capital city at par with city of Chandigarh where there had been evolve  a strict mechanism by the UT Administration to curb the malpractices by private schools situated therein.  

कृषि सुधार क़ानूनों के पश्चात अब सम्पत्ति क्षतिपूर्ति कानून के खिलाफ सडक़ों पर उतरी किसान सभा

सम्पत्ति क्षतिपूर्ति कानून के खिलाफ सडक़ों पर उतरी किसान सभा
सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन : बोले आंदोलन को कुचलने की साजिश रची तो परिणाम भुगतेगी सरकार
सतीश बंसल सिरसा 20 अप्रैल:

हरियाणा सरकार द्वारा पारित सम्पत्ति क्षतिपूर्ति कानून 2021 के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर जिले के किसानों द्वारा सडक़ों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की गई और जिला उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया।

संयुक्त किसान मोर्चा के घटक हरियाणा किसान सभा के नेता रोशन सुचान, बलराज बणी, प्रितपाल सिद्धू और हरदेव जोश ने राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने बीती 18 मार्च को विधानसभा में विधेयक पारित कर आंदोलनों के दौरान होने वाली सम्पत्ति के नुक्सान की वसूली आंदोलनकारियों से किए जाने का प्रावधान किया है, जिसमें सरकार द्वारा पुलिस और प्रशासन को लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने के लिए असीमित शक्तियां दी गई हैं, जिससे आंदोलन करने वालों, समर्थकों, योजना बनाने वालों व सलाहकारों को सम्पत्ति के नुक्सान का दोषी करार देकर उनसे वसूली किए जाने का निरंकुश प्रावधान है। इसलिए आज प्रदेश के सभी जिलों में किसान सडक़ों पर उतरकर इस कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

विधेयक के बारे में: 

  • नुकसान की वसूली: यह विधेयक किसी जनसमूह, चाहे वह कानूनी हो अथवा गैर-कानूनी, द्वारा लोक व्यवस्था में उत्पन्न विघ्न के दौरान किसी व्यक्ति विशेष द्वारा किये गए संपत्ति के नुकसान की वसूली का प्रावधान करता है, इसमें दंगे और हिंसक गतिविधियाँ शामिल हैं।
  • पीड़ितों को मुआवज़ा: यह पीड़ितों के लिये मुआवज़ा भी सुनिश्चित करता है।
  • विस्तृत दायरा: नुकसान की वसूली केवल उन लोगों से नहीं की जाएगी जो हिंसा में लिप्त थे, बल्कि उन लोगों से भी की जाएगी जो विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व या आयोजन करते हैं , योजना में शामिल होते हैं और जो विद्रोहियों को प्रोत्साहित करते हैं।
  • दावा अधिकरण स्थापित करना: विधेयक में देयता या क्षतिपूर्ति का निर्धारण,  आकलन और क्षतिपूर्ति का दावा करने हेतु दावा अधिकरण के गठन का प्रावधान किया गया है। 
  • संपत्ति की कुर्की/ज़ब्ती: किसी भी व्यक्ति जिसके खिलाफ हर्ज़ाना राशि का भुगतान करने हेतु दावा अधिकरण में अपील की गई है, उसकी संपत्ति या बैंक खाते को सील करने की शक्ति प्रदान की गई है।
  • अधिकरण के खिलाफ अपील: पीड़ित व्यक्ति दावा अधिकरण के निर्णयों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर कर सकता है।
  • हर्ज़ाने को लेकर दावे से संबंधित कोई भी प्रश्न सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं होगा। 

सरकार का रुख:

  • सरकार की ज़िम्मेदारी: राज्य की संपत्ति की सुरक्षा करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है, चाहे वह संपत्ति निजी हो या सरकारी।
  • अधिकारों और उत्तरदायित्व  के मध्य संतुलन: लोकतंत्र में सभी को शांतिपूर्ण तरीके से बोलने और विरोध प्रकट करने का अधिकार है, लेकिन संपत्ति को नुकसान पहुंँचाने का अधिकार  किसी को भी नहीं है।
  • निवारण: हिंसक गतिविधियों को अंज़ाम देने और इसका आयोजन करने वालो के या इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने हेतु सरकार के पास एक कानूनी ढांँचा होना चाहिये।

किसान नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार शांतिपूर्वक चल रहे किसान आंदोलन को कुचलने की नाकाम कोशिश करने के लिए यह कानून लेकर आई है जबकि सरकार सडक़ों खुद खोद रही है। ऐसे दमनकारी कानून अंग्रेजी राज की याद दिलाते हैं, जिनके विरोध में शहीद भगत सिंह सरीखे नौजवानों को असैम्बली में बम फैंकने के लिए मजबूर होना पड़ा था। किसान आंदोलन शांतिपूर्वक चल रहा है और पिछले पांच महीनों से सम्पत्ति के नुक्सान की कोई घटना नहीं हुई है, परन्तु सरकार किसानों-मजदूरों के शांतिपूर्वक आंदोलनों पर पुलिस बल और हजारों मुकदमे दर्ज करके तानाशाहीका सबूत दे रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

किसान सभा ने राष्ट्रपति से मांग कर सम्पत्ति क्षतिपूर्ति अधिनियम कानून 2021 को रद्द करने, किसानों पर बने मुकदमे रद्द करने ओर आंदोलन के दमन पर रोक लगाने की मांग कर प्रदेश सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोरोना के नाम पर आंदोलन कुचलने की कोशिश की तो सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

इस अवसर पर किसान सभा के नेता हरजिन्द्र भंगु, एआईएसएफ नेता अरमनान, सुमेर गिल, नवदीप विर्क, रूढ़ सिंह, सतनाम सिंह, दविन्द्र सिंह, गुरमेज सिंह, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह, गुरनाम सिंह करीवाला के अलावा अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से जगरूप सिंह चौबुर्जा, बलवीर कौर गांधी, का० सुरजीत सिंह, गुरतेज बराड़ एडवोकेट, बलवीर फौजी, हरकिशन कम्बोज, राजकुमार, पालासिंह चीमा आदि उपस्थित थे।

लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984

  • इस अधिनियम के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक संपत्ति को दुर्भावनापूर्ण कृत्य द्वारा नुकसान पहुँचाता है तो उसे पाँच साल तक की जेल अथवा जुर्माना या दोनों सज़ा से दंडित किया जा सकता है। अधिनियम के प्रावधान को भारतीय दंड संहिता में भी शामिल किया जा सकता है।
  • इस अधिनियम के अनुसार, लोक संपत्तियों में निम्नलिखित को शामिल किया गया है-
    • कोई ऐसा भवन या संपत्ति जिसका प्रयोग जल, प्रकाश, शक्ति या उर्जा के उत्पादन और वितरण में किया जाता है।
    • तेल प्रतिष्ठान।
    • खान या कारखाना।
    • सीवेज स्थल।
  • लोक परिवहन या दूर-संचार का कोई साधन या इस संबंध में उपयोग किया जाने वाला कोई भवन, प्रतिष्ठान और संपत्ति।

थॉमस समिति:

  • के.टी. थॉमस समिति ने सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान से जुड़े मामलों में आरोप सिद्ध करने की ज़िम्मेदारी की स्थिति को बदलने की सिफारिश की। न्यायालय को यह अनुमान लगाने का अधिकार देने के लिये कानून में संशोधन किया जाना चाहिये कि अभियुक्त सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने का दोषी है।
    • दायित्व की स्थिति में बदलाव से संबंधित यह सिद्धांत,  यौन अपराधों तथा इस तरह के अन्य अपराधों पर लागू होता है। 
    • सामान्यतः कानून यह मानता है कि अभियुक्त तब तक निर्दोष है जब तक कि अभियोजन पक्ष इसे साबित नहीं करता।
  • न्यायालय द्वारा इस सुझाव को स्वीकार कर लिया गया। 

नरीमन समिति :

  • इस समिति की सिफारशें सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की क्षतिपूर्ति से संबंधित थीं।
  • सिफारिशों को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का आरोप तय करते हुए संपत्ति में आई विकृति में सुधार करने के लिये क्षतिपूर्ति शुल्क लिया जाएगा।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालयों को भी ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेने के दिशा-निर्देश जारी किये तथा सार्वजनिक संपत्ति के विनाश के कारणों को जानने तथा क्षतिपूर्ति की जाँच के लिये एक तंत्र की स्थापना करने को कहा।

कोरोना के बजाय श्रेय लेने को लड़ रहे केजरीवाल और संसाधनों की कमी की दुहाई दे रहे कैप्टन

एक राष्ट्रिय दैनिक की मानें तो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने पिछले साल से लगभाग 30 करोड़ की लागत के 290 वेंटिलेटर एक गोदाम में पड़े हैं। लेकिन कागजों और मीडिया के लिए वह अपने राज्य और नागरिकों के प्रति इतने चिंतित हैं कि उन्होने आज ही केंद्र से वैक्सीन और कम पड़ती ओक्सेजेन के लिए पंजाब में नए यूनिट लगाने कि गुहार लगाई है। वहीं दूसरी ओर धरना प्रेमी दिल्ली के मुख्यमंत्री और दूसरे नेता इस घड़ी में भी विशुद्ध राजनीति कर रहे हैं। दिल्ली कि जनता को भ्रमित करते रहने का कोई मौका नहीं चूकते। मुख्यमंत्री केजरीवाल तो अपनी हर नाकामयाबी का ठीकरा केंद्र के सर फोड़ते पाये जाते हैं तो उप मुख्यमंत्री केंद्र के प्रयासों और पहल पर अपनी मोहर लगाने से नहीं चूकते।

नयी दिल्ली/ चंडीगढ़ :

देश में कोरोना संक्रमण ने अब तक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। पिछले 24 घंटों में 2.74 लाख से ज्यादा नए मरीज मिले हैं और 1619 से अधिक लोगों की जिंदगी इस संक्रमण ने छीन ली है। एक तरफ राज्यों में बेड, वेंटिलेटर, रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की किल्लत बताई जा रही है, वहीं कुछ राज्यों में संसाधन बर्बाद हो रहे।  

कॉन्ग्रेस शासित पंजाब में 250 वेंटिलेटर एक साल से गोदाम में पड़े हैं। एक राष्ट्रिय दैनिक की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 20 मार्च को केंद्र सरकार ने राज्य में लगभग 30 करोड़ रुपए की लागत से 290 वेंटिलेटर भेजे थे। लेकिन राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने एक साल बाद भी इसका इस्तेमाल नहीं किया है। उसे गोदाम में बंद कर धूल जमने के लिए रखा गया है। इन वेंटिलेटर को मेडिकल कॉलेजों या अन्य कोविड सेंटर में भेजा जाना था, जहाँ पर L-3 केयर प्रदान किया जाता है। L-3 केयर उन मरीजों को दी जाती है जिन्हें दो या दो से अधिक ऑर्गन सपोर्ट या मैकेनिकल वेंटिलेशन की आवश्यकता होती है। बताया गया कि मेडिकल कॉलेजों या कोविड सेंटरों से माँग इसलिए नहीं की गई, क्योंकि वेंटिलेटर पर मरीजों की देखभाल करने वाले कुशल मैन पावर की कमी थी।  

एक दैनिक की रिपोर्ट में कहा गया कि यह पहला मौका नहीं था जब राज्य के अस्पताल वेंटिलेटर का उपयोग करने में विफल रहे। पाँच साल पहले, 10 वेंटिलेटर सिविल अस्पताल, लुधियाना भेजे गए थे, लेकिन पाँच साल तक उनका इस्तेमाल नहीं किया गया। बाद में विवाद होने और महामारी के बढ़ने पर एक स्थानीय निजी अस्पताल को वेंटिलेटर सौंपा गया। 

वहीं दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली कैंट में DRDO द्वारा छतरपुर में सरदार पटेल कोविड केयर सेंटर और कोविड केंद्र के लिए क्रेडिट लेने की कोशिश की। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ‘व्यवस्थाओं की समीक्षा’ के बहाने केंद्र में फोटो सेशन के लिए गए।

उप मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दावा किया कि मंगलवार शाम तक यहाँ 500 बिस्तरों पर इलाज शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस केयर सेंटर को 5000 बिस्तरों वाले अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। यहाँ ऑक्सीजन और आइसोलेशन की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

सत्येंद्र जैन ने भी इसी तरह का ट्वीट करते हुए लिखा, “माननीय उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ DRDO के मेक शिफ्ट अस्पताल का दौरा किया। यह सोमवार से चालू हो जाएगा। 250 आईसीयू बेड कल से चालू हो जाएँगे और अगले कुछ दिनों में 250 और जोड़े जाएँगे।”

उल्लेखनीय है कि AAP का आधिकारिक हैंडल, सिसोदिया या जैन, किसी ने भी ये जिक्र नहीं किया कि ITBP सेंटर और DRDO सेंटर को केंद्र सरकार के समर्थन से बनाया गया है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी उनके ट्वीट को रीट्वीट किया, लेकिन उन्होंने भी समर्थन के लिए केंद्र का शुक्रिया अदा नहीं किया।

यह पहली बार नहीं है जब आआपा ने दिल्ली सरकार द्वारा कोविड मामलों में वृद्धि को नियंत्रित करने में विफल रहने के बाद केंद्र सरकार द्वारा की गई पहल का श्रेय लिया। पिछले साल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद, सरदार पटेल कोविड सेंटर की स्थापना भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के सहयोग से की थी। सेटअप हो जाने के बाद, आआपा ने केंद्र के लिए श्रेय लेने की कोशिश की। आआपा के संजय सिंह ने दावा किया कि बीजेपी ने सरदार पटेल की मूर्ति का निर्माण किया, जबकि दिल्ली सरकार ने कोविड सेंटर का निर्माण किया।

ऑक्सीजन की कमी पर केजरीवाल का केंद्र पर आरोप

दिल्ली के सीएम केजरीवाल बार-बार कह रहे हैं कि दिल्ली में अब ऑक्सीजन, बेड में कमी आ रही है। इसी कड़ी में केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि दिल्ली को मिलने वाला ऑक्सीजन का कोटा अन्य राज्यों को भेजा जा रहा है। 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, “दिल्ली में ऑक्सीजन की बहुत कमी हो गई है। बढ़ते केसों को देखते हुए दिल्ली में सामान्य से अधिक सप्लाई की जरूरत है। लेकिन सप्लाई बढ़ाने की बजाय हमारी आपूर्ति घटा दी गई है। दिल्ली का कोटा दूसरे राज्यों को डायवर्ट कर दिया गया है। दिल्ली में ऑक्सीजन इमर्जेंसी बन गया है।”

अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को चिट्ठी भी लिखी है। जिसमें उन्होंने कहा है, “केंद्र सरकार ने दिल्ली के हिस्से की मेडिकल ऑक्सीजन को जो दूसरे राज्यों को डायवर्ट किया है उसको वापिस रीस्टोर किया जाए। इसके अलावा रोजाना 700 मेट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाई जाए।”

उन्होंने आगे मंत्री से अनुरोध किया, “एनसीटी में COVID-19 स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए दिल्ली में  M/s INOX द्वारा ऑक्सीजन की 140MT की आपूर्ति की 140MT की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधितों को उचित निर्देश दें।”

एक साप्ताहिक की रिपोर्ट के मुताबिक वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आरोपों को खारिज किया और इसे ‘खुल्लम खुला झूठ’ करार दिया। आधिकारिक आँंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के अस्पतालों को 16 अप्रैल को 254 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन रिसीव की गई। 17 अप्रैल को यह मात्रा 2.4 गुना बढ़ गई और अस्पतालों को 612 मीट्रिक टन प्राप्त हुए। हालाँकि, दिल्ली से दैनिक माँग 197 मीट्रिक टन थी। दिल्ली के लिए गोयल गैस, लिंडे, आईनॉक्स और एयर लिक्विड पर कुल स्टॉक 311 मीट्रिक टन है। रिपोर्ट में कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी में मेडिकल ऑक्सीजन का कुल स्टॉक 700 मीट्रिक टन है

केजरीवाल की केंद्र से अपील

दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामले और ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार (अप्रैल 18, 2021) की सुबह पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात की और दोपहर में पीएम मोदी को भी पत्र लिखकर दिल्ली में केंद्र के अस्पतालों में 10 में से 7 हजार हजार बेड्स कोविड के लिए रिजर्व करने और ऑक्सीजन की सप्लाई करने की माँग की थी।

High Level Committee Meeting held online by PU

Chandigarh April 19, 2021

The meeting of  high level committee of experts headed by Prof. R.P.Tiwari, Vice Chancellor, Central University of Punjab, Bathinda was held today at Panjab University in online mode with all the members present .

The 11-member committee discussed in detail the sub committee recommendations which were mainly related to composition of Senate, Syndicate, Faculties and appointment of Deans. The nominees of Govt of Punjab sought one week time to seek the views of the Govt of Punjab., which will be incorporated in the final report.