“Sushma Ji was seen as an epitome of Indian culture with a blend of modern thinking and traditional values and always respectful towards seniors” — M. Venkaiah Naidu

Sushma ji was like a family –  M. Venkaiah Naidu 

Chandigarh August 6, 2020

Sushma Swaraj

“Sushma Ji was seen as an epitome of Indian culture with a blend of modern thinking and traditional values and always respectful towards seniors” said Sh. M. Venkaiah Naidu, Hon’ble Vice President of India and Chancellor of Panjab University while delivering Ist Sushma Swaraj Memorial Lecture organized online by Panjab University, Chandigarh, today on her death anniversary.

Hon’ble Vice President of India further added that Sushma Ji  was my sister and a family to me. Still cannot believe that she is no more, he added. She was one of the most popular Indian Ministers in recent times. She was a wonderful human being, always considerate and prompt in responding to any issue. He further added that Sushma Ji made a mark as a dynamic leader and added many firsts to her career which only potrays that she was very popular with people. She was a multi-lingual brilliant orator with apt use of words.He added that Sushmi ji was efficient,sweet,sober and at the same time firm on her commitments towards country .

While appreciating the efforts of PU in organizing the Ist Memorial Lecture, he stressed that he is proud to be the Chancellor of the University which has produced a Parliamentarian and Leader like Sushma ji.  He added that memorial lectures or commemoration events are meant to not only pay tributes but also inspire the younger generation to emulate the qualities of great men and women.

Prof. Raj Kumar, Vice Chancellor, Panjab University in his welcome address said that the University is proud if its alumna and plans to organise memorial lecture every year. He introduced Hon’ble Vice President and gave a brief sketch of Sushma Ji’s life and career.

Ms. Bansuri Swaraj, daughter of late Smt. Sushma Swaraj was present online along with 800 PU faculty, researchers and students.

Senior PU officials present, included Prof. R.K. Singla, Dean University Instructions, Prof. Karamjeet Singh, Registrar, Prof Sanjay Kaushik, Dean College Development Council, Prof. S.K. Tomar, Dean Student Welfare and Prof. Sukhbir Kaur, DSW(W).

PU Girls Hostels No. 3-6 carried Plantation Drive

Chandigarh August 5, 2020:

A Tree Plantation drive was organised in Panjab University Women Hostels No.3(Sarojini), 4 (Kasturba Hall), 5(Savitri Bai Phulle) and 6 (Mother Teresa Hall) in their premises with all support of Sh. Anil Thakur, Deputy Executive Engineer (Horticulture).

Dr. S.K. Tomar, Dean Student Welfare and Dr. Sukhbir Kaur, Dean Student Welfare (W) planted the trees in the hostels alongwith the wardens and staff members with the aim to plant 40,000 saplings in the entire campus during the rainy season.

मुख्य मंत्री द्वारा बेटी को आगे बढाओ के अपने सकंल्प पर 11 नए महाविद्यालय खोलने की घोषणा की गयी

पंचकूला 3 अगस्त:

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने रक्षाबंधन के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढाओ अभियान को आगे बढाते हुए बेटी को आगे बढाओ के अपने सकंल्प पर 11 नए महाविद्यालय खोलने की घोषणा की। इसके साथ ही हरियाणा ऐसा प्रदेश बन गया जिसकी 15 किलोमीटर की परीधि में एक महाविद्यालय खुल गया।

पंचकूला के सैक्टर 1 के राजकीय स्नातकोतर महाविद्यालय से मुख्यमंत्री ने इन कालेजों की घोषणा करने के साथ साथ पर्यावरण बचाने के लिए वृक्षारोपण कर उसकी रक्षा के लिए वृक्षबंधन का भी प्रदेश के लोगों से आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा दान एक महादान है। इसी के मध्येनजर पिछले 5 वर्षो में 97 नए कालेज खाले गए जबकि पिछले 48 वर्षो में 75 कालेज खोले गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संयोग की बात है कि अभी हाल ही में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति घोषित हुई है जिसमे 2030 तक उच्चतर शिक्षा में जीईआर 50  प्रतिशत तक करना है जो वर्तमान में 32 प्रतिशत तक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकारी  प्रयासों के साथ साथ गैर सरकारी समितियां, समाज के प्रबुद्व व्यक्तियों के सहयोग से हरियाणा इस लक्ष्य को हासिल करेगा। नई शिक्षा नीति में कक्षा 6 से ही व्यवसायिक रूप से विद्यार्थी के हुनर के अनुरूप ही  विषय चुनने का विकल्प दिया गया है जो एक इस नीति की सबसे बड़ी खुबी है।

हरियाणा में देश का पहला का भगवान विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय पलवल जिले दुधोला में खोला गया है। इस विश्वविद्यालय में युवाओं को उनके कौशल अनुसार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में हजारों युवा इस विश्वविद्यालय में कौशल की शिक्षा हासिल कर रहे है। उन्होने कहा कि नई शिक्षा  नीति प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में कारगर सिद्व होगी। इससे शिक्षा के स्तर में अमूलचूल परिवर्तन होगा और पूर्ण रूप से रोजगारपरक होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का कार्यक्रम केवल 10 महाविद्यालयों की घोषणा था परन्तु आज ही महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा के अनुरोध पर कलायत विधानसभा क्षेत्र के गांव राजोंद में 11 महाविद्यालय खोलने की घोषणा की गई है। यह रक्षाबंधन का हमारी बहनों के लिए विशेष तोहफा है। उन्होंने कहा कि अब 15 किलोमीटर की दायरे में कोई न कोई महाविद्यालय खोला जा चुका है। सरकार का लक्ष्य  10 किलोमीटर की परीधि में एक महाविद्यालय खोलना हेै। उन्होंने प्रदेश के लोगों से आहवान किया कि अगर किसी क्षेत्र में इससे अधिक दूरी पर महाविद्यालय है तो वे सरकार के संज्ञान में लाए, उस पर तुरन्त कार्यवाही की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आज सबका साथ सबका विकास के अपने लक्ष्य पर चलते हुए आज पंचकूला से नूह तथा जगाधरी से डबवाली हर विधानसभा क्षेत्र में कोई न कोई महाविद्यालय दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी हलकों में 161 सरकारी महाविद्यालय है जो किसी न किसी विधानसभा क्षेत्र में पडते हैं। परन्तु यह हैरानी की बात कांगे्रस के 10 वर्षो के शासन काल में बरोदा विधानसभा हलके में एक भी महाविद्यालय नहीं है। इसलिए उन्हांेने बरौदा में दो महाविद्यालय देने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायती राज संस्थानों में पढे लिखे जनप्रतिनिधि आंए। इसके लिए उन्होंने न्यायालय तक लड़ाई लडी। जिसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2016 में 33 प्रतिशत आरक्षण की तुलना में 43 प्रतिशत महिलाएं चुनकर आई। उन्होंने घोषणा की कि आगामी पंचायती राज चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटे आरक्षित की जाएगीं। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित महिला तीन तीन पीढियों का भला करती है। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या समाज में एक कलंक है ओर हरियाणा में इसकी स्थिति ओर भी खराब थी। इसके मध्येनजर बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की शुरूआत की गई। सरकारी प्रयासों के साथ साथ, जनसहयोग से इस अभियान के सार्थक परिणाम आए और वर्तमान में लिंगानुपात की स्थिति 923 तक पहुंच गई है जो पहले केवल 871 थीं।

मुख्यमंत्री ने वृक्षारोपण को वृक्षबंधन का कार्यक्रम बताते हुए कहा कि हमें वृक्षों को भी हमने रक्षासूत्र में बांधना होगा। वृक्ष बचेगें तो हमें आक्सीजन ओर जीवन मिलेगा। उन्होंने वृक्षों को रक्षा बांधते हुए परवरिश करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई वृक्षबंधन डोक्यूमेंट्री का अवलोकन किया ओर इसका एप भी लांच किया। यह एप सदैव खुला रहेगा और इस पर कोई विद्यार्थी पौधारोपण व उसकी सुरक्षा करके एप पर फोटो अपलोड कर सकता है। उन्होंनेे स्वामी विवेका नंद की पुस्तक-आई एम इंडिया- का विमोचन किया।    

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि पंचकूला के लिए आज रक्षाबंधन का ऐतिहासिक दिन है। पिछले कुछ वर्षो से पंचकूला एक शिक्षा के हब के रूप में उभर रहा है और मोरनी हिल्स जैसे दुगर्म क्षेत्र में अब तक केाई तक केाई कालेज  नहीं उस क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने एक शिक्षा सौगात दी है। उन्होंने इससे पहले पंचकूला में हरियाणा का पहला अंग्रेजी माध्यम से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शुरू किया गया है। इसके अलावा 5 प्राईमरी स्कूल भी अंग्रेजी माध्यम के जिला में खोले गए है। इन स्कूलों से पंचकूला में शिक्षा का ग्राफ बढा है और पिछले वर्षो की तुलना में 10 व 12वीं कक्षाओं की नतीजे भी बेहतर आ रहे है।

गुप्ता ने कहा कि पिछले कई सालो उपेक्षित पंचकूला में जितने विकास कार्य इन 5 सालों में हुए उतने पहले कभी नही हुए। उन्होंने कहा कि पंचकूला के विकास में करोड़ों रुपए की राशि खर्च की जा चुकी है और निरंतर विकास जारी रहेंगें। उन्होंने मोरनी जैसे दुर्गम क्षेत्र में कालेज की स्थापना करने पर मुख्यंत्री का आभार जताया।

केन्द्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने कहा कि हरियाणा में केन्द्र सरकार की नल से जल योजना के तहत बेहतर कार्य किए जा रहे है। इसके लिए हरियाणा सरकार विशेष रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नल से जल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की एक महत्वकांक्षी योजना है। इसके तहत 2024 तक हर घर में नल से जल पहुचंाया जाएगा। हरियाणा इस योजना में पहले ही काफी आगे चल रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री बधाई के पात्र है। उन्होंने कहा कि मन में ठाना है उसे कर दिखाना है और आज के 11 महाविद्यालय महिला शिक्षा में मील का पत्थर साबित होेगें और हरियाणा उन्नति के शिखर पर पहंुचेगा।  

हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के आने से पहले ही प्रदेश में 1000 प्ले स्कूल खोलने की योजना तैयार की जा चुकी थी। इसके अलावा मिड डे योजना के तहत प्रदेश के स्कूलों में अब विद्यार्थियों को सप्ताह में 6 दिन दूध उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोविड 19 के दौरान आॅन लाईन कक्षाएं लगाकर हरियाणा ने देश में बेहतरीन प्रदर्शन किया और हिमाचल व गुजरात के बाद हरियाणा देश में अव्वल स्थान पर रहा। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य व शिक्षा पर मुख्यरूप से फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में  उच्च शिक्षा के साथ साथ 98 संस्कृति माॅडल स्कूल भी खोले जा रहे है। शिक्षा के क्षेत्र में पिछले साढे पंाच साल में स्कूल व कालेज के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में जितना कार्य किया है उतना पहले कभी नहीं हुआ।

कार्यक्रम को महानिदेश शिक्षा अजीत बाला जोशी, प्राचार्य डा. अर्चना मिश्रा व उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अंकुर गुप्ता ने भी संबोधित किया। कालेज की छात्राओं ने मुख्यमंत्री व अन्य विशिष्ठ व्यक्तियों को राखी बांधकर आशिर्वाद लिया। इस मौके पर उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा, पुलिस आयुक्त सौरभ सिंह, पुलिस उपायुक्त मोहित हांडा, नगर निगम के आयुक्त महावीर सिंह, भाजपा जिला प्रधान दीपक शर्मा, श्याम लाल बंसल, कुलभुषण गोयल सहित पार्टी के कई पदाधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।  

विश्वास स्कूल में बच्चों ने ऑनलाइन ही मनाया सलाना दिवस

पंचकूला 3 अगस्त:

सेक्टर 9 बी.के.एम् विश्वास स्कूल में 3 अगस्त को मनाया जाने वाला वार्षिक उत्सव लोक डाउन पीरियड के अंतर्गत घर में  ही बच्चों ने विभिन्न विभिन्न विषयों पर वीडियो बनाकर भेजे I प्रत्येक वर्ष बच्चे इस दिन को बड़े हर्षोल्लास से मनाते थे परंतु इस बार करोना बीमारी के चलते स्कूल बंद होने पर भी बच्चों ने अपना उत्साह नहीं छोड़ा व इस महान स्थापना दिवस को बड़े जोर शोर से मनाया उन्होंने सॉन्ग गाए व भाषण भी दिए बच्चों ने मेडिटेशन, हिमाचली, वेस्टर्न, क्लासिकल डांस, स्पोर्ट्स, योगा आदि के बड़े अच्छे अच्छे वीडियो बनाएं I

स्कूल की प्रिंसिपल साध्वी नीलिमा विश्वास जी ने सभी प्रतियोगियों को स्कूल के खुलने पर सर्वश्रेष्ठ वीडियो को पुरस्कार देने की घोषणा की I

राशिफल 03 अगस्त 2020

Aries

03 अगस्त 2020: कुछ ऐसी घटनाएं आपकी परेशानी का कारण बन सकती हैं, जिन्हें टालना मुमकिन न हो. लेकिन आप ख़ुद को शांत बनाए रखें और हालात से निपटने के लिए तुरंत प्रतिक्रिया न करें. अगर आप सूझ-बूझ से काम लें, तो आज अतिरिक्त धन कमा सकते हैं. आपकी पारिवारिक सदस्यों को क़ाबू में रखने और उनकी न सुनने प्रवृत्ति की वजह से बेवजह वादविवाद हो सकता है और आपको आलोचना का सामना भी करना पड़ सकता है. मुमकिन है कि यह आपके रोमांटिक जीवन का सबसे मुश्किल दौर होगा, जो आपको दिल पूरी तरह से तोड़ सकता है, जो नए संपर्क आप आज बनाएंगे, वे आपके करियर को एक नई तेज़ी देंगे. चीज़ों और लोगों को तेज़ी-से परखने की क्षमता आपको दूसरों से आगे बनाए रखेगी. अगर आप अपने जीवनसाथी से स्नेह की आशा रखते हैं, तो यह दिन आपकी आशाओं को पूरा कर सकता है. बाग़बानी करना आपके लिए सुकून भरा हो सकता है. इससे पर्यावरण को भी लाभ पहुंचेगा.

Taurus

03 अगस्त 2020: अपनी नकारात्मक भावनाओं और वृत्तियों पर लगाम लगाकर रखें. आपकी रुढ़िवादी सोच/ पुराने ख़याल आपकी प्रगति में रोड़ा बन सकते हैं, उसकी दिशा बदल सकते हैं और आपकी राह में आगे कई बाधाएँ खड़ी कर सकते हैं. आर्थिक मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की ज़रूरत है. अगर बातचीत और चर्चा आपके मुताबिक़ न हो, तो आप नाराज़गी में कड़वी बातें कह सकते हैं जिन्हें लेकर बाद में आपको पछताना पड़ सकता है. इसलिए भली-भांति सोचकर ही बोलें. आपका प्रिय को आपसे भरोसे और वादे की ज़रूरत है. दफ़्तर के काम में व्यवधान पड़ने की काफ़ी सम्भावना है. कोई आध्यात्मिक गुरु या बड़ा आपकी सहायता कर सकता है. आपका जीवनसाथी आज आपके लिए कुछ बहुत ख़ास करने वाला है. दिन के पहले भाग में ख़ुद को थोड़ा अलसाहट भरा महसूस कर सकते हैं, लेकिन अगर आप घर से बाहर निकलने की हिम्मत जुटाएं तो काफ़ी काम किया जा सकता है.

Gemini

03 अगस्त 2020: आपका स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं होगा. चिकित्सक की सलाह या दवाई लेने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. पर्याप्त आराम करें. आर्थिक समस्याओं ने रचनात्मक सोचने की आपकी क्षमता को बेकार कर दिया है. अपने दोस्तों को अपने उदार स्वभाव का ग़लत फ़ायदा न उठाने दें. आप प्रेम की आग में धीरे-धीरे ही सही, लेकिन लगातार जलते रहेंगे. अपने काम और प्राथमिकताओं पर ध्यान एकाग्र करें. आज के दिन आपकी योजनाओं में आख़िरी पल में बदलाव हो सकते हैं. आपको महसूस होगा कि शादी के वक़्त किए गए सारे वादे सच्चे हैं. आपका जीवनसाथी ही आपका हमदम है. सितारे इशारा कर रहे हैं कि आज आप अपना दिन टीवी देखने में गुज़ार सकते हैं.

Cancer

03 अगस्त 2020: ऊर्जा और उत्साह का अतिरेक आपको घेर लेगा और आप सामने आने वाले सभी मौक़ों का भरपूर फ़ायदा उठाएंगे. लंबे समय से अटके मुआवज़े और कर्ज़ आदि आख़िरकार आपको मिल जाएंगे. कुछ दिनों से आपका व्यक्तिगत जीवन ही आपके ध्यान का केंद्र रहा है, लेकिन आज आप सामाजिक कार्यों पर ज़्यादा ध्यान देंगे और ज़रूरतमंदों की मदद करने की कोशिश करेंगे. आप अचानक गुलाबों की ख़श्बू से ख़ुद को सराबोर पाएंगे. यह प्यार की मदहोशी है, इसे महसूस करें. अपना बायोडाटा भेजने या किसी इंटरव्यू में जाने के लिए अच्छा समय है. दीर्घावधि में कामकाज के सिलसिले में की गई यात्रा फ़ायदेमंद साबित होगी. आज जीवनसाथी के साथ समय गुज़ारने का यह बढ़िया मौक़ा है. इस सप्ताहांत में आप काफ़ी-कुछ करना चाहते हैं, लेकिन अगर आप काम टालते रहेंगे तो ख़ुद पर ही खीझ पैदा होने लगेगी.

Leo

03 अगस्त 2020: आज आप खेल-कूद में हिस्सा ले सकते हैं, जो आपको सेहतमंद बनाए रखेगा. आज आप अच्छा पैसा कमाएंगे, लेकिन ख़र्च में इज़ाफ़ा आपके लिए बचत को और ज़्यादा मुश्किल बना देगा. आपके दोस्त आपको ऐसे वक़्त पर दग़ा दे सकते हैं, जब आपको उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो. आप अपने प्रिय की बांहों में आराम महसूस करेंगे. अगर आप अपना नज़रिया आस-पास के ऐसे लोगों को बताएं जो महत्वपूर्ण निर्णय लेते हों, तो आपको लाभ होगा. साथ ही आपको काम के प्रति अपने समर्पण और निष्ठा के लिए शाबाशी भी मिलने की संभावना है. यात्रा और भ्रमण वग़ैरह न सिर्फ़ आनन्ददायक सिद्ध होंगे, बल्कि काफ़ी शिक्षाप्रद भी रहेंगे. आपको और आपके जीवनसाथी को कोई बहुत सुखद ख़बर सुनने को मिल सकती है. आज के दिन कुछ न करें, सिर्फ़ अस्तित्व का आनंद लें और अहोभाव से ख़ुद को सराबोर होने दें. स्वयं को भाग-दौड़ के लिए बाध्य न करें.

Virgo

03 अगस्त 2020: तली-भुनी खाने की चीज़ों से किनारा करें. इस बात में सावधानी बरतें कि आप किसके साथ आर्थिक लेन-देन कर रहे हैं. सामाजिक समारोह में परिवार के साथ शामिल होना सबके लिए अच्छा अनुभव रहेगा. घटती घरेलू ज़िम्मेदारी और रुपये-पैसे को लेकर वाद-विवाद के चलते आपके वैवाहिक जीवन में खटास पैदा हो सकती है. योग्य कर्मियों को पदोन्नति या आर्थिक मुनाफ़ा हो सकता है. यात्रा के मौक़ों को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए. जीवनसाथी द्वारा परिवार और मित्रों के बीच नकारात्मक तरीक़े से आपके वैवाहिक

Libra

03 अगस्त 2020: बहुत-कुछ आपके कंधों पर टिका हुआ है और फ़ैसले लेने के लिए स्पष्ट सोच ज़रूरी है. बैंक से जुड़े लेन-देन में काफ़ी सावधानी बरतने की ज़रूरत है. रिश्तेदार आपके दुख में भागीदार बनेंगे. अपनी परेशानियां उनसे बांटने में हिचकिचाएं नहीं. निश्चित तौर पर आप उन्हें हल करने में सफल रहेंगे. घटती घरेलू ज़िम्मेदारी और रुपये-पैसे को लेकर वाद-विवाद के चलते आपके वैवाहिक जीवन में खटास पैदा हो सकती है. रचनात्मक काम में लगे लोगों के लिए सफलता से भरा दिन है, उन्हें वह शौहरत और पहचान मिलेगी जिसकी उन्हें एक अरसे से तलाश थी. आपके वैवाहिक जीवन के लिए यह जीवन के सबसे मुश्किल समय में से एक हो सकता है.

Scorpio

03 अगस्त 2020: मानसिक शांति के लिए तनाव के कारणों का समाधान करें. आर्थिक तंगी से बचने के लिए अपने तयशुदा बजट से दूर न जाएं. दोस्तों और परिवार के साथ मज़ेदार समय बीतेगा. आपको उदार और स्नेह से भरे प्यार का तोहफ़ा मिल सकता है. अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल पेशेवर मामलों को सहजता से सुलझाने में करें. आज के दिन शुरू किया गया निर्माण का कार्य संतोषजनक रूप से पूरा होगा. वैवाहिक जीवन के मोर्चे पर यह दिन वाक़ई बहुत बढ़िया है. ग़ज़ब का दिन है. दोस्तों के साथ समय बीतेगा.

Sagittarius

03 अगस्त 2020: आज का दिन मौज-मस्ती और आनंद से भरा रहेगा, क्योंकि आप ज़िंदगी को पूरी तरह जिएंगे. आर्थिक तौर पर सिर्फ़ और सिर्फ़ एक स्रोत से ही लाभ मिलेगा. किसी पारिवारिक भेद का खुलना आपको चकित कर सकता है. दूसरों की दख़लअंदाज़ी गतिरोध पैदा कर सकती है. आज आप एक ऐसी परियोजना पूरी कर राहत की सांस लेंगे, जिसे आपके बहुत पहले शुरू किया था. अपनी बातचीत में मौलिकता रखें, क्योंकि किसी भी तरह का बनावटीपन आपको फ़ायदा नहीं पहुंचाएगा. शादीशुदा ज़िंदगी के नज़रिये से यह दिन शानदार रहेगा. परिवार के साथ आज शॉपिंग पर जाना संभव हैं, लेकिन थकान का अनुभव भी हो सकता है. 

Capricorn

03 अगस्त 2020: आपके हंसी-मज़ाक़ का लहजा किसी दूसरे को आपकी तरह इस क्षमता को विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकता है. आपसे उसे यह सबक़ मिलेगा कि ज़िंदगी की ख़ुशी बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि ख़ुद के ही भीतर है. बैंक से जुड़े लेन-देन में काफ़ी सावधानी बरतने की ज़रूरत है. आपका मज़ाकिया स्वभाव सामाजिक मेल-जोल की जगहों पर आपकी लोकप्रियता में इज़ाफ़ा करेगा. हर रोज़ प्रेम में पड़ने की अपनी आदत को बदलिए. आपके आत्मविश्वास में वृद्धि हो रही है और तरक़्की साफ़ नज़र आ रही है. अगर आप लंबे समय से अपने जीवन में किसी रोचक चीज़ के होने का इंतज़ार कर रहे हैं, तो निश्चय ही आपको उसके संकेत दिखाई देने लगेंगे. बढ़िया खाना, रोमानी पल और जीवनसाथी का साथ यही ख़ास है

Aquarius

03 अगस्त 2020: अपने वज़न पर नज़र रखें और ज़रूरत से ज़्यादा खाने से बचें. केवल एक दिन को नज़र में रखकर जीने की अपनी आदत पर क़ाबू करें और ज़रूरत से ज़्यादा वक़्त और पैसा मनोरंजन पर ख़र्च न करें. परिवार की शांति अचानक आई समस्याओं की वजह से भंग हो सकती है, लेकिन ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि समय सब ठीक कर देगा. वक़्त का तकाज़ा यह है कि शांति से परेशानी का सामना किया जाए दूसरों को ख़ुशियां देकर और पुरानी ग़लतियों को भुलाकर आप जीवन को सार्थक बनाएंगे. अगर आप विदेशों में नौकरी के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो आज का दिन अच्छा है. अगर कहीं बाहर जाने की योजना है तो वह आख़िरी वक़्त पर टल सकती है. आपका जीवनसाथी आपको ज़्यादा ख़ास वक़्त देने वाला है. यह दिन हो सकता है बहुत ही बढ़िया.

Pisces

03 अगस्त 2020: आज आप थकावट महसूस करेंगे और छोटी-छोटी बातों पर नाराज़ भी हो सकते हैं. नया आर्थिक क़रार अंतिम रूप लेगा और धन आपकी तरफ़ आएगा. दोस्तों को अपने उदार स्वभाव का ग़लत फ़ायदा न उठाने दें. व्यक्तिगत संबंध संवेदनशील और नाज़ुक रहेंगे. पेशेवर तौर पर आज का दिन सकारात्मक रहेगा. इसका भरपूर उपयोग करें. सड़क पर बेक़ाबू गाड़ी न चलाएं और बेजा ख़तरा मोल लेने से बचें. यह समय जीवन में आपको वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद देगा. नींद शरीर की आवश्यक भूख है, लेकिन ज़रुरत से ज़्यादा सोना सेहत के लिए नुक़सानदायक हो सकता है.

अकाउंट्स में 100 नंबर लाने वाली छात्रा अशिमा को दिल्ली में रहने वाले सीए ने भेजा नकद पुरस्कार

डबवाली:

शहर में दुर्गा मंदिर के सामने वाली गली निवासी छात्रा अशिमा ने 12वीं सीबीएसई परीक्षा में अकाउंट्स विषय में 100 अंक हासिल करते हुए नाम रोशन किया है। शहर का नाम रोशन करने वाली छात्रा की उपलब्धि पर दिल्ली में रहने वाले सीए ओमप्रकाश गुप्ता डबवाली ने छात्रा को पुरस्कृत किया है।
दिल्ली निवासी सीए ओमप्रकाश गुप्ता डबवाली की ओर से भेजी गई 11 हजार रूपए नकद पुरस्कार राशि सहित घर पहुंच कर रिटायर्ड जिला मार्केटिंग अधिकारी वियोगी हरि शर्मा ने उद्योग विभाग के डिप्टी डायरेक्टर गुरप्रताप सिंह बराड़ की अध्यक्षता में छात्रा को भेंट करते हुए सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि अकाउंट्स विषय में शत-प्रतिशत अंक हासिल करना दूसरे विषयों के मुकाबले काफी मुश्किल और ख्याति नाम है। शहर की बेटी ने यह उपलब्धि हासिल करते हुए शहर का नाम रोशन किया और उसकी उच्च शिक्षा के साथ इलाके की नई उपलब्धि भी कायम होगी। जिससे शहर के पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट ओम प्रकाश गुप्ता ने शहर का नाम रोशन करने वाली छात्रा असीमा को दिल्ली से 11 हजार रूपए भेजकर पुरस्कृत किया है।

उल्लेखनीय है कि किलियांवाली रोड स्थित बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा अशिमा पुत्री राकेश जिंदल ने अकाउंट्स में 100 अंक हासिल किए हैं। इस अवसर पर मेहता इंस्टीट्यूट संचालक सुनील मेहता, छात्रा के दादा तरसेम जिंदल व माता पिता सहित परिवार जन मौजूद रहे।

PU Plans to Plant 40,000 saplings this Season

Chandigarh August 1, 2020:

Girls  Hostel no 1 and 2 ,Panjab University Chandigarh organised a plantation drive  to celebrate the month of Sawan . 

The saplings were planted by the DSW(W) Prof Sukhbir Kaur, Chairperson Dept of Geography Prof SimritKahlon, Chairperson IETVE, Dr Kanwalpreet Kaur, Wardens Dr Kamla and Dr Anju Goyal and the staff of the Hostels. Speaking on the occasion the DSW(W)  said that the season of rains in Panjab University was this year being celebrated as a time to make the campus more green. The University planned to plant a total of 40,000 saplings during this season.

She appreciated the efforts being made by the Dept of Horticulture in this regard.

“Styling is 99% research and 1% creativity”

Chandigarh August 1, 2020:

University Institute of Fashion Technology & Vocational Development (UIFT&VD), Panjab University, Chandigarh, conducted a Webinar on Fashion Styling (My Journey and Business of Fashion Styling) on Friday 31st July, 2020.

Chairperson of UIFT&VD, Dr.PrabhdipBrar, gave an introductory note, welcoming the speaker, Mr. Rahul Vijay, a fashion design graduate who started his career at Harper’s Bazaar India. He rose from a fashion intern to a fashion editor and moved to Mumbai. He joined ELLE India and later GQ India and is responsible for styling covers and fashion editorials, with an 8 years’ experience in women’s wear styling. He is one of the creative directors for Lakme Fashion Week and has styled for leading designers such as Rajesh Pratap Singh, AM:PM, Ashish Soni and KunalRawal among others.

The speaker narrated his journey starting from writing articles for his college magazine in 2007 to reaching Harper’s Bazaar in 2011. It stated that the role of a stylist is to give trends to designers, help them edit a collection and to create a language to sell his/her product. Apart from garments the other necessities for styling include footwear, wearer trials and photography. For a magazine, any cover star is selected on the basis of an upcoming movie release, on newsworthy content associated with them or according to the mood board. The takeaway of the session was that “Styling is 99% research and 1% creativity.” The talk converged at a statement that “To succeed as a stylist, one needs the right team and the right attitude.” This session would definitely strike the right chord in the students of fashion technology who wish to pursue styling as a career.  

 It was attended by more than 90 participants including faculty members, research scholars and students of Fashion Technology.

क्या आंदोलन से उपजी थी नयी शिक्षा नीति की नींव?

राजविरेन्द्र वशिष्ठ, चंडीगढ़ – 31 जुलाई:

वर्ष 2002, 26 नवम्बर के दिन ABVP के कार्यकर्ताओ का अटल सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा छात्र आंदोलन किया था जिसका नारा था ‘भारत केन्द्रित शिक्षा नीति’ आज 2020 में उस आंदोलन की सफलता #राष्ट्रीय_शिक्षा_निति की रूप में प्राप्त हुई है यह विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओ के लिए हर्ष का विषय है।

इस आन्दोलन को गति देने हेतु विभिन्न प्रान्तों में सम्मेलन, सभाएं, यात्रा जैसे कार्यक्रम किए गए। हर प्रान्त में स्थानीय समस्याओं को भी लेकर मांगपत्र बने, जो राज्य के शिक्षा मंत्रियों को दिए गए। छात्रों में जागरण हेतु दो करोड़ से भी अधिक संख्या में पत्रक बांटे गए। बेरोजगारी के कारण तथा उपाय के विषय पर एक पुस्तिका का प्रकाशन किया गया। इसके अलावा पोस्टर, बैनर आदि प्रचार सामग्री भी विपुल मात्रा में मुद्रित की गई। इस सम्पूर्ण आन्दोलन के द्वारा यह प्रयास किया गया कि शिक्षा में परिवर्तन एवम् रोजगार विषय पर समाज में, विशेष रूप से शिक्षा जगत् में व्यापक बहस हो। सरकारों के द्वारा छात्रों की एवं शिक्षा की समस्याओं के समाधान हेतु ठोस कदम उठाए जाएं।

आज 18 साल बाद उस व्यापा आंदोलन फलीभूत हुआ देखिये उस समय जो मांगें अभाविप ने की थीं वह आज भी कितनी प्रासांगिक हैं।

प्रमुख मांगें:

शिक्षा का भारतीयकरण हो

  • भारतीय भाषाओं में हो शिक्षा।
  • संस्कृत अध्ययन को प्रोत्साहन मिले
  • नैतिक शिक्षा दी जाए।
  • राष्ट्रीय शिक्षा आयोग स्थापित हो।

शिक्षा की वित्त-व्यवस्था सुधारी जाए

  • सकल घरेलू उत्पादक का न्यूनतम 6 प्रतिशत शिक्षा पर व्यय हो
  • निजी सहभाग के नाम पर बढ़ते व्यापारीकरण पर रोक लगे
  • शिक्षा-शुल्क न्यूनतम हो।
  • राष्ट्रीय शिक्षा कोष की स्थापना की जाए।

विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता मिले

  • सीनेट और सिंडीकेट जैसे निकाय अनिवार्य हों।
  • छात्र संघ के निर्वाचन अनिवार्य हों।
  • विश्वविद्यालय स्वायत्त हो।
  • जनीतिक हस्तक्षेप बंद हो।

रोजगार में बढ़ोत्तरी हो

  • श्रम-आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाए।
  • निवेश और रोजगार का संख्यात्मक अनुपात निश्चित हो।
  • अनौपचारिक रूप से शिक्षित कुशल कारीगरों को प्रमाण पत्र दिया जाए।

केंद्र सरकार ने बीते दिन लगभग 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में बदलाव किया। कई बदलाव ऐसे हैं, जिन्हें वाकई पढ़ा और समझा जाना चाहिए। सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि देश को वैश्विक स्तर पर मुखिया बनाने के दौर में शिक्षा नीति की भूमिका सबसे अहम होगी। 

चाहे सामाजिक न्याय और समानता हो या अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी या देश की एकता, शिक्षा की भूमिका लगभग हर क्षेत्र में अहम है। सरकार ने इन सारी बातों को मद्देनज़र रखते हुए शिक्षा नीति में बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं।  

सरकार ने शिक्षा नीति के इन बदलावों को बुनियादी स्तर पर 4 हिस्सों में बाँटा है। पहले और दूसरे हिस्से में प्राथमिक और उच्च शिक्षा का ब्यौरा है। तीसरे हिस्से में भाषा, संस्कृति और तकनीक पर विस्तार से चर्चा की गई है। चौथे हिस्से में इस बात का ज़िक्र है कि कैसे सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और नई नीति लागू कैसे की जाए।  

स्कूली शिक्षा

हमारे देश की शुरुआती पढ़ाई का ढाँचा 10+2 पर आधारित था। इसके हिसाब से एक बच्चा 6 साल की उम्र में पहली कक्षा में पहुँचता है। यानी 3 से 6 साल की उम्र के बीच उसका शिक्षा से कोई सरोकार नहीं रहता है। नए बदलाव के हिसाब से इसे 5+3+3+4 कर दिया गया है। और इसका नाम रखा गया है  Early Childhood Care and Education (ECCE), यानी 3 साल की उम्र से ही बच्चों की पढ़ाई शुरू होगी।  

शुरुआती उम्र से तैयार किए जाएँगे बच्चे 

सरकार ने ऐसा करने के पीछे उल्लेखनीय कारण दिया है।  सरकार का कहना है एक बच्चे के दिमाग का 85 फ़ीसदी विकास 6 साल की उम्र के पहले हो जाता है। ऐसे में यह बेहद ज़रूरी है कि वह पहली कक्षा में जाने के पहले विद्यालय (स्कूल) के लिए पूरी तरह तैयार रहे। बच्चों को बेहतर भाषा और अक्षर ज्ञान कराने के लिए अलग-अलग तरह के खेल और क्रियाकलापों का हिस्सा बनाया जाएगा। 

एनसीइआरटी (NCERT) दो हिस्सों में बच्चों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करेगी। पहला 0-3 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए और दूसरा 3-8 तक की उम्र के बच्चों के लिए। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षा को आँगनबाड़ी से भी जोड़ा जाएगा। साथ ही आँगनबाड़ी को बहुत मज़बूती प्रदान की जाएगी। 

कक्षा 1 से पहले बच्चों को “Preparatory Class” यानी “बालवाटिका” में भेजा जाएगा। इसमें पढ़ाने वाले शिक्षक का ज़ोर बच्चों को स्कूली शिक्षा के लिए तैयार करना होगा। इसके पहले आँगनबाड़ी में काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को एनसीइआरटी के नीति-निर्देशों के आधार पर तैयार किया जाएगा। आदिवासी इलाकों के लिए ECCE के लिए “आश्रमशाला” बनाई जाएगी और इसमें भी ऊपर दी गई जानकारी के आधार पर काम होगा।  

30 बच्चों पर 1 शिक्षक का लक्ष्य 

सरकार के मुताबिक़ देश के 5 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जिन्हें अंकों का सही ज्ञान नहीं है। सरकार का ज़ोर इस बात पर होगा कि वह जोड़, घटाव, गुणा और भाग करना सीखें। सरकार इस योजना पर चल रही है कि साल 2025 तक बच्चों को संख्याओं और अंकों की सही समझ हो जाए। इसके लिए बच्चों को कक्षा 3 तक अच्छे से अंकों की पढ़ाई करवाई जाएगी। 

इसके अलावा पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की बहाली की जाएगी। छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) 30:1 रखा जाएगा, यानी 30 बच्चों पर एक शिक्षक। वहीं आर्थिक और समाजिक रूप से कमज़ोर बच्चों के लिए यह अनुपात 25:1 रखा जाएगा। इसके लिए सरकार एक राष्ट्रीय स्तर का पोर्टल भी संचालित करेगी, Digital Infrastructure for Knowledge Sharing (DIKSHA)। बच्चों के पोषण (Nutrition) और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) का ख़ास ध्यान रखा जाएगा।  

जिससे बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे 

सरकार इस बात पर भी विशेष ध्यान देगी कि ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में बच्चे विद्यालयों में दाख़िला लें और शिक्षा हासिल करें। कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों की पढ़ाई का सकल नामांकन अनुपात Gross Enrollment Ratio (GER) 90.9 % था। यानी 90.9 % बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं लेकिन आगे की पढ़ाई में ऐसा नहीं है।

कक्षा 9 से 10 और 11 से 12 तक यह अनुआत सिर्फ 79.3% और 56.5% है। सरकार इस लक्ष्य पर काम कर रही है कि साल 2035 तक 12वीं तक के बच्चों की पढ़ाई का GER 100% हो जाए। इसके लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के बच्चों के लिए National Institute of Open Schooling (NIOS) के तहत Open and Distance Learning (ODL) भी शुरू की जाएगी। साथ ही साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए उनको बढ़ावा देने के लिए पूर्व छात्रों और स्थानीय समुदाय के लोगों की मदद भी ली जाएगी।    

किस उम्र में कितने दर्जे में होगा बच्चा 

इस नीति से बच्चों की शुरुआती पढ़ाई का पूरा ढाँचा बदला जाएगा। इसे कक्षा और आयु वर्ग के हिसाब से बदला जाएगा। यह कुछ इस तरह होगा, 3-8 साल, 8-11 साल, 11-14 साल और 14-18 साल। 5+3+3+4 कुछ इस तरह होगा, 

  • Foundational Stage: कुल 3 साल का प्री-स्कूल और कक्षा 1-2 की पढ़ाई 3 से 8 साल की उम्र तक
  • Preparatory Stage: 8 से 11 साल उम्र तक कक्षा 3 से 5 तक की पढ़ाई
  • Middle School Stage: 11 से 14 साल की उम्र तक कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई
  • High School or Secondary Stage: कक्षा 9 से 12 की पढ़ाई कुल दो हिस्सों में, 9-10 पहले हिस्से में और 11-12 दूसरे हिस्से में

इसके अलावा अलावा ECCE पाठ्यक्रम में अच्छे व्यवहार, मान-सम्मान की भावना, नैतिकता, व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता और सहयोग की भावना से जुड़ी चीज़ें भी बताई जाएँगी।

बच्चों को बनाया जाएगा बहुभाषी  

  • प्रायोगिक तरीके से पढ़ाई और सीखने पर ज़ोर दिया जाएगा, उदाहरण- किस्सागोई।
  • पाठ्यक्रम के लगभग हर पहलू में कला को शामिल किया जाएगा।
  • खेल-कूद को बढ़ावा दिया जाएगा, इसे फिट इंडिया मूवमेंट के तहत पढ़ाई में शामिल किया जाएगा।
  • बच्चों की पढ़ाई में ह्यूमैनिटीज़ (मानव मूल्यों) को भी शामिल किया जाएगा।
  • कक्षा 5 तक बच्चों की पढ़ाई में मातृभाषा अनिवार्य होगी। ऐसा निजी और सार्वजनिक दोनों तरह के विद्यालयों में किया जाएगा।
  • इसके अलावा भाषा की पढ़ाई पर ज़ोर दिया जाएगा। जिससे बच्चे ज़्यादा भाषाओं में संवाद कर सकें।
  • किसी भी राज्य पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। बच्चों को 3 भाषाएँ पढ़ाने पर ज़ोर दिया जाएगा।
  • भाषाओं का चुनाव करने का अधिकार राज्य और बच्चों को दिया जाएगा।
  • एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना के तहत ‘The Languages of India’ नाम की पहल शुरू की जाएगी। इसके तहत बच्चों को बताया जाएगा कि भारत की एकता का आधार भाषाएँ रही हैं।
  • बच्चों की पढ़ाई में संस्कृत भी अनिवार्य रूप से शामिल की जाएगी।
  • संस्कृत के अलावा तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयाली, उड़िया, पर्शियन, प्राकृत और पाली भी (वैकल्पिक रूप से) शामिल की जाएगी।
  • रूसी, कोरियाई, जापानी, चीनी, जर्मन, फ्रांसीसी, स्पैनिश जैसी अंतर्राष्ट्रीय भाषा भी पढ़ाई में शामिल की जाएगी।
  • साथ ही सांकेतिक भाषा में बच्चों की पढ़ाई भी पाठ्यक्रम में शामिल की जाएगी। 

बदला जाएगा परीक्षा और मूल्यांकन का स्वरूप 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत एनसीईआरटी National Curricular Framework, NCF 2020 लागू करेगा। इसका हर 5 से 10 साल में मूल्यांकन किया जाएगा। आसान शब्दों में इसका लक्ष्य बच्चों से किताबों का भार कम करना होगा। साथ ही इसका लक्ष्य बच्चों में सीखने समझने का कौशल तैयार करना होगा। 

NCF के तहत बच्चों की परीक्षाओं का स्वरूप भी बड़े पैमाने पर बदला जाएगा। बोर्ड की परीक्षाओं में छात्रों को “बेस्ट ऑफ़ टू” असेसमेंट की सुविधा दी जाएगी। छात्रों के मूल्यांकन (असेसमेंट) के लिए National Assessment Centre बनाया जाएगा। इसका कार्य छात्रों की परीक्षाओं और मूल्यांकन के लिए दिशा-निर्देश तैयार करना होगा। इसे लागू करने में State Achievement Survey (SAS) और National Achievement Survey (NAS) बनाया जाएगा। 

विद्यालयों में विषय और प्रोजेक्ट संबंधी समूह (क्लब/सर्कल) बनाए जाएँगे। इसमें विज्ञान, गणित, संगीत, शतरंज, कविता, भाषा, परिचर्चा के अलग -अलग सर्कल बनाए जाएंगे। यह बच्चों की पढ़ाई से पूरी तरह होगा।    

शिक्षकों के लिए भी होंगे तमाम नए अवसर  

नई शिक्षा नीति में शिक्षकों के लिए भी काफी कुछ नया है। 4 साल के बैचलर ऑफ़ एजुकेशन प्रोग्राम के लिए विशेष छात्रवृत्ति का प्रावधान किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर काफी संख्या में रोज़गार पैदा होगा, खासकर महिला शिक्षिकाओं के लिए। 

शिक्षकों का स्थानान्तरण भी विशेष परिस्थितियों में ही होगा। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को भी मज़बूत किया जाएगा। एक सुझाव के मुताबिक़ विद्यालयों को “स्कूल कॉम्प्लेक्स” बनाना चाहिए। इसके प्रबंधन के लिए स्थानीय लोगों को अभिवावकों की मदद ली जा सकती है। 

शिक्षकों के पास अपने तरीके से पाठ्यक्रम लागू करने का अधिकार होगा। शिक्षकों को ऑनलाइन मंच दिए जाएँगे, जहाँ वह अपने सुझाव साझा कर सकें। उन्हें एक साल में 50 घंटे का समय खुद पर काम करने के लिए मिलेगा।इस दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को समय-समय पर प्रोन्नति भी मिलेगी। 

साल 2022 के अंत तक National Professional Standards for Teachers (NPST) बनाई जाएगी। इसमें शिक्षकों के विकास प्रोन्नति से जुड़े दिशा-निर्देश मौजूद होंगे। दिव्यांग बच्चों के लिए अलग शिक्षक रखे जाएँगे, जिनका काम उन बच्चों के विकास पर ध्यान देना होगा। साल 2030 के अंत तक शिक्षकों को पढ़ाने के लिए 4 साल का बीएड अनिवार्य होगा।   

दिव्यांग, ट्रांसजेंडर और लड़कियाँ सभी को समान शिक्षा

सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEDGs) से आने वाली आबादी को कई श्रेणी में बाँटा गया है। जिसमें मुख्य रूप से लैंगिक आधार पर (महिलाएँ और ट्रांसजेंडर), अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक को रखा गया है। इसके अलावा दिव्यांग, गरीबी रेखा से नीचे के लोग, तस्करी का शिकार हुए बच्चे, अनाथ और शोषित वर्ग से आने वाले बच्चे इन सभी के लिए सामान शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी। 

जिन इलाकों में SEDGs श्रेणी के बच्चे ज़्यादा होंगे उन इलाकों को Special Education Zones घोषित कर दिया जाएगा। जवाहर नवोदय विद्यालय के तरह के विद्यालय तैयार किए जाएँगे जिसमें छात्रों को लगभग मुफ़्त सुविधाएँ मिलेंगी। इसमें लड़कियों और ट्रांसजेंडर की शिक्षा और सुरक्षा को मद्देनज़र रखते हुए छात्रावास तैयार किए जाएंगे। 

इसके अलावा दिव्यांग अधिकार क़ानून 2016 के तहत दिव्यांग बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित कराने के लिए उचित कदम उठाए जाएँगे। दिव्यांग बच्चों को समान शिक्षा दिलाने के लिए शिक्षा पद्धति में उनके अनुसार बदलाव होंगे। SEDGs वर्ग के बच्चों के लिए कई छात्रवृत्ति योजना भी शुरू की जाएँगी।               

पढ़ाई में बढ़ाई जाएगी गवर्नेंस की भूमिका 

शिक्षा में गर्वनेंस को बढ़ावा देने के लिए इससे जुड़े अधिकारियों को अहम ज़िम्मेदारियाँ दी जाएगी। इसमें मुख्य रूप से ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) शामिल किए जाएँगे। यह विद्यालयों के कॉम्प्लेक्स/समूह के साथ मिल कर नीति-निर्देश लागू करेंगे। 

हर ज़िले या राज्य में “बाल भवन” का निर्माण कराया जाएगा जिसमें बच्चे हफ्ते के एक दिन जा सकेंगे। यह मूल रूप से सामुदायिक शिक्षा पर केन्द्रित होंगे और कई विद्यालयों के साथ मिल कर चलाए जाएँगे। विद्यालयों को बतौर ‘सामाजिक चेतना केंद्र’ भी स्थापित किया जाएगा।

सार्वजनिक विद्यालयों में होगा सुधार  

पुरानी शिक्षा नीति में ज़्यादातर नीति-निर्देश तैयार करने का अधिकार कुछ ही इकाइयों के पास है। मसलन, स्कूली शिक्षा विभाग। इसका तंत्र ऐसा है कि बड़े बदलावों की जगह बहुत कम बचती है। इसकी वजह से निजी क्षेत्र में शिक्षा का व्यवसायीकरण बहुत बढ़ा है। शिक्षा भले महँगी हुई है लेकिन यह तय नहीं हो पाया कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो पा रहा है या नहीं। 

इस ढाँचे में बदलाव के लिए कुछ निर्देश तैयार किए गए हैं। निजी से लेकर सार्वजनिक सभी तरह के विद्यालयों का उचित मूल्यांकन होगा। इससे बच्चों को बेहद शुरुआती स्तर से अच्छी शिक्षा मिलेगी। इसके अलावा Sustainable Development Goal4 (SDG4) सुनिश्चित किया जा सकेगा। सार्वजनिक विद्यालयों को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे बच्चों को वहाँ भी अच्छी शिक्षा मिले। अभिवावकों को इस बात का विकल्प कि वह बच्चों का दाख़िला यहाँ भी करवा सकते हैं। National Achievement Survey (NAS) के तहत बच्चों की नियमित रूप से जाँच कराई जाएगी।   

उच्च शिक्षा के लिए कई खामियों का उल्लेख करते हुए उन पर काम करने की जरूरत बताई गई है। ये हैं;

  • सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए संस्थानों में अलग प्रावधान न होना।
  • शिक्षक और संस्थागत स्वायत्तता न होने की वजह से छात्रों का विकास न होना।
  • पाठ्यक्रम और विषयों के विस्तृत न होने से छात्रों में समग्र गुणों की कमी।
  • विश्वविद्यालयों में फंडिंग न होने के चलते शोध और अनुसंधान की कमी।
  • विश्वविद्यालयों में गवर्नेंस और मानकों की कमी।
  • नियमों की अनदेखी और फ़र्ज़ी तरीके से चल रहे शैक्षिक संस्थानों में बढ़ोतरी।

उच्च शिक्षा का हिस्सा लिबरल आर्ट्स 

सॉफ्ट स्किल्स (बुनियादी कौशल) को भारतीय शिक्षा का अहम हिस्सा बनाया जाएगा। इसमें कला (विशेष रूप से लिबरल आर्ट्स) को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाएगा। छात्रों को ज़्यादा से ज़्यादा कला विधा की समझ और जानकारी देने के लिए तक्षशिला और नालंदा की पद्धति पर काम किया जाएगा।

बाणभट्ट के कादम्बरी में 64 कलाओं के बारे में विस्तार से बताया गया था। इसमें सिर्फ चित्र कला और गायन नहीं बल्कि विज्ञान से संबंधित तमाम विषय शामिल थे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में भी इस तरह की शिक्षा पर ज़ोर दिया जाएगा। इनके पाठ्यक्रम में भी ह्यूमैनिटीज़ और कला को शामिल किया जाएगा। 

उच्च शिक्षा में मानव संबंधी मूल्यों को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा, सत्य, धर्म, शांति, प्रेम, अहिंसा, नागरिक मूल्य और जीवन कौशल। एकएकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट बनाया जाएगा जिसके तहत संस्थानों के क्रेडिट का ब्यौरा तैयार किया जाएगा।  

दुनिया में भारतीय शिक्षा को बढ़ावा

देश में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को कई बड़े अवसर दिए जाएँगे। एक ऐसा केंद्र तैयार किए जाएगा जिसमें विदेशी छात्र भारतीय छात्रों के साथ मिल कर अनुसंधान संबंधी विषयों पर काम कर सकते हैं। दूसरे देशों के साथ इस पर समझौते भी किए होंगे जिससे ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में साझा कार्यक्रम पूरे किए जा सकें। इसमें छात्रों से लेकर प्राध्यापकों तक सभी शामिल होंगे। 

देश में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को दुनिया के कुछ देशों में अपना परिसर बनाने का मौक़ा मिलेगा। इसके अलावा दुनिया के 100 सबसे अच्छे विश्वविद्यालय भारत में अपना परिसर स्थापित कर सकेंगे। साथ ही छात्रों को उच्च शिक्षा मुहैया कराने के लिए उन्हें आर्थिक मदद भी की जाएगी। इसके लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा शिक्षक और छात्रों का अनुपात कम से कम 10:1 और ज़्यादा से ज़्यादा 20:1 रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।   

जिससे छात्रों की उच्च शिक्षा जारी रहे 

देश के हर वर्ग और हर क्षेत्र से आने छात्र उच्च शिक्षा जारी रखें इसके लिए भी कई नए प्रावधान किए गए हैं। सबसे पहले सरकार उच्च शिक्षा के लिए फंड बढ़ाएगी। उच्च शिक्षा में लिंगानुपात पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। देश में ज़्यादा से ज़्यादा स्पेशल एजुकेशन ज़ोन बनाए जाएँगे। विश्वविद्यालयों में भारतीय और स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई कराने पर ज़ोर दिया जाएगा। 

उच्च शिक्षा में छात्रवृत्ति भी बढ़ाई जाएगी और शिक्षा में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। उच्च शिक्षा में ऐसे बदलाव होंगे जिससे ज़्यादा से ज़्यादा छात्रों का रोज़गार सुनिश्चित हो। इस बात का ख़ास ख़याल रखा जाएगा कि पढ़ाई के दौरान किसी छात्र का शोषण न किया जा रहा हो।   

प्रोफेशनल स्टडीज़ को उच्च शिक्षा का अहम हिस्सा बनाया जाएगा। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय, विधि विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य और विज्ञान विश्वविद्यालय, तकनीकी विश्वविद्यालय समेत हर तरह के शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा दिया जाएगा। लक्ष्य के मुताबिक़ साल 2030 तक प्रोफेशनल स्टडीज़ प्रदान करने वाले हर संस्थान को समूह के तौर पर विकसित किया जाएगा। अलग-अलग प्रोफेशनल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले संस्थानों के लिए उनकी आवश्यकता के हिसाब से निर्देश तैयार किए जाएँगे।    

देश और दुनिया में ऐसी तमाम घटनाएँ हो रही हैं जिन पर शोध और अनुसंधान की ज़रूरत है। जैसे जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या बढ़ोतरी और नियंत्रण, बायो टेक्नोलॉजी, डिजिटल दुनिया का प्रभाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कई अहम मुद्दे। ऐसे ज़रूरी मुद्दों पर अच्छे नतीजे हासिल करने के लिए सरकार शोध और अनुसंधान पर विशेष ध्यान देगी। 

शोध और अनुसंधान, Research & Innovation (R&I) इतना अहम विषय होने के बावजूद भारत इस पर अपनी जीडीपी का केवल 0.69 हिस्सा खर्च करता है। वहीं दूसरे देशों से तुलना करें तो अमेरिका 2.8%, इज़रायल 4.3%, चीन 2.1% और दक्षिण कोरिया 4.2% हिस्सा खर्च करता है। 

भारत भी अब इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम करने वाला है। भारत का इतिहास शोध और अनुसंधान के मामले में बेहद गहरा है, इस नीति में उसे वापस हासिल करने की बात की गई है। इसके लिए National Research Foundation (NRF) तैयार की जाएगी, जिसका काम देश के विश्वविद्यालयों में शोध कार्य को बढ़ावा देना होगा।

साथ ही यह विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध का मूल्यांकन भी करेगा। इसके बाद कारगर शोध कार्यक्रमों की जानकारी सरकारी समूहों और एजेंसियों को देगा। शोध कार्यों को फंड दिलाना भी NRF के तहत ही आएगा।  

कैसे लागू होंगे उच्च शिक्षा के बेहतर विकल्प 

उच्च शिक्षा का स्वरूप बेहतर करने के लिए इसका रेगुलेटरी सिस्टम (लागू करने की पद्धति) बदला जाएगा। यह सारे कार्य भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (HECI) के तहत किए जाएँगे। इस आयोग में 4 स्वतंत्र इकाइयाँ शामिल की जाएँगी। इनके जरिए उच्च शिक्षा का बुनियादी ढाँचा सुधारा जाएगा। इसकी सबसे पहली इकाई होगी, 

  • National Higher Education Regulatory Council (NHERC) का काम मुख्यतः रेगुलेशन सुनिश्चित करना होगा।
  • National Accreditation Council (NAC) का काम मान्यता दिलाना होगा।
  • Higher Education Grants Council (HEGC) का काम फंडिंग उपलब्ध कराना होगा।
  • General Education Council (GEC) का काम शिक्षा के उचित मानक तय कराना होगा।

 उच्च शिक्षा में गवर्नेंस 

उच्च शिक्षा में गवर्नेंस को लेकर कई अहम कदम उठाए जाएँगे। सुविधाजनक मान्यता प्रणाली और स्वायत्तता तैयार की जाएगी। इसकी मदद से संस्थान खुद सकारात्मक बदलाव और बड़े कदम उठा सकेंगे। 

उच्च शिक्षा संस्थानों में बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स स्थापित किया जाएगा। इनका काम उच्च शिक्षा संस्थानों को राजनीति दखलंदाज़ी से बचाकर रखना होगा। प्राध्यापकों की भर्ती करना होगा और संस्थागत निर्णय लेना होगा। यह शिक्षाविदों और शिक्षा से जुड़े अनुभवी लोगों का एक समूह होगा जो उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए स्वतंत्र रूप से काम करेगा। तय लक्ष्य के मुताबिक़ साल 2035 के अंत तक देश के लगभग सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स का यह समूह होगा।  

भाषाओं के ज़रिए युवाओं को पढ़ाने का लक्ष्य 

इसके अलावा जिस बात पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया जाएगा वह है युवाओं की शिक्षा और भारतीय भाषाओं का प्रचार। इन दो बातों के अलावा प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कला और संस्कृति को भी शामिल किया जाएगा। दशकों पहले देश में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन शुरू किया गया था, इसे आधार बनाते हुए सरकार देश के हर युवा को साक्षर और शिक्षित बनाने लक्ष्य लेकर चल रही है। देश भर में इसके लिए एडल्ट एजुकेशन सेंटर शुरू किए जाएँगे। 

नई शिक्षा नीति में ‘अतुल्य भारत’ को आधार बनाते हुए भारतीय संस्कृति के एक बड़े हिस्से को पढ़ाई में शामिल करने की बात कही है। यूनेस्को ने 197 भारतीय भाषाओं को लगभग लुप्त बताया है। पिछले 50 सालों में लगभग 50 भारतीय भाषाएँ लुप्त हो चुकी हैं। इसके अलावा एक और नए तरह का संस्थान शुरू किया जाएगा Indian Institute of Translation and Interpretation (IITI)। इसका काम व्याख्या और अनुवाद संबंधी काम को बढ़ावा देना होगा। 

भाषा और संस्कृति की पढ़ाई करने वालों के लिए छात्रवृत्ति शुरू की जाएगी। इतना ही नहीं डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देश में आधुनिक माध्यमों के ज़रिए संवाद को बढ़ावा दिया जाएगा।  

जीडीपी का 6% शिक्षा पर 

नई शिक्षा नीति में ‘केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड’ को मज़बूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा को सबसे ऊपर रखने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर ‘शिक्षा मंत्रालय’ किया जाएगा। इसके अलावा नई शिक्षा नीति में सबसे ज़्यादा इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी का 6% तक खर्च हो। फिलहाल यह 4.43% ही है। यह दुनिया के तमाम विकासशील और विकसित देशों से कमतर हैं। इसलिए नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर किए जाने वाले खर्च को बढ़ावा देने की बात का ज़िक्र है। 

यह भारत की साक्षरता और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए ही बहुत ज़रूरी है। सरकार इस योजना पर काम कर रही है कि 2030 से 2040 के दशक के बीच यह शिक्षा नीति पूरी तरह प्रभावी होगी।     

A book Release on Police Administration , Panjab University

Chandigarh – 31 July

         Prof. Mahesh Sharma, Chairman of the Department of Evening Studies, Panjab University today released a book entitled ‘Police Administration:Concepts and Practice’ written by Dr. Sanjeev Ranjan of the Police Administration Department. He said that the department has always been in the forefront of research and teaching and every year the articles and books of the teachers of the department are published at national and international level. He congratulated Dr. Sanjeev Ranjan for his writing and said that he should continue with such research work in future also. On this occasion, Prof. G.C. Chauhan also appreciated the writing. Among those present included Dr. Rajesh Chander, Dr. Balbir Singh, Dr. Vinod Kumar, Dr. Alka Gulati and Ms. Gurjot Kaur etc. Dr. Ranjan presented a copy of this book to the departmental library.