कोरोना योद्धाओं पर विशेष

demokraticfront॰com कोरोना योद्धाओं पर अपनी विशेष शृंखला ले कर आ रहा है आज मिलें रोटरी अस्पताल में एमडी मेडिसिन के तौर कार्य करने वाले डॉक्टर अभिषेक मित्तल से।

हमारे करोना योद्धा बहुत ही बहादुरी से करोन से लड़ रहे हैं इसी पीछे लोग अपने परिवार से भी नहीं मिल पा रहे तो आज हम बात करते हैं रोटरी अस्पताल में एमडी मेडिसिन के तौर कार्य करने वाले डॉक्टर अभिषेक मित्तल की अपनी जिम्मेदारी को निभाने के कारण ही 1 माह से अपनी जुड़वा बेटियों से नहीं मिल पाए हैं जब हमने डॉक्टर से बात की तो उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी महिला रोग विशेषज्ञ हैं जो कि अपनी बेटियों की देखभाल अपनी नानी के घर पर कर रही है।

डॉ॰ मित्तल के अनुसार जब से कोरोना वाइरस ने दस्तक दी है तभी से बड़े हस्पताल कोरोना से जंग लड़ रहे हैं, इनके हस्पताल ने लोगों कि परेशानियाँ देखते हुए OPD चालू रखी और सभी टेस्ट x-ray इत्यादि कि सुविधाएं जारी रखी है। पिछले एक महीने से वह मरीजों कि आमद को देखते हुए हस्पताल ही में हैं। हसपटल प्रबंधन से जब बात हुई तो पता लगा कि डॉ मित्तल एक मास से स्वेच्छा से घर नहीं गए हैं। उन्होने अपनी नवजात बेटियों जो कि अब ए मास कि होने वालीन हैं उन्हे देखा नहीं है। इसी के साथ प्रबंधन समिति के सदस्य ने यह भी बताया कि हस्पताल के सभी कार्य no profit – no loss पर आधारित हैं।

यह तो बात हुई डॉ॰ मित्तल कि ऐसे ही कई कोरोना योद्धा अपनि अपनी समरभूमि में डटे होंगे। demokraticfront॰com परिवार उन सभी जाने अंजाने शूरवीरों को नमस्कार करता है।

मुझे भरोसा है, मैंने आत्मसमर्पण कर दिया है : इरफान खान

मशहूर अभिनेता इरफान खान जिन्होंने कई अंतरार्ष्ट्रीय और भारतीय फिल्मों में अपनी भूमिकाओं से लाखों प्रशंसकों के दिल जीते, वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। मुंबई के कोकिला बेन हॉस्पिटल में इरफान ने बुधवार सुबह आखिर सांस ली। इसके बाद वर्सोवा स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इस दौरान उनकी पत्नी और बेटे वहां मौजूद थे। कोरोना लॉकडाउन की वजह से उनके परिवार के 20 लोग ही उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हो सके।   

इरफान को अंतिम विदाई देने के लिए कई सेलेब्स आना चाहते थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से ज्यादा लोग नहीं जा पाए। बता दें कि इरफान के निधन की खबर सुनने के बाद इरफान के करीबी दोस्त और डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया हॉस्पिटल पहुंचे थे। तिग्मांशु और इरफान ने कई फिल्मों में साथ काम किया है। तिग्मांशु ने इरफान की फिल्म पान सिंह तोमर का निर्देशन किया था, जिसके लिए इरफान को बेस्ट एक्टर के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।

अभिनेता के निधन की पुष्टि वाले बयान में कहा गया है, मुझे भरोसा है, मैंने आत्मसमर्पण कर दिया है’, ये वे शब्द थे, जिन्हें इरफान ने अपने दिल से व्यक्त किए थे। ऐसा उन्होंने 2018 में कैंसर से अपनी लड़ाई की जानकारी देते समय लिखा था।” आगे कहा गया है, “मूक भावों को अपनी आंखों से व्यक्त करने की क्षमता रखने वाले अभिनेता की आंखों की गहराई स्क्रीन पर उनके यादगार कामों के साथ हमेशा याद की जाएगी। यह दुखद है कि आज हमें उनके निधन की खबर देनी पड़ रही है। इरफान एक मजबूत आत्मा थे, ऐसा व्यक्ति जो अंत तक लड़ता रहा और जो भी उसके करीब आया, उसे वह हमेशा प्रेरित करता रहा। साल 2०18 में दुर्लभ किस्म का कैंसर शरीर में पनपने का पता चलने के साथ ही उन्होंने जिंदगी के लिए कई लड़ाइयां लड़ीं। वह अपने प्यार और अपने परिवार से पूरे समय घिरे रहे, और उनकी उन्होंने हमेशा बहुत परवाह की। अब वह स्वर्ग में रहने के लिए चले गए हैं और अपने पीछे वास्तव में खुद की एक विरासत छोड़ गए हैं। हम सभी प्रार्थना करते हैं और आशा करते हैं कि वह शांति से रहें। इरफान के शब्दों में- ‘जैसे कि मैं पहली बार जीवन चख रहा था, जो कि इसका जादुई पक्ष है।”’

बता दें कि मंगलवार को इरफान को कोलोन संक्रमण के साथ मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि बुधवार के शुरुआती घंटों में उनके प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में उड़ाई गई अफवाहों से दूरी बना ली थी, लेकिन बाद में इरफान के निधन की पुष्टि हुई। इरफान खान के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए फिल्म निमार्ता शूजित सरकार ने बुधवार सुबह ट्वीट किया, “मेरे प्यारे दोस्त इरफान। आपने लड़ाई लड़ी और लड़ते रहे। मैं हमेशा आप पर गर्व करूंगा … हम आपसे मिलेंगे … सुतपा और बाबिल के प्रति संवेदना … सुतपा आपने भी बहुत संघर्ष किया और इस लड़ाई में हर संभव मदद की। ओम शांति। इरफान खान को सलाम। शूजित सरकार ने साल 2015 की अपनी फिल्म ‘पीकू’ में इरफान को निर्देशित किया था, जिसमें दीपिका पादुकोण और अमिताभ बच्चन भी थे। अभिनेता तब से बीमार हैं, जब उन्हें कुछ समय पहले न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का पता चला था और तब से ही वे चिकित्सा निगरानी में थे। वे इलाज के लिए विदेश भी गए थे।

इरफान खान आखिरी बार फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ में देखे गए थे। उनकी यह आखिरी रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म कोविड-19 का फैलाव रोकने के लिए लॉकडाउन लागू किए जाने से ठीक एक दिन पहले ही सिनेमा हॉल में आई थी। 

पत्नी के लिए दोबारा जीना चाहते थे इरफान खान…

बता दें कि इरफान खान ने कैंसर से लंबी जंग लड़ी है। हालांकि तबीयत ठीक होने के बाद इरफान ने फिल्म अंग्रेजी मीडियम की। इस फिल्म के रिलीज के दौरान उन्होंने एक इंटरव्यू में बीमारी से चल रही अपनी जंग को लेकर बात की थी।

इरफान ने कहा था, मेरे लिए ये जो दौर था वो रोलर कोस्टर राइड जैसा था। हम थोड़ा रोए, लेकिन बहुत हंसे भी। मुझे बहुत बेचैनी होती थी, लेकिन मैंने उसे  बाद में कंट्रोल कर लिया था।

उन्होंने कहा था, हालांकि इस बीच जो सबसे अच्छी बात हुई वो ये कि मैं अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय रहा। मैंने उन्हें बढ़ता देखा। अपनी पत्नी सुतापा को लेकर तो मैं क्या ही कहूं। वह 24 घंटे मेरे साथ रहती हैं। हमेशा मेरा ध्यान रखतीं। अगर मुझे जीने का मौका मिला तो मैं उसके लिए जीना चाहूंगा। मैं अगर अभी तक हूं तो उसकी बड़ी वजह मेरी पत्नी है।

आर.डब्ल्यू.ए. ने किए सैक्टर 38 वैस्ट के सभी रास्ते सील

पुलिस की मदद से हर आने-जाने वाले पर रखी जा रही है नजर

राकेश शाह, चंडीगढ़ :

कोरोना वायरस के चलते 19 अप्रैल को चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार मनोज परीदा ने ट्वीट करके सभी वेल्फेयर एसोसिएशनस से अपील की थी कि सैक्टरों के सभी रास्ते सील किए जाएं, आने जाने के रास्तों को नियंत्रित किया जाए और सैक्टर में आने जाने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड रखा जाए।

सैक्टर 38 वैस्ट आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि सलाहकार की अपील पर उनके सैक्टर में कार्यरत सभी वेल्फेयर एसोसिएशनस ने एकजुटता दिखाते हुए पूरे सैक्टर के सभी रास्तों को सील कर दिया है। सैक्टर की पॉकेट ए और पॉकेट बी में आने-जाने के लिए केवल एक-एक रास्ता ही खुला रखा गया है, जिन पर लोकल पुलिस के सहयोग से हर व्यक्ति की पूरी पड़ताल की जा रही है।

आर.डब्ल्यू.ए. के महासचिव कुलभूषण शर्मा ने बताया कि दोनों एंट्री प्वाइंट्स पर पुलिस के साथ-साथ हमारे अपने वालंटियरस भी खड़े हैं, जो वेंडर्स और बाहर से आने वाले लोगों के आई.डी. प्रूफ जैसे आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि चेक करके ही उन्हें सैक्टर में जाने देते हैं और लिखित तौर पर भी उनका रिकॉर्ड रखा जा रहा है। रेजिडेंट्स यूनाइटेड फ्रंट के अध्यक्ष के.एस. चौधरी ने कहा कि वेंडर्स और बाहर से आए लोगों के हाथों को सेनीटाइज करके ही उन्हें अंदर प्रवेश दिया जा रहा है और जिनके पास मास्क नहीं हैं उन्हें मास्क भी दिए जा रहे हैं।

एच.आई.जी. लोअर आर.डब्ल्यू.ए. की अध्यक्ष रेखा सूद ने बताया कि इन एंट्री प्वाइंट्स पर लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए शिक्षित भी किया जा रहा है और पूरी तरह अपने घरों में ही रहने के लिए कहा जा रहा है। एम.आई.जी. ग्रुप एजेंसी के अध्यक्ष चितरंजन सिंह के अनुसार उनके वालंटियरस इस मुश्किल समय में न केवल जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करवा रहे हैं बल्कि पुलिस के सहयोग से सीनियर सिटीजंस को भी हरसंभव मदद दे रहे हैं।

चंडीगढ़ से एक और फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार

कपिल नागपाल, चंडीगढ़ – 10 अप्रैल:

चंडीगढ़ से एक और फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार,पहले कर रहा था कंपाउंडर का काम फिर फर्जी डॉक्टर बन चमकाई क्लीनिक की दुकान

शहर में जमातीयों के साथ ही चंडीगढ़ पुलिस ने झोलाछाप डॉक्टरों की भी खबर लेनी शुरू कर दी है। पुलिस की इसी सतर्कता के परिणाम स्वरूप मलोया थानाा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले डडूमाजरा में पुलिस ने एक और झोलाछाप डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी की पुलिस के मुताबिक यह झोलाछाप डॉक्टर पहले कंपाउंर का काम किया करता था। जिसके बाद आरोपी ने जाली डॉक्टर बन क्लीनिक खोल इसे अपना धंधा बना लिया। मामले में मलोया थाना पुलिस ने आरोपी फर्जी डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी झोलाछाप डॉक्टर की पहचान डडूमाजरा के रहने वाले ओम प्रकाश के रूप में हुई है। आपको बता बता दें कि लॉक डाउन के दौरान यह चंडीगढ़ पुलिस की ओर से फर्जी डॉक्टर की इस तरह से दूसरी गिरफ्तारी है।

छाया: कपिल नागपाल

जानकारी के अनुसार लॉक डाउन के दौरान तैनात किए गए एक्सक्यूटिव मजिस्ट्रेट इंदरजीत सिंह और एसएचओ मलोया पलक गोयल अपनी जनरल ड्यूटी के दौरान क्षेत्र में राउंड पर थी। इस दौरान उन्होंने दीपा क्लीनिक के नाम से मौजूद क्लीनिक के डॉक्टर ओम प्रकाश से बात की। संदेह होने पर पुलिस में जब आरोपी डॉक्टर से उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट डाक्यूमेंट्स और मेडिकल डिग्री मांगी गई तो वह पहले गोलमाल करने लगा । लेकिन जब पुलिस ने उससे सख्ती सेेे पूछताछ की । इस दौरान उसने पुलिस के सामने माना कि उसके पास कोई भी सर्टिफिकेट ,रजिस्ट्रेेशन या डिग्री नहीं है। वह बीते करीब 1 माह से इसी तरह से खुद को डॉक्टर बता क्लीनिक चलाता आ रहा है।

छाया: कपिल नागपाल

पुलिस की माने तो आरोपी ने पूछताछ में बताया है कि वह पहले कंपाउंडर का काम करता था। इसके बाद उसने क्लीनिक खोल डॉक्टरी को अपना धंधा बना लिया। मामले में आरोपी फर्जी डॉक्टर के खिलाफ मेडिकल काउंसिल एक्ट -1956 की धारा 15 और सेक्शन 23 पंजाब मेडिकल रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

60 के दशक की हेरोइन निम्मी नहीं रहीं, वह 88 वर्ष की थीं

  • निम्मी ने राज कपूर,‌ नरगिस और प्रेम नाथ स्टारर फिल्म ‘बरसात’ (1949) से अपने‌ फिल्मी करियर की शुरुआत की थी.
  • 1986 में आई फिल्म ‘लव ऐंड गॉड’ निम्मी की अंतिम फिल्म थी और उससे पहले उन्होंने राजेंद्र कुमार और साधना स्टारर फिल्म ‘मेरे महबूब’ (1963) में काम किया था.

हिंदी सिनेमा में राजकपूर की खोज मानी जाने वाली मशहूर अभिनेत्री निम्मी का बुधवार की शाम यहां मुंबई में हृदयगति रुक जाने से निधन हो गया। वह कुछ अरसे से बीमार चल रही थीं। सरला नर्सिंग होम में शाम छह बजे के करीब उन्होंने अंतिम सांस ली। निम्मी के पिता मेरठ के रहने वाले थे और निम्मी का जन्म आगरा में हुआ। वह 87 साल की थीं। 

मुंबई- 

पचास और साठ के दशक की बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री निम्मी का बुधवार (25 मार्च) की शाम मुंबई में उनके घर पर निधन हो गया. वह 88 वर्ष की थीं. वो पिछले काफी लंबे समय से बीमार थीं. उन्होंने सांताक्रूज के एक प्राइवेट अस्पताल में अंतिम सांस ली. निम्मी का अंतिम संस्कार आज (26 मार्च) की दोपहर बाद किया जाएगा.

फिल्मी पर्दे पर जलवे बिखेरने वाली एक्ट्रेस जन्म के समय नाम नवाब बानो था. राज कपूर ने उन्हें स्क्रीन नाम दिया- निम्मी. निम्मी पहली बार स्क्रीन पर फिल्म बरसात में साल 1949 में दिखी थीं. उनकी मौत की जानकारी मशहूर फिल्म क्रिटिक कोमल नाहटा ने ट्वीट कर साझा कीं. निम्मी ने अपने जमाने की आन, उड़न खटोला, मेरे मेहबूब जैसी कई फिल्मों में यादगार किरदार निभाई थे. उन्हें अपने दौर की बेहतरीन एक्ट्रेस के तौर पर शुमार

निम्मी की शादी लेखक अली राजा के साथ हुई, जिन्होंने दुनिया को 2007 में ही छोड़ दिया था. निम्मी ने 16 साल फिल्मों में काम किया. साल 1949 से लेकर 1965 तक वे फिल्मों में सक्रिय रहीं.

कहा जाता है कि करियर के शुरुआती दिनों में निम्मी काफी डिमांड में थीं. कहा जाता है कि दिलीप कुमार से लेकर राज कपूर, अशोक कुमार, धर्मेंद्र जैसे कई बड़े सितारे उनके साथ काम करने को लेकर उत्सुक थे. निम्मी के निधन को लेकर मशहूर फिल्म डायरेक्टर महेश भट्ट ने भी ट्वीट किया है और उन्हें श्रद्धांजलि दी है. वहीं, बॉलीवुड की कई हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है.

कनिका कपूर की तीसरी रिपोर्ट भी पोसिटिव, पार्टी में शामिल 60 नेगेटिव

कुछ देर पहले जहां खबर आई थी कि कोरोना वायरस से संक्रमित बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर (Kanika Kapoor) की तीसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है. वहीं अब उनके संपर्क में आए लोगों लेकर एक राहत भरी खबर सामने आई है. यह तो सभी को पता है कि कनिका ने संक्रमण के बावजूद कई कार्यक्रम अटेंड किए. सनद रहे बॉलीवुड सिंगर बीते 9 मार्च को लंदन से मुंबई लौटी थीं, इसके दो दिन बाद वह लखनऊ गईं और कई पार्टियों में भी शामिल हुईं. रिपोर्ट्स की मानें तो 15 मार्च को ही कनिका लंदन से लखनऊ आई थीं और एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट कर्मियों की मिलीभगत से वॉशरूम में छिप कर निकल भागी थीं. 

नई दिल्ली: 

कुछ देर पहले जहां खबर आई थी कि कोरोना वायरस से संक्रमित बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर की तीसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है. वहीं अब उनके संपर्क में आए लोगों लेकर एक राहत भरी खबर सामने आई है. यह तो सभी को पता है कि कनिका ने संक्रमण के बावजूद कई कार्यक्रम अटेंड किए. इसलिए उनके संपर्क में आए लोगों में भी कोरोना होने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन अब खबर है कि कनिका कपूर के संपर्क में आए 262 लोगों में से 60 लोगों की मेडिकल रिपोर्ट निगेटिव आई है. 

बॉलीवुड सिंगर बीते 9 मार्च को लंदन से मुंबई लौटी थीं, इसके दो दिन बाद वह लखनऊ गईं और कई पार्टियों में भी शामिल हुईं. रिपोर्ट्स की मानें तो 15 मार्च को ही कनिका लंदन से लखनऊ आई थीं और एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट कर्मियों की मिलीभगत से वॉशरूम में छिप कर निकल भागी थीं. 

बीते शुक्रवार को लखनऊ में कनिका को कोरोना टेस्ट कराया गया था, जिसमें वह पॉजिटिव पाई गई थीं. वहीं, खबर यह भी है कि कनिका के साथ कल्पना टावर में मौजूद 35 लोग का कोरोना वायरस टेस्ट करवाया गया है. कनिका के साथ कल्पना टावर में 35 में से 11 लोगों का कोरोना वायरस टेस्ट रिजल्ट नेगिटिव आया है.

इसे भी पढ़ें: क्यों आत्महत्या करना चाहती थीं कनिका कपूर, जानिए पूरी वजह!

कनिका कपूर को लखनऊ के जिस पीजीआई हॉस्पिटल में आइसोलेशन के लिए रखा गया है, उस हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ आरके धीमान ने लिखित बयान जारी किया करते हुए कनिका पर ढेर सारे इल्जाम लगाए. हॉस्पिटल वालों का कहना है कि कनिका इलाज में बिलकुल भी सहयोग नहीं कर रही हैं. वह एक पेशेंट नहीं, बल्कि स्टार जैसा व्यवहार कर रही हैं. हॉस्पिटल में उनके नखरों से वहां का सारा स्टॉफ परेशान है. हॉस्पिटल ने कनिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाने के बावजूद बालीवुड सिंगर के नखरे कम नहीं हो रहे हैं. कनिका को हॉस्पिटल में सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं दी गई हैं, लेकिन उनकी डिमांड से हॉस्पिटल वाले परेशान हैं.

कनिका कपूर की लापरवाही को लेकर उत्तर प्रदेश में उन पर कई एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है.

“काईलिन एंड ईवी रेस्टोरेंट” : भारतीय परिधान निषेध हैं

बुजुर्ग बताते हैं कि अँग्रेजी हुकूमत के दिनों में रेस्टोरेंट्स और होटल के दरवाजे पर लिखा रहता था “Dogs & Indians are not allowed” अर्थात “कुत्तों और भारतियों का प्रवेश निषेध है”। यह बीते दिनों कि बात है लेकिन आज की तारीख में भारत की राजधानी दिल्ली के कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठान आज भी अँग्रेजी राज की याद दिलाते हैं। वसंत कुंज स्थित काईलिन एंड ईवी रेस्टोरेंट उनही प्रतिष्ठानों में से एक है जहां अब ग्राहकों की कमी के कारण भारतियों को प्रवेश देना मजबूरी है लेकिन भारतीय शालीन पहनावों को नहीं। वहाँ आप धोती कुर्ता, साढ़ी लहंगा चोली इत्यादि भारतीय पारंपरिक परिधान पहन कर नहीं जा सकते। और इन जगहों को दिल्ली सरकार अपनी नाक के नीचे पनाह देती है और उनकी विचारधारा को बढ़ावा देते हुए उन पर कोई कार्यवाई नहीं करती

  • 10 मार्च को दिल्ली के वसंत कुंज स्थित रेस्टोरेंट की घटना, रेस्टोरेंट प्रबंधन की सफाई- हमारे यहां ऐस कोई प्रतिबंध नहीं
  • प्रिंसिपल संगीता ने कहा- भारतीय होने पर गर्व कैसे करूं?, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब की बेटी ने कहा- रेस्टोरेंट का लाइसेंस रद्द हो

नई दिल्ली. साड़ी पहनकर रेस्टोरेंट में पहुंची महिला को कर्मचारी ने एंट्री देने से मना कर दिया। घटना 10 मार्च को वसंत कुंज स्थित काईलिन एंड ईवी रेस्टोरेंट में हुई। गुड़गांव के पाथवे सीनियर स्कूल की प्रिंसिपल संगीता नाग पति के साथ रेस्टोरेंट में पहुंची थीं। कर्मचारी ने उनसे कहा कि हमारे यहां पारंपरिक पोशाक में आने वालों को एंट्री नहीं दी जाती। महिला ने इस घटना का वीडियो ट्वीट किया। सोशल मीडिया पर रेस्टोरेंट का लाइसेंस रद्द करने की मांग उठ रही है। इसके बाद रेस्टोरेंट ने सफाई दी कि हमारे यहां ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है। केवल शॉर्ट और चप्पल पहनकर आने पर प्रतिबंध लगाया गया है। 

रेस्टोरेंट के निदेशक सौरभ खनिजो ने इस घटना पर माफी मांगी। उन्होंने कहा, “जो कर्मचारी वीडियो में दिख रहा है, वह अभी नया है। हमारे यहां केवल शॉर्ट्स और चप्पल पहनकर आने पर पाबंदी है।”

प्रिंसिपल ने कर्मचारी से पूछा- रेस्टोरेंट भारत में है, फिर ऐसी पाबंदी क्यों?

संगीता नाग ने जो वीडियो ट्वीट किया, वह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कर्मचारी ने संगीता से कहा कि इस पहनावे को हम मंजूरी नहीं देते हैं। इस पर संगीता ने सवाल किया, “आपका बार और रेस्टोरेंट भारत में है, दिल्ली में है। इसके बावजूद आप यहां परंपरागत पोशाक पहनकर आने पर एंट्री नहीं देते हैं?’ इस पर कर्मचारी ने जवाब दिया कि हमारे यहां पारंपरिक पोशाक को अनुमति नहीं दी जाती है। इस जवाब के बाद संगीता ने कहा कि मैं यही जानना चाहती थी, धन्यवाद।

इस घटना के बाद संगीता ने वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “काईलिन एंड ईवी रेस्टोरेंट में मुझे भारतीय होने पर भेदभाव वाला अनुभव मिला। यहां मुझे पारंपरिक पहनावे की वजह से एंट्री नहीं मिली। भारत में एक रेस्टोरेंट, जो स्मार्ट कैजुअल की अनुमति देता है, लेकिन भारतीय पोशाक पहनकर आने वालों को नहीं। जो कुछ भी हुआ, उसके बाद मैं भारतीय होने पर कैसे गर्व करूं?”

What the hell! If this Kylin & Ivy or any other restaurant still follow such colonial practices of not allowing guests wearing ethnic clothes, their licences should be immediately cancelled. Shame! @ArvindKejriwal @PMOIndia https://t.co/JdIdc4apiu

प्रणब की बेटी शर्मिष्ठा ने संगीता का वीडियो री-ट्वीट किया

वायरल वीडियो को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने री-ट्वीट किया। उन्होंने घटना पर लिखा, “क्या बकवास है। इस तरह की हरकत काईलिन एंड ईवी या जिस भी रेस्टोरेंट में हो, उस रेस्टोरेंट का लाइसेंस तुरंत रद्द कर देना चाहिए।” शर्मिष्ठा ने अपने ट्वीट को प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री केजरीवाल को भी टैग किया है।

क्रांतिकारी, विचारक और लेखक राष्ट्रवादी वीर सावरकर कांग्रेस की परेशानी

शायद ही कभी जिन्ना की निंदा खुले मंच से हुई हो, जिस जिन्ना ने भारत माता के विभाजन में सबसे अग्रणी भूमिका निभाई थी. यहाँ तक कि पाकिस्तान के निर्माता जिन्ना के लिए तो अलीगढ़ में भाजपा सरकार का विरोध तक कर डाला. इतनी निंदा उन अंग्रेजो की नहीं की गई जिन्होंने देश को लगभग 200 साल लूटा. हजारों वर्ष अत्याचार करने वाले मुगलों को महान बताया गया , क्योकि जिन्दा रखने थे तथाकथित सेकुलरिज्म के नकली सिद्धांत.

लेकिन जब भी और जिस भी मंच से भाषण दिया गया, वहां वीर सावरकर को अपमानित किया गया. अपने पूर्वजो का इतिहास कभी न बताने वालों ने वीर सावरकर को अपमानित कर के किसका वोट हासिल किया ये सभी जानते हैं. उनके भी वोट हासिल करने की कोशिश सावरकर को अपमान कर के की गई जो भारत की सेना और पुलिस बल के खिलाफ दिन रात मोर्चा खोले रहते हैं.

ये निंदा स्थानीय नेताओं के बजाय सर्वोच्च पदों पर आसीन राहुल गाँधी जैसो ने की. उनका इशारा पाते ही बाकी सब भी उनके सुर में सुर मिलाते रहे और अनगिनत हिन्दुओं के हत्यारे मुग़ल आक्रान्ता टीपू सुलतान की जय जयकार करने वाली कांग्रेस आजादी के नायक, हिन्दू राष्ट्रवाद के प्रणेता अमर हुतात्मा वीर सावरकार के खिलाफ तनकर खड़ी हो गई. कांग्रेस की राजस्थान सरकार ने सरकार ने नए पाठ्यक्रम में विनायक दामोदर सावरकर को वीर और देशभक्त नहीं, बल्कि जेल से बचने के लिए अंग्रेजों से दया मांगने वाला बता दिया. इतना ही नही मध्यप्रदेश में कांग्रेस के युवा टीम सावरकर जी पर अनैतिक संबंध बनाने का आरोप लगाया. यद्दपि देश देखता रहा ये सब और राष्ट्रीय जनादेश ऐसा करने वालों के विरुद्ध गया.

राजवीरेन्द्र वशिष्ठ, चंडीगढ़:

न ही भाजपा-संघ वाले स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के बारे में बात करते थकते हैं और न ही कॉन्ग्रेस वाले हिन्दू महासभा के नेता रहे विनायक दामोदर सावरकर में नुक्स निकालते। इन दोनों राजनीतिक ध्रुवों के बीच जो खो जाता है, वह है लेखक, इतिहासकार, विचारक सावरकर- जिसने शायद एक व्यक्ति या नेता से आगे जाकर भारत में ब्रिटिश शासन की जड़ें खोद दीं। जिसने दशकों बाद पहली बार भारत-भूमि को याद दिलाया कि 1857 में महज कुछ दिशाहीन, अनुशासन-विहीन सैनिकों की हिंसा नहीं, स्वतंत्रता का पहला संग्राम हुआ था। जिसके ‘मास्टर-प्लान’ पर काम करते हुए बारीन्द्र घोष, शचीन्द्रनाथ सान्याल, रासबिहारी बोस आदि ने अपनी उम्र झुलसा दी और बिस्मिल, बाघा जतीन, राजेन्द्र लाहिड़ी आदि अनगिनत वीरों ने प्राणोत्सर्ग किया। जिसकी प्रेरणा से अध्यक्ष चुने जाने के बावजूद कॉन्ग्रेस में हाशिये पर धकेल दिए गए सुभाष चन्द्र बोस आज़ाद हिन्द फ़ौज के ‘नेताजी’ बनने नजरबंदी से भाग निकले। जिसकी किताबें इतनी लोकप्रिय थीं कि भगत सिंह उसकी प्रतियाँ बेचकर बंदूकें खरीदने का पैसा जुटा सकते थे!

‘1857 दोहरा कर ही मिलेगी आज़ादी’

1857 के विद्रोह को दबाने में अंग्रेजों ने जो क्रूरता और निर्ममता दिखाई थी, वह अनायास या अकारण ही नहीं थी। पूरी ब्रिटिश शासन व्यवस्था ब्रिटिश सेना के संरक्षण पर टिकी थी और ब्रिटिश सेना (चाहे वह ईस्ट इंडिया कम्पनी की हो या बाद में ब्रिटिश क्राउन की) में केवल मुट्ठी-भर अंग्रेज अफ़सर होते थे- भारतीयों को विदेशियों का गुलाम बना कर रखने वाली असली ताकत भारतीय सैनिक ही थे; उन राजाओं की सेनाओं के, जिनकी कम्पनी बहादुर या ब्रिटेन के राजपरिवार के साथ संधि हुई थी, या सीधे ब्रिटेन की गुलामी में पड़े हुए भू-भाग की ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सैनिक। अतः 1857 को क्रूरता से कुचलना अंग्रेजों के लिए ज़रूरी था, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक किसी सैनिक के दिमाग में अपने गोरे मालिकों पर बंदूक तानने की जुर्रत न आए। इसीलिए उन्होंने न केवल लोमहर्षक निर्ममता के साथ इस संग्राम को कुचला (किवदंतियाँ हैं कि मंगल पाण्डे के घर वालों की पहचान करने में नाकाम रहने पर उन्होंने कानपुर से बैरकपुर तक के हर गाँव के हर पाण्डे उपनाम वाले बच्चे-बूढ़े-औरत को गाँवों के पेड़ों से फाँसी पर लटका दिया था), बल्कि इतिहास में इसे अधिक महत्व न देते हुए महज़ एक अनुशासनहीन विद्रोह के रूप में दिखाया। वह सावरकर ही थे जिन्होंने पहले मराठी और फिर अंग्रेजी में प्रकाशित ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’/The Indian War of Independence के ज़रिए इस लड़ाई के असली रूप को जनचेतना में पुनर्जीवित किया।

1909 में प्रकाशित इस किताब में उन्होंने न केवल इस विद्रोह की राजनीतिक चेतना को रेखांकित किया बल्कि इसके राष्ट्रीय स्वरूप के पक्ष में भी तर्क रखे। यही नहीं, उन्होंने यह भी अनुमानित कर लिया था कि अगर भारत को ब्रिटिश शासन के चंगुल से मुक्त होना है तो अंततः यही रास्ता फिर से पकड़ना होगा। ब्रिटिश सेना को पुनः राष्ट्रवादी, देशभक्त सैनिकों से भरना होगा जो वर्षों तक चुपचाप सेना में अपनी पैठ बनाएँ, प्रभुत्व स्थापित करें, अन्य सैनिकों की निष्ठा विदेशी शासन से इस देश की जनता की ओर मोड़ें। अंत में जब संख्याबल आदि सभी प्रकार से मजबूत हो जाएँ तो अपने नेता के इशारे पर, सही समय पर विद्रोह कर दें। महत्वपूर्ण रणनीतिक संसाधनों, हथियारों, रसद, आपूर्ति मार्गों आदि पर कब्ज़ा कर अंग्रेजों की व्यवस्था को घुटने पर ले आएँ।

सारे जहाँ में प्रतिबंधित

बौखलाए अंग्रेजों ने किताब और सावरकर पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। लंदन के सभी प्रकाशकों को इस किताब के अंग्रेजी अनुवाद/संस्करण के प्रकाशन के खिलाफ़ आगाह कर दिया गया। फ़्रांस ने भी अंग्रेज़ी दबाव में घुटने टेक दिए। अंततः किताब का अंग्रेज़ी संस्करण हॉलैंड (अब नीदरलैंड) में प्रकाशित हुआ- वह भी इसलिए कि ‘काली’ और ‘भूरी’ दुनिया को गुलाम बनाने में इंग्लैण्ड और हॉलैंड में ऐतिहासिक दौड़ मची थी। दोनों एक-दूसरे के औपनिवेशिक शासन को कमजोर करना चाहते थे। इस किताब को भारत में बाँटे जाने के लिए ब्रिटिश साहित्य के पन्नों में छिपा कर, या उसकी जिल्द चढ़ाकर लाया जाता था।

पीटर होपकिर्क अपनी किताब On Secret Service East of Constantinople में लिखते हैं कि इसके बाद अंग्रेजों ने सावरकर की किताब को ब्रिटिश लाइब्रेरी की सूची तक में जगह नहीं दी, ताकि भारतीय छात्रों को इसके बारे में पता न चल जाए। इसी किताब में वह यह भी बताते हैं कि सावरकर की किताब को ‘तस्करी’ कर भारत में लाने के लिए चार्ल्स डिकेंस का मशहूर उपन्यास ‘पिकविक पेपर्स’ काफ़ी इस्तेमाल हुआ है।

भगत सिंह

भगत सिंह ने न केवल सावरकर के साहित्य का खुद गहन अध्ययन किया (उनकी जेल डायरियों और लेखन में सावरकर से अधिक उद्धृत केवल एक लेखक हैं), बल्कि कई इतिहासकारों की राय है कि वे अपने क्रांतिकारी संगठन में भी सावरकर के अध्ययन को प्रोत्साहित करते थे। यही नहीं, सावरकर की ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ और इसके अंग्रेजी संस्करण की आमजन के बीच भारी माँग और प्रतिबंध के चलते आपूर्ति में किल्लत को देखते हुए भगत सिंह के इसकी व्यवसायिक पैमाने पर तस्करी करने के भी उद्धरण इतिहास में मिलते हैं। इस किताब को ऊँचे दामों पर बेचकर उनका संगठन अंग्रेजों के खिलाफ़ क्रांति के लिए हथियार खरीदने का धन उगाहता था। इस किताब का दूसरा संस्करण प्रकाशित करवाने में भगत सिंह की भूमिका का ज़िक्र विक्रम सम्पत द्वारा लिखित सावरकर की जीवनी में है। यही नहीं, भगत सिंह ने सावरकर की केवल इस किताब ही नहीं, ‘हिन्दू पदपादशाही’ का भी ज़िक्र अपने लेखन में किया है।

सावरकर भी भगत सिंह का काफी सम्मान करते थे। इसकी एक बानगी यह है कि सावरकर की मृत्यु के उपरांत 1970 में प्रकाशित उनकी जीवनी ‘आत्माहुति’ का विमोचन भगत सिंह की माता माताजी विद्यावती देवी के हाथों हुआ। इस समारोह में उनके छोटे भाई भी शरीक हुए थे।

आज यह कतई ज़रूरी नहीं है कि जो कुछ सावरकर ने लिखा है, वह सही ही हो। बहुत कुछ ऐसा भी हो सकता है जो उस समय भले सही रहा हो, लेकिन आज प्रासंगिक न हो। सावरकर के जीवनकाल में ही ‘हिंदुत्व’ और हिंदूवादी राजनीति की उनसे अलग परिभाषाएँ रहीं हैं। ऐसा माना जाता है कि डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के हिन्दू महासभा छोड़ने के पीछे एक महती कारण पाकिस्तान को लेकर उनमें और सावरकर में पाकिस्तान के अस्तित्व को स्वीकार कर लेने (डॉ. मुखर्जी का मत) बनाम पुनः एक दिन अखण्ड हिंदुस्तान की सावरकर की परिकल्पना का गंभीर मतभेद था। ‘हिंदुत्व’ शब्द सावरकर के पहले भी था और सरसंघचालक मोहन भागवत ने यह कई बार साफ़ किया है कि आज का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोलवलकर-सावरकर से आगे बढ़ चुका है। ऐसे में यदि सावरकर को यदि जीवित रखना है तो उनके प्रशंसकों, उनके अनुयायियों को उन्हें दोबारा पढ़ना होगा, उन्हें दोबारा ‘खोजना’ होगा।

प्रेम और आत्मसम्मान

यह कोई नये शब्द नहीं है जहां जहां प्रेम की बात होती है वहां पर आत्मसम्मान का पाठ पढ़ाया जाता है क्योंकि किसी भी इंसान जिसमें रीढ़ की हड्डी मजबूत हो जो अपने स्वाभिमान के साथ जीता हो उसके लिए उसका आत्मसम्मान ही सबसे बड़ी चीज होती है। लेकिन जब बात आती है प्रेम की वहां अक्सर लोग अपना आत्मसम्मान खोते नजर आते हैं चाहे प्रेम में पड़कर हो चाहे सामने वाले के साथ तालमेल बिठाने को लेकर। एक हद तक यह सही भी होता है कि प्रेम को की पूर्ति करने के लिए कई बार अपने सम्मान को थोड़ा किनारे रखकर लोग आगे बढ़ते हैं क्योंकि किसी भी रिश्ते को खत्म करने से बेहतर होता है कि थोड़ासा एडजस्ट किया जाए रिश्ते रोज नहीं बनते लेकिन जब बनते हैं तो उन्हें सच्चे मन से निभाने वाले इंसान ही सच्चे होते हैं।

अब सवाल आता है आत्मसम्मान कए साथ एडजस्ट कहां किया जाए किसके साथ किया जाए किसके साथ आप करना चाहेंगे जिसके साथ आप करते हैं जो आपसे प्रेम करता है? जो आपसे प्रेम करता होगा वह आपको कभी भी आपके सम्मान के साथ समझौता नहीं करने देगा उसे महसूस होगा कि आपके सम्मान को ठेस पहुंच रही है तो वो आपसे एक कदम ज्यादा आगे बढ़कर उन शर्तों में बदलाव कर देगा लेकिन इसके लिए सामने वाले के दिल में आपके लिए निश्छल प्रेम का होना जरूरी है।

जहां प्रेम स्थिति समय और सुविधानुसार किया जाएगा वह कभी भी सामने वाला आपको वह सम्मान नहीं दिला पाएगा जो आपका अधिकार है और जिस प्रेम में अधिकारों को बताना पड़े जताना पड़े मांगना पड़े प्रेम नहीं सिर्फ परिस्थितियों में उलझा हुआ रिश्ता है। पर ऐसे रिश्ते में मन को बहलाने के लिए आप चाहे तो जीवन भर रह सकते हैं लेकिन याद रखिए जब जब सच्चाई की कसौटी पर यह रिश्ता परखेंगे तब तब आपको ठेस पहुंचेगी या तो आप खुद को तैयार कर लीजिए कि जब जब आपको ठोकर लगेगी आप अकेले गिरेंगे रोएंगे सम्भलेंगे और फिर उठ जाएंगे। लेकिन यह सब सिर्फ कुछ समय तक ही चल पाता है बार-बार अपमान के घूंट आपको इतना अंधेरों में धकेलेंगे कि आप चाह कर भी फिर नहीं उभर पाएंगे। कोई भी रिश्ता हो लेकिन चुनाव सिर्फ आपका होना चाहिए। कितना चलना है कैसे चलना है आपकी भूमिका कितनी होगी यह आप खुद तैयार कीजिए प्रेम में पड़कर भी किसी को इतना हक मत दीजिए कि सामने वाला आपको कठपुतली की तरह नचा सके। खुद का सम्मान करे तभी कोई और आपका सम्मान करेगा।

Strict Legal Action Against the Miscreants on St. Valentine’s Day

The Valentine’s Day will be celebrated on 14-02-2020 in the different parts of the City especially by the youngsters. In order to curb  indulgence in dangerous driving, use of pressure horns and eve teasing, Proper security cover shall be deployed at Panjab University and its surrounding roads, markets of Sectors-8, 9,10,11,15,16,17 & 22 as well as in different Colleges and Girls Hostels.

For the proper maintenance of law & order and to curb the occurrence of such incidents, *Total-714 police personnel* (i.e. GOs-03, SHO/Insps.-24 and NGO/ORs-687) will be on ground on      14-02-2020. Further, PCR patrolling being intensified in the city especially around girls colleges, schools, hostels, parks, busy markets and malls. Lady police in civil clothes also being deployed in parks and around the colleges. Turn Sector-11/12 to Market Sector-10 being earmarked as *“Limited Vehicle Zone”* to curb hooligans and rash driving. The drivers/vehicles violating traffic rules especially dangerous driving and using pressure horns will be challaned/impounded. In addition to above, 40 internal nakas also being laid down from 4:00pm to 10:00pm.  

This year special 12 nakas being established around the Pubs & Bars in Sector-26 and Sector-7 till early morning, to restrain the hooligism, brawl incidents and safety of the women from anti-eve teasing and anti- snatching point of view. 

Special focus of deployment will be around the girl’s colleges & schools, ISBT-43, 17 and special anti eve teasing drive will be carried out.

Eve teasing, romeogiri, Drunken driving, dangerous driving shall be dealt with strict legal action.