पीएफआई और RSS बराबर, इसपर भी लगाओ बैन : कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल

                        उर्दू अखबार ‘इंकलाब’ ने एक जुलाई 2018 को रिपोर्ट छापी थी जिसमें बताया गया था कि राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ मुलाकात के दौरान कहा था कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है इस रिपोर्ट को पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा खारिज करने पर उसी अखबार में कांग्रेस के अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रमुख नदीम जावेद का इंटरव्यू छपा है, जिसमें कांग्रेस नेता ने एक तरह से यह पुष्टि की है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी बताया था। साथ ही कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह भी 2018 में RSS के खिलाफ विवादित बयान दे चुके हैं। झाबुआ में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अभी तक जितने भी हिंदू आतंकी सामने आए हैं, सब RSS से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा था कि संघ के खिलाफ जांच की जाए और फिर कार्रवाई होनी चाहिए। आज कॉंग्रेस की सनातन धर्मी लोगों के प्रति नफरत फिर सामने आई जब केरल से कांग्रेस सांसद और लोकसभा में मुख्य सचेतक कोडिकुन्निल सुरेश आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है और कहा है कि पीएफआई पर बैन लगाना कोई उपाय नहीं है।  

  • भारत सरकार ने पीएफआई को पांच साल के लिए बैन कर दिया
  • पीएफआई पर बैन को लेकर कांग्रेस सांसद ने उठाया सवाल
  • कांग्रेस सांसद सुरेश ने कहा कि आरएसएस पर भी बैन लगना चाहिए

राजविरेन्द्र वसिष्ठ, डेमोक्रेटिक फ्रंट चंडीगढ़/ नयी दिल्ली

            समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मल्लपुरम में कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल ने कहा. “हम आरएसएस पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग करते हैं।  पीएफआई पर बैन कोई उपाय नहीं है। आरएसएस भी पूरे देश में हिंदू साम्प्रदायिकता फैला रहा है। आरएसएस और पीएफआई दोनों समान हैं, इसलिए सरकार को दोनों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। केवल पीएफआई पर ही बैन क्यों?”

            गौरतलब है कि पीएफआई के अलावा, आतंकवाद रोधी कानून ‘यूएपीए’ के तहत ‘रिहैब इंडिया फाउंडेशन’ (आरआईएफ), ‘कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया’ (सीएफ), ‘ऑल इंडिया इमाम काउंसिल’ (एआईआईसी), ‘नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन’ (एनसीएचआरओ), ‘नेशनल विमेंस फ्रंट’, ‘जूनियर फ्रंट’, ‘एम्पावर इंडिया फाउंडेशन’ और ‘रिहैब फाउंडेशन’(केरल) को भी प्रतिबंधित किया गया है।

            कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह भी 2018 में RSS के खिलाफ विवादित बयान दे चुके हैं। झाबुआ में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अभी तक जितने भी हिंदू आतंकी सामने आए हैं, सब RSS से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा था कि संघ के खिलाफ जांच की जाए और फिर कार्रवाई होनी चाहिए।


            PFI पर बैन लगने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री गिरिराज सिंह ने ट्वीट किया है। सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा- बाय बाय PFI। वहीं असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा- मैं भारत सरकार की ओर से PFI पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का स्वागत करता हूं। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ है कि भारत के खिलाफ विभाजनकारी या विघटनकारी डिजाइन से सख्ती से निपटा जाएगा।

           12 सितंबर को कांग्रेस ने अपने ट्विटर अकाउंट से खाकी की एक निक्कर की तस्वीर शेयर की। इसमें लिखा- देश को नफरत से मुक्त कराने में 145 दिन बाकी हैं। हालांकि, संघ ने भी इसका तुरंत विरोध किया और संगठन के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने कहा था कि इनके बाप-दादा ने संघ का बहुत तिरस्कार किया, लेकिन संघ रुका नहीं। 

           भारत में आजादी के बाद 3 बार बैन लग चुका है। पहली बार 1948 में गांधी जी की हत्या के बाद बैन लगा था। यह प्रतिबंध करीब 2 सालों तक लगा रहा। संघ पर दूसरा प्रतिबंध 1975 में लागू आंतरिक आपातकाल के समय लगा। आपातकाल खत्म होने के बाद बैन हटा लिया गया।

वहीं तीसरी बार RSS पर 1992 में बाबरी विध्वंस के वक्त बैन लगाया गया। यह बैन करीब 6 महीने के लिए लगाया गया था।

           RSS की स्थापना साल 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ में सर संघचालक सबसे प्रमुख होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक करोड़ से ज्यादा प्रशिक्षित सदस्य हैं। संघ परिवार में 80 से ज्यादा समविचारी या आनुषांगिक संगठन हैं। दुनिया के करीब 40 देशों में संघ सक्रिय है।

           मौजूदा समय में संघ की 56 हजार 569 दैनिक शाखाएं लगती हैं. करीब 13 हजार 847 साप्ताहिक मंडली और 9 हजार मासिक शाखाएं भी हैं। संघ में सर कार्यवाह पद के लिए चुनाव होता है। संचालन की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है।

वहीं PFI के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को लेकर SDPI  ने कहा है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों को गलत तरीके से इस्तेमाल कर रही है और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है।  

एक तरफ जहां पीएफआई के खिलाफ इस कार्रवाई पर संगठन से सहानुभूति रखने वाला पक्ष केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहा है तो दूसरी ओर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने इस कदम का स्वागत किया है।  PFI पर बैन को लेकर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “देश गृह मंत्री अमित शाह के फैसले की सराहना कर रहा है, हम उनका धन्यवाद करते हैं और इस निर्णय का स्वागत करते हैं इसका विरोध करने वालों भारत स्वीकार नहीं करेगा और सख्त जवाब देगा।”

                पीएफआई को लेकर सांप्रदायिक हिंसा के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में संभावनाएं है कि बैन जैसी बड़ी कार्रवाई के बाद पीएफआई के कार्यकर्ता सामाजिक माहौल खराब करने की कोशिश कर सकते हैं जिसके चलते पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की गई है. दिल्ली से लेकर तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में सुरक्षा एजेंसियां चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं।  

                आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए छापेमारी की थी जिसमें संगठन के खिलाफ अहम सबूत मिले थे और विदेशी फंडिंग तक की बातें सामने आईं थीं। इसके चलते मंगलवार देर रात मोदी सरकार ने इस संगठन को बैन करने का ऐलान कर दिया जो कि संगठन के लिए एक बड़ा झटका है।

शराबी पति ने दिया तीन तलाक तो रूबीना ने हिंदू धर्म अपनाकर दूसरी शादी कर ली

            रुबीना का कहना है कि शोएब द्वारा तीन तलाक दिए जाने और घर से निकालने के बाद वह बिल्कुल अकेली हो गई थी। उसे एक नए जीवनसाथी की तलाश थी। 5 साल पहले उसकी दोस्ती प्रेमपाल से हुई थी। पति के अत्याचार की दास्तान प्रेमपाल को पहले ही पता थी। तीन तलाक के बाद रुबीना ने प्रेमपाल से शादी करने की इच्छा जताई, जिस पर प्रेमपाल भी तैयार हो गया।

  • पति के अत्याचारों से तंग आ गई मुस्लिम महिला
  • तीन तलाक के बाद छोड़ दिया पति का घर
  • हिंदू धर्म अपनाकर कर ली दूसरी शादी

डेमोक्रेटिक फ्रंट (ब्यूरो) बरेली :  

            शराबी पति के अत्याचार और तीन तलाक से परेशान एक युवती बरेली में हिंदू धर्म अपनाकर रुबीना खान से पुष्पा बन गई। इसके बाद उसने हिंदू रीति-रिवाज के साथ प्रेम कुमार से शादी भी कर ली. यह शादी सुभाषनगर थाना इलाके के अगस्त मुनि आश्रम में हुई।  इस मौके पर रुबीना खान उर्फ पुष्पा ने बताया कि उसका मायका रामपुर जिले में है।  9 साल पहले उसकी शादी उत्तराखंड  निवासी शोएब से हुई थी. उसके शोएब से तीन लड़के भी हैं।  लेकिन उसका पति उसके चरित्र को लेकर शक करता था।

                  महिला ने बताया कि उसका पति शोएब शराब पीकर उसके साथ आए दिन मारपीट करता था। वह जैसे-तैसे दिन गुजार रही थी कि इस बीच उसकी मुलाकात प्रेम कुमार से हुई।  प्रेम रुबीना के पति शोएब का दोस्त है।  इसलिए उसका आए दिन उसके घर आना जाना होता रहता था।  इस बीच रुबीना को लगा कि प्रेम कुमार ही वह शख्स है जिसके साथ वह अपनी पूरी जिंदगी बिता सकती है।  प्रेम से उसकी नजदीकियां बढ़ती गईं।  इस दौरान जब शोएब ने उसे 3 तलाक दिया तो प्रेम कुमार ने रुबीना को स्वीकार कर लिया और हिन्दू रीति रिवाज के साथ शादी कर ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रामपुर निवासी रुबीना का निकाह 9 साल पहले उत्तराखंड के रहने वाले शोएब से हुआ था। शादी के बाद दोनों में आए दिन झगड़ा और मारपीट होने लगी। शोएब शराब के नशे में हर रोज रुबीना के साथ मारपीट करने लगा। करीब एक हफ्ते पहले वह फिर से शराब के नशे में मारपीट कर रहा था। इसी दौरान उसने तीन तलाक देते हुए रुबीना को घर से निकाल दिया। रुबीना के तीन बेटे हैं, इनमें सबसे बड़ा 8, दूसरा 6 और छोटा बेटा 4 साल का है।

रुबीना का कहना है कि शोएब द्वारा तीन तलाक दिए जाने और घर से निकालने के बाद वह बिल्कुल अकेली हो गई थी। उसे एक नए जीवनसाथी की तलाश थी। 5 साल पहले उसकी दोस्ती प्रेमपाल से हुई थी। पति के अत्याचार की दास्तान प्रेमपाल को पहले ही पता थी। तीन तलाक के बाद रुबीना ने प्रेमपाल से शादी करने की इच्छा जताई, जिस पर प्रेमपाल भी तैयार हो गया।

इसके बाद दोनों ने बरेली के मढ़ीनाथ स्थित एक मंदिर में जाकर घरवालों की मर्जी से शादी कर ली है। शादी से पहले रुबीना ने ‘घर-वापसी’ भी कर ली है और अब उसने अपना नाम पुष्पा रखा है। वहीं, दूसरी तरफ प्रेमपाल के परिवार वालों ने भी दोनों की शादी को स्वीकार कर लिया है।

प्रेमपाल का कहना है, “मेरी रुबीना के साथ शादी हुई है। इनके पति से मेरी जान पहचान थी। कभी-कभी मैं उनके घर भी जाता था। इनके पति इन्हें बहुत परेशान करते थे, मारते थे और नशा भी करते थे। इनसे जब बात हुई तो इन्होंने सब कुछ बताया। फिर हम दोनों ने यह फैसला लिया है कि हम शादी कर लें।”

रुबीना धर्म परिवर्तन कर पुष्पा तो बन गई है और उसने धर्मपाल से शादी भी कर ली है, लेकिन उसका कहना है कि उसका पूर्व शौहर उसे जान से मारने की धमकियाँ दे रहा है। रुबीना उर्फ पुष्पा को डर है कि यदि उसे पुलिस की सुरक्षा नहीं मिलती है, शोएब कभी भी उसको जान से मार सकता है।

श्राद्ध श्रद्धा का विषय है, प्रश्न हमारी आस्था पर ही क्यों?

पीयूष पियोधी, डेमोक्रेटिक फ्रंट, अध्यात्मिक डेस्क – 23 सितंबर

सबसे पहले कुछ पुरानी बातें :

सा’ब को भोत बुरा लगता कि सनातनी मरणोपरान्त पितृपक्ष में श्राद्ध करते हैं – पिण्ड-तर्पण अर्पण करते हैं …

अपमानित-तौहीन करने के विचार-ख्याल से विद्वान कर्मकाण्डी को दरबार में बुलवाया और अपनी आपत्ति – एतराज जाहिर किया

पण्डित जी मुस्काये – सा’ब आपके वालिदान-पुरखों को कोई गाली दे तो उनको लगेगी  ?

 सा’ब तमतमा गये, बोले – उनको लगे कि न लगे मुझे तो बहुत बुरा लगेगा और गुस्ताख़ को  सजा मुकर्रर कर दूँगा ..

पण्डित जी बोले – पितरों को किया तर्पण उनको मिले कि न मिले पर हमारी अपनी प्रसन्नता के लिये, कृतज्ञता-ज्ञापन के लिये यदि हम करते हैं – शास्त्र-सम्मत विधि से तो उसमें आपको आपत्ति नहीं होनी चाहिये !

श्राद्ध श्रद्धा का विषय है …

अब अगली बात

अंत्येष्टि का रहस्य

सोलह संस्कारों का यह अन्तिम संस्कार है ।

पर इस“ अंत्येष्टि” शब्द में एक गूढ़ रहस्य छिपा हुआ है , जो संभव है की कुछ लोगों को नहीं पता होगा ।

यह अंत्येष्टि शब्द दो शब्दों अंत्य + इष्टि”  में गुण संधि के द्वारा बना है ।

अब जो पंथ , यज्ञ को संस्कार नहीं मानते पर अंत्येष्टि करते हैं उनके लिए भी जानने की बात है की इष्टि का निरुक्त  “यज्ञ”  होता है ।

अब एक शब्द “अंत्याक्षरी” (यह एक प्राचीन खेल है)  समझ लें जिससे अंत्येष्टि समझने में सहायता मिलेगी ।

अंत्याक्षरी में अंतिम अक्षर , समाप्त करने के लिए नहीं होता बल्कि उसी अन्तिम अक्षर से कविता आरम्भ करने के लिए होता है ।

ठीक वही भावना है अंत्येष्टि में । अंतिम यज्ञ पुनः नव यज्ञ का आरम्भ है । और वह आरम्भ वहीं से होता है जहाँ तक वह जीव पहुँच चुका होता है ।

अपने इसी जीवन को यज्ञ स्वरूप बनाएँ । हृदय में सीता राम धारण करें…

श्राद्ध करते हो अर्थात मानते हो कि देह , आत्मा से भिन्न है । और यह बताने के लिए हर गाँव में हमें स्कूल नही खोलना थाहमें दुकान नही चलानी थी ।

जो लोग भी आज बक बक करते हैं कि सनातन धर्म ने हर गाँव में वेदों को सिखाने का प्रयास क्यो नही किया ।

तो, भैया , हमने हर गाँव में नहीं बल्कि हर मनुष्य के हृदय में ज्ञान देने का प्रयास किया । पर तुम, संसार जो कभी भी पकड़ा नहीं जा सकता उसको पकड़ने के लिए भाग रहे हो , और तुम्हारी आत्मा जो सदैव तुम्हारे साथ है उसके साक्षात्कार की तुम्हें चिंता ही नहीं है ।

सभी संस्कार तुम्हारे अद्वितीय होने की सूचना देते है । तुम्हीं ब्रह्म हो । जगो ।

अब अंतिम पक्ष…..

सनातन धर्म का रहस्य”

01. जब आप , अपने पितामह , पर पितामह या पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं तो आपके बच्चे को पता चलता है की आत्मा , देह से अलग है ।सब कुछ पेट ही नहीं है ।

02. इंद्रिय का अर्थ “इंद्र का” अर्थात देवताओं का , जब आप अपनी इंद्रियों को बलशाली बनाते हैं , विभिन्न उपायों के द्वारा , वह देव पूजा है ।

03. जब आपको ज्ञान लेना होता है तब गीता , वेद , पुराण इत्यादि का सहारा लेते है और यह एक प्रकार की ऋषि पूजा है ।

04. जब आप चलकर मंदिरों में जाते हैं और उस मंदिर की मूर्ति को , वहाँ के विधि अनुसार मूर्ति पूजा करते हैं वह इश्वर के सर्वत्र होने का भाव प्रकट करता है ।

05. जब आप इश्वर के विवृति अभिन्न निमित्तोपादान कारण द्वारा अवतार की पूजा करते हैं वह आपके द्वारा इश्वर के वात्सल्य भाव की पूजा है ।

06. और यह सब करते हुए आप अपना अंत: करण शुद्ध करते हुए स्वंयम का स्वरूप जानने का प्रयास करते हैं । यह सब सनातन के अंग हैं । इसमें से किसी एक को न मानने वाला हिन्दु आपका शत्रु नहीं है ।

जीवन में IIT, IIM, IAS, बीस कोठियाँ , बैंक बैलेंस बनाइए पर उपर बताए हुए 6 बिंदुओं पर भी ध्यान रखिए ।

नोट: कुछ लोगों ने अभिन्न निमित्तोंपादान कारण की व्याख्या पूछी है , जो इस प्रकार से है ।

अभिन्न निमित्तोपादान”

पिता ( कार्य ) होता है और पुत्र ( कारण ) , परन्तु वही पुत्र कालांतर में  ( स्वंय कार्य ) बन जाता है और उसका पुत्र , कारण ।

और दूसरे ढंग से देखिए । बीजांकुरण न्याय की दृष्टि से । बीज को आजकल (-30 डिग्री ) पर भी भविष्य के लिए सुरक्षित करके रखा जा रहा है , क्योकि यह बात सर्व सिद्ध है की उस बीज में वृक्ष बनने का संस्कार निहित है अर्थात बीज ( कार्य ) और वृक्ष ( कारण) रूपी गुण प्रकृति में निहित है । और उचित वातावरण , खाद जल प्रकाश तापमान आदि मिलने पर उसमें स्फुरण होगा ।

जब हम “अभिन्न” कहते है तो इसका अर्थ इस कार्य और कारण से भिन्न है अर्थात कार्य कारणातीत है । अर्थात यह विश्व प्रपंच में जो भी कार्य कारण है , परमात्मा उससे कारणातीत है ।

पर अभिन्न , तत्व से भिन्न नहीं है । तत्व के समान नहीं , तत्व से अभिन्न ।

जैसे एक बूँद सागर का जल पूरे के सागर के समान शक्तिशाली नहीं होता पर गुण में एक समान अर्थात अभिन्न होता है ।

निमित्त , एक कुम्हार ही घड़ा बना सकता है अत: कुम्हार , घड़े का निमित्त कारण है ।

और मिट्टी उस घड़े का “ उपादान “ कारण है , क्योकि घड़ा वास्तव में मिट्टी ही है ।

अत: अभिन्न निमित्तोंपादान का अर्थ , जीव भी वही , जगत भी वही और जगदीश्वर भी वही ।

घड़ा भी वही, मिट्टी भी वही, कुम्हार भी वही ।

अब एक और बात (अंतिम नहीं)…….

सवाल हमारी आस्था पर ही क्यों?

अगले माह ईसाइयों का हैलोवीन त्यौहार आने वाला है, जिसमें वे अपने मृत पूर्वजों को याद करते हैं।इस त्यौहार में लोग मृत्यु या मृतकों का संकेत देने वाली वस्तुओं से लोग अपने घरों को सजाते हैं। इनमें कंकाल, चुड़ैल, भूत-प्रेतों वाले मुखौटे, मकड़ियां और कटे हुए हाथ-पैर आदि कई प्रकार की वीभत्स चीजें होती हैं।इन दिनों वहां के लगभग सभी बड़े स्टोर हैलोवीन के सामान से पटे हुए हैं। यूरोप, अमरीका और कनाडा जैसे आधुनिक और विकसित समझे जाने वाले देशों में भी आज तक वहां के लोग अपने त्यौहारों को अपनी परंपराओं के अनुसार पूरे उत्साह व धूमधाम से मना रहे हैं। कोई इसे अंधविश्वास नहीं कहता और न कोई इसका वैज्ञानिक आधार पूछकर किसी की आस्था का मजाक उड़ाता है।

इधर दूसरी ओर भारत में कई नमूने हैं, जो लगभग हर सनातन धर्म (हिन्दू ) त्यौहार के खिलाफ कोई न कोई सवाल उठाते हैं और कभी पर्यावरण के नाम पर, कभी अंधविश्वास मिटाने के नाम पर, तो कभी किसी और बहाने से हमारे त्यौहारों को मिटाने में लगे रहते हैं। इन दिनों पितृ-पक्ष चल रहा है तो उस पर भी सवाल उठाने वाले या पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वालों को अंधविश्वासी बताने वाले कई लोग आपको भी दिखते होंगे।

मेरा सुझाव है कि ऐसे कुंठित लोगों को उनके हाल पर छोड़ दें। उन्हें किसी बात का वैज्ञानिक आधार बताने या किसी त्यौहार का अर्थ समझाने के फेर में पड़कर अपना समय बर्बाद न करें क्योंकि ऐसे लोग कुछ जानने समझने के लिए सवाल नहीं पूछते हैं, बल्कि केवल आपकी आस्था को ठेस पहुंचाने या आपको अपमानित करके स्वयं प्रसन्न होने के लिए ही ऐसे सवाल पूछते हैं। आप इनकी उपेक्षा कीजिए और अपनी आस्था पर अडिग रहिए।

सैकड़ों वर्षों के अन्याय, अत्याचार और गुलामी के कालखंड में भी हमारे और आपके पूर्वज सारे संकटों का सामना करते हुए भी अपने धर्म, संस्कृति और आस्था पर अडिग रहे, इसीलिए आप और मैं आज भी गर्व से स्वयं को सनातन धर्म (हिन्दू ) कह पा रहे हैं और अपनी आस्था का पालन कर पा रहे हैं। हम सबके पूर्वजों के प्रति हमें कृतज्ञ होना चाहिए। मैं उन सबको प्रणाम करता हूं।

मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का दिल्ली AIIMS में निधन

 

            राजू श्रीवास्तव दिल्ली के एक होटल में रुके थे और वहीं के जिम में वह वर्कआउट कर रहे थे। वर्कआउट के दौरान राजू की तबीयत बिगड़ गई थी और ट्रेडमिल पर गिर पड़े थे। राजू को फिर तुरंत एम्स में भर्ती कराया गया, जहां कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में उनका इलाज चल रहा था। राजू के करीबियों ने जानकारी दी थी कि उनको ब्रेन इंजरी हो गई थी। हार्ट अटैक के बाद गिरने से काफी देर तक दिमाग में ऑक्सीजन नहीं पहुंची थी। डॉक्टर्स ने बताया था कि उनको होश में आने में वक्त लग सकता है। इलाज के बीच उनकी बॉडी में कुछ मूवमेंट की रिपोर्ट्स भी थीं।

  • कॉलेज में महसूस हो चुका था कि वह अच्छे कॉमेडियन बन सकते हैं
  • अमिताभ बच्चन उनके पहले आदर्श थे और उनकी खूब मिमिक्री भी की
  • लालू यादव के सामने जब उनकी नकल उतारी तो वह भी खूब हंसेराजू श्रीवास्तव ने मुंबई में कुछ समय के लिए ऑटो भी चलाया
  • तेजाब, मैंने प्यार किया, बाजीगर, आमदानी अठन्नी खर्चा रुपैया जैसी फिल्मों में उनके रोल थे
  • 80 के दशक में कॉमेडियन बनने मुंबई पहुंचे राजू श्रीवास्तव के हुनर को बहुत देर से पहचान मिली

कोरल ‘पुरनूर’, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़/नयी दिल्ली  –  21 सितंबर :

            श्रीवास्तव की बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने की खबरें बनते-बनाते आखिरी खबर आ गई। बुधवार सुबह 10 बजे के करीब दिल्ली एम्स में उनका निधन हो गया। उमर 58 साल थी। दिल्ली में ही 10 अगस्त को एक्सरसाइज करते उन्हें हार्ट अटैक आया था। उसके बाद से ही एम्स में भर्ती थे। इलाज में पता चला था कि दिल के एक हिस्से में 100% ब्लॉकेज है।

                        पत्रकार विकास भदौरिया ने भी ट्वीट कर इस खबर की पुष्टि की है। उन्होंने लिखा, “एम्स से बुरी खबर आ रही है, राजू श्रीवास्तव का निधन हो गया है। प्रभु उन्हें श्रीचरणों में स्थान दे। ॐ शांति शांति शांति।”

            बता दें कि 10 अगस्त 2022 की सुबह एक्सरसाइज करते वक्त राजू श्रीवास्तव बेहोश होकर गिर गए थे। इसके बाद उन्हें एम्स लाया गया था। वहाँ डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके कारण उनका ब्रेन डैमेज हो गया और उन्हें एंजियोप्लास्टी करनी पड़ी।

            पिछले 10 साल में उनकी 3 बार एंजियोप्लास्टी हो चुकी थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके निधन के खबरें वायरल हुई थीं। इसको देखते हुए उनके परिजन और बॉलीवुड के पूर्व अभिनेता एवं महाभारत में भीष्म पितामह का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना ने तब इसका खंडन किया था। इतने दिनों तक मौत से लड़ने के बाद आज वो हार गए। सबको हँसाने वाले आज बहुतों को रुला गए।

 

छठ पूजा त्यौहार की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित

डेमोक्रेटिक फ्रंट संवाददाता, चण्डीगढ़ –  19 सितंबर  : 

            चण्डीगढ़ पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक में अगले माह आने वाले छठ पूजा त्यौहार की तैयारियों को लेकर एक बैठक आयोजित हुई जिसमें फ़ैसला लिया गया कि 30 अक्तूबर को सेक्टर 42 स्थित सन लेक पर हर साल की तरह ही महापर्व छठ पूजा त्यौहार को धूमधाम से मनाया जाएगा।

            संस्था के वरिष्ठ सदस्य  सुनील गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि घाट पर पहुचने वाले श्रद्धालुओं व व्रतियों के लिए सभी मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रशासन के साथ मिलकर पहले से पुख्ता इंतज़ाम किये जाने बारे में चर्चा हुई।

            बैठक में डीके सिंह, राजिंदर सिंह, डॉ. एसडी पांडे, यूके सिंह, विक्रम यादव, गोविन्द राव व भोला रॉय आदि भी शामिल रहे। 

पीएम नरेंद्र मोदी की दीर्घायु के लिए हुई कामना, भाजपा कार्यकर्ताओं ने हवन कराया बांटे फल

डेमोक्रेटिक फ्रंट संवाददाता, चंडीगढ़ – 17 सितंबर :

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनमदिन पर शनिवार 17 सितंबर को चंडीगढ़ शहर के सेक्टर 48 के सनातन धर्म मंदिर में भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ ने उनकी लंबी उम्र और दीर्घायु के लिय हवन किया।

          इतना ही नहीं सुबह से ही शहर के कई स्थानों पर प्रधानमंत्री के जनांदिन को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा राहे हैं। सैक्टर 48 के सनतानधर्म मंदिर में बड़ी संख्या में महिला और पुरुषों ने इकट्ठा हो कर एक हवन का आयोजन किया।  जहां पर प्रधान मंत्री की फोटो लगा कर पूरे रीति रिवाज से हवन कुंड में आहुति दी गयी और मंत्रौच्चारण के साथ प्रधान मंत्री मोदी की द्दिर्धायु मांगी गयी है।

            आज इस हवन में संयोजक  अजय सिंगला , सह संयोजक अजय कौशिक , सह संयोजक राजेश मित्तल , सह संयोजक श्रीमती पूजा बक्शी जी, मन्दिर के  प्रधान अग्रवाल जी , रत्न लाल जी और अन्य सदस्य  उपस्थित रहे।

मिथिला ऑटो यूनियन धूमधाम से मनाएगी विश्वकर्मा पूजा

महापौर व अरुण सूद होंगी मुख्य अतिथि

डेमोक्रेटिक फ्रंट संवाददाता, चण्डीगढ़ :

              मिथला ऑटो यूनियन के प्रधान त्रिगुण पासवान ने बताया कि 17 सितम्बर को भगवान विश्वकर्मा पूजा हर एक साल की भाँति इस साल भी बस अड्डा सेक्टर-43 में धूमधाम से मनाया जा रहा हैं।

              मुख्य अतिथि चंडीगढ़ नगर निगम कि महापौर श्रीमती सरबजीत कौर एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा अरुण सूद होंगे। वशिष्ट अतिथि सीनियर डिप्टी मेयर दलीप शर्मा, डिप्टी मेयर अनुप गुप्ता,भाजपा नेता देवन्द्र सिंह बबला, चंद्रशेखर, शशिशंकर तिवारी, अध्यक्ष, पूर्वांचल विकास महासंघ ट्राइसिटी, चंडीगढ़ होंगे। इस प्रोग्राम में सभी ऑटो यूनियन के सदस्य भगवान विश्वकर्मा जी कि विधिविधान से पूजा करके अपने कल्याण एवं समाज के कल्याण कि कामना करेंगे।

              इस मौके पर भोजपुरी,मैथिली एवं हिन्दी का भी भव्य प्रोग्राम होगा।  

Breaking News : ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज

ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन के मामले पर जिला जज  अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि मामला सुनने योग्य है। काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र-ज्ञानवापी परिसर छावनी में तब्दील है।  पढ़ें पल-पल का अपडेट

दोपहर दो बजे से अदालत की कार्यवाही शुरू होने वाली है। अभी कुछ देर पहले दोनों पक्षों के वकील भी कोर्ट परिसर के अंदर पहुंच चुके हैं। वादी महिलाएं भी कोर्ट पहुंच गई हैं। सभी ने अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी के चैंबर में भजन-कीर्तन किया।

  • जिला जज कोर्ट में आज के फैसले से तय हो जाएंगी कई बातें
  • देश की आजादी के वक्त ज्ञानवापी में मस्जिद थी या मंदिर
  • यहां प्‍लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्‍ट 1991 लागू होगा या फिर नहीं
  • प्रशासन अलर्ट, धारा 144 लागू, सोशल मीडिया पर भी नजर

डेमोक्रेटिक फ्रंट(ब्यूरो) वाराणसी – 12 सितंबर :

ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण में सोमवार का दिन बेहद अहम रहा। ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और विग्रहों के संरक्षण पर वाराणसी कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। जिला जज डॉ. अजय कृष्‍ण विश्‍वेश की अदालत ने इस याचिका पर आगे भी सुनवाई करने का फैसला लिया है। जज का फैसला आते ही कोर्ट परिसर हर हर महादेव के जयकारे से गूंज उठा। वकीलों ने भी जमकर नारे लगाए। आज दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। 

मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि ये फैसला न्यायोचित नहीं है। हम फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। जज साहब ने फैसला सांसद के कानून को दरकिनार कर दिया। ऊपरी अदालत के दरवाजे हमारे लिए खुले हैं। उन्‍होंने कहा कि न्यायपालिका आपकी है। आप सांसद के नियम को नही मानेंगे। सब लोग बिक गए हैं।

वाराणसी के पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने फैसले से पहले बताया था, ‘शहर के संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू है। शहर में हिंदू-मुस्लिमों की मिली-जुली आबादी वाले इलाके में पुलिस फोर्स तैनात है। पुलिस ने कुछ इलाकों में बीती रात से ही गश्त बढ़ा दी थी, ताकि आदेश के बाद कानून-व्यवस्था के हालात न बिगड़ें।’

फैसले के मद्देनजर पूरे शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया था। सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग की जा रही थी। जिला अदालत परिसर में खास चौकसी बरतते हुए बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड भी तैनात किया गया था।

पांच हिंदू महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मौजूद हिंदू देवी-देवताओं की पूजा की अनुमति मांगी थी। इन महिलाओं ने खासतौर पर श्रृंगार गौरी की हर दिन पूजा करने की इजाजत चाही थी। कोर्ट के आदेश पर मस्जिद में सर्वे भी किया गया था। सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि मस्जिद के तहखाने में शिवलिंग मौजूद है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे फव्वारा बताया था। केस में अब तक क्या हुआ, 3 पॉइंट्स में समझिए…

  • 18 अगस्त 2021 को 5 महिलाएं ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मां श्रृंगार गौरी, गणेश जी, हनुमान जी समेत परिसर में मौजूद अन्य देवताओं की रोजाना पूजा की इजाजत मांगते हुए कोर्ट पहुंची थीं। अभी यहां साल में एक बार ही पूजा होती है।
  • इन पांच याचिकाकर्ताओं का नेतृत्व दिल्ली की राखी सिंह कर रही हैं, बाकी चार महिलाएं सीता साहू, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और रेखा पाठक बनारस की हैं।
  • 26 अप्रैल 2022 को वाराणसी सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी और अन्य देव विग्रहों के सत्यापन के लिए वीडियोग्राफी और सर्वे का आदेश दिया था।
  • मान्यता है कि 1669 में औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर का एक हिस्सा तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि 14वीं सदी में जौनपुर के शर्की सुल्तान ने मंदिर को तुड़वाकर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी।
  • कुछ मान्यताओं के अनुसार अकबर ने 1585 में नए मजहब दीन-ए-इलाही के तहत विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी।
  • मस्जिद और विश्वनाथ मंदिर के बीच 10 फीट गहरा कुआं है, जिसे ज्ञानवापी कहा जाता है। इसी कुएं के नाम पर मस्जिद का नाम पड़ा। स्कंद पुराण में कहा गया है कि भगवान शिव ने स्वयं लिंगाभिषेक के लिए अपने त्रिशूल से ये कुआं बनाया था।
  • शिवजी ने यहीं अपनी पत्नी पार्वती को ज्ञान दिया था, इसलिए इस जगह का नाम ज्ञानवापी या ज्ञान का कुआं पड़ा। किंवदंतियों, आम जनमानस की मान्यताओं में यह कुआं सीधे पौराणिक काल से जुड़ता है।
  • मसाजिद कमेटी की जवाबी बहस 22 अगस्त से लगातार जारी है। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वर्ष 1936 में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ था। वर्ष 1944 के गजट में यह बात सामने आई थी कि ज्ञानवापी मस्जिद का नाम शाही मस्जिद आलमगीर है।
  • संपत्ति शहंशाह आलमगीर यानी औरंगजेब की थी। वक्फ करने वाले के तौर पर भी बादशाह आलमगीर का नाम दर्ज था। इस तरह से बादशाह औरंगजेब द्वारा 1400 साल पुराने शरई कानून के तहत वक्फ की गई (दान दी गई) संपत्ति पर वर्ष 1669 में मस्जिद बनी और तब से लेकर आज तक वहां नमाज पढ़ी जा रही है।
  • इसके अलावा, 1883-84 में अंग्रेजों के शासनकाल में जब बंदोबस्त लागू हुआ तो सर्वे हुआ और आराजी नंबर बनाया गया। आराजी नंबर 9130 में उस समय भी दिखाया गया था कि वहां मस्जिद है, कब्र है, कब्रिस्तान है, मजार है, कुआं है। पुराने मुकदमों में भी यह तय हो चुका है कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ की प्रॉपर्टी है।
  • सरकार भी इसे वक्फ प्रॉपर्टी मानती है, इसी वजह से काशी विश्वनाथ एक्ट में मस्जिद को नहीं लिया गया। वर्ष 2021 में मस्जिद और मंदिर प्रबंधन के बीच जमीन की अदला-बदली हुई, वह भी वक्फ प्रॉपर्टी मान कर ही की गई। इसलिए मां शृंगार गौरी का मुकदमा सिविल कोर्ट में सुनवाई योग्य नहीं है।

वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में बनी ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जारी विवाद वर्षों पुराना है। इन मंदिर-मस्जिद को लेकर 213 साल पहले दंगे भी हो चुके हैं। हालांकि, आजादी के बाद इस मुद्दे को लेकर कोई दंगा नहीं हुआ। ज्ञानवापी को हटाकर उसकी जमीन काशी विश्वनाथ मंदिर को सौंपने को लेकर दायर पहली याचिका अयोध्या में राम मंदिर मुद्दा उठने के बाद 1991 में दाखिल हुई थी। 

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष का दावा खारिज हो सकता है। अंजुमन इंतेजामिया प्रबंध समिति ने सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर करके कहा है कि ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराने वाला वाराणसी सिविल कोर्ट का आदेश स्पष्ट रूप से द प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट 1991 का उल्लंघन है। इसके बाद ज्ञानवापी विवाद की पूरी बहस इसी कानून के इर्द-गिर्द टिकी हुई है।

‘मैंने बचपन में एक बात सुनी थी। कबूतर जब बिल्ली को देखता है तो वह जानता है कि बिल्ली उसे खा जाएगी। बिल्ली को कबूतर बहुत स्वादिष्ट लगता है। कबूतर इतना भोला और नादान होता है कि वह सोचता है कि आंखें बंद कर लूंगा तो बिल्ली दिखेगी नहीं। इस तरह से बिल्ली उसको खा जाती है। 1947 की स्थिति में धार्मिक स्थलों को बनाए रखना, यानी कबूतर की तरह बिल्ली से आंखें मूंदना है।’ 9 सितंबर 1991 को लोकसभा में द प्लेसेज ऑफ वर्शिप बिल (उपासना स्थल विधेयक) पर बहस के दौरान यह बात भाजपा नेता उमा भारती ने कही थी।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद का भी ज्ञानवापी की तर्ज पर सर्वे कराने के लिए याचिका दाखिल की गई है।
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद का भी ज्ञानवापी की तर्ज पर सर्वे कराने के लिए याचिका दाखिल की गई है।

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब मथुरा में श्री कृष्ण जन्म भूमि के परिसर में स्थित मस्जिद के भी सर्वे कराए जाने की याचिका अदालत पहुंच गई है। उधर ताजमहल के भी शिव मंदिर तेजो महालया होने के दावे को लेकर याचिका दायर की गई है। इस बीच हिंदू संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में कुतुब मीनार के पास हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए इसका नाम बदलकर विष्णु स्तंभ किए जाने की मांग की। हालांकि, भारत में मंदिर-मस्जिद से जुड़ा विवाद नया नहीं है। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद की हुई, जो 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद थम गया। 

SVSU will encourage the youth to generate more ideas, startups, innovations as well as technology : Shri Raj Nehru

Mukesh Chouhan, Demokretic Front, Gurugram – August 24, 22 :

      Shri Vishwkarma Skill University with the collaboration of Gurugram University organized a programme on World Entrepreneurship Day on Wednesday at Govt College for Girls sector 14. In this programme the Chief Guest was Shri Satish Kumar from All India Co-Organizer (Swadeshi Jagran Manch), President of the program were Vice Chancellor of Shri Vishwakarma Skill University Shri Raj Nehru and Vice Chancellor of Gurugram University Prof. Dinesh Kumar.

      Hon’ble Vice Chancellor Shri Raj Nehru appreciated all the students and said the world has a  large number of great entrepreneurs who have made it to the records of running their businesses from a very young age. He expressed his confidence that SVSU will encourage the youth to generate more ideas, startups, innovations as well as technology which will surely leverage the economy of the country. Shri Satish Kumar encouraged all the students and entrepreneur. He said being highly populated or having a large number of young population is not a weakness but a great asset. Every youngster is capable of becoming a job provider rather than a job seeker, thus generating employment opportunities for others.

      Dean Academics Prof.  Jyoti Rana present the University Progress Report and Dr. Mukta Sandhu presented the report of Shri Guru Nanak Dev Centre for Excellence for innovative leadership and Entrepreneurship. Moreover, appreciation for recognition of Idea, Innovation, initiatives for creating employability and livelihood was given to Mr. Anoop Kumar for 3D Printing Project, Mr. Ankit Agarwal for Industrial Internet of Things and Ms Sonal Modi for IAS Academy. Registrar of SVSU Prof. R. S Rathore appreciated the Organizing committee for organizing this event and all the Industry Partners for being present. He said that skill plays the major role to become an Entrepreneur. During the Programme all the Deans, Chairpersons, Faculty and students of Shri Vishwakarma Skill University were present.

अखिलेश यादव, BJP पर किया हमला, बोले-सूद समेत वापस लेंगे ‘किला’

अखिलेश यादव ने कहा, “20 वर्ष पुराने मामले में सरकार के इशारे पर विधायक रमाकांत यादव को जेल में बंद किया गया। लगातार उन पर झूठे मुकदमे लादे जा रहे हैं और सरकार चाहती है कि वह जेल में रहें। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों से बचने के लिए भाजपा ऐसे काम कर रही है। जानबूझकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही विपक्ष के नेता आवाज न उठा सके इसके लिए ये लोग चिन्हित कर, झूठे मुकदमे लगाकर उन्हें जेल भेज रहे हैं।”

आजमगढ़ पहुंचे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साधा भाजपा पर निशाना। - Dainik Bhaskar
  • सपा विधायक रमाकांत यादव से मिलने अखिलेश यादव जिला कारागार पहुंचे
  • कहा, जनता पर भरोसा, 2024 में सूद सहित आजमगढ़ सीट को वापस लिया जाएगा

डेमोक्रेटिक फ्रंट, लखनऊ (ब्यूरो), आजमगढ – 22 अगस्त :

हत्या के प्रयास, जहरीली शराब कांड सहित अन्य मामले में जेल में निरुद्ध सपा विधायक रमाकांत यादव से मिलने सोमवार को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव जिला कारागार पहुंचे. 35 मिनट तक फुलपुर पवई से विधायक रमाकांत यादव से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “बीजेपी जानबूझकर समाजवादी पार्टी व विपक्ष के लोगों के पर मुकदमे लादे जा रही है। फर्जी मुकदमे लादकर बीजेपी वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी अभी से कर रही है। “

मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि 20 वर्ष पुराने मामले में सरकार के इशारे पर विधायक रमाकांत यादव को जेल में बंद किया गया. लगातार उन पर झूठे मुकदमे लादे जा रहे हैं और सरकार चाहती है कि वह जेल में रहें। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों से बचने के लिए भाजपा ऐसे काम कर रही है। जानबूझकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही विपक्ष के नेता आवाज न उठा सके इसके लिए ये लोग चिन्हित कर, झूठे मुकदमे लगाकर उन्हें जेल भेज रहे हैं।

ओम प्रकाश राजभर के साथ सपा का गठबंधन इतिहास रचेगा। भाजपा के लिए दरवाजा ओमप्रकाश राजभर ने खोला था, अब उसी दरवाजे को वो खुद ही बंद करेंगे। समाजवादी पार्टी उस दरवाजे पर लॉक लगाने का काम करेगी। आज जिस तरह से मऊ में ऐतिहासिक भीड़ उमड़ी उससे साफ दिख रहा है कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। बता दें, अखिलेश यादव मऊ जिले में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सभासपा) के 19वें स्थापना दिवस समारोह में विशाल जनसभा को संबोधित कर आजमगढ़ पहुंचे थे। दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे अखिलेश यादव ने पदाधिकारियों से मुलाकात भी की। बताया जा रहा है कि जिले के 130 मेधावियों को गुरुवार को लैपटॉप का वितरण करेंगे।

अखिलेश यादव ने आजमगढ़ जिले में न आने के सवाल पर कहा कि हमारे लिए आजमगढ़ व इटावा एक जैसा है। यह सरकार बनाने का चुनाव है। आजमगढ़ हमारे लिए नया नहीं है। पूर्वांचल की जनता अपने सम्मान को समझती है, और इस बार के विधानसभा के चुनाव में भाजपा का सफाया होगा।