गुरू पूर्णिमा व्यास पूजा पर्व

भारतीय संस्‍कृति में गुरु का बहुत महत्‍व है और आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु के लिए ही समर्पित किया गया है। इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरुओं की पूजा-सम्‍मान किया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। दुनिया में मां के बाद गुरु को ही सबसे ऊंचा स्‍थान दिया गया है। इस बार 23 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। महाभारत के रचयिता महर्षि व्‍यास का जन्‍म भी आषाढ़ महीने की पूर्णिमा के दिन ही हुआ था इसलिए इसे व्‍यास पूर्णिमा भी कहते हैं। महर्षि वेद व्‍यास ने ही मानव जाति को वेदों का ज्ञान दिया है और उन्‍हें आदिगुरु माना जाता है। 

धर्म/संस्कृति डेस्क, चंडीगढ़:

हिन्दू धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष दिन माना जाता है। देश भर में 24 जुलाई 2021 दिन शनिवार को आषाढ़-गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन अगर आप गंगा स्नान के बाद दान पूण्य का कार्य करते हैं तो यह आपके जीवन में शुभ फलदायी माना जाता है। इस तिथि को लेकर ऐसा माना जाता है कि इसी दिन आषाढ़ पूर्णिमा पर ही वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इन के जन्म दिन के उपलक्ष्य पर ही सदियों से गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजन की परंपरा चली आ रही है। इस वजह से इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

Guru Purnima 2021: हिन्दू धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष दिन माना जाता है। देश भर में 24 जुलाई 2021 दिन शनिवार को आषाढ़-गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन अगर आप गंगा स्नान के बाद दान पूण्य का कार्य करते हैं तो यह आपके जीवन में शुभ फलदायी माना जाता है। इस तिथि को लेकर ऐसा माना जाता है कि इसी दिन आषाढ़ पूर्णिमा पर ही वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इन के जन्म दिन के उपलक्ष्य पर ही सदियों से गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजन की परंपरा चली आ रही है। इस वजह से इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

हिन्दू धर्म में कुल पुराणों की संख्या 18 है और इन सभी पुराणों के रचियता महर्षि वेदव्यास को ही माना जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन जो भी व्यक्ति विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना करता है तो उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस खास दिन प्रीति और आयुष्मान योग में किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है। चलिए जानते हैं 24 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त और उस दिन पड़ने वाले योग के बारे में.

पूर्णिमा तिथि 23 जुलाई 2021 दिन शुक्रवार की सुबह 10ः43 बजे से प्रारंभ होकर 24 जुलाई 2021 दिन शनिवार की सुबह 08ः06 बजे तक रहेगी। इस तिथि पर अगर बनने वाले योग के बारे में बात करें तो इस साल गुरु पूर्णिमा पर विष्कुंभ योग बन रहा है, जो सुबह 06ः12 बजे तक रहेगा। इसके बाद 25 जुलाई की सुबह 03ः16 बजे तक प्रीति योग रहेगा और तत्पश्चात आयुष्मान योग लगेगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस बार प्रीति योग और आयुष्मान योग का एक साथ बनना शुभ माना जा रहा है। प्रीति और आयुष्मान योग में किए गए कार्य सफल होते हैं। विष्कुंभ योग को वैदिक ज्योतिष में शुभ योगों में नहीं गिना जाता है। इसलिए यह अशुभ होता है।

गुरु पूर्णिमा पर ऐसे करें पूजा

Guru Purnima 2021: गुरु पूर्णिमा के दिन बन रहे ये खास योग, जानें शुभ मुहूर्त और तारीख
Guru Purnima 2021 सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि के दिन गंगा स्नान व दान बेहद शुभ फलकारी माना जाता है।

अगर आप गूरू पूर्णिमा पर विधि विधान के साथ पूजा कर लाभ अर्जित करना चाहते हैं तो इसके लिए आपके पास पान के पत्ते, पानी वाले नारियल, मोदक, कर्पूर, लौंग, इलायची होना चाहिए इनके साथ पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। ऐसी पूजा करने से सौ वाजस्नीय यज्ञ के समान फल मिलता है।

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का विशेष दिन माना जाता है ऐसा कहा जाता है कि अगर आप इस दिन गंगा में स्नान करते हैं तो इससे आप स्वस्थ्य और आयुवर्द्धक होते हैं। त्वचा रोग और दमा में बहुत लाभ मिलता है। इसलिए ऐसे मौके का लाभ उठाएं। इसके अलावा अगर कोविड-19 का संक्रमण देखें तो आप इसका लाभ घर में भी उठा सकते हैं। इसके लिए आप अपने नहाने युक्त जल में थोड़ा सा गंगा जल मिला लें। यह भी उतना ही फलदायी है जितना की गंगा जी में स्नान करना।

याज्ञवल्य ऋषि के वरदान से वृक्षराज को जीवनदान मिला था। इसलिए गुरु पूर्णिमा पर बरगद की भी पूजा की जाती है। इसके अलावा अगर आप गुरु पूर्णिमा की रात खीर बनाकर दान करते हैं तो इससे मानसिक शांति मिलती है। चंद्र ग्रह का प्रभाव भी दूर होकर लाभप्रद होता है।

Personality Development course by IASC at PU

Chandigarh July 22, 2021

            The Centre for IAS and Other Competitive Examinations announces the last date for submission of application form for Interview Preparation and Personality Development course to 30th July’ 2021, informed Prof. Sonam Chawla, Honorary Director. The batch commences on 2nd August 2021. This is an extremely beneficial Course for Freshers and Others from any Stream who are keen on honing their Personality and Interview Techniques like Enhancing Communication Skills (Reading, Speaking, Writing), Effective Interview Skills, Group Discussions, Team Building, Self Introduction at Interview, Resume Writing, Body Language, Building Self Confidence, Public Speaking, Leadership Styles etc. There will be Live Group Discussions and Mock Interviews by Executives from Industry as well as Academia towards the end of the course.

For more details please contact office 9915871062/7888578886 or check website www.iasc.puchd.ac.in

International Webinar on Newer Markers of Breast Cancer and Associated Bone Metastasis in Women by PU

Chandigarh July 9, 2021

University Institute of Pharmaceutical Sciences (UIPS), Panjab University, Chandigarh organised an International Webinar on “The ZNF217 oncogene is a key mediator and early indicator of metastasis in breast cancer” under UIPS Expert Talk series, today.

Professor Indu Pal Kaur, Chairperson UIPS, extended a cordial welcome and introduced the renowned speaker Professor Pascale A. Cohen who is currently a Professor in Molecular Biology and Biotechnology Faculty of Pharmacy University of Lyon, France. Professor Indu Pal Kaur and Professor Pascale A. Cohen were US Fulbright colleagues.

Chief Guest, Professor Amanjit Bal, Department of Histopathology, PGIMER, Chandigarh, sensitised the audience about the rising cases of breast cancer which has surpassed cervical cancer. She emphasised that the mechanism underlying metastasis is still unexplored and there is a dire need for more targets which can be utilised for the development of therapies. 

Professor Pascale A. Cohen shared the contribution of her group, one of the leader teams in the “Zinc-Finger Protein 217 (ZNF217)” field, in deciphering ZNF217’s driven deleterious functions and biomarker value in breast cancer. Her talk focussed mainly on recent research on ZNF217-driven molecular functions in human breast cancers, revisiting major hallmarks of cancer and highlighting the ZNF217’s downstream molecular targets and signaling pathways. She apprised the audience that ZNF217 is a new indicator for the emergence of bone metastasis, and future therapies targeting ZNF217 may be beneficial for patients by preventing the development of bone metastases.

 The talk was followed by an extensive Q&A session and was concluded successfully with a vote of thanks by the Chairperson Professor Indu Pal Kaur and Professor Poonam Piplani. Almost 140 participants joined the webinar and included students, researchers, UIPS and PU faculty and distinguished guests.

माधोक के विद्यार्थी परिषद ने किया 73वें वर्ष में प्रवेश

‘पुरनूर’ कोरल, चंडीगढ़ :

आज से ठीक 72 वर्ष पहले यानि 9 जुलाई 1949 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता प्रो बलराज मधोक ने स्थापना की।
संघ परिवार के सदस्यों मे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को अग्रज की संज्ञा दी जाए तो गलत न होगा। इसके बाद ही शिक्षा परिषद , जनसंघ और अन्य संस्थान अस्तित्व में आये । भारतीय जनता पार्टी का सृजन तो आपातकाल के बाद किया गया।

दृढ़ निश्चयी , अनुशासित, राष्ट्रवाद के पुरोधा, विचारक आदि नाना प्रकार के गुणों से प्रोत मधोक को भले ही उतना महत्व न दिया जाता हो लेकिन तथा कथित राष्टवादी और हिन्दूवादी संगठनों द्वारा उठाये जा रहे मुद्दे असल मे उन्हीं की देन हैं।

भारत पर गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने की माँग करने वाले बलराज मधोक पहले शख़्स थे. उन्होंने पूरे भारत में घूम कर गौ हत्या विरोध का माहौल बनाने की कोशिश की थी। वो पहले नेता थे जिन्होंने 1968 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद हिंदुओं के हवाले करने की माँग उठाई थी, उसके बदले में उन्होंने हिंदुओं द्वारा मुसलमानों के लिए उसके बदले एक भव्य मस्जिद बनाने की पेशकश की ।

“मुसलमानों को भारत की मुख्यधारा में लाने की ज़रूरत है.

उदारवादी बलराज मधोक ने कहा था, “मुसलमानों को भारत की मुख्यधारा में लाने की ज़रूरत है. उसके लिए दो क़दम ज़रूरी है. पहला क़दम ये है कि उनके दिमाग से निकालो कि मुसलमान बनने के कारण तुम्हारी संस्कृति बदल गई. संस्कृति तुम्हारी वही है जो भारत की है. भाषा तुम्हारी वही है जो तुम्हारे माँ बाप की थी। उर्दू हिंदी का एक स्टाइल है, मैं भी उसे पसंद करता हूँ, क्योंकि मेरी शिक्षा भी उर्दू मे हुई है. लेकिन उर्दू मेरी भाषा नहीं है, मेरी भाषा पंजाबी है”।

भारत विभाजन के विरोधी मधोक ने 1947 में हुए भारत विभाजन को कभी स्वीकार नहीं किया और जीवनभर हर मंच पर उसका विरोध करते रहे और अखंड भारत का सपना देखते रहे।

सांझा संस्कृति की बात भारत विभाजन के साथ ही समाप्त हो गयी थी।

मधोक का कहना था, “दुर्भाग्य ये हुआ कि उस समय हमने विभाजन तो स्वीकार कर लिया लेकिन उससे निकलने वाले परिणामों को अनदेखा कर दिया. विभाजन ने दो बातें साफ़ कर दीं, ये जो साझा संस्कृति को जो बात थी वो ख़त्म हो गई। हर मुल्क की साझा संस्कृति होती है लेकिन कोई इसे साझा नहीं कहता। “गंगा के अंदर अनेक नदियाँ मिलती हैं , लेकिन मिलने के बाद गंगा जल हो जाता है. ये गंगा – जमुनी की बात ग़लत है। जब जमुना गंगा मे मिल जाती है तो कोई गंगा के पानी को गंगा -जमुनी पानी नहीं कहता, वह गंगाजल कहलाता है।”

भले ही अपनी बेबाकी की वजह से संघ के राजनीतिक पटल पर अड़ियल कार्यकर्ता के रूप में दिखे और छद्दम संघियों की राजनीति का शिकार हुए लेकिन प्रो बलराज मधोक के योगदान अविस्मरणीय हैं।

Hunar 2021 at USOL

Chandigarh July 7, 2021

            University School of Open Learning, Panjab University, Chandigarh, today organized its sixth annual cultural event Hunar, a platform that gives students to explore their talents, included creative items and activities such as writings of poetry and essay, poster making, dance, singing, poetry recitation, photography and filmmaking. Keeping in view the pandemic norms of social distancing and self-isolation, the event was organized online. The students had emailed as many as two hundred entries through PDFs and videos.

            The Chairperson, Prof Madhurima Verma, introduced the chief guests Prof S. K. Tomar, the Dean Students’ Welfare (Men) and Prof Meena Sharma, Dean Students’ Welfare (Women). Referring to the celebration of the Golden Jubilee year of USOL, Prof Verma highlighted the distinctive services rendered by the institution in the field of open learning and education.

            In his address, Prof Tomar congratulated the organizers for the event in the difficult times of the Covid and extolled the efforts of the students. Invoking the landmark mythical character of Eklavya, a dalit, Prof Tomar called him the first distant learner as he mastered the skill of archery staying away from his teacher Dronacharya.  He also called upon to institute a judicious balance between the three coordinates of education—the teacher, the taught and the study material.

            Prof Meena Sharma appreciated the event and called it nothing less than a stress buster and confidence booster for the students as the preparation of and engagement with the creative-cultural items distanced them from the environment suffused negativity triggered by the covid. The judgment of each creative item was prepared by a team of three faculty members. 

            Eight teachers including Prof Neeru, Prof Harsh, Prof Praveen, Prof Sukhpreet, Dr Kuljeet, Dr Parveen, Dr Kamala and Dr Richa gave a comprehensive introduction to each creative item and presented the judgment by making a declaration of the first, second, third position and consolation prizes. As many as 40 students were declared as prize winners.  The two prize winning students Mr Gopi and Ms Anand Priya shared their enriching experiences regarding the preparation of their respective items.

            The coordinator of the event, Dr Ravinder Kaur Dhaliwal and co-coordinator Dr Reena Chaudhari, along with a dedicated team of faculty members, put strenuous efforts to organize the event. 

            Dr Sucha Singh provided the technical support to conduct the event. Mr Sudhir Baweja conducted the event eloquently and Dr Kamala Sandhu proposed a vote of thanks.

Connecting Women Social Entrepreneurs – Indo Aus Workshop

Chandigarh July 5, 2021

            A two-week workshop on “Connecting Women Social Entrepreneurs” was inaugurated today, on an online mode. The workshop is a joint project between University Business School(UBS), Panjab University and Western Sydney University, Australia. The project is covered under Australia-India Council Grants Program. The program is coordinated by Prof. Meena Sharma and Prof. Purva Kansal, UBS, PU and  Prof. Maria Estela Varua, Dr. Rina Datt, Dr. F.Evangelista and Dr. Heath Spong are coordinators for the Porject from Western Sydney University.

            The workshop was inaugurated by Professor D. Sweeney, DVC, WSU, Sydney.  Prof. Amir Mahmood, Dean, School of Business, in his address to the participants and audience stated that the event would build deeper and better relations between the two countries of Australia and India. Panjab University was represented in the inaugural event by Prof. Sanjay Kaushik, DCDC Panjab University. Prof. Sanjay Kaushik spoke on the various challenges faced by Women Entrepreneurs and stressed on the need to provide empowerment to the Women Social entrepreneurs Through such workshops and projects.  Dr. Heath Spong introduced the theme and Prof, Maria E. Varua introduced on the workshop and said that the aim of the project is to bring together Indian and Australian women social entrepreneurs to share and gain new knowledge, explore networking opportunities and to help develop better understanding of each other’s country. Participants from India were introduced by Prof Meena Sharma and Prof. Purva Kansal and from Australia were introduced by Dr. Felicitas Evangelista.

            The workshop has 30 social entrepreneurs from India and Australia giving them a unique learning experience. Incorporating a meaningful cultural exchange, the workshop will be an attempt to create a meaningful and ongoing economic relationship between Australia and India.

            In the workshop the participants would be representing their social enterprise at the Connecting Women Social Entrepreneurs workshop which would be held from 5th July – 16th July, 2021.  

स्वतंत्र भारत के इतिहास का काला अध्याय ‘आपातकाल’

46 साल पहले भारत ने आपातकाल का अनुभव किया भारतीय इतिहास का काला अध्याय राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से निपटने के बजाय भारत पर इमरजेंसी ठोक देना और लोकतांत्रिक शक्तियों का दमन करना ज्यादा आसान लगा। ऐसा भी नहीं था कि 25 जून की रात अचानक से आपातकाल की घोषणा कर दी गई थी। इसके पीछे एक बड़ी रणनीति थी. देश की जनता पर आपातकाल थोपने का मकसद सत्ता में बने रहना का तो था ही इससे भी अधिक खतरनाक मंशा तत्कालीन हुकुमत की थी। हमें उस पक्ष पर भी  चर्चा करनी चाहिए, जिसके कारण देश के लोकतंत्र को एक परिवार ने बंदी बना लिया। दरअसल लोकतंत्र की हत्या करके ही जो चुनाव जीता हो उसे लोकतंत्र का भान कैसे रह जाएगा ? लोकतंत्र की उच्च मर्यादा की उम्मीद उनसे नहीं की सकती, जो जनमत की बजाय धनमत और शक्ति का दुरुपयोग करके सत्ता पर काबिज होने की चेष्टा करें।

सारिका तिवारी,(inputs by) पुरनूर – चंडीगढ़ 26 जून:

देश में आपातकाल की नींव इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले से पड़ गई थी जिसमें अदालत ने राजनारायण के पक्ष और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ अपना फैसला सुनाया था। अदालत के फैसले से पहले 12 जून 1975 की सुबह इंदिरा गांधी अपने असिस्टेंट से पूछती हैं। आज तो रायबरेली चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आना है। इस पर वहां मौजूद इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी कहते हैं, “आप बेफिक्र रहिए।” संजय का तर्क था कि इंदिरा की सांसदी को चुनौती देने वाले संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राजनारायण के वकील भूषण नहीं थे। जबकि इंदिरा के वकील एसी खरे ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि फैसला उनके ही पक्ष में आएगा। कांग्रेसी खेमा पूरी तरह से आश्वस्त था, लेकिन उस दिन जो हुआ वो इतिहास बन गया। जस्टिस जगमोहन सिन्हा ने इंदिरा के खिलाफ अपना फैसला सुना दिया। जज ने इंदिरा गांधी को चुनावों में धांधली करने का दोषी पाया और रायबरेली से सांसद के रूप में चुनाव को अवैध घोषित कर दिया। साथ ही इंदिरा के अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई। हाईकोर्ट से मिले इंदिरा को झटके के बाद कांग्रेसी खेमा स्तब्ध रह गया तो राज नारायण के समर्थक दोपहर में दिवाली मनाने लगे।

पार्टी की अस्थिरता को दरकिनार कर स्वयं का वर्चस्व की रक्षा हेतु उस समय की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को संविधान की धारा 352 के तहत राष्ट्र आपात काल घोषित करना पड़ा। कहीं नौकरशाही और सरकार के बीच का संघर्ष, कभी विधान पालिका और न्यायपालिका के बीच विवाद, केशवानंद भारती और गोरखनाथ केस इन विवादों के साक्ष्य हैं। इससे पहले के चुनाव देखें तो कांग्रेस लगातार आज ही की तरह अपने ही अंतर कलह की वजह से सीटे गवाती रही। कई हिस्सों में बटी कांग्रेस का कांग्रेस (आर) इंदिरा के हिस्से आया जब इंदिरा गांधी ने कम्युनिस्ट पार्टी से मिलकर सरकार बनाई पार्टी का यह हाल हो गया था कि सिंडिकेट के दिग्गज भी अपनी सीटें ना बचा पाए। इंदिरा गांधी के कट्टर विरोधी मोरारजी देसाई ने पार्टी छोड़ी और इंदिरा को कमजोर करने में जुट गए। दूसरी और नीलम संजीवा रेड्डी, कामराज, निजा लिंगप्पा पूरी तरह से इंदिरा विरोधी थे। निजालिंगप्पा ने इंदिरा को पार्टी तक से निकाल दिया था।

इमरजेंसी के जो बड़े कारण बने वह है महंगाई, इंदिरा की कई मनमानियां, विद्यार्थियों का असंतोष, जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में रेलवे की हड़ताल, जयप्रकाश नारायण का ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा।

सुब्रह्मण्यम स्वामी, ‘जिंदा या मुर्दा’

इमरजेंसी के दौरान इंदिरा ने बहुत मनमानियां की निरंकुश ढंग से अपने विरोधियों को कुचला, जॉर्ज फर्नांडिस तो कई साल जेल में ही रहे। उन्होंने तो चुनाव भी जेल से लड़ा सुब्रह्मण्यम स्वामी के ‘जिंदा या मुर्दा’ के वारंट जारी किए गए अखबारों पर अंकुश लगाया गया कि वह जनता की बात जनता तक ना पहुंचा पाएँ। लेकिन कुछ अखबारों ने पोस्ट खाली छोड़ कर सरकार का विरोध भी किया।

इस सब में संजय गांधी अपने मित्रों के साथ पूरी तरह से सक्रिय होकर उतरे मनमानीयों के लिए। कुछ नवनियुक्त पुलिस अधिकारी जिनमें किरण बेदी, गौतम कौल और बराड़ आदि भी शामिल थे, इन्होंने एक बार इन पर लाठीचार्ज भी किया जिसका खामियाजा इन्हे आपातकाल के हटने के बाद भी कई वर्षों तक भुगतना पड़ा। पड़ा। कई वर्षों तनख्वाह के बिना नौकरी की।

इमरजेंसी की मियाद खत्म होने संविधान में संशोधन किया गया संविधान की प्रस्तावना में सेक्यूलर शब्द शामिल किए गए सबसे बड़ी बात इस संशोधन में यह की गई के न्यायपालिका संसद द्वारा पारित किसि भी कानून को गलत नहीं ठहरा सकती।

आपातकाल की काली रात 19 महीने लंबी थी और इस लंबे वक्त तक देश का लोकतंत्र कोमा में रहा। जनता के अधिकार, लिखने बोलने की आजादी सब आपातकाल की जंजीरों में जकड़ी हुई थी। आपातकाल के दौरान इंदिरा के बेटे संजय गांधी की हनक थी। जबरन नसबंदी जैसे तानाशाही फैसलों ने जनता को परेशान कर दिया था। जनवरी के महीने में आपातकाल हटाने के फैसले के साथ-साथ राजराजनीतिक बंदियों को रिहा करने के आदेश दिए गए और आम चुनाव की घोषणा की गई। इंदिरा को लगने लगा था कि वो प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएंगी, लेकिन जनता ने कुछ और ही सोच रखा था। 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई। इंदिरा गांधी.. संजय गांधी समेत तमाम नेता हारे और हार गई तानाशाही…
यह थी 1975 की इमरजेंसी और उसके परिणाम

“International Yoga Day Celebrations” at UIPS, Panjab University

Chandigarh June 25, 2021

To celebrate the International Yoga Day 2021 on the theme, Yoga for wellbeing, University Institute of Pharmaceutical Sciences (UIPS), Panjab University, Chandigarh organized a ”Virtual Yoga Practice for Healthy Well Being” by Yoga Expert & fitness enthusiast, Ms Kanica Nayyar today.

She recapitulated the term YOGA, means ‘unity’ or ‘oneness’ involving different practices to harmonize body and mind. She shared important key points, like prior permission of doctors in case of complicated diseases, each yoga movement involves breathing and one should go slow while practicing yoga to feel the body part and its problem, if any. With live practical session, she highlighted the benefits of Pranayama, Joint movements, and Asanas helpful in day-to-day life, with a special emphasis on predicaments everyone frequently encounters, such as lower back pain, cervical pain, thyroid, joint pains, stress removal, weight reduction and much more. She urged the participants to take up fitness as part of their daily lifestyle and reiterated the old wisdom, “A healthy mind resides in a healthy body’

Professor Indu Pal Kaur, Chairperson, UIPS and Program Organizer extended a cordial welcome to all the participants

Professor Poonam Piplani, Convener Lecture Organizing Team, spearheaded the entire event proceedings and introduced the young and dynamic speaker,Ms Kanica Nayyar who  is a recognized Yoga Teacher and Fitness Enthusiast, and having more than 3 years of work experience. She is associated with one of the biggest fitness startups, Cultfit Healthcare Private Limited and implementing her learnings and serving in an efficient approach to the mankind across the globe. 

All the faculty, students and staff members of UIPS joined the session and stretched out to mark the International Yoga Day.  Around 100 participants attended the webinar.

Webinar on Gender and Media Equity

Chandigarh June 24, 2021

An International Webinar on Gender and Media Equity was jointly organized by the Centre for Social Work, Department of Ancient Indian History, Culture and Archaeology and Centre for Midwest and Central Asian Studies, Panjab University. 

The key Speaker, Sh. Bajinder Pal Singh, Advisor, Media and Communications, University of Chulalonkogorn, Bangkok, talked about women in journalism , particularly from India and other South East Asian countries and the kind of issues that  they face on the field .

Professor Raj Kumar, Vice-Chancellor Panjab University,  remarked on the importance of the media for society at large .

The welcome address was given by Professor Monica Munjial Singh, Chairperson, Centre for Social Work and also while introducing the speaker, she said that he is from  University in Bangkok which is the oldest university of Thailand and currently ranked amongst the top hundred global universities. 

The concluding remarks were delivered by Professor Paru Bal Sidhu, Chairperson, Ancient Indian History, Culture and Archaeology, Panjab University, Chandigarh. 

The formal vote of thanks was given by Professor Pampa Mukherjee, Honorary Director, Centre for Midwest and Central Asian Studies, Panjab University. It was a well attended webinar by faculty members, Post Graduate students and Research Scholars. A few women journalists from Kashmir also joined the International Webinar. 

“Empathy not Sympathy” Towards Disable Friendly Chandigarh at PU

Chandigarh June 23, 2021

The Department of Community Education and Disability Studies of Panjab University  with Yuvsatta (Youth for Peace)-an NGO, organized a webinar  today on the theme of “Empathy not Sympathy” with focus on promoting disable friendly Chandigarh.

Sharing about the initiative Dr. Dazy Zarabi, said that the objective of the Webinar was on empowering marginalized disabled students. Recently their Department attached their 25 B.Ed students with 49 diasbled students of Govt. Model Sr. Sec. School, Dhanas, whom the Panjab University students will be mentoring and guiding to come out of Covid pandemic crisis and work for betterment of lives.

The programme began by sharing issues by differently abled students and their teachers, facilitated by Mrs. Seema, Principal of Govt. Model Sr. Sec. School, Dhanas, Chandigarh. The students said because of their invisible disability i.e in the form of Learning Disability, mild intellectual disability and autism spectrum disorder they suffer more as compared to students with physical, mild visual and other kinds of disabilities.

Sh. Sameer Garg, CEO of BillionAbles in his deliberations said that Sensitization about accessibility and inclusion for all should be a compulsory part of curriculum at primary and higher education so that it get inculcated in the mindset and universal access is provided by and for every one while planning any or all infrastructure, services and products.  It should be planned and made available as free as the oxygen we breathe and without which one cannot line.

Sh. Anil Mudgal, Secretary, Arushi, Bhopal, Madhya Pradesh stressed that being independent and with dignity is a basic right which should be provided automatically and not when demanded.  A society is truly inclusive and everyone can be a part of everything and anything.

Mrs. Abha Negi, Chairperson, Global Forum for empowerment, New Delhi in her concluding remark said that for any society to evolve into an inclusive society that embraces diversity the basic tenet is empathy where it invites all to participate as equals neither patronize nor leave persons with disabilities to fend. When the society as a whole shows empathy it works towards making things happen while taking note of diversity.

 Pramod Sharma, Coordinator of Yuvsatta-NGO added that the system should be oriented to mass understanding and finding a collective solution with utmost responsiveness. NGO’s and governments should play the role of facilitator. Each one of us has to be responsive and take this mission forward.

The over 100 participants included students of Department of Community Education and Disability Studies, Panjab University, teachers, counselors and students of GMSSS, Dhanas,  St. Josephs Sr. Secondary School, led by their Principal Mrs. Monica Chawala and the volunteers of Yuvsatta-NGO