प्रियंका गांधी की ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ और मुलायम सिंह के साढू भजपो में शामिल

डॉ. प्रियंका का आरोप है कि उन्हें घूस नहीं देने पर सरोजिनी नगर विधानसभा सीट से टिकट नहीं दिया गया। लड़की हूं लड़ सकती हूं कैंपेन सिर्फ एक धांधली थी। लोग कहेंगे कि टिकट नहीं मिला तो ऐसा कर रहे, लेकिन खुद जांच करें फिर बोलें। हमें तो 2024 की तैयारी करो ऐसा कहा जाने लगा। 15 जनवरी को कांग्रेस द्वारा 150 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की गई थी। जिसमें 50 महिलाएं शामिल थीं। प्रियंका ने पार्टी के एक पदाधिकारी पर टिकट के लिए पैसे मांगने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि पार्टी में धांधली चल रही है और किसी को बोलने की हिम्मत नहीं है। जातिवाद के कारण नरेश सैनी को भी पार्टी छोड़नी पड़ी।

  • बिधुना विधानसभा सीट से वर्ष 2012 में विधायक रह चुके हैं प्रमोद गुप्ता
  • मुलायम सिंह यादव के साढ़ू को पार्टी से जोड़कर भाजपा ने दिया बड़ा संकेत
  • प्रमोद गुप्ता ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद की योगी-मोदी की तारीफ
  • अपर्णा यादव के बाद प्रमोद गुप्ता, मुलायम परिवार को दो दिनों में लगा दूसरा झटका
डॉ. प्रियंका मौर्य

डेमोरेटिक फ्रंट, लखनऊ(ब्यूरो) :

उत्तरप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज है। इसी बीच यूपी चुनाव में कांग्रेस के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान की पोस्टर गर्ल प्रियंका मौर्य ने चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। गुरुवार को मौर्या ने बीजेपी नेताओं की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बता दें कि खबर आई थी कि चूंकि कांग्रेस ने उनको विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया है, इस वजह से प्रियंका बीजेपी ज्वाइन करने को लेकर विचार कर रही हैं।

समाजवादी पार्टी के संस्थापक और संरक्षक मुलायम सिंह यादव के साढ़ू प्रमोद गुप्ता भी भाजपाई हो गए। उन्होंने गुरुवार को साइकिल की सवारी छोड़कर कमल थाम लिया। यूपी के चुनावी मैदान में पहली लड़ाई में भाजपा सरकार के मंत्री-विधायकों को पार्टी में शामिल कराकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव बढ़त बनाते दिखे। ताबड़तोड़ इस्तीफों से भाजपा भी हिल गई, लेकिन पार्टी ने संभलकर जोरदार पलटवार किया है। पहले अपर्णा यादव और फिर प्रमोद गुप्ता के रूप में मुलायम परिवार के दो सदस्यों को पार्टी में लेकर समाजवादी पार्टी की मनोवैज्ञानिक बढ़त को काफी हद तक पाट दिया है। प्रमोद गुप्ता के अलावा कांग्रेस की पोस्टर गर्ल प्रियंका मौर्य ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। वे कांग्रेस की ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ की पोस्टर गर्ल रही हैं।

प्रमोद गुप्ता ने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में पहुंच कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और योगी सरकार की जमकर तारीफ की। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में औरैया के बिधुना विधानसभा सीट से उन्होंने जीत दर्ज की थी। पिछले दिनों समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिधुना के भाजपा विधायक विनय शाक्य को पार्टी में शामिल कराया था। इसके बाद प्रमोद गुप्ता को इशारा मिल चुका था कि इस बार पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिलेगा। वे भाजपा के संपर्क में आए। पिछले दिनों उन्होंने बुधवार को भाजपा में शामिल होने की घोषणा की थी, लेकिन इस दिन अपर्णा यादव के भाजपा में शामिल होने को लेकर यह मिलन समारोह एक दिन के लिए टल गया।

चुनावी मैदान में चर्चाओं का अलग महत्व होता है। पहली लड़ाई में जब अखिलेश यादव ने भाजपा में सेंधमारी की तो उनकी बढ़त काफी दिखने लगी थी। लगातार इस्तीफों से पार्टी परेशान भी थी और चुनावी मैदान में भी अखिलेश यादव चर्चाओं में बाजी मारते दिख रहे थे। लेकिन, जब मुलायम परिवार में ही टूट होने लगी तो मोमेंटम शिफ्ट हो गया है। अब चर्चाओं में परिवार को संभाल पाने में अखिलेश के कामयाब नहीं होने की बात है। स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी टीम के सपा में शामिल होने के बदली राजनीतिक तस्वीर धूमिल होने लगी है।

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव को भारतीय जनता पार्टी में शामिल कराने के बाद से भाजपा हमलावर है। भले ही अपर्णा यादव राजनीतिक मैदान में कच्ची खिलाड़ी हों। उन्होंने वर्ष 2017 का चुनाव भाजपा की सीनियर नेता रीता बहुगुणा जोशी के सामने गंवाया हो, लेकिन भाजपा के लिए वह प्रतीक हैं। यूपी की राजनीति में नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव की बड़ी साख है। उनके परिवार के किसी भी सदस्य के भाजपा में जाने से भाजपा उसे अपने तरीके से भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाली। इसीलिए, पार्टी ने इस सफलता के बाद सीधे सपा अध्यक्ष पर हमला बोल दिया है।

प्रमोद गुप्ता को बिधुना विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी अपना उम्मीदवार बना सकती है। विनय शाक्य के पार्टी छोड़ने के बाद उनकी बेटी रिया शाक्य ने भाजपा में रहने की बात कही थी। लेकिन, भाजपा ने प्रमोद गुप्ता को पार्टी में शामिल कराकर एक बड़ा संकेत दे दिया है। प्रमोद गुप्ता के पार्टी का उम्मीदवार बनने की स्थिति में इस सीट पर विनय शाक्य या उनके भाई को कड़ी टक्कर मिलने की भी संभावना जताई जा रही है। हालांकि, भाजपा की ओर से इस संबंध में विधिवत घोषणा होनी बाकी है।

अखिलेश यादव मैनपुरी के करहल सीट से 2022 के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेंगे

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। वह अपनी जन्मभूमि वाले इलाके से मैदान में उतरेंगे या कर्मभूमि से, इस पर संशय है। अखिलेश ने अभी तक विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। भाजपा जिस तरह से हर मुद्दे पर हमलावर है, उससे पार्टी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि वह सपा अध्यक्ष के चुनाव मैदान में न उतरने पर भी सवाल खड़े कर सकती है। ऐसे में अखिलेश के लिए आजमगढ़ की गोपालपुर, संभल की गुन्नौर, कन्नौज की छिबरामऊ और मैनपुरी की सदर व करहल सीट को मुफीद माना जा रहा है।

डेमोक्रेटिक फ्रंट लखनऊ(ब्यूरो) :

पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव किस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, इन सभी अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया है। आधिकारिक रूप से अब यह तय हो गया है कि अखिलेश यादव मैनपुरी के करहल सीट से 2022 के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेंगे। यह पहली बार होगा जब अखिलेश यादव विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे, मौजूदा आजमगढ़ सीट से सांसद अखिलेश यादव मुख्यमंत्री रहते हुए एमएलसी थे। इससे पहले उनके आजमगढ़ की गोपालपुर और फिर संभल के गुन्नौर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने को लेकर चर्चा थी।योगी आदित्यनाथ की राह पर निकले अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल सिंह यादव भी यूपी के चुनावी रण में कूदने जा रहे हैं। हालांकि शिवपाल यादव किस सीट से चुनाव लड़ेंगे इसको लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रगतिशील पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव जसवंतनगर सीट से मैदान में उतर सकते हैं। बता दें कि गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने की खबर के बाद सपा में भी अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने को लेकर हलचल शुरू हो गई थी। गुरुवार दोपहर तक समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव कहां से चुनाव लड़ेंगे इसको लेकर उहा-पोह की स्थिति बनी हुई थी। 

भाजपा नेतृत्व योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को कौशांबी की सिराथू विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने का ऐलान कर चुका है। इसके चलते अखिलेश यादव पर चुनाव लड़ने का दबाव बन रहा था। अखिलेश यादव मौजूदा समय में आजमगढ़ के सांसद हैं। अखिलेश ने अभी तक विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है। वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद वह विधानसभा परिषद सदस्य के बने थे। बुधवार को अखिलेश के गोपालपुर या मैनपुरी से चुनाव लड़ने की चर्चाएं शुरू हुईं थीं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में स्थिति साफ करते हुए कहा कि अभी तय नहीं है कि वह कहां से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन यह साफ है कि चुनाव लड़ने से पहले वह आजमगढ़ की जनता से जरूर पूछेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह चाहते हैं कि योगी आदित्यनाथ से पहले वह चुनाव लड़े। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं वहां पर छठे चरण में 3 मार्च को मतदान होना है। गोपालपुर में सातवें चरण में 7 मार्च को मतदान होगा और मैनपुरी में तीसरे चरण में 20 फरवरी को मतदान होना है। 

चन्नी आम आदमी नहीं, बेईमान आदमी है : अरविंद केजरीवाल

पंजाब में अवैध रेत खनन के खिलाफ जारी मनी लॉन्ड्रिंग के सिलसिले में कई जगहों पर छापेमारी के दौरान दस करोड़ रुपये की नकदी जब्त की है। इसमें मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के एक रिश्तेदार के ठिकाने पर भी छापेमारी की कार्रवाई की गई थी जिसमें 8 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं। इसे लेकर दिल्ली सीएम केजरीवाल पंजाब चुनाव से पहले पंजाब सीएम चन्नी पर घातक वार करने में लगे हुए है। सीएम केजरीवाल ने अपने ट्वीट के साथ छापेमारी की कार्रवाई के दौरान मिली नोटों की गड्डियों की तस्वीर भी शेयर की है।

संवाददाता डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंदगढ़ :

आम आदमी पार्टी (आआपा) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को आरोप लगाया कि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी आम आदमी नहीं बल्कि ‘बेईमान आदमी’ हैं। केजरीवाल ने चन्नी के रिश्तेदारों के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी पर कांग्रेस नेता को घेरने की कोशिश की है। केजरीवाल ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब ईडी ने ‘बालू माफिया’ के खिलाफ धन शोधन जांच के तहत चन्नी के रिश्तेदार और अन्य से जुड़े परिसरों पर छापा मारा है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल 20 जनवरी और 21 जनवरी को पंजाब में होंगे। लेकिन अपने इस पंजाब दौरे से पहले केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री को घेरा है। आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को आरोप लगाया कि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी आम आदमी नहीं बल्कि ‘बेईमान आदमी’ हैं।  केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, ‘चन्नी आम आदमी नहीं, बेईमान आदमी हैं।’

केजरीवाल ने चन्नी के रिश्तेदारों के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी पर कांग्रेस नेता को घेरने की कोशिश की है। केजरीवाल ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब ईडी ने ‘बालू माफिया’ के खिलाफ धन शोधन जांच के तहत चन्नी के रिश्तेदार और अन्य से जुड़े परिसरों पर छापा मारा है।

इधर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भतीजे और रिश्तेदार के यहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। चन्नी ने कहा कि यह बदला लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे पता चला है कि छापेमारी के दौरान ईडी ने कहा है कि पीएम मोदी का फिरोजपुर दौरा मत भूलना। चन्नी ने आगे कहा ईडी की छापेमारी बदले की भावना को दर्शाता है। मुझे फंसाने के लिए मेरे भतीजे से 24 घंटे पूछताछ की गई। एजेंसी को मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।

इधर प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि पंजाब में अवैध बालू खनन के खिलाफ जारी धनशोधन रोधी जांच के सिलसिले में की गई छापेमारी के दौरान 10 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई, जिसमें से आठ करोड़ रुपए चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह उर्फ हनी से जुड़े परिसरों से जब्त किए गए। सूत्रों ने बताया कि दो करोड़ रुपये की नकदी संदीप कुमार नाम के एक शख्स के ठिकाने से बरामद हुई है। अधिकारियों ने कहा कि नवांशहर पुलिस की 2018 की प्राथमिकी और राज्य में अवैध रेत खनन के कारोबार में कथित रूप से शामिल कुछ कंपनियों एवं व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस को मिली इसी प्रकार की अन्य शिकायतों का संज्ञान लेने के बाद यह कार्रवाई की गई।

कहा जा रहा है कि ईडी कुदरतदीप सिंह नाम के एक शख्स से हनी के संबंध खंगाल रही है, जो इस जांच का केंद्र है। उन्होंने कहा कि हनी और कुदरतदीप एक कंपनी में साझेदार हैं। विपक्षी दलों ने चन्नी पर हनी के वित्तीय लेन-देन में शामिल होने के आरोप लगाए हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री ने खारिज किया है।ईडी ने अवैध खनन मामले में बीते साल नवंबर में आपराधिक मामला दर्ज किया था। सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने पाया है कि पंजाब में गैर-अधिसूचित इलाकों में खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं और ‘खनन माफिया’ इससे अर्जित अवैध धन का शोधन कर निजी व बेनामी संपत्ति खड़ी कर रहे हैं।

महाराष्ट्र पंचायत चुनावों में भाजपा ने सबसे अधिक सीटें जीतीं

महाराष्ट्र के 106 नगरपंचायतों में से 93 नगरपंचायतों की 336 सीटों पर मंगलवार को मतदान हुआ था, जिसमें कुल 81 फीसदी वोट पड़े थे. जिला परिषद और उनसे जुड़ी पंचायत समितियों के चुनावों में 73 फीसदी मतदान हुआ था। जबकि ग्राम पंचायतों के उपचुनावों में 76 फीसदी वोट डाले गए थे। इसके साथ ही 115 ग्राम पंचायतों की 209 सीटों के लिए भी कल वोट डाले गए थे। जहां भाजपा ने 384 सीटें हासिल कीं वहीं शिव सेना 284 ही ले पायी।

डेमोक्रेटिक फ्रंट, मुंबई(ब्यूरो) :

महाराष्ट्र के पंचायत चुनावों में भाजपा ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं हैं जबकि राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी दूसरे स्‍थान पर रही। 106 नगर पंचायतों और 2 जिला परिषदों के लिए हुए चुनावों में भाजपा ने नगर पंचायतों में सबसे अधिक 416 सीटें जीतीं, इसके बाद एनसीपी ने 378 सीटें जीतीं। एनसीपी ने 25 और उसके बाद भाजपा ने 24 नगर पंचायतों में जीत हासिल की। इस चुनाव में शिवसेना और कांग्रेस तीसरे और चौथे स्‍थान पर पहुंच गईं। हालांकि सत्तारूढ़ तीनों दलों ने सामूहिक रूप से करीब 60 प्रतिशत सीट हासिल की।

महाराष्ट्र में एक बार फिर भाजपा ने दमखम दिखाते हुए सबसे बड़े दल के रूप में अपना रुतबा कायम रखा है। राज्य के 32 जिलों हुए 106 नगर पंचायत चुनाव में अब तक आए नतीजों में भाजपा नंबर वन पार्टी के रूप में सामने आई है। हालांकि, भाजपा के मुकाबले तीन दलों की महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सर्वाधिक सीटें जीतने में सफल हुई हैं, लेकिन, शिवसेना लगातार पिछड़ रही है।

महाराष्ट्र में 32 जिलों की 106 नगरपंचायतों में चुनाव हुए जिसमें से 31 जिलों की 97 नगरपंचायतों के नतीजे घोषित किए गए। बुधवार को 97 नगरपंचायतों की 1649 सीटों के नतीजे सामने आए, जिसमें भाजपा ने सबसे ज्यादा 384 सीटों पर कमल खिलाया है, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) 344, कांग्रेस 316 और शिवसेना को 284 सीटों पर जीत मिली है।

गड़चिरोली की 9 नगरपंचातों के नतीजे बृहस्पतिवार को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में सभी दलों ने अपने दम पर चुनाव लड़ा था, लेकिन कुछ जगहों पर शिवसेना और एनसीपी के बीच स्थानीय स्तर पर गठबंधन भी हुआ था। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने दावा किया कि भाजपा ही सूबे में सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है। 

उन्होंने कहा कि हम 24 निकाय संस्थाओं में बहुमत हासिल करने में कामयाब हुए हैं। लगभग 26 महीने तक सत्ता से बाहर रहने के बावजूद, भाजपा को भारी जीत हासिल हुई है। इससे पता चलता है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं का हमारा नेटवर्क, बिना किसी सरकार के समर्थन या संसाधन के अच्छे नतीजे दे सकता है। शिवसेना को मुख्यमंत्री का पद मिल गया, लेकिन वह इस चुनाव में तीसरे या चौथे स्थान के लिए संघर्ष कर रही है। राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने दावा किया कि नगरपंचायत चुनाव में एमवीए ने 80 फीसदी सीटें जीती हैं और भाजपा को जनता ने नकार दिया है।

सांगली के कडेगाव नगर पंचायत में 25 साल बाद खिला कमल
महाराष्ट्र कांग्रेस नेता व राज्य मंत्री विश्वजीत कदम को अपने गृह जिले सांगली के कडेगाव नगर पंचायत में करारी हार मिली। कांग्रेस के वर्चस्व वाले कडेगाव नगर पंचायत में 25 साल बाद कमल खिला है। कडेगाव नगर पंचायत की 17 सीटों में से भाजपा को 11 जीत पर विजय मिली है। भाजपा नेता पृथ्वीराज देशमुख ने इस जीत में अहम भूमिका निभाई है।

सत्तार ने केंद्रीय मंत्री दानवे को किया चित्त
शिवेसना नेता व प्रदेश के राजस्व राज्य मंत्री व अब्दुल सत्तार ने केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रावसाहब दानवे को औरंगाबाद के सोयगाव नगर पंचायत चुनाव में चित्त कर दिया है। शिवसेना ने सोयगाव नगर पंचायत में 17 में से 11 सीटें जीती जबकि भाजपा को मात्र 6 सीटों पर ही सफलता मिली। सत्तार ने दावा किया कि सोयगाव नगर पंचायत चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और राकांपा के बीच छिपा गठबंधन था।

अशोक चव्हाण का जादू कायम
प्रदेश के सार्वजनिक निर्माण कार्य मंत्री अशोक चव्हाण के गृह जिले नांदेड़ में कांग्रेस का जादू कायम है। नांदेड़ की तीन में से दो नगर पंचायतों में कांग्रेस को एकतरफा जीत मिली है।

किस दल को मिली कितनी सीटें :
भाजपा- 384 सीटें
राकांपा-  344 सीटें
कांग्रेस- 316 सीटें
शिवसेना- 284 सीटें
सीपीआईएम- 11 सीटें
बसपा- 4 सीटें
मनसे- 4 सीटें
अन्य राज्यों में पंजीकृत दल- 3 सीटें
राज्य चुनाव आयोग में पंजीकृत दल- 82 सीटें
निर्दलीय- 206 सीटें  
कुल सीटे- 1638 

हरक के कांग्रेस में शामिल होने से पहले विरोध शुरू, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा- ऐसे लोगों को दूर रखें

प्रदीप टम्टा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि ऐसे दलबदलू लोगों को पार्टी से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस तरह की जोड़तोड़ में विश्वास नहीं करते हैं। बावजूद इसके यदि शीर्ष नेतृत्व हरक सिंह को पार्टी में लेने का निर्णय लेता है, तो हम पार्टी से बाहर नहीं जाएंगे। पार्टी को भी निर्णय लेते समय 2016 में हुए अपराध का संज्ञान लेना चाहिए। माफी मांग लेने भर से कुछ नहीं हो जाता। इसकी क्या गारंटी है कि उन्होंने (हरक सिंह) जो पहले किया है, उसे फिर से नहीं दोहराएंगे।

डेमोक्रेटिक फ्रंट, उत्तराखंड(ब्यूरो) :

बीजेपी से निष्कासित पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत 6 साल बाद एक बार फिर से कांग्रेस में वापसी को बेकरार दिख रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से 100 बार माफ़ी मांगने की बात भी कही है। बावजूद इसके कांग्रेस आला कमान में हरक सिंह रावत की एंट्री को लेकर को बात अभी तक नहीं बन पायी है। मिल रही जानकारी के मुताबिक हरक सिंह रावत लगातार कांग्रेस के संपर्क में हैं। लेकिन हरीश रावत की वजह से उनकी जॉइनिंग पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका है। हरीश रावत ने हालांकि हरक सिंह रावत को माफ़ करने की बात तो कही, लेकिन साथ ही उन्हें अपराधी भी बता दिया।

भाजपा से निष्कासित पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की कांग्रेस में एंट्री से पहले ही विरोध शुरू हो गया है। केदारनाथ विधायक मनोज रावत के बाद राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने भी हरक को पार्टी में नहीं लिए जाने की बात कही है। अमर उजाला से बातचीत में सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि जो लोग आज हरक सिंह रावत को पार्टी में शामिल किए जाने की पैरवी कर रहे हैं, शायद वह वर्ष 2016 की घटना को भूल गए हैं, जब षड़यंत्र के तहत लोकतंत्र की हत्या की गई थी।

इस साजिश के शामिल डॉ. हरक सिंह रावत ने पांच साल सरकार में रहकर कभी भाजपा की गलत नीतियों की आलोचना नहीं की। लेकिन अब जब उन्हें पार्टी ने निकाल दिया है, तब उन्हें फिर कांग्रेस याद आ रही है। वह जानते हैं कि इस बार राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। इसलिए कांग्रेस पार्टी का रुख करना चाहते हैं। हम जनता को क्या जवाब देंगे।

टम्टा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि ऐसे दलबदलू लोगों को पार्टी से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस तरह की जोड़तोड़ में विश्वास नहीं करते हैं। बावजूद इसके यदि शीर्ष नेतृत्व हरक सिंह को पार्टी में लेने का निर्णय लेता है, तो हम पार्टी से बाहर नहीं जाएंगे। पार्टी को भी निर्णय लेते समय 2016 में हुए अपराध का संज्ञान लेना चाहिए। माफी मांग लेने भर से कुछ नहीं हो जाता। इसकी क्या गारंटी है कि उन्होंने (हरक सिंह) जो पहले किया है, उसे फिर से नहीं दोहराएंगे।

पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की कांग्रेस पार्टी में ज्वानिंग नहीं हो पाई है। कहा जा रहा है कि पूर्व सीएम हरीश रावत के कारण ऐसा हो रहा है। जबकि हरीश रावत का कहना है कि व्यक्तिगत तौर पर तो वह उन्हें (डॉ. हरक) बहुत पहले माफ कर चुके हैं, लेकिन यह मामला व्यक्तिगत नहीं है। उन्हें घाव लगा है, इसलिए हो सकता है, वह निष्पक्ष होकर निर्णय नहीं ले पाएं, लेकिन पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जो भी निर्णय लेगा, वह उसके साथ होंगे। 

डॉ. हरक सिंह के मुद्दे पर अमर उजाला से बातचीत करते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि इस मामले में वह पिक्चर में नहीं हैं। पार्टी का जो निर्णय होगा, वह उसे मान लेंगे। हरक सिंह रावत अगर यह कह रहे हैं कि मैंने माफी दे दी है तो यह हरीश रावत का व्यक्तिगत मामला नहीं है। वह तो इस बात को अपने मन से बहुत पहले ही हटा चुके हैं। बकौल हरीश, हमारे जीवन में यह घटना होनी थी, हो गई, हम इसे झेल रहे हैं। हम ही क्या, सभी उसका परिणाम झेल रहे हैं।

उस दौरान यदि तीन-चार माह और सरकार रहती तो काम करने के तमाम अवसर मिलते। लेकिन इन्होंने (हरक सिंह) ऐसा नहीं होने दिया। इन्होंने सरकार का एक प्रकार से पूरा एक वित्तीय वर्ष खत्म कर दिया। इस दौरान उत्तराखंड के विकास का जो नुकसान हुआ, उसका सवाल बड़ा है। लोकतंत्र का नुकसान हुआ, उसका भी सवाल है। इसके लिए आप (हरक सिंह) भले ही सर्वाजनिक रूप से बात करें या माफी मांगे, लेकिन यह पार्टी को देखना है कि इनके आने से फायदा है या नुकसान है। यह पार्टी को तय करना है, मैं इस मसले पर नहीं फंसना चाहता हूं। हरीश रावत ने आगे जोड़ा कि उन्हें घाव लगा था, इसलिए हो सकता है, वह निष्पक्ष तरीके से नहीं सोच पा रहे हों। वह इतना ही कहना चाहते हैं कि पार्टी के सामूहिक निर्णय में हरीश रावत का निर्णय भी शामिल होगा।

पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश जोशी की कांग्रेस भवन में मौजूदगी के दौरान रायपुर विधानसभा क्षेत्र के कुछ कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय भवन में डॉ. हरक सिंह रावत के विरोध में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। 

बताया जा रहा है कि प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ता दो माह पूर्व ही कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए महेंद्र नेगी गुरुजी के समर्थक थे। महेंद्र नेगी रायपुर से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। डॉ. हरक सिंह रावत के कांग्रेस में शामिल होने और रायपुर सीट से दावेदारी जताने की आशंका में उम्मीदवार पहले ही विरोध दर्ज करा देना चाहते हैं।

शायद यही वजह रही कि पर्यवेक्षक नियुक्त होने के बाद पहली बार कांग्रेस मुख्यालय भवन पहुंचे मोहन प्रकाश जोशी की मौजूदगी के समय विरोध दर्ज कराने का समय चुना गया। जिस वक्त पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश जोशी कांग्रेस भवन में पहली मंजिल पर बने वार रूम का निरीक्षण कर रहे थे, उसी वक्त कार्यालय प्रांगण में कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। 

अपर्णा यादव कल भाजपा में शामिल होंगी

 स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि देखिए कौन आने और कौन जाने वाला है, कौन आ सकता है कौन जा सकता है…यह मैं बता नहीं सकता, अभी हम लोगों को जानकारी नहीं है। बातचीत के दौरान पत्रकार सौरभ द्विवेदी ने स्वतंत्र देव सिंह से कहा कि कोई इनकार न करे तो परोक्ष रूप से स्वीकार ही होता है। इसके जवाब में स्वतंत्र देव सिंह ने कहा, ‘न कोई जानकारी है, न कोई इनकार है, जो लोग आएंगे एक बार देखकर उनको हम स्वीकार कर रहे हैं। लेकिन पुनः मैं फिर बोलता हूं 2022 के लिए कार्यकर्ताओं ने मन बना लिया है और नेतृत्व करने में कार्यकर्ता सक्षम और माहिर हैं।

डेमोरेटिक फ्रंट, लखनऊ(ब्यूरो) :
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 का बिगुल बज चुका है। सभी सियासी दलों ने सभी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपना खाका भी तैयार कर लिया है। वहीं, अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के बीच भी सियासी लड़ाई थम चुकी है। इसी बीच प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रमुख शिवपाल यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यूपी चुनाव में सपा के सिंबल पर उम्मीदवार उतारेंगे। वहीं, चाचा शिवपाल यादव ने बहू अपर्णा यादव को भी नसीहत दे डाली है।

सपा मुखिया अखिलेश यादव से गठबंधन कर चुके प्रसपा मुखिया शिवपाल यादव ने अपने एक बयान में बहू अपर्णा यादव को नसीहत देते हुए कहा है कि अपर्णा को पहले पार्टी के लिए काम करना चाहिए। इसके बाद किसी तरह की उम्मीद करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अपर्णा यादव को समाजवादी पार्टी में ही रहना चाहिए।

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के नजदीक आते ही राज्‍य में सियासी उठा-टक ने भी जोर पकड़ लिया है। विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच मुलायम सिंह यादव के घराने से बड़ी खबर सामने आ रही है। उनकी बहू अपर्णा यादव  19 जनवरी बुधवार) को भाजपा का दामन थामने वाली हैं। इसके लिए वह दिल्‍ली के लिए रवाना हो चुकी हैं। विधानसभा चुनाव से ऐन पहले मुलायम सिंह यादव की बहू  के भाजपा में शामिल होने को लेकर उत्‍तर प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। बता दें कि अपर्णा यादव के भाजपा ज्‍वाइन करने की चर्चाएं काफी तेज थीं।

बता दें कि अपर्णा यादव मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं और सोशल मुद्दों पर बोलती हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने लखनऊ कैंट सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था उस समय वो रीता बहुगुणा जोशी से हार गई थी। अगर इस बार अपर्णा यादव बीजेपी के साथ आती हैं तो अखिलेश के लिए ये बड़ी शर्मिंदगी होगी। हालांकि आज उन्हें मनाने की कोशिश हुई। अपर्णा के भाई ने शिवपाल यादव से मुलाकात की लेकिन लगता है बात नहीं बनी। अब एक सवाल है कि बीजेपी अपर्णा यादव को किस सीट से टिकट देगी क्योंकि रीता बहुगुणा जोशी इस बार लखनऊ कैंट से अपने बेटे के लिए टिकट चाहती हैं और इसके लिए उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष जो पी नड्डा को चिट्ठी भी लिखी है।

ED द्वारा रिशतेदारों पर दबिश पर चिन्नी का ब्यान

विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने मंगलवार सुबह लगभग आठ बजे पंजाब में लगभग दस जगहों पर दबिश दी। यह कार्रवाई 2018 में दर्ज एक एफआईआर पर की गई है। सूत्रों के अनुसार लुधियाना और शहीद भगत सिंह नगर में सीएम चरणजीत चन्नी के रिश्तेदारों के ठिकानों पर भी दबिश दी गई है। इसके अलावा मोहाली में सेक्टर 70 में छापेमारी की गई है। पंचकूला में भी रेड पड़ी है। वहीं ईडी की इस कार्रवाई से पंजाब की सियासत गरमा गई है।

संवाददाता, डेमोक्रेटिक फ्रंट – चंडीगढ़ :

पंजाब में करीब 10 ठिकानों पर ईडी की तरफ से सोमवार को रेड की जा रही है। इसको लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके रिश्तेदारों को ईडी ने तंग किया था। अब पंजाब में भी ईडी का इस्तेमाल कर कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।


वहीं सीएम चन्नी ने इसे साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनके रिश्तेदार के घर पर छापेमारी की जा रही है। वे मुझे निशाना बना रहे हैं और आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुझ पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। हम इससे लड़ने के लिए तैयार हैं। बंगाल चुनाव के दौरान भी यही हुआ था।


वहीं सीएम चन्नी ने इसे साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनके रिश्तेदार के घर पर छापेमारी की जा रही है। वे मुझे निशाना बना रहे हैं और आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुझ पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। हम इससे लड़ने के लिए तैयार हैं। बंगाल चुनाव के दौरान भी यही हुआ था।

मौलाना तौकीर रजा का हिंदू विरोधी भाषण वायरल, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा और कॉंग्रेस ने इन्हे अपना लिया

मौलाना तौकीर रजा कहते हैं, ‘जिस दिन मेरा नौजवान मेरे कंट्रोल से बाहर आ गया। जिस दिन मेरा कंट्रोल इन नौजवानों से खत्म हो गया….. मैं कहता हूं कि पहले मैं लड़ूंगा बाद में तुम्हारा नंबर आएगा… मैं हिंदू भाइयों से खासतौर से कहना चाहता हूं कि मुझे उस वक्त से डर लगता है जिस दिन नौजवान कानून अपने हाथ में ले लेगा। जिस दिन ये नौजवान बेकाबू हो गया और कानून अपने हाथ में लेने को मजबूर हो गया तो तुम्हें हिंदुस्तान में कहीं पनाह नहीं मिलेगी… हिंदुस्तान का नक्शा बदल जाएगा। हम तो पैदाइशी लड़ाके हैं।’

डेमोक्रेटिक फ्रंट, लखनऊ(ब्यूरो) :

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इत्तेहादुल मिल्लत काउंसिल के मौलाना तौकीर रजा खान और कांग्रेस के साथ आने पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही है कि हिंदुओं के खिलाफ ज्यादा घृणा कौन उगल सकता है और हिंदुओं के खिलाफ बोलने वालों को कौन सी पार्टी प्रश्रय दे सकती है। कल (सोमवार को कांग्रेस के यूपी प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में मौलाना तौकीर रजा खान ने कांग्रेस को अपना समर्थन दिया।

बरेली के ‘आला हजरत शरीफ’ के तौकीर रजा खान ने कॉन्ग्रेस पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है। हिन्दुओं के खिलाफ ज़हर उगलने के बाद वो सुर्ख़ियों में आए थे। उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के इस बात का ऐलान किया कि मौलाना तौकीर रजा खान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी को समर्थन दिया है। साथ ही प्रियंका गाँधी के साथ तौकीर रजा व अन्य मुस्लिम नेताओं की एक तस्वीर भी वायरल हुई है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के अनुसार, तौकीर रजा ने उत्तर प्रदेश में ‘अमन-चैन’ के लिए गैर-भाजपा सरकार की वकालत की और मुस्लिमों से कहा कि वो अपने वोट को बँटने नहीं दें। तौकीर रजा ने कहा, ”मैं उत्तर प्रदेश से प्यार करने वाले सभी हिंदू, मुस्लिम, सिख ईसाई और खासकर मुस्लिमों से अपील करता हूँ कि अगर राज्य में शांति कायम रखनी है तो किसी भी कीमत पर अपने वोट को तकसीम (बँटने) नहीं होने देना है। कॉन्ग्रेस की हिमायत में वोट करना है।”

तौकीर रजा ने कहा कि कॉन्ग्रेस के साथ जब भी मुस्लिम और दलित खड़े हुए हैं, तब-तब पार्टी ने सरकार बनाई है। उन्होंने कहा कि इस बार भी ‘इंशाअल्लाह’ हम सरकार बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैर-भाजपा सरकार के लिए क़ुरबानी भी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वो अपनी पार्टी की क़ुरबानी देकर कॉन्ग्रेस के साथ आए हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने निशाना साधते हुए पूछा कि क्या प्रियंका गाँधी से इसी मुलाकात के बाद मौलाना तौकीर रजा ने कहा की हमारे लड़ाको ने अगर कानून अपने हाथ में ले लिया तो हिन्दुओं को देश में रहने की जगह नहीं मिलेगी और हिंदुस्तान का नक्शा बदल देंगे?

कॉन्ग्रेस पार्टी ने प्रियंका गाँधी के साथ उनकी तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “बीते दिनों आला हज़रत बरेली शरीफ के मौलाना तौकीर रज़ा खान साहब (राष्ट्रीय अध्यक्ष, इत्तेहाद मिल्लत कौंसिल) की कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जी से मुलाकात हुई थी। उन्होंने उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी से चुनाव ना लड़ाने का फैसला करते हुए अपनी पार्टी का पूरा समर्थन कॉन्ग्रेस पार्टी और कॉन्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को दिया है। पाँचों राज्य में हो रहे चुनाव में भी उन्होंने अपने समर्थकों को कॉन्ग्रेस के समर्थन के लिए कहा है।”

बता दें कि भड़काऊ भाषण देते हुए तौकीर रजा ने कहा था कि जिस दिन मुस्लिम कानून हाथ में ले लेंगे, उस दिन हिंदुओं को पूरे देश में कहीं पनाह नहीं मिलेगा। रजा ने कहा था, “अगर ये गुस्सा फुट पड़ा, जिस दिन मेरा नौजवान मेरे कंट्रोल से बाहर आ गया उस दिन….. । लोग मुझे कहते हैं कि तुम तो बुजदिल हो गए हो, तो मैं कहता हूँ कि पहले मैं मरूँगा, उसके बाद तुम्हारा नंबर आएगा। मैं अपने हिंदू भाइयों से खासतौर पर कहता हूँ कि मुझे उस वक्त से डर लगता है, जिस दिन मेरा ये नौजवान कानून अपने हाथ में ले लेगा उस दिन हिंदुस्तान में तुम्हें रहने की कहीं जगह नहीं मिलेगी।”

मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित होने पर भगवंत मान को योगेश्वर शर्मा ने दी बधाई

  • पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व में बनेगी आम आदमी पार्टी की सरकार, मान राज्य का एक जाना माना चेहरा होने के साथ साथ ईमानदार एवं मेहनती नेता हैं जोकि पंजाबियों के लिए संघर्ष करते रहते हैं


पंचकूला,18 जनवरी:

आम आदमी पार्टी ( आआपा) के उत्तरी हरियाणा के सचिव योगेश्वर शर्मा ने सांसद भगवंत मान को पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किये जाने पर उन्हें हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मान राज्य का एक जाना माना चेहरा होने के साथ साथ ईमानदार एवं मेहनती नेता हैं जोकि पंजाबियों के लिए संघर्ष करते रहते हैं। यही कारण है कि वह लंबे समय से अपने इलाके के सांसद हैं और बड़े बड़े पूंजिपतियों को हराकर चुनाव जीते हैं।

आज यहां जारी एक ब्यान में योगेश्वर शर्मा ने कहा कि आआपा नेतृत्व की ओर से पिछले दिनों ऑनलाईन वोटिंग करवाई गई थी,जिसमें करीब 22 लाख लोगों ने मतदान किया और उसमें से 93 प्रतिशत लोगों ने भगवंत मान को मुख्यमंत्री के तौर पर वोट की है। लोग उनकी मेहनत,ईमानदारी एवं मिलनसार स्वभाव के कायल हैं। उन्होंने कहा कि यह आमजन की आवाज है और जनता फैसला सर्वोप्रिया होता है। ऐसे में पंजाब में भगवंत मान के नेतृव में अब आप की सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि कई सर्वे में आप को बाकी दलों से आगे दिखाया जा चुका है,मगर आआपा इससे खुश होकर अपनी मेहनत करना नहीं छोड़ सकती। आआपा हरियाणा के वलंटियर भी पंजाब में अपनी सेवांए देने के लिए  पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में विधानसभा के चुनाव थे तब पंजाब के सभी बड़े चेहरे वहां अपने दलों के लिए चुनाव प्रचार करने गये थे।

जाब आआपा की ओर से भगवंत मान भी अपनी डयूटी करने गये थे,मगर दिल्ली के लोगों ने सबसे ज्यादा प्यार भगवंत मान को ही दिया था और दिल्ली में उन उन इलाकों में जहां जहां मान ने चुनाव प्रचार किया था,पार्टी को न सिर्फ जीत मिली बलिक वोट प्रतिशत भी पहले से ज्यादा मिले। उन्होंने कहा कि अब पंजाब में भी लोग भगवंत मान को पसंद करते हैं और एक बार उनके नेतृत्व में आम आदमी पार्टी को अवसर देने का मन बना चुके हैं,क्योंकि लोग अब दिल्ली की तर्ज पर पंजाब में भी विकास की नई इबादत लिखना चाहते हैं और पुरानी पार्टियों के खोखले दावों पर से उनका भरोसा उठ चुका है।

आआपा नेता योगेश्वर शर्मा ने आगे कहा कि पंजाब के लोगों पर लाखों करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है,मगर सुविधांए उन्हें नहीं मिल रही। ऐसे में अब लोगों की सारी उम्मीदें अरविंद केजरीवाल के पंजाब के लिए तैयार मॉडल पर हैं कि किस तरह से उन्होंने लोगों को दिल्ली में सुविधाएं भी दीं और कोई टैक्स भी नहीं लगाये। लोगों को अरविंद केजरीवाल पर भरोसा है।

भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल के लिए मुख्यमंत्री चेहरा

अरविंद केजरीवाल पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह पंजाब में सीएम की दौड़ में नहीं हैं। पंजाब का सीएम चेहरा सिख समाज से होगा। 2017 में आआपा को इसी वजह से बड़ा झटका लगा था कि सीएम फेस सिख समाज से नहीं था। विरोधियों ने कहा कि बाहर से आकर कोई मुख्यमंत्री बन सकता है, जिससे पंजाबी आआपा से दूर होते चले गए।

संवाददाता डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़ :

पंजाब में आम आदमी पार्टी का सीएम चेहरा भगवंत मान ही होंगे। कहा जा रहा है कि लोगों से फोन पर आए कॉल और मैसेज में भगवंत मान ही सबसे आगे रहे हैं। उनके नाम का ऐलान आज अरविंद केजरीवाल कर सकते हैं। बता दें कि पंजाब की सियासत में आने से पहले वह अपने पूरे परिवार को छोड़ चुके हैं। 2015 में उनका अपनी पत्नी से तलाक हो चुका है और अब उनके बच्चों की भी उनसे बातचीत नहीं हो पाती है।

आम आदमी पार्टी (आआपा) द्वारा पंजाब में पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा चुनने के लिए एक नंबर  जारी किया गया था। इससे पहले पार्टी में विधायकों की तरफ से सांसद भगवंत मान को बतौर सीएम एलान किए जाने की मांग की जा रही थी लेकिन अरविंद केजरीवाल ने लोहड़ी के दिन नया दांव खेलते हुए पंजाब के लोगों से ही इसके लिए राय मांग ली थी।

सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में आप के पंजाब सहप्रभारी राघव चड्ढा ने कांग्रेस पर जुबानी हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का सिर्फ दलित वोट पाने के लिए इस्तेमाल किया है। कांग्रेस इससे पहले महाराष्ट्र में भी ऐसा ही कर चुकी है। लेकिन चुनाव के लिए टिकट देते समय उनके किसी रिश्तेदार या सगे भाई को टिकट नहीं दिया, जबकि कई नेताओं के बच्चों और भाईयों को टिकट दिया है। वहीं, उन्होंने साफ किया है कि उनके संपर्क में न तो सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के भाई मनोहर सिंह और न ही उनके अन्य रिश्तेदार हैं।

इस मौके पर राघव चड्ढा ने सबसे पहले कहा कि पंजाब के विधानसभा चुनाव-2022 में उतरने जा रही आम आदमी पार्टी ऐसी पहली पार्टी है जो कि अपने सीएम चेहरे का सबसे पहले एलान कर रही है। अभी तक किसी पार्टी ने अपने सीएम चेहरे का एलान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सीएम का चेहरा भी लोगों की राय से चुना जा रहा है। इस संबंधी अब तक 15 लाख से अधिक संदेश उन्हें आ चुके हैं। 

सीएम चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह को बस्सी पठाना से टिकट न देने के बहाने उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि इससे साफ हो गया है कि पार्टी में चरणजीत सिंह चन्नी की कितनी कीमत है। उन्होंने कुछ नेताओं के नाम गिनाएं, जिनके भाईयों और बेटों को कांग्रेस ने चुनाव के लिए टिकट दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का खेल कांग्रेस ने पहली बार नहीं किया। कई साल पहले महाराष्ट्र में भी कांग्रेस इस तरह का खेल कर चुकी है। चुनाव से ठीक तीन-चार महीने पहले दलित वोट के लिए उन्होंने सुशील कुमार शिंदे को सीएम घोषित कर दिया था और अगले ही चुनाव में उन्हें बदल दिया था। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि नाइट वाच मैन की तरह चरणजीत सिंह चन्नी का प्रयोग किया गया है।

चड्ढा ने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस के पंजाब प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू भी उनकी इज्जत नहीं करते हैं। जब सिद्धू प्रेस कांफ्रेंस करते हैं तो वह अपने पीछे लगे बैनर में मुख्यमंत्री की फोटो तक नहीं लगाते। वह रोजाना चन्नी सरकार पर कई मुद्दों पर बात करके आरोप लगाते हैं। इस मौके पर चढ्ढा ने कहा कि उनकी पार्टी की ओर से अभी चार सीटों पर उम्मीदवारों का एलान नहीं किया है, जो कि आने वाले दिनों में कर दिया जाएगा।

इस सवाल का जवाब देने से बचे

फिरोजपुर देहाती से आप के उम्मीदवार आशु बांगड़ के पार्टी से इस्तीफा देने के सवाल पर राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें भी अभी ही इस बारे में जानकारी मिली है। हमारे उम्मीदवार ने अरविंद केजरीवाल को जो पत्र भेजा है उसमें हम पर आरोप लगाए हैं कि हमने उनसे होर्डिंग लगाने के लिए कहा है, क्या मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था। चुनाव के दौरान अगर हम अपने उम्मीदवारों से ऐसा नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे।

किसानों को अब चुनावी मैदान में देखेंगे

राघव चड्ढा ने 22 किसान संगठनों के आधार पर बने संयुक्त समाज मोर्चा को बेस्ट ऑफ लक कहते हुए कहा कि अब वे चुनावी मैदान में ही देखेंगे। उन्होंने किसान संगठनों में टिकटों को लेकर आपस में सहमति न बनने पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह किसान संगठनों का निजी मामला है, हमारी पार्टी इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी।