जितिन प्रसाद के पश्चात हरेन्द्र और पंकज मालिक के साथ कई नेता बढ़ा रहे हैं प्रियंका वाड्रा की मुश्किलें

यूपी की सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी कांग्रेस को झटके लगने का सिलसिला जारी है। कई बड़े नेताओं के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब पश्चिमी यूपी के जाट नेता हरेंद्र मलिक व उनके पुत्र पूर्व विधायक पंकज मलिक ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आज शाम अपने आवास पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि दोनों ने कांग्रेस के सभी पदों से अपना त्यागपत्र पार्टी हाईकमान को भेज दिया है। वहीं पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने बताया कि जल्द ही वे नया राजनीतिक निर्णय लेंगे। इससे पहले भी कई नेता कांग्रेस छोड़ सपा का दामन थाम चुके हैं जिनमें उन्नाव की पूर्व सांसद अन्नू टंडन, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी और पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। वहीं कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे जितिन प्रसाद भाजपा में ठिकाना तलाशा तो पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी के कांग्रेस छोडऩे के बाद अगला कदम उठाने का इंतजार है। सूत्रों के अनुसार कॉंग्रेस द्वार महिलाओं के लिए 40% आरक्षण की घोषणा के पश्चात इन्हें टीकेट मिलने के आसार धूमिल हो चले थे इसीलिए पिता पुत्र द्व्य ने यह कदम उठाया। अभी और अधिक चुनाव लड़ने के इच्छुक इधर उधर छिटक सकते हैं।

लखनऊ(ब्यूरो) :

उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी कांग्रेस को झटके लगने का सिलसिला जारी है। कई बड़े नेताओं के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट नेता हरेंद्र मलिक व उनके पुत्र पूर्व विधायक पंकज मलिक ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पिता-पुत्र के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के संकेत हैं।

मुजफ्फरनगर निवासी हरेंद्र मलिक चार बार विधायक व इंडियन नेशनल लोक दल के राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। वह कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा की सलाहकार समिति के भी सदस्य हैं। वहीं शामली सीट से दो बार विधायक रह चुके पंकज मलिक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ हाल ही में घोषित पार्टी की इलेक्शन स्ट्रैटेजी कमेटी के सदस्य बनाये गए थे। प्रदेश कांग्रेस के नए निजाम में पिता-पुत्र असहज महसूस कर रहे थे और उनके पार्टी छोड़ने की चर्चा इधर कुछ अरसे से जोरशोर से थी।

सूत्रों के अनुसार हरेंद्र मलिक ने दो दिन पहले लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से भेंट की थी। हरेंद्र मलिक ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही पिता-पुत्र सपा की साइकिल पर सवार होंगे। कांग्रेस छोड़ सपा में जाने के पीछे स्थानीय सियासी समीकरण बताये जा रहे हैं। इस बाबत पूछने पर हरेंद्र मलिक ने कहा कि राजनीतिक व्यक्ति सियासी वजहों से फैसले लेते हैं। उनके निर्णय को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

उधर, मेरठ के पूर्व सांसद हाजी शाहिद अखलाक जल्द ही अपने अगले सियासी कदम के संबंध में खुलासा कर सकते हैं। उनकी फेसबुक पोस्ट के बाद शहर की सियासत गर्म है। कहा जा रहा है कि शाहिद अखलाक जल्द ही असदुद्दीन औवेसी की पार्टी में शामिल हो सकते हैं। लेकिन आज उन्होंने लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की। इससे उनके सपा में जाने की चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, हाल ही में मुजफ्फरनगर के पूर्व सांसद कादिर राणा ने भी समाजवादी पार्टी ज्वॉइन की है। वहीं अब अंदाजा लगाया जा रहा है कि शाहिद अखलाख भी जल्द ही सपा में शामिल हो सकते हैं। 

पूर्व सांसद शाहिद अखलाक ने कहा कि अखिलेश यादव से मुलाकात अच्छी रही। शाहिद अखलाक साल 2004 में बसपा के टिकट पर मेरठ के सांसद चुने गए थे। वह मेरठ के मेयर भी रह चुके हैं। वहीं साल 2009 में सेक्युलर एकता पार्टी बनाकर उन्होंने मेरठ से चुनाव लड़ा था। साल 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। अब उनके सपा में शामिल होने को लेकर पश्चिमी यूपी की मुस्लिम सियासत में हलचल तेज हो गई है।

यूपी 2022 चुनावों के नतीजे तय हैं, विपक्ष ईवीएम का रोना रोएगा : योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित होने पर नितिन अग्रवाल को मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया कि नितिन अग्रवाल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपके उज्ज्वल कार्यकाल के लिए अनंत मंगलकामनाएं। इसके साथ ही सीएम योगी ने इसे आगामी चुनावों में भाजपा की जीत का संकेत भी बताया। उन्होंने लिखा कि समाजवाद की विरोधी समाजवादी पार्टी के लिए उनका परिवार ही पार्टी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए ‘पूरा प्रदेश’ ही परिवार है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछड़े साढ़े चार साल में प्रदेश में एक भी दंगा नहीं हुआ है क्योंकि हमने पहले ही दिन संदेश दे दिया था कि दंगा करने वालों की सात पीढ़ियां उनकी हरकतों की भरपाई करती रहेंगी।

लखनऊ(ब्यूरो):

उत्तर प्रदेश विधान सभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के लिए सोमवार सुबह करीब 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, विपक्ष और सरकार के बीच संवाद जरूरी है। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर संवाद को बाधित करने का आरोप भी लगाया. सीएम योगी ने आरोप-प्रत्यारोप को लोकंतत्र की परंपरा का हिस्सा बताया।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, विपक्ष की आदत मुझे पता है, चुनाव नतीजों के बाद ये EVM पर दोष देंगे। साथ ही उन्होंने कहा, विधान सभा चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है क्योंकि हमने प्रदेश की 25 करोड़ जनता के लिए काम किया है।

वहीं एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के बागी विधायक नितिन अग्रवाल को उत्तर प्रदेश विधान सभा का उपाध्यक्ष चुन लिए गया. नितिन अग्रवाल को कुल 304 वोट मिले जबकि सपा के नरेंद्र वर्मा को 60 वोट मिले। विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने बताया कि कुल 368 वोट पड़े जिसमें 364 वोट वैध रहे और 4 वोट अवैध रहे।

नितिन अग्रवाल बीजेपी के समर्थन से विधान सभा उपाध्यक्ष बने हैं। इस पर सीएम योगी ने सदन में कहा, हम लोग पिछले साढ़े 4 वर्षों से इसका इंतजार कर रहे थे कि सबसे बड़े विपक्षी दल द्वारा इसके लिए प्रस्ताव आएगा लेकिन कोई सकारात्मक रवैया न होने के कारण आज अनुभवी उपाध्यक्ष चुने गए हैं। नितिन अग्रवाल को हृदय से बधाई देता हूं।

नितिन अग्रवाल के विधान सभा उपाध्यक्ष चुने जाने पर सपा के विरोध पर सीएम योगी ने कहा, ये युवा विरोधी हैं अपने ही लोगों को नहीं बचा पाते हैं। पार्टी के अंदर ही अंतर्विरोध है। उन्होंने नसीहत दी कि परिवारवाद से ऊपर उठकर समाजवादी पार्टी कुछ कार्य करेगी तो ये पार्टी के भी हित में रहेगा।

भाजपा राष्ट्रिय कार्यकारिणी : सिंधिया IN, गांधी OUT

अत्यधिक मुखरता से आंदोलन कारी किसानों का समर्थन करने लिखीमपुर खीरी में आंदोलन कारियों और भपा कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले में अपनी ही सरकार को घेरने और उत्तर प्रदेश में मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसलों पर अपनी टिप्पणियों के कारण भाजपा अपने सांसद फिरोज वरुण गांधी से बहुत नाराज़ है। सनद रहे की वरुण गांधी कॉंग्रेस के शीर्ष परिवार से संबंध रखते हैं वह इन्दिरा गांधी के पुत्र स्व॰ संजय गांधी के पुत्र हैं। भाजपा ने इन्हे अपनी राष्ट्रिय कार्यकारिणी में शामिल नहीं किया है। वहीं, डेढ़ साल पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया और बंगाल चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल मिथुन चक्रवर्ती को भी इसमें जगह दी गयी है।

सारिका तिवारी, नयी दिल्ली/चंडीगढ़ :

अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित कर दी है। भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 80 सदस्य शामिल हैं, जिस सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुरली मनोहर जोशी का नाम भी शामिल है। इतना ही नहीं, लिस्ट में लालकृष्ण आडवाणी को भी शामिल किया गया है, मगर वरुण गांधी का नाम कहीं नहीं है। सिर्फ वरुण गांधी ही नहीं, उनकी मां मेनका गांधी को भी नई कार्यकारिणी में शामिल नहीं किया गया है। 

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान किसानों के समर्थन में बोलने वाले भाजपा सांसद वरुण गांधी, उनकी सांसद मां मेनका गांधी और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह को कार्यकारी सदस्य के पद से हटा दिया गया है। 80 नियमित सदस्यों के अलावा, कार्यकारिणी में 50 विशेष आमंत्रित और 179 स्थायी आमंत्रित सदस्य भी होंगे।

इस सूची में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंक्षी राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, किरेन रिजीजू, गिरिराज सिंह, एस जयशंकर, मनोत तिवारी समेत कई नाम शामिल हैं। हर्षवर्धन, रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर जैसे पूर्व केंद्रीय मंत्री भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने हुए हैं।

वहीं, इसमें नए चेहरों को भी प्रमुख्ता से जगह दी गई है। हाल ही में कैबिनेट में शामिल किए गए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, मीनाक्षी लेखी, मनसुख मंडाविया और ज्योतिरादित्य सिंधिया को राष्ट्रीय  कार्यकारिणी में शामिल किया गया है।

दरअसल, जब आज भाजपा ने 80 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित की तो सबकी नजर इस बात पर गई कि इसमें वरुण गांधी का नाम नहीं है। बीते कुछ समय से वरुण गांधी न सिर्फ केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं, बल्कि लखीमपुर खीरी कांड को लेकर भी योगी सरकार के खिलाफ लगातार मुखर रहे हैं। लखीमपुर खीरी कांड में वरुण गांधी हर दिन ट्वीट कर-करके योगी सरकार पर दबाव बनाते नजर आए हैं। 

पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने आज भी लखीमपुर कांड का नया वीडियो सामने आने के बाद ट्वीट किया था और अपनी ही सरकार को घेरते हुए लिखा था- यह वीडियो बिल्कुल शीशे की तरह साफ है। प्रदर्शनकारियों का मर्डर करके उनको चुप नहीं करा सकते हैं। निर्दोष किसानों का खून बहाने की घटना के लिए जवाबदेही तय करनी होगी। हर किसान के दिमाग में उग्रता और निर्दयता की भावना घर करे इसके पहले उन्हें न्याय दिलाना होगा।’

बता दें कि भाजपा महासचिव अरूण सिंह की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक कार्यसमिति में 50 विशेष आमंत्रित सदस्य और 179 स्थायी आमंत्रित सदस्य (पदेन) भी होंगे, जिनमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधायक दल के नेता, पूर्व उपमुख्यमंत्री, राष्ट्रीय प्रवक्ता, राष्ट्रीय मोर्चा अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी, सह प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री संगठन और संगठक शामिल हैं। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करती है और संगठन के कामकाज की रूपरेखा तय करती है। कोविड-19 महामारी के चलते लंबे समय से राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक नहीं हुई है।

कार्यसमिति के मनोनित सदस्यों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई केंद्रीय मंत्री, सांसद व वरिष्ठ नेता शामिल हैं। कार्यसमिति में पूर्व मंत्रियों हर्षवर्धन, प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद को भी जगह दी गई है।

कार्यकारिणी पार्टी का एक प्रमुख विचार-विमर्श करने वाला निकाय है जो सरकार के सामने आने वाले प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करता है और संगठन के एजेंडे को आकार देता है। कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से इसकी बैठक नहीं हुई है। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नवंबर में होने वाली है। जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली बैठक होगी।

भक्ति – अध्यातम ही नहीं अपितु व्यापार वाणिज्य से भी परिपूर्ण करते हैं शारदीय नवरात्रे

माँ भगवती

धर्म संस्कृति डेस्क, चंडीगढ़:

पित्र पक्ष में अपने पित्रों को तृप्त कर खुशी खुशी विदा करते हैं वहीं से शारदीय नवरात्रों का उल्लास त्योहारों की एक निरंतर लड़ी के आगमन की सूचना भी लाता है। आषाढ़ मास की आखिरी मूलाधार के पश्चात दक्षिणायन होते रश्मीरथी आर्याव्रत की भूमि पर अपनी उग्र उष्णता कम कर सौम्य होते जाते हैं मानों वह भी नवरात्रों में माँ भगवती का स्वागत कर रहे हों।

शारदीय नवरात्रि केवल मात्र शक्ति पूजन ही नहीं है, यह धन – धन्य से परिपूर्ण करने वाला समय है। जहां एक ओर हम माता के नौं रूपों की भक्ति करते हैं वहीं हमरे खलिहानों को भरने का समय भी होता है। नयी फसलें ज्वार , बाजरा , धान , मक्का , मूंग , सोयाबीन , लोबिया , मूंगफली , कपास , जूट , गन्ना , तम्बाकू , आदि से हमारे व्यापार – वाणिज्य में नवप्राणों का उत्सर्ग होता है। नया धान आने से कुटाई छनाई (शेल्लर उद्योग) गतिमान होता है वहीं गुड शक्कर और खांडसेरी की भट्टियाँ भी जल उठतीं हैं। चहुं ओर उल्लास का साम्राज्य दिखाई पड़ता है।

आज अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि (07 अक्तूबर) से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है। शारदीय नवरात्र का व्रत सभी महिलाएं और पुरुष कर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति खुद व्रत ना कर सके तो वह अपनी पुत्र या ब्राम्हण को अपना प्रतिनिधि बनाकर व्रत को पूर्ण करवा सकता है।

मृतकों को 45 – 45 लाख, 1 परिवार जन को सरकारी नौकरी , घायलों को 10 -10 लाख और राजनैतिक परीतान पर पूर्णतया प्रतिबंध

केंद्रिय कृषि क़ानूनों के विरोध में किसान आंदोलन आरंभ ही से अपने उग्र स्वरूप के लिए कुख्यात है। किसान आंदोलन जगह जगह उद्दंड और विध्वंसा होने की कगार पर है। किसान नेताओं के देश विरोधी ब्यान और अब मिडिया घरानों कपो धमकाने के बाद मीडिया कर्मियों की हत्या तक पहुँच चुका है। किसान आंदोलन को भारत में मौजूद विपक्षी पार्टियों का यहाँ तक की उन राज्यों की सरकारों का भी समर्थन प्राप्त है जहां इस कानून का प्रभाव आणून लागू होने से पहले ही से देखा जा रहा है। पंजाब में तो यह कानून अपने क्रूरतम रूप में पहले ही से मौजूद है। लेकिन भाजपा की सरकार को गिरने में शायद अब यही आंदोलन आखिरी कील साबित होगा। यही मान कर हर छोटी बड़ी घटना परराजनैतिक दल, राजनैतिक रोटियाँ सेकने या यूं कहें की गिद्धभोज करने पहुँच जाते हैं और उन्माद बढ़ाते हैं। लेकिन योगी सरकार ने इस पर रोक लगा दी है।

सारिका तिवारी, लखनऊ/पंचकुला:

लखीमपुर खीरी में रविवार को हुई हिंसा में मारे गए किसानों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मुआवजे, सरकारी नौकरी और न्यायिक जांच कराने की घोषणा की है। एडीजी (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने सोमवार को कहा कि सरकार हिंसा में मारे चार किसानों के परिवार को सरकारी नौकरी, 45 लाख रुपए का मुआवजा देगी। पुलिस अधिकारी ने कहा कि घायलों को 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जीएगी। किसानों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होगी और हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज इस हिंसा मामले की जांच करेंगे। पुलिस अधिकारी ने कहा कि जिले में धारा 144 लागू होने की वजह से राजनीतिक दलों के नेताओं को लखीमपुर खीरी जाने की इजाजत नहीं दी गई है। हालांकि, किसान संघों के सदस्य यहां आ सकते हैं। पुलिस का कहना है कि घटना के दोषियों को वह आठ दिनों में गिरफ्तार करेगी।

लखीमपुर घटना के बाद प्रदेश में राजनीतिक राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। तमाम दलों के नेता अपनी-अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस मुद्दे को अपने हित में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसको देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रशासन ने जिले में राजनीतिक दलों के नेताओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है।

उत्तर प्रदेश के एडीजी (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा कि हिंसाग्रस्त लखीमपुर खीरी जिले में सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी गई है और किसी भी राजनीतिक दल के नेता को यहाँ आने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के सदस्यों को यहाँ आने पर कोई रोक नहीं है।

लखीमपुर खीरी में किसानों से मिलने निकली कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका वाड्रा को सीतापुर पुलिस ने हरगांव में सुबह 4 बजे हिरासत में ले लिया। पुलिस हिरासत में प्रियंका उपवास पर बैठ गईं। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों के परिवारों व अन्य किसानों से वे नहीं मिलेंगी, तब तक अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। यहाँ यह स्पष्ट है कि उन्हे केवल मृतक किसानों के यहाँ ही जाना है न तो उन्हे मारे गए पत्रकार से कोई सरोकार है न ही दूसरे मृतकों से।

इधर, समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव को लखीमपुर जाने से रोक दिया, जिसके बाद वे अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद अखिलेश को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वहीं, इस बीच गौतमपल्ली थाने के पास कुछ अराजक तत्वों ने एक पुलिस वाहन को आग के हवाले कर दिया। इस पर पूर्व मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव ने अपने ब्यान में वाहन फ़ूनने का आरोप पुलिस कर्मियों पर ही मध दिया।

लखीमपुर खीरी – पत्रकार की हत्या के पश्चात से स्थिति बेहद तनावपूर्ण, राजनैतिक पर्यटन पर रोक, धारा 144 लागू

9 लोगों की मौत के बाद से ‘किसान प्रदर्शनकारी’ धरने पर हैं। सोमवार (4 अक्टूबर, 2021) को सुबह साढ़े 4 बजे ही राकेश टिकैत वहाँ पहुँच गए थे और उन्होंने एक गुरुद्वारे में बैठक भी की। इस में आगे की रणनीति बनाई गई। केंद्रीय गृह मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष का नाम FIR में डालने की माँग की गई। फ़िलहाल स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए लखीमपुर खीरी में धारा-144 लगा दिया गया है। इन आठ लोगों में 4 प्रदर्शनकारी 4 भाजपाई शामिल हैं। एक और नाम है ‘रमन कश्यप’। रमन कश्यप की हत्या के बाद से जन मानस में राकेश टिकैत के खिलाफ भीषण गुस्से की लहर है। सनद रहे पिछले दिनों ज़ी टीवी द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में टिकैत के भाई का भंडाफोड़ हुआ था तब राकेश टिकैत ने मीडिया घरानों को धमकाया था की हमारा साथ दो नई तो …… । पत्रकार की हत्या को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

सारिका तिवारी, लखनऊ/चंडीगढ़:

लखिम पुर खीरी में यह दुखांत दुर्घटना क्या हुई की राजनैतिक दलों के तो पों बारह हो गए। ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ की गुंडई के बाद अब वहाँ ‘राजनीतिक पर्यटन’ भी शुरू हो गया। कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका वाड्रा के अलावा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल(कांग्रेस) और पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा(कांग्रेस) भी वहाँ पहुँच रहे हैं। ‘भारतीय किसान मोर्चा’ के प्रवक्ता राकेश टिकैत भी वहाँ पहुँचे हैं और कहा है कि कार्रवाई न होने तक मृतकों का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

प्रियंका वाड्रा राहुल गांधी कल ही से अतिउत्साह में जान पड़ रहे हैं। गांधी वाड्रा के साठा समस्त विपक्षी दलों ने यह साफ नहीं किया है कि वह नौं के नौं मृतकों के साथ हैं या मात्र 4 किसानों के साथ।

इन गिद्धभोजी पर्यटकों के प्रवास में कहीं ‘रमन’ का नाम भी आता है या फिर इनकी पर्यटन मंडली घात लगा कर प्रदर्शनकारियों द्वारा मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ भी खड़ी है।

सनद रहे कि लखीमपुर खीरी में अबतक कुल 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इनमें 4 की मौत गाड़ी चढ़ाने से जबकि बाकी बवाल में हुई है। किसानों का आरोप है कि वो कृषि कानूनों को लेकर विरोध कर रहे थे तब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा ने उन पर गाड़ी चढ़ा दी। इसके बाद प्रदेश ही नहीं देश भर में बवाल मचा हुआ है। वहीं मंत्री के बेटे आशीष का कहना है कि वो गाड़ी में नही थे।

सभी राजनीतिक दलों ने किया लखीमपुर का रुख

इस घटना के बाद देश भर से राजनीतिक दलों के नेताओं ने लखीमपुर का रुख कर लिया है। देर रात से ही नेताओं ने लखीमपुर जाने की कोशिश शुरू कर दी। हालांकि किसी भी दल के नेता को लखीमपुर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही। किसी को हाउस अरेस्ट किया गया है तो किसी को रास्ते में हिरासत में लिया गया।

लखीमपुर पहुंचने से पहले प्रियंका हिरासत में, कांग्रेसियों ने किया हंगामा

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा कल रात ही लखनऊ पहुंच गई। देर रात लखनऊ से लखीमपुर के लिए रवाना हुई। पुलिस ने पहले उन्हें लखनऊ के कौल हाउस पर ही रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रियंका नहीं रुकी। पुलिस से तीखी नोकझोंक के बाद प्रियंका लखीमपुर के लिए रवाना हुई। हालांकि पुलिस ने उन्हें सीतापुर के हरगांव से हिरासत में ले लिया। प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर बैठ कर प्रदर्शन करने लगे। काफी देर तक धरने पर रहने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच उनकी पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। उन्होंने पुलिस और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

बसपा राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र भी हाउस अरेस्ट

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा भी देर रात अपने लखनऊ आवास से लखीमपुर के लिए निकल रहे थे। लेकिन उससे पहले ही उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया। इसके बाद सतीश मिश्रा की पुलिस से काफी बहस हुई और उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा आदेश है तो उन्हें दिखाया जाए। बाद में संयुक्त पुलिस आयुक्त की तरफ से लिखित आदेश मिलने के बाद सतीश मिश्र ने अपना कार्यक्रम स्थगित किया।

संजय सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद को सीतापुर से हिरासत में लिया गया

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी देर रात लखीमपुर के लिए रवाना हुए. लेकिन उन्हें सीतापुर में ही रोक दिया गया. संजय सिंह को हिरासत में लेने के बाद पुलिस लाइन में रखा गया। लखीमपुर जा रहे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने सीतापुर के खैराबाद टोल प्लाजा पर रोक लिया। इस बीच उनकी पुलिस से तीखी बहस हुई। पुलिस चंद्रशेखर को हिरासत में लेने के बाद सीतापुर पुलिस लाइन ले आयी।

लखीमपुर जाने से रोकने पर धरने पर बैठे अखिलेश, पुलिस ने हिरासत में लिया

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आज सुबह लखीमपुर के लिए निकलना था। लेकिन इससे पहले ही उनके घर के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा बैठा दिया गया। अखिलेश यादव ने लखीमपुर के लिए निकलने की कोशिश की तो उन्हें भारी पुलिस बल ने रोक दिया. इस दौरान बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता भी अखिलेश यादव के आवास के बाहर धरना प्रदर्शन करने लगे। जब पुलिस ने जाने की अनुमति नहीं दी तो अखिलेश यादव अपने आवास के सामने ही सड़क पर धरने पर बैठ गए। काफी देर तक धरने पर बैठे रहने के बाद पुलिस ने अखिलेश यादव को भी हिरासत में ले लिया।

छत्तीसगढ़ के सीएम और पंजाब के डिप्टी सीएम के लखनऊ एयरपोर्ट आने पर रोक

इस घटना के विरोध में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखविंदर एस रंधावा को भी आज लखीमपुर पहुंचना था। लेकिन उनके प्लेन के लखनऊ में उतरने पर रोक लगा दी गई है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी को लिखे पत्र में कहा है कि दोनों को लखनऊ में उतरने की अनुमति न दी जाए।

ब्राह्मण चेहरे जीतीन प्रसाद को मिला प्रीविधिक शिक्षा विभाग, योगी ने दी बधाई

कई दिनों से चल रहीं यूपी सरकार में विस्तार की खबरों के बीच रविवार को इस पर विराम लग गया। रविवार की देर शाम जितिन प्रसाद समेत कई नेता योगी मंत्रिमंडल में शामिल होंगे। रविवार की शाम शपथ लेने के बाद जितिन प्रसाद यूपी मंत्रिमंडल में शामिल हो जाएंगे। आपको बता दें कि जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़कर कुछदिन पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे। पिछले वर्ष भी जितिन के भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई गई थीं, लेकिन बाद में उन्होंने इन अटकलों को खारिज कर दिया था। कांग्रेस की आलामान केन्द्रित राजनीति को देखते हुए जितिन प्रसद ने कुछ महीने पहले ही भाजपा का दामन थामा तो सभी चौंक गए थे। जितिन प्रसाद सबसे पहले शाहजहांपुर से चुनाव जीते थे। इसके बाद उन्हें कांग्रेस ने धौरहरा सीट से चुनाव लड़ाया था। जितिन प्रसाद धौरहरा, कस्ता, मोहम्मदी, महोली और हरगांव विधानसभा क्षेत्रों में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। राजनीति के लिहाज से जितिन इन्हीं क्षेत्रो में काम करते रहे हैं। लेकिन ब्राह्मण होने के नाते उनके नाम का प्रभाव अवध के बड़े क्षेत्र और पूर्वांचल के कुछ क्षेत्रों पर भी है। 

लखनऊ/नयी दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नए मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 7 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। सबसे पहले कैबनेट मंत्री के रुप में जतिन प्रसाद ने मंत्रिपद की शपथ ली। इसके बाद छत्रपाल गंगवार ने भी शपथ ली। फिर पलटू राम, संगीता बलवंत बिंद, संजीव कुमार, दिनेश खटीक और धर्मवीर प्रजापति ने मंत्री पद की शपथ ली।

सीएम योगी की इस नई टीम में 7 नेताओं को शामिल किया गया है। जिसमें जातीय समीकरण का सबसे ज्यादा ध्यान रखा गया है। इन 7 मंत्रियों में 3 दलित, 3 ओबीसी, एक ब्राह्मण चेहरे को मंत्री बनाया गया है। जितिन प्रसाद कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं। वहीं बाकी के 6 को मंत्री बनेंगे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सात नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया है। सीएम ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद को प्राविधिक (टेक्निकल) शिक्षा विभाग दिया गया है। जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़कर कुछ महीने पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे. तभी से उन्हें मंत्री बनाए जाने की अटकलें लगाई जा रही थी।

राज्य मंत्री पलटू राम को सैनिक कल्‍याण, होमगार्ड, प्रान्‍तीय रक्षक दल एवं नागरिक सुरक्षा विभाग, राज्य मंत्री डॉ. संगीता बलवंत को सहकारिता विभाग, राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति को औद्योगिक विकास विभाग दिया गया है। राज्य मंत्री छत्रपाल सिंह गंगवार को राजस्‍व विभाग, राज्य मंत्री संजीव कुमार को समाज कल्‍याण व अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्‍याण विभाग, राज्य मंत्री दिनेश खटीक को जल शक्ति एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग का दायित्व मिला है।

सीएम ने ट्वीट कर कहा, ”उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में कल शामिल हुए सभी नए सदस्यों को आज विभागों का दायित्व प्राप्त हो गया है। मुझे विश्वास है कि आप सभी के कुशल, अनुभवी एवं कर्मठ नेतृत्व में संबंधित विभाग विकास की नई ऊंचाइयों को स्पर्श। करेंगे. आप सभी के उज्ज्वल कार्यकाल हेतु अनंत शुभकामनाएं।”

सुनियोजित ढंग से हुए थे दिल्ली दंगे : दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में एक आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि शहर में कानून और व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए पूर्व नियोजित साजिश थी और घटनाएं पल भर में नहीं हुआ”। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की कथित हत्या के मामले में मोहम्मद इब्राहिम द्वारा दायर जमानत याचिका पर विचार करते हुए कहा कि घटनास्थल के आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों को सुनियोजित तरीके से काट दिया गया और नष्ट कर दिया गया।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की कथित हत्या से संबंधित मामले में आरोपी मोहम्मद इब्राहिम द्वारा दाखिल जमानत याचिका पर विचार करते हुए कहा कि घटनास्थल के आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया गया।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की हत्या मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मोहम्मद इब्राहिम की बेल याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बताया कि मौजूदा सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि शहर में कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए एक पूर्व नियोजित साजिश रची गई थी।

कोर्ट ने कहा, “फरवरी 2020 में देश की राष्ट्रीय राजधानी को दहलाने वाले दंगे स्पष्ट तौर पर एकदम से नहीं हुए। वीडियो और फुटेज में दिखने वाला प्रदर्शनकारियों का बर्ताव जिसे अभियोजन पक्ष द्वारा रिकॉर्ड में रखा गया, साफ तौर पर दिखाता है कि यह सरकार के कामकाज को अस्त-व्यस्त करने के साथ-साथ शहर में लोगों के सामान्य जीवन को बाधित करने का एक सुनियोजित प्रयास था।”

अदालत ने यह भी कहा कि सीसीटीवी कैमरों को भी व्यवस्थित ढंग से नष्ट किया गया था जो शहर में कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए एक पूर्व नियोजित साजिश के अस्तित्व की पुष्टि करता है। अदालत ने कहा, “यह (पूर्व नियोजित साजिश) इस तथ्य से भी साफ होती है कि असंख्य दंगाइयों ने बेरहमी से पुलिस अधिकारियों पर लाठी, डंडे, बैट चलाए।”

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के दौरान मारे गए हेड कॉन्सटेबल रतन लाल के मर्डर केस में आरोपित की बेल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता इस प्रकार दुरुपयोग नहीं की जानी चाहिए कि समाज के ताने बाने को अस्थिर करके खतरा हो और दूसरों को चोट पहुँचे।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, “इस न्यायालय ने पहले एक लोकतांत्रिक राजनीति में व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व पर विचार किया है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का दुरुपयोग इस तरह से नहीं किया जा सकता है जिससे सभ्य समाज के ताने-बाने को अस्थिर करने का प्रयास किया जाता है। यह और अन्य व्यक्तियों को चोट पहुँचाता है।”

इब्राहिम के ख़िलाफ़ केस

सीसीटीवी फुटेज में मोहम्मद इब्राहिम को नेहरू जैकेट, सलवार कुर्ता, और इस्लामी टोपी पहने साफ देखा गया था। अभियोजन पक्ष ने तीन वीडियो सबूत के तौर पर पेश किए थे कि ताकि साबित हो कि हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की मौत पूर्व-नियोजित थी। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली दंगे कुछ ऐसा नहीं थे जो अचानक भड़क गए हों।

कोर्ट ने बेल याचिका को नकारते हुए कहा, भले ही इब्राहिम क्राइम सीन पर न दिखा, लेकिन वह भीड़ का हिस्सा था। वह जानबूझकर अपने इलाके से  1.5 किलोमीटर दूर तक गया। उसके हाथ में तलवार थी जिसका इस्तेमाल किसी भी नुकसान के वक्त किया जा सकता था। कोर्ट ने कहा, “इसी प्रकाश में याचिकाकर्ता की तलवार के साथ वाली फुटेज काफी भयानक है जो याचिकाकर्ता को हिरासत में रखे रखने के लिए पर्याप्त है।”

बता दें कि आरोपितों की ओर से पेश हुए कई वकीलों की दलीलें सुनने के बाद इस संबंध में पिछले माह आदेश सुरक्षित रख लिया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से एएसजी एसवी राजू और विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद मामले में पेश हुए थे। इब्राहिम की जमानत याचिका 11 जमानत आवेदनों में सुरक्षित आदेशों का हिस्सा थी। गौरतलब है कि, अदालत ने मामले में शाहनवाज और मोहम्मद अय्यूब नाम के अन्य आरोपितों को जमानत दे दी, लेकिन सादिक और इरशाद अली के आवेदनों को खारिज कर दिया। 5 अन्य आरोपितों- मो. आरिफ, शादाब अहमद, फुरकान, सुवलीन और तबस्सुम को इस महीने की शुरुआत में जमानत मिली थी।

24 फरवरी को दिल्ली दंगों के समय इस्लामी भीड़ डंडा, लाठी, बास्केट बैट, लोहे की रॉड और पत्थरों लेकर वजीराबाद रोड पर करीब 1 बजे इकट्ठा हुई। कुछ देर में ये हिंसक हो गए। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस छोड़ने पड़े। मौजूदा पुलिसकर्मी बताते हैं कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को मारना शुरू कर दिया था। भीड़ ने डीसीपी शाहदरा, एसीपी गोकुलपुरी और हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल पर भी हमला किया। दोनों सड़क पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल को मृत घोषित कर दिया गया।

महंत गिरि की मृत्यु पर संदेह गहराया, पार्थिव देह को भू – समाधि दी गयी

कल देर शाम टीवी पर चल रही बहस में कॉंग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं ने अपने – अपने वक्तव्य में महंत नरेंद्र गिरि की संदेहास्पद मृत्यु की जांच पर प्रश्न खड़े किए। उन दोनों का मानना था की पुलिस जब प्राथमिक जांच करती है तब वह प्रथम दृष्ट्या जिस कोण से मामले की जांच शुरू करती है फिर घूम फिर कर प्राथमिकी भी उसी की दर्ज की जाती है, यह इतने वर्षों का उनका राजनैतिक अनुभव रहा है। महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या पत्र की बात उन्होने यह कह कर नकार दी कि स्वर्गवासी महंत जी को लिखना आता ही नहीं था, इसके लिए उन्होने मीडिया में फैल रही सूचनाओं का संदर्भ लिया। गिरि जी आत्म/हत्या कि गुत्थी तो सुलझा ली जाएगी लेकिन एक पुरानी गुत्थी उलझ कर सामने आ गयी। वह गुत्थी है जनेमाने युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और उनकी मित्र और प्रबन्धक   दिशा सालियान की। नग्नावस्था में एक बहुमंजिला इमारत से राजनैतिक रसूख रखने वाले कुछ युवाओं की उपस्थिती में उनही के घर से कूद कर जान दी गयी थी। आत्महत्या की जांच और फिर वही प्राथमिकी) सुशांत सिंह राजपूत की अपने घर के पंखे से लटक कर जान देना वह पंखा और फंदा राजपूत के कद से मेल न खाते हुए भी अत्महत्या की ही प्राथमिकी दर्ज की गयी। महाराष्ट्र में कॉंग्रेस की सरकार है। शायद उनका राजनैतिक अनुभव ठीक ही कहता है।

प्रयागराज/लखनऊ/चंडीगढ़ :

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघम्बरी मठ के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को एक ओर जहाँ आज भू-समाधि दी गई। वहीं, इसी बीच उनके उत्तराधिकारी को लेकर नया विवाद शुरू हो गया। पंचपर्मेश्वर की बैठक में महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट को फर्जी कहा गया है।

इसी के साथ उनके उत्तराधिकारी की घोषणा के लिए 25 सितंबर की तारीख तय की गई है। निरंजनी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी ने सुसाइड लैटर को फर्जी बताते हुए उत्तराधिकारी की घोषणा करने से मना कर दिया। जिसके बाद संत बलवीर के उत्तराधिकारी बनने पर फिलहाल के लिए फैसला टल गया। बैठक की अगली दिनांक यानी 25 सितंबर को इस बाबत फैसला लेकर घोषणा की जाएगी।

‘आज तक’ से बातचीत में निरंजनी अखाड़ा के रविंद्र पुरी ने कहा कि जो सुसाइड नोट मिला है, वह उनके (महंत नरेंद्र गिरि) द्वारा नहीं लिखा गया है। इस मामले की जाँच होनी चाहिए। ऐसा लगता है किसी बीए पास लड़के ने यह पत्र लिखा है। इस संबंध में अखाड़ा अपने स्तर से भी जाँच कर रहा है।

रविंद्र पुरी ने सवाल किया कि आखिर फाँसी में पीछे चोट कैसे हो सकती है? इसके अलावा न जुबान चढ़ी थी और न आखें…तो ये फाँसी कैसे हो सकती है। पुरी ने जानकारी दी कि महंत के निधन पर अखाड़े में भी 7 दिन का शोक जारी है। उत्तराधिकारी को लेकर उन्होंने कहा कि कथित सुसाइड नोट में बलवीर गिरि लिखा है जबकि वो पुरी हैं। महंत नरेंद्र गिरि ऐसी गलती नहीं कर सकते थे।

इसके अलावा सुसाइड लेटर को लेकर यह बातें भी कही जा रही है कि कुल 12 पन्ने के सुसाइड नोट को दो बार में और दो अलग-अलग कलम से लिखा गया है। पहले आठ पेज 13 सितंबर को लिखे गए जबकि अगले चार पेज 20 सितंबर को। अजीब बात यह है कि 13 सितंबर को जिन पेजों को लिखा गया, उस पर तारीख को काट कर 20 सितंबर कर दिया गया है। शुरुआती पेजों में 25 जगह कटिंग नोटिस की गई है जबकि अगले चार पेजों में 11 जगह।

बता दें कि बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को फूलों से सजे वाहन में रखकर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर लाया गया। यहाँ उन्हें स्नान कराने के बाद मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में उनके गुरु के बगल में समाधि दी गई।

महंत नरेंद्र गिरि पद्मासन मुद्रा में ब्रह्मलीन हुए। अब एक साल तक यह समाधि कच्ची ही रहेगी। इस पर शिवलिंग की स्थापना कर रोज पूजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद समाधि को पक्का बनाया जाएगा। इस बीच उनकी आत्महत्या के मामले में ये नया मोड़ ही है जो प्रयागराज में हुई पंचपर्मेश्वर की बैठक में महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट को फर्जी कहा गया। इसके साथ ही उनके उत्तराधिकारी घोषित किए जाने की बात पर भी विवाद हुआ।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि का संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया

प्रयागराज:

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि का सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया। महंत नरेन्द्र ‍गिरि का यहां बाघंबरी अखाड़े में निधन हुआ। हालांकि मौत के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक महंत नरेन्द्र गिरि की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। पुलिस घटनास्‍थल पर पहुंच गई है। पूर्व सांसद रामविलास वेदांती ने कहा कि नरेन्द्र गिरि की मौत के पीछे साजिश हो सकती है। इस बीच, यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

प्रयागराज से बड़ी खबर आ रही है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी का निधन हो गया है। यहां के बाघंबरी मठ में ही उनकी मौत हो गई है। फिलहाल मृत्यु के कारणों पर कोई कुछ नहीं बोल रहा है। अधिकारी संदिग्ध मौत बता रहे हैं। मठ पर आवाजाही रोक दी गई है। आला अधिकारी मठ पहुंच रहे हैं। अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि उन्होंने आत्महत्या की है। संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन पोस्टमार्टम के बारे में विचार कर रहा है। मठ पर फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया है। 

नरेंद्र गिरी अपने बयानों को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं। कल सुबह ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उनसे मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि वह लगातार तनाव में रह रहे थे। अपने शिष्य आनंद गिरी से उनका पुराना विवाद भी चल रहा था। पिछले दिनों उन्होंने आनंद गिरी को मठ से अलग कर दिया था। हालांकि बाद में सुलह हो गई थी।

नरेंद्र गिरी के निधन की खबर आते ही संत समाज के साथ ही राजनीतिक दलों में भी शोक की लहर दौड़ गई है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने शोक जताते हुए लिखा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य संत महंत नरेंद्र गिरी जी महाराज के देवलोकगमन की दुःखद सूचना मिली। सनातन धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले पूज्य स्वामीजी द्वारा समाज के कल्याण में दिए योगदान को सदैव याद किया जाएगा। ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

शिष्य आनंद गिरि से विवादों के कारण भी यह चर्चा में रहे
इससे पहले भी यह विवादों में रहे हैं। इनके शिष्य आनंद गिरि से विवादों के कारण भी यह चर्चा में रहे थे। यह विवाद संपत्ति को लेकर था जिस बाद में एक आला अधिकारी के माध्यम से सुलझा लिया गया था। पुलिस के आला अधिकारी हर तरह से मामले की जांच करने का आश्वासन दे रहे हैं।

फर्जी अकाउंट से कई विवादित ट्विट किए गए थे
अभी कुछ हफ्ते पहले ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नाम से बने फर्जी अकाउंट से कई विवादित ट्विट किए गए थे। इसे लेकर नरेंद्र गिरी ने काफी आश्चर्य जताया था और उन्होंने दारागंज थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया था।