पाकिस्तान में चीनियों पर चौथा आतंकी हमला, 3 की मौत, क्या चीन से बिगड़ेंगे रिश्ते ?

विशेषज्ञों के मुताबिक चीन कन्फ्यूशियस इंस्‍टीट्यूट के जरिए दुनियाभर में सांस्‍कृतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही इसके जरिए चीन उस देश के चर्चित विश्‍वविद्यालय में हो रहे शोध और अन्‍य तकनीकों के विकास पर नजर रखता है। इससे जासूसी को भी बढ़ावा देने की भी खबरें आई हैं और यही वजह है कि भारत ने चीनी इंस्‍टीट्यूट को लेकर बहुत सख्‍त न‍ियम बना दिए हैं। इससे पहले गत 26 अप्रैल को बुर्का पहनी बलूच आत्‍मघाती महिला ने खुद को उड़ा दिया था जिसमें 3 चीनी शिक्षक मारे गए थे और 4 अन्‍य घायल हो गए थे। सीनेट रक्षा समिति के अध्यक्ष मुशाहिद हसन ने अखबार डॉन को बताया कि इस घटना के बाद पाकिस्तान में चीनी लोगों की रक्षा करने की सरकार की क्षमता पर चीन का विश्वास गंभीर रूप से हिल गया। इस घटना के बाद चीनी सरकार ने पाकिस्तान में काम कर रहे अपने नागरिकों पर हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

कराची/नयी दिल्ली, डेमोक्रेटिक फ्रंट :   

पाकिस्तान   के विभिन्न हिस्सों में मैंडरिन पढ़ाने वाले चीनी शिक्षक हाल में हुए घातक हमलों के मद्देनजर बीजिंग द्वारा वापस बुलाए जाने के बाद घर के लिए रवाना हो गए हैं। कराची विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।  कुछ हफ्ते पहले बुर्का पहनकर आई बलूच महिला आत्मघाती हमलावर ने पाकिस्तान के प्रतिष्ठित कराची विश्वविद्यालय के अंदर एक वाहन के पास खुद को विस्फोट कर उड़ा लिया। देश की वित्तीय राजधानी में चीनी नागरिकों के खिलाफ इस हमले में कन्फ्यूशियस संस्थान के प्रमुख और उनके स्थानीय चालक सहित तीन चीनी शिक्षकों की मौत हो गई। प्रतिबंधित बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) से संबद्ध मजीद ब्रिगेड ने चीन द्वारा निर्मित कन्फ्यूशियस संस्थान के पास शिक्षकों पर हुए हमले की 26 अप्रैल को जिम्मेदारी ली थी।

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में चीनी नागरिकों को निशाना बनाकर हमला किया गया हो। आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में कब-कब चीनी नागरिकों पर हमला किया गया है।

23 नवंबर 2018

इस दिन चीनी कांसुलेट जनरल, कराची पर हमला किया गया था। इस हमले में 4 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें 2 पुलिस के कर्मी और 2 पाकिस्तान के नागरिक मारे गए थे। घंटों चले ऑपरेशन में तीनों हमलावर मारे गए थे। इस हमले में एक भी चीनी नागरिक न ही घायल हुआ था और न ही मारा गया था।

घटना के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चीन राजनयिक एजेंसियों के खिलाफ किसी भी हिंसक हमले की कड़ी निंदा करता है। चीन ने कहा था कि हमले के बावजूद चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना आगे बढ़ेगी। उस वक्त पाकिस्तान में चीनी दूतावास में मिशन के उप प्रमुख झाओ लिजियन ने हमले के जवाब में ‘समय पर और उचित कार्रवाई’ के लिए पाकिस्तानी सेना और पुलिस की तारीफ की थी।

20 अगस्त 2021

इस दिन बलूचिस्तान में ग्वादर ईस्ट बे एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में एक आत्मघाती हमलावर ने चीनी कर्मियों पर हमला किया था। इस हमले में एक चीनी नागरिक घायल हो गया था और दो स्थानीय बच्चों की मौत हो गई थी।

हमले के बाद चीन ने कहा था कि पाकिस्तान से घायलों का उचित इलाज करने, हमले की गहन जांच करने और अपराधियों को कड़ी सजा देने की मांग की गई। इसके साथ ही चीन ने कहा कि हाल ही में पाकिस्तान में सुरक्षा की स्थिति गंभीर रही है। पाकिस्तान में चीनी दूतावास ने चीनी नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की थी।

14 जुलाई 2021

खैबर पख्तूनख्वा के ऊपरी कोहिस्तान जिले में दासु हाइड्रोपॉवर में काम कर रहे चीनी श्रमिकों को ले जा रहे एक बस पर हमला किया गया था। इस हमले में कुल 13 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें 4 पाकिस्तानी नागरिक थे और 9 चीनी। इस हमले में 28 लोग घायल हो गए थे। इस हमले के बाद चीन ने जमकर पाकिस्तान को लताड़ लगाई थी।

पाकिस्तान ISI की मदद से बब्बर खालसा और गैंगस्टर लखविंदर ने दागा रॉकेट, पुलिस ने किया खुलासा

पंजाब के DGP वी. के. भवरा ने कहा, ने कहा, घटना के पीछे की साजिश का पता लगा लिया गया है और पाकिस्तान की आईएसआई के इशारे पर आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल और गैंगस्टरों के बीच सांठगांठ का मामला सामने आया है।  पंजाब के मोहाली में पुलिस के इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर RPG हमले में प्रमुख रूप से इंसान लखबीर सिंह लांडा की पहचान की है। यह हरिंदर सिंह रिंडा का करीबी सहयोगी है । यह तरनतारन जिले का रहने वाला है. यह 2017 में कनाडा चला गया था। इसके पाकिस्तान ISI से करीबी रिश्ते हैं।  

सारिका तिवार, डेमोक्रेटिक फ्रंट,चंडीगढ़ :  

पंजाब पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि मोहाली में उसकी खुफिया ईकाई के मुख्यालय में विस्फोट का मुख्य साजिशकर्ता तरनतारन ज़िले का रहने वाला लखविंदर सिंह लांडा है। जो कि एक गैंगस्टर है और 2017 में कनाडा चला गया था। वह बब्बर खालसा के आतंकी हरविंदर सिंह रिंडा का करीबी सहयोगी है। जिसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से करीबी रिश्ते हैं।  पंजाब पुलिस ने कहा कि पाकिस्तान आईएसआई के समर्थन से बीकेआई (बब्बर खालसा इंटरनेशनल) और गैंगस्टर द्वारा इस रॉकेट हमले को अंजाम दिया गया.

पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए आरोपितों में तरनतारन का कंवर बाठ, बलजीत कौर, बलजिंदर रैंबो, अनंतदीप सोनू और जगदीप कंग शामिल हैं। छठा आरोपित निशान सिंह है, जिसे फरीदकोट पुलिस ने दूसरे केस में गिरफ्तार कर रखा है । इस केस में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

राकेट दगाने वाले तरनतारन के चढ़त सिंह का साथ नोएडा के मुहम्मद नसीम आलम और मोहम्म्द सरफराज ने दिया। दोनों को अरेस्ट किया गया है। अलाम और सरफराज दोनों मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। डीजीपी भावरा ने कहा कि उक्त दोनों से पूछताछ की जा रही है। जल्द ही इस बारे में जानकारी दी जाएगी।

मोहाली में पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय में ग्रेनेड हमले के मामले में एसएसओसी की टीम ने जगदीप कंग को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। जगदीप को शुक्रवार को मोहाली कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 9 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जगदीप कंग पंजाबी गायक करन औजला का नजदीकी बताया जा रहा है।
वहीं, हमले के मामले में मुख्य आरोपित निशान सिंह को मोहाली लाया गया है, जहां पर उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। निशान सिंह ने बताया है कि उसने पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से आए राकेट लांचर को हमलावरों को सौंपा था और हमलावर इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर हमला करने के बाद उत्तर प्रदेश की ओर भागे हैं। इसके बाद पंजाब पुलिस की तीन टीमें उत्तर प्रदेश में लगातार हमलावरों की तलाश कर रही हैं और छापेमारी जारी है।

‘माता सीता जयंती ‘ : वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की नवमी

हर साल वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। इस दिन को सीता नवमी और जानकी जयंती के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में सीता नवमी का महत्व भी राम नवमी के समान ही बताया गया है। इस बार सीता नवमी का पर्व 10 मई को पड़ रहा है। सीता नवमी को रामनवमी की तरह विशेष माना जाता है। इस दिन मां सीता और भगवान श्रीराम की पूजा करने से हर तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है। 

राजविरेन्द्र वशिष्ठ, डेमोक्रेटिक फ्रंट, धर्म /संस्कृति डेस्क, चंडीगढ़:

सनातन धर्म के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी मनाई जाती है। इस साल ये पर्व 10 मई को आ रहा है। इसे भगवान श्रीराम की पत्नी सीता का प्राकट्य दिवस माना जाता है। कहते हैं कि मां सीता ने इसी दिन धरती पर अवतरण लिया था। सीता नवमी के दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और श्रीराम एवं सीता की पूजा करती हैं। कहते हैं कि इस दिन व्रत रखने से 16 महान दान का फल मिलता है। आइए जानते हैं क्यों मनाई जाती है सीता नवमी और क्या है मां सीता से जुड़ी पौराणिक कथा?

नेपाल में खासकर इस पर्व को बड़े उत्साह से मनाया जाता है। नेपाल के जानकी मंदिर में इस दिन बहुत बड़ा आयोजन किया जाता है। कहा जाता है कि आज के दिन ही माता सीता भूमि के गर्भ से प्रकट हुई थी और इसी कारण इसे जानकी जयंती के नाम से जाना जाता है।

रामायण में ये कथा बहुत प्रसिद्द है कि एक बार जब जनकपुरी में भयानक अकाल पड़ा तो ऋषियों ने राजा जनक को भूमि यज्ञ करने की सलाह दी ताकि वर्षा हो सके। यज्ञ के पश्चात राजा जनक को स्वर्ण के हल से पृथ्वी को जोतना था। जब वे ऐसा कर रहे थे तो उनका हल एक जगह अटक गया। जब उस जगह को खोदा गया तो वहां से एक कन्या का प्राकट्य हुआ जिसे राजा जनक ने अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया। उनकी पुत्री होने के कारण उस कन्या का नाम जानकी पड़ा और चूँकि उनका प्रादुर्भाव भूमि के खुदाई (सीतने) के कारण हुआ था, उनका एक नाम सीता भी पड़ा। बचपन में ही सीता ने भगवान् शिव का महान पिनाक धनुष उठा लिया था जिसे कभी कोई हिला भी नहीं पाया था। इसे देख कर राजा जनक ने सीता के स्वयंवर में ये शर्त रखी कि जो योद्धा पिनाक पर प्रत्यञ्चा चढ़ा देगा उसी से सीता का विवाह किया जाएगा। सभी राजाओं के असफल होने के बाद अंततः श्रीराम ने धनुष को भंग कर सीता से विवाह किया।

कम्ब रामायण के अनुसार सीता पिछले जन्म में वेदवती नाम की कन्या थी जो भगवान् विष्णु को अपने पति के रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थी। एक बार रावण घूमते हुए वहाँ आया और वेदवती की सुंदरता पर मुग्ध हो गया। वेदवती द्वारा रावण का प्रणय निवेदन अस्वीकार करने के बाद रावण ने उसके साथ दुष्कर्म करना चाहा जिससे बचने के लिए उसने यज्ञ-कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए। उसके इस त्याग के कारण भगवान नारायण ने उसे वरदान दिया कि अगले जन्म में वो उन्हें पति के रूप में पा सकेगी। मृत्यु से पहले उसने रावण को श्राप दिया कि अगले जन्म में वो उसकी मृत्यु का कारण बनेगी। साथ ही उसने ये श्राप भी दिया कि अगर आज के पश्चात रावण किसी भी स्त्री के साथ बिना उसकी इच्छा के रमण करेगा तो तत्काल उसकी मृत्यु हो जाएगी। यही कारण था कि रावण ने सीता का हरण करने के बाद भी उसके साथ कोई दुर्व्यहवार नहीं किया। कई मान्यताओं के अनुसार, सीता रावण की पुत्री थी जिसके जन्म के तुरंत बाद रावण ने अनिष्ट की आशंका से उसका त्याग कर दिया था क्यूँकि उसे आशंका थी कि वेदवती ही सीता का जन्म लेकर आयी है। 

सीता नवमी की पौराणिक कथा के अनुसार मारवाड़ क्षेत्र में एक वेदवादी श्रेष्ठ धर्मधुरीण ब्राह्मण निवास करते थे। उनका नाम देवदत्त था। उन ब्राह्मण की बड़ी सुंदर रूपगर्विता पत्नी थी, उसका नाम शोभना था। ब्राह्मण देवता जीविका के लिए अपने ग्राम से अन्य किसी ग्राम में भिक्षाटन के लिए गए हुए थे। इधर ब्राह्मणी कुसंगत में फंसकर व्यभिचार में प्रवृत्त हो गई। जब उसकी मृत्यु हुई तो उसका अगला जन्म चांडाल के घर में हुआ। पति का त्याग करने से वह चांडालिनी बनी, ग्राम जलाने से उसे भीषण कुष्ठ हो गया तथा व्यभिचार-कर्म के कारण वह अंधी भी हो गई। अपने कर्म का फल उसे भोगना ही था। इस प्रकार वह अपने कर्म के योग से दिनों दिन दारुण दुख प्राप्त करती हुई देश-देशांतर में भटकने लगी। एक बार दैवयोग से वह भटकती हुई कौशलपुरी पहुंच गई। संयोगवश उस दिन वैशाख मास, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि थी। उस पवित्र दिन भूख-प्यास से व्याकुल वह दुखियारी लोगों से भोजन के लिए प्रार्थना करने लगी।

रोते-रोते वह स्त्री श्री कनक भवन के सामने बने एक हजार पुष्प मंडित स्तंभों से गुजरती हुई उसमें प्रविष्ट हुई। जहाँ एक भक्त ने उससे कहा- देवी! आज तो सीता नवमी है, भोजन में अन्न देने वाले को पाप लगता है, इसीलिए आज तो अन्न नहीं मिलेगा। कल पारणा करने के समय आना किंतु वह नहीं मानी। अधिक कहने पर भक्त ने उसे तुलसी एवं जल प्रदान किया। वह पापिनी भूख से मर गई। किंतु इसी बहाने अनजाने में उससे सीता नवमी का व्रत पूरा हो गया। व्रत पूरा होने से देवी ने उसे समस्त पापों से मुक्त कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से वह पापिनी निर्मल होकर स्वर्ग में आनंदपूर्वक अनंत वर्षों तक रही। तत्पश्चात् वह कामरूप देश के महाराज जयसिंह की महारानी काम कला के नाम से विख्यात हुई। उसने अपने राज्य में अनेक देवालय बनवाए, जिनमें जानकी-रघुनाथ की प्रतिष्ठा करवाई। 
अत: सीता नवमी पर जो श्रद्धालु माता जानकी का पूजन-अर्चन करते है, उन्हें सभी प्रकार के सुख-सौभाग्य प्राप्त होते हैं। श्रीजानकी नवमी पर श्रीजानकी जी की पूजा, व्रत, उत्सव, कीर्तन करने से उन परम दयामयी श्रीमती सीता जी की कृपा हमें अवश्य प्राप्त होती है तथा इस दिन जानकी स्तोत्र, रामचंद्रष्टाकम्, रामचरित मानस आदि का पाठ करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

न्यूयार्क, USA पहुंचे हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री भाई चंद्रमोहन

न्यूयार्क/पंचकुल :

जॉन एफ कैनेडी ईन्टरनेशनल एयरपोर्ट,न्यूयार्क USA पर हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री भाई चंद्रमोहन का स्वागत वहां के निवासी और समाजसेवी दीपक बंसल जी व उनकी टीम द्वारा पूर्व चेयरमैन विजय बंसल जी के आग्रह पर किया गया

दीपक बंसल ने कहा कि *चंद्रमोहन* जी के न्यूयार्क पहुंचने पर उनकी टीम द्वारा अभिनंदन करना उनके लिए गर्व की बात है।चंद्रमोहन जी का हरियाणा के विकास में अहम योगदान है।उनके न्यूयार्क प्रवास के दौरान उनकी टीम चंद्रमोहन जी के साथ रहेगी।

दीपक बंसल जी, USA में लॉन्ग आइलैंड पंजाबी सर्कल द्वारा हिक्सविले में आयोजित होने वाले विशाल वैसाखी मेले के कोर टीम के सदस्य होने के नाते सभी भारतीयों की विदेश में सहायता भी करके मानवता का परिचय देते है।

संबोधन में भावुक हुए इमरान खान, भारत को बताया खुद्दार देश

इमरान ने कहा, खुलेआम हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है, भेड़ बकरियों की तरह नेताओं को होटलों में बंद किया जा रहा है। ये कौन सी जम्हूरियत है। इंसाफ के सबसे बड़े फोरम से हम उम्मीद करते थे कि वो इसका संज्ञान लेगा। आज पाकिस्तान का मजाक बन गया है। पैसे के लिए ये लोग अपना जमीर बेच रहे हैं। रिजर्व सीट वाले भी बिक रहे हैं, जबकि इसे तो पार्टी वाले तोहफे के रूप में देते हैं। 

  • इमरान खान ने अवाम के नाम संबोधन में अमेरिका के खिलाफ जमकर बयानबाजी की
  • बोले- मैंने अमेरिका का विरोध किया, इसलिए हटाने की कोशिश की जा रही
  • विपक्षी पार्टियों पर लगाया बिकने का आरोप, भारत की खूब तारीफ की

इस्लामाबाद/नयी दिल्ली, डेमोक्रेटिक फ्रंट :  

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से निराशा जताई, जिसमें नेशनल असेंबली को भंग करने और राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को उनके द्वारा दी गई सलाह को असंवैधानिक करार दिया गया है।  राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में उन्होंने कोर्ट के फैसले पर अफसोस जताते हुए कहा कि विदेशी साजिश की बात को कोर्ट ने क्यों नहीं देखा, कोर्ट को सबूत देखने चाहिए थे।

उन्होंने आगे कहा, “देश में खुलेआम सांसदों की खरीद फरोख्त हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट को इसे देखना चाहिए था. विपक्ष के लोग बिके हुए हैं।” अपने संबोधन के दौरान इमरान खान ने एक बार फिर भारत की तारीफ की। वे हिन्दुस्तान का नाम लेकर भावुक हुए और कहा कि भारत में उन्हें बहुत इज्जत मिली। भारत को खुद्दार देश बताते हुए उन्होंने वहां की आजाद विदेश नीति को भी सराहा. उन्होंने कहा, “किसी की जुर्रत नहीं की भारत के खिलाफ साजिश करे।  दुनिया में भारत की इज्जत है, लेकिन हम गुलाम मुल्क।”

इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान में खुलेआम नेताओं के जमीर खरीदे जा रहे हैं। भेड़ बकरियों की तरह नेताओं को खरीदा जा रहा है। बच्चे-बच्चे को पता है कि नेताओं को खरीदा जा रहा है। पाकिस्तान की डेमोक्रेसी का मजाक बन गया है। बनाना रिपब्लिक में भी ऐसा नहीं होता है। कौम जिसकी 60 फीसदी से ज्यादा आबादी युवाओं की है। फ्यूचर को हम गाइड नहीं करेंगे तो वो भी यह समझेंगे कि मुल्क की लीडरशिप सही नहीं हैं। नेताओं को खरीदने की शुरुआत शरीफ भाइयों ने की थी।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में हमारे राजदूत की मुलाकात वहां के एक वरिष्ठ अधिकारी से हुई। इस दौरान अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इमरान खान को रूस नहीं जाना चाहिए था। अगर इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव से बच जाते हैं तो पाकिस्तान को मुश्किलों का सामना करना होगा। लेकिन, अगर इमरान खान हार जाते हैं तो पाकिस्तान को माफ किया जा सकता है। इमरान खान ने आरोप लगाया कि अमेरिका को पता है कि पाकिस्तान में कौन सत्ता में आने वाला है।

हम 22 करोड़ लोग हैं, एक देश हमारे लोगों को हुक्म दे रहा है कि अगर आपका पीएम बच जाता है तो हम माफ कर देंगे। उन्होंने कहा कि अगर हमे ऐसे ही जिंदगी गुजारनी है तो हम आजाद क्यों हुए थे। हमारी पार्टी से सांसदों को भी एकाएक पता चलता है कि इमरान खान बुरे आदमी हैं। मीडिया में भी पैसा चल रहा है। मीडिया भी जश्न मना रही है कि इमरान खान की सरकार काफी बुरी है।

उन्होंने कहा कि हमें पता चला है कि अमेरिका के डिप्लोमेट्स पाकिस्तानी राजनेताओं से मिल रहे हैं। चंद महीने पहले ही उन्होंने नेताओं को बुलाकर कहा था कि इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने वाला है। ऐसे में मेरा कौम से सवाल है कि हम किस तरह की सरकार चाहते हैं। शहबाज शरीफ पर अमेरिका का पिछलग्गू होने का आरोप लगाया। इमरान ने दावा किया कि मेरे बारे में पूरा पाकिस्तान जानता है। मैने कोई जुर्म नहीं किया है।

इमरान खान ने कहा कि ड्रोन हमलों का विरोध किया। अफगानिस्तान में बातचीत का समर्थन किया। इराक में हमले का विरोध किया। पाकिस्तान में 400 ड्रोन हमले हुए, इसके खिलाफ मैंने ही धरने दिए थे और विरोध किया था। अमेरिका को पता है कि इमरान खान की कोई जायदाद विदेशों में नहीं है, कोई बैंक बैलेंस नहीं है। ऐसे में इमरान खान को दबाया नहीं जा सकता है। ऐसे में वे विपक्षी पार्टियों के जरिए हमें हटाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 4000 किलोमीटर की दूरी से एक आदमी रिमोट का बटन दबाता है और यहां लोग मारे जाते हैं। पाकिस्तान में 400 ड्रोन हमले किए गए। शादियों में, मदरसों पर ड्रोन हमले किए गए। हमारी विपक्षी पार्टियां पूरी तरह से अमेरिका के नियंत्रण में हैं।

हमारे साथ ही भारत आजाद हुआ था। भारत से हमें रेस्पेक्ट मिला प्यार मिला। मुझे बहुत अफसोस है कि आरएसएस के विचारधारा के कारण और कश्मीर में जो किया उसके कारण हमारे रिश्ते अच्छे नहीं हैं। भारत खुद्दार कौम है, कभी किसी की जुर्रत नहीं है कि वहां ऐसी बात करें। किसी सुपर पावर की हैसियत नहीं है कि वे भारत के खिलाफ कुछ करें। मैं भी वैसा ही सोचना हूं। मैं अपने लोगों को कुर्बान नहीं कर सकता। 35 लाख लोगों को अपना घरबार छोड़कर जाना पड़ा। 80 हजार लोग मारे गए। डॉलर्स के लिए हमें युद्ध में फंसा दिया गया। अगर हम अमेरिका से पैसे लिए बिना आतंक के खिलाफ युद्ध में गए होते तो हम अफगानिस्तान में अपने भाइयों को मदद करते।

खुफिया एजेंसियों को नहीं मिला ‘विदेशी साजिश’ का कोई सबूत, इमरान खान का दावा निकला झूठा

पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्‍ट्र के नाम संबोधन में अपनी सरकार के खिलाफ एक बार फिर ‘अंतरराष्‍ट्रीय साजिश’ की आशंका जाहिर की तो इस क्रम में उन्‍होंने अमेरिका का नाम भी लिया। इमरान खान ने अमेरिका का जिक्र तब किया, जब वह अपनी सरकार के खिलाफ ‘अंतरराष्‍ट्रीय साजिश’ के साक्ष्‍य के तौर पर एक ‘धमकीभरे खुफिया पत्र’ का जिक्र कर रहे थे, जिसका उल्‍लेख उन्‍होंने रविवार की रैली के दौरान भी किया था। र विवार को इस्‍लामाबाद में आयोजित जनसभा के दौरान उन्‍होंने अपनी जेब से एक कागज का टुकड़ा निकाला था और भीड़ के सामने इसे लहराते हुए दावा किया गया था कि यह उनकी सरकार गिराने के लिए की गई ‘अंतरराष्‍ट्रीय साजिश‘ का साक्ष्‍य है। इमरान खान ने इस पत्र के बारे में पाकिस्‍तान के कुछ पत्रकारों से भी बात की है, लेकिन अब तक उन्‍होंने यह पत्र मीडिया को नहीं दिखाया है।

नयी दिल्ली/इस्लामाबाद, डेमोक्रेटिक फ्रंट :

पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को ऐसा कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार को अस्थिर करने के लिए “विदेशी साजिश” का उनका दावा सही है। हालात से वाकिफ एक सूत्र ने मंगलवार को रॉयटर्स को यह जानकारी दी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर ने कहा था कि नागरिक अधिकारियों, सैन्य और खुफिया प्रमुखों से बने एक उच्च निकाय राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने सरकार के खिलाफ एक योजना की पुष्टि की थी।

इस तरह के मामलों से अवगत कराए गए अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां ​​​​इमरान खान के समान निष्कर्ष पर नहीं पहुंची थीं और उन्हें अपनी स्थिति से अवगत कराया था। पिछले हफ्ते, इमरान खान ने अपना संसदीय बहुमत खो दिया और उन्हें एकजुट विपक्ष से अविश्वास मत का सामना करना पड़ रहा था, जिसे रविवार को हारने का अनुमान था।

प्रस्ताव को संसद के डिप्टी स्पीकर ने ‘विदेशी साजिश’ और ‘असंवैधानिक’ बताते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद पीएम इमरान के निर्देश पर राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने संसद भंग कर दी। दरअसल, इमरान ने कथित पत्र को 27 मार्च को एक सार्वजनिक रैली में लहराते हुए ऐलान किया था कि उन्हें सत्ता से बेदखल करने के लिए विदेशी साजिश रची गई थी। प्रधानमंत्री इमरान ने अपने खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनकी सरकार को गिराने के लिए विदेशी पैसे से पोषित चाल का एक उदाहरण है।

पाकिस्तान में मुश्किलों से जूझ रहे प्रधानमंत्री इमरान खान ने बीते 30 मार्च को उस पत्र का कुछ ब्योरा वरिष्ठ पत्रकारों और कैबिनेट सहयोगियों से साझा किया था जिसे उन्होंने ‘विदेशी साजिश पत्र’ कहा है। उन्होंने कहा था कि यह पत्र उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के पहले मिला था। इस पत्र में भी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का जिक्र है।

अमेरिका की चेतावनीः रूस से लेनदेन बढ़ाने का भारत को हो सकता है “बड़ा खतरा”

अमेरिकी प्रतिबंधों का असर रूस की कच्चा तेल बेचने की क्षमता पर हुआ है। दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत रूस में होता है। पेरिस स्थित इंटरनेशनल ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि प्रतिबंध और खरीददारों द्वारा रूस से तेल खरीदने में परहेज के चलते अप्रैल में रोजाना लगभग 30 लाख बैरल कम तेल बाजार में पहुंचेगा। प्रवक्ता ने कहा कि बाइडेन सरकार भारत और यूरोपीय देशों के साथ मिलकर इस बात की कोशिश कर रही है कि यूक्रेन युद्ध का दुनिया के ऊर्जा बाजार पर कम से कम असर हो और साथ ही रूसी ऊर्जा पर निर्भरता घटाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

नई दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :  

रूस के मुद्दे पर अमेरिका धीरे-धीरे भारत पर दबाव बढ़ाने लगा है। रूस की तरफ से भारत को सस्ती दर पर कच्चा तेल देने के प्रस्ताव और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के नई दिल्ली पहुंचने के कुछ ही घंटे पहले अमेरिका ने कहा है कि भारत को रूस से ज्यादा ईंधन खरीदने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर भारत ऐसा करता है तो इसका द्विपक्षीय रिश्तों पर भी असर हो सकता है। यह संदेश भारत दौरे पर आए अमेरिका के डिप्टी एनएसए दलीप सह ने भारतीय नेताओं के साथ बातचीत में दिए।

मार्केट से कम दाम पर रूस से लगातार कच्चा तेल खरीद रहे भारत को अमेरिका ने चेतावनी दी है। अमेरिका ने कहा है कि बड़ी मात्रा में रूस से कच्चे तेल की खरीद नई दिल्ली को महंगी पड़ सकती है।

पाक पीएम इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश, 31 मार्च को फैसला

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को हटाने के लिए सोमवार को पाकिस्तान की संसद में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। शहबाज शरीफ द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर गुरुवार 31 मार्च को बहस शुरू होगी। अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद ही नेशनल एसेंबली की कार्यवाही 30 मार्च तक के लिए स्थगित हो गई। पाकिस्तान के स्पीकर कासिम सूरी के हवाले से बताया गया कि 31 मार्च की शाम 4 बजे अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होगी और मतदान कराया जाएगा।

नई दिल्ली: 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को पद से हटाने के लिए सोमवार को विपक्षी दलों ने संसद में अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। संसद में अविश्वास प्रस्ताव को विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने पेश किया। अब इस प्रस्ताव पर गुरुवार को बहस शुरू होगी और अविश्वास प्रस्ताव पर सात दिन के भीतर मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी। इमरान खान सरकार के खिलाफ पेश प्रस्ताव को 161 सांसदों ने समर्थन किया है। इमरान सरकार के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ ने पेश किया। उन्होंने कहा कि देश की जनता का इमरान खान नियाजी की सरकार पर भरोसा नहीं रहा गया है, ऐसे में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराया जाना चाहिए।

इमरान खान सरकार के खिलाफ पेश प्रस्ताव को 161 सांसदों ने समर्थन किया है। इमरान सरकार के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ ने पेश किया। उन्होंने कहा कि देश की जनता का इमरान खान नियाजी की सरकार पर भरोसा नहीं रहा गया है, ऐसे में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराया जाना चाहिए।

Two-day International Conference on “Narratives of Nation: Contemporary Literary, Cultural, and Theoretical Debates” held at Central University of Punjab

  •        Indian and international scholars expressed their views during this two-day International Conference

Bathinda, March 26: 

The Dept. of English at the Central University of Punjab, Bathinda (CUPB) organized a two-day international conference on the theme “Narratives of the Nation: Contemporary Literary, Cultural, and Theoretical Debates” from March 24—25, 2022. The Keynote speakers in this programme were Prof. Martin Puchner, Harvard University  (U.S.A) and Prof. Dhananjay Singh, Jawaharlal Nehru University (India).

In the inaugural session, Prof. Martin Puchner from Harvard University shared his views on “Narratives of the Nation” and “How Literature Shaped History”. He stated that a Nation is an imaginary concept and it needs additional tools to keep its people together. He added that storytelling has evolved as one of the most powerful tool and the invention of paper and printing technologies has helped our ancestors develop literature and transfer their knowledge, beliefs, and cultural traits to future generations. He discussed the role of foundational texts available in sacred books and text fundamentalists in shaping social beliefs and shed light on the importance of literature on the changing planet.

On the second day, Prof. Dhananjay Singh from Jawaharlal Nehru University delivered a talk on “Nation and Darshan in Thought and Tradition”. He understood nation as a substance, an attribute and a perspective derived from Bharata’s Nātyaśastra. By bringing into discussion several ideas of nation as proposed by western and Indian thinkers like Benedict Anderson, Raja Rao, Vijay Mishra, he emphasized on the postcolonial and diasporic view of Nation. Prof. Singh reiterated that there is a need to come away from the colonial idea of nation state, since India stems as a community from the idea of the Self. To understand self, he referred to Chhandogyopanishad and linked it to the idea that India is a darshan, a seen space rather than an imagined concept. He raised the question of whether a nation as an invisible entity can be a ground of experience.

In his presidential address, Prof. Raghavendra P Tiwari, the Vice Chancellor, emphasized that India has a rich tradition, filled with principles and values that form the ethos of the land. As an ancient civilization, India has provided the world with powerful national narratives which would always be beneficial for the entire humanity, such as: God is one; Vasudhaiva Kutumbakam (the whole world is one family); Sarve Bhavantu Sukhinah (may all be happy); and the theory of minimalism (all natural resources belong to God and an individual need to use it judiciously). He expressed hope that the deliberations made in this workshop would help the participants to understand the concept of nation beyond physical boundaries and contribute to making this planet a better place to live.

This international conference featured five technical sessions during which faculty and research scholars, from India and abroad, presented 20 research papers. Different sub-themes , such as Silence and Resilience; Imagining Gender and Nation through Narratives of Partition by Women; Critiquing Nation; The Concept of Nation; Earth and Moon as Nations; Epistemology in Wisdom Literature; Challenges to National Identity etc., were covered.

During this programme, Prof. Ramakrishna Wusirika, Dean In-charge, Academics, and Prof. Anjana Munshi, Dean Research, expressed gratitude towards the keynote speakers, relayed the observations they made during the plenary sessions, and congratulated the paper presenters. Dr. Shahila Zafar, Head, Department of English, Central University of Punjab, gave a formal vote of thanks. She complimented the members of Organizing Committee, Prof. Alpna Saini, Dr. Vipan Pal Singh (Coordinator), Dr. Dinesh Babu P., Dr. Prithvi Raj, along with the PhD Research Scholars- Anusha Hegde, Ankit Sharma, Don Joseph, Gurjeet Singh and Suraj Soni- for the smooth execution of this workshop.

पाकिस्तान के ‘वजीर – ए – आजम’ इमरान खान इन दिनों अपनी सरकार बचाने के लिए संघर्ष में

खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में एक रैली को संबोधित करते हुए इमरान खान ने कहा कि वह पड़ोसी देश भारत की सराहना करेंगे क्योंकि उसके पास अपनी एक ”स्वतंत्र विदेश नीति” रही है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत क्वाड समूह का हिस्सा है और उसने अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से कच्चा तेल आयात किया। खान ने कहा कि उनकी विदेश नीति भी पाकिस्तानी जनता के हित में रहेगी।

नयी दिल्ली/इस्लामाबाद :

पाकिस्तान के वजीर – ए – आजम इमरान खान इन दिनों अपनी सरकार बचाने के लिए संघर्षकर रहे हैं। पूरा विपक्षी दल इस वक्त इमरान खान को सत्ता से बेदखल करने के लिए उतारू है। दूसरी ओर इमरान खान भी पूरा जोर लगा रहे हैं कि उनकी सरकार बच जाए। अब इमरान खान का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो विपक्षी पार्टियों को गालियां दे रहे हैं। इतना ही नहीं अपनी बात में उन्होंने पीएम मोदी को भी घसीटा।

पाकिस्तान में अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान खुद पर हो रहे हमलों के बाद फ्रंटफुट पर आ गए हैं। विपक्षी दलों पर ताजा कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि तीन विपक्षी नेता डकैत हैं। खैबर पख्तूनख्वा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब नवाज शरीफ सत्ता में थे, तो उन्होंने कभी भी भारतीय प्रधान मंत्री के उस बयान का पलटवार नहीं किया, जब उन्होंने पाकिस्तानी सेना को आतंकवादी तक कह दिया था। 

इमरान खान ने कहा कि वे मुझसे कहते हैं कि अगर मैं उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को बंद नहीं करता तो वे मेरी सरकार गिरा देंगे। लेकिन मैं उनसे कहता हूं कि अगर मुझे इसके लिए अपनी जान देनी पड़े तो भी मैं मामलों को बंद नहीं करूंगा। मैं आपके खिलाफ राजनीति नहीं कर रहा हूं। 

बीते रोज भारतीय मिसाइल के पाकिस्तान में घुसने की घटना का जिक्र करते हुए इमरान खान ने कहा, जब नवाज शरीफ सत्ता में थे, तो उन्होंने भारतीय प्रधान मंत्री के खिलाफ कभी बात नहीं की, जो उस समय पाकिस्तानी सेना को आतंकवादी कह रहे थे। नवाज ने विदेश कार्यालय को भारत के खिलाफ बयान जारी नहीं करने का निर्देश दिया था। जिस नेता की संपत्ति विदेश में है, वह कभी भी ऐसी स्वतंत्र विदेश नीति नहीं बनाएगा जो देश और उसके अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित हो। लेकिन न तो मैं कभी किसी के सामने झुकी हूं और न ही कभी आपको किसी के सामने झुकने दूंगा।

याचिका में अनुच्छेद 63-ए के तहत अयोग्यता की दो व्याख्याओं पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें सदस्य को बिना किसी प्रतिबंध के साधारण डी-सीटिंग और आजीवन अयोग्यता के साथ-साथ गलत वोट के शून्य प्रभाव शामिल हैं। इमरान खान की पार्टी इस बात की कोशिश में है कि गलती करने वाले सांसद के वोटों की गिनती नहीं की जाए, ताकि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में असंतुष्ट सांसदों के वोट प्रधानमंत्री के खिलाफ पड़ने वाले वोटों में न जुड़ें।   

ये वोट महत्वपूर्ण हैं क्योंकि विपक्ष को प्रधानमंत्री को हटाने के लिए 172 वोटों की जरूरत है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के लगभग 100 सांसदों ने 8 मार्च को नेशनल असेंबली सचिवालय के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रधानमंत्री खान के नेतृत्व वाली सरकार देश में आर्थिक संकट और बढ़ती मुद्रास्फीति के लिए जिम्मेदार है।