गुलाम नबी आजाद की अपनी पार्टी ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’

            गुलाम नबी आजाद ने अपनी पार्टी के झंडे का भी अनावरण किया है। उन्होंने कहा, झंडे का पीला रंग रचनात्मकता, एकता और विविधता को दर्शाता है। सफेद रंग शांति और नीला रंग स्वतंत्रता, खुले विचार, कल्पना और सागर की गहराई से आकाश की ऊंचाई तक को दिखाता है। आजाद ने कहा, लोगों ने उर्दू, संस्कृति, हिंदी में नाम सुझाए थे। हालांकि हम ऐसा नाम चाहते थे जिसमें डेमोक्रेटिक, शांति और स्वतंत्र तीनों बाते हों। 

आजाद की आज पहले नवरात्र पर पार्टी के नाम की घोषणा करने की तैयारी है।
डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी
  • कांग्रेस से अलग होकर गुलाम नबी आजाद ने अपनी नई पार्टी का ऐलान किया
  • गुलाम नबी आजाद ने अपनी पार्टी का नाम डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी रखा
  • इस मौके पर गुलाम नबी आजाद ने पार्टी का नाम और झंडे का अनावरण किया

डेमोक्रेटिक फ्रंट, जम्‍मू(ब्यूरो) – 26 सितंबर :  

            कांग्रेस के पूर्व नेता और जम्‍मू-कश्‍मीर के मुख्‍यमंत्री रह चुके गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को अपनी नई पार्टी के नाम का ऐलान कर दिया।  उन्‍होंने अपनी पार्टी का नाम डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी रखा है।  कांग्रेस से नाता टूटने के बाद गुलाम नबी आजाद ने अपने दम पर नई पार्टी गठित करने के संकेत दे दिए थे।  इसके बाद उनकी नई पार्टी के नाम को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया था। तमाम अटकलबाजियों को विराम देते हुए गुलाम नबी आजाद ने नवरात्रि के पहले दिन अपनी नई पार्टी के नाम का ऐलान कर दिया।

            गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पार्टी की सदस्‍यता 26 अगस्‍त को त्‍याग दी थी।  इसके बाद से ही उनके द्वारा नई पार्टी  का गठन करने का अनुमान लगाया जा रहा था।  गुलाम नबी ने कई मौकों पर खुद भी इसके संकेत दिए थे।  कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद उन्‍होंने कहा था कि वह समर्थकों से मुलाकात और राय – विचार करने के बाद नई पार्टी लॉन्‍च करने की घोषणा करेंगे।  अपनी पार्टी के नाम का ऐलान करने से पहले गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को कहा, लोगों ने नई पार्टी के लिए तकरीबन 1500 नाम मुझे भेजे थे।  इनमें से कई नाम उर्दू और संस्‍कृत में भी थे।  इनमें हिन्‍दी और उर्दू का मिश्र‍ित नाम जैसे हिन्‍दुस्‍तानी भी था।  मैं अपनी पार्टी का नाम लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और स्‍वतंत्रता को प्रदर्शित करने वाला रखना चाहता हूं।”

            उन्होंने कहा कि आजाद का मतलब उनके नाम से नहीं है। बल्कि इसका मतलब स्वतंत्र से है। उनकी पार्टी स्वतंत्र लोकतांत्रिक पार्टी होगी जो आम लोगों से जुड़ी होगी। आजाद ने आगे कहा कि राजनीति में कोई दुश्मन नहीं होता। हां राजनीतिक दलों की नीतियों पर मतभेद हो सकते हैं। हम उसकी का विरोध करते हैं।

            जम्मू हवाई अड्डे से आजाद सीधे गांधी नगर स्थित अपने आवास पहुंचे। अपने आवास के बाहर पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में आजाद ने कहा कि मैं यहां पर नेताओं व कार्यकर्ताओं से मिलने लिए आया हूं। पार्टी लांच करने से पहले सोमवार को मीडिया को आमंत्रित करूंगा। उनके करीबियों के अनुसार नाम व झंडा फाइनल हो चुका है। जल्द ही इसका एक दो दिन में खुलासा हो जाएंगा। सूत्रों ने बताया कि आजाद की आज पहले नवरात्र पर पार्टी के नाम की घोषणा करने की तैयारी है।

            आजाद के आवास पर दिन भर बैठकों का दौर चला। इसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री ताराचंद, डा. मनोहर लाल शर्मा, जीएम सरूरी, अब्दुल मजीद वानी, बलवान सिंह, गौरव चोपड़ा, जुगल किशोर आदि शामिल हुए। इस दौरान पार्टी के नाम पर चर्चा की गई। जम्मू का दो दिवसीय दौरा पूरा करने के बाद आजाद 27 सितंबर को श्रीनगर का रुख करेंगे। वह दो दिन तक कश्मीर में पार्टी नेताओं से बैठकें करेंगे।

            आजाद को जम्मू कश्मीर से पंद्रह हजार से अधिक लोगों ने पार्टी के नाम के सुझाव दिए थे। हालांकि वह पार्टी के नाम पर दिल्ली में विचार विमर्श कर चुके हैं लेकिन फाइनल करने के लिए उन्होंने जम्मू कश्मीर के नेताओं से भी विस्तार से चर्चा की। सितंबर माह में गुलाम नबी आजाद का यह दूसरा दौरा है। इससे पहले कांग्रेस छोड़ने के बाद चार सितंबर को जम्मू कश्मीर आए थे। रैलियां की और चार सौ से अधिक प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की थी।

            पार्टी का एजेंडा स्पष्ट किया लेकिन पार्टी के नाम का फैसला नहीं हो पाया था। आजाद अनुच्छेद 370 पर अपनी राय को स्पष्ट कर चुके है कि यह अनुच्छेद फिर से वापिस नहीं आ सकता क्योंकि इसके लिए संसद में दो तिहाई बहुमत चाहिए। वह कह चुके है कि उनकी पार्टी जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने, स्थानीय लोगों के लिए नौकरियां व भूमि के अधिकार सुरक्षित करने के लिए संघर्ष करेंगे।

            वह महिलाओं के सम्मान, कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास करने, हर क्षेत्र के बराबर विकास करने पर काम करेंगे। आजाद के समर्थन में कांग्रेस के अधिकतर नेता पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं।

रैली ऑफ़ हिमालयाज में  चमके सिटी ब्यूटीफुल के हरविंदर भोला व् नेविगेटर चिराग

डेमोक्रेटिक फ्रंट संवाददाता, चंडीगढ़ – 08 सितंबर  : 

            मोटरस्पोर्ट्स में शीर्ष रैलिस्ट में शामिल हरविंदर भोला व् नेविगेटर चिराग ठाकुर  ने बेहतरीन प्रदर्शन कर  हिमालयन एक्सट्रीम  मोटरस्पोर्ट्स क्लब द्वारा आयोजित रैली ऑफ़ हिमालयाज में ओवरआल तीसरा स्थान हासिल किया  I और अपनी श्रेणी क्लास 4  ग्रुप टी1  वर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया। इस रैली  का आयोजन मनाली में 27 अगस्त से 30 अगस्त को हुआ  जिसमें  25 फोर व्हीलर ड्राइवर्स और 60 बाईकर्स ने हिस्सा लिया

            हरविंदर भोला और चिराग ने तक़रीबन 200 किलोमीटर की कंपेटिटिव स्टेज की दूरी  02 घंटे 47 मिनट्स में मारुती सुजुकी ग्रैंड विटारा में पूरी की  I रैली विभिन्न चरणों में करवाई गई। पहले चरण में कोठी से रोहतांग दर्रा होते हुए रैली ग्रांफू पहुंची। ग्रांफू से रैली वापस मनाली पहुंची। दूसरे चरण में रैली अटल टनल होते हुए बातल और बातल से जिस्पा पहुंची। जबकि तीसरे चरण में  रैली जिस्पा से शुरू होकर शिंकुला दर्रा होते हुए लद्दाख की जांस्कर घाटी के गोमोरंजन में संपन्न हुई। इसके बाद रैली का काफिला वापस मनाली पहुंचा  650 किलोमीटर लंबी रैली ऑफ हिमालय  पहली बार 16,850 फीट ऊंचे शिकुंला दर्रा से  गुजरी।

             रैली को लेकर हरविंदर भोला ने बताया पहाड़ों की सर्पीली, संकरी सड़कों पर रैली का रोमांच बहुत ख़ास रहा  I पहली बार  रैली रोहतांग दर्रा, शिंकुला दर्रा जैसे खतरनाक रास्तों से होकर गुजरी।  तापमान में अधिक गिरावट होने के बावजूद हमने सभी चुनौतियों का डटकर सामना किया  I बर्फीली हवाएं औरनुकीले मोड़ वाली सड़को  ने रैली रूट को  और चुनौतीपूर्ण बना दिया था  I हमारी प्रमुख चुनौती थी कि हम अपने वाहन के सस्पेंशन को बेहतरीन सेटअप के साथ तैयार करें क्योंकि हर चरण अलग-अलग इलाकों में बटे थे और हर एक इलाको में अलग जटिल परिस्थिति से निपटना था I  समुद्रतल से 16580 फीट ऊंचे शिंकुला दर्रे से होकर ठंड और कठोर मौसम के बीच तेज़  गति बनाकर यह एक्सपीडिशन रोमांच भरा होने के साथ ही कई नई यादे जोड़ गयI I

            चिराग ने बताया मुझे ख़ुशी है कि हम दुनिया की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली लाहौल-स्पीति और लद्दाख की सड़कों पर अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहे   यह रैली साहस और सहनशीलता की अग्नि परीक्षा साबित हुई  भयानक रास्तों ने भागीदारों को एक इंसान और उसकी चहेती मशीन के बीच गजब का तालमेल दिखाने का अवसर मिला।

“Let us develop technologies for our Nation” was organised today by TEC of P U

Koral ‘Purnoor’, Demokretic Front, Chandigarh  –  September 8  : 


           Workshop titled “Let us develop technologies for our Nation” was organised today by Technology Enabling Centre (TEC) of Panjab University, Chandigarh in seminar hall of Rajiv Gandhi College Bhawan. Technology Enabling Centre (TEC) of Panjab University, Chandigarh is a Department of Science & Technology (DST) sponsored project of Government of India (GoI).

           In the work shop today, managers of TEC (Er Ankush Gawri & Dr S Vaibhav) explained in detail 25 live problems of Industry on which innovation is required to be done by Academia. From the presentation made by the managers of TEC it was apparent that there is a dire need to develop low cost automation solutions for MSMEs of our region.

           Managers of TEC urged students as well as teachers to visit website of TEC at https://tecpu.in/industrial-issues/ and pick live industrial problems for innovation from here. On this website, managers of TEC have posted 156 problems of Industry on which innovation is required.

           Professor Rajneesh Arora delivered keynote speech on topic “Development of technologies for our Nation”. Professor Rajneesh Arora did B.Tech and PhD from IIT Delhi and has served as Vice Chancellor of Punjab Technical University. Professor Arora in his lecture emphasized that young engineers of our Nation have to develop such technologies that are relevant to our own Nation. Therefore he stressed that budding engineers of our Nation should closely interact with local industry and find out exact problems of our industry on which innovation is required. He further stressed that the technologies that we develop should be sustainable and do good for our local ecosystem as well as global ecosystem.

           Professor Arora shared that With a view to enhance the employability skills and impart deep knowledge in emerging areas which are usually not being covered in Undergraduate Degree credit framework, AICTE has come up with the concept of Minor Degree in emerging areas. Minor Degree will carry 18 to 20 credits in addition to the credits essential for obtaining the Under Graduate Degree in Major Discipline (i.e. 163 credits usually). Keeping in mind the need of manpower in emerging areas, AICTE with the help of industry-academia experts, has framed the curriculum for Minor Degree in Universal Human Values (UHV) to develop teachers, parents and policy makers of tomorrow who will have a humane worldview along with technical skills and strive to ensure value-based living for themselves as well as the society. Pertinent to highlight here that Professor Arora is member of Working Group constituted by AICTE for this Model Curriculum of Minor Degree in Universal Human Values (UHV).

           Professor Arora expressed desire that in near future Panjab University should also offer Minor Degree in UHV. Gathering was also addressed by Dean Research & Development of IIT Ropar Professor Navin Kumar.

           Professor Navin Kumar opined that in present times it is extremely important that the technologies we develop for our Nation do not accelerate the phenomenon of “Climate Change” and at the same time should generate wealth for our Nation. About 150 students and teachers of Panjab University attended this workshop. Vote of thanks was delivered by Professor Sanjay Kaushik of University Business School (UBS).

बदल गए दोस्त और सियासी दुश्मन, जानिए नीतीश का ये दिल्ली दौरा क्यों है

चुनाव के चाणक्य कहे जाने वाले रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक बार फिर से चर्चा में हैं। उन्होंने बिहार की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। प्रशांत किशोर ने कहा है कि बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल आने वाला है। बड़ी उटल फेर की संभावना है। उनके इस बयान से सब का ध्यान उनकी तरफ एक फिर से खींच गया है। प्रशांत किशोर सुराज यात्रा के दौरान हाजीपुर में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार की राजनीति अभी 180 डिग्री घूमी है। पीछे क्या चल रहा है यह किसी को पता नहीं है। अभी देखिए प्रदेश की राजनीति कितनी बार घूमेगी। पीके ने दावा किया है कि वो 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में हवा का रुख सुराज की ओर मोड़ देंगे।

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, सीतामढ़ी/नयी दिल्ली – 05 सितंबर :

चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि बिहार में हालिया उथल-पुथल (सत्ता परिवर्तन) ‘राज्य केंद्रित’ घटना थी, और इससे राष्ट्रव्यापी प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। स्पष्ट है कि उन्होंने पिछले महीने जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) के बीजेपी से नाता तोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ महागठबंधन सरकार बनाने के घटनाक्रम की ओर इशारा करते हुए यह बात कही।  उन्होंने विपक्षी एकता कायम करने के लिए नीतीश कुमार के तीन दिन के दिल्ली दौरे को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को बिहार पर शासन करने के लिए जनादेश मिला है, और यही उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा, यहां जो हुआ है वो एक राज्य पर केंद्रित घटना है, जिसका कोई राष्ट्रव्यापी प्रभाव होने की संभावना नहीं है।

सोमवार को अपने जन सुराज अभियान में सीतामढ़ी पहुंचे पीके ने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नया बागी रुख ‘राजनीतिक अस्थिरता’ का प्रतीक है, जिसका सामना बिहार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नई बीजेपी’ के उदय के बाद से कर रहा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि हम केवल एक बात निश्चित रूप से कह सकते हैं कि कुछ भी हो, नीतीश कुमार सत्ता पर काबिज रहेंगे जैसे कि वो इतने वर्षों से करते आ रहे हैं।

किशोर को चार साल पहले हफ्तों के भीतर ही जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर पदोन्नत किया गया था और सीएए-एनपीआर-एनआरसी विवाद पर तीखे मतभेदों के बाद दो साल से भी कम समय में उन्हें निष्कासित कर दिया गया था। 

किशोर ने दावा किया, मैं आपको लिखित रूप में दे सकता हूं कि बिहार में अगले विधानसभा चुनाव के लिए 2025 में एक और गठबंधन होगा। हम नहीं जानते कि कौन सी पार्टी या नेता किस तरफ उतरेगा। लेकिन वर्तमान परिदृश्य बदल जाएगा। 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी के शानदार अभियान के लिए आईपैक को श्रेय दिया गया था। 

पहले 100 फिर 51(AAP)और अब 5000 कांग्रेसी ‘आज़ाद’ के समर्थन में

केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रामदास आठवले ने सोमवार को कहा कि हाल ही में कांग्रेस छोड़ने वाले गुलाम नबी आजाद को केंद्र में सत्तारूढ़ NDA के साथ मिलकर काम करना चाहिए। आठवले ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस तेजी से अपनी लोकप्रियता खो रही है और कई नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘गुलाम नबी आजाद को कांग्रेस छोड़ने के बाद अब ‘आजादी’ मिल गई है।’’ 

डेमोक्रेटिक फ्रंट (ब्यूरो, नयी दिल्ली: :

गुलाम नबी आजाद द्वारा पार्टी छोड़े जाने और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधे जाने के बाद से कांग्रेस लगातार उन पर हमले बोल रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को पार्टी ने कहा है कि राज्यसभा की सीट पर संकट आने के बाद ही उन्हें उस ‘दिव्य ज्ञान’ की प्राप्ति हुई जो अब दे रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने जम्मू-कश्मीर में आजाद के समर्थन में कई नेताओं के पार्टी छोड़ने को ज्यादा तवज्जो नहीं देने की कोशिश करते हुए यह भी कहा कि इस केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी का अच्छा खासा आधार है और यह लोगों के मुद्दे उठा रही है। ‘आज़ाद’ ने कहा कि सोनिया गांधी ने उन्हें वर्ष 1998 से 2004 तक 8 राज्यों का प्रभारी बनाया। जिसमें से पार्टी ने 7 राज्यों में विजयी हासिल की। कांग्रेस पार्टी में आजतक ऐसा कोई नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि जिन कांग्रसियों को कांग्रेस का वर्तमान इतिहास नहीं मालुम वही मेरे ऊपर यह आरोप लगा रहे हैं।

आज गुलाम नबी आजाद का कांग्रेस पार्टी छोड़े अभी एक सप्ताह का भी वक्त नहीं हुआ है। इतने कम वक्त में आजाद ने कांग्रेस पार्टी को अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। जम्मू कश्मीर की राजनीति में बड़ा रसूख रखने वाले आजाद के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक सप्ताह से भी कम वक्त में कांग्रेस के 100 से ज्यादा नेता पार्टी छोड़कर आजाद को अपना समर्थन दे चुके हैं।

गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थन में पार्टी से निकलने वाले लोगों का सिलसिला लगातार जारी है। मंगलवार को गुलाम नबी आजाद के समर्थन में 65 नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अब बुधवार को भी 42 नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। इन सभी नेताओं का कहना है कि वह गुलाम नबी आजाद की नई बनने वाली पार्टी में शामिल होंगे। इस तरह गुलाम नबी आजाद के समर्थन में अब तक पार्टी के 100 से ज्यादा नेता इस्तीफा दे चुके हैं। इन नेताओं में पूर्व डिप्टी सीएम ताराचंद भी शामिल हैं।

बुधवार को जम्मू कश्मीर में आम आदमी पार्टी के 51 नेताओं ने भी पार्टी छोड़कर आजाद को अपना समर्थन दिया है। इतना ही नहीं गुरुवार को कांग्रेस के 5000 कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर आजाद को अपना समर्थन देंगे।

इस बीच गुलाम नबी आजाद ने अपनी पार्टी बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। वह 4 सितंबर को जम्मू में एक रैली को संबोधित करने वाले हैं। कांग्रेस छोड़ने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम होगा। माना जा रहा है कि इस रैली के दौरान वह अपनी पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। अहम बात यह है कि 4 सितंबर को ही दिल्ली में राहुल गांधी ‘महंगाई पर हल्ला बोल’ रैली को संबोधित करने वाले हैं। साफ है कि गुलाम नबी आजाद के कार्यक्रम के चलते कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन प्रभावित होगा। गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफे के बाद कहा था कि यह तो अभी शुरुआत है। इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि आने वाले दिनों में उनकी ओर से कांग्रेस पर हमलों में इजाफा हो सकता है।

मिरर नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, गुलाम नबी आजाद के समर्थन में जम्मू कश्मीर के 5000 कांग्रेसी कार्यकर्ता गुरुवार को उरी में होने वाले एक कार्यक्रम के दौरान सामूहिक रूप से इस्तीफा देंगे और आजाद को अपना समर्थन देंगे। इससे पहले बुधवार को 42 कांग्रेसी नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दिया और कहा कि वे आजाद की होने वाली पार्टी के साथ जुड़ेंगे। कुल मिलाकर जम्मू कश्मीर में आजाद अभी तक कांग्रेस के 100 से ज्यादा नेता और कल हजारों कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ेंगे।

गौरतलब है कि आजाद ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद ऐलान किया था कि वे जल्द ही अपना दल शुरू करेंगे। उन्होंने जम्मू कश्मीर की राजनीति पर फोकस करने की भी बात कही थी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उनकी नई पार्टी का नाम क्या होगा और नई पार्टी का गठन कब तक करेंगे, लेकिन जिस तरह आजाद के अपनी पार्टी बनाने से पहले ही बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता जुट रहे हैं, उसने कांग्रेस पार्टी के लिए चिंता जरूर बढ़ा दी है। 

बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज का तीन दिवसीय उत्सव सम्पन्न

दूरदराज से आए संत महात्माओं का हुआ सम्मान,सुंदर भजनों के गायन से संपूर्ण हुआ कार्यक्रम

डेमोक्रेटिक फ्रंट संवाददाता, चंडीगढ़ 26 अगस्त 2022: 

बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज को समर्पित तीन दिवसीय उत्सव यहां वीरवार को मंदिर के संचालक व 9वीं पुस्त गद्दीनशीन महंत व विश्वकर्मा समाज चंडीगढ़ के शंकराचार्य जय कृष्ण नाथ तथा मंदिर की सह-संचालिका व विश्वकर्मा महिला मंडल की महामंडलेश्वर सुरेन्द्रा देवी के सानिध्य में संपंन हो गया। यह आयोजन सेक्टर 36 स्थित पीर गुग्गा माड़ी मंदिर में हर वर्ष की भांति भाद्रपद की द्वादशी, त्रयोदशी व चतुर्दशी को आयोजित किया जाता है।

बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज के तीन दिवसीय इस उत्सव के अंतिम दिन पीर गुग्गा माडी मंदिर के संचालक व 9वीं पुस्त गद्दीनशीन महंत व विश्वकर्मा समाज चंडीगढ़ के शंकराचार्य जय कृष्ण नाथ तथा मंदिर की सह-संचालिका व विश्वकर्मा महिला मंडल की महामंडलेश्वर सुरेन्द्रा देवी ने ध्वजारोहण की परम्परा को निभाया जिसके उपरांत बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज की पूजा विधि विधान के साथ की गई। जिसके उपरांत रात्रि को बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज की कथा का श्रवण कथा व्यास तिलक राज योगी ने करवाया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आये श्रद्धालुओं ने दरबार में माथा टेका और बाबा का आर्शीवाद प्राप्त किया। 

उत्सव में 9वीं पुस्त गद्दीनशीन महंत व विश्वकर्मा समाज चंडीगढ़ के शंकराचार्य जय  कृष्ण नाथ ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि भक्त ही एकमात्र ऐसा साधन है जो हृदय से यदि भगवान को याद करे तो परमपिता भी स्वयं को उसके अधीन कर देते हैं। इसलिए भक्ति से भगवान भी भक्त के वश में हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि गुग्गा माडी मंदिर जो वर्षों पुराना है, में जो श्रद्धालु सच्चे भाव से अपनी कोई मनोकामना लेकर आता है वह पूरी होती है। यह आस्था का जीता जागता सबूत है। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में डॉ स्वामी राजेश्वरानंद पुरी ने स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद पद्धति पर चर्चा की और शास्त्रों के अनुसार आर्युवेद के महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान उन्होंने गौ रक्षा व गौ माता के महत्व पर प्रवचन दिए। उत्सव के दौरान तीन दिन निरन्तर विशाल अटूट भंडारे का आयोजन किया गया।  

उत्सव के समापन पर विशेष अतिथि के तौर पर देश के विभिन्न राज्यों से संत महात्माओं में योगी सूरजनाथ,आध्यात्मिक गुरु महात्मा ज्ञाननाथ, साध्वी ऊषानाथ,संत पीठाधीश नवीन सरहदी व अन्यों ने शिरकत की। जिसका आदर सत्कार मंदिर की सह-संचालिका व विश्वकर्मा महिला मंडल की महामंडलेश्वर सुरेन्द्रा देवी ने की। इस अवसर पर सभी आये संतों ने बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज के जीवन पर प्रकाश डाला और प्रवचन दिये।

भजन गायन का प्रारम्भ महामंडलेश्वर सुरेन्द्रा देवी ने गणेश वंदना तथा जग में साचो तेरो नाम के प्रसिद्ध भजन के साथ किया जिसके बाद भजन गायक राजन शेरगिल के.डी नारायण ने मधुर भजन गाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने गाए गए भजनों में मुझे रास आ गया है, तेरे दर पर सर झुकाना, राधे राधे गोविन्द राधे, गोपाल राधे, मैं हुं दासी, तुम हो राजा गाकर कर उपस्थित श्रद्धालुओं का घंटों समां बांधे रखा और झुमने पर विवश कर दिया।

रायगढ़ में नाव से एके-47 बरामद, फडणवीस बोले- बोट ऑस्ट्रलियाई नागरिक की, हाईटाइड से यहां पहुंची

श्रीवर्धन (रायगढ़) विधायक, अदिति तटकरे ने कहा कि प्राथमिक जानकारी के अनुसार रायगढ़ के श्रीवर्धन के हरिहरेश्वर और भारदखोल में हथियार-दस्तावेज वाली कुछ नावें मिली है। जांच चल रही है, मैंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि ATS या स्टेट एजेंसी की स्पेशल टीम तत्काल नियुक्त करें। मामले में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बयान जारी किया है। उनका कहना है कि मामले पर सरकार गंभीरता से नजर बनाए हुए है। गंभीरता के साथ जांच की जा रही है। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के हरिहरेश्वर तट पर गुरुवार सुबह 8 बजे के करीब समुद्र में एक संदिग्ध बोट मिली।बोट से तीन AK-47 और बुलेट्स बरामद किए गए। हरिहरेश्वर तट से करीब 32 किलोमीटर दूर भारदखोल में एक लाइफ बोट भी मिली, जिसके बाद आतंकी साजिश की आशंका जताई गई। पुलिस ने बोट को रस्सी के सहारे किनारे खींचा।

'टेरर एंगल नहीं, पुलिस अलर्ट', रायगढ़ में ऑस्ट्रेलिया महिला के नाव में मिली तीन AK- 47 पर बोले डिप्टी सीएम फडणवीस
  • विधानसभा में डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने संदिग्ध नाव को लेकर जानकारी दी
  • देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि बोट की मालिक एक ऑस्ट्रेलियन महिला है
  • कोस्टगार्ड के सूत्रों से पता चला है कि रायगढ़ में मिली बोट एक ‘डिस्ट्रेस बोट’ है

मुंबई(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट – 18 अगस्त, 2022 :

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित हरिहरेश्वर तट के पास संदिग्ध नाव मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। मुंबई को हाई अलर्ट किया गया है. वहीं विधानसभा में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने घटना को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा, “रायगढ़ जिले के समुद्री तट पर एक बोट पाई गई है,  जिसमें तीन एके-47 और उसके साथ उसका अमिनेशन व बोट के कुछ कागजात पाए गए हैं। इस घटना की सूचना मिलने के बाद तुरंत महाराष्ट्र पुलिस ने और एटीएस ने सभी जगह नाकाबंदी कर तफ्तीश शुरू कर दी। हम लोगों ने तुरंत भारतीय कोस्ट गार्ड के साथ संपर्क किया और उन्होंने भी इसकी तफ्तीश शुरू की है।”

साथ ही उन्होंने यह भी बताया, “जांच के दौरान पाया गया कि बोटका नाम लेडी हाल है. इस बोट की  मालिक एक ऑस्ट्रेलियन महिला है। उस महिला के पति इस बोट के कप्तान हैं और यह बोट मस्कट से यूरोप की तरफ जा रही थी और 26 जून को इस बोट का इंजन खराब हो गया और बोट पर जो लोग सवार थे उन्होंने कोरियन नेवी को मदद के लिए कॉल दिया। दरअसल, कोरियन नेवी की बोट आसपास ही थी। इसके बाद कोरियन नेवी ने इन सभी लोगों को उस बोट से सुरक्षित निकाला और ओमान को सुपुर्द कर दिया। उस समय हाइटाइड होने के कारण इस बोर्ड को स्पोर्ट्स स्टोर इन नहीं किया जा सका।”

फडणवीस ने कहा- यह बोट मस्कट से यूरोप जा रही थी। 26 जून 2022 को इस बोट का इंजन खराब हुआ और इस मौजूद लोगों ने डिस्ट्रेस कॉल किया। कोरियन नेवी की शिप ने इन लोगों को रेस्क्यू किया था। रेस्क्यू करने के बाद इन लोगों को ओमान के हवाले कर दिया गया था।

हाई टाइड की वजह से रायगढ़ तट पर पहुंची बोट फडणवीस ने बताया कि हाई टाइड होने के कारण इस बोट की टोइंग नहीं की जा सकी और यह तैरते हुए श्रीवर्धन के समुद्री तट पर पहुंच गई। इंडियन कोस्ट गार्ड ने इसकी पुष्टि की है। हमने अभी तक सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा है। नाकाबंदी भी जारी है। हम सभी एंगल को ध्यान में रखकर जांच को आगे बढ़ा रहे हैं। क्योंकि फेस्टिवल सीजन है कोई भी रिस्क नहीं लिया जा सकता।

टेरर एंगल के सवाल पर फडणवीस ने कहा- प्राथमिक जानकारी के अनुसार अभी तक हमें कोई टेरर एंगल नजर नहीं आया है, लेकिन जांच के बाद ही सबकुछ साफ हो सकेगा।

इसी बॉक्स में हथियार रखे हुए थे। बॉक्स पर अंग्रेजी में नेप्च्यून मरीटाइम सिक्योरिटी लिखा हुआ है। यह कंपनी ब्रिटेन की बताई जा रही है।
इसी बॉक्स में हथियार रखे हुए थे। बॉक्स पर अंग्रेजी में नेप्च्यून मरीटाइम सिक्योरिटी लिखा हुआ है। यह कंपनी ब्रिटेन की बताई जा रही है।

कोस्ट गार्ड के कमांडर जनरल परमेश शिवमणी ने कहा- 26 जून को इस बोट से हमें कॉल किया गया था। तब वो मुश्किल में थे और उन्होंने मदद मांगी थी। ओमान की खाड़ी में इस बोट पर मौजूद चार लोगों का रेस्क्यू किया गया था। बोट ब्रिटेन जा रही थी और इस पर ब्रिटेन का झंडा भी लगा था। बाद में यह हरिहरेश्वर चली गई।

इस पर तीन AK-47 के अलावा कुछ छोटे हथियार भी थे। बोट के मालिक से बातचीत की गई है। दुबई की एक सिक्योरिटी एजेंसी ने भी हमें फोन पर बताया कि इस सीरीज के हथियार उनके हैं और यह गायब हैं। इस एजेंसी ने साफ कर दिया है कि यह हथियार बोट पर मौजूद क्रू मेंबर्स की हिफाजत के लिए रखे गए थे।

पुलिस ने इस घटना के पीछे आतंकी साजिश से इनकार नहीं किया है। स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही पूरे रायगढ़ जिले को हाई अलर्ट पर रखा गया है। साथ ही समुद्र किनारे के सभी इलाकों की नाकेबंदी कर दी गई है। मौके पर एंटी टेरर स्क्वॉड ( ATS) भी पहुंच गई है। ATS चीफ विनीत अग्रवाल ने कहा कि ये आतंकी साजिश भी हो सकती है। बोट दूसरे देश की है या नहीं और इसका मकसद क्या था, हम इसकी भी जांच करेंगे।

रायगढ़ के तट पर पहले भी संदिग्ध गतिविधियां होती रहीं हैं। कहा जाता है कि 1993 ब्लास्ट से पहले अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम के निर्देश पर यहीं के शेखाडी तट पर ब्लास्ट में इस्तेमाल किए गए RDX उतारे गए थे। 26/11 में कसाब समेत 10 आतंकी भी रायगढ़ के समुद्र को क्रॉस करके मुंबई पहुंचे थे। यह भी थ्योरी सामने आई थी कि कसाब और उसकी टीम ने यहीं अपनी एक नाव बदली थी।

करीब 13 साल पहले यानी 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों ने ताज होटल समेत मुंबई के कई जगहों पर कत्लेआम मचाया था। इसमें 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे। तब लश्कर-ए-तैय्यबा के 10 पाकिस्तानी आतंकी समुद्र के रास्ते ही यहां आए थे। इनमें से 9 मारे गए थे, जबकि सिर्फ अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। 21 नवंबर 2012 को कसाब को फांसी पर लटका दिया गया था।

हर घर तिरंगा आजादी का अमृत महोत्सव के नेतृत्व में एक अभियान

स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में एक राष्ट्र के रूप में ध्वज को सामूहिक रूप से घर लाना न केवल तिरंगे से हमारे व्यक्तिगत संबंध का एक कार्य है बल्कि यह राष्ट्र-निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बन जाता है। आजादी के अमृत महोत्सव में हर घर तिरंगा अभियान 13 से 15 अगस्त, 2022 तक आयोजित किया जाएगा।

हमारे देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस पर हर घर में तिरंगा फहराया जा रहा है। आइए जानते हैं हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बारे में।

जसविंदर पाल शर्मा, डेमोक्रेटिक फ्रंट, श्री मुक्तसर साहिब पंजाब :

झंडा किसी देश का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक होता है। इसी तरह, भारत का राष्ट्रीय ध्वज भारत के लिए सर्वोच्च महत्व का प्रतीक है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज देश के सम्मान, देशभक्ति और स्वतंत्रता का प्रतीक है। यह भाषा, संस्कृति, धर्म, जाति आदि में अंतर के बावजूद भारत के लोगों की एकता को दर्शाता है। सबसे विशेष रूप से, भारतीय ध्वज एक क्षैतिज आयताकार तिरंगा है। इसके अलावा भारत के झंडे में केसरिया, सफेद और हरा रंग होता है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास

15जिसे तिरंगा भी कहते हैं, तीन रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज है। इसकी अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी।इसे 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व 22 जुलाई, 1947 को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था

1921 में महात्मा गांधी द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को ध्वज का प्रस्ताव दिया गया था। इसके अतिरिक्त, ध्वज को पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किया गया था। झंडे के केंद्र में एक पारंपरिक चरखा था। फिर केंद्र में एक सफेद पट्टी को शामिल करने के लिए डिजाइन में एक संशोधन किया गया। यह संशोधन अन्य धार्मिक समुदायों के लिए भी हुआ और चरखे की पृष्ठभूमि बनाने के लिए भी।

रंग योजना के साथ सांप्रदायिक जुड़ाव से बचने के लिए, विशेषज्ञों ने तीन रंगों को चुना। सबसे खास यह कि ये तीन रंग केसरिया, सफेद और हरा थे। केसरिया रंग साहस और बलिदान का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा सफेद रंग शांति और सच्चाई का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा, हरा रंग विश्वास और बहादुरी का प्रतीक है।
आजादी से कुछ दिन पहले विशेष रूप से गठित संविधान सभा ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। निर्णय यह था कि भारतीय ध्वज सभी समुदायों और पार्टियों को स्वीकार्य होना चाहिए। हालांकि, भारतीय ध्वज के रंगों में कोई बदलाव नहीं आया। हालांकि, चरखे को अशोक चक्र से बदल दिया गया था। इसके अलावा, यह अशोक चक्र कानून के शाश्वत चक्र का प्रतिनिधित्व करता है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन

ध्वज का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है तो उसे इस प्रकार फहराया जाएगा कि जब वक्ता का मुँह श्रोताओं की ओर हो तो ध्वज उनके दाहिने ओर हो। ध्वज किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए। फटा या मैला ध्वज नहीं फहराया जाता है।

Independence Day: The Demand For The Tricolor Has Doubled After Indias  Stellar Performance In The Olympics ANN | Independence Day: Olympics में  भारत के शानदार प्रदर्शन के बाद दोगुनी हुई तिरंगे की

नियमों में कहा गया है कि जब दो झंडे किसी पोडियम के पीछे की दीवार पर क्षैतिज रूप से फैले होते हैं, तो उनके झंडे एक दूसरे के सामने होने चाहिए। साथ ही केसर की पट्टियां ऊपर होनी चाहिए। जब फ्लैग डिस्प्ले एक छोटे फ्लैगपोल पर होता है, तो माउंटिंग दीवार के कोण पर होनी चाहिए। साथ ही, कोण ऐसा है कि उसमें से झंडा लिपटा हुआ है। जब एक पार किए गए कर्मचारी पर झंडे दिखाई देते हैं, तो लहराते हुए एक दूसरे की ओर होना चाहिए।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल कभी भी टेबल, लेक्चर, पोडियम या इमारतों को ढंकने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। जब ध्वज को घर के अंदर प्रदर्शित किया जाता है, तो यह हमेशा दाहिनी ओर होना चाहिए। इसका कारण प्राधिकरण की स्थिति है। इसके अतिरिक्त, ध्वज हमेशा वक्ता के दाहिने हाथ पर होना चाहिए जब ध्वज वक्ता के सामने प्रदर्शित होता है। सबसे विशेष रूप से, जब भी ध्वज प्रदर्शित किया जाता है, तो इसे पूरी तरह से बढ़ाया जाना चाहिए।
अंत में, भारत का राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश का गौरव है। इसके अलावा, भारत का झंडा देश की संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करता है। सबसे विशेष रूप से, राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हुए देखना हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी का क्षण होता है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज निश्चित रूप से भारत के प्रत्येक नागरिक से बहुत सम्मान का पात्र है।

जगदीप धनखड़ होंगे देश के अगले उपराष्ट्रपति, 11 अगस्त को लेंगे शपथ

चुनाव के नतीजे आने से पहले एनडीए प्रत्याशी जगदीप धनखड़ की जीत तय मानी जा रही थी। ऐसा इसलिए था क्योंकि दोनों सदनों में मौजूद आँकड़ों के अनुसार बहुमत के लिए 388 वोट की जरूरत होती है और इस बार अकेले भाजपा के पास ही दोनों सदनों के सदस्यों को मिलाकर संख्या 390 (लोकसभा में 303 सांसद और राज्यसभा में 93 सांसद) के ऊपर थी।

  • जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले, जबकि मार्गरेट अल्वा को सिर्फ 182 वोट से संतोष करना पड़ा
  • मतदान के दौरान 780 में से 725 सांसदों ने अपने मत का इस्तेमाल किया
  • उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत के लिए 390 से अधिक मतों की आवश्यकता थी

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़/नई दिल्ली :

देश के नए उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए शनिवार को हुए मतदान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ विजयी घोषित हुए हैं। उनका मुकाबला विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा से था। धनखड़ को जहां 528 वोट मिले, वहीं अल्वा को सिर्फ 182 वोट से संतोष करना पड़ा, जबकि 15 वोट अमान्य करार दिये गए। लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, “सुबह 10 बजे से शुरू हुआ चुनाव शाम 5 बजे तक चला। इस दौरान 780 में से 725 सांसदों ने अपने मत का इस्तेमाल किया।  वोटिंग खत्म होने के तुरंत बाद ही बैलेट बॉक्स को सील कर दिया गया। मतों की गिनती शाम 6 बजे शुरू हुई. कुल 725 वोट (92.94%) डाले गए, जिसमें से 710 वोट (97.93%) ही मान्य थे।”

जीत के लिए 390 से अधिक मतों की आवश्यकता थी।  संसद में वर्तमान सदस्यों की मौजूदा संख्या 788 है, जिनमें से केवल भाजपा के 394 सांसद हैं। ऐसे में आंकड़ों के लिहाज से पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल धनखड़ की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी। धनखड़ 71 वर्ष के हैं और वह राजस्थान के प्रभावशाली जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उनकी पृष्ठभूमि समाजवादी रही है।  जनता दल (यूनाईटेड), वाईएसआर कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, अन्नाद्रमुक और शिवसेना ने धनखड़ का समर्थन किया था।  आपको बता दें कि, लोकसभा और राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 788 है, लेकिन उच्च सदन राज्यसभा में 8 सीट रिक्त होने के कारण इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने वाले सांसदों की कुल संख्या 780 थी।

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 55 सांसदों ने वोटिंग के अधिकार का प्रयोग नहीं किया। इनमें से टीएमसी के 34 सांसद शामिल थे। हालांकि टीएमसी के दो सांसदों ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के आदेश के बावजूद वोटिंग में हिस्सा लिया। ये नाम शिशिर और दिव्येंदु अधिकारी के हैं। इसके अलावा एसपी और शिवसेना के दो और बीएसपी के एक सांसद ने भी वोटिंग नहीं की। भाजपा के दो सांसदों- सनी देओल और संजय धोत्रे ने भी स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वोटिंग से किनारा किया।

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 55 सांसदों ने वोटिंग के अधिकार का प्रयोग नहीं किया। इनमें से टीएमसी के 34 सांसद शामिल थे। हालांकि टीएमसी के दो सांसदों ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के आदेश के बावजूद वोटिंग में हिस्सा लिया। ये नाम शिशिर और दिव्येंदु अधिकारी के हैं। इसके अलावा एसपी और शिवसेना के दो और बीएसपी के एक सांसद ने भी वोटिंग नहीं की। भाजपा के दो सांसदों- सनी देओल और संजय धोत्रे ने भी स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वोटिंग से किनारा किया।

राजस्थान के झुंझुणूं जिले में एक सुदूर किठाना गांव में कृषि परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति तक का सफर बेहद दिलचस्प है। जगदीप धनखड़ साल 1989 में जनता दल पार्टी के सांसद के तौर पहली बार राजस्थान के झुंझुणूं जिले से संसद पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं दी। 1993 में वे अजमेर जिले के किशनगढ़ से राजस्थान विधानसभा पहुंचे। साल 2019 में उन्हें केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। 

मिलेट  क्रांति लाने के लिए वर्ल्ड वाइड वेब दिवस मनाया गया

लोगों से स्वस्थ रहने के लिए मुख्य भोजन के रूप में मिलेट का सेवन करने का आग्रह किया गया

डेमोक्रेटिक फ्रंट संवाददाता, चण्डीगढ़ :

दुनिया भर में व्यापक रूप से भाग लेने वाले एक वेबिनार में, डाइटिशियन श्रेया ने पोषण और पर्यावरणीय मूल्यों और मिलेट की खपत के सहसंबंध और हमारे किसानों को बचाने और हमारी मिट्टी और पर्यावरण की रक्षा के लिए मिलेट क्रांति के महत्वपूर्ण संदेश को फैलाने के लिए वर्ल्ड वाइड वेब दिवस चुना।

  गौरतलब है कि भारत के आह्वान पर यूएनओ द्वारा विश्व के 80 देशों द्वारा वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेटवर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

*मिलेट गर्ल श्रेया ने इस वेबिनार में सभी मिलेटस  के सूक्ष्म पोषण संबंधी विवरणों पर ध्यान केंद्रित किया, बाजरा के बारे में सभी शंकाओं को दूर करने के लिए उपस्थित लोगों की ओपन सेशन से भी  मदद  की*