टीएमसी के एक विधायक और 12 पार्षदों ने थामा कमल

ममता की मुश्किलें थमने का नाम ही नहीं ले रहीं अभी डाक्टरों की हड़ताल थमी भी नहीं थी कि टीएमसी के एक विधायक और 12 पार्षद भी अपने समर्थकों सहित भाजपा में शामिल हो गए।

कोलकाता: लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेजी से अपने पैर फैलाने की कोशिश कर रही है. लोकसभा चुनावों में उसने ममता बनर्जी की तमाम कोशिशों के बाद भी शानदार प्रदर्शन किया. उसके बाद राज्य में बीजेपी और टीएमसी लगातार आमने सामने हैं. टीएमसी नेताओं का बीजेपी में आना लगातार जारी है. सोमवार को बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को तब और तगड़ा झटका लगा जब उनके एक विधायक ने बीजेपी का दामन थाम लिया. इसके साथ ही 12 पार्षद भी बीजेपी से जुड़ गए.

नौपारा से तृणमूल के विधायक सुनील सिंह सोमवार को बीजेपी में शामिल हो गए. उनके साथ 12 काउंसिलिर भी बीजेपी के पाले में आ गए हैं. इस कार्यक्रम में बंगाल बीजेपी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय, मुकुल रॉय, बीजेपी सांसद दिलीप घोष मौजूद थे. इससे पहले ममता बनर्जी को तब झटका लगा था जब दार्जिलिंग नगर निगम में करीब डेढ़ दर्जन पार्षद पाला बदलकर बीजेपी में शामिल हो गए थे. इसके बाद निगम मे बीजेपी की सरकार बन गई थी.

इससे पहले निकाय चुनाव में भाटपारा में नगर पालिका में बीजेपी ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी. लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की थी. 2014 के चुनावों में बीजेपी के पास सिर्फ 2 सांसद थे. पश्चिम बंगाल में दो साल बाद यानी 2021 में विधानसभा चुनाव हैं. ऐसे में तृणमूल कांग्रेस के पास अपनी सत्ता बचाने की चुनौती है.

ममता बनर्जी ने 2011 में वामदलों के 30 साल के शासन को खत्म कर पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कब्जा जमाया था. इसके बाद 2016 में वह राज्य की सत्ता पर फिर से जीतकर आई थीं. लेकिन बीजेपी के उभार के साथ ही उनकी जमीन सिकुड़ने लगी. ममता बनर्जी के कई बड़े नेता बीजेपी के साथ जुड़ चुके हैं. ऐसे में आने वाले चुनावों में बंगाल में एक दिलचस्प राजनीतिक लड़ाई देखने को मिल सकती है.

हौसले और मेहनत से कुछ भी हासिल इया जा सकता है: दुष्यंत

पंचकूला
जन नायक पार्टी के कार्यकर्ता बैठक को सम्बोधित करते हुए दुष्यंत चौटाला ने कहा कि हौसले और मेहनत से पार्टी को ऊँचाई पर पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भाजपा 303 सीटें लेकर घमण्ड कर रही है जबकि राजीव गांधी को 432 आई थीं लेकिन उस समय चौधरी देवीलाल ने हिम्मत नहीं हारी और प्रदेश में कांग्रेस 5 सीटें ही ले पाई थी । आज कांग्रेस के पास 47 सीटें है आप मेहनत से 4 पर भी ला सकते हैं।

अवैध खनन को काल्का विधायक का संरक्षण: भाग सिंह

पंचकूला ( मैनपाल )

बहुत बड़े स्तर पर माइनिंग की जा रही है। पंचकूला में मुख्यमंत्री द्वारा माइनिंग माफियाओं को स्वयं पकड़ने के बाद भी जिला पंचकुला में माइनिंग की तमाम चल रही गतिविधियां को आम देखा जा सकता है। खास तौर पर कालका विधानसभा क्षेत्र में कालका विधायक द्वारा अवैध माइनिंग को संरक्षण दे रखा है! आरोप लगाते हुए जननायक जनता पार्टी जिला अध्यक्ष भाग सिंह दमदमा ने ने पत्रकारो को सम्बोधित करते हुए कहा।

जजपा शहरी जिला अध्यक्ष ओपी सिहाग ने कहा कि पिंजौर के एचएमटी प्लांट के मामले में भी सरकार सवालों के घेरे में घिरी हुई है।क्योंकि कांग्रेस के बाद एच एम टी को ताबूत बनाकर आखरी कील ठोकने का काम भाजपा ने किया है!क्षेत्र की लाइफ लाइन एच एम टी को भाजपा दुआरा बंद किया गया है इसे चलना भाजपा विधायक दूर जारी किए गए संकल्प पत्र में था!ओर चुनाव का विधयक दुआरा जारी किए गए संकल्प पत्र पर विधयक क्षेत्र को बताए कि उसमें से कितने कार्य किये!इतना ही नहीं कालका क्षेत्र में किसी भी नई सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। चंडीगढ़ नजदीकी शहर होने के कारण यहां पर व्यवसाय़ के कई मार्ग खुल जाने चाहिए थे! लेकिन उधोगों की तरफ भी सरकार का कोई ध्यान नहीं गया है।

शिक्षा पर बात करते हुए उन्होंने कहा क्षेत्र शिक्षा की बुनियादी आवश्यकताओं के लिए आज भी तरस रहे है!क्षेत्र में एक प्राइमरी स्कूल के छोटे से कमरे में तीन तीन कक्षाएँ पढ़ाई जा रही हैं वो बच्चे केसे प्राइवेट स्कूलों के छात्रों का मुकाबला करेंगे ।मोरनी,कालका,और पिंजौर रायपुररानी क्षेत्र के  हिस्सों में पानी की कमी का निवारण भी सरकार द्वारा नहीं किया गया है।आज भी क्षेत्र में बहुत जगह लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं!विधायक की क्षेत्र को पिछड़ा घोषित करवाने के दावे की पोल भी खुल गयी है!क्योंकि अभी तक कोई निवेशक क्षेत्र में नही आया और कोई इन्डस्ट्री नही लगी अभी तक,विधायक दुआरा झूठ व बदले की राजनीति कालका में देखने को जरूर मिली! कालका क्षेत्र हरियाणा के लिए कई तरह से रोजगार के साधन भी बना सकता है! क्योंकी यहां  पंजाब व हिमाचल को जोड़ने वाली कड़ी है। इस प्रेस कांफ्रेस में इन सभी मुद्दों पर सवाल उठाना जजपा पार्टी का कर्तव्य निहित करता है! क्योंकी राज्य की सभी इकाइयों में विकास,परिवर्तन, सुरक्षा व शिक्षा की व्यवस्था करना हमारा कार्य है।ओर जजपा सत्ता में आने पर शिक्षा स्वास्थ रोजगार सुरक्षा व विकास आदि मुद्दों पर प्रथमिकता से कार्य करेगी!

मौजूदा सरकार को सरासर असफल बताते हुए कहा कि आम नागरिक की सुरक्षा को लेकर कानून व्यवस्था के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। प्रदेश में आए-दिन मर्डर,डकैती, बलात्कार, जैसे जघन्य अपराध हो रहे हैं। यहां तक की छोटी-छोटी बच्चियां भी सुरक्षित नहीं हैं। हरियाणा प्रदेश के मुख्य़ समाचार पत्रों की सुबह पहली झलक जघन्य अपराधों और बुरी वारदातों की देखने को मिलती है। सरकार आम आदमी को सुरक्षा देने में पूर्ण रुप से विफल रही है। जिला पंचकूला में ही जो प्रदेश का सबसे शांत जिला माना जाता है…..उसी के 2014 से अबतक कालका, पिंजौर , मोरनी, रायपुर रानी, बरवाला व पंचकूला शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में दर्जनों हत्याएँ हो चुकी हैं।जिससे क्षेत्र का आम नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

25 मोटरसाइकिल सवार क्विक रेस्पॉन्स टीम रखेगी सड़क दुर्घटनाओं पर नज़र: मनोज यादव

पंचकूला
पुलिस महानिदेशक मनोज यादव ने आज 25 मोटरसाइकिल सवार क्विक रेस्पॉन्स टीम को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। पुलिस थाना सेक्टर14 थाने में आयोजित कार्यक्रम में महानिदेशक मनोज यादव ने ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों को निर्देश दिया कि यदि कोई पुलिस कर्मी भी नियमों की उलंघ्ना करता है तो उससे कोई भी रियायत न बरती जाए।

उन्होंने कहा कि दिनों दिन बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं।पंचकूला में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं पिंजोर और चंडीमंदिर के इलाकों में होती है इसीलिए इन क्षेत्रों में रिस्पांस टीम की ज़्यादा ज़रूरी है ।
पंचकूला में 66 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएँ राष्ट्रीय राजमार्ग पर होते हैं इसको ध्यान में रखते हुए पुलिस आयुक्तों को विशेष निर्देश दिए गए हैं जिससे कि हादसों को कम किया जा सकता है।

पंचकूला के पुलिस उपायुक्त कमलदीप गोयल ने बताया कि विभाग द्वारा क्विक रेस्पॉन्स टीम को प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण दिए जाने की भी योजना है।

पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में 115 मौतें हुईं और 126 घायल हुए।
इसके अतिरिक्त सेक्टर 14 में ट्रैफिक पार्क बनाये जाने का भी प्रस्ताव है जिसमें होंडा कम्पनी पूर्ण रूप से सहयोग देगी

7 दिनों के बाद डाक्टरों की हड़ताल समाप्त होगी

जिस समस्या को 5 मिनट में सुलझाया जा साता था उसे एक महिला के दंभ ने 7 दिनों तक लटकाया ओर न सिर्फ लटकाया बल्कि एक अस्पताल के मुद्दे को राष्ट्रव्यापी त्रासदी बना दिया। आज भी ममता ने वही कुछ किया जिसकी एक सुलझे हुए राजनेता और एक राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा आपेक्षित होती है। डाक्टरों ने हड़ताल खत्म करने की बात की है। उनका कहना है की जो भी आश्वासन ममता ने दिये हैं वह लिखित रूप में उन्हे मिल जाएँ तभी वह हड़ताल समाप्ती की औपचारिक घोषणा कर देंगे।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों की सोमवार को प्रस्तावित बैठक खत्म हो गई है. बैठक में ममता बनर्जी ने निर्णय लिया है कि पश्चिम बंगाल के सभी अस्पतालों में नोडल ऑफिसर तैनात किए जाएंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि वह हड़ताल खत्म होते ही घायल डॉक्टर से मिलने जाएंगी. वहीं, रेजिडेंट डॉक्टरों ने कहा कि वह ममता बनर्जी के वादों से संतुष्ट हैं.

इससे पहले मुख्यमंत्री के साथ बैठक में जूनियर डॉक्टरों के ज्वाइंट फोरम ने कहा था कि काम करते हुए हमें डर लगता है. फोरम ने कहा था कि एनआरएस के डॉक्टरों से मारपीट करने वालों को ऐसी सजा दी जाए, जो दूसरों के लिए उदाहरण हो. वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डॉक्टरों से कहा था कि इस मामले में हमने पर्याप्त कदम उठाए हैं. एनआरएस अस्पताल में हुई घटना में कथित तौर पर लिप्त पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. 

सीएम ममता बनर्जी ने आंदोलनरत जूनियर डॉक्टरों के साथ बैठक में कहा था कि राज्य सरकार ने किसी भी डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है. बता दें ममता बनर्जी ने प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों के साथ सोमवार को प्रस्तावित बैठक के सीधे प्रसारण (लाइव कवरेज) के लिए सहमति दे दी थी. हालांकि, केवल दो क्षेत्रीय न्यूज चैनलों को ही राज्य सचिवालय में बनर्जी और जूनियर डॉक्टरों के बीच हुई बैठक को कवर करने की अनुमति दी गई है. इस बैठक में पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य सचिव, राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और राज्य के अधिकारी, 31 जूनियर डॉक्टर सीएम ममता बनर्जी के साथ बातचीत कर रहे हैं. 

मुख्यमंत्री ने जूनियर डॉक्टरों के साथ बैठक में उनके प्रस्ताव के मुताबिक पश्चिम बंगाल के सभी अस्पतालों में शिकायत निपटारा इकाइयों के गठन का निर्देश दिया है. बैठक में जूनियर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उन्हें हो रही दिक्कतों से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अवगत कराया. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आंदोलन कर रहे जूनियर डॉक्टरों के बीच राज्य सचिवालय में बैठक की जा रही है.

ममता झुकी, कैमरे की मौजूदगी में बातचीत को तैयार

हड़ताली डॉक्टरों की जिद के आगे झुकीं CM ममता बनर्जी, कैमरे के सामने शुरू हुई बैठक. समूचे पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टर स्थानीय एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कार्यरत अपने दो सहकर्मियों पर हुए हमले के विरोध में हड़ताल पर हैं. आरोप है कि दोनों जूनियर डॉक्टरों पर एक मरीज के परिजन ने हमला किया था. उस मरीज की पिछले सप्ताह मौत हो गई थी.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों के साथ सोमवार को प्रस्तावित बैठक के सीधे प्रसारण (लाइव कवरेज) के लिए सहमति दे दी है. इससे हफ्ते भर से जारी गतिरोध सुलझने का रास्ता साफ हो गया है. पहले राज्य सरकार ने बैठक के सीधे प्रसारण की हड़ताली डॉक्टरों की मांग ठुकरा दी थी. यह बैठक आज ही होनी थी. राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया, ‘मुख्यमंत्री बैठक के सीधे प्रसारण की मांग पर सहमत हो गई हैं.’ यह बैठक हावड़ा में राज्य सचिवालय से सटे एक सभागार में शुरू हो गई है.

जूनियर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उन्हें हो रही दिक्कतों से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अवगत कराया. समूचे पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टर स्थानीय एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कार्यरत अपने दो सहकर्मियों पर हुए हमले के विरोध में हड़ताल पर हैं. आरोप है कि दोनों जूनियर डॉक्टरों पर एक मरीज के परिजन ने हमला किया था. उस मरीज की पिछले सप्ताह मौत हो गई थी. पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य सचिव, राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और राज्य के अधिकारी, 31 जूनियर डॉक्टर बनर्जी के साथ बैठक कर रहे हैं.

इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata banerjee) ने कोलकाता में प्रदर्शनरत जूनियर डॉक्टरों को बातचीत के लिये सोमवार दिन में औपचारिक रूप से आमंत्रित किया था. चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक प्रदीप मित्रा ने कहा, ‘नहीं, मीडिया को अंदर आने की इजाजत नहीं होगी. उनके पत्र में ऐसा कोई जिक्र नहीं किया गया है.’ 

प्रदर्शनरत डॉक्टरों को आज सुबह आमंत्रण भेजा गया है. हालांकि डॉक्टरों ने कहा कि बैठक के संबंध में उन्हें ऐसा कोई आमंत्रण नहीं मिला है.

डॉक्टरों के संयुक्त मोर्चे के प्रवक्ता ने पत्रकारों से कहा, ‘सचिवालय पर दिन में बैठक के संबंध में हमलोगों को ऐसा कोई आमंत्रण नहीं मिला है. यह भ्रम पैदा करने की चाल है और हमने स्पष्ट तौर पर कहा है कि बैठक मीडिया की मौजूदगी में ही होगी.’ उन्होंने कहा कि आम जनता को यह जानने का हक है कि बैठक में क्या चर्चा हुई क्योंकि वही सबसे अधिक नुकसान उठा रही है.

आज डाकटरों की देशव्यापी हड़ताल

ममता की भड़काई आग में सारे देश के जूनियर डाक्टर हड़ताल पर हैं। अभी तक कहीं कहीं सांकेतिक हड़ताल चल रही थी परंतु आज यानि 17 जून को आईएमए और दूसरे संगठनों ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। जो बात सिर्फ एक आश्वासन से दूर की जा सकती थी उसे पहले ममता ने सांप्रदायिक रंग दिया, फिर क्षेत्रीय मामला बनाया, धमकाया, इस्तीफे – निलंबन और तत्पश्चात अपनी सुरक्षा से भी जोड़ दिया। सब कुछ किया बस वही नहीं किया जो अति साधारण और अति आवश्यक था।

नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के साथ हुए व्यवहार के बाद हड़ताल का असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है. आज राजधानी दिल्ली में सफदरजंग, लेडी हार्डिंग, आरएमएल, जी टीबी, डॉ बाबासाहेब अंबेडकर, संजय गांधी मेमोरियल, दिन दयाल उपाध्याय अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे. डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने के कारण दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं और रूटीन ऑपरेशन प्रभावित होंगे. 

इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी

इन अस्पतालों में करीब 14,500 रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने से ओपीडी प्रभावित रहेंगी. वहीं ऑपरेशन थियेटर बंद रहने की वजह से पहले से निर्धारित ऑपरेशन नहीं हो पाएंगे. हालांकि ओपीडी में वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहेंगे. रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि इमरजेंसी में रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे. ताकि गंभीर मरीजों का इलाज प्रभावित न होने पाए. आइएमए की घोषणा के मद्देनजर दिल्ली के निजी अस्पतालों में भी ओपीडी सेवा प्रभावित होने की आशंका है. इससे हजारों मरीजों का इलाज प्रभावित होगा.

इन अस्पतालों में जाने से बचें

सफदरजंग, आरएमएल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, लोकनायक, जीबी पंत, जीटीबी, डीडीयू, संजय गांधी स्मारक अस्पताल, आंबेडकर अस्पताल, गुरु गो¨वद सिंह अस्पताल, हइबास, हिंदू राव, भगवान महावीर अस्पताल, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, रेलवे अस्पताल व महर्षि वाल्मीकि अस्पताल, एलबीएस. एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने अपना फैसला बदल लिया है और दोपहर 12 बजे से हड़ताल में शामिल होने के एलान किया है. इससे कार्डियक सेंटर व न्यूरो सेंटर में दोपहर दो बजे से होने वाली ओपीडी प्रभावित होगी.

दिल्ली के इन अस्पतालों के लिए जारी किया गया नंबर

यहां पहुंचने वाले मरीज़ हड़ताल से  अस्पताल में कौन-कौन सी स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुई है उसकी जानकारी हासिल कर सकते हैं..
1. सफदरजंग  :- 26165060, 26165032, 26168336
2. लेडी हार्डिंग :- 011 2336 3728
3. आरएमएल :-91-11-23404040
4. जी टीबी  :- 011 2258 6262
5. डॉ बाबासाहेब अंबेडकर:- 0120 245 0254
6. संजय गांधी मेमोरियल :-011 2792 2843 / 011 2791 5990
7.दिन दयाल उपाध्याय : 011 2549 4402

19 जून को सभी दलों के प्रमुखों के साथ प्रधान मंत्री मोदी कि बैठक

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर बात करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों के प्रमुखों को 19 जून को आमंत्रित किया है। सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने कहा है कि जिन पार्टियों के अध्‍यक्ष नहीं हैं, वे अपने प्रतिनिधि को भेजें ज्ञात हो कि वाम दलों में पार्टी अध्यक्ष का पद होता नहीं ओर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष ने लोक सभा चुनावों में किए गए आपने दावों के विपरीत मिली करारी हार के पश्चात इस्तीफा सौंपा हुआ है जो विचाराधीन है।

नई दिल्‍ली: ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर बात करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों के प्रमुखों को 19 जून को आमंत्रित किया है. सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने कहा है कि जिन पार्टियों के अध्‍यक्ष नहीं हैं, वे अपने प्रतिनिधि को भेजें. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्‍यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्‍तीफे के संदर्भ में उपजे भ्रम के मद्देनजर पीएम मोदी का यह बयान महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि कुछ लोग इस बयान को भाकपा और माकपा जैसे दलों के संदर्भ में भी जोड़कर देख रहे हैं. ऐसा इसलिए क्‍योंकि वामदलों में पार्टी के अध्‍यक्ष का पद नहीं होता है. हालांकि 17 जून से संसद का सत्र शुरू होने जा रहा है. लेकिन राहुल गांधी के कांग्रेस के अध्‍यक्ष पद पर बने रहने को लेकर असमंजस बरकरार है.   

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर बात
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई लोकसभा के पहले सत्र की पूर्वसंध्या पर रविवार को सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने के लिए 19 जून को सभी दलों के प्रमुखों की बैठक बुलाई है.

पीएम मोदी ने कहा कि लोकसभा में इस बार कई नये चेहरे हैं और निचले सदन का प्रथम सत्र नये उत्साह और सोच के साथ शुरू होना चाहिए. बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी दलों के नेताओं से इस बात का आत्मनिरीक्षण करने का अनुरोध किया कि संसद सदस्य जन प्रतिनिधि के तौर पर लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम हों. 16वीं लोकसभा के अंतिम दो वर्ष बेकार चले जाने के विषय पर भी विचार करने का अनुरोध किया गया.

सर्वदलीय बैठक की परंपरा
संसद के प्रत्येक सत्र की शुरुआत से पहले उसके सुगम कामकाज के लिहाज से सर्वदलीय बैठक की परंपरा रही है. पीएम मोदी ने उन सभी दलों के अध्यक्षों को 19 जून को होने वाली बैठक में आमंत्रित किया है जिनका लोकसभा या राज्यसभा में एक भी सदस्य है. जोशी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर, 2022 में भारत की आजादी के 75 वर्ष होने और इस साल महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष के विषय पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाई है.

उन्होंने कहा कि इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों के साथ 20 जून को रात्रिभोज पर बैठक होगी जिसमें सभी सरकार के साथ मुक्त संवाद कर सकेंगे. जोशी ने कहा कि ये दो अनूठे तरीके सभी सांसदों के बीच टीम भावना का निर्माण करने में कारगर होंगे. इस बैठक में विपक्ष ने मांग की कि किसानों के संकट, बेरोजगारी और सूखे जैसे विषयों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए.

बैठक के बाद मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘आज हमने सार्थक सर्वदलीय बैठक की जो चुनाव परिणामों के बाद और मानसून सत्र शुरू होने से पहली बैठक है. नेताओं के बहुमूल्य सुझावों के लिए उनका आभार. हम सभी संसद में सुगम कामकाज के लिए सहमत हुए ताकि हम सभी जनता की आकांक्षाओं को पूरा कर सकें.’’

कांग्रेस की प्रतिक्रिया
बैठक के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जो भी विधेयक जनता के हित में हैं, हम उनके खिलाफ नहीं हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या, बेरोजगारी और सूखे के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए. आजाद ने जम्मू-कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराने की भी मांग की जहां अभी राष्ट्रपति शासन लगा है. उन्होंने कहा कि जब राज्य में लोकसभा चुनाव हो सकते हैं तो विधानसभा चुनाव क्यों नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार राज्यपाल के प्रशासन के माध्यम से राज्य को चलाना चाहती है. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और के. सुरेश भी बैठक में उपस्थित थे.

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने मांग की कि महिला आरक्षण विधेयक तत्काल लाया जाना चाहिए. सत्रहवीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से 26 जुलाई तक चलेगा.

बजट सत्र से पहले मीडिया से रु-ब-रु होंगे मोदी

बीजेपी ने भी रविवार को संसदीय दल की बैठक की. इसके माध्यम से प्रधानमंत्री ने सभी भारतीयों को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार ऐसे विधेयकों को लाने में अग्रणी रहेगी जो ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की भावना को परिलक्षित करें। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रधान मंत्री मोदी ने 16वीं लोक सभा के दौरान इस मुद्दे पर अपने विचार रखे थे। उन्होने इस बाबत यह भी बताया था कि इस विचार को अमली जामा पहनाने के लिए गूढ विमर्श की आवश्यकता है। इस विचार को मूर्त रूप देने से पहले उन्हे विपक्ष को इस बात के लिए तैयार करना होगा। 3 तलाक का मुद्दा भी इस सत्र में छाया रहेगा। शायद तब तक काँग्रेस भी लोकसभा में अपना नेता चुन ले।

नई दिल्लीः संसद के बजट सत्र की आज से शुरुआत होने जा रही है. आज सभी नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी. प्रोटेम स्पीकर सांसदों को शपथ दिलवाएंगे. बता दें कि 19 जून को लोकसभा स्पीकर का चुनाव होना है. संसद के इस सत्र में केंद्रीय बजट पारित किया जाएगा और तीन तलाक जैसे अन्य महत्वपूर्ण विधेयक इसमें सरकार के एजेंडे में प्रमुख रहेंगे. इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई लोकसभा के पहले सत्र की पूर्वसंध्या पर सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने 19 जून को सभी दलों के प्रमुखों को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है.

यह भी पढ़ें: कॉंग्रेस लोकसभा में बिना किसी नेता के उतरेगी

लोकसभा में इस बार कई नये चेहरे होने की बात को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि निचले सदन का पहला सत्र नये उत्साह और सोच के साथ शुरू होना चाहिए.सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने सरकार के साथ बेरोजगारी, किसानों की समस्या, सूखा और प्रेस की आजादी जैसे विषय उठाये. विपक्षी दल ने जम्मू कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराने की मांग की.

बीजेपी ने भी रविवार को संसदीय दल की बैठक की. इसके माध्यम से प्रधानमंत्री ने सभी भारतीयों को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार ऐसे विधेयकों को लाने में अग्रणी रहेगी जो ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की भावना को परिलक्षित करें.

लोकसभा के प्रथम सत्र से एक दिन पहले राजग की बैठक भी यहां हुई. 26 जुलाई को समाप्त होने वाले सत्र में 30 बैठकें होंगी.पहले दो दिन लोकसभा के सभी सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी. कार्यवाहक लोकसभा अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार शपथ दिलाएंगे. लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव 19 जून को होगा और अगले दिन दोनों सदनों के संयुक्त सत्र की बैठक में राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा. बजट पांच जुलाई को पेश किया जाएगा.

कॉंग्रेस लोकसभा में बिना किसी नेता के उतरेगी

लोक सभा के पहले सत्र में कांग्रेस क्या बिना किसी तैयारी के आ जाएगी? नेता प्रतिपक्ष का पद यूं ही नहीं दिया जा सकता। 10% सीटों वाले दल के नेता ही को नेता प्रतिपक्ष का पद दिया जाता है। पिछली लोक सभा में मल्लिकार्जुन खडगे ने दूसरे विपक्षी दलों के साथ मिल कर इस पद को हासिल किया था। लेकिन इस बार कांग्रेस चुनावों के आरंभ ही से असमंजस की स्थिति में है, यह स्थिति यथावत बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक राहुल छुट्टियाँ मनाने विदेश जा चुके हैं। इस बार की लोकसभा के चुनावों मे मिली करारी हार के बाद से राहुल के इस्तीफे ने भी उहापोह की स्थिति पैदा कर दी है। राहुल का इस्तीफा काँग्रेस के लिए साँप छ्छुंदर जैसे हालात कर गया है। काँग्रेसी आगे बढ़-बढ़ कर राहुल में विश्वास जता रहे हैं और राहुल की रणनीति भी कुछ एसी ही है। वह जानते हैं कि उनके(गांधी सर नेम) बिना कॉंग्रेस अनाथों जैसी हो जाएगी और बिखराव की स्थिति में आ जाएगी। चापलूस नेता तभी से राहुल की चिरौरी करने लग पड़े थे जब राहुल ने इस्तीफा दिया था। बस अब कुछ दिन और, शायद इस सत्र की समाप्ती तक राहुल इस पूरे नाटक का पटाक्षेप कर दें।

नई दिल्ली: कांग्रेस ने अभी तक यह फैसला नहीं किया है कि लोकसभा में पार्टी का नेता किन्हें नियुक्त किया जाए. यह मुद्दा अब तक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास लंबित है. सूत्रों ने यह जानकारी दी. संसद का सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है और ऐसे में जहां तक सदन में विपक्षी दलों के बीच समन्वय स्थापित करने की बात है, विपक्ष उधेड़-बुन की स्थिति में नजर आ रहा है. दरअसल, अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा के लिए उसकी कोई बैठक नहीं हुई है. साथ ही, इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि विपक्षी दलों की इस तरह की बैठक कब होगी.

कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि ज्यादातर विपक्षी दलों को लोकसभा में अपने नेता को लेकर फैसला करना अभी बाकी है और इन प्रक्रियाओं के पूरी होने के बाद एक बैठक आयोजित की जाएगी. खुद कांग्रेस ने भी इस बारे में फैसला नहीं किया है कि वह लोकसभा में अपना नेता किन्हें नियुक्त करेगी. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘अब तक, कोई फैसला नहीं किया गया है और यह मुद्दा नेतृत्व के पास अब तक लंबित है.’’ 

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के साथ पश्चिम बंगाल के कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और केरल से पार्टी के नेता के. सुरेश रविवार को सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए. इससे ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि इन दोनों नेताओं में से एक को लोकसभा में कांग्रेस का नेता बनाया जा सकता है. चौधरी और सुरेश के साथ-साथ कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी और तिरूवनंतपुरम से लगातार तीन बार सांसद शशि थरूर भी लोकसभा में कांग्रेस के नेता पद की दौड़ में शामिल हैं. 

इससे पहले ये कयास लगाए जा रहे थे राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश के बाद वह (राहुल) लोकसभा में यह जिम्मेदारी संभाल सकते हैं लेकिन उनके अध्यक्ष पद पर बने रहने के बारे में कांग्रेस के जोर देने के बाद इस चर्चा पर विराम लग गया है. थरूर ने इससे पहले अपने बारे में कहा था कि वह लोकसभा में कांग्रेस के नेता पद की पेशकश किए जाने पर यह जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं. विपक्ष ने 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से कोई बैठक नहीं की है. आमचुनाव में भाजपा नीत राजग ने शानदार जीत हासिल की. नवगठित 17 वीं लोकसभा का प्रथम सत्र 17 जून से 26 जुलाई तक चलेगा.