हिन्दू विवाह की तरह संस्कार नहीं एक कांट्रैक्ट है निकाह कर्नाटक – उच्च न्यायालय

हाई कोर्ट ने कहा कि मुसलमानों में एक अनुबंध के साथ निकाह होता है और यह अंतत: वह स्थिति प्राप्त कर लेता है जो आमतौर पर अन्य समुदायों में होती है। यही स्थिति कुछ न्यायोचित दायित्वों को जन्म देती है। वे अनुबंध से पैदा हुए दायित्व हैं। अदालत ने कहा कि कानून के तहत नए दायित्व भी उत्पन्न हो सकते हैं।

  • कर्नाटक HC ने कहा- मुस्लिम निकाह एक कांट्रैक्‍ट है, इसके कई मायने
  • फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कराने हाई कोर्ट पहुंचा था मुस्लिम शख्‍स
  • कोर्ट ने याचिका रद्द कर दी, साथ ही 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

कर्णाटक/नयी दिल्ली:

उच्च न्यायालय ने कहा है कि मुस्लिम निकाह एक अनुबंध या कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं और इसके टूट जाने से बने कुछ अधिकारों एवं दायित्वों से पीछे नहीं हटा जा सकता। यह मामला बेंगलुरु के भुवनेश्वरी नगर में 52 साल के  एजाजुर रहमान की एक याचिका से संबंधित है, जिसमें 12 अगस्त, 2011 को बेंगलुरु में एक पारिवारिक अदालत के प्रथम अतिरिक्त प्रिंसिपल न्यायाधीश का आदेश रद्द करने का अनुरोध किया गया था।

रहमान ने अपनी पत्नी सायरा बानो को पांच हजार रुपये के ‘मेहर’ के साथ विवाह करने के कुछ महीने बाद ही ‘तलाक’ शब्द कहकर 25 नवंबर, 1991 को तलाक दे दिया था। इस तलाक के बाद रहमान ने दूसरी शादी की, जिससे वह एक बच्चे का पिता बन गया। बानो ने इसके बाद गुजारा भत्ता लेने के लिए 24 अगस्त, 2002 में एक दीवानी मुकदमा दाखिल किया था. पारिवारिक अदालत ने आदेश दिया था कि वादी वाद की तारीख से अपनी मृत्यु तक या अपना पुनर्विवाह होने तक या प्रतिवादी की मृत्यु तक 3,000 रुपये की दर से मासिक गुजारा भत्ते की हकदार है।

न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित ने 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ याचिका खारिज करते हुए सात अक्टूबर को अपने आदेश में कहा, ‘निकाह एक अनुबंध है जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह एक संस्कार नहीं है। यह बात सत्य है।’ न्यायमूर्ति दीक्षित ने विस्तार से कहा कि मुस्लिम निकाह कोई संस्कार नहीं है और यह इसके समाप्त होने के बाद पैदा हुए कुछ दायित्वों और अधिकारों से भाग नहीं सकता। पीठ ने कहा, ‘तलाक के जरिये विवाह बंधन टूट जाने के बाद भी दरअसल पक्षकारों के सभी दायित्वों और कर्तव्य पूरी तरह समाप्त नहीं होते हैं।’ उसने कहा कि मुसलमानों में एक अनुबंध के साथ निकाह होता है और यह अंतत: वह स्थिति प्राप्त कर लेता है, जो आमतौर पर अन्य समुदायों में होती है। अदालत ने कहा, ‘यही स्थिति कुछ न्यायोचित दायित्वों को जन्म देती है। वे अनुबंध से पैदा हुए दायित्व हैं।’

अदालत ने कहा कि कानून के तहत नए दायित्व भी उत्पन्न हो सकते हैं। उनमें से एक दायित्व व्यक्ति का अपनी पूर्व पत्नी को गुजारा भत्ता देने का परिस्थितिजन्य कर्तव्य है जो तलाक के कारण अपना भरण-पोषण करने में अक्षम हो गई है। न्यायमूर्ति दीक्षित ने कुरान में सूरह अल बकराह की आयतों का हवाला देते हुए कहा कि अपनी बेसहारा पूर्व पत्नी को गुजारा-भत्ता देना एक सच्चे मुसलमान का नैतिक और धार्मिक कर्तव्य है। अदालत ने कहा कि एक मुस्लिम पूर्व पत्नी को कुछ शर्तें पूरी करने की स्थिति में गुजारा भत्ता लेने का अधिकार है और यह निर्विवाद है। न्यायमूर्ति दीक्षित ने कहा कि मेहर अपर्याप्त रूप से तय किया गया है और वधु पक्ष के पास सौदेबाजी की समान शक्ति नहीं होती।

यकीनन ‘वीर’ ही थे सावरकर

राजनाथ सिंह द्वारा दिया गया बयान कि वीर सावरकर ने मोहनदास करमचंद गांधी के कहने पर माफी मांगी थी अथवा माफी के लिए अंग्रेज़ हुकूमत को पत्र लिखा था। इस बात ने देश भर में अनर्गल राजनैतिक बहस छिड़ गईहाई।टीवी चैनल हों या प्रबुद्ध समाचार पत्र सभी इस बहस को दिखा एसएनए अथवा पढ़ा रहे हैं। जब हम उस काल खंड को दहते हैं तो हैरान होते हैं कि जहां सावरकर को दिन में 10 किलो तेल निकालना होता था और उन्हें यह त पता नहीं था कि दो कोठरी छोड़ कर उनका भाई कैद काट रहा है वह पत्र लिख पाये। कोल्हू में बैल कि जगह जुतना और फिर विमर्श पत्र लिखना क्या ही अचंभा है। अब कॉंग्रेस सावरकर को लेकर इतनी दुविधाग्रस्त क्यों है? रत्नगिरी में रहते हुए सावरर दलित बस्तियों में जाने का, सामाजिक कार्यों के साथ साथ धार्मिक कार्यों में भी दलितों के भाग लेने का और सवर्ण एवं दलित दोनों के लिए पतितपावन मंदिर की स्थापना का निश्चय लिया था। जिससे सभी एक स्थान पर साथ साथ पूजा कर सके और दोनों के मध्य दूरियों को दूर किया जा सके। यह भी एक कारण हैं कि कांग्रेस सावरकर की विरोधी बन कर खड़ी हो रही है, वरना 90 के दशक तक तो ऐसा देखने में नहीं आता था। उससे पहले भारत सरकार जब की कांग्रेस सत्तासीन थी ने सावरकर पर डाक टिकट भी जारी किया था। सत्ता के लाले पड़ने पर कॉंग्रेस हमेशा से झूठ सच की राजनीति करती आई है, इस मामले में भी यही हुआ।

राज वशिष्ठ, चंडीगढ़:

मेरे मन में प्रश्न उठता है कि, क्या मोहनदास गांधी कभी पर्यटन के लिए भी कालापानी गए थे? यदि नहीं गए थे तो वीर सावरकर ने गांधी से विमर्श कब किया? साथ ही एक बात और उठती है कि वीर सावरकर को क्या ही अनुमति थी कि वह पत्र व्यवहार कर सकें? क्या हमारी अथवा नयी पीढ़ी को पता भी है कि सावरकर को काला पानी कि सज़ा क्यों हुई थी? क्या उनके उस अपराध के पश्चात भी अंग्रेज़ सरकार उन्हें कागज कलाम पदाने कि हिम्मत जुटा पाती?

इन प्रश्नों के उत्तर खोजना कोई पुआल में सुई ढूँढने जैसा नहीं है। बस थोड़े से प्रयास की आवश्यकता है।

सबसे पहले पहली बात की सावरकर को सज़ा क्यों हुई?

सावरकर को सज़ा देने की पृष्ठ भूमि अंग्रेज़ सरकार बहुत पहले ही से तय कर चुकी थी। सावरकर की 1901 में प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंध का गौरव प्राप्त करती अत्यंत विचारोतेजक पुस्तक ‘1857 का सावतंत्र्य समर’। इस पुस्तक के प्रकाशन की संभावना मात्र से अंग्रेज़ हुकूमत थर्रा गयी थी। फिर भी इस प्स्त्का का गुप्त प्रकाशन एम वितरण हुआ। अंग्रेजों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस पुस्तक को नष्ट करने में कोई कोर कसर न छोड़ी।

वीर सावरकर को लंदन में रहते हुए दो हत्याओं का आरोपी बनाया गया। पहली, 1 जुलाई 1909 को मदन लाल ढींगरा द्वारा कर्नल विलियम हट वायली की हत्या जिसका अंग्रेजों ने सूत्रधार वीर दामोदर सावरकर को ठहराया। दूसरी 1910 में हुई नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए नासिक षडयंत्र काण्ड के अंतर्गत इन्हें साल 1910 में इंग्लैंड में गिरफ्तार किया गया। 8 अप्रैल,1911 को काला पानी की सजा सुनाई गई और सैल्यूलर जेल (काला पानी) पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया। मुक़द्दमा अंग्रेजों द्वारा अङ्ग्रेज़ी अदालत में चलाया गया और बाकी प्रबुद्ध विचाराओं की भांति इन्हे भी काले पानी की सज़ा सुना दी गयी। इन्हें 25 – 25 वर्ष की दो कारावासों का दंड दिया गया था जिसका अर्थ है की वह अपने आगामी जीवन के 50 वर्ष काला पानी में कोल्हू अथवा अंग्रेज़ मुलाजिमों की बग्घी में जुते रहते।

अब दूसरे प्रश्न पर, क्या मोहन दस करमचंद गांधी कभी अंडेमान राजनैतिक पर्यटन के लिए भी गए थे, तो उत्तर है ‘नहीं’। फिर गांधी – सावरकर कहाँ मिले?

गांधी सावरकर पहली बार इंग्लैंड में मिले थे, अक्तूबर 1906 में मिले थे। यह एक बहुत ही संक्षिप्त सी मुलाक़ात थी। दूसरी मुलाक़ात 24 अक्तूबर 1909 को इंडिया हाउस लंदन में हुई। तब तक वीर सावरर किसी भी आक्षेप को नहीं झेल रहे थे। अब यह प्रश्न कहाँ से उठा की गांधी ने सावरकर को दया याचिका डालने की सलाह कब और कहाँ दी?

इस बाबत व‍िक्रम संपत ने अपनी क‍िताब ‘Echoes from a Forgotten Past, 1883-1924’ में ल‍िखा है क‍ि व‍िनायक दामोदर सावरकर के छोटे भाई नारायण दामोदर सावरकर ने 1920 में एक चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्‍होंने अपने भाई के धुर व‍िरोधी व‍िचारधारा वाले मोहनदास करमचंद गांधी को खत ल‍िखा। छह खतों में से यह पहला खत ल‍िखा गया था 18 जनवरी, 1920 को। इसमें उन्‍होंने सरकारी माफी की योजना के तहत अपने दोनों बड़े भाइयों को जेल से र‍िहा करवाने के संबंध में मदद व सलाह मांगी थी।

नारायण सावरकर ने अपने पत्र में लिखा था कि कल (17 जनवरी) मुझे भारत सरकार द्वारा जानकारी मिली कि सावरकार बंधुओं को उन लोगों में शामिल नहीं किया गया है, जिन्हें रिहा किया जा रहा है। ऐसे में अब साफ हो चुका है कि भारत सरकार उन्हें रिहा नहीं करेगी। अपने पत्र में उन्होंने महात्मा गांधी से सुझाव मांगा था कि ऐसी परिस्थितियों में आगे क्या किया जा सकता है। इस चिट्ठी का जिक्र, कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी के 19वें वॉल्यूम के पेज नंबर 384 पर किया गया है।

नारायण सावरकर की इस चिट्ठी का जवाब महात्मा गांधी ने 25 जनवरी 1920 को दिया था, जिसमें उन्होंने सलाह दी थी कि राहत प्रदान करने की एक याचिका तैयार करें, जिसमें तथ्यों के जरिए साफ करें कि आपके भाई द्वारा किया गया अपराध पूरी तरह से राजनीतिक था। उन्होंने अपने जवाब में यह भी लिखा कि वह अपने तरीके से इस मामले में आगे बढ़ रहे हैं। गांधी द्वारा दिए गए इस जवाब का उल्लेख कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी के 19वें संस्करण में भी देखा जा सकता है।

अंग्रेजों से माफी मांगने का। इस मामले पर गांधी ने सावरकर को ‘चतुर’ बताते हुए कहा था कि ‘उन्होंने (सावरकर ने) स्थिति का लाभ उठाते हुए क्षमादान की मांग की थी, जो उस दौरान देश के अधिकांश क्रांतिकारियों और राजनीतिक कैदियों को मिल भी गई थी। सावरकर जेल के बाहर रहकर देश की आजादी के लिए जो कर सकते थे वो जेल के अंदर रहकर नहीं कर पाते।’

गांधी जी के इस कथन से इतना तो साफ है कि सावरकर अंग्रेजों के सामने झुके नहीं थे, बल्कि आगे की लड़ाई के लिए चतुराई दिखाई थी। खैर, बात करते हैं सावरकर से जुड़े तमाम पहलुओं की जो उनपर राय बनाने से पहले जानना जरूरी है।

उत्तराखंड, गुजरात के बाद क्या अब खट्टर का नंबर है

भारतीय जनता पार्टी ने कई राज्यों में गैर-प्रमुख जातियों के नेताओं को मुख्यमंत्री का पद सौंपा लेकिन हाल में हुए बदलावों को देखकर लगता है कि बीजेपी का हृदय परिवर्तन हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री को बदला जाना यह बताता है कि पार्टी ने जाति प्रमुख को महत्व देते हुए रणनीति में बदलाव किया है और इसी का कारण है कि विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में चुनाव से पहले वहां की प्रमुख जाति के चेहरों को सीएम की कुर्सी पर बैठाया। उत्तराखंड और कर्नाटक के बाद सबसे ताजा उहादरण गुजरात का है, जहां भाजपा ने बहुसंख्यक और प्रभुत्वशाली पाटीदार समाज की मांग के आगे झुकते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पद से हटा दिया और भूपेंद्र पटेल को नया मुख्यमंत्री बनाया।

चंडीगढ़/नयी दिल्ली:

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को गुरुवार को अचानक दिल्ली बुलाया गया, जहां पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। मुख्यमंत्री खट्टर पीएम से मिलने उनके आवास पर पहुंचे हैं। दोनों नेताओं के बीच एक घंटे तक बैठक चली है। बताया जा रहा है कि इस दौरान वो गृह मंत्री अमित शाह सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों और आरएसएस के कुछ पदाधिकारियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि और मुलाकातों को लेकर खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इनकार किया है। कयास ऐसे भी लगाए जा रहे हैं कि क्या बीजेपी संगठन गुजरात के बाद अब हरियाणा में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बारे में खट्टर ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी को उनके जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर बधाई दी है। हरियाणा सरकार के नए इनीशिएटिव्स को लेकर पीएम मोदी जी से बातचीत हुई है। मेरी फसल मेरा ब्यौरा, मेरा पानी मेरी विरासत, सहित राइट टू सर्विस कमिशन, के सॉफ्टवेयर को लेकर और तमाम नए प्रोजेक्ट्स के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी है।

अपने दिल्ली दौरे को लेकर बोले सीएम खट्टर ने कहा कि दिल्ली दौरे पर और कुछ मुलाकातें नहीं हैं। गुड़गांव से होते हुए कल चंडीगढ़ के लिए वापसी होगी। करनाल की घटना और किसान आंदोलन को लेकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा हुई है। करनाल की घटना की जानकारी दी है. सुप्रीम कोर्ट ने जो रास्ता छोड़ने की बात की है उसकी कमेटी की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी है।

जानकारों की मानें तो बरोदा उपचुनाव में बीजेपी की हार और इसके अलावा निकाय चुनाव में बीजेपी की सोनीपत और अंबाला में हार हुई. किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा बीजेपी बैकफुट पर नजर आई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री मनोहर लाल और गृहमंत्री अनिल विज के बीच कई विवाद सामने आए हैं। दोनों के बीच का विवाद हाईकमान तक भी पहुंचा है।

हालांकि इस मुलाकात का एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ है, चर्चा जोरों पर कि इस बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बदल सकते हैं, इसके साथ ही हरियाणा में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदर तीन बीजेपी शासित राज्यों के 4 मुख्यमंत्रियों को बदल चुकी है. इसकी शुरूआत हुई उत्तराखंड से हुई और बयार चलते-चलते गुजरात तक पहुंची। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि ये हरियाणा का नंबर भी आ सकता है।

मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा गैर-प्रमुख जाति के नेताओं को चुनने के लिए जानी जाती रही है. फिर चाहे बात हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की हो या फिर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की. इन दोनों नेताओं को नरेंद्र मोदी-अमित शाह नेतृत्व ने जाट और मराठा समुदायों के बाहर से चुना था. जिसमें से खट्टर अभी भी मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हैं, हालांकि सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि 2024 में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा मुख्यमंत्री बदल सकती है और गुजरात के तर्ज पर यहां भी किसी जाति-समुदाय प्रमुख चेहरे को राज्य का सीएम बना सकती है. हालांकि, ये सिर्फ भी कयास भर है.

कर्णाटक की इन्दिरा कैंटीन का नाम अन्नपूर्ण कैंटीन करने की मांग

पिछले हफ्ते भारतीय खेलों के सर्वोच्च पुरस्कार का नाम राजीव गांधी खेल रत्न से हटाकर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर दिया गया। इसके बाद अब कर्नाटक में चलाई जा रही इंदिरा कैंटीन का नाम बदलने की मांग जोर पकड़ने लगी है। कर्नाटक बीजेपी के नेता ने राज्य के मुख्यमंत्री बी.एस. बोम्मई से इंदिरा कैंटीन का नाम बदलकर अन्नपूर्णाश्वरी रखने की मांग की तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे प्रतिशोध की राजनीति करार दिया। इंदिरा कैंटीन कर्नाटक सरकार द्वारा संचालित एक खाद्य सब्सिडी कार्यक्रम है।

बंगलोर/नयी दिल्ली(ब्यूरो) :

06 अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि अब इस पुरस्कार को भारत के हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम पर दिया जाएगा। हालाँकि जहाँ एक ओर पूरे देश में इस फैसले का स्वागत किया गया वहीं इस पर राजनीति भी शुरू हो चुकी है। ताजा मामला कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया का है जिन्होंने एक और योजना का नाम बदले जाने की संभावना पर भाजपा पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

दरअसल, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने 07 अगस्त 2021 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस बोम्मई को ट्विटर पर टैग करते हुए यह माँग की थी कि कर्नाटक में चलने वाली ‘इंदिरा कैंटीन’ के नाम को बदलकर ‘अन्नपूर्णेश्वरी कैंटीन’ किया जाए। रवि ने अपने ट्वीट में आगे लिखा था कि इसका कोई कारण नहीं दिखता कि कर्नाटक के लोग खाना खाते समय आपातकाल के उन काले दिनों को याद करें।

रवि की इस माँग पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि इंदिरा कैंटीन के नाम को बदलने की बात करना कुछ और नहीं बल्कि भाजपा द्वारा की जा रही प्रतिशोध की राजनीति है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के नेतृत्व के नाम पर कई कार्यक्रम हैं ऐसे में क्या कभी उन्होंने इन नामों को बदलने की कोशिश की? सिद्धारमैया ने कहा कि खेल रत्न में राजीव गाँधी का नाम था, ऐसे में वह (भाजपा) इसे क्यों बदलना चाहते थे? साथ ही उन्होंने पीएम मोदी से इस मुद्दे पर जवाब माँगा है।

वहीं दूसरी ओर शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मुद्दे पर कहा कि राजीव गाँधी के द्वारा दिए गए बलिदान का अपमान किए बिना भी मेजर ध्यानचंद को सम्मान दिया जा सकता था। शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखते हुए राउत ने कहा कि राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड किया जाना एक ‘राजनैतिक दाँव’ है न कि लोगों की इच्छा के अनुरूप लिया गया फैसला।

ज्ञात हो कि केंद्र की मोदी सरकार ने शुक्रवार (6 अगस्त 2021) को खेल रत्न पुरस्कार मेजर ध्यानचंद के नाम पर दिए जाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा था, “मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल रत्न पुरस्कार का नाम रखने के लिए देशभर से नागरिकों का अनुरोध मिले हैं। मैं उनके विचारों के लिए उनका धन्यवाद करता हूँ। उनकी भावना का सम्मान करते हुए, खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा! जय हिंद!”

बसवराज सोमप्पा बोम्मई होंगे कर्णाटक के नए मुख्यमंत्री

कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री का पूरा नाम बसवराज सोमप्पा बोम्मई है। कर्नाटक के गृह मामले, कानून, संसदीय मामले के मंत्री रहे बोम्मई ने हावेरी और उडुपी के जिला प्रभारी मंत्री के रूप में भी कार्य किया। इससे पहले उन्होंने जल संसाधन और सहकारिता मंत्री के रूप में कार्य किया है. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसआर बोम्मई के पुत्र बसवराज ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई की है। उन्होंने जनता दल से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी।

चंडीगढ़/कर्नाटक:

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के दो साल पूरे होने पर बीएस येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के ऐलान के बाद शुरू हुई हलचल अब शांत है। मंगलवार (जुलाई 27, 2021) शाम हुई विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए बसवराज बोम्मई का नाम सर्वसम्मति से पास कर दिया है।

कहा जा रहा है कि बैठक में स्वयं बीएस येदियुरप्पा ने ही इस नाम का प्रस्ताव रखा और फिर बाकी नेताओं ने इस पर सहमति दी। इससे पहले बसवराज, येदियुरप्पा सरकार में गृह मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बुधवार यानी 28 जुलाई को वह 3 बजकर 20 मिनट पर सीएम पद की शपथ लेंगे।

बता दें कि बसवराज के पिता एस आर बोम्मई भी राज्य में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वहीं बसवराज ने भी जनता दल के साथ राजनीति की शुरुआत की थी। साल 1998 और 2004 में वह धारवाड़ से दो बार विधान परिषद के लिए चुने गए। लेकिन साल 2008 में वह भाजपा में शामिल हो गए और इसी वर्ष उन्होंने हावेरी जिले के शिगगाँव से विधायक पद पर जीत हासिल की।

28 जनवरी 1960 को जन्मे बसवराज बोम्मई फिलहाल कर्नाटक के गृह मंत्री हैं। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की हुई है। राज्य में कई सिंचाई प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए उनकी तारीफ होती रही है। इसके अलावा वह येदियुरप्पा के करीबी माने जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में दो साल सरकार चलाने के बाद मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने एक कार्यक्रम में ऐलान किया था कि वह अपना सीएम का पद छोड़ रहे हैं। हालाँकि आज उन्होंने बोम्मई का नाम पास होने पर कहा, “हमने सर्वसम्मति से बसवराज एस बोम्मई को भाजपा विधायक दल का नेता चुना है। मैं पीएम मोदी को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूँ। पीएम के नेतृत्व में वह (बोम्मई) कड़ी मेहनत करेंगे।”

गौरतलब है कि केंद्र की कॉन्ग्रेस सरकार ने एसआर बोम्मई की सरकार को 21 अप्रैल 1989 को संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत कर कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। उन्हें बहुमत साबित करने का भी मौका नहीं दिया गया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। एसआर बोम्मई बनाम भारत सरकार नाम से मशहूर इस मामले में 1994 में शीर्ष अदालत का फैसला आया था। इसमें अदालत ने उनकी सरकार की बर्खास्तगी को अनुचित बताया था। कहा था कि उन्हें बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए था। इसी फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 356 लागू करने में केंद्र सरकार की मनमानी शक्ति को सिमित करने के लिए कई शर्तें जोड़ी थी।

बढ़ती उम्र के चलते येदियुरप्पा ने दिया इस्तीफा

कर्नाटक के सीएम बीएस येदियुरप्पा ने इस्तीफा देने का फैसला किया है. उन्होंने भाषण के दौरान इस्तीफा देने की घोषणा की. बता दें कि मुख्यमंत्री ने करीब 35 मिनट तक भाषण दिया. इस दौरान कई बार उनकी आंखों में आंसू भी आ गए. सीएम येदियुरप्पा ने रविवार को कहा था कि वो बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व का फैसला मानेंगे. माना जा रहा है कि बढ़ती उम्र के चलते येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा. क्या अगला मुख्यमंत्री नॉन – लिंगायत होगा.

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

पिछले दिनों से चल रही अटकलों के बीच कर्नाटक (Karnataka CM) के मुख्‍यमंत्री बीएस येडियुरप्‍पा (BS Yediyurappa) ने सोमवार को अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है. वह शाम 4 बजे राज्‍यपाल से मुलाकात करेंगे. येडियुरप्‍पा ने अपने इस्‍तीफे की जानकारी उनकी सरकार को 26 जुलाई को दो साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में दी है.

बीएस येडियुरप्‍पा ऐसी संभावना जता चुके थे कि शायद 25 जुलाई को उनका मुख्‍यमंत्री के तौर पर आखिरी दिन होगा. उनका कहना था कि 25 जुलाई को केंद्रीय नेतृत्‍व उन्‍हें जो भी निर्देश देगा, वह 26 जुलाई से उसी के अनुसार काम शुरू करेंगे. उनका यह भी कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा पर उन्‍हें पूरा विश्‍वास है. आलाकमान जो भी निर्देश देगा, उन्‍हें वह मंजूर होगा.

शनिवार को इस बारे में उन्‍होंने कहा था कि मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेने के पहले दिन से ही उन्‍होंने कई चुनौतियों का सामना किया है. लेकिन वह लोगों के जीवन का बेहतर बनाने के लिए किए गए ईमानदारी के काम को लेकर संतुष्‍ट हैं. बीएस येडियुरप्‍पा ने रविवार को कहा था कि वो इस पद पर बने रहेंगे या नहीं, कल तक (26 जुलाई) पता चल जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि वो अगले 10 से 15 साल तक भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करते रहेंगे. येडियुरप्‍पा कर्नाटक के लिंगायत समुदाय से आते हैं. समुदाय में उनकी अच्‍छी पकड़ मानी जाती है.

वहीं कर्नाटक के नए मुख्‍यमंत्री की रेस में भी बीजेपी के कुछ नेताओं का नाम है. इनमें प्रह्लाद जोशी, मुरुएश आर निरानी, बासवराज बोम्‍मई, अरविंद बेलाड़ और बासनगौड़ा पाटिल यतनाल प्रमुख हैं.

आज गुरु पूर्णिमा पर विशेष

अर्थात् (हमको) असत्य से सत्य की ओर ले चलो । अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो ।। मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो ॥।

उषा केडिया , मैसूर (कर्नाटक)

उषा केडिया ,
मैसूर (कर्नाटक
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      असत्य से सत्य की ओर अंधकार से प्रकाश की ओर मृत्यु से अमरता की ओर हमें केवल गुरु ही ले जा सकता है ।यहाँ प्रश्न आता है की गुरु ही क्यूँ हमें ले जा सकता है ???

        गुरु का शब्द दो वर्णों से बना है गु + रु = गुरु गु का अर्थ अंधकार और रु का अर्थ प्रकाश । गु – कौन गु वह चन्द्रमा है वह अज्ञान है जिसमें कोई प्रकाश नही और रु -वह सूर्य वह ईश्वर है जो स्वयं के ज्ञान से प्रकाशित है ।

         जैसा कि हम सभी जानते है चन्द्रमा के पास अपना कोई प्रकाश नहीं लेकिन उसने अपना मुख सूर्य के सामने रखा हुआ है चूँकि सूर्य में अपना प्रकाश है तो जब चन्द्रमा उसके सामने आ जाता है तो उसके ऊपर सूर्य का प्रकाश पड़ने लगता है और इस तरह जहाँ जहाँ सूर्य का प्रकाश पड़ता है वहाँ वहाँ से चन्द्रमा भी प्रकाशित हो जाता है और एक दिन पूर्ण प्रकाश को पा जाता है ,उस प्रकाश को पा अब वो काली रात ( अंधकार)में दुनिया को प्रकाशित करता है।

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        तो बात चल रही थी गुरु ही क्यूँ  हमें अंधकार से प्रकाश की ओर असत्य से सत्य की ओर और मृत्यु से अमरता की ओर ले जा सकता है ?? 

    उत्तर है क्यूँकि गुरु ने ही अपना मुख उस चन्द्रमा की तरह सूर्य रूपी ईश्वर की तरफ़ कर उससे प्रकाश प्राप्त किया है और अब वो ही केवल और केवल दुनिया के अंधकार को अपने ज्ञान द्वारा मिटा सकते है उनकी वाणी उस चन्द्रमा की तरह ही तपित हृदय को शीतलता प्रदान करती है ।

       इस प्रकृति पर लाखों करोड़ों लोग है किंतु सभी लोग तो गुरु की शरण में नही आते तो उनका जीवन उस काली रात की चादर सा ही रह जाता है और जो गुरु की शरण में आ जाते है उनका जीवन तारो सा हो जाता है जो काली रात में आसमान में चन्द्रमा के साथ झिलमिलाते है । 

        गुरु तो हमारी रूह है जो हमें बताते है कि तुम शरीर नही आत्मा हो , क्यूँकि मृत्यु के बाद शरीर तो वहीं पड़ा है तो फिर क्यूँ नही उसे गले लगते हो जिसके साथ ताउम्र सोते थे  उसके साथ एक रात भी सो नही पाते । क्यूँकि जिसके साथ तुम रहते थे वो आत्मा थी न की शरीर । गुरु बताते है कि हर आत्मा में ईश्वर है सभी आत्माओं को चाहे वह छोटा हो या बड़ा उसमें हमें उनके दर्शन कर उनको नमन करना है । गुरु पूर्ण है और उनके भावों को अपना कर हमें भी अपने जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष की तरफ़ आगे बढ़ना है ।

लक्षद्वीप का राजनैतिक संकट गहराया

पिछले साल दिसंबर में लक्षद्वीप का कमान प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को दिया गया। इसके बाद उन्होंने लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, लक्षद्वीप असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम विनियमन, लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन और लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियमों में संशोधन के मसौदे लेकर आए। इसमें एंटी-गुंडा एक्ट और दो से अधिक बच्चों वालों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का भी प्रावधान है।

पंचकुला/केरल :

भारत में कोरोना की दूसरी लहर के बीच तौक्ते तूफान ने बर्बादी मचाई और अब यास तूफान तबाही मचा रहा है। इन सबके बीच केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में विवादों का तूफान सामने आया है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांति के लिए जाना जाने वाला लक्षद्वीप इस समय एक राजनीतिक विवाद को लेकर चर्चा में है। केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को हटाने की मांग करने वाले #SaveLakshadweep हैशटैग वाले सैकड़ों पोस्ट से सोशल मीडिया भरा पड़ा है। स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक लोगों से लेकर निवासी भी प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल, प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को लक्षद्वीप में कोरोना संक्रमण मामलों में आए उछाल के लिए दोषी ठहराया जा रहा है. उन पर भारत के सबसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश में सामाजिक तनाव पैदा करने का भी आरोप है।

आइए जानते हैं वो 10 वजहें जिनकी वजह से लक्षद्वीप में ये विवादों का सियासी तूफान आया है।

कोरोना का हॉट स्पॉट बना लक्षद्वीप

भारत में कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान लक्षद्वीप कोविड-19 के ग्रीन जोन में था प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल द्वारा क्वारंटीन और यात्रा नियमों में ढील की वजह से लक्षद्वीप को कोविड-19 के लिए ‘हाइएस्ट पॉजिटिविटी’ वाली जगह बना दिया है लक्षद्वीप में कोविड-19 के 7,000 से अधिक मामले हैं लक्षद्वीप ने इस साल 18 जनवरी को अपने पहले कोविड-19 मामलों की जानकारी दी, जब 14 व्यक्तियों की कोरोना वायरस संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी 2011 की जनगणना के अनुसार लक्षद्वीप की जनसंख्या 65,000 से भी कम है लक्षद्वीप में कोरोना का पॉजिटिविटी रेट ज्यादातर 10 से कम रहा है हालांकि, कभी-कभी यह कुछ दिनों के में 20 फीसदी को पार कर जाता है

पूर्व प्रशासक दिवंगत दिनेश्वर शर्मा के प्रशासनकाल में क्वारंटीन के नियमों का सख्ती से पालन किया गया था वहीं, अब यात्रियों को लक्षद्वीप पहुंचने के लिए केवल कोरोना वायरस की निगेटिव रिपोर्ट की जरूरत होती है इस पर प्रफुल्ल खोड़ा पटेल का कहना है कि लक्षद्वीप की अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह बदलाव लाए गए थे

लक्षद्वीप पशु संरक्षण नियम 2021

प्रफुल्ल खोड़ा पटेल ने लक्षद्वीप पशु संरक्षण नियम 2021 प्रावधान प्रस्तावित किया है जिसके अंतर्गत गाय, सांड और बैल की हत्या पर प्रतिबंध लग जाएगा इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया जा रहा है और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रफुल्ल खोड़ा पटेल आरएसएस के बीफ बैन के एजेंडे को लागू कर रहे हैं हालांकि, भारत में बीफ में ज्यादातर भैंस का मांस होता है

लक्षद्वीप की आबादी में लगभग 97 फीसदी मुसलमान हैं और इनमें अधिकतर अनुसूचित जनजाति के हैं लक्षद्वीप की जनजातीय आबादी लगभग 95 फीसदी है प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बीफ उनके नियमित आहार का हिस्सा है प्रफुल्ल खोड़ा पटेल का समर्थन करने वाले राज्य को गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने वाले संवैधानिक प्रावधान का हवाला देते हैं

मिड-डे मील से मांसाहार को हटाना

प्रफुल्ल खोड़ा पटेल ने लक्षद्वीप के स्कूलों में मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील से मांसाहारी भोजन को हटा दिया है इस निर्णय का भी जमकर विरोध हो रहा है प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बच्चों के खाने से मांसाहार को नही हटाना चाहिए 

शराब की बिक्री और बार की अनुमति

प्रफुल्ल खोड़ा पटेल ने केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के तरीके के तौर पर लक्षद्वीप में बार की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है गुजरात की तरह ही लक्षद्वीप में भी शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगाने वाला एक निषेध कानून है दिलचस्प बात यह है कि संविधान भारत में शराबबंदी का प्रावधान करता है इस कदम का स्थानीय निवासियों और राजनीतिक नेताओं द्वारा जोरदार विरोध किया जा रहा है यहां शराब का विरोध चौंकाने वाला है क्योंकि लक्षद्वीप की अधिकांश आबादी मलयालम भाषी है और देश में सबसे अधिक शराब खपत करने वाले राज्यों में सामिल केरल के साथ गहरे संबंध रखती है

असामाजिक गतिविधि विनियमन विधेयक

विवादों के इस तूफान में लक्षद्वीप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित असामाजिक गतिविधि विनियमन विधेयक भा अहम है प्रस्तावित कानून में किसी संदिग्ध को हिरासत में लेने के लिए कोर्ट द्वारा जारी वारंट की जरूरत नही होगी प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘गुंडा एक्ट’ करार दिया और विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि लक्षद्वीप में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार देश की सबसे कम अपराध दर है प्रफुल्ल खोड़ा पटेल का तर्क है कि लक्षद्वीप में ड्रग्स से संबंधित अपराधों में बढ़ोत्तरी देखी गई है

कर्नाटक को कार्गो का डायवर्जन

प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के नेतृत्व पर ये भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वह केरल के साथ लक्षद्वीप के संबंधों को बाधित कर रहे हैं साथ ही भाजपा शासित राज्य कर्नाटक को फायदा पहुंचा रहे हैं दरअसल, पहले लक्षद्वीप के लिए आने वाले कार्गो को केरल के बेपोर बंदरगाह पर डॉक किया जाता था केरल के साथ द्वीप के निवासियों के मजबूत सांस्कृतिक संबंध हैं प्रफुल्ल खोड़ा पटेल पर आरोप है कि उन्होंने भाजपा शासित राज्य को लाभ पहुंचाने और केरल के साथ लक्षद्वीप के संबंधों को बाधित करने के लिए कार्गो को कर्नाटक के मैंगलोर बंदरगाह पर भेजा

लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण

इन सभी मुद्दों में सबसे विवादास्पद लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन 2021 है, जिसे प्रफुल्ल खोड़ा पटेल द्वारा प्रस्तावित किया गया है अगर इसे लागू किया जाता है, तो यह प्रशासक के तौर पर सरकार को मजबूत करेगा दरअसल, इसके अंतर्गत लक्षद्वीप में ‘खराब लेआउट या पुराने’ बुनियादी ढांचे के रूप में पहचाने जाने वाले किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए विकास प्राधिकरणों का गठन करने की प्रशासक को शक्ति मिलती है केवल छावनी क्षेत्रों को ही इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है प्रदर्शनकारियों द्वारा इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि इस कानून का उद्देश्य ‘रियल इस्टेट हितों’ को साधना और अनुसूचित जनजाति के लोगों की छोटी जमीनों को हड़पना है

लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियम

केंद्र शासित प्रदेश में लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियम प्रस्तावित किया गया है इस नियम के अनुसार, दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होगा प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लक्षद्वीप की कुल प्रजनन दर 1.6 है यह कानून कई प्रमुख नेताओं को अयोग्य घोषित करने के लिए लाया गया है

संविदा नौकरियों को खत्म करना

प्रदर्शनकारियों का ये भी आरोप है कि लक्षद्वीप में विभिन्न विभागों में संविदा कर्मचारी के तौर पर काम करने वाले लोगों को भी हटाया जा रहा है प्रफुल्ल खोड़ा पटेल पर आरोप है कि पर्यटन विभाग, आंगनवाड़ी, शिक्षण संस्थानों समेत कई विभागों से लोगों को बड़ी संख्या में बर्खास्त किया जा रहा है

सड़कों का चौड़ीकरण

प्रफुल्ल खोड़ा पटेल ने लक्षद्वीप में सड़कों के चौड़ीकरण और हाइवे निर्माण के आदेश भी दिए हैं प्रदर्शनकारी और नेता इसका भी विरोध कर रहे हैं दरअसल, लक्षद्वीप में सबसे बड़ा बसा हुआ द्वीप एंड्रोथ केवल 4.9 वर्ग किमी में फैला है जिसका घनत्व 2,312 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है सबसे कम घने द्वीप बितरा में 271 लोग 0.10 वर्ग किमी क्षेत्र में रहते हैं प्रदर्शनकारी का कहना है कि इतनी छोटी जमीन पर किस तरह से हाइवे या मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाए जा सकते हैं?

2 – DG कोरोना के खिलाफ DRDO का नया हथियार

कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की जंग लगातार जारी है. इस बीच रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की ओर से शुभ समाचार देश को मिला है और डीआरडीओ ने एंटी-कोविड मेडिसन, 2 डीजी (2-DG) लॉन्च कर दी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोमवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम में 2 डीजी की पहली खेप को रिलीज की।

नई दिल्ली(ब्यूरो): 

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से एंटी-कोविड मेडिसिन, 2 डीजी (2-DG) लॉन्च कर दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस दवा की पहली खेप को रिलीज की।

पाउडर फॉर्म में उपलब्ध है दवा

डीआरडीओ के अनुसार, ‘2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज’ दवा को इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS) द्वारा हैदराबाद की डॉक्टर रेड्डी लैब के साथ मिलकर तैयार किया है। हाल ही में क्लीनिकल-ट्रायल में पास होने के बाद ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इस दवा को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। बताया जा रहा है कि ये दवाई सैशे में उपलब्ध होगी. यानी मरीजों को इसे पानी में घोलकर पीना होगा।

इस दवा से ऑक्सीजन लेवल रहेगा मेंटेन

अधिकारियों का कहना है कि ग्लूकोज पर आधारित इस दवा के सेवन से कोरोना मरीजों को ऑक्सजीन पर ज्यादा निर्भर नहीं होना पड़ेगा। साथ ही वे जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे। क्लीनिक्ल-ट्रायल के दौरान भी जिन कोरोना मरीजों को ये दवाई दी गई थी, उनकी RT-PCR रिपोर्ट जल्द निगेटिव आई है। उन्होंने बताया कि ये दवा सीधा वायरस से प्रभावित सेल्स में जाकर जम जाती है और वायरस सिंथेसिस व एनर्जी प्रोडक्शन को रोककर वायरस को बढ़ने से रोक देती है। इस दवा को आसानी से उत्पादित किया जा सकता है. यानी बहुत जल्द इसे पूरे देश में उपलब्ध कराया जा सकेगा।

देशभर में कोरोना के 24 घंटे में 281386 नए केस आए सामने

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटे में भारत में 2 लाख 81 हजार 286 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए है, जबकि इस दौरान 4106 लोगों की जान गई। इसके बाद भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 2 करोड़ 49 लाख 65 हजार 463 हो गई है, जबकि 2 लाख 74 हजार 390 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, देशभर में पिछले 24 घंटे में 3 लाख 78 हजार 741 लोग ठीक हुए, जिसके बाद कोविड-19 से ठीक होने वाले लोगों की संख्या 2 करोड़ 11 लाख 74 हजार 76 हो गई है। इसके साथ ही देशभर में एक्टिव मामलों में भी गिरावट आई है और देशभर में 35 लाख 16 हजार 997 लोगों का इलाज चल रहा है।

डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉक्टर अनंत नारायण ने बताया, ‘सीसीएमबी हैदराबाद में हमने इसका पहला टेस्ट किया था, उसके बाद हमने ड्रग कंट्रोल से कहा कि क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दें। ट्रायल में हमने देखा है कि कोरोना पेशेंट को काफी फायदा हुआ. टेस्टिंग के बाद फेज 2 सही से किया और फेज 3 में हमने बहुत बड़े पैमाने पर प्रयोग किया।’

डीआरडीओ ने डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज के साथ मिल बनाई दवा

कोरोना की इस दवा को डीआरडीओ के Institute of Nuclear Medicine and Allied Sciences यानी INMAS ने हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज के साथ मिलकर तैयार किया है।

इस दवा से 7 दिन में ठीक हो जाएंगे मरीज

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि 2-डीजी एक जेनेरिक मॉलीक्यूल है और ग्लुकोज से मिलती जुलती है, इसलिए इसका उत्पादन आसान होगा और ये दवा देश में बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराई जा सकेगी। डॉक्टर अनंत नारायण ने कहा, ‘इस ड्रग को हम जल्द से जल्द मार्किट में लाने का काम कर रहे है. यह दवा पाउडर के रूप में आता है पानी में घोल कर दिया जाता है। इसको दिन में 2 बार सुबह-शाम देने के बाद मरीज लगभग सात दिन में लोग ठीक हो रहे है।

ऑक्सीजन की किल्लत से मिलेगी राहत

इस दवा के बाजार में आने से एक और बड़ी राहत मिलेगी. अभी जो ऑक्सीजन की मारा-मारी है, दावा है कि इस दवा के मिलने के बाद ये समस्या बहुत हद तक कम होगी साथ ही ये दवा कोविड से संक्रमित मरीजों की अस्पताल में दाखिले की संख्या को भी कम करेगी. यानी मरीज घर पर रहकर ही डॉक्टर की सलाह से ये दवा लेकर ठीक हो जाएंगे।

इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तन लेने के पश्चात दलित नहीं ले सकेंगे जातिगत आरक्षण का लाभ

हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था है, हिन्द धर्म 4 वर्णों में बंटा हुआ है, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वेश्या एवं शूद्र। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात पीढ़ियों से वंचित शूद्र समाज को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए संविधान में आरक्षण लाया गया। यह आरक्षण केवल (शूद्रों (दलितों) के लिए था। कालांतर में भारत में धर्म परिवर्तन का खुला खेल आरंभ हुआ। जहां शोषित वर्ग को लालच अथवा दारा धमका कर ईसाई या मुसलिम धर्म में दीक्षित किया गया। यह खेल आज भी जारी है। दलितों ने नाम बदले बिना धर्म परिवर्तन क्यी, जिससे वह स्वयं को समाज में नचा समझने लगे और साथ ही अपने जातिगत आरक्षण का लाभ भी लेते रहे। लंबे समय त यह मंथन होता रहा की जब ईसाई समाज अथवा मुसलिम समाज में जातिगत व्यवस्था नहीं है तो परिवर्तित मुसलमानों अथवा इसाइयों को जातिगत आरक्षण का लाभ कैसे? अब इन तमाम बहसों को विराम लग गया है जब एकेन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद सिंह ने सांसद में स्पष्ट आर दिया कि इस्लाम या ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले दलितों के लिए आरक्षण की नीति कैसी रहेगी।

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले दलितों को चुनावों में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा वह आरक्षण से जुड़े अन्य लाभ भी नहीं ले पाएँगे। गुरुवार (11 फरवरी 2021) को राज्यसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने यह जानकारी दी। 

हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म स्वीकार करने वाले अनुसूचित जाति के लोग आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के योग्य होंगे। साथ ही साथ, वह अन्य आरक्षण सम्बन्धी लाभ भी ले पाएँगे। भाजपा नेता जीवी एल नरसिम्हा राव के सवाल का जवाब देते हुए रविशंकर प्रसाद ने इस मुद्दे पर जानकारी दी। 

आरक्षित क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की पात्रता पर बात करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, “स्ट्रक्चर (शेड्यूल कास्ट) ऑर्डर के तीसरे पैराग्राफ के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।” इन बातों के आधार पर क़ानून मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि इस्लाम या ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले दलितों के लिए आरक्षण की नीति कैसी रहेगी। 

क़ानून मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संसदीय या लोकसभा चुनाव लड़ने वाले इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति को निषेध करने के लिए संशोधन का प्रस्ताव मौजूद नहीं।