PratigyaPatra: Swaraj India’s Madhu Anand reveals vision to transform Panchkula

DATE: 12/10/2019

MadhuAnand, Panchkula candidate of Swaraj India, held a press conference at the party office in Sector-6, Panchkula. With members of the party including ShaliniMalviya, Shailendra Kumar, and Pardeep Tiwari, Anand revealed the PratigyaPatra(election promises) of her candidature and shed light on the plans laid out for the development of Panchkula.

PratigyaPatrahighlights premier issues of the region such as jobs, education, health, colonies, civic amenities, and public security. This has been devised on the basis of the regular meetings of Anand with different sections of society and city in the previous months. With the aim to improve the prevailing conditions, Anand is looking to transform Panchkula into something bigger than just a satellite city of Chandigarh.

MadhuAnandstated that PratigyaPatra is not just another manifesto. It is an attempt to highlight the key issues of Panchkula along with their suggested, solution-centric framework. For instance, targeting the health sector, she said that there is only one government hospital in Panchkula, which is facing overcrowding issues. Anand added that the party will aim to build another hospital and strive to increase the number of doctors and machinery in the existing facility.

ShaliniMalviya expressed that rural Panchkula is in dire need of development and a voice that falls on the ears of the government. Previously, various manifestos have highlighted the same issue, but there has been negligible progress. Rather, these issues have become a veil for public money theft as crores sanctioned for issues like the improvement of primary schools, etc, remain unaccounted.

Emphasizing on the issues specific to rural regions, Anand said that she aims to improve the condition of the farmers by ensuring that they receive at least 1.5 times of their total cost of production for the sale of their crops. Furthermore, she would ensure that the government makes a separate functional body to address he compensation issues in an event of crop destruction.

Colonies and slums are not only deprived of basic services such as water pipes, health, hygiene, etc, but they continue to live in the fear of getting demolished, said Tiwari. The Pradhan MantriAawasYojana has an underlying philosophy of better housing. However, this is based on the in situ development of such colonies and it is being violated to the extent of forced removal of people from the city. Along with this, drugs, domestic violence, and increasing student dropout rates continue to impact countless lives.

Identifying the link between common issues, MadhuAnand added that the increasing number ofdropouts can be associated with increasing drug abuse, which, in turn, has a direct impact on the safety of women and senior citizens. To tackle this prolonged issue from its roots, the party would ensure that no liquor shop is established in a locality without the permission of women along with strong steps to curb the rising influence of drugs on the youth.

सशक्त हिन्दू – सशक्त भारत

रामचंद्र अग्रवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता

कुछ समय पहले पूज्य शंकराचार्य जी से मैंने पूछा था कि भारतीय समाज में कई जातियों व संप्रदाय हैं ऐसे हालात में देश में एकता कैसे लाई जा सकती है तो उन्होंने जवाब दिया था कि यदि वर्ण व्यवस्था पुन: कर्म प्रधान हो जावे जैसा के प्राचीन भारत में थी तो जातिगत भेदभाव समाप्त हो जाएगा व सांप्रदायिक एकता भी आ जावेगी। यदि माता-पिता अपने बेटे बेटियों की शादी के लिए match स्वयं के व्यवसाय या बेटे – बेटी के व्यवसाय के हिसाब से देखना चालू कर दें तो वर्ण व्यवस्था पुन: कर्म प्रधान हो सकती है। एक डॉक्टर लड़के के विवाह के समय डॉक्टर लड़की को preference दी जावे चाहे वह किसी भी जाति या संप्रदाय की हो तो इस तरह से वर्ण व्यवस्था को पुन: कर्मप्रधान बनाया जा सकता है। देश का अरबपति तबका परिवार के बच्चों के रिश्ते करते समय जातिगत विचार नहीं रखता यही बात जब उच्च शिक्षित वर्ग में भी है। विदेशों में जो भारतीय रहते हैं उनकी कोशिश यही रहती है कि बच्चों का रिश्ता किसी भारतीय परिवार में हो जावे, चाहे जाती कुछ भी हो। रिश्ते करते समय अनुकूलता व परिचित होने पर ज्यादा ध्यान होना चाहिए।

कई संपन्न व शिक्षित मुस्लिम परिवार भी ऐसा अनुभव करते हैं कि मुसलमान रहते हुए ज्यादा तरक्की नहीं कर सकते इसलिए यह हिंदू धर्म अपनाने को तैयार हैं लेकिन हिंदू समाज में इनके बच्चों की शादियां नहीं हो पाती। शिक्षक मुस्लिम युवतियों से मुस्लिम युवक निकाह नहीं करना चाहते क्योंकि यह सुधारवादी विचार रखती हैं, कश्मीर में कई मुसलमान भी बेटियों की शादी हिंदू युवकों से करना चाहते हैं क्योंकि आतंकवाद के कारण वहां के युवकों का कोई भविष्य नहीं है। यदि हिंदू समाज इनको अपनाना चालू कर देवें तो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत इन युवतियों की शादी हिंदू युवकों से संभव है। इसके लिए जगह-जगह मैरिज ब्यूरो बनाए जावें। जहां कोई हिंदू युवक किसी मुस्लिम युवती से विवाह करता है तो ऐसे मामले में इन जोड़ों के सम्मान का ध्यान हिंदू संगठनों को रखना होगा अन्यथा वह युवक भी मुसलमान बन जावेगा। यदि कई मुस्लिम परिवारों को सामूहिक रूप से हिंदू बनाया जाए तो इनके बच्चों के रिश्ते करने में कठिनाई नहीं होगी वहीं अकेलापन भी महसूस नहीं होगा। जब यह बड़े लोग हिंदू बन जाएंगे तो इनका अनुसरण करके कई मध्यम व गरीब लोग भी हिंदू बन जाएंगे देश को आज नुसरत जहां जैसी महिलाओं की जरूरत है जो मुस्लिम युवतियों को कट्टरवाद से छुटकारा दिला सकती है।

इस समय यूरोप अमेरिका वह विश्व में कई देशों में मुसलमानों को नफरत की नजर से देखा जाता है इस कारण इनमें से कई इस्लाम छोड़कर अन्य धर्म अपनाने को तैयार हैं। इस्लाम एकेश्वरवाद में विश्वास करता है वह मूर्ति पूजा में यकीन नहीं करता। आर्य समाज द्वारा प्रसारित वैदिक धर्म में भी यही बात है। आर्य समाज के महान संत स्वामी श्रद्धानंद जी ने शुद्धि आंदोलन चलाकर लाखों मुसलमानों व ईसाइयों को हिंदू बनाया था लेकिन बाद में आंदोलन कमजोर पड़ गया। फिर से अन्य धर्म मानने वालों को हिंदू बनाने का कार्य किया जावे तो विश्व के करोड़ों मुसलमान हिंदू धर्म अपना लेंगे। किंतु मुसलमान आर्य समाज से परिचित ही नहीं है जो कि मुसलमानों में क्रांतिकारी सुधार लाने में सक्षम है इससे वेदों की वाणी पुन: गुंजायमान होगी।

इस्लाम केवल मजहब ही नहीं वरन एक राजनैतिक आंदोलन भी है जिसका मकसद यह है कि पूरे विश्व में केवल इस्लाम धर्म हो व सभी देशों में मुसलमानों का शासन हो। मुस्लिम धर्म शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि यदि कोई भी मुसलमान किसी गैर मुस्लिम को प्रेरित करके मुसलमान बना दे तो ऐसे प्रेरक के सभी गुनाह खुदा माफ कर देता है उसे जन्नत मिलती है, इस कारण प्रत्येक मुसलमान इस्लाम का प्रचारक हो जाता है। इस कारण कई मुसलमान यह सोचते हैं कि कितने भी अपराध कर लो फिर बाद में किसी को भी मुसलमान बना दो तो सारे पाप धुल जाएंगे व मरने के बाद स्वर्ग मिल जाएगा। यह एक अंधविश्वास है। क्योंकि कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है यह अंधविश्वास समाप्त किया जाना जरूरी है अंधविश्वासों को खत्म करने के लिए सलमान रुश्दी, अनवर शेख, तस्लीमा नसरीन जैसे लेखकों की किताबों का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए जिससे इस्लाम व मोहम्मद साहेब की सच्चाई की जनता को जानकारी हो सकेगी।

भारत में प्रतिवर्ष 400000 से जायदा हिंदू लड़कियां लव जिहाद का शिकार हो रही हैं। मुस्लिम युवकों ने इस तरह का एक बड़ा अभियान चला रखा है। ऐसे युवकों को इनके परिवार व समाज का पूर्ण सहयोग है जबकि इन लड़कियों को हिंदू समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है जिसके कारण नहीं लड़कियों का कोई रक्षक नहीं रहता और मुसलमानों द्वारा इनके कई तरह से शोषण किया जाता है। सुना है कि कुछ लड़कियों को बेच दिया जाता है, वहीं गुर्दे आंखें लीवर हार्ट इत्यादि अंग ऐसे मरीजों में प्रत्यारोपित कर दिए जाते हैं जिनको इन अंगों की जरूरत है। इसलिए बहिष्कृत लड़कियों का पता करके इन्हें पुन: अपने समाज से जोड़ा जावे। जिन लड़कियों का निकाह हो चुका है उनके निकाह का पंजीकरण कराकर उन्हें पुन: हिन्दू बनाया जा सकता है। यदि हिंदू ना भी बने तो इस पंजीयन से यह दंपत्ति शरीयत के दायरे से निकल जाएंगे। लेकिन ऐसी लड़कियों की जानकारी तभी संभव है जब बुर्का प्रथा समाप्त हो। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कई आतंक कारी वह अपराधी पुरुष भी बचने के लिए बुर्का पहन लेते हैं। ऐसी लड़कियों को तलाश करने के लिए हिंदू महिलाओं को आगे आना होगा ऐसी लड़कियों की मदद से मुस्लिम समाज में कई सुधार लाए जा सकते हैं।

जिस किसी भी हिंदू परिवार की लड़की मुस्लिम परिवार में चली गई हो ऐसे हिंदू परिवारों की जानकारी एकत्रित की जानी चाहिए। फिर इन हिंदू परिवारों को भी प्रेरित करना चाहिए कि जिस मुस्लिम परिवार में हिंदू लड़की गई है उसी मुस्लिम परिवार या उसके रिश्तेदारों मित्रों पड़ोसी की लड़की किसी भी हिंदू परिवार में आजावे। इस तरह की क्रॉस रिलेशनशिप भी कानून में मान्य है ऐसा होने से जो हिंदू लड़की चले गई उसकी भी रक्षा करना सुगम हो जावेगा लव जिहाद के मामलों की रोकथाम तभी संभव है जबकि लड़की के परिवार के अलावा संपूर्ण हिंदू समाज भी निगरानी करें। जहां भी कोई हिंदू लड़की किसी मुस्लिम लड़के के साथ दिखे यदि हम उस लड़के से नाम वह लड़की से उसके पिता का नाम इत्यादि पूछना चालू कर देना तो उनके पास कोई स्कूटर मोटरसाइकिल या अन्य वाहन है तो उसका नंबर नोट कर लेना तो इससे भी रोक होना चालू हो जाएगा।

मुस्लिम समाज में शरिया कानून के कारण महिलाओं को निर्दोष होते हुए भी कई परेशानियां उठानी पड़ती है। तलाक के बाद ऐसा पुरुषों ने अपनी तलाकशुदा पत्नी से निकाह करना चाहे तो पहले उस महिला को किसी अन्य पुरुष से निकाह करना होगा व शारीरिक संबंध भी बनाने होंगे. इसके बाद जब दूसरा पति उसे उसे तलाक दे देवें तभी वह महिला अपने पूर्व पति से विवाह कर सकती है। यदि मुस्लिम दंपतियों को निकाह का पंजीयन स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत करवाने को प्रेरित किया जावे तो महिलाओं को कई परेशानियां नहीं झेलनी पड़ेगी। जो मुसलमान शरीयत के दायरे में रहना चाहते हैं उनके लिए दंड व्यवस्थाएं भी इस्लामी यदि इस्लामी कानून के अनुसार कर दी जावे तो भारत के आधे से अधिक मुसलमान शरीयत छोड़ने को तैयार हो जाएंगे। इसके लिए इंडियन पीनल कोड की धारा 4 में भी संशोधन करना पड़ेगा इससे मुसलमानों द्वारा किए जाने वाले अपराध बिल्कुल कम हो जाएंगे।

यदि मुस्लिम समाज की अनपढ़ लड़कियों व महिलाओं को इतना सा शिक्षित भी कर दिया जाए कि वह हिंदी का अखबार वह किताबें पढ़ सकें तो यह मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम समाज के पुरुषों को कट्टरपंथियों के चुंगल में नहीं फंसने देंगी। व जो पहले से फंसे हुए हैं उन्हें भी निकालने के लिए प्रयास करेंगी, क्योंकि कट्टरवाद के कारण इन महिलाओं को भारी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। मदरसों में ऐसी शिक्षा देना जरूरी है कि इनमें राष्ट्रीयता की भावना आवे व अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णुता भी। शिक्षा वैज्ञानिक सोच विकसित करने व अंधविश्वास खत्म करने वाली हो।

बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्ला ईरान के थे। उनका मानना था कि संपूर्ण विश्व एक देश होना चाहिए, व संपूर्ण मानव जाति बिना किसी धार्मिक भेदभाव व शांति व प्रेम के साथ – साथ रहे। बहाई धर्म का लोटस टेंपल दिल्ली में है इनका मानना है कि मुस्लिम धर्म ग्रंथों में यह भी वर्णन आता है कि ऐसा पैगंबर आवेगा जो विश्व में इस तरह की एकता लाने का प्रयास करेगा। भारत के मुसलमानों को बहाई धर्म की तरफ प्रेरित किया जा सकता है। भारत में मुसलमानों के अलावा अन्य कई भी बहाई धर्म मानते हैं इनमें विवाह की दशा में स्पेशल मैरिज एक्ट लागू होता है।

इस्लामिक आतंकवाद पूरे विश्व में फैल रहा है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र (UNO) को भी विश्व के देशों में जहां पर भी कॉमन सिविल कोड नहीं है इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। जिससे मुसलमान व अन्य भी कट्टरपंथियों के चुंगल से निकल सके। जिन देशों में कॉमन सिविल कोड नहीं है उन पर कई आर्थिक प्रबंध लगाकर उन्हें समान नागरिक संहिता के लिए बाध्य किया जा सकता है। शरिया मानने वाले मुसलमानों को गैर मुस्लिम देशों में आने पर प्रतिबंध लगाया जावे। कोई भी देश तब तक धर्मनिरपेक्ष नहीं कहा जा सकता जब तक के वहां समान नागरिक संहिता ना हो। क्योंकि इसके अभाव में कोई भी व्यक्ति बिना खुद की पहचान बदले बिना खुद के समाज से अलग हुए अपने जन्मजात धर्म के अलावा अन्य धर्म नहीं अपना सकता। वह एक से अधिक धर्मों की उपासना भी नहीं कर सकता। फिर इस्लाम में तो किसी भी सुधार की भी मनाही है। वह सुधारको के लिए कठोर यातनाएं भी हैं। भारत में जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती तब तक स्पेशल मैरिज एक्ट व इंडियन सकसेशन एक्ट से ही काम चलाना होगा।

भारतीय उपमहाद्वीप में 95 प्रतिशत मुसलमान ऐसे हैं जिनके पूर्वज हिंदू थे, लेकिन उन्हें उस समय के मुस्लिम शासकों ने बलपूर्वक मुसलमान बनाया था। यदि यह लोग आज हिंदू होते तो अधिक शिक्षित व संपन्न होते। क्योंकि इस्लाम में जमाने के हिसाब से कोई भी सुधार नहीं हुए हैं। मुसलमानों को यह समझना चाहिए के मोहम्मद साहब का कार्य क्षेत्र केवल मक्का मदीना के आसपास के क्षेत्रों तक सीमित था। व उनकी सोच का दायरा केवल वहां के समाज का सुधार जो उस समय संभवत वही तक था। विश्व के अन्य देशों में उस समय भी कई उत्कृष्ट धर्म व्यवस्थाएं थी जिनसे मोहम्मद साहब अपरिचित थे। हिंदू कोई धर्म नहीं वरन एक जीवन शैली है, जिसका आधार यह है कि एक ही ईश्वर तक पहुंचने के लिए सभी धर्म अलग-अलग रास्ते हैं।
“एकम सत विप्रा: बहुधा वदन्ति”
सभी धर्मों में कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं जिनमें समय के हिसाब से सुधार होना चाहिए। यदि विश्व के मुसलमान भी मानने लग जाए तो वह स्वयं की रूचि के अनुसार कई धर्मों की उपासना पद्धतियों का भी लाभ भी ले सकेंगे, जिससे उनका संपूर्ण विकास हो सकेगा। इसके लिए सुधारवादी मुसलमानों को संगठन “राष्ट्रीय मुस्लिम मंच” से जोड़ने का काम हिंदुओं को भी करना होगा। अन्य कई नए सुधारवादी संगठन भी बनाने होंगे जिससे इस समाज के लिए कई प्रकार के सुधारात्मक कार्यक्रम चलाया जा सके।

विदेशों में हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी प्रेम से रहते हैं, क्योंकि दोनों में बोलचाल के अलावा भी कई सामान्यताएं हैं। वैसे भी 1947 का भारत विभाजन अंग्रेजों की एक चाल थी जिससे दोनों देश लड़ते रहें वह कभी तरक्की न कर सकें। दोनों जर्मनी पूर्वी व पश्चिमी मिलकर एक हो सकते हैं तो भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश भी एक हो सकते हैं। जिससे कश्मीर समस्या, आतंकवाद व भारत में बांग्लादेशियों की समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाएंगी। दोनों देशों का रक्षा खर्च भी कम हो जावेगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश में सेना ने सत्ता का स्वाद चख रखा है इसलिए बिना भारत की मदद के वहां लोकतंत्र रह भी नहीं सकता। पाकिस्तान और बांग्लादेश की जनता को भी भारत में विलय हेतु प्रयास करना चाहिए जिससे इन दोनों देशों का आर्थिक विकास संभव है।

भारतीय राजनेताओं को यह समझना चाहिए कि इस्लाम पाकिस्तान की ताकत है। जिसके कारण पाकिस्तानियों में ना केवल भारत के खिलाफ एकता है बल्कि राष्ट्रीयता की भावना भी है। इस्लाम के कारण पाकिस्तानियों को विदेशों में वहां के मुसलमानों का सहयोग आसानी से मिल जाता है व उन देशों का भी जहां भी मुसलमान हैं। परवेज मुशर्रफ ने एक दफे कहा था कि पाकिस्तान की असली ताकत वहां की सेना नहीं बल्कि हिंदुस्तान में रहने वाले वह मुसलमान हैं जिनका पाकिस्तान पर प्रेम है। व जिनके कारण पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद भारत में पनप रहा है। जिहाद के नाम पर पाकिस्तान मामूली खर्चे पर भारत के खिलाफ आतंकवादी तैयार कर लेता है। जो फिदायीन हमलों के लिए भी तैयार रहते हैं। अब यह एक अंतरराष्ट्रीय बीमारी बन गई है जो महामारी का रूप लेती जा रही है। जिहाद को धर्मयुद्ध समझना भी अंधविश्वास ही है।

आलेख में छपे विचार लेखक के निजी विचार हैं, डेमोक्रेटिकफ्रंट. कॉम इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।

भारत माता की जय,का नारा लगाने की स्थिति में नहीं है कांग्रेसी: योगी आदित्यनाथ

काल्का , 11 अक्टूबर (सारिका तिवारी)

योगी आदित्यनाथ आज काल्का हल्के में भाजपा प्रत्याशी लतिका शर्मा के लिए प्रचार सभा में आमंत्रित थे। उन्होने हरियाणा में चुनावी रैली करने के लिए काल्का हल्के को दो कारणों से चुना पहला कारण यह मान कालिका का सिद्धपीठ है ओर दूसरे यह विधानसभा क्षेत्र संख्या अनुक्रमांक में पहले नंबर पर आता है। योगी ने काश्मीर से लेकर राफेल तक सभी मुद्दों पर बात की। वहीं उन्होने कॉंग्रेस के दोगले चरित्र पर खूब लताड़ लगाई। योगी ने याद दलाया की कॉंग्रेस में भारत माता का नारा रोक कर सोनिया गांधी ज़िंदाबाद के नारे लगवाए जाते है।

कांग्रेस ने पहले देश बेचा, अब टिकट बेच रहे : योगी आदित्यनाथ

कालका 11 अक्तूबर (सारिका तिवारी)

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए हुए उसे देश बेचने वाला बताया। योगी ने कहा कि कांग्रेस ने पहले देश को बेचा। जब देश की सत्ता उनके हाथ से चली गई तो उन्होंने अपनी पार्टी की टिकट बेचना शुरू कर दी। पार्टी के नेता ही लगातार आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस के नेताओं द्वारा टिकट बेची गई हैं।इसलिए जिस पार्टी का स्वयं कोई भविष्य तय नहीं है, वह दूसरों के बारे में क्या सोचेगी।

योगी आदित्यनाथ ने लोगों से ज्ञान चंद गुप्ता और लतिका शर्मा के पक्ष में मतदान की अपील की। सीएम योगी आदित्यनाथ कालका में भाजपा प्रत्याशी लतिका शर्मा और पंचकूला से भाजपा के प्रत्याशी ज्ञानचंद गुप्ता के पक्ष में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया।


विजयदशमी के दिन रफेल की जब शस्त्र पूजा तो कांग्रेसियों को हंसी आ रही थी अपने देश के समृद्धि विकास पर हंसने वाले लोगों पर कौन विश्वास करेगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कांग्रेस पार्टी घोटाला पार्टी के रूप में सामने आई है। कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान घोटालों खासतौर पर वाड्रा के विषय में बात करते हैं उन्होंने कहा कि दामाद जी ने घोटालों के नए कीर्तिमान स्थापित किए गुड़गांव से लेकर पंचकूला तक कोई ऐसी जमीन नहीं छोड़ी जिस पर घोटाला ना क्या हो।

योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 370 को समाप्त करने की पहल करने और उस पर ऐतिहासिक निर्णय लिए जाने की उनकी सराहना की जबकि राहुल गांधी ने काश्मीर को लेकर कहा की एक बार आप वहाँ छूट दो तो वहाँ खून की नदियां बह जाएंगी और वहाँ एक पटाखा भी नहीं फूटा। कॉंग्रेस और पाकिस्तान की नीति एक ही है की वहाँ जाणीवन में गतिरोध बना रहे और जीवन अस्तव्यस्त रहे। वहाँ आतंकवाद पनपता रहे। दूसरी ओर प्रधान मंत्री मोदी आतंकवाद को वैश्विक चुनौती मानते हुए सम्पूर्ण विश्व को इस समस्या के खिलाफ एक जुट करने पर जुटे हुए हैं।

योगी ने आते ही सभी को नवरात्रि की बधाई दी और याद दिलाया की भाजपा के मंच पर भारत माता की जय जय आर होती है जबकि कॉंग्रेस के मंचों पर भारत मटा की जैकार के नारे रोक कर सोनिया गांधी के नारों की बौछार होती है।

योगी आदित्यनाथ ने रहल गांधी पर चुटकी लेते हुए कहा कि रहल गांधी हर च्नाव के बाद नानी याद आ जाती है और वह उनसे मिलने भी जाते हैं। यह तंज़ उनके अज्ञात विदेशी प्रवासों को लेकर था।

योगी ने कहा कि अब काँग्रेस का कोई भविष्य नहीं रह गया है, कॉंग्रेस के लोग खुद काँग्रेस कि जड़ें खोद रहे हैं। वहीं प्रधान मंत्री मोदी में जनता ने दूसरी बार विश्वास जताया है हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में जहां विकास कि बयार बही है वहीं हरियाणा सरार ने 72000 नोकरियाँ बिना साक्षात्कार के वरीयता के आधार पर मोहैया करवाईं गईं। किसी भी पद के लिए भाई भतीजावाद नहीं किया गया।

योगि ने याद दिलाया कि मोदी सरकार कि नीतियों को अक्षरश: पालन करने वाली मनोहर सरकार के कारण हरियाणा ने लोकसभा कि एक भी सीट नहीं गंवाई। सारी लोकसभा सीटें जीतने का गोरव हरियाणा के सर सजा है।

VOLUNTARY SEWA FOR 72nd ANNUAL NIRANKARI SANT SAMAGAM BEGINS

Chandigarh, October 7, 2019: 

Satguru Mata Sudiksha Ji Maharaj today inaugurated voluntary sewa for 72nd Annual Nirankari Sant Samagam at Sant Nirankari Spiritual Complex, Samalkha Haryana.  The Samagam is scheduled to be held at the SantNirankari Spiritual Complex near Samalkha on G.T. Road in Haryana from November 16 to 18, 2019.The Samagam is being held at the Mission’s own land for the second time.

While addressing Sewadal Adhikaris, volunteers and a large gathering of devotees from Chandigarh & Tricity, Delhi, Greater Delhi, Haryana, Punjab, Rajasthan, Himachal Pradesh, Uttaranchal and Jammu & Kashmir, Satguru Mata Ji said that Sewa (voluntary service) is not about the members of Sewadal only who have been contributing towards this selfless service rather it is for each member of the Mission who have been taking part with love and devotion. The realization of Nirankar Almighty enables each devotee to respect one another. This is how every devotee worships God here.

Recalling 90-year journey of the Mission, Satguru Mata Ji said that the Mission is all about spreading the message of Oneness, Peace, Universal Brotherhood and imbibing human values in devotees of the Mission.  For this, we must always adopt the ornaments of Sewa, Simran and Satsang.  Her Holiness prayed for the wellbeing of entire mankind and devotees coming for Sewa from God Almighty. 

          Approximately 4,000 volunteers would be rendering their services on daily basis at the Samagam venue from 7thOctober, 2019 onwards.

          Lakhs of devotees,like each passing year, are expected to arrive from all over India to attend the Samagam. A large number of saints will come from abroad also. For the convenience of devotees, Ministry of Railways has decided to halt every Express and Mail train for 3 minutes from November 5 to 30, 2019 at the Bhodwal Majri Railway Station located close to the Samagam venue.

          Besides the main Satsang Pandal and a large township of residential Shamianas, the Samagam Ground will have various offices, exhibitions, publication stalls, Langar (community kitchen), canteens and dispensaries, medical centres, etc. There will be parking areas for buses and other vehicles. All basic amenities would be well taken care of to make the stay comfortable for all the devotees.

          All arrangements for water, electricity supply, transport, traffic control and other necessary facilities are being well-coordinated with the local authorities concerned.

          Special attention will be paid to cleanliness and environment. Langar will be served in steel plates. There will be special arrangements for differently abled devotees coming to attend the Samagam.

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मध्य प्रदेश निकाय चुनावों संबन्धित अध्यादेश को लेकर भाजपा काँग्रेस में ठहरी

मध्य प्रदेश में निकाय चुनाव को लेकर कमलनाथ कैबिनेट में एक प्रस्ताव मंजूर किया था। जिसमें नगरपालिका चुनाव के प्रावधानों में संशोधन किया है। जिसके बाद अब प्रदेश में महापौर का चुनाव सीधे जनता के बजाए पार्षदों के जरिए किया जाएगा। लेकिन इस अध्यादेश को फिलहाल राज्यपाल लालजी टंडन ने रोक दिया है, उनकी मंजूरी फिलहाल इस प्रस्ताव को नहीं मिली है। जिसके बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर भाजपा पहले ऐसे ही कांग्रेस के आमने-सामने है। अध्यादेश पर फिलहाल रोक लगाने से राज्यपाल पर कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने बयान दिया है उन्होंने राज्यपाल से राज धर्म पालन करने की अपील की है। इसी मामले में सोमवार को बीजेपी नेता उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर अध्यादेश पर विरोध जताया. 

लाल जी टंडन

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन द्वारा महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से करने वाले कमलनाथ सरकार के अध्याधेश को मंजूरी नहीं देने का विवाद गहराता जा रहा है. इसे राज्य की कमलनाथ सरकार के लिए नगरीय निकाय चुनाव से पहले बड़ा झटका माना जा रहा है. बता दें कि बीजेपी इस अध्यादेश का विरोध कर रही है.

इसी मामले में सोमवार को बीजेपी नेता उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर अध्यादेश पर विरोध जताया. दरअसल, राज्यपाल लालजी टंडन ने महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से करने वाले राज्य सरकार के अध्याधेश को मंजूरी नहीं दी है. बता दें कि महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से करने संबंधी प्रस्ताव को बीते महीने मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंजूरी दी थी. 

इस प्रस्ताव के तहत प्रदेश में महापौर और नगर पंचायत अध्यक्षों का निर्वाचन पार्षदों द्वारा किया जाना है. वहीं, बीजेपी द्वारा इस प्रक्रिया का विरोध किया जा रहा है. बीजेपी ने निकाय चुनाव की अप्रत्यक्ष प्रक्रिया को मंजूरी नहीं देने के लिए राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा था. वहीं, शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत के अध्यक्षों का चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से होना चाहिए. उन्होंने सीएम कमलनाथ से चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने की मांग की है.

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज का कहना है कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होने पर खरीद-फरोख्त का खतरा बढ़ेगा. वहीं, विवेक तन्खा के ट्वीट पर शिवराज सिंह ने कहा कि राज्यपाल राजधर्म का पालन कर रहे हैं. उन्हें कांग्रेस नेता सीख ना दें. गौरतलब है कि कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने ट्वीट कर राज्यपाल लालजी टंडन को राजधर्म का पालन करने को कहा था. 

बता दें कि राज्यपाल लालजी टंडन ने महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से करने वाले राज्य सरकार के अध्याधेश को मंजूरी नहीं दी है. हालांकि, राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार के एक अन्य अध्यादेश को मंजूरी दे दी है. ये अध्यादेश पार्षद प्रत्याशी के हलफनामे में गलत जानकारी से जुड़ा है. इसमें विधानसभा चुनाव की तरह उन्हें 6 माह की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना का प्रावधान है.

राष्ट्रवाद की नकल कर भाजपा को हराएगी काँग्रेस

कांग्रेस की ओर से कार्यकर्ताओं को अब राष्ट्रवाद की सीख दी जाएगी. एक ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत यह पाठशाला लगेगी. पहले हिंदुत्व की नकल और अब राष्ट्रवाद की. क्या कांग्रेस पार्टी बीजपी और आरएसएस की नकल करने में ही सारी अक्ल लगा देगी ? लगता तो कुछ ऐसा ही है. बैठक में तय यह भी हुआ कि जनता तक पहुंचकर ये बताया जाएगा कि असली राष्ट्रवाद तो कांग्रेस है, बीजपी वाले तो छद्म राष्ट्रवाद हैं.

नई दिल्ली: अगर आप 5 साल पहले जाएं तो 2014 लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने बीजपी के हिंदुत्व की नकल शुरू की थी. क्योंकि 2014 के चुनाव में बीजपी और प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस को एन्टी हिंदू साबित कर दिया था. एन्टी हिंदू की छाप से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस पार्टी ने बाकायदा एक कमेटी बनाई, जिसके अध्यक्ष बनाए गए थे कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटोनी. मंथन शुरू हुआ कि कैसे कांग्रेस पार्टी महज 44 सीटों पर सिमट गई.

इस कमेटी ने ये माना कि 2004 से लेकर 2014 के बीच यूपीए 1 और 2 की सरकार के दौरान सरकार और पार्टी के नेताओं के बयान ने पार्टी की छवि एन्टी हिंदू बना दी थी. पार्टी के नेताओं ने माना कि 2002 गुजरात दंगों के बाद सिर्फ एक कौम की बात की गई. ये भी माना कि बटला हाउस एनकाउंटर के बाद दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं के बयान ने पार्टी की छवि को प्रो मुस्लिम और एन्टी हिंदू बनाने का काम किया. इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब ये बयान दिया कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ अल्पसंख्यकों का है. तब पार्टी पर ये ठप्पा मजबूती से लग गया कि ये एन्टी हिंदू पार्टी है.

ऐसे में इस छवि से बाहर निकलने के लिए राहुल गांधी के ‘मंदिर दौड़’ का प्लान बनाया गया. गुजरात विधानसभा चुनाव में तो राहुल गांधी ने द्वारकाधीश मंदिर से लेकर सोमनाथ सभी मंदिरों में जाकर मत्था टेका. यही नहीं पूरे चुनाव के दौरान राहुल गांधी एक भी मस्जिद नहीं गए और ना ही मुस्लिस समुदाय के लोगों के साथ अलग से कोई मीटिंग की. चुनाव में इसका फायदा भी हुआ. उसके बाद मध्यप्रदेश हो, राजस्थान हो, छत्तीसगढ़ हो सभी जगहों पर राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार की शुरुआत किसी न किसी बड़े मंदिर में मत्था टेक कर ही किया. राहुल गांधी ने मंच से ऐलान कर कर्नाटक चुनाव के बाद मानसरोवर की यात्रा भी की. इन तमाम कोशिशों से काफ़ी हद तक कांग्रेस पार्टी को एन्टी हिंदू वाली छवि से बाहर निकलने का मौका मिला.

लेकिन JNU में टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ राहुल गांधी का खड़ा होना, 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगकर और बालाकोट एयर स्ट्राइक पर सवाल खड़ाकर 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी की छवि एन्टी नेशनल यानि राष्ट्र विरोधी की हो गई. इसका नतीज़ा भी 2019 के लोकसभा चुनाव में आप सबने देख ही लिया.

अब कांग्रेस पार्टी एन्टी नेशनल की छवि से बाहर निकलने की रणनीति में जुट गई है. इसके लिए राजधानी दिल्ली में देशभर के कांग्रेस के सभी प्रदेश अध्यक्षों और विधायक दल के नेताओं की बैठक बुलाई गई. इस बैठक में पार्टी को एन्टी नेशनल की छवि से बाहर निकालने के लिए प्लान बनाया गया. तय ये हुआ कि पूरे देश में राज्य स्तर पर, जिला स्तर पर और प्रखंड स्तर पर कांग्रेस के नेताओं को राष्ट्रवाद की ट्रेनिंग दी जाएगी. इस ट्रेनिंग में ये बताया जाएगा कि राष्ट्रवाद सिर्फ बीजपी की जागीर नहीं है.

असल में राष्ट्रवाद तो कांग्रेस की देन है. आज़ादी के दौर में कांग्रेस पार्टी और उनके नेताओं के योगदान को बताया जाएगा और साथ ही इंदिरा गांधी के दौर में पाकिस्तान के दो टुकड़े करने की घटना को जनता तक पहुंचाकर ये बताया जाएगा कि असली राष्ट्रवाद तो कांग्रेस है, बीजपी वाले तो छद्म राष्ट्रवाद हैं.

बैठक में तय तो ये भी हुआ था कि कांग्रेस पार्टी आरएसएस के प्रचारकों की तर्ज़ पर प्रेरक निकलेगी. जो देशभर में कांग्रेस के राष्ट्रवाद की अलख जगाएंगे. लेकिन सोनिया गांधी ने इसपर ऐतराज किया तो ये प्लान ड्रॉप कर दिया गया.

सवाल ये है कि कांग्रेस पार्टी कबतक बीजपी और आरएसएस की नकल करती रहेगी. क्योंकि हिंदुत्व के मुद्दे पर नकल करने का थोड़ा फायदा हुआ तो राष्ट्रवाद के मुद्दे पर नेताओं की गलतियों ने पार्टी को फ़िर से वहीं लाकर खड़ा कर दिया. शायद इसीलिए कहा जाता है कि नकल के लिए भी अक्ल की जरूरत होती है.

भारत के रक्षामंत्र इस बार करेंगे फ्रांस में शस्त्र पूजन, लाएँगे भारत के लिए पहला राफेल

इस बार फ्रांस एक अनोखे और अकल्पनीय दृश्य का साक्षी होगा। फ्रांस के इतिहास में पहली बार वहाँ के आयूध केंद्र जहां से राफेल क पहली खेप भारत के लिए उड़ान भरेगी वहाँ उससे पहले विजय दशमी के दिन हमारे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह शस्त्र पूजन करेंगे। संयोग की बात यह है की 8 अक्तूबर को विजय दशमी के साथ साथ ही वायु सेना दिवस भी है, अत: राफेल विमान और उसमें प्रयोग होने वाले आयुधों के लिए यह शस्त्र पूजा रखी गयी है। यूं तो क्षत्रिय होने के नाते राजनाथ सिंह पारंपरिक तौर पर विजय दशमी को शस्त्र पूजा कराते आए हैं परंतु अब जब वह भारत के रक्षामंत्री भी हैं तो इस पूजा का महत्व ओर भी अधिक बढ़ जाता है।

क्यों होती हा शस्त्र पूजा

असत्य पर सत्य की जीत का पर्व दशहरा 8 अक्टूबर 2019 को मनाया जाएगा। अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पावन पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था और इसी दिन प्रभु श्री राम ने दिग्विजयी रावण पर विजय प्राप्त की थी। उस महान विजय के प्रतीक दशहरा वाले दिन देश भर में अस्त्र-शस्त्र की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है, उसका शुभ लाभ अवश्य प्राप्त होता है।

सनातन परंपरा में शस्त्र और शास्त्र दोनों का बहुत महत्व है। शास्त्र की रक्षा और आत्मरक्षा के लिए धर्मसम्म्त तरीके से शस्त्र का प्रयोग होता रहा है। प्राचीनकाल में क्षत्रिय शत्रुओं पर विजय की कामना लिए इसी दिन का चुनाव युद्ध के लिए किया करते थे। पूर्व की भांति आज भी शस्त्र पूजन की परंपरा कायम है और देश की तमाम रियासतों और शासकीय शस्त्रागारों में आज भी शस्त्र पूजा बड़ी धूमधाम के साथ की जाती है।

अब फ्रांस में भी होग शस्त्र पूजा

सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस में सबसे पहले राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरेंगे. खास बात ये है कि जिस दिन राफेल भारत के सुपुर्द किया जाएगा उसी दिन भारतीय वायुसेना दिवस भी है. इसी दिन राजनाथ सिंह बोर्डिओक्स के पास मेरिनैक में राफेल जेट रिसीव करेंगे। बताया जाता है कि नौ अक्टूबर को राजनाथ सिंह, वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल एचएस अरोड़ा और अन्य वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों के साथ पेरिस पहुंचेंगे।

शस्त्र पूजन सनातन धर्म की बहुत पुरानी परंपरा है, जिसमें घर में रखे हथियारों की पूजा की जाती है. बता दें कि राजनाथ सिंह गृहमंत्री रहते हुए भी शस्त्र पूजन किया करते थे। गौरतलब है कि भारत ने 2016 में फ्रांस के साथ 58,000 करोड़ रुपये में 36 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए करार किया था. यह विमान बड़ी मात्रा में शक्तिशाली हथियार और मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं।

वायुसेना को लंबे समय से था इंतजार

देश की वायु सेना को लंबे समय से राफेल विमान का इंतजार था. क्योंकि भारत के पास आने वाला यह सबसे आधुनिक और अधिक मारक क्षमता वाला विमान होगा। इन विमानों को भारत लाने में इसलिए देरी हो रही है क्योंकि राफेल विमानों के परीक्षण और ट्रेनिंग के लिए भारतीय पायलट इन्हें फ्रांस में कम-से-कम 1,500 घंटे उड़ाएंगे। उड़ान के दौरान राफेल विमान SCALP मिसाइल से लैस होंगे, जो 300 किलोमीटर की रेंज में जमीन पर वार कर सकती है। ट्रेनिंग और परीक्षण पूरा होने के बाद राफेल को वायुसेना के अंबाला बेस में लाया जाएगा।

नियाजी मियां के इस्लामिक टीवी की इस्राइल ने निकली हवा

जम्मू-कश्मीर मामले पर दुनियाभर में अपना मजाक बनाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लाम से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए एक इस्लामिक अंग्रेजी चैनल खोलने का प्लान बनाया है। इमरान के अनुसार पाकिस्तान, तुर्की और मलेशिया तीनों मिलकर एक इस्लामिक अंग्रेजी चैनल की शुरूआत करेंगे, जिसके जरिए दुनिया में फैले ‘इस्लामोबोफिया’ के खिलाफ लड़ा जा सकेगा। लेकिन इमरान खान के इस प्लान पर इजरायल ने तंज कसा है। साथ ही इजरायल की मीडिया ने तीनों देशों के कानूनों, विरोधियों पर ऐक्शन और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का जिक्र करते हुए आईना दिखाने की कोशिश की है।

नई दिल्ली:

इस्लाम से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की बात कह नया टीवी चैनल प्लान कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर इजरायल ने तंज कसा है. इजरायल की मीडिया ने पाकिस्तान, मलयेशिया और तुर्की के कानूनों, विरोधियों पर ऐक्शन और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का जिक्र करते हुए आईना दिखाने की कोशिश की है.

आपको बता दें कि हाल में अमेरिका के दौरे पर गए पाक पीएम इमरान खान ने मलयेशिया के पीएम और तुर्की के राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद ‘बीबीसी टाइप’ चैनल शुरू करने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा है कि दुनियाभर में इस्लामोफोबिया को दूर करने के लिए नया चैनल शुरू किया जाएगा. हालांकि इमरान भले ही इस्लामोफोबिया की बात कर रहे हों पर उनके इस दांव के पीछे मुसलमानों का मसीहा बनने की कोशिश भी छिपी हुई है. इस तरह वह कश्मीर पर मुस्लिम देशों को भी साधना चाहते हैं.

इस्लामोफोबिया से ग्रस्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को अब ‘टीवी’ की बीमारी लग गई है. इमरान ख़ान अब इस्लामिक चैनल के जरिए जेहाद के ‘प्रसारण’ की तैयारी कर रहे हैं. इस्लामोफोबिया की आड़ में इमरान इस्लामिक चैनल खोलने वाले हैं. इमरान ने तुर्की और मलेशिया के प्रमुख से मलिकर एक इंग्लिश चैलन खोलने का प्लान बनाया है. इमरान ने तर्क दिया है कि इस चैलन के जरिए मुसलमानों मुद्दों और इस्लामोबोफिया के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी. बैठक के बाद इमरान ने ट्टीव करके कहा- ‘बैठक में हमने BBC जैसे इंग्लिश टीवी चैनल की शुरुआत करने का फैसला किया है. चैनल मुसलमानों के मुद्दों को उठाने के साथ इस्लामोबोफिया से भी लड़ेगा.’ 

हालांकि इमरान के इस प्लान की इजरायल ने हवा निकाल दी. इजरायल ने इमरान को आईना दिखाते हुए तंज कसा और कहा कि अब कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने वाले इस्लामोफोबिया दूर करेंगे. 

इमरान को लगी ‘टीवी’ की बीमारी?

इस्लामिक चैनल के जरिए वो जेहाद के नाम पर पूरी दुनिया में नफरत और भड़काने का संदेश देंगे. दुनिया भर में दुष्प्रचार के साथ वो दूसरे धर्मों के खिलाफ मुस्लिम देशों को उकसाएंगे और इतना ही नहीं. इमरान खान अपने घर में जिन आतंकियों को पाल रहे हैं. उनकी हिफाजत करेंगे. अभी हाल ही इमरान ने UN में इस्लामोफोबिया का जिक्र करते हुए मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की थी. पूरे विश्व में 1.3 बिलियन मुस्लिम रहते हैं. लाखों को मुस्लिम यूएस और यूरोपियन देशों में अल्पसंख्यकों की तरह रहते हैं लेकिन अमेरिका में 9/11 के बाद से इस्लामोफोबिया का जिक्र हुआ और इस्लामोफोबिया के नाम पर बांटा गया’.

इमरान की एक और इंटरनेशनल बेइज्जती!

इंटरनेशनल बेइज्जती कराने में मशहूर इमरान की फजीहत में एक और अध्याय जुड़ गया है. इमरान को अमेरिका में चीन की तारीफ करना महंगा पड़ा है. चीन की तारीफ करने पर अमेरिकी न्यूज़ चैनल के एंकर ने इमरान खान को करारा जवाब दिया है. न्यूज़ एंकर ने इमरान को  वेल्डर कहकर बुलाया है. वहीं लंडन में रह रहे पाकिस्तान की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के नेता अल्ताफ हुसैन ने भी इमरान पर तंज कसा है. 

फारूक अब्दुल्लाह को कोई फौरी राहत नहीं

एमडीएमके नेता वाइको ने अपने करीबी दोस्त और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की हिरासत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई थी. इस दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया कि फारूक अब्दुल्ला पर PSA एक्ट लगाया गया है. इसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी.

नई दिल्लीः 

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को ‘गैरकानूनी रुप से हिरासत’ में रखे जाने के आरोप वाली MDMK नेता वाइको की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. चीफ जस्टिस ने कहा कि अब इस मामले में अब कुछ बचा नहीं है. इसके अलावा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के बाद जम्मू कश्मीर में लगाई गई पाबंदी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ मंगलवार को करेगी सुनवाई.

सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि इन याचिकाओं को मुख्य मामले के साथ जोड़ दिया गया है, जिस पर मंगलवार 1 अक्टूबर को सुनवाई होनी है. दरअसल, अनुच्छेद 370 को हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ कल सुनवाई करने वाली है.

वाइको ने की थी अब्दुल्ला को कोर्ट में पेश करने की गुजारिश

तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद वाइको ने इस याचिका में फारूक अब्दुल्ला को कोर्ट के सामने पेश करने की गुजारिश की थी. लेकिन, चीफ जस्टिस (CJI) रंजन गोगोई, जस्टिस बोबडे और जस्टिस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि पीएसए एक्ट के तहत डिटेंशन ऑर्डर जारी होने के बाद इस याचिका में विचार करने के लिए और कुछ नहीं रह गया है.

सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने वाइको के वकील से कहा, ‘वह (अब्दुल्ला) जन सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में हैं. ऐसे में याचिकाकर्ता जम्मू-कश्मीर जन सुरक्षा कानून के तहत अब्दुल्ला के खिलाफ हिरासत के आदेश को सक्षम प्राधिकरण के समक्ष चुनौती दे सकता है.’

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से दो हफ्ते में कश्मीर के हालात पर जवाब दाखिल करने को कहा था.कोर्ट ने पूछा था कि हलफनामा दाखिल कर बताएं कि राज्य में कब तक हालात सामान्य हो जाएंगे.कोर्ट ने सरकार से कहा था कि जम्मू-कश्मीर में सामान्य जनजीवन सुनिश्चित करें, लेकिन इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाए, यह मामला काफी गंभीर है.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने एमडीएमके प्रमुख वाइको की याचिका (हैबियस कार्पस) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 30 सितंबर तक जवाब मांगा था.वाइको ने याचिका में कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को 15 सितंबर को चेन्नई में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई की 111वीं जयंती में शामिल होना था. लेकिन 6 अगस्त के बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है.जम्मू-कश्मीर में नेताओं की नजरबंदी के खिलाफ दायर 8 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी.सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर, जम्मू, बारामूला और अनंतनाग जाने की इजाजत दी थी. लेकिन इस दौरान वे कोई भाषण नहीं दे सकते और न ही कोई रैली करेंगे.

कश्मीर टाइम्स की संपादक की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि कश्मीर में इंटरनेट बंद है, मीडिया सही काम नहीं कर पा रही है.इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया था कि कश्मीर में न्यूज पेपर 5 अगस्त से पब्लिश हो रहे हैं, दूरदर्शन, लोकल टीवी चैनल और रेडियो भी चालू हैं.मीडियाकर्मियों को इंटरनेट और टेलीफोन समेत सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं.राज्य में लैंडलाइन और अन्य संचार साधन चालू हो गए हैं.तमाम पाबंदियां हटा ली गई हैं.चिकित्सा सुविधाओं बेहतर तरीके से संचालित हो रही हैं.5.5 लाख लोग ओडीपी में इलाज करा चुके हैं.


इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में नाबालिगों को भी हिरासत में लिए जाने के आरोप पर हाईकोर्ट की ज्युवेनाइल जस्टिस कमिटी से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी थी.पिछली बार इसी मामले की सुनवाई में वकील ने कहा था कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पाना मुश्किल है. हाईकोर्ट ने रिपोर्ट भेजकर इस दावे को गलत बताया है. सुप्रीम ने कहा था कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से हमें रिपोर्ट मिली है और ये बात गलत है कि J&K के लोगों को हाई कोर्ट जाने में दिक्कत है.

पहली शैलपुत्री कहलावे

नवरात्रि 2019 शुभ महूरत समय सारिणी :

29 सितंबर रविवार से शुरू हो रहे नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि को मुख्‍य नवरात्रि माना जाता है। हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार यह नवरात्रि शरद ऋतु में अश्विन शुक्‍ल पक्ष से शुरू होती हैं और पूरे नौ दिनों तक चलती हैं। मां दुर्गा इस बार सर्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि योग में हाथी पर सवार होकर रविवार को हमारे घर पधारेंगी। फिर 9 दिन बाद घोड़े पर विदा होंगी। घट स्थापना प्रतिपदा तिथि रविवार को सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिद्धि योग में होगी। विद्वान पंडितों के अनुसार 29 सितंबर, 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर के दिन दो-दो योग रहेंगे। इन योगों में नवरात्र पूजा काफी शुभ रहेगी।

कलश स्थापना ( घट स्थापना ) की विधि एवं शुभ मूहुर्त का समय

आचार्यों ने बताया कि नवरात्रि में कलश स्‍थापना का विशेष महत्‍व है। कलश स्‍थापना को घट स्‍थापना भी कहा जाता है। नवरात्रि की शुरुआत घट स्‍थापना के साथ ही होती है। घट स्‍थापना शक्ति की देवी का आह्वान है। पंडित विवेक गैरोला ने बताया कि सुबह स्नान कर साफ-सुथरे कपड़े पहनें। पूजा का संकल्प लें। मिट्टी की वेदी पर जौ को बोएं, कलश की स्थापना करें, गंगा जल रखें। इस पर कुल देवी की प्रतिमा या फिर लाल कपड़े में लिपटे नारियल को रखें और पूजन करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि कलश की जगह पर नौ दिन तक अखंड दीप जलता रहे।

शुभ मूहुर्त का समय

शुभ समय – सुबह 6.01 से 7.24  बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त- 11.33 से 12.20 तक 

पूरे 9 दिन होगी आराधना

नवरात्र 9 दिनों का होता है और दसवें दिन देवी विसर्जन के साथ नवरात्र का समापन होता है। लेकिन, ऐसा हो पाना दुर्लभ संयोग माना गया है, क्योंकि कई बार तिथियों का क्षय हो जाने से नवरात्र के दिन कम हो जाते हैं। लेकिन, इस बार पूरे 9 दिनों की पूजा होगी और 10वें दिन देवी की विदाई होगी। यानी 29 सितंबर से आरंभ होकर 7 अक्तूबर को नवमी की पूजा होगी और 8 को देवी विसर्जन होगा।

नवरात्र में इन नौ देवियों का पूजन

: पहले दिन- शैलपुत्री
: दूसरे दिन- ब्रह्मचारिणी
: तीसरे दिन- चंद्रघंटा
: चौथे दिन- कुष्मांडा
: पांचवें दिन- स्कंद माता
: छठे दिन- कात्यानी
: सातवें दिन- कालरात्रि
: आठवें दिन- महागौरी
: नवें दिन- सिद्धिदात्री

किस दिन कौनसा योग

: 29 सितंबर- सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिद्धि योग
: 1 अक्टूबर- रवि योग
: 2 अक्टूबर- रवि योग व सर्वार्थ सिद्धि योग
: 3 अक्टूबर- सर्वार्थसिद्धि योग
: 4 अक्टूबर- रवि योग
: 6 अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्धि योग
: 7 अक्टूबर- सर्वार्थसिद्धि योग व रवि योग
ये सभी योग व्यापार और खरीदारी के लिए शुभ हैं।

कलश स्थापना के दिन शुक्र का उदय होना बेहद शुभ फलदायी 

इस बार कलश स्थापना के दिन ही सुख समृद्धि के कारक ग्रह शुक्र का उदय होना बेहद शुभ फलदायी है। शुक्रवार का संबंध देवी लक्ष्मी से है। नवरात्र के दिनों में देवी के सभी रूपों की पूजा होती है। शुक्र का उदित होना भक्तों के लिए सुख-समृद्धि दायक है। धन की इच्छा रखने वाले भक्त नवरात्र के दिनों में माता की उपासना करके अपनी आर्थिक परेशानी दूर कर सकते हैं। इस दिन बुध का शुक्र के घर तुला में आना भी शुभ फलदायी है।

ज्योतिषाचार्यों ने कहा कि शारदीय नवरात्र इस बार कई संयोग लेकर आएं हैं। जिससे भक्तों को शुभ फल की प्राप्ति होगी। वहीं इस बार पूरे नौ दिन मां अंबे की पूजा-अर्चना होगी, जबकि दसवें दिन मां को विधि-विधान के साथ विदाई दी जाएगी। ऐसा दुर्लभ संयोग लंबे समय बाद बना है।

चार सर्वार्थ सिद्धि योग 

इस साल की नवरात्र इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार 4 सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। ऐसे में साधकों को सिद्धि प्राप्त करने के पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं। 29 सितंबर, 2, 6 और 7 अक्तूबर को भी यह शुभ योग बन रहा है।

संयोग में होगा कलश स्थापना 

रविवार को नवरात्र का प्रारंभ इस बार कलश स्थापना के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और द्विपुष्कर नामक शुभ योग में होगा। ये सभी घटनाएं नवरात्र का शुभारंभ कर रहे हैं। इसी दिन भक्त 10 दिनों तक माता की श्रद्धा भाव से पूजा का संकल्प लेकर घट स्थापना करेंगे।

दो सोमवार होना भी फलदायी

इस बार नवरात्र का आरंभ रविवार को हो रहा है और इसका समापन मंगलवार को होगा। ऐसे में नवरात्र में दो सोमवार और दो रविवार आएंगे। पहले सोमवार को देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी और अंतिम सोमवार को महानवमी के दिन सिद्धिदात्री की पूजा होगी। नवरात्र में दो सोमवार का होना शुभ फलदायी माना गया है।

पहले दिन ऐसे करें मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है।
चौकी पर मां शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा को स्थापित करे और इसे बाद कलश कि स्थापना करें। कलश के ऊपर नारियल और पान के पत्ते रख कर स्वास्तिक जरूर बनाएं। इसके बाद कलश के पास अंखड ज्योति जला कर ‘ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:’ मंत्र का जाप करें और फिर सफेद फूल मां को अर्पित करें। इसके बाद मां को सफेद रंग का भोग लगाएं। जैसे खीर या मिठाई आदि। अब माता कि कथा सुने और आरती करें। शाम को मां के समक्ष कपूर जरूर जलाएं।

 मंत्र

1. ऊँ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:
2. वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
3. वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्। वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥
4. या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ मां