राजऋषि दशरथ मेडिकल कालेज में 55 लाख की लागत से बनेगा ऑक्सिजन संयंत्र

देश में मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की फ़िलहाल किल्लत है, जिसके लिए रिलायंस से लेकर टाटा और कई अन्य कंपनियाँ सामने आई हैं। टाटा को जब नए संसद भवन के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी तो इन्हीं लोगों ने उसकी आलोचना की थी। अंबानी-अडानी को ये लोग रोज गाली देते हैं। इसी तरह अब वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को भी निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही एक वर्ग दोहरा रवैया अपनाते हुए ये भी पूछ रहा है कि 18 से कम के उम्र वालों को वैक्सीन पहले ही क्यों नहीं दी?

अब जब देश कोरोना काल में एक तरह के मेडिकल आपातकाल से गुजर रहा है, ऐसे समय में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट देश में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए आया है। ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि वो दशरथ मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करेगा। देश में ऑक्सीजन की दिक्कत को देखते हुए ट्रस्ट ने ये बड़ा फैसला लिया है। इस ऑक्सीजन प्लांट को स्थापित करने में 55 लाख रुपए का खर्च आएगा।

‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए कहा कि इस समय पूरा देश कोरोना की दूसरी लहर से परेशान है, ऐसे में राम मंदिर की तरफ से भी जनहित में योगदान दिया जा रहा है। बता दें कि रामलला के अस्थायी मंदिर में दर्शन-पूजन पहले ही रोक दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ न जुटे। इसी तरह कुम्भ के अखाड़ों ने भी हरिद्वार में अब इसे प्रतीकात्मक रखने का फैसला किया।

इस खबर से गिरोह विशेष को ज़रूर परेशानी हो सकती है, जो लगातार मंदिर-मंदिर की रट लगाए हुए था और पूछा जा रहा था कि जिस देश में मंदिर बनवाए जाते हों, वहाँ स्वास्थ्य सिस्टम कैसे सुधरेगा? अब उन्हें आत्मचिंतन करने का समय आ गया है क्योंकि मंदिर सरकार नहीं, श्रद्धालु बनवा रहे हैं। हाँ, मंदिर की संपत्ति पर ज़रूर सरकार का कब्ज़ा है। क्या किसी अन्य मजहब में ऐसा होता है? हिसाब माँगा जाता है?

हाल ही में अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने इसी तरह का प्रोपेगंडा फैलाया था। स्वरा भास्कर को ये तो जानना ही चाहिए कि इस आपात स्थिति में राम मंदिर क्या कर रहा है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी दो और खबरें हैं, जो आजकल में ही आईं।

  1. राजस्थान के सांगनेर स्थित जामा मस्जिद में जब पुलिस लॉकडाउन का पालन कराने गई तो पुलिस पर ईंट-पत्थरों से हमला किया गया।
  2. गुजरात के कपड़वंज स्थित अली मस्जिद में भीड़ जुटाने से रोका गया तो पुलिस पर हमला हुआ।

अभी तक गिरोह विशेष के एक भी सेलेब्रिटी ने इन घटनाओं की निंदा नहीं की है। पिछले साल भी ऐसी कई घटनाएँ सामने आई थीं, ये नई नहीं हैं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि गाँवों में स्थित छोटे मंदिरों से लेकर हजारों वर्ष पुराने भव्य मंदिर तक कोरोना काल में जिस तरह से गरीबों की सेवा कर रहे हैं, उसे छिपाने के लिए राम मंदिर के दान का मुद्दा बार-बार उठाया जाता है? साथ ही इससे इस्लामी कट्टरपंथियों की करतूतों पर भी पर्दा डाला जाता है?

असली कारण यही है। पीएम केयर्स फंड में जिस तरह से मंदिरों ने आगे आकर बढ़-चढ़ कर दान दिया, उसकी प्रशंसा इन सेलेब्रिटीज ने नहीं की। कुम्भ को सही समय पर समाप्त कर के अखाड़ों ने बिना किसी के कहे ही जनहित में निर्णय लिया, उसकी तारीफ़ इन वामपंथी पत्रकारों ने नहीं की। IIT कानपुर के उस रिसर्च पर आँख मूँद लिया गया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि कुम्भ से कोरोना के प्रसार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

देश में मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की फ़िलहाल किल्लत है, जिसके लिए रिलायंस से लेकर टाटा और कई अन्य कंपनियाँ सामने आई हैं। टाटा को जब नए संसद भवन के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी तो इन्हीं लोगों ने उसकी आलोचना की थी। अंबानी-अडानी को ये लोग रोज गाली देते हैं। इसी तरह अब वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को भी निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही एक वर्ग दोहरा रवैया अपनाते हुए ये भी पूछ रहा है कि 18 से कम के उम्र वालों को वैक्सीन पहले ही क्यों नहीं दी?

असली दिक्कत ये नहीं है। अगर हम मंदिरों की सूची गिनाने लगें जिन्होंने कोरोना काल में गरीबों के भोजन से लेकर आमजनों में जागरूकता फैलाने का काम किया है तो कई पन्ने छोटे पड़ जाएँगे। सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि लिबरल गिरोह को ह्यूमन चेन टाइप की कोई स्टोरी आजकल मिल नहीं रही है क्योंकि तबलीगी जमात प्रकरण से लेकर अबकी रमजान में छूट की माँग तक, मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कहानियों का उनके पास भी अभाव है।

आपको याद होगा एक युवती ने लिखा था कि जब राम मंदिर के लिए चंदा माँगने के लिए लोग उसके घर आए तो वो कई मिनटों तक गुस्से में काँपती रही। एक महिला ने तो चंदा माँगने वालों की बेइज्जती करते हुए वीडियो भी पोस्ट कर मजे लिए थे। अब यही लोग मंदिरों से हिसाब माँगते हैं, जबकि इन मंदिरों को बनाने से लेकर इनमें पूजा-पाठ तक, इनका योगदान शून्य ही होता है। अब सोशल मीडिया मंदिर के रुपयों से हिसाब का सवाल लिए भरा पड़ा है।

हाल ही में स्वामीनारायण मंदिर ने अपने परिसर में ही कोविड केयर यूनिट स्थापित किया। वजह ये है कि मोदी काल में पौने 2 लाख किलोमीटर सड़कें, 12 नए AIIMS, 7 नए IIT-IIM-IIIT और 35 एयरपोर्ट्स बने हैं; इन आँकड़ों को छिपाने के लिए ये नैरेटिव तो बनाना पड़ेगा न कि ‘मोदी सरकार मंदिर बनवाती है।’ अभी तो 3 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला गैस योजना का लाभ मिलने और 11 करोड़ टॉयलेट्स बनवाने की बात हमने की ही नहीं।

मंदिर का पैसा सरकार रखती है। लेकिन, हज के लिए सब्सिडी सरकार देती है। कई राज्यों में मौलानाओं और मस्जिद के कर्मचारियों को वेतन सरकार देती है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दरगाह के लिए खजाने सरकार खोलती है। राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में CM की तस्वीर के साथ मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए विज्ञापन सरकार देती है। हज हाउस सरकार बनवाती है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग सरकार का मंत्रालय है।

अब जब इस कोरोना काल में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने अयोध्या के राजाश्री दशरथ मेडिकल कॉलेज में 55 लाख रुपए की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगाने का निर्णय लिया है, तो लिबरल गिरोह की जुबान सिल जाएगी। तबलीगी जमात के सुपर स्प्रेडर्स का बचाव करने वाले ये लोग श्रीराम मंदिर ट्रस्ट द्वारा ऑक्सीजन प्लांट लगाने या देश के हजारों मंदिरों द्वारा कोरोना के खिलाफ लड़ाई में योगदान दिए जाने पर चूँ तक न करेंगे।

रेलगाड़ियां बन्द करने की बजाय फेरे कम करने का अग्रिम सुझाव

पिछले महीने तक लग रहा था कि महामारी से तबाह हुई भारत की अर्थव्यवस्था संभल रही है। इस रिकवरी को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की विकास दर 10 से 13 प्रतिशत के बीच बढ़ने की भविष्वाणी की थी। लेकिन अप्रैल में कोरोना वायरस की दूसरी भयावह लहर के कारण न केवल इस रिकवरी पर ब्रेक लगा है बल्कि पिछले छह महीने में हुए उछाल पर पानी फिरता नज़र आता है। रेटिंग एजेंसियों ने अपनी भविष्यवाणी में बदलाव करते हुए भारत की विकास दर को दो प्रतिशत घटा दिया है। अब जबकि राज्य सरकारें लगभग रोज़ नए प्रतिबंधों की घोषणाएं कर रही हैं तो अर्थव्यवस्था के विकास में बाधाएं आना स्वाभाविक है। बेरोज़गारी बढ़ रही है, महंगाई के बढ़ने के पूरे संकेत मिल रहे हैं और मज़दूरों का बड़े शहरों से पलायन भी शुरू हो चुका है।

करणीदान सिंह, श्रीगंगानगर:

भारत एक बार फिर कोरोना संक्रमण की गिरफ़्त में आ गया। कोरोना संक्रमण की यह दूसरी लहर बहुत ज़्यादा ख़तरनाक साबित हो रही है और इसने भारत के शहरों को बुरी तरह जकड़ लिया है। कोरोना की इस दूसरी लहर में मध्य अप्रैल तक हर दिन संक्रमण के लगभग एक लाख मामले आने लगे। रविवार को भारत में कोरोना संक्रमण के 2,70,000 केस दर्ज किए गए थे और 1600 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी. एक दिन में यह संक्रमण और मौतों का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था।

ऐसे में रेल परिवहन पर बड़ा असर पड़ रहा है। प्रवासी श्रमिकों की घर वापीसी ने यह मुश्किलें और भी बढ़ा दी है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए रेलवे ने कई रेलगाड़ियों की आवाजाही बंद करने के सुझाव/ निर्देश दिये हैं।

कोरोना की दूसरी लहर का रेल यात्रीभार पर काफी असर महसूस किया जा रहा हैं। जेडआरयूसीसी सदस्य भीम शर्मा ने रेलवे अधिकारियों को अग्रिम सुझाव भेजा हैं कि किसी भी ट्रेन को पूर्णतः बंद करने की बजाय उसके फेरों में कमी करके संचालन जारी रखा जाना चाहिये। अगर किसी दैनिक ट्रैन का यात्रीभार कम आंका जा रहा हैं तो उसे त्रि-साप्ताहिक या द्वि साप्ताहिक के रूप में चलाया जाना चाहिये। किसी भी ट्रेन का संचालन पूरी तरह से बन्द करना उचित नही होगा।

कृषि सुधार क़ानूनों के पश्चात अब सम्पत्ति क्षतिपूर्ति कानून के खिलाफ सडक़ों पर उतरी किसान सभा

सम्पत्ति क्षतिपूर्ति कानून के खिलाफ सडक़ों पर उतरी किसान सभा
सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन : बोले आंदोलन को कुचलने की साजिश रची तो परिणाम भुगतेगी सरकार
सतीश बंसल सिरसा 20 अप्रैल:

हरियाणा सरकार द्वारा पारित सम्पत्ति क्षतिपूर्ति कानून 2021 के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर जिले के किसानों द्वारा सडक़ों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की गई और जिला उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया।

संयुक्त किसान मोर्चा के घटक हरियाणा किसान सभा के नेता रोशन सुचान, बलराज बणी, प्रितपाल सिद्धू और हरदेव जोश ने राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने बीती 18 मार्च को विधानसभा में विधेयक पारित कर आंदोलनों के दौरान होने वाली सम्पत्ति के नुक्सान की वसूली आंदोलनकारियों से किए जाने का प्रावधान किया है, जिसमें सरकार द्वारा पुलिस और प्रशासन को लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने के लिए असीमित शक्तियां दी गई हैं, जिससे आंदोलन करने वालों, समर्थकों, योजना बनाने वालों व सलाहकारों को सम्पत्ति के नुक्सान का दोषी करार देकर उनसे वसूली किए जाने का निरंकुश प्रावधान है। इसलिए आज प्रदेश के सभी जिलों में किसान सडक़ों पर उतरकर इस कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

विधेयक के बारे में: 

  • नुकसान की वसूली: यह विधेयक किसी जनसमूह, चाहे वह कानूनी हो अथवा गैर-कानूनी, द्वारा लोक व्यवस्था में उत्पन्न विघ्न के दौरान किसी व्यक्ति विशेष द्वारा किये गए संपत्ति के नुकसान की वसूली का प्रावधान करता है, इसमें दंगे और हिंसक गतिविधियाँ शामिल हैं।
  • पीड़ितों को मुआवज़ा: यह पीड़ितों के लिये मुआवज़ा भी सुनिश्चित करता है।
  • विस्तृत दायरा: नुकसान की वसूली केवल उन लोगों से नहीं की जाएगी जो हिंसा में लिप्त थे, बल्कि उन लोगों से भी की जाएगी जो विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व या आयोजन करते हैं , योजना में शामिल होते हैं और जो विद्रोहियों को प्रोत्साहित करते हैं।
  • दावा अधिकरण स्थापित करना: विधेयक में देयता या क्षतिपूर्ति का निर्धारण,  आकलन और क्षतिपूर्ति का दावा करने हेतु दावा अधिकरण के गठन का प्रावधान किया गया है। 
  • संपत्ति की कुर्की/ज़ब्ती: किसी भी व्यक्ति जिसके खिलाफ हर्ज़ाना राशि का भुगतान करने हेतु दावा अधिकरण में अपील की गई है, उसकी संपत्ति या बैंक खाते को सील करने की शक्ति प्रदान की गई है।
  • अधिकरण के खिलाफ अपील: पीड़ित व्यक्ति दावा अधिकरण के निर्णयों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर कर सकता है।
  • हर्ज़ाने को लेकर दावे से संबंधित कोई भी प्रश्न सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं होगा। 

सरकार का रुख:

  • सरकार की ज़िम्मेदारी: राज्य की संपत्ति की सुरक्षा करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है, चाहे वह संपत्ति निजी हो या सरकारी।
  • अधिकारों और उत्तरदायित्व  के मध्य संतुलन: लोकतंत्र में सभी को शांतिपूर्ण तरीके से बोलने और विरोध प्रकट करने का अधिकार है, लेकिन संपत्ति को नुकसान पहुंँचाने का अधिकार  किसी को भी नहीं है।
  • निवारण: हिंसक गतिविधियों को अंज़ाम देने और इसका आयोजन करने वालो के या इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने हेतु सरकार के पास एक कानूनी ढांँचा होना चाहिये।

किसान नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार शांतिपूर्वक चल रहे किसान आंदोलन को कुचलने की नाकाम कोशिश करने के लिए यह कानून लेकर आई है जबकि सरकार सडक़ों खुद खोद रही है। ऐसे दमनकारी कानून अंग्रेजी राज की याद दिलाते हैं, जिनके विरोध में शहीद भगत सिंह सरीखे नौजवानों को असैम्बली में बम फैंकने के लिए मजबूर होना पड़ा था। किसान आंदोलन शांतिपूर्वक चल रहा है और पिछले पांच महीनों से सम्पत्ति के नुक्सान की कोई घटना नहीं हुई है, परन्तु सरकार किसानों-मजदूरों के शांतिपूर्वक आंदोलनों पर पुलिस बल और हजारों मुकदमे दर्ज करके तानाशाहीका सबूत दे रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

किसान सभा ने राष्ट्रपति से मांग कर सम्पत्ति क्षतिपूर्ति अधिनियम कानून 2021 को रद्द करने, किसानों पर बने मुकदमे रद्द करने ओर आंदोलन के दमन पर रोक लगाने की मांग कर प्रदेश सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोरोना के नाम पर आंदोलन कुचलने की कोशिश की तो सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

इस अवसर पर किसान सभा के नेता हरजिन्द्र भंगु, एआईएसएफ नेता अरमनान, सुमेर गिल, नवदीप विर्क, रूढ़ सिंह, सतनाम सिंह, दविन्द्र सिंह, गुरमेज सिंह, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह, गुरनाम सिंह करीवाला के अलावा अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से जगरूप सिंह चौबुर्जा, बलवीर कौर गांधी, का० सुरजीत सिंह, गुरतेज बराड़ एडवोकेट, बलवीर फौजी, हरकिशन कम्बोज, राजकुमार, पालासिंह चीमा आदि उपस्थित थे।

लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984

  • इस अधिनियम के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक संपत्ति को दुर्भावनापूर्ण कृत्य द्वारा नुकसान पहुँचाता है तो उसे पाँच साल तक की जेल अथवा जुर्माना या दोनों सज़ा से दंडित किया जा सकता है। अधिनियम के प्रावधान को भारतीय दंड संहिता में भी शामिल किया जा सकता है।
  • इस अधिनियम के अनुसार, लोक संपत्तियों में निम्नलिखित को शामिल किया गया है-
    • कोई ऐसा भवन या संपत्ति जिसका प्रयोग जल, प्रकाश, शक्ति या उर्जा के उत्पादन और वितरण में किया जाता है।
    • तेल प्रतिष्ठान।
    • खान या कारखाना।
    • सीवेज स्थल।
  • लोक परिवहन या दूर-संचार का कोई साधन या इस संबंध में उपयोग किया जाने वाला कोई भवन, प्रतिष्ठान और संपत्ति।

थॉमस समिति:

  • के.टी. थॉमस समिति ने सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान से जुड़े मामलों में आरोप सिद्ध करने की ज़िम्मेदारी की स्थिति को बदलने की सिफारिश की। न्यायालय को यह अनुमान लगाने का अधिकार देने के लिये कानून में संशोधन किया जाना चाहिये कि अभियुक्त सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने का दोषी है।
    • दायित्व की स्थिति में बदलाव से संबंधित यह सिद्धांत,  यौन अपराधों तथा इस तरह के अन्य अपराधों पर लागू होता है। 
    • सामान्यतः कानून यह मानता है कि अभियुक्त तब तक निर्दोष है जब तक कि अभियोजन पक्ष इसे साबित नहीं करता।
  • न्यायालय द्वारा इस सुझाव को स्वीकार कर लिया गया। 

नरीमन समिति :

  • इस समिति की सिफारशें सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की क्षतिपूर्ति से संबंधित थीं।
  • सिफारिशों को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का आरोप तय करते हुए संपत्ति में आई विकृति में सुधार करने के लिये क्षतिपूर्ति शुल्क लिया जाएगा।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालयों को भी ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेने के दिशा-निर्देश जारी किये तथा सार्वजनिक संपत्ति के विनाश के कारणों को जानने तथा क्षतिपूर्ति की जाँच के लिये एक तंत्र की स्थापना करने को कहा।

मोब लिंचिंग के शिकार इन्स्पैक्टर की बेटी ने की सीबीआई जांच की मांग

अधिकारियों ने बताया कि मामले में आरोपियों को पकड़ने के लिए एक पुलिस टीम के साथ कुमार गांव में गए थे. यह मामला किशनगंज पुलिस थाने में दर्ज है. उन्होंने बताया किभीड़ ने उन्हें घेर लिया और उन पर हमला कर दिया था. इसके बाद पंजिपारा चौकी से पुलिसकर्मियों की एक टीम ने उन्हें भीड़ से छुड़ाया और इस्लामपुर सदर अस्पताल ले गई, जहां डॉक्‍टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. उनकी पहचान फिरोज आलम, अबुजर आलम और सहीनुर खातून के रूप में हुई है.

किशनगंज(बिहार)/ नयी दिल्ली :

बिहार के किशनगंज जिला के नगर थाना प्रभारी अश्विनी कुमार की शनिवार (अप्रैल 10, 2021) को पश्चिम बंगाल में हत्या के मामले में उनकी बेटी ने इसे षड़यंत्र करार देते हुए सीबीआई जाँच की माँग की है। वहीं उनकी पत्नी ने सर्किल इंस्पेक्टर पर केस दर्ज करने की माँग की है। 

मामले में किशनगंज के एसडीपीओ जावेद अंसारी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि SHO की हत्या करने वाले भीड़ को वहाँ की एक मस्जिद से बकायदा अनाउंस करके जुटाया गया था। एसडीपीओ के मुताबिक दो लोगों ने हल्ला कर पहले लोगों को बुलाया और फिर देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई। एसडीपीओ ने कहा कि थानाध्यक्ष की हत्या करने के मामले में मस्जिद से ऐलान कर लोगों को इकट्ठा किया गया था कि चोर आ गए हैं, डाकू आ गए हैं जिसके बाद भीड़ ने थानेदार की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

रविवार (अप्रैल 11, 2021) को किशनगंज थाना प्रभारी अश्विनी कुमार और उनकी माँ उर्मिला देवी का पूर्णिया जिले में उनके पैतृक गाँव में अंतिम संस्कार किया गया। रविवार को सुबह ही अश्विनी कुमार की 75 वर्षीया माँ उर्मिला देवी ने बेटे का शव देखते ही दम तोड़ दिया था। इसके बाद दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान शहीद अश्विनी अमर रहे के नारे से पूरा इलाका गूँज उठा।

मीडिया से बात करते हुए, अश्विनी कुमार की बेटी नैंसी ने अपने पिता की निर्मम हत्या के पीछे साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने ऑपरेशन के दौरान अपने पिता के साथ अन्य अधिकारियों की भूमिका पर आशंका जताई। उसने सवाल किया कि जब उनके पिता को मार डाला गया, तो बाकी लोग सुरक्षित वापस कैसे आ गए। उन्हें एक खरोंच भी नहीं आई। नैंसी ने सीबीआई जाँच की माँग की है।

नैंसी ने रोते हुए कहा, “यह एक साजिश है और मैं सीबीआई जाँच की माँग करती हूँ। उन्होंने बंदूकें होने के बावजूद मेरे पिता को अकेला छोड़ दिया। न केवल सर्किल इंस्पेक्टर मनीष कुमार, बल्कि भागने वाले सभी लोगों को दंडित किया जाना चाहिए। मेरे पिता की मृत्यु के बाद मेरी दादी भी सदमे से मर गईं।”

अश्विनी कुमार की पत्नी मीनू स्नेहलता ने किशनगंज के सर्किल इंस्पेक्टर मनीष कुमार समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज करने की माँग की है। पुलिस को दिए आवेदन में उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके पति की निर्मम हत्या में मनीष कुमार का हाथ है। छापेमारी के दौरान मनीष कुमार ने जो लापरवाही और कर्तव्यहीनता दिखाई, उसे पुलिस प्रशासन ने भी माना और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसने साबित कर दिया कि इस हत्याकांड में मनीष कुमार निश्चित रूप से संदेह के घेरे में है। मीनू ने मनीष को अपनी सास की हत्या के लिए भी अप्रत्यक्ष रूप से मनीष कुमार को जिम्मेदार ठहराया है।

अश्विनी कुमार के स्वजनों को पूर्णिया प्रक्षेत्र के सभी पुलिसकर्मियों ने एक दिन का वेतन (करीब 50 लाख रुपए) और आईजी ने 10 लाख देने की घोषणा की। वहीं मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद देने की बात कही। इसके साथ ही अनुकंपा पर घर के एक व्यक्ति को नौकरी देने की भी घोषणा की गई है। अश्विनी की बड़ी बेटी जहाँ बदहवास स्वजनों को सँभालने की कोशिश कर रही थी वहीं उनकी सबसे छोटी बेटी और बेटा सबसे बार- बार यही पूछ रहे थे कि पापा उठ क्यों नहीं रहे। बता दें कि इस मातम की वजह से गाँव में किसी के भी घर में दो दिनों तक चूल्हा नहीं जला।

प्रखंड क्षेत्र में रविवार को जगह-जगह श्रद्धांजलि दी गई और हत्यारे की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की माँग की गई। इस मामले में अब तक पश्चिम बंगाल से पाँच जबकि बिहार से तीन लोगों की गिरफ्तारी की गई है। मस्जिद से अनाउंस कर भीड़ इकट्ठा करने के मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड फिरोज और इजराइल थे जिनको भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले शनिवार को पुलिस ने मुख्य अभियुक्त फिरोज आलम ,अबुजार आलम और सहीनुर खातून की गिरफ्तारी की थी।

ये घटना पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के गोलपोखर पुलिस स्टेशन इलाके के गाँव पांतापारा में हुई। किशनगंज थाने के एसएचओ अश्विनी कुमार दलबल के साथ बाइक चोरी को पकड़ने बंगाल के पांतापाड़ा गाँव छापेमारी करने गए थे। भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला कर खदेड़ा। थानाध्यक्ष को घेर लिया और पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। आरोप है कि पश्चिम बंगाल की पुलिस ने सूचना के बावजूद बिहार पुलिस की टीम का कोई सहयोग नहीं किया।

जंगलों की आग से बचने के उपाय छुपे हैं ग्रामीण परिवेश में

चढ़ते पारे के साथ उत्तराखंड के जंगलों में फिर से आग भड़कने लगी है। 24 घंटे के भीतर ही प्रदेशभर में 50 नई घटनाएं हुईं, जिनमें बड़े पैमाने पर वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। जबकि, कई क्षेत्रों में जंगल की आग रिहायशी इलाकों के करीब पहुंच गई, जिससे ग्रामीणों और मवेशियों को खतरा बना हुआ है। वन विभाग, एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड आग पर काबू पाने में जुटी हुई हैं। हालांकि, जंगलों में जानबूझकर आग लगाने वाले शरारती तत्व भी बाज नहीं आ रहे हैं। वन विभाग की टीम ने तीन और आरोपितों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।  पखवाड़ेभर से उत्तराखंड के जंगल धधक रहे हैं। तमाम प्रयास के बावजूद लगातार बढ़ रही घटनाओं पर अंकुश लगाना मुश्किल साबित हो रहा है। बीते मंगलवार को हुई बारिश-बर्फबारी के बाद कुछ राहत जरूर मिली थी, लेकिन अब फिर से आग विकराल होने लगी है। 24 घंटे के भीतर प्रदेशभर में हुई 50 घटनाओं में कुछ 60 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इस दौरान गढ़वाल 47 और कुमाऊं में तीन घटनाएं हुईं। गढ़वाल में पौड़ी और टिहरी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। 

जंगलों में लगने वाली आग के पीछे का एक प्रमुख कारण ग्रामीणों द्वारा घास की अधिक माँग होना माना जाता रहा है लेकिन यह कारण अपने आप में  सिर्फ एक भ्रांति है। आग लगने के बाद फास्फोरस और पोटाश मिट्टी में वापस तो आते हैं लेकिन मानसूनी बारिश और पहाड़ी ढाल होने के कारण यह नदी-नालों में बह जाते हैं। इस कारण से  जमीन और अधिक बंजर और रूखी हो जाती है। साथ ही साथ आग लगने के कारण घास का महीन बीज भी जलकर खत्म हो जाता है। इस कारण घास का उत्पादन बढ़ने के बजाए हर वर्ष कम होता जाता है। इसी तरह चीड़ वनों से जुड़ी भ्रांतियां और उनके कुप्रबंधन के चलते भी वर्षों से हिमालयी वन जलते रहे हैं। यह अति आवश्यक है, कि वैज्ञानिक ढंग से इन प्रभावों को समझा जाए और आज की परिस्थितियों के हिसाब से वनाग्नियों से जुड़ी घटनाओं को समय से पहले रोका जाए। 

नैनीताल/मसूरी:

उत्तराखंड के जंगल पिछले कई दिनों से धू-धूकर जल रहे हैं। जंगल में लगी आग इतनी भीषण है जिसे बुझाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने केंद्र सरकार से मदद मांगी है। आग पर काबू पाने के लिए वायुसेना के हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं। कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 40 से ज्यादा जगहों पर आग लगी हुई है।

एमआई 17 हेलीकॉप्टरों की मदद से उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग बुझाई जा रही है। जंगलों में आग मुख्यतः जमीन पर गिरी सूखी घास-पत्तियों से फैलती है। उत्तराखंड के पहाड़ों में चीड़ के पेड़ों की अधिकता यहाँ आग फैलने का मुख्य कारण है। चीड़ की पत्तियाँ जिन्हें पिरूल भी कहा जाता है, अपनी अधिक ज्वलनशीलता की वजह से हिमालय की बहुमूल्य वन संपदा खत्म कर रही हैं।

यूकेफॉरेस्ट वेबसाइट के अनुसार वर्ष 2021 में अब तक जंगल में आग लगने की 1635 घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। जिस वजह से 4 लोगों की मौत के साथ ही 17 जानवरों की मौत भी हुई है। जंगल में आग लगने की वजह से 6158047.5 रुपए की वन संपदा जल कर ख़ाक हो गई।

इसी वेबसाइट पर आप जंगल में आग से प्रभावित स्थानों की लाइव जानकारी भी ले सकते हैं।

इस आग की वज़ह से पहले ही उत्तर भारत के तापमान में 0.2 डिग्री सेल्सियस की छलांग से मानसून पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। चीड़ के पेड़ हिमालय में आग फैलाने के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी तो हैं पर उन्हें काट देना ही आग रोकने का समाधान नहीं है। चीड़ के बहुत से फायदे भी हैं। उसे कई रोगों के इलाज में उपयोगी पाया गया है, जैसे इसकी लकड़ियाँ, छाल आदि मुँह और कान के रोगों को ठीक करने के अलावा अन्य कई समस्याओं में भी उपयोगी हैं।

चीड़ की पत्तियों से कोयला बना और बिजली उत्पादन कर आजीविका भी चलाई जा सकती है।

ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (टेरी ) के जैवविविधता विशेषज्ञ डॉ योगेश गोखले चीड़ के जंगलों में हर वर्ष लगने वाली आग की समस्या पर कहते हैं कि पिरूल के बढ़ने से आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है। नमी की वज़ह से आग को फैलने से रोका जा सकता है। जलती बीड़ी जंगलों में फेंक देना भी जंगल की आग के लिए उत्तरदायी है।

आग लगने की वजह से पर्यावरण को जो नुकसान पहुँच रहा है, उसे बचाने के लिए डॉ गोखले पिरूल के अधिक से अधिक इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहते हैं क्योंकि पिरूल हटने से बाकि वनस्पतियों का विकास होगा और मिश्रित जंगल बनने की वज़ह से भविष्य में आग लगने की घटनाओं में भी कमी आएगी। पालतू जानवरों के लिए चारा उपलब्ध होगा तो ग्रामीण इसके लिए पिरूल के जंगलों में आग भी नही लगाएँगे।

आईएफएस एडिशनल प्रिंसिपल, चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट उत्तराखंड डॉ एसडी सिंह से जब यह पूछा गया कि चीड़ के जंगलों में आग न लगे, सरकार इसके लिए क्या कदम उठा रही है तो उन्होंने बताया कि इसके लिए हर वर्ष कार्य योजना बनाई जाती है। फरवरी और मार्च में ही तय कर लिया जाता है कि कहाँ पर फायर क्रू स्टेशन बनाए जाने हैं और साथ में ही संचार साधन भी दुरस्त कर लिए जाते हैं। इसके अलावा जंगल में फायर लाइन बनाते रहते हैं और झाड़ी नहीं होने देते हैं। किसानों को भी साथ लेकर पत्तियाँ इकट्ठा की जाती हैं और खेतों के किनारे सफाई की जाती है ताकि आग खेतों तक न फैले।

पत्रिका की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग की घटनाओं को नैनीताल हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इसके स्थाई समाधान के लिए जंगलों में पहले से चाल व खाल बनाने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड में पारंपरिक रूप से पानी रोकने के लिए बनाए जाने वाले तालाबों को चाल व खाल कहते हैं, इनकी वजह से जमीन में नमी बनी रहती है और आग कम फैलती है।

भारत में औपनिवेशिक काल से पहले लोग वनों का उपभोग भी करते थे और रक्षा भी। अंग्रेजों ने आते ही वनों की कीमत को समझा, जनता के वन पर अधिकारों में कटौती की और वनों का दोहन शुरू किया।

जनता के अधिकारों में कटौती की व्यापक प्रतिक्रिया हुई और समस्त कुमाऊँ में व्यापक स्तर पर आन्दोलन शुरू हो गए। शासन ने दमन नीति अपनाते हुए प्रारम्भ में कड़े कानून लागू किए, परन्तु लोगों ने इन कानूनों की अवहेलना करते हुए यहाँ के जंगलों को आग के हवाले करना आरम्भ किया। फलस्वरूप शासन ने समझौता करते हुए एक समिति का गठन किया।

कुमाऊँ फॉरेस्ट ग्रीवेंस कमिटी

1921 में गठित कुमाऊँ फॉरेस्ट ग्रीवेंस कमिटी का अध्यक्ष तत्कालीन आयुक्त पी विंढम को चुना गया तथा इसमें तीन अन्य सदस्यों को शामिल किया गया। समिति ने एक वर्ष तक पर्वतीय क्षेत्र का व्यापक भ्रमण किया। समिति द्वारा यह सुझाया गया कि ग्रामीणों की निजी नाप भूमि से लगी हुई समस्त सरकारी भूमि को वन विभाग के नियंत्रण से हटा लिया जाए।

स्वतन्त्र भारत में वनों को लेकर बहुत से नए-नए नियम कानून बनाए गए। वर्तमान समय में उत्तराखंड की वन पंचायत जो पंचायती वनों का संरक्षण और संवर्धन खुद करती है, उन्हें अधिक शक्ति दिए जाने की आवश्यकता है।

डाउन टू अर्थ में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में आदिवासी बहुल क्षेत्र सबसे कम कार्बन उत्सर्जित करते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि समुदाय के पास जंगल का नियंत्रण रहने से वहाँ आग भी कम लगती है क्योंकि वह ही जंगल की रक्षा भी करते हैं।

जंगल में लग रही इस आग के समाधान पर वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरणविद राजीव नयन बहुगुणा कहते हैं कि उत्तराखंड के गाँवों की चार किलोमीटर परिधि में जंगलों से सरकारी कब्ज़ा हटा कर उन्हें ग्राम समुदाय के सुपुर्द किया जाना चाहिए।

मई-जून की गर्मियों में उत्तराखंड के जंगलों में आग सबसे ज्यादा फैलेगी और हेलीकॉप्टर से पानी गिरा आग बुझाना, इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। न ही चीड़ के पेड़ों को काट-काट कर हम अपने कृत्यों से लगी इस आग को रोक सकते हैं। समुदाय ने मिल कर ही मानव जाति का निर्माण किया है और वह ही इसे और अपने पर्यावरण को बचा भी सकता है।

भारतीय पुरातत्व विभाग को काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद के विवादित स्थल पर सर्वेक्षण कराने की मंजूरी

रिपोर्ट्स के अनुसार मामले में वादी पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि 1991 में दायर याचिका में मांग की गई थी कि मस्जिद ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर मंदिर का एक अंश है. जहां हिन्दू आस्थावानों को पूजा-पाठ, दर्शन और मरम्मत का अधिकार है। स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर के पक्षकार पंडित सोमनाथ व्यास और अन्य ने याचिका दायर की थी।

  • भारतीय पुरातत्व विभाग को काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद के विवादित स्थल पर सर्वेक्षण कराने की मंजूरी
  • वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के आवेदन को स्वीकार कर लिया
  • सर्वेक्षण के दौरान मुस्लिम समुदाय से संबंधित लोगों को विवादित स्थल पर नमाज अदा करने से रोका नहीं जाएगा

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के पक्ष में फैसला देते हुए कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर का रडार तकनीक से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मंजूरी दे दी है। सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट आशुतोष तिवारी की अदालत ने गुरुवार को लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के आवेदन को स्वीकार कर लिया।

अदालत में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजयशंकर रस्तोगी की तरफ से वर्ष 1991 से लंबित इस प्राचीन मुकदमे में आवेदन दिया था। जिसमें कहा गया कि मौजा शहर खास स्थित ज्ञानवापी परिसर के आराजी नंबर 9130, 9131, 9132 रकबा एक बीघे नौ बिस्वा जमीन का पुरातात्विक सर्वेक्षण रडार तकनीक से करके यह बताया जाए कि जो जमीन है, वह मंदिर का अवशेष है या नहीं। साथ ही विवादित ढांचे का फर्श तोड़कर देखा जाए कि 100 फीट ऊंचा ज्योतिर्लिंग स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ वहां मौजूद हैं या नहीं। दीवारें प्राचीन मंदिर की हैं या नहीं।

काशी

रडार तकनीक से सर्वेक्षण से जमीन के धार्मिक स्वरूप का पता चल सकेगा। वाद मित्र रस्तोगी की दलील थी कि 14वीं शताब्दी के मंदिर में प्रथम तल में ढांचा और भूतल में तहखाना है, जिसमें 100 फीट ऊंचा शिवलिंग है, यह खुदाई से स्पष्ट हो जाएगा। मंदिर हजारों वर्ष पहले 2050 विक्रम संवत में राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था। फिर सतयुग में राजा हरिश्चंद्र और वर्ष 1780 में अहिल्याबाई होलकर ने जीर्णोद्धार कराया था। उन्होंने यह भी कहा था कि जब औरंगजेब ने मंदिर पर हमला किया था तो उसके बाद 100 वर्ष से ज्यादा समय तक यानी वर्ष 1669 से 1780 तक मंदिर का अस्तित्व ही नहीं था।

सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता अभय नाथ यादव ने कहा कि दावे के अनुसार, जब मंदिर तोड़ा गया, तब ज्योतिर्लिंग उसी स्थान पर मौजूद था, जहां आज है। उसी दौरान राजा अकबर के वित्तमंत्री टोडरमल की मदद से नरायन भट्ट ने मंदिर बनवाया था, जो उसी ज्योतिर्लिंग पर बना है। ऐसे में विवादित ढांचा के नीचे दूसरा शिवलिंग कैसे आ सकता है। इसलिए खुदाई नहीं होनी चाहिए।

रामजन्म भूमि की तरह पुरातात्विक रिपोर्ट मंगाए जाने पर कहा था कि स्थितियां विपरीत हैं। वहां साक्षियों के बयान के बाद विरोधाभास होने पर कोर्ट ने रिपोर्ट मंगाई थी, जबकि यहां के मामले में अभी तक किसी का साक्ष्य हुआ ही नहीं है। ऐसे में साक्ष्य आने के बाद विरोधाभास होने पर कोर्ट रिपोर्ट मंगा सकती है। दलील दी कि साक्ष्य एकत्र करने के लिए रिपोर्ट नहीं मंगाई जा सकती। यह भी कहा कि विवादित ढांचा खोदे जाने से शांतिभंग भी हो सकती है।

कोर्ट का दायित्व है कि वहां शांति बनी रहे। इसी तरह से सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड से मिलती-जुलती दलीलें अंजुमन इंतजामिया कमेटी की ओर से भी पेश की गई। अदालत में लार्ड विश्वेश्वरनाथ की तरफ से अमरनाथ शर्मा, सुनील रस्तोगी, रितेश राय, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से रईस अहमद खान, अफताब अहमद व मुमताज अहमद और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से तौफीक खान कोर्ट में मौजूद थे।

मुख्तार अंसारी रिटर्न्स

अंसारी को यूपी लाए जाने पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, ‘मैने जितना भी अखबार में पढ़ा और टीवी पर देखा है, उसमें मुख्तार के परिजन कह रहे हैं कि हमें इंसाफ के लिए कोर्ट पर भरोसा है लेकिन बीजेपी की सरकार जिस तरह से काम करती है, उसमें यह उम्मीद कर पाना नामुमकिन है कि किसी को भी न्याय मिल पाएगा। अखिलेश के बयान पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। शर्मा ने कहा, ‘सीएम के पद पर शपथ लेने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ ने अपराध और अपराधी तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने का ऐलान किया था। किसी व्यक्ति विशेष को लेकर यह नीति नहीं है।’

चंडीगढ़/लखनऊ:

बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से लेकर यूपी पुलिस बांदा के लिए रवाना हो गई है। मंगलवार (अप्रैल 6, 2021) सुबह यूपी पुलिस की टीम रोपड़ जेल पहुँची। यहाँ जेल अधिकारियों ने कड़ी सुरक्षा के बीच मुख्तार अंसारी को यूपी पुलिस की कस्टडी में सौंप दिया। तकरीबन दो बजे यूपी पुलिस की टीम मुख्तार को लेकर रोपड़ जेल के गेट नंबर 2 से बाहर निकली। जेल से बाहर निकलते हुए मुख्तार अंसारी एंबुलेंस में बैठा नजर आया। मीडिया की टीमें भी कवरेज के लिए काफिले के पीछे लगी हुईं हैं।

इस रूट से लाया जा रहा बांदा

तकरीबन 900 किलोमीटर के सफर में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से बागपत होते हुए उसे लाया जा रहा है। इसके बाद यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते इटावा और औरैया होते हुए उसे बांदा जेल लाया जाएगा। एक प्लाटून पीएसी, 10 गाड़ियों, वज्र वाहन और एंबुलेंस के काफिले के साथ यूपी पुलिस उसे बांदा ला रही है। इस बीच मुख्तार की पत्नी ने सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। उधर मुख्तार के बड़े भाई और गाजीपुर से बीएसपी सांसद अफजाल अंसारी मीडिया से बातचीत में बिफर पड़े। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुख्तार की यूपी जेल में शिफ्टिंग हो रही है।

याचिका में विकास दुबे एनकाउंटर का जिक्र

मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शा अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पंजाब के रोपड़ से यूपी लाते समय उन्होंने मुख्तार की जान को खतरा जताया है। इस याचिका में विकास दुबे एनकाउंटर का जिक्र करते हुए कहा गया है कि शिफ्टिंग के दौरान मुख्तार की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। मुख्तार की पत्नी ने याचिका में कहा है कि उन्हें इस बात का डर है कि कहीं फर्जी एनकाउंटर ना कर दिया जाए।

बता दें कि उज्जैन से कानपुर लाते वक्त कानपुर से थोड़ा पहले विकास दुबे जिस गाड़ी में था, वह पलट गई थी। पुलिस का कहना था कि उसने हथियार छीनकर फायरिंग की कोशिश की और जवाबी कार्रवाई में गोली चलानी पड़ी थी। मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शा अंसारी ने अंदेशा जताया है कि उनके पति की फर्जी एनकाउंटर में हत्या की जा सकती है। उन्होंने कोर्ट से मुख्तार अंसारी की सुरक्षा और निष्पक्ष ट्रायल सुनिश्चित करने की माँग की है।

फेक एनकाउंटर की आशंका जताते हुए मुख्तार अंसारी की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में अपने पति की सुरक्षा की गुहार लगाई है। अफ्शा अंसारी को अंदेशा है कि पंजाब की जेल से बांदा लाते वक्त रास्ते में फर्जी मुठभेड़ की आड़ में उनके शौहर की हत्या की जा सकती है। मुख्तार की पत्नी ने अपनी याचिका में रोपड़ से बांदा लाते वक्त के पूरे सफर की वीडियोग्राफी की भी माँग की है।

मीडिया से अफजाल अंसारी की बहस

मुख्तार अंसारी को लेकर मीडिया ने जब अफजाल से सवाल पूछा तो वह झल्ला गए। अफजाल ने कहा, “मुख्तार अंसारी, मुख्तार अंसारी, मुख्तार अंसारी… बस यही मुद्दा है देश में। जो पेट में है उसे भी मुँह में ऊँगली डालकर बाहर निकाल लो।” इससे पहले अफजाल ने यूपी लाते वक्त मुख्तार के एनकाउंटर का अंदेशा जताते हुए योगी सरकार को घेरा था।

मुख्तार के लिए 10 गाड़ियों का काफिला

माफिया मुख्तार अंसारी को यूपी लाने के लिए करीब 100 लोगों की पुलिस टीम पंजाब के रोपड़ गई थी। 10 गाड़ियों के काफिले में पुलिस और पीएसी के जवानों के अलावा डॉक्टर भी शामिल हैं। उधर, यूपी पुलिस ने मुख्तार की वापसी के साथ उस पर शिकंजा और कसने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्तार के खिलाफ चल रहे मुकदमों का ट्रायल और तेजी से करवाया जाएगा।

मुख्तार के खिलाफ अभी 15 मामले अंडरट्रायल

एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि मुख्तार के खिलाफ प्रदेश भर में 52 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें 15 मामले विचाराधीन हैं। इन मुकदमों में तेज और प्रभावी पैरवी के जरिए मुख्तार को कड़ी सजा दिलवाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्तार को रूल्स फॉर गार्ड्स ऐंड स्कॉर्ट्स (1970) के प्रावधानों के तहत स्थापित प्रोटोकॉल और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के क्रम में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ यूपी लाया जाएगा।

‘कॉन्ग्रेस बचा रही मुख्तार को’

यूपी के कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने पंजाब सरकार पर मुख्तार को बचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार के संरक्षण में मुख्तार को जेल में सभी सुविधाएँ दी जा रही थी। मुख्तार को निजी एम्बुलेंस भी पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने ही उपलब्ध करवाई थी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को अपराधी में भी सांप्रदायिकता दिखती है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था शिफ्ट करने का आदेश

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को पंजाब की जेल से यूपी की बांदा जेल भेजने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया था कि अंसारी को दो सप्ताह के भीतर यूपी को सौंप दिया जाए और फिर बांदा जेल में रखा जाए। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार की याचिका पर यह निर्णय दिया। याचिका में अंसारी को पंजाब से यूपी जेल में स्थानांतरित करने की माँग की गई थी।

सेट पर 45 लोगों के कोरोना संक्रमित होने से टला अक्ष्य की फिल्म राम सेतु का छायांकन

मुंबई के मड आइलैंड में सोमवार यानी 5 अप्रैल को 100 लोगों की एक टीम फिल्म ‘राम सेतु’ के सेट पर पहुंचने वाली थी। लेकिन अक्षय कुमार और फिल्म के प्रड्यूसर विक्रम मल्होत्रा ने सभी के कोविड टेस्ट कराने का निर्णय लिया। बताया जा रहा है कि 100 लोगों में से 45 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इस तरह से अक्षय कुमार और विक्रम मल्होत्रा की सावधानी ने कई लोगों को कोरोना वायरस से बचाया है।

  • राम सेतु के लिए काम कर रहे 45 जूनियर आर्टिस्ट के कोरोना की चपेट में 
  • सभी कोरोना संक्रमितों को तुरंत क्वारंटीन कर दिया गया
  • 5 अप्रैल को 100 लोग राम सेतु के सेट पर अपना काम शुरू करने वाले थे

फिल्म ‘राम सेतु’ की शूटिंग के लिए कुछ ही दिनों पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और फिर अयोध्या पहुँचे अभिनेता अक्षय कुमार कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। मुंबई के मढ द्वीप पर इस फिल्म की शूटिंग होनी थी। अभिनेत्री नुसरत भरूचा और जैकलीन फर्नांडिस भी इस फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। अब इस फिल्म से जुड़े 45 जूनियर आर्टिस्ट कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित हो गए हैं।

सोमवार (अप्रैल 5, 2021) को 100 जूनियर कलाकारों की एक टीम शूटिंग में शामिल होने वाली थी। फिल्म के मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार और निर्माता विक्रम मल्होत्रा ने फिल्म की शूटिंग में शामिल होने वाली सभी कलाकारों का कोरोना टेस्ट अनिवार्य कर रखा है। एक दैनिक की खबर के अनुसार, 100 की टीम में से 45 का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव निकला। ‘फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉईज (FWICE)’ ने इस खबर की पुष्टि की है।

संगठन के महासचिव अशोक दुबे ने कहा कि ‘राम सेतु’ की शूटिंग के दौरान पूरी सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी 45 कोरोना पॉजिटिव कलाकारों को क्वारंटाइन कर दिया गया है। अब शूटिंग को भी रोक दिया गया है। अगले 15 दिनों में इस फिल्म की शूटिंग फिर से शायद ही शुरू हो पाए। हर दो दिन पर सावधानी के लिए सेट पर सबका कोरोना टेस्ट किया जाता है।

बताया गया है कि पॉजिटिव आने वालों को आइसोलेट करने के साथ ही उनका खर्च भी ‘राम सेतु’ की टीम ही वहन करती है। अगर किसी को कुछ तकलीफ महसूस होती है तो उसे तुरंत आइसोलेट किया जाता है। अक्षय कुमार ने खुद कई बार टेस्ट कराया है। महाराष्ट्र में पहले से ही कोरोना के रोज 50,000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। पिछले 1 दिन में देश में 1 लाख मामले सामने आए, जो अब तक का सर्वाधिक है।

अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आप सभी की शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं के लिए आभार। ऐसा लग रहा है जैसे उनका असर हो रहा है। मैं ठीक हूँ, लेकिन सावधानी के तौर पर मेडिकल सलाहों को मान कर मैं अस्पताल में हूँ। मैं जल्द ही घर वापस लौटूँगा।” इससे पहले अक्षय कुमार होम क्वारंटाइन में थे। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में अपने संपर्क में आए सभी लोगों को कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी थी।

हाल ही में नुसरत ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर की थीं, जिसमें वह ‘राम सेतु’ की स्क्रिाप्ट पढ़ते हुए नजर आ रही थीं। उन्होंने लिखा था, “Let’s do this!!”। इसी के साथ उन्होंने अक्षय कुमार, जैकलीन फर्नांडीज और फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक शर्मा को भी टैग किया था। उन्होंने इस फिल्म में मौका मिलने के लिए खुद को ‘सौभाग्यशाली’ करार दिया था। अक्षय, नुसरत और जैकलीन यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे।

योगी आदित्यनाथ ने बंगाल के प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्ष होकर काम करने की नसीहत दी

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने पश्चिम बंगाल में ऐलान किया कि दो मई को भाजपा सरकार आ रही है और प्रशासन के लोग वह काम न करें, जिससे आगे चल कर उनको पछतावा हो, ये टीएमसी की विदाई की बेला है, शानदार तरीके से इनको विदा कीजिए। प्रशासन चुनाव सम्‍पन्‍न कराने में ईमानदारी से अपना काम करे। मैं हेलीकाॅप्टर से देख रहा था कि जगह-जगह पर भाजपा कार्यकर्ताओं को रोका जा रहा। लोकतंत्र में यह अच्छा नहीं है।

कोलकत्ता:

पश्चिम बंगाल में चुनावी सभाओं में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने टीएमसी नेताओं के साथ ही वहां के प्रशासनिक अफसरों को भी चेताया। उन्होंने कहा कि दो मई को दीदी की विदाई तय हैं और भाजपा की सरकार बनने जा रही है। इसलिए अधिकारी चुनाव में निष्पक्ष होकर काम करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी कोई भी ऐसा काम न करें, जिसकी वजह से उन्हें आगे चलकर पछतावा हो। उन्होंने कहा कि जगह-जगह भाजपा कार्यकर्ताओं को मतदान करने से रोका जा रहा है। प्रशासन के लोग ऐसा न करें। टीएमसी सरकार की विदाई की बेला है, इसलिए शानदार तरीके से विदा करें।

मुख्यमंत्री ने रविवार को हुगली, चंदन नगर, खानाकुल और जंगीपाड़ा में चुनावी संबोधित करते हुए टीएमसी सरकार पर जमकर निशाना साधा। खानाकुल जनसभा में उन्होंने कहा कि दशकों से टीएमसी और वामपंथी अराजकता फैला रहे हैं। इन दलों के भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से सिर्फ  भाजपा ही मुक्ति दिला सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की धरती पर जन्मी विभूतियों ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत देश को दिया है। ये वही धरती है जिसने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को आगे बढ़ाया, वीरांगनाओं को जन्म दिया। आज यहां के लोग वामपंथियों और टीएमसी की अराजकता से परेशान हैं।

उन्होंने ममता बनर्जी से सवाल करते हुए कहा कि जिस धरती ने 10 साल तक मुख्यमंत्री बनाए रखा, उसी धरती पर देश की शान का प्रतीक तिरंगे को लहराने वाले कार्यकर्ताओं की हत्या पर क्यों मौन हैं? टीएमसी के भ्रष्ट कृत्यों को उजागर करने वाले भाजपा कार्यकर्ता सुदर्शन प्रामाणिक की हत्या का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी हत्या टीएमसी के गुंडों ने की है। लेकिन प्रामाणिक का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अब गुंडागर्दी के शेष 28 दिन ही बचे हैं। दो मई के बाद तो टीएमसी के गुंडों की आने वाली पीढ़ियां भी गुंडागर्दी करना भूल जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता ने 30 से 40 साल कांग्रेस को 30 साल वामदलों और 10 साल टीएमसी को दिए हैं,  लेकिन विकास के नाम पर कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा नहीं कर सकते हैं। होली खेलने से रोका जाता है। ऐसा ही काम पहले यूपी में भी होता था, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद यूपी में कांवड़ यात्रा निकलती है, दुर्गा पूजा और होली खेली जाती है। सभी गुंडे यूपी से गायब हो चुके हैं और सिर्फ  विकास का बोलबाला है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले दुर्गा पूजा और रमजान एक साथ पड़ा था तो ममता दीदी ने दुर्गा पूजा पर रोक लगा दी थी। ममता दीदी का पूरा ध्यान दुर्गा पूजा के बजाय रोजा इफ्तार कराने में लगा रहता है।

दो घंटे बूथ पर बैठकर हार स्वीकार कर चुकीं हैं दीदी
चंदननगर की जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि वामपंथी, टीएमसी और कांग्रेस ने युवा, किसान और गरीबों के लिए कुछ नहीं किया। यहां कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं दिया गया। जबकि यूपी में कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जा रहा है। नंदीग्राम में दो घंटे एक बूथ पर ममता दीदी का बैठना यह बताता है कि टीएमसी अपनी हार स्वीकार कर चुकी है।

दीदी सिर्फ अपने भतीजे के विकास में लगीं

श्रीरामपुर विधानसभा के जंगीपाड़ा की सभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां का विख्यात हैंडलूम उद्योग दम तोड़ रहा है। फूड प्रोसेसिंग का कोई अच्छा केन्द्र न होने से यहां के आलू उत्पादन में लगे किसानों को  उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। 10 साल से पश्चिम बंगाल में कोई उद्योग नहीं लगा। दीदी सिर्फ अपने भतीजे के ही विकास में लगी रहीं।

चीनी दोस्ती के चक्कर में चीनी से हाथ धोते पाकिस्तान ने भारत से लगाई गुहार

भारत द्वारा 2019 में जम्‍मू-कश्‍मीर से विशेष राज्‍य का दर्जा समाप्‍त करने के बाद पाकिस्‍तान ने भारत के साथ अपने व्‍यापार को रद्द कर दिया था। मई, 2020 में पाकिस्‍तान ने कोविड-19 महामारी के कारण भारत से दवाओं और कच्‍चे माल पर लगे प्रतिबंध को समाप्‍त कर दिया था। कपास और यार्न की कमी के कारण, पाकिस्तान में उपयोगकर्ताओं को संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील और उज्‍बेकिस्‍तान से कपास का आयात करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। भारत से कपास का आयात बहुत सस्ता बैठेगा और यह तीन से चार दिनों के भीतर पाकिस्तान पहुंच जाएगा। बाकी देशों से कपास धागे का आयात करना न केवल महंगा है, बल्कि पाकिस्तान तक पहुंचने में एक से दो महीने का समय भी लगता है।

Pakistani customers buy flour and other items ahead of the start of Ramadan in Rawalpindi on May 15, 2018. – Muslims are preparing for Islam’s holy month of Ramadan, which is calculated on the sighting of the new moon, and during which they fast from dawn until dusk. (Photo by AAMIR QURESHI / AFP)

पाकिस्तान में चीनी की बढ़ती कीमतों और संकटों से जूझ रहे कपड़ा उद्योग को बचाने के लिए पाकिस्‍तान की इमरान खान सरकार आज (मार्च 31, 2021) भारत के साथ व्‍यापार की फिर से शुरुआत कर सकती है। दोनों देशों में तनावपूर्ण रिश्तों के बीच यह पाकिस्तान का भारत के साथ संबंधों को सुधारने की दिशा में पहला बड़ा प्रयास हो सकता है। पाकिस्तान को यह निर्णय लेने के लिए इसलिए विवश होना पड़ा है क्योंकि उसकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। ऊपर से कोरोना काल ने उसकी और कमर तोड़ दी है।

पाकिस्तान की आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने बुधवार सुबह बैठक किया, जिसमें भारत से चीनी और कॉटन के आयात पर फैसला किया गया। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान में आर्थिक मामलों से जुड़ी कैबिनेट ने भारत के साथ ट्रेड को मंजूरी दी है। अब पाकिस्तान, भारत से कपास और चीनी का आयात करेगा। इससे पहले अगस्‍त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ रिश्ते को तोड़ लिया था। पाकिस्तान सरकार चीनी और कॉटन का आयात ऐसे समय पर करने जा रही है जब इन दोनों के लिए पाकिस्तान को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

भारत पाकिस्तान सहित पड़ोसियों के साथ सामान्य व्यापार संबंधों की इच्छा रखता है

वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में कहा था कि भारत सामान्य संबंधों की इच्छा रखता है, जिसमें पाकिस्तान सहित सभी देशों के साथ व्यापार शामिल है। बता दें कि पाकिस्तान ने अगस्त 2019 में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को एकतरफा निलंबित कर दिया। अगस्त 2019 में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष दर्जा समाप्त करने और दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के नरेंद्र मोदी सरकार के कदम के जवाब में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित करने की घोषणा की थी।

रिकॉर्ड महंगाई, कर्ज की मार, चरमराई अर्थव्यवस्था और भूख से बिलखता… कुछ ऐसा है इमरान खान के नए पाकिस्तान का हाल।  25 फीसदी से ज्यादा आबादी गरीबी रेखा के नीचे. कोरोना की मार और ठंड का कहर… इन सबसे अलग महंगाई की चोट. एक अंडे की कीमत 30 रुपए, । चीनी का दाम 104 रुपए किलो, अदरक 1000 रुपए किलो आवाम कैसे भरेगी पेट। ये सब उसी पाकिस्तान में है जहां इमरान खान जरूरी चीजों के दाम कम करने के नाम पर अपनी पीठ थपथपाते हैं। लेकिन, असलियत कोसो दूर है. महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भुखमरी के हालत बन रहे हैं। पाकिस्तान रुपया लगातार गिर रहा है। इकोनॉमी अब तक के निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा अंडे का है. पाकिस्तान के अखबार द डॉन के मुताबिक, देश के ज्यादातर हिस्सों में सर्दियों में बढ़ी डिमांड की वजह से अंडे के दाम 350 पाकिस्तानी रुपए प्रति दर्जन तक पहुंच गया है। पाकिस्तान की बड़ी आबादी खाने में अंडों का इस्तेमाल करती है। लेकिन, एक अंडे की कीमत 30 रुपए हो तो गुजारा करना भी मुश्किल है।

इमरान खान ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

पीएम मोदी ने अपने पत्र में कहा था कि पाकिस्तान के साथ भारत सौहार्द्रपूर्ण संबंधों की आकांक्षा करता है, लेकिन विश्वास का वातावरण, आतंक और बैर रहित माहौल इसके लिए ‘अनिवार्य’ है। प्रधानमंत्री मोदी के पत्र के जवाब में खान ने उनका शुक्रिया अदा किया और कहा कि पाकिस्तान के लोग भारत सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण सहयोगी संबंध की आकांक्षा रखते हैं। 

आतंक मुक्त माहौल पर खान ने कहा कि शांति तभी संभव है, यदि कश्मीर जैसे सभी लंबित मुद्दों का समाधान हो जाए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने 29 मार्च को लिखे पत्र में कहा, “हम इस बात से सहमत हैं कि खासतौर पर जम्मू कश्मीर विवाद जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच लंबित सभी मुद्दों के समाधान पर दक्षिण एशिया में टिकाऊ शांति एवं स्थिरता निर्भर करती है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों पीएम मोदी ने इमरान खान को पत्र लिख कर दोनों देशों के अच्छे संबंधों की कामना भी की थी। मोदी ने इमरान खान को लिखा, ”पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मैं पाकिस्तान की आवाम को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। एक पड़ोसी देश के तौर पर भारत पाकिस्तान के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते की इच्छा रखता है। इसके लिए भरोसा और आतंकवाद एवं आक्रमकता से मुक्त माहौल बेहद जरूरी है।”