महाराष्ट्र में सुरक्षित नहीं हैं हिन्दू समाज के पुरोधा

ठाकरे परिवार सत्ता सुह के लिए इस हद तक जा सकता है मानो यह देखना अभी बाकी ही है। पालघर लिंचिंग का मामला हो अथवा टीपू सुल्तान की जयंती एफ़आर उद्धव ठाकरे का ब्यान की राम मंदिर का निर्माण तुरंत रुकवा देना चाहिए और अब नांदेड़ में साधू की हत्या। कारण कोई भी हो यह तय है की अब कोई भी पत्रकार सत्ता पक्ष अथवा उनके घटक दलों से सीधे सीधे कोई प्रश्न नहीं करेगा, किसी को 12 घंटे की अनर्गल पूछताछ के चक्कर में नहीं फंसना। न जाने क्यों यह लाग्ने लग गया है की पूछो जितने प्रश्न पूछने हैं यह सब तो चलता ही रहेगा। आप पर हमला भी होगा और पूछताछ में दोषी भी आप ही को बनाया जाएगा। महाराष्ट्र में साधुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. पालघर में दो साधुओं की हत्या का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब नांदेड़ में एक साधु की हत्या से इलाके में खौफ का माहौल है। अब महाराष्ट्र के नादेंड़ के उमरी तालुका के नागठाना में बाल ब्रह्मचारी साधु शिवाचार्य की हत्या का मामला सामने आया है। शिवाचार्य के पास ही भगवान शिंदे नाम के शख्स की भी लाश मिली। इन दोनों की लाश बाथरूम के पास मिली है। हत्या गला रेत कर की गई। पुलिस ने हत्या के मामले में साईनाथ शिंगाडे नाम के शख्स को तेलंगाना से पकड़ा है।

मुंबई(ब्यूरो) – 24मई

      महाराष्ट्र में पालघर के बाद अब नांदेड़ जिले में लिंगायत समाज के साधु की हत्या का मामला सामने आया है। मृतक साधु का नाम रुद्र पशुपति महाराज बताया जा रहा है। इस घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। नांदेड़ अधीक्षक विजयकुमार मगर ने कहा कि देर रात नांदेड़ के उमरी में लिंगायत समुदाय के एक साधु का शव उनके आश्रम में पाया गया।

      जानकारी के मुताबिक, रुद्र पशुपति महाराज के साथ ही बदमाशों ने उनके एक और सहयोगी की भी हत्या कर दी है। दूसके मृतक का नाम भगवान राम शिंदे बताया गया है। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर दोनों के शव कब्जे में ले लिए हैं और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए हैं।

      वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साधु की हत्या पर गाँव वालों ने अनशन कर दिया है। उनका कहना है कि हत्यारे के पकड़े जाने के बाद ही इन दोनों का अंतिम संस्कार होगा।

      बताया जा रहा है कि साधु की हत्या साईनाथ राम नाम के शख्स ने की है। पुलिस के मुताबिक आरोपित भी लिंगायत समाज का ही है और मृतक भगवान राम शिंदे आरोपित का साथी था।

कैसे हुई हत्या?

      आरोपित साईनाथ शनिवार रात दरवाजा खोलकर आश्रम में दाखिल हुआ, क्योंकि कहीं भी दरवाजा तोड़ने के निशान नहीं हैं। दरवाजा अंदर से खुला है, यह कैसे खुला फिलहाल इस बारे में स्पष्ट नहीं है। पशुपति महाराज की हत्या करने के बाद आरोपित साईनाथ साधु की लाश कार में रखकर बाहर निकलने की फिराक में था। लेकिन कार गेट में फँस गई। इस दौरान छत पर सो रहे आश्रम के दो सेवादार जाग गए। उन्हें जब तक सारी बात समझ में आती आरोपित भागने लगा। सेवादारों ने आरोपित का पीछा किया, लेकिन वह भाग निकला।

सुबह एक और मृत शरीर मिला

      रविवार (मई 24, 2020) सुबह जिला परिषद स्कूल के पास भगवान राम शिंदे की डेड बॉडी मिली। भगवान राम शिंदे भी लिंगायत समाज से हैं। उनकी हत्या साईनाथ ने की या किसी और ने, पशुपति महाराज की हत्या से पहले या बाद में, तमाम सवालों पर पुलिस फिलहाल जाँच कर रही है।

      बताया जा रहा है कि साधु की गला रेतकर हत्या की गई है। नांदेड़ के आश्रम में लिंगायत समुदाय के साधु की हत्या ने फिर महाराष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हत्या के बाद एक बार फिर बीजेपी ने उद्धव सरकार के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा, “साधु और एक सेवकरी की नांदेड़ जिले में नृशंस हत्या स्तब्ध करने वाला और दुखद है। मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं. राज्य सरकार से मेरा यह अनुरोध है कि आरोपी को फौरन गिरफ्तार किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उसे कठोर सजा मिले.” 

      बीजेपी नेता और प्रवक्ता राम कदम ने कहा, “महाराष्ट्र में एक महीने के अंतराल में ही एक बार फिर साधु की हत्या कर दी गई। पहली बार हुई साधुओं की हत्या को अफवाह करार देने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने बचने की कोशिश की थी, लेकिन सच तो यह है कि महाराष्ट्र सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है। जिस तरह से राज्य में साधु-संतों की हत्या हो रही है, उससे साफ है कि राज्य में साधु सुरक्षित नहीं हैं।”

      गौरतलब है कि इससे पहले पालघर में 70 साल के कल्पवृक्षनाथगिरी और 35 साल के सुशीलगिरी नाम के 2 साधु और उनके 32 साल के ड्राईवर नीलेश तेलगडे की पीच-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस दौरान वहाँ मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जानकारी के मुताबिक दोनों साधु लॉकडाउन के दौरान गुजरात में अपने गुरु की अंतिम यात्रा में शामिल होने जा रहे थे।

दुकान से घर लौट रहे ज्वैलर्स पर हमला कर गहनों से भरा बैग छीना

पुलिस ने ज्वेलर्स की शिकायत पर किया लूट का मामला दर्ज

कोशिक खान, छछरौली -15 मई:

 दुकान बंद करके घर लौट रहे सुनार का रास्ता रोक तेजधार हथियार से हमला कर बुलेट सवार तीन युवक गहनों से भरा बैग ले उड़े। बैग में करीब साढे ₹3 लाख के गहने थे। सुनार के बयान पर पुलिस ने तीनों युवकों के खिलाफ लूट का मामला दर्ज किया।

ललहाडी निवासी ललित ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि कोट मुस्तरका गांव में उसकी राघव ज्वेलर्स के नाम से दुकान है। वीरवार को शाम के समय करीब 6:45 पर उसने दुकान बंद की थी। दुकान बंद कर घर जाते समय उसने अपने बैग में 3 किलो चांदी एक सोने की चैन 20 ग्राम, दो जोड़ी कानों की बालियां 10ग्राम,दो अंगुठी 8 ग्राम रखी हुई थी। जिनकी कीमत करीब साढे तीन लाख के लगभग थी। यह ज्वैलरी बैग में रखकर अपने साथ घर ले जा रहा था। वह कोट मुश्तरका से चलकर कोट माजरी के पास पहुंचा तो सड़क पर गांव के ही तीन युवक इंद्रजीत, रजत व असलम बुलेट बाइक लेकर खड़े हुए थे। जिनको वह अच्छी तरह से पहचानता ओर जानता भी है। जैसे ही वह उनके करीब गया तो उन्होंने रास्ता रोककर उसको बीच सड़क रोक लिया। इस दौरान अचानक इंद्रजीत ने कृपाण से उसके चेहरे पर हमला कर दिया।जिससे मेरे माथे पर आंख के पास गहरी चोट लगी और पास खड़े रजत ने भी तुरंत उसके चेहरे पर डंडे से वार किया जिसे उसके चेहरे पर चोट लग गई और वह मोटरसाइकिल समेत नीचे गिर गया। जब वह नीचे गिरा तो उनके साथी असलम ने लोहे की रॉड से उसके चेहरे पर वार किया जो कि उसकी नाक पर लोहे की रॉड लगने से उसको गहरी चोट लगी। जिससे वह बुरी तरह से तड़प उठा। इस दौरान उन्होंने ज्वेलरी से भरा बैग उससे छीन लिया। उसने इस दौरान शोर भी मचाया पर आस-पास कोई नहीं था। वह बैग छीनकर वहां से फरार हो गए। इसके बाद वह बेहोश हो गया पीछे से मेरे चाचा का लड़का अमित जो कि कोट मुश्तरका गांव में किसी काम के लिए गया था वह वापस घर आ रहा था। उसने देखा कि ललित घायल अवस्था में बेहोश पड़ा है। उसने वहां से उठाकर जगाधरी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया जहां पर उपचार चल रहा है। पुलिस ने ललित के बयान पर तीनों युवकों के खिलाफ लूट का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

थाना प्रभारी छछरौली पृथ्वी सिंह का कहना है कि ललहाडी निवासी ललित की शिकायत पर कोट मुश्तरका निवासी तीन युवक इंद्रजीत, रजत व असलम के खिलाफ लूट व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन कर दबिश दी जा रही है। जल्दी ही आरोपियों की गिरफ्तार कर उनको कोट में पेश कर दिया जाएगा।

महाराणा प्रताप की जयंती पर विशेष

चंडीगढ़(धर्म संस्कृति) – 9 मई

बाबर के खिलाफ युद्ध में राणा सांगा की हार ने देश का भाग्य बदल दिया और दिल्ली में मुगल सत्ता की स्थापना हुई , जो बाबर से अकबर तक विस्तारित होकर दृढ़तर होती गई। राजपूताना के सभी राजाओं ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली। इतना ही नहीं , अपने पवित्र कुलों की कन्याओं को अकबर के हरम में भेज दिया। अत्याचारों का दौर चल पड़ा। मेवाड़ को छोड़ सभी दिल्लीश्वर को जगदीश्वर मान बैठे। ऐसे समय में महाराणा प्रताप का उदय हुआ।

महारानी जयवन्ती बाई के गर्भ से ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया , रविवार , विक्रम संवत् 1597 (9 मई , 1540) को कुम्भलगढ़ में महाराणा प्रताप का जन्म हुआ। चण्डू ज्योतिषी ने प्रताप की जन्म पत्रिका तैयार की। प्रताप का जीवन राजसी वैभव से अप्रभावित , सादगी , सरलता और विनम्रता लिए हुए था। वे उच्च चरित्र के व्यक्ति थे।   बचपन में पौराणिक कथाएं , देश के लिए जीने की वृत्ति का उपदेश सुनकर ही प्रताप तैयार हुए। राजकुमारों के समान ही शिक्षा-दीक्षा हुई। शस्त्र विद्या में निपुण प्रताप सिंह अपने आसपास के इलाके में “कीका ” नाम से विख्यात थे। इतिहासकार राजशेखर व्यास लिखते हैं कि प्रताप लगभग दस वर्ष तक कुम्भलगढ़ में रहे और अधिकांश समय भीलों के साथ व्यतीत किया। भीलों के साथ उनकी इतनी घनिष्ठता थी कि वे मात्र महाराणा उदयसिंह के पुत्र न होकर प्रत्येक भील परिवार के पुत्र तथा राज परिवार के राजकुमार न रहकर मेवाड़ के व्यापक भील समुदाय के राजकुमार बन गए।   मेवाड़ के वनवासी इलाकों में लोक संबंधों की घनिष्ठता इतनी प्रगाढ़ हो गई थीं कि हर रोज भील परिवारों के वृद्ध , प्रौढ़ , युवक , पुरुष और महिलाएं प्रताप के अपने घर आने की प्रतीक्षा करते थे। उनके आने पर अत्यधिक प्रसन्नता का अनुभव कर स्वर्गिक आनंद की प्राप्ति करते थे।

प्रताप 12 वर्ष की उम्र में 1552 में कुम्भलगढ़ से चित्तौड़गढ़ आए और वहां तलहटी में झालीमहल (पाडनपोल के पास) में रहकर शस्त्र प्रशिक्षण , राजनीतिक दांव-पेच इत्यादि सीखने लगे। उनके गुरु सलूम्बर के रावत किसनदास थे। अब तक प्रताप को युवराज का पद प्राप्त हो गया था। इसी समय अपनी मित्र मंडली के साथ उन्होंने जयमल मेड़तिया से युद्ध व्यूह कला का प्रशिक्षण प्राप्त किया। मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में प्रताप ने वागड़ , छप्पन और गोड़वाड़ के इलाके जीत लिए। इसी समय उनका विवाह मामरख पंवार की पुत्री अजबांदे कुंवर से हुआ। 16 मार्च , 1559 को अजबांदे कुंवर की कोख से ज्येष्ठ पुत्र के रूप में अमर सिंह ने जन्म लिया। आगे चलकर महाराणा प्रताप ने सैन्य प्रशिक्षण और सैनिकों की भर्ती के प्रयास शुरू किए , जिसमें भीलू राणा पूंजा का विशेष योगदान रहा। महाराणा प्रताप के राज्यारोहण के समय ही भीलू राणा अपने सैनिकों के साथ पूंजा पानरवा से आ गया था। हल्दीघाटी युद्ध में वह 500 सैनिकों के साथ पहाड़ों में तंदावल दस्ते में तैनात था। प्रताप की सेना के गोगुन्दा से कोत्यारी के जंगलों से जाने पर मानसिंह की सेना को घेरने , रसद सामग्री लूटने तथा आवरगढ़ में अस्थायी निवास स्थापित कर प्रताप एवं उनके परिवार की सुरक्षा का जिम्मा भीलू राणा पूंजा ने अपने ऊपर लिया था। भीलू राणा पूंजा तथा उसके भील सैनिकों की कर्त्तव्यनिष्ठा , रण-कुशलता तथा छापामार युद्ध प्रणाली की दक्षता के कारण ही प्रताप , अकबर और उसके सेनानायकों के भीषण आक्रमणों का सामना कर सके। चावण्ड में राजधानी की स्थापना के समय तक प्रताप को भीलों का अतुलनीय योगदान प्राप्त था। मेवाड़ ने इसी कारण अपने राज चिह्न में एक ओर राजपूत तथा दूसरी ओर भील सैनिक का चित्र देकर उनके योगदान को मान्यता प्रदान की है।

1576 से 1585 तक अकबर ने सात बार अपने सेनापतियों को समस्त संसाधनों से युक्त बड़ी सेना के साथ महाराणा को पराजित करने के लिए भेजा। एक बार तो वह खुद भी आया। यही नहीं , अकबर ने अपने सेनापतियों को धमकी भी दी कि असफल होने पर उनके सिर कलम करवा देगा। इसके बावजूद अकबर के सेनापतियों का हर आक्रमण असफल रहा। संक्षेप में कहा जा सकता है कि संघर्ष के इस दशक में ( 1576-1585) अकबर हर मामले में महाराणा प्रताप से पराजित हुआ। प्रताप अन्ततोगत्वा अपनी छापामार युद्धनीति के कारण शत्रु को परास्त करने में सफल होकर स्वयं अविजित रहे और स्वतंत्रता की अलख जलाकर विदेशी दासता के बंधनों से मातृभमि को मुक्त रख सके।

अब्दुल रहीम खानखाना , जिन्हें अकबर ने प्रताप को मिटाने भेजा था , महाराणा की प्रशंसा में दो पंक्तियां लिख गए हैं-
धरम रहसी रहसी धरा ,
खप जासी खुरसाण।
अमर विसम्भर ऊपरे ,
राख निहच्चौ राण।।

अर्थात् धर्म रहेगा , धरती रहेगी , परन्तु शाही सत्ता सदा नहीं रहेगी। अपने भगवान पर भरोसा करके राणा ने अपने सम्मान को अमर कर लिया है। इस अमरत्व को प्राप्त करने के लिए प्रताप को केवल 57 साल का जीवन और 25 साल का राजकाल मिला। राजस्थान का गौरव सूर्य उगने से पहले ही कुम्हला गया और अपने जीवन के भरे मध्याह्न में जमीन से लग गया। जेम्स टॉड से लेकर आधुनिक इतिहासकारों ने मृत्यु के समय महाराणा प्रताप की दु:खी मनस्थिति का वर्णन किया है तथा इसका कारण अमरसिंह की अयोग्यता बताया है। सरदारों के शपथ लेने पर उन्होंने शान्तिपूर्वक प्राण त्याग दिए।   यह घटना वि.सं. 1653 माघ सुदी 11 की है महाराणा प्रताप ने अपने अंतिम समय में मेवाड़ को पूर्ण स्वतंत्र (मेवाड़ के सभी 32 किले) कराकर , उसे सुव्यवस्थित कर लिया था।

पंजाब में नशा आंतकवाद फैलाने के भद्दे यत्नों से बाज़ आए पाकिस्तान- कैप्टन

  • कोविड की ड्यूटियों के बावजूद देश विरोधी गतिविधियों पर पुलिस की कड़ी नजऱ
  • पाकिस्तान को ऐसी सरगर्मियों की हरगिज़ इजाज़त नहीं देंगेे

राकेश शाह, चंडीगढ़ – 9 मई:

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज पाकिस्तान द्वारा सीमा पार से नशा आंतकवाद फैलाने के लगातार किये जा रहे यत्नों के विरुद्ध सख़्त चेतावनी दी है। उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति ज़ाहिर करते हुए कहा कि कोविड के संकट के दरमियान भी पंजाब पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है और सीमा पार की देश विरोधी गतिविधियों पर तीखी नजऱ रखी जा रही है।

पुलिस द्वारा नशों के कारोबार में बड़ी मछलियों को काबू करने के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमें सब कुछ दिखाई दे रहा है कि पाकिस्तान कर क्या रहा है?’’ लोगों को भरोसा देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पुलिस फोर्स चाहे कोविड की ड्यूटियों में कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, सरहद पर पूरी निगाह रख रही है। उन्होंने डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता के नेतृत्व वाली पुलिस फोर्स को बधाई दी, जिन्होंने ताज़ा गिरफ्तारियों के साथ-साथ हिज़बुल मुजाहिदीन के खि़लाफ़ जम्मू-कश्मीर में चलाए गए ऑपरेशनों में अहम भूमिका अदा की। उन्होंने हिलाल की गिरफ्तारी का हवाला दिया जो हिज़बुल मुजाहिदीन का सक्रिय कार्यकर्ता था और पाबन्दीशुदा जत्थेबंदी का कमांडर नायकू जिसको कश्मीर में सुरक्षा बलों ने हलाक कर दिया था, का नज़दीकी साथी था।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा कि कोविड संकट के बावजूद पाकिस्तान द्वारा नशे, हथियार और ड्रग मनी को बढ़ावा देने की कोशिशों को सफल नहीं होने देंगे, क्योंकि पड़ोसी मुल्क राज्य को अस्थिर करके यहाँ की शान्ति भंग करने की भद्दी चालें चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसी घटना की हरगिज़ इजाज़त नहीं देंगे।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (सीमा पर सुरक्षा की पहली कतार) द्वारा पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को मात देने के लिए पूरी मुस्तैदी बरती जा रही है। उन्होंने साथ ही कहा कि पंजाब की पुलिस लगातार चौकसी के साथ काम कर रही है, जिससे ऐसे घृणित कामों को पूरा नहीं होने दिया जाये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘दहशतगर्दों और गैंग्स्टरों ने सोचा होगा कि पुलिस कर्मियों की कोविड-19 ड्यूटी और स्रोतों की बाँट होने के कारण पैदा हुए हालातों का लाभ लेते हुए वह पंजाब में नशों और हथियारों की तस्करी करके अशांति पैदा कर देंगे। चाहे आधी पुलिस फोर्स कफ्र्यू /लॉकडाउन की ड्युूटी और मानव कल्याण के लिए काम कर रही है परन्तु वह साथ ही सीमा पर घट रही गतिविधियों पर भी गहरी निगरानी रख रही है।

उन्होंने कहा कि हम यह यकीनी बनाऐंगे कि देश विरोधी असामाजिक तत्वों को पकड़ कर सलाखों के पीछे भेजा जाये, जहाँ उनकी असली जगह है।

राज्य के लोगों के साथ पंजाब के अंदर नशों के धंधो की कमर तोड़ देने संबंधी किये अपने वायदे को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रणजीत उर्फ चीता की गिरफ्तारी ने इसको प्रभावी रूप में कर दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्च 2017 में पंजाब के अंदर उनकी सरकार बनने के बाद पुलिस द्वारा दहशतगर्दी ताकतों पर नकेल कसने के लिए पूरी चौकसी से काम किया जा रहा है और अब तक ऐसे 32 गिरोहों को काबू कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस समय के दौरान 155 दहशतगर्दों /कट्टरपंथियों को गिरफ़्तार करने के साथ-साथ बड़ी मात्रा में हथियारों, जिनमें विदेशों में बने हथियार और चीन में बने ड्रोन शामिल हैं, की बरामदगी की जा चुकी है।

गिलगित-बाल्टिस्‍तान और मुजफ्फराबाद अब IMD के वेदर बुलेटिन में

भारत ने पाकिस्तान को साफ और कड़े शब्दों में समझा दिया है कि गिलगित- बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं। इस बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के क्षेत्रों को भी अब अपने वेदर बुलेटिन में शामिल कर लिया है। यानी आईएमडी ने अपने बुलेटिन में ‘जम्‍मू और कश्‍मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्‍तान और मुजफ्फराबाद’ को भी शामिल कर लिया है।

  • पाकिस्‍तानी सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने का आदेश
  • भारत पहले ही कर चुका है साफ, गिलगित-बाल्टिस्तान देश का अभिन्‍न अंग
  • ‘अवैध तरीके से और जबरन कब्जाए’ हुए इलाकों में हस्‍तक्षेप ना करें पाकिस्‍तान : भारत
  • भारतीय मौसम विभाग ने अपने बुलेटिन में गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को भी दी जगह

नई दिल्‍ली

भारत ने पाकिस्‍तान को साफ-साफ समझा दिया है कि गिलगित-बाल्टिस्‍तान उसका अभिन्‍न अंग है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जम्‍मू-कश्‍मीर सब-डिविजन को अब ‘जम्‍मू और कश्‍मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्‍तान और मुजफ्फराबाद’ कहना शुरू कर दिया है। गिलगित-बाल्टिस्‍तान और मुजफ्फराबाद, दोनों पर पाकिस्‍तान ने अवैध रूप से कब्‍जा कर रखा है। मंगलवार को IMD ने नॉर्थवेस्‍ट इंडिया के लिए जो अनुमान जारी किए, उसमें गिलगित-बाल्टिस्‍तान और मुजफ्फराबाद को भी शामिल किया गया है।

क्‍यों अहम है IMD का ये कदम?
IMD की ओर से अपने बुलेटिन में गिलगित-बाल्टिस्‍तान और मुजफ्फराबाद को जगह देना बड़ा अहम है। IMD के डायरेक्‍टर-जनरल मृत्‍युंजय महापात्रा ने कहा कि ‘IMD पूरे जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के लिए वेदर बुलेटिन जारी करता रहा है। हम बुलेटिन में गिलगित-बाल्टिस्‍तान, मुजफ्फराबाद का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्‍योंकि वह भारत का हिस्‍सा है।’ इसी महीने की शुरुआत में भारत ने साफ कहा था कि पाकिस्‍तान का इन इलाकों पर कोई हक नहीं है। दरअसल वहां की सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्‍तान सरकार को गिलगित-बाल्टिस्‍तान में चुनाव कराने के आदेश दिए थे। भारत ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि पाकिस्‍तान को वहां पर दखल देने का कोई हक नहीं है।

पाकिस्‍तान की अदालत नहीं कर सकती फैसला: भारत
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनयिक को आपत्ति पत्र भी जारी किया था। बयान के मुताबिक, तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पाकिस्तान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।’ बयान में कहा गया, ‘यह स्पष्ट रूप से बता दिया गया है कि केंद्र शासित प्रदेश पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, वह पूरी तरह से कानूनी और अपरिवर्तनीय विलय के तहत भारत का अभिन्न अंग हैं।’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी सरकार या उसकी न्यायपालिका को उन क्षेत्रों पर हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं हैं जो उसने ‘अवैध तरीके से और जबरन कब्जाए’ हुए हैं।

भारत ने दिया कानून का हवाला
पाकिस्‍तान से भारत ने कहा था कि संसद से 1994 में पास एक प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर पर स्थिति साफ है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के हालिया कदम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर उसके ‘अवैध कब्जे’ को छुपा नहीं सकते हैं और न ही इस पर पर्दा डाल सकते हैं कि पिछले सात दशकों से इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के ‘मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया, शोषण किया गया और उन्हें स्वतंत्रता से वंचित’ रखा गया।

क्या रानी नागर का इस्तीफा नामंज़ूर करने से महिला अधिकारी से होगा न्याय??

सारिका तिवारी, चंडीगढ़:

हरियाणा काडर की चर्चित आईएएस अधिकारी रानी नागर द्वारा दिए गए इस्तीफे को हरियाणा सरकार द्वारा नामंजूर कर दिया गया है। रानी ने गत दिवस इस्तीफा देने औऱ घर की अनुमति मिल जाने के बाद अपनी बहन के साथ गाजियाबाद चलींं गई थी। वहीं उनके त्‍यागपत्र से हरियाणा की सियासत गर्मा गई थी।

भरोसेमंद उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया है कि राज्य सरकार की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने रानी नागर के इस्तीफे का पूरा मामला प्रदेश के मुख्यमंत्री व बाकी अफसरों के साथ में विचार-विमर्श किया। मामले में मुख्यमंत्री और सीएमओ के अफसरों ने फिलहाल इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया है। दूसरा बताया जा रहा है कि पूरे मामले में सरकार फूंक फूंककर कदम रखेगी साथ ही इस महिला अधिकारी द्वारा अगर किसी अन्य राज्य में सर्विस करने का विकल्प दिया जाता है, तो उस पर भी सरकार विचार करेगी। इतना ही नहीं रानी की सहमति बनती है, तो उसको दूसरे काडर में भेजने की सिफारिश भी राज्य की ओर से कर दी जाएगी।

रानी नागर के सनसनीखेज आरोप

हरियाणा (Haryana) की महिला आईएएस अफसर रानी नागर (IAS Rani Nagar) ने अपना इस्तीफा देने के बाद गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने गुरुवार को ट्वीट कर यूटी गेस्ट हाउस (Guest House) पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि यूटी गेस्‍ट हाउस में उन्‍हें खराब खाना दिया जाता है. खाने में लोहे के पिन मिलाकर दिया जाता था. रानी नागर के आरोप से हड़कंप मच गया है. बता दें कि आईएएस अधिकारी रानी नागर ने चार मई को अपना इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद वो अपनी बहन के साथ उत्‍तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित अपने घर चली गई थीं. उनके त्‍यागपत्र देने से हरियाणा की सियासत गर्मा गई है.

रानी नागर ने अपने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि हमें यूटी गेस्ट हाऊस में ही रखा गया. कर्फ्यू और लॉकडाउन में हमें खाना भी नहीं मिला. मैं और मेरी बहन रीमा नागर ने कर्फ्यू और लॉकडाउन में बड़ी मुश्किल से तरल पदार्थ आदि से अपना गुजारा चलाया. यदि आप मेरा इस्तीफा रोकने के बारे में आग्रह और आंदोलन ना करें तो आप सभी की हम पर बड़ी दया होगी.

उनके समर्थन में आए लोगों से की अपील

उन्होंने उनके समर्थन में आए लोगों से भी ट्वीट में अपील करते हुए कहा, आप सभी से हाथ जोड़कर सादर यह विनती करती हूं कि आप मेरा इस्तीफा स्वीकार ना किए जाने के लिए आग्रह और आंदोलन ना करें. मुझे माननीय न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. मैं अपने केस में माननीय न्यायपालिका में जाती रहूंगी. मेरे पास अभी अपनी रोटी खाने के लिए भी बहुत सीमित साधन है.

हाथ जोड़कर की विनती

मेरी आप सभी से हाथ जोड़कर विनती है कि जितनी जल्दी मेरा इस्तीफा स्वीकार होगा उतनी ही जल्दी मेरे तनख्वाह में से कटा हुआ एनपीएस फंड मुझे प्राप्त होगा जिससे मैं अपना रोटी का का खर्च चला पाऊंगी. मेरे इस्तीफा स्वीकार ना होने से मेरा और अधिक शोषण होगा. आगे सरकारी नौकरी कर पाना मेरे लिए संभव नहीं होगा.

Shri narsimha

नरसिंह जयंती पर विशेष

चंडीगढ़ (धर्म संस्कृति):

भक्तों की रक्षा के लिए प्रभु धरती पर अवतरित होते हैं। भक्त06 मई 2020 को नृसिंह जयंती को है। भगवान को अपने भक्त सदा प्रिय लगते हैं तथा जो लोग सच्चे भाव से प्रभु को याद करते हैं उन पर प्रभु की कृपा सदा बनी रहती है तथा भगवान अपने भक्तों के सभी कष्टों का क्षण भर में निवारण कर देते हैं।भगवान विष्णु के दशावतारों में नृसिंह अवतार का प्रमुख स्थान है। नृसिंह जयंती वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को व्रत-पर्व के रूप में श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नृसिंह जयंती मनाई जाती है। तदनुसर इस वर्ष गुरूवार 9 मई 2017 को नृसिंह जयंती मनाई जाएगी। हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस तिथि को भगवान विष्णु जी ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु नृसिंह के रूप में अवतरित हुए थे। भगववान नृसिंह ने इस दिन भक्त प्रह्लाद के पिता दैत्य हिरण्यकशिपु का वध कर धर्म तथा भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। अतः इस दिन नृसिंह जयंती मनाई जाती है।

नृसिंह पुराण के अनुसार इस पर्व को दोपहर के समय पवित्र नदी, सरोवर आदि पर जाकर आंवले के लेप के साथ अति शुभ फलदायक बताया गया है। उल्लिखित है कि मानसिक संकल्प के साथ उस दिन उपवास करना चाहिए। शाम को प्रदोष के बाद वेदी पर कमल बनाकर उस पर नृसिंह व लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित कर भगवान नृसिंह का पंचोपचार पूजन करना चाहिए। रात में गायन, वादन, नृसिंह पुराण का श्रवण तथा हरिकीर्तन आदि के साथ रात्रि जागरण से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। दूसरे दिन विप्रों को भोजन कराने के बाद पारण का विधान है।

जयंती पर भगवान नृसिंह के दर्शन पूजन औेर व्रत दान से समस्त पापों का शमन होता है। ईश्वरीय कृपा से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। भगवान नृसिंह के उग्र रूप का दर्शन तथा इनके मंत्रों का जप शत्रुओं की पराजय व नौ ग्रहों की शांति का कारक तो है ही, इससे बाधाओं से पार करने की शक्ति भी प्राप्त होती है। इनका मंत्र ही कष्टों का दमनकारी है।
जानिए भगवान नरसिंह की कथा–

हमारे शास्त्र एवं पुराण प्रभु की महिमा से भरे पड़े हैं। जिनमें बताया गया है कि भगवान सदा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। जब भक्त किसी दुष्ट के सताए जाने पर सच्ची भावना से प्रभु को पुकारते हैं तो भगवान दौड़े चले आते हैं क्योंकि भगवान तो भक्त वत्सल हैं जो सदा ही अपने भक्तों के आधीन रहते हैं। अनादि काल से ही जैसे-जैसे धरती पर दानवों ने देवताओं को तंग किया तथा देवताओं ने आहत होकर अपनी रक्षा करने के लिए प्रभु को पुकारा तो भगवान ने सदा ही किसी न किसी रुप में अवतार लेकर उनकी रक्षा की। अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने और हिरण्यकशिपु के आतंक को समाप्त करने के लिए भगवान ने श्री नृसिंह अवतार लिया। जिस दिन भगवान धरती पर अवतरित हुए उस दिन वैशाख मास की चतुर्दशी थी। इसी कारण यह दिन नृसिंह जयंती के रुप में मनाया जाता है। इस बार (मंगलवार) 09 मई 2017 को नृसिंह जयंती का उपवास है।

धार्मिक ग्रंथो के अनुसार प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि रहते थे। ऋषि कश्यप के पत्नी का नाम दिति था तथा उनकी दो संतान थी। ऋषि कश्यप ने प्रथम पुत्र का नाम ‘हरिण्याक्ष’ तथा दूसरे पुत्र का नाम ‘हिरण्यकशिपु’ रखा था। परंतु ऋषि के दोनों संतान असुर प्रवृति का था।

आसुरी प्रवृति होने के कारण भगवान विष्णु जी के वराह रूप ने पृथ्वी की रक्षा हेतु ऋषि कश्यप के पुत्र ‘हरिण्याक्ष का वध कर दिया था। अपने भाई की मृत्यु से दुखी तथा क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने अपने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प लिया। हिरण्यकशिपु ने भगवान ब्रह्मा जी का कठोर तप किया।

जानिए कैसे करें नरसिंह जयंती का व्रत—
नृसिंह जयंती के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहर्त में उठकर स्नान आदिसे निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए एवम भगवान नृसिंह की पूजा विधि-विधान से करे। इस दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि क्रियाओं से निपटकर भगवान विष्णु जी के नृसिंह रूप की विधिवत धूप, दीप, नेवैद्य, पुष्प एवं फलों से पूजा एवं अर्चना करनी चाहिए तथा विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।भगवान नृसिंह की पूजा फल, फूल, धुप, दीप, अगरबत्ती, पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल, अक्षत एवम पीतांबर से करे। सारा दिन उपवास रखें तथा जल भी ग्रहण न करें। सांयकाल को भगवान नृसिंह जी का दूध, दही, गंगाजल, शहद, चीनी के साथ ही गाय के मक्खन अथवा घी आदि से अभिषेक करने के पश्चात चरणामृत लेकर फलाहार करना चाहिए। नृसिंह जयंती के दिन व्रत-उपवास एवम पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने हेतु निम्न मन्त्र का जाप करे —

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥

इन मंत्रो के जाप करने से समस्त प्रकार के दुखो का निवारण होता है तथा भगवान नृसिंह की कृपा से जीवन में मंगल ही मंगल होता है। भगवान नृसिंह अपने भक्तो की सदैव रक्षा करते है। इस तरह नृसिंह द्वादशी की कथा सम्पन्न हुआ। प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु रूप नृसिंह देव की जय।

जानिए क्या है प्रभु का स्वरूप —
शास्त्रों के अनुसार श्री नृसिंह जी को भगवान विष्णु जी का अवतार माना जाता है तथा इसमें उनका आधा शरीर नर तथा आधा शरीर सिंह के समान है तभी इस रूप को भगवान विष्णु जी के श्री नृसिंह अवतार के रूप में पूजा जाता है।

जानिए क्या है व्रत का पुण्यफल —
व्रत के प्रभाव से जहां जीव की सभी कामनाओं की पूर्ति हो जाती है वहीं मनुष्य का तेज और शक्तिबल भी बढ़ता है। जीव को प्रभु की भक्ति भी सहज ही प्राप्त हो जाती है। शत्रुओं पर विजय पाने के लिए यह व्रत करना अति उत्तम फल दायक है तथा इस दिन जप एवं तप करने से जीव को विशेष फल प्राप्त होता है।

ॐ श्री लक्ष्मीनृसिंहाय नम:।
शत्रु बाधा हो या तंत्र मंत्र बाधा,भय हो या अकाल मृत्यु का डर।इस मंत्र के जप करने से शांति हो जाती है।शत्रु निस्तेज होकर भाग जाते है,भूत पिशाच भाग जाते है तथा असाध्य रोग भी ठीक होने लगता है।ये श्रीविष्णु अवतार तथा भक्त वत्सल है।एक लोक प्रसिद्ध कथा है,कि जब आद्य शंकराचार्य कामाख्या गये थे,तो वहाँ का एक प्रसिद्ध तांत्रिक ने उनपर भीषण तंत्र प्रयोग कर दिया,जिसके कारण शंकराचार्य को भगन्दर रोग हो गया।आद्य चाहते तो प्रयोग निष्फल कर सकते थे,परन्तु उन्होनें वेदना सहन किया।परन्तु शंकराचार्य के एक प्रिय शिष्य ने ॐकार नृसिंह मंत्र प्रयोग कर के उस दुष्ट तांत्रिक का तंत्र प्रभाव दूर कर दिया।इसके परिणाम वह तांत्रिक मारा गया और शंकराचार्य स्वस्थ हो गये।इस मंत्र को जपने से अकाल मृत्यु से भी रक्षा होती है।इनका रुप थोड़ा उग्र है,परन्तु भक्त के सारे संकट तत्क्षण दूर कर देते है। गवान नृसिंह बहुत ही उग्र देवता हैं और इनकी उपसना में की गयी कोई भी गलती क्षम्य नही है। इसीलिए इनकी साधना किसी अनुभवी गुरू के सानिध्य में ही करनी चाहिए। अपने गुरूदेव, गणेश जी आदि का ध्यान करने के पश्चात श्री नृसिंह भगवान का धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजन करना चाहिए…

*************आत्म-देह रक्षार्थ श्री नरसिंह मंत्र-प्रयोग **************
मंत्र-:—–ॐ नमो महा नरसिंहाय -सिंहाय सिंह-मुखाय विकटाय वज्रदन्त-नखाय माम् रक्ष -रक्ष मम शरीरं नख-शिखा पर्यन्तं रक्ष रक्षां कुरु-कुरु मदीय शरीरं वज्रांगम कुरु-कुरु पर -यन्त्र, पर-मंत्र, पर-तंत्राणां क्षिणु – क्षिणु खड्गादि-धनु -बाण-अग्नि-भुशंडी आदि शस्त्राणां इंद्र-वज्रादि ब्र्ह्मस्त्राणां स्तम्भय -स्तम्भय ,, जलाग्नि-मध्ये रक्ष ,, गृह -मध्ये ,, ग्राम-मध्ये ,,नगर-मध्ये ,, नगर-मध्ये ,, वन-मध्ये ,,रण-मध्ये ,, श्मशान-मध्ये रक्ष-रक्ष ,, राज-द्वारे राज-सभा मध्ये रक्ष रक्षां कुरु-कुरु ,, भूत-प्रेत -पिशाच -देव-दानव-यक्ष-किन्नर-राक्षस , ब्रह्म-राक्षस ,, डाकिनी-शाकिनी-मौन्जियादि अविधं प्रेतानां भस्मं कुरु-कुरु भो: अत्र्यम- गिरो सिंही -सिंहमुखी ज्वलज्ज्वाला जिव्हे कराल -वदने मां रक्ष-रक्ष ,, मम शरीरं वज्रमय कुरु-कुरु दश -दिशां बंध-बंध वज्र-कोटं कुरु-कुरु आत्म-चक्रं भ्रमावर्त सर्वत्रं रक्ष रक्ष सर्वभयं नाशय -नाशय ,, व्याघ्र -सर्प-वराह-चौरदिन बन्धय-बन्धय,, पिशाच-श्वान दूतान्कीलय-कीलय हुम् हुम् फट !!

*******मृत्य्वष्टकम्************

।। मार्कण्डेय उवाच ।।
नारायणं सहस्राक्षं पद्मनाभं पुरातनम् ।
प्रणतोऽस्मि हृषीकेशं किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। १
गोविन्दं पुण्डरीकाक्षमनन्तमजमव्ययम् ।
केशवं च प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। २
वासुदेवं जगद्योनिं भानुवर्णमतीन्द्रियम् ।
दामोदरं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ३
शङ्खचक्रधरं देवं छन्नरुपिणमव्ययम् (छन्दोरुपिणमव्ययम्) ।
अधोक्षजं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ४
वाराहं वामनं विष्णुं नरसिंहं जनार्दनम् ।
माधवं च प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ५
पुरुषं पुष्करं पुण्यं क्षेमबीजं जगत्पतिम् ।
लोकनाथं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ६
भूतात्मानं महात्मानं जगद्योनिमयोनिजम् (यज्ञयोनिमयोनिजम्) ।
विश्वरुपं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ७
सहस्रशीर्षसं देवं व्यक्ताऽव्यक्तं सनातनम् ।
महायोगं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ८
।।फल-श्रुति।।
इत्युदीरितमाकर्ण्य स्तोत्रं तस्य महात्मनः ।
अपयातस्ततो मृत्युर्विष्णुदूतैश्च पीडितः ।। ९
इत्येन विजितो मृत्युर्मार्कण्डेयेन धीमता ।
प्रसन्ने पुण्डरीकाक्षे नृसिंहं नास्ति दुर्लभम् ।। १०
मृ्त्य्वष्टकमिदं (मृत्युञ्जयमिदं) पुण्यं मृत्युप्रशमनं शुभम् ।
मार्कण्डेयहितार्थाय स्वयं विष्णुरुवाच ह ।। ११
य इदं पठते भक्त्या त्रिकालं नियतः शुचिः ।
नाकाले तस्य मृत्युः स्यान्नरस्याच्युतचेतसः ।। १२
हृत्पद्ममध्ये पुरुषं पुरातनं (पुराणम्) नारायणं शाश्वतमादिदेवम् ।
संचिन्त्य सूर्यादपि राजमानं मृत्युं स योगी जितवांस्तदैव ।। १३

।।श्रीनरसिंह पुराणे अन्तर्गत मार्कण्डेयमृत्युञ्जयो नाम (मृत्य्वष्टकं नाम) स्तोत्र।।
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..भगवान नृसिंह विष्णुजी के सबसे उग्र अवतार माने जाते है। उनके बीज मंत्र के जप से शत्रुओं का नाश होकर कोर्ट-कचहरी के मुकदमे आदि में विजय प्राप्त होती है। इससे शत्रु शमन होकर पराक्रम में बढ़ोतरी होती है तथा आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
नृसिंह मंत्र से तंत्र मंत्र बाधा, भूत पिशाच भय, अकाल मृत्यु का डर, असाध्य रोग आदि से छुटकारा मिलता है तथा जीवन में शांति की प्राप्ति हो जाती है।इसके लिए लाल रंग के आसन पर दक्षिणाभिमुख बैठकर रक्त चंदन या मूंगे की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

जानिए भगवान नृसिंह का बीज मंत्र।

‘श्रौं’/ क्ष्रौं (नृसिंहबीज)— इस बीज में क्ष् = नृसिंह, र् = ब्रह्म, औ = दिव्यतेजस्वी, एवं बिंदु = दुखहरण है। इस बीज मंत्र का अर्थ है ‘दिव्यतेजस्वी ब्रह्मस्वरूप श्री नृसिंह मेरे दुख दूर करें’।जीवन में सर्वसिद्धि प्राप्ति के लिए 40 दिन में पांच लाख जप पूर्ण करें।
* उपरोक्त मंत्र का प्रतिदिन रात्रि काल में जाप करें।
* मंत्र जप के दौरान नित्य देसी घी का दीपक जलाएं।
* 2 लड्डू, 2 लौंग, 2 मीठे पान और 1 नारियल भगवान नृसिंह को पहले और आखरी दिन भेट चढ़ाएं।
* अगले दिन विष्णु मंदिर में उपरोक्त सामग्री चढ़ा दीजिए।
* अंतिम दिन दशांश हवन करें।
* अगर दशांश हवन संभव ना हो तो पचास हजार मंत्र संख्या और जपे।
अगर आप कई संकटों से घिरे हुए हैं या संकटों का सामना कर रहे हैं, तो भगवान विष्णु या श्री नृसिंह प्रतिमा की पूजा करके संकटमोचन नृसिंह मंत्र का स्मरण करें –

****** संकटमोचन श्री नृसिंह मंत्र *****************

ध्याये न्नृसिंहं तरुणार्कनेत्रं सिताम्बुजातं ज्वलिताग्रिवक्त्रम्।
अनादिमध्यान्तमजं पुराणं परात्परेशं जगतां निधानम्।।

.******श्री नृसिंह देव स्तवः*******
(गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय)
प्रहलाद ह्रदयाहलादं भक्ता विधाविदारण।
शरदिन्दु रुचि बन्दे पारिन्द् बदनं हरि ॥१॥
नमस्ते नृसिंहाय प्रहलादाहलाद-दायिने।
हिरन्यकशिपोर्बक्षःर शिलाटंक नखालये ॥२॥
इतो नृसिंहो परतोनृसिंहो, यतो-यतो यामिततो नृसिंह।
बर्हिनृसिंहो ह्र्दये नृसिंहो, नृसिंह मादि शरणं प्रपधे ॥३॥
तव करकमलवरे नखम् अद् भुत श्रृग्ङं।
दलित हिरण्यकशिपुतनुभृग्ङंम्।
केशव धृत नरहरिरुप, जय जगदीश हरे ॥४॥
वागीशायस्य बदने लर्क्ष्मीयस्य च बक्षसि।
यस्यास्ते ह्र्देय संविततं नृसिंहमहं भजे ॥५॥
श्री नृसिंह जय नृसिंह जय जय नृसिंह।
प्रहलादेश जय पदमामुख पदम भृग्ह्र्म ॥६॥

जानिए नरसिंह देव के नाम—–
१ नरसिंह
२ नरहरि
३ उग्र विर माहा विष्णु
४ हिरण्यकश्यप अरी
तीर्थस्थल

नरसिंह विग्रह के दस (१०) प्रकार
१ उग्र नरसिंह
२ क्रोध नरसिंह
३ मलोल नरसिंह
४ ज्वल नरसिंह
५ वराह नरसिंह
६ भार्गव नरसिंह
७ करन्ज नरसिंह
८ योग नरसिंह
९ लक्ष्मी नरसिंह
१० छत्रावतार नरसिंह/पावन नरसिंह/पमुलेत्रि नरसिंह..

.…हिन्दू धर्म पंचाग का वैशाख माह विष्णु भक्ति का शुभ काल माना गया है। भगवान विष्णु का स्वरूप शांत, सौम्य व आनंदमयी माना गया है। किंतु विष्णु अवतार से जुडे पौराणिक प्रसंग साफ करते हैं कि धर्म रक्षा और धर्म आचरण की सीख देने के लिए लिए युग और काल के मुताबिक भगवान विष्णु अलग-अलग स्वरूपों में प्रकट हुए।

इसी कड़ी में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह के प्राकट्य की पुण्य घड़ी मानी जाती है। भगवान नृसिंह की उपासना भक्त प्रहलाद की तरह ही सारे संकटों, मुश्किलों, दु:खों और मुसीबतों से बचाकर मनचाहे सुखों को देने वाली मानी गई है।

अगर आप भी संकट में घिरे हों या सामना कर रहे हैं, तो संकटमोचन के लिए इस नृसिंह मंत्र का स्मरण भगवान विष्णु या नृसिंह प्रतिमा की पूजा कर जरूर करें –
– भगवान नृसिंह सुबह व शाम के बीच की घड़ी में प्रकट हुए। इसलिए प्रदोष काल यानी सुबह-शाम के मिलन के क्षणों में ही गंध, चंदन, फूल व नैवेद्य चढ़ाकर नीचे लिखा नृसिंह मंत्र मनोरथ सिद्धि की प्रार्थना के साथ बोलें व धूप, दीप से आरती कर प्रसाद ग्रहण करें –
ध्याये न्नृसिंहं तरुणार्कनेत्रं सिताम्बुजातं ज्वलिताग्रिवक्त्रम्।
अनादिमध्यान्तमजं पुराणं परात्परेशं जगतां निधानम्।।

…..भगवान विष्णु लक्ष्मीपति और श्रीपति भी पुकारे जाते हैं। मंगलकारी, ऐश्वर्यसंपन्न और शान्तिस्वरूप देवता भगवान विष्णु की भक्ति जगत के लिए सुखदायी है। धार्मिक मान्यता है कि विष्णु की प्रसन्नता से देवी लक्ष्मी कृपा भी बरसने लगती है।
यही कारण है कि देवी उपासना के विशेष दिन शुक्रवार को भगवान विष्णु की उपासना का महत्व है। इसी कड़ी में आज शुक्रवार के साथ विष्णु अवतार भगवान नृसिंह की जयंती का विशेष योग बना है। जिसमें एक विशेष मंत्र से लक्ष्मी और भगवान नृसिंह का ध्यान सुख-समृद्धि, शक्ति और वैभव पाने की कामना को शीघ्र पूरा करने वाला माना गया है।
जानिए, यह आसान लक्ष्मी-नृसिंह मंत्र व पूजा विधि –
– सुबह स्नान के बाद देवालय में भगवान नृसिंह व मां लक्ष्मी की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराकर सुंदर वस्त्र व गहने पहनाएं।
– भगवान नृसिंह को केसर चन्दन, पीले सुगंधित फूल, पीताम्बरी रेशमी वस्त्र, इत्र, यज्ञोपवीत अर्पित करें। इसी तरह माता लक्ष्मी को लाल पूजा सामग्रियां चढ़ावें। नैवेद्य, धूप व दीप लगाकर नीचे लिखे लक्ष्मी-नृसिंह मंत्र का आसन पर बैठकर कम से कम 108 बार सुख-शांति, समृद्धि की कामना से स्मरण करें –

ॐ श्री लक्ष्मीनृसिंहाय नम:।

– इस मंत्र जप के बाद भगवान नृसिंह व मां लक्ष्मी की आरती कर उनको स्नान कराया जल चरणामृत के रूप में ग्रहण करें।

…भगवान नरसिंह को प्रसन्न करने के लिए उनके नरसिंह गायत्री मंत्र का जाप करें
मंत्र-
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि |
तन्नो नरसिंह प्रचोदयात ||

पांच माला के जाप से आप पर भगवान नरसिंह की कृपा होगी
इस महा मंत्र के जाप से क्रूर ग्रहों का ताप शांत होता है
कालसर्प दोष, मंगल, राहु ,शनि, केतु का बुरा प्रभाव नहीं हो पाटा
एक माला सुबह नित्य करने से शत्रु शक्तिहीन हो जाते हैं
संध्या के समय एक माला जाप करने से कवच की तरह आपकी सदा रक्षा होती है
यज्ञ करने से भगवान् नरसिंह शीघ्र प्रसन्न होते हैं .
मंत्र-ॐ नृम मलोल नरसिंहाय पूरय-पूरय
मंत्र जाप संध्या के समय करने से शीघ्र फल मिलता है

2)ऋण मोचक नरसिंह मंत्र

है यदि आप ऋणों में उलझे हैं और आपका जीवन नरक हो गया है, आप तुरंत इस संकट से मुक्ति चाहते हैं तो ऋणमोचक नरसिंह मंत्र का जाप करें
भगवान नरसिंह की प्रतिमा का पूजन करें
पंचोपचार पूजन कर फल अर्पित करते हुये प्रार्थना करें
मिटटी के पात्र में गंगाजल अर्पित करें
हकीक की माला से छ: माला मंत्र का जाप करें
काले रंग के आसन पर बैठ कर ही मंत्र जपें
मंत्र-ॐ क्रोध नरसिंहाय नृम नम:
रात्रि के समय मंत्र जाप से शीघ्र फल मिलता है

3)शत्रु नाशक नरसिंह मंत्र

यदि आपको कोई ज्ञात या अज्ञात शत्रु परेशान कर रहा हो तो शत्रु नाश का नरसिंह मंत्र जपें
भगवान विष्णु जी की प्रतिमा का पूजन करें
धूप दीप पुष्प सहित जटामांसी अवश्य अर्पित कर प्रार्थना करें
चौमुखे तीन दिये जलाएं
हकीक की माला से पांच माला मंत्र का जाप करें
काले रंग के आसन पर बैठ कर ही मंत्र जपें
मंत्र-ॐ नृम नरसिंहाय शत्रुबल विदीर्नाय नमः
रात्री को मंत्र जाप से जल्द फल मिलता है

4)यश रक्षक मंत्र

यदि कोई आपका अपमान कर रहा है या किसी माध्यम से आपको बदनाम करने की कोशिश कर रहा है तो यश रक्षा का नरसिंह मंत्र जपें
भगवान नरसिंह जी की प्रतिमा का पूजन करें
कुमकुम केसर गुलाबजल और धूप दीप पुष्प अर्पित कर प्रार्थना करें
सात तरह के अनाज दान में दें
हकीक की माला से सात माला मंत्र का जाप करें
काले रंग के आसन पर बैठ कर ही मंत्र जपें
मंत्र-ॐ करन्ज नरसिंहाय यशो रक्ष
संध्या के समय किया गया मंत्र शीघ्र फल देता है

5)नरसिंह बीज मंत्र

यदि आप पूरे विधि विधान से भगवान नरसिंह जी का पूजन नहीं कर सकते तो आपको चलते फिरते मानसिक रूप से लघु मंत्र का जाप करना चाहिए
लघु मंत्र के जाप से भी मनोरथ पूरण होते हैं
मंत्र-ॐ नृम नृम नृम नरसिंहाय नमः ।
भगवान नरसिंह को मोर पंख चढाने से कालसर्प दोष दूर होता है
भगवान नरसिंह को दही अर्पित करने से मुकद्दमों में विजय मिलती है
भगवान नरसिंह को नाग केसर अर्पित करने से धन लाभ मिलता है
भगवान नरसिंह को बर्फीला पानी अर्पित करने से शत्रु पस्त होते हैं
भगवान नरसिंह को मक्की का आटा चढाने से रूठा व्यक्ति मान जाता है
भगवान नरसिंह को लोहे की कील चढाने से बुरे ग्रह टलते हैं
भगवान नरसिंह को चाँदी और मोती चढाने से रुका धन मिलता है
भगवान नरसिंह को भगवा ध्वज चढाने से रुके कार्य में प्रगति होती है
भगवान नरसिंह को चन्दन का लेप देने से रोगमुक्ति होती है..

पंचकुला से थे हंदवाड़ा के शहीद मेजर अनुज सूद

  • NDA में हर सेमेस्टर में अव्वल रहे मेजर अनुज सूद
  • इन्फैंट्रीमैन होने के बावजूद एमटेक की क्लास में रहे टॉपर

जम्मू और कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में कर्नल, मेजर और 3 जवान शहीद हो गए. एनकाउंटर में शहीद होने वाले जांबाजों में एक नाम मेजर अनुज सूद का भी है. मेजर अनुज सूद ब्रिगेड ऑफ गार्ड्स के अधिकारी थे. सेना के इस जांबाज अधिकारी का नाता भारतीय सेना से पुराना रहा है. पिता सीके सूद सेना में ब्रिगेडियर रहे हैं. हरियाणा के पंचकूला के रहने वाले मेजर अनुज एनकाउंटर में वीरगति को प्राप्त हो गए.

पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा के छात्र रहे अनुज सूद पढ़ाई में बेहद तेज रहे. पीपीएस में हर क्लास में मेजर अनुज सूद ने खुद को अव्वल साबित किया. होनहार अनुज सूद का चयन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) में हो गया था, लेकिन उन्होंने आईआईटी की जगह एनडीए को चुना.

हमेशा रहे क्लास टॉपर

एनडीए में मेजर सूद ने कीर्तिमान स्थापित किया. 6 बार वे अपने अनुशासन और इंटेलिजेंस के चलते अव्वल रहे. इन्फैंट्रीमैन होने के बावजूद उन्होंने आईआईएससी बेंगलुरु से एमटेक किया और डिस्टिंक्शन मार्क से टॉप किया.

2 साल पहले ही हुई थी शादी

मेजर अनुज सूद की शादी 2 साल पहले हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा की रहने वाली आकृति से हुई थी. अभी उनका कोई बच्चा नहीं है. मेजर सूद की पत्नी पुणे में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं. मेजर अनुज के पिता ब्रिगेडियर सीके सूद अमरावती एन्क्लेव में रहते हैं.

बहन भी सेना में है तैनात

मेजर अनुज की माता सुमन यमुनानगर के एक सरकारी स्कूल में बतौर प्रिसिपल कार्यरत हैं. मेजर अनुज सूद की एक बड़ी बहन ऑस्ट्रेलिया में रहती है, वहीं छोटी बहन सेना में तैनात है.

पंचकूला में होगा अंतिम संस्कार

सूद परिवार लगभग 8 महीने पहले पंचकूला स्थित अमरावती एन्क्लेव में रहने आया था. घर अभी निर्माणाधीन है. मेजर अनुज सूद का पार्थिव शरीर सोमवार को ही पंचकूला पहुंचेगा. मनीमाजरा स्थिति श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा.

5 सुरक्षाकर्मी हुए शहीद

हंदवाड़ा के राजवार इलाके में मुठभेड़ के दौरान रविवार को पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए. शहीद सुरक्षाकर्मियों में 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राकेश, लांस नायक दिनेश के साथ जम्मू कश्मीर पुलिस के सब इंस्पेक्टर शकील काजी शामिल हैं. सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो आतंकी को भी ढेर कर दिया. मरने वाले दोनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के थे. एक आतंकी स्थानीय बताया जा रहा है.

IFSC महाराष्ट्र ही में रहने दें: पवार

एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) घरेलू अर्थव्यवस्था के अधिकार क्षेत्र से बाहर के ग्राहकों को पूरा करता है, सीमाओं के पार वित्त, वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के प्रवाह से निपटता है। ऐसे केंद्र सीमाओं के पार वित्त, वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के प्रवाह से संबंधित हैं। लंदन, न्यूयॉर्क और सिंगापुर को वैश्विक वित्तीय केंद्रों में गिना जा सकता है। दुनिया भर के कई उभरते IFSCs, जैसे कि शंघाई और दुबई, आने वाले वर्षों में एक वैश्विक भूमिका निभाने के इच्छुक हैं। विश्व बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री पर्सी मिस्त्री की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ पैनल ने 2007 में मुंबई को एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र बनाने के बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। हालांकि, 2008 में भारत सहित वैश्विक वित्तीय संकट ने अपने वित्तीय क्षेत्रों को तेजी से खोलने के बारे में सतर्क किया।

पहले उद्धव ठाकरे के चयन को लेकर केन्द्र और राज्य में रार उट्ठी थी, फिर अजित पवार पर ईडी ने फिर से शिकंजा कस दिया और अब IFSC को लेकर तो हद ही हो गयी बड़े पवार को प्रधान मंत्री को चेतना पड़ा। शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा है कि- मुझे माननीय से उम्मीद है कि PMOIndia राज्य की राजनीति को अलग रखते हुए तर्कसंगत, विवेकपूर्ण निर्णय लेने और इसे अत्यधिक राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा मानता है. उन्होंने आगे लिखा- मुझे उम्मीद है कि मेरा पत्र एक सही भावना से लिया जाएगा

मुंबई(ब्यूरो):

 इटरनेशनल फायनेंशियल सर्विसेस सेंटर (IFSC) के हेडक्वार्टर को लेकर महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार के बीच ठन गई है. IFSC का मुख्यालय मुंबई (Mumbai) की बजाय गुजरात (Gujarat) के गांधीनगर (Gandhinagar) में बनाने के केंद्र सरकार के फैसले पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को खत लिखकर नाराजगी जताई है. उन्होंने पीएम से तुरंत फैसले को पलटने की मांग की है.

दरअसल, IFSC सेंटर मुंबई मे बनाने को लेकर महाराष्ट्र के नेताओं ने सालों से केंद्र सरकार पर दबाव बनाया हुआ है. लेकिन केंद्र के इस सेंटर को मुंबई की बजाय गुजरात के गांधीनगर मे शिफ्ट करने के फैसले से अब सियासी तूफान खड़ा हो गया है. 

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस केंद्र की बीजेपी सरकार पर आक्रामक हो गई हैं. IFSC सेंटर को लेकर सूबे में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा है कि- मुझे माननीय से उम्मीद है कि PMOIndia राज्य की राजनीति को अलग रखते हुए तर्कसंगत, विवेकपूर्ण निर्णय लेने और इसे अत्यधिक राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा मानता है. उन्होंने आगे लिखा- मुझे उम्मीद है कि मेरा पत्र एक सही भावना से लिया जाएगा और IFSC मुख्यालय को भारत की वित्तीय राजधानी में स्थापित करने पर विचार किया जाएगा. 

IFSC क्या सेवाएं दे सकता है?

  • व्यक्तियों, निगमों और सरकारों के लिए -फंड बढ़ाने वाली सेवाएं
  • सेटसेट फंड, बीमा कंपनियों और म्यूचुअल फंड द्वारा शुरू किए गए -सेट मैनेजमेंट और ग्लोबल पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन
  • धन प्रबंधन
  • ग्लोबल टैक्स मैनेजमेंट और क्रॉस-बॉर्डर टैक्स लायबिलिटी ऑप्टिमाइज़ेशन, जो वित्तीय मध्यस्थों, एकाउंटेंट और कानून फर्मों के लिए एक व्यावसायिक अवसर प्रदान करता है।
  • ग्लोबल और रीजनल कॉर्पोरेट ट्रेजरी मैनेजमेंट ऑपरेशन जिसमें फंड जुटाने, लिक्विडिटी इन्वेस्टमेंट और मैनेजमेंट और एसेट-लायबिलिटी मैचिंग शामिल हैं
  • बीमा और पुनर्बीमा जैसे प्रबंधन प्रबंधन संचालन
  • अंतरराष्ट्रीय निगमों के बीच विलय और अधिग्रहण की गतिविधियाँ

उधर, इस फैसले को लेकर महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात पहले की केंद्र पर हमला बोल चुके हैं. थोरात ने ट्वीट कर कहा था कि, ‘केंद्र सरकार का  IFSC मुख्यालय को गुजरात में स्थापित करने का फैसला बेहद निराशाजनक है. केंद्र का ये कदम मुंबई के कद को कम करने के लिए उठाया गया है. केंद्र को अपने इस फैसले पर पुनिर्विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुंबई देश की वित्तीय राजधानी है. उन्होंने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र बीजेपी नेताओं की खामोशी पर भी सवाल उठाए थे. शिवसेना भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और बीजेपी से खफाहै.

महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री और शिवसेना नेता अरविंद सावंत ने कहा कि उन्होंने संसद में केंद्र सरकार से IFSC केंद्र गुजरात नहीं ले जाने की अपील की थी. लेकिन सरकार ने शिवसेना की मांग को नजरअंदाज कर दिया. 

इस मुद्दे पर राजनीति तेज होती देख महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण गुजरात के गांधीनगर में स्थापित करने के केंद्र के फैसले का बचाव किया है. फडणवीस ने विपक्षी दलों पर राजनीति का आरोप लगाया है. 

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का काम हर चीज के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को दोषी ठहराना है. उन्होंने कहा केंद्र सरकार की एक उच्चस्तरीय समिति ने फरवरी, 2007 में रिपोर्ट सौंपी थी जिसें IFSC के गठन की सिफारिश की गई थी. उन्होंने कहा कि न तो महाराष्ट्र सरकार ने कोई आधिकारिक प्रस्ताव सौंपा है और न ही केंद्र ने इस पर विचार किया है. गांधीनगर में IFSC के मुख्यालय की घोषणा इसलिए की गई क्योंकि यहां पहले से ही IFSC के कामकाज हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि अब जो लोग ये बयान दे रहे हैं वो साल 2007 से 2014 तक सत्ता में थे. लेकिन उन्होंने मुंबई मे  IFSC के लिए कुछ कदम नहीं उठाया. जब पहली बार  IFSC का विचार आया था तो गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने इसे अपने राज्य में लाने के लिए काम शुरू किया था. वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस की सरकार ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया था.

‘कोरोना योद्धाओं’ पर भारतीय सेना ने की पुष्पवर्षा

सरहद पर वतन के लिए जान न्यौछावर करने वाले रविवार को एक अलग ही तरह की सेवा पर हैं। आज वे उन योद्धाओं पर फूल बरसा रहे हैं, जो कोरोना की जंग में मैदान में अपनी जान की बाजी लगाकर मैदान में डटे हुए हैं। इन कोरोना योद्धाओं में डाक्टर, सभी स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी और पुलिस कर्मी शामिल हैं।

  • जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जताया आभार
  • महाराष्ट्र से लेकर बंगाल की खाड़ी तक दी गई सलामी
  • बंगाल की खाड़ी में INS जलशवा ने जताया आभार

डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम, चंडीगढ़ :

दिल्ली सहित मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, चेन्नई, राजस्थान, मध्य प्रदेश में कोरोना योद्धाओं के सम्मान में तीनों सेनाएं विभिन्न आयोजनों के जरिए उनका आभार व्यक्त किया।

चंडीगढ़ में भारतीय वायुसेना के विमान C-130 ने सुखना झील के ऊपर से फ्लाई पास्ट किया। आज तीनों सेनाएं ‘कोरोना योद्धाओं’ को उनकी सेवाओं के लिए आभार प्रकट किया।

जम्मू-कश्मीर: जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज(GMC) में भारतीय सेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति अपना आभार प्रकट करने के लिए बैंड बजाया

भारतीय वायु सेना (IAF) ने दिल्ली में वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज, सफदरजंग हॉस्पिटल के ऊपर से फ्लाई पास्ट करते हुए फूल बरसा कर कोरोना वॉरियर्स के प्रति आभार व्यक्त किया।

असम: गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल(GMCH) में ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताते हुए भारतीय वायुसेना ने बैंड बजाया और फ्लाईपास्ट किया गया। 

बिहार: भारतीय वायुसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ का आभार जताते हुए AIIMS पटना पर फूल बरसाए और फ्लाईपास्ट किया।

त्रि-सेवा प्रमुखों के प्रतिनिधि- मेजर जनरल आलोक काकेर, रियर एडमिरल मैकार्थी और एयर वाइस मार्शल पी.के. घोष ने आज राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में श्रद्धांजलि अर्पित की: दिल्ली

दिल्ली: नरेला क्वारंटाइन सेंटर में बैंड बजाकर ‘कोरोना योद्धाओं’ का आभार जताई भारतीय सेना।

दिल्ली: LNJP अस्पताल के नोडल ऑफीसर ने कहा कि भारतीय वायुसेना बहुत अच्छा काम कर रही है। हमारा जो सम्मान किया गया है इसके हम आभारी हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई को जीत गए हों। इससे हमारे हौंसले और भी बढ़ेंगे।

दिल्ली: भारतीय वायुसेना बहुत अच्छा काम कर रही है। हमारा जो सम्मान किया गया है इसके हम आभारी हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई को जीत गए हों। ये हमारे हौंसले को बढ़ाएगा: नोडल ऑफीसर, LNJP अस्पताल

दिल्ली: ये हमारे लिए गर्व की बात है क्योंकि राष्ट्र के लिए वो भी लड़ते हैं और राष्ट्र के लिए हम भी लड़ रहे हैं लेकिन वो हमारा सम्मान कर रहे हैं तो हम उन्हें सल्यूट करते हैं: कोरोना वॉरियर 

दिल्ली: भारतीय वायु सेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ को आभार प्रकट करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पर फूल बरसाए।

दिल्ली: भारतीय वायुसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताते हुए राम मनोहर लोहिया अस्पताल पर फूल बरसाए।

दिल्ली: भारतीय वायुसेना ने पुलिसकर्मियों का आभार प्रकट करने के लिए पुलिस युद्ध स्मारक पर फूलों की वर्षा की।

दिल्ली: भारतीय वायुसेना के चॉपर ने पुलिसकर्मियों का आभार प्रकट करने के लिए पुलिस युद्ध स्मारक पर फूलों की वर्षा की

दिल्ली: गंगा राम अस्पताल में बैंड बजाकर ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति अपना आभार जताती भारतीय सेना। आज तीनों सेनाएं अलग-अलग तरह से स्वास्थ्यकर्मियों और दूसरे अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के प्रति अपना आभार जता रही हैं।

मध्यप्रदेश: भोपाल के चिरायु अस्पताल में ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताते हुए स्वास्थ्यकर्मियों पर फूल बरसाए गए।

लेह: S.N.M. अस्पताल में कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ रहे कोरोना वॉरियर्स पर भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर ने फूल बरसा कर हवाई सलामी दी।

राजस्थान: भारतीय वायुसेना ने जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के ऊपर से फ्लाईपास्ट कर ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति अपना आभार जताया।

त्रिवेंद्रम: भारतीय वायुसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताने के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज पर फूल बरसाए

चेन्नई: भारतीय वायुसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताने के लिए राजीव गांधी सरकारी अस्पताल पर फूल बरसाए।

बेंगलुरु: भारतीय वायुसेना ने इस मुश्किल वक़्त में लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार प्रकट करने के लिए विक्टोरिया अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों पर फूल बरसाए। 

लखनऊ: भारतीय वायुसेना ने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMU) के ऊपर से फ्लाईपास्ट किया और ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार प्रकट करने के लिए फूलों की वर्षा की। 

मुंबई: INHS अश्विनी नौसैनिक अस्पताल में कार्यरत कोरोना वॉरियर्स के कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जुटे रहने के हौंसले के प्रति आभार प्रकट करने के लिए हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए गए।

मुंबई: मरीन ड्राइव से फ्लाई पास्ट करता भारतीय वायुसेना का विमान। आज तीनों सेनाएं अलग-अलग तरह से ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार प्रकट कर रही हैं|

भारतीय वायु सेना ने मेडिकल प्रोफेशनल्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स के कोरोना महामारी के खिलाफ सराहनीय काम के प्रति आभार प्रकट करने के लिए राजपथ के ऊपर से फ्लाईपास्ट किया: दिल्ली

गोवा: भारतीय नौसेना ने ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताने के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज के ऊपर से फ्लाई पास्ट किया और स्वास्थ्यकर्मियों पर फूल बरसाए।

हरियाणा: कोरोना वॉरियर्स के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए पंचकूला सेक्टर-6 के सरकारी अस्पताल के बाहर आर्मी बैंड ने लयबद्ध होकर प्रस्तुति दी।