पंचांग, 14 जुलाई 2022

पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। शास्त्र कहते हैं कि तिथि के पठन और श्रवण से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। तिथि का क्या महत्व है और किस तिथि में कौन से कार्य कराना चाहिए या नहीं यह जानने से लाभ मिलता ह। पंचांग मुख्यतः पाँच भागों से बना है। ये पांच भाग हैं: तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण। यहां दैनिक पंचांग में आपको शुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू माह और पहलू आदि के बारे में जानकारी मिलती है।

नोटः आज अशून्यशयन व्रत प्रारम्भ (चन्द्रोदय व्यापिनी) अशून्य शयन व्रत का महत्व: धार्मिक अम्न्यता है कि इस व्रत को करने से पत्नी दीर्घायु होती है। दांपत्य जीवन खुशहाल रहता है तथा दांपत्य जीवन की सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। जीवन साथ का सहयोग हमेशा बना रहता है। वैवाहिक जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। पति और पत्नी के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है।

यह भी पढ़ें : अशून्य शयन व्रत पत्नी की लंबी उम्र के लिए पति रखते हैं, वैवाहिक जीवन को बनाना है आनंदमय

विक्रमी संवत्ः 2079, 

शक संवत्ः 1944, 

मासः श्रावण़, 

पक्षः कृष्ण, 

तिथिः प्रतिपदा रात्रि 08.17 तक है,

वारः गुरूवार, नक्षत्रः उत्तराषाढ़ा रात्रि 08.18 तक है, 

योगः वैधृति प्रातः 08.27 तक। 

विशेषः आज दक्षिण दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर गुरूवार को दही पूरी खाकर और माथे में पीला चंदन केसर के साथ लगाये और इन्हीं वस्तुओं का दान योग्य ब्रह्मण को देकर यात्रा करें।

करणः बालव, 

सूर्य राशिः मिथुन, चंद्र राशिः मकर, 

राहु कालः दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक, 

सूर्योदयः 05.37, सूर्यास्तः 07.17 बजे।