PU Enactus team Launches Cloth-based Sanitary Napkins

Chandigarh September 21, 2021

Enactus team, Dr. S. S. Bhatnagar University Institute of Chemical Engineering & Technology (SSBUICET),  Panjab University in collaboration with Developing Indigenous Resources-India (DIR) and Versatile Group, Ludhiana launched reusable, cost-effective and eco-friendly cloth-based sanitary napkins under its Project Uday, at an event held today at Janata Colony, Nayagaon.

A team of more than  50 student members, dedicated towards a common goal of bringing “the best suitable business model” in order to shape a better society has come forward to raise concerns surrounding the challenges that affect the health and wellbeing of women and girls due to the lack of hygienic menstrual products. Upon in-depth research, the team found that menstrual hygiene practices were unsatisfactory among the rural women, often pushing them to the edge of being the most vulnerable to infections and health problems, averred Prof. Seema Kapoor, Faculty Advisor of Enactus team.

Thus, the team started working on reusable cloth-based sanitary napkins that could be an affordable and eco-friendly alternative to generic plastic based sanitary napkins available in the market.

The guest of honor for the event was Ms. Geetanjali Bakshi, Coordinator of CSR project Amodini of Versatile Group, who was instrumental in getting the sponsorship for 2 Usha automatic sewing machines and accessories worth Rs.55000/ for the community. Also the special fabric for sanitary napkins is being sponsored by Versatile group under its CSR project. 

The event saw participation from underprivileged ladies working under project Uday, Enactus students and DIR staff. 

In the presence of dignitaries, Ms. Bakshi distributed Sanitary Napkin kits, each comprising of 4 napkins in 1 potli to over 30 ladies of the  slums of Janta Colony, ensuring accessibility of safe and quality assured menstrual products. If compared with the standard cloth based sanitary napkins available in the global market, the product is approximately 70-80% cheaper than the ones conventionally available and is tested upon various paramete by NABL accredited labs. 

Dr. Asha Katoch, CEO of DIR, a non-profit charitable trust has been working relentlessly for the upliftment of slum dwellers for the past 17 years, with the objectives of promoting health, providing education and facilitating income generation in the slum community. She has been at the front in keeping up with the cause of building awareness among the rural population on menstruation. In addition to this, Dr. Asha has extended her trust and support through the provision of skill development and training for the community of ladies. 

Prof. Kapoor highlighted how pandemic has made things worse with restricted availability of hygienic sanitary products, increased poverty and disruption of essential services. She advocated for building community awareness and supporting female hygiene. Ms. Bakshi emphasized the importance of getting over the period stereotypes and ensure easy access to related supplies.

Accentuating the need of promoting reusable sanitary napkins, Akshit Kalra, President of Enactus team, Meesha, Vice president of Enactus team and other team members namely Yash, Nandini, Dea, Ravnoor, Sanya, Leeza and Abhinav participated and vocalized the cause of adopting menstrual hygiene practices. 

ਸਤਿੰਦਰ ਸਰਤਾਜ ਦੇ ਵੈਨਕੂਵਰ ਸ਼ੋ ਦੀਆਂ 1 ਕਰੋੜ 10 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੀਆਂ ਟਿੱਕਟਾਂਆਨ ਲਾਈਨ ਵਿਕੀਆਂ (ਕੁੱਲ ਇੱਕ ਸ਼ੋ ਵਿੱਚੋਂ 1 ਕਰੋੜ 38 ਲੱਖ ਦੀ ਸੇਲ

ਚੰਡਿਗੜ:

ਵੀ ਟਿਕਸ ਦੇ ਬੁਲਾਰੇ ਕੈਵਿਨ ਸ਼ੈਲੀ ਨੇ ਸਤਿੰਦਰ ਸਰਤਾਜ ਦੇ ਵੈਨਕੂਵਰ 7 ਨੰਵਬਰ ਨੂੰ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਵੈਨਕੋਵਰ ਸ਼ੋ ਬਾਰੇ ਹਾਊਸਫੁੱਲ ਦਾ ਫੱਟਾ ਲਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਉਸ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮੁਤਾਬਕ ਸਰਤਾਜ ਸ਼ੋ ਦੀਆਂ 1 ਲੱਖ 91 ਹਜ਼ਾਰ ਡਾਲਰ ਦੀਆਂ 2714 ਟਿੱਕਟਾਂਵਿਕ ਚੁੱਕੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹੁਣ ਕੋਈ ਸੀਟ ਬਾਕੀ ਨਹੀਂ ਰਹੀ।

ਇਸਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਸਪਾਂਸਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਇਸ ਸ਼ੋ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਮਸ਼ਹੂਰੀ ਲਈਤਕਰੀਬਨ 50,000 ਕਨੇਡੀਅਨ ਡਾਲਰ ਲਾਏ ਗਏ ਹਨ।

ਇਸਸ਼ੋਦੀਆਂਟਿਕਟਾਂ50 ਦਿਨਪਹਿਲਾਂਹੀਵਿਕਗਈਆਂਹਨਜਿਹੜੀਕਿਪੰਜਾਬੀਸ਼ੋਅਬਾਰੇਅਜੀਬਜਿਹੀਗੱਲਹੈਅਤੇਇਸਨਾਲਵਿਦੇਸ਼ਾਂਵਿੱਚਪੰਜਾਬੀਗਾਈਕੀਦਾਚੰਗਾਰੁਝਾਨਵੱਧਰਿਹਾਹੈ।   ਇਸ ਗੱਲ ਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਕੈਨੇਡਾ ਦੀ ਫਿਰਦੌਸ ਪ੍ਰੋਡਕਸ਼ਨ ਕੰਪਨੀ ਨੇ ਵੀ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਗੱਲ-ਬਾਤ ਕਰਦੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਸ਼ੋ ਦੀ ਸਾਰੀਮਾਰਕਟਿੰਗ ਸ਼ੋਸ਼ਲ ਮੀਡੀਏ ਰਾਹੀਂ ਹੋਈ ਹੈ ਜਿਸਦੀ ਦੇਖ-ਰੇਖ ਅਮਰੀਕਨ ਕੰਪਨੀ ਨੇ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇੱਕ ਵੀ ਟਿੱਕਟਮੁਫ਼ਤ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਦਿੱਤੀ ਗਈ।

 ਯਾਦ ਰਹੇ, ਡਾਕਟਰ ਸਤਿੰਦਰ ਸਰਤਾਜ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਉਹ ਗਾਇਕ ਹਨ ਜਿਹੜੇ ਸਾਫ਼ ਸੁਥਰੀ ਤੇ ਸਾਰਥਿਕ ਗਾਇਕੀ ਲਈ ਜਾਣੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ।ਪਿੱਛਲੇ 2-3 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਕਾਰਜ-ਸ਼ੈਲੀ ਵਿੱਚ ਤਬਦੀਲੀ ਲਿਆਂਦੀ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਇਸ ਸਾਲ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਸ਼ੋਅ ਨੂੰ ਭਾਰੀਹੁੰਗਾਰਾ ਮਿਲ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਪਿੱਛਲੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਗੀਤਾਂ ਦੀ ਪੇਸ਼ਕਾਰੀ ਅਤੇ ਗਿਣਤੀ ਨੂੰ ਵਧਾਇਆ ਹੈ। ਹੁਣ ਉਹ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਹੀ ਇੱਕਗੀਤ ਰਲੀਜ਼ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਤੇ ਚੈਰਿਟੀ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਵਧਾਇਆ ਹੈ।

 ਦਾ ਬਲੈਕ ਪ੍ਰਿੰਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਆਮ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਆ ਰਹੀਆਂ ਮੁਸ਼ਕਲਾਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਦੂਜੀ ਫ਼ਿਲਮ ਇੱਕੋ-ਮਿੱਕੇ ਲਿਆਂਦੀ ਜਿਸਨੂੰਚੰਗਾ ਹੁਲਾਰਾ ਮਿਲਿਆ।

ਉਹ ਪਿੱਛਲੇ ਮਾਰਚ ਵਿੱਚ ਰਲੀਜ ਹੋਈ ਸੀ ਪਰ ਕਰੋਨਾ ਮਾਹਮਾਰੀ ਕਰਕੇ ਦੋ ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹੀ ਲਾਹੁਣੀ ਪਈ।ਹੁਣ ਉਹ 26 ਨਵੰਬਰ ਨੂੰ ਦੁਬਾਰਾ ਰਲੀਜ਼ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ, ਚੰਗਾ ਹੁੰਗਾਰਾ ਮਿਲਣ ਦੀ ਆਸ ਹੈ। 

राजस्थान में दो सालों में दो दलित युवकों की मुस्लिम भीड़ द्वारा हत्या आरोपी बेखौफ आज़ाद

दो साल पहले 15 अगस्त, 2019 को राजस्थान के हरीश जाटव मॉब लिचिंग मामले में हरीश के पिता रत्तीराम जाटव ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों का आरोप थ कि मामले में न्याय नहीं मिलने के कारण रत्तीराम जाटव ने ये कदम उठाया।  दरअसल राजस्थान के अलवर के भिवाड़ी के झिवाना गांव निवासी हरीश जाटव की मॉब लीचिंग में मौत हो गई थी।   घटना 17 जुलाई की थी।   परिजनों का आरोप है कि इस घटना के बाद भी पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया और आरोपी लगातार हरीश जाटव के परिवार को धमकी देते रहे।   हरीश जाटव के अंधे गरीब दलित पिता लगातार न्याय की गुहार लगाते रहे लेकिन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की।   उधर आरोपी भी लगातार बेखौफ होकर घूम रहे थे जिससे परेशान होकर पिता ने आत्महत्या कर ली।  

हरीश जाटव

भरतपुर/नईदिल्ली :

राजस्थान में गहलोत सरकार में दलितों की मोब लिंधींग कोई नयी बात नहीं है। आज जब राजस्थान के अलवर में योगेश जाटव नाम के दलित युवक की मॉब लिंचिंग की खबर सुर्ख़ियों में है, मुस्लिम भीड़ द्वारा 2 साल पहले हरीश जाटव की हत्या को भी याद कीजिए। ताज़ा घटना 15 सितंबर, 2021 की है। पिछली घटना 16 जुलाई, 2019 की। राज्य में तब भी अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी।

राजस्थान में गहलोत सरकार में दलितों की मोब लिंधींग कोई नयी बात नहीं है। आज जब राजस्थान के अलवर में योगेश जाटव नाम के दलित युवक की मॉब लिंचिंग की खबर सुर्ख़ियों में है, मुस्लिम भीड़ द्वारा 2 साल पहले हरीश जाटव की हत्या को भी याद कीजिए। ताज़ा घटना 15 सितंबर, 2021 की है। पिछली घटना 16 जुलाई, 2019 की। राज्य में तब भी अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी।

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार है और अशोक गहलोत वामपंथी मीडिया के भी दुलारे हैं (जब तक वो गाँधी परिवार के इशारे पर नाचते रहें, वरना जिस दिन उनका हश्र कैप्टेन अमरिंदर सिंह वाला हुआ, उस दिन से मीडिया का ये गिरोह विशेष उन्हें भी नकार देगा)। दूसरा कारण ये है कि हत्यारे मुस्लिम समुदाय से आते हैं। कॉन्ग्रेस का राज और हत्यारों का मुस्लिम होना – ये दो कारण काफी हैं मीडिया को चुप कराने के लिए।

योगेश जाटव

आइए, सबसे पहले घटना पर एक नज़र डाल लेते हैं कि आखिर हुआ क्या था। घटनाक्रम कुछ यूँ था कि बड़ौदामेव के मीना का बास इलाके में बुधवार (15 सितम्बर, 2021) को भटपुरा निवासी योगेश जाटव बाइक से गाँव की तरफ जा रहे थे। रास्ते में एक गड्ढा था, ऐसे में दुर्घटना हो गई और उनकी बाइक एक महिला से टकरा गई। इसके बाद शुरू हुआ मुस्लिम भीड़ का आतंक। दलित युवक की इतनी पिटाई की गई कि वो कोमा में चला गया।

3 दिन इलाज चला, जिसके बाद जयपुर में शनिवार को योगेश की मौत हो गई। अगले ही दिन आक्रोशित ग्रामीणों ने बडौदामेव में अलवर-भरतपुर रोड पर दोपहर करीब 3 बजे से शाम 6 बजे तक शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन के साथ किसी तरह समझौता हुआ, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार करने को परिजन राजी हुए। आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार कर के जेल भेजे जाने की माँग के साथ-साथ ग्रामीणों ने पीड़ित परिजनों को 50 लाख रुपए की सहायता देने के लिए सरकार से माँग की है।

इस घटना के अगले ही दिन परिजनों ने FIR दर्ज करवा दी थी, जिसमें 6 लोगों को आरोपित बनाया गया था। रसीद पुत्र नामालूम, साजेत पठान, मुबीना पत्नी नामालूम तथा अन्य चार लोगों के नाम FIR में शामिल थे। ग्रामीणों के आक्रोश के कारण अलवर-भरतपुर मार्ग घंटों जाम रहा। योगेश जाटव की उम्र मात्र 17 वर्ष ही बताई जा रही है। चार बहनों का वो इकलौता भाई था, ऐसे में परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है।

पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ही ग्रामीणों को विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। 5 घंटे तक हुए प्रदर्शन से पहले पुलिस ने IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-336 (उतावलेपन या उपेक्षापूर्वक ऐसा कोई कार्य, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा हो), 143 (भीड़ द्वारा गैर-कानूनी कार्य), 323 (किसी को चोट पहुँचाना), 379 (छीना-झपटी कर घायल करना) और 341 (किसी को गलत तरीके से रोकना) के तहत मामला दर्ज किया था।

पुलिस ने उलटा विरोध प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति को ही गिरफ्तार कर लिया और उस पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगाए गए। वो परिजनों की तरफ से बोल रहा था। हालाँकि, बाद में उसे छोड़ दिया गया। SC/ST एक्ट के अलावा अब हत्या की धारा भी लगा दी गई है। प्रशासन दोषियों के विरोध कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए सरकार तक पीड़ित परिजनों की बात पहुँचाने का वादा भी कर रहा है।

हजारों लोगों के सड़क पर उतरने के बावजूद इन पीड़ितों की आवाज़ अब तक मीडिया के कान में नहीं पहुँची है, क्योंकि मृतक का नाम ‘योगेश जाटव’ है, ‘पहलू खान’ नहीं। किसी चोर को रंगे हाथों पकड़े जाने और उसकी पिटाई के बाद मौत होने पर उसके यहाँ ‘राजनीतिक टूर’ करने वाले नेता इस बार संवेदना तक नहीं जताएँगे, क्योंकि इससे उनसे सेक्युलर होने का तमगा छिन जाएगा। मुस्लिम वोटों के तुष्टिकरण के लिए ऐसी घटनाओं पर उन्हें आँख मूँदे रहने की आदत है।

आपको कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए काल याद है, जब संसद में ‘सांप्रदायिक हिंसा बिल’ लाया गया था? इसमें प्रस्ताव था कि दोष किसी का भी हो, हत्या की घटनाओं के लिए बहुसंख्यकों को ही जिम्मेदार माना जाएगा। हिंसा की स्थिति में सीधे केंद्र के दखल की बात कह कर संघीय ढाँचे पर भी प्रहार किया गया था। तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने इसके खिलाफ आवाज़ बुलंद करते हुए कहा था कि ये बिल धार्मिक और भाषाई आधार पर समाज को बाँटने वाला है।

उनका कहना था कि इससे धार्मिक और भाषाई पहचान हमारे समाज में मजबूत हो चलेगी और आसानी से हिंसा के साधारण घटना को भी सांप्रदायिक रंग दिया जा सकेगा। उन्होंने बताया था कि कैसे यह कानून धार्मिक और भाषाई पहचान वाले नागरिकों के लिए आपराधिक कानूनों को अलग-अलग ढंग से अप्लाई करने का मौका दे सकता है। इससे अधिकारी तक डरे हुए रहते, क्योंकि मुस्लिमों की शिकायत पर उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होती।

इस मामले में पुलिस ने मॉब लिंचिंग वाली धारा भी नहीं लगाई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि बहुसंख्यकों को बिना गलती हत्यारा मानने वाले कॉन्ग्रेस के बिल से कितना नुकसान होता? अक्सर देखा गया है कि मुस्लिम भीड़ ने संगठित होकर दंगे किए हैं। हाल की घटनाओं में देखें तो दिल्ली और बेंगलुरु में हुए दंगे इसके उदाहरण हैं। या ऐसी स्थिति में भी हिन्दुओं को ही जेल होती? आरोपित मुस्लिम हैं, इसीलिए कोई नेता/पत्रकार उन्हें जेल भेजने की माँग नहीं करेगा।

राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “राजस्थान के अलवर में शांतिदूतों की भीड़ ने मासूम युवक योगेश को पीट पीट कर मार डाला। सेक्यूलर बिछुओं के कानों तक आवाज़ नहीं पहुँचेगी। क्योंकि मरने वाला योगेश और मारने वाले रशिद, साजित पठान, मूबिना और उसके साथी हैं।’ उनकी बात बिलकुल सही है। आजकल हंगामा मृतकों और आरोपितों का मजहब देख कर होता है।

पंचकूला: आम आदमी पार्टी ने ठोकी ताल

सभी इलेक्शन सिंबल पर लड़ेंगे

पंचकूला, 19 सितम्बर:

आम आदमी पार्टी जिला पंचकूला की बैठक जिला प्रधान सुरेंद्र राठी की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में आम आदमी पार्टी ने किसान मजदूर खेत बचाओ यात्रा पूरे हरियाणा में 90 हल्को मे निकाली थी यात्रा में लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और यात्रा का स्वागत किया वह बड़ी सफल रही उसकी सफलता के लिए पार्टी के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने के डॉक्टर सुशील कुमार गुप्ता राज्यसभा सांसद को बधाई दी। भविष्य में भी पार्टी का जनाधार बढ़ाने के बारे में चर्चा हुई। सुरेंद्र राठी ने बताया के आने वाले ब्लॉक समिति जिला परिषद और नगर परिषद के चुनाव में भी पार्टी बड़े जोर शोर से भाग लेगी। हाईकमान के आदेश पर पार्टी इस बार पार्टी का निशान झाड़ू पर इलेक्शन लड़ेगी।

इलेक्शन में पार्टी दिल्ली मॉडल का प्रचार करेगी और दिल्ली में जो काम हुए हैं इसी बात को लेकर वार्डो के अध्यक्ष नियुक्त किए गए। कालका नगर परिषद के चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई के घर घर जाकर पार्टी का प्रचार करें। पार्टी की नीतियों को आगे बढ़ाएं। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जो काम किए हैं उन कामों को देख कर पार्टी का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।

इस मीटिंग में उपाध्यक्ष नसीब सिंह, जगमोहन बट्टू, राजबीर दलाल, विनश ढाका, राकेश पंडित, प्रवीण देवराज योगी मथुरिया, पिंटू, विकी पटेल, पवन, साहिल पिंटू राजभर, पंकज ढाका पवन आदि ने भाग लिया

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि का संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया

प्रयागराज:

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि का सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया। महंत नरेन्द्र ‍गिरि का यहां बाघंबरी अखाड़े में निधन हुआ। हालांकि मौत के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक महंत नरेन्द्र गिरि की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। पुलिस घटनास्‍थल पर पहुंच गई है। पूर्व सांसद रामविलास वेदांती ने कहा कि नरेन्द्र गिरि की मौत के पीछे साजिश हो सकती है। इस बीच, यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

प्रयागराज से बड़ी खबर आ रही है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी का निधन हो गया है। यहां के बाघंबरी मठ में ही उनकी मौत हो गई है। फिलहाल मृत्यु के कारणों पर कोई कुछ नहीं बोल रहा है। अधिकारी संदिग्ध मौत बता रहे हैं। मठ पर आवाजाही रोक दी गई है। आला अधिकारी मठ पहुंच रहे हैं। अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि उन्होंने आत्महत्या की है। संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन पोस्टमार्टम के बारे में विचार कर रहा है। मठ पर फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया है। 

नरेंद्र गिरी अपने बयानों को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं। कल सुबह ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उनसे मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि वह लगातार तनाव में रह रहे थे। अपने शिष्य आनंद गिरी से उनका पुराना विवाद भी चल रहा था। पिछले दिनों उन्होंने आनंद गिरी को मठ से अलग कर दिया था। हालांकि बाद में सुलह हो गई थी।

नरेंद्र गिरी के निधन की खबर आते ही संत समाज के साथ ही राजनीतिक दलों में भी शोक की लहर दौड़ गई है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने शोक जताते हुए लिखा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य संत महंत नरेंद्र गिरी जी महाराज के देवलोकगमन की दुःखद सूचना मिली। सनातन धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले पूज्य स्वामीजी द्वारा समाज के कल्याण में दिए योगदान को सदैव याद किया जाएगा। ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

शिष्य आनंद गिरि से विवादों के कारण भी यह चर्चा में रहे
इससे पहले भी यह विवादों में रहे हैं। इनके शिष्य आनंद गिरि से विवादों के कारण भी यह चर्चा में रहे थे। यह विवाद संपत्ति को लेकर था जिस बाद में एक आला अधिकारी के माध्यम से सुलझा लिया गया था। पुलिस के आला अधिकारी हर तरह से मामले की जांच करने का आश्वासन दे रहे हैं।

फर्जी अकाउंट से कई विवादित ट्विट किए गए थे
अभी कुछ हफ्ते पहले ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नाम से बने फर्जी अकाउंट से कई विवादित ट्विट किए गए थे। इसे लेकर नरेंद्र गिरी ने काफी आश्चर्य जताया था और उन्होंने दारागंज थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया था। 

कॉंग्रेस के पहले दलित मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी 100 दिनों के लिए किसकी कुर्सी संभालेंगे ?

आजादी के बाद से राज्य पर शासन करने वाले 15 मुख्यमंत्रियों में से कोई भी दलित समाज से नहीं हुआ है। 1966 में राज्य के बंटवारे से पहले पंजाब के तीन मुख्यमंत्री हिंदू मूल के थे। उसके बाद से लगभग सभी मुख्यमंत्री (ज्ञानी जेल सिंह को छोड़कर) जट सिख समुदाय से हुए हैं। जो राज्य की आबादी का 19 फीसदी ही है. 1972 से 1977 तक राज्य के सीएम रहे ज्ञानी जैल सिंह ओबीसी समुदाय के रामगढ़िया समूह से ताल्लुक रखते थे।

चरणजीत सिंह चन्नी आज पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री बने। इंका कार्यकाल आने वाले 100 दिनों का होगा।

चंडीगढ़:

पंजाब का सियासी तूफान अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा। चरणजीत सिंह चन्नी के शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही सुनील जहद के एक ट्वीट ने हलचल मचा दी है जिसमें जकड़ ने पंजाब मामलों के कांग्रेस प्रभारी को शाब्दिक लताड़ लगाई है। ट्वीट के अनुसार रावत ने म्ख्यमंत्री शपथ से पहले ही मानों च्नावोन की घोषणा कर दी है और मुख्यमंत्री के इतर सिद्धू का महिमा मंडन किया है, जो कि न केवल अंचित है अपितु मुख्यमंत्री कि गरिमा को घटाने वाला भी है।

खूब बात यह है की चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे केवल सिद्धू -कैप्टन की आपसी कलह है।

कॉंग्रेस पार्टी दावा कर रही है कि उन्होने पंजाब को पहला दलित मुख्यमंत्री दिया है। यह बात अलग है कि यह पद मात्र 100 दिनों के लिए ही है। कॉंग्रेस इसे आगामी चुनावों में शियाद/बसपा, आआपा और भाजपा पर अपनी विजय बता रहे हैं। लेकिन वह इन तीनों दलों कि तरह यह बताने में असमर्थ रहे हैं कि चन्नी ह आगामी चुनावों में पार्टी का चेहरा होंगे। यह पूछने पर कि चुनावों में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा। यहाँ पर कॉंग्रेस मौन हैं।

शपथा समारोह में राहुल गांधी के आने की बात काही जा रही थी। 20 मिनट बाद भी राहुल गांधी की अनुपस्थिति में ही समारोह आरंभ हुआ। और शपथ ग्रहण पूरा होने त राहुल गांधी नहीं पहुंचे थे। बाद में सरकारी वक्तव्य में देरी का कारण महिंद्रा के बदले सोनी के नाम की कवायद को बताया गया। जो भी हो जब राहुल गांधी पहुंचे तब तक नए मुख्य मंत्री अपने दोनों उपमुख्य मंत्रियों के साथ सभागार से बाहर आ चुके थे। राहुल चरते प्लेन से आने के पश्चात भी देर से आए।

आज के इस शपथ समारोह से कैप्टन अमरीनद्र सिंह ने दूरी बनाए राखी। सोनिया गांधी द्वारा कैप्टन का इस्तीफा मांगा जाना कैप्टन को स्पष्ट संकेत था कि अब काँग्रेस में कैप्टन मान्य नहीं हैं। कैप्टन ने भी विधाया दल कि बैठक का बहिष्कार किया। महामहिम गवर्नर को त्यागपत्र सौंपने ए बाद कैप्टन ने पत्रकारों ओ संबोधित कराते हुए आहा था कि वह कॉंग्रेस पार्टी के शीर्ष परिवार से आहत हैं। अत: न्होने कॉंग्रेस पार्टी कि अंदरूनी कलह को विराम देने की कोशिश की।

कैप्टन के त्यागपत्र से सिद्धू का कद पार्टी के भीतर बढ़ गया। कल त श्जिंदर सिंह का नाम म्ख्यमंत्री के तौर पर सामने आ रहा था। सुख्जिंदर सिंह सिद्धू समर्थक उन 40 विधायकों में से थे जिनहोने कैप्टन के खिलाफ अविश्वास जताया था, और उन्हे कल तक उन्हे सिद्धू और शीर्ष परिवार द्वारा मुख्यमंत्री पद की कुर्सी बतौर इनाम दी जा रही थी। लेकिन कल ही उन्होने पुन: कैप्टन में आस्था जाता दी और न्हे अपना राजनाइत्क गुरु तक कह डाला। नतीजा कल ही मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत चन्नी का नाम आगे ला दिया गया। दलील यह दी गाय की चन्नी दलित हैं।

पंजाब कॉंग्रेस में सिद्धू के बढ़ते कद के कारण ब्रह्म महिंद्रा कैप्टन के बेहद करीबी माने जाने वाले नेता को शपथ समारोह से एन पहले ओपी सोनी के साथ बादल दिया गया। यह भी आलाकमान द्वारा अमरेन्द्र सिंह को दिया गया दूसरा झटका है।

अब चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री के साथ ओपी सोनी और सुख्जिंदर सिंह ने उप मुख्यमंत्री की शपथ ली है। पंजाब में अब सिद्धू समर्थकों की बल्ले बल्ले है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन जी पहुँचे सेक्टर 8 महालक्ष्मी ज्वैलरी की दुकान पर ओर पुलिस प्रशासन से की हमलावरो को जल्द ही पकड़ने की माँग

पंचकुला:

पंचकूला सेक्टर 8 में महालक्ष्मी ज्वैलर के अंदर दिनदहाड़े तीन युवकों ने तेजधार हथियार से किया हमला मालिक के सिर पर
ओर हमलावर आटो में भाग निकले
*पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन जी ने कहा भारतीय जनता पार्टी व जजपा  की सरकार पुरी तरह फेल हो चुकी है पचकुलां व पुरे हरियाणा में गुंडागर्दी का राज है हमलावरो को जल्द नहीं पकड़ा तो सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करेंगे*
चन्द्रमोहन जी साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशी शर्मा, पूर्व पार्षद दलवीर बालमिकी , कांग्रेस पार्षद पद की उम्मीदवार रहीं प्रियंका हुड्डा,

उत्तराखंड, गुजरात के बाद क्या अब खट्टर का नंबर है

भारतीय जनता पार्टी ने कई राज्यों में गैर-प्रमुख जातियों के नेताओं को मुख्यमंत्री का पद सौंपा लेकिन हाल में हुए बदलावों को देखकर लगता है कि बीजेपी का हृदय परिवर्तन हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री को बदला जाना यह बताता है कि पार्टी ने जाति प्रमुख को महत्व देते हुए रणनीति में बदलाव किया है और इसी का कारण है कि विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में चुनाव से पहले वहां की प्रमुख जाति के चेहरों को सीएम की कुर्सी पर बैठाया। उत्तराखंड और कर्नाटक के बाद सबसे ताजा उहादरण गुजरात का है, जहां भाजपा ने बहुसंख्यक और प्रभुत्वशाली पाटीदार समाज की मांग के आगे झुकते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पद से हटा दिया और भूपेंद्र पटेल को नया मुख्यमंत्री बनाया।

चंडीगढ़/नयी दिल्ली:

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को गुरुवार को अचानक दिल्ली बुलाया गया, जहां पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। मुख्यमंत्री खट्टर पीएम से मिलने उनके आवास पर पहुंचे हैं। दोनों नेताओं के बीच एक घंटे तक बैठक चली है। बताया जा रहा है कि इस दौरान वो गृह मंत्री अमित शाह सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों और आरएसएस के कुछ पदाधिकारियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि और मुलाकातों को लेकर खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इनकार किया है। कयास ऐसे भी लगाए जा रहे हैं कि क्या बीजेपी संगठन गुजरात के बाद अब हरियाणा में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बारे में खट्टर ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी को उनके जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर बधाई दी है। हरियाणा सरकार के नए इनीशिएटिव्स को लेकर पीएम मोदी जी से बातचीत हुई है। मेरी फसल मेरा ब्यौरा, मेरा पानी मेरी विरासत, सहित राइट टू सर्विस कमिशन, के सॉफ्टवेयर को लेकर और तमाम नए प्रोजेक्ट्स के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी है।

अपने दिल्ली दौरे को लेकर बोले सीएम खट्टर ने कहा कि दिल्ली दौरे पर और कुछ मुलाकातें नहीं हैं। गुड़गांव से होते हुए कल चंडीगढ़ के लिए वापसी होगी। करनाल की घटना और किसान आंदोलन को लेकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा हुई है। करनाल की घटना की जानकारी दी है. सुप्रीम कोर्ट ने जो रास्ता छोड़ने की बात की है उसकी कमेटी की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी है।

जानकारों की मानें तो बरोदा उपचुनाव में बीजेपी की हार और इसके अलावा निकाय चुनाव में बीजेपी की सोनीपत और अंबाला में हार हुई. किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा बीजेपी बैकफुट पर नजर आई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री मनोहर लाल और गृहमंत्री अनिल विज के बीच कई विवाद सामने आए हैं। दोनों के बीच का विवाद हाईकमान तक भी पहुंचा है।

हालांकि इस मुलाकात का एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ है, चर्चा जोरों पर कि इस बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बदल सकते हैं, इसके साथ ही हरियाणा में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदर तीन बीजेपी शासित राज्यों के 4 मुख्यमंत्रियों को बदल चुकी है. इसकी शुरूआत हुई उत्तराखंड से हुई और बयार चलते-चलते गुजरात तक पहुंची। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि ये हरियाणा का नंबर भी आ सकता है।

मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा गैर-प्रमुख जाति के नेताओं को चुनने के लिए जानी जाती रही है. फिर चाहे बात हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की हो या फिर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की. इन दोनों नेताओं को नरेंद्र मोदी-अमित शाह नेतृत्व ने जाट और मराठा समुदायों के बाहर से चुना था. जिसमें से खट्टर अभी भी मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हैं, हालांकि सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि 2024 में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा मुख्यमंत्री बदल सकती है और गुजरात के तर्ज पर यहां भी किसी जाति-समुदाय प्रमुख चेहरे को राज्य का सीएम बना सकती है. हालांकि, ये सिर्फ भी कयास भर है.

भाजपा पंचकुला ने बनाया इन्द्र कुमार को ज़िला सचिव व सरु डिमरी को महिला मोर्चा ज़िला सचिव

पंचकुला 16 सितंबर:

पंचकुला भाजपा ने संगठन विस्तार करते हुए ज़िला सचिव व महिला मोर्चा ज़िला सचिव के पदाधिकारी घोषित किए। भाजपा   ज़िलाध्यक्ष अजय शर्मा की अगुवाई में भाजपा कार्यालय पंचकुला में ज़िला भाजपा व महिला मोर्चे के रिक्त स्थानों की पूर्ति करने के लिए बैठक हुई। बैठक के बाद अजय शर्मा ने बयान जारी कर कहा की प्रदेश नेतृत्व से विचार विमर्श कर भाजपा ज़िला सचिव व महिला मोर्चा की ज़िला सचिव की घोषणा की। घोषित किए गए नामों में कालका से इन्द्र कुमार को भाजपा ज़िला सचिव व महिला मोर्चा में विस्तार के नाते जिले में सचिव की जिम्मेवारी सरु डिमरी को दी गई है। इन्द्र कुमार  पूर्व में कालका मंडल के अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी निभा चुके है।   भाजपा ज़िलाध्यक्ष अजय शर्मा ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी और विश्वास जताया कि यह पार्टी द्वारा दी गयी ज़िम्मेवारी का नई ऊर्जा के साथ परिपूर्ण करेंगे।। महिला मोर्चा अध्यक्ष वैशाली कंसल ने विश्वास दिलाते हुए कहा की  नवनियुक्त पदाधिकारी अपने अनुभव के माध्यम से पार्टी को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।

प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को खत्म करने पर तुली हुई।चंद्रमोहन

पंचकुला – 16 सितंबर :

प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा की प्रदेश सरकार की गलत और किसान विरोधी नीतियों के कारण आज गन्ना किसान खेत में तैयार खड़ी गन्ने की फसल को लेकर चिंतित है उन्होंने बताया कि किसान गन्ने की फसल को पूरे एक वर्ष में अपने मेहनत करके तैयार करता है। लेकिन फिर भी एक वर्ष तक पेमेंट किसान के खाते में नही आती है प्रतिवर्ष किसान संगठनों को शहजादपुर शुगर मिल के सामने विरोध प्रदर्शन करने पड़ते है लेकिन अबकी बार तो सरकार ने किसानों को इसी चिंता में डाल दिया है की मिल गन्ना लेगा भी या नही क्योंकि जिस प्रकार से मिल द्वारा प्रदेश के अन्य तीन शुगर मिलों को चिट्ठी लिखकर अपने क्षेत्र के किसानों का गन्ना लेने का अनुरोध किया है उससे ये संदेश जाता है की सरकार शहजादपुर शुगर मिल को बंद करना चाहती है पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा की यदि ऐसा हुआ तो हमारे क्षेत्र का हजारों एकड़ गन्ना उत्पादक किसान बर्बाद हो जाएगा क्योंकि इस मिल की प्रबंधक कमेटी ने करोड़ों रुपए हमारे किसानों के देने है और करोड़ों रुपए का किसानों के नाम से क्रॉप लोन लिया हुआ है हैरानी की बात ये है की अगर मिल मालिक मिल बंद करके चला जाता है तो वो किसानों की बकाया राशि कौन देगा और कौन क्रॉप लोन चुकता करेगा। चंद्रमोहन ने बताया कि जो किसान पिछले लगभग एक वर्ष से नए कृषि कानूनों के विरोध में बैठे है उन्हे पता है की अगर कृषि कॉरपोरेट हाथो में चली गई तो वो लोग ऐसे ही शुगर मिलों की तरह किसानों को परेशान करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर मिल बंद करने बारे सरकार की गलत सोच है तो वो किसानों के साथ विरोध प्रदर्शन में हर तरह से साथ देंगे।