सरकार ने आम घरों के बच्चों के डाक्टर बनने पर लगाई पाबंदी – ‘आआपा’

  • 3 जून को करेंगे मंत्री ओ.पी सोनी की कोठी का घेराव – मीत हेयर
  • प्राईवेट मैडीकल कालेजों की फीसों में बढ़ौतरी एक बड़ा घपला – दिनेश चढ्ढा

राकेश शाह, चंडीगड़, 1 जून 2020:

पंजाब सरकार द्वारा सरकारी मैडीकल कालेजों की फीसों में 70 से 80 प्रतिश्त वृद्धि कर असिद्धे तरीके से आम घरों के बच्चों के डाक्टर बनने पर ही पाबंदी लगा दी है, क्योंकि आम घरों के बच्चे इतनी मोटी फीसों अदा नहीं कर सकते।

चण्डीगढ़ में मीडिया को संबोधन करते हुए बरनाला से विधायक मीत हेयर, पंजाब के महा सचिव दिनेश चड्ढा और पंजाब के यूथ प्रधान मनजिन्दर सिंह सिद्धू ने कहा कि बहुत ही हैरानी की बात है कि बाबा फरीद मैडीकल यूनिवर्सिटी के वायस चांसलर यह बयान दे रहे हैं कि जब प्राईवेट स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए माता-पिता लाखों रुपए खर्च करते हैं तो डाक्टर बनने के लिए भी अदा कर सकते हैं। जिस का मतलब यह है कि अब प्राईवेट स्कूलों में मोटी फीसें अदा करने वालों को ही सरकार डाक्टर बनाऐगी। दूसरी तरफ सरकारी और छोटे स्कूलों में पढऩे वाले गरीब, दलित और मध्य वर्गीय घरों के बच्चों को डाक्टर बनने का मौका भी नहीं दे रही बेशक वह कितने भी होशियार और होनहार क्यों न हों।

उन्होंने कहा कि 2010 में सरकारी कालेजों की एम.बी.बी.एस की फीस 13 हजार रुपए वार्षिक थी जो 10 साल बाद आज 12 गुणा बडा कर 1 लाख 56 हजार रुपए वार्षिक कर दी है। जबकि इन वर्षों में डाक्टरों के वेतन और स्टाईफन में न-मात्र विस्तार किया गया।

‘‘फीसें बढ़ाए बिना कालेज नहीं चल सकते और फीसें बढ़ाने का मकसद मैडीकल कालेजों के डाक्टरों को बढिय़ा सहूलतें देना है।’’, सरकार के इस तर्क को पूर्ण तौर पर खारिज करते हुए मीत हेयर ने कहा कि यदि पड़ोसी राज्य हिमाचल, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मैडीकल कालेज बहुत ही कम फीसों के साथ मैडीकल कालेज चला सकते हैं तो पंजाब क्यों नहीं। मीत हेयर ने कहा कि सरकार स्कूलों, कालेजों और मैडीकल कालेजों की फीसों बढ़ौतरी करके खजाने नहीं भर सकती। खजाने भरने के लिए सरकार को शराब माफिया, रेत माफिया और ट्रांसपोर्ट माफिया समेत सभी तरह के माफीए को नकेल कसनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण बेशक इक्कट्ठ करने से गुरेज करना चाहिए परंतु कोरोना वायरस की आड़ में सरकार की ओर से लिए जा रहे लोक विरोधी फैसलों को नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता। इस लिए आम आदमी पार्टी के यूथ विंग ने पंजाब के आम घरों के होनहार विद्यार्थियों के हक में 3 जून 2020 को अमृतसर में मंत्री ओ.पी सोनी की कोठी का घेराव करने का फैसला लिया है।

प्रैस कान्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाते एडवोकेट दिनेश चड्ढा ने कहा कि प्राईवेट मैडीकल कालेजों की फीसों में बढ़ौतरी सीधे तौर पर बड़ा घपला है। चड्ढा ने कागज पेश करते खुलासा किया कि उनकी ओर से दायर की गई जनहित पटीशन माननीय पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांटस कमीशन को पंजाब के गैर सरकारी कालेजों के वित्तीय खाते जांच करने के लिए कहा था। यू.जी.सी ने अपने 3 सदस्यता समिति से करवाई जांच में पंजाब के गैर सरकारी कालेजों में बड़ी वित्तीय बेनियमियां पाई गई थे। पंजाब के गैर सरकारी कालेज ट्रस्टों के खातों से मर्सिडीज जैसी शाही गाड़ीयां खरीद कर, ट्रस्टों के खातों से सम्पतियां खरीदी गई, अपने परिवारिक सदस्यों को 25-25 लाख का वेतन दिया गया और अपने मन-मर्जी के खर्चे लिखने के बावजूद भी वार्षिक 9 करोड़ रुपए तक सरपलस्स थे। जिस उपरांत यू.जी.सी ने 2014 में पंजाब सरकार को बनती कार्यवाही करने के लिए कहा था, परंतु बार-बार पैरवी करने पर भी न तो पिछली सरकार ने और न ही कांग्रेस ने इस सम्बन्धित कोई कार्यवाही की। बल्कि इस यू.जी.सी की हिदायत को अनदेखा करके प्राईवेट मैडीकल कालेजों को फीसें बढ़ाने की इजाजत दे दी। जो कि सीधे तौर पर पंजाब के लोगों के साथ ठगी है।

मीत हेयर समेत ‘आआपा’ नेताओं ने मांग की है कि पिछली अकाली-भाजपा सरकार से लेकर अब तक सरकारी और प्राईवेट मैडीकल कालेजों की ओर से एम.बी.बी.एस, एम.एस. /एम.डी, डैंटल और नर्सिंग कालेजों की तरफ से वसूली गई फीसों की जांच पड़ताल के लिए हाईकोर्ट की निगरानी में न्यायिक आयोग गठित किया जाए। आदेश यूनिवर्सिटी समेत जितने भी कालेजों की तरफ से माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की उल्लंघना करके प्रति विद्यार्थी करोड़ों रुपए की फालतू फीसें वसूला गई हैं, वह ब्याज समेत विद्यार्थियों को वापस करवाई जाएं।

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गीता में कई मूल मंत्र है जिनसे की इस आपदा की घड़ी में हर पहलू पर नियंत्रण रखा जा सकता है: प्रोफ॰ दीप्ति

पंचकूला 24 मई:

      उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन की शुरुआत में प्रथम टेक्निकल सेशन में डॉक्टर रितु सिंह चैहान नेशनल प्रोफेशनल ऑफिसर डब्ल्यूएचओ नई दिल्ली ने कोविड-19 से संबंधित संवेदनशील मैसेजिंग व उससे जुड़े पहलुओं पर विस्तार से अवगत करवाया।   

उन्होंने कहा कि आज के समय में जागरूक होना आवश्यक है मगर उस जागरूकता का सही इस्तेमाल करना उससे भी ज्यादा आवश्यक है। इसलिए हमें इनसे ज्ञान अर्जित कर स्कूल स्तर पर भी शिक्षकों को अवगत करवाया जाना चाहिए। 

      डिप्टी डायरेक्टर उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा डॉ हेमंत वर्मा ने सभी का स्वागत किया। द्वितीय टेक्निकल सेशन में सीडीएलयू सिरसा की  प्रोफेसर दीप्ति धर्मानी ने उच्चतर शिक्षा संस्थान भगवत गीता की मदद से किस तरह कोविड-19 को हरा सकते हैं। इन पहलूओं पर बारीकि से प्रकाश डाला। प्रोफेसर दीप्ती ने कहा की गीता में कई सारे मूल मंत्र है जिनसे की इस आपदा की घड़ी में हर पहलू पर नियंत्रण रखा जा सकता है। 

      तीसरे टेक्निकल सेशन में रिटायर्ड आईएएस विवेक अत्रे ने कहा कि यह मोटिवेशनल स्पीकर की प्रेरणा ही सफलता की कुंजी है। इस पर विस्तार अपने विचार व्यक्त किए।  उन्होंने कई सारे व्यक्तिगत उदाहरण देकर प्रतिभागियों को सफल बनने की प्रेरणा दी। प्रैक्टिकल सेक्शन 4 में लेडी इरविन कॉलेज नई दिल्ली डॉ अपर्णा खन्ना ने गेम बाइ गेम, इस विषय पर प्रकाश डालकर उन्होंने विस्तार से दिखाया कि कैसे हम छात्रों को कोविड-19 की घड़ी में गेम्स के द्वारा व्यस्त रख सकते हैं। उन्होंने कई विस्तार से उदाहरण भी देकर समझाया। इसके उपरांत डॉक्टर बलदेव कुमार, प्रोफेसर प्रोमिला बतरा, डॉ आभा खेतरपाल, डॉ रीता कालरा इन सभी ने कोविड-19 से जुड़े तथ्य एवं सत्य पर पैनल डिस्कशन की जिसे डॉ अंजू मनोचा ने मॉडरेट किया।  डिप्टी डायरेक्टर डॉ हेमंत वर्मा ने सभी प्रतिभागी व अतिथि गणों का आभार जताया। 

अयोग्य अभियन्ताओं की पदोन्नति कानून सम्मत नहीं : राजेश मोहन

सारिका तिवारी/ जंगशेर राणा, चंडीगढ़ -15 मई

नए कानून जिसमें सभी क्षेत्रों के अभियंताओं को समान रूप से पदोन्नति दिए जाने का प्रावधान है तुरंत प्रभाव से समाप्त किया जाए यह माँग निदेशक जल सेवा राजेश मोहन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को लिखें एक पत्र के माध्यम से की।

उन्होंने कहा की कुछ अभियंता सिविल क्षेत्र से नहीं है मैकेनिकल इलेक्ट्रिकल कंप्यूटर आदि क्षेत्रों से संबंधित हैं उन्हें भी सिविल इंजीनियरिंग के साथ सामान्य वरीयता के आधार पर पदोन्नति दी गई है जोकि सरासर गलत है। उन्होंने पत्र में लिखा है पीडब्ल्यूडी सिविल इंजीनियरों का विभाग है ।

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है की वर्ष 2012 मैं हाईकोर्ट ने रामफल डांगी असीम खन्ना के पक्ष में निर्णय देते समय न्याय की शर्तों को ध्यान में नहीं रखा इतना ही नहीं हरियाणा सिंचाई विभाग के सतवीर सिंह डांगी गुलाब सिंह नरवाल और राकेश चौहान ने कभी भी मैकेनिकल इंजीनियर की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की, फिर भी उन्हें विभाग में उच्च पदों पर लगाया गया है।

एक अन्य व्यक्ति बलराज सिंह चौहान सिविल इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं उन्हें ना तो किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज ने लाइसेंस प्रदान किया है और ना ही हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा ही चयनित किया गया सरकार में कार्यरत सिविल इंजीनियरों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए मांग रखी रामफल डांगी इंजीनियर के पद पर न केवल क्या कानूनी ढंग से आसीन है बल्कि यह पद उन्होंने धोखे से हासिल किया है जिस वजह से उन्हें तुरंत प्रभाव से सेवा से निष्कासित किया जाए ओ साथी भारतीय दंड संहिता की धारा 193 120 बी और 170 के तहत उनके विरुद्ध कारवाई की जाए।

कुलपति डॉ नीता खन्ना ने आते ही किए महत्वपूर्ण विभागों में बदलाव, प्रोफेसर बृजेश साहनी होंगे नए डीपीआर

मनोज त्यागी, 15 मई:

धर्म नगरी कुरुक्षेत्र में नए उपकुलपति की टीम अब विभागों का जिम्मा संभालेगी कुलपति डॉ नीता खन्ना के ने गुरुवार को पांच महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत अधिकारियों से चार्ज लेकर पूर्व में इन पदों पर काम कर चुके दूसरे शिक्षकों को सौंप दिया है प्रोफेशन पवन शर्मा की जगह पूर्व कुलपति डॉ डीजेएस संधू के समय में इस पद पर रहे गणित विभाग के प्रोफेसर अनिल वशिष्ठ को छात्र कल्याण अधिवक्ता नियुक्त किया है, इसके साथ ही अब जनसंपर्क विभाग के निदेशक का पदभार भी प्रोफेसर तेजेंद्र शर्मा से लेकर पहले भी इस पद पर रहे अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर बृजेश साहनी को दिया गया है।

वहीं कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी युवा एवं सांस्कृतिक विभाग का कार्यभार भी प्रोफेसर तेजेंद्र शर्मा की जगह पहले भी निदेशक रह चुके डॉक्टर महाशिव पुनिया को सौंपा गया है वहीं पर डॉक्टर गुरचरण को डॉक्टर हितेश त्यागी की जगह युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग का उप निदेशक बनाया गया है इसके अलावा प्रोफ़ेसर प्रदीप कुमार की जगह इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग के पहले भी आईटी सेल निदेशक रह चुके प्रोफेसर सुनील ढींगरा को आईटी सेल का निदेशक नियुक्त किया गया है इसी के साथ आईटी सेल की कमेटी के कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग के प्रोफेसर राजेंद्र नाथ प्रोफेसर राकेश इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग के डॉक्टर प्रदीप कुमार और इंस्टीट्यूट आफ इंटीग्रेटेड एंड स्टडीज के डॉ अश्विनी कुश को कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया है

कोरोना की जंग में दयाल सिंह स्कूल ने प्रदान की राहत राशि

सुशील पंडित, यमुनानगर – 15 मई:    

करोना महामारी की जंग में पूरा देश एकजुट हो गया है। इन प्रतिकूल परिस्थितियों में दयाल सिंह कॉलेज ट्रस्ट सोसायटी भी इस मुश्किल घड़ी में सामने आयी और दयाल सिंह पब्लिक स्कूल जगाधरी की तरफ से विद्यालय के हर सदस्य ने अपनी स्वेच्छा से एक दिन का वेतन करोना पीड़ितों के लिए सरकार को दिया।

करोना फंड के लिए शुक्रवार को स्कूल प्रबंधक राव सोहन लाल , प्रधानाचार्य व शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री कंवरपाल से भेंटकर एक लाख रुपये (₹100000 ) का चेक हरियाणा करोना फंड में उन्हें सौंपा और साथ ही यह प्रार्थना की, कि यह महामारी जल्द ही समाप्त हो जाए और राष्ट्र खुशहाली व प्रगति की राह में एक बार पुनः वापसी करें ।इस मौके पर शिक्षा मंत्री ने दयाल सिंह कॉलेज ट्रस्ट सोसायटी के इस सहयोग की सराहना की। संस्था के प्रबंधक राव सोहन लाल ने कहा कि पूरा राष्ट्र इस समय कोरोना के प्रभाव से आर्थिक, मानसिक व शारिरिक दृष्टि से पूर्णतः प्रभावित है भारत के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हम सब की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम सभी अपने स्तर पर सम्पूर्ण समाज को इस विपदा की घड़ी से उभारने की सकारात्मक कोशिश करें ताकि हम सभी भारतवासी पुनः उसी प्रकार जीवन की मुख्यधारा से जुड़ कर सशक्त व सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण कर सके।

प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की लॉक डाउन के दौरान फीस माफ करवाने हेतु अभिभावक मंच करनाल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया

ऑनलाइन पढ़ाई का तो बस फीस लेने का एक बहाना है : सोमबीर प्रधान अभिभावक मंच करनाल

करनाल 12 मई (मनोज त्यागी) :

      को अभिभावक समस्या निवारण मंच ने करनाल के उपायुक्त निशांत यादव व संजय बठला प्रतिनिधि मुख्यमंत्री करनाल, के माध्यम से  प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की लॉक डाउन के दौरान फीस माफ करवाने  हेतु माननीय मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। मंच के प्रधान  सोमबीर ने कहां, आज करोना महामारी के दौरान सभी मध्यवर्गीय परिवार बहुत ही दयनीय स्थिति से गुजर रहे हैं इसलिए प्राइवेट स्कूल वालों को फीस न लेने के आदेश दिए जाएं। क्योंकि इस दौरान बच्चों की पढ़ाई नहीं चल रही ऑनलाइन पढ़ाई का तो बस फीस लेने का एक बहाना है स्कूल वालों के पास ऑनलाइन पढ़ाई कराने के लिए कोई संसाधन नहीं है और ना ही अभिभावकों के पास ही कोई ऑनलाइन के लिए जरूरी साधन है। मंच के सदस्य  वंदना आर्य ने उपभोक्ता कानून का हवाला देते हुए कहां उपभोक्ता को जब  पूरी सेवाएं मिले तभी वह सर्विस चार्ज देने के लिए बाध्य है इस समय स्कूल विद्यार्थियों को कोई पढ़ाई नहीं करा रहे हैं। मनमोहन जी ने कहा कि जब छोटा बिजनेस मैन अपने कर्मचारी  की सैलरी खुद दे रहा है तो स्कूल प्रशासन अपने कर्मचारियों की सैलरी खुद क्यों नहीं दे सकते।

      मौके पर मौजूद प्रदीप कश्यप, एडवोकेट अशोक, सतीश शर्मा, अमित तंवर,डॉक्टर जितेंद्र, विकास व राजीव शर्मा ने भी अपना मत रखा और  सरकार को अपील की वह है इस मामले का संज्ञान लेकर प्राइवेट स्कूल प्रशासन को आदेश देकर फीस माफ करवाएं

अध्यापकों को कोरोना वोर्रियर्स समझें: पब्लिक स्कूल एसोसिएशन यमुनानगर

सुशील पंडित, यमुनानगर – 9  मई      

आज पब्लिक स्कूल एसोसिएशन की मीटिंग एम. एस. साहनी की अध्यक्षता में आयोजित  की गयी, जिसमें सोशल-डिस्टन्सिंग का पालन किया गया।बताया गया कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूल अभी तक बंद हैं। बच्चो को पढ़ाई के नुक्सान से बचाने के लिए सभी स्कूल अध्यापक टेक्नोलॉजी का सहारा लेकर ऑनलाइन शिक्षा दें रहे  हैं। पूरी मेहनत व तत्परता से शिक्षण कार्य किया जा रहा है। सरकार के निर्देशानुसार सभी अभिभावको को प्रति महीने अनुसार ट्यूशन फीस देने के लिए कहा गया है। इसी के मद्देनजर निजी स्कूल प्रबंधको की तरफ से अभिभावकों को एक महीने की फीस जमा करने की प्रार्थना व अपील की गई थी।

स्कूल प्रबंधको का कहना है कि अभिभावक जो बच्चों की फीस जमा करते हैं उससे ही स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन दिया जाता हैं। इसलिए फीस न मिलने से उन्हें इन शिक्षण कार्यो को पूरा करने में  परेशानी हो रही है, पहले ही स्कूल बंद रहने से सभी स्कूलों की आर्थिक अर्थव्यस्था चरमरा गई है। उनके अनुसार कुछ अभिभावकों ने तो पिछले सत्र 2019 -20 की फीस का भी पूरा भुगतान नहीं किया है। स्कूल प्रबंधको का कहना है कि सक्षम अभिभावक भी फीस जमा कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है जिससे उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

स्कूल प्रबंधको द्वारा सभी सक्षम अभिभावकों से पुन: अपील कि जा गयी कि वे जल्द से जल्द अपनी देय राशि का भुगतान करे ताकि स्कूल की शेक्षिणिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाया जा सके। मीटिंग के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि अगर कोई अभिभावक अभी पूरी फीस जमा करने में सक्षम नहीं है तो वह फीस की किश्ते बनवाकर भी भुगतान कर सकता है, वह स्कूल प्रिंसिपल को संपर्क कर सकता है या ई-मेल के द्वारा फीस को किश्तों में देने के लिए आवेदन कर सकता है उनके द्वारा किये गए आवेदन पर विचार किया जायेगा। यह भी देखा गया की कुछ पैरेंट या शरारती तत्वो  द्वारा फेसबुक या सोशल मीडिया पर गलत अफवाहे फैलाई जा रही है, इसलिए एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी डॉ एम. के. सहगल ने अभिभावकों से अनुरोध किया है इन भ्रमित संदेशो के बहकावे में मत आये क्युकि जल्दी ही इन व्यक्तियों के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही की जा रही है।उन्हें इन संदेशो को नजरअंदाज करके जल्दी से जल्दी अपनी फीस जमा करके अध्यापन कार्य को सुचारु रूप देने में अपनी महत्पूर्ण भूमिका निभाए। यहीं समय है जब शिक्षकों को भी कोरोना वॉरीअर समझते हुए उनके हित में भी स्कूलो को मासिक फ़ीस जमा करा के सहयोग करें।

खानपुर medical college मैं 101 कोरोना पॉजिटिव उपचाराधीन है

धर्मपाल वर्मा, चंडीगढ़ :

चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब 2005 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने उस समय सोनीपत जिले के गांव खानपुर कला में महिला शिक्षा संस्थान कन्या गुरुकुल अस्तित्व में था lहजारों की संख्या में देश प्रदेश की कन्याएं इस संस्थान में पढ़ रही थी। यहां के महत्व को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे महिला विश्वविद्यालय के रूप में इसके संस्थापक भगत फूल सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय बनाने का फैसला किया यहीं एक नया मील पत्थर साबित हुआ। भगत फूल सिंह महिला मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का फैसला लेकर उस समय जन-जन की वाह वाही लूटी थी l

आज पूरा प्रदेश महसूस कर रहा है कि ग्रामीण अंचल में स्थित यह मेडिकल कॉलेज बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है। आज स्थिति यह है कि खानपुर medical college मैं 101 कोरोना पॉजिटिव उपचाराधीन है। इस समय इसे विशेष तौर पर कोरोना उपचार के लिए प्रयुक्त किया जा रहा हैl खानपुर कला medical college का लाभ सोनीपत पानीपत करनाल सहित कई जिलों को मिल रहा है l

हजारों विद्यार्थियों का तुरंत नतीजे ऐलान करे एमआरएस-पीटीयू – हरपाल सिंह चीमा

  • पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप की सरकार की ओर बकाया खड़ी 1,850 करोड़ रुपए की राशि ने विद्यार्थियों का भविष्य किया अंधकारमय –आआपा
  • 1 हजार से अधिक कालेजों के परीक्षा फीसें न भुगतान करने पर यूनिवर्सिटी ने रोके नतीजे

राकेश शाह, चण्डीगढ़ 7 मई 2020

आम आदमी पार्टी (आआपा) पंजाब के सीनियर और विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टैकनिकल यूनिवर्सिटी (एमआरएस-पीटीयू) बठिंडा की ओर से अपने मान्यता प्राप्त कालेजों के हजारों विद्यार्थियों के नतीजे रोकने का सख्त नोटिस लिया है। यूनिवर्सिटी के इस फैसले से करीब 2000 विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। ऐसे फैसलों के कारण कोरोना-वायरस के इस नाजुक हलातों में विद्यार्थियों और उनके परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 

पार्टी हैडक्वाटर से जारी बयान में हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि उनके साथ कुछ प्रभावित विद्यार्थियों ने संपर्क कर जानकारी दी है कि करीब 1,012 कालेजों ने यूनिवर्सिटी को परीक्षा फीसों का भुगतान नहीं किया। जिस कारण यूनिवर्सिटी ने नतीजा ऐलान करने पर रोक लगा दी है। 

चीमा ने कहा कि दूसरी तरफ इन कालेजों की पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप (पीएमएस) स्कीम के अधीन लगभग 1850 करोड़ रुपए की राशि सरकार की तरफ बकाया है और जब तक सरकार बकाया रकम का भुगतान नहीं करती, उस समय तक कालेज यूनिवर्सिटी को फीस अदा नहीं कर रहे, विद्यार्थी इस चक्की में बेवज़्हा पीस रहे हैं। इस लिए मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को इस मामले में तुरंत दखल देना चाहिए।  

चीमा ने कहा कि सरकारों की गलत नीतियों और नियतों से हजारों छात्रों और शिक्षा संस्थाएं अनावश्यक समस्याओं का सामना कर रही हैं। इस की मिसाल यह है कि साल 2015 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने इन्द्र कुमार गुजराल पंजाब टैकनिकल यूनिवर्सिटी जालंधर को दो हिस्सों में बांटा था। जिस में कुछ कालेज आईकेजी-पीटीयू के अधीन थे और कुछ कालेज नई बनी एमआरएस-पीटीयू बठिंडा के अधीन थे। तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने  आईकेजी-पीटीयू को नई बनी यूनिवर्सिटी के साथ कुछ फंड सांझे करने के लिए कहा था, परंतु आईकेजी-पीटीयू ने अपने फंड़ को सांझा करने से इन्कार कर दिया, जिस कारण एमआरएस-पीटीयू पहले से ही बड़े वित्तीय संकट में से गुजर रही है। 

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि एक तरफ एआईसीटीई और देश की ओर चोटी की शैक्षिक संस्थाओं विद्यार्थियों से कोई फीस न लेने का सुझाव दे रही हैं और कालेजों को स्टाफ की तनख्वाह अदा करने के निर्देश दे रही हैं जबकि दूसरी तरफ एमआरएस-पीटीयू ने इन विद्यार्थियों के नतीजों को रोका हुआ है। 

विपक्ष के नेता चीमा ने कहा कि यदि कालजिस यूनिवर्सिटी को भुगतान करन में असफल रहती है तो इस में विद्यार्थियों का क्या कसूर है और लॉकडाउन के कारण उन की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है और साथ ही यूनिवर्सिटी अब पिछले समैस्टर के नतीजों का ऐलान भी नहीं कर रही है। 

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि एक तरफ पंजाब सरकार बड़ी वित्तीय संकट का सामना कर रही है, जबकि दूसरी तरफ पंजाब सरकार एक ही काम पर दोगुनी रकम खर्च रही है।

पंजाब के सरकारी काॅलेजों और यूनिवर्सिटियों में गर्मियों की छुट्टियाँ 15 मई से 15 जून तक होंगी – तृप्त बाजवा

राकेश शाह, चंडीगढ़, 7 मईः

पंजाब सरकार ने राज्य के सरकारी काॅलेजों और यूनिवर्सिटियों में 15 मई से 15 जून तक गर्मियों की छुट्टियाँ करने का फैसला किया है।
राज्य के उच्च शिक्षा और भाषा मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए बताया कि यूनिवर्सिटियों और काॅलेजों से मिली जानकारी के अनुसार चालू समेस्टर / क्लास का तकरीबन 80 प्रतिशत सिलेबस पूरा हो चुका है और रहता सिलेबस पूरा करने के लिए अध्यापक विद्यार्थियों की हर संभव तरीकेे से मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा तालाबन्दी से बाहर आने के लिए बनाई गई लखनपाल समिति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार यूनिवर्सिटी और काॅलेज विद्यार्थियों के इम्तिहान 1 जुलाई से लिए जा सकते हैं। इन दिशा-निर्देशों पर यूनिवर्सिटियों के वाइस चांसलरों के साथ हुई मीटिंग में भी सहमति थी कि अगला अकादमिक सत्र सितंबर में शुरू किया जायेगा।

बाजवा ने कहा कि उपरोक्त स्थिति के मद्देनजर यह महसूस किया गया कि यूनिवर्सिटियों और काॅलेजों में होने वाली गर्मियों की छुट्टियाँ इन दिनों में कर दी जाएँ ताकि छुट्टियों के बाद अध्यापक इम्तिहानों और नये दाखिलों का काम करने के लिए पूरी तरह तरोताज़ा होकर अएं। उन्होंने कहा कि यह छुट्टियाँ करने सम्बन्धी विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मंजूरी दे दी है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि गर्मियों की छुट्टियाँ करने सम्बन्धी सरकार के आदेश आज यूनिवर्सिटियों को पहुँच जाएंगे।