मुख्य मंत्री द्वारा बेटी को आगे बढाओ के अपने सकंल्प पर 11 नए महाविद्यालय खोलने की घोषणा की गयी

पंचकूला 3 अगस्त:

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने रक्षाबंधन के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढाओ अभियान को आगे बढाते हुए बेटी को आगे बढाओ के अपने सकंल्प पर 11 नए महाविद्यालय खोलने की घोषणा की। इसके साथ ही हरियाणा ऐसा प्रदेश बन गया जिसकी 15 किलोमीटर की परीधि में एक महाविद्यालय खुल गया।

पंचकूला के सैक्टर 1 के राजकीय स्नातकोतर महाविद्यालय से मुख्यमंत्री ने इन कालेजों की घोषणा करने के साथ साथ पर्यावरण बचाने के लिए वृक्षारोपण कर उसकी रक्षा के लिए वृक्षबंधन का भी प्रदेश के लोगों से आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा दान एक महादान है। इसी के मध्येनजर पिछले 5 वर्षो में 97 नए कालेज खाले गए जबकि पिछले 48 वर्षो में 75 कालेज खोले गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संयोग की बात है कि अभी हाल ही में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति घोषित हुई है जिसमे 2030 तक उच्चतर शिक्षा में जीईआर 50  प्रतिशत तक करना है जो वर्तमान में 32 प्रतिशत तक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकारी  प्रयासों के साथ साथ गैर सरकारी समितियां, समाज के प्रबुद्व व्यक्तियों के सहयोग से हरियाणा इस लक्ष्य को हासिल करेगा। नई शिक्षा नीति में कक्षा 6 से ही व्यवसायिक रूप से विद्यार्थी के हुनर के अनुरूप ही  विषय चुनने का विकल्प दिया गया है जो एक इस नीति की सबसे बड़ी खुबी है।

हरियाणा में देश का पहला का भगवान विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय पलवल जिले दुधोला में खोला गया है। इस विश्वविद्यालय में युवाओं को उनके कौशल अनुसार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में हजारों युवा इस विश्वविद्यालय में कौशल की शिक्षा हासिल कर रहे है। उन्होने कहा कि नई शिक्षा  नीति प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में कारगर सिद्व होगी। इससे शिक्षा के स्तर में अमूलचूल परिवर्तन होगा और पूर्ण रूप से रोजगारपरक होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का कार्यक्रम केवल 10 महाविद्यालयों की घोषणा था परन्तु आज ही महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा के अनुरोध पर कलायत विधानसभा क्षेत्र के गांव राजोंद में 11 महाविद्यालय खोलने की घोषणा की गई है। यह रक्षाबंधन का हमारी बहनों के लिए विशेष तोहफा है। उन्होंने कहा कि अब 15 किलोमीटर की दायरे में कोई न कोई महाविद्यालय खोला जा चुका है। सरकार का लक्ष्य  10 किलोमीटर की परीधि में एक महाविद्यालय खोलना हेै। उन्होंने प्रदेश के लोगों से आहवान किया कि अगर किसी क्षेत्र में इससे अधिक दूरी पर महाविद्यालय है तो वे सरकार के संज्ञान में लाए, उस पर तुरन्त कार्यवाही की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आज सबका साथ सबका विकास के अपने लक्ष्य पर चलते हुए आज पंचकूला से नूह तथा जगाधरी से डबवाली हर विधानसभा क्षेत्र में कोई न कोई महाविद्यालय दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी हलकों में 161 सरकारी महाविद्यालय है जो किसी न किसी विधानसभा क्षेत्र में पडते हैं। परन्तु यह हैरानी की बात कांगे्रस के 10 वर्षो के शासन काल में बरोदा विधानसभा हलके में एक भी महाविद्यालय नहीं है। इसलिए उन्हांेने बरौदा में दो महाविद्यालय देने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायती राज संस्थानों में पढे लिखे जनप्रतिनिधि आंए। इसके लिए उन्होंने न्यायालय तक लड़ाई लडी। जिसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2016 में 33 प्रतिशत आरक्षण की तुलना में 43 प्रतिशत महिलाएं चुनकर आई। उन्होंने घोषणा की कि आगामी पंचायती राज चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटे आरक्षित की जाएगीं। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित महिला तीन तीन पीढियों का भला करती है। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या समाज में एक कलंक है ओर हरियाणा में इसकी स्थिति ओर भी खराब थी। इसके मध्येनजर बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की शुरूआत की गई। सरकारी प्रयासों के साथ साथ, जनसहयोग से इस अभियान के सार्थक परिणाम आए और वर्तमान में लिंगानुपात की स्थिति 923 तक पहुंच गई है जो पहले केवल 871 थीं।

मुख्यमंत्री ने वृक्षारोपण को वृक्षबंधन का कार्यक्रम बताते हुए कहा कि हमें वृक्षों को भी हमने रक्षासूत्र में बांधना होगा। वृक्ष बचेगें तो हमें आक्सीजन ओर जीवन मिलेगा। उन्होंने वृक्षों को रक्षा बांधते हुए परवरिश करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई वृक्षबंधन डोक्यूमेंट्री का अवलोकन किया ओर इसका एप भी लांच किया। यह एप सदैव खुला रहेगा और इस पर कोई विद्यार्थी पौधारोपण व उसकी सुरक्षा करके एप पर फोटो अपलोड कर सकता है। उन्होंनेे स्वामी विवेका नंद की पुस्तक-आई एम इंडिया- का विमोचन किया।    

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि पंचकूला के लिए आज रक्षाबंधन का ऐतिहासिक दिन है। पिछले कुछ वर्षो से पंचकूला एक शिक्षा के हब के रूप में उभर रहा है और मोरनी हिल्स जैसे दुगर्म क्षेत्र में अब तक केाई तक केाई कालेज  नहीं उस क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने एक शिक्षा सौगात दी है। उन्होंने इससे पहले पंचकूला में हरियाणा का पहला अंग्रेजी माध्यम से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शुरू किया गया है। इसके अलावा 5 प्राईमरी स्कूल भी अंग्रेजी माध्यम के जिला में खोले गए है। इन स्कूलों से पंचकूला में शिक्षा का ग्राफ बढा है और पिछले वर्षो की तुलना में 10 व 12वीं कक्षाओं की नतीजे भी बेहतर आ रहे है।

गुप्ता ने कहा कि पिछले कई सालो उपेक्षित पंचकूला में जितने विकास कार्य इन 5 सालों में हुए उतने पहले कभी नही हुए। उन्होंने कहा कि पंचकूला के विकास में करोड़ों रुपए की राशि खर्च की जा चुकी है और निरंतर विकास जारी रहेंगें। उन्होंने मोरनी जैसे दुर्गम क्षेत्र में कालेज की स्थापना करने पर मुख्यंत्री का आभार जताया।

केन्द्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने कहा कि हरियाणा में केन्द्र सरकार की नल से जल योजना के तहत बेहतर कार्य किए जा रहे है। इसके लिए हरियाणा सरकार विशेष रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नल से जल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की एक महत्वकांक्षी योजना है। इसके तहत 2024 तक हर घर में नल से जल पहुचंाया जाएगा। हरियाणा इस योजना में पहले ही काफी आगे चल रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री बधाई के पात्र है। उन्होंने कहा कि मन में ठाना है उसे कर दिखाना है और आज के 11 महाविद्यालय महिला शिक्षा में मील का पत्थर साबित होेगें और हरियाणा उन्नति के शिखर पर पहंुचेगा।  

हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के आने से पहले ही प्रदेश में 1000 प्ले स्कूल खोलने की योजना तैयार की जा चुकी थी। इसके अलावा मिड डे योजना के तहत प्रदेश के स्कूलों में अब विद्यार्थियों को सप्ताह में 6 दिन दूध उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोविड 19 के दौरान आॅन लाईन कक्षाएं लगाकर हरियाणा ने देश में बेहतरीन प्रदर्शन किया और हिमाचल व गुजरात के बाद हरियाणा देश में अव्वल स्थान पर रहा। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य व शिक्षा पर मुख्यरूप से फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में  उच्च शिक्षा के साथ साथ 98 संस्कृति माॅडल स्कूल भी खोले जा रहे है। शिक्षा के क्षेत्र में पिछले साढे पंाच साल में स्कूल व कालेज के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में जितना कार्य किया है उतना पहले कभी नहीं हुआ।

कार्यक्रम को महानिदेश शिक्षा अजीत बाला जोशी, प्राचार्य डा. अर्चना मिश्रा व उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अंकुर गुप्ता ने भी संबोधित किया। कालेज की छात्राओं ने मुख्यमंत्री व अन्य विशिष्ठ व्यक्तियों को राखी बांधकर आशिर्वाद लिया। इस मौके पर उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा, पुलिस आयुक्त सौरभ सिंह, पुलिस उपायुक्त मोहित हांडा, नगर निगम के आयुक्त महावीर सिंह, भाजपा जिला प्रधान दीपक शर्मा, श्याम लाल बंसल, कुलभुषण गोयल सहित पार्टी के कई पदाधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।  

“Styling is 99% research and 1% creativity”

Chandigarh August 1, 2020:

University Institute of Fashion Technology & Vocational Development (UIFT&VD), Panjab University, Chandigarh, conducted a Webinar on Fashion Styling (My Journey and Business of Fashion Styling) on Friday 31st July, 2020.

Chairperson of UIFT&VD, Dr.PrabhdipBrar, gave an introductory note, welcoming the speaker, Mr. Rahul Vijay, a fashion design graduate who started his career at Harper’s Bazaar India. He rose from a fashion intern to a fashion editor and moved to Mumbai. He joined ELLE India and later GQ India and is responsible for styling covers and fashion editorials, with an 8 years’ experience in women’s wear styling. He is one of the creative directors for Lakme Fashion Week and has styled for leading designers such as Rajesh Pratap Singh, AM:PM, Ashish Soni and KunalRawal among others.

The speaker narrated his journey starting from writing articles for his college magazine in 2007 to reaching Harper’s Bazaar in 2011. It stated that the role of a stylist is to give trends to designers, help them edit a collection and to create a language to sell his/her product. Apart from garments the other necessities for styling include footwear, wearer trials and photography. For a magazine, any cover star is selected on the basis of an upcoming movie release, on newsworthy content associated with them or according to the mood board. The takeaway of the session was that “Styling is 99% research and 1% creativity.” The talk converged at a statement that “To succeed as a stylist, one needs the right team and the right attitude.” This session would definitely strike the right chord in the students of fashion technology who wish to pursue styling as a career.  

 It was attended by more than 90 participants including faculty members, research scholars and students of Fashion Technology.

क्या आंदोलन से उपजी थी नयी शिक्षा नीति की नींव?

राजविरेन्द्र वशिष्ठ, चंडीगढ़ – 31 जुलाई:

वर्ष 2002, 26 नवम्बर के दिन ABVP के कार्यकर्ताओ का अटल सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा छात्र आंदोलन किया था जिसका नारा था ‘भारत केन्द्रित शिक्षा नीति’ आज 2020 में उस आंदोलन की सफलता #राष्ट्रीय_शिक्षा_निति की रूप में प्राप्त हुई है यह विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओ के लिए हर्ष का विषय है।

इस आन्दोलन को गति देने हेतु विभिन्न प्रान्तों में सम्मेलन, सभाएं, यात्रा जैसे कार्यक्रम किए गए। हर प्रान्त में स्थानीय समस्याओं को भी लेकर मांगपत्र बने, जो राज्य के शिक्षा मंत्रियों को दिए गए। छात्रों में जागरण हेतु दो करोड़ से भी अधिक संख्या में पत्रक बांटे गए। बेरोजगारी के कारण तथा उपाय के विषय पर एक पुस्तिका का प्रकाशन किया गया। इसके अलावा पोस्टर, बैनर आदि प्रचार सामग्री भी विपुल मात्रा में मुद्रित की गई। इस सम्पूर्ण आन्दोलन के द्वारा यह प्रयास किया गया कि शिक्षा में परिवर्तन एवम् रोजगार विषय पर समाज में, विशेष रूप से शिक्षा जगत् में व्यापक बहस हो। सरकारों के द्वारा छात्रों की एवं शिक्षा की समस्याओं के समाधान हेतु ठोस कदम उठाए जाएं।

आज 18 साल बाद उस व्यापा आंदोलन फलीभूत हुआ देखिये उस समय जो मांगें अभाविप ने की थीं वह आज भी कितनी प्रासांगिक हैं।

प्रमुख मांगें:

शिक्षा का भारतीयकरण हो

  • भारतीय भाषाओं में हो शिक्षा।
  • संस्कृत अध्ययन को प्रोत्साहन मिले
  • नैतिक शिक्षा दी जाए।
  • राष्ट्रीय शिक्षा आयोग स्थापित हो।

शिक्षा की वित्त-व्यवस्था सुधारी जाए

  • सकल घरेलू उत्पादक का न्यूनतम 6 प्रतिशत शिक्षा पर व्यय हो
  • निजी सहभाग के नाम पर बढ़ते व्यापारीकरण पर रोक लगे
  • शिक्षा-शुल्क न्यूनतम हो।
  • राष्ट्रीय शिक्षा कोष की स्थापना की जाए।

विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता मिले

  • सीनेट और सिंडीकेट जैसे निकाय अनिवार्य हों।
  • छात्र संघ के निर्वाचन अनिवार्य हों।
  • विश्वविद्यालय स्वायत्त हो।
  • जनीतिक हस्तक्षेप बंद हो।

रोजगार में बढ़ोत्तरी हो

  • श्रम-आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाए।
  • निवेश और रोजगार का संख्यात्मक अनुपात निश्चित हो।
  • अनौपचारिक रूप से शिक्षित कुशल कारीगरों को प्रमाण पत्र दिया जाए।

केंद्र सरकार ने बीते दिन लगभग 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में बदलाव किया। कई बदलाव ऐसे हैं, जिन्हें वाकई पढ़ा और समझा जाना चाहिए। सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि देश को वैश्विक स्तर पर मुखिया बनाने के दौर में शिक्षा नीति की भूमिका सबसे अहम होगी। 

चाहे सामाजिक न्याय और समानता हो या अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी या देश की एकता, शिक्षा की भूमिका लगभग हर क्षेत्र में अहम है। सरकार ने इन सारी बातों को मद्देनज़र रखते हुए शिक्षा नीति में बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं।  

सरकार ने शिक्षा नीति के इन बदलावों को बुनियादी स्तर पर 4 हिस्सों में बाँटा है। पहले और दूसरे हिस्से में प्राथमिक और उच्च शिक्षा का ब्यौरा है। तीसरे हिस्से में भाषा, संस्कृति और तकनीक पर विस्तार से चर्चा की गई है। चौथे हिस्से में इस बात का ज़िक्र है कि कैसे सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और नई नीति लागू कैसे की जाए।  

स्कूली शिक्षा

हमारे देश की शुरुआती पढ़ाई का ढाँचा 10+2 पर आधारित था। इसके हिसाब से एक बच्चा 6 साल की उम्र में पहली कक्षा में पहुँचता है। यानी 3 से 6 साल की उम्र के बीच उसका शिक्षा से कोई सरोकार नहीं रहता है। नए बदलाव के हिसाब से इसे 5+3+3+4 कर दिया गया है। और इसका नाम रखा गया है  Early Childhood Care and Education (ECCE), यानी 3 साल की उम्र से ही बच्चों की पढ़ाई शुरू होगी।  

शुरुआती उम्र से तैयार किए जाएँगे बच्चे 

सरकार ने ऐसा करने के पीछे उल्लेखनीय कारण दिया है।  सरकार का कहना है एक बच्चे के दिमाग का 85 फ़ीसदी विकास 6 साल की उम्र के पहले हो जाता है। ऐसे में यह बेहद ज़रूरी है कि वह पहली कक्षा में जाने के पहले विद्यालय (स्कूल) के लिए पूरी तरह तैयार रहे। बच्चों को बेहतर भाषा और अक्षर ज्ञान कराने के लिए अलग-अलग तरह के खेल और क्रियाकलापों का हिस्सा बनाया जाएगा। 

एनसीइआरटी (NCERT) दो हिस्सों में बच्चों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करेगी। पहला 0-3 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए और दूसरा 3-8 तक की उम्र के बच्चों के लिए। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षा को आँगनबाड़ी से भी जोड़ा जाएगा। साथ ही आँगनबाड़ी को बहुत मज़बूती प्रदान की जाएगी। 

कक्षा 1 से पहले बच्चों को “Preparatory Class” यानी “बालवाटिका” में भेजा जाएगा। इसमें पढ़ाने वाले शिक्षक का ज़ोर बच्चों को स्कूली शिक्षा के लिए तैयार करना होगा। इसके पहले आँगनबाड़ी में काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को एनसीइआरटी के नीति-निर्देशों के आधार पर तैयार किया जाएगा। आदिवासी इलाकों के लिए ECCE के लिए “आश्रमशाला” बनाई जाएगी और इसमें भी ऊपर दी गई जानकारी के आधार पर काम होगा।  

30 बच्चों पर 1 शिक्षक का लक्ष्य 

सरकार के मुताबिक़ देश के 5 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जिन्हें अंकों का सही ज्ञान नहीं है। सरकार का ज़ोर इस बात पर होगा कि वह जोड़, घटाव, गुणा और भाग करना सीखें। सरकार इस योजना पर चल रही है कि साल 2025 तक बच्चों को संख्याओं और अंकों की सही समझ हो जाए। इसके लिए बच्चों को कक्षा 3 तक अच्छे से अंकों की पढ़ाई करवाई जाएगी। 

इसके अलावा पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की बहाली की जाएगी। छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) 30:1 रखा जाएगा, यानी 30 बच्चों पर एक शिक्षक। वहीं आर्थिक और समाजिक रूप से कमज़ोर बच्चों के लिए यह अनुपात 25:1 रखा जाएगा। इसके लिए सरकार एक राष्ट्रीय स्तर का पोर्टल भी संचालित करेगी, Digital Infrastructure for Knowledge Sharing (DIKSHA)। बच्चों के पोषण (Nutrition) और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) का ख़ास ध्यान रखा जाएगा।  

जिससे बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे 

सरकार इस बात पर भी विशेष ध्यान देगी कि ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में बच्चे विद्यालयों में दाख़िला लें और शिक्षा हासिल करें। कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों की पढ़ाई का सकल नामांकन अनुपात Gross Enrollment Ratio (GER) 90.9 % था। यानी 90.9 % बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं लेकिन आगे की पढ़ाई में ऐसा नहीं है।

कक्षा 9 से 10 और 11 से 12 तक यह अनुआत सिर्फ 79.3% और 56.5% है। सरकार इस लक्ष्य पर काम कर रही है कि साल 2035 तक 12वीं तक के बच्चों की पढ़ाई का GER 100% हो जाए। इसके लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के बच्चों के लिए National Institute of Open Schooling (NIOS) के तहत Open and Distance Learning (ODL) भी शुरू की जाएगी। साथ ही साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए उनको बढ़ावा देने के लिए पूर्व छात्रों और स्थानीय समुदाय के लोगों की मदद भी ली जाएगी।    

किस उम्र में कितने दर्जे में होगा बच्चा 

इस नीति से बच्चों की शुरुआती पढ़ाई का पूरा ढाँचा बदला जाएगा। इसे कक्षा और आयु वर्ग के हिसाब से बदला जाएगा। यह कुछ इस तरह होगा, 3-8 साल, 8-11 साल, 11-14 साल और 14-18 साल। 5+3+3+4 कुछ इस तरह होगा, 

  • Foundational Stage: कुल 3 साल का प्री-स्कूल और कक्षा 1-2 की पढ़ाई 3 से 8 साल की उम्र तक
  • Preparatory Stage: 8 से 11 साल उम्र तक कक्षा 3 से 5 तक की पढ़ाई
  • Middle School Stage: 11 से 14 साल की उम्र तक कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई
  • High School or Secondary Stage: कक्षा 9 से 12 की पढ़ाई कुल दो हिस्सों में, 9-10 पहले हिस्से में और 11-12 दूसरे हिस्से में

इसके अलावा अलावा ECCE पाठ्यक्रम में अच्छे व्यवहार, मान-सम्मान की भावना, नैतिकता, व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता और सहयोग की भावना से जुड़ी चीज़ें भी बताई जाएँगी।

बच्चों को बनाया जाएगा बहुभाषी  

  • प्रायोगिक तरीके से पढ़ाई और सीखने पर ज़ोर दिया जाएगा, उदाहरण- किस्सागोई।
  • पाठ्यक्रम के लगभग हर पहलू में कला को शामिल किया जाएगा।
  • खेल-कूद को बढ़ावा दिया जाएगा, इसे फिट इंडिया मूवमेंट के तहत पढ़ाई में शामिल किया जाएगा।
  • बच्चों की पढ़ाई में ह्यूमैनिटीज़ (मानव मूल्यों) को भी शामिल किया जाएगा।
  • कक्षा 5 तक बच्चों की पढ़ाई में मातृभाषा अनिवार्य होगी। ऐसा निजी और सार्वजनिक दोनों तरह के विद्यालयों में किया जाएगा।
  • इसके अलावा भाषा की पढ़ाई पर ज़ोर दिया जाएगा। जिससे बच्चे ज़्यादा भाषाओं में संवाद कर सकें।
  • किसी भी राज्य पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। बच्चों को 3 भाषाएँ पढ़ाने पर ज़ोर दिया जाएगा।
  • भाषाओं का चुनाव करने का अधिकार राज्य और बच्चों को दिया जाएगा।
  • एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना के तहत ‘The Languages of India’ नाम की पहल शुरू की जाएगी। इसके तहत बच्चों को बताया जाएगा कि भारत की एकता का आधार भाषाएँ रही हैं।
  • बच्चों की पढ़ाई में संस्कृत भी अनिवार्य रूप से शामिल की जाएगी।
  • संस्कृत के अलावा तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयाली, उड़िया, पर्शियन, प्राकृत और पाली भी (वैकल्पिक रूप से) शामिल की जाएगी।
  • रूसी, कोरियाई, जापानी, चीनी, जर्मन, फ्रांसीसी, स्पैनिश जैसी अंतर्राष्ट्रीय भाषा भी पढ़ाई में शामिल की जाएगी।
  • साथ ही सांकेतिक भाषा में बच्चों की पढ़ाई भी पाठ्यक्रम में शामिल की जाएगी। 

बदला जाएगा परीक्षा और मूल्यांकन का स्वरूप 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत एनसीईआरटी National Curricular Framework, NCF 2020 लागू करेगा। इसका हर 5 से 10 साल में मूल्यांकन किया जाएगा। आसान शब्दों में इसका लक्ष्य बच्चों से किताबों का भार कम करना होगा। साथ ही इसका लक्ष्य बच्चों में सीखने समझने का कौशल तैयार करना होगा। 

NCF के तहत बच्चों की परीक्षाओं का स्वरूप भी बड़े पैमाने पर बदला जाएगा। बोर्ड की परीक्षाओं में छात्रों को “बेस्ट ऑफ़ टू” असेसमेंट की सुविधा दी जाएगी। छात्रों के मूल्यांकन (असेसमेंट) के लिए National Assessment Centre बनाया जाएगा। इसका कार्य छात्रों की परीक्षाओं और मूल्यांकन के लिए दिशा-निर्देश तैयार करना होगा। इसे लागू करने में State Achievement Survey (SAS) और National Achievement Survey (NAS) बनाया जाएगा। 

विद्यालयों में विषय और प्रोजेक्ट संबंधी समूह (क्लब/सर्कल) बनाए जाएँगे। इसमें विज्ञान, गणित, संगीत, शतरंज, कविता, भाषा, परिचर्चा के अलग -अलग सर्कल बनाए जाएंगे। यह बच्चों की पढ़ाई से पूरी तरह होगा।    

शिक्षकों के लिए भी होंगे तमाम नए अवसर  

नई शिक्षा नीति में शिक्षकों के लिए भी काफी कुछ नया है। 4 साल के बैचलर ऑफ़ एजुकेशन प्रोग्राम के लिए विशेष छात्रवृत्ति का प्रावधान किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर काफी संख्या में रोज़गार पैदा होगा, खासकर महिला शिक्षिकाओं के लिए। 

शिक्षकों का स्थानान्तरण भी विशेष परिस्थितियों में ही होगा। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को भी मज़बूत किया जाएगा। एक सुझाव के मुताबिक़ विद्यालयों को “स्कूल कॉम्प्लेक्स” बनाना चाहिए। इसके प्रबंधन के लिए स्थानीय लोगों को अभिवावकों की मदद ली जा सकती है। 

शिक्षकों के पास अपने तरीके से पाठ्यक्रम लागू करने का अधिकार होगा। शिक्षकों को ऑनलाइन मंच दिए जाएँगे, जहाँ वह अपने सुझाव साझा कर सकें। उन्हें एक साल में 50 घंटे का समय खुद पर काम करने के लिए मिलेगा।इस दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को समय-समय पर प्रोन्नति भी मिलेगी। 

साल 2022 के अंत तक National Professional Standards for Teachers (NPST) बनाई जाएगी। इसमें शिक्षकों के विकास प्रोन्नति से जुड़े दिशा-निर्देश मौजूद होंगे। दिव्यांग बच्चों के लिए अलग शिक्षक रखे जाएँगे, जिनका काम उन बच्चों के विकास पर ध्यान देना होगा। साल 2030 के अंत तक शिक्षकों को पढ़ाने के लिए 4 साल का बीएड अनिवार्य होगा।   

दिव्यांग, ट्रांसजेंडर और लड़कियाँ सभी को समान शिक्षा

सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEDGs) से आने वाली आबादी को कई श्रेणी में बाँटा गया है। जिसमें मुख्य रूप से लैंगिक आधार पर (महिलाएँ और ट्रांसजेंडर), अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक को रखा गया है। इसके अलावा दिव्यांग, गरीबी रेखा से नीचे के लोग, तस्करी का शिकार हुए बच्चे, अनाथ और शोषित वर्ग से आने वाले बच्चे इन सभी के लिए सामान शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी। 

जिन इलाकों में SEDGs श्रेणी के बच्चे ज़्यादा होंगे उन इलाकों को Special Education Zones घोषित कर दिया जाएगा। जवाहर नवोदय विद्यालय के तरह के विद्यालय तैयार किए जाएँगे जिसमें छात्रों को लगभग मुफ़्त सुविधाएँ मिलेंगी। इसमें लड़कियों और ट्रांसजेंडर की शिक्षा और सुरक्षा को मद्देनज़र रखते हुए छात्रावास तैयार किए जाएंगे। 

इसके अलावा दिव्यांग अधिकार क़ानून 2016 के तहत दिव्यांग बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित कराने के लिए उचित कदम उठाए जाएँगे। दिव्यांग बच्चों को समान शिक्षा दिलाने के लिए शिक्षा पद्धति में उनके अनुसार बदलाव होंगे। SEDGs वर्ग के बच्चों के लिए कई छात्रवृत्ति योजना भी शुरू की जाएँगी।               

पढ़ाई में बढ़ाई जाएगी गवर्नेंस की भूमिका 

शिक्षा में गर्वनेंस को बढ़ावा देने के लिए इससे जुड़े अधिकारियों को अहम ज़िम्मेदारियाँ दी जाएगी। इसमें मुख्य रूप से ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) शामिल किए जाएँगे। यह विद्यालयों के कॉम्प्लेक्स/समूह के साथ मिल कर नीति-निर्देश लागू करेंगे। 

हर ज़िले या राज्य में “बाल भवन” का निर्माण कराया जाएगा जिसमें बच्चे हफ्ते के एक दिन जा सकेंगे। यह मूल रूप से सामुदायिक शिक्षा पर केन्द्रित होंगे और कई विद्यालयों के साथ मिल कर चलाए जाएँगे। विद्यालयों को बतौर ‘सामाजिक चेतना केंद्र’ भी स्थापित किया जाएगा।

सार्वजनिक विद्यालयों में होगा सुधार  

पुरानी शिक्षा नीति में ज़्यादातर नीति-निर्देश तैयार करने का अधिकार कुछ ही इकाइयों के पास है। मसलन, स्कूली शिक्षा विभाग। इसका तंत्र ऐसा है कि बड़े बदलावों की जगह बहुत कम बचती है। इसकी वजह से निजी क्षेत्र में शिक्षा का व्यवसायीकरण बहुत बढ़ा है। शिक्षा भले महँगी हुई है लेकिन यह तय नहीं हो पाया कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो पा रहा है या नहीं। 

इस ढाँचे में बदलाव के लिए कुछ निर्देश तैयार किए गए हैं। निजी से लेकर सार्वजनिक सभी तरह के विद्यालयों का उचित मूल्यांकन होगा। इससे बच्चों को बेहद शुरुआती स्तर से अच्छी शिक्षा मिलेगी। इसके अलावा Sustainable Development Goal4 (SDG4) सुनिश्चित किया जा सकेगा। सार्वजनिक विद्यालयों को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे बच्चों को वहाँ भी अच्छी शिक्षा मिले। अभिवावकों को इस बात का विकल्प कि वह बच्चों का दाख़िला यहाँ भी करवा सकते हैं। National Achievement Survey (NAS) के तहत बच्चों की नियमित रूप से जाँच कराई जाएगी।   

उच्च शिक्षा के लिए कई खामियों का उल्लेख करते हुए उन पर काम करने की जरूरत बताई गई है। ये हैं;

  • सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए संस्थानों में अलग प्रावधान न होना।
  • शिक्षक और संस्थागत स्वायत्तता न होने की वजह से छात्रों का विकास न होना।
  • पाठ्यक्रम और विषयों के विस्तृत न होने से छात्रों में समग्र गुणों की कमी।
  • विश्वविद्यालयों में फंडिंग न होने के चलते शोध और अनुसंधान की कमी।
  • विश्वविद्यालयों में गवर्नेंस और मानकों की कमी।
  • नियमों की अनदेखी और फ़र्ज़ी तरीके से चल रहे शैक्षिक संस्थानों में बढ़ोतरी।

उच्च शिक्षा का हिस्सा लिबरल आर्ट्स 

सॉफ्ट स्किल्स (बुनियादी कौशल) को भारतीय शिक्षा का अहम हिस्सा बनाया जाएगा। इसमें कला (विशेष रूप से लिबरल आर्ट्स) को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाएगा। छात्रों को ज़्यादा से ज़्यादा कला विधा की समझ और जानकारी देने के लिए तक्षशिला और नालंदा की पद्धति पर काम किया जाएगा।

बाणभट्ट के कादम्बरी में 64 कलाओं के बारे में विस्तार से बताया गया था। इसमें सिर्फ चित्र कला और गायन नहीं बल्कि विज्ञान से संबंधित तमाम विषय शामिल थे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में भी इस तरह की शिक्षा पर ज़ोर दिया जाएगा। इनके पाठ्यक्रम में भी ह्यूमैनिटीज़ और कला को शामिल किया जाएगा। 

उच्च शिक्षा में मानव संबंधी मूल्यों को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा, सत्य, धर्म, शांति, प्रेम, अहिंसा, नागरिक मूल्य और जीवन कौशल। एकएकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट बनाया जाएगा जिसके तहत संस्थानों के क्रेडिट का ब्यौरा तैयार किया जाएगा।  

दुनिया में भारतीय शिक्षा को बढ़ावा

देश में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को कई बड़े अवसर दिए जाएँगे। एक ऐसा केंद्र तैयार किए जाएगा जिसमें विदेशी छात्र भारतीय छात्रों के साथ मिल कर अनुसंधान संबंधी विषयों पर काम कर सकते हैं। दूसरे देशों के साथ इस पर समझौते भी किए होंगे जिससे ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में साझा कार्यक्रम पूरे किए जा सकें। इसमें छात्रों से लेकर प्राध्यापकों तक सभी शामिल होंगे। 

देश में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को दुनिया के कुछ देशों में अपना परिसर बनाने का मौक़ा मिलेगा। इसके अलावा दुनिया के 100 सबसे अच्छे विश्वविद्यालय भारत में अपना परिसर स्थापित कर सकेंगे। साथ ही छात्रों को उच्च शिक्षा मुहैया कराने के लिए उन्हें आर्थिक मदद भी की जाएगी। इसके लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा शिक्षक और छात्रों का अनुपात कम से कम 10:1 और ज़्यादा से ज़्यादा 20:1 रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।   

जिससे छात्रों की उच्च शिक्षा जारी रहे 

देश के हर वर्ग और हर क्षेत्र से आने छात्र उच्च शिक्षा जारी रखें इसके लिए भी कई नए प्रावधान किए गए हैं। सबसे पहले सरकार उच्च शिक्षा के लिए फंड बढ़ाएगी। उच्च शिक्षा में लिंगानुपात पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। देश में ज़्यादा से ज़्यादा स्पेशल एजुकेशन ज़ोन बनाए जाएँगे। विश्वविद्यालयों में भारतीय और स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई कराने पर ज़ोर दिया जाएगा। 

उच्च शिक्षा में छात्रवृत्ति भी बढ़ाई जाएगी और शिक्षा में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। उच्च शिक्षा में ऐसे बदलाव होंगे जिससे ज़्यादा से ज़्यादा छात्रों का रोज़गार सुनिश्चित हो। इस बात का ख़ास ख़याल रखा जाएगा कि पढ़ाई के दौरान किसी छात्र का शोषण न किया जा रहा हो।   

प्रोफेशनल स्टडीज़ को उच्च शिक्षा का अहम हिस्सा बनाया जाएगा। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय, विधि विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य और विज्ञान विश्वविद्यालय, तकनीकी विश्वविद्यालय समेत हर तरह के शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा दिया जाएगा। लक्ष्य के मुताबिक़ साल 2030 तक प्रोफेशनल स्टडीज़ प्रदान करने वाले हर संस्थान को समूह के तौर पर विकसित किया जाएगा। अलग-अलग प्रोफेशनल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले संस्थानों के लिए उनकी आवश्यकता के हिसाब से निर्देश तैयार किए जाएँगे।    

देश और दुनिया में ऐसी तमाम घटनाएँ हो रही हैं जिन पर शोध और अनुसंधान की ज़रूरत है। जैसे जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या बढ़ोतरी और नियंत्रण, बायो टेक्नोलॉजी, डिजिटल दुनिया का प्रभाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कई अहम मुद्दे। ऐसे ज़रूरी मुद्दों पर अच्छे नतीजे हासिल करने के लिए सरकार शोध और अनुसंधान पर विशेष ध्यान देगी। 

शोध और अनुसंधान, Research & Innovation (R&I) इतना अहम विषय होने के बावजूद भारत इस पर अपनी जीडीपी का केवल 0.69 हिस्सा खर्च करता है। वहीं दूसरे देशों से तुलना करें तो अमेरिका 2.8%, इज़रायल 4.3%, चीन 2.1% और दक्षिण कोरिया 4.2% हिस्सा खर्च करता है। 

भारत भी अब इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम करने वाला है। भारत का इतिहास शोध और अनुसंधान के मामले में बेहद गहरा है, इस नीति में उसे वापस हासिल करने की बात की गई है। इसके लिए National Research Foundation (NRF) तैयार की जाएगी, जिसका काम देश के विश्वविद्यालयों में शोध कार्य को बढ़ावा देना होगा।

साथ ही यह विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध का मूल्यांकन भी करेगा। इसके बाद कारगर शोध कार्यक्रमों की जानकारी सरकारी समूहों और एजेंसियों को देगा। शोध कार्यों को फंड दिलाना भी NRF के तहत ही आएगा।  

कैसे लागू होंगे उच्च शिक्षा के बेहतर विकल्प 

उच्च शिक्षा का स्वरूप बेहतर करने के लिए इसका रेगुलेटरी सिस्टम (लागू करने की पद्धति) बदला जाएगा। यह सारे कार्य भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (HECI) के तहत किए जाएँगे। इस आयोग में 4 स्वतंत्र इकाइयाँ शामिल की जाएँगी। इनके जरिए उच्च शिक्षा का बुनियादी ढाँचा सुधारा जाएगा। इसकी सबसे पहली इकाई होगी, 

  • National Higher Education Regulatory Council (NHERC) का काम मुख्यतः रेगुलेशन सुनिश्चित करना होगा।
  • National Accreditation Council (NAC) का काम मान्यता दिलाना होगा।
  • Higher Education Grants Council (HEGC) का काम फंडिंग उपलब्ध कराना होगा।
  • General Education Council (GEC) का काम शिक्षा के उचित मानक तय कराना होगा।

 उच्च शिक्षा में गवर्नेंस 

उच्च शिक्षा में गवर्नेंस को लेकर कई अहम कदम उठाए जाएँगे। सुविधाजनक मान्यता प्रणाली और स्वायत्तता तैयार की जाएगी। इसकी मदद से संस्थान खुद सकारात्मक बदलाव और बड़े कदम उठा सकेंगे। 

उच्च शिक्षा संस्थानों में बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स स्थापित किया जाएगा। इनका काम उच्च शिक्षा संस्थानों को राजनीति दखलंदाज़ी से बचाकर रखना होगा। प्राध्यापकों की भर्ती करना होगा और संस्थागत निर्णय लेना होगा। यह शिक्षाविदों और शिक्षा से जुड़े अनुभवी लोगों का एक समूह होगा जो उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए स्वतंत्र रूप से काम करेगा। तय लक्ष्य के मुताबिक़ साल 2035 के अंत तक देश के लगभग सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स का यह समूह होगा।  

भाषाओं के ज़रिए युवाओं को पढ़ाने का लक्ष्य 

इसके अलावा जिस बात पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया जाएगा वह है युवाओं की शिक्षा और भारतीय भाषाओं का प्रचार। इन दो बातों के अलावा प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कला और संस्कृति को भी शामिल किया जाएगा। दशकों पहले देश में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन शुरू किया गया था, इसे आधार बनाते हुए सरकार देश के हर युवा को साक्षर और शिक्षित बनाने लक्ष्य लेकर चल रही है। देश भर में इसके लिए एडल्ट एजुकेशन सेंटर शुरू किए जाएँगे। 

नई शिक्षा नीति में ‘अतुल्य भारत’ को आधार बनाते हुए भारतीय संस्कृति के एक बड़े हिस्से को पढ़ाई में शामिल करने की बात कही है। यूनेस्को ने 197 भारतीय भाषाओं को लगभग लुप्त बताया है। पिछले 50 सालों में लगभग 50 भारतीय भाषाएँ लुप्त हो चुकी हैं। इसके अलावा एक और नए तरह का संस्थान शुरू किया जाएगा Indian Institute of Translation and Interpretation (IITI)। इसका काम व्याख्या और अनुवाद संबंधी काम को बढ़ावा देना होगा। 

भाषा और संस्कृति की पढ़ाई करने वालों के लिए छात्रवृत्ति शुरू की जाएगी। इतना ही नहीं डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देश में आधुनिक माध्यमों के ज़रिए संवाद को बढ़ावा दिया जाएगा।  

जीडीपी का 6% शिक्षा पर 

नई शिक्षा नीति में ‘केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड’ को मज़बूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा को सबसे ऊपर रखने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर ‘शिक्षा मंत्रालय’ किया जाएगा। इसके अलावा नई शिक्षा नीति में सबसे ज़्यादा इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी का 6% तक खर्च हो। फिलहाल यह 4.43% ही है। यह दुनिया के तमाम विकासशील और विकसित देशों से कमतर हैं। इसलिए नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर किए जाने वाले खर्च को बढ़ावा देने की बात का ज़िक्र है। 

यह भारत की साक्षरता और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए ही बहुत ज़रूरी है। सरकार इस योजना पर काम कर रही है कि 2030 से 2040 के दशक के बीच यह शिक्षा नीति पूरी तरह प्रभावी होगी।     

कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को हरी झंडी दी, स्कूली शिक्षा को 5+3+3+4 फॉर्मूले के तहत पढ़ाया जाएगा

केंद्र की मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. नई शिक्षा नीति में 10+2 के फार्मेट को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, इसे समझें. अब इसे 10+2 से बांटकर 5+3+3+4 फार्मेट में ढाला गया है. इसका मतलब है कि अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा 1 और कक्षा 2 सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे. फिर अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा. इसके बाद में तीन साल मध्य चरण (कक्षा 6 से 8) और माध्यमिक अवस्था के चार वर्ष (कक्षा 9 से 12). इसके अलावा स्कूलों में कला, वाणिज्य, विज्ञान स्ट्रीम का कोई कठोर पालन नहीं होगा, छात्र अब जो भी पाठ्यक्रम चाहें, वो ले सकते हैं.

नयी दिल्ली (ब्यूरो) 29 जुलाई:

कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को हरी झंडी दे दी है. 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है. HRD मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि ये नीति एक महत्वपूर्ण रास्ता प्रशस्‍त करेगी.  ये नए भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी. इस नीति पर देश के कोने कोने से राय ली गई है और इसमें सभी वर्गों के लोगों की राय को शामिल किया गया है. देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि इतने बडे़ स्तर पर सबकी राय ली गई है

अहम बदलाव 

  • नई शिक्षा नीति के तहत अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा.
  • बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी ही क्यों न हो, एक सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ाया जाएगा
  • 9वींं से 12वींं क्लास तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी. स्कूली शिक्षा को 5+3+3+4 फॉर्मूले के तहत पढ़ाया जाएगा
  • वहीं कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी. यानि कि ग्रेजुएशन के पहले साल पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्‍लोमा, तीसरे साल में डिग्री मिलेगी. 
  • 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है. वहीं हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी. 4 साल की डिग्री करने वाले स्‍टूडेंट्स एक साल में  MA कर सकेंगे. 
  • अब स्‍टूडेंट्स को  MPhil नहीं करना होगा. बल्कि MA के छात्र अब सीधे PHD कर सकेंगे.

इतने बड़े पैमाने पर जुटाई गई थी राय

इस शिक्षा नीति के लिए कितने बड़े स्तर पर रायशुमारी की गई थी, इसका अंदाजा इन आंकड़ों से सहज ही लगाया जा सकता है. इसके लिए 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6,600 ब्लॉक्स, 676 जिलों से सलाह ली गई थी. 

स्‍टूडेंट्स बीच में कर सकेंगे दूसरे कोर्स 

हायर एजुकेशन में 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 50 फीसदी हो जाएगा. वहीं नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर वो दूसरा कोर्स कर सकता है. 

हायर एजुकेशन में भी कई सुधार किए गए हैं. सुधारों में ग्रेडेड अकेडमिक, ऐडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल ऑटोनॉमी आदि शामिल हैं. इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स शुरू किए जाएंगे. वर्चुअल लैब्स विकसित किए जाएंगे. एक नैशनल एजुकेशनल साइंटफिक फोरम (NETF) शुरू किया जाएगा. बता दें कि देश में 45 हजार कॉलेज हैं.

सरकारी, निजी, डीम्‍ड सभी संस्‍थानों के लिए होंगे समान नियम

हायर एजुकेशन सेक्रटरी अमित खरे ने बताया, ‘ नए सुधारों में टेक्नॉलॉजी और ऑनलाइन एजुकेशन पर जोर दिया गया है. अभी हमारे यहां डीम्ड यूनविर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज और स्टैंडअलोन इंस्टिट्यूशंस के लिए अलग-अलग नियम हैं. नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत सभी के लिए नियम समान होंगे.  

हरियाणा में कल से खुलेंगे सरकारी स्कूल

सारिका तिवारी, चंडीगढ़:

अध्यापन और गैर शिक्षण कमर्चारी गर्मियों की छुट्टियों के बाद अपनी ड्यूटी पर आएंगे जबकि विद्यार्थी स्कूल आएं या नहीं इस पर फैसला नहीं हुआ कमोबेश यही हाल हरियाणा में कॉलेजों का भी है। कॉलेजों में अध्यापक एवं प्रशासनिक स्टाफ आएगा लेकिन विद्यार्थियों के आने पर अभी कोई नोटिफिकेश्न जारी नहीं हुआ है।

आपको बता दें कि कोरोनावायरस संक्रमण के बढ़ते हुए मामले को देखते हुए सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं क्लास की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। छात्रों को अगली क्लास में प्रमोट करने के लिए एक पासिंग फॉर्म्युला अपनाया जाएगा। इसीबीच हरियाणा में सभी स्कूलों को खोलने की तैयारी है। हरियाणा के स्कूली शिक्षा निदेशालय ने 1 जुलाई से 26 जुलाई, 2020 तक राज्य में गर्मी की छुट्टी घोषित कर दिया है। हरियाणा के स्कूली शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राज्य के सभी स्कूल 27 जुलाई से खुलेंगे।

हरियाणा सरकार ने राज्य के स्कूली बच्चों की शिक्षा में सुधार के लिए रिलायंस जियो टीवी के साथ करार किया था। छात्र टीवी, लैपटॉप, डेस्कटॉप, टैबलेट और मोबाइल के माध्यम से एजुसैट के सभी चार चैनल एवं रिलायंस जियो टीवी देख सकते हैं। राज्य सरकार के इस कदम से हरियाणा स्कूली शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई एवं अन्य बोर्डों के अधीन चलने वाले सरकारी और निजी स्कूलों के करीब 52 लाख हिंदी और इंग्लिश मीडियम के छात्रों को कथित रूप से लाभ पहुंचेगा।

रद्द हो चुकी है 10वीं और 12वीं की बाकी परीक्षा

नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में दंगे की वजह से उस क्षेत्र में 10वीं और 12वीं की परीक्षा प्रभावित हुई थी। बाकी लॉकडाउन की वजह से देश भर में 12वीं की परीक्षा स्थगित हुई थी। 10वीं की परीक्षा नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में होनी थी जबकि 12वीं की बाकी परीक्षाएं पूरे देश में। सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की यह परीक्षा 1 से 15 जुलाई, 2020 तक होनी थी लेकिन अब इसे भी रद्द कर दिया गया है। एक पासिंग फॉर्म्युला के आधार पर छात्रों का रिजल्ट तैयार किया जाएगा। आईसीएसई ने भी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। सीटेट की परीक्षा 5 जुलाई को होनी थी। सीबीएसई ने उसे भी रद्द कर दिया था

आज लोक गीत मान कर गाये जाते हैं शिव कुमार बटालावी के गीत

कोरल ‘पुरनूर’ चंडीगढ़ – 23 जुलाई:

जन्मदिवस पर विशेष: पंजाबी के विद्यापति ‘शिव कुमार बटालवि’

शिव बटालवि

अमृता के ‘बिरह के सुल्तान’ लोक संस्कृति के पुरोधा भी हैं

शिव के गीत भारत पाकिस्तान में घर घर गली गली महफिल महफिल इस क़दर मशहूर हैं सभी आम – ओ – खास उनको लोक गीत ही समझकर गाते सुनते हैं लट्ठे दी चादर , ईक मेरी अख कासनी, जुगनी, म्धानियाँ हाय ओह … आदि  जैसे गीत हमारी संस्कृति का हिस्सा  ही नहीं बल्कि पंजाबी को द्निया में अहम स्थान दिलाने के श्रेय के भी अधिकारी है शिव पंजाब का विद्यापति है।

‘इक कुड़ी जिहदा नाम मोहब्बत गुम है’ उनकी शाहकार रचना  में भावनाओं का उभार, करुणा, जुदाई और प्रेमी के दर्द का बखूबी चित्रण है।

शिव कुमार बटालवी के गीतों में ‘बिरह की पीड़ा’ इस कदर थी कि उस दौर की प्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम ने उन्हें ‘बिरह का सुल्तान’ नाम दे दिया। शिव कुमार बटालवी यानी पंजाब का वह शायर जिसके गीत हिंदी में न आकर भी वह बहुत लोकप्रिय हो गया। उसने जो गीत अपनी गुम हुई महबूबा के लिए बतौर इश्तहार लिखा था वो जब फ़िल्मों तक पहुंचा तो मानो हर कोई उसकी महबूबा को ढूंढ़ते हुए गा रहा था

वे 1967 में वे साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले सबसे कम उम्र के साहित्यकार बन गये। साहित्य अकादमी (भारत की साहित्य अकादमी) ने यह सम्मान पूरण भगत की प्राचीन कथा पर आधारित उनके महाकाव्य नाटिका ‘लूणा’ (1965) के लिए दिया, जिसे आधुनिक पंजाबी साहित्य की एक महान कृति माना जाता है और जिसने आधुनिक पंजाबी किस्सा गोई की एक नई शैली की स्थापना की।

        शिव कुमार का जन्म 23 जुलाई 1936 को गांव बड़ा पिंड लोहटिया, शकरगढ़ तहसील (अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में) राजस्व विभाग के ग्राम तहसीलदार पंडित कृष्ण गोपाल और गृहिणी शांति देवी के घर में हुआ। भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार गुरदासपुर जिले के बटाला चला आया, जहां उनके पिता ने पटवारी के रूप में अपना काम जारी रखा और बाल शिव ने प्राथमिक शिक्षा पाई। लाहौर में पंजाबी भाषा की क़िताबें छापने वाले प्रकाशक ‘सुचेत क़िताब घर’ ने 1992 में शिव कुमार बटालवी की चुनिंदा शायरी की एक क़िताब ‘सरींह दे फूल’ छापी.

5 फ़रवरी 1967 को उनका विवाह गुरदासपुर जिले के किरी मांग्याल की ब्राह्मण कन्या अरुणा से हुआ  और बाद में दंपती को दो बच्चे मेहरबां (1968) और पूजा (1969) हुए। 1968 में चंडीगढ़ चले गये, जहां वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जन संपर्क अधिकरी बने, वहीं अरुणा बटालवी पुंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के पुस्तकालयमें कार्यरत रहीं। आज शिव कुमार बटालवी का परिवार केनेडा में रहता है।

ग्रामीण क्षेत्रों मे रहने वाले किसानों ओर बाकी लोगों के संपर्क में आए ओर उन्हीं की बातें अपने लेखन में ढाली उनको जानने वाले लोग उनकी जीवन शैली और दिनचर्या के बारे में बताते हैं के वो राँझे की सी जिंदगी जीते थे वह ऐसे कवि थे जो कि अपनी रचना को स्वयं लयबद्ध करते थे।

        बटालवी की नज्मों को सबसे पहले नुसरत फतेह अली खान ने अपनी आवाज दी. नुसरत ने उनकी कविता ‘मायें नी मायें मेरे गीतां दे नैणां विच’ को गाया था. इसके बाद तो जगजीत सिंह – चित्रा सिंह, रबी शेरगिल, हंस राज हंस, दीदार सिंह परदेसी और सुरिंदर कौर जैसे कई गायकों ने बटालवी की कविताएं गाईं. उस शायर के लिखे हुए गीत – अज्ज दिन चढ्या, इक कुड़ी जिद्दा नां मुहब्बत, मधानियां, लट्ठे दी चादर, अक्ख काशनी आदि आज भी न केवल लोगों की जुबां पर हैं बल्कि बॉलीवुड भी इन्हें समय समय पर अपनी फिल्मों को हिट करने के लिए यूज़ करता आ रहा है. नुसरत फतेह अली, महेंद्र कपूर, जगजीत सिंह, नेहा भसीन, गुरुदास मान, आबिदा, हंस राज हंस….

     “असां ते जोबन रुत्ते मरना…” यानी “मुझे यौवन में मरना है, क्यूंकि जो यौवन में मरता है वो फूल या तारा बनता है, यौवन में तो कोई किस्मत वाला ही मरता है” कहने वाले शायर की ख़्वाहिश ऊपर वाले ने पूरी भी कर दी. मात्र छत्तीस वर्ष की उम्र में शराब, सिगरेट और टूटे हुए दिल के चलते 7 मई 1973 को वो चल बसे. लेकिन, जाने से पहले शिव ‘लूणा’ जैसा महाकाव्य लिख गये, जिसके लिए उन्हें सबसे कम उम्र में साहित्य अकादमी का पुरूस्कार दिया गया. मात्र इकतीस वर्ष की उम्र में. ‘लूणा’ को पंजाबी साहित्य में ‘मास्टरपीस’ का दर्ज़ा प्राप्त है और जगह जगह इसका नाट्य-मंचन होता आया है.

शिव को राजनीतिक चुनोतियों का भी सामना करना पड़ा  उन्होने पंजाबी ओर हिन्दी को हिन्दू – सिक्ख में बँटते भी देखा ओर इस बात का पुरजोर विरोध भी किया, अपनी मातृभाषा को इस तरह बँटते देखना असहनीय था।  लोगों के दोहरे व्यवहार और नकलीपन की वजह से उन्होंने कवि सम्मेलनों में जाना बंद कर दिया था. एक मित्र के बार-बार आग्रह करने पर वे 1970 में बम्बई के एक कवि सम्मलेन में शामिल हुए थे. मंच पर पहुँचने के बाद जब उन्होंने बोला तो पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया. उन्होंने बोला कि आज हर व्यक्ति खुद को कवि समझने लगा है, गली में बैठा कोई भी आदमी कवितायें लिख रहा है. इतना बोलने के बाद उन्होंने अपनी सबसे प्रसिद्ध रचना ‘इक कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत है, गुम है’ सुनाई. इस पूरे पाठ के दौरान हॉल में सन्नाटा बना रहा. सच कहा जाए तो शिव कुमार कभी दुःख से बाहर निकल ही नहीं पाए. उन्हें हर समय कुछ न कुछ काटता ही रहा.

एक साक्षात्कार के दौरान शिव ने कहा आदमी, जो है, वो एक धीमी मौत मर रहा है. और ऐसा हर इंटेलेक्चुअल के साथ हो रहा है, होगा.”

The Quick brown fox नहीं यह है एक वर्णमाला का सम्पूर्ण वाक्य ‘क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोटौठीडढण:।’

अजय नारायण शर्मा ‘अज्ञानी’, चंडीगढ़:

संस्कृत भाषा का कोई सानी नहीं है। यह अत्यंत वैज्ञानिक व विलक्षण भाषा है जो अनंत संभावनाएं संजोए है।

अंग्रेजी में
A QUICK BROWN FOX JUMPS OVER THE LAZY DOG
यह एक प्रसिद्ध वाक्य है। अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर इसमें समाहित हैं। किन्तु इसमें कुछ कमियाँ भी हैं, या यों कहिए कि कुछ विलक्षण कलकारियाँ किसी अंग्रेजी वाक्य से हो ही नहीं सकतीं। इस पंक्ति में :-

1) अंग्रेजी अक्षर 26 हैं और यहां जबरन 33 का उपयोग करना पड़ा है। चार O हैं और A,E,U,R दो-दो हैं।
2) अक्षरों का ABCD.. यह स्थापित क्रम नहीं दिख रहा। सब अस्तव्यस्त है।

अब संस्कृत में चमत्कार देखिये!

क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोटौठीडढण:।
तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।।

अर्थात्– पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनहार कौन? राजा मय कि जिसको शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं।

आप देख सकते हैं कि संस्कृत वर्णमाला के सभी 33 व्यंजन इस पद्य में आ जाते हैं। इतना ही नहीं, उनका क्रम भी यथायोग्य है।

एक ही अक्षर का अद्भुत अर्थ विस्तार।
माघ कवि ने शिशुपालवधम् महाकाव्य में केवल “भ” और “र”, दो ही अक्षरों से एक श्लोक बनाया है-

भूरिभिर्भारिभिर्भीभीराभूभारैरभिरेभिरे।
भेरीरेभिभिरभ्राभैरूभीरूभिरिभैरिभा:।।

अर्थात् धरा को भी वजन लगे ऐसे वजनदार, वाद्य यंत्र जैसी आवाज निकालने वाले और मेघ जैसे काले निडर हाथी ने अपने दुश्मन हाथी पर हमला किया।

किरातार्जुनीयम् काव्य संग्रह में केवल “न” व्यंजन से अद्भुत श्लोक बनाया है और गजब का कौशल प्रयोग करके भारवि नामक महाकवि ने कहा है –

न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नाना नना ननु।
नुन्नोSनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नन्नुनन्नुनुत्।।

अर्थ- जो मनुष्य युद्ध में अपने से दुर्बल मनुष्य के हाथों घायल हुआ है वह सच्चा मनुष्य नहीं है। ऐसे ही अपने से दुर्बल को घायल करता है वो भी मनुष्य नहीं है। घायल मनुष्य का स्वामी यदि घायल न हुआ हो तो ऐसे मनुष्य को घायल नहीं कहते और घायल मनुष्य को घायल करें वो भी मनुष्य नहीं है।

अब हम एक ऐसा उदहारण देखेंगे जिसमे महायमक अलंकार का प्रयोग किया गया है। इस श्लोक में चार पद हैं, बिलकुल एक जैसे, किन्तु सबके अर्थ अलग-अलग –

विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणा विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणाः।
विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणा विकाशमीयुर्जगतीशमार्गणाः।।

अर्थात् – अर्जुन के असंख्य बाण सर्वत्र व्याप्त हो गए जिनसे शंकर के बाण खण्डित कर दिए गए। इस प्रकार अर्जुन के रण कौशल को देखकर दानवों को मारने वाले शंकर के गण आश्चर्य में पड़ गए। शंकर और तपस्वी अर्जुन के युद्ध को देखने के लिए शंकर के भक्त आकाश में आ पहुँचे।

संस्कृत की विशेषता है कि संधि की सहायता से इसमें कितने भी लम्बे शब्द बनाये जा सकते हैं। ऐसा ही एक शब्द इस चित्र में है, जिसमें योजक की सहायता से अलग अलग शब्दों को जोड़कर 431 अक्षरों का एक ही शब्द बनाया गया है। यह न केवल संस्कृत अपितु किसी भी साहित्य का सबसे लम्बा शब्द है। (चित्र संलग्न है…)

संस्कृत में यह श्लोक पाई (π) का मान दशमलव के 31 स्थानों तक शुद्ध कर देता है।

गोपीभाग्यमधुव्रात-श्रुग्ङिशोदधिसन्धिग।
खलजीवितखाताव गलहालारसंधर।।

pi=3.1415926535897932384626433832792

श्रृंखला समाप्त करने से पहले भगवन श्री कृष्णा की महिमा का गान करने वाला एक श्लोक प्रस्तुत है जिसकी रचना भी एक ही अक्षर से की गयी है।

दाददो दुद्ददुद्दादी दाददो दूददीददोः।
दुद्दादं दददे दुद्दे दादाददददोऽददः॥

यहाँ पर मैंने बहुत ही काम उदाहरण लिए हैं, किन्तु ऐसे और इनसे भी कहीं प्रभावशाली उल्लेख संस्कृत साहित्य में असंख्य बार आते हैं। कभी इस बहस में न पड़ें कि संस्कृत अमुक भाषा जैसा कर सकती है कि नहीं, बस यह जान लें, जो संस्कृत कर सकती है, वह कहीं और नहीं हो सकता।

सेमेस्टर प्रणाली हटाने व परीक्षा शुल्क वापस करने बाबत शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन: एबीवीपी हरियाणा

चंडीगढ़ – 30 जून:

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने माननीय शिक्षा मंत्री मान कंवरपाल गुर्जर को 7 सूत्री ज्ञापन सौंप कर शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर अपने सुझाव ज्ञापित किए। ज्ञापन के दौरान विद्यार्थी परिषद हरियाणा का एक प्रतिनिधिमंडल जिसमें प्रांत अध्यक्ष प्रा. राजेंद्र धीमान, प्रांत मंत्री सुमित जागलान, प्रांत संगठन मंत्री श्याम सिंह राजावत एवं प्रांत कार्यकारिणी सदस्य सुश्री पुरनूर वशिष्ट मौजूद रहे। विद्यार्थी परिषद हरियाणा ने शिक्षा मंत्री को दिये अपने ज्ञापन में स्नातक स्तर पर गैर तकनीकी कक्षाओं में सेमेस्टर प्रणाली हटाने, परीक्षा शुल्क वापस करने, रि-अपीयर के विद्यार्थियों को आ रही परेशानी एवं शिक्षा क्षेत्र की ओर समस्याओं को लेकर ज्ञापन प्रेषित कर उनके समाधान की मांग की है।

        एबीवीपी हरियाणा के प्रदेश मंत्री सुमित जागलान ने कहा कि विद्यार्थी परिषद की लम्बे समय से एक मांग गैर तकनीकी कोर्सों में स्नातक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली को समाप्त करने की भी है । वर्ष में सेमेस्टर सिस्टम की वजह से 2 बार परीक्षा होने के कारण 4 से 5 महीने इन्हीं परीक्षा को कराने में निकल जाते हैं। जिसके कारण विद्यार्थी का काफी वक्त सिर्फ परीक्षाओं में निकल जाता है और विद्यार्थी वर्षभर परीक्षाओं के तनाव में रहता है । परीक्षाओं के अलावा किसी भी पाठ्येतर गतिविधि में विद्यार्थी भाग नहीं ले पाता जिससे उसका सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता । इसके अलावा दो बार परीक्षा होने के कारण यूजीसी की गाइडलाइन के तहत 180 क्लास का नियम भी अच्छे से पालन नहीं हो रहा है। छात्रों को अतिरिक्त अध्ययन के लिए समय नहीं मिलता है परिणामस्वरूप उन्हें विषय का सिर्फ मूल ज्ञान होता है। इसके अलावा प्रथम सेमेस्टर का विद्यार्थी जब तक कॉलेज में आकर दो से तीन महीनों में कॉलेज के वातावरण और पढ़ाई के साथ खुद का संतुलन बना पाता है तब तक उसकी परीक्षाएं आ जाती हैं और इस कारण विषय को रटना ही एकमात्र विकल्प बचता है। विद्यार्थी विषय को समझने की बजाय सिर्फ रटना और परीक्षा देना इसी में रह जाते हैं। कभी-कभी, शिक्षक कम समय के कारण विषय का पूरा ज्ञान नहीं दे पाते हैं। इन सब खामियों की वजह से विद्यार्थी परिषद की शुरू से मांग रही है कि तकनीकी कोर्सों को छोड़कर बाकी गैर तकनीकी (B.A., B.SC, B.COM) में सेमेस्टर सिस्टम खत्म होना चाहिए और वार्षिक प्रणाली लागू होनी चाहिए ।

         इसके इलावा विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क लिया गया है जबकि परीक्षा नहीं हो रही है तो परीक्षा शुल्क को वापस किया जाए, रिअपीयर के विद्यार्थियों के लिए नोटिफिकेशन में स्थिति स्पष्ठ नहीं की गई है इसलिए इस स्थिति को स्पष्ट किया जाए व इस बात का ध्यान रखा जाए कि किसी भी विद्यार्थी का 1 वर्ष खराब ना हो, आगामी सत्र के लिये नया शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया जाए, कोरोना महामारी के कारण आगामी सत्र विलंब से आरंभ होगा इसलिए सिलेबस को आनुपातिक रूप से कम किया जाए, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्लेसमेंट सेल सक्रिय नही है इसलिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्लेसमेंट सेल को टारगेट बेस्ड बनाया जाए। प्लेसमेंट सेल को छात्रों को रोजगार दिलाने के टारगेट दिए जाएं, हरियाणा बोर्ड की 10वीं 12वीं की परीक्षाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए आदि मांगों/सुझावों को रखा है।

          एबीवीपी हरियाणा के प्रदेश मंत्री सुमित जागलान ने कहा कि, छात्र हितों की इन मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए नहीं, अगर सरकार इन मांगों को पूरा नहीं करती है, प्रदेशभर में विद्यार्थी परिषद एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार है।

एबीवीपी युवाओं ने क्षी जिन्न पिंग पर उतारा गुस्सा, फूंका पुतला

चीन द्वारा गलवान घाटी में किए गए संधि उल्लंघन और भारतीय सेना के 20 जवानों की शहादत से आक्रोश में आए भारतीय युवाओं ने आज बीच सड़क में अपना गुस्सा ज़ाहिर किया।

पंचकुल (ब्यूरो):

चीन के संधि उल्लंघन और एलएसी पर अतिक्रमण से गुस्साये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के युवा विद्यार्थियों ने शी जिनपींग के पुतले को पहले तो जूतियों से पीटा और फिर बाद में आग लगा दी।

आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पंचकुला इकाई ने मनसादेवी कॉम्प्लेक्स में गालवान घाटी के 20 शाहीद सैनिकों के दोषी चीन के तानाशाह परिमियर शी जिन पिंग का पुतला फूंका। फूंकने से पहले आक्रोशित युवा छात्रों ने जिन पिंग के पतले को चप्पल जूतों से पीटा। युवाओं के इस आक्रोश में स्थानीय नागरिकों ने भी भाग लिया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विद्यार्थियों के साथ आम नागरिकों ने भी शाहिद जवानों पर गर्वित आक्रोश जताया, भारत माता की जय के साथ साथ भारतीय सेना के नाम के जयकारे भी लगाए गए। इस मौके पर पुरनूर ने दूसरे दलों के विद्यार्थी दलों से भी अपील की इस समय वह राजनीति छोड़ देश हिट में आगे आयें और चीन ओ एक कडा संदेश दें “खान पीन नुं वखों वख ते लड़न भिड़न नु कट्ठे” हम भारतीय.

इस विरोध प्रदर्शन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पंचकूला से दोनों प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बलराम भारद्वाज और पुरनूर के साथ अभाविप कार्यकर्ता कृष्ण भरद्वाज, बॉबी, संजय और सोनू कौशिक उपस्तिथ रहे

एबीवीपी पंचकूला इकाई ने सिटी मैजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा

आज एबीवीपी पंचकूला इकाई द्वारा सिटी मैजिस्ट्रेट सुशील कुमार को ज्ञापन सौंपा गया इस ज्ञापन में सरकार से छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने के लिए आग्रह किया गया इस ज्ञापन में छात्रों की वर्तमान समस्याओं का उल्लेख किया गया है.

ज्ञापन का विषय था परीक्षा संबंधित समस्याएं व उनके समाधान निकालना

इन समस्याओं के समाधान हेतु माननीय राज्यपाल मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को भी ज्ञापन प्रेषित किया गया था एबीवीपी द्वारा ज्ञापन मैं प्रदेश के 10000 विद्यार्थियों से बातचीत करने के पश्चात अनेक सुझाव सरकार के सामने रखे थे परंतु सरकार द्वारा उन मामलों पर कोई उचित निर्णय नहीं लिया गया सरकार के द्वारा परीक्षा से संबंधित पत्र क्रमांक KW 18/79- 2020 UNP(4) दिनांक 12 जून 2020 को जारी इस पत्र में कुछ बिंदु अव्यावहारिक है

सिटी मेजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते हुए एबीवीपी पंचकुला के कार्यकर्ता
  1. अंतिम वर्ष की परीक्षाएं हरियाणा के छात्रों के लिए तो अनिवार्य हैं हरियाणा से बाहर के विद्यार्थियों के लिए आवश्यक नहीं एक ही कक्षा के विद्यार्थियों के लिए दोहरा मापदंड क्यों?
  2. परीक्षा की घोषणा तथा परीक्षा की तिथि में केवल 15 दिन का अंतर है करो ना कि ऐसी स्थिति में छात्र मानसिक रूप से तुरंत परीक्षा देने के लिए तैयार नहीं है
  3. विभाग के पत्र के अनुसार परीक्षा देने वाले छात्र हॉस्टल में नहीं ठहर पाएंगे ऐसे में दूरदराज ग्रामीण क्षेत्र तथा दूर के जिलों से आने वाले परीक्षार्थी कैसे परीक्षा दे पाएंगे विशेषकर छात्राओं के लिए तो यह और भी कष्टदायक होगा
  4. जिन छात्रों के परिवार क्वॉरेंटाइन है वह विद्यार्थी परीक्षा देने कैसे आएगा इस विकट परिस्थिति में कोई गरीब छात्र ना तो टैक्सी करके परीक्षा देने आ पाएगा ना ही उसे कोई किराए पर घर देने को तैयार होगा

तो ऊपर दिए गए इन्हीं कुछ बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अभाविप पंचकूला इकाई ने आज सिटी मजिस्ट्रेट यानी कि सुशील कुमार जी को ज्ञापन सौंपा और उसमें उनसे आग्रह किया कि वह दि गई मांगों को मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री तक पहुंचाएं

उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि

  1. उच्चतर शिक्षा विभाग की नई गाइड लाइन के अनुसार परीक्षाएं 1 जुलाई से शुरू होंगी वर्तमान परिस्थितियां देखते हुए यह परीक्षाओं के लिए अनुकूल समय नहीं है इसलिए परीक्षा पर्याप्त समय देकर करवाई जाएं एवं परीक्षाओं के विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाए
  2. परीक्षा केंद्र विद्यार्थियों के निकटतम के स्थानों पर बनाए जाएं
  3. प्रत्येक विश्वविद्यालय दूर के विद्यार्थियों के लिए जो उसके क्षेत्र में नहीं आता वह वहां के केंद्र पर एक परीक्षा केंद्र बनवाएं
  4. परीक्षाओं की स्थितियों पर कोविड-19 महामारी के चलते यदि छात्र संक्रमित होता है या कोई अनहोनी होती है तो इस स्थिति में छात्र का 20 लाख का बीमा होना चाहिए
  5. कोरोना महामारी के चलते कुछ छात्र दिया प्रिय का फॉर्म भरने से वंचित हो गए हैं उन्हें रिअपीयर का फॉर्म भरने के लिए 1 सप्ताह का समय दिया जाए
  6. महामारी के चलते विद्यार्थियों का सिलेबस पूरा नहीं हो पाया है इसलिए सिलेबस को उसी अनुपात में कम किया जाए
  7. आगामी सत्र में दाखिला एवं प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया क्या रहेगी इसे तुरंत स्पष्ट किया जाए
  8. छात्रों की परीक्षा से संबंधित समस्याओं के लिए महाविद्यालय विश्वविद्यालय या कुछ हेल्पलाइन नंबर या कुछ व्हाट्सएप नंबर जारी करें जिससे छात्र सीधा अपनी समस्या की जानकारी महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों को दे सके
  9. परीक्षा होने से 1 माह पहले डेट शीट जारी की जाए
  10. अगला सत्र वार्षिक किया जाए ताकि अगले सत्र की परीक्षाओं की तैयारियों के लिए छात्रों को पर्याप्त समय मिल सके
  11. पुरानी रिअपीयर वाले विद्यार्थी जिनके पास पेपर पास करने का वर्तमान समय में अंतिम अवसर है एवं अन्य सेमेस्टर में भी रिअपीयर वाले विद्यार्थियों को नियमित विद्यार्थियों से संबंधित बनाई जाने वाली परीक्षा पद्धति को अपनाकर ही उन्हें अवसर मिलना चाहिए ताकि उनका 1 वर्ष व्यर्थ ना हो