यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, यहां यह नहीं कहा जाता है कि लड़के हैं, गलती कर देते हैं : मुख्यमंत्री योगी

विधान सभा में शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा अपराध होने का दावा करते हुए इलाहाबाद, चंदौली, सिद्धार्थनगर और ललितपुर में महिलाओं के साथ हुई आपराधिक घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है उसमें पुलिस मनमानी कर रही है, ललितपुर थाने में एक दुष्कर्म पीड़िता के साथ थानाध्यक्ष की ओर से रेप किये जाने की घटना की ओर ध्यान दिलाते हुए यादव ने कहा कि नेता सदन ललितपुर गये और मामले में कार्रवाई हुई।

  • योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि अपराध किसी प्रकार का हो वह अक्षम्य है।
  • महिला अपराध पर सरकार अपराधियों के खिलाफ कठोरतापूर्वक कार्रवाई कर रही है: योगी
  • जो सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है उसमें पुलिस मनमानी कर रही है: अखिलेश यादव

लखनऊ(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

उत्तर प्रदेश विधान सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने सदन में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध का मामला उठाया था जिसके जवाब में CM योगी ने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, यहां यह नहीं कहा जाता है कि लड़के हैं, गलती कर देते हैं। बता दें कि महिला अपराध के एक मामले में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि ‘लड़के हैं गलती हो जाती है।‘

रेप आरोपियों को फांसी की सजा का विरोध करते हुए अखिलेश यादव के पिता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने एक रैली में कहा था, ”लड़के लड़के हैं, गलती हो जाती है।” महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध को लेकर नेता विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में सीएम योगी ने कहा, ”यह भाजपा की सरकार है। यहां अपराधियों को लेकर यह नहीं कहा जाता है कि लड़के हैं गलती कर देते हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी तरह का अपराध अक्षम्य है। सरकार अपराधियों खासकर महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों पर सख्त ऐक्शन ले रही है।

शून्य काल के दौरान अखिलेश यादव ने इलाहाबाद, चंदौली, सिद्धार्थनगर, ललितपुर में महिलाओं के खिलाफ अपराध का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध यूपी में होते हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि जो सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है उसमें पुलिस मनमानी कर रही है। ललितपुर थाने में एक दुष्कर्म पीड़िता के साथ थानाध्यक्ष द्वारा दुष्कर्म किए जाने की घटना की ओर ध्यान दिलाते हुए यादव ने कहा कि नेता सदन ललितपुर गए और मामले में कार्रवाई हुई।

अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, ”सदन के नेता सच बोलते हैं, मुझे बहुत अच्छा लगा, मैं उस मीटिंग में मौजूद नहीं था लेकिन मुझे तो अखबारों के माध्यम से पता चला कि वहां जब अधिकारियों की शिकायत हुई और सरकार की शिकायत की गई तो नेता सदन ने कहा कि आप लोग दलाली छोड़ दो, अधिकारियों को मैं सुधार दूंगा। मैं अपने नेता सदन का बहुत धन्यवाद देता हूं।” नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि पांच साल तक दलाली चलती रही, नेता सदन को पता ही नहीं चला। किन अधिकारियों को सुधार दिया। मैं इस विषय को इसलिए उठा रहा हूं क्योंकि मैं खुद गया ललितपुर और जब वहां सूचना पाई कि एक बेटी के साथ ऐसी घटना हुई और सरकार ने कार्रवाई की तो क्या सरकार यह बताएगी कि घटना न हो इसके लिए सरकार क्या कर रही है। 

योगी ने नेता प्रतिपक्ष पर पलटवार करते हुए जवाब दिया कि अगर अपराधी है चाहे वह कोई भी है, उसके खिलाफ कत्तई बर्दाश्त नहीं की नीति के तहत ही कार्रवाई होती है, नेता प्रतिपक्ष इस बात को समझते भी हैं और स्वीकार भी किया है कि कार्रवाई हुई है। उन्होंने आरोप लगाया, ”आप (अखिलेश यादव) तो हर उस अपराधी का समर्थन करते हैं जो प्रदेश में अराजकता के पुजारी हैं, गुंडागर्दी जिनका पेशा बन चुकी है।” उन्होंने अपनी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्ष के अंदर प्रदेश में कानून व्यवस्था, सुरक्षा के बेहतर माहौल ने ही इस सरकार को फिर से व्यापक जन समर्थन दिया है। 

योगी ने कहा कि प्रत्यक्ष को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती, चुने गए माननीय सदस्य इस बात के प्रमाण हैं कि जनता ने इन्हें समर्थन दिया है, आधी आबादी ने जिस भाव के साथ समर्थन किया है वह अभिनंदनीय है। नेता सदन ने कहा कि खासतौर पर महिला संबंधी अपराधों को लेकर हमारी सरकार ने वर्ष 2017 में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया था और इसके साथ ही प्रदेश में महिला संबंधी अपराधों को रोकने के लिए 218 पॉक्सो कोर्ट की स्थापना भी कराई गई। अपराध में पांच वर्षों में कमी का दावा करते हुए योगी ने कहा कि कल हमारे प्रतिपक्ष के मित्र राज्यपाल के अभिभाषण को सुनते तो बहुत सारी बातें उनके सामने साफ होती। अभिभाषण का जब जवाब देंगे तो आप को स्पष्ट रूप से बताएंगे कि अपराधों में कितनी गिरावट आई है।

विनय कुमार सक्सेना दिल्ली के नए उपराज्यपाल नियुक्त

विनय कुमार सक्सेना की प्राप्त सूचना के पश्चात सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए कहा, “दिल्ली के नवनियुक्त उपराज्यपाल महोदय श्री विनय कुमार सक्सेना जी का दिल्ली की जनता की तरफ़ से मैं हार्दिक स्वागत करता हूं। दिल्ली की बेहतरी के लिए उन्हें दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल की तरफ़ से पूर्ण सहयोग मिलेगा। “ इसके साथ ही मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल अनिल बैजल को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “दिल्ली के उपराज्यपाल रहे श्री अनिल बैजल जी के साथ मिलकर दिल्ली में कई काम किए और कई समस्याओं को ठीक करने की कोशिश की। वे एक बेहद अच्छे इंसान हैं. भविष्य के लिए मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं और उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करता हूं। “

दिल्ली के उपराज्यपाल, विनय कुमार सक्सेना

नई दिल्‍ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :  

विनय कुमार सक्सेना को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह पदभार ग्रहण करने की तारीख से दिल्ली के उपराज्यपाल होंगे। सक्सेना, अनिल बैजल का स्थान लेंगे, जिन्होंने ”निजी कारणों” का हवाला देते हुए पिछले सप्ताह पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले विनय कुमार सक्सेना खादी ग्रामोद्योग आयोग भारत सरकार के चैयरमैन थे।  उनके नेतृत्व में, केवीआईसी के कारोबार में 248 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई, जबकि सिर्फ सात साल में बड़े पैमाने पर 40 लाख नए रोजगार सृजित हुए।

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘भारत के राष्ट्रपति को विनय कुमार सक्सेना को उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त करते हुए प्रसन्नता हो रही है। ’ उल्लेखनीय है कि तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग के अचानक इस्तीफा देने के बाद 1969 बैच के आईएएस अधिकारी बैजल को दिसंबर 2016 में दिल्ली का 21वां उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था।  18 मई को दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने इस्‍तीफा दे दिया था। उनका यह फैसला अचानक लिया गया था। उन्‍होंने बताया था कि वे निजी कारणों से इस्‍तीफा दे रहे हैं।

23 मार्च 1958 को जन्मे विनय कुमार सक्सेना कानपुर यूनिवर्सिटी के छात्र रह चुके हैं। उनके बारे में बताया जाता है कि वह कॉरपोरेट के साथ-साथ एनजीओ सेक्टर में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने 1984 में राजस्थान में जेके ग्रुप को ज्वॉइन किया और 11 सालों तक यहाँ काम किया। इसके अलावा उन्होंने जल संसाधन विकास के क्षेत्र में, सामाजिक कुप्रथाओं से लड़ने और आपदा प्रबंधन सहायता के क्षेत्र में भी काम किया।

देखना दिलचस्प होगा कि नए उप-राज्यपाल के साथ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के रिश्ते कैसे रहते हैं? अनिल बैजल और अरविंद केजरीवाल के बीच खटपट की खबरें अक्सर चर्चा में रहती है। हाल ही में दिल्ली सरकार की डोर स्टेप डिलिवरी स्कीम को एलजी ने रोक दिया था जिसके बाद एक बार फिर सीएम और एलजी के बीच टकराव खुलकर सामने आ गई थी।

विनय कुमार सक्सेना की प्राप्त सूचना के पश्चात सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए कहा, “दिल्ली के नवनियुक्त उपराज्यपाल महोदय श्री विनय कुमार सक्सेना जी का दिल्ली की जनता की तरफ़ से मैं हार्दिक स्वागत करता हूं। दिल्ली की बेहतरी के लिए उन्हें दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल की तरफ़ से पूर्ण सहयोग मिलेगा। “

इसके साथ ही मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल अनिल बैजल को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “दिल्ली के उपराज्यपाल रहे श्री अनिल बैजल जी के साथ मिलकर दिल्ली में कई काम किए और कई समस्याओं को ठीक करने की कोशिश की। वे एक बेहद अच्छे इंसान हैं. भविष्य के लिए मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं और उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करता हूं। “

अजमगढ़ में कट्टरपंथी मिशनरियों के जबरन धर्मांतरण के खेल का हुआ पर्दाफाश, VHP की शिकायत पर पुलिस ने रेड में 3 आरोपितों को पकड़ा, 1 नाबालिग

  आजमगढ़ के पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बताया कि रविवार को शहर कोतवाली क्षेत्र में धर्मांतरण की एक सूचना मिली थी, जिसके आधार पर मौके से तीन लोगों को हिरासत में लिया गया था। वहीं, पूछताछ के बाद आज (सोमवार) दो अभियुक्तों रौसीसुख पुत्र राजेश सुख और विजय कुमार पुत्र फुला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आजमगढ़ जिले में धर्मांतरण का मामला सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है। गौरतलब है कि जिले में तीन महीने में यह तीसरी धर्मांतरण की घटना है। इससे पहले शहर कोतवाली के सरायमंद राजा और ठंडी सड़क के मड़या में भी धन व भूत प्रेत का लालच देकर धर्मांतरण कराये जाने का मामला सामने आया था, जिसमें पुलिस ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

आजमगढ़, लखनऊ(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :  

यूपी के आजमगढ़ जिले में लगातार पैसों का प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराये जाने का खेल जारी है। ताजा मामला शहर कोतवाली क्षेत्र के हरबंशपुर स्थित शाही पुल के समीप मड़या जयरामपुर मोहल्ले का है। वहीं, मकान में धर्मांतरण कराये जाने की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया था। इसके बाद दोनों से सख्ती से पूछताछ की तो धर्मांतरण की बात खुली। वहीं, पुलिस ने दोनों आरोपियों रौसीसुख और विजय कुमार को जेल भेज दिया है।

बहरहाल, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों को रविवार को सूचना मिली कि शहर के मड़या जयरामपुर में एक मकान में कुछ लोगों द्वारा धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और वीडियो और फोटो लेने लगे। वहीं, इसकी सूचना पुलिस को भी दे दी। इस दौरान मकान के अंदार काफी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं और वहां प्रार्थना सभा भी चल रही थी। वहीं, मौके पर पहुंची पुलिस तीन लोगों को हिरासत में लेकर कोतवाली चली गई, जहां उनसे पूछताछ की गई.पुलिस ने मौके पर धर्म प्रचार सामग्री भी बरामद की।

अब आगे इनसे बाकी की पूछताछ होगी। बताया जा रहा है कि पकड़े गए तीन आरोपितों में से एक नाबालिग था, इसलिए पुलिस ने उसे छोड़ दिया। जो गिरफ्तार हुए उनके नाम रौसी सुख और विजय कुमार हैं। एसपी शैलेंद्र ने कहा है कि आरोपितों से पूछताछ के बाद कार्रवाई होगी।

विश्व हिंदू परिषद के आजमगढ़ के महामंत्री गौरव रघुवंशी ने बताया, “हमारे पास धर्म परिवर्तन से जुड़ी शिकायतें काफी लंबे समय से आ रही थी जो कि पूरी तरह गैर कानूनी है। मासूम जनता को तरह-तरह के लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। ऐसी चीजें बर्दाश्त नहीं की जाएँगी। हम माँग करते हैं कि इन लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में इस काम को न दोहराया जाए।”

इस पूरे मामले में स्थानीय लोगों ने भी धर्म परिवर्तन के खेल की पोल पट्टी खोली है। उन्होंने कहा कि मकान में लोगों को जुटाकर ऐसे आयोजन होते रहते हैं, इसलिए उन्हीं लोगों ने ये शिकायत हिंदू संगठनों को दी थी। उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने इस कार्यक्रम में रुकवाया।

उल्लेखनीय है कि यूपी में पहले भी धर्म परिवर्तन कराने की बहुत सी शिकायतें आती रही हैं। पिछले साल जामिया नगर से दो आरोपित पकड़े गए थे जिन्होंने मूक-बधिर बच्चों का धर्म परिवर्तन करवा दिया था। आरोप था कि ये गिरोह सालाना 200-300 लोगों का धर्म परिवर्तन करवाता था।

ज्ञानवापी पर हिन्दू पक्ष में ‘रूबीना खानम’ का ब्यान अखिलेश को बर्दाश्त नहीं, खानम सपा से पदमुक्त

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रही बयानबाजियों के बीच अलीगढ़ की महिला नेता रुबीना खानम ने हिंदुओं के पक्ष में बयान दिया था। ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) की नेता रुबीना खानम पर अब सपा ने एक्शन ले लिया है। उन्होंने आगे कहा, “मुझे हैरानी इस बात की है कि मुझे उन्होंने पद मुक्त इसलिए किया है कि मैंने अनुशासनहीनता की है। ऐसी अनुशासनहीनता तो मैं बार-बार करना चाहूंगी। अब मेरा समाजवादी पार्टी में भी रहने का कोई मतलब नहीं है। ऐसी पार्टी में तो मैं खुद नहीं रहना चाहती, जहां मुझे सच बोलने का अधिकार ना हो, जहां मैं हिंदू भाइयों की बात नहीं कर सकती, जहां मैं देश की बात नहीं कर सकती पहले मैंने इस पार्टी में रहते हुए तुष्टीकरण की राजनीति की, सिर्फ एक तरफा एक वर्ग विशेष की राजनीति की, लेकिन जब मुझे ज्ञान हुआ, मेरी आत्मा ने और मेरे जमीर ने कहा मैं जिस देश में रहती हूं उस देश की बात करनी चाहिए, जिस देश का मैंने नमक खाया है, उस देश की बात करनी चाहिए.मुझे किसी पार्टी की बात नहीं करनी चाहिए।”

राजविरेन्द्र वसिष्ठ, सेमोक्रेटिक फ्रंट, अलीगढ़/ चंडीगढ़:

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर बीते तीन दिनों में लगातार कई घटनाक्रम बदले हैं.मस्जिद में सर्वे के दौरान शिवलिंग मिलने का दावा हिंदू पक्ष ने किया था। वाराणसी कोर्ट के निर्देश के बाद बीते शनिवार को ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे की शुरुआत हुई थी, जिसके बाद लगातार तीन दिनों तक मस्जिद में सर्वे हुआ। सर्वे के तीसरे और अंतिम दिन कोर्ट ने ज़िला प्रशासन को निर्देश देते हुए उस जगह को सील करने को कहा जहां सर्वे टीम को कथित तौर पर ‘शिवलिंग’ मिला था। वहीं शिवलिंग मिलने के दावे के बाद आम जनता से लेकर राजनेता भी इस मुद्दे पर जमकर बयानबाजी कर रहे हैं।

शनिवार को सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने एक पत्र जारी कर रुबीना खानम को अनुशासहीनता में महानगर अध्यक्ष पद से पदम मुक्त कर दिया। इस पर रुबीना खानम ने कहा है कि जब हमने राष्ट्रहित की बात की, सत्य की बात की। सभी धर्मों का सम्मान करते हुए हिंदू धर्म की आस्था का सम्मान करते हुए बहुसंख्यकों की भी बात की, सपा के लिए ये अनुशासनहीनता हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुद को हटाए जाने पर रुबीना ने नाराजगी जताई। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “मैं अनुशासनहीन इसलिए हो गई क्योंकि मैं समाजवादी पार्टी के हिसाब से नहीं बोली। मुझे सपा ने पद से इसलिए हटा दिया क्योंकि मैंने राष्ट्रवाद और सभी धर्मों के सम्मान की बात कह दी। यही सपा का असली चेहरा है।”

रुबीना ने कहा, “जिस पार्टी में मैं सच भी नहीं बोल सकती और देश की बात भी नहीं कर सकती उसमें मैं नहीं रहना चाहती। मेरे पास आए लेटर में मुझे अनुशासनहीन बताया गया है। मतलब मुसलमानों के साथ हिन्दुओं की भी बात करना अनुशासनहीनता कैसे हो गया ? अगर ये अनुशासनहीनता है तो मैं इसे बार-बार करूँगी। आज पद से निकाला है कल पार्टी से निकाल देंगे। ऐसी पार्टी में मैं खुद नहीं रह सकती।”

रुबीना के मुताबिक, “जिस पार्टी में बहू अपर्णा यादव का सम्मान नहीं हुआ वहाँ मेरा सम्मान कैसे होता ? ये सच है कि मैं पहले तुष्टिकरण की राजनीति करती थी। लेकिन बाद में मुझे मेरी आत्मा ने झकझोर दिया। तब मुझे आत्मज्ञान हुआ। तब से मैंने पूरे देश की बात करनी शुरू कर दी।”

इससे पहले ज्ञानवापी सर्वे पर बोलते हुए रुबीना खानुम का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। तब उन्होंने कहा था, “अगर ये साबित हो जाता है कि किसी शासन ने जबरन ताकत के दम पर मस्जिद बनाई गई थी। तब हमारे धर्म गुरुओं को समझना चाहिए कि वहाँ नमाज़ पढ़ना हराम है। साथ ही तब हमारा मुस्लिम समाज और उलेमा उस जमीन को हिन्दू पक्ष को लौटा दें।”

गौरतलब है कि रुबीना खानुम पहले कई विवादित बयानबाजी कर चुकी हैं। हिजाब विवाद में रुबीना ने हिजाब पर हाथ डालने वालों के हाथ काट देने का एलान किया था। वहीं लाऊडस्पीकर विवाद में भी उन्होंने मंदिरों के आगे लाऊडस्पीकर पर कुरान का पाठ करने की धमकी दी थी।

गुजरात, पंजाब के बाद क्या हरियाणा में कांग्रेस की तीसरी विकट गिरने वाली है

हरियाणा कांग्रेस में एक बार फिर से बगावत के सुर सामने आ रहे हैं। पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई ने अपने बगावती तेवर से कांग्रेस पार्टी को सकते में डाल दिया है। एचपीसीसी के आला अधिकारियों में जगह न मिलने से बिश्नोई नाराज हैं. उनका हरियाणा कांग्रेस के साथ टकराव बना हुआ है। कई मौके ऐसे आए, जब कभी कुलदीप तो कभी उनके बेटे भव्य बिश्नोई के भगवा रंग में रंग जाने की खबरें उड़ीं, लेकिन राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी कुलदीप ने अपने समर्थकों को विश्वास में लिए बिना कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया। अब, राजनीतिक कयास और भी अधिक तेज हो गए, जब कुलदीप ने सीएम से मुलाकात कर आने के तुरंत बाद हिसार में रविवार को सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों के अपने खास समर्थकों की बैठक बुलाई।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल से कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई ने की मुलाकात। गुजरात, पंजाब के बाद क्या हरियाणा में कांग्रेस की तीसरी विकट गिरने वाली है

  1. सुनील जाखड़
  2. हार्दिक पटेल
  3. कुलदीप बिश्नोई

कोरल ‘पुरनूर’, डेमोक्रेटिक फ्रंट, प्पंचकुला :

कांग्रेस केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य एवं आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई ने गुरुवार को चंडीगढ़ आवास पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आदमपुर में विकास परियोजनाओं बारे उनके साथ विस्तार से चर्चा की। हरियाणा कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस बात के संकेत हैं कि अगर बिश्नोई को नहीं मनाया गया, तो वह ऐसा कदम भी उठा सकते हैं, जिससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। जिससे अक्टूबर 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

पंजाब की तरह हरियाणा कांग्रेस की आंतरिक कलह से जूझ रही है। हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुलदीप बिश्नोई बागी तेवर अपना रखे हैं। कहा जा रहा है कि बिशनोई हरियाणा के नए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव खुश नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष उदय भान हुड्डा के खेमे के माने जाते हैं। दिल्ली में राहुल गांधी, भूपिंदर सिंह हुड्डा और उदय भान ने अपनी नई टीम के साथ मुलाकात की है।

नाराजगी का आलम यह है कि बिश्नोई इस घोषणा के बाद से पार्टी के कार्यक्रमों में भाग नहीं भी नहीं ले रहे हैं। 4 मई को पार्टी मुख्यालय में आयोजित उस कार्यक्रम में भी वह शामिल नहीं हुए जिसमें उदय भान और हरियाणा कांग्रेस के चार कार्यकारी अध्यक्षों को नई जिम्मेदारी दी गई थी।

हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद मिलाने का दर्द आदमपुर से कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई की जुबां पर आखिरकार आ ही गया। कुलदीप बिश्नोई ने शुक्रवार को एक ट्वीट लिखा कि थोड़ा डूबूंगा, मगर मैं फिर तैर आऊंगा, ऐ जिंदगी, तू देख मैं फिर जीत जाऊंगा। अध्यक्ष न बन पाने के कारण उनका यमुनानगर में होने वाला जन जागरण अभियान भी स्थगित हो गया है। कुलदीप के समर्थक निराश होकर उनके नए संदेश का इंतजार कर रहे हैं।

कुलदीप बिश्नोई द्वारा लिखा गया ट्वीट।

हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद कुलदीप बिश्नोई को न मिलने पर उनके समर्थकों में रोष था, लेकिन बुधवार को कुलदीप ने ट्वीट करके संयम बरतने के लिए कहा है। कुलदीप ने ट्वीट किया कि साथियों, आप सबके संदेश सोशल मीडिया पर पढ़ रहा हूं। आपका अपार प्यार देखकर अत्यंत भावुक हूं, लेकिन मेरी सब से प्रार्थना है कि जब तक मैं राहुल जी से जवाब न मांग लूं, हमें कोई कदम नहीं उठाना है। अगर मेरे प्रति आपके मन में स्नेह है तो संयम रखें।

कुलदीप का पहला ट्वीट

आदमपुर से विधायक बिश्नोई हाल के दिनों में अपने गृह क्षेत्र और उसके आसपास जनसभाएं कर रहे हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्र में से संबंधित मुद्दों को उठाने के लिए भाजपा नेता और सीएम मनोहर लाल खट्टर से भी मुलाकात की है। हरियाणा कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस बात के संकेत हैं कि अगर बिश्नोई को नहीं मनाया गया तो वह ऐसा कदम भी उठा सकते हैं जिससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। जिससे अक्टूबर 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

बिश्नोई गैर-जाट नेता के तौर पर जाने जाते जबकि राज्य कांग्रेस में भूपेंद्र हुड्डा, उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा और रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे जाट नेताओं का वर्चस्व है। वहीं भान दलित समुदाय से संबेध रखते हैं। बिश्नोई अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के संरक्षक भी हैं। 25 अप्रैल को हिसार में अपने समुदाय की एक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि उनके आलोचकों के साथ उनके राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सामाजिक मतभेद नहीं।

बिश्नोई को उम्मीद थी कि नई टीम में उन्हें जगह मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और शायद इसी वजह से वो नाराज भी है। कुलदीप ने राहुल गांधी से मिलने के लिए समय भी मांगा है, लेकिन यह मीटिंग अभी तक नहीं हो पाई है। नई टीम की घोषणा के तुरंत बाद, बिश्नोई ने कहा था कि वह राहुल गांधी से मिलने के बाद अपने भविष्य को लेकर कोई अगला कदम उठाएंगे। बिश्नोई हुड्डा के आलोचक रहे हैं। 2007 में तत्कालीन सीएम हुड्डा से खींचतान के बाद उनको पार्टी से बाहर कर दिया गया था।

बिश्नोई की नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर हरियाणा के एआईसीसी प्रभारी विवेक बंसल ने कहा- “यह सब जल्द ही सुलझा लिया जाएगा, मैं बिश्नोई के संपर्क में हूं।” बंसल ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस की जिला और ब्लॉक इकाइयों के गठन के लिए इन स्तरों पर संगठनात्मक चुनाव कराना पार्टी की प्राथमिकता होगी।

इससे पहले पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख सुनील जाखड़ ने पिछले शनिवार को नाटकीय अंदाज में पार्टी से नाता तोड़ लिया था। उन्होंने ये इस्तीफा तब दिया जब उदयपुर में कांग्रेस का चिंतन शिविर चल रहा था। उसी तरह चिंतन शिविर में शामिल न होते हहुए गुजरात के कार्यकारिणी प्रदेशाध्यक्ष ‘हार्दिक पटेल ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था। अब तीसरी ‘विकेट’ के गिरने की भी उम्मीद जाग रही है।

ज्ञानवापी के मामले मे कमिश्नर अजय मिश्रा द्वारा प्रस्तुत सर्वे रिपोर्ट मे प्रथम दृष्टया हिन्दु प्रतीक चिन्ह मिले

सर्वे खत्म होने के बाद हिंदू पक्ष ने बड़ा दावा किया है. हिंदू पक्ष का कहना है कि ‘ज्ञानवापी मस्जिद के कुएं में में शिवलिंग मिला है और इसको लेकर वे बहुत खुश हैं, वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस दावे को नकारा है. पूर्व कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा ने 6 और 7 मई की तारीख की रिपोर्ट को कोर्ट में पेश कर दिया है। विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह 12 मई के बाद की कमिशन की कार्यवाही की रिपोर्ट स्वंय दाखिल करेंगे। सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह विशेष अधिवक्ता विशाल सिंह के निर्देशन में काम करेंगे। कोर्ट ने आगे कहा कि विशाल सिंह ने कहा है कि कमिशन रिपोर्ट तैयार करने में कम से कम 2 दिन का समय लगेगा। इस प्रार्थनापत्र को स्वीकार किया जाता है और उन्हें 2 दिन का समय दिया जाता है। 

वाराणसी(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

ज्ञानवापी विवाद मे न्यायालय द्वारा नियुक्त कमिश्नर अजय मिश्रा 6 म ई और 7 म ई को किये सर्वे की प्रारम्भिक सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमे प्रथम दृष्टया हिन्दु प्रतीक चिन्ह मिलने की बात कही गयी है।

कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट मे बताया कि सर्वे की कार्यवाही 6 म ई शुक्रवार करीब 3:30 बजे शुरु की गयी जो सूर्यास्त तक 5:45 तक चली दूसरे दिन 7 म ई को पुन:3:30 पर शुरु हुई जिसमे अंजुमन इंतजामिया कमेटी के पक्षकार उपस्थित नही हुये तथा प्रशासन का भी असहयोग रहा तथा प्रतिवादी गण की तरफ से करीब 100 लोग मुस्लिम समाज के एकत्र हो गये जिसके कारण 4:50 के बाद सर्वे का काम नही हो सका।

कमिश्नर ने अपनी सर्वे रिपोर्ट मे बताया कि विवादित स्थल के मूल स्थान बैरिकेटिंग के बाहर उतर से पश्चिम की दीवार के कोने में मन्दिरो का मलबा जिसपर देवी देवताओ की कलाकृति तथा अन्य शिलापट्ट पर कमल की कलाकृति मौजूद है तथा मध्य शिलापट्ट शेषनाग, नागफन जैसी थी,की विडियोग्राफी कराई गयी। अन्य शिलापट्टो पर सिंदूर के लेप की हुई कलाकृति मौजूद थी। उन्होने यह भी अपनी रिपोर्ट मे बताया कि कुछ शिलापट्ट भूमि पर लम्बे समय से पडे प्रतीत होते है तथा प्रथम दृष्टया किसी बडे भवन के खंडित अंश आ रहे है सर्वे की पूरी फोटोग्राफी और विडियो ग्राफी कराई गयी है।
कमिश्नर अजय मिश्रा ने आगे कहा कि जब वादिनीगण और और उनके अधिवक्तागण से प्रशन किया कि विवादित स्थल पश्चिमी दीवार की बैरिकेटिंग के बाहर सिंदूर लगी तीन चार कलाकृति व चौखट प्रकार का शिलापट्ट ही दावे मे वर्णित श्रंगार गौरी है या नही? तो उन्होने बताया कि ये श्रंगार गौरी मन्दिर की चौखट के ही अवशेष हैं इन प्रतीको को ही फिलहाल श्रंगार मानकर ही पूजते है।

अखिलेश ने हिंदू धर्म का उड़ाया मजाक, कहा- ज्ञानवापी मामला BJP बढ़ा रही है

एक तरफ अदालत में ज्ञानवापी को लेकर बहस जारी है कि वो मस्जिद है या फिर मंदिर है, दावे अपने-अपने हैं और इन दावों को झुठलाने और सही साबित करने के लिये वार और पलटवार भी किया जा रहा है। जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई जारी है, तो वहीं सियासत भी तेज हो चुकी है। हालांकि अखिलेश यादव से उनकी पार्टी के लोग ही सहमत नहीं दिख रहे। अखिलेश ने आगे कहा कि “मुख्यमंत्री योगी जी गरीबों की दुकान हटाना चाहते है, होर्डिंग हटाना चाहते है। पहले गरीब को राशन दिया। अब उनकी महंगे दाम में वसूली करना चाहते है। प्रदेश में बिजली कटौती जारी है। इसके बीच लोगों के घरों में बिजली का बिल पहुंचने लगा है। बिजली का बिल न देने पर उन्हें धमकाया जा रहा है।” समाजवादी पार्टी की नेता रूबीना खानम ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाना गलत है।

सारिका तिवारी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, अयोध्याजी/ नयी दिल्ली :  

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अखिलेश यादव जो यादवों के प्रतिनिधि हिन्दू धर्म के बारे में जो सोचते हैं वही उनके बयानों में सामने आता है। वाराणसी के ज्ञानवापी सर्वे पर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि हिंदू धर्म में में कहीं पर भी पत्थर रख दो, एक लाल झंडा रख दो, पीपल के पेड़ के नीचे तो मंदिर बन गया। अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके उन्होंने इशारों ही इशारों में बाबरी मस्जिद को लेकर भी बड़ी बात कह दी। उन्होंने कहा कि एक समय था जब रात के समय मूर्तियां रख दी गई थी। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद से सियासी राज छिड़ा हुआ है। भाजपा ने इसे समाजवादी पार्टी की तुष्टिकरण की राजनीति बताया।

सिद्धार्थनगर से लौटते समय अखिलेश अयोध्या में रुके थे, यहां पर उन्होंने एक होटल में प्रेस कांफ्रेंस की। कहा कि देश में महंगाई बढ़ी है, वह भाजपा ने बढ़ाई है। भाजपा ज्ञानवापी का मुद्दा जानबूझकर उठा रही है। अभी तक एक योजना चला रही थी, कि वन नेशन वन राशन, लेकिन अब योजना चला रही है कि वन नेशन वन उद्योगपति। सभी का ध्यान ज्ञानवापी मस्जिद की ओर करके भाजपा उद्योगों को बेच रही है।

अखिलेश ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के बहाने सरकार गेहूं को विदेश भेजकर कुछ लोगों को फायदा पहुंचा रही है। सभी ने निर्यात पर रोक लगाए जाने का समाचार पढ़ा और सुना होगा, लेकिन गेहूं विदेश भेजने का नहीं सुना होगा। देश के बंदरगाहों पर खड़े हजारों ट्रक गेहूं रोक के बावजूद भी विदेश भेज दिए गए।

अखिलेश यादव ने कहा कि अयोध्या जैसे पवित्र स्थान पर 5 साल की बच्ची से रेप होता है। वहां बुलडोजर नहीं चलाया गया। केवल गरीब पर चलता है। एक व्यक्ति सब्जी लेने गया था, उस पर भी बुलडोजर चल गया। अखिलेश ने बिजली को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री गरीबों की दुकान हटाना चाहते है, होर्डिंग हटाना चाहते हैं। पहले गरीब को राशन दिया। अब उनकी महंगे दाम में वसूली करना चाहते है। प्रदेश में बिजली कटौती जारी है।

उधर ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जमीयत उलेमा ए हिन्द (महमूद मदनी ग्रुप) ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बयान जारी कर कहा है कि ऐसे मामलों को लेकर सार्वजनिक प्रदर्शन करने से बचना होगा।

उलेमा, वक्ताओं और गणमान्य व्यक्तियों और टीवी पर बहस करने वालों से अपील है कि वह टीवी डिबेट और बहस में भाग लेने से परहेज करें। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए सार्वजनिक डिबेट में भड़काऊ बहस और सोशल मीडिया पर भाषणबाजी किसी भी तरह से देश और मुसलमानों के हित में नहीं है।

मौलाना महमूद मदनी

प्रेस नोट में लिखा है कि ज्ञानवापी मस्जिद जैसे मुद्दे को सड़क पर न लाया जाए और सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रदर्शनों से बचा जाए। इस मामले में मस्जिद इंतेजामिया कमेटी एक पक्षकार के रूप में विभिन्न अदालतों में मुकदमा लड़ रही है। उनसे उम्मीद है कि वे इस मामले को अंत तक मजबूती से लड़ेंगे। देश के अन्य संगठनों से अपील है कि वे इसमें सीधे हस्तक्षेप न करें। जो भी सहायता करनी है, वह अप्रत्यक्ष रूप से इंतेजामिया कमेटी की की जाए।

बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर मंगलवार को मौलाना राबे हसन नदवी के नेतृत्व में आपातकालीन बैठक की थी। उस बैठक में बोर्ड से जुड़े देशभर के 45 सदस्य शामिल हुए थे, जिसमें तय हुआ कि बाबरी मस्जिद की तरह देश की दूसरी मस्जिदों को हाथ से नहीं जाने देंगे, वो चाहे काशी की ज्ञानवापी मस्जिद हो या फिर मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद।

सपा प्रमुख ने केंद्र पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश में उद्योगपतियों को बड़ी-बड़ी चीजें बेची जा रही हैं। कंपनियाँ बिक रही हैं, बैंक मर्ज हो रहे हैं, एलआईसी का निजीकरण हो रहा है, एयरपोर्ट बिक रहे हैं, राज्य का गेहूँ विदेशों में बेचा जा रहा है… अखिलेश के अनुसार, ज्ञानवापी का मामला इन्हीं सब मामलों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया है।

वह वर्तमान सरकार पर ‘फूट डालो राज करो’ वाली नीति पर चलने का इल्जाम मढ़ते हैं। वह कहते हैं कि अंग्रेजों ने जिस तरह से डिवाइड एंड रूल किया उसी तरीके से भाजपा भी यही नियम अपना रही है। ये सिद्धांत कई साल पुराना जिसे अंग्रेज इस्तेमाल करते थे। जनता के साथ इतना अन्याय और उत्पीड़न कभी नहीं हुआ, जितना इस सरकार में हो रहा है। ये सरकार केवल डरा कर धर्म और जाति के नाम पर डरा रही है।

सर्वोच्च न्यायालय ने शिवलिंग की जगह को संरक्षित करने के दिए आदेश, ढाँचे में मुस्लिमों की आवाजाही और नमाज की मनाही नहीं

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को वाराणसी के जिलाधिकारी को ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर के अंदर उस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जहां सर्वे के दौरान शिवलिंग मिलने की बात कही गई है। साथ ही, शीर्ष न्यायालय ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को वहां नमाज अदा करने और धार्मिक रस्म निभाने की अनुमति दे दी। ‘‘समता को संतुलित रखते हुए”, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्ह की पीठ ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का कामकाज देखने वाली कमेटी ऑफ मैनेजमेंट अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया और निचली अदालत में जारी कार्यवाही पर रोक लगाने से मना कर दिया।

नई दिल्ली(ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट,  

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उस जगह को सुरक्षित करने का आदेश दिया जहा शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन मुसलमानों के मस्जिद में जाने और वहां नमाज पढ़ने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने आदेश में ज्ञानवापी मस्जिद पर निचली अदालत के आदेश को सीमित कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, “जिस जगह पर शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है सिर्फ उस जगह को सुरक्षित किया जाएगा। ये सुरक्षा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट प्रदान करेंगे। वो सुनिश्चित करेंगे कि जिस चीज को शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा है उसे कोई नुकसान न हो।”

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने निर्देश दिया- अगर शिवलिंग मिला है तो हमें संतुलन बनाना होगा। हम डीएम को निर्देश देंगे कि वह उस स्थान की सुरक्षा करें, पर मुस्लिमों को नमाज से न रोका जाए।

सर्वोच्च न्यायालय के ऑर्डर के 3 अहम पॉइंट

  1.  शिवलिंग के दावे वाली जगह को सुरक्षित किया जाए।
  2.  मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से न रोका जाए।
  3.  सिर्फ 20 लोगों के नमाज पढ़ने वाला ऑर्डर अब लागू नहीं।

इस आदेश का असर ये होगा कि मस्जिद में बने वजूखाने का इस्तेमाल पूरी तरह से नहीं हो पाएगा क्योंकि वजूखाने के बीचोंबीच ही शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा ह। . हालांकि मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है वो वजूखाने का फव्वारा है। सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश के मुताबिक ज्ञानवापी मस्जिद में मुसलमानों के जाने पर कोई पाबंदी नहीं होगी और किसी भी तादाद में नमाज़ी मस्जिद में जाएंगे व अपने तरीके से नमाज पढ़ेंगे।

वहीं ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार (17 मई, 2022) को कहा कि इस मामले की सुनवाई निचली अदालत में चल रही है, ऐसे में जरूरी है कि जिला अदालत के फैसले का इंतजार किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने वाराणसी के जिला अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद की याचिका पर हिंदू याचिकाकर्ताओं और यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। 19 मई तक जवाब दाखिल करना है।

सर्वे के दौरान शिवलिंग मिला, वहां ट्रायल कोर्ट ने एंट्री बैन की थी

  • वाराणसी न्यायालय के आदेश के बाद 3 दिन में सर्वे का काम पूरा हुआ है। वहीं, तीसरे दिन सोमवार को सर्वे के दौरान ज्ञानवापी परिसर के अंदर शिवलिंग मिला।
  • हिंदू पक्ष की अपील पर वाराणसी कोर्ट ने डीएम को आदेश दिया था कि जिस जगह शिवलिंग मिला है, उसे तत्काल सील कर दें। वहां पर किसी भी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित किया जाए।
  • कोर्ट ने डीएम, पुलिस कमिश्नर और सीआरपीएफ कमांडेंट को जगहों को संरक्षित और सुरक्षित रखने की व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदारी दी है। प्रशासन की टीम वहां पहुंची और 9 ताले लगाकर साक्ष्य को सील किया।

बता दें कि आज सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्ह की पीठ वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद के मामलों का प्रबंधन करने वाली प्रबंधन समिति ‘अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद’ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यूपी सरकार को कुछ मुद्दों पर उनसे सहायता की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने वाराणसी कोर्ट की ओर से सर्वे कराए जाने के आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत परिसर की वीडियोग्राफी की जा रही है।

मस्जिद कमिटी के वकील होजैफा अहमदी ने न्यायालय से कहा कि तीन बातें हैं। उन्होंने न्यायालय को बताया कि ये पूजा के अधिकार का मामला है और इसमें माँ गौरी, हनुमान एवं अनुन्देवता के पूजा की माँग की गई है। उन्होंने फिर कहा है कि रोजाना वहाँ जाने में अवरोध न हो, यानी उस जगह का कैरेक्टर बदलने की माँग है जो इस वक्त मस्जिद है।

अहमदी ने आगे अपनी दलीलों में कहा, “हमारा कहना है कि ये याचिका स्वीकार ही नहीं होनी चाहिए थी। दूसरी बात ये है कि पुलिस की सहायता चाहिए। इस पर आदेश हमें सुने बिना किया गया। फिर कहा गया कि इस खास आदमी को कोर्ट कमिश्नर बनाया जाए। निचली अदालत के ये तीन आदेश हैं, जिसे हम चुनौती दे रहे हैं।”

हुजेफा अहमदी ने कहा कि शनिवार और रविवार को कमिश्नर सर्वे करने गए और कमिश्नर को पूरी तरह से पता था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इस बेंच के समक्ष सूचीबद्ध है। वाराणसी कोर्ट ने सोमवार को आयुक्त द्वारा बताए जाने के बाद परिसर में एक स्थान को सील करने का आदेश दिया कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर एक शिवलिंग पाया गया है। कार्यवाही रोकी जानी चाहिए, यथास्थिति बने रहे।

अहमदी का कहना है कि वह निचली अदालत द्वारा आयुक्त की नियुक्ति सहित सभी आदेशों पर रोक लगाने की माँग कर रहे हैं और यथास्थिति का आदेश दिया जाना चाहिए क्योंकि ये आदेश अवैध हैं और संसद के कानून के खिलाफ हैं। परिसर सील नहीं रह सकते हैं और आदेश अवैध हैं। यदि परिसर को सील कर दिया जाता है, तो यथास्थिति में परिवर्तन होता है। उन्होंने प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसके सेक्शन 3 में यथास्थिति की बात कही गई थी।

ASI ने जारी की ताजमहल के बंद कमरों की तस्वीरें

विश्वधरोहर और दुनिया के अजूबों में से एक ताजमहल के तहखाने में बंद पड़े 22 कमरों में आखिर क्या है.. इसका पता अब चल गया है। बता दें कि इन कमरों की तस्वीरें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से जारी कर दी गई हैं। ज्ञानवापी ​मस्जिद की तरह ताजमहल के इन कमरों पर विवाद चल रहा है। इन विवादों में दावा किया गया था कि कमरों को खोलने से पता चलेगा कि ताजमहल आखिर है क्या। एएसआई के अनुसार, ये तस्वीरें उस दौरान ली गई थीं जब साल 2022 में इनकी मरम्मत की गई थी।

नई दिल्ली (ब्यूरो), डेमोक्रेटिक फ्रंट :

ताजमहल के तहखाने में बंद जिन 22 कमरों को लेकर इन दिनों विवाद जारी है। उन कमरों की तस्वीरें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने जारी की है। एएसआई के अनुसार, ये तस्वीरें उस दौरान ली गई थीं जब साल 2022 में इनकी मरम्मत की गई थी। आगरा एएसआई प्रमुख आर के पटेल के अनुसार, तस्वीरें जनवरी 2022 के न्यूजलेटर के रूप में एएसआई की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं, कोई भी उनकी वेबसाइट पर जाकर इन तस्वीरों को देख सकता है। इनमें बताया गया है कि इन बंद कमरों में रेनोवेशन का काम किया गया था। इस काम में करीब 6 लाख रुपये का खर्च आया था। वहीं पर्यटन उद्योग के सूत्रों ने बताया कि इन कमरों में क्या है। इस बारे में गलत बातें न फैले, इसे रोकने के लिए ही इन तस्वीरों को सार्वजनिक किया गया है/

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट में अयोध्या निवासी डॉ. रजनीश कुमार की ओर से दायर ताजमहल के इन 22 कमरों को खोलने की मांग वाली जनहित याचिका दायर की गई थी। हालांकि बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि आप एक समिति के माध्यम से तथ्यों की खोज की मांग कर रहे हैं, आप कौन होते हैं, यह आपका अधिकार नहीं है और न ही यह आरटीआई अधिनियम के दायरे में है, हम आपकी दलील से सहमत नहीं हैं। कमरे को खोलने की मांग के लिए ऐतिहासिक शोध की जरूरत है, हम रिट याचिका पर विचार करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए याचिका खारिज की जाती है।

भाकियू में बगावत, राकेश टिकैत ‘बर्खास्त’, नरेश टिकैत की भी छुट्टी

यह बात नवंबर 2021 की है। उस वक्त उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारियों में सभी दल लगे हुए थे। किसान आंदोलन के जरिए देश में अपनी पहचान बना चुके भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत इन दिनों काफी लाइम लाइट में थे और बीजेपी विरोध में लगातार प्रचार कर रहे थे। नवंबर 2021 में ही यूपी के सिसौली में भाकियू के कार्यालय पर बीजेपी के विधायक उमेश मलिक पर हमला हुआ था। इस हमले के नामजद आरोपी भी तय किए गए। लेकिन राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत इनकी गिरफ्तारी के खिलाफ अड़ गए, और कहा कि किसी भी हाल में बीजेपी विधायक पर हमले के आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। बताया जाता है कि यहीं से भाकियू के टूटने और राकेश टिकैत के खिलाफ बगावत की भूमिका तैयार हो गई थी।  

  • किसानों में उभरी नाराजगी के बाद लिया गया फैसला
  • राकेश टिकैत को राजनीतिक बयान देना पड़ा भारी
  • राजेश सिंह चौहान भारतीय किसान यूनियन के नए अध्यक्ष बनाए गए

लखनऊ (ब्यूरो) डेमोक्रेटिक फ्रंट :  

तीन कृषि कानूनो के खिलाफ एक साल से अधिक समय तक चले किसान आंदोलन की अगुवाई करने वाले भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) में रविवार को दो-फाड़ हो गये। संगठन के नेता राजेश सिंह चौहान ने यहां संवाददाता सम्मेलन में भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत और उनके भाई एवं भाकियू के अध्यक्ष नरेश टिकैत पर राजनीति से प्रेरित होने का आरोप लगाते हुए भाकियू से अपनी राह जुदा करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनके नये संगठन का नाम भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) है। चौहान ने किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत की जयंती के अवसर पर यहां गन्ना संस्थान सभागार में संगठन की कार्यकारिणी की बैठक में किये गये इन फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राकेश टिकैत और नरेश टिकैत राजनीति से प्रेरित थे जो यूनियन की विचारधारा के विपरीत है। किसान अपनी लड़ाई लड़ने में समर्थ हैं और उसे किसी राजनीतिक दल की जरूरत नहीं है। चौहान ने कहा, “हम किसी राजनैतिक दल से नहीं जुड़ेंगे और न ही सिद्धांतों से समझौता करेंगे। मैंने दोनो भाइयों से राजनीतिक दलों से जुड़ने का विरोध किया था। हमने कहा था हम अराजनैतिक लोग है और हमारा काम किसानों की समस्याओं के लिये लड़ना है।”

भारतीय किसान यूनियन में हुई टूट और बिखराव के मामले में राकेश टिकैत के ही परिवार में 3 अलग-अलग बयान आए हैं। जहाँ राकेश टिकैत इस पूरे घटनाक्रम का दोषी भाजपा सरकार को बता रहे हैं तो वहीं नरेश टिकैत ने इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी राजनैतिक हस्तक्षेप होने से इंकार किया है। इससे पहले 15 मई 2022 (रविवार) को कभी राकेश टिकैत के सहयोगी रहे राजेश सिंह चौहान ने राकेश टिकैत और उनके भाई नरेश टिकैत को संगठन से अलग कर दिया था। इसी के साथ नए संगठन का नाम भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) दिया था।

अब राकेश टिकैत ने खुद से बगावत करने वाले उन सभी पदाधिकारियों को किसान विरोधी घोषित किया है। इसी के साथ उन्होंने 7 सदस्यों की लिस्ट जारी कर के उनको बर्खास्त करने की भी घोषणा की है।

इसी के साथ राकेश टिकैत ने इस पूरे मामले का दोष UP सरकार पर मढ़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टिकैत ने कहा, “मैंने इस बिखराव को रोकने की काफी कोशिश की जिसके लिए मैं लखनऊ तक गया। पहले तो राजेश सिंह मान गए थे लेकिन शायद बाद में अधिक दबाव से टूट गए। वो सरकार की नोटिस से डर गए थे। जो गए हैं उनके जाने से संगठन पर फर्क नहीं पड़ने वाला। ये टूट पहली बार नहीं हुई है। इस से पहले 8-10 बार अलग-अलग संगठन टूट कर हमसे अलग हो चुके हैं। जनवरी 2021 में भी कुछ लोग सरकार के आगे झुक गए थे। यह सब सरकार का किया धरा है। सरकार अपनी मंशा में कामयाब रही।”

राकेश टिकैत के बयान से ठीक उलट नरेश टिकैत ने 15 मई 2022 (रविवार) को ऑपइंडिया से बात करते हुए किसान यूनियन के विभाजन में किसी भी राजनैतिक दल की भूमिका से इंकार किया था। तब उन्होंने कहा था कि इस पूरे मामले में कोई भी राजनीति नहीं है।

चौहान ने कहा “ हम भी किसान आंदोलन में बराबर के हिस्सेदार रहे। मैंने राकेश तथा नरेश टिकैत के साथ हमेशा लड़ाई लड़ी है। अब भी सरकार नहीं सुनेगी तो हम नये सिरे से संगठन को तैयार कर किसानों की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि भाकियू (अराजनैतिक) की कार्यकारिणी का चेयरमैन और संरक्षक राजेश सिंह मलिक को बनाया गया है जबकि वह खुद इसके अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा मांगेराम त्यागी उपाध्यक्ष, अनिल तालान राष्ट्रीय महासचिव और धर्मेंन्द्र मलिक संगठन के प्रवक्ता होंगे। चौहान ने कहा कि संगठन की उत्तर प्रदेश इकाई का भी गठन कर हरिनाम सिंह वर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।