पत्थरबाजी : काश्मीर से चल कर पहुंची केरल

Er. S. K. Jain

काश्मीर में पाकिस्तान द्वारा भेजे गए आतंकियों ने वहाँ के युवाओं को गुमराह कर सेना पर पत्थरबाजी कारवाई। हमें नाज़ है हमारे जवानों पर जिनहोने संयम से काम लेते हुए पत्थर बाजों पर गोलियां नहीं चलाईं बल्कि खुद घायल होते रहे। ऐसी सहनशीलता की मिसाल दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी। अभी हाल ही में केरल से ख़बरें आ रहीं हैं की वहाँ भी पत्थरबाजी ने अपने “अदरक के पंजे” फैलाने शुरू कर दिये हैं

हमारे देश में हिन्दू आस्था के खिलाफ षड्यंत्र करने वालों व इसे तहस नहस करने वालों की संख्या दिन-ओ-दिन बढ़ती ही जा रही है। साजिशे रचीं जा रहीं हैं। अब तो केरल सरकार और प्रशासन इसका हिस्सा बनते हुए नज़र आ रहे हैं। हिन्दू आस्था को बदनाम और तार तार करने के लिए नए नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।  मदिर में प्रवेश करने के लिए केरल की वामपंथी सरकार साजिश रचती है। 2 महिलाओं को धोखे से मंदिर के अंदर प्रवेश करवाया जाता है। इन महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश करने के लिए किसी भी परंपरागत नियम का पालन नहीं किया है। (आप सबको याद दिला दें कि सबरी माला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर कोई निषेध नहीं है, बस एक खास उम्र कि महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर पाबंदी है वही महिला जब उस आयु को पार कर लेती है तो वह उस मंदिर में प्रवेश पा सकती है।)      करीब रात एक(1:00am) बजे पुलिस महिलाओं के साथ एंबुलेंस के जरिए मंदिर में प्रवेश करती है। पुलिस कहती है कि यह महिलाएं नहीं किन्नर हैं। मंदिर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश होती है। जबर्दस्ती उन्हे अंदर भेजा जाता है और पूजा कारवाई जाती है। मंदिर प्रशासन इस पर सख्त एतराज करता है, बाद में प्रशासन मंदिर के द्वार बंद कर देता है। इसके बाद मंदिर और देवता का शुद्धिकरण किया जाता है और कपाट पुन: खोल दिये जाते हैं। लेकिन फर्जी महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर भक्तों का गुस्सा अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाता है।

प्रो॰ संदीप कुमार जो कि “साउथ इंडिया स्टडीज़” के जानकार माने जाते हैं का कहना है कि हिन्दू धर्म को तोड़ने व इसका सत्यानाश करने के लिए यह कमयूनिस्ट सरकार कि सोची समझी साजिश है। केरल के सांसद और वरिष्ठ नेता श्री वी मुरलीधरन जी का कहना है:

              “केरल कि वामपंथी सरकार जिसकी धर्म (हिन्दू) और मंदिर (सबरीमाला) में कोई आस्था नहीं है, वह सबरीमाला मंदिर कि परम्पराओं एवं आस्था को तोड़ने का प्रयास कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर  और इसके आधार पर बहाना बना कर 2 महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करवाया और पूजा पाठ करवाया, इसका पता चलते ही भारतीय जन मानस में आक्रोश की लहर दौड़ गयी। इससे बचने के लिए वामपंथियों द्वारा भाजपा और आरएसएस के दफ्तरों में बमों से हमले किए गये, भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के घरों में आगजनी के साथ साथ बंब भी फेंके गये।“

इन सब घटनाओं के मद्देनजर कुछ सवाल उठते हैं जैसे:

  • क्या केरल की वामपंथी सरकार को हिंदुओं की धार्मिक आस्था एवं आज़ादी से कोई लेना देना नहीं?
  • क्या केरल में हिंदुओं की आस्था सुरक्षित नहीं?
  • क्या केरल वामपंथी पत्थरबाज़ों का अड्डा बन गया है?
  • क्या केरल में भी काश्मीर की तर्ज़ पर पत्थरबाज़ों का जन्म हो गया है?
  • क्या वामपंथी सरकार के चलते केरल इस्लामिक स्टेट बनने को अग्रसर है?
  • क्या काशमीर की ही तरह हिंदुओं को केरल से भी पालायन करना होगा?
Sabrimal Temple

केरल में अत्याचार हो रहे हैं और सरकार दमन के लिए नए हथकंडे अपना रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा की सभी आयु वर्ग की महिलाएं मंदिर जा सकतीं हैं, यह तो नहीं कहा कि हिन्दू धर्म में आस्था ण रखने वाली मुस्लिम महिलाओं को जबर्दस्ती मंदिर में भेजो? बाहर सड़कों पर हिन्दू धर्म की महिलाएँ अपनी आस्था को लेकर प्रदर्शन कर रहीं हैं, उनका मानना है की उन्हे मंदिर में प्रवेश नहीं चाहिए, वह भगवान अय्याप्पा स्वामी की भक्ति ही में खुश हैं, वह दर्शनभिलाषी नहीं, उनकी स्नेह भाजन हैं। उन्हे भगवान अय्याप्पा की मर्ज़ी के खिलाफ उनके दर्शन नहीं चाहिए। लाखों की संख्या में महिलाए हाथों में पूजा की थाली ले कर दीप प्रज्ज्वलित कर कन्याकुमारी तक पांकती बद्ध हो कर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहीं हैं, लेकिन जबर्दस्ती अनास्थावान स्त्रियॉं को लेकर उन्हें मंदिर पहुंचाने की ज़िद! केरल सरकार की शह पर वहाँ हिंसा में उतारू लोगों का उद्दंडता से भर नंगा नाच हो रहा है।

केरल राज्य से हिंसा की वारदातों की खबरें आ रहीं हैं। मंदिर परिसर में पत्थर बाज़ी से 55 वर्ष के मंदिर कमेटी के भक्त की मौत हो जाती है, केरल सरकार उसे हृदयाघात (Cardiac Arrest/ Attack) बता रही है। जबकि डॉ। की रिपोर्ट बता रही है की मौत गंभीर चोट लगने से हुई है। पूरे केरल में वामपंथी काश्मीरी पत्थरबाज़ों की तरह भगवान अय्यापा के भक्तों पर पर पत्थरबाजी कर रहे हैं। करीब 1400 भक्त गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। केरल में पीएफ़आई पहिले से ही सक्रिय है। अगर पीएफ़आई इसमें शामिल है तो केरल को काश्मीर बनने से कोई नहीं रोक सकता। अगर सरकार ही षड्यंत्र करवाने पर उतारू हो जाये तो कौन बचाएगा? सरकार हिंदुओं को कानून हाथ में लेने के लिए मजबूर कर रही है। पुलिस गुंडों की तरह व्यवहार कर रही है। एक विडियो में दिख रहा है की कैसे पुलिस एक बाइक सवार को बाइक से उतार कर पीट रही है। बाइक सवार कसूर इत्न था की उसके हाथ में भगवा झण्डा था।  यदि यह अधिकार भी किसी व्यक्ति को नहीं है, तो क्या यह राज्य भारतवर्ष का हिस्सा हो सकता है? यह अपने आप में  बहुत बड़ा प्रश्न है।

तमिलनाडू में जल्लीकुट्टू पर केंद्र सरकार को अध्यादेश लाना पड़ा तो सबरीमाल पर भी केंद्र सरकार को चाहिए कि जल्दी ही अध्यादेश लाये।

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