अनियमितताओं के चलते पेटीएम पर 1 करोड़ और वेस्टर्न यूनियन पर 27.78 लाख का जुर्माना

भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। … इसके अलावा आरबीआई ने वेस्टर्न यूनियन फाइनेंशियल सर्विसेज पर 27.78 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मनी ट्रांसफर सर्विस स्कीम (एमटीएसएस) के निर्देशों का पालन न करने पर ये जुर्माना लगाया गया है।

दिल्ली/चंडीगढ़ :

देश के अग्रणी पेंमेंट्स बैंकों में से एक पेटीआयी एम पेमेंट्स बैंक को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने नियमों के उल्लंघन के लिए पेटीएम पेमेंट्स बैंक लि. यानी पीपीबीएल पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।  पेमेंट एंड सेटलमेंट की धारा 6(2) के उल्लंघन के चलते यह जुर्माना लगाया गया है.

इसके अलावा आरबीआई ने वेस्टर्न यूनियन फाइनेंशियल सर्विसेज पर 27.78 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मनी ट्रांसफर सर्विस स्कीम (एमटीएसएस) के निर्देशों का पालन न करने पर ये जुर्माना लगाया गया है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक के ऑथराइजेशन के फाइनल सर्टिफिकेट जारी करने के आवेदन की जांच करने पर, आरबीआई ने पाया कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक ने ऐसी जानकारी दी थी, जो तथ्यात्मक स्थिति को नहीं दर्शाती थी। केंद्रीय बैंक ने कहा, “क्योंकि यह पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट की धारा 26 (2) का उल्लंघन था, पेटीएम पेमेंट्स बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था।”

व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान मिले लिखित जवाबों और मौखिक जानकारियों की समीक्षा करने के बाद,समीक्षा के बाद आरबीआई ने आरोपों को सही पाया। इसी के बाद पीपीबीएल पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की गई।

मुस्लिम कट्टरपंथियों ने उस्मानाबाद में किया प्रदर्शन, रोकने गए पुलिसकर्मियों को किया घायल

पुलिस ने बुधवार को बताया कि यह घटना विजय चौक इलाके में मंगलवार को रात करीब साढ़े 10 बजे हुई और हिंसक भीड़ को रोकने की कोशिश के दौरान चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। उस्मानाबाद शहर पुलिस थाना के निरीक्षक सुरेश बुधवंत ने बताया, ‘भीड़ ने विजय चौक इलाके में एक पोस्टर, एक पुलिस वाहन और एक ऑटो-रिक्शा को क्षतिग्रस्त कर दिया। भीड़ को रोकने की कोशिश करते समय एक अधिकारी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में 43 नामजद और 150 से 170 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

उस्मानाबाद/पुणे/नयी दिल्ली :

कट्टरपंथी मुगल आक्रान्ता औरंगजेब को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की गई थी, जिसमें उसकी आलोचना की गई है। इसके बाद महाराष्ट्र के उस्मानाबाद में लगभग 150 कट्टरपंथियों की अनियंत्रित भीड़ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर गई। इस हंगामे में चार पुलिसकर्मी घायल हो गए।

घटना मंगलवार रात साढ़े 10 बजे विजय चौक इलाके की है। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने एक फेसबुक पोस्ट पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए वाहनों पर पथराव किया और बैनर और होर्डिंग तोड़ डाले।

इस बीच हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में इंस्पेक्टर सुर्वे सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। उस्मानाबाद सिटी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सुरेश बुधवंत ने पीटीआई को बताया, “भीड़ ने विजय चौक इलाके में एक होर्डिंग, एक पुलिस वाहन और एक ऑटो-रिक्शा में तोड़फोड़ की। भीड़ को रोकने की कोशिश में एक अधिकारी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हो गए।”

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 333 (लोक सेवक को गंभीर चोट पहुँचाना), 353 (हमला या लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए आपराधिक बल) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम के तहत 44 लोगों के खिलाफ नामजद और 150 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

उस्मानाबाद के एक स्थानीय न्यूज पोर्टल ‘उस्मानाबाद लाइव‘ के अनुसार, यह सब मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा शुरू किया गया, जब उन लोगों ने नवरात्रि के दौरान चौक पर फहराए गए एक हिंदू धार्मिक ध्वज को हटाकर वहाँ अपने धार्मिक त्योहार के दिन अपना झंडा लगा दिया। इससे दोनों समूहों के बीच तनाव पैदा हो गया, जिसके बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट के बहाने कट्टरपंथियों की भीड़ ने पथराव और तोड़फोड़ किया।

हमने पहले भी बताया था कि कट्टरपंथी इस्लामिस्ट किस तरह से हमले, हत्या, आगजनी और बर्बरता को सही साबित करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। फिर चाहे फेसबुक पोस्ट को लेकर बेंगलुरू में हुआ दंगा हो या फिर बांग्लादेश में हिंदुओं पर टारगेटेड अटैक। हर बार कट्टरपंथी फेसबुक पोस्ट के बहाने अपनी हिंसा को सही ठहराने की कोशिश करते हैं।

राजकोट में 200 महिलाओं ने ‘तलवार रास’ में दिखाया हस्तलाघव

गुजरात के राजकोट में राजपूत महिलाओं ने अपने तलवार बाजी कौशल का शानदार प्रदर्शन कर सबके दिलों को जीत लिया है। दरअसल, राजकोट में पांच दिवसीय तलवार रास कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राजपूत महिलाओं ने न सिर्फ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि अपने तलवार कौशल का प्रदर्शन भी किया। इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक महिला अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर कुछ महिलाओं की पीठ पर चढ़कर तलवार बाजी करती दिख रही है।

राजकोट में चल रहे पांच दिन के कार्यक्रम में ‘तलवार रास’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और तलवार कौशल दिखाया। कार्यक्रम में राजपूती महिलाओं ने आंख में पट्टी बांधकर तलवार से करतबबाजी दिखाई। वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला आंख में पट्टी बांधकर कुछ महिलाओं की पीठ पर चढ़कर तलवार से करतब दिखा रही है।

‘तलवार रास’ में राजपूत महिलाएँ पारंपरिक कपड़े पहनती हैं। तलवार के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक नृत्य करती हैं। राजकोट के शाही परिवार की राजकुमारी कादंबरी देवी ने कहा, “तलवार रास पिछले बारह वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। हर साल एक नया समूह होता है और महिलाएँ पूरे उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में भाग लेती हैं।”

कादंबरी देवी ने आगे कहा, “तलवार एक देवी की तरह है और इसलिए हम शस्त्र पूजा करते हैं।” यह आयोजन राजपूत महिला योद्धाओं के इतिहास को जीवित रखने और यह संदेश देने के लिए है कि आज की महिलाएँ उतनी ही शक्तिशाली हैं जितनी वे सालों पहले थीं।

तलवार रास की लिबरलों ने मुहर्रम से तुलना की

‘तलवार रास’ महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लिबरल को पसंद नहीं आया। उन्होंने इसकी तुलना मुहर्रम से करते हुए इसे ‘संघी आतंकवाद’ तक कह डाला।

विडंबना यह है कि इस कार्यक्रम की आलोचना करने वाले लोगों को विदेशी ‘आत्मरक्षा‘ तकनीकों को बढ़ावा देने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पारंपरिक भारतीय कला और संस्कृति को देखकर वे भयभीत हो जाते हैं। बता दें कि गुजरात की लोक परंपराओं के विद्वान डॉ. उत्पल देसाई के अनुसार, तलवार रास राजपूत युद्ध नायकों की याद में बनाया गया था, जो भुचर मोरी (18 जुलाई, 1591) के ऐतिहासिक युद्ध में मारे गए थे।

जितिन प्रसाद के पश्चात हरेन्द्र और पंकज मालिक के साथ कई नेता बढ़ा रहे हैं प्रियंका वाड्रा की मुश्किलें

यूपी की सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी कांग्रेस को झटके लगने का सिलसिला जारी है। कई बड़े नेताओं के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब पश्चिमी यूपी के जाट नेता हरेंद्र मलिक व उनके पुत्र पूर्व विधायक पंकज मलिक ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आज शाम अपने आवास पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि दोनों ने कांग्रेस के सभी पदों से अपना त्यागपत्र पार्टी हाईकमान को भेज दिया है। वहीं पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने बताया कि जल्द ही वे नया राजनीतिक निर्णय लेंगे। इससे पहले भी कई नेता कांग्रेस छोड़ सपा का दामन थाम चुके हैं जिनमें उन्नाव की पूर्व सांसद अन्नू टंडन, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी और पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। वहीं कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे जितिन प्रसाद भाजपा में ठिकाना तलाशा तो पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी के कांग्रेस छोडऩे के बाद अगला कदम उठाने का इंतजार है। सूत्रों के अनुसार कॉंग्रेस द्वार महिलाओं के लिए 40% आरक्षण की घोषणा के पश्चात इन्हें टीकेट मिलने के आसार धूमिल हो चले थे इसीलिए पिता पुत्र द्व्य ने यह कदम उठाया। अभी और अधिक चुनाव लड़ने के इच्छुक इधर उधर छिटक सकते हैं।

लखनऊ(ब्यूरो) :

उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी कांग्रेस को झटके लगने का सिलसिला जारी है। कई बड़े नेताओं के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट नेता हरेंद्र मलिक व उनके पुत्र पूर्व विधायक पंकज मलिक ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पिता-पुत्र के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के संकेत हैं।

मुजफ्फरनगर निवासी हरेंद्र मलिक चार बार विधायक व इंडियन नेशनल लोक दल के राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। वह कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा की सलाहकार समिति के भी सदस्य हैं। वहीं शामली सीट से दो बार विधायक रह चुके पंकज मलिक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ हाल ही में घोषित पार्टी की इलेक्शन स्ट्रैटेजी कमेटी के सदस्य बनाये गए थे। प्रदेश कांग्रेस के नए निजाम में पिता-पुत्र असहज महसूस कर रहे थे और उनके पार्टी छोड़ने की चर्चा इधर कुछ अरसे से जोरशोर से थी।

सूत्रों के अनुसार हरेंद्र मलिक ने दो दिन पहले लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से भेंट की थी। हरेंद्र मलिक ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही पिता-पुत्र सपा की साइकिल पर सवार होंगे। कांग्रेस छोड़ सपा में जाने के पीछे स्थानीय सियासी समीकरण बताये जा रहे हैं। इस बाबत पूछने पर हरेंद्र मलिक ने कहा कि राजनीतिक व्यक्ति सियासी वजहों से फैसले लेते हैं। उनके निर्णय को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

उधर, मेरठ के पूर्व सांसद हाजी शाहिद अखलाक जल्द ही अपने अगले सियासी कदम के संबंध में खुलासा कर सकते हैं। उनकी फेसबुक पोस्ट के बाद शहर की सियासत गर्म है। कहा जा रहा है कि शाहिद अखलाक जल्द ही असदुद्दीन औवेसी की पार्टी में शामिल हो सकते हैं। लेकिन आज उन्होंने लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की। इससे उनके सपा में जाने की चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, हाल ही में मुजफ्फरनगर के पूर्व सांसद कादिर राणा ने भी समाजवादी पार्टी ज्वॉइन की है। वहीं अब अंदाजा लगाया जा रहा है कि शाहिद अखलाख भी जल्द ही सपा में शामिल हो सकते हैं। 

पूर्व सांसद शाहिद अखलाक ने कहा कि अखिलेश यादव से मुलाकात अच्छी रही। शाहिद अखलाक साल 2004 में बसपा के टिकट पर मेरठ के सांसद चुने गए थे। वह मेरठ के मेयर भी रह चुके हैं। वहीं साल 2009 में सेक्युलर एकता पार्टी बनाकर उन्होंने मेरठ से चुनाव लड़ा था। साल 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। अब उनके सपा में शामिल होने को लेकर पश्चिमी यूपी की मुस्लिम सियासत में हलचल तेज हो गई है।

नाबालिग द्वारा झूठा अपहरण और बलात्कार का मुकदमा दर्ज करा सरकार से मुआवजे के रुप मे प्राप्त की गई धनराशि वापस करने का आदेश

एक नाबालिग लड़की, जिसने दो पुरुषों द्वारा बलात्कार की शिकायत की थी, के अदालत में मुकर जाने के बाद, एक विशेष अदालत ने हाल के एक आदेश में उसे राज्य सरकार से प्राप्त किसी भी मौद्रिक मुआवजे को वापस करने का निर्देश दिया, इसे “एक बेईमान व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक धन का दुरुपयोग” कहा। “।

मुंबई/जयपुर :

मुंबई की एक अदालत ने एक नाबालिग पिडिता द्वारा दो अभियुक्तों के खिलाफ झूठी अपहरण और बलात्कार की एफ आई आर दर्ज करवा कर सरकार से मुआवजे के रुप मे प्राप्त धनराशि को लौटाने का आदेश दिया है। न्यायधीश बघेल ने कहा कि अगर उसे इस तरह की सहायता मिली है तो इस अदालत का दायित्व है कि वह सरकार को इस तथ्य से अवगत कराएं कि प्राथमिकी स्वयं शिकायतकर्ता द्वारा गलत तथ्यों पर गलत तरीके से दर्ज की गई है जैसा कि उसकी गवाही से पता चलता है

न्यायाधीश बघेले ने पीड़िता द्वारा महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुआवजे के रूप में प्राप्त की गई धनराशि को जप्त कर लौटाने का आदेश दिया है तथा आरोपित आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया

नाबालिग बालिका ने 4 मई 2016 को एक एफ आई आर दर्ज कराई की ऑटो रिक्शा में जाते समय दो युवकों ने उसका अपहरण किया और उसके साथ बलात्कार किया जिसे लेकर पुलिस ने आईपीसी की धारा 363 366 376 376d पोक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान किया तथा शिकायतकर्ता पीड़िता के 164 सीआरपीसी के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज करवाएं तत्पश्चात बालिका न्यायालय के सामने अपने पूर्व में किए गए कथन से मुकर गई और कहा कि इस तरह की मेरे साथ कोई घटना नहीं हुई जिसे लेकर न्यायालय ने यह आदेश दिया है

हालांकि अभियोजन पक्ष ने पीड़िता बालिका शिकायतकर्ता के खिलाफ झूठी गवाही देने के लिए न्यायालय को कार्रवाई करने का अनुरोध किया जिसे न्यायालय ने पीड़िता बालिका शिकायतकर्ता की उम्र को ध्यान में रखते हुए अभियोजन पक्ष का अनुरोध खारिज कर दिया।

Panchkula Police

Police Files, Panchkula – 19 October

पंचकूला पुलिस नें अवैध हुक्का बार के खिलाफ कडा शिकंजा कसतें हुए 10 हुक्का सहित आरोपी को किया काबू ।

                     पुलिस प्रवक्ता नें जानकारी देतें हुए बताया कि प्रबंधक पुलिस थाना चण्डीमन्दिर निरिक्षक अरविन्द कुमार व उसकी टीम नें अवैध हुक्काबार के खिलाफ कडी कार्यवाही करते हुए अवैध हुक्काबार के मामलें में आऱोपी को गिरफ्तार किया गया । गिरफ्तार कियें गयें आरोपी की पहचान भवर सिह पुत्र स्व. रामकुमार वासी गाँव ख़टौली जिला पंचकूला के रुप में हुई ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस थाना चण्डीमन्दिर की त्यौहारो को लेकर अपराधो की रोकथाम हेतु गस्त पडताल करतें हुए सैक्टर 22 पंचकूला में मौजूद थी । तभी मुखबर खास नें सूचना दी कि रेस्टोरेंट हिंटर लैड नजदीक गांव गुमथला मे आम जनता को हुक्का प्रतिबंध निकोटिन पदार्थ तम्बाकु पिला रहे है । जो सूचना पाकर पुलिस की टीम नें सरकारी के रेस्टोरेंट हिंटर लैड नजदीक गांव गुमथला पहुंचा । जहा अन्दर जाकर देखा कि कई मेजों पर हुक्का परोसा जा रहा है । रेस्टोरेंट मे भंवर सिंह पुत्र स्व श्री रामकुमार हाजिर मिला । जो टेबलों पर बैठे व्यक्ति पुलिस को देखकर उठ कर चले गये । टेबल पर रखे हुक्के की चिलम को खाली करवाया गया तथा साथ बनी रसोई में एक पेटी प्लास्टिक मे 10 डिब्बे व 5 डिब्बियां प्लास्टिक अलग- अलग प्रकार व 4 डिब्बी गत्ता फ्लेवर की बरामद हुई । जो टेबल पर रखे 10 हुक्का वा बरामदा पेटी प्लास्टिक को उसमें रखे डिब्बों तथा डिब्बियों को बतौर वजह सबुत फर्द द्वारा कब्जा पुलिस में लिया गया । आरोपी के खिलाफ पुलिस थाना चण्डीमन्दिर में कोटपा अधिनियम के तहत मामला दर्ज करके आऱोपी को गिरफ्तार करकें कडी कार्यवाही की गई ।

यकीनन ‘वीर’ ही थे सावरकर

राजनाथ सिंह द्वारा दिया गया बयान कि वीर सावरकर ने मोहनदास करमचंद गांधी के कहने पर माफी मांगी थी अथवा माफी के लिए अंग्रेज़ हुकूमत को पत्र लिखा था। इस बात ने देश भर में अनर्गल राजनैतिक बहस छिड़ गईहाई।टीवी चैनल हों या प्रबुद्ध समाचार पत्र सभी इस बहस को दिखा एसएनए अथवा पढ़ा रहे हैं। जब हम उस काल खंड को दहते हैं तो हैरान होते हैं कि जहां सावरकर को दिन में 10 किलो तेल निकालना होता था और उन्हें यह त पता नहीं था कि दो कोठरी छोड़ कर उनका भाई कैद काट रहा है वह पत्र लिख पाये। कोल्हू में बैल कि जगह जुतना और फिर विमर्श पत्र लिखना क्या ही अचंभा है। अब कॉंग्रेस सावरकर को लेकर इतनी दुविधाग्रस्त क्यों है? रत्नगिरी में रहते हुए सावरर दलित बस्तियों में जाने का, सामाजिक कार्यों के साथ साथ धार्मिक कार्यों में भी दलितों के भाग लेने का और सवर्ण एवं दलित दोनों के लिए पतितपावन मंदिर की स्थापना का निश्चय लिया था। जिससे सभी एक स्थान पर साथ साथ पूजा कर सके और दोनों के मध्य दूरियों को दूर किया जा सके। यह भी एक कारण हैं कि कांग्रेस सावरकर की विरोधी बन कर खड़ी हो रही है, वरना 90 के दशक तक तो ऐसा देखने में नहीं आता था। उससे पहले भारत सरकार जब की कांग्रेस सत्तासीन थी ने सावरकर पर डाक टिकट भी जारी किया था। सत्ता के लाले पड़ने पर कॉंग्रेस हमेशा से झूठ सच की राजनीति करती आई है, इस मामले में भी यही हुआ।

राज वशिष्ठ, चंडीगढ़:

मेरे मन में प्रश्न उठता है कि, क्या मोहनदास गांधी कभी पर्यटन के लिए भी कालापानी गए थे? यदि नहीं गए थे तो वीर सावरकर ने गांधी से विमर्श कब किया? साथ ही एक बात और उठती है कि वीर सावरकर को क्या ही अनुमति थी कि वह पत्र व्यवहार कर सकें? क्या हमारी अथवा नयी पीढ़ी को पता भी है कि सावरकर को काला पानी कि सज़ा क्यों हुई थी? क्या उनके उस अपराध के पश्चात भी अंग्रेज़ सरकार उन्हें कागज कलाम पदाने कि हिम्मत जुटा पाती?

इन प्रश्नों के उत्तर खोजना कोई पुआल में सुई ढूँढने जैसा नहीं है। बस थोड़े से प्रयास की आवश्यकता है।

सबसे पहले पहली बात की सावरकर को सज़ा क्यों हुई?

सावरकर को सज़ा देने की पृष्ठ भूमि अंग्रेज़ सरकार बहुत पहले ही से तय कर चुकी थी। सावरकर की 1901 में प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंध का गौरव प्राप्त करती अत्यंत विचारोतेजक पुस्तक ‘1857 का सावतंत्र्य समर’। इस पुस्तक के प्रकाशन की संभावना मात्र से अंग्रेज़ हुकूमत थर्रा गयी थी। फिर भी इस प्स्त्का का गुप्त प्रकाशन एम वितरण हुआ। अंग्रेजों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस पुस्तक को नष्ट करने में कोई कोर कसर न छोड़ी।

वीर सावरकर को लंदन में रहते हुए दो हत्याओं का आरोपी बनाया गया। पहली, 1 जुलाई 1909 को मदन लाल ढींगरा द्वारा कर्नल विलियम हट वायली की हत्या जिसका अंग्रेजों ने सूत्रधार वीर दामोदर सावरकर को ठहराया। दूसरी 1910 में हुई नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए नासिक षडयंत्र काण्ड के अंतर्गत इन्हें साल 1910 में इंग्लैंड में गिरफ्तार किया गया। 8 अप्रैल,1911 को काला पानी की सजा सुनाई गई और सैल्यूलर जेल (काला पानी) पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया। मुक़द्दमा अंग्रेजों द्वारा अङ्ग्रेज़ी अदालत में चलाया गया और बाकी प्रबुद्ध विचाराओं की भांति इन्हे भी काले पानी की सज़ा सुना दी गयी। इन्हें 25 – 25 वर्ष की दो कारावासों का दंड दिया गया था जिसका अर्थ है की वह अपने आगामी जीवन के 50 वर्ष काला पानी में कोल्हू अथवा अंग्रेज़ मुलाजिमों की बग्घी में जुते रहते।

अब दूसरे प्रश्न पर, क्या मोहन दस करमचंद गांधी कभी अंडेमान राजनैतिक पर्यटन के लिए भी गए थे, तो उत्तर है ‘नहीं’। फिर गांधी – सावरकर कहाँ मिले?

गांधी सावरकर पहली बार इंग्लैंड में मिले थे, अक्तूबर 1906 में मिले थे। यह एक बहुत ही संक्षिप्त सी मुलाक़ात थी। दूसरी मुलाक़ात 24 अक्तूबर 1909 को इंडिया हाउस लंदन में हुई। तब तक वीर सावरर किसी भी आक्षेप को नहीं झेल रहे थे। अब यह प्रश्न कहाँ से उठा की गांधी ने सावरकर को दया याचिका डालने की सलाह कब और कहाँ दी?

इस बाबत व‍िक्रम संपत ने अपनी क‍िताब ‘Echoes from a Forgotten Past, 1883-1924’ में ल‍िखा है क‍ि व‍िनायक दामोदर सावरकर के छोटे भाई नारायण दामोदर सावरकर ने 1920 में एक चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्‍होंने अपने भाई के धुर व‍िरोधी व‍िचारधारा वाले मोहनदास करमचंद गांधी को खत ल‍िखा। छह खतों में से यह पहला खत ल‍िखा गया था 18 जनवरी, 1920 को। इसमें उन्‍होंने सरकारी माफी की योजना के तहत अपने दोनों बड़े भाइयों को जेल से र‍िहा करवाने के संबंध में मदद व सलाह मांगी थी।

नारायण सावरकर ने अपने पत्र में लिखा था कि कल (17 जनवरी) मुझे भारत सरकार द्वारा जानकारी मिली कि सावरकार बंधुओं को उन लोगों में शामिल नहीं किया गया है, जिन्हें रिहा किया जा रहा है। ऐसे में अब साफ हो चुका है कि भारत सरकार उन्हें रिहा नहीं करेगी। अपने पत्र में उन्होंने महात्मा गांधी से सुझाव मांगा था कि ऐसी परिस्थितियों में आगे क्या किया जा सकता है। इस चिट्ठी का जिक्र, कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी के 19वें वॉल्यूम के पेज नंबर 384 पर किया गया है।

नारायण सावरकर की इस चिट्ठी का जवाब महात्मा गांधी ने 25 जनवरी 1920 को दिया था, जिसमें उन्होंने सलाह दी थी कि राहत प्रदान करने की एक याचिका तैयार करें, जिसमें तथ्यों के जरिए साफ करें कि आपके भाई द्वारा किया गया अपराध पूरी तरह से राजनीतिक था। उन्होंने अपने जवाब में यह भी लिखा कि वह अपने तरीके से इस मामले में आगे बढ़ रहे हैं। गांधी द्वारा दिए गए इस जवाब का उल्लेख कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी के 19वें संस्करण में भी देखा जा सकता है।

अंग्रेजों से माफी मांगने का। इस मामले पर गांधी ने सावरकर को ‘चतुर’ बताते हुए कहा था कि ‘उन्होंने (सावरकर ने) स्थिति का लाभ उठाते हुए क्षमादान की मांग की थी, जो उस दौरान देश के अधिकांश क्रांतिकारियों और राजनीतिक कैदियों को मिल भी गई थी। सावरकर जेल के बाहर रहकर देश की आजादी के लिए जो कर सकते थे वो जेल के अंदर रहकर नहीं कर पाते।’

गांधी जी के इस कथन से इतना तो साफ है कि सावरकर अंग्रेजों के सामने झुके नहीं थे, बल्कि आगे की लड़ाई के लिए चतुराई दिखाई थी। खैर, बात करते हैं सावरकर से जुड़े तमाम पहलुओं की जो उनपर राय बनाने से पहले जानना जरूरी है।

यूपी 2022 चुनावों के नतीजे तय हैं, विपक्ष ईवीएम का रोना रोएगा : योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित होने पर नितिन अग्रवाल को मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया कि नितिन अग्रवाल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपके उज्ज्वल कार्यकाल के लिए अनंत मंगलकामनाएं। इसके साथ ही सीएम योगी ने इसे आगामी चुनावों में भाजपा की जीत का संकेत भी बताया। उन्होंने लिखा कि समाजवाद की विरोधी समाजवादी पार्टी के लिए उनका परिवार ही पार्टी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए ‘पूरा प्रदेश’ ही परिवार है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछड़े साढ़े चार साल में प्रदेश में एक भी दंगा नहीं हुआ है क्योंकि हमने पहले ही दिन संदेश दे दिया था कि दंगा करने वालों की सात पीढ़ियां उनकी हरकतों की भरपाई करती रहेंगी।

लखनऊ(ब्यूरो):

उत्तर प्रदेश विधान सभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के लिए सोमवार सुबह करीब 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, विपक्ष और सरकार के बीच संवाद जरूरी है। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर संवाद को बाधित करने का आरोप भी लगाया. सीएम योगी ने आरोप-प्रत्यारोप को लोकंतत्र की परंपरा का हिस्सा बताया।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, विपक्ष की आदत मुझे पता है, चुनाव नतीजों के बाद ये EVM पर दोष देंगे। साथ ही उन्होंने कहा, विधान सभा चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है क्योंकि हमने प्रदेश की 25 करोड़ जनता के लिए काम किया है।

वहीं एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के बागी विधायक नितिन अग्रवाल को उत्तर प्रदेश विधान सभा का उपाध्यक्ष चुन लिए गया. नितिन अग्रवाल को कुल 304 वोट मिले जबकि सपा के नरेंद्र वर्मा को 60 वोट मिले। विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने बताया कि कुल 368 वोट पड़े जिसमें 364 वोट वैध रहे और 4 वोट अवैध रहे।

नितिन अग्रवाल बीजेपी के समर्थन से विधान सभा उपाध्यक्ष बने हैं। इस पर सीएम योगी ने सदन में कहा, हम लोग पिछले साढ़े 4 वर्षों से इसका इंतजार कर रहे थे कि सबसे बड़े विपक्षी दल द्वारा इसके लिए प्रस्ताव आएगा लेकिन कोई सकारात्मक रवैया न होने के कारण आज अनुभवी उपाध्यक्ष चुने गए हैं। नितिन अग्रवाल को हृदय से बधाई देता हूं।

नितिन अग्रवाल के विधान सभा उपाध्यक्ष चुने जाने पर सपा के विरोध पर सीएम योगी ने कहा, ये युवा विरोधी हैं अपने ही लोगों को नहीं बचा पाते हैं। पार्टी के अंदर ही अंतर्विरोध है। उन्होंने नसीहत दी कि परिवारवाद से ऊपर उठकर समाजवादी पार्टी कुछ कार्य करेगी तो ये पार्टी के भी हित में रहेगा।

सेवादार रणजीत सिंह हत्या मामले में डेरमुखी को उम्रक़ैद की सज़ा

पंचकूला की विशेष अदालत में रंजीत सिंह हत्‍याकांड में डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सहित पांच दा‍ेषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जज ने शाम करीब साढ़े चार बजे सजा का एलान किया। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद वकीलों ने मीडिया को इसके बारे में जानकारी दी। रंजीत सिंह के पुत्र जगसीर सिंह ने फैसले को सराहनीय बताया। सीबीआइ ने गुरमीत राम रहीम को फांसी की सजा देने के मांग की थी, लेकिन अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। 

‘पुरनूर’ कोरल, पंचकूला:

सीबीआई की विशेष अदालत ने रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में सोमवार को अपना फैसला सुना दिया है| डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह समेत पांच आरोपियों को लेकर अदालत ने अपना फैसला सुनाया है| रंजीत हत्याकांड में राम रहीम सहित पांचों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है| इसके साथ ही अदालत ने राम रहीम पर 31 लाख रुपये और बाकी आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है|

इससे पहले जज कोर्ट रूम में पहुंचे और दोषियों को भी कोर्ट रूम में बुला लिया गया। इससे पहले सजा को लेकर कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। सीबीआइ के वकील ने गुरमीत राम रहीम को फांसी की सजा सुनाने  की मांग की। कोर्ट रूम के बाहर सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई और भारी संख्‍या में पुलिसकर्मी व अर्द्ध सुरक्षा बलों के जवान तैनात कर दिए गए।

दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने इसका विरोध किया और कहा कि यह रेयर आफ रेयरेस्‍ट मामला नहीं है। पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष सीबीआइ अदालत ने डेरा सच्चा सौदा सिरसा के पूर्व मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या के दोषी डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को उम्रकैद कैद की सजा सुनाई है। साथ ही कृष्ण लाल, अवतार, जसबीर और सबदिल भी उम्रकैद की सजा सुनाई। एक आरोपित इंद्रसेन की ट्रायल के दौरान 8 अक्टूबर 2020 को मौत हो गई थी।

राम रहीम को दो मामलों में पहले से सजा काट रहे हैं

वहीं, इससे पहले गुरमीत राम रहीम को साध्वियों से यौन शोषण के मामले में 20 साल और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है| गुरमीत राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं|

सनद रहे कि, हाल ही में अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सहित कुल पांच लोगों को को दोषी करार दिया था| जिसके बाद अदालत में सजा के फैसले को लेकर सुनवाई की गई थी लेकिन अदालत ने सजा पर फैसला सुनाने की तारीख 18 अक्टूबर मुकर्रर की|

रंजीत सिंह हत्याकांड मामले में सुनाई जा रही हा सज़ा।

बता दें कि कुरुक्षेत्र निवासी रंजीत सिंह की 10 जुलाई 2002 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी|

बीएसएफ़ का दायरा बढ़ा, पंजाब और बंगाल का संघवाद खतरे में

अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सालों से चली आ रही नशे और आतंकवाद की तस्करी रोकने में नाकाम रही पंजाब सरकार को झटका लगा है जब केंद्र ने बीएसएफ़ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाते हुए उसे बार्डर से ले कर 50 किलोमीटर तक के क्षेत्र में जांच छापे मारी और किसी भी बनती कार्यवाई के अधिकार दे दिये हैं। वहीं दूसरी ओर बंगाल सरकार का भी यही हाल है, वहाँ 1971 के बाद से बंगलादेशी घुसपैठिए, रोहङियान मुसलमानों को रोकने और गो तसारी को रोकने में ब्री तरह नाकामयाब रही है। गृह मंत्रालय ने तीन राज्यों में बीएसएफ (BSF) का क्षेत्राधिकार बढ़ाया है। इन राज्यों में पंजाब भी शामिल हैं। हालांकि अब इस मामले पर राज्य में सियासी बवाल मच गया है। जानकारी के मुताबिक पंजाब,बंगाल और असम में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बॉर्डर सीमा क्षेत्र के 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक किए जाने को लेकर 2 राज्यों की सरकारों ने आपत्ति जताई है।

  • गृह मंत्रालय ने तीन सीमावर्ती राज्‍यों में बढ़ाया बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र
  • सीमा के 15 किलोमीटर के बजाय 50 किलोमीटर भीतर तक होगा दखल
  • पंजाब और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने खुलकर किया इस कदम का विरोध
  • मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम और नगालैंड में घटाया गया है BSF का इलाका

राजविरेन्द्र वशिष्ठ, चंडीगढ़/नई दिल्ली :

पश्चिम बंगाल, पंजाब और असम में सीमा सुरक्षा बल (BSF) का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने का विपक्ष ने विरोध किया है। गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, इन तीन राज्‍यों में BSF का क्षेत्र अंतरराष्‍ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर भीतर तक होगा। पहले यह दायरा 15 किलोमीटर था। BSF के अधिकारी पुलिस की तरह ही तलाशी, जब्‍ती और गिरफ्तारी कर सकते हैं। पंजाब और पश्चिम बंगाल की सरकार ने इस कदम को ‘तर्कहीन फैसला’ बताते हुए कहा कि यह ‘संघवाद पर सीधा हमला’ है। अभी यह साफ नहीं कि फैसले से पहले राज्‍य सरकारों को बताया गया था या नहीं। पंजाब और पश्चिम बंगाल सरकार की प्रतिक्रियाओं से तो ऐसा नहीं लगता।

केंद्र के इस फैसले से BSF के कार्यक्षेत्र का दायरा काफी बढ़ गया है। अब BSF 50 किलोमीटर के दायर में गश्ती, सर्च ऑपरेशन, गिरफ्तारी और जब्ती जैसी कार्रवाई कर सकेगा। केंद्र के आदेश के मुताबिक, बल 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाली अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा। इससे पहले BSF को पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में 15 किलोमीटर तक ही कार्रवाई करने का अधिकार था, लेकिन नए आदेश के साथ अब इसे केंद्र या राज्य सरकारों से किसी और अनुमति के बिना 50 किलोमीटर तक कार्रवाई को अधिकृत किया गया है।

हालाँकि, नए आदेश के तहत पूर्वोत्तर भारत के पाँच राज्यों- मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में BSF के अधिकार क्षेत्र में कटौती की गई है। यहाँ पहले इसका अधिकार क्षेत्र 80 किलोमीटर तक था। गुजरात में भी इसके अधिकार क्षेत्र को 80 किलोमीटर से घटाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। राजस्थान में BSF का अधिकार क्षेत्र 50 किलोमीटर ही रहेगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 11 अक्टूबर 2021 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, “मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय राज्यों और जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल पूरे क्षेत्र तथा गुजरात, राजस्थान में पचास किलोमीटर के भीतर का क्षेत्र और पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम की 50 किमी का दायरा बीएसएफ के अधीन होगा।” केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल अधिनियम 1968 (1968 का 47) की धारा 139 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर यह कदम उठाया है।

पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस फैसले को पंजाब के साथ धोखा करार दिया है। उनका कहना है कि इससे आधे से अधिक पंजाब केंद्र सरकार के कंट्रोल में चला गया है। उन्होंने ट्विटर पर कहा है कि मैं भारत सरकार के इस एकतरफा फैसले की कड़ी निंदा करता हूँ। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ लगे 50 किलोमीटर के दायरे को बीएसएफ के कंट्रोल में दे दिया गया है। यह संघवाद पर हमला है। वहीं सुनील जाखड़ ने कहा है कि केंद्र के फैसले से 50,000 वर्ग किमी में फैले पंजाब का 25,000 वर्ग किमी का दायरा सीधे तौर पर केंद्र के कंट्रोल में चला जाएगा। अब पंजाब पुलिस केवल खड़ी रह जाएगी। पंजाब प्रांत के 6 जिले अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़े हुए हैं, पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरण तरण, फ़िरोज़पुर और फाजिल्का। आतंकी हेपेन, ड्रोन और नशीले पदार्थ इन्हीं जिलों से बाई देश में पहुंचाए जाते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्रालय के बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया और केंद्र के इस फैसले का सम्मान करने की अपील की है। उन्होने कहा कि जिस तरह से पंजाब में ड्रग्स की तस्करी और आतंकी खतरा बढ़ा है, अब केंद्र के फैसले से पंजाब सुरक्षित होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि बीएसएफ की बढ़ी हुई उपस्थिति और शक्तियाँ ही हमें मजबूत बनाएँगी। केंद्रीय सशस्त्र बलों को राजनीति में न घसीटें।

वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र के इस फैसले को तर्कहीन निर्णय और संघवाद पर हमला करार दिया है। बंगाल के मुताबिक, इसके जरिए केंद्र अब राज्यों के अंदरूनी मामलों में केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से हस्तक्षेप करने की कोशिश करेगा। पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री और टीएमसी नेता फिरहाद हकीम ने कहा, “केंद्र सरकार देश के संघीय ढाँचे का उल्लंघन कर रही है। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही है।” पश्चिम बंगाल के 8 जिलों पर यह आदेश लागू होगा। यह जिले हैं कूच बिहार, दर्जलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी, मालदा, मूषिर्दाबाद, नादिया, उत्तर 24 परगना। इन्हीं जिलों से गौ तस्करी, बंगलादेशी घुसपैठियों और रोहङियान के स्वागत द्वार हैं।