हिसार/पवन सैनी
योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के ‘युज’ नामक शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है-जुडऩा या मिलना। शरीर, मन, बुद्धि व आत्मा का एक साथ मिलना ही योग कहलाता है। योग से न केवल शारीरिक व मानसिक विकास होता है अपितु, अध्यात्मिक रूप से भी विकास होकर व्यक्ति का सर्वांगिण विकास होता है। इसलिए हर व्यक्ति को एकाग्रता व निरंतरता के साथ अपने दैनिक-दिनचर्या में योग को अपनाना चाहिए। ये विचार चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कहे। वे बुधवार को 9वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण निदेशालय और योगा कल्ब के संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
मुख्यातिथि प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कहा कि अगर हमें जिंदगी में आगे बढऩा है तो अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करना होगा। योग सबसे बड़ी ताकत है, क्योंकि पूर्व काल में बीमारियों का इलाज करने के लिए चिकित्सालय जैसी सुविधाएं नहीं थी, उस दौरान योग ही सबसे बड़ा माध्यम था, जिससे हर बीमारी का इलाज संभव हो पाया। मुख्यातिथि ने आह्वान किया कि जिंदगी को आनंदित बनाने के लिए सकारात्मक सोच, एकाग्रता व निरंतरता के साथ दैनिक-दिनचर्या में योग जरूर करें। इसके अलावा मुख्यातिथि ने स्वामी विवेकानंद के प्रसंगों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर एकाग्रता के साथ योग अपनाने पर भी बल दिया।
योग अनुदेशक रोहताश व सुमन सहारण ने प्रतिभागियोंं को आयुष मंत्रालय के प्रोटोकॉल के अनुसार विभिन्न योग क्रियाओं तथा प्राणायाम का अभ्यास करवाया। सह-छात्र कल्याण निदेशक डॉ. संजय एलावादी ने भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योग को दिनचर्या में अपनाने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम की शुरुआत में सह-निदेशक छात्र कल्याण (खेल) डॉ. बलजीत गिरधर ने सभी का स्वागत किया, जबकि हकृवि योगा कल्ब के अध्यक्ष एवं मीडिया एडवाइजर डॉ. संदीप आर्य ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया।
इस अवसर पर मानव संसाधन प्रबंधन निदेशालय की निदेशक डॉ. मंजू मेहता, साई सेंटर के इंचार्ज हरभजन सिंह सहित खिलाड़ी व स्वयंसेवक भी उपस्थित रहे।
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