चौटाला के रिहा होने से किसान राजनीति में आएगी एक नयी हलचल

पंचकूला में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दादा ओम प्रकाश चौटाला की रिहाई पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें सूचना मिली है कि तिहाड़ जेल प्रशासन ने ईमेल की है, जिसमें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को रिहा करने की बात की गई है। दुष्‍यंत ने कहा कि एक साजिश के तहत हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला व डॉ अजय सिंह चौटाला को सजा सुनाई गई थी। अब उनकी सजा पूरी होने के बाद उनके रिहा किए जाने के फैसले से वे बेहद खुश हैं।

चंडीगढ़(ब्यूरो):

ओपी चौटाला के वकील अम‍ित साहनी ने बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा चौटाला जी की स्पेशल रिमीशन मंजूर कर ली गई है. इस बारे में तिहाड़ जेल से उन्हें एक ऑफिशयल मेल प्राप्त हुआ है. उनकी रिहाई स्वीकार कर ली जाएगी. उन्होंने बताया कि इससे पहले हमने उच्च न्यायालय में उनकी रिहाई के लिए कई याचिकाएं डाली थी. अब दिल्ली सरकार द्वारा उनकी स्पेशल रिमीशन मंजूर कर ली है.

बता दें कि रोहिणी स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार ने 308 पेज के अपने फैसले में इंडियन नेशनल लोकदल के प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला को घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता करार दिया था. वर्ष 1999-2000 के दौरान 3206 जूनियर बेसिक ट्रेंड (जेबीटी) शिक्षकों की भर्ती में घोटाले के इस मामले में पूर्व आईएएस संजीव कुमार, पूर्व आईएएस विद्याधर, मौजूदा विधायक शेर सिंह बडशामी और 16 महिला अधिकारियों को भी दोषी करार दिया था. संजीव कुमार ने ही सबसे पहले इस घोटाले का खुलासा किया था, लेकिन सीबीआई जांच में वह खुद भी इसमें लिप्त पाए गए.

विद्याधर तब चौटाला के ओएसडी थे, जबकि बडशामी उनके राजनीतिक सलाहकार थे. संजीव कुमार ने वर्ष 2003 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी. सीबीआई ने वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेबीटी मामले की जांच शुरू की थी. जांच एजेंसी ने 2008 में कुल 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था. सीबीआई अदालत ने जुलाई 2010 में आरोप तय किए थे. मामले की सुनवाई करीब ढाई साल पहले सीबीआई अदालत में शुरू हुई थी.

चौधरी ओमप्रकाश चौटाला पांच बार (1970, 1990, 1993, 1996 और 2000) हरियाणा विधान सभा के सदस्य रह चुके हैं. वर्ष 1989 में ओम प्रकाश चौटाला पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद वह 1990, 1991 और 1999 में भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में विजयी हुए. 1999 में ओम प्रकाश चौटाला नरवाना और रोरी दोनों निर्वाचन क्षेत्र से जीते थे. इन दोनों विकल्पों में से ओम प्रकाश चौटाला ने नरवाना निर्वाचन क्षेत्र को अपने लिए बेहतर समझा.

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला का जन्म 1 जनवरी, 1935 को सिरसा, हरियाणा के एक छोटे से गांव में हुआ था. ओम प्रकाश चौटाला की शिक्षा-दीक्षा उनके गृहनगर में ही हुई थी. पूर्व उप मुख्यमंत्री चौधरी देवी लाल के पुत्र, ओम प्रकाश चौटाला युवावस्था से ही राजनीति में रुचि रखने लगे थे.

ओमप्रकाश चौटाला की रिहाई से उनके बड़ेे बेटे अजय सिंह चौटाला और पोते दुष्‍यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी (JJP) और इनेलो (INLD) के बीच सियासी टकराव का नया रूप देखने को मिल सकता है। जजपा राज्‍य में भाजपा के साथ सत्‍ता में साझीदार है और इनेलाे व भाजपा का पहले गठबंधन रह चुका है।  

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की सजा पूरी होने की खबर बुधवार को आई तो इनेलो के नेताओं और कार्यकर्ता उत्‍साह से भर गए। ओमप्रकाश चौटाला फिलहाल पैरोल पर तिहाड़ जेल से बाहर से हैं। तिहाड़ जेल के नो‍टिफिकेशन के अनुसार, चौटाला के पैरोल से जेल में सरेंडर करने के बाद रिहा कर दिया जाएगा।

जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले में सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार ने 16 जनवरी को 2013 ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला समेत 55 लोगों को आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया था। फैसला आने के तुरंत बाद चौटाला समेत सभी दोषियों को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।

इससे पहले सीबीआइ और बचाव पक्ष के वकीलों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने 17 दिसंबर 2012 को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद स्पेशल जज विनोद कुमार ने 16 जनवरी 2013 को 55 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसमें ओम प्रकाश चौटाला, अजय चौटाला के अलावा तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा विभाग के निदेशक आइएएस संजीव कुमार, चौटाला के पूर्व विशेष अधिकारी विद्याधर और राजनीतिक सलाहकार तत्कालीन विधायक शेर सिंह बड़शामी भी शामिल थे। मामले में कुल 62 आरोपियों में 6 की मौत हो गई थी और एक को बरी कर दिया गया था।

जल निकासी व्यवस्था को किया जाए सुदृढ, बरसात में न बनें जल भराव की स्थिति : उपायुक्त अनीश यादव

-जल निकासी प्रबंधों को लेकर उपायुक्त ने किया शहर का दौरा, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश

सतीश बंसल सिरसा, 23 जून।

उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि अधिकारी जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ बनाएं, ताकि बरसाती पानी की जल्द से जल्द निकासी सुनिश्चित हो सके और जल भराव की स्थिति से बचा जा सके। नालों व सीवरों की सफाई करवाई जाए।
उपायुक्त बुधवार को जल निकासी प्रबंधों को लेकर शहर के विभिन्न स्थानों का दौरा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल निकासी व्यवस्था कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और प्राथमिकता के आधार पर गंभीरता से समयावधि में पूरा किया जाए। इस दौरान उनके साथ एसडीएम जयवीर यादव, नगर परिषद कार्यकारी अभियंता अजय पंघाल, एडीओ जन स्वास्थ्य, कार्यकारी अभियंता आर.के शर्मा, कार्यकारी अभियंता पीडब्ल्यूडी बीएंड आर के.सी कंबोज, जनस्वास्थ्य एडीओ अजय ढाका, जेई सुमित व दिव्या सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
उपायुक्त ने अपने दौरे में सबसे पहले खैरमपुर हिसार रोड़ के नाले का निरीक्षण कर जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि नाले की सफाई व्यवस्था दुरूस्त की जाए, ताकि पानी निकासी में कोई परेशानी न आए। इसी प्रकार उन्होंने नटार व केलनियां एसटीपी सहित विभिन्न जल निकासी साइटों का दौरा कर संबंधित अधिकारियों को जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ करने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने केलनियां सीवर ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) का निरीक्षण करते हुए एसटीपी के बारे में पूर्ण जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवयक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि वे प्लांट में सभी आवश्यक प्रबंधों को दुरूस्त रखा जाए।
उपायुक्त ने कहा कि शहर में जल भराव की स्थिति न बनें और पानी की निकासी जल्द से जल्द हो सके इसके लिए संबंधित अधिकारियों को गंभीरता से कार्य करने बारे दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से बरसाती पानी की जल्द से जल्द निकासी को लेकर व्यवस्था को सुदृढ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में जल निकासी को लेकर 28 करोड़ के प्रोजेक्ट की भी सरकार की ओर से मूंजरी मिल चुकी है। इस प्रोजैक्ट के पूरा होने से जल भराव की समस्या का स्थाई समाधान होगा।

खेल विभाग द्वारा अंतर्राष्टï्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर साइलिक रैली व पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन

– अंतर्राष्टï्रीय हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया के पिता महेंद्र सिंह पूनिया व माता लीलावती ने साइलिक रैली को दिखाई हरी झंडी
सतीश बंसल सिरसा, 23 जून।

जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग द्वारा अंतर्राष्टï्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर साइकिल रैली व पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंतर्राष्टï्रीय हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया के पिता महेंद्र सिंह पूनिया ने साइलिक रैली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर सविता पूनिया की माता लीलावती भी मौजूद थी। जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी लाजवंती ने अंतर्राष्टï्रीय हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया के पिता महेंद्र सिंह पूनिया व उनकी माता लीलावती को पौधा भी भेंट किया।
अंतर्राष्टï्रीय हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया के पिता महेंद्र सिंह पूनिया ने कार्यक्रम में उपस्थित खिलाडिय़ों को सविता पूनिया के संघर्ष व मेहनत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जिला स्तर से लेकर टोक्यों ओलंपिक तक के सफर के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि लग्न व मेहनत के बल पर कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। खेल सभी के लिए जरूरी है, स्वस्थ शरीर और दिमाग को विकसित करने के लिए खेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी लाजवंती ने बताया कि वर्तमान समय में खेल क्षेत्र में अपार संभावनाएं है।  बड़े गौरव की बात है कि जिला सिरसा के खिलाडिय़ों ने अंतर्राष्टï्रीय स्तर पर देश, प्रदेश व जिला का नाम चमकाया है। उन्होंने खिलाडिय़ों से आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ खेलों में अपनी भागीदारी बढ़ाते हुए अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्टï्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर जिला के पांच स्टेडियमों व आठ राजीव गांधी खेल परिसरों में लगभग 550 पौधे रोपित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ पर्यावरण को शुद्ध बनाते हैं, स्वच्छ ऑक्सीजन से प्रदूषण स्तर में कमी आती है। खेल परिसरों में पौधारोपण से खिलाडिय़ों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और खेल अभ्यास में और अधिक मन लगेगा। उन्होंने बताया कि शहीद भगत सिंह स्टेडियम में चियर फॉर इंडिया टोक्यो 2020 नाम से सेल्फी प्वाइंट भी स्थापित किया गया है।
इस अवसर पर उपाधीक्षक हरि राम, लॉग टेनिस कोच रेशम सिंह, जुडो कोच सीमा व अर्चना, क्रिकेट कोच शंकर, वॉलीबॉल कोच रणजीत सिंह, कुश्ती कोच लखविंद्र सिंह, तीरंदाजी कोच कर्ण सहित अन्य  मौजूद थे।

“Empathy not Sympathy” Towards Disable Friendly Chandigarh at PU

Chandigarh June 23, 2021

The Department of Community Education and Disability Studies of Panjab University  with Yuvsatta (Youth for Peace)-an NGO, organized a webinar  today on the theme of “Empathy not Sympathy” with focus on promoting disable friendly Chandigarh.

Sharing about the initiative Dr. Dazy Zarabi, said that the objective of the Webinar was on empowering marginalized disabled students. Recently their Department attached their 25 B.Ed students with 49 diasbled students of Govt. Model Sr. Sec. School, Dhanas, whom the Panjab University students will be mentoring and guiding to come out of Covid pandemic crisis and work for betterment of lives.

The programme began by sharing issues by differently abled students and their teachers, facilitated by Mrs. Seema, Principal of Govt. Model Sr. Sec. School, Dhanas, Chandigarh. The students said because of their invisible disability i.e in the form of Learning Disability, mild intellectual disability and autism spectrum disorder they suffer more as compared to students with physical, mild visual and other kinds of disabilities.

Sh. Sameer Garg, CEO of BillionAbles in his deliberations said that Sensitization about accessibility and inclusion for all should be a compulsory part of curriculum at primary and higher education so that it get inculcated in the mindset and universal access is provided by and for every one while planning any or all infrastructure, services and products.  It should be planned and made available as free as the oxygen we breathe and without which one cannot line.

Sh. Anil Mudgal, Secretary, Arushi, Bhopal, Madhya Pradesh stressed that being independent and with dignity is a basic right which should be provided automatically and not when demanded.  A society is truly inclusive and everyone can be a part of everything and anything.

Mrs. Abha Negi, Chairperson, Global Forum for empowerment, New Delhi in her concluding remark said that for any society to evolve into an inclusive society that embraces diversity the basic tenet is empathy where it invites all to participate as equals neither patronize nor leave persons with disabilities to fend. When the society as a whole shows empathy it works towards making things happen while taking note of diversity.

 Pramod Sharma, Coordinator of Yuvsatta-NGO added that the system should be oriented to mass understanding and finding a collective solution with utmost responsiveness. NGO’s and governments should play the role of facilitator. Each one of us has to be responsive and take this mission forward.

The over 100 participants included students of Department of Community Education and Disability Studies, Panjab University, teachers, counselors and students of GMSSS, Dhanas,  St. Josephs Sr. Secondary School, led by their Principal Mrs. Monica Chawala and the volunteers of Yuvsatta-NGO

Police Files, Chandigarh 23 June

‘Purnoor’ Korel, CHANDGARH – 23.06.2021

Action against illicit liquor

Chandigarh Police arrested Pankaj Kumar R/o # 1957, Mauli Jagran, Chandigarh and recovered 122 quarters of country made liquor from his possession near Kabari Market, Makhan Majra, Chandigarh on 22.06.2021. A case FIR No. 72, U/S 61-1-14 Excise Act has been registered in PS-Mauli Jagran, Chandigarh. Later, he bailed out. Investigation of the case is in progress.

MV Theft

          Hemant Rana R/o # 2294/A, Sector-23/C, Chandigarh reported that unknown person stole away complainant’s Activa Scooter No. CH-03Y-1486 parked near ICIC Bank, Sector-9, Chandigarh on 21.06.2021. A case FIR No. 49, U/S 379 IPC has been registered in PS-03, Chandigarh. Investigation of the case is in progress. 

Sanjay Kumar R/o # 3325, Sector-27, Chandigarh reported that unknown person stole away complainant’s car No. PB-11CM-3528 parked near his house on the night intervening 08/09-06-2021. A case FIR No. 141, U/S 379 IPC has been registered in PS-26, Chandigarh. Investigation of the case is in progress. 

Vikram Singh R/o # 178/1, Village-Palsora, Chandigarh reported that unknown person stole away complainant’s Splendor Motor Cycle No. CH-01AK-0656 parked near his house on 22-06-2021. A case FIR No. 161, U/S 379 IPC has been registered in PS-39, Chandigarh. Investigation of the case is in progress. 

Cheating

A case FIR No. 91, U/S 420, 467, 468, 471 IPC has been registered in PS-17, Chandigarh on the complaint of Rajesh Mahajan R/o Hotel Oyster, SCO No. 1-2-3, Sector-17/C, Chandigarh who alleged that Jai Shankar Jha R/o # 447, Gali No. 18, Saurabh Nadarpur, Delhi represented himself to be authorized representative of M/s Jaya Carpets dealing in flooring solutions including carpets, wooden flooring, etc.. Alleged person taken payment of Rs. 4,30,000/- and promised to deliver goods on or before 02.11.2020. He neither delivered the goods and nor return money of complainant. Investigation of the case is in progress. 

Snatching

Ajay Singh R/o Village-Kansal, Distt. Mohali (PB)  reported that two unknown person on motor cycle sped away after snatching his mobile phone near dividing rod, Sector 7/8, Chandigarh on 21-06-2021. A case FIR No. 140, U/S 379A, 34 IPC has been registered in PS-26, Chandigarh. Investigation of the case is in progress.

Quarrel/Assault

Durgesh Tiwari R/o # 50, Village-Faidan, Chandigarh reported that Vinod @ Lalla and Jitender @ Tila both R/o # 405, Village-Faidan, Chandigarh and two other persons attacked on complainant and his tenant Kamlesh and Raju with sticks & Axe near complainant’s residence on 21.06.2021. A case FIR No. 83, U/S 323, 341, 506, 34 IPC has been registered in PS-31, Chandigarh. Alleged persons namely Vinod and Jitender have been arrested in this case. Investigation of the case is in progress.

फसल विविधिकरण समय की मांग: डॉ. रामनिवास ढांडा

कृषि विज्ञान केंद्र में ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन
पंचकूला, 23 जून:

चैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र पंचकूला में एक ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रामनिवास ढांडा बतौर मुख्यातिथि शामिल हुए। वेबिनार का विषय स्थायी कृषि प्रणाली रखा गया।

डाॅ. ढांडा ने कहा कि परंपरागत खेती में बदलाव करते हुए फसल विविधीकरण पर जोर देना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है, जो पर्यावरण के लिए एक खतरा है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कृषि में विज्ञान और तकनीकी को शामिल किया जाना बहुत ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज का युग तकनीकी का युग है। मौसम में हो रहे बदलाव, घटते भूमिगत जलस्तर, मुक्त बाजार, घटती हुई जोत और कम होती जमीन की उपजाऊ शक्ति, सीमित  कृषि योग्य क्षेत्र हमारे सामने बहुत ही कठिन चुनौतियां हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान करते हुए कहा कि अब हमारा लक्ष्य सीमित संसाधनों का आधुनिक तकनीक के प्रयोग से अधिकाधिक लाभ उठाते हुए किसान की आय में बढ़ोतरी करना होना चाहिए और किसानों को भी चाहिए कि वह कृषि वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार और विश्वविद्यालय द्वारा सिफारिश किए गए उर्वरकों का ही इस्तेमाल करें।

समन्वित कृषि प्रणाली एकमात्र विकल्प: डॉ. श्रीदेवी तल्लापगड़ा

केंद्र की इंचार्ज श्रीदेवी तल्लाप्रगड़ा ने कहा कि वर्तमान समय में एकल फसल प्रणाली को छोडक़र समन्वित कृषि प्रणाली को अपनाना ही एकमात्र विकल्प है। इससे किसानों की आमदनी मेें इजाफा हो सकता है। उन्होंने कहा कि फसलों में कीड़े, मकोड़े व बीमारियों से कहीं ज्यादा नुकसान खरपतवार करते हैं, इसलिए इसके बचाव हेतू प्रमाणित बीज, सही किस्म का चुनाव, बिजाई का उचित समय, गुणवत्ता वाली गोबर की खाद, खरपतवारों का फूल व बीज बनने से पहले ही नियंत्रण करना कारगर साबित होता है। उन्होंने कहा कि फसलों में बीमारियों की रोकथाम के लिए बीज उपचार करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि ज्यादा खाद व पानी इस्तेमाल करने से भी पौधों में रोग लग जाते हैं। वर्तमान समय में इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि परंपरागत कृषि पद्धति में बदलाव करके किसानों को फल-फूल सब्जी व औषधीय खेती की ओर ध्यान देना चाहिए, जिससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो सके। उपभोक्ता, बाजार, व्यापार और मार्केट की मांग के अनुरूप फसलों का उत्पादन किया जाना चाहिए ताकि किसान को अधिक से अधिक लाभ हासिल हो सके। कृषि विभाग की ओर से डॉ. जयप्रकाश ने विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
 मत्स्य विज्ञानी डॉ. गजेंद्र सिंह ने किसानों को लिए मछली पालन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए इसकी शुरुआत में आने वाली परेशानियों व उनके समाधान के बारे में बताया।

कार्यक्रम मेें सस्य वैज्ञानिक डॉ. वंदना, पौध रोग वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र, डॉ. राजेश लाठर ने भी अपने विचार रखे। डॉ. गुरनाम सिंह ने कार्यक्रम में शामिल होने पर सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। वेबिनार में क्षेत्र के किसानों,  कृषि अधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारियों ने ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया।

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पंचांग, 23 जून 2021

एक तिथि का भोग काल सामान्यतया 60 घटी का होता है। किसी तिथि का क्षय या वृद्धि होना सूर्योदय पर निर्भर करता है। कोई तिथि, सूर्योदय से पूर्व आरंभ हो जाती है और अगले सूर्योदय के बाद तक रहती है तो उस तिथि की वृद्धि हो जाती है अर्थात् वह वृद्धि तिथि कहलाती है लेकिन यदि कोई तिथि सूर्योदय के बाद आरंभ हो और अगले सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाती है तो उस तिथि का क्षय हो जाता है अर्थात् वह क्षय तिथि कहलाती है।

विक्रमी संवत्ः 2078, 

शक संवत्ः 1943, 

मासः ज्येष्ठ, 

पक्षः शुक्ल पक्ष, 

तिथिः त्रयोदशी प्रातः 07.00, बजे तक है। 

वारः बुधवार, 

नक्षत्रः अनुराधा प्रातः 11.48 तक हैं, 

योगः साध्य प्रातः काल 10.00 तक, 

करणः तैतिल, 

सूर्य राशिः मिथुन, 

चंद्र राशिः वृश्चिक, 

राहु कालः दोपहर 12.00 बजे से 1.30 बजे तक, 

सूर्योदयः 05.28, 

सूर्यास्तः 07.18 बजे।

नोटः चतुर्दशी तिथि का क्षय है।

विशेषः आज उत्तर दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर बुधवार को राई का दान, लाल सरसों का दान देकर यात्रा करें।

तिथि क्षय और वृद्धि

धर्म संस्कृति:

तिथियों का निर्धारण चन्द्रमा की कलाओं के आधार पर होता है। ये तिथियाँ चन्द्रमा की 16 कलाओं के आधार पर 16 प्रकारों में ही हैं। इसमें शुक्ल व कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से चतुर्दशी पर्यन्त 14-14 तिथियाँ तथा पूर्णिमा व अमावस्या सहित तीस तिथियों को मिलाकर एक चान्द्रमास का निर्माण होता है। शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि पूर्णिमा एवं कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि अमावस्या होती है।

एक तिथि का भोग काल सामान्यतया 60 घटी का होता है। किसी तिथि का क्षय या वृद्धि होना सूर्योदय पर निर्भर करता है। कोई तिथि, सूर्योदय से पूर्व आरंभ हो जाती है और अगले सूर्योदय के बाद तक रहती है तो उस तिथि की वृद्धि हो जाती है अर्थात् वह वृद्धि तिथि कहलाती है लेकिन यदि कोई तिथि सूर्योदय के बाद आरंभ हो और अगले सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाती है तो उस तिथि का क्षय हो जाता है अर्थात् वह क्षय तिथि कहलाती है।

तिथि क्यों घटती-बढ़ती है ? तिथियों का निर्धारण सूर्य और चन्द्रमा की परस्पर गतियों के आधार पर होता है। राशि चक्र में 3600 होते हैं साथ ही तिथियों की संख्या 30 हैं अत: एक तिथि का मान।

360/ 30 = 12डिग्री = 1 तिथि

इसका तात्पर्य यह है कि जब सूर्य और चन्द्रमा एक स्थान (एक ही अंश) पर होते हैं तब अमावस्या तिथि होती है। इस समय चन्द्रमा, सूर्य के निकट होने के कारण दिखाई नहीं देते हैं या वे अस्त होते हैं तथा सूर्य और चंद्रमा का अंतर शून्य होता है। चन्द्रमा की दैनिक गति सूर्य की दैनिक गति से अधिक होती है। चन्द्रमा एक राशि लगभग सवा दो दिन में पूरी करते हैं जबकि सूर्य 30 दिन लगाते हैं।

सूर्य, चन्द्रमा का अन्तर जब शून्य से अधिक बढ़ने लगता है तो प्रतिपदा प्रारम्भ हो जाती है और जब यह अंतर 12 डिग्री होता है तो प्रतिपदा समाप्त हो जाती है और चंद्रमा उदय हो जाते हैं। तिथि वृद्धि और तिथि क्षय होने का मुख्य कारण यह होता है कि एक तिथि 12 डिग्री की होती है जिसे चन्द्रमा 60 घटी में पूर्ण करते हैं परन्तु चन्द्रमा की यह गति घटती-बढ़ती रहती है। कभी चन्द्रमा तेजी से चलते हुए (एक तिथि)120डिग्री की दूरी को 60 घटी से कम समय में पार करते हैं तो कभी धीरे चलते हुए 60 घटी से अधिक समय में पूर्ण करते हैं। जब एक तिथि (12डिग्री) को पार करने में 60 घटी से अधिक समय लगता है तो वह तिथि बढ़ जाती है और जब 60 घटी से कम समय लगता है तो वह तिथि क्षय हो जाती है अर्थात् जिस तिथि में दो बार सूर्योदय हो जाए तो उस तिथि की वृद्धि और जिस तिथि में एक बार भी सूर्योदय नहीं हो उसका क्षय हो जाता है। तिथियों की क्षय और वृद्धि को हम निम्न प्रकार से समझ सकते हैं :-

वृद्धि तिथि:

जब किसी तिथि में दो बार सूर्योदय हो जाता है तो उस तिथि की वृद्धि हो जाती है। जैसे – किसी रविवार को सूर्योदय प्रात: 5:48 पर हुआ और इस दिन सप्तमी तिथि सूर्योदय के पूर्व प्रात: 5:32 बजे प्रारंभ हुई और अगले दिन सोमवार को सूर्योदय (प्रात: 5:47) के बाद प्रात: 7:08 तक रही तथा उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो गई। इस तरह रविवार और सोमवार को दोनों दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि होने से, सप्तमी तिथि की वृद्धि मानी जाती है। सप्तमी तिथि का कुल मान 25 घंटे 36 मिनिट आया जो कि औसत मान 60 घटी या 24 घंटे से अधिक है। ऎसी परिस्थिति में किसी भी तिथि की वृद्धि हो जाती है।

तिथि क्षय:

जब किसी तिथि में एक बार भी सूर्योदय नहीं हो तो उस तिथि का क्षय हो जाता है। जैसे- किसी शुक्रवार सूर्योदय प्रात: 5:44 पर हुआ और इस दिन एकादशी तिथि सूर्योदय के बाद प्रात: 6:08 पर समाप्त हो गई तथा द्वादशी तिथि प्रारंभ हो गई और द्वादशी तिथि आधी रात के बाद 27 बजकर 52 मिनिट (अर्थात् अर्द्धरात्रि के बाद 3:52) तक रही तत्पश्चात् त्रयोदशी तिथि प्रारंभ हो गई। द्वादशी तिथि में एक भी बार सूर्योदय नहंी हुआ। शुक्रवार को सूर्योदय के समय एकादशी और शनिवार को सूर्योदय (प्रात: 5:43) के समय त्रयोदशी तिथि रही, अत: द्वादशी तिथि का क्षय हो गया। इस प्रकार जब किसी तिथि में सूर्योदय नहीं हो तो उस तिथि का क्षय हो जाता है। क्षय तिथि को पंचांग के तिथि वाले कॉलम में भी नहीं लिखा जाता जबकि वृद्धि तिथि को दो बार लिखा जाता है।