Monday, March 2

       डीपीएस, गोमती नगर, लखनऊ, स्कूल ने साइक-ईडी के नेशनल फाइनल में किया प्रवेश       डीपीएस, गोमती नगर, लखनऊ, स्कूल उन 12 स्कूलों में से एक है,…

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रघुनंदन पराशर, डेमोक्रेटिक फ्रंट, जैतो,19 नवम्बर : क्षेत्र की जानी-मानी शिक्षा संस्थान सरस्वती जीनियस स्कूल इकाई जैसे के प्रांगण में बच्चों के…

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुरू किया अच्छा भोजन देने का अभियानकई तरह के पैरामीटर्स को आधार बनाकर की गई है…

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सुशील पंडित, डेमोक्रेटिक फ्रंट, यमुनानगर :             इंडियन पब्लिक स्कूल जगाधरी के विज्ञान विद्यार्थियों ने प्रयोग व अनुसंधान के माध्यम से उत्तर…

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डेमोक्रेटिक फ्रंट संवाददाता, चण्डीगढ़, 17 नवंबर, 2022 :             भारतीय जीवन बीमा निगम, चण्डीगढ़ मंडल की ओर से स्कूली छात्र-छात्राओं के कल्याण…

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कोरल‘पुरनूर’, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़ : पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के उर्दू विभाग में शायर अल्लामा इकबाल व देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती विश्व उर्दू दिवस व राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाई गई। उर्दू विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में अल्लामा इकबाल और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जन्मदिन को अंतर्राष्ट्रीय उर्दू दिवस और राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर रेहाना परवीन ने की।गुल पेशी के साथ डॉ. ज़रीन, शमीम चौधरी और रिजवाना ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत इकबाल की कविता “सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा ” से हुई। तत्पश्चात विभाग के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने अल्लामा इकबाल एवं मौलाना अबुल कलाम आजाद की कृतियों के संबंध में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये, जिसमें विभाग के शोधार्थी मुहम्मद सुल्तान ने इकबाल के काव्य विचारों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। विभाग की शोधार्थी शमीम चौधरी ने अबुल कलाम आजाद के जीवन और सेवाओं पर अपना पेपर प्रस्तुत किया। इसके अलावा मनीज़ पनेसर, बशीर, इंदरजीत कौर, अरविन्दर कौर, राम व हरमंदर कौर ने इकबाल की कविताएं सुनाकर दर्शकों का मनोरंजन किया।इस बीच फारसी विभाग के शिक्षक डॉ. जुल्फिकार अली ने इकबाल की फ़ारसी शायरी पर बातचीत की । प्रोफेसर रेहाना परवीन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कविता पाठ और उसकी बारीकियां समझाईं और छात्रों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इस कार्यक्रम में मंच की जिम्मेदारी विभाग के शोधार्थी मुहम्मद शरीफ ने निभाई थी। बैठक के अंत में विभाग के अध्यक्ष डॉ. अली अब्बास ने अपने समापन भाषण में मौलाना अबुल कलाम आजाद पर तर्कपूर्ण चर्चा की,जिसमें उन्होंने मौलाना के पत्रों के संग्रह “गुबार ए खातिर” पर चर्चा की और उनकी दूरदर्शिता और समझ के साथ-साथ उनकी देशभक्ति और हिंद-पाक बँटवारे के दूरगामी आशंकाओं को समझाया। डॉ. अब्बास ने आगे कहा कि मौलाना आजाद जहां अंग्रेजों के खिलाफ थे, वहीं वे राष्ट्रीय सद्भाव और हिंदू-मुस्लिम एकता के भी प्रबल समर्थक थे। उन्होंने अपने समाचार पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय और देशभक्ति की भावनाओं को जगाने का प्रयास किया। मौलाना अबुल कलाम स्वतंत्र राजनीतिक मोर्चे में भी सक्रिय थे। उन्होंने ‘असहयोग आंदोलन’, ‘भारत छोड़ो’ और ‘खिलाफह आंदोलन’ में भी भाग लिया। महात्मा गांधी के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध थे । वे गांधीजी के अहिंसा के रास्ते से बहुत प्रभावित थे। इन विचारों को व्यक्त करते हुए डॉ. अली ने आगे कहा कि अबुल कलाम आजाद को गांधीजी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा था। उन्होंने गांधी के विचारों को बढ़ावा देने के लिए पूरे देश का दौरा भी किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उर्दू विभाग व अन्य विभागों के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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शिक्षा क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का बढ़ता महत्व सुशील पंडित, डेमोक्रेटिक फ्रंट, यमुनानगर : डीएवी कॉलेज के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम सेल की…

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