पंचांग 04 अगस्त 2020

आज 4 अगस्त को हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह शुरू हो गया है. इसे आम भाषा में भादों का महीना भी कहा जाता है. आज भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है. भाद्रपद माह भगवान कृष्ण और गणेश भगवान को समर्पित माना जाता है.

विक्रमी संवत्ः 2077, 

शक संवत्ः 1942, 

मासः भाद्रपद़़, 

पक्षः कृष्ण पक्ष, 

तिथिः प्रतिपदा रात्रि 09.55 तक है, 

वारः मंगलवार, 

नक्षत्रः श्रवण प्रातः 08.11 तक, 

योगः सौभाग्य प्रातः 05.15 तक, 

करणः बालव, 

सूर्य राशिः कर्क, 

चंद्र राशिः मकर, 

राहु कालः अपराहन् 3.00 से 4.30 बजे तक, 

सूर्योदयः 05.48, 

सूर्यास्तः 07.06 बजे।

नोटः आज रात्रि 8.47 से पंचक प्रारम्भ हो रहे हैं, पंचक काल में तृण, काष्ठ, धातु का संचय व भवन निर्माण और नवीन कार्य तथा यात्रा आदि कर्म वर्जित होते हैं।पंचक काल में शव दाह का भी निषेध होता है।चूंकि शव को इतनी लंबी अवधि हेतु रोकना देश काल परिस्थिति के अनुसार मुश्किल हैं, अतः योग्य वैदिक ब्रह्मण की सलाह लेकर पंच पुतलों का दाह और पंचक नक्षत्रों की शांति विधि पूर्वक करानी चाहिए। क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि मृतक व्यक्ति के परिवार व संबंधियों में से ही पाॅच व्यक्तियों के अकालमृत्यु होने की आशंका बनी रहती है।

नोटः आज ऋग्वेदियों के उपाकर्म है।

विशेषः आज उत्तर दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर मंगलवार को धनिया खाकर, लाल चंदन, मलयागिरि चंदन का दानकर यात्रा करें।

पंचांग 28 जुलाई 2020

आज 28 जुलाई को हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है. आज मंगलवार है. आज का दिन राम-सिया के परम भक्त बजरंगबली को समर्पित माना जाता है. आज के दिन भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं. बजरंगबली को सभी कष्टों को हरने वाला बताया गया है.

विक्रमी संवत्ः 2077, 

शक संवत्ः 1942, 

मासः श्रावण़़, 

पक्षः शुक्ल पक्ष, 

तिथिः नवमी रात्रि 03.00 तक है, 

वारः मंगलवार, 

नक्षत्रः स्वाती प्रातः 09.42 तक, 

योगः शुभ सांय 06.06 तक, 

करणः बालव, 

सूर्य राशिः कर्क, 

चंद्र राशिः तुला, 

राहु कालः अपराहन् 3.00 से 4.30 बजे तक, 

सूर्योदयः 05.44, 

सूर्यास्तः 07.11 बजे।

विशेषः आज उत्तर दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर मंगलवार को धनिया खाकर, लाल चंदन,मलयागिरि चंदन का दानकर यात्रा करें।

26 जुलाई : विजय दिवस पर मन की बात

  • करगिल युद्ध भारत कभी नहीं भूल सकता है-PM मोदी
  • ‘पाक ने पीठ में छुरा घोंपने की कोशिश की थी’
  • करगिल युद्ध के दौरान अटल जी संदेश को याद करें

नई दिल्ली: 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह 11 बजे ‘मन की बात‘ कार्यक्रम के जरिए देश को संबोधित किया. पीएम मोदी ने मन की बात में कहा कि आज का दिन बहुत खास है. आज कारगिल विजय दिवस है. 21 साल पहले आज के दिन करगिल में हमारी सेना ने भारत की जीत का झंडा लहराया था. कारगिल का युद्ध किन परिस्थितियों में हुआ था, वह भारत कभी नहीं भूल सकता. पीएम मोदी ने अमर शहीदों के साथ वीर माताओं को भी नमन किया. 

पीएम मोदी ने कहा, “पाकिस्तान में बड़े-बड़े मंसूबे पालकर भारत की भूमि हथियाने और अपने यहां चल रहे आंतरिक कलह से ध्यान भटकाने को लेकर दुस्साहस किया था. भारत और पाकिस्तान से अच्छे संबंधों के लिए प्रयासरत था. दुष्ट का स्वभाव भी होता है, हर किसी से बिना वजह दुश्मनी करना ऐसे स्वभाव के लोग जो हित करता है, उसका भी नुकसान ही सोचते हैं. इसलिए भारत की मित्रता के जवाब में पाकिस्तान के द्वारा पीठ में छुरा भोंकने की कोशिश हुई थी लेकिन इसके बाद जो भारत की वीर सेना ने जो पराक्रम दिखाया उसे पूरी दुनिया ने देखा.” 

पीएम मोदी ने आगे कहा, “जीत पहाड़ों की ऊंचाई कि नहीं भारत के वीरो के ऊंचे हौसले की हुई. वीर माताओं के प्यार के बारे में एक दूसरे को बताए शहीदों की वीरता के बारे में एक दूसरे को बताएं. मैं देश के लोगों से अपील करता हूं. कारगिल युद्ध के समय अटल जी ने यहां दिल्ली से जो कहा था वह आज भी हमारे लिए प्रासंगिक है. महात्मा गांधी का मंत्र था कि किसी को कोई दुविधा हो तो उसे क्या करना क्या ना करना, उसे भारत के सबसे गरीब और असहाय व्यक्ति के बारे में सोचना चाहिए. जो वह करने जा रहा है. उससे उस व्यक्ति की भलाई होगी या नहीं होगी. गांधी जी के इस विचार से आगे बढ़कर अटल जी ने कहा था कि करगिल युद्ध ने हमें एक दूसरा मंत्र दिया है. यह मंत्र था कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले हम यह सोचे कि क्या हमारा यह कदम उस सैनिक के सम्मान के अनुरूप है जिसने उन दुर्गम पहाड़ियों में अपने प्राणों की आहुति दी थी.” 

कोरोना का खतरा टला नहीं

पीएम मोदी ने कोरोना के खतरे के प्रति आगाह किया. उन्होंने कहा, “आज हमारे देश में कोरोना का रिकवरी एक अन्य देशों के मुकाबले बेहतर साथ ही हमारे देश में मृत्यु दर भी विदेशों से कम. हमें कारोना से बहुत ही ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. चेहरे पर मास्क लगाना या गमछे का प्रयोग करना दो गज़ की दूरी हाथ धोना कहीं पर थूकना नहीं साफ सफाई का पूरा ध्यान यही हमारे हथियार हैं. जब भी मास्क हटाने का मन करे, तब उन डॉक्टर का कोरोना वायरस का स्मरण करिए वह घंटों तक मास्क पहनकर जुटे रहते हैं.” 

आपदा को अवसर में बदलने का वक्त

पीएम मोदी ने एक बार फिर दोहराया को कोरोना संकट की आपदा को अवसर में बदलने का यही सही वक्त है. उन्होंने लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही. पीएम मोदी ने कहा, “उत्तर पूर्व में कारीगरों ने बांस से बनी इको फ्रेंडली बोतलें और बर्तन बनाए हैं. यह हम सबके लिए उदाहरण है. झारखंड में लेमन ग्रास की खेती कर कारोबार बढ़ाया जा रहा है. लद्दाख और लेह में चूली फल या खुमानी की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए सोलर पैनल का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे खुमानी को सुखाकर दूसरे हिस्सों में भेजा जा रहा है.” 

शिवराज सिंह चौहान कोरोना पॉजिटिव, उमा भारती ने स्वास्थ्यलाभ की कामना की

मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान कोरोना पॉजिटिव (Shivraj Singh Chouhan Corona Positive) हो गए हैं। शनिवार सुबह यह जानकारी आने के बाद से बोपाल से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मचा हुआ है। सीएम भोपाल स्थित मंत्रालय में नियमित बैठकें करने के अलावा पूर्व राज्यपाल लालजी टंडन के अंतिम संस्कार में शामिल होने लखनऊ भी गए थे।

भोपाल – 25 जुलाई :

एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। शनिवार सुबह उन्होंने ट्वीट कर खुद इसकी पुष्टि की और अपने संपर्क में आए लोगों को टेस्ट कराने की सलाह दी। इसके बाद से राजधानी भोपाल से लेकर यूपी के लखनऊ तक में हड़कंप मचा हुआ है। चौहान पिछले सप्ताह पूर्व राज्यपाल लालजी टंडन के अंतिम संस्कार में शामिल होने लखनऊ भी गए थे। शिवराज सिंह के कोरोना संक्रमित होने पर उमा भारती ने कहा कि शिवराज जी और अनिल भदौरिया, लालजी की अंत्योष्टि में शामिल हुए थे. उसके कुछ दिन बाद ही भदौरिया पजिटिव आए थे, इसके बाद से हम सब उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे. उन्होंने कहा मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं जल्द ही वह ठीक हो और सिर्फ वह ही नहीं इस धरती पर जो भी इस वायरस की चपेट में आए वो जल्द से जल्द ठीक हो. उमा भारती ने कहा कि इस वायरस ने हमारे खिलाफ जैविक युद्ध छेड़ दिया है. 

पिछले दिनों किनसे मिले सीएम

  1. शुक्रवार शाम मंत्रालय में आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसे कई विभागों के शीर्ष अधिकारी शामिल थे।
  2. बुधवार को चौहान ने प्रदेश कैबिनेट की बैठक ली थी। वे दो दिनों तक मंत्रियों से अलग-्अलग भी मिले।
  3. इससे पहले वे लखनऊ में लालजी टंडन के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। इसमें उनके साथ गए एक मंत्री पहले ही कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं।
  4. चौहान गुरुवार शाम को भोपाल स्थिक प्रदेश बीजेपी मुख्यालय गए थे। यहां उनकी मौजूदगी में कांग्रेस के पूर्व विधायक नारायण पटेल ने कांग्रेस की सदस्यता ली थी।
  5. सीएम रोजाना शाम को कोरोना की समीक्षा बैठक करते हैं। इसमें जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल होते हैं, लेकिन मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अफसर उनके साथ होते हैं।

कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘मैं कोरोना गाइडलाइन का पूरा पालन कर रहा हूं. डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्वयं को क्वारंटाइन करूंगा और इलाज कराऊंगा. मेरी प्रदेश की जनता से अपील है कि सावधानी रखें, जरा सी असावधानी कोरोना को निमंत्रण देती है. मैंने कोरोना से सावधान रहने के हर संभव प्रयास किए लेकिन समस्याओं को लेकर के लोग मिलते ही थे. मेरी उन सब को सलाह है कि जो मुझसे मिले, वह अपना टेस्ट करवा लें.’ 

नाग पंचमी 2020

व्रत – उपवास – त्यौहार, चंडीगढ़ – 25 जुलाई:

नाग पंचमी का त्योहार आज 25 जुलाई को मनाया जा रहा है. आज लोग सांपों/नाग देवताओं की पूजा करेंगे और नाग देवता को दूध पिलाएंगे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन नागदेव की पूजा करने से कुंडली के राहु और केतु से संबंधित दोष दूर होते हैं. जिन जातकों की कुंडली में सांप का भय और सर्पदंश का योग होता है वो नाग पंचमी के दिन कालसर्प योग की पूजा करेंगे. आज कई महिलाएं सांप को भाई मानकर उनकी पूजा करती हैं और भाई से अपने परिवार की रक्षा का आशीर्वाद मांगती हैं. आइए नाग पंचमी के मौके पर पढ़ते हैं नाग पंचमी कथा …

नाग पंचमी कथा:

नाग पंचमी की पौराणिक कथा के अनुसार, बहुत समय पहले की बात है जब प्राचीन नगर में एक सेठजी के सात पुत्र थे. सातों के विवाह हो चुके थे. सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई नहीं था.

एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने को पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं को साथ चलने को कहा तो सभी धलिया और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने लगी. तभी वहां एक सर्प निकला, जिसे बड़ी बहू खुरपी से मारने लगी. यह देखकर छोटी बहू ने उसे रोकते हुए कहा- ‘मत मारो इसे? यह बेचारा निरपराध है.’

यह सुनकर बड़ी बहू ने उसे नहीं मारा तब सर्प एक ओर जा बैठा. तब छोटी बहू ने उससे कहा-‘हम अभी लौट कर आती हैं तुम यहां से जाना मत. यह कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गई और वहां कामकाज में फंसकर सर्प से जो वादा किया था उसे भूल गई.

उसे दूसरे दिन वह बात याद आई तो सब को साथ लेकर वहां पहुंची और सर्प को उस स्थान पर बैठा देखकर बोली- सर्प भैया नमस्कार! सर्प ने कहा- ‘तू भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात कहने के कारण तुझे अभी डस लेता. वह बोली- भैया मुझसे भूल हो गई, उसकी क्षमा मांगती हूँ, तब सर्प बोला- अच्छा, तू आज से मेरी बहन हुई और मैं तेरा भाई हुआ. तुझे जो मांगना हो, मांग ले. वह बोली- भैया! मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ जो तू मेरा भाई बन गया.

कुछ दिन व्यतीत होने पर वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर उसके घर आया और बोला कि ‘मेरी बहन को भेज दो.’ सबने कहा कि ‘इसके तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला- मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूं, बचपन में ही बाहर चला गया था. उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी को उसके साथ भेज दिया. उसने मार्ग में बताया कि ‘मैं वहीं सर्प हूं, इसलिए तू डरना नहीं और जहां चलने में कठिनाई हो वहां मेरी पूंछ पकड़ लेना. उसने कहे अनुसार ही किया और इस प्रकार वह उसके घर पहुंच गई. वहां के धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई.

एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा- ‘देश परंतु सर्प के समझाने पर शांत हो गई. तब सर्प ने कहा कि बहिन को अब उसके घर भेज देना चाहिए. तब सर्प और उसके पिता ने उसे बहुत सा सोना, चांदी, जवाहरात, वस्त्र-भूषण आदि देकर उसके घर पहुंचा दिया.

इतना ढेर सारा धन देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या से कहा- भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लाना चाहिए. सर्प ने यह वचन सुना तो सब वस्तुएं सोने की लाकर दे दीं. यह देखकर बड़ी बहू ने कहा- ‘इन्हें झाड़ने की झाड़ू भी सोने की होनी चाहिए’. तब सर्प ने झाडू भी सोने की लाकर रख दी.

सर्प ने छोटी बहू को हीरा-मणियों का एक अद्भुत हार दिया था. उसकी प्रशंसा उस देश की रानी ने भी सुनी और वह राजा से बोली कि- सेठ की छोटी बहू का हार यहां आना चाहिए.’ राजा ने मंत्री को हुक्म दिया कि उससे वह हार लेकर शीघ्र उपस्थित हो मंत्री ने सेठजी से जाकर कहा कि ‘महारानीजी छोटी बहू का हार पहनेंगी, वह उससे लेकर मुझे दे दो’. सेठजी ने डर के कारण छोटी बहू से हार मंगाकर दे दिया.

छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी, उसने अपने सर्प भाई को याद किया और आने पर प्रार्थना की- भैया ! रानी ने हार छीन लिया है, तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह हार उसके गले में रहे, तब तक के लिए सर्प बन जाए और जब वह मुझे लौटा दे तब हीरों और मणियों का हो जाए. सर्प ने ठीक वैसा ही किया. जैसे ही रानी ने हार पहना, वैसे ही वह सर्प बन गया. यह देखकर रानी चीख पड़ी और रोने लगी.

यह देख कर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी कि छोटी बहू को तुरंत भेजो. सेठजी डर गए कि राजा न जाने क्या करेगा? वे स्वयं छोटी बहू को साथ लेकर उपस्थित हुए. राजा ने छोटी बहू से पूछा- तुने क्या जादू किया है, मैं तुझे दंड दूंगा. छोटी बहू बोली- राजन ! धृष्टता क्षमा कीजिए, यह हार ही ऐसा है कि मेरे गले में हीरों और मणियों का रहता है और दूसरे के गले में सर्प बन जाता है. यह सुनकर राजा ने वह सर्प बना हार उसे देकर कहा- अभी पहनकर दिखाओ. छोटी बहू ने जैसे ही उसे पहना वैसे ही हीरों-मणियों का हो गया.

यह देखकर राजा को उसकी बात का विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर उसे बहुत सी मुद्राएं भी पुरस्कार में दीं. छोटी वह अपने हार और इन सहित घर लौट आई. उसके धन को देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या के कारण उसके पति को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है. यह सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर कहा- ठीक-ठीक बता कि यह धन तुझे कौन देता है? तब वह सर्प को याद करने लगी.

तब उसी समय सर्प ने प्रकट होकर कहा- यदि मेरी धर्म बहन के आचरण पर संदेह प्रकट करेगा तो मैं उसे खा लूंगा. यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बड़ा सत्कार किया. उसी दिन से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है और स्त्रियां सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं. 

आज लोक गीत मान कर गाये जाते हैं शिव कुमार बटालावी के गीत

कोरल ‘पुरनूर’ चंडीगढ़ – 23 जुलाई:

जन्मदिवस पर विशेष: पंजाबी के विद्यापति ‘शिव कुमार बटालवि’

शिव बटालवि

अमृता के ‘बिरह के सुल्तान’ लोक संस्कृति के पुरोधा भी हैं

शिव के गीत भारत पाकिस्तान में घर घर गली गली महफिल महफिल इस क़दर मशहूर हैं सभी आम – ओ – खास उनको लोक गीत ही समझकर गाते सुनते हैं लट्ठे दी चादर , ईक मेरी अख कासनी, जुगनी, म्धानियाँ हाय ओह … आदि  जैसे गीत हमारी संस्कृति का हिस्सा  ही नहीं बल्कि पंजाबी को द्निया में अहम स्थान दिलाने के श्रेय के भी अधिकारी है शिव पंजाब का विद्यापति है।

‘इक कुड़ी जिहदा नाम मोहब्बत गुम है’ उनकी शाहकार रचना  में भावनाओं का उभार, करुणा, जुदाई और प्रेमी के दर्द का बखूबी चित्रण है।

शिव कुमार बटालवी के गीतों में ‘बिरह की पीड़ा’ इस कदर थी कि उस दौर की प्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम ने उन्हें ‘बिरह का सुल्तान’ नाम दे दिया। शिव कुमार बटालवी यानी पंजाब का वह शायर जिसके गीत हिंदी में न आकर भी वह बहुत लोकप्रिय हो गया। उसने जो गीत अपनी गुम हुई महबूबा के लिए बतौर इश्तहार लिखा था वो जब फ़िल्मों तक पहुंचा तो मानो हर कोई उसकी महबूबा को ढूंढ़ते हुए गा रहा था

वे 1967 में वे साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले सबसे कम उम्र के साहित्यकार बन गये। साहित्य अकादमी (भारत की साहित्य अकादमी) ने यह सम्मान पूरण भगत की प्राचीन कथा पर आधारित उनके महाकाव्य नाटिका ‘लूणा’ (1965) के लिए दिया, जिसे आधुनिक पंजाबी साहित्य की एक महान कृति माना जाता है और जिसने आधुनिक पंजाबी किस्सा गोई की एक नई शैली की स्थापना की।

        शिव कुमार का जन्म 23 जुलाई 1936 को गांव बड़ा पिंड लोहटिया, शकरगढ़ तहसील (अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में) राजस्व विभाग के ग्राम तहसीलदार पंडित कृष्ण गोपाल और गृहिणी शांति देवी के घर में हुआ। भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार गुरदासपुर जिले के बटाला चला आया, जहां उनके पिता ने पटवारी के रूप में अपना काम जारी रखा और बाल शिव ने प्राथमिक शिक्षा पाई। लाहौर में पंजाबी भाषा की क़िताबें छापने वाले प्रकाशक ‘सुचेत क़िताब घर’ ने 1992 में शिव कुमार बटालवी की चुनिंदा शायरी की एक क़िताब ‘सरींह दे फूल’ छापी.

5 फ़रवरी 1967 को उनका विवाह गुरदासपुर जिले के किरी मांग्याल की ब्राह्मण कन्या अरुणा से हुआ  और बाद में दंपती को दो बच्चे मेहरबां (1968) और पूजा (1969) हुए। 1968 में चंडीगढ़ चले गये, जहां वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जन संपर्क अधिकरी बने, वहीं अरुणा बटालवी पुंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के पुस्तकालयमें कार्यरत रहीं। आज शिव कुमार बटालवी का परिवार केनेडा में रहता है।

ग्रामीण क्षेत्रों मे रहने वाले किसानों ओर बाकी लोगों के संपर्क में आए ओर उन्हीं की बातें अपने लेखन में ढाली उनको जानने वाले लोग उनकी जीवन शैली और दिनचर्या के बारे में बताते हैं के वो राँझे की सी जिंदगी जीते थे वह ऐसे कवि थे जो कि अपनी रचना को स्वयं लयबद्ध करते थे।

        बटालवी की नज्मों को सबसे पहले नुसरत फतेह अली खान ने अपनी आवाज दी. नुसरत ने उनकी कविता ‘मायें नी मायें मेरे गीतां दे नैणां विच’ को गाया था. इसके बाद तो जगजीत सिंह – चित्रा सिंह, रबी शेरगिल, हंस राज हंस, दीदार सिंह परदेसी और सुरिंदर कौर जैसे कई गायकों ने बटालवी की कविताएं गाईं. उस शायर के लिखे हुए गीत – अज्ज दिन चढ्या, इक कुड़ी जिद्दा नां मुहब्बत, मधानियां, लट्ठे दी चादर, अक्ख काशनी आदि आज भी न केवल लोगों की जुबां पर हैं बल्कि बॉलीवुड भी इन्हें समय समय पर अपनी फिल्मों को हिट करने के लिए यूज़ करता आ रहा है. नुसरत फतेह अली, महेंद्र कपूर, जगजीत सिंह, नेहा भसीन, गुरुदास मान, आबिदा, हंस राज हंस….

     “असां ते जोबन रुत्ते मरना…” यानी “मुझे यौवन में मरना है, क्यूंकि जो यौवन में मरता है वो फूल या तारा बनता है, यौवन में तो कोई किस्मत वाला ही मरता है” कहने वाले शायर की ख़्वाहिश ऊपर वाले ने पूरी भी कर दी. मात्र छत्तीस वर्ष की उम्र में शराब, सिगरेट और टूटे हुए दिल के चलते 7 मई 1973 को वो चल बसे. लेकिन, जाने से पहले शिव ‘लूणा’ जैसा महाकाव्य लिख गये, जिसके लिए उन्हें सबसे कम उम्र में साहित्य अकादमी का पुरूस्कार दिया गया. मात्र इकतीस वर्ष की उम्र में. ‘लूणा’ को पंजाबी साहित्य में ‘मास्टरपीस’ का दर्ज़ा प्राप्त है और जगह जगह इसका नाट्य-मंचन होता आया है.

शिव को राजनीतिक चुनोतियों का भी सामना करना पड़ा  उन्होने पंजाबी ओर हिन्दी को हिन्दू – सिक्ख में बँटते भी देखा ओर इस बात का पुरजोर विरोध भी किया, अपनी मातृभाषा को इस तरह बँटते देखना असहनीय था।  लोगों के दोहरे व्यवहार और नकलीपन की वजह से उन्होंने कवि सम्मेलनों में जाना बंद कर दिया था. एक मित्र के बार-बार आग्रह करने पर वे 1970 में बम्बई के एक कवि सम्मलेन में शामिल हुए थे. मंच पर पहुँचने के बाद जब उन्होंने बोला तो पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया. उन्होंने बोला कि आज हर व्यक्ति खुद को कवि समझने लगा है, गली में बैठा कोई भी आदमी कवितायें लिख रहा है. इतना बोलने के बाद उन्होंने अपनी सबसे प्रसिद्ध रचना ‘इक कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत है, गुम है’ सुनाई. इस पूरे पाठ के दौरान हॉल में सन्नाटा बना रहा. सच कहा जाए तो शिव कुमार कभी दुःख से बाहर निकल ही नहीं पाए. उन्हें हर समय कुछ न कुछ काटता ही रहा.

एक साक्षात्कार के दौरान शिव ने कहा आदमी, जो है, वो एक धीमी मौत मर रहा है. और ऐसा हर इंटेलेक्चुअल के साथ हो रहा है, होगा.”

।। गुरु।।

अधिवक्ता भावना नागदा

गुरु वहीं जो आपको जीना सिखा दे।
और आपकी आपसे पहचान करा दे।

कविता

।। गुरु।।

गुरु वही जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है ।
हर बुराई को दूर करता है नयी राह दिखाता है ।
जीवन के घोर अंधेरो मे प्रकाश बन कर आता है।
गुरु वहीं जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है।
अज्ञान से महान ज्ञानी बनाए नई ऊर्जा और नया जीवन दे।
नाम बढें जग मे यही कामना करता है हृदय से।
गुरु वहीं जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है।
हीरे की तरह तराश दे मन मे एक विश्वास जगादे।
आपकी आप से पहचान कराये और जीना सिखा दे।
गुरु वहीं जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है।
सच और झूठ से साकार करा दे।
हमेशा दिखाए सच्चा मार्ग वो एक अच्छा इंसान बना दे।
गुरु वहीं जो अपने शिष्य को प्रकाश देता है।
मुश्किलो से लड़कर आगे बढ़ जाओ वो इतना समझदार बना दे
बताये जीत जाना ही सब कुछ नहीं हारक जीत जाने का हुनर सिखा दे।
गुरु वहीं जो आपको जीना सिखा दे।
और आपकी आपसे पहचान करा दे।

: अधिवक्ता भावना नागदा
(अपने दादा,दादी मां -पिता गुरु को समर्पित)

स्वस्थ्य संबंधी कुछ शर्तो के साथ जगन्नाथ रथ यात्रा होगी

पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ रथयात्रा की इजाजत दी. मंदिर प्रबंधन समिति, राज्य सरकार और केंद्र सरकार आपस में तालमेल कर रथयात्रा का आयोजन करवाएंगे. कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का पालन करते हुए ऐसा किया जाएगा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पुरी में कोरोना के केसों की संख्‍या में बढ़ोतरी हो तो राज्‍य सरकार के पास रथ यात्रा रोकने की आजादी होगी. इससे पहले कॉलरा और प्लेग के दौरान भी रथ यात्रा सीमित नियमों और श्रद्धालुओं के बीच हुई थी. चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट केवल पुरी में यात्रा के बारे में विचार कर रहा है और ओडिशा में कहीं अन्‍य जगह पर नहीं. 

नयी दिल्ली(ब्यूरो) – 22 जून:

सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा पर अपने पिछले आदेश में लगाई गई रोक को हटा लिया है। यानी कल (23 जून 2020 को) पुरी में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक व ऐतिहासिक रथ यात्रा निकलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए मंदिर कमिटी, राज्य व केंद्र सरकार को समन्वय बना कर करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज (22 जून, 2020) ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा पर रोक संबंधी आदेश में संशोधन करने के अनुरोध पर सुनवाई की। केंद्र की ओर से मामले का विशेष उल्लेख सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया। उन्होंने यहाँ कुछ प्रतिबंधों के साथ रथयात्रा की अनुमित देने का अनुरोध किया।

जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह रथयात्रा सदियों पुरानी है और इसे रोकना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कोर्ट के समक्ष इस मामले में कुछ शर्तों और हिदायतों के साथ पूर्व के आदेश में संशोधन का आग्रह किया।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामले का उल्लेख करते हुए सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “यह कई करोड़ लोगों की आस्था का मामला है। अगर भगवान जगन्नाथ को कल बाहर नहीं लाया गया तो परंपरा के मुताबिक उन्हें अगले 12 साल तक बाहर नहीं निकाला जा सकता है।” इस पीठ में दोपहर बाद मुख्य न्यायधीश भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ गए।

सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस रथयात्रा में कवल उन लोगों का चयन होगा, जिनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया हो और वे भगवान जगन्नाथ मंदिर में सेवायत के रूप में काम कर रहे हों। उन्होंने बताया कि भीड़ को रोकने के लिए राज्य सरकार कर्फ्यू लगा सकती है। हालातों को देखते हुए कदम उठाए जा सकते हैं और जन भागीदारी के बिना रथ यात्रा आयोजित हो सकती है।

वहीं, ओडिशा सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी केंद्र की दलील का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर याचिकाकर्ता पूरे एहतियात के साथ रथयात्रा आयोजित करते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। जिसके बाद जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वह सभी मामलों की सुनवाई के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श लेकर आदेश में संशोधन के मामले पर विचार करेंगे।

इसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया नागपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मामले पर सुनवाई के लिए जुड़े। 18 जून के आदेश के मामले में संशोधन की माँग वाले मामले की अध्यक्षता इसके बाद CJI ने ही की।

गौरतलब है कि इससे पहले 18 जून को कोरोना वायरस की महामारी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 23 जून को पुरी (ओडिशा) के जगन्नाथ मंदिर में होने वाली वार्षिक रथ यात्रा पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर हमने इस साल रथयात्रा की इजाजत दे दी तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।

इसके बाद पुरी के राजा गजपति दिब्यसिंह ने शनिवार (जून 20, 2020) को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिख कर रथ यात्रा को अनुमति देने के लिए अपने आदेश को संशोधित करने के लिए तत्काल सुप्रीम कोर्ट का रूख करने की अपील की थी। वहीं भाजपा ने भी दिब्यसिंह देब के प्रस्ताव के अनुसार कदम उठाने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार को पुरी शंकराचार्य से भी चर्चा करनी चाहिए।

यहाँ बता दें कि भुवनेश्वर के ओडिशा विकास परिषद एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर कर इस मामले को उठाया था। उन्होंने अपनी दायर में कहा ता कि रथयात्रा से कोरोना फैलने का खतरा हो सकता है। इसमें कहा गया था कि अगर लोगों की सेहत को ध्यान में रखकर कोर्ट दीपावली पर पटाखे जलाने पर रोक लगा सकता है तो फिर रथयात्रा पर रोक क्यों नहीं लगाई जा सकती?

कोरोना योद्धाओं पर विशेष

demokraticfront॰com कोरोना योद्धाओं पर अपनी विशेष शृंखला ले कर आ रहा है आज मिलें रोटरी अस्पताल में एमडी मेडिसिन के तौर कार्य करने वाले डॉक्टर अभिषेक मित्तल से।

हमारे करोना योद्धा बहुत ही बहादुरी से करोन से लड़ रहे हैं इसी पीछे लोग अपने परिवार से भी नहीं मिल पा रहे तो आज हम बात करते हैं रोटरी अस्पताल में एमडी मेडिसिन के तौर कार्य करने वाले डॉक्टर अभिषेक मित्तल की अपनी जिम्मेदारी को निभाने के कारण ही 1 माह से अपनी जुड़वा बेटियों से नहीं मिल पाए हैं जब हमने डॉक्टर से बात की तो उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी महिला रोग विशेषज्ञ हैं जो कि अपनी बेटियों की देखभाल अपनी नानी के घर पर कर रही है।

डॉ॰ मित्तल के अनुसार जब से कोरोना वाइरस ने दस्तक दी है तभी से बड़े हस्पताल कोरोना से जंग लड़ रहे हैं, इनके हस्पताल ने लोगों कि परेशानियाँ देखते हुए OPD चालू रखी और सभी टेस्ट x-ray इत्यादि कि सुविधाएं जारी रखी है। पिछले एक महीने से वह मरीजों कि आमद को देखते हुए हस्पताल ही में हैं। हसपटल प्रबंधन से जब बात हुई तो पता लगा कि डॉ मित्तल एक मास से स्वेच्छा से घर नहीं गए हैं। उन्होने अपनी नवजात बेटियों जो कि अब ए मास कि होने वालीन हैं उन्हे देखा नहीं है। इसी के साथ प्रबंधन समिति के सदस्य ने यह भी बताया कि हस्पताल के सभी कार्य no profit – no loss पर आधारित हैं।

यह तो बात हुई डॉ॰ मित्तल कि ऐसे ही कई कोरोना योद्धा अपनि अपनी समरभूमि में डटे होंगे। demokraticfront॰com परिवार उन सभी जाने अंजाने शूरवीरों को नमस्कार करता है।

मुझे भरोसा है, मैंने आत्मसमर्पण कर दिया है : इरफान खान

मशहूर अभिनेता इरफान खान जिन्होंने कई अंतरार्ष्ट्रीय और भारतीय फिल्मों में अपनी भूमिकाओं से लाखों प्रशंसकों के दिल जीते, वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। मुंबई के कोकिला बेन हॉस्पिटल में इरफान ने बुधवार सुबह आखिर सांस ली। इसके बाद वर्सोवा स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इस दौरान उनकी पत्नी और बेटे वहां मौजूद थे। कोरोना लॉकडाउन की वजह से उनके परिवार के 20 लोग ही उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हो सके।   

इरफान को अंतिम विदाई देने के लिए कई सेलेब्स आना चाहते थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से ज्यादा लोग नहीं जा पाए। बता दें कि इरफान के निधन की खबर सुनने के बाद इरफान के करीबी दोस्त और डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया हॉस्पिटल पहुंचे थे। तिग्मांशु और इरफान ने कई फिल्मों में साथ काम किया है। तिग्मांशु ने इरफान की फिल्म पान सिंह तोमर का निर्देशन किया था, जिसके लिए इरफान को बेस्ट एक्टर के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।

अभिनेता के निधन की पुष्टि वाले बयान में कहा गया है, मुझे भरोसा है, मैंने आत्मसमर्पण कर दिया है’, ये वे शब्द थे, जिन्हें इरफान ने अपने दिल से व्यक्त किए थे। ऐसा उन्होंने 2018 में कैंसर से अपनी लड़ाई की जानकारी देते समय लिखा था।” आगे कहा गया है, “मूक भावों को अपनी आंखों से व्यक्त करने की क्षमता रखने वाले अभिनेता की आंखों की गहराई स्क्रीन पर उनके यादगार कामों के साथ हमेशा याद की जाएगी। यह दुखद है कि आज हमें उनके निधन की खबर देनी पड़ रही है। इरफान एक मजबूत आत्मा थे, ऐसा व्यक्ति जो अंत तक लड़ता रहा और जो भी उसके करीब आया, उसे वह हमेशा प्रेरित करता रहा। साल 2०18 में दुर्लभ किस्म का कैंसर शरीर में पनपने का पता चलने के साथ ही उन्होंने जिंदगी के लिए कई लड़ाइयां लड़ीं। वह अपने प्यार और अपने परिवार से पूरे समय घिरे रहे, और उनकी उन्होंने हमेशा बहुत परवाह की। अब वह स्वर्ग में रहने के लिए चले गए हैं और अपने पीछे वास्तव में खुद की एक विरासत छोड़ गए हैं। हम सभी प्रार्थना करते हैं और आशा करते हैं कि वह शांति से रहें। इरफान के शब्दों में- ‘जैसे कि मैं पहली बार जीवन चख रहा था, जो कि इसका जादुई पक्ष है।”’

बता दें कि मंगलवार को इरफान को कोलोन संक्रमण के साथ मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि बुधवार के शुरुआती घंटों में उनके प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में उड़ाई गई अफवाहों से दूरी बना ली थी, लेकिन बाद में इरफान के निधन की पुष्टि हुई। इरफान खान के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए फिल्म निमार्ता शूजित सरकार ने बुधवार सुबह ट्वीट किया, “मेरे प्यारे दोस्त इरफान। आपने लड़ाई लड़ी और लड़ते रहे। मैं हमेशा आप पर गर्व करूंगा … हम आपसे मिलेंगे … सुतपा और बाबिल के प्रति संवेदना … सुतपा आपने भी बहुत संघर्ष किया और इस लड़ाई में हर संभव मदद की। ओम शांति। इरफान खान को सलाम। शूजित सरकार ने साल 2015 की अपनी फिल्म ‘पीकू’ में इरफान को निर्देशित किया था, जिसमें दीपिका पादुकोण और अमिताभ बच्चन भी थे। अभिनेता तब से बीमार हैं, जब उन्हें कुछ समय पहले न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का पता चला था और तब से ही वे चिकित्सा निगरानी में थे। वे इलाज के लिए विदेश भी गए थे।

इरफान खान आखिरी बार फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ में देखे गए थे। उनकी यह आखिरी रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म कोविड-19 का फैलाव रोकने के लिए लॉकडाउन लागू किए जाने से ठीक एक दिन पहले ही सिनेमा हॉल में आई थी। 

पत्नी के लिए दोबारा जीना चाहते थे इरफान खान…

बता दें कि इरफान खान ने कैंसर से लंबी जंग लड़ी है। हालांकि तबीयत ठीक होने के बाद इरफान ने फिल्म अंग्रेजी मीडियम की। इस फिल्म के रिलीज के दौरान उन्होंने एक इंटरव्यू में बीमारी से चल रही अपनी जंग को लेकर बात की थी।

इरफान ने कहा था, मेरे लिए ये जो दौर था वो रोलर कोस्टर राइड जैसा था। हम थोड़ा रोए, लेकिन बहुत हंसे भी। मुझे बहुत बेचैनी होती थी, लेकिन मैंने उसे  बाद में कंट्रोल कर लिया था।

उन्होंने कहा था, हालांकि इस बीच जो सबसे अच्छी बात हुई वो ये कि मैं अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय रहा। मैंने उन्हें बढ़ता देखा। अपनी पत्नी सुतापा को लेकर तो मैं क्या ही कहूं। वह 24 घंटे मेरे साथ रहती हैं। हमेशा मेरा ध्यान रखतीं। अगर मुझे जीने का मौका मिला तो मैं उसके लिए जीना चाहूंगा। मैं अगर अभी तक हूं तो उसकी बड़ी वजह मेरी पत्नी है।