आज डाकटरों की देशव्यापी हड़ताल

ममता की भड़काई आग में सारे देश के जूनियर डाक्टर हड़ताल पर हैं। अभी तक कहीं कहीं सांकेतिक हड़ताल चल रही थी परंतु आज यानि 17 जून को आईएमए और दूसरे संगठनों ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। जो बात सिर्फ एक आश्वासन से दूर की जा सकती थी उसे पहले ममता ने सांप्रदायिक रंग दिया, फिर क्षेत्रीय मामला बनाया, धमकाया, इस्तीफे – निलंबन और तत्पश्चात अपनी सुरक्षा से भी जोड़ दिया। सब कुछ किया बस वही नहीं किया जो अति साधारण और अति आवश्यक था।

नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के साथ हुए व्यवहार के बाद हड़ताल का असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है. आज राजधानी दिल्ली में सफदरजंग, लेडी हार्डिंग, आरएमएल, जी टीबी, डॉ बाबासाहेब अंबेडकर, संजय गांधी मेमोरियल, दिन दयाल उपाध्याय अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे. डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने के कारण दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं और रूटीन ऑपरेशन प्रभावित होंगे. 

इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी

इन अस्पतालों में करीब 14,500 रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने से ओपीडी प्रभावित रहेंगी. वहीं ऑपरेशन थियेटर बंद रहने की वजह से पहले से निर्धारित ऑपरेशन नहीं हो पाएंगे. हालांकि ओपीडी में वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहेंगे. रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि इमरजेंसी में रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे. ताकि गंभीर मरीजों का इलाज प्रभावित न होने पाए. आइएमए की घोषणा के मद्देनजर दिल्ली के निजी अस्पतालों में भी ओपीडी सेवा प्रभावित होने की आशंका है. इससे हजारों मरीजों का इलाज प्रभावित होगा.

इन अस्पतालों में जाने से बचें

सफदरजंग, आरएमएल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, लोकनायक, जीबी पंत, जीटीबी, डीडीयू, संजय गांधी स्मारक अस्पताल, आंबेडकर अस्पताल, गुरु गो¨वद सिंह अस्पताल, हइबास, हिंदू राव, भगवान महावीर अस्पताल, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, रेलवे अस्पताल व महर्षि वाल्मीकि अस्पताल, एलबीएस. एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने अपना फैसला बदल लिया है और दोपहर 12 बजे से हड़ताल में शामिल होने के एलान किया है. इससे कार्डियक सेंटर व न्यूरो सेंटर में दोपहर दो बजे से होने वाली ओपीडी प्रभावित होगी.

दिल्ली के इन अस्पतालों के लिए जारी किया गया नंबर

यहां पहुंचने वाले मरीज़ हड़ताल से  अस्पताल में कौन-कौन सी स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुई है उसकी जानकारी हासिल कर सकते हैं..
1. सफदरजंग  :- 26165060, 26165032, 26168336
2. लेडी हार्डिंग :- 011 2336 3728
3. आरएमएल :-91-11-23404040
4. जी टीबी  :- 011 2258 6262
5. डॉ बाबासाहेब अंबेडकर:- 0120 245 0254
6. संजय गांधी मेमोरियल :-011 2792 2843 / 011 2791 5990
7.दिन दयाल उपाध्याय : 011 2549 4402

टीएमसी नेताओं के बच्चे डाक्टरों की हड़ताल के समर्थक

नई दिल्‍ली : पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक अस्‍पताल में तीमारदारों की ओर से डॉक्‍टरों संग की गई मारपीट के बाद शुरू हुई डॉक्‍टरों की हड़ताल पूरे देश में फैल गई है. देश के सबसे बड़े सरकारी अस्‍पताल एम्‍स के भी रेजीडेंट डॉक्‍टर भी इसमें शामिल हो गए हैं. डॉक्‍टरों की इस हड़ताल में कोलकाता के मेयर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता फरहाद हकीम की डॉक्‍टर बेटी भी शामिल हो गई है. उनकी बेटी शबा हकीम ने गुरुवार को डॉक्‍टरों की हड़ताल का समर्थन किया है. इसके साथ ही उन्‍होंने फेसबुक में एक पोस्‍ट लिखा. उसमें उन्‍होंने साफतौर पर कहा है कि मैं टीएमसी समर्थक हूं लेकिन इस मामले में नेताओं के ढुलमुल रवैया और उनकी ओर से साधी गई चुप्‍पी पर मैं शर्मिंदा हूं.

app-facebookShabba Hakimon Wednesday

For those who do not know Doctors in government and most private hospitals are boycotting OPD but are still working in emergency. Unlike other professions we can’t just decide not to work because at the end of the day we have humanity. 
If there was a bus or taxi strike not one taxi driver or bus driver would provide you with any service no matter how dire the situation. 
For those saying “Ono Rugider ki dosh?” Please question the government as in why the police officers post…See more

शबा हकीम ने कोलकाता के केपीसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से डॉक्‍टरी की पढ़ाई की है. शबा हकीम ने सोशल मीडिया में पोस्‍ट करते हुए डॉक्‍टरों को पश्चिम बंगाल में काम के समय अस्‍पताल में सुरक्षा उपलब्‍ध कराने की मांग की. बात दें कि इसके बाद शुक्रवार को ही खुद ममता बनर्जी के भतीजे आबेश बनर्जी भी डॉक्‍टरों की इस हड़ताल में शामिल हुए हैं. कोलकाता के केपीसी मेडिकल कॉलेज और अस्‍पताल में पढ़ने वाले आबेश बनर्जी ने डॉक्‍टरों की हड़ताल का समर्थन किया है और इस हड़ताल में शामिल हो गए हैं. 

पश्‍चिम बंगाल में मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के अल्‍टीमेटम के बाद डॉक्‍टरों की हड़ताल ने तूल पकड़ लिया है. इसी के चलते शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के 16 और डॉक्‍टरों ने अपना इस्‍तीफा दे दिया है. ये सभी डॉक्‍टर कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं.

डॉक्‍टरों की सुरक्षा की मांग और पश्चिम बंगाल की घटना के विरोध में डॉक्‍टरों का प्रतिनिधिमंडल ने आज स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मुलाकात की है. डॉक्‍टरों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात से पहले स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने डॉक्‍टरों से सांकेतिक हड़ताल कर मरीजों का इलाज जारी रखने की अपील की. उन्‍होंने कहा कि मैं सभी डॉक्‍टरों को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर है. 

Dr Dev D@neo_natal

Dr Abesh Banerjee, nephew of Mamata Banerjee at KPC hospital Kolkata!!#SaveTheDoctors https://twitter.com/Jb21bh/status/1139209543928258560 …

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#Jayanta Bhattacharya@Jb21bhAbesh Bannerjee, son of @MamataOfficial’s brother Kartik Bannerjee was leading the protest of the doctors of KPC College and Hospital.#BengalBurning,@trunilss,@prettypadmaja,#IndiaFirst, #TeamIndiaFirst510:09 PM – Jun 13, 2019Twitter Ads info and privacySee Dr Dev D’s other Tweets

 
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने यह भी कहा कि मैं पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी से अनुरोध करता हूं कि इस मामले को अपने सम्‍मान का मुद्दा न बनाएं. उन्‍होंने डॉक्‍टरों को कल अल्‍टीमेटम दिया था, इसीलिए डॉक्‍टर नाराज हो गए और उन्‍होंने हड़ताल कर दी. आज मैं इस मामले में ममता बनर्जी जी को लिखूंगा. साथ ही उनसे बात करने की भी कोशिश करूंगा.

ममता के चलते डाक्टरों की देशव्यापी हड़ताल

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी और डॉक्‍टरों के बीच हुए विवाद की आंच पूरे देश में फैल गई है. पश्चिम बंगाल के डॉक्‍टरों के साथ हुई मारपीट के बाद देशभर के डॉक्‍टर उनके समर्थन में आ गए हैं. इसके तहत राजधानी दिल्‍ली, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र और उत्‍तर प्रदेश के अधिकांश सरकारी और निजी डॉक्‍टर आज हड़ताल करेंगे. साथ ही कुछ मरीजों के इलाज के दौरान ही विरोध प्रदर्शन करेंगे. सनाद रहे कोलकाता के सरकारी अस्‍पताल सागर दत्‍ता मेडिकल कॉलेज और अस्‍पताल के 3 असिस्‍टेंट प्रोफेसर, 1 प्रोफेसर और 4 रेजिडेंट डॉक्‍टरों ने पद से इस्‍तीफा दे दिया है.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने दोपहर दो बजे तक काम पर लौटने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश को नहीं माना और कहा कि सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा संबंधी मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी. वहीं मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों पर बरसते हुए विपक्षी बीजेपी और सीपीएम पर उन्हें भड़काने तथा मामले को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया.

डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से कई सरकारी अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों अस्पतालों में तीसरे दिन भी आपातकालीन वार्ड, ओपीडी सेवाएं, पैथोलॉजिकल इकाइयां बंद रही. वहीं निजी अस्पतालों में भी चिकित्सकीय सेवाएं बंद रहीं. डॉक्टर कोलकाता में एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद भीड़ द्वारा अपने दो सहकर्मियों पर हमले के मद्देनजर प्रदर्शन कर रहे हैं. भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने घटना के खिलाफ तथा हड़ताली डॉक्टरों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए शुक्रवार को ‘अखिल भारतीय विरोध दिवस’ घोषित किया है.

विपक्ष ने गतिरोध के लिए बनर्जी पर हमला किया है और बीजेपी ने उनपर ‘हिटलर’ की तरह काम करने का आरोप लगाया. जब मुख्यमंत्री दोपहर में सरकारी एसएसकेएम अस्पताल पहुंची तो डॉक्टरों ने ‘हमें इंसाफ चाहिए’ के नारे लगाए. उन्होंने कहा, “मैं आंदोलन की निंदा करती हूं. कनिष्ठ चिकित्सकों का आंदोलन सीपीएम और बीजेपी का षड्यंत्र है.”  

बनर्जी के पास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का भी प्रभार है. उन्होंने चिकित्सकों को चार घंटे के भीतर काम पर लौटने को कहा था लेकिन बाद में समय-सीमा में संशोधन करके इसे अपराह्न दो बजे कर दिया. उन्होंने ऐसा नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि उन्हें छात्रावास खाली करने होंगे. बनर्जी की समय सीमा के बावजूद डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल जारी रखी. डॉक्टरों की एक टीम ने इस मुद्दे पर राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी से मुलाकात की. राज्यपाल ने भी उनसे हड़ताल खत्म करने की अपील की.

त्रिपाठी से भेंट के बाद राजभवन के बाहर एक जूनियर डॉक्टर ने कहा, “मांग पूरी होने तक हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे. हमारी मांगे साधारण हैं…उचित सुरक्षा मिले और सभी अस्पताल में सशस्त्र पुलिस बल तैनात हों तथा एनआरएस अस्पताल में शनिवार को हुए हमले में शामिल अपराधियों को गैर जमानती धाराओं में गिरफ्तार किया जाए.”

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो कहा, हमें उनसे उसकी उम्मीद नहीं थी. बहरहाल, बनर्जी ने आरोप लगाया कि बाहर के लोग चिकित्सीय कॉलेजों और अस्पतालों में व्यवधान डालने के लिए घुस आए हैं. उन्होंने बीजेपी पर हड़ताल को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “सीपीएम की मदद से बीजेपी हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर रही है. मैं उनके बीच प्रेम को देखकर स्तब्ध हूं.” बनर्जी ने कहा, “बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने और फेसबुक पर दुष्प्रचार चलाने के लिए उकसा रहे हैं.’’ 

एक फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने हड़ताल की वजह से मरीजों की खराब हालात को रेखांकित किया तथा दावा किया कि सरकार डॉक्टरों के साथ सहयोग कर रही है. उन्होंने एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में दो जूनियर डॉक्टरों को आई चोटों को दुर्भाग्यपूर्ण कहा. बनर्जी ने कहा कि इस बाबत पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और इलाज में लापरवाही की शिकायत पर भी जांच के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि कैंसर व गुर्दे के मरीज तथा दुर्घटना पीड़ित और दूर दराज से आए बच्चे इलाज नहीं मिलने की वजह से सबसे ज्यादा भुगत रहे हैं.

विपक्षी पार्टियों ने हड़ताली डॉक्टरों को कथित ‘धमकी’ देने के लिए मुख्यमंत्री की आलोचना की और स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर उनका इस्तीफा मांगा. बीजेपी नेता मुकुल रॉय ने आरोप लगाया कि बनर्जी अराजक बन गई हैं और ‘हिटलर’ की तरह काम कर रही है. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए माकपा की केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि बनर्जी की गतिरोध को खत्म करने में दिलचस्पी नहीं लगती है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा ने भी मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए.

स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री बनर्जी पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. मेरे पास डॉक्टरों के इस्तीफे की कोई रिपोर्ट नहीं है.’’

डॉक्टरों की हड़ताल की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बृहस्पतिवार को मरीजों और उनके तीमारदारों से संयम बरतने का अनुरोध किया और घटना की निंदा की. उन्होंने कहा कि कि वह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के समक्ष डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा उठाऐंगे. राष्ट्रीय राजधानी स्थित एम्स के रेजीडेंट डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार को सांकेतिक प्रदर्शन करते हुए अपने सिर पर पट्टियां बांधकर काम किया और शुक्रवार को काम का बहिष्कार करने का फैसला किया. इस बीच बनर्जी ने एसएसकेएम अस्पताल के हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर उनके दौरे के समय अपशब्द बोलने का आरोप लगायाा.

उन्होंने गुरुवार रात को एक बांग्ला समाचार चैनल से बातचीत में कहा, “मैं आपातकालीन विभाग में गयी थी जहां वे मुझसे बात कर सकते थे, लेकिन जब मैं वहां थी तो उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, वह मुझे अपशब्द बोलने जैसा था.” 

नितीश एनडीए में रहते हुए करेंगे 3 तालाक बिल का विरोध

मामला 3 तलाक का हो, धारा 370 का या फिर बंगाल में बिगड़ती राजनैतिक व्यवस्था के लिए किसी निर्णय का नितीश कुमार विरोध दर्ज करेंगे। एनडीए के सत्ता में दोबारा आने के बाद से और जेडीयू को कोई मंत्रालय न मिलने से नाराज़ नितीश कुमार एनडीए से निकालने के लिए छटपटा रहे हैं। कुछ चुनावी मुद्दे/ वायदे भाजपा के हैं तो कुछ एनडीए के लेकिन नितीश कुमार की चाल समझना अभी बाकी है।

पटनाः तीन तलाक का मुद्दा देश में फिर से उठने लगा है. संसद के बजट सत्र में तीन तलाक को लेकर नए बिल लाने की बात केंद्र सरकार ने की थी. जिसके बाद एक बार फिर लोकसभा में तीन तलाक बिल पेश करने लिए तैयार है. इसके लिए केन्द्रीय कैबिनेट ने एक साथ तीन बार तलाक बोलकर संबंध विच्छेद की प्रथा पर प्रतिबंध लगाने के लिए बुधवार को नए विधेयक को मंजूरी दी. वहीं, तीन तलाक के मुद्दे पर जेडीयू केंद्र सरकार के साथ नहीं दिख रही है.

एनडीए सरकार की सहयोगी दल जेडीयू तीन तलाक विधेयक को लेकर सरकार के साथ नहीं है. जेडीयू ने कहा है कि वह इस बिल को लेकर सरकार का साथ नहीं देगी. यह समाज का मुद्दा है इसे समाज को ही तय करना चाहिए.

जेडीयू के महासचिव और बिहार सरकार के मंत्री श्याम रजक ने तीन तलाक बिल को लेकर कहा है कि इस मामले में ह सरकार का साथ नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि हमने पहले भी इसका विरोध किया था और अभी भी इसका विरोध करते हैं. हम आगे भी इसका विरोध करेंगे.

उन्होंने कहा कि हमारे विरोध की वजह से ही तीन तलाक का बिल राज्यसभा में नहीं आ पाया था. तीन तलाक बिल को लेकर जेडीयू की राय पहले से ही साफ है. चुकि यह समाज से जुड़ा मसला है. इसलिए जेडीयू का मानना है कि इस मामले को समाज को ही तय करने देना चाहिए.

वहीं, उनसे पूछा गया कि वह एनडीए में रहकर सरकार का विरोध कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि यह मामला एनडीए से नहीं जुड़ा है बल्कि यह सरकार से जुड़ा हुआ मुद्दा है. इसलिए मुद्दे को लेकर जेडीयू राय बिल्कुल स्पष्ट है.

दरअसल, केंद्रीय कैबिनेट ने ‘तीन तलाक’ (तलाक-ए-बिद्दत) की प्रथा पर पाबंदी लगाने के लिए बुधवार को नए विधेयक को मंजूरी दी थी. केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह जानकारी दी.

पिछले महीने 16 वीं लोकसभा के भंग होने के बाद पिछला विधेयक निष्प्रभावी हो गया था, क्योंकि यह राज्यसभा में लंबित था. दरअसल, लोकसभा में किसी विधेयक के पारित हो जाने और राज्यसभा में उसके लंबित रहने की स्थिति में निचले सदन (लोकसभा) के भंग होने पर वह विधेयक निष्प्रभावी हो जाता है

मदरसों पर आजम खान की मोदी सरकार को नसीहत

आजम खान ने आज मोदी सरकार पर फिर से निशाना साधा है, आज उन्हे अपने वोट बैंक में सेंध लगती हुई सी मालूम हो रही है। इनकी राजनैतिक बिसात मुस्लमानों से शुरू होकर वहीं पर सिमट जाती है। कई दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद इनहोने कभी भी मुसलमानों के हक में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, उन्हे बहुसंख्यक समाज से डराते रहे ओर पढ़ाई के नाम पर सिर्फ धर्म की पढ़ाई पर ही ज़ोर दिया अत: वह समाज की मुख्य धारा से काटते चले गए, लेकिन इनका वोट बैंक दृढ़ होता गया। आज जब मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के लिए कुछ अच्छा करने जा रही है तो यह फिर अपना पुराना राग अलापने लगे हैं। मदरसों के ‘स्टैंडर्ड’ पर खुद कभी कोई काम नहीं किया ठीक ही है ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’

नई दिल्ली/रामपुर: एक बार फिर से मोदी सरकार के बनने के बाद सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के नए नारे के साथ देश के अल्पसंख्यकों को साथ लेकर चलने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने सक्रियता दिखाते हुए देश के अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए अगले पांच वर्ष का खाका खींच दिया है. सरकार ने तय किया है कि देश भर के मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए मदरसा शिक्षकों को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, ताकि वे मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा-हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, कंप्यूटर आदि दे सकें. सरकार के इस फैसले पर सपा नेता और रामपुर से सांसद आजम खान ने निशाना साधा है. 

सही हो मदरसो का स्टैंडर्ड
उन्होंने कहा कि दो तरह के शिक्षा होती है. मदरसों में मजहबी तालीम दी जाती है. उन्हीं मदरसो में अंग्रेजी, हिन्दी, गणित पढ़ाई जाती है. उन्होंने कहा कि अगर मदद करनी है तो मदरसों का स्टैंडर्ड सही करना होगा. उन्होंने कहा कि झूठ बोलने, ठगी करने या धोखा देने से नुकसान हिन्दुस्तान का होगा.

अल्पसंख्यकों को कहां से देंगे सहूलियत
सपा सांसद ने देश की बेसिक शिक्षा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस मुल्क में हमारी बेसिक शिक्षा अभी भी पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि बच्चे घर से टाट-फट्टा लेकर जाते हैं. तो सवाल ये कि सरकार सिर्फ अल्पसंख्यकों को कहां से सहूलियत देगी.

सरकार पर साधा निशाना
रामपुर सांसद आजम खान ने कहा कि आधुनिक मदरसे बनवाइए, उनकी इमारते बनावाइए, तन्खवा दिलवाइए ये अच्छी बात है. लेकिन धोखा मत दीजिए. उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मदरसों को आज तक मिड डे मील से महरूम रखा है और बात आधुनिक मदरसे की करते हैं. वजीफा देने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन साथ ही इंस्टीटूशन खत्म कर रह हैं. उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए कहा कि ले देकर एक अल्पसंख्यक संस्थान बचा है और बीजेपी सरकार उसके पीछे पड़ी हुई है कि किस तरह उसे बर्बाद किया जाए. 

… तो इन्हें माना जाए लोकतंत्र का दुश्मन
उन्होंने इस दौरान प्रज्ञा ठाकुर और नाथूराम गोडसे के विचारों को बढ़ावा देने वालों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मदरसे में नाथूराम गोडसे की फितरत पैदा नहीं की जाती, प्रज्ञा ठाकुर जैसी शखसियत पैदा नहीं की जाती. पहले सरकार को इन्हें रोकना चाहिए. उन्होंने कहा सरकार को ऐलान करना चाहिए कि नाथूराम गोडसे के विचारों को बढ़ावा देनेवालों को लोकतंत्र का दुश्मन माना जाएगा.

क्या लिया मोदी सरकार ने फैसला
आपको बता दें कि अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के नेतृत्व में मंगलवार को दिल्ली के अंत्योदय भवन में मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन की 112वीं गवर्निंग बॉडी और 65वीं आम सभा की बैठक हुई. इस बैठक के बाद मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मोदी सरकार ने सांप्रदायिकता और तुष्टीकरण की ‘बीमारी’ को खत्म किया है और देश में स्वस्थ समावेशी विकास का माहौल बनाया है. नकवी ने कहा कि सरकार ‘समावेशी विकास, सर्वस्पर्शी विश्वास’ के प्रति प्रतिबद्ध है.

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि देशभर में बने बड़ी संख्या में मदरसों को औपचारिक शिक्षा और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाएगा, ताकि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे भी समाज के विकास में योगदान दे सकें. उन्होंने अल्पसंख्यकों को मिलने वाली स्कॉलरशिप पर कहा है कि केंद्र सरकार पांच करोड़ से ज्यादा गरीब अल्पसंख्यक वर्गों के गरीब छात्र छात्राओं को वजीफा देगी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यक वर्गों के सशक्तिकरण के साथ शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है.

गंगा दशहरा 2019

हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार गंगा दशहरा का पर्व 12 जून 2019 यानी बुधवार के दिन मनाया जाएगा। गंगा दशहरा के दिन ही ईक्षवाकू वंश के राजा भागीरथ के प्रयास से मां गंगा धरती पर प्रकट हुई थी। मां गंगा की इस दिन विधिवत पूजा का विधान है। ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि के दिन यह पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। गंगा दशहरा के दिन दान और स्नान को अधिक महत्व दिया जाता है। अगर आप भी गंगा दशहरा के दिन मां गंगा की पूजा- अर्चना करना चाहते हैं और आपको गंगा की पृथ्वी पर उत्पत्ति, गंगा जल के फायदे और गंगा दशहरा पर स्नान के महत्व के बारे में नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो चलिए जानते हैं गंगा जल के फायदे और गंगा दशहरा पर स्नान के महत्व के बारे में…

गंगा का भूलोक पर उतरना

  • राजा दशरथ के पूर्वजों में राजा सगर हुए थे। सगर के पिता का नाम असित था। वे अत्यंत पराक्रमी थे। हैहय, तालजंघ, शूर और शशबिन्दु नामक राजा उनके शत्रु थे। उनसे युद्ध करते-करते राज्य त्यागकर उन्हें अपनी दो पत्नियों के साथ हिमालय भाग जाना पड़ा। वहां कुछ काल बाद उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी दोनों पत्नियां गर्भवती थीं। उनमें से एक का नाम कालिंदी था। कालिंदी की संतान नष्ट करने के लिए उसकी सौत ने उसको विष दे दिया। कालिंदी अपनी संतान की रक्षा के निमित्त भृगुवंशी महर्षि च्यवन के पास गयी। महर्षि ने उसे आश्वासन दिया कि उसकी कोख से एक प्रतापी बालक विष के साथ (स+गर) जन्म लेगा। अत: उसके पुत्र का नाम सगर पड़ा।
  • सगर अयोध्या नगरी के राजा हुए। वे संतान प्राप्त करने के इच्छुक थे। उनकी सबसे बड़ी रानी विदर्भ नरेश की पुत्री केशिनी थी। दूसरी रानी का नाम सुमति था। दोनों रानियों के साथ राजा सगर ने हिमवान के प्रस्त्रवण गिरि पर तप किया। प्रसन्न होकर भृगु मुनि ने उन्हें वरदान दिया कि एक रानी को वंश चलाने वाले एक पुत्र की प्राप्ति होगी और दूसरी के साठ हज़ार वीर उत्साही पुत्र होंगे। बड़ी रानी के एक पुत्र और छोटी ने साठ हज़ार पुत्रों की कामना की। केशिनी का असमंजस नामक एक पुत्र हुआ और सुमति के गर्भ से एक तूंबा निकला जिसके फटने पर साठ हज़ार पुत्रों का जन्म हुआ। असमंजस बहुत दुष्ट प्रकृति का था। अयोध्या के बच्चों को सताकर प्रसन्न होता था। सगर ने उसे अपने देश से निकाल दिया। कालांतर में उसका पुत्र हुआ, जिसका नाम अंशुमान था। वह वीर, मधुरभाषी और पराक्रमी था।
  • राजा सगर ने विंध्य और हिमालय के मध्य यज्ञ किया। सगर के पौत्र अंशुमान यज्ञ के घोड़े की रक्षा कर रहे थे। जब अश्ववध का समय आया तो इन्द्र राक्षस का रूप धारण कर घोड़ा चुरा ले गये। सगर ने अपने साठ हज़ार पुत्रों को आज्ञा दी कि वे पृथ्वी खोद-खोदकर घोड़े को ढूंढ़ लायें। जब तक वे नहीं लौटेंगे, सगर और अंशुमान दीक्षा लिये यज्ञशाला में ही रहेंगे। सगर-पुत्रों ने पृथ्वी को बुरी तरह खोद डाला तथा जंतुओं का भी नाश किया। देवतागण ब्रह्मा के पास पहुंचे और बताया कि पृथ्वी और जीव-जंतु कैसे चिल्ला रहे हैं। ब्रह्मा ने कहा कि पृथ्वी विष्णु भगवान की स्त्री हैं वे ही कपिल मुनि का रूप धारण कर पृथ्वी की रक्षा करेंगे। सगर-पुत्र निराश होकर पिता के पास पहुंचे। पिता ने रुष्ट होकर उन्हें फिर से अश्व खोजने के लिए भेजा। हज़ार योजन खोदकर उन्होंने पृथ्वी धारण करने वाले विरूपाक्ष नामक दिग्गज को देखा। उसका सम्मान कर फिर वे आगे बढ़े। दक्षिण में महापद्म, उत्तर में श्वेतवर्ण भद्र दिग्गज तथा पश्चिम में सोमनस नामक दिग्गज को देखा। तदुपरांत उन्होंने कपिल मुनि को देखा तथा थोड़ी दूरी पर अश्व को चरते हुए पाया। उन्होंने कपिल मुनि का निरादर किया, फलस्वरूप मुनि के शाप से वे सब भस्म हो गये। बहुत दिनों तक पुत्रों को लौटता न देख राजा सगर ने अंशुमान को अश्व ढूंढ़ने के लिए भेजा। वे ढूंढ़ने-ढूंढ़ते अश्व के पास पहुंचे जहां सब चाचाओं की भस्म का स्तूप पड़ा था। जलदान के लिए आसपास कोई जलाशय भी नहीं मिला। तभी पक्षीराज गरुड़ उड़ते हुए वहां पहुंचे और कहा कि ‘ये सब कपिल मुनि के शाप से हुआ है, अत: साधारण जलदान से कुछ न होगा। गंगा का तर्पण करना होगा। इस समय तुम अश्व लेकर जाओ और पिता का यज्ञ पूर्ण करो।’ उन्होंने ऐसा ही किया।
  • सगर के बाद उनके पौत्र अंशुमान राजा हुए थे। अंशुमान अपने पुत्र दिलीप को राज्य-भार सौंप कर गंगा को पृथ्वी पर लाने की चिंता में ग्रस्त थे। उन्होंने घोर तपस्या करते हुए शरीर त्याग किया। राजा दिलीप गंगा को पृथ्वी पर लाने का कोई मार्ग नहीं सोच पाये और बीमार होकर स्वर्ग सिधार गये।
  • भगीरथ पुत्रहीन थे। उन्होंने राज्यभार अपने मन्त्रियों को सौंपा और स्वयं गोकर्ण तीर्थ में जाकर घोर तपस्या करने लगे। ब्रह्मा के प्रसन्न होने पर उन्होंने दो वर माँगे—एक तो यह कि गंगा जल चढ़ाकर भस्मीभूत पितरों को स्वर्ग प्राप्त करवा पायें और दूसरा यह कि उनको कुल की सुरक्षा करने वाला पुत्र प्राप्त हो। ब्रह्मा ने उन्हें दोनों वर दिये, साथ ही यह भी कहा कि गंगा का वेग इतना अधिक है कि पृथ्वी उसे संभाल नहीं सकती। शंकर भगवान की सहायता लेनी होगी। ब्रह्मा के देवताओं सहित चले जाने के उपरान्त भगीरथ ने पैर के अंगूठों पर खड़े होकर एक वर्ष तक तपस्या की। शंकर ने प्रसन्न होकर गंगा को अपने मस्तक पर धारण किया। गंगा को अपने वेग पर अभिमान था। उन्होंने सोचा था कि उनके वेग से शिव पाताल में पहुँच जायेंगे। शिव ने यह जानकर उन्हें अपनी जटाओं में ऐसे समा लिया कि उन्हें वर्षों तक शिव-जटाओं से निकलने का मार्ग नहीं मिला।
  • भगीरथ ने फिर से तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर उसे बिंदुसर की ओर छोड़ा। वे सात धाराओं के रूप में प्रवाहित हुईं। ह्लादिनी, पावनी और नलिनी पूर्व दिशा की ओर; सुचक्षु, सीता और महानदी सिंधु पश्चिम की ओर बढ़ी। सातवीं धारा राजा भगीरथ की अनुगामिनी हुई। राजा भगीरथ गंगा में स्नान करके पवित्र हुए और अपने दिव्य रथ पर चढ़कर चल दिये। गंगा उनके पीछे-पीछे चलीं। मार्ग में अभिमानिनी गंगा के जल से जह्नुमुनि की यज्ञशाला बह गयी। क्रुद्ध होकर मुनि ने सम्पूर्ण गंगा जल पी लिया। इस पर चिंतित समस्त देवताओं ने जह्नुमुनि का पूजन किया तथा गंगा को उनकी पुत्री कहकर क्षमा-याचना की। जह्नु ने कानों के मार्ग से गंगा को बाहर निकाला। तभी से गंगा जह्नुसुता जान्हवी भी कहलाने लगीं। भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर गंगा समुद्र तक पहुँच गयीं। भगीरथ उन्हें रसातल ले गये तथा पितरों की भस्म को गंगा से सिंचित कर उन्हें पाप-मुक्त कर दिया। ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर कहा—“हे भगीरथ, जब तक समुद्र रहेगा, तुम्हारे पितर देववत माने जायेंगे तथा गंगा तुम्हारी पुत्री कहलाकर भागीरथी नाम से विख्यात होगी। साथ ही वह तीन धाराओं में प्रवाहित होगी, इसलिए त्रिपथगा कहलायेगी।’’

गंगा जल के फायदे

1.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा जल के स्पर्श मात्र से ही किसी भी चीज का शुद्धिकरण हो जाता है।
2.गंगा जल कई प्रकार की औषोधियों में भी प्रयोग होता है।
3.शास्त्रों के अनुसार अगर किसी मरते हुए व्यक्ति के गंगा की बूंदे डालने से उसके सभी पाप धूल जाते हैं।
4. गंगा जल का विशेष गुण है। उसका कभी न खराब होना । गंगा जल सालों तक खराब नहीं होता
5.शास्त्रों के अनुसार पूजा में गंगा जल का विशेष प्रयोग किया जाता है।

गंगा दशहरा पर स्नान महत्व

गंगा दशहरा पर स्नान को विशेष महत्व दिया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन पवित्र गंगा जी में डुबकी लगाने से मनुष्य अपने जीवन के सभी पाप और कष्ट से मुक्त हो जाता है। इसके अलावा गंगा दशहरा अगर आपको कोई ऐसा रोग है जो ठीक न हो और वह गंगा दशहरा के दिन कोई रोगी गंगा नदी में स्नान कर लेता है तो उसे उस रोग से मुक्ति मिल जाती है।

गंगा दशहरा पर किया गया स्नान मनुष्य के जन्म – जन्मांतर के पाप को धो देता है। माना जाता है अगर आप गंगा दशहरा के दिन किसी तीर्थ पर जाते हैं तो आपको इस दिन भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होगी।शास्त्रों में एक और चीज वर्णित है कि अगर आप गंगा जी में स्नान नहीं कर पाते तो अपने नहाने के पानी में इस दिन नहाने के पानी में गंगा जल डालकर स्नान कर सकते हैं।

इस दिन किया गया स्नान मनुष्य के जन्मों के पाप को धो देता है। इस दिन अगर आप किसी तीर्थ पर भी जाते हैं तो आपको इसका लाभ अवश्य मिलेगा और अगर आप गंगा जी में स्नान नहीं कर पाते तो अपने नहाने के पानी में इस दिन नहाने के पानी में गंगा जल डालकर स्नान कर सकते हैं।

अंतर्कलह की भेंट चढ़ी स्मीक्षा बैठक पर भीम अफजल के लिए सब ठीक है

कांग्रेस नेता केके शर्मा ने कहा कि मैंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया से बैठक के दौरान कहा कि मुझे गुलाम नबी आजाद के खिलाफ काफी कुछ कहना है लेकिन, मौका नहीं दिया गया. कॉंग्रेस की यही कमजोरी है की वह मंथन के नाम पर भी आदेश ही देती है। समीक्षा के नाम पर दोषारोपण और बली ली जाती है। बड़े नेताओं की दुयानेन चलतीं रहे इस लिए न्हे संगठन ही मेन न्छे पद दे दिये जाते हैं ओर वह अपने यवराज ही की भांति आचरण करते हैं और जमीनी कार्यकर्ताओं की तो बात छोड़िए पार्टी के स्थानीय नेताओं से भी नहीं मिलते। राहुल की भांति सिंधिया भी अपनी अभूतपूर्व हार से कुछ नहीं सीखे। सनद रहे सिंधिया अपने ही कार्यकर्ता के अपमान का स्वाद उसी कार्यकर्ता द्वारा मिली हार से चख रहे हैं। परंतु आज भी वह वही गलती करते जा रहे हैं।

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) में कांग्रेस के अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के बाद मंगलवार को एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई. कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा आयोजित की गई इस बैठक में उत्तर प्रदेश में पार्टी को मिली हार की समीक्षा की जानी थी. इसी दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ कांग्रेसी नेताओं के बीच गरमागरमी हो गई. न्यूज एजेंसी एएनआई के द्वारा जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि नेताओं के बीच बहस ने काफी बड़ा रूप ले लिया और धक्कामुक्की भी हुई. बताया जा रहा है कि कांग्रेस के नेता समीक्षा बैठक के लिए काफी समय से इंतजार कर रहे थे लेकिन, बैठक शुरू होने में काफी समय लग गया.

Argument between Congress leaders from Western Uttar Pradesh following a review meeting in Delhi on election results in UP; a Congress leader says, “it’s our internal matter”.

Embedded video

70 people are talking about this

कांग्रेस नेता केके शर्मा ने नेताओं की बहस मामले पर न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि हम यहां सुबह 10 बजे से इंतजार कर रहे थे. लेकिन, बैठक शाम को 3 बजे बुलाई गई थी. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व ने बिना बैठक के ही निर्णय ले लिया. उन्होंने दावा किया कि बैठक में सदस्यों को जगह नहीं दी गई और नेतृत्व ने बिना सदस्यों से मिले ही निर्णय ले लिया. उन्होंने कहा कि जो लोग चुनाव नतीजों के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें बैठक में जगह ही नहीं मिली. उन्होंने कहा कि मैंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया से बैठक के दौरान कहा कि मुझे गुलाम नबी आजाद के खिलाफ काफी कुछ कहना है लेकिन, मौका नहीं दिया गया.


वहीं, इस मामले पर कांग्रेस नेता मीम अफजल ने कहा कि यह हमारा आंतरिक मामला है. मीम अफजल ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 10 जिलों के नेताओं को बुलाया गया था. सभी ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपना विश्लेषण रखा. उन्होंने बताया कि बैठक में यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर और पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद थे. उन्होंने कहा कि इस बैठक में समीक्षा की गई. उन्होंने कहा कि यह बैठक लोकसभा चुनाव 2022 की तैयारी के लिए की गई थी.

सारा पारवार ही मासूम के कत्ल में शामिल था

अलीगढ़ के टप्पल इलाके में धन के लेनदेन को लेकर हुए विवाद के कारण तीन साल की एक बच्ची की हत्या करके उसका शव कूड़े के ढेर में डाल दिया गया। इस मामले को लेकर पूरे देश में रोष है मामले की आगे जांच के लिए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं एक महिला इंस्पेक्टर सहित छह सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई गई है। 24 घंटे के बाद भी जब बच्ची का सुराग नहीं लगा, तो 31 मई को शाम तकरीबन 4 बजे पुलिस ने आईपीसी की धारा 363 अपहरण का केस दर्ज किया। मामले के तूल पकड़ते ही पुलिस अधिकारी ने पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। अलीगढ़ के एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया इस मामले पर अब तक चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है। ज़ाहिद ओर असलम के अतिरिक्त ज़ाहिद की पत्नी और ज़ाहिद का भाई मेहँदी हसन, पुलिस का कहना है कि इन दोनों को भी इस हत्या के बारे में जानकारी थी। सूत्रों की मानें तो हत्यारा असलम इस घटना के पहले दिल्ली में एक छोटी बच्ची के साथ बलात्कार करने के आरोप में “पास्को एक्ट” के तहत जेल में था और वहां से छूटने के बाद खुद अपनी ही 4 साल की बच्ची से बलात्कार करने के बाद फिर से “पास्को एक्ट” के तहत ही जेल में था।

नई दिल्ली: अलीगढ़ में ढाई साल की मासूम बच्ची की हत्या के मामले शनिवार (08 जून) को पुलिस ने घटना में शामिल दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने मुख्य आरोपी जाहिद के भाई मेंहदी हसन और जाहिद की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है. जानकारी के मुताबिक, बच्ची के शव में जाहिद की पत्नी का दुपट्टा मिला था. इसके साथ ही SIT को जांच में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं.

फ्रिज में रखा था शव !

पुलिस को शक था कि आरोपी ने घर में ही बच्ची की लाश को रखा था. एसआईटी ने जांच करते हुए आरोपी के घर का ताला तोड़ा और तलाशी शुरू की. पुलिस ने आरोपी के घर का फ्रिज देखा. फ्रिज को देखकर लग रहा था कि उसे एक-दो दिन पहले ही साफ किया गया है. पुलिस ने पहले भी ये शक जताया था कि आरोपियों ने शव को नमी वाली जगह पर या फिर फ़्रिज में रखा था.

मुख्य आरोपी की पत्नी को थी हत्या का जानकारी

अलीगढ़ के एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया इस मामले पर अब तक चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है. दो पहले गिरफ्तार हुए थे. अब मेहंदी और जाहिद की पत्नी शाहिस्ता को गिरफ्तार किया है. ज़ाहिद की पत्नी का दुपट्टा से बच्ची की डेडबॉडी को लपेटा गया था और पुलिस का कहना है कि उसे भी इस हत्या के बारे में जानकारी थी. 

रासुका के तहत मामला दर्ज

यूपी सरकार ने गिरफ्तार दो आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत मामला दर्ज किया है. इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित करवाने का भी फैसला लिया गया है. सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह निर्णय योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा लिया गया है.

पैसों का लेनदेन बना बवाल 

25 से 26 मई को टप्पल इलाके में बच्ची के घर के पास जाहिद और पैसे दिलवाने वाले बिचौलिए के साथ पैसों को आपस में बहस हो रही थी, तभी बच्ची का दादा भी वहां से निकल रहा था, फिर तीनों के बीच पैसों को लेकर बात हुई, फिर बाद इतनी ज्यादा बढ़ गई की जाहिद ने बच्ची के दादा को धमकी देते हुए देख लेने की बात कही. सूत्रों कि मानें तो आरोपी ने बच्ची के पिता के 40 हज़ार लौटने थे।

30 मई खेलते-खेलते गायब हुई थे मासूम

30 मई को सुबह 8 बजे बच्ची अपने घर से 10-20 कदम की दूरी पर खेल रही थी, तभी अचानक गायब हो गई.  बच्ची के परिजनों ने उसे ढूंढा, लेकिन बच्ची नहीं मिली. मंदिर और मस्जिद से अनोउंसमेन्ट भी करवाया गया. लेकिन फिर भी कोई जानकारी नहीं आई. 12 बजे तक जब बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजन टप्पल थाने पहुंचें. पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया ये कहकर मामला रफादफा कर दिया कि बच्ची आपकी मिल जाएगी, आप हमारा नम्बर ले कुछ भी हो तो बता देना.

कुत्ते नोंच रहे थे लाश

ये सुनकर बच्ची के परिवार के लोग घर आ गए लेकिन 24 घंटे के बाद भी जब बच्ची का सुराग नहीं लगा, तो 31 मई को शाम तकरीबन 4 बजे पुलिस ने आईपीसी की धारा 363 अपहरण का केस दर्ज किया, फिर 2 जून को सुबह तक़रीबन 7 बजे आरोपी ज़ाहिद के घर के सामने खाली पड़ा प्लॉट जहां लोग कूड़ा फेंकते हैं, वहां से एक महिला सफाई कर्मचारी माया वहां से कूड़ा ले रही थी, तभी उसने देखा की एक डेडबॉडी को तीन कुत्ते नोंच रहे हैं.

बच्ची के इनर से परिजनों ने पहचाना

ऐसे देखते ही महिला कर्मचारी ने शोर मचा दिया. लोग इकठ्ठा हो गए. बच्ची के परिवार के लोग भी आ गए. बच्ची के परिजनों इनर को देखकर पहचान लिया. जाहिद के घर के बाहर बच्ची के मिलने के बाद परिवार का शक जाहिद पर गया और लोगों के जमा होने के बाद वह भागने की कोशिश कर रहा था, परिवार वालों ने उसे मौके से पकड़ लिया और पुलिस को जानकारी दी.

मौके पर से ही आरोपी को दबोचा

पुलिस ने जाहिद को मौके से पकड़ा, फिर उससे पूछताछ के बाद उसके दोस्त असलम को भी पकड़ लिया. पुलिस ने दोनों को चार जून को गिरफ्तार किया. आरोपी जाहिद ने बताया की उसने बच्ची को 30 मई को किडनैप करने के बाद उसे असलम घर ले गया और भूसे वाले कमरे में ले जाकर उसे मार दिया. फिर 1 मई की देर शाम को बच्ची को जाहिद ने असलम के घर से बच्ची को लिया और सामने वाले खाली खण्डर मकान में डाल दिया और फिर 2 मई की सुबह बच्ची को डेड बॉडी बरामद हुई.

पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड 

इस पूरे मामले में अगर पुलिस लापरवाही नहीं बरतती तो बच्ची की जान बच सकती थी. मामले के तूल पकड़ते ही पुलिस अधिकारी ने पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया. वहीं, पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया की बच्ची को गला दबाकर हत्या की गई और कोई रेप नहीं हुआ. लेकिन पीएम रिपोर्ट में ये लिखा है की बच्ची के साथ बहुत बुरा सलूक किया गया उसका हाथ भी कटा हुआ है. आरोपी जाहिद पर कोई प्रीवियस क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन मोहम्मद असलम पर पहले ही दो केस दर्ज है. दोनों आरोपी के परिवारवाले अब फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट चौंकाने वाली है, 3-4 दिन पहले हुई थी हत्या

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के पॉइंटर
– 3-4 दिन पहले मौत
– मौत की वजह दम घुटना
– लेफ्ट चेस्ट पर पिटाई 
– रिब्स टूटी हुई
– लेफ्ट लेग फ्रेक्चर 
– सर में चोट
– सीधा हाथ कंधे की तरफ से कटा हुआ है 
– बहुत ज़्यादा पीटा गया है 
– बॉडी में कीड़े पड़ गए, जिससे हड्डी तक एक्सपोज़ हो रही हैं
– सर में चोट 
– नाक की हड्डी टूटी हुई
– दोनों आखों पर जख्म
– रेप की पुष्टि के लिए स्लाइड फॉरेंसिक लैब भेजी गई है

सपा-बसपा गठबंधन नतीजे क्यों नहीं दे पाया???

प्रधान मंत्री मोदी ने चुनावों के दौरान ही महागठबंधन को ले कर कहा था की नतीजों के बाद यह आपस ही में लड़ खपेंगे। नतीजे आने के 13 दिन बाद ही गठबंधन धराशायी हो गया। सूत्रों की मानें तो मायावती ने सपा के सहारे अपनी डूबी नैया पार लगा ली। सूत्रों के अनूसार जिस जगह आप जातिवाद की राज नीति करते हैं वहाँ एक बात सपष्ट है की यादवों को अखिलेश ओर डिम्पल का मायावती के पाँव पड़ना पसंद नहीं आया। जहां एक ओर दलित वोटर भाजपा के खेमे में गया वहीं यादव वोटर ने भी भाजपा का पलड़ा भारी किया। माया यह सब जानती थी। जानते मुलायम भी थे पर उनकी बात सुनता कौन??

लखनऊः लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद सपा-बसपा गठबंधन टूट गया है. बीएसपी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया है कि सपा अपना काडर वोट भी नहीं ले सकी है. इसलिए यह कहना मुश्किल होगा कि सपा के लोगों ने बीएसपी को कितने वोट दिए होंगे. उन्होंने कहा कि सपा को यादव बाहुल्य क्षेत्रों में भी वोट नहीं मिला है. उधर अखिलेश यादव ने मायावती के फैसले पर कहा, जिन्हें जाना है वह जा सकते है. उप चुनाव में सपा अकेले चुनाव लड़ेगी. ऐसे में अब यह सवाल भी उठ रहे हैं किआखिर मायावती ने क्यों तोड़ा गठबंधन? क्या मायावती ने समाजवादी पार्टी से पुराना बदला ले लिया है?

दरअसल ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्यों कि मुलायम सिंह यादव ने बीएसपी से गठबंधन का विरोध किया था और लोकसभा चुनाव के नतीजे देखें तो सपा-बसपा गठबंधन का सीधा फायदा बीएसपी को हुआ और नुकसान समाजवादी पार्टी को बीएसपी शून्य से 10 सीटों पर पहुंच गई और सपा 5 सीटें ही जीत पाई. इस पूरे गठबंधन में मायावती सीनियर और अखिलेश जूनियर पार्टनर की भूमिका में रहे

गठबंधन में मायावती रहीं सीनियर

12 जनवरी 2019 को लखनऊ में सपा बसपा के गठबंधन का ऐलान होता है. गठबंधन और सीटों का ऐलान मायावती करती हैं. पूरी प्रेस वार्ता में मायावती गेस्ट हाऊस कांड का नाम लेना नहीं भूलती हैं. अखिलेश यादव पीसी में मायावती के बाद बोलते हैं. 38-38 सीटों पर दोनों दल चुनाव लड़ने का ऐलान करते हैं. सपा बसपा 2 सीटें अमेठी और रायबरेली कांग्रेस के लिए छोड़ते हैं और 2 सीटें आरएलडी के लिए. आरएलडी 2 सीटों पर गठबंधन में शामिल होने को तैयार नहीं थी, वो कम से कम 3 सीटें मांग रही थी.

अखिलेश ने कदम कदम पर किया समझौता

मायावती ने अपने कोटे से आरएलडी को सीट देने से मना कर दिया. मायावती के इंकार के बाद अखिलेश यादव ने अपने कोटे से 1 और सीट मथुरा आरएलडी को दी. इस प्रकार बीएसपी – 38, सपा – 37, RLD- 3 सीटों पर चुनाव लड़ी सीटों की संख्या के बाद अब सीटों के चयन पर सपा-बसपा ने काम करना शुरू किया, इसमें भी बीएसपी प्रमुख मायावती अपर हैंड रहीं. सभी शहरी सीटें मायावती ने समाजवादी पार्टी के कोटे में दे दी. लगभग 10 ऐसी सीटें जहां पर बीजेपी को हराना नामुमकिन होता है.

माया ने सपा प्रत्याशी के लिए नहीं की अलग रैली

मायावती ने अखिलेश यादव को वाराणसी, लखनऊ, गाज़ियाबाद, कानपुर, झांसी, गोरखपुर, अयोध्या, इलाहाबाद, बरेली, उन्नाव जैसी शहरी सीटें दी, यानि इस प्रकार से अखिलेश यादव सिर्फ 27 सीटों पर मजबूती से लड़ पाए.सीटों के बंटवारे के बाद अब चुनाव प्रचार की बारी आई, तो अखिलेश-मायावती ने एक साथ लगभग 19 संयुक्त रैलियां की. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संयुक्त रैलियों के अतिरिक्त बीएसपी के 30-32 प्रत्याशियों के लिए अलग से अकेले चुनावी रैलियां की. बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने सपा के किसी भी प्रत्याशी के लिए अलग से कोई भी चुनावी रैली नहीं की.

डिंपल की हार के पीछे दलित वोटों का बीजेपी के शिफ्ट

लोकसभा चुनाव के नतीजों में मायावती यादव बाहुल्य सीटें जीतीं लेकिन अखिलेश यादव दलित बाहुल्य सीटें हार गए. मायावती गाज़ीपुर, जौनपुर, घोसी, लालगंज, अंबेडकरनगर जैसी यादव बाहुल्य सीटें जीत गईं. अखिलेश यादव हाथरस, हरदोई, कौशाम्बी, फूलपुर, बाराबंकी, बहराइच, रॉबर्ट्सगंज जैसी दलित बाहुल्य सीटें हार गए. कहा ये भी जा रहा है कि कन्नौज में अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव की हार के पीछे दलित वोट बैंक का बीजेपी की तरफ शिफ्ट होना है. 2014 में बीएसपी अलग चुनाव लड़ी थी तो कन्नौज में दलित वोट बीएसपी के पास गया था लेकिन 2019 में साइकिल निशान होने के कारण दलित वोट बीजेपी के पास चला गया. जिस वजह से कन्नौज से डिम्पल यादव चुनाव हार गईं. यहां कन्नौज की रैली में डिम्पल यादव ने बीएसपी अध्यक्ष मायावती के पैर छुए थे. कन्नौज में डिम्पल यादव 12,353 वोटों से चुनाव हार गईं.

यादव वोट बंटवारे ने सपा को हराया

जानकार ऐसा मानते हैं कि बदायूं और फिरोज़ाबाद में यादव वोटों के बंटवारे ने सपा को हरा दिया. फिरोज़ाबाद में अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने यादव वोट काटा. फिरोज़ाबाद में सपा के महासचिव रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव चुनाव लड़ रहे थे. शिवपाल यादव भी फिरोज़ाबाद से लोकसभा चुनाव लड़े. यादव वोटों में बंटवारे से फिरोज़ाबाद सीट पर बीजेपी की जीत हुई. फिरोज़ाबाद में सपा के अक्षय यादव 28,781 वोटों से चुनाव हार गए, इसी सीट पर शिवपाल यादव को 91,869 वोट मिले. यानि ये सीट सपा शिवपाल यादव के कारण हार गई. बदायूं में सपा के धर्मेन्द्र यादव 18,454 वोटों से चुनाव हार गए, यहां पर गुन्नौर विधानसभा में यादव वोटों का बंटवारा हुआ. यादव वोटों में बंटवारे से ये सीट सपा हार गई.

मायावती ने क्यों तोड़ा गठबंधन?

जानकार मानते हैं कि मायावती ने 10 सीटें जीतने के बाद सपा का जनाधार कम करने के लिए यह फैसला लिया है. क्योंकि लोकसभा चुनाव में 10 सीटे लाने के बाद अब बीएसपी ने फैसला किया है कि वह पहली बार उपचुनाव लड़ेगी. ऐसा बताया जा रहा है कि मायावती की निगाहें 2022 में सीएम पद पर है. ऐसे में अगर इन उपचुनाव में अखिलेश से गठबंधन रहता तो अखिलेश को यूपी का सीएम चेहरा बनाना पड़ता,  क्योंकि अखिलेश ने अनौपचारिक तौर पर 2019 में मायावती को पीएम चेहरा माना था.

सपा का मुस्लिम वोट बैंक को तोड़ना चाहती हैं माया

2019 में मोदी के बंपर जीत के बाद मायावती के पास यूपी विधानसभा चुनाव के अलावा कहीं और फोकस करने की कोई गुंजाईश नहीं बची है. ऐसा बताया जा रहा है कि मायावतीअपने भतीजे आकाश आनंद को मायावती विधानसभा चुनाव में लॉच कर सकती हैं. हालांकि मायावती ने गठबंधन पर परमानेंट ब्रेक ना लगने की बात भी कही है. दरअसल मायावती मुस्लिमों में ये संदेश नहीं देना चाहती हैं कि गठबंधन उन्होंने तोड़ दिया है.

क्यों अहम है यूपी के उपचुनाव

यूपी में 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं. इनमें रामपुर, लखनऊ कैंट, प्रतापगढ़, गोविंदनगर (कानपुर), गंगोह (सहारनपुर), टूंडला (सु), जलालपुर (अंबेडकरनगर), इगलास (अलीगढ़), बलहा (बहराइच), जैदपुर (बाराबंकी), मानिकपुर-चित्रकूट 12 वीं सीट मुज़फ्फरनगर ज़िले की मीरापुर विधानसभा सीट पर उप चुनाव संभव हो सकता है, क्योंकि यहां से बीजेपी के टिकट पर विधायक बने अवतार भड़ाना 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी थे. दलबदल कानून के कारण अवतार भड़ाना की सदस्यता खत्म हो सकती है.

उपचुनाव से साफ होगी 2022 की तस्वीर

यूपी में होने वाले उपचुनाव के नतीजे 2022 की तस्वीर साफ करेंगे. सपा बसपा अलग होने के बाद किस स्थिति में रहेंगे, ये भी उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे. बीजेपी के लिए भी ये चुनाव महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि ये चुनाव मोदी के नाम पर नहीं होगा. सपा बसपा इन चुनावों के जरिए अपनी वापसी की कोशिश करेंगे.

सपा बसपा गठबंधन क्यों फेल रहा है?

सपा बसपा गठबंधन के फेल होने का कारण जानकार यह बताते हैं किसपा बसपा ने जातीय समीकरण पर काम किया, सपा बसपा दलित-यादव-मुस्लिम के समीकरण वाले आंकड़ों में उलझ गई. दोनों दलों ने बूथ पर काम नहीं किया. ऐसा बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियों का चुनावी मैनेजमेंट ठीक नहीं था. बूथ स्तर पर सपा बसपा ने साथ काम नहीं किया. बीजेपी ने गोरखपुर-फूलपुर-कैराना के नतीज़ों के बाद बूथ स्तर पर काम शुरू किया. बीजेपी के पास गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित पूरी तरह से आ गया. बीजेपी को सवर्णों का पूरा वोट मिला. बीजेपी ने वोटर लिस्ट पर काम किया और सपा बसपा जातीय अंकगणित के जाल में उलझी रही. सपा बसपा के कई वरिष्ठ नेता नाराज़ थे

माया ने गठबंधन तोड़ा

नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की हार के बाद नाराज चल रहीं बीएसपी सुप्रीम मायावती ने आज समाजवादी पार्टी के साथ अपने गठबंधन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. मायावती ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही कहा कि अखिलेश यादव ने उनका बहुत सम्मान किया है. मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव के पूरे परिवार का हम भी बहुत सम्मान करते हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का बेस वोट हमारी पार्टी की तरह मजबूत नहीं रहा. मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी के बड़े प्रत्याशी यादव बाहुल्य सीटों पर हार गए. मायावती ने कहा कि डिंपल यादव कन्नौज में हार गईं. फिरोजाबाद में रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव हार गए और बदायूं में धर्मेंद्र यादव हार गए. इससे साबित होता है कि यादवों का वोट भी सपा को नहीं मिला.

मायावती ने अखिलेश यादव को कहा कि यदि वह राजनीतिक कार्यों के साथ साथ अपने कार्यकर्ताओं को बीएसपी की तरह मिशनरी मोड पर लाते हुए एकजुट करते हैं तो हम आगे उनके साथ हो सकते हैं.  ॉ

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– जब से सपा के साथ बीएसपी का गठबंधन हुआ तब से अखिलेश जी ने मुझे बड़ा सम्मान दिया है. हमारे साथ उनके रिश्ते लंबे समय तक बने रहेंगे 
– समाजवादी पार्टी के साथ यादव समाज नहीं टिका रह सका, यादव बाहुल्य सीटों पर भी सपा के मजबूत उम्मीदवार हार गए है. सपा को उनका बेस वोट नहीं मिला
– बदायूं, कन्नोज और फिरोजाबाद सीट पर सपा प्रत्याशियों का हार जाना हमें बहुत कुछ सोचने को मजबूर करता है.
– चुनाव परिणाम में ईवीएम की भूमिका खराब रही है. सपा बसपा का बेस वोट जुड़ने पर हमें नहीं हारना चाहिए था. 
– ऐसी स्थिति में यह आंकलन किया जा सकता है कि जब सपा का बेस वोट खुद सपा को नहीं मिला , तो बीएसपी को कैसे मिला होगा.
– इसी संदर्भ में कल 3 जून को दिल्ली केंद्रीय कार्यालय में चुनाव परिणामों की समीक्षा की गई थी.
 यदि मुझे लगेगा कि सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों के साथ साथ अपने लोगों को मिशनरी बनाकर जोड़े रखेंगे तो हम फिर साथ आएंगे 
– फिलहाल आने वाले उपचुनावों में हमारे लिए अकेले चुनाव लड़ना ही ठीक रहेगा.
– मीडिया में गलत तरीके से हमारी बात को रखा गया, जबकि हमारी पार्टी की तरफ से या मेरी तरफ से कोई रिपोर्ट मीडियो को नहीं दी गई. 
– इसीलिए मैंने अपनी बात आज मीडिया के सामने रख दी है.

सोमवार को बीएसपी की अध्यक्ष मायावती ने लोकसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन पर क्षेाभ व्यक्त करते हुये पार्टी के पदाधिकारियों से ‘गठबंधनों’ पर निर्भर रहने के बजाय अपना संगठन मजबूत करने का निर्देश दिया था. मायावती ने आगामी उपचुनाव भी बसपा द्वारा अपने बलबूते लड़ने की बात कह कर भविष्य में गठबंधन नहीं करने का संकेत दिया थे.

मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने अपने ट्विटर अकाउंट से मंगलवार को जानकारी दी कि बीएसपी प्रमुख मायावती प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी. आकाश ने अपने एक अन्य ट्वीट के जरिए यह भी बताया कि सपा-बसपा गठबंधन टूट नहीं रहा है केवल उपचुनाव अकेले लड़ने की बात है. 

बता दें कि लोकसभा चुनाव के परिणाम की समीक्षा के लिये मायावती ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बैठक में कहा था कि बसपा को जिन सीटों पर कामयाबी मिली उसमें सिर्फ पार्टी के परंपरागत वोटबैंक का ही योगदान रहा. सूत्रों के अनुसार बसपा अध्यक्ष ने लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के बावजूद बसपा के पक्ष में यादव वोट स्थानांतरित नहीं होने की भी बात कही है