अनियमितताओं के चलते पेटीएम पर 1 करोड़ और वेस्टर्न यूनियन पर 27.78 लाख का जुर्माना

भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। … इसके अलावा आरबीआई ने वेस्टर्न यूनियन फाइनेंशियल सर्विसेज पर 27.78 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मनी ट्रांसफर सर्विस स्कीम (एमटीएसएस) के निर्देशों का पालन न करने पर ये जुर्माना लगाया गया है।

दिल्ली/चंडीगढ़ :

देश के अग्रणी पेंमेंट्स बैंकों में से एक पेटीआयी एम पेमेंट्स बैंक को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने नियमों के उल्लंघन के लिए पेटीएम पेमेंट्स बैंक लि. यानी पीपीबीएल पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।  पेमेंट एंड सेटलमेंट की धारा 6(2) के उल्लंघन के चलते यह जुर्माना लगाया गया है.

इसके अलावा आरबीआई ने वेस्टर्न यूनियन फाइनेंशियल सर्विसेज पर 27.78 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मनी ट्रांसफर सर्विस स्कीम (एमटीएसएस) के निर्देशों का पालन न करने पर ये जुर्माना लगाया गया है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक के ऑथराइजेशन के फाइनल सर्टिफिकेट जारी करने के आवेदन की जांच करने पर, आरबीआई ने पाया कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक ने ऐसी जानकारी दी थी, जो तथ्यात्मक स्थिति को नहीं दर्शाती थी। केंद्रीय बैंक ने कहा, “क्योंकि यह पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट की धारा 26 (2) का उल्लंघन था, पेटीएम पेमेंट्स बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था।”

व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान मिले लिखित जवाबों और मौखिक जानकारियों की समीक्षा करने के बाद,समीक्षा के बाद आरबीआई ने आरोपों को सही पाया। इसी के बाद पीपीबीएल पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की गई।

राजकोट में 200 महिलाओं ने ‘तलवार रास’ में दिखाया हस्तलाघव

गुजरात के राजकोट में राजपूत महिलाओं ने अपने तलवार बाजी कौशल का शानदार प्रदर्शन कर सबके दिलों को जीत लिया है। दरअसल, राजकोट में पांच दिवसीय तलवार रास कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राजपूत महिलाओं ने न सिर्फ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि अपने तलवार कौशल का प्रदर्शन भी किया। इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक महिला अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर कुछ महिलाओं की पीठ पर चढ़कर तलवार बाजी करती दिख रही है।

राजकोट में चल रहे पांच दिन के कार्यक्रम में ‘तलवार रास’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और तलवार कौशल दिखाया। कार्यक्रम में राजपूती महिलाओं ने आंख में पट्टी बांधकर तलवार से करतबबाजी दिखाई। वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला आंख में पट्टी बांधकर कुछ महिलाओं की पीठ पर चढ़कर तलवार से करतब दिखा रही है।

‘तलवार रास’ में राजपूत महिलाएँ पारंपरिक कपड़े पहनती हैं। तलवार के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक नृत्य करती हैं। राजकोट के शाही परिवार की राजकुमारी कादंबरी देवी ने कहा, “तलवार रास पिछले बारह वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। हर साल एक नया समूह होता है और महिलाएँ पूरे उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में भाग लेती हैं।”

कादंबरी देवी ने आगे कहा, “तलवार एक देवी की तरह है और इसलिए हम शस्त्र पूजा करते हैं।” यह आयोजन राजपूत महिला योद्धाओं के इतिहास को जीवित रखने और यह संदेश देने के लिए है कि आज की महिलाएँ उतनी ही शक्तिशाली हैं जितनी वे सालों पहले थीं।

तलवार रास की लिबरलों ने मुहर्रम से तुलना की

‘तलवार रास’ महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लिबरल को पसंद नहीं आया। उन्होंने इसकी तुलना मुहर्रम से करते हुए इसे ‘संघी आतंकवाद’ तक कह डाला।

विडंबना यह है कि इस कार्यक्रम की आलोचना करने वाले लोगों को विदेशी ‘आत्मरक्षा‘ तकनीकों को बढ़ावा देने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पारंपरिक भारतीय कला और संस्कृति को देखकर वे भयभीत हो जाते हैं। बता दें कि गुजरात की लोक परंपराओं के विद्वान डॉ. उत्पल देसाई के अनुसार, तलवार रास राजपूत युद्ध नायकों की याद में बनाया गया था, जो भुचर मोरी (18 जुलाई, 1591) के ऐतिहासिक युद्ध में मारे गए थे।

पिंजोर में आयोजित वाल्मीकि जयंती में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे पूर्व डिप्टी सीएम चन्द्रमोहन,वाल्मीकि जयंती पर सभी को दी बधाई

  • पूर्व चेयरमैन विजय बंसल ने बतौर विशिष्ट अतिथि की शिरकत,नए भवन व धर्मशाला के लिए किया आश्वसत
  • इलाके के विकास में वाल्मीकि समाज का काफी योगदान : चन्द्रमोहन

पिंजोर न्यूज(20 अक्टूबर 2021):

महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन पर्व पर रामबाग रोड़ पिंजोर स्थित वाल्मीकि मंदिर व धर्मशाला में वाल्मीकि सभा पिंजोर द्वारा वाल्मीकि जयंती का आयोजन करवाया गया जिसमें कालका से चार बार लगातार विधायक व हरियाणा सरकार के उपमुख्यमंत्री रह चुके श्री चन्द्रमोहन ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की तो वही उनके साथ पूर्व चेयरमैन विजय बंसल एडवोकेट ने बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत की।पूर्व पार्षद संजीव कुमार राजू ने बताया कि श्री चन्द्रमोहन ने अपने कार्यकाल के दौरान पिंजोर वाल्मीकि मंदिर के भवन निर्माण में निजी कोष से आर्थिक योगदान दिया था जिससे वाल्मीकि समाज के लोगो के साथ अन्य स्थानीय निवासियों को कार्यक्रम करने में भी सहूलियत मिली।चन्द्रमोहन ने इस अवसर पर सभी को वाल्मीकि जयंती की बधाई दी।

संजीव राजू ने चन्द्रमोहन व विजय बंसल से आग्रह किया है कि अब समय की मांगनुसार वाल्मीकि समाज के लिए भव्य भवन का निर्माण करवाया जाए जिसपर विजय बंसल ने आश्वस्त करते हुए कहा कि श्री चन्द्रमोहन के सहयोग व महर्षि वाल्मीकि भगवान जी के आशीर्वाद से यदि उन्हें सेवा का मौका मिला तो नगर परिषद कालका की गद्दी सम्भालने के बाद नगर परिषद की जमीन पर वाल्मीकि समाज का भव्य मंदिर व भवन धर्मशाला का निर्माण करवाया जाएगा।

श्री चन्द्रमोहन ने कहा कि वाल्मीकि समाज ने हमेशा उनका साथ दिया है।इलाके के विकास में वाल्मीकि समाज का काफी योगदान है।आज समाज व सभी को महर्षि वाल्मीकि के उपदेशों का पालन करने की जरूरत है।महर्षि वाल्मीकि जहां एक महान कवि थे वही उनके उपदेशों को पालन किया जाना जरूरी है।

श्री विजय बंसल ने सम्बोधित करते हुए कहा कि आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी की जीवन गाथा पर आधारित आदिकाव्य हिन्दू ग्रंथ ‘रामायण’ के रचयिता होने के साथ साथ महान व्यक्तित्व के धनी थे।समाज को एकजुट करने में उनके उपदेशों का पालन करना जरूरी है।

वाल्मीकि समाज की ओर से संजीव राजू एडवोकेट पूर्व पार्षद,संजीव धारीवाल प्रधान,विनोद गोरी एडवोकेट,खुशी राम,मोहन लाल,राजीव कुमार,प्रिंस,टोनी,रिंकू,रवि समेत अन्य लोगो ने चन्द्रमोहन का स्वागत किया इसके साथ ही उनके साथ आए विजय बंसल एडवोकेट,रविन्द्र रिहोड़,दीपांशु बंसल,सजल,अजय बबल आदि का भी सिरोपा पहनाकर अभिनंदन किया। इस दौरान गुरुप्यारा लाल,कृष्णा शर्मा पूर्व पार्षद,भूरी बेगम,पवन गुप्ता,जगदीश शर्मा,दीक्षित शर्मा समेत अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

यकीनन ‘वीर’ ही थे सावरकर

राजनाथ सिंह द्वारा दिया गया बयान कि वीर सावरकर ने मोहनदास करमचंद गांधी के कहने पर माफी मांगी थी अथवा माफी के लिए अंग्रेज़ हुकूमत को पत्र लिखा था। इस बात ने देश भर में अनर्गल राजनैतिक बहस छिड़ गईहाई।टीवी चैनल हों या प्रबुद्ध समाचार पत्र सभी इस बहस को दिखा एसएनए अथवा पढ़ा रहे हैं। जब हम उस काल खंड को दहते हैं तो हैरान होते हैं कि जहां सावरकर को दिन में 10 किलो तेल निकालना होता था और उन्हें यह त पता नहीं था कि दो कोठरी छोड़ कर उनका भाई कैद काट रहा है वह पत्र लिख पाये। कोल्हू में बैल कि जगह जुतना और फिर विमर्श पत्र लिखना क्या ही अचंभा है। अब कॉंग्रेस सावरकर को लेकर इतनी दुविधाग्रस्त क्यों है? रत्नगिरी में रहते हुए सावरर दलित बस्तियों में जाने का, सामाजिक कार्यों के साथ साथ धार्मिक कार्यों में भी दलितों के भाग लेने का और सवर्ण एवं दलित दोनों के लिए पतितपावन मंदिर की स्थापना का निश्चय लिया था। जिससे सभी एक स्थान पर साथ साथ पूजा कर सके और दोनों के मध्य दूरियों को दूर किया जा सके। यह भी एक कारण हैं कि कांग्रेस सावरकर की विरोधी बन कर खड़ी हो रही है, वरना 90 के दशक तक तो ऐसा देखने में नहीं आता था। उससे पहले भारत सरकार जब की कांग्रेस सत्तासीन थी ने सावरकर पर डाक टिकट भी जारी किया था। सत्ता के लाले पड़ने पर कॉंग्रेस हमेशा से झूठ सच की राजनीति करती आई है, इस मामले में भी यही हुआ।

राज वशिष्ठ, चंडीगढ़:

मेरे मन में प्रश्न उठता है कि, क्या मोहनदास गांधी कभी पर्यटन के लिए भी कालापानी गए थे? यदि नहीं गए थे तो वीर सावरकर ने गांधी से विमर्श कब किया? साथ ही एक बात और उठती है कि वीर सावरकर को क्या ही अनुमति थी कि वह पत्र व्यवहार कर सकें? क्या हमारी अथवा नयी पीढ़ी को पता भी है कि सावरकर को काला पानी कि सज़ा क्यों हुई थी? क्या उनके उस अपराध के पश्चात भी अंग्रेज़ सरकार उन्हें कागज कलाम पदाने कि हिम्मत जुटा पाती?

इन प्रश्नों के उत्तर खोजना कोई पुआल में सुई ढूँढने जैसा नहीं है। बस थोड़े से प्रयास की आवश्यकता है।

सबसे पहले पहली बात की सावरकर को सज़ा क्यों हुई?

सावरकर को सज़ा देने की पृष्ठ भूमि अंग्रेज़ सरकार बहुत पहले ही से तय कर चुकी थी। सावरकर की 1901 में प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंध का गौरव प्राप्त करती अत्यंत विचारोतेजक पुस्तक ‘1857 का सावतंत्र्य समर’। इस पुस्तक के प्रकाशन की संभावना मात्र से अंग्रेज़ हुकूमत थर्रा गयी थी। फिर भी इस प्स्त्का का गुप्त प्रकाशन एम वितरण हुआ। अंग्रेजों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस पुस्तक को नष्ट करने में कोई कोर कसर न छोड़ी।

वीर सावरकर को लंदन में रहते हुए दो हत्याओं का आरोपी बनाया गया। पहली, 1 जुलाई 1909 को मदन लाल ढींगरा द्वारा कर्नल विलियम हट वायली की हत्या जिसका अंग्रेजों ने सूत्रधार वीर दामोदर सावरकर को ठहराया। दूसरी 1910 में हुई नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए नासिक षडयंत्र काण्ड के अंतर्गत इन्हें साल 1910 में इंग्लैंड में गिरफ्तार किया गया। 8 अप्रैल,1911 को काला पानी की सजा सुनाई गई और सैल्यूलर जेल (काला पानी) पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया। मुक़द्दमा अंग्रेजों द्वारा अङ्ग्रेज़ी अदालत में चलाया गया और बाकी प्रबुद्ध विचाराओं की भांति इन्हे भी काले पानी की सज़ा सुना दी गयी। इन्हें 25 – 25 वर्ष की दो कारावासों का दंड दिया गया था जिसका अर्थ है की वह अपने आगामी जीवन के 50 वर्ष काला पानी में कोल्हू अथवा अंग्रेज़ मुलाजिमों की बग्घी में जुते रहते।

अब दूसरे प्रश्न पर, क्या मोहन दस करमचंद गांधी कभी अंडेमान राजनैतिक पर्यटन के लिए भी गए थे, तो उत्तर है ‘नहीं’। फिर गांधी – सावरकर कहाँ मिले?

गांधी सावरकर पहली बार इंग्लैंड में मिले थे, अक्तूबर 1906 में मिले थे। यह एक बहुत ही संक्षिप्त सी मुलाक़ात थी। दूसरी मुलाक़ात 24 अक्तूबर 1909 को इंडिया हाउस लंदन में हुई। तब तक वीर सावरर किसी भी आक्षेप को नहीं झेल रहे थे। अब यह प्रश्न कहाँ से उठा की गांधी ने सावरकर को दया याचिका डालने की सलाह कब और कहाँ दी?

इस बाबत व‍िक्रम संपत ने अपनी क‍िताब ‘Echoes from a Forgotten Past, 1883-1924’ में ल‍िखा है क‍ि व‍िनायक दामोदर सावरकर के छोटे भाई नारायण दामोदर सावरकर ने 1920 में एक चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्‍होंने अपने भाई के धुर व‍िरोधी व‍िचारधारा वाले मोहनदास करमचंद गांधी को खत ल‍िखा। छह खतों में से यह पहला खत ल‍िखा गया था 18 जनवरी, 1920 को। इसमें उन्‍होंने सरकारी माफी की योजना के तहत अपने दोनों बड़े भाइयों को जेल से र‍िहा करवाने के संबंध में मदद व सलाह मांगी थी।

नारायण सावरकर ने अपने पत्र में लिखा था कि कल (17 जनवरी) मुझे भारत सरकार द्वारा जानकारी मिली कि सावरकार बंधुओं को उन लोगों में शामिल नहीं किया गया है, जिन्हें रिहा किया जा रहा है। ऐसे में अब साफ हो चुका है कि भारत सरकार उन्हें रिहा नहीं करेगी। अपने पत्र में उन्होंने महात्मा गांधी से सुझाव मांगा था कि ऐसी परिस्थितियों में आगे क्या किया जा सकता है। इस चिट्ठी का जिक्र, कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी के 19वें वॉल्यूम के पेज नंबर 384 पर किया गया है।

नारायण सावरकर की इस चिट्ठी का जवाब महात्मा गांधी ने 25 जनवरी 1920 को दिया था, जिसमें उन्होंने सलाह दी थी कि राहत प्रदान करने की एक याचिका तैयार करें, जिसमें तथ्यों के जरिए साफ करें कि आपके भाई द्वारा किया गया अपराध पूरी तरह से राजनीतिक था। उन्होंने अपने जवाब में यह भी लिखा कि वह अपने तरीके से इस मामले में आगे बढ़ रहे हैं। गांधी द्वारा दिए गए इस जवाब का उल्लेख कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी के 19वें संस्करण में भी देखा जा सकता है।

अंग्रेजों से माफी मांगने का। इस मामले पर गांधी ने सावरकर को ‘चतुर’ बताते हुए कहा था कि ‘उन्होंने (सावरकर ने) स्थिति का लाभ उठाते हुए क्षमादान की मांग की थी, जो उस दौरान देश के अधिकांश क्रांतिकारियों और राजनीतिक कैदियों को मिल भी गई थी। सावरकर जेल के बाहर रहकर देश की आजादी के लिए जो कर सकते थे वो जेल के अंदर रहकर नहीं कर पाते।’

गांधी जी के इस कथन से इतना तो साफ है कि सावरकर अंग्रेजों के सामने झुके नहीं थे, बल्कि आगे की लड़ाई के लिए चतुराई दिखाई थी। खैर, बात करते हैं सावरकर से जुड़े तमाम पहलुओं की जो उनपर राय बनाने से पहले जानना जरूरी है।

City loses Father of Indian Arbitration

Dr. P.C. Markanda passes away

Dr P.C. Markanda, Senior Advocate and a renowned authority on Arbitration Laws, passed away here in the wee hours of the morning after a short illness. He was 84.

One of the leading arbitration lawyers of the Supreme Court of India, architect and structural engineer, author, and academician, Dr. P.C. Markanda spoke very recently at a national level webinar on the 9th of October along with the Union Law Minsiter, Mr Kiren Rijju.

Popularly known as father of Indian Arbitration, he had been a multifaceted personality who excelled in the field of architecture as well as law.  Author of numerous papers, and books on law and architecture,

He was a Civil Engineering graduate who ventured into law and did his doctorate and acquired specialization in the fields of construction and infrastructure investment and joint venture, international and domestic supply contracts, service contracts, oil and gas company contracts, railways etc.

Dr Markanda served on various national and international artbitration law bodies, ,  . He has also served on various Boards and Advisory Committees and continues to provide advise to the voluntary sector.

As a civil engineer for 27 years he left indelible mark having constructed and designed many multi storeyed RCC structures, including Gymnasium in Punjab University having 100 feet clear span, the largest in any University in Asia, and was consultant to the Engineering Consortium in 1982 in Baghdad (Iraq).

Possessed of a strategic mind and ability to formulate bespoke solutions to clients requirements he has for many years acted for parties involved in contractual disputes. For his deep knowledge of arbitration and related fields he is on many arbitral tribunals with known High Court and Supreme Court judges.

Dr Markanda had been visiting professor and on board of studies of various universities for architecture too. 

बीएसएफ़ का दायरा बढ़ा, पंजाब और बंगाल का संघवाद खतरे में

अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सालों से चली आ रही नशे और आतंकवाद की तस्करी रोकने में नाकाम रही पंजाब सरकार को झटका लगा है जब केंद्र ने बीएसएफ़ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाते हुए उसे बार्डर से ले कर 50 किलोमीटर तक के क्षेत्र में जांच छापे मारी और किसी भी बनती कार्यवाई के अधिकार दे दिये हैं। वहीं दूसरी ओर बंगाल सरकार का भी यही हाल है, वहाँ 1971 के बाद से बंगलादेशी घुसपैठिए, रोहङियान मुसलमानों को रोकने और गो तसारी को रोकने में ब्री तरह नाकामयाब रही है। गृह मंत्रालय ने तीन राज्यों में बीएसएफ (BSF) का क्षेत्राधिकार बढ़ाया है। इन राज्यों में पंजाब भी शामिल हैं। हालांकि अब इस मामले पर राज्य में सियासी बवाल मच गया है। जानकारी के मुताबिक पंजाब,बंगाल और असम में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बॉर्डर सीमा क्षेत्र के 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक किए जाने को लेकर 2 राज्यों की सरकारों ने आपत्ति जताई है।

  • गृह मंत्रालय ने तीन सीमावर्ती राज्‍यों में बढ़ाया बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र
  • सीमा के 15 किलोमीटर के बजाय 50 किलोमीटर भीतर तक होगा दखल
  • पंजाब और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने खुलकर किया इस कदम का विरोध
  • मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम और नगालैंड में घटाया गया है BSF का इलाका

राजविरेन्द्र वशिष्ठ, चंडीगढ़/नई दिल्ली :

पश्चिम बंगाल, पंजाब और असम में सीमा सुरक्षा बल (BSF) का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने का विपक्ष ने विरोध किया है। गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, इन तीन राज्‍यों में BSF का क्षेत्र अंतरराष्‍ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर भीतर तक होगा। पहले यह दायरा 15 किलोमीटर था। BSF के अधिकारी पुलिस की तरह ही तलाशी, जब्‍ती और गिरफ्तारी कर सकते हैं। पंजाब और पश्चिम बंगाल की सरकार ने इस कदम को ‘तर्कहीन फैसला’ बताते हुए कहा कि यह ‘संघवाद पर सीधा हमला’ है। अभी यह साफ नहीं कि फैसले से पहले राज्‍य सरकारों को बताया गया था या नहीं। पंजाब और पश्चिम बंगाल सरकार की प्रतिक्रियाओं से तो ऐसा नहीं लगता।

केंद्र के इस फैसले से BSF के कार्यक्षेत्र का दायरा काफी बढ़ गया है। अब BSF 50 किलोमीटर के दायर में गश्ती, सर्च ऑपरेशन, गिरफ्तारी और जब्ती जैसी कार्रवाई कर सकेगा। केंद्र के आदेश के मुताबिक, बल 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाली अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा। इससे पहले BSF को पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में 15 किलोमीटर तक ही कार्रवाई करने का अधिकार था, लेकिन नए आदेश के साथ अब इसे केंद्र या राज्य सरकारों से किसी और अनुमति के बिना 50 किलोमीटर तक कार्रवाई को अधिकृत किया गया है।

हालाँकि, नए आदेश के तहत पूर्वोत्तर भारत के पाँच राज्यों- मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में BSF के अधिकार क्षेत्र में कटौती की गई है। यहाँ पहले इसका अधिकार क्षेत्र 80 किलोमीटर तक था। गुजरात में भी इसके अधिकार क्षेत्र को 80 किलोमीटर से घटाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। राजस्थान में BSF का अधिकार क्षेत्र 50 किलोमीटर ही रहेगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 11 अक्टूबर 2021 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, “मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय राज्यों और जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल पूरे क्षेत्र तथा गुजरात, राजस्थान में पचास किलोमीटर के भीतर का क्षेत्र और पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम की 50 किमी का दायरा बीएसएफ के अधीन होगा।” केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल अधिनियम 1968 (1968 का 47) की धारा 139 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर यह कदम उठाया है।

पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस फैसले को पंजाब के साथ धोखा करार दिया है। उनका कहना है कि इससे आधे से अधिक पंजाब केंद्र सरकार के कंट्रोल में चला गया है। उन्होंने ट्विटर पर कहा है कि मैं भारत सरकार के इस एकतरफा फैसले की कड़ी निंदा करता हूँ। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ लगे 50 किलोमीटर के दायरे को बीएसएफ के कंट्रोल में दे दिया गया है। यह संघवाद पर हमला है। वहीं सुनील जाखड़ ने कहा है कि केंद्र के फैसले से 50,000 वर्ग किमी में फैले पंजाब का 25,000 वर्ग किमी का दायरा सीधे तौर पर केंद्र के कंट्रोल में चला जाएगा। अब पंजाब पुलिस केवल खड़ी रह जाएगी। पंजाब प्रांत के 6 जिले अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़े हुए हैं, पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरण तरण, फ़िरोज़पुर और फाजिल्का। आतंकी हेपेन, ड्रोन और नशीले पदार्थ इन्हीं जिलों से बाई देश में पहुंचाए जाते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्रालय के बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया और केंद्र के इस फैसले का सम्मान करने की अपील की है। उन्होने कहा कि जिस तरह से पंजाब में ड्रग्स की तस्करी और आतंकी खतरा बढ़ा है, अब केंद्र के फैसले से पंजाब सुरक्षित होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि बीएसएफ की बढ़ी हुई उपस्थिति और शक्तियाँ ही हमें मजबूत बनाएँगी। केंद्रीय सशस्त्र बलों को राजनीति में न घसीटें।

वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र के इस फैसले को तर्कहीन निर्णय और संघवाद पर हमला करार दिया है। बंगाल के मुताबिक, इसके जरिए केंद्र अब राज्यों के अंदरूनी मामलों में केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से हस्तक्षेप करने की कोशिश करेगा। पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री और टीएमसी नेता फिरहाद हकीम ने कहा, “केंद्र सरकार देश के संघीय ढाँचे का उल्लंघन कर रही है। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही है।” पश्चिम बंगाल के 8 जिलों पर यह आदेश लागू होगा। यह जिले हैं कूच बिहार, दर्जलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी, मालदा, मूषिर्दाबाद, नादिया, उत्तर 24 परगना। इन्हीं जिलों से गौ तस्करी, बंगलादेशी घुसपैठियों और रोहङियान के स्वागत द्वार हैं।

छठ पूजा : भाजपा क हुंकार के बाद बचाव में आई आआपा सरकार

दिल्ली बीजेपी ने छठ आयोजन की मनाही का विरोध करते हुए दिल्ली सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर अनुमति नहीं मिली तो उसके बावजूद छठ पर्व का आयोजन किया जाएगा। बीजेपी की दलील है कि अगर पूरी दिल्ली को अनलॉक किया जा सकता है और सभी तरह की एक्टिविटी को अनुमति दे दी गई है तो छठ के आयोजन पर मनाही किस बात को लेकर है। इसे लेकर दिल्ली बीजेपी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर विरोध प्रदर्शन भी किया जिसमें बीजेपी सांसद मनोज तिवारी चोटिल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दिल्ली बीजेपी ने दिल्ली सरकार के इस फैसले को पूर्वांचलियों का अपमान बताया है। वहीं सांसद परवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा, “केजरीवाल ने पूरी दिल्ली खोल रखी है लेकिन छठ पूजा आ रही है तो अचानक से तालिबानी फरमान सुना दिया कि छठ पूजा पर पाबंदी रहेगी। यह केजरीवाल बकरीद, ईद पर लॉकडाउन में खुली छूट देता था। आखिर केजरीवाल जी इतनी नफरत क्यों?”

दिल्ली में छठ पूजा को लेकर भाजपा के विरोध का असर देखने को मिल रहा है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में छठ पूजा के आयोजन की अनुमति को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल को लेटर लिखा है। पत्र में कहा गया है कि राजधानी में पिछले तीन महीने में कोविड महामारी नियंत्रण में है। सीएम केजरीवाल ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए छठ पूजा को अनुमति देने का आग्रह किया है।

एलजी को लिखे पत्र में सीएम केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में पिछले तीन महीनों से कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है। इसलिए कोरोना प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखने हुए छठ पूजा मनाने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली से सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से सटे अन्य राज्यों में भी नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए उचित प्रतिबंधों के साथ छठ पूजा मनाने की अनुमति दी गई है।

दिल्ली के लोगों और बीजेपी के हमलों के मद्देनजर केजरीवाल ने एलजी अनिल बैजल से अपील किया है कि जल्द से जल्द DDMA की बैठक बुलाकर छठ पूजा के लिए मंजूरी दिया जाए। मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से एलजी अनिल बैजल से कहा है कि दिल्ली के लोग बड़ी आस्था के छठ पूजा का पर्व हर साल मनाते हैं। यह त्योहार हमारी वैदिक आर्य संस्कृति का अहम हिस्सा है। छठ पूजा पर सूर्य देव और छठी मइया की पूजा करने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य समृद्धि और सुखों का लाभ होता है।

पत्र देखकर ऐसा लग रहा होगा जैसे इसके पहले प्रतिबन्ध किसी और ने लगाया था लेकिन ऐसा नहीं है। हालाँकि पिछली बार कोरोना के चलते दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर छठ पर्व का आयोजन नहीं किया गया था। तो वहीं इस साल ईद सहित कई आयोजनों की अनुमति दी गई जबकि उस समय कोरोना के मामले ज़्यादा थे। लेकिन छठ के मामले में इस साल भी दिल्ली डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने कोरोना की आड़ लेते हुए आदेश जारी कर सार्वजनिक जगहों पर छठ पर्व के आयोजन पर रोक लगा दी है। जिसे लेकर दिल्ली बीजेपी ने केजरीवाल सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। यहाँ तक की बीजेपी ने ईद पर अनुमति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री हाउस का घेराव करने की भी कोशिश की थी।

वहीं दो दिन पहले 12 अक्टूबर, 2021 को छठ पूजा पर प्रतिबंध को राजनीतिक मुद्दा बनते देखकर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर गेंद केंद्र के पाले में डालने की कोशिश की थी, ताकि इस मुद्दे पर भाजपा के हमले को कुंद किया जा सके। लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने फैसले की जिम्मेदारी सौंपते हुए गेंद वापस दिल्ली सरकार के पाले में डाल दी है। बता दें कि दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र भेजकर पर्व को मनाने की अनुमति और इसके संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने की माँग की थी।

डिप्टी सीएम का कहना था कि छठ पूजा उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में मनाए जाने वाला ऐतिहासिक पर्व है। यह पूर्वांचल समाज के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक त्योहार है। पूर्वांचल समाज के लोग इस पर्व को मनाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

तो वहीं छठ पूजा को लेकर दिल्ली सरकार और भाजपा के बीच मचे राजनीतिक घमासान के बीच केंद्र ने यह साफ कर दिया था कि इसके लिए अलग से दिशा निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के लिए पहले से पूरे देश के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मौजूद है और दिल्ली सरकार को उसी के अनुरूप फैसला लेना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रीय स्तर का एक एसओपी केंद्र की ओर से जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी राज्य अपने-अपने यहाँ संक्रमण की स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर त्योहारों के लिए दिशानिर्देश जारी कर रहे हैं। दिल्ली सरकार भी उसी के अनुरूप फैसला ले सकती है।

तो वहीं आज केजरीवाल के पत्र पर दिल्ली बीजेपी के मनोज तिवारी ने भी ट्वीट किया है, “जय छठी मैया… आस्था के आगे जिद टूटी… जितनी कहानी आज चिट्ठी में लिखे हो दिल्ली के मुख्यमंत्री जी.. ये सब प्रतिबंध लगाते याद नही था क्या? ख़ैर देर आए दुरुस्त आए… चलो मिल कर छठ मनाए… छठी मैया की जय।”

दरअसल, यह पूरा मामला तब गरमाया जब दिल्ली सरकार ने खुले में छठ के आयोजन पर प्रतिबन्ध लगा दिया। दिल्ली बीजेपी ने छठ आयोजन की मनाही का विरोध करते हुए दिल्ली सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर अनुमति नहीं मिली तो उसके बावजूद भी छठ पर्व का आयोजन किया जाएगा। बीजेपी की दलील थी कि अगर पूरी दिल्ली को अनलॉक किया जा सकता है और सभी तरह की एक्टिविटी को अनुमति दे दी गई है तो छठ के आयोजन पर मनाही किस बात को लेकर है।

बता दें कि राजधानी में छठ पूजा पर बैन हटाने की मॉँग करते हुए मनोज तिवारी के नेतृत्‍व में भाजपा नेताओं के एक समूह ने मंगलवार (12 अक्टूबर, 2021) को सीएम हाउस के पास प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्‍ली पुलिस ने सीएम हाउस के चारों ओर बैरिकेडिंग की थी। इसका मकसद प्रदर्शनकारियों को सीएम हाउस तक पहुँचने से रोकना था। छठ पूजा पर बैन के खिलाफ मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन के दौरान उन्‍हें चोटें भी आईं थी।

पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने काली माता मन्दिर में नवाया शीश,पूर्व चेयरमैन विजय बंसल समेत दर्जनों कांग्रेसी रहे मौजूद

  • राम नवमी के अवसर पर इलाकावासियों के सुख समृद्धि व स्वस्थ जीवन के लिए मनोकामना की 
  • बालाजी मंदिर में भी शीश नवाने पहुंचे चन्द्रमोहन,पिंजोर में कांग्रेसी कार्यकर्ता का जाना हाल
  • कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने चन्द्रमोहन का कालका पहुंचने पर गर्मजोशी से किया स्वागत

कालका न्यूज(14 अक्टूबर 2021):

मां दुर्गा के सिद्धी एवं मोक्ष देने वाला स्वरूप माँ सिद्धीदात्री के अराधना व उपासना दिवस महानवमी के पावन पर्व एवं नौवे नवरात्रे पर हरियाणा सरकार के उपमुख्यमंत्री व कालका से लगातार 4 बार विधायक रहे श्री चन्द्रमोहन ने महामाई काली माता के दरबार मे पूर्व चेयरमैन विजय बंसल एडवोकेट व अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ शीश नवाया।चन्द्रमोहन ने काली माता के दर्शन करते हुए इलाकावासियों के सुख समृद्धि व स्वस्थ जीवन के लिए मनोकामना की तो वही पूजा अर्चना करते हुए सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही यह भी प्रार्थना की है कि माता रानी का आशीर्वाद सभी पर बना रहे।कालका बाजार में चन्द्रमोहन के प्रति लोगो मे काफी जोश व उत्साह देखने को मिला।चन्द्रमोहन ने मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं व ऑन ड्यूटी कर्मियों से भी मुलाकात कर कुशलक्षेम जाना और कर्मियों द्वारा नवरात्रों के 9 दिन की गई सेवा के लिए भी आभार प्रकट किया। 

चन्द्रमोहन ने कहा कि कालका उनका घर है जहां के लोगो ने 4 बार उन्हें विधानसभा भेजा और प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया।कालका में आकर उन्हें बहुत खुशी महसूस होती है।उन्होंने कहा कि आज बड़े दुख की बात है कि जिस कालका को हमने विकास के पथ पर चलाया था उसे अब भाजपा ने जनविरोधी नीतियों से उतार दिया है।अब तो कालका पिंजोर के प्रमुख सड़क की हालत दयनीय है जोकि बेहद चिंता का विषय है।उन्होंने कहा कि वह इस बारे में आला अधिकारियों से बात करेंगे।विजय बंसल ने चन्द्रमोहन से आग्रह किया है कि कालका मंदिर के लिए स्थाई पार्किंग व अलग से श्राइन बोर्ड बनाने की मांग को पूरा करवाया जाए।चन्द्रमोहन ने इसके लिए सभी को कहा है कि वह इस मांग को पूरा करवाने के लिए पूरे प्रयास करेंगे। 

चन्द्रमोहन के साथ पूर्व चेयरमैन विजय बंसल एडवोकेट,सोहन लाल,दीपांशु बंसल,बहादुर राणा,ओम शुक्ला,बलविंदर मुरादनगर,राजू अभयपुर आदि पहुंचे तो वही कालका मंदिर में पहुंचने पर कालका बार एसोसिएशन प्रधान हरभजन राणा,पूर्व पार्षद आरके वैद,संजीव राजू पूर्व पार्षद,पूर्व पार्षद हरभजन,भूपेंद्र गौतम पूर्व ब्लाक कालका कांग्रेस प्रधान,सुरेंद्र चौहान,सागर सोनकर अध्यक्ष कालका एनएसयूआई,सितार चंद वाल्मीकि,सूरजभान दहिया सदरू खान आदि ने स्वागत किया।नगर पालिका कालका के पूर्व प्रधान प्रेम गुप्ता ने भी चन्द्रमोहन का कालका पहुंचने पर स्वागत किया। 

कालका काली माता मंदिर भंडारा कमेटी के प्रधान संजय बंसल पूर्व पार्षद,राजेश गुप्ता एडवोकेट व अन्य ने भी चन्द्रमोहन का भंडारा कमेटी की ओर से स्वागत किया और माता रानी के चरणों मे चन्द्रमोहन के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। 

चन्द्रमोहन ने काली माता मंदिर में माथा टेकने के बाद ऐतिहासिक बालाजी मंदिर टिपरा कालका में शीश नवाया।इसके ततपश्चात पिंजोर में कांग्रेस के बहुत पुराने कार्यकर्ता गुरूप्यारा के घर पहुंचकर उनके दामाद के आकस्मिक निधन पर खेद प्रकट किया तो वही उन्हें गुरूप्यरा का कुशलक्षेम जाना। 
फोटो केप्शन : श्री काली माता मंदिर कालका में शीश नवाते हुए पूर्व डिप्टी सीएम चन्द्रमोहन,विजय बंसल व अन्य।

विधि विभाग खुलवाने के लिए इनसो ने सौंपा ज्ञापन

सिरसा। चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय में विधि विभाग को खुलवाने को लेकर इनसो की जिला इकाई ने कुलपति को एक ज्ञापन सौंपा। कुलपति को सौंपे ज्ञापन में इनसो नेत्री संजू, छात्राएं खुशबू, पूनम वर्मा, दीपिका, अमृतपाल कौर, सिमरन, हीना ने बताया कि वे एलएलबी तृतीय वर्ष के विद्यार्थी हैं। उन्होंने बताया कि हमारी कक्षाएं 11 अक्तूबर से शुरू होनी थी, लेकिन ऐलनाबाद उपचुनाव के चलते कक्षाएं शुरू नहीं की गई हैं। कोरोना के चलते विभाग पहले ही बंद था और अब चुनावों के कारण विभाग बन्द कर रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों का नुकसान होना तय है। विद्यार्थियों ने बताया कि दिसंबर माह में परीक्षाएं होनी है, ऐसे में कक्षाएं शुरू न करवाकर उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। विद्यार्थियों ने बताया कि अगर कक्षाओं में देरी होती है तो सिलेबस पूर्ण नहीं होगा, जिससे वे परीक्षा की बेहतर तरीके से तैयारी नहीं कर पाएंगे।
इनसो नेत्री संजू ने कहा कि इनसो छात्र संगठन हमेशा से ही छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाता रहा है। आज इसी कड़ी में कुलपति को विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है, ताकि विद्यार्थियों का साल खराब न हो। इसलिए आपसे आग्रह है कि विद्यार्थियों की ऑफलाइन कक्षाएं तुरंत प्रभाव से शुरू की जाएं।

पंचकूला जिला की 3 अनाज मंडियों में अब तक 41457 मीट्रिक टन धान की, की जा चुकी है खरीद-उपायुक्त विनय प्रताप सिंह

  • तीनों अनाजमंडियों में 20390 मीट्रिक टन धान का उठान किया गया है

पंचकूला, 13 अक्तूबर:

जिला में खरीफ सीजन 2021-22 में सरकारी खरीद एजंसियों द्वारा धान की खरीद का कार्य प्रगति पर है। अब तक जिला की तीन मंडियों में 41457 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है, जिसमें से 24160 मीट्रिक टन हैफेड द्वारा तथा 17297 मीट्रिक टन हरियाणा वेयरहासिंग काॅरपोरेशन द्वारा खरीदी गई है। अब तक तीनों अनाजमंडियों में 20390 मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए उपायुक्त श्री विनय प्रताप सिंह ने बताया कि खरीफ सीजन 2021-22 में जिला में दो सरकारी खरीद एजंसियों द्वारा धान की खरीद की जा रही है।

उन्होंने बताया कि अब तक पंचकूला अनाज मंडी में 2597 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है जिसमें से 597 मीट्रिक टन हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा तथा 2000 मीट्रिक टन हैफेड द्वारा खरीद की गई है। इसी प्रकार बरवाला अनाज मंडी में 24710 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है जिसमें से 11600 मीट्रिक टन हरियाणा वेयरहासिंग कार्पोरेशन द्वारा व 13110 मीट्रिक टन हैफेड द्वारा खरीद की गई। उन्होंने बताया कि रायपुररानी अनाज मंडी में अब तक 14150 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है जिसमें से 5100 मीट्रिक टन हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा तथा 9050 मीट्रिक टन हैफेड द्वारा खरीद की गई है।

उन्होंने बताया कि तीनों मंडियों द्वारा अब तक 20390 मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है, जिसमें से पंचकूला अनाजमंडी में 1480 मीट्रिक टन धान का उठान किया गया है। 230 मीट्रिक टन हरियाणा वेयरहाउसिंग काॅरपोरेशन व 1250 मीट्रिक टन हैफेड द्वारा धान का उठान किया गया है। इसी प्रकार बरवाला अनाजमंडी में 14110 मीट्रिक टन धान का उठान हुआ हैं, जिसमें से 4110 मीट्रिक टन धान का उठान हरियाणा वेयरहाउसिंग काॅरपोरेशन द्वारा व 10000 मीट्रिक टन उठान हैफेड द्वारा किया गया है। उन्होंने बताया कि रायपुररानी अनाजमंडी में 4800 मीट्रिक टन धान का उठान हुआ है, जिसमें 1200 मीट्रिक टन धान का उठान हरियाणा वेयरहाउसिंग काॅरपोरेशन द्वारा व 3600 मीट्रिक टन उठान हैफेड द्वारा किया गया है।

पंचकूला जिला में बरवाला, रायपुररानी व पंचकूला में स्थापित तीन अनाज मंडियों में सरकारी खरीद एजंसियों नामतः हैफेड तथा हरियाणा वेयरहासिंग कार्पोरेशन द्वारा फसलों की खरीद की जा रही है।