हरियाणवी सिंगर के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर पैसे ऐंठे वाला काबू

 मनोज त्यागी करनाल /पानीपत 6जुलाई:

                         डिजिटल दुनिया लोगों के लिए अभिशाप बनने लगी है l ठगों ने ठगी करने का नया तरीका ढूंढ निकला है l  पहले फेसबुक पर दोस्ती करते हैं फिर शिकार बनाते हैं  ।  हट जा ताऊ पाछै नै-नाचन दे जी भर कै नै… गाना गाने वाले हरियाणवी सिंगर बीते दो साल से टेंशन में थे। टेंशन की वजह उसके नाम से बनी एक फर्जी फेसबुक आईडी थी l  जिसकी मदद से एक आरोपी लोगों से पैसे ऐंठ रहा था। एक साल पहले विकास इसकी शिकायत भी कर चुके थे , लेकिन पुलिस आरोपी को काबू नहीं कर पाई थी। अब तंग आकर सिंगर विकास कुमार ने खुद प्लॉनिंग बनाई और जैसे-तैसे आरोपी को पानीपत बस स्टैंड बुला लिया। आरोपी पैसे लेने बस स्टैंड आया था, उसे सिंगर विकास कुमार ने दबोच लिया और बस स्टैंड पुलिस चौकी के हवाले कर दिया। आरोपी यूपी के सहारनपुर का रहने वाला है। पुलिस अब जांच कर रही है।सिर्फ एक अल्फाबेट के अंतर से उसने फर्जी आईडी बना रखी थी l

                        औद्योगिक नगरी में लगातार फर्जी फेसबुक आईडी से ठगी के मामले सामने आ रहे हैं । ठग शहर के व्यापारी ,दुकानदार को अपना शिकार बना रहे थे अब उन्होंने जाने -माने बॉलीवुड सिंगर को शिकार बनाया है । पानीपत में रहने वाले मशहूर सिंगर विकास की फर्जी आईडी से ठगी करने वाले सहारनपुर के युवक को खुद सिंगर ने काबू कर पुलिस के हवाले कर दिया l

                        सिंगर विकास कुमार बताते हैं कि बीते दो साल से उसके नाम से फेसबुक पर एक फर्जी आईडी बनी हुई थी। आईडी विकास कुमार सिंगर के नाम से बनी थी और हूबहू उसकी रियल फेसबुक आईडी की सारी जानकारियां कॉपी कर रखी थी। उसमें जानकारी के अलावा फोटो वो डाली गई थी, जो विकास की ओरिजनल फेसबुक आईडी में लगी थी। बस फर्क था तो सिर्फ इतना कि विकास की ओरिजनल फेसबुक आईडी में विकास कुमार सिंगर (सिंगर में ए एल्फाबेट लगा था) जबकि आरोपी की फर्जी आईडी में सिंगर में ई अल्फाबेट लगाया गया था। इसी फर्क के चक्कर में लोग उस आईडी पर फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजकर फंस जाते थे। विकास का कहना है कि आरोपी उसे जानने वाले काफी लोगों से पैसे ऐंठ चुका है। विकास का आरोप है कि आरोपी युवक उसके हिसार के एक साथी से तो एप्पल का लैपटॉप और एप्पल वॉच तक ले चुका है।

                        विकास कुमार ने आरोपी को एक दूसरी फेसबुक आईडी से रिक्वेस्ट भेजी। उसने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करके मैसेंजर कर पैसे मांगने शुरू कर दिए। आरोपी ने बीमारी का बहाना बनाकर पैसे मांगे। विकास ने उसे कहा कि पैसे दे दूंगा, पानीपत बस अड्डे आ जा। विकास ने इसके लिए अपनी पत्नी की मदद ली और उसे फोन करवाया। आरोपी ने कहा कि मैं विकास बोल रहा हूं, पैसे लेने के लिए अपना एक आदमी भेज रहा हूं। विकास अपने साथियों के साथ पानीपत बस अड्डे पहुंच गया। जैसे ही आरोपी पहुंचा तो उसे दबोच लिया। पूछताछ में पता चला कि वह उत्तरप्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला है

रामजन्म भूमि पूजन के समय 50 परिवारों ने अपनाया ‘सनातन धर्म’

अयोध्या जी में राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद हर तरफ उत्साह का माहौल है। पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के बाड़मेर जिले में बुधवार से ही लोगों ने जश्न मनाना शुरू किया जो गुरुवार को भी जारी रहा। राम मंदिर के भूमि पूजन के मौके पर बाड़मेर जिले के पायला कल्ला पंचायत समिति के मोतीसरा गांव में रहने वाले 50 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म अपनाया है। इन परिवारों के करीब 250 लोगों ने बुधवार को हवन-पूजन किया और पुरुषों ने जनेऊ धारण कर हिंदू धर्म अपनाया।

जयपुर (ब्यूरो) 6 अगस्त:

5 अगस्त 2020 यानी बुधवार को जब अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हो रहा था तो राजस्थान के करीब 50 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म में वापसी की। मामला बाड़मेर जिले पायला कल्ला पंचायत के मोतीसारा गाँव की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन परिवारों के करीब 250 लोगों ने बुधवार को हवन-पूजन किया। पुरुषों ने जनेऊ धारण कर हिंदू धर्म अपनाया। इन लोगों ने कहा है कि ऐसा करने के लिए उन पर किसी ने दबाव नहीं बनाया था।

हिंदू धर्म अपनाने वाले मुस्लिम परिवार के बुजुर्गों का कहना है कि उनके पूर्वज हिंदू थे। उन्हें जैसे ही इतिहास का ज्ञान हुआ इसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह निर्णय स्वेच्छा से लिया गया है।

हिंदू धर्म स्वीकार करने वाले सुभनराम ने मीडिया वालों से बात करते हुए इस बारे में जानकारी दी। सुभनराम ने कहा मुग़ल शासन में मुस्लिमों ने हमारे पूर्वजों (हिंदुओं) को डरा धमका कर उनका धर्म परिवर्तन करा लिया था। 

इसके बाद उन लोगों के घर पर हवन हुआ और परिवार के लगभग 250 सदस्यों ने हिंदू धर्म अपना लिया। हरजीराम ने बताया कि ये परिवार कंचन ढाढ़ी जाति से संबंध रखते हैं। इन परिवारों के सदस्य पिछले कई सालों से हिंदू धर्म के रीति-रिवाज़ों का पालन कर रहे थे।

विंजाराम के मुताबिक़ परिवार का कोई भी व्यक्ति मुस्लिम रीति रिवाज़ों का पालन कभी नहीं करता था। राम मंदिर के शिलान्यास समारोह में भी हम सभी ने पूजा-पाठ का आयोजन कराया था और हमने पूरी स्वेच्छा से हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया।  

गाँव में लगभग 50 परिवार ढाढ़ी जाति के हैं जिसमें से लगभग एक दर्जन घरों के आस-पास मंदिर बने हुए हैं। इतना ही नहीं परिवारों में ज़्यादातर लोगों के नाम भी हिंदू धर्म से ही प्रेरित हैं। परिवार के बुजुर्गों का दावा है कि औरंगज़ेब के दौर में उनके पूर्वज हिंदू थे। उन्होंने मुग़ल शासक के डर से हिंदू धर्म अपनाया। लेकिन अब उनके परिवार के शिक्षित लोगों को इस बात का ज्ञान हुआ, जिसके बाद उन्होंने वापस हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया। 

राम जन्मभूमि शिलान्यास का काम पूरा, ओवैसी का राग बाबरी जारी

अयोध्या जी में राम मंदिर भूमि पूजन का कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के हाथों संपन्न हो गया है. अयोध्या जी में राम मंदिर शिलान्यास कार्यक्रम के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के इस कार्यक्रम में शामिल होने पर सवाल खड़ा किया है.

नयी दिल्ली(ब्यूरो) – 5 अगस्त :

अयोध्या जी में राम मंदिर भूमि पूजन का कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के हाथों संपन्न हो गया है. अयोध्या जी में राम मंदिर शिलान्यास कार्यक्रम के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के इस कार्यक्रम में शामिल होने पर सवाल खड़ा किया है. ओवैसी ने कहा, ‘मैं शुरू से ही यह कहता रहा हूं कि पीएम को भूमि पूजन में शामिल नहीं होना चाहिए था. क्योंकि वह किसी समुदाय के पीएम नहीं है, भारत का एक ही धर्म है. उन्होंने कहा कि ये लोकतंत्र की हार है.

ओवैसी ने आगे कहा, ‘पीएम का इस कार्यक्रम में शामिल होना देश की धर्मनिरपेक्ष नीतियों का उल्लंघन है. आज हिंदुत्व और धर्मनिरपेक्षता के लिए एक सफल दिन है क्योंकि मोदी (एक पीएम के रूप में) इस कार्यक्रम में शामिल हुए. पीएम ने कहा कि आज का कार्यक्रम भारत का प्रतीक है. लेकिन, वह एक देश के पीएम हैं और उन्हें समझने की जरूरत है कि देश का प्रतीक मंदिर या मस्जिद नहीं हो सकता.’

क्या है नया भारत?

ओवैसी ने आगे बोलते हुए कहा, ‘मैं कह रहा हूं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रमुख उपस्थिति के कारण हिंदुत्व की सफलता का दिन है. वह वहां क्यों है? भागवत ने कहा कि यह नया भारत बनाता है. क्या है नया भारत? नया भारत जहां मुस्लिमों के साथ भेदभाव किया जाएगा.’

संघ परिवार ने किया बाबरी मस्जिद को ध्वस्तः ओवैसी

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि वह आज भावुक थे. मैं भी उतना ही भावुक था क्योंकि मैं नागरिकों की सहभागिता और समानता में यकीन रखता हूं. मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, मैं इस वजह से भावुक हूं क्योंकि वहां 450 वर्षों तक मस्जिद खड़ी थी.’ उन्होंने कहा, ‘मैं भी भावुक हूं क्योंकि आपकी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला है. बीजेपी और संघ परिवार ने मिलकर बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था.’

भूमि पूजन से पहले ट्वीट

ओवैसी ने राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम के शुरू होने से पहले ट्वीट कर कहा था कि बाबरी जिंदा है. इस ट्वीट में ओवैसी ने इसमें बाबरी जिंदा है हैशटैग का इस्तेमाल किया था. असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट में लिखा, ‘बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी इंशाअल्लाह.’ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नेता ने हैशटैग बाबरी जिंदा है के साथ इस ट्वीट को शेयर किया. बताते चलें कि ओवैसी ने पीएम मोदी के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह संविधान सम्मत नहीं होगा.

इसके पहले हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रियंका गांधी के बयान पर तंज कसा था. प्रियंका के बयान पर ओवैसी ने कहा था, ‘खुशी है कि वो अब नाटक नहीं कर रहे हैं. कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा को गले लगाना चाहते हैं तो ठीक है, लेकिन भाईचारे के मुद्दे पर पर वो खोखली बातें क्यों करती हैं.’

दरअसल, प्रियंका गांधी ने भूमि पूजन कार्यक्रम का समर्थन करते हुए कहा था कि राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं. सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु. राम नाम का सार है. प्रियंका गांधी ने आगे कहा है कि रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर है.

राम मंदिर की आधारशिला प्रधान मंत्री द्वारा समय पर और निर्विघ्न रखी गयी

ॐ जय श्री राम ॐ

आज 528 वर्षों के पश्चात अयोध्या जी में सनातन समाज का एक संकल्प पूरा हुआ। इसी संकल्प के साथ अयोध्या जी में राम जन्मभूमि स्थल का शिलान्यास विधिवत पूर्ण हुआ।

अयोध्या जी (ब्यूरो) – 5 अगस्त:

अयोध्या जी में राम मंदिर निर्माण बनने का बरसों का इंतजार आज खत्म गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधिवत भूमि पूजा के बाद राम मंदिर की आधारशिला रखी. राम मंदिर के शिलान्यास समारोह का शुभ मुहूर्त 32 सेंकेड का था. 12 बजकर 44 मिनट 8 सेकेंड से लेकर 12 बजकर 44 मिनट 40 सेकेंड तक रहा. ठीक समय पर पीएम मोदी ने मंदिर के लिए पहली ईंट रखीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा अयोध्या जी में भूमि पूजन के साथ ही राम मंदिर निर्माण का कार्य तेजी से शुरू हो जाएगा. इसके बावजूद सबके मन में सवाल यही है कि भव्य राम मंदिर कब तक बनकर तैयार हो जाएगा और श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन करने का मौका कब मिलेगा. ऐसे में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने राम मंदिर की सीमा तय कर रखी है और 2024 के पहले अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने अयोध्या जी में मंदिर निर्माण का साढ़े तीन साल में हर हाल में बनाने का टारगेट रखा है. ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टूब्रो कंपनी को काम सौंपा है. हालांकि, ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए 32 महीने के अंदर का वक्त दे रखा है ताकि अगर कुछ थोड़ा बहुत काम रह जाए तो उसे बाकी समय में पूर कर लिया जाए.

आज अयोध्या जी में पहुंचते ही श्री रामलला के दर्शन करने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हनुमान गढ़ी गए. ऐसे में हर एक के मन में ये उत्सुकता है कि आखिर श्री रामलला से पहले हनुमान गढ़ी के दर्शन प्रधानमंत्री ने क्यों किए? आखिर इसका इतिहास या धार्मिक महत्व क्या है? दरअसल वाराणसी में जिस तरह से काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है और वहां जाना जरूरी होता है, ये उसी तरह की मान्यता है कि माना जाता है कि लंका विजय के बाद हनुमान जी सरयू नदी के दाहिनी तट पर एक ऊंचे टीले पर गुफा में रहने लगे थे और यहीं से वो अयोध्या जी की रक्षा करते थे. इसी जगह को बाद में हनुमान गढ़ी या रामकोट कहा जाने लगा. कालांतर में यहां एक विशाल मंदिर बना दिया गया और जिस तरह से गुफा होती है, उसी तरह से इस मंदिर में नीचे जाने के लिए 76 सीढ़ियां हैं. वीर आंजनेय हनमान अयोध्या जी के नगर कोतवाल हैं। नगर में कुछ भी शुभ करना हो तो नगर कोतवाल की अनुमति लेना आवश्यक होता है पर आज तो प्रधान मंत्री मोदी ने नगर कोतवाल पवनपुत्र हनुमान को प्रार्थना अरते हे आग्रह किया है की आज जो राम काज आरंभ हो रहा है अब वह उसकी भी निगरानी करें।

इस दौरान उन्होंने राम मंदिर के प्रांगण में पारिजात का पौधा लगाया. कहा जाता है कि पारिजात वृक्ष को देवराज इंद्र ने स्वर्ग में लगाया था. इसके फूल सफेद रंग के और छोटे होते हैं. ये फूल रात में खिलते हैं और सुबह पेड़ से स्वत: ही झड़ जाते हैं. यह फूल पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प है. 

इस वृक्ष को लेकर कई हिन्दू मान्यताएं हैं. कहा जाता है कि धन की देवी लक्ष्मी को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं. पूजा-पाठ के दौरान मां लक्ष्मी को ये फूल चढ़ाने से वो प्रसन्न होती हैं. खास बात ये है कि पूजा-पाठ में पारिजात के वे ही फूल इस्तेमाल किए जाते हैं जो वृक्ष से टूटकर गिर जाते हैं. इस वृक्ष को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण स्वर्ग से धरति पर लाये थे।

कंगना ने पूछे ठाकरे से कुछ सवाल

शिवसेना सुप्रीमो और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और राज्य के पर्यावरण मंत्री ने मराठी भाषा में एक बयान जारी किया. इस दौरान मराठी भाषा में आई सफाई में उन्होंने ये भी कहा कि सोशल मीडिया पर चौबीसों घंटे जो कुछ उड़ाया जा रहा है वो सब बेबुनियाद हैं. उन्होंने ये भी कहा कि इस केस को लेकर दौरान वायरल हो रहीं तमाम थ्योरी पूरी तरह गलत और बकवास है, जिस पर विपक्ष उनके परिवार पर कीचड़ उछालने के साथ घटिया राजनीति कर रहा है. उन्होंने कहा कि एक भी आरोप या साजिश की थ्योरी का कोई आधार नहीं है और ये उनका करियर प्रभावित करने की साजिश हो सकती है। सनद रहे आदित्य ठाकरे वही हैं जिनहे baby penguin कहने पर व्यक्ति को हरसत में ले लिया जाता है और उस पर बाकायदा उस पर मानहानि का मुक़द्दमा दर्ज़ आर दिया जाता है। बाल ठाकरे राजनैतिक कार्टूनिस्ट का परिवार राजनैतिक व्यंग्य की समझ नहीं रखता। लेकिन उसी परिवार को अपने विरुद्ध राजनैतिक षड्यंत्र की बू आ जाती है।

यह भी बताते चलें कि बिहार सरकार ने सीबीआई जांच कि अनुशंसा की है।

चंडीगढ़(ब्यूरो) – 5 अगस्त:

सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में लगातार आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है. हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इस केस में सड़क छाप पॉलिटिक्स हो रही है लेकिन वो धैर्य के साथ काम ले रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा था कि इस केस के जरिए उनके और उनके परिवार पर कीचड़ उछाला जा रहा है. अब इस मामले में कंगना रनौत ने आदित्य ठाकरे पर निशाना साधा है.

कंगना की डिजिटल टीम ने अपने पहले ट्वीट में लिखा- हाहा, देखिए डर्टी पॉलिटिक्स की बात कौन कर रहा है. आपके पिता को मुख्यमंत्री की सीट कैसे मिली, ये भी डर्टी पॉलिटिक्स पर केस स्टडी है सर. ये सब छोड़िए, अपने पिता से सुशांत सिंह राजपूत की मौत के सिलसिले में बस ये कुछ सवाल पूछ लीजिए. पहला सवाल- आखिर रिया चक्रवर्ती कहां है?

उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा- आखिर मुंबई पुलिस ने सुशांत की मौत को लेकर एफआईआर रजिस्टर क्यों नहीं की थी? तीसरा सवाल, जब सुशांत की जिंदगी के खतरे में होने को लेकर फरवरी के महीने में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी तो मुंबई पुलिस इसे एक ही दिन में सुसाइड घोषित करने पर क्यों तुली हुई थी?

कंगना डिजिटल टीम ने अपने तीसरे ट्वीट में लिखा- चौथा सवाल- आखिर हमारे पास फोरेंसिक एक्सपर्ट्स या फिर सुशांत का फोन डाटा क्यों नहीं है जिससे पता लग सके कि उनकी मौत के एक हफ्ते पहले तक उन्होंने किन-किन से फोन पर बात की थी? पांचवा सवाल – बिहार के आईपीएस विनय तिवारी को क्वरानटीन के नाम पर लॉक कर के क्यों रखा हुआ है? छठा सवाल – आखिर आप सीबीआई जांच से इतना डर क्यों रहे हैं ? सातवां सवाल- रिया और उसके परिवार वालों ने सुशांत के पैसे क्यों लूटे?

बीजेपी नेता ने भी लगाए थे सुशांत केस में पुलिस और सरकार पर गंभीर आरोप

कंगना की डिजिटल टीम ने अपने आखिरी ट्वीट में लिखा- इन सवालों का पॉलिटिक्स के साथ कुछ लेना-देना नहीं है. प्लीज इन सवालों का जवाब दें. बता दें कि इससे पहले बीजेपी नेता नारायण राणे ने भी अपने बयान में कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत ने सुसाइड नहीं किया है बल्कि उनका मर्डर हुआ है. उन्होंने ये भी कहा था कि दिशा सालियान का सुसाइड नहीं हुआ है बल्कि उनका रेप करने के बाद मर्डर किया गया है. राणे ने कहा था कि मुंबई पुलिस इस मामले में रसूखदार लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है.

संस्मरण : सन 1992 की अयोध्या जी की यात्रा

5 अगस्त 2020 को जब राम मंदिर का शिलान्यास किया आ रहा है तो 1992 के आरसेवकों को अपने बीते दिनों की याद आह्लादित कर रही है। शास्त्री देवशंकर ने अपने संस्मरणों को डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम से सांझा किया।

शास्त्री देवशंकर चौबीसा, उदयपुर:

सन 1992 में मेरी पोस्टिंग सागवाड़ा में थी, वहां हम कनकमल जी भाईसाहब के सानिध्य में कार सेवा के लिए रवाना हुए। सागवाड़ा से हम बस द्वारा बांसवाड़ा के स्वयंसेवकों को साथ लेते हुए रतलाम पहुंचे। रतलाम से हमने रात को ट्रेन पकड़ी थी, जैसे ही ट्रेन में चढ़े ऐसा लगा कि जितने भी कारसेवक आ रहे थे, वह सभी अपने परिवार के लोग हैं, जगह नहीं थी, ऊपर-नीचे खचाखच ट्रेन भरी हुई थी। मैं जब ट्रेन के ऊपर सवारियों को बैठे हुए देखता तो ऐसा लगता है कि कैसे बैठते होंगे, परन्तु जब मैं स्वयं ट्रेन के ऊपर बैठा तो रामलला के भक्तो के मध्य बहुत ही आनंददायक माहौल था। “जय श्री राम” के नारे और गीतों को गाते हुए अयोध्याजी पहुंचे।

कनक जी के सानिध्य में हमने अपना अभियान जारी रखा, जैसा जैसा निर्देश मिलता रहा वैसे हम कार्य करते रहें। प्रातः काल से लेकर के विभिन्न संतो, महंतों और नेताओं के भाषण चल रहे थे और उनको सुन रहे थे और यह तय हुआ था कि सबसे पहले कौन जाएगा, सबसे आगे कौन खड़ा रहेगा, इसके लिए रात्रि में बैठक भी हुई थी। ऐसी स्थिति में जिस दिन ढांचा गिरा उस दिन ना तो भूख लग रही थी ओर ना ही प्यास लग रही थी, केवल एक ही लक्ष्य था और उसके लिए हम सभी वहां मैदान में डटे हुए थे। हमारी जरूरत पड़ जाए और हम भगवान श्रीराम और देश के लिए काम आये।

शाम को 5:00 बजे राष्ट्रपति शासन लग गया था। वहां ऐसी स्थिति में रात को पता चला कि सुबह जल्दी उठते ही सुबह 4:00 बजे हमको उठा दिया गया और कहा कि यहां अयोध्याजी में कर्फ्यू लग चुका है तुरंत जितना जल्दी हो सकता है अयोध्याजी खाली करने के आदेश मिले। साथ ही पुलिस की घोषणा भी हो रही थी कि आप तुरंत अयोध्याजी खाली करें। लेकिन प्रातः कालीन 4:00 बजे अपना आवास छोड़कर के निकले थे पुलिस वालों ने हमको रोका, परंतु माइक से मजिस्ट्रेट घोषणा की, कि जो कारसेवक घर की तरफ जा रहे हैं उन्हें किसी प्रकार से परेशान नहीं किया जाए और हमने वहाँ से ट्रेन पकड़ी। बाराबंकी में मुस्लिमों ने ट्रेन को रोका और पथराव किया। परन्तु हमारे साथ कुछ ऑर्मी के जवान थे, उन्होंने मुकाबला किया हवाई फायरिंग कर उन लोगों को भगाया । फिर धीरे से ट्रेन रवाना हुई ऐसे करते-करते हम घर पहुंचे।

जो हमने उठाया था एक लक्ष्य लेकर पहुंचे थे वह कल साकार होता दिख रहा है, भगवान श्रीराम का जन्म स्थान पर इस भव्य मंदिर के निर्माण के लिए 1992 में जो कुछ किया था वह अपनी आंखों से होता हुआ हम देख रहे हैं ।

योगी की पाती प्रभु राम के नाम

लखनऊ, 01 अगस्त:

 5 अगस्त को होने जा रहे ऐतिहासिक राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर शासन और प्रशासन की ओर से तैयारियां अंतिम चरण में हैं. 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर का भूमि पूजन करेंगे और इसकी आधारशिला रखेंगे. इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बेहद भावुक लेख लिखा है. इसमें उन्होंने भूमि पूजन को उल्लास, आह्लाद, गौरव एवं आत्‍मसंतोष का अवसर बताया है. सीएम योगी ने लिखा है कि श्रीराम के आदर्शों पर चलकर एक नए भारत का निर्माण हो रहा है और ये युग रामराज्य और मानवकल्याण का है.

  रामचरितमानस की चौपाई से लेख की शुरुआत 

सीएम योगी ने लेख की शुरुआत तुलसीदास की रचना श्रीरामचरितमानस की चौपाई से की है. उत्तर भारत में श्रीरामचरितमानस के हिंदू धर्म में काफी उच्च स्थान प्राप्त है. सीएम योगी लेख की शुरुआत इस तरह की है

– श्री रामलला विराजमान

जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती॥
रघुकुल तिलक सुजन सुखदाता। आयउ कुसल देव मुनि त्राता॥

  सकल आस्था के प्रतिमान रघुनन्‍दन प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली धर्मनगरी  श्रीअयोध्या जी की पावन भूमि पर श्रीरामलला के भव्‍य और दिव्य मंदिर की स्थापना की प्रक्रिया गतिमान है.लगभग 5 शताब्दियों की भक्तपिपासु प्रतीक्षा, संघर्ष और तप के उपरांत, कोटि-कोटि सनातनी बंधु-बांधवों के स्वप्न को साकार करते हुए 5 अगस्त 2020 को अभिजीत मुहूर्त में मध्याह्न बाद 12.30 से 12.40 के बीच आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर-कमलों से श्री रामलला के चिरअभिलाषित भव्य-दिव्य मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी.

 श्रीरामजन्मभूमि मंदिर को लेकर हुआ संघर्ष याद किया

   सीएम योगी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सदियों के संघर्ष को याद करते हुए लिखा है – ‘नि:संदेह यह अवसर उल्लास, आह्लाद, गौरव एवं आत्मसंतोष का है, सत्यजीत करूणा का है. हम भाग्यशाली हैं कि प्रभु श्रीराम ने हमें इस ऐतिहासिक घटना के साक्षी होने का सकल आशीष प्रदान किया है. भाव-विभोर कर देने वाली इस वेला की प्रतीक्षा में लगभग पांच शताब्दियां व्यतीत हो गईं, दर्जनों पीढियां अपने आराध्य का मंदिर बनाने की अधूरी कामना लिए भावपूर्ण सजल नेत्रों के साथ ही, इस धराधाम से परमधाम में लीन हो गईं. किंतु प्रतीक्षा और संघर्ष का क्रम सतत जारी रहा. वास्तव में दीर्घकालीन, दृढ़प्रतिज्ञ, संघर्षमय और भावमयी कारूणिक प्रतीक्षा की परिणति अंतत: सुखद ही होती है. आज वह शुभ घड़ी आ ही गई कि जब कोटि-कोटि सनातनी आस्थावानों के त्याग और तप की पूर्णाहुति हो रही है. मर्यादा के साक्षात प्रतिमान, पुरूषोत्तम, त्यागमयी आदर्शसिक्‍त चरित्र के नरेश्वर, अवधपुरी के प्राणपिय राजा श्रीराम आज अपने वनवास की पूर्णाहुति कर हमारे हृदयों के भावपूरित संकल्प स्वरूप सिंहासन पर विराजने जा रहे हैं.सत्य ही कहा गया है, आस्था से उत्पन्न भक्ति की शक्ति का प्रताप अखंड होता है. श्रीरामजन्‍मभूमि मंदिर निर्माण में अवरोध विगत पांच शताब्दियों से सनातन हिंदू समाज की आस्थावान सहिष्‍णुता की कठोर परीक्षातुल्य था. आज उस परीक्षा के शुभ परिणाम का उत्‍सव मनाने का अवसर है. श्री रामलला विराजमान की भव्‍य प्राण-प्रतिष्ठा भारत की सांस्कृतिक अंतर्रात्मा की समरस अभिव्यक्ति का प्रतिमान सिद्ध होगा.’ 

गोरक्षनाथ पीठ के संघर्ष को भी स्मरण किया

राम मंदिर आंदोलन में गोरक्षपीठ के संतों के संघर्ष को भी सीएम योगी ने इस लेख में याद किया है- ‘श्री राम जन्‍मभूमि मंदिर के निर्माण हेतु भूमिपूजन के बहुप्रतीक्षित अवसर पर आज सहज ही दादागुरू ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत श्री दिग्विजयनाथ जी महाराज और पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्‍वर महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज का पुण्य स्मरण हो रहा है. मैं अत्यंत भावुक हूं कि हुतात्माद्वय भौतिक शरीर से इस अलौकिक सुख देने वाले अवसर के साक्षी नहीं बन पा रहे किंतु आत्मिक दृष्टि से आज उन्हें असीम संतोष और हर्षातिरेक की अनुभूति अवश्य हो रही होगी. ब्रितानी परतंत्रता काल में श्रीराममंदिर के मुद्दे को स्वर देने का कार्य महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने किया था. सन् 1934 से 1949 के दौरान उन्होंने राम मंदिर निर्माण हेतु सतत् संघर्ष किया. 22-23 दिसम्‍बर 1949 को जब कथित विवादित ढांचे में श्रीरामलला का प्रकटीकरण हुआ, उस दौरान वहां तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्‍वर, गोरक्षपीठ महंत श्री दिग्विजयनाथ जी महाराज कुछ साधु-संतों के साथ संकीर्तन कर रहे थे. 28 सितंबर 1969 को उनके ब्रह्मलीन होने के उपरांत अपने गुरूदेव के संकल्‍प को महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज ने अपना बना लिया, जिसके बाद श्री राम मंदिर निर्माण आंदोलन के निर्णायक संघर्ष की नवयात्रा का सूत्रपात हुआ.’ 

राममंदिर आंदोलन ने राजनीति की दिशा बदली

   ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मार्गदर्शन, पूज्‍य संतों का नेतृत्व एवं विश्व हिंदू परिषद की अगुवाई में आजादी के बाद चले सबसे बड़े सांस्कृतिक आंदोलन ने न केवल प्रत्येक भारतीय के मन में संस्‍कृति एवं सभ्यता के प्रति आस्था का भाव जागृत किया अपितु भारत की राजनीति की धारा को भी परिवर्तित किया. 21 जुलाई, 1984 को जब अयोध्या के वाल्मीकि भवन में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ था तो सर्वसम्‍मति से पूज्य गुरूदेव गोरक्षपीठाधीश्‍वर महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज को अध्यक्ष चुना गया. तब से आजीवन श्रीराम जन्‍मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज अध्यक्ष रहे. पूज्य संतों की तपस्‍या के परिणामस्वरूप राष्‍ट्रीय वैचारिक चेतना में विकृत, पक्षपाती एवं छद्म धर्मनिरपेक्षता तथा साम्प्रदायिक तुष्टीकरण की विभाजक राजनीति का काला चेहरा बेनकाब हो गया.’ 

जन्मभूमि की मुक्ति के लिए हुआ कड़ा संघर्ष

सीएम योगी ने इस लेख में जन्मभूमि आंदोलन के दौरान गुरु अवैद्यनाथ महाराज और संत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज को याद करते हुए लिखा है -‘वर्ष 1989 में जब मंदिर निर्माण हेतु प्रतीकात्मक भूमिपूजन हुआ तो भूमि की खोदाई के लिए पहला फावड़ा स्वयं अवैद्यनाथ महाराज एवं पूज्य संत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज ने चलाया था. इन पूज्य संतों की पहल, श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के कारण पहली शिला रखने का अवसर श्री कामेश्वर चौपाल जी को मिला. आज श्री कामेश्वर जी श्री राम जन्‍मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य होने का सौभाग्य धारण कर रहे हैं. जन्मभूमि की मुक्ति के लिए बड़ा और कड़ा संघर्ष हुआ है. न्याय और सत्य के संयुक्त विजय का यह उल्लास अतीत की कटु स्‍मृतियों को विस्मृत कर, नए कथानक रचने, और समाज में समरसता की सुधा सरिता के प्रवाह की नवप्रेरणा दे रहा है.’ 

आध्यात्मिक और आधुनिक संस्कृति का प्रतिमान बनेगी अयोध्या 

अयोध्या के विकास का वादा करते हुए सीएम योगी ने लिखा कि अब अयोध्या की अलग पहचान होगी-‘सनातन संस्कृति के प्राण प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली हमारे शास्त्रों में मोक्षदायिनी कही गई है. आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश प्रदेश सरकार इस पावन नगरी को पुन: इसी गौरव से आभूषित करने हेतु संकल्पबद्ध है. श्रीअयोध्या जी वैश्विक मानचित्र पर महत्‍वपूर्ण केंद्र के रूप में अंकित हो और इस धर्मधरा में राम राज्य की संकल्पना मूर्त भाव से अव‍तरित हो, इस हेतु हम नियोजित नीति के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं. वर्षों तक राजनीतिक उपेक्षा के भंवर जाल में उलझी रही अवधपुरी, आध्यात्मिक और आधुनिक संस्‍कृति का नया प्रमिमान बनकर उभरेगी. यहां रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं. विगत 3 वर्षों में विश्व ने अयोध्या की भव्य दीपावली देखी है. अब यहां धर्म और विकास के समन्वय से हर्ष की सरिता और समृद्धि की बयार बहेगी. निश्चित रूप से, 5 अगस्त को श्रीअयोध्या जी  में आयोजित भूमिपूजन/शिलान्यास कार्यक्रम में सहभागिता हेतु प्रभु श्रीराम के असंख्य अनन्य भक्तगण परम् इच्छुक होंगे. किंतु वर्तमान वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा. इसे प्रभु इच्छा मानकर सहर्ष स्वीकार करना चाहिए. आदरणीय प्रधानमंत्री जी सवा सौ करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रतिबिंब हैं, वह स्वयं  भूमिपूजन/शिलान्यास करेंगे. यह प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का क्षण होगा. आदरणीय प्रधानमंत्री जी के कारण ही देश और दुनिया लगभग पांच शताब्दी बाद इस शुभ मुहूर्त का अहसास कर पा रहा है.’ 

रामराज्य का युग है, दीपक जलाकर उत्सव मनाएं 

सीएम योगी ने भूमिपूजन की घटना को नए युग का सूत्रपात बताते हुए कहा है कि ये मानवकल्याण और रामराज्य का युग है. इस वक्त कोरोना का ध्यान रखते हुए घरों में रहकर दीप जलाएं और खुशियां मनाएं -‘5 अगस्त, 2020 को भूमिपूजन/शिलान्यास न केवल मंदिर का है वरन्, एक नए युग का भी है. यह नया युग प्रभु श्रीराम के आदर्शों के अनुरूप नए भारत के निर्माण का है. यह युग मानव कल्याण का है. यह युग लोक कल्याण हेतु तपोमयी सेवा का है. यह युग रामराज्‍य का है.भाव-विभोर करने वाले इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रत्‍येक देशवासी का मन प्रफुल्लित होगा, हर्षित-मुदित होगा. किंतु स्मरण रहे, प्रभु श्रीराम का जीवन हमें संयम की शिक्षा देता है. इस उत्साह के बीच भी हमें संयम रखते हुए वर्तमान परिस्थितियों के दृष्टिगत शारीरिक दूरी बनाये रखना है क्योंकि यह भी हमारे लिए परीक्षा का क्षण है. अत: मेरी अपील है कि विश्व के किसी भी भाग में मौजूद समस्त श्रद्धालुजन 4 एवं 5 अगस्त, 2020 को अपने-अपने निवास स्‍थान पर दीपक जलाएं, पूज्य संत एवं धर्माचार्यगण देवमंदिरों में अखंड रामायण का पाठ एवं दीप जलाएं. निर्माण का स्वप्न पालकर पवित्र तप करने वाले तथा ऐसे ऐतिहासिक क्षण का प्रत्‍यक्ष किये बिना गोलोक पधार चुके अपने पूर्वजों का स्‍मरण करें और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें. पूर्ण श्रद्धाभाव से प्रभु श्रीराम का स्‍तवन करें.प्रभु श्रीराम का आशीष हम सभी पर बना रहेगा.

अशोक गहलोत 99 के फेर में, 10 – 15 विधायक पायलट के

“अशोक गहलोत गुट के 10 से 15 विधायक हमारे सीधे संपर्क में हैं। वे कह रहे हैं कि जैसे ही उन्हें छोड़ा जाएगा वे हमारे साथ आ जाएँगे। अगर गहलोत प्रतिबंध हटाते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने विधायक उनके पक्ष में हैं” पायलट गुट का दावा। राजस्थान में 200 सदस्यीय विधानसभा में 101 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। अशोक गहलोत को बहुमत साबित करने के लिए सीपीएम के विधायक बलवान पूनिया ने कुछ वक्‍त पहले साथ देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन वे न जयपुर में बाडेबंदी में थे न ही जैसलमेर गए थे।

जयपुर(राजस्थान ब्यूरो):

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनका कैंप दावा कर रहा है कि उनके पास 109 विधायक है लेकिन डेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम के पास गहलोत समर्थक विधायकों की पुरी सूची है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कैंप के पास 99 विधायक ही हैं। इन 99 में से 92 विधायक ही जयपुर से आज जैसलमेर पहुंचे। चार मंत्री समेत 7 विधायक जयपुर में ही हैं। इसमें से कुछ विधायक शनिवार को जैसलमेर जा सकते हैं।

राजस्थान में 200 सदस्यीय विधानसभा में 101 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। अशोक गहलोत को बहुमत साबित करने के लिए सीपीएम के विधायक बलवान पूनिया ने कुछ वक्‍त पहले साथ देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन वे न जयपुर में बाडेबंदी में थे न ही जैसलमेर गए थे। पूनिया ने अगर पार्टी व्हिप का पालन किया और कांग्रेस के पक्ष में मत नहीं दिया तो गहलोत सरकार के पास विधायक 99 ही रहेंगे. यानी गहलोत सरकार के गिरने का खतरा।

एक मंत्री मास्टर भंवरलाल इतने बीमार हैं कि मतदान नहीं कर सकते हैं। फिलहाल उनका मत किसी कैंप में नहीं है। स्पीकर सीपी जोशी सिर्फ पक्ष-विपक्ष की समान मत संख्या पर ही मतदान करा सकते हैं। अगर गहलोत के पास 99 मत ही रहते हैं तो सीपी जोशी मतदान नही कर पाएंगे यानी सरकार नहीं बचा सकते। जोशी सरकार को तभी बचा सकते हैं जब गहलोत 100 विधायक जुटा लें ऐसा तभी संभव है जब सीपीएम के दो में से कम से एक गहलोत के पक्ष में मत करे।

आज ही गहलोत ने अपने एक ताजे बयान में कहा है कि जो लोग सरकार गिराने की साजिश में लगे थे अगर वह आलाकमान के पास जाते हैं और आलाकमान उन्हें माफ कर देता है तो मैं उन्हें गले लगा लूंगा. मुझे पार्टी ने बहुत कुछ दिया है तीन बार मुख्यमंत्री था प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष रहा मैं जो भी कर रहा हूं पार्टी और जनता की सेवा के लिए कर रहा हूं मेरा इसमें अपना कुछ भी नहीं है

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर मंडरा रहा खतरा टलता नहीं दिख रहा। सचिन पायलट गुट के एक विधायक के दावे ने पार्टी की मुसीबत और बढ़ा दी है। विधायक हेमाराम चौधरी का दावा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गुट के 10 से 15 विधायक उनके संपर्क में हैं।

हेमाराम ने यह बात ऐसे वक्त में कही है जब गहलोत विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लेकर आने की बात कह रहे हैं।हेमाराम चौधरी ने कहा, “अशोक गहलोत गुट के 10 से 15 विधायक हमारे सीधे संपर्क में हैं। वे कह रहे हैं कि जैसे ही उन्हें छोड़ा जाएगा वे हमारे साथ आ जाएँगे। अगर गहलोत प्रतिबंध हटाते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने विधायक उनके पक्ष में हैं।”

अमर नहीं रहे

पूर्व समाजवादी पार्टी नेता, राज्‍यसभा सांसद अमर सिंह का निधन हो गया है. वो पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहे थे उनका दुबई कए एक अस्पताल में इलाज चल रहा था. कुछ दिनों पहले ही उनका किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था. शनिवार दोपहर उनका निधन हो गया।

राज्‍यसभा सांसद अमर सिंह का निधन हो गया है. वह लगभग 6 महीने से बीमार चल रहे थे. सिंगापुर में इलाज के दौरान अमर सिंह शनिवार दोपहर जिंदगी की जंग हार गए. उनके सियासी सफर में ऊपर चढ़ने और नीचे गिरने की कहानी दो दशकों के दौरान लिखी गई. एक दौर में वो समाजवादी पार्टी के सबसे असरदार नेता थे, उनकी तूती बोलती थी लेकिन हाशिए पर भी डाले जाते रहे. समाजवादी पार्टी की कमान अखिलेश के हाथों में जाने के बाद उन्हें सपा से किनारा करना पड़ा.

अमर सिंह विभिन्न वजहों से कई बार विवादों में भी रहे। एक बार उन्होंने एक वाकया सुनाया था कि कैसे उन्होंने 1999 में कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की पिटाई की थी। मणिशंकर अय्यर ने उन्हें अवसरवादी कहा था और शराब के नशे में कुछ भी बकने का आरोप लगाया था। जब अय्यर ने उन्हें माँ की गाली दी और मुलायम को भी गाली दी तो उन्होंने वहीं पटक कर अय्यर की पिटाई कर दी।

64 वर्षीय राज्यसभा सांसद अमर सिंह का निधन सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने ईद की शुभकामनाएँ भी दी थीं और साथ ही बाल गंगाधर तिलक की 100वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया था। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निधन पर दुःख जताते हुए कहा कि स्वभाव से विनोदी अमर सिंह की सार्वजनिक जीवन के दौरान सभी दलों में मित्रता थी।

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भाजपा नेता शीतल बिश्नोई द्वारा फेसबुक पर ब्राह्मण समाज के लोगो को ‘दिहाडी मजदूर’ बताने पर ब्राह्मण समाज महापंचायत नाराज

राहुल भारद्वाज, सहारनपुर:

सहारनपुर भाजपा नेता शीतल बिश्नोई द्वारा फेसबुक पर ब्राह्मण समाज के विरुद्ध अभद्र टिप्पणी पर ब्राह्मण समाज महापंचायत के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने आज शीतल बिश्नोई के खिलाफ नारेबाजी करते हुए  कार्रवाई की मांग कि।  महांचायत के कार्यकर्ताओ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदी सोमवार तक इस मामले मे बिश्नोई के खिलाफ कोई कार्रवाई नही गयी तो उन्हें आन्दोलन के लिये बेबस होना पडेगा। आपको बता दे, कि शीतल बिश्नोई ने ब्राहम्ण समाज को फेसबुक पर दिहाडी मजदूर का दर्जा दे डाला था। उसी अभद्र टिपन्नी को लेकर   ब्राह्मण समाज आज  शीतल बिश्नोई से बेहद नाराज है।प्रदर्शन करने वालों मे सर्व ब्राह्मण महासभा के जिलाउपाध्यक्ष सागर पण्डित भलस्वा,भाजपा नेता दिव्यांश पण्डित,निक वशिष्ठ,राहुल शर्मा,इत्यादी लोग मोजूद रहे।

इस प्रदर्शन मे सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पूरा ख्याल रखा गया।