ज्योतिष शोध कार्यों में आधुनिक संचार माध्यमों का हो सार्थक उपयोग- रजनीश सूद ज्योतिषाचार्य

गणना पर आधारित इस विज्ञान की मदद से भूत, वर्तमान व भविष्य के बारे में पता लगाया जा सकता है। जरूरत इसके नियमों, उप-नियमों, देशकाल की स्थिति को समझने तथा आधुनिक परिवेश में अपने शोध कार्यों को और अधिक सटीक व जनोपयोगी बनाने की है। ज्योतिष शोध कार्यों में आधुनिक संचार माध्यमों का भी सार्थक उपयोग होना चाहिए।

ज्योतिष के माध्यम से हमारे ऋषि-मुनियों, तपस्वियों व बुद्धिजीवियों ने विभिन्न शोध कार्यों से जनसाधारण के जीवन को सुगम बनाने के सतत् प्रयास किए हैं। ज्योतिष भारतीय संस्कृति की सर्वोत्तम धरोहर है। गणना पर आधारित इस विज्ञान की मदद से भूत, वर्तमान व भविष्य के बारे में पता लगाया जा सकता है। जरूरत इसके नियमों, उप-नियमों, देश काल की स्थिति को समझने तथा आधुनिक परिवेश में अपने शोध कार्यों को और अधिक सटीक व जनोपयोगी बनाने की है। ज्योतिष शोध कार्यों में आधुनिक संचार माध्यमों का भी सार्थक उपयोग होना चाहिए। इसी सोच से नक्षत्र २७ रिसर्च सेंटर आयजित करवा रहा है राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन रविवार पांच दिसंबर को होटल सनबीम में ; इस ज्योतिष महासम्मेलन में ,राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिषाचार्य जी. डी. वशिष्ठ  ,अनिल वात्स  ,एच .एस रावत , पंडित लेखराज ,पी .पी. एस राणा  ,मदन गुप्ता स्पाटू  , रविंद्र भंडारी , अक्षय  तथा इसके इलावा देश भर से   प्रमुख ज्योतिषी इस सम्मेलन में भाग लेंगे  ।इस सम्मेलन के आयोजक संगठन के सी ई ओ डॉ रजनीश सूद व् चेयरपर्सन डॉ बविता अग्रवाल  है। इस सम्मेलन को करवाने का मुख्य उद्देश्य- ज्योतिष शास्त्र के विद्यार्थियों  को प्रोत्साहित करना है ।क्योंकि वही ज्योतिष का भविष्य है। ज्योतिष भारत की नस नस में है, भारत की संस्कृति है, भारत की धड़कन है ।

रोजगारपरक ज्योतिष से हो रहा है जनकल्याण : बबिता  

 नक्षत्र 27 रिसर्च सेंटर की डॉ बबिता अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान दौर में ज्योतिष जहां स्वरोजगार का साधन बना है, वहीं इसके उपायों से जनकल्याण कार्य भी हो रहे हैं। इनसे जहां समाज में जागृति आती है, वहीं ज्योतिषीय कार्य, उपायों का सामान बेचने वाले लोगों को भी रोजगार के अच्छे अवसर मिल रहे हैं। ऐसे में राष्ट्री स्तर के ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन समाज में एकजुटता, समरसता भाव लाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। 

समस्त संसार एक परिवार की भावना से ही उन्नति संभव

सारिका तिवारी, धर्म डेस्क – चंडीगढ़:

सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज पंचकूला, 29 नवंबर, 2021ः ‘‘परमात्मा यदि हमारा अपना है तो इसका रचा हुआ संसार भी हमारा अपना ही है। यह परमात्मा सबका आधार है। हर एक में और ब्रह्मांड के कण-कण में इसी का वास है। ऐसा भाव जब हृदय में बस जाता है तब किसी अन्य वस्तु अथवा मनुष्य में फिर कोई फर्क नज़र नहीं आता। अतः हम यह कह सकते हैं कि समस्त संसार एक परिवार की भावना जीवन में धारण करने से ही उन्नति सम्भव है।’’

निरंकारी सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने वर्चुअल रूप में आयोजित 74वें वार्षिक निरंकारी सन्त समागम के दूसरे दिन 28 नवंबर, 2021 की शाम को हुए सत्संग समारोह को सम्बोधित करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए जिसका आनंद मिशन की वेबसाईट एवं साधना टी.वी.चैनल के माध्यम द्वारा विश्वभर के विश्वभर के निरंकारी श्रद्धालु भक्त घर बैठे ही प्राप्त कर रहे हैं।

सत्गुरु माता जी ने प्रतिपादन किया कि यदि हम आध्यात्मिकता के दृष्टिकोण से देखें तो वास्तविक रूप में सबका आधार यह परमात्मा ही है जिस पर विश्वास भक्ति की बुनियाद है। इसीलिए अपनत्व के भाव को धारण करके हम सब एक दूसरे के साथ सद्भावपूर्ण व्यवहार करें। हर एक के प्रति मन में सदैव प्रेम की ही भावना बनीं रहे, नफ़रत की नहीं। यदि हम किसी के लिए कुछ कर भी रहे हैं तब उसमें सेवा का भाव हो, एहसान का नहीं।

परमात्मा पर विश्वास की बात को और अधिक स्पष्ट करते हुए सत्गुरु माता जी ने कहा कि जब हम इस परम सत्ता को ब्रह्मज्ञान द्वारा जान लेते हैं तो फिर इस पर विश्वास करने से ही हमारी भक्ति सही अर्थों में और सुदृढ़ होती है। उसके उपरान्त फिर जीवन में घटित होने वाले विभिन्न प्रकार के उतार-चढावों के कारण हमारा मन विचलित नहीं होता। यह दृढ़ता हमें सत्संग, सेवा और सुमिरण के माध्यम से प्राप्त होती है।

इसके पूर्व सायं 5.00 बजे से चल रहे सत्संग समारोह में देश-विदेश से भाग ले रहे वक्ता, गीतकार एवं कवियों ने अपने अपने व्याख्यान, गीत एवं कविताओं के माध्यम से समागम के मुख्य विषय ‘विश्वास, भक्ति, आनंद’ पर रोशनी डाली।

इन्दिरा उद्यान जी भारत को अपना दूसरा घर मानते हैं

धर्म डेस्क, पंचकूला :

पद्मश्री अगुस इंदिरा उद्यान जी को अभी महामहिम राष्ट्रपति जी से पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। आज यहां सुरेंद्र राठी जी के निवास पर पहुंचे और उन्होंने बताया इंदिरा उद्यान जी गांधीजी पर पीएचडी की है। और इन्होंने समाज सेवा के काफी काम किए हैं इन सभी सोशल कार्य को देखते हुए हिंदुस्तान के राष्ट्रपति ने इनको पदम श्री अवार्ड से सम्मानित किया है इंदिरा उद्यान जी के इंडोनेशिया के बाली में चार आश्रम हैं जहां पर यह बच्चों को योग और संस्कृति शिक्षा देते हैं इनका कहना है कि भारत मेरा दूसरा घर है। और मैं हर साल हिंदुस्तान घूमने आता हूं और मुझे यहां ठीक कला और संस्कृति बहुत अच्छी लगती है यहां के लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं इंदिरा उद्यान जी का कहना है कि 2001 से इंडिया इंडोनेशिया संगम प्रोजेक्ट के तहत एक दूसरे देश की कला और संस्कृति को समझने के लिए कार्य कर रहे हैं उन्होंने आर्ट, योगा में कार्य किया है। इंदिरा उद्यान जी कॉलेज के दिनों से ही गांधी जी के विचारों से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने गांधीजी के ऊपर काफी कार्य किया और उनके विचारों को देश-विदेश में पहुंचाया।

Devotees Attribute to Guru Nanak’s Teachings in Letter and Spirit

‘Purnoor’ Koral, Chandigarh:

There is only one Gurdwara in Chandigarh where langar is not served but still there is uninterrupted service of langar. One has to wait for two months to offer langar service at Gurdwara Nanaksar located in Sector-28.

There are no Golaks. There is no need to ask, whoever has to do seva should come and do seva according to devotion.

Baba Gurdev Singh says that sangats are waiting for their turn to serve. In the Gurdwara, langar is served at all three times. People bring langar from their homes. If one wants to set up a langar, he has to wait for at least two months. Some serve in the morning, some in the afternoon and some at night. It is continuous recipe of Akhand Path all the time. Kirtan is performed every day from 7 am to 9 pm and from 5 pm to 9 pm. The Diwan prostrates on the day of the new moon every month.

All sorts of arrangements were made for the needy even during the Corona period.

Gurdwara Nanaksar was built on the day of Diwali. Baba Gurdev Singh, head of Nanaksar Gurdwara in Chandigarh, says that it has been more than 50 years since the construction of this Gurdwara. Spread over an area of ​​2.5 acres, the Gurdwara also has a library and offers free dental treatment.

The annual fair is held in March every year. This annual festival lasts for seven days. It attracts a large number of people from all over the world. During this time a huge bloody camp was set up.

Although many arrangements have been made as a precautionary measure due to Corona, the service continues.

What is left after the sangat’s langar is sent to PGI in addition to the hospitals in Sector-16 and 32, so that people can also take prasad there. This has been going on for years.

The headquarters is near Ludhiana

It is headquartered at Nanaksar Clare, near Ludhiana. Amritpan is done twice a year. Gurdwara Nanaksar has 30 to 35 persons including ragi pathis and sevadars. Apart from Chandigarh, Haryana, Dehradun and abroad, there are more than 100 Nanaksar shrines in USA, Canada, Australia, New Zealand and England.

आपातकाल के लोकतंत्र सेनानी हिंदू हिंदुस्तानी:सम्मान नहीं देना मोदी सरकार की ऐतिहासिक गलती रहेगी

 करणीदानसिंह राजपूत :

लोकतंत्र सेनानी हिंदू है हिंदुस्तानी है भारतीय हैं फिर नरेन्द्र मोदी और भाजपा सरकार इनका तिरस्कार करके बहुत बड़ी ऐतिहासिक और राजनैतिक गलती क्यों कर रही है?

हिंदुओं के उत्पीड़न को लेकर भाजपा संघ के लोगों द्वारा गांधी नेहरू परिवारों पर रोजाना लिखने की कोसने की भरमार  ग्रुप और फेसबुक सोशल मीडिया में की जाती है।

 जो गलती सैकड़ों सालों से चली जिनके लिए पूर्व सत्ताधारी पार्टी नेता और व्यक्तियों को कांग्रेस को कोसा जा रहा है वर्तमान में वही गलती नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार क्यों कर रही है? लोकतंत्र सेनानी हिंदू हिंदुस्तानी है।

 लोकतंत्र सेनानी और सभी के परिवार देश भक्ति में आगे रहे आज नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री काल में भाजपा के राज में  भयानक पीड़ाएं भोग रहे हैं।

 जब जरूरत थी आपातकाल का विरोध करने की जेलों में जाने की तब यही लोकतंत्र सेनानी हिंदू हिंदुस्तानी आगे आया था। आज इन लोकतंत्र सेनानी हिंदुओं को हिंदुओं के द्वारा ही क्यों तिरस्कृत किया जा रहा है।

  नरेंद्र मोदी सरकार देश की सबसे बड़ी पार्टी जिसका शासन है वह पार्टी और संघ के सर्वमान्य इनका तिरस्कार क्यों कर रहे हैं? जिन गलतियों के लिए गांधी जवाहरलाल नेहरू इंदिरा गांधी राजीव गांधी अब सोनिया गांधी राहुल गांधी को कोसा जा रहा है वही महान गलती भाजपा और संघ के लोग क्यों कर रहे हैं?

 नरेंद्र मोदी जी उनकी सरकार भाजपा की सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानियों का तिरस्कार करने की इस कुनीति पर गलती पर मौन क्यों हैं चुप्पी क्यों है? सोशल मीडिया और लोकतंत्र सेनानियों के ग्रुपों में लिखने से छुप क्यों रहे हैं?

कछ को छोड़ कर सभी पढते हैं लेकिन समर्थन करने से डरते हैं।

हिंदुओं के तिरस्कार पर पिछली कांग्रेसी सरकारों को उनके नेताओं को अभद्र भाषा में कोसा जाता है तो लोकतंत्र सेनानियों हिंदुस्तानियों को तिरस्कार करने वाले वर्तमान सत्ताधारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनकी सरकार और भाजपा को लिख कर और चुप रह कर क्यों बचाया जा रहा है? ये भी तो क्षमा के योग्य नहीं है।

लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान भारत सरकार की ओर से करके नरेन्द्र मोदी और भाजपा अपने भविष्य और इतिहास के लिए अपनी बड़ी गलती को शीघ्र ही सुधारे नहीं तो समय काल कभी क्षमा नहीं करता।

 यदि सत्ता के अभिमान में ऐसा नहीं किया गया तो मोदी राज की उपल्बधियों के साथ ये गलतियां भी लिखी जाएगी। यह भी लिखा जाएगा कि सत्ता होते बहुमत होते हुए नरेंद्र मोदी की सरकार ने भाजपा सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों को हिंदू हिंदुस्तानियों को देशभक्तों को संविधान रक्षकों को सम्मान तक नहीं दिया।०0०

सिद्धू ने केजरीवाल पर साधे निशाने

सोमवार को पंजाब के दौरे के दौरान, उन्होंने वादा किया था कि अगर आआपा सत्ता में आती है, तो उसकी सरकार राज्य की प्रत्येक महिला के खाते में 1,000 रुपये प्रति माह डालेगी और उन्होंने इसे ‘दुनिया का सबसे बड़ा महिला सशक्तीकरण’ कार्यक्रम करार दिया। इससे पहले वह हर घर के लिये 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली, 24 घंटे जलापूर्ति, सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और दवाओं का वादा कर चुके हैं। अमृतसर में सिद्धू ने युवाओं व महिलाओं समेत समाज के विभिन्न वर्गों से किए गए लंबे-चौड़े वादों को लेकर केजरीवाल को आड़े हाथों लिया।

‘पुरनूर’ कोरल, चंडीगढ़:

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने सोमवार को आम आदमी पार्टी के कन्वीनर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। सिद्धू ने लगातार ट्वीट कर केजरीवाल से उनके घोषणा पत्र के बारे में कई सवाल किए। सिद्धू ने केजरीवाल से पूछा कि अपने 2015 के घोषणापत्र में आपने दिल्ली में 8 लाख नई नौकरियों और 20 नए कॉलेजों का वादा किया था, नौकरियां और कॉलेज कहां हैं? आपकी असफल गारंटियों के विपरीत, पिछले 5 वर्षों में दिल्ली की बेरोजगारी दर लगभग 5 गुना बढ़ गई है।

शिक्षकों और नौकरियों पर सवाल उठाते हुए सिद्धू ने कहा कि 2015 में दिल्ली में शिक्षकों की 12515 रिक्तियां थीं, और 2021 में दिल्ली में शिक्षकों की ऐसी 19907 रिक्तियां हैं… और आप ज्यादातर रिक्त पदों को सिर्फ अतिथि व्याख्याताओं द्वारा भर रहे हैं। इसके बाद सिद्धू ने केजरीवाल को सलाह देते हुए कहा कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते केजरीवाल जी। आप महिला सशक्तिकरण, नौकरी और शिक्षकों की बात करते हैं लेकिन आपके मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री नहीं है। सिद्धू ने सवाल किया कि शीला दीक्षित जी द्वारा छोड़े गए राजस्व अधिशेष के बावजूद दिल्ली में कितनी महिलाओं को एक हजार रुपये मिलते हैं। 

दो दिन पहले शनिवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोहाली में कहा था कि एक तरफ पंजाब सरकार दावा करती है कि वह अध्यापकों को नौकरियां दे रहे हैं। 36 हजार कर्मचारियों को पक्का कर दिया है लेकिन बेरोजगार अध्यापक छह महीने पानी की टंकियों पर चढ़े हैं। उन्होंने कहा था कि पंजाब सरकार झूठ बोलने की आदी है। इसका प्रमाण खुद भुक्तभोगी लोग हैं। केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी 15000 है। अगर कोई ईंट उठाने का काम भी करता तो उसको भी 15000 मिलते हैं, जबकि पंजाब में पढ़े-लिखे लोगों के साथ शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के अध्यापकों को ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजा जा रहा है। जबकि पंजाब सरकार अपने टीचरों को पानी की टंकी पर भेज रही हैं।  

त्रिपुरा में भाजपा, बाकी लुप्त

भाजपा ने अंबासा नगर परिषद की 12 सीटें हासिल कीं, जबकि टीएमसी और सीपीआई-एम ने यहां एक-एक सीट जीती और दूसरी एक निर्दलीय उम्मीदवार के पास गई। भाजपा ने कैलाशहर नगर परिषद की 16 सीटों पर भी जीत हासिल की। यहां माकपा को एक सीट मिली। पानीसागर नगर पंचायत में भाजपा 12 सीटों पर विजयी हुई और सीपीआई (एम) ने एक पर जीत हासिल की। भाजपा ने खोवाई नगर परिषद के सात, धर्मनगर नगर पालिका के एक, मेलाघर नगर परिषद के दो और जिरानिया के 10 वार्डों में निर्विरोध जीत हासिल की थी। भाजपा ने बिना किसी चुनाव के रानीबाजार, विशाल गंज, मोहनपुर, कमालपुर, उदयपुर और शांतिबाजार के 92 वार्ड के नगर निकायों को जीता। शानदार जीत के साथ भाजपा के पास राज्य के शहरी निकायों के 324 वार्डों में से 329 सीटों पर जीत हासिल की। 

सारिका तिवारी, चंडीगढ़/नयी दिल्ली:

त्रिपुरा निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 334 में से 239 सीटों पर जीत दर्ज की है। अगरतला महानगर पालिका में पार्टी सभी 51 सीटों पर विजयी रही। भाजपा के 112 प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए। पार्टी ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसे असाधारण माना जा सकता है। चुनाव से पहले प्रदेश में बनाए गए राजनीतिक माहौल का चुनाव परिणाम पर असर न के बराबर रहा। परिणाम से साफ है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस ने पश्चिम बंगाल से नेताओं को भेज त्रिपुरा में जिस तरह का राजनीतिक माहौल को खड़ा करने का प्रयास किया, उसे स्थानीय लोगों में स्वीकृति नहीं मिली पाई। ऐसे में परिणाम के बाद अपने सदस्यों और नेताओं को बधाई देते हुए अभिषेक बनर्जी द्वारा जो कहा गया, वह आश्चर्यचकित नहीं करता।

पश्चिम बंगाल में भारी जीत के बाद पिछले कुछ महीनों से उत्तर-पूर्वी राज्यों में तृणमूल कॉन्ग्रेस की विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना की काफी चर्चा रही है। इस प्रक्रिया में दल को त्रिपुरा में होने वाले निकाय चुनावों के रूप में पहला पड़ाव नजर आया था। यही कारण था कि दल के नेताओं ने राज्य के कई दौरे किए और काफी हद तक ऐसा माहौल बनाने की कोशिश जिसमें तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा वहाँ उलटफेर की संभावना दिखाई दे। मीडिया में इस बात की चर्चा की गई कि भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ दी है। बांग्लादेश में हिंदुओं के विरुद्ध हुई हिंसा के विरोध में हिंदू संगठनों के प्रदर्शन को लेकर अफवाहें फैलाई गई। अंतिम दॉंव के रूप में तृणमूल कॉन्ग्रेस चुनावों को स्थगित करने के उद्देश्य से सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गई, पर चुनाव परिणाम आने के बाद फिलहाल राजनीतिक स्थिति स्पष्ट हो गई है।

ऐसे एकतरफा चुनाव परिणाम के क्या कारण हो सकते हैं? यह प्रश्न इसलिए और प्रासंगिक हो जाता है क्योंकि अगले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में वापस न आने के दावे किए जाने लगे थे। राज्य के मुख्यमंत्री बिप्लब देब शुरू से ही लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम के निशाने पर रहे हैं। शुरुआती दिनों में उनकी हर बात और हर बयान पर न केवल बहस का मुद्दा बनाया गया, बल्कि उन बयानों पर कई बार अफवाह और भ्रम भी फैलाया गया। समस्या यह थी कि इस इकोसिस्टम के लोगों को बिप्लब देब की राजनीति की समझ नहीं थी, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें अचानक त्रिपुरा की राजनीति में उतार दिया था। राज्य की उनकी समझ और लोगों के साथ उनके समीकरण की समझ त्रिपुरा के बाहर बैठे लोगों को नहीं थी।

डेमोग्राफी में बदलाव के विषय पर उत्तर-पूर्वी राज्यों में असम की तरह ही त्रिपुरा का भी एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य रहा है। लंबे समय तक चलने वाली वाम मोर्चे की सरकार ने त्रिपुरा को जिस स्तर का शासन और प्रशासन दिया उससे राज्य की जनता परेशान तो थी, लेकिन पश्चिम बंगाल की तरह उसके पास विकल्प दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के रूप में उसे जब विकल्प मिला तो जनता को वामपंथियों से छुटकारा मिला और वामपंथियों के शासन से तंग आ चुकी जनता को एक युवा मुख्यमंत्री में नई राजनीति की आशा दिखी। यही कारण है कि वर्तमान मुख्यमंत्री काफी लोकप्रिय हैं और जनता उन्हें मौके देने से पीछे नहीं हटना चाहती।

इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि वर्षों तक सत्तासीन रहे वामपंथियों के पास सरकारी योजनाओं की डिलीवरी की जो प्रशासनिक मशीनरी थी, उसे पूरी तरह से जंग लग गया था। स्थानीय लोगों का ऐसा मानना है कि वर्तमान सरकार आने के बाद केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाओं का लाभ काफी हद तक जनता तक पहुँचता रहा है। त्रिपुरा जैसे छोटे राज्यों में यह सुनिश्चित करना अपने आप में बड़ा काम माना जाता है और वर्तमान मुख्यमंत्री को इस बात की समझ है कि छोटे-छोटे प्रयासों से यह काम किया जा सकता है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में पहले से चल रहे तरीकों में बदलाव लाने का प्रयास किया गया है और उसका असर भी दिखाई देता है। राज्य के कुछ कृषि उत्पादों के लिए नए बाज़ार खोजने की कोशिशों की पहचान स्थानीय लोगों द्वारा की गई है।

वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा उत्तर-पूर्वी राज्यों में विकास प्राथमिकता देने का असर बाकी राज्यों की तरह त्रिपुरा में भी दिखाई दे रहा है। राज्य के साथ देश के अन्य जगहों की कनेक्टिविटी सुलभ होने के साथ ही स्थानीय उत्पादों के लिए नए बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी। वर्तमान मुख्यमंत्री प्रयास करते हुए नज़र आते हैं और जनता के साथ उनके संबंध पहले से बढ़े हैं। लोगों की बात सुनने के लिए तैयार मुख्यमंत्री की उनकी छवि उनके राजनीतिक सफर का भविष्य उज्ज्वल करेगी। निकाय चुनावों के परिणाम से साफ़ है कि एक दल के तौर पर भाजपा राज्य में अपनी जड़ें जमा चुकी है और असम की तरह ही त्रिपुरा में भी लंबे समय तक सत्ता में रहने का प्रयास उत्तर-पूर्वी राज्यों को लेकर दल की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

PROTEST HELD BY BANK OFFICERS TO OPPOSE BANK PRIVATISATION

Chandigarh :

The Tri City- Unit of the All India Bank Officers’ Confederation (AIBOC), the apex organisation of bank officers in the country, hold peaceful Protest  here today at Press Chownk lights , Chandigarh to mobilise public opinion against bank privatization on the eve of the winter session of parliament. The protest was orgqanised under the campaign launched by AIBOC “Bank Bachao, Desh Bachao” which will be culminating at Delhi on November 30th, 2021. The Protest  was attended by more than 200 Bank Officers of different Public Sector Banks. it is widely anticipated that the Government will be introducing amendments to the Banking Companies (Acquisition and Transfer of Undertakings) Acts, 1970 and 1980 and the Banking Regulation Act, 1949 in order to pave the way for bank privatisation as announced by the Union Finance Minister in the Union Budget 2021.
The Protest  was addressed by President of SBI Officers’ Association Sh Sanjay Sharma , President   Sh. Ashok Goyal  and Sh. TS Saggu state Secretary of AIBOC tricity unit.

Sharma told that the Individual bank deposits in India totaled around Rs. 87.6 lakh crore in March 2021. Of this, Rs. 60.7 lakh crore, i.e. around 70% were under the custody of the Public Sector Banks (PSBs). Clearly, Indian depositors prefer the safety and security of the publicly owned banks. Bank privatisation would remove the sovereign guarantee behind the banks and make the deposits less safe and secure. The FRDI Bill which was tabled by the Union government in 2017, but later withdrawn because of public backlash, was also aimed at removing the sovereign guarantee behind the PSBs. He said that over 60% of the total credit to the priority sector; i.e. small and marginal farmers, non-corporate individual farmers, micro-enterprises, self-help groups and weaker sections like the SCs, STs and minorities; is provided by the 12 PSBs and the 43 Regional Rural Banks sponsored by them. Private and foreign banks have been meeting shortfalls in their 40% priority sector lending target in net bank credit by buying Priority Sector Lending Certificates from the PSBs and RRBs. Privatisation of PSBs would adversely impact credit flow to the priority sector.
The Secretary of AIBOC Sh. TS Saggu also told said that less than 3% of the 43.8 crore PM Jan Dhan Yojana accounts have been opened by the private sector banks till date. 31% of all PSB branches are in the rural areas, while rural bank branches account for only around 20% of private sector branches. This is because private sector banks cater more to the affluent sections and disproportionately concentrate their resources in the metropolitan areas because of their narrow focus on profitability. Privatisation of PSBs will adversely impact financial inclusion.

President Sh. Ashok Goyal said that the losses made by the PSBs are mainly contributed by the large corporate borrowers. Over 13% of all advances made by the PSBs to large borrowers have turned into NPAs. Moreover, cases of bank frauds have increased very sharply in the recent years, with over Rs. 4 lakh crore worth fraud cases detected between 2017-18 and 2020-21.The central government has failed to bring the perpetrators of the big-ticket loan frauds to book, like Vijaya Mallya, Nirav Modi, Mehul Choksi, Jatin Mehta, etc.

Privatisation of the PSBs would imply selling the banks to private corporates, many of whom have defaulted on loans from the PSBs. The growing NPAs and frauds in the private sector banks show that these occur independent of bank ownership. Far from offering any solution to the NPA problem, PSB privatisation will only reward crony capitalism. 

The Bank Officers’ leaders present appealed to the people of India to rise up against the government’s retrograde policy of selling out our public sector enterprises, which form the backbone of our national economy. We appeal to the millions of small depositors of the PSBs, the farmers, MSMEs, Self-Help Groups and loanees from the weaker sections of society, to rise up against bank privatisation, which will harm their interests. We appeal to all civil society organisations, farmers’ and workers’ unions, political parties and other stakeholders of our democracy to join and support our movement in defense of the PSBs, and public sector enterprises in general. Together, we shall defeat the policies of privatisation.

Harrmeet Singh, Harvinder singh , Satish Rana, Sachin and others were also present on the occasion.

होम लोन में दो ईएमआई की छूट देता है बैंक ऑफ महाराष्ट्र : हेमन्त टम्टा

बैंक ऑफ महाराष्ट्र के कार्यपालक निदेशक ने रिटेल एवं एमएसएमई एक्स्पो में 152 करोड़  के लोन बांटे

चण्डीगढ़ :

सैक्टर 43 स्थित होटल में बैंक ऑफ महाराष्ट्र आंचलिक कार्यालय, चण्डीगढ़ ने रिटेल / एमएसएमई एक्सपो का आयोजन किया जिसके तहत ट्राईसिटी की सभी शाखाओं के साथ व अंचल की सभी शाखाओं में शाखा स्तर पर  रिटेल /एमएसएमई एक्सपो  का आयोजन हुआ।

एक्सपो का शुभारम्भ बैंक ऑफ महाराष्ट्र के कार्यपालक निदेशक हेमन्त टम्टा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस आयोजन में बैंक ऑफ महाराष्ट्र  के कई अप्रूवड बिल्डर्स, कार डीलर्स, बिजनस चैनल पार्टनर्स, डीएसए व एज्यूकेशन लॉन काउसलंर्स के साथ स्थानीय अंचल प्रबंधक सुशांत कुमार गुप्ता, उप अंचल प्रबंधक संजय कुमार गुप्ता, सीपीसी हेडस अभिषेक बिंदल, महीलाल मीना के साथ ट्राईसिटी के शाखा प्रबंधक व बैंक के भावी ग्राहकों ने हिस्सा लिया।

हेमन्त कुमार  टम्टा ने सभी उपस्थित  ग्राहकों को मुलाक़ात कर स्वीकृति पत्र प्रदान किये। एक्सपो में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, चंडीगढ़ अंचल ने रिटेल में कुल 75 करोड़ ( 120 खाते )  व एमएसएमई में 77 करोड़ (92 खाते ) की राशि  का ऋण स्वीकृत  कर कुल 152 करोड़ का व्यवसाय दर्ज किया।

 इसी  दौरान हेमंत कुमार टम्टा ने मीडिया से रुबरु होते हुये बतलाया कि बैंक के  सीएमडी ए.एस. राजीव का लक्ष्य मार्च  2024 तक बैंक  का कुल व्यवसाय रु. 5,00,000/-करोड़ (पाँच लाख करोड़) तक हासिल करना हैं।टम्टा ने भिन्न–भिन्न जमा एवं अग्रिम योजनाओं  के बारे में विस्तृत  रूप से चर्चा की। उन्होंने बताया कि उनका बैंक समय पर किश्त चुकाने वालों को होम लोन में दो ईएमआई की छूट देता है जिस कारण बड़ी संख्या में आम जन बैंक ऑफ महाराष्ट्र की तरफ आकृष्ट हो रहें हैं।

उपस्थित ग्राहकों  ने बैंक द्वारा दी जा रही सेवाओं  की भूरि–भूरि  प्रंशसा की। कार्यक्रम के अंत में  धन्यवाद  संजय कुमार गुप्ता ने किया।

“मेरा चंडीगढ़ मेरा सुझाव” अभियान ने पकड़ी गति, घरों और मार्केट्स में जाकर लोगों से सुझाव ले रहे भाजपा कार्यकर्ता

चंडीगढ़:

 नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। पार्टी के हर कार्यकर्ता नगर निगम चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में जी-जान से जुटे हैं। भाजपा की ओर से शुरू किए अभियान “मेरा चंडीगढ़ मेरा सुझाव” को भी लोगों का शानदार समर्थन मिल रही है। भाजपा के कार्यकर्ता इस अभियान को सफल बनाने के लिए घरों और मार्केट्स में जा-जाकर लोगों से सुझाव मांग रहे हैं। लोग भी इस अभियान को अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं। भाजपा की ओर से शुरू किए गए अभियान के तहत शहर में अलग-अलग जगहों पर 200 सुझाव पेटियां लगाई गई हैं जिनमें रोजाना हजारों लोग अपने सुझाव डाल रहे हैं। अभियान की इस शानदार प्रतिक्रिया को देखते हुए पार्टी की ओर से और भी सुझाव पेटियां लगाई जाएंगी।  

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले हफ्ते भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की ओर से इस अभियान की शुरुआत की गई थी। एक हफ्ते के अंदर ही हजारों लोगों के सुझाव मिल चुके हैं। इन्हीं सुझावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा आगामी नगर निगम चुनाव में अपना घोषणा पत्र तैयार करेगी। जैन ने कहा कि पिछली बार की तरह इस बार भी भाजपा को लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है और पार्टी सभी 35 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टियां इस समय बिखरी नजर आ रही हैं। कांग्रेस पार्टी में आपसी अंतर्कलह में उलझी हुई है जबकि आम आदमी पार्टी लोगों का ध्यान नहीं खींच पा रही है क्योंकि पार्टी में संगठन नाम की कोई चीज़ ही नहीं है। वहीं, बाकी अन्य पार्टियों का शहर में कोई अस्तित्व ही नहीं है। जैन ने कहा कि लोग इस बार भी भाजपा पर ही भरोसा जता रहे हैं।