एंकाउंटर का खोफ या कार्यवाई कि दहशत, योगिराज में हाथ उठा पैदल चल कर ठाणे मीन आत्मसमरपर्ण कर रहे गैंगस्टर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद ही अपराधियों को ललकारते हुए कहा था कि, अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा या तो अपराधी जेल में होंगे या या फिर अपराधी उत्तर प्रदेश से पलायन कर जाएं। अब हालात यह हैं कि पुलिस के लगातार दबाव एवं अन्य कानूनी कार्रवाई के डर से शुक्रवार को वांछित गैंगस्टर के तीन आरोपी मोमीन, इंतजार व मंगता निवासी गांव रामड़ा थाना कैराना पहुंचे और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

यूपी(ब्यूरो):

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बढ़ते अपराधों पर नकेल कसने के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। प्रदेश की पुलिस कुख्यात अपराधियों और उनके गिरोह के अन्य सहयोगियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। यही कारण है कि योगी सरकार के डर से राज्य के अधिकतर थानों से फरार अपराधी खुद ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं। ताजा मामला यूपी के शामली जिले का है।

शनिवार (24 जुलाई 2021) को शामली के तीन गैंगस्टर्स मोमीन पुत्र समसुदीन, इन्तजार पुत्र बशीर और मंगता पुत्र नूरहसन निवासी ग्राम रामडा पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी के डर से हाथ उठाकर थाने पहुँचे और आत्मसमर्पण कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सभी गैंगस्टर्स ने कहा कि वो अपराध से तौबा कर भविष्य में अपराध न करने की कसम खाते हैं। पुलिस अधीक्षक शामली सुकीर्ति माधव ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ थाना कैराना पर बलवा, हत्या का प्रयास के केस पहले से ही पंजीकृत हैं, जिन पर अंकुश लगाने के लिए आरोपितों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने कैराना कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट में वांछित चल रहे तीनों गैंगस्टरों को गिरफ्तार कर चालान कर दिया है।

आपराधिक इतिहास मोमीन
1. मु0अ0सं0 606/17 धारा 147/148/149/307/336/353 भादवि व 7 सीएलए एक्ट थाना कैराना।
2. मु0अ0सं0 66/21 धारा 2/3 गैगस्टर एक्ट थाना कैराना जनपद शामली।
आपराधिक इतिहास इन्तजार
1. मु0अ0सं0 606/17 धारा 147/148/149/307/336/353 भादवि व 7 सीएलए एक्ट थाना कैराना।
2. मु0अ0सं0 66/21 धारा 2/3 गैगस्टर एक्ट थाना कैराना जनपद शामली।
आपराधिक इतिहास मंगता
1. मु0अ0सं0 606/17 धारा- 147/148/149/307/336/353 भादवि व 7 सीएलए एक्ट थाना कैराना जनपद शामली।
2. मु0अ0सं0 531/16 धारा 354ख/323/504/506 भादवि थाना कैराना जनपद शामली।
3. मु0अ0स0 66/21 धारा 2/3 गैगस्टर एक्ट थाना कैराना जनपद शामली।

गौरतलब है कि योगी सरकार के कार्यकाल में गैंगस्टर अधिनियम के तहत कुल 15 अरब 74 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति को जब्त किया गया है। इसमें सर्वाधिक कार्रवाई जनवरी 2020 से अब तक की गई है। इस दौरान रिकॉर्ड कुल 13 अरब, 22 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति गैगेंस्टर अधिनियम के तहत जब्त की है।

दैनिक भास्कर और भारत टीवी के संस्थानों पर की गई छापामारी प्रेस की आजादी पर हमला है : अशोक कुमार

आज कवि कुमार विश्वास की यह पंक्तियाँ सहज ही स्मरण हो उठतीं हैं। भास्कर समूह एवं भारत टीवी चैनल पर आईटी विभाग की रेड मीडिया जगत में आक्रोश भरी सुरखियों के साथ चर्चा का विषय हैं। सभी की ज़ुबान पर एक ही बात कि अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कारवाई है यह रेड।

पंचकूला जर्नलिस्ट क्लब के प्रधान अशोक शर्मा भी सरकार की टाइमिंग पर आहात हैं। हर क्षेत्र में नाकाम मोदी सरकार आज इस काल के सबसे प्रखर स्तम्भ को आसान निशाना बना रही है। और दर्शा रही है की लीक से हटोगे तो भ्गटना पड़ेगा। अघोषित आपातकाल के जैसा महसूस हो रहा है।

पंचकूला जर्नलिस्ट क्लब आज दैनिक भास्कर और भारत टीवी के संस्थानों पर की गई छापामारी की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया है

भास्कर बहाना है, मीडिया निशाना है

केंद्र में किसान आंदोलन का कोई उचित समाधान ना दे पाने से इस मोर्चे पर मुंह की खाये केंद्र सरकार, बंगाल से भी मुंह की खा कर लौटी मोदी – शाह की जोड़ी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ पर पिल पड़ी और वहाँ भी कुछ हाथ नहीं लगा तो तिलमिलाई सरकार अपनी साख बचाने का प्रयास कर ही रही थी कि मानसून सत्र के एन पहले फोन टेपिंग का मामला सुर्खियों में आ गया। अब मोदी शाह आकंठ गुस्से मेन डूब गए और फिर जो लावा फूटा तो वह सबसे आसान शिकार मीडिया पर।

  • दैनिक भास्कर समूहों के सभी ऑफिसों पर पड़ रहे हैं आयकर विभाग के छापे
  • भोपाल स्थित ऑफिस पर सुबह से ही जारी है छापेमारी
  • अखबार मालिक के घर पर भी की जा रही है छापेमारी
  • न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक कर चोरी के मामले में जारी है छापेमारी

चंडीगढ़/नयी दिल्ली:

कुछ बोल के लब आज़ाद हैं तेरे

अभी अभी भारत समाचार चैनल लखनऊ में रेड।

आयकर विभाग ने कर चोरी के आरोपों में मीडिया समूह दैनिक भास्कर और भारत समाचार के विभिन्न शहरों में स्थित परिसरों पर गुरुवार को छापे मारे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि छापेमारी भास्कर समूह के  भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और कुछ अन्य स्थानों पर की गयी है। वहीं भारत समाचार के प्रमोटर्स और एडिटर-इन-चीफ के ठिकानों पर भी आयकर विभाग की तरफ से कार्रवाई की गयी है।

हालांकि अभी तक विभाग या उसके नीति निर्माण निकाय से किसी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है लेकिन आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई विभिन्न राज्यों में संचालित हिंदी मीडिया समूह के प्रमुखों के खिलाफ चल रही है। कांग्रेस नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर कहा कि आयकर विभाग के अधिकारी समूह के करीब छह परिसरों पर “मौजूद हैं”। इनमें राज्य की राजधानी भोपाल में प्रेस कॉम्प्लेक्स में उसका कार्यालय भी शामिल है। बताते चलें कि कोरोना संकट के दौरान दैनिक भास्कर की तरफ से कई ग्राउंड रिपोर्ट किए गए थे।

बताते चलें कि आयकर विभाग की तरफ से यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है। विपक्षी दल पेगासस जासूसी मामले को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं। मंगलवार को कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी पार्टियों ने संसद के दोनों सदनों में यह मुद्दा उठाते हुए कार्यवाही बाधित कर दिया था। विपक्षी सदस्यों ने पत्रकारों, नेताओं, मंत्रियों, न्यायाधीशों और अन्य लोगों की इजराइली पेगासस स्पाईवेयर से जासूसी कराए जाने के आरोपों पर दोनों सदनों में जमकर विरोध जताया था।

शायर मुनव्वर राना की बेटी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर लगाया दुर्व्यवहार का आरोप

 प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उरूसा के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। उरूसा पार्टी की सम्मानित पदाधिकारी हैं और उनका अपमान करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। लल्लू ने कहा कि बल्कि खुद उन्होंने ही प्रियंका से उरूसा का परिचय कराया था। उरूसा खुद को जहां से हटाए जाने की बात कर रही हैं वहां प्रियंका के अलावा किसी और को नहीं बैठना था।

रमन विज, नयी दिल्ली -16 जुलाई :

 उत्तर प्रदेश महिला कांग्रेस की मध्य जोन इकाई की उपाध्यक्ष और विवादित शायर मुनव्वर राना की बेटी उरूसा राना ने पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू पर शुक्रवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के लखनऊ में धरने के दौरान दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया।

    लल्लू ने इन आरोपों को गलत बताया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उरूसा के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। उरूसा पार्टी की सम्मानित पदाधिकारी हैं और उनका अपमान करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। लल्लू ने कहा कि बल्कि खुद उन्होंने ही प्रियंका से उरूसा का परिचय कराया था। उरूसा खुद को जहां से हटाए जाने की बात कर रही हैं वहां प्रियंका के अलावा किसी और को नहीं बैठना था।

    उरूसा ने आरोप लगाया कि जब वह गांधी प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन से पहले प्रियंका का अभिवादन करने उनके नजदीक पहुंचीं तो लल्लू ने उन्हें बेइज्जत करके वहां से चले जाने को कहा।

    उन्होंने कहा कि जब लखनऊ में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन की बारी थी तब लल्लू उनसे सहयोग मांगते थे। आज जिस तरह उन्होंने बर्ताव किया उससे वह बहुत आहत हैं।

    उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उरूसा के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। उरूसा पार्टी के सम्मानित पदाधिकारी हैं और उनका अपमान करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

    लल्लू ने कहा कि बल्कि खुद उन्होंने ही प्रियंका से उरूसा का परिचय कराया था। उरूसा खुद को जहां से हटाए जाने की बात कर रही है वहां प्रियंका के अलावा किसी और को नहीं बैठना था।

‘देश में जंग होगी युद्ध होगा: राकेश टिकैत

राकेश टिकैत ने कहा किसान तो वापसी आएगा नहीं किसान वहीं रहेगा और सरकार को बातचीत करनी चाहिए। हमने 5 सितंबर की एक बड़ी पंचायत बुलाई है। आगे का निर्णय हम उसमें लेंगे 2 महीने का हमने सरकार को वक्त दिया है। अपना फैसला सरकार भी कर लिया और किसान भी कर ले। राकेश टिकैत ने कहा है ऐसा लग रहा है देश में जंग होगी युद्ध होगा।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

पश्चिम बंगाल में खेला हुआ क्या यूपी में भी खेला होगा इस पर राकेश टिकैत ने कहा उत्तर प्रदेश में भी खेला होगा अगर खेला करवाना चाहेंगे तो खेला होगा। इनके पास 2 महीने का टाइम है 5 सितंबर कि हमारी पंचायत है उससे पहले पहले बातचीत करके हमारा समाधान कर दें नहीं तो इनका खेला जरूर होगा। तो वहीं पीलीभीत में राकेश टिकैट ने कहा कि बीती 26 जनवरी को लाल किला पर जो घटना हुई उसकी जांच होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि जनसंख्या कानून सही है, लेकिन यह राष्ट्रीय स्तर पर लागू होना चाहिए। टिकैट निजी कार्यक्रम में पीलीभीत पहुंचे थेय़ कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के कई नेता सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन तब तक चलेगा जब तक सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेती।

टिकैत ने कहा कि सरकार जो कानून लाई है, इससे और ज्यादा नुकसान होगा। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार कानून वापसी ले और किसानों से बैठ कर बात करे, नहीं तो ये आंदोलन जारी रहेगा। किसानों में गर्माहट है। किसानों के धरने पर बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि वो शांतिपूर्ण तरिके से धरना दे रहे, इसलिए सरकार नही सुन रही है। क्रांतिकारी तरीके से धरना दें तो सुन लेगी।

किसानों के संसद का घेराव करने पर राकेश टिकैत ने कहा किसान संसद भवन का रास्ता जानते हैं। अभी 22 तारीख से 200 लोग वहाँ जाएँगे। जब तक पार्लियामेंट चलेगी, तब तक हर रोज 200 लोग जाएँगे। अब जब भी किसान जाएगा, तो लाल किला नहीं संसद भवन ही जाएगा। डीटीसी बस से टिकट लेकर जाएगा।

2022 के चुनाव को लेकर राकेश टिकैत ने कहा, “हमारी क्या तैयारी हो, हम एक ही बार बताएँगे। हम आदेश देंगे, वो लग जाएँगे।” ट्रैक्टर अभियान पर राकेश टिकैत ने कहा, “हमने यह कहा कि ट्रैक्टर पर रंग रोगन करा लो बढ़िया सा बंपर लगवा लो, क्योंकि दिल्ली आना जाना तो लगा रहेगा।”

पश्चिम बंगाल में खेला हुआ क्या यूपी में भी ‘खेला’ होगा, इस पर राकेश टिकैत ने कहा, “उत्तर प्रदेश में भी ‘खेला’ होगा अगर ‘खेला’ करवाना चाहेंगे तो ‘खेला’ होगा। इनके पास 2 महीने का टाइम है। 5 सितंबर को हमारी पंचायत है, उससे पहले पहले बातचीत करके हमारा समाधान कर दें नहीं तो इनका ‘खेला’ जरूर होगा।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार से कहा था कि महीनों से चल रहे किसान आंदोलन को या तो बातचीत से खत्म किया जाए या गोलियों से। टिकैत ने कहा था कि किसान बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना किसी शर्त के। टिकैत ने कहा था कि सरकार चाहती है कि किसान उससे सशर्त बातचीत करे लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि किसान पिछले 8 महीनों से सरकार की बात मानने के लिए प्रदर्शन में नहीं बैठे हैं।

इससे पहले राकेश टिकैत के रोने की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल किए गए थे। टिकैत के रोने से 2 दिन पहले गणतंत्र दिवस (जनवरी 26, 2021) के दिन दिल्ली की ‘ट्रैक्टर रैली’ में जम कर हिंसा हुई थी।

मीडिया पोर्टल ‘Kreatey’ पर प्रकाशित एक खबर के अनुसार, राकेश टिकैत के रोने से पहले खालिस्तानियों ने टेंट के भीतर ही उनकी पिटाई की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कुछ कट्टर सिखों ने उन्हें थप्पड़ और लातों से तो मारा ही था, साथ ही उनसे पैसे वापस लेने की भी धमकी दी थी। जबकि राकेश टिकैत ने रोते हुए दावा किया था कि प्रशासन किसानों का दमन कर रहा है और उनका आत्महत्या करने का मन कर रहा है।

अखिलेश के बाद मायावती ने आतंकियों की गिरफ्तारी पर राजनीति चमकाई

अखिलेश यादव ने अलकायदा आतंकियों की गिरफ़्तारी पर उन्होंने कहा कि वो न तो यूपी पुलिस और न ही भाजपा की सरकार पर भरोसा कर सकते हैं। बता दें कि मैंगो बेल्ट काकोरी के एक मकान से ATS ने मसरुद्दीन और मिनहाज अहमद नामक दो आतंकियों को दबोचा। ये आतंकी देश के कई हिस्सों में बम ब्लास्ट की योजना बना रहे थे, जिसमें मानव-बम से हमले भी शामिल थे। जहाँ अहमद दुबग्गा का निवासी है, मसरुद्दीन मड़ियाँव में रहता था।

  • यूपी एटीएस और पुलिस ने अलकायदा के दो संदिग्ध आतंकियों को किया गिरफ्तार
  • अखिलेश यादव ने उठाए सवाल की यूपी पुलिस पर नहीं है भरोसा
  • अब मायावती ने भी खड़े किए सवाल, बोलीं- अब तक बेखबर क्यों रही पुलिस
  • मायावती ने कहा कि आतंकी पकड़े जाने की आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए

लखनऊ/दिल्ली:

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी पर कहा कि इसकी आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर दावा सही है तो यह गंभीर मामला है और कार्रवाई जरूर होनी चाहिए।

‘..आड़ में न हो राजनीति’
मायावती ने ट्वीट किया, ‘यूपी पुलिस का लखनऊ में आतंकी साजिश का भंडाफोड़ करने व इस मामले में गिरफ्तार दो लोगों के तार अलकायदा से जुड़े होने का दावा अगर सही है तो यह गंभीर मामला है। इस पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए वरना इसकी आड़ में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही है।’

भारत से की जा रही थीं भर्तियां

ADG प्रशांत कुमार ने इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी देते हुए कहा, उम्र-अल-मंदी द्वारा अलकायदा  में इंडिया से भर्ती की जा रही थीं। यहां कुछ जिहादी लोगों को चिन्हित किया गया था. लखनऊ में मॉडल खड़ा करने की तैयारी में ये लोग लगे हुए थे। मॉडल के प्रमुख सदस्य मसरुद्दीन और शकील बड़ी साजिश रच रहे थे। एडीजी के मुताबिक 15 अगस्त से पहले उत्तर प्रदेश में विस्फोट (Blast) करने की साजिश रची जा रही थी।

कैसे हत्थे चढ़े आतंकी

यूपी एटीएस की टीम ठाकुरगंज इलाके के फरीदीपुर में पहुंची. वहां पर दो घरों मे सर्च ऑपरेशन किया गया. यूपी एटीएस के साथ लोकल पुलिस भी रेड में शामिल रही. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आसपास के इलाकों में भी पुलिस तैनात की गई थी।  सूत्रों के मुताबिक छोटे ब्लास्ट की वजह से UP-ATS को इन आतंकियों के बारे में सुराग मिला। आशंका है कि इलाके में कुछ और आतंकी भी छिपे हो सकते हैं। आतंकियों की गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर जम्मू-कश्मीर के पुलिस अफसरों ने भी यूपी पुलिस से संपर्क साधा है। इधर यूपी ATS का सर्च ऑपरेशन जारी है।

अखिलेश यादव ने अलकायदा आतंकियों की गिरफ़्तारी पर उन्होंने कहा कि वो न तो यूपी पुलिस और न ही भाजपा की सरकार पर भरोसा कर सकते हैं। बता दें कि मैंगो बेल्ट काकोरी के एक मकान से ATS ने मसरुद्दीन और मिनहाज अहमद नामक दो आतंकियों को दबोचा। ये आतंकी देश के कई हिस्सों में बम ब्लास्ट की योजना बना रहे थे, जिसमें मानव-बम से हमले भी शामिल थे। जहाँ अहमद दुबग्गा का निवासी है, मसरुद्दीन मड़ियाँव में रहता था।

इससे पहले राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पश्चिम बंगाल और केरल में अलकायदा के मॉड्यूल का खुलासा किया था। केरल के एर्नाकुलम और पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से इन आतंकियों की गिरफ़्तारी हुई थी। ये लोग कोच्चि नौसेना बेस और शिपयार्ड्स को निशाना बनाने वाले थे। बिहार पुलिस भी लखनऊ में अलकायदा आतंकियों की गिरफ़्तारी के बाद अलर्ट पर है। देश के कई हिस्सों में अलकायदा के स्लीपर सेल मौजूद हैं, इनकी फंडिंग पर रोक लगा कर उनके नेटवर्क को ध्वस्त करना मुख्य चुनौती है।

एक भाजपा सांसद के अलावा कई अन्य भाजपा नेता इन आतंकियों के निशाने पर थे। आसपास के घरों में इन आतंकियों के साथियों के ठिकाने हो सकते हैं, इसीलिए उनकी भी तलाशी हो रही है। सीरियल ब्लास्ट की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और अफगानिस्तान में इस पर ‘रिसर्च’ हुआ था। आसपास के 500 मीटर के दायरे में सारे घरों को खाली करा लिया गया। जल्द ही कई और खुलासे होने की संभावना है।

कश्मीर से उत्तराखंड तक बारिश का कहर

हिमाचल प्रदेश में मानसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए रविवार का दिन शानदार खबर लेकर आया है जहां कई जगहों पर खूब बारिश हुई। लेकिन कई जगहों पर इस कदर तेज बारिश हुई कि तबाही जैसे हालात पैदा हो गए। राज्य के प्रसिद्ध पर्यटन भागसू में रविवार को बादल फट गया जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए हैं और सड़क पर खड़ी गाड़ियां ऐसे बहने लगी मानों ताश के पत्ते बह रहे हों। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि भारी बारिश के बाद सड़कों पर बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं और लोग घरों के अंदर नजर आए।

  • राजस्थान में आकाशीय बिजली गिरने से हुई मौतों पर पीएम मोदी ने दुख जताया।
  • राजस्थान के अलावा आकाशीय बिजली ने यूपी में भी तांडव मचाया है। अलग-अलग जिलों में हुई घटनाओं में करीब 40 लोगों की मौत हो गई।
  • जयपुर में आमेर किले के पास वॉच टावर पर सेल्फी ले रहे लोगों पर गिरी बिजली, 11 की मौत
  • राजस्थान पर टूटा आकाशीय बिजली का कहर, 7 बच्चों सहित 20 से ज्यादा लोगों की मौत, 21 घायल
  • खराब मौसम के बीच बिजली गिरने से उत्तर प्रदेश में कई लोगों की मौत

चण्डीगढ़/जम्मू/हिमाचल/मोहिंदर सिंह द्वारा इनपुट से:

मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 13 जुलाई को और 14 से 16 जुलाई तक भारी बारिश हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कांगड़ा जिले में सभी विभागों के जिले के अधिकारियों को अलर्ट पर रहने का आदेश दिया गया है।

करीब एक महीने तक शांत रहा मानसून दोबारा एक्टिव हो गया है। राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में एक-दो दिन से रुक-रुककर बारिश जारी है तो मध्य प्रदेश में 17 जुलाई से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार के 14 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां 7.5 से 15 मिमी तक बारिश हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में और जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की घटना सामने आई है। शिमला सहित कई जिलों में रविवार रात से भारी बारिश हो रही है। इस कारण नदी-नाले उफान पर हैं। कई जगह बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। कुल्लू की सरवरी नदी भी उफान पर है। इससे किनारे पर बसी झुग्गी बस्तियों पर खतरा पैदा हो गया है।

नदी का पानी झुग्गी बस्ती के बीच में बह रहा है। लोगों ने अपनी झुग्गियां खाली करनी शुरू कर दी हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। शिमला में भारी बारिश के बाद झाकरी और रामपुर से गुजरने वाला नेशनल हाईवे ब्लॉक हो गया है।

उधर, सेंट्रल कश्मीर के गांदरबल में रविवार देर रात बादल फटने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। घरों में पानी घुस गया है। कई दुकानें और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। घटना के बाद J&K प्रशासन ने रात में ही राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया। प्रशासन का कहना है कि हालात फिलहाल काबू में हैं।

PM मोदी द्वारा मुश्किल के इस क्षण में हिमाचल प्रदेश को प्रदान किए जा रहे सहयोग के लिए समस्त प्रदेशवासियों की ओर से आभार। हिमाचल में भारी बारिश के कारण पेश आई प्राकृतिक आपदा में प्रधानमंत्री जी का सहारा मिलना सभी प्रदेशवासियों के लिए राहत का विषय है:हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री

डिजिटल प्लेटफॉर्म रेलवे के प्लेटफॉर्म नहीं हैं, ये अनियंत्रित हो सकते हैं – उच्चतम न्यायालय

फरवरी 2020 के दिल्ली दंगे के मामले में दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सौहार्द समिति ने फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और एमडी अजीत मोहन को समन भेजा है। समिति ने पिछले साल 10 और 18 सितंबर को मोहन को समन भेज उन्हें अपने सामने पेश होने को कहा है। समिति ने यह समन दंगे के दौरान कथित भड़काऊ भाषणों के फैलने में उसकी भूमिका की जांच के सिलसिले में भेजा है। फेसबुक ने समन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। उसी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये तल्ख टिप्पणियां कीं और याचिका को रद्द कर दिया। हालांकि, पिछले साल 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक को राहत देते हुए दिल्ली विधानसभा की समिति को उसके खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया था।

  • दिल्ली विधानसभा की एक समिति की तरफ से समन को चुनौती देने वाली फेसबुक की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज
  • इस दौरान कोर्ट ने कुछ तल्ख टिप्पणियां भी की, कहा- डिजिटल प्लेटफॉर्म रेलवे के प्लेटफॉर्म नहीं हैं, ये अनियंत्रित हो सकते हैं
  • कोर्ट ने कहा कि दुनियाभर में सोशल मीडिया मैनिपुलेशन से चुनाव और वोटिंग प्रक्रिया के लिए खतरा पैदा हो रहा है
  • दरअसल विधानसभा की शांति एवं सौहार्द समिति ने 2020 के दिल्ली दंगों में फेसबुक की कथित भूमिका को लेकर उसे समन किया है

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय उस बेंच की है जिसके सामने फेसबुक ने दिल्ली विधानसभा की शांति और सामंजस्य कमेटी (Peace and Harmony Committee) से मिले एक समन को रद्द करने की सिफारिश की थी।

कमेटी ने फेसबुक को यह समन 2020 में हुए दिल्ली दंगों के परिप्रेक्ष्य में उसकी भूमिका को लेकर भेजा था। समन में कमेटी ने फेसबुक के प्रबंध निदेशक को उसके समक्ष उपस्थित होकर इस आरोप पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा था कि; फेसबुक दंगों के दौरान हिंसा को भड़काने वाली पोस्ट को नियंत्रित करने में विफल रहा।

न्यायाधीशों ने समन को रद्द करने से इनकार करते हुए आगे अपनी टिप्पणी में कहा, “अपने यूजर द्वारा पोस्ट किए संदेश या सूचना को लेकर फेसबुक की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। उसकी भूमिका इतनी भी सरल नहीं है कि वो अपने मंच पर पोस्ट किए जाने वाली सूचनाओं से खुद को दूर रख सके।”

बेंच ने अपनी टिप्पणी में आगे कहा, “देश की राजधानी ऐसे दंगे फिर देखना नहीं चाहती और इसलिए फेसबुक की भूमिका पर विचार होना ही चाहिए।” न्यायालय ने इस विषय पर विधानसभा की कमेटी द्वारा व्यक्त की गई चिंता को जायज़ ठहराते हुए कहा, “कमेटी की चिंता को केवल इसलिए दरकिनार नहीं किया जा सकता क्योंकि विधानसभा स्थानीय प्रशासन और विधि निर्माण के लिए है।”

न्यायालय की एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी के अनुसार, “फेसबुक का यह तर्क मान लेना अब किसी के लिए भी संभव नहीं है कि वह प्रोग्रामिंग और एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके यूजर को उसके व्यक्तिगत पसंद के हिसाब से कंटेंट नहीं दिखाता।” न्यायालय ने अन्य देशों में फेसबुक की भूमिका पर भी बात की और उसे याद दिलाया कि म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों में सामाजिक और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने में सोशल मीडिया मंचों की क्या भूमिका रही है और इसके लिए उन्हें वहाँ किन समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

इसके अलावा न्यायालय ने लोकतंत्र में चुनाव और उससे सम्बंधित प्रक्रियाओं को प्रभावित करने में सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक की भूमिका पर बात करते हुए कहा, “आज लोकतांत्रिक सरकार के चुनाव की प्रक्रिया अर्थात मतदान को सोशल मीडिया द्वारा किए जा रहे हस्तक्षेप के कारण बहुत बड़ा खतरा है और इसकी वजह से फेसबुक जैसे सोशल मीडिया मंचों की भूमिका और उनकी बढ़ती ताकत पर सार्वजनिक बहस स्वाभाविक है। न्यायालय ने फेसबुक को यह भी याद दिलाया कि उसके जैसे सोशल मीडिया मंचों के लिए भारत एक बड़ा बाजार है पर इन मंचों को भी अपनी भूमिका का ख्याल रखना पड़ेगा।”

उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई ये टिप्पणियाँ मेरे विचार से सही समय पर आई हैं। केवल भारत ही नहीं, विश्व के अन्य लोकतांत्रिक देशों में चुनावी प्रक्रिया तथा अन्य विषयों पर सोशल मीडिया मंचों, खासकर फेसबुक, ट्विटर और गूगल की भूमिका को लेकर न केवल बहस होती रही है बल्कि इन लोकतांत्रिक देशों में कई बार सरकार या अन्य संस्थाओं द्वारा बनाई गई कमेटियों के सामने इन कंपनियों के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों से विस्तृत रूप से सवाल किए गए हैं। साथ ही पिछले तीन-चार वर्षों में तमाम देशों ने अपने हितों की रक्षा के लिए कानून पर विचार भी किए और उनका क्रियान्वन भी किया है। फ्रांस के साथ ही अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस विषय पर हाल के दिनों में मुखर रहे हैं।

हमारे देश में भी केंद्र सरकार ने नए आई टी नियम बनाकर इन कंपनियों की भूमिका की निगरानी और उन्हें जिम्मेदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है पर अभी तक इन कंपनियों की ओर से इन नियमों के पालन की बात पर बार-बार केवल बहाने बनाए गए हैं। ट्विटर एक तरह से सरकार के सामने खड़ा हो गया है, कभी इस बहाने कि; उस पर केवल अमेरिकी कानून और कंपनी की नीतियाँ ही लागू हो सकती हैं तो कभी यह कहते हुए कि वह सरकार के साथ बात कर रहा है।

इस विषय में दिल्ली उच्च न्यायलय की ताज़ी टिप्पणी सबसे महत्वपूर्ण है जिसमें न्यायालय ने ट्विटर को किसी भी तरह की कानूनी सुरक्षा देने से मना करते हुए यह कहा कि उसे भारतीय कानूनों का पालन करना ही होगा और अभी तक वह अपनी इन जिम्मेदारियों से कन्नी काटता रहा है। ऐसे में सरकार अपनी तरफ से कार्रवाई कर सकती है।

उच्चतम न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से आई टिप्पणियाँ यह साफ़ करती हैं कि न्यायालय भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में इन तकनीकी कंपनियों की भूमिका को लेकर न केवल चिंतित है बल्कि सतर्क भी है। साथ ही दुनिया के अन्य देशों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर देश, प्रशासन और नागरिकों में जागरूकता भी बढ़ रही है।

यह इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पिछले दो-तीन वर्षों में भारतीय लोकतंत्र को किसी न किसी रूप में प्रभावित करने की बाहरी शक्तियों की मंशा की चर्चा सार्वजनिक तौर पर होती रही है। साथ ही अगले वर्ष कुछ महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव होने वाले हैं जिनका परिणाम अगले लोकसभा चुनावों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। सरकार, प्रशासन और न्यायलय की अभी तक की भूमिका संतोषप्रद रही है और आशा है कि आनेवाले समय में ये संस्थाएंँ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह और प्रभावशाली ढंग से करेंगी।

रामभक्त सेनानियों के नाम पर होंगी यूपी में सड़कें

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 से पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ा ऐलान किया है। अयोध्या में कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि 1990 में अयोध्या में मारे गये कारसेवकों के नाम पर प्रदेश में सड़कों का निर्माण किया जाएगा। तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव पर निशाना साधते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि कारसेवक अयोध्या में रामलला के ‘दर्शन’ चाहते थे। लेकिन, तत्कालीन सपा सरकार ने निहत्थे भगवान राम भक्तों पर गोलियां चलाई थीं। कई लोग मारे गए। आज, मैं घोषणा करता हूं कि ऐसे सभी कारसेवकों के नाम पर यूपी में सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

  • केशव मौर्य ने ऐलान किया है कि 1990 फायरिंग में मारे गए कारसेवकों के नाम पर सड़कें बनवाई जाएगी
  • केशव मौर्य ने कहा कि कारसेवक भगवान राम के दर्शन करना चाहते थे लेकिन उन पर गोलियां चलवाई गई
  • कैशव मौर्य ने कहा कि इन सड़कों पर स्मारक पट्टिका भी लगाई जाएगी, कारसेवकों के नाम और तस्वीर होगी

सेमोक्रेटिकफ्रंट॰कॉम स्टाफ:

शायद ही कोई ऐसा हो जिन्हें वे रामभक्त याद न हों, जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया। 2 नवंबर 1990 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर की माँग कर रहे हजारों कारसेवकों पर गोलियाँ चलाई थीं। अब योगी आदित्यनाथ की सरकार ने घोषणा की है कि पुलिस की गोलीबारी में वीरगति प्राप्त हुए कारसेवकों के नाम पर यूपी में सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

यूपी के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार (06 जुलाई 2021) को अयोध्या की यात्रा के दौरान कहा, “1990 में कारसेवक अयोध्या आए थे और रामलला के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार ने निहत्थे रामभक्तों पर गोलियाँ चलवा दी थीं। इनमें कई लोगों की मृत्यु हो गई थी।” डेप्युटी सीएम मौर्य ने कहा कि यूपी सरकार ने इन सभी कारसेवकों के नाम पर उत्तर प्रदेश की सड़कों के नामकरण का निर्णय लिया है। योगी सरकार इसके पहले कोठारी बंधुओं के नाम पर अयोध्या में सड़क के नामकरण की घोषणा कर चुकी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, योगी सरकार द्वारा इन कारसेवकों के सम्मान में सड़कों का नाम ‘बलिदानी रामभक्त मार्ग’ रखा जाएगा और ये सड़कें वीरगति प्राप्त करने वाले कारसेवकों के घर की ओर जाएँगी। शिलान्यास पट्टिका पर उन कारसेवकों का नाम और उनकी तस्वीर भी लगाई जाएगी। इसके अलावा, डेप्युटी सीएम मौर्य ने यह भी बताया कि देश के दुश्मनों से लड़ते हुए अपने जीवन का बलिदान करने वाले सेना के जवानों और पुलिसकर्मियों के सम्मान में राज्य में जय हिन्द वीर पथ का निर्माण किया जाएगा।

2 नवंबर 1990, रामभक्तों का नरसंहार

2 नवंबर 1990 को हजारों की संख्या में कारसेवक अयोध्या में इकट्ठा हुए थे। एक समूह का नेतृत्व बजरंग दल के तत्कालीन नेता विनय कटियार कर रहे थे। इन कारसेवकों में कोठारी बंधु भी शामिल थे। इससे पहले कि ये कारसेवक आगे बढ़ते, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद कारसेवक विरोध प्रदर्शन करते हुए हनुमानगढ़ी के पास बैठ गए और भजन-कीर्तन करने लगे।

यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश के बाद यूपी पुलिस ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे इन कारसेवकों पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। पुलिस की गोली लगने से कई कारसेवक उसी समय वीरगति को प्राप्त हुए। पुलिस कार्रवाई के बाद मची भगदड़ में सरयू ब्रिज पर भी कई लोगों की जान चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कोठारी बंधु, जिन्होंने विवादित बाबरी ढाँचे पर भगवा लहराया था, पुलिस की वीभत्स बर्बरता का शिकार हुए थे। कोठारी बंधुओं के सिर और गले में गोलियाँ मारी गई थीं।

हालाँकि, सरकार के आँकड़ों के अनुसार पुलिस की इस कार्रवाई में 16 कारसेवकों की मौत हुई थी लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा थी। कई रिपोर्ट में बताया गया था कि उस दौरान कई कारसेवकों की लाशों को अनजान जगहों पर जला दिया गया था और कई लाशें सरयू नदी में फेंक दी गई थीं। 2019 में एक निजी टीवी चैनल के स्टिंग में यह खुलासा किया गया था कि कई हिंदुओं को अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हुआ था, क्योंकि जलाने के स्थान पर इन कारसेवकों के शवों को दफना दिया गया था।

मुन्नवर राणा के बेटे ने चलवाई खुद पर गोली, अब फरार

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में मुनव्वर राणा के बेटे तबरेज राणा पर हुई फायरिंग मामले में पुलिस ने शुक्रवार को (जुलाई 2, 2021) बड़ा खुलासा किया। पुलिस की छानबीन में पता चला कि तबरेज ने अपने चाचा और उनके बेटों को फँसाने के लिए खुद के ऊपर अपने दोस्तों से हमला करवाया और बाद में झूठा आरोप लगाते हुए एफआईआर करवा दी। अब इस मामले में पुलिस मुन्नवर राणा की भूमिका की भी जाँच कर रही है।

  • शायर मुनव्वर राना के बेटे तबरेज राना पर रायबरेली में हुई थी फायरिंग
  • पुलिस की जांच में पता चला कि तबरेज ने ही रची थी हमले की साजिश
  • रायबरेली पुलिस ने 4 को किया गिरफ्तार, बाइक और असलहा बरामद
  • सगे भाई की संपत्ति हड़पने और चुनाव लड़ने के लिए साजिश का शक

उत्तरप्रदेश((ब्यूरो):

मशहूर शायर मुनव्वर राना के बेटे पर हमले के मामले में नया मोड़ आ गया है। रायबरेली जिले के त्रिपुला चौराहे के पास मुनव्वर के बेटे तबरेज राना की कार पर बाइक सवार दो नकाबपोशों ने फायरिंग की थी। घटना 28 जून की थी। इस मामले में चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। रायबरेली के एसपी श्लोक कुमार ने मीडिया को बताया कि अपने चाचा से चल रहे संपत्ति विवाद में फंसाने के लिए मुनव्वर राना के बेटे ने खुद पर गोली चलवाने की प्लानिंग की थी। फिलहाल मुनव्वर का बेटा तबरेज फरार है और उसकी तलाश में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं।

आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल बाइक, असलहे और मोबाइल जब्त किए गए हैं। पुलिस ने हलीम, सुल्तान, सत्येंद्र और शुभम नाम के चार युवकों को गिरफ्तार किया है। सत्येंद्र और शुभम ने 28 जून की शाम को त्रिपुला चौराहे के पास पेट्रोल पंप से बाहर निकल रही एक कार पर फायरिंग की थी। इसके बाद बाइक सवार दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। यह कार शायर मुनव्वर राना के पुत्र तबरेज राना की थी। फायरिंग के वक्त तबरेज कार में मौजूद थे। गोली चलने की सूचना उन्होंने तत्काल पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू की। तबरेज ने अपने चाचा और चचेरे भाइयों पर हमले का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी। इस बीच लखनऊ में डीजीपी मुकुल गोयल से मुलाकात के लिए मुनव्वर राना की दो बेटियों सिग्नेचर बिल्डिंग पहुंचीं। रायबरेली पुलिस की शिकायत लेकर दोनों वहां पहुंचीं लेकिन डीजीपी से मुलाकात नहीं हो सकी है।

पूरा मामला सम्पत्ति विवाद से जुड़ा है। तबरेज अपने चाचा पर दबाव बनाना चाहता था। लेकिन केस उलटा हो गया। बाद में पुलिस ने तबरेज को पकड़ने के लिए गुरुवार आधी रात लखनऊ और रायबरेली में छापेमारी की। साथ ही उसके दोनों शूटर दोस्तों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में अब तक 4 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

इस बीच मुनव्वर राणा की बेटी ने जहाँ पुलिस पर अभद्रता का आरोप लगाया, वहीं खुद शायर मुनव्वर राणा ने सारे सबूतों के बावजूद पुलिस को दोषी दिखाना चाहा। उन्होंने कहा कि केस को बिकरु कांड बनाने की कोशिश चल रही है। इन हालात में वे मर जाते हैं तो इसके लिए पुलिस जिम्मेदार होगी। मुनव्वर ने तंज कसते हुए कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी है कि उन्होंने तबरेज को पैदा किया।

4 गिरफ्तारी

रायबरेली पुलिस ने इस केस को फर्जी करार दिया है। वहीं एसपी ने बताया कि तबरेज पर हमले की प्लानिंग होर्डिंग लगाने वाले हलीम घोसी और सुल्तान ने बनाई थी। आपराधिक रिकॉर्ड वाले -सत्येंद्र त्रिपाठी और शुभम सरकार ने तबरेज की कार पर गोली चलाई थी। इन चारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। चारों ने अपना गुनाह कबूल भी कर लिया है उन्होंने बताया कि मुनव्वर राना का बेटा तबरेज फरार है उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

रायबरेली पुलिस ने जारी की वीडियो

मामले पर रायबरेली पुलिस ने सच बताते हुए दो वीडियो जारी किया है। पहली वीडियो में तबरेज शूटर्स के साथ मिलकर होटल ओम क्लार्क के सामने खुद पर हमले की प्लानिंग कर रहा है। इसमें दो शूटर और तबरेज दिख रहे हैं। दूसरे वीडियो में तबरेज अपनी गाड़ी से पेट्रोल पंप के पहुँचता हुआ दिखाई दे रहा है।

वीडियो में देख सकते हैं कि पंप से कुछ दूरी पर ही उसने गाड़ी रोक दी। थोड़ी देर बाद बाइक से दो लोग आते हैं। कार के पीछे से घूमकर सामने आते हैं। उस वक्त तबरेज गाड़ी रोककर खड़ा रहता है। फिल्मी अंदाज में दोनों कार पर गोली चलाते हैं और फिर कार के सामने से निकल जाते हैं।

मुनव्वर राणा ने पुलिस को बताया दोषी

पुलिस की छापेमारी के बाद शायर ने भी अपना एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने कहा, “एक दिन हमारी जंगल में लाश पड़ी मिलेगी, बिकरु कांड की तरह। इसमें इतना हंगामा करने की क्या जरूरत है? अब ये मुनव्वर राना बिकरु कांड हो गया है। पुलिस ने कहा कि हम इनको जेल ले जाएँगे… उनको जेल ले जाएँगे। मैंने वारंट के बारे में पूछा तो उन्होंने मुझे हटने के लिए बोल दिया।”

मुनव्वर के मुताबिक, ”पुलिस ने हमारे साथ गुंडागर्दी की। इनमें से कोई मुझे मार भी देगा और न भी मारे तो मैं इन हालात में मर जाऊँगा।” मुनव्वर ने पुलिस पर तंज कसते हुए कहा, “पुलिस वाले मुझे हटने के लिए बोल रहे थे…मैं कैसे हट जाऊँ। वो मेरा बेटा है। मेरी सबसे बड़ी गलती है कि मैंने उसे पैदा किया है।”

तबरेज पर फायरिंग का पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि मुनव्वर और उनके भाइयों के बीच 8 करोड़ की कीमत वाली पुश्तैनी जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। 28 जून को तबरेज पर रायबरेली के त्रिपुला चौराहे के पास हमने की घटना से हल्ला मच गया था। बाद में 29 जून को इस संबंध में शिकायत हुई जिसमें दावा किया गया कि हमलावरों ने तबरेज की सफेद गाड़ी पर कई राउंड फायरिंग की। हमले में वे बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई थी।

तबरेज राणा ने इस मामले में अपने ही परिवार के पाँच लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर दी थी। देर रात पुलिस ने उसके चाचा समेत पाँचों आरोपितों इस्माइल राणा, राफे राणा, जमील राणा, शकील राणा (सभी चाचा) और यासर राणा (चचेरे भाई) के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

फायरिंग के बाद दर्ज हुए मुकदमे में आरोपित बनाए गए राफे राणा ने बताया था कि राजघाट पर साढ़े आठ बीघा जमीन है। इसमें चार बीघा उनकी और उनके भाई इस्माइल की है। साढ़े चार बीघा में 6 भाइयों का हिस्सा है। पिता की मृत्यु के बाद पूरी साढ़े आठ बीघा जमीन 6 भाइयों के नाम चढ़ गई। इसका वाद न्यायालय में विचाराधीन है। राफे के मुताबिक फरवरी 2021 में तबरेज ने उनके हिस्से की जमीन में से 18 बिस्वा बेच दी। ये बात जब पता चली तो निबंधन कार्यालय में आपत्ति करके दाखिल-खारिज रुकवा दी।

बता दें कि पूरे मामले का सच उजागर होने के बाद कहा जा रहा है कि संपत्ति मामले में परिवार के लोग ज्यादा अड़ंगेबाजी न करें इसलिए तबरेज ने यह साजिश रची। फिलहाल वह फरार है पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।