Senate Elections Stands Postponed Till Further Orders

Chandigarh October 15, 2020

After taking cognizance of unlock 5 guidelines, Professor Raj Kumar, Vice Chancellor, Panjab University, Chandigarh has decided to seek advice of UT administration regarding the conduct of senate elections 2020 . In the meantime the dates of senate elections stands postponed till further order .

Further course of action shall be decided after the receipt of advice from UT administration Chandigarh.

PU to remain open on 16.10.20

Chandigarh October 15, 2020

It is hereby notified that the Institutions/Regional Centers/ Rural Center, Affiliated Colleges of Panjab University located in the State of Punjab will remain closed on Friday 16th October 2020 on account of 350th Birthday of Baba Banda Singh Bahadur Ji. The declaration has been made in terms of Punjab Govt. Notification No. 1/77726/2020 dated 16.09.2020. The Panjab University (Sector-14&25) Campus, offices/Teaching departments and affiliated colleges in Chandigarh shall remain open on 16.10.2020 as usual.   

‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: कार्यान्वयन के लिए रोडमैप’ पीयू में हुआ वेबिनार

कोरल ‘पुरनूर’, चंडीगढ़ – 10 अक्तूबर:

आज 10 अक्टूबर 2020 को पंजाब विश्वविद्यालय ने 2020 ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: कार्यान्वयन के लिए रोडमैप ‘पर एक वेबिनार का आयोजन किया। इस वेबिनार में, सुश्री  अनुसुईया उइके, छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल, मुख्य अतिथि थीं। इस अवसर पर सुश्री उइके ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल कार्यान्वयन के लिए वेबिनार श्रृंखला के आयोजन के लिए पंजाब विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा हालांकि, NEP के बारे में देशव्यापी उत्साह अभी भी जारी है, हमारे लिए यह समझने का समय है कि ऐसे क्या क्या कारक आकार लेने जा रहे है  जो  देश भर में इसके कार्यान्वयन को प्रभावित करने जा रहे हैं। इस एनईपी में कई अच्छे तत्व हैं जैसे : समस्या और लक्ष्य अच्छी तरह से स्पष्ट हैं, यह सबूत-आधारित है और हितधारकों द्वारा व्यापक समर्थन के साथ समर्थित है। “मातृ भाषा पर ध्यान देना इस नीति की शीर्ष विशेषता है, इस तरह से हम आदिवासी युवाओं के बीच उनकी मातृ भाषा के लिए गर्व ला सकते हैं अन्यथा ये मूल भाषाएं बहुत जल्द नष्ट हो जाएंगी “सुश्री उइके ने कहा।

उन्होंने कहा कि इस शैक्षिक नीति की अवधारणा महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा की अवधारणा पर आधारित है। यह शिक्षा नीति अत्यधिक प्रतिस्पर्धी 21 वीं सदी के लिए तैयार होने के लिए भारत के लिए एक मजबूत आधार का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि यह भारत को ‘आत्म निर्भर भारत ‘बनाने की एकमात्र नीति है, क्योंकि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है।

“किसी भी नीति के कार्यान्वयन में पहली बाधा हितधारकों के साथ संचार की कमी होती है। किसी भी नीति को पहले हितधारकों द्वारा प्रभावी संचार के माध्यम से अच्छी तरह से समझा जाना चाहिए। सौभाग्य से, शिक्षा मंत्रालय के इस श्रेय के रूप में कि एनईपी की घोषणा से पहले ड्राफ्ट एनईपी पर हितधारकों के साथ बड़े पैमाने पर विचार-विमर्श किया गया था ” राज्यपाल ने कहा।

नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की अवधारणा; जीडीपी का 6% खर्च इस नीति  की विशेषताएं हैं।

सही प्राथमिकताएं निर्धारित करना किसी भी नीति के सफल कार्यान्वयन का एक और महत्वपूर्ण कदम है। एनईपी के कार्यान्वयन में दो प्रमुख खिलाड़ी हैं – केंद्र में शिक्षा मंत्रालय और हितधारक, जिसमें राज्य सरकारें, स्कूल और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। इस प्रकार इन सभी हितधारकों पर भी इसके सफल क्रियान्वन की जिम्मेवारी निहित है। “आधुनिक शिक्षा प्रणाली में स्थानीय साहित्य के विकास पर जोर दिया जाना चाहिए। अच्छी और गुणवत्ता वाली सामग्री विकसित करना समय की आवश्यकता है और यह इस नीति के कार्यान्वयन की कुंजी रहने वाली है। ” एनईपी के कार्यान्वयन के बारे में बात करते हुए राज्यपाल ने कहा

राज्यपाल ने कहा कि चूंकि एनईपी प्रकृति में दीर्घकालिक है, इसलिए हमें पहली प्राथमिकता के रूप में समर्थन तंत्र बनाने की जरूरत है। समर्थन तंत्र का विचार पहले से ही भारत के उच्च शिक्षा आयोग (HECI) की स्थापना के माध्यम से नियमन, मान्यता, वित्त पोषण और शैक्षणिक मानक-सेटिंग के लिए अलग-अलग कार्यों के साथ चार ऊर्ध्वाधर बनाये गए है। राज्यपाल की राय थी कि इस पैटर्न में हमारे पास एक आयोग होना चाहिए, जिसमें सभी हितधारकों का  प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

इससे पहले, प्रोफेसर राजकुमार, पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति, ने अपने संबोधन में कोरोना महामारी के समय में पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा की गई विभिन्न गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया था। उन्होंने बताया कि 4 अप्रैल 2020 से लेकर आज तक पंजाब विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन मंच पर लगभग 370 वेबिनार / कार्यशालाएं आयोजित की हैं।

इस अवसर पर प्रो वी.आर. सिन्हा ने वेबिनार के परिचयात्मक नोट को प्रस्तुत किया और अतिथियों का परिचय दिया। अंत में प्रो हरीश ने औपचारिक वोट ऑफ थैंक्स प्रस्तुत किया।

ओजोन फोर लाईफ विषय पर क्वीज प्रतियोगिता-प्रोमिला मलिक

पंचकूला – 19 सितम्बर:

श्रीमती अरूणा आसफ अली महाविद्यालय, कालका में ईको क्लब एवं इंन्वायरमेंट एवेरनैस क्लब के संयुक्त सहयोग से ओजोन डे पर आॅनलाईन क्वीज प्रतियोगिता का आयोजन करवाया गया।  

प्राध्यापक बिन्दु ने इस संबध में जानकारी देते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र की थीम ‘-ओजोन फोर लाईफ-विषय को बढावा देते हुए सभी सदस्यों ने अपने अपने व्हाटसअप पर ओजोन फोर लाईफ का फोटो लगाकर विद्यार्थियों को इस मुहिम से जोड़कर जागरूकता फैलाई। इस दिवस पर कालेज के व्हाटसअप, टवीटर एवं इंस्टाग्राम पर ओजोन परत की फोटो वीडियो अपलोड की गई ताकि विद्यार्थियांे के साथ साथ अन्य लोगों को भी जानकारी हो सके ओर सामाजिक प्रयास से इस परत में होने वाली हानि को रोका जा सके।

विद्यार्थियों के लिए आयोजित इंटर कालेज ओनलाईन क्वीज प्रतियोगिता में 19 महाविद्यालयों एवं देशभर के 10 विश्वविद्यालयों के 476 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें से 280 विद्यार्थी सफलतापूवर्क निर्धारित सीमा में क्वीज रिसंपोस जमा करवा पाए। इनमें प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले आरकेएसडी कालेज कैथल के हिमांशु शर्मा ने सबसे कम समय में उत्तर देकर यह उपलब्धि हासिल की। दूसरे स्थान पर जीवीएम सोनीपता की भावना और तीसरे स्थान पर हिन्दू गल्र्स कालेज की आशु रही।

राजकीय महाविद्यालय कालका की प्राचार्य प्रोमिला मलिक ने ईको क्लब एवं इंन्वायरमेंट एवेरनैस क्लब के सदस्यों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी ओैर भविष्य में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रोेत्साहित किया।  

एएमयू के स्कूल की लीज़ खत्म वंशजों ने वापिस मांगी ज़मीन

प्रयागराज में केंद्रीय विश्वविद्यालय के इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के बाद प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय की तर्ज पर अब अलीगढ़ को भी एक राज्य विश्वविद्यालय का तोहफा मिलने जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने अलीगढ़ में भी राज्य विश्वविद्यालय खोलने की योजना फाइनल कर ली है। यहां पर राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी खोली जाएगी। राजा महेंद्र सिंह ने ही अलीगढ़ में विश्वविद्यालय खोलने के लिए अपनी जमीन दान की थी, लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के किसी भी कोने में उनका नाम अंकित नहीं है। इसी कारण यहां पर एएमयू का नाम बदलने के लिए काफी मांग उठती रहती है। अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसके लिए बीच का रास्ता निकाल लिया है।

उप्र(ब्यूरो):

स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक, पूर्व जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह (1886-1979) ने 1929 में 90 साल की लीज पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को स्कूल स्थापित करने के लिए लगभग 3.04 एकड़ जमीन दी थी। पिछले साल लीज समाप्त होने के बाद जाट राजा के वंशजों ने माँग की है कि विश्वविद्यालय के आगरा स्थित स्कूल का नाम बदल कर उनके नाम पर रखा जाए और साथ ही महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा एएमयू को दी गई बाकी जमीन उन्हें वापस कर दी जाए।

मामले को देखने और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद द्वारा एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर तारिक मंसूर हैं।

सिंह के प्रपौत्र चरत प्रताप सिंह के अनुसार, उन्होंने 2018 में लीज की समाप्ति के बारे में विश्वविद्यालय को कानूनी नोटिस दिया था। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उनके परदादा द्वारा दी गई जमीन के दो हिस्से थे। 

हालाँकि, उन्होंने आगे ये भी कहा कि वे उस जमीन का बड़ा हिस्सा दान कर रहे हैं, जिस पर आगरा में महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर एएमयू का सिटी स्कूल बनाने की माँग की गई है। चरत ने कहा कि भूमि के दूसरे छोटे टुकड़े (1.2 हेक्टेयर) को परिवार को वापस सौंप दिया जाना चाहिए या फिर जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।

महेंद्र प्रताप सिंह मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के पूर्व छात्र थे, जो बाद में एएमयू बन गया।

सिंह को मान्यता देने को लेकर एएमयू और बीजेपी के बीच रस्साकशी

गौरतलब है कि पिछले साल, अलीगढ़ की इगलास सीट पर उप-चुनावों के दौरान प्रचार करते हुए, सीएम योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर एक विश्वविद्यालय स्थापित करेगी। एएमयू में इस तरह के योगदान देने के बावजूद यूनिवर्सिटी द्वारा मान्यता नहीं दी गई थी। इसके बाद यूपी कैबिनेट ने पूर्व जाट राजा के नाम पर एक विश्वविद्यालय के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

सिंह, भाजपा और यूनिवर्सिटी के बीच विवाद की वजह बन गए थे।  पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के चित्र को एएमयू परिसर में लटकाए जाने के बाद विश्वविद्यालय के नाम बदलने की माँग ने 2018 में गति पकड़ ली थी।

1 दिसंबर 2014 को AMU में जाट राजा की 128 वीं जयंती मनाने के लिए भाजपा सांसद सतीश गौतम के सुझाव के बाद विवाद खड़ा हो गया था। भाजपा ने तब अलीगढ़ में अपने कार्यालय में एक छोटे से समारोह की व्यवस्था की थी और बाद में सिंह पर एक संगोष्ठी आयोजित करने के लिए यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति की तरफ से आश्वासन मिला था।

सिंह ने 1957 के लोकसभा चुनावों में अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था

महेंद्र प्रताप सिंह प्रथम विश्व युद्ध के मध्य अफगानिस्तान में एक अस्थाई सरकार स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं। बाद में उन्हें 1932 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। सिंह 1957-62 के दौरान मथुरा निर्वाचन क्षेत्र से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित लोकसभा सदस्य भी थे, उन्होंने कद्दावर भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था। अटल बिहारी वाजपेयी बाद में भारत क प्रधानमंत्री बने।

हिन्दी सुरक्षा सप्ताह – क्या वाकई??

जब भी हिन्दी दिवस आता है, हिन्दी के अस्‍त‍ित्‍व पर खतरे को लेकर बहस और विमर्श शुरू हो जाता है। चंद गोष्‍ठ‍ियां होती हैं और कुछ सरकारी आयोजन। कुछ अखबारों में हिन्दी को सम्‍मान देने की रस्‍में पूरी की जाती हैं।
कुल जमा सप्‍ताह भर तक ‘हिन्दी सुरक्षा सप्‍ताह’ चलता है। इन कुछ दिनों तक हिन्दी हमारा गर्व और माथे की बिंदी हो जाती है।

14 सितंबर,2020 :

प्रति‍ वर्ष यही होता है, संभवत: आगे भी होता रहेगा। चूंकि यह एक परंपरा-सी है, ठीक उसी तरह जैसे हम आजादी का उत्‍सव मनाते हैं या नया वर्ष।
पिछले कई वर्षों से ऐसा किया जा रहा है। हिन्दी के अस्‍त‍िव को बचाने के लिए नारे गढ़े जा रहे हैं और इसके सिर पर मंडराते खतरे गि‍नाए जा रहे हैं। लेकिन तब से अब तक न तो हिन्दी का अस्‍त‍ित्‍व मिटा है और ही इस पर कोई संकट या खतरा आया गहराया है। और न ही ऐसा हुआ है कि हिन्दी बचाओ अभियान चलाने से यह अब हमारे सिर का ताज हो गई हों।

न तो हिन्दी का अस्‍त‍ित्‍व खत्‍म हुआ है और न ही इस पर कोई संकट है। यह तो हमारी आदत और औपचारिकता है हर दिवस पर ‘ओवररेटेड’ होना, इसलिए हम यह सब करते रहते हैं।

हिन्दी की अपनी लय है, अपनी चाल और अपनी प्रकृति‍। इन्‍हीं के भरोसे वो चलती है और अपनी राह बनाती रहती है। सतत प्रवाहमान किसी नदी की तरह। कभी अपने बहाव में तरल है तो कहीं उबड़-खाबड़ पत्‍थरों से टकराती बहती रहती है और वहां पहुंच जाती है, जहां उसे जाना होता है, जहां से उसे गुजरना होता है।
इसके बनाने बि‍गड़ने में हमारा अपना कोई योगदान नहीं हैं, वो खुद ही अपना अस्‍त‍ित्‍व तैयार करती है और जीवि‍त रहती है, हमारे ढकोसले से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

भाषा कभी किसी अभि‍यान के भरोसे जिंदा नहीं रहती। वो देश, काल और परिस्‍थति के अनुसार अपनी लय बनाती रहती है। स्‍वत: ही उसकी मांग होती है और स्‍वत: ही उसकी पूर्त‍ि। यह ‘डि‍मांड और सप्‍लाय’ का मामला है।

पिछले दिनों या वर्षों में हिन्दी की लय या गति‍ देख लीजिए। दूसरी भाषाओं से हिन्दी में अनुवाद की मांग है, इसलिए कई किताबों के अनुवाद हिन्दी में हो रहे हैं, कई अंतराष्‍ट्रीय बेस्‍टसेलर किताबों के अनुवाद हिन्दी में किए जा रहे हैं। क्‍योंकि हिन्दी-भाषी लोग उन्‍हें पढ़ना चाहते हैं, और वे हिन्दी पाठक किसी अभि‍यान के तहत या किसी मुहिम से प्रेरित होकर हिन्दी नहीं पढ़ना चाहते, बल्‍कि उन्‍हें स्‍वाभाविक तौर बगैर किसी प्रयास के हिन्दी पढ़ना है, इसलिए हिन्दी उनकी मांग है।
सोशल मीडि‍या पर हिन्दी में ही चर्चा और विमर्श होते हैं, यह स्‍वत: है। हिन्दी में लिखा जा रहा है, हिन्दी में पढ़ा जा रहा है। हाल ही में कई प्रकाशन हाउस ने हिन्दी में अपने उपक्रम प्रारंभ किए हैं।

हीरे – मोती से लेकर माँ, रहस्यनामा, पिता और पुत्र, बौड़म(Idiot), यद्ध और शांति, अपराध और दंड इत्यादि सभी रूसी कालजयी रचनाएँ मैंने हिन्दी ही में पढ़ी हैं।

गूगल हो, ट्व‍िटर या फेसबुक। या सोशल मीडि‍या का कोई अन्‍य माध्‍यम। हिन्दी ने अपनी जगह बना ली है, हिन्दी में ही लिखा, पढ़ा और खोजा जा रहा है।
ऐसा कभी नहीं होता कि हमारी अंग्रेजी अच्‍छी हो जाएगी तो हिन्दी खराब हो जाएगी। बल्‍क‍ि एक भाषा दूसरी भाषा का हाथ पकड़कर ही चलती है। एक दूसरे को रास्‍ता दिखाती है। अगर हमारे मन के किसी एक के प्रति‍ कोई द्वेष न हों।

साभार : नवीन रांगियाल

हिन्दी का प्रचार राष्ट्रीयता का प्रचार है: हिन्दी दिवस पर विशेष

राष्ट्र भाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है। हिन्दी अपनी ताकत से बढ़ेगी। हिन्दी का प्रचार राष्ट्रीयता का प्रचार है। हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाना नहीं है वह तो है ही। हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्त्रोत है। हिन्दी के द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है आदि…आदि … ये हम नहीं बोल रहे ये देश के विद्वान् पुरुषों के कथन हैं जो राष्ट्र भाषा के प्रचार को राष्ट्रीयता का अंग मानते थे। अब केवल काम है। नीतियां हैं…वो भी बेमतलब।

14 सितंबर, 2020:

कितना दुखी होंगे वे आज, जहां भी होंगे। क्योकि उनके इन सभी स्वर्णिम वाक्यों को, लोहे की तरह जंग लगे सरियों में हम बदलते देख रहे हैं, बड़े भारी और बोझल मन के दुःख के साथ। कहां गई भाषा के प्रति आस्था, विश्वास। कहां गया मातृभाषा का गौरव और उसकी अभिव्यक्ति? कैसे जाता जा रहा है ये रसातल में, कमतरी का अपराधबोध लिए हुए? कौन जिम्मेदार है इसका? और कैसे बचा पाएंगे अस्मिता हम अपने हिन्दू, हिंदुस्तान की धड़कन हिन्दी को? या फिर चलता रहेगा यह राष्ट्र ऐसे ही आत्माविहीन शव सा हिन्दी की धडकन से विरक्त हो? सोचिए इस विषय को, विचारिए इस संकट को भी….भाषा कोई भी बुरी नहीं। बच्चा वाणी ले कर पैदा होता है, भाषा उसे हम देते हैं वैसे ही जैसे धर्म देते हैं और ये बात कि हिन्दी भी उसी धर्म से जुड़ी हुई है जो हमारे प्रथम धर्म हैं।

हिन्दी का बिगाड़ भारत माता के रूप की लालिमा का बिगाड़ है, उसकी सिन्दूरी आभा का बिगाड़ है, उसके माथे की बिंदी का बिगाड़ है। बिगाड़ तो अंग्रेजों ने भरपूर किया पर उनके बिगाड़ को सम्मान से स्वीकार किया चापलूसों ने।
फ़िल्में, शिक्षा पद्धति, कान्वेंटीकरण से होता सत्यानाश तो हम भुगत ही रहे थे, अब आया है वेब सीरिज का दौर।

साधन जितने आकार में छोटे होते गए, जेब में समाते गए इनके भाषा-बिगाडू रोगाणु-जीवाणु भी उतनी ही सूक्ष्म भेदीकरण शक्ति के साथ मस्तिष्क में समाने लगे हैं। जो थोड़ी बहुत हिन्दी का सतीत्व बचा हुआ था उसका शील-भंग करने में इसने भी कोई कसार नहीं छोड़ी। भले ही कहें कि ये तो हिन्दी में हैं फिर आपको दिक्कत क्यों? तो फिर पहले भाषा का मायने जानें-“गिरा हि संखारजुया वि संसति, अपेसला होइ असाहुवादिणी.”- बृहतकल्पभाष्य
अर्थात्- सुसंकृत भाषा भी यदि असभ्यतापूर्वक बोली जाती है तो वह भी जुगुप्सित हो जाती है।

बस यही चीज वर्तमान में आ चुकी है, पहले दबे पांव आती थी अब पूरे प्रमाण-पत्रों के साथ स्वीकार्य हो पूरी तरह अहंकार में चूर बच्चों बच्चों तक पहुंचाई जा रही है। नशीले हानिकारक पदार्थों के साथ। धुंआ-धुंआ होती संकृति के साथ ख़राब जुबान का जहर घोलती ये वेब सीरीजों की बाढ़, शयनकक्ष के कर्मों को सड़कों पर खुले आम करने को प्रोत्साहित करती, भाषा की मर्यादाओं को भंग करने को उकसाती इस बार अपने साथ धरती की घास को भी बहा ले जाएगी जो बड़ा ही अनर्थकारी होगा। ‘जब कोई विजित जाति अपनी भाषा के शब्दों को ठुकराए और विजेता की भाषा पर गर्व करे तो इसे गुलामी का ही चिह्न मानना चाहिए।’‘भाषा की दो खानें हैं, एक किताबों में एक जनता की जुबान पर।’ और ये जुबान भ्रष्ट हो चली है खास करके भाषा के मामले में। ‘भाषा ही संस्कृति का वाहन है और उसका अंग भी।’ और हम दोनों के ही हन्ता बन बैठे हैं। कई आसान सी बुराइयों ने ‘कुनेन’ की भांति काम किया है। ऊपर से मीठा अंदर से कड़वा-जहर। दिल, दिमाग, बुद्धि, शुद्धि, जुबान, भाषा सभी को ख़त्म करने पर आमादा।

बात-बात पर अपशब्दों का प्रयोग, महिलाओं के लिए अश्लील भाषा का बेहिचक प्रयोग, मर्यादा भंग, लिहाज को ठेंगा बताता बड़ों के प्रति अपमानजनक व्यवहार, कुटिलता से भरे नामों की रचना, धर्मग्रंथों के साथ-साथ संस्कृति का मजाक उड़ाना ऐसी कई अनंत बीमारियों के संवाहक ये वेब-सीरिज पीढ़ियों को बिगाड़ने का अपराध कर रहे।

‘भाषा की समृद्धि स्वतंत्रता का बीज है’ पर दुखद तो यह है मेरे देश में कि विदेशी भाषा तो छोड़ हम अपनी भाषा के विषय में भी नहीं जानते। जबकि ‘भाषा मानव-मस्तिष्क की वह शस्त्रशाला है जिसमें अतीत की सफलताओं के जयस्मारक और भावी सफलताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र, एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह साथ साथ रहते हैं।’ पर हमें सावधान रहना होगा कि हमारा ये गौरवपूर्ण सिक्का जो भारतमाता के स्वर्णिम भाल पर चमचमा रहा है अपनी भाषा हिन्दी के रूप में इसे कोई भी मलीन न करने पाए हम भाषा को नहीं बनाते, भाषा हमें बनाती है। थोड़े से प्रयोजनीय शब्द गढ़ लेना भाषा बनाना नहीं है, सुविधा है।

भाषा बड़ी रहस्यमयी देवी है। यह नई सृष्टि करती है। इतिहास विधाता के किए कराऐ पर वह ऐसा पर्दा डालती है कि कभी-कभी दुनिया ही बदल जाती है। तो इस खतरनाक मायाजाल को पहचानें। इसकी घुसपैठ हमारे देश की नींव को दीमक लगा दे उसके पूर्व ही हिन्दी के मान की रक्षा के पुण्य दायित्व को निभाएं। भाषा में प्रयुक्त एक-एक शब्द, एक-एक स्वराघात कुछ सूचना देते हैं। व्यक्तियों का नाम, कुलों-खानदानों के नाम, पुराने गावों के नाम, जीवंत इतिहास के साक्षी हैं। हमारे रीति-रस्म, पहनावे, मेले, नाच-पर्व, पर्व-त्योहार-उत्सव सभी तो हमारी इस भाषा की गाथा सुना जाते हैं। आओ…मिल कर रोकें इस दुश्मन को जो हमारी भाषा रूपी गहने की चोरी की नीयत से कई रूप धरे है। यह भाषा ही तो हमारे विचारों का परिधान है। क्योंकि जब कोई भाषा नष्ट होती है तो उस राष्ट्र की कई वंशावलियां भी नष्ट हो जातीं हैं। तो सावधान….नींद से जागें…आपके देश की आत्मा पर प्रहार हो रहा है….धीरे-धीरे…हौले-हौले से पर करारा…

साभार : डॉ. छाया मंगल मिश्र

जेईई और नेट की परीक्षाएं तुरंत रद्द की जाएं-मुकेश सिरसवाल

पंचकूला 29 अगस्त:

जिला पंचकूला युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मुकेश सिरसवाल की अध्यक्षता में पंचकूला सेक्टर 1 जिला सचिवालय में नारे लगाकर नगराधीश श्री धीरज चहल के माध्यम से केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल को जेईई-एनइइटी परीक्षाएं को स्थगित करवाने के बारे मैं ज्ञापन सौंपा। जिला पंचकूला युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मुकेश सिरसवाल ने कहा कि क्योंकि करो ना महामारी को देखते हुए भारत सरकार को अपना यह फैसला वापस लेना चाहिए और 25 लाख छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर ना लगाते हुए जेईई और नेट की परीक्षाएं रद्द की जाए। पहले ही हमारा भारत देश करो ना जैसी महामारी बीमारी से लड़ रहा है। ऐसे में हमारे देश के युवा साथी पढ़ाई नहीं कर पाए ना उनकी अच्छी तैयारी हो पाई है। ऐसे में भाजपा सरकार युवा साथियों के साथ बहुत बड़ा धोखा परीक्षा करवा कर करने जा रही है।

मुकेश सिरसवाल ने मांग की है कि परीक्षा को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इस अवसर पर विशेष तौर पर हरियाणा प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव श्री शांतनु चौहान, जिला उपाध्यक्ष सुनील सरोहा, जिला युवा कांग्रेस जिला महासचिव अभिषेक सैनी, जिला युवा कांग्रेस पंचकूला के जिला सचिव विवेक शर्मा, जिला युवा कांग्रेस के जिला सचिव अनिल शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष लेखपाल, भीम यादव, युवा कांग्रेस सोशल मीडिया से राघव विज, मोहित सैनी, संजीव शर्मा, दीपक कुमार, सुखबीर गहलोत, प्रीत कुमार, मनीष मौजूद रहे।

जल्दी ही Unlock 4.0 की आएंगी गाइडलाइंस

Unlock4: पूरे देश में एक सितंबर से आवाजाही और आसान हो सकती है, स्कूल, कॉलेज, सिनेमा हॉल खोलने की नहीं मिलेगी अनुमति. अनलॉक-चार के गाइडलाइंस में किन-किन क्षेत्रों को खोला जा रहा है का जिक्र नहीं होगा। इसके बजाय सिर्फ उन क्षेत्रों का जिक्र होगा जो प्रतिबंधित रहेंगी।

नयी दिल्ली(ब्यूरो)

कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण जारी लॉकडाउन के कारण देश भर के स्कूलों और कॉलेजों को बंद हुए 5 महीने हो चुके हैं. 31 अगस्त को अनलॉक 3.0 समाप्त होने के साथ यह उम्मीद की जा रही है कि गृह मंत्रालय (MHA) जल्द ही अनलॉक 4.0 के तहत स्कूलों को फिर से खोलने पर निर्णय ले सकता है. इस महीने के अंत तक दिशानिर्देश (guidelines) जारी किए जाने की भी संभावना है.

एक सितंबर से देश में अनलॉक 4 की शुरुआत हो रही है. ऐसे में सबकी नजर स्कूल और कॉलेज खोलने को लेकर सरकार के फैसले पर है. गृह मंत्रालय की ओर से जारी होने वाली गाइडलाइंस से पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को साफ कर दिया है कि सरकार की ओर से स्कूल और कॉलेज खोलने को लेकर कोई निर्देश नहीं हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि अनलॉक को लेकर गृह मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइंस में स्कूल और कॉलेज के खोलने से संबंधित कोई निर्देश नहीं हैं.

राजेश भूषण ने कहा कि देश में जो भी गतिविधियां खोली जा रही हैं उसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय एसओपी जारी करती है. जब भी स्कूल और कॉलेज को खोलने का निर्णय होगा तो वो एसओपी प्रभाव में आएगा और उसको लागू किया जाना होगा. 

‘3 करोड़ से ज्यादा टेस्ट किए जा चुके’

देश में कोरोना की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. मंत्रालय की ओर से बताया गया कि देश में अब तक 3 करोड़ 60 लाख से ज्यादा टेस्ट किए जा चुके हैं. स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि देश में ठीक हुए मरीजों की संख्या एक्टिव केस से तीन गुना ज्यादा है. उन्होंने बताया कि देश में लैब की संख्या में भी इजाफा हुआ है. इसमें प्राइवेट और सरकारी लैब दोनों हैं. जिसके कारण टेस्टिंग की संख्या बढ़ी है. 

मंत्रालय की ओर से बताया गया कि कुल मामलों के 22.2 प्रतिशत केस ऐक्टिव हैं. रिकवरी रेट 75 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है. देश में कोरोना से मृत्युदर 1.58 प्रतिशत है जो कि दुनिया में सबसे कम में शामिल है. पिछले 24 घंटे में एक्टिव केस की संख्या में 6,400 की गिरावट दर्ज हुई है. ये पहली बार हुआ है.

आईसीएमआर के महानिदेशक प्रोफेसर डॉ. बलराम भार्गव ने बताया कि भारत में कोरोना की तीन वैक्‍सीन का परीक्षण चल रहा है. सीरम इंस्‍टीट्यट की वैक्‍सीन का 2 (बी) फेज और 3 फेज टेस्‍ट चल रहा है. भारत बायोटेक और जेडस कैडिला की वैक्‍सीन ने 1 फेज का टेस्‍ट पूरा कर लिया है.   
 

गुरु ब्रह्मानंद राजकीय बहुतकनीकी में दाखिले की क्रिया जोर-शोर से आरंभ

 मनोज त्यागी, करनाल / नीलोखेड़ी – 14 अगस्त:

गुरु ब्रह्मानंद राजकीय बहुतकनीकी नीलोखेड़ी में दाखिले की प्रक्रिया ने जोर पकड़ लिया है | सभी इच्छुक विद्यार्थी ऑनलाइन क्रिया में भाग ले रहे हैं उन्हें किसी भी जगह जाने की जरूरत नहीं है वे अपना दाखिला फार्म भर ऑनलाइन जमा करवा सकते हैं | यह जानकारी देते हुए गुरु ब्रह्मानंद राजकीय व तकनीकी के प्रधानाचार्य हरीश शर्मा ने बताया कि विद्यार्थी ऑनलाइन अपना फार्म भर सकते हैं और जरूरी दस्तावेज जमा करवा सकते हैं| इच्छुक विद्यार्थियों द्वारा जमा कराए गए  दस्तावेजों के संस्थान में के प्रिंट लिए जाते हैं व जो भी कमी होती है उन्हें दूरभाष द्वारा साथ साथ सूचित किया जाता है इच्छुक विद्यार्थी वह दस्तावेज ऑनलाइन से ही भेज देता है |  किसी का भी प्रवेश पत्र रिजेक्ट नहीं किया जाता है | संस्थान का सारा स्टाफ परितोष पराशर, जो कि दाखिले के इंचार्ज हैं, के मार्गदर्शन में पूर्ण मेहनत से लगा हुआ है |  हरीश शर्मा ने आगे बताया कि यह संस्थान उत्तर भारत का सबसे पुराना संस्थान है व यहां पर दूर-दूर से विद्यार्थी दाखिला लेने आते हैं व डिप्लोमा पूर्ण होने से पहले रोजगार प्राप्त कर लेते हैं | लॉकडाउन में भी ऑनलाइन टेस्ट में इंटरव्यू के द्वारा बहुत से विद्यार्थियों का मल्टीनेशनल कंपनी में सलेक्शन हुआ है | उन्होंने बताया कि यहां पर 600 सीटें हैं व 6 प्रकार की ट्रेड हैं | ऑनलाइन फॉर्म भरने की पूरी प्रक्रिया और प्रोस्पेक्टस विभाग की वेबसाइट www.techeduhry.gov.in पर उपलब्ध है | 

इच्छुक विद्यार्थी अपना दाखिला फॉर्म 1 अगस्त से 7 सितंबर तक www.onlinetesthry.gov.in पर भर सकते है | ऑनलाइन फीस भी 1 अगस्त से 7 सितंबर तक है वही चालान से 4 अगस्त से लेकर 8 सितंबर तक फीस भर सकते हैं | इसमें लैटरल एंट्री का भी प्रावधान है जिसमें डायरेक्ट सेकंड ईयर में एडमिशन हो जाता है, इसके दाखिले की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है और ऑनलाइन ही फार्म भरे जा रहे हैं जो कि 1 अगस्त से 3 सितंबर तक भरे जाएंगे | इसकी फीस भी 1 अगस्त से दिसंबर तक रहेगी और चालान से 4 अगस्त से 4 सितंबर तक की रहेगी | इस प्रकार के दाखिले की प्रक्रिया 20 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी | उन्होंने आगे बताया कि भिन्न-भिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति भी यहां विद्यार्थियों को दी जाती है |उन्होंने बताया कि इस संस्थान के उत्तीर्ण विद्यार्थियों को शत प्रतिशत रोजगार मिल जाता है|  छात्र  व  छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास की व्यवस्था है | सभी प्रकार के खेलों की सुविधाएं हैं | रियायती दरों पर बस व रेल पास की सुविधा है व अनुसूचित वर्ग के विद्यार्थियों को बस व रेल पास की राशि वापस कर दी जाती है | संस्थान में विद्यार्थियों को एन.सी.सी. व एन.एस.एस. का प्रशिक्षण भी दिया जाता है | उन्होंने उम्मीद जताई है कि पहले काउंसलिंग में ही इस संस्थान की अधिकतम सीट भर जाएंगी, जिसके लिए पूरा स्टाफ एकजुट होकर मेहनत से कार्य कर रहा है | इस संस्थान से शिक्षा ग्रहण करके जो भी विद्यार्थी अलग-अलग क्षेत्रों में, विदेशों में, सरकारी नौकरियों में उच्च स्थान पर कार्यरत हैं वह भी अपने रिश्तेदारों, बच्चों आदि को इस संस्थान में दाखिला करवाने में रुचि दिखा रहे हैं |