पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। शास्त्र कहते हैं कि तिथि के पठन और श्रवण से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। तिथि का क्या महत्व है और किस तिथि में कौन से कार्य करान चाहिए या नहीं यह जानने से लाभ मिलता ह। पंचांग मुख्यतः पाँच भागों से बना है। ये पांच भाग हैं : तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण। यहां दैनिक पंचांग में आपको शुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू माह और पहलू आदि के बारे में जानकारी मिलती
डेमोक्रेटिक फ्रंट, आध्यात्मिक डेस्क – पंचांग, 06 अगस्त, 2026
नोट: कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी।
नोटः आज दक्षिण दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर गुरुवार को साबुत दही खाकर केसर युक्त पीला चन्दन मस्तक पर लगाएँ तथा उसी का दान किसी योग्य ब्राह्मण को देकर यात्रा करें।
विक्रम संवत्: 2083
शक संवत्: 1948
मासः श्रावण
पक्षः कृष्ण
तिथि: अष्टमी सायं 6.53 बजे तक
वार: गुरुवार
नक्षत्र: भरणी रात्रि 08.14 बजे तक
योग: दण्ड अपराह्न 03.01 बजे तक
करण: बालव
राहु काल: अपराह्न 02.07 बजे से 03.47 बजे तक
सूर्य राशि: कर्क, चन्द्र राशि: मेष
सूर्योदय: 05.49 प्रातः, सूर्यास्त: 07.04 सायं।

