महाराष्ट्र में 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की अनुशंसा पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यपाल की अनुशंसा पत्र पर मुहर लगा दी है. साल 1980 के बाद महाराष्ट्र में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा है. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मंगलवार को राजनीतिक पार्टियों को चौंकाते हुए, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा वाली एक रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी थी. 

दिल्ली:

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की अनुशंसा पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यपाल की अनुशंसा पत्र पर मुहर लगा दी है. साल 1980 के बाद महाराष्ट्र में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा है. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मंगलवार को राजनीतिक पार्टियों को चौंकाते हुए, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा वाली एक रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी थी.

राजभवन की ओर से घोषणा के अनुसार, ‘महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी इस बात से संतुष्ट हैं कि चूंकि राज्य सरकार को संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता. उन्होंने इस बाबत संविधान के अनुच्छेद 356 के प्रावधानों पर विचार करने के बाद आज एक रिपोर्ट दाखिल की है.’

इससे पहले राजभवन के सूत्रों ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के कयास को खारिज कर दिया था, इसके महज एक घंटे बाद ही यह अनुशंसा की गई है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने अपने मीडिया ब्रीफिंग में बताया था कि राजभवन ने इस तरह की अफवाहों को हवा दी थी.

राज्यपाल का यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब राकांपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था और मंगलवार रात 8.30 बजे तक इस बाबत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया था.

मालूम हो कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी+शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला था, लेकिन मुख्यमंत्री के पद को लेकर दोनों के बीच हुई लड़ाई के चलते सरकार नहीं बन पाई. इसके बाद राज्यपाल कोश्यारी ने नंबर एक पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. इसके बाद राज्यपाल ने बारी-बारी से नंबर दो शिवसेना और नंबर तीन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को सरकार बनाने का मौका दिया, लेकिन ये दोनों भी बहुमत का आंकड़ा जुटाने में असफल रहे हैं. इसके बाद राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा कर दी थी. विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं.

लोकसम्पर्क विभाग में 89 करोड़ रूपये का फर्जीवाड़ा उजागर

  • लोकायुक्त ने अपने आदेशों में सरकार से,विज्ञापनों पर धन खर्चने की पारदर्शी व स्पष्ट निति बनाने की सिफारिश की ।

चंडीगढ:

महालेखाकार (ऑडिट) की जॉंच रिपोर्ट में लोकसम्पर्क विभाग के 89 करोड़ रूपये की वित्तीय अनियमिताएं व फर्जीवाड़ा सामने आया है। लोकायुक्त ने अपनी जांच में लोकसम्पर्क विभाग के विरूद्ध गंभीर टिप्पणी की है।
लोकायुक्त जस्टिस एन0 के0 अग्रवाल ने सरकारी विज्ञापनों पर धन खर्च करने बारे पारदर्शी व स्पष्ट पद्धति तय करने की सरकार को सिफारिश करते हुए तीन माह में रिपोर्ट तलब की है। लोकायुक्त ने अपने 22 अक्तुबर,2019 के आदेश में कहा कि घपले की रिपोर्ट कैग के माध्यम से राज्यपाल को जाने के उपरांत विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत होगी। लोकसम्पर्क विभाग के स्पष्टीकरण से संतुष्ट ना होने की स्थिति में ही सरकार द्वारा उचित कारवाई हो सकती है।
क्या है मामला:- आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने हरियाणा व सबसे आगे हरियाणा के विज्ञापनों में पूंजीनिवेश व रोजगार के दिए आंकड़ो को निराधार बताते हुए लोकायुक्त को दिनांक 26 सितम्बर 2013 को शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि इन विज्ञापनों में दिए गए आंकड़े फर्जी हैं। इन भ्रामक विज्ञापनों पर सार्वजनिक धन का करोड़ों रूपया फूंक कर सीएम अपनी छवि चमका रहे हैं। कपूर ने इनके विरूद्ध आपराधिक केस दर्ज कराने की मांग की थी।
लोकायुक्त जांच में पाया गया:- विज्ञापनों में किए गए पूंजीनिवेश व रोजगार देने के भारी भरकम आंकड़ों बारे लोकसम्पर्क अधिकारी कोई लिखित आधार पेश नहीं कर पाए। सबकुछ जुबानी व तदर्थ आधार पर ही चलता रहा। लोकायुक्त ने महालेखाकार प्रिंसिपल अकाउंट जनरल (ऑडिट) हरियाणा को कपूर की शिकायत भेजकर रिपोर्ट तलब कर पूछा था कि लोकसम्पर्क विभाग ने जो खर्च किया है वह नियमानुसार है या नहीं। लोकायुक्त ने महालेखाकार से रिपोर्ट मिलने पर महानिदेशक लोकसम्पर्क विभाग हरियाणा से इस रिपोर्ट पर जवाब तलब किया गया। इसके साथ ही लोकसम्पर्क विभाग से इन विज्ञापनों की फाइल नोटिंग मांगी गई तो विभाग ने बताया कि मूल रिकार्ड नष्ट कर दिया गया। हालांकि शपथ पत्र सहित छाया प्रति पेश कर दी। इसके पश्चात 7 जून 2019 को लोकायुक्त को दी अपनी नवीनतम रिपोर्ट में पाया कि सीएम ने अपने अधिकार व प्राप्त शक्तियों के तहत ही विज्ञापन प्रकाशित कराने के आदेश दिए थे! अत: सी0एम0 के विरूद्ध कारवाई नहीं बनती। लेकिन लोकसम्पर्क विभाग के अधिकारियों से यह अपेक्षा नहीं बनती कि वे विज्ञापन प्रकाशित कराने की निर्धारित सामान्य प्रक्रिया को नजरअंदाज करके विज्ञापन प्रकाशित कराये। तत्कालीन महानिदेशक को यह सुनिश्चित करना था कि विज्ञापनों पर खर्च निर्धारित मापदंडो के अनुरूप है। लोकायुक्त रजिस्ट्रार ने लोकायुक्त को अपनी रिपोर्ट में सूचित किया कि ऑडिटर जनरल के संदेहों का स्पष्टीकरण लोकसम्पर्क विभाग ने दे दिया है। लेकिन इस स्पष्टीकरण को प्रिंसिपल ऑडिटर जनरल द्वारा स्वीकार करने का कोई प्रमाण नहीं दिया है। ऑडिटर जनरल की इस ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर लोकसम्पर्क विभाग के तत्कालीन महानिदेशक व अन्य दोषी अधिकारियों के खिलाफ कारवाई की अनुशंसा की जानी चाहिए। पूरे केस की सुनवाई की अनुशंसा की जानी चाहिए। लोकायुक्त जस्टिस एन0के0 अग्रवाल ने पूरे केस की सुनवाई उपरांत 22 अक्टूबर को इस केस का फैसला किया। लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल ने इस फैसले में लिखा कि मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णय के सही व प्रभावी क्रियान्वन ना किए जाने के अधार पर तत्कालीन सीएम हुड्डा या लोकसम्पर्क विभाग को ड्यूटी से लापरवाही का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सरकारी नीतियों के क्रियान्वन के दौरान विज्ञापनों के प्रकाशन के लिए पारदर्शी प्रक्रिया हर प्रकार के संदेहों के उन्मूलन के लिए आवश्यक है। लोकायुक्त ने सरकारी विज्ञापनों के प्रकाशन पर धन खर्च करने बारे स्पष्ट व पारदर्शी पद्धति तय करने की सिफारिश करते हुए की गई कारवाई रिपोर्ट तीन माह मेें हरियाणा सरकार से तलब की है!
महालेखाकार (ऑडिट) हरियाणा ने यह धांधलियां बताई:-

  1. गैर सूचिबद्ध समाचार पत्रों को 8,76,00000/- रूपये के विज्ञापन
  2. 14 गैर सूचिबद्ध समाचारपत्रों में विज्ञापन से 20.52 लाख रूपये का नुकसान
  3. हरियाणा विज्ञापन नीति/नियम एवं दिशा निर्देश-2007 व वित्तीय नियमावली की उल्लंघना करके 2.35 करोड़ रूपये खर्च किए।
  4. संवाद सोसाइटी के गठन पर 14.07 करोड़ रूपये खर्च करके व्यर्थ किए जबकि यह कार्य विभाग की उत्पादन एवं कला शाखा द्वारा किया जा रहा था।
  5. मीडिया सलाहकारों की नियुक्ति करके 1.88 करोड़ रूपये व्यर्थ किए।
  6. छह वातानुकूलित कारें होने के बावजूद वातानुकूलित टैक्सी के किराए पर 26.68 लाख रूपये व्यर्थ किए।
  7. सरकारी वाहनों से शनिवार व रविवार छुट्टी के दिन सैर सपाटे व यात्राएं करके 20 लाख रूपये फालतू खर्च किए।
  8. *अनाधिकृत अधिकारियों को कारें अलॉट करके 1.67 लाख रूपये का नुकसान।
  9. एक ही अधिकारी को दो अलग-अलग कारें अलॉट कर दी।
  10. पत्रकारों को तोहफे बांटने में 87 लाख रूपये का अवैध खर्च।
  11. पत्रकारों को सरकारी आवास देकर सरकार को 30 करोड़ 45 लाख रूपये की चपत। लाइसेंस शुल्क भी नहीं वसूल किया।
  12. स्टेट अवार्डस पर 14.06 लाख रूपये का फालतू खर्च।
  13. अनाधिकृत अधिकारियों/कर्मचारियों को 20.11 करोड़ रूपये आवासीय भत्ता का भुगतान।
  14. हरियाणा कला परिषद् के स्टाफ के वेतन में 6.90 करोड़ रूपये का अवैध भुगतान।
  15. 2.96 करोड़ रूपये सीसीटीवी कैमरों की खरीद पर व्यर्थ किए, कैमरे लगाए ही नहीं।
  16. स्टाफ की अनियमित समावेश।
  17. हरियाणा कला परिषद् के विज्ञापनों पर 1.04 लाख रूपये का नुकसान। पेमेंट 15 प्रतिशत डिस्काउंट के बाद भुगतान करना था। डिस्काउंट नहीं किया।
  18. किताबें जारी करने में धांधली, कई किताबें वापिस नहीं मिली।
  19. सरकारी खातों से बाहर ग्रान्ट रखी गई।
  20. 0.28 लाख रूपये का फालतू भुगतान।
    इसी से बहुत बड़े पैमाने पर अंधेरगर्दी बरती गई!

Police Files, Chandigarh

Korel, CHANDIGARH – 12.11.2019

One person arrested for consuming liquor at public place

          A case U/S 68-1(B) Punjab Police Act 2007 & 510 IPC has been registered in PS-49, Chandigarh against one person who was arrested while consuming liquor at public place from Sector-51, Chandigarh on 11.11.2019. Later he was released on bail.

One arrested for possessing illegal liquor

          Chandigarh Police arrested Dilkash Kumar @ Tini R/o # 5863, Sector-56, Chandigarh while he was illegally possessing 18 quarters and 3 bottles of country made of liquor near kacha Rasta, Sector 55-56 dividing road on 11.11.2019. A case FIR No. 408, U/S 61-1-14 Excise Act has been registered in PS-39, Chandigarh. Investigation of case is in progress.

Cheating

          Ajay Kumar R/o # 4600 B Sector 46 Chandigarh reported that he received a Call on his cell number from 8358985245 and the caller introduced himself as SBI Employee and he shared the detail of his credit card and OTP to caller and Total Rs.15998/- has been deducted from his account. A case FIR No. 277, U/S 420 IPC has been registered in PS-34, Chandigarh. Investigation of the case is in progress.

          A case FIR No. 187, U/S 406, 420 IPC has been registered in PS-Maloya, Chandigarh on the complaint of Suresh Kumar Goyal R/o # 5725, Maloya colony, Chandigarh against unknown person who fraudulently change his ATM and withdrawn cash Rs. 47,500/- from PNB Bank ATM, Village Maloya, Chandigarh. Investigation of the case is in progress.

Accident

Abdul Manan r/o # 226 Block-K, Colony No. 4, Chandigarh reported that driver of truck no. PB11CB-2479, who hit to unknown pedestrian near Garcha turn on 11.11.2019. Pedestrian got injured and admitted in GMCH-32, Chandigarh, where duty doctor declared him brought dead. A case FIR No. 288, U/S 279, 337 IPC has been registered in PS-I/A, Chandigarh. Investigation of case is in progress.

Theft

          Puneet R/o # 1148, Phase-1 Ram Darbar, Chandigarh reported that unknown person who stole away a gold chain of 3 tola, one gold Koka, 3 set of silver payal, 2 set of silver kangan, one set of silver chutki, one silver neckless of 5 tola and 44000/- after breaking the lock on the night intervening 09/10.11.2019. A case FIR No. 277, U/S 380, 457 IPC has been registered in PS-31, Chandigarh. Investigation of the case is in progress.

          Ashish Kainthla r/o # 160, Sector-40-A, Chandigarh reported that unkwno person, who stole away 2 tyres of complainant’s Baleno car No. HP07E-1114, while it was parked near his residence on intervening night 10/11.11.2019. A case FIR No. 407, U/S 379 IPC has been registered in PS-39, Chandigarh. Investigation of the case is in progress.

          Monu R/o # 1145, Sector-52, Chandigarh reported that unknown person stole away his E-rickshaw No. CHTE-2074 from near bus stop, Sector -45, Chandigarh on 02.11.2019. A case FIR No. 278, U/S 379 IPC has been registered in PS-34, Chandigarh. Investigation of the case is in progress.

संजय निरूपम की राह पर संजय राऊत

संजय राउत का बड़बोलापन महाराष्ट्र में गठबंधन के रिश्तों के लिए खतरा बनता जा रहा है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे तक इस मसले में कुछ नहीं बोल रहे, लेकिन राउत बार हैं कि मानते ही नहीं. आखिर वह ये सब किसी के इशारे पर तो नहीं कर रहे है. हाल ही में उन्होंने शरद पवर से मुलाकात की थी उसके बाद से वह हस्पताल में दाखिल हैं।

नई दिल्ली: 

जैसे-जैसे दिन बीतता जा रहा है महाराष्ट्र की सियासत और भी दिलचस्प होती जा रही है. प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी, और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन विराजमान होगा? इस सवाल का हर कोई बड़ी ही बेसब्री से इंतजार कर रहा है. जोड़-तोड़ और आंकड़ों को अपने पक्ष में करने का खेल चल रहा है. बहुमत से दूर भाजपा ने माननीय राज्यपाल के
सरकार बनाने के न्योते को विनम्रता से माना कर दिया है, तो वहीं शिवसेना ने बहुमत का जादुई आंकड़ा अपने पक्ष में होने का दावा कर दिया है. जो भी हो, संजय राउत दिन कुछ ऐसी बातें कर रहे हैं, जो शिवसेना-भाजपा के रिश्तों में खटास पैदा करने का काम कर रहे हैं.

संजय राउत कैसे दोनों पार्टियों के बीच के रिश्तों में दरार डालने की कोशिश कर रहे हैं इसक 5 अहम सबूत आपको बताते हैं.

सबूत नंबर 1

ये दावा कितना सच्चा?

महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा गठबंधन की मुश्किलें बढ़ाते दिख रहे राउत ने एक बार फिर अजीबो-गरीब दावा कर दिया. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि हमारे पास बहुमत का आंकड़ा है. अभी हमारे पास 170 विधायकों का समर्थन है, जो 175 तक पहुंच सकता है. उन्होंने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ ये बोला कि ‘मैं आपको बता रहा हूं और मैं दावे के साथ कहता हूं. जल्द ही आपको पता चल जाएगा.’

मुलाकात हुई, क्या बात हुई?

संजय राउत जिस भरोसे के साथ बहुमत का दावा कर रहे है. उससे ऐसे संकेत जा रहे हैं कि पार्टी की ओर से कोई ना कोई खिचड़ी तो पक रही है. गुरुवार को संजय राउत एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से मिले थे. आज भी उन्होंने शरद पवार की जमकर तारीफ की है. जिसके बाद आज एनसीपी ने भी शिवसेना को समर्थन के संकेत दिए हैं. राउत ने कहा कि ‘शरद पवार साहब महाराष्ट्र के लिए देश के लिए हमेशा एक बड़े अनुभवी नेता रहे हैं. हमने उसको देखा है, बाला साहेब के बाद या बालासाहेब थे तब भी उनका हमेशा आदर किया है. आज भी उनके जैसा बड़ा अनुभवी कद वाला नेता नहीं है. हम जब भी चाहें उनका मार्गदर्शन भी लेते हैं.’ राऊत यहीं नहीं रुके उन्होंने इसके साथ ही प्रदेश के हालात का जिक्र करते हुए ये तक कह दिया कि ‘महाराष्ट्र में आज की जो स्थिति है परिस्थिति है जो चक्रव्यूह बना है ऐसा आपको लगता है. जो पेंच पड़ा है. उसके लिए अगर हम पवार साहब का मार्गदर्शन लेते हैं तो उसमें कुछ गलत नहीं है.’ और तब ही से वह अस्पताल में हैं और उनकी अंजिओप्लास्टी होने की भी खबर है।

सबूत नंबर 3

सामना के जरिए हमला

शिवसेना प्रवक्ता और सामना के एडिटर जितना मीडिया के माध्यम से भाजपा पर हमलावर हो रहे हैं. उतना ही उनके संपादन में छप रही पत्रिका में भाजपा के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में बीजेपी पर बड़े आरोप लगाए. शिवसेना ने साफ कर दिया है कि वो पिछली बार की तरह जल्दबाजी नहीं दिखाएगी और बीजेपी के सामने घुटने नहीं टेकेगी.

इसबार सामना में क्या लिखा?

शिवसेना ने सामना में लिखा है कि ‘कलियुग ही झूठा है. सपने में दिया गया वचन पूरा करने के लिए राजा हरिश्चंद्र ने राजपाट छोड़ दिया. पिता द्वारा सौतेली मां को दिए गए वचन के कारण श्रीराम ने राज छोड़कर वनवास स्वीकार कर लिया. उसी हिंदुस्तान में दिए गए वचन से विमुख होने का ‘कार्य’ भारतीय जनता पार्टी ने पूरा कर दिया. ये सब एक मुख्यमंत्री पद के कारण हो रहा है और राज्य में सरकार बनाने की प्रक्रिया अधर में लटकी है.’

शिवसेना ना सिर्फ भाजपा पर झूठ बोलने का आरोप लगा रही है बल्कि अनैतिक तरीके से सरकार बनाने की कोशिश करने की तोहमत भी मढ़ रही है. सामना में ये भी लिखा है कि चुनाव से पहले ‘युति’ करते समय क्या करार हुआ था, वो महत्वपूर्ण है. श्री फडणवीस पहले निर्धारित शर्तों के अनुरूप शिवसेना को ढाई साल मुख्यमंत्री पद देने को तैयार नहीं हैं. पदों का समान बंटवारा ऐसा रिकॉर्ड पर बोले जाने का सबूत होने के बावजूद बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस पलटी मारते हैं और पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग की मदद से सरकार बनाने के लिए हाथ की सफाई दिखा रहे हैं. ये लोकतंत्र का कौन-सा उदाहरण है?

सबूत नंबर 4

कहीं इतिहास तो नहीं दोहरा रहा?

संजय राउत के ये तेवर इतिहास के एक पन्ने को याद दिलाने का काम कर रहा है. कई साल पहले की बात है, साल 1993 में संजय निरुपम शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादक बनाए गए थे. कुछ बीतने के बाद उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर बागी तेवर अपना लिए. हालात ये हो गए थे कि हर कोई समझ ही नहीं पा रहा था, कि सामना में पार्टीलाइन के अलग बातें क्यों छप रही हैं. अप ऐसे में उस वक्त निरुपम को शिवसेना ने निकाल दिया था. संजय राउत के अलावा पार्टी का कोई बड़ा नेता आजकल इतनी बड़ी बातें नहीं बोल रहा है. लेकिन राउत हैं कि कभी अजीबो-गरीब पोस्टर साझा करते हैं. जिसमें शिवसेना पार्टी का निशान हाथ में कमल लिए गले में एनसीपी के निशान का माला पहना हुआ है. सिर्फ भाजपा पर ही नहीं, बल्कि पार्टी अध्यक्ष शाह को लेकर भी राउत ने सवाल खड़ा कर दिया. तो क्या राउत के तेवर इतिहास दोहराने का काम कर रहा है.

सबूत नंबर 5

ऐसा कहने वाले राउत कौन होते हैं?

संजय राउत भाजपा पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं. जिनती शिवसेना नहीं भड़क रही है, उद्धव और अन्य नेता नहीं बोल रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा राउत का पारा चढ़ा हुआ है. राउत ने अब किसी भी फॉर्मूले पर बातचीत करने से इंकार कर दिया है. उनका कहना है कि अब बात होगी तो सिर्फ मुख्यमंत्री पद पर होगी वरना शिवसेना अपने दम पर बहुमत हासिल कर मुख्यमंत्री बनाएगी. संजय राउत ने कहा कि ‘क्या शिवसेना बाजार में बैठी है? हमने बात की है मुख्यमंत्री पद की और मुख्यमंत्री पद पर ही चर्चा होगी. अगर नहीं होती है तो शिवसेना अपनी ताकत पर अपना मुख्यमंत्री बनाकर दिखाएगी.’

राउत ने ऐसा तो बोल दिया कि शिवसेना अपनी ताकत पर अपना मुख्यमंत्री बनाकर दिखाएगी, और चर्चा नहीं होगी. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब पार्टी हाईकमान ने इसपर चुप्पी साध रखी है. हर कोई इस बात का इंतजार कर रहा है कि उद्धव ठाकरे और अमित शाह के बीच बात होगी तो उसमें क्या निकलकर आएगा. तो ये सब बोलने वाले संजय राउत कौन होते हैं?

एनसीपी को मिला सरकार बनाने का न्योता

महाराष्ट्र में बीजेपी के बाद शिवसेना भी सरकार बनाने में नाकाम रही है. इसके बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने तीसरे नंबर की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को सरकार बनाने का न्योता भेजा है. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें राज्यपाल का न्योता मिला है.

चंडीगढ़:

महाराष्ट्र में बीजेपी के बाद शिवसेना भी सरकार बनाने में नाकाम रही है. इसके बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने तीसरे नंबर की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को सरकार बनाने का न्योता भेजा है. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें राज्यपाल का न्योता मिला है. वे शाम आठ बजे तक राज्यपाल से भेंट कर बताएंगे कि वे सरकार बनाने में सक्षम हैं या नहीं. मालूम हो कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा 105 सीटें आई हैं. वहीं शिवसेना को 56 और एनसीपी के 54 विधायक हैं. कांग्रेस के 44 विधायक हैं.

एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि सरकार बनाने के लिए हमें राज्यपाल का न्योता पत्र मिला है. हम कांग्रेस से बातचीत के बाद सरकार बनाने के किसी नतीजे पर पहुंचेंगे. शिवसेना को यह मौका मिला था, लेकिन वे राज्यपाल को बहुमत के आंकड़े को लेकर संतुष्ट नहीं कर पाए. कांग्रेस नेताओं की शरद पवार से मुलाकात के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा.

शिवसेना को राज्यपाल ने नहीं दिया वक्त

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात के बाद कहा, ‘हमसे कहा गया था कि 24 घंटे भीतर बताइए कि आप सरकार बनाएंगे या नहीं. हालांकि हमने 48 घंटे का वक्त मांगा था. हमने राज्यपाल से मिलकर उन्हें कह दिया है कि शिवसेना (Shiv Sena) सरकार बनाने को तैयार है. हमने राज्यपाल महोदय से कहा है कि हम सरकार तो बनाएंगे, लेकिन स्थाई सरकार के लिए हम सहयोगियों से अभी भी बातचीत कर रहे हैं.’

गवर्नर ने भाजपा और शिव सेना को 24 – 24 घंटे का समय दिया था जो कि अब राष्ट्रवादी कॉंग्रेस पार्टी के पाले में गया है। काँग्रेस और एनसीपी अपने बड़े द्श्मन भाजपा के बदले छोटे दुश्मन शिवसेना का साथ देने को तयार थे। कयास यह भी लगाए जा रहे थे कि अजित पवार माननीय राज्यपाल से मिल कर शिवसेना को समर्थन कि बात कहेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब कॉंग्रेस एनसीपी का मानना है कि किसी भी तरह दोबारा चुनाव नहीं होने चाहिए, सबसे बड़ा कारण राम मंदिर पर आया फैसला और मोदी के पक्ष में लहर है। यदि दोबारा चुनाव होते हैं तो तो शायद भाजपा इसका पूरा पूरा फायदा उठा ले जिससे कॉंग्रेस एक बार फिर सत्ता से दूर हो जाये।

राज्यपाल से मिलकर लौटे आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनको समर्थन करने वाली पार्टियों की अपनी प्रक्रिया होने के कारण उन्हें अभी तक समर्थन का पत्र नहीं मिला है. आदित्य ने कहा राज्यपाल ने उन्हें और समय देने से मना कर दिया है, लेकिन उनके सरकार बनाने के दावे को खारिज नहीं किया है. आदित्य ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार बनाने की कोशिश जारी रखेंगे.

उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अभी डील फाइनल नहीं हुई है. बातचीत का दौर जारी है. इसके अलावा कांग्रेस ने लिखित बयान जारी कर भी यही बात कही है. 


Police Files, Chandigarh

Korel, CHANDIGARH – 10.11.2019

Two persons arrested for consuming liquor at public place

          A case U/S 68-1(B) Punjab Police Act 2007 & 510 IPC has been registered in PS-34, Chandigarh against two persons who were arrested while consuming liquor at public place near Park Sector 33, Chandigarh on 09.11.2019. Later they were released on bail.

MV theft

          Sunil Malhotra R/o # 1034, Sector-19/D, Chandigarh reported that unknown person stole away complainant’s Acent car No. CH-03W-3000 parked near his residence on night intervening 06/07-11-2019. A case FIR No. 136, U/S 379 IPC has been registered in PS-19, Chandigarh. Investigation of the case is in progress.

          Kritika Ahuja R/o # 1224, Sector-18, Chandigarh reported that unknown person stole away complainant’s Zen car No. CH-01U-8749 while parked near Gate No. 1, DLF Building, IT Park, Chandigarh on 08.11.2019. A case FIR No. 236, U/S 379 IPC has been registered in PS-IT Park, Chandigarh. Investigation of the case is in progress.

वामपंथियों के इतिहास पर भरी पड़ा राम लल्ला का अस्तित्व

इसमे विचारणीय प्रश्न यह है कि इस सर्वेक्षण को रोमिला थापर और इरफान हबीब जैसे वामपंथि झुठला रहे थे और इसका मजाक बना रहे थे तो इनके लिखे साहित्य कितने विश्वसनीय है ?
अब जब विवाद का निस्तारण हो चुका है सभी पक्ष संतुष्ट है पूरे देश के नागरिक सम्मान कर रहे है केन्द्र सरकार का दायित्व है कि शीघ्र ही इस फैसले का ट्रस्ट बनाकर क्रियान्वयन करे

दिनेश पाठक अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर। विधि प्रमुख विश्व हिन्दु परिषद

आखिर देश का बहुप्रतिक्षित निर्णय एक ऐतिहासिक निर्णय के रुप मे सामने आ ही गया ! देश की सरकारों और अदालतों ढुलमुल रवैये से परिचित देश की जनता के सामने मुख्यन्यायधीश रंजन गोगोई ने न्यायपालिका की समृद्ध ,बृहद एवं सम्मानजनक छवि पेश की राम जन्मभूमि के निर्णय से देश के आमजन मे न्यायपालिका के प्रति आस्था मे अकल्पनीय वृद्धि हुई है !

1949 से लम्बित प्रकरण रामजन्म भूमी बाबरी मस्जिद का सत्तर साल बाद उस समय निपटारा हो गया जब देश की सर्वोच्च अदालत ने शनिवार 9 नवम्बर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया ।

माननीय मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के अन्य सदस्य माननीय न्यायाधीश गण जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस चन्द्रचूड, जस्टिस ए नजीर ने चालीस दिन लगातार चली सुनवाई को निर्णय तक पहुंचा कर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुये रामलला को अयोध्या मे विरजमान कर दिया। देश के लिये सबसे अच्छी खबर इस निर्णय मे यह रही कि निर्णय बहुमत से नही सर्वमत से आया पीठ के किसी भी सदस्य ने किसी भी मुद्दे पर अपने सहयोगी न्यायाधीश से असहमति नही जताई सबने पूरा निर्णय एकमत होकर दिया जो इस निर्णय को ऐतिहासिक बनाता है जो न्यायपालिका के लिये एक लैणडमार्क निर्णय होगा ।

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बिल्कुल अन्तिम है और देश के हर नागरिक को इसका सम्मान करना चाहिये हालांकि कोई भी पक्ष इसका रिव्यू कर सकता है जिसे सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही सुन सकता है ।

इस ऐतिहासिक फैसले सबसे बडी बात यह रही कि न्यायालय ने इसका फैसला आस्था पर न करके मामले के तथ्य और सबूतो के आधार किया जिस कारण फैसला सर्वानुमति से आया ! इस फैसले मे तथ्यो का गहराई से विश्लेषण किया सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली स्थान पर नही बनी इसके नीचे कोई ढांचा था लेकिन वो ढाचा इस्लामिक नही था इसके लिये सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्यो को सही माना जिसने अपने सर्वेक्षण मे बाबरी मस्जिद ने नीचे धर्मिक ढांचा माना और इस सर्वेक्षण को सुप्रीम कोर्ट नकार नही सका। इसमे विचारणीय प्रश्न यह है कि इस सर्वेक्षण को रोमिला थापर और इरफान हबीब जैसे वामपंथि झुठला रहे थे और इसका मजाक बना रहे थे तो इनके लिखे साहित्य कितने विश्वसनीय है ?

सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यो को देखते हुये यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर अपना निर्बाद अधिकार को साबित नही कर पाया इस बात के भी सबूत नही मिले कि ब्रिटिश काल मे 18 वीं सदी तक नमाज वहां पढ़ी जाती थी लेकिन हिन्दुओ ने पूजा करना नही छोडा। इस तरह न्यायलय ने तथ्यो का गहराई से विश्लेषण कर 1885 मे संत रघुवरदास द्वारा फैजाबाद की जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक 134 वर्ष पुराने विवाद का अंत मुख्य न्यायाधीश ने अपनी सेवानिवृत की तारीख से आठ दिन पहले एक निश्चित समय सीमा मे रहते सब कुछ छोडकर कर दिया। इसके लिये सभी पांचो न्यायाधीश श्रद्धा और नमन के पात्र है जिनकी दृढ इच्छा शक्ति के चलते सैकडो बर्षो से चले आ रहे तनाव के माहौल को शांत कर दिया। इस कार्य मे जितना श्रेय न्याये को है उतना ही विवाद से समबन्धित पक्षकारों का उनके वकीलों का और उत्तर प्रदेश और केन्द्र सरकार को भी जाता है जिन्होंने इस विवाद के निपटारे को अंजाम तक पहुचाने मे न्यायालय का सहयोग किया ! विशेषकर केन्द्र की भाजपा सरकार का। क्योकि विवाद बहुत पुराना था बहुत सरकारे बनी क ई प्रधानमंत्री आसीन हुये लेकिन किसी सरकार ने कभी ऐसी इच्छा शक्ति नही दिखाई कि इस विवाद का निपटारा हो क्योकि नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक सारे प्रधानमंत्री को एक डर था कि यदि इसका फैसला आता है तो उसके बाद एक समुदाय उनसे नाराज हो जायेगा साथ ही यह भी डर था कि फैसले के बाद देश मे क्या हालात होंगे जिसके चलते कोई सरकार नही चाहती थी कि इसका फैसला हो।

लेकिन पहली बार देश मे ऐसी सरकार आई जिसका नेतृत्व नरेन्द्र मोदी कर रहे है और सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र सरकार ने पूरा सहयोग तो किया ही दोनो को एक दूसरे पर यकीन था केन्द्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट पर कि वो इसका फैसला कर सकती है एवं सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र सरकार पर कि वो फैसले के बाद स्थिति को संभाल लेगी जैसे कि कश्मीर मे संभाला।

अब जब विवाद का निस्तारण हो चुका है सभी पक्ष संतुष्ट है पूरे देश के नागरिक सम्मान कर रहे है केन्द्र सरकार का दायित्व है कि शीघ्र ही इस फैसले का ट्रस्ट बनाकर क्रियान्वयन करे

ओवैसी पर बरसे उद्धव ठाकरे

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज का दिन स्वर्ण अक्षरों से लिखने वाला दिन है न्याय देवता को प्रणाम. इतने दिनों से राम की कहानियां सुन रहे थे, आज विवाद खत्म हुआ है. सभी समाज का धन्यवाद. आज सभी को बालासाहेब की याद आ रही होगी. उन्होंने पहले कहा था कि गर्व से कहो हम हिन्दू है. मैं आडवाणी से मिलूंगा

चंडीगढ़:

अयोध्या विवाद मामले में 70 सालों तक चली कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों तक लगातार चली सुनवाई के बाद शनिवार को ऐतिहासिक फैसला आ गया. फैसला विवादित जमीन पर रामलला के हक में सुनाया गया. फैसले में कहा गया कि राम मंदिर विवादित स्थल पर बनेगा और मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन अलग से दी जाएगी. अदालत ने कहा कि विवादित 02.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन रहेगी. केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज का दिन स्वर्ण अक्षरों से लिखने वाला दिन है. न्याय देवता को प्रणाम. इतने दिनों से राम की कहानियां सुन रहे थे, आज विवाद खत्म हुआ है. सभी समाज का धन्यवाद. आज सभी को बालासाहेब की याद आ रही होगी. उन्होंने पहले कहा था कि गर्व से कहो हम हिन्दू है. मैं आडवाणी से मिलूंगा.”

ठाकरे ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को करारा जवाब देते हुए कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट नहीं है. दरअसल, ओवैसी ने फैसले पर नाखुशी जाहिर की है. उन्होंने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च है, लेकिन अचूक नहीं है. उन्होंने अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसले को तथ्यों के ऊपर आस्था की एक जीत बताया. वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या पर पुनर्विचार याचिका नहीं दाखिल करेगा. मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी फैसले पर संतुष्ट हैं.

ठाकरे ने यह भी कहा कि वह 24 नवंबर को अयोध्या जाएंगे. उन्होंने आगे कहा, “आनंद है, सभी को होना चाहिए, इससे किसी को तकलीफ नहीं होना चहिए. शिवनेरी जहां शिवाजी का जन्म हुआ है, वहां की मिट्टी लेकर गया था. एक साल के भीतर काम हुआ, अभी शिवनेरी जाकर नमन करूंगा. जिन लोगों की उस वक्त जान गई, उन लोगों को नमन करता हूं.” 

राम मंदिर पर आए फैसले ने ओवैसी के बिगड़े बोल

नई दिल्ली: 

अयोध्या मामला:

अयोध्या भूमि विवाद को लेकर पांच जजों की पीठ ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित ढांचे पर अपना एक्सक्लूसिव राइट साबित नहीं कर पाया. कोर्ट ने विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को देने का फैसला सुनाया, तो मुसलमानों को दूसरी जगह जमीन देने के लिए कहा है. AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने फैसला आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है. ओवैसी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, “मैं कोर्ट के फैसले से संतुष्‍ट नहीं हूं. सुप्रीम कोर्ट वैसे तो सबसे ऊपर है, लेकिन अपरिहार्य नहीं है. हमें संविधान पर पूरा भरोसा है, हम अपने अधिकार के लिए लड़ रहे हैं, हमें खैरात के रूप में 5 एकड़ जमीन नहीं चाहिए. हमें इस पांच एकड़ जमीन के प्रस्‍ताव को खारिज कर देना चाहिए. हम पर कृपा करने की जरूरत नहीं है.”

ओवैसी ने आगे कहा, ”अगर मस्जिद वहां पर रहती तो सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला लेती. यह कानून के खिलाफ है. बाबरी मस्जिद नहीं गिरती तो फैसला क्या आता है. जिन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराया, उन्हें ट्रस्ट बनाकर राम मंदिर बनाने का काम दिया गया है.”

सुप्रीम कोर्ट के पांचों जजों की सहमति से फैसला सुनाया गया है. फैसला पढ़ने के दौरान पीठ ने कहा कि ASI रिपोर्ट के मुताबिक नीचे मंदिर था. CJI ने कहा कि ASI ने भी पीठ के सामने विवादित जमीन पर पहले मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं. CJI ने कहा कि हिंदू अयोध्या को राम जन्म स्थल मानते हैं. हालांकि, ASI यह नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी. मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि वहां दोनों ही पक्ष पूजा करते थे. रंजन गोगोई ने कहा कि ASI की रिपोर्ट के मुताबिक खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनी थी. साथ ही सबूत पेश किए हैं कि हिंदू बाहरी आहते में पूजा करते थे.

साथ ही CJI ने कहा कि सूट -5 इतिहास के आधार पर है जिसमें यात्रा का विवरण है. सूट 5 में सीतार रसोई और सिंह द्वार का जिक्र है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए शांतिपूर्ण कब्जा दिखाना असंभव है. CJI ने कहा कि 1856-57 से पहले आंतरिक अहाते में हिंदुओ पर कोई रोक नहीं थी. मुसलमानों का बाहरी आहते पर अधिकार नहीं रहा.

अयोध्या विवाद निर्णय के चलते जिला में धारा 144 लागू

कोरल, पंचकुला 09 नवम्बर :-

पुलिस उपायुक्त कमलदीप गोयल, ह0पु0से0 ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या राम मन्दिर विवाद में निर्णय दिए जाने के चलते जिला पंचकुला में अमन, चैन व शांति बनाए रखने के लिए जिला में तुरंत प्रभाव से धारा 144 लागू करने के आदेश जारी किए हैं । असमाजिक तत्वों द्वारा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी फैलाकर कानून एवं शान्ति व्यवस्था की स्थिती को भंग किया जा सकता है ।

    पुलिस उपायुक्त द्वारा जारी आदेशानुसार जिला में सार्वजनिक स्थलों पर पांच या इससे अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने पर प्रतिबंद रहेगा । कोई भी व्यक्ति तेजधार हथियार जैसे कुल्हाड़ी, चाकू, छुरा, तलवार, साईकिल चैन, बरछी, फरसा, जेली, गंडासी, लाठी, बंदूक या पिस्तौल के साथ नहीं घूम सकता और न ही हथियारों का खुले मे प्रदर्शन कर सकता है । सभी पैट्रोल पम्प के मालिकों को निर्देश दिये गये है कि वह खुले मे पैट्रोल व डीजल नही बेचेगे । उन्होंने कहा कि आदेशों की अवलेहना करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी । उन्होंने आमजन का आह्वान करते हुए कहा कि सभी जिलावासी सामाजिक सौहार्द बनायें रखते हुए शांति व सामाजिक भाईचारा बनाये रखने में सहयोग करें ।