Tuesday, March 3

पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। शास्त्र कहते हैं कि तिथि के पठन और श्रवण से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। तिथि का क्या महत्व है और किस तिथि में कौन से कार्य करान चाहिए या नहीं यह जानने से लाभ मिलता ह। पंचांग मुख्यतः पाँच भागों से बना है। ये पांच भाग हैं: तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण। यहां दैनिक पंचांग में आपको शुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू माह और पहलू आदि के बारे में जानकारी मिलती है।

नोटः आज गण गौरी तृतीया व्रत। गणगौरी तृतीया त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती की भक्ति में मनाया जाता है। इस दिन भक्त देवी पार्वती की कृपा पाने के लिए उपवास रखते हैं। 2022 में, गणगौरी तृतीया महोत्सव 15 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह व्रत केवल परिवार की महिलाएं ही करती हैं। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार इसे गौरी उत्सव, गौरी तृतीया, ईश्वर गौरी और दोलोत्सवम के नाम से भी जाना जाता है। तो आइये जानते है, गणगौरी तृतीया उत्सव क्या है? विस्तार में।

विक्रमी संवत्ः 2079, 

शक संवत्ः 1944, 

मासः चैत्ऱ, 

पक्षः शुक्ल

तिथिः तृतीया दोपहर 1.56 तक है, 

वारः सोमवार।

विशेषः आज पूर्व दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर सोमवार को दर्पण देखकर, दही,शंख, मोती, चावल, दूध का दान देकर यात्रा करें।

नक्षत्रः भरणी दोपहरः 02.28 तक है, 

योगः विष्कुम्भक प्रातः काल 07.42 तक, 

करणः गर, 

सूर्य राशिः मीन,  चंद्र राशिः मेष, 

राहु कालः प्रातः 7.30 से प्रातः 9.00 बजे तक पक्ष, 

सूर्योदयः 06.12,  सूर्यास्तः 06.37 बजे।