हैदराबाद एनकाउंटर के बाद CJI का बड़ा बयान, ‘ मेरा मानना है कि न्याय जैसे ही बदला बनेगा, वह अपना स्वरूप छोड़ देगा.’

सीजेआई बोबडे ने कहा, ”बदले से किया गया न्याय कभी इंसाफ नहीं हो सकता. न्याय बदले के रूप में नहीं होना चाहिए. मेरा मानना है कि न्याय जैसे ही बदला बनेगा, वह अपना स्वरूप छोड़ देगा.” उनका ये बयान हैदराबाद एनकाउंटर के बाद आया है..

नयी दिल्ली(ब्यूरो), 7/12:

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने बड़ा बयान दिया है. हैदराबाद एनकाउंटर के बाद उनका बयान काफी अहम हो जाता है. सीजेआई बोबडे ने कहा, ”बदले की भावना से किया गया न्याय कभी इंसाफ नहीं हो सकता. न्याय बदले के रूप में नहीं होना चाहिए. मेरा मानना है कि न्याय जैसे ही बदला बनेगा, वह अपना स्वरूप छोड़ देगा.”

बता दें कि हैदराबाद में शुक्रवार तड़के एक एनकाउंटर में पुलिस ने रेप के चार आरोपियों को ढेर कर दिया था. पुलिस का दावा है कि जब वह आरोपियों को लेकर घटनास्‍थल पर सीन को रीक्रिएट करने पहुंची थी, उसी समय इन आरोपियों ने भागने की कोशिश की, पुलिस ने उन्‍हें सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन उन्‍होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इसके बाद गोलीबारी में चारों की मौत हो गई.

जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई इमारत के उद्घाटन समारोह में जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, “मैं नहीं समझता हूं कि न्याय कभी भी जल्दबाजी में किया जाना चाहिए. मैं समझता हूं कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो ये अपना मूल स्वरूप खो देता है”. उन्होंने कहा कि न्याय को कभी भी बदले का रूप नहीं लेना चाहिए.

सीजेआई बोबडे ने कहा, देश में हाल की घटनाओं ने एक बार फिर से पुरानी बहस छेड़ दी है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपराधिक मामलों को निपटाने में लगने वाले समय को लेकर आपराधिक न्याय प्रणाली को अपनी स्थिति और दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करना चाहिए. लेकिन, मुझे नहीं लगता कि न्याय तुरंत हो सकता है या होना चाहिए. न्याय कभी भी बदले की जगह नहीं ले सकता.

बता दें कि ऐडवोकेट जीएस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. याचिका में कहा गया है कि एनकाउंटर में शामिल पुलिकर्मियों के खिलाफ एफआईआर की जानी चाहिए और जांच करके कार्रवाई की जानी चाहिए. इस मामले में कोर्ट सोमवार को सुनवाई करे

पीड़िता ने शुक्रवार सुबह में डॉक्टर से पूछा था कि ‘क्या मैं बच जाऊंगी?’

ज्ञात हो कि उन्नाव के बिहार थानाक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की युवती के साथ दुष्कर्म हुआ था. इसके बाद दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. युवती इसी मामले की पैरवी के लिए गुरुवार को रायबरेली जा रही थी. गुरुवार तड़के करीब चार बजे पीड़िता रायबरेली जाने के लिए ट्रेन पकड़ने बैसवारा स्टेशन के लिए निकली थी, तभी गांव के बाहर खेत में दोनों आरोपी व उनके तीन साथियों ने उसके ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.

नई दिल्ली(ब्यूरो):

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा ने मांग की है कि उन्नाव रेप केस में बलात्कारियों को एक महिने के भीतर फांसी हो. बता दें उन्नाव में आग के हवाले की गई दुष्कर्म पीड़िता की शुक्रवार रात दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई.

करीब 90 फीसदी झुलस चुकी पीड़िता को गुरुवार को एअरबस से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया था. अस्पताल की ओर से बताया गया कि शुक्रवार को रात 11:40 बजे पीड़िता ने आखिरी सांस ली. 

पीड़िता को शुक्रवार रात को 11:10 बजे कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम उसे संभालने में जुट गए, लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी. पीड़िता ने शुक्रवार सुबह में डॉक्टर से पूछा था कि क्या मैं बच जाऊंगी?’ उसने अपने भाई से कहा था कि अगर उसकी मौत हो जाती है तो दोषियों को नहीं छोड़ना.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पीड़िता को एअरलिफ्ट कराया गया था. पीड़िता को बंदरिया बाग और अर्जुनगंज होते हुए शहीद पथ रास्ते से एयरपोर्ट पहुंचाया गया था.

ज्ञात हो कि उन्नाव के बिहार थानाक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की युवती के साथ दुष्कर्म हुआ था. इसके बाद दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. युवती इसी मामले की पैरवी के लिए गुरुवार को रायबरेली जा रही थी. गुरुवार तड़के करीब चार बजे पीड़िता रायबरेली जाने के लिए ट्रेन पकड़ने बैसवारा स्टेशन के लिए निकली थी, तभी गांव के बाहर खेत में दोनों आरोपी व उनके तीन साथियों ने उसके ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.

राम मंदिर पर आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर काँग्रेस पार्टी के नेशनल हेराल्ड को शर्म आती है: संबित पात्रा

‘कांग्रेस पार्टी के माउथ पीस नेशनल हेराल्ड को अयोध्या फैसले से सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान की याद आती है. यह शर्मनाक है. क्या यह भारत के सुप्रीम कोर्ट को छोटा दिखाने का प्रयास नहीं है!’ नेशनल हेराल्ड ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने वही फैसला दिया जो विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी शुरूसे चाहती थी. पात्रा ने कहा कि भारत की न्याय प्रक्रिया पारदर्शी है और इसका विश्व में कोई मुकाबला नहीं है.

नई दिल्ली: अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले के बाद छपे लेख को लेकर कांग्रेस के मुख्यपत्र नेशनल हेराल्ड ने माफी मांगी है. साथ ही कहा है कि अखबार में छपे लेख में कही गई बातें लेखकर निजी राय है. इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने रविवार को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के मौके पर नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान जाने और राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर नेशनल हेराल्ड में की गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है. पार्टी मुख्यालय में बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा कि सोनिया गांधी को इन दोनों ही बातों को लेकर देश से माफी मांगनी चाहिए.

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पात्रा ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि करतारपुर कॉरिडोर और राम जन्मभूमि मामले में कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दोनों के चहेते विधायक और पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू भारतीय जत्थे के साथ पाकिस्तान जाने के बजाय पाकिस्तान के निमंत्रण पर अलग से वहां गए और इमरान खान की तारीफों के पुल बांधे.’ पात्रा ने कहा कि सिद्धू ने वहां जाकर सिख समुदाय के 14 करोड़ लोगों की ओर से इमरान की तारीफ की.

उन्होंने सवाल उठाया, ‘सिद्धू पहले यह बताएं कि उन्हें सिख समुदाय के 14 करोड़ लोगों का नुमाइंदा किसने बनाया. भारतीय सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार उन्हें किसने दिया?’

सिद्धू ने शनिवार को पाकिस्तान में अपने शायराना अंदाज में इमरान खान की तारीफ की थी. इस बात को लेकर संबित पात्रा ने कांग्रेस पार्टी और सिद्धू पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सिद्धू ने इमरान को सिकंदर से भी बड़ा बताते हुए उन्हें बब्बर शेर तक कहा. वह अपने आप ही सिखों के नुमाइंदे बन जाते हैं.

बीजेपी प्रवक्ता ने सिद्धू के हवाले से कहा कि उन्होंने वहां कहा था, ‘क्या मिलेगा किसी को मारकर जान से/मारना हो तो मार डालो एहसान से/दुश्मन मर नहीं सकता कभी नुकसान से/और सर उठाकर चल नहीं सकता मरा हुआ एहसान से.’

उन्होंने कहा, ‘सिद्धू क्या इस बात से यह कहना चाहते हैं कि इमरान खान ने सिखों पर बहुत बड़ा एहसान किया है और हिंदुस्तान इस एहसान के बोझ से छोटा हो गया है. सिद्धू ने वहां पाकिस्तान को बड़ा दिखाने की कोशिश की और मारने वाली बात से क्या वह यह कहना चाहते हैं कि हिंदुस्तान किसी को मारता है. जान से मारने का काम केवल इमरान और पाकिस्तान करता है. पुलवामा के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान को बचाने वाला बताना कांग्रेस और सिद्धू की मनोस्थिति को बताता है.’

बीजेपी प्रवक्ता ने इसके बाद नेशनल हेराल्ड पर बात करते हुए गांधी परिवार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह उनकी धरोहर है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर की गई टिप्पणी निंदनीय है.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी के माउथ पीस नेशनल हेराल्ड को अयोध्या फैसले से सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान की याद आती है. यह शर्मनाक है. क्या यह भारत के सुप्रीम कोर्ट को छोटा दिखाने का प्रयास नहीं है!’ नेशनल हेराल्ड ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने वही फैसला दिया जो विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी शुरूसे चाहती थी. पात्रा ने कहा कि भारत की न्याय प्रक्रिया पारदर्शी है और इसका विश्व में कोई मुकाबला नहीं है.

वामपंथियों के इतिहास पर भरी पड़ा राम लल्ला का अस्तित्व

इसमे विचारणीय प्रश्न यह है कि इस सर्वेक्षण को रोमिला थापर और इरफान हबीब जैसे वामपंथि झुठला रहे थे और इसका मजाक बना रहे थे तो इनके लिखे साहित्य कितने विश्वसनीय है ?
अब जब विवाद का निस्तारण हो चुका है सभी पक्ष संतुष्ट है पूरे देश के नागरिक सम्मान कर रहे है केन्द्र सरकार का दायित्व है कि शीघ्र ही इस फैसले का ट्रस्ट बनाकर क्रियान्वयन करे

दिनेश पाठक अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर। विधि प्रमुख विश्व हिन्दु परिषद

आखिर देश का बहुप्रतिक्षित निर्णय एक ऐतिहासिक निर्णय के रुप मे सामने आ ही गया ! देश की सरकारों और अदालतों ढुलमुल रवैये से परिचित देश की जनता के सामने मुख्यन्यायधीश रंजन गोगोई ने न्यायपालिका की समृद्ध ,बृहद एवं सम्मानजनक छवि पेश की राम जन्मभूमि के निर्णय से देश के आमजन मे न्यायपालिका के प्रति आस्था मे अकल्पनीय वृद्धि हुई है !

1949 से लम्बित प्रकरण रामजन्म भूमी बाबरी मस्जिद का सत्तर साल बाद उस समय निपटारा हो गया जब देश की सर्वोच्च अदालत ने शनिवार 9 नवम्बर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया ।

माननीय मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के अन्य सदस्य माननीय न्यायाधीश गण जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस चन्द्रचूड, जस्टिस ए नजीर ने चालीस दिन लगातार चली सुनवाई को निर्णय तक पहुंचा कर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुये रामलला को अयोध्या मे विरजमान कर दिया। देश के लिये सबसे अच्छी खबर इस निर्णय मे यह रही कि निर्णय बहुमत से नही सर्वमत से आया पीठ के किसी भी सदस्य ने किसी भी मुद्दे पर अपने सहयोगी न्यायाधीश से असहमति नही जताई सबने पूरा निर्णय एकमत होकर दिया जो इस निर्णय को ऐतिहासिक बनाता है जो न्यायपालिका के लिये एक लैणडमार्क निर्णय होगा ।

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बिल्कुल अन्तिम है और देश के हर नागरिक को इसका सम्मान करना चाहिये हालांकि कोई भी पक्ष इसका रिव्यू कर सकता है जिसे सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही सुन सकता है ।

इस ऐतिहासिक फैसले सबसे बडी बात यह रही कि न्यायालय ने इसका फैसला आस्था पर न करके मामले के तथ्य और सबूतो के आधार किया जिस कारण फैसला सर्वानुमति से आया ! इस फैसले मे तथ्यो का गहराई से विश्लेषण किया सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली स्थान पर नही बनी इसके नीचे कोई ढांचा था लेकिन वो ढाचा इस्लामिक नही था इसके लिये सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्यो को सही माना जिसने अपने सर्वेक्षण मे बाबरी मस्जिद ने नीचे धर्मिक ढांचा माना और इस सर्वेक्षण को सुप्रीम कोर्ट नकार नही सका। इसमे विचारणीय प्रश्न यह है कि इस सर्वेक्षण को रोमिला थापर और इरफान हबीब जैसे वामपंथि झुठला रहे थे और इसका मजाक बना रहे थे तो इनके लिखे साहित्य कितने विश्वसनीय है ?

सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यो को देखते हुये यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर अपना निर्बाद अधिकार को साबित नही कर पाया इस बात के भी सबूत नही मिले कि ब्रिटिश काल मे 18 वीं सदी तक नमाज वहां पढ़ी जाती थी लेकिन हिन्दुओ ने पूजा करना नही छोडा। इस तरह न्यायलय ने तथ्यो का गहराई से विश्लेषण कर 1885 मे संत रघुवरदास द्वारा फैजाबाद की जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक 134 वर्ष पुराने विवाद का अंत मुख्य न्यायाधीश ने अपनी सेवानिवृत की तारीख से आठ दिन पहले एक निश्चित समय सीमा मे रहते सब कुछ छोडकर कर दिया। इसके लिये सभी पांचो न्यायाधीश श्रद्धा और नमन के पात्र है जिनकी दृढ इच्छा शक्ति के चलते सैकडो बर्षो से चले आ रहे तनाव के माहौल को शांत कर दिया। इस कार्य मे जितना श्रेय न्याये को है उतना ही विवाद से समबन्धित पक्षकारों का उनके वकीलों का और उत्तर प्रदेश और केन्द्र सरकार को भी जाता है जिन्होंने इस विवाद के निपटारे को अंजाम तक पहुचाने मे न्यायालय का सहयोग किया ! विशेषकर केन्द्र की भाजपा सरकार का। क्योकि विवाद बहुत पुराना था बहुत सरकारे बनी क ई प्रधानमंत्री आसीन हुये लेकिन किसी सरकार ने कभी ऐसी इच्छा शक्ति नही दिखाई कि इस विवाद का निपटारा हो क्योकि नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक सारे प्रधानमंत्री को एक डर था कि यदि इसका फैसला आता है तो उसके बाद एक समुदाय उनसे नाराज हो जायेगा साथ ही यह भी डर था कि फैसले के बाद देश मे क्या हालात होंगे जिसके चलते कोई सरकार नही चाहती थी कि इसका फैसला हो।

लेकिन पहली बार देश मे ऐसी सरकार आई जिसका नेतृत्व नरेन्द्र मोदी कर रहे है और सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र सरकार ने पूरा सहयोग तो किया ही दोनो को एक दूसरे पर यकीन था केन्द्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट पर कि वो इसका फैसला कर सकती है एवं सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र सरकार पर कि वो फैसले के बाद स्थिति को संभाल लेगी जैसे कि कश्मीर मे संभाला।

अब जब विवाद का निस्तारण हो चुका है सभी पक्ष संतुष्ट है पूरे देश के नागरिक सम्मान कर रहे है केन्द्र सरकार का दायित्व है कि शीघ्र ही इस फैसले का ट्रस्ट बनाकर क्रियान्वयन करे

राम मंदिर पर आए फैसले ने ओवैसी के बिगड़े बोल

नई दिल्ली: 

अयोध्या मामला:

अयोध्या भूमि विवाद को लेकर पांच जजों की पीठ ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित ढांचे पर अपना एक्सक्लूसिव राइट साबित नहीं कर पाया. कोर्ट ने विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को देने का फैसला सुनाया, तो मुसलमानों को दूसरी जगह जमीन देने के लिए कहा है. AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने फैसला आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है. ओवैसी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, “मैं कोर्ट के फैसले से संतुष्‍ट नहीं हूं. सुप्रीम कोर्ट वैसे तो सबसे ऊपर है, लेकिन अपरिहार्य नहीं है. हमें संविधान पर पूरा भरोसा है, हम अपने अधिकार के लिए लड़ रहे हैं, हमें खैरात के रूप में 5 एकड़ जमीन नहीं चाहिए. हमें इस पांच एकड़ जमीन के प्रस्‍ताव को खारिज कर देना चाहिए. हम पर कृपा करने की जरूरत नहीं है.”

ओवैसी ने आगे कहा, ”अगर मस्जिद वहां पर रहती तो सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला लेती. यह कानून के खिलाफ है. बाबरी मस्जिद नहीं गिरती तो फैसला क्या आता है. जिन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराया, उन्हें ट्रस्ट बनाकर राम मंदिर बनाने का काम दिया गया है.”

सुप्रीम कोर्ट के पांचों जजों की सहमति से फैसला सुनाया गया है. फैसला पढ़ने के दौरान पीठ ने कहा कि ASI रिपोर्ट के मुताबिक नीचे मंदिर था. CJI ने कहा कि ASI ने भी पीठ के सामने विवादित जमीन पर पहले मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं. CJI ने कहा कि हिंदू अयोध्या को राम जन्म स्थल मानते हैं. हालांकि, ASI यह नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी. मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि वहां दोनों ही पक्ष पूजा करते थे. रंजन गोगोई ने कहा कि ASI की रिपोर्ट के मुताबिक खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनी थी. साथ ही सबूत पेश किए हैं कि हिंदू बाहरी आहते में पूजा करते थे.

साथ ही CJI ने कहा कि सूट -5 इतिहास के आधार पर है जिसमें यात्रा का विवरण है. सूट 5 में सीतार रसोई और सिंह द्वार का जिक्र है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए शांतिपूर्ण कब्जा दिखाना असंभव है. CJI ने कहा कि 1856-57 से पहले आंतरिक अहाते में हिंदुओ पर कोई रोक नहीं थी. मुसलमानों का बाहरी आहते पर अधिकार नहीं रहा.

SC orders that the disputed land must be given to Hindus.

BIG Breaking : SC orders that the disputed land must be given to Hindus. Centre to formulate a scheme within 3 months.
Muslims must be given alternate land.

AYODHYAVERDICT

A suitable plot of 5 acres must be granted to Sunni Waqf Board to set up a Mosque. The disputed land at Ayodhya must be given to a Board of Trustees for construction of #RamMandir. Centre to formulate scheme within 3 months.

AYODHYAVERDICT

#AYODHYAVERDICT

[09/11, 11:00 AM] www.demokraticfront.com: Muslims offered prayer inside the inner courtyard while the same was done by Hindus in the outer court yard : SC

AYODHYAVERDICT

[09/11, 11:00 AM] www.demokraticfront.com: Sunni Board cannot claim adverse possession : SC

AYODHYAVERDICT

[09/11, 11:01 AM] www.demokraticfront.com: SC holds that the mosque was not abandoned; mere cessation of namaz by Muslims cannot lead to inference that mosque was abandoned and they lost possession

AYODHYAVERDICT

राम मंदिर पर फैसला आने से पहले काँग्रेस की कार्यसमिति की बैठक

चंडीगढ़: 

राम मंदिर भूमि मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले कांग्रेस ने कार्यसमिति की बैठक बुलाई है. इसमें राम मंदिर मसले को लेकर पार्टी लाइन तय की जाएगी.

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस के सीनियर नेताओं के साथ अहम बातचीत करेंगी. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी भी दिल्ली लौट चुके हैं. वे भी इसमें शामिल होंगे. पहले रविवार को 4.30 यह बैठक होनी थी, लेकिन किन्हीं वजहों से इसे टाल दिया गया था.

देश के संभवत: सर्वाधिक चर्चित व विवादित अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में कल (शनिवार 9 नवंबर) सुबह 10:30 बजे सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाने जा रहा है.

इस मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद देश की शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. तभी से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने से पहले इस मामले में फैसला आ जाएगा.

अयोध्या मामले में फैसला कल सुबह 10:30 बजे, सारे देश में सुरक्षा के कड़े इंतेज़ाम

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट कल सुबह यानी 9 नवंबर को फैसला सुनाएगा. पांच जजों की पीठ यह फैसला सुनाएगी.
सूत्रों ने कहा कि न्यायाधीशों ने राज्य के अधिकारियों से पूछा कि कानून और व्यवस्था को बनाए रखने और इसे मजबूत करने के लिए क्या उन्हें किसी भी तरह की मदद की जरूरत है?

चंडीगढ़: 

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट कल सुबह यानी 9 नवंबर को फैसला सुनाएगा. पांच जजों की पीठ यह फैसला सुनाएगी. अयोध्या मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है. इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ यह फैसला सुनाएगी. यह भारत का सबसे पुराना मामला है. अयोध्या मामले में पक्षकार और पंच निर्वाणी अणी अखाड़े के परमाध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास ने कहा, ‘माहौल कोई बिगाड़ ही नहीं सकता है, हम लोग अयोध्यावासी सब मिलकर राम मंदिर का निर्माण करेंगे. इस पर कोई विचार न करे कोर्ट क्या कह रहे हैं. लड़ना होगा तो हम ही लड़ेंगे. यहां पर जो हो, एक धार्मिक व्यवस्था को जो व्यापार नहीं मिल रहा है उसपर ध्यान ना दें.’

वहीं इस मामले में मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, ‘हमारी अपील है, लोग शांति बनाए रखें. हम लोग साथ होंगे आज हम पूरी दुनिया को संदेश दे रहे हैं. हम भारत के वासी हैं, जो फैसला कोर्ट करेगा वह हम मानेंगे. हम हिन्दुस्तान को बड़ा देखना चाहते हैं. हमारे यहां कोई विवाद नहीं है, किसी के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं, तमाम साधू और मुस्लिम साथ दिखाई पड़ते हैं. पूरी दुनिया देख रही है हम एक हैं. यहां जात नहीं पूछी जाती है, यहां इंसानियत देखी जाती है, ये हमारे घर भी आते हैं और हम भी जाते हैं हम शान्ति चाहते हैं. सब रख रखाव सरकार के हाथ में है.’

यहां आपको बता दें कि अयोध्या जमीन विवाद के फैसले से पहले एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के साथ अति गोपनीय बैठक की. ऐसा मना जा रहा है कि बैठक में प्रदेश में कानून-व्यवस्था का न्यायाधीश ने जायजा लिया. सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी, डीजीपी ओम प्रकाश सिंह और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के साथ अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही पीठ के पांच न्यायाधीशों में से अन्य दो न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण भी मौजूद रहे.

अयोध्या मामले पर फैसला कभी भी आ सकता है, इसलिए बैठक में राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर केंद्रित चर्चा की गई. एक सूत्र ने कहा, ‘न्यायधीशों और राज्य अधिकारियों के बीच बैठक सुबह 11.30 बजे शुरू हुई और दोपहर 1 बजे खत्म हुई.’

सूत्रों ने कहा कि न्यायाधीशों ने राज्य के अधिकारियों से पूछा कि कानून और व्यवस्था को बनाए रखने और इसे मजबूत करने के लिए क्या उन्हें किसी भी तरह की मदद की जरूरत है?

छठ पूजा 2019 भव्यता के साथ संपन्न

छठ पूजा सूर्य, उषा, प्रकृति,जल, वायु और उनकी बहन छठी म‌इया को समर्पित है ताकि उन्हें पृथ्वी पर जीवन की देवतायों को बहाल करने के लिए धन्यवाद और कुछ शुभकामनाएं देने का अनुरोध किया जाए। छठ में कोई मूर्तिपूजा शामिल नहीं है। त्यौहार के अनुष्ठान कठोर हैं और चार दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं।

हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक छठ महाव्रत मनाया जाता है। इसमें भगवान सूर्यदेव की पूजा होती है। इस बार छठ पूजा 13 नवंबर, 2018 को है।​​ छठ व्रत खासतौर पर पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है।

छठ पर छठी मैया के जयकारे के साथ आराधना की जाती है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश राज्यों में यह प्रमुख तौर पर मनाया जाता है…

छठ व्रत कथा

दिवाली के 6 दिन बाद छठ मनाया जाता है। छठ के महाव्रत को करना अत्यंत पुण्यदायक है। छठ व्रत सबसे महत्त्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को होता है। सूर्योपासना का यह महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। छठ पर्व के लिए कई कथाएं प्रचलित हैं, किन्तु पौराणिक शास्त्रों में इसे देवी द्रोपदी से जौड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा था। द्रोपदी के व्रत के फल से पांडवों को अपना राजपाट वापस मिल गया था। इसी तरह छठ का व्रत करने से लोगों के घरों में समृद्धि और सुख आता है। छठ मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश सहित कई क्षेत्रों में छठ का महत्व है।

छठ पूजा या सूर्य षष्ठी या छठ व्रत में सूर्य भगवान की पूजा होती है और धरती पर लोगों के सुखी जीवन के लिए सूर्य देव के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन शक्ति का देवता माना जाता है। इसलिए छठ पर्व पर समृद्धि के लिए पूजा की जाती है।

सूर्य की पूजा से विभिन्न बीमारियों का इलाज संभव है। सूर्य पूजा के साथ स्नान किया जाता है। इससे कुष्ठ रोग जैसी गंभीर रोग भी दूर हो जाते हैं। छठ पर्व परिवार के सदस्यों और मित्रों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए भी मनाया जाता है।

छठ व्रत पूजा विधि

छठ देवी भगवान सूर्यदेव की बहन हैं। जिनकी पूजा के लिए छठ मनाया जाता है। छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। छठी मैया का ध्यान करते हुए लोग मां गंगा-यमुना या किसी नदी के किनारे इस पूजा को मनाते हैं। इसमें सूर्य की पूजा अनिवार्य है साथ ही किसी नदी में स्नान करना भी।इस पर्व में पहले दिन घर की साफ सफाई की जाती है। छठ पर्व पर गांवों में अधिक सफाई देखने को मिलती है। छठ के चार दिनों तक शुद्ध शाकाहारी भोजन किया जाता है, दूसरे दिन खरना का कार्यक्रम होता है, तीसरे दिन भगवान सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन भक्त उदियमान सूर्य को उषा अर्घ्य देते हैं।
छठ के दिन अगर कोई व्यक्ति व्रत को करता है तो वह अत्यंत शुभ और मंगलकारी होता है। पूरे भक्तिभाव और विधि विधान से छठ व्रत करने वाला व्यक्ति सुखी और साधनसंपन्न होता है। साथ ही निःसंतानों को संतान प्राप्ति होती है।

छठ अनुष्ठान विधि

छठ के दिन सूर्योदय में उठना चाहिए।
व्यक्ति को अपने घर के पास एक झील, तालाब या नदी में स्नान करना चाहिए।
स्नान करने के बाद नदी के किनारे खड़े होकर सूर्योदय के समय सूर्य देवता को नमन करें और विधिवत पूजा करें।
शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सूर्य को धुप और फूल अर्पण करें।

छठ पूजा में सात प्रकार के फूल, चावल, चंदन, तिल आदि से युक्त जल को सूर्य को अर्पण करें।
सर झुका कर प्रार्थना करते हुए

ॐ घृणिं सूर्याय नमः, ॐ घृणिं सूर्य: आदित्य:, ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा,
या फिर
ॐ सूर्याय नमः 108 बार बोलें।

अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराएं।