23 और 24 अगस्त को दो दिन मनाई जाएगी ‘जन्माष्टमी’

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी में इस बार 23 और 24 अगस्त को दो दिन मनाई जाएगी। जन्माष्टमी का पर्व हिन्दु पंचाग के अनुसार, भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस बार यह अष्टमी 23 और 24 तारीख दो दिन है। विशेष उपासक 23 को जन्माष्टमी मनाएंगे जबिक आम लोग 24 अगस्त को जन्माष्टमी मना सकते हैं। क्योंकि उदया तिथि अष्टमी की बात करें तो यह 24 अगस्त को है। हालांकि भगवान कृष्ण के जन्म के वक्त आधी रात को अष्टमी तिथि को देखें तो 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

भगवान श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था। भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र का संयोग होना शुभ माना गया है। रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि के साथ सूर्य और चन्द्रमा ग्रह भी उच्च राशि में है। रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी के साथ सूर्य और चंद्रमा उच्च भाव में होगा। द्वापर काल के अद्भुत संयोग में इस बार कान्हा जन्म लेंगे। घर-घर उत्सव होगा। लड्डू गोपाल की छठी तक धूम रहेगी। इस योग पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। 


अष्टमी तिथि : 
अष्टमी 23 अगस्त 2019 शुक्रवार को सुबह 8:09 बजे लगेगी।

अगस्त 24, 2019 को 08:32 बजे अष्टमी समाप्त होगी। जन्मोत्सव तीसरे दिन तक मनाया जाएगा।

रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त 2019 को दोपहर  12:55 बजे लगेगा। 
रोहिणी नक्षत्र 25 अगस्त 2019 को रात 12:17 बजे तक रहेगा।


श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व –
मान्यता है कि भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। क्योंकि भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु के ही अवतार हैं। इसके अलावा भगवान कृष्ण का ध्यान, व्रत और पूजा  करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्ति होती है। भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम या बलदाऊ जी का पालन पोषण भी नंदबाबा के घर में हुआ। वासुदेव जी की एक पत्नी थीं रोहिणी जिनके पुत्र बलदाऊ जी महाराज थे। कंस ने देवकी को वासुदेव के साथ जेल में डाला तो रोहिणी को नंद बाबा के यहां भेज दिया गया। वैष्णव पंथ को मानने वाले हिन्दु धर्म के उपासक भगवान कृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं ऐसे में आराध्य को याद करने लिए भी प्रित वर्ष लोग उनका जन्मोत्सव मनाते हैं।

भोग में चढ़ाएं दूध-धी और मेवा-
त्व देवां वस्तु गोविंद तुभ्यमेव समर्पयेति!! मंत्र के साथ भगवान कृष्ण का भोग लगाना चाहिए। भोग के लिए माखन मिश्री, दूध, घी, दही और मेवा काफी महत्व पूर्ण माना गया है। पूजा में पांच फलों का भी भोग लगा सकते हैं। चूंकि भगवान कृष्ण को दूध-दही बहुत पसंद था ऐसे में उनके भोग में दूध, दही और माखन जरूर सम्मिलित करना चाहिए।

पूजन विधान-
जन्माष्टमी के दिन व्रती सुबह में स्नानादि कर ब्रह्मा आदि पंच देवों को नमस्कार करके पूर्व या उत्तर मुख होकर आसन ग्रहण करें। हाथ में जल, गंध, पुष्प लेकर व्रत का संकल्प इस मंत्र का उच्चारण करते हुए लें- ‘मम अखिल पापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत करिष्ये।’ इसके बाद बाल रूप श्रीकृष्ण की पूजा करें। गृहस्थों को श्रीकृष्ण का शृंगार कर विधिवत पूजा करनी चाहिए। बाल गोपाल को झूले में झुलाएं। प्रात: पूजन के बाद दोपहर को राहु, केतु, क्रूर ग्रहों की शांति के लिए काले तिल मिश्रित जल से स्नान करें। इससे उनका कुप्रभाव कम होता है।

इस मंत्र का करें जाप-
सायंकाल भगवान को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें-
‘धर्माय धर्मपतये धर्मेश्वराय धर्मसम्भवाय श्री गोविन्दाय नमो नम:।’
इसके बाद चंद्रमा के उदय होने पर दूध मिश्रित जल से चंद्रमा को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें- ‘ज्योत्सनापते नमस्तुभ्यं नमस्ते ज्योतिषामपते:! नमस्ते रोहिणिकांतं अघ्र्यं मे प्रतिग्रह्यताम!’ रात्रि में कृष्ण जन्म से पूर्व कृष्ण स्तोत्र, भजन, मंत्र- ‘ऊं क्रीं कृष्णाय नम:’ का जप आदि कर प्रसन्नतापूर्वक आरती करें। 

रामजन्मभूमि मामला: मस्जिद का निर्माण मंदिर को गिरा कर हुआ था

रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने अदालत में पाञ्चजन्य के एक रिपोर्टर की रिपोर्ट को पढ़ा और बताया कि जब 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया तो जो स्लैब वहां से गिर रही थीं, उनमें संस्कृत भाषा में कुछ लिखा हुआ था। रिपोर्टर ने इसकी तस्वीर भी खींची थी, बाद में पुलिस ने उन स्लैब को जब्त कर लिया था। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या से स्लैब ASI के द्वारा इकट्ठा किया गया था? इस पर वैद्यनाथन ने कहा कि ये ASI रिपोर्ट में नहीं था, ASI काफी बाद में आई थी। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मस्जिद को बनाने के लिए मंदिर तोड़ा गया था। उन्होंने ASI रिपोर्ट का हवाला देते हुए मगरमच्छ, कछुओं का भी जिक्र किया और कहा कि इनका मुस्लिम कल्चर से मतलब नहीं था।

रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि 1114 AD से 1155 AD तक 12वीं शताब्दी में साकेत मंडल का राजा गोविंदचंद्र था, तब अयोध्या ही उसकी राजधानी हुआ करती थी। उन्होंने बताया कि यहां विष्णु हरि का बहुत भव्य मंदिर था, पुरातत्वविदों ने इसकी पुष्टि भी की है। रामलला के वकील सीएस. वैद्यनाथन ने अदालत में बताया कि मुस्लिम पक्ष ने पहले कहा था कि जमीन के नीचे कुछ नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि जो ढांचा मिला है वह इस्लामिक ढांचा है। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, भूमि के नीचे मंदिर था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इस रिपोर्ट पर भरोसा किया है।

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में अयोध्‍या केस की 8वें दिन की सुनवाई में रामलला विराजमान की ओर से वकील सीएस वैद्यनाथन ने बहस शुरू की. उन्‍होंने सबसे पहले भारतीय पुरातत्‍व विभाग (एएसआई) की रिपोर्ट का हवाला दिया. रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि जहां मस्जिद बनाई गई थी उसके नीचे एक विशाल निर्माण था और ASI की खुदाई में जो चीजें सामने आईं हैं उसके मुताबिक वह हिंदू मंदिर था.

सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि बाबरी मस्जिद के नीचे जिस तरह का स्ट्रक्चर था, उसकी बनावट, उसके निर्माण के तरीके और उसमें भगवान के चिन्ह बताते हैं कि वहां पहले से मंदिर था, पहले मुस्लिम पक्ष मंदिर के स्ट्रक्चर को ही मना करता था, लेकिन बाद में वो कहने लगे कि स्ट्रक्चर तो था, लेकिन वो एक इस्लामिक स्ट्रक्चर की तरह था.

रामलला के वकील ने कहा कि संस्कृत वाले शिलालेख को विवादित ढांचा विध्वंस के समय एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था, इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है. साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में लगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या संस्कृत वाले शिलालेख जैसी चीजों को ASI ने इकट्ठा किया था? रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये ASI रिपोर्ट में नहीं था क्योंकि ASI रिपोर्ट काफी बाद में आई थी.

रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि अयोध्या में हर रोज़ त्यौहार का माहौल रहता है. रोज़ हज़ारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए आते हैं, हज़ारों श्रद्धालु पूरी राम जन्मभूमि की परिक्रमा करते हैं.

जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि दक्षिण भारत के मंदिरों में पूजा करने के लिए पुजारियों के पास गर्भगृह होता है. लेकिन उत्तर भारत के मंदिरों में ऐसा नहीं है. वैद्यनाथन ने कहा कि मोहम्मद हाशिम ने कहा था कि जिस तरह मुसलमानों के लिए मक्का है उसी तरह हिंदुओं के लिए अयोध्या है.

रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि एक मुस्लिम गवाह ने कहा था कि अगर मंदिर गिरा कर मस्जिद बनाया गया होता तो मुस्लिम उसको मस्जिद नहीं मानेंगे, मस्जिद ज़बरदस्ती कब्ज़े में ली गई जमीन पर नहीं बनाई जा सकती है…सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि एक मुस्लिम गवाह ने कहा कि हिंदुओं का मानना है कि जन्मस्थान पर भगवान राम का जन्म हुआ और इसलिए उसकी पूजा करते हैं. मुस्लिम गवाह मुहम्मद यसीन ने कहा था कि उसने मस्जिद में आखिरी बार नमाज़ को पढ़ते  समय देखा था कि उन पत्थरों पर कमल और दूसरी तस्वीर है. जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि वह गवाह शिया था या सुन्नी? सीएस वैद्यनाथन ने जवाब दिया कि वह गवाह सुन्नी था.

रामलला विराजमान का पक्ष

इससे पिछली सुनवाई में रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कोर्ट को विवादित ज़मीन के नक्शे और फोटोग्राफ दिखाते हुए कहा था कि खुदाई के दौरान मिले खंभों में श्रीकृष्ण, शिव तांडव और श्रीराम की बालरूप की तस्वीरें नज़र आती हैं. वैद्यनाथन ने कहा था कि 1950 में वहां हुए निरीक्षण के दौरान भी तमाम ऐसी तस्वीर, ढांचे मिले थे, जिनके चलते उसे कभी भी एक वैध मस्ज़िद नहीं माना जा सकता. किसी भी मस्ज़िद में इस तरह के खंभे नहीं मिलेंगे.

रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया था कि 1950 में निरीक्षण के दौरान वहां मस्जिद का दावा किया गया लेकिन उसके बावजूद ये पाया गया कि वहां कई ऐसी तस्वीरें, नक्काशी और इमारत थीं जो साबित करता है कि वो मस्जिद वैध नहीं थी. इस पर मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने हस्‍तक्षेप करते हुए कहा था कि कई पहलुओं को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है जो स्पष्ट नहीं हैं. रामलला विराजमान ने कहा था कि हमारी तरफ से सही उदाहरण और तथ्य पेश किए जा रहे हैं. पुरातात्विक विभाग (ASI) की रिपोर्ट वाली अल्बम की तस्वीरें- मेहराब और कमान की तस्वीरें भी वैद्यनाथन ने कोर्ट को दिखाई थी जो 1990 में खींची गई थी. उसमें कसौटी पत्थर के स्तंभों पर श्रीराम जन्मभूमि उत्कीर्ण है. तस्वीरों में भी साफ साफ दिखता है. कमिश्नर की रिपोर्ट में पाषाण स्तंभों पर श्रीराम जन्मभूमि यात्रा भी लिखा है.

श्रीराम जन्मभूमि पुनरोद्धार समिति (याचिका 9) शंकराचार्य की ओर से कहा गया था कि वो प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा की याद में लिखा गया शिलालेख था. स्तंभों और छत पर बनी मूर्तियां, डिजाइन, आलेख और कलाकृतियां मंदिरों में अलंकृत होने वाली और हिन्दू परंपरा की ही हैं. मस्जिदों में मानवीय या जीव जंतुओं की मूर्तियां नहीं हो सकतीं. रामलला के वकील ने कहा था कि इस्लाम में नमाज़ व प्रार्थना तो कहीं भी हो सकती है. मस्जिदें तो सामूहिक साप्ताहिक और दैनिक प्रार्थना के लिए ही होती हैं. धवन ने कहा था कि मैंने ये कभी स्वीकार नहीं किया कि वहां मस्जिद नहीं थी. जवाब में रामलला विराजमान ने कहा था कि मुस्लिम पक्षकार के वकील के हवाले से उनकी तरफ से कुछ नहीं कहा गया.

रामलला के वकील ने कहा था कि जन्मस्थल पर नमाज इसलिए पढ़ी जाती रही जिससे उन्हें इस पर कब्जा मिल जाए. इस नमाज़ में विश्‍वास का पूर्ण अभाव था. नमाज़ सड़क पर भी पढ़ी गई तो क्या वह मस्जिद बन जायेगी. सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के वकील वैद्यनाथन से यह साबित करने के लिए कहा था कि ‘बाबरी मस्जिद का निर्माण जिस ढांचे पर हुआ था वह मंदिर या किसी भी प्रकार का धार्मिक ढांचा था. वैद्यनाथन ने जवाब दिया था कि भूमिगत ढांचा बहुत विशाल था. ASI की रिपोर्ट से साफ है कि मस्जिद किसी खाली पड़ी ज़मीन या एग्रीकल्चर ज़मीन पर नहीं बनी, मस्जिद एक बहुत बड़े ढांचे के ऊपर बनी. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि पिछली सदियों में सभ्यताओं को नदी के किनारे बसते हुए देखा है. जहां लोगों ने पहले से मौजूद संरचनाओं पर निर्माण किया है. लेकिन साबित करें कि कथित खंडहर या ध्वस्त इमारत (जिस पर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी) प्रकृति में धार्मिक थी.

रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया था कि विवादित स्थल की खुदाई से मिले पुरातात्विक अवशेष से साफ पता चलता है कि ये किसी उत्तर भारतीय मंदिरों के स्‍थापत्‍य शैली वाले ही हैं. मस्जिद का निर्माण पौराणिक, ऐतिहासिक इमारत के ऊपर सीधे किया गया. पुरातत्व ने पाया था कि विवादित स्थल पर मस्जिद रामजन्म भूमि के ढांचे के ऊपर की गई. बड़े पैमाने पर विशेषज्ञों की निगरानी में रामजन्म भूमि पर पुरातत्व विभाग ने खुदाई की और यह भी स्पष्ट कर दिया था कि कौन से पत्थर किस सदी के हैं. विराजमान के वकील सीके वैद्यनाथन ने कहा था कि ऐसे ही तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला था कि रामजन्म भूमि पर मस्जिद का निर्माण किया गया.

रामलला विराजमान ने ये भी कहा था कि पुरातत्व की रिपोर्ट के मुताबिक 17 कतारें थी. हरेक कतार 5 खंभों पर टिकी हुई थी. इस रिपोर्ट में इतनी सामग्री है जिससे साफ होता कि मस्जिद का निर्माण धार्मिक नहीं कुदृष्टि से दूसरे धर्म को कुचलने के लिए किया गया था. बड़ा ढांचा था विवादित मस्जिद के नीचे. 2003 में दो खंडों में दाखिल की गई पुरातत्व कि रिपोर्ट में सभी विशेषज्ञों ने विवादित स्थल पर मस्जिद की मौजूदगी से पहले उसके नीचे मौजूद ढांचे होने का तथ्य दिया जिसमें पूरा ढांचे की दीवार दर दीवार और खंभों का जिक्र किया गया. कोर्ट ने कहा था कि चिड़िया, खंभे कहां स्पष्ट करते हैं कि कोई धार्मिक ढांचा था. रामलला विराजमान ने कहा था कि बहुत सामग्री इस निष्कर्ष पर पहुंचाती हैं जो विशेषज्ञों ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया. रामलला विराजमान के वकील ने कोर्ट को बताया था कि ASI की रिपोर्ट के बाद वो गवाहों के बयान अदालत में रखेंगे.उसके बाद उनकी बहस पूरी हो जाएगी और इसमें करीब 4 घंटे लग सकते हैं.

प्रियंका से सवाल पूछने पर कांग्रेसी ने दी पत्रकार को ठोकने की धमकी

एबीपी न्यूज के एक पत्रकार नीतीश कुमार पांडेय ने कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के सहयोगी संदीप सिंह के खिलाफ अभद्रता और धमकी देने का मामला दर्ज कराया है. खबरों के मुताबिक पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने कहा है कि प्रियंका गांधी इसी मंगलवार को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र आई थीं. तब उन्होंने कांग्रेस महासचिव से धारा 370 पर उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही थी. उसी दौरान संदीप सिंह ने उसे ऐसा करने से रोका था. साथ ही उन्हें गाली देते हुए उनके कैमरे को भी धक्का दिया था.

वहीं सोनभद्र जिले के घोरावल पुलिस थाने के अधिकारी सीपी पांडेय ने इस शिकायत की पुष्टि की है. उन्होंने कहा है कि एबीपी न्यूज के पत्रकार की यह शिकायत इसी थाने में दर्ज करवाई गई है. पुलिस ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और छानबीन शुरू कर दी है. इधर, इस पूरी घटना का सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ है.

इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस घटना को निंदनीय बताते हुए इसकी आड़ में प्रियंका गांधी को घेरने की कोशिश की है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए एक ट्वीट किया है. इसके जरिये उन्होंने कहा है, ‘प्रियंका गांधी जी! कृपया आप सोनभद्र के गरीबों का आंसू पोंछने का नाटक बंद कीजिए. मीडिया की स्वतंत्रता की दुहाई देने वाले कहां है जब प्रियंका वाड्रा के सचिव एक पत्रकार के साथ बदसलूकी कर रहे हैं और वे कुछ नहीं बोल रहीं.’ इसी ट्वीट से मृत्युंजय कुमार ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध भी बताया है.,…

इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस घटना को निंदनीय बताते हुए इसकी आड़ में प्रियंका गांधी को घेरने की कोशिश की है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए एक ट्वीट किया है. इसके जरिये उन्होंने कहा है, ‘प्रियंका गांधी जी! कृपया आप सोनभद्र के गरीबों का आंसू पोंछने का नाटक बंद कीजिए. मीडिया की स्वतंत्रता की दुहाई देने वाले कहां है जब प्रियंका वाड्रा के सचिव एक पत्रकार के साथ बदसलूकी कर रहे हैं और वे कुछ नहीं बोल रहीं.’ इसी ट्वीट से मृत्युंजय कुमार ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध भी बताया है.

इससे पहले पहले इसी मंगलवार को प्रियंका गांधी सोनभद्र के उम्भा गांव में हुए हत्याकांड के पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए पहुंची थीं. तब कुछ पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान जम्मू-कश्मीर से धारा 370 के अधिकांश प्रावधानों को हटाने के लिए अपनाए गए तरीके को उन्होंने असंवैधानिक बताया था. साथ ही उसे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के भी विरुद्ध कहा था.

आरिफ मोहम्मद की ओवैसी को नसीहत “यदि समानता दरकार है तो ‘समान नागरिक संहिता’ का भी समर्थन करो”

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि बोर्ड ने तीन तलाक के मुद्दे पर यू-टर्न ले लिया है. खान ने ओवैसी को सलाह देते हुए कहा, “अगर वह समानता की बात करते हैं तो वह सरकार से देश के प्रत्येक नागरिक के लिए पारिवारिक कानूनों को लागू करने के लिए क्यों नहीं कहते. वह कॉमन सिविल कोड का समर्थन करें.” 

ब्यूरो:

 पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि बोर्ड ने तीन तलाक के मुद्दे पर यू-टर्न ले लिया है. खान ने यह बयान एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान के जवाब में दिया जिसमें उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से उन्हें उम्मीद है कि वह तीन तलाक कानून की वैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा. पूर्व केंद्रीय मंत्री खान ने ओवैसी को भी नसीहत दे डाली. 

दरअसल, ओवैसी ने सवाल उठाया था कि हिंदू व्यक्ति को एक साल की सजा जबकि मुस्लिम व्यक्ति को तीन साल साल की सजा का प्रावधान है. एक देश में दो कानून क्यों हैं? इस पर खान ने ओवैसी को सलाह देते हुए कहा, “अगर वह समानता की बात करते हैं तो वह सरकार से देश के प्रत्येक नागरिक के लिए पारिवारिक कानूनों को लागू करने के लिए क्यों नहीं कहते. वह कॉमन सिविल कोड का समर्थन करें.” 

पूर्व केंद्रीय मत्री ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “पर्सनल लॉ बोर्ड ने सबसे पहले तो तलाक को ‘गुनाह, दमनकारी और अन्यायपूर्ण बताया था.” हालांकि, बाद में उन्होंने अपना रुख बदल दिया.”   
 
खान ने कहा, “हम एक लोकतांत्रिक देश हैं. हर किसी को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है. आपके पास संसद में पास कानून की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का अधिकार है लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जिसने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर वादा किया था कि वह तीन तलाक के खिलाफ कैंपेन चलाएगा, वह अब कोर्ट कैसे जा सकता है.”  

उन्होंने कहा, “वे अब फिर से सुप्रीम कोर्ट वैधानिकता को चुनौती देने जा रहे हैं तो ऐसे में अपने शपथ पत्र की बातों को कैसे स्वीकार करेंगे. मैं अब देखना चाहूंगा कि वे अब क्या कहते हैं. मैं इसका स्वागत करता हूं. उन्हें कोर्ट जाना चाहिए.”  

खान राजीव गांधी सरकार में मंत्री थे लेकिन 1986 में मुस्लिम पर्सनल लॉ बिल और तीन तलाक को लेकर कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. खान ने कहा कि डिवोर्स एक सिविल मामला है जबकि तीन तलाक ‘आपराधिक कृत्य’ है.  

ईडी ने बढ़ाईं आज़म खान की मुश्किलें दर्ज़ किया मनी लॉन्‍ड्र‍िंग का केस

आजम खान पहले से ही जमीन से जुड़े मामलों में घिरे हुए हैं. उनकी यूनिवर्स‍िटी पर छापे पड़ रहे हैं.

ब्यूरो: समाजवादी पार्टी के नेता और रामपुर से सांसद आजम खान की मुसीबतें खत्‍म होने का नाम नहीं ले रही हैं. ईडी ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्‍ड्र‍िंग का केस दर्ज किया है. आजम खान पहले से ही जमीन से जुड़े मामलों में घिरे हुए हैं. उनकी यूनिवर्स‍िटी पर छापे पड़ रहे हैं. इस मामले में उनके बेटे अब्‍दुल्‍ला को भी हिरासत में लिया गया था. हालांकि खुद आजम खान अपने ऊपर लगे आरोपों को लगातार नकार रहे हैं.

जमीन हड़पने का आरोप
आजम खान जमीन हथियाने के 26 नए मामलों के बाद करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले में फंस गए हैं. उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने उनको रामपुर में लग्जरी रिसॉर्ट हमसफर के लिए सरकारी जमीन कब्जाने को लेकर नोटिस जारी किया है. जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन के एक बड़े टुकड़े को कब्जाने के संबंध में अनियमितताओं का आरोप लगाया है. इस जमीन पर गेस्ट हाउस का निर्माण किया गया है.

त्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के खिलाफ सरकारी और गरीब किसानों की कृषि योग्य भूमि हथियाने के सिलसिले में लगातार मामले दर्ज किए जाने के बाद उनको भूमाफिया घोषित किया गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)भी खान के निजी विश्वविद्यालय के खाते में विदेशों से दान मिलने से संबंधित कथित धनशोधन के आरोपों की जांच कर रहा है.

काम में अड़चन डालने के अपराध में आज़म खान के बेटे को किया गिरफ्तार

 हिरासत में लिए जाने से पहले वह जौहार यूनिवर्सिटी पहुंचे थे. जहां, उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी बोलकर प्रशासन बदला ले रहा है. 

रामपुर से सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्लाह आलम को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार ने कर लिया है। अब्‍दुल्‍लाह आजम समाजवादी पार्टी से ही विधायक हैं। अब्‍दुल्‍लाह को आज मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से हिरासत किया गया है। फिलहाल पुलिस अब्‍दुल्‍लाह से पूछताछ कर रही है।

अब्‍दुल्‍लाह को जौहर यूनिवर्सिटी की जांच में हस्‍तक्षेप को देखते हुए उन पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और छापे के दौरान पुलिस अधिकारियों से बदसलूकी के चलते हिरासत में लिया गया है।

बता दें कि कल यूपी पुलिस ने  अब्दुल्लाह आजम खान के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। अब्दुल्लाह आजम खान पर फर्जी दस्तावेजों की मदद से पासपोर्ट बनवाने का आरोप लगाया गया है। रामपुर के थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने अब्दुल्लाह के खिलाफ यह शिकायत दर्ज कराई है।

आरोप है कि अब्दुल्लाह आजम खान के पासपोर्ट में उनकी जन्मतिथि उनके हाईस्कूल, बीटेक और एमटेक के प्रमाणपत्रों से अलग है। आरोप है कि पासपोर्ट में अब्दुल्लाह आजम खान की जन्मतिथि 01.01.1993 अंकित है जबकि पासपोर्ट में जन्मतिथि 30.09.1990 दर्ज है। अब्दुल्लाह आजम खान पर भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 12 (1A) के तहत भी शिकायत दर्ज की गई है।

हिंदी विभाग द्वारा मुंशी प्रेमचंद की जयंती का आयोजन

प्रेमचन्द की कहानी ‘सद्गति’ का नाट्य मंचन

कानून विभाग की अर्शी ने जीती भाषण प्रतियोगिता

आज हिंदी विभाग द्वारा कथाकार मुंशी प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य तीन कार्यक्रम, प्रश्नोत्तरी और भाषण प्रतियोगिता एवं नाट्य मंचन किया गया। पहले चरण में मुंशी प्रेमचंद के जीवन और साहित्य पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई और दूसरे चरण में ‘यदि प्रेमचंद आज के समय में होते’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता हुई और आख़िर में विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रेमचन्द की कहानी सद्गति का नाट्य मंचन किया गया। जिसमें राहुल, ममता चौबे, राहुल संधेर, इंदु, राहुल-2, अंजू, रुचि, अनुज और अजय मौर्य ने विभिन्न भूमिका अदा की। विभागाध्यक्ष डॉ गुरमीत सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में 5 महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय के विभागों से 18 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में डी.यू.आई. प्रो. शंकरजी झा मुख्य अतिथि के रूप में शरीक हुए। उन्होंने हिंदी विभाग के कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘अर्न व्हाईल लर्न’ की शुरुआत भी हिंदी विभाग से हुई है। आज आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में आयोजनकर्ता हिंदी विभाग की टीम के प्रतिभागी ‘राहुल व ऋषभ’ ने जीत हासिल
की, किंतु सद्भावना के तौर पर उन्होंने खुद को प्रतियोगिता से अलग कर लिया, जिसके बाद विजेता सांध्यकालीन विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय की टीम के प्रतिभागियों अंकित कुमार और सोनिया रहे , जी.सी.जी., सेक्टर – 11 की प्रतिभागियों ज्योति और ज्योति -2 उपविजेता रही। वहीं भाषण प्रतियोगिता में पहला स्थान कानून विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय की प्रतिभागी अर्शी ने
प्रथम स्थान, एस. डी., सेक्टर – 32 के प्रतिभागी सिद्धार्थ सरण ने द्वितीय स्थान और एम.सी.एम.डी. ए.वी., सेक्टर – 36 की अमनदीप कौर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में रूसी विभाग के अध्यक्ष डॉ. पंकज मालवीय, उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ. अली अब्बास और मानव अधिकार विभाग की अध्यक्ष डॉ. नमिता गुप्ता शामिल हुईं।
कार्यक्रम का आयोजन संध्याकालीन सभागार में किया गया।

इस अवसर पर पंजाब विश्वविद्यालय के प्रकाशन ब्यूरो द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी लगाई गई।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह, प्रो. नीरजा सूद, प्रो. बैजनाथ प्रसाद, प्रो. सत्यपाल सहगल और डॉ. अशोक कुमार उपस्थित रहे।

अनिल चौधरी बने दी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष

एशिया के सबसे बडी वकीलो की बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनावो मे सोमवार को हुये मतदान की आज मतगणना हुई जिसमे अनिल चौधरी अध्यक्ष एवं सतीश शर्मा महासचिव निर्वाचित हुये!

अध्यक्ष पद पर अनिल चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कमल किशोर शर्मा 179 मतो से पराजित किया अनिल चौधरी को 2278 तथा कमल किशोर शरमा को 2099 मत प्राप्त हुये

चुनाव अधिकारी प्रशांत चतुरवेर्दी ने बताया कि अन्य पदो पर हुये मतदान मे,महासचिव पद पर सतीश शर्मा,उपाध्यक्ष पद पर सियाराम शर्मा,राकेश पबडी,संयुक्त सचिव पद पर नरेश गजराज,कोषाध्यक्ष पद पर लक्ष्मी शर्मा,पुस्तकालय सचिव पद पर रमन गुप्ता,उपकोषाध्यक्ष पद पर अंकित कपूर,सास्कृतिक सचिव पद पर राजेश शर्मा को निर्वाचित हुये!

अमेठी से काँग्रेस गायब, संजय सिंह ने दिया काँग्रेस से इस्तीफा

अमेठी से पहले रहुल गांधी भागे अब रही सही कसर संजय सिंह ने काँग्रेस छोड़ कर पूरी आर दी। अमेठी होगी पूरी तरह से भगवा। डॉ. संजय सिंह असम से राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल अभी एक साल का बचा हुआ है. इसके बावजूद उन्होंने राज्यसभा और कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया. संजय गांधी के दोस्त रहे संजय सिंह ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज कांग्रेस से ही किया था, लेकिन राममंदिर आंदोलन के दौरान कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे.

नई दिल्‍ली: कांग्रेस नेता संजय सिंह ने राज्‍यसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया है. चेयरमैन वेंकैया नायडू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. उन्‍होंने और पत्‍नी अमिता ने कांग्रेस से भी इस्‍तीफा दे दिया है. उन्‍होंने कहा कि वह कल बीजेपी ज्‍वाइन करेंगे. संजय सिंह ने कहा कि मेरा गांधी परिवार से करीबी रिश्‍ता है और उन रिश्तों में कोई गड़बड़ी नहीं है. हमारा 40 साल से कांग्रेस से नाता है लेकिन 15-20 साल में पार्टी के भीतर जो संवादहीनता हुई, पहले कभी नहीं थी. हम दो बार लोकसभा में और दो बार राज्यसभा में रहे और ये फैसले 1-2 दिन के नहीं होते है. 

उन्‍होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में संवादहीनता है, नेतृत्‍व में शून्‍यता है. पार्टी बीते हुए कल में चल रही है और आने वाले कल से बेखबर है. उधर पीएम मोदी ने नारा दिया है- सबका साथ सबका विकास. उन्‍होंने जो कहा है, वो किया है. मुझे लगता है कि देश उनके साथ है और अगर देश उनके साथ है तो मैं भी उनके साथ हूं. अपनी आगे की योजनाओं के बारे में उन्‍होंने कहा कि मैं कल बीजेपी ज्‍वाइन करूंगा.

भाजपा ने ‘राज्यसभा’ में भी ट्रिपल तलाक बिल को दिलाई मंजूरी

ट्रिपल तलाक बिल राज्यसभा में भी पास हो गया है. बिल के पक्ष में 99 जबकि विपक्ष में 84 वोट पड़े.    पीएम मोदी ने कहा, ‘एक प्राचीन और मध्यकालिन प्रथा को आखिरकार इतिहास के कूड़ेदान में डाल दिया गया. संसद ने ट्रिपल तलाक खत्म कर दिया है और मुस्लिम महिलाओं के साथ की गई एक एतिहासिक गलती को सुधार दिया है.  पीएम मोदी ने कहा कि यह जेंडर जस्टिस की जीत है जो कि आगे समाज में समानता लाएगी. आज भारत खुश है.’

नई दिल्‍ली: देश के लिए आज ऐतिहासिक दिन है. मोदी सरकार ने मुस्लिम बहनों को रक्षाबंधन का गिफ्ट दिया है. ट्रिपल तलाक बिल राज्यसभा में भी पास हो गया है. बिल के पक्ष में 99 जबकि विपक्ष में 84 वोट पड़े. अब बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. उनके हस्ताक्षर के बाद यह कानून का रूप ले लेगा. एनडीए के 16 सदस्यों ने बिल का बहिष्कार किया और वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. उधर, विपक्ष की ओर से एनसीपी, बसपा, आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने बॉयकट किया. एआईएडीएमके और जेडीयू ने सदन से वॉक आउट किया. बीजेडी ने बिल का समर्थन किया. कांग्रेस के 4 सदस्य किसी वजह से सदन में मौजूद नहीं थे. वहीं बीजेपी के दो सांसद सदन में मौजूद नहीं थे. 

उधर, राज्यसभा में ट्रिपल तलाक पास होने पर कानून मंत्री रविशंकर ने प्रतिक्रिया देते हुए कह, “यह ऐतिहासिक दिन है. दोनों सदनों ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय प्रदान किया है. ये बदलते भारत की शुरुआत है.”  

इससे पहले, बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने का प्रस्ताव गिर गया था. तभी तय हो गया था कि यह बिल राज्यसभा में पास हो जाएगा क्योंकि वोटिंग के दौरान संख्याबल यही रहने के आसार थे. थोड़ी देर बाद, बिल पास हो गया. लोकसभा में पास होने के बाद तीन तलाक बिल मंगलवार को राज्‍यसभा में पेश किया गया था. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दोपहर 12 बजे बिल सदन के पटल पर रखा और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में इस प्रथा को अवैध ठहराया गया लेकिन उसके बाद भी तीन तलाक की प्रथा जारी है. 

अब ट्रिपल तलाक दिया तो क्या होगा? 

1. देश में अब ट्रिपल तलाक अपराध होगा.
2. ट्रिपल तलाक देने पर पति को अधिकतम 3 साल की सजा मिल सकती है. 
3. पीड़िता या रिश्तेदार अब एफआईआर दर्ज करा सकते हैं.