मामा शिवराज सिंह चौहान को पार लगा रही हैं महिला वोटर?


पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत तीन फीसदी बढ़ा है.


पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत  तीन फीसदी बढ़ा है. राज्य के लगभग 47 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत ज्यादा है. महिलाओं के वोटिंग प्रतिशत में हुई वृद्धि से बीजेपी अपने पक्ष में चुनाव नतीजे आने की उम्मीद लगाए बैठी है.

विंध्य क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर महिलाओं ने की है ज्यादा वोटिंग

विधानसभा के इस चुनाव में महिलाओं ने सबसे ज्यादा वोटिंग विंध्य इलाके में की है. विंध्य में विधानसभा की कुल तीस सीटें हैं. वर्तमान में कांग्रेस के कब्जे में सिर्फ बारह सीटें हैं. बसपा दो सीटों पर चुनाव जीती थी. बीजेपी के खाते में सोलह सीटें आईं थीं. पिछले विधानसभा चुनाव में भी विंध्य क्षेत्र में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों की तुलना में ज्यादा रहा था.

इस बार इलाके की दो दर्जन से अधिक सीटों पर महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत आश्चर्यजनक रूप से बढ़ा है. खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर पिछले चुनाव की तुलना में इस बार दस प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है. बसपा के कब्जे वाली रैगांव सीट पर इस चुनाव में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 74.97 फीसदी रहा है. जबकि पिछले चुनाव में 64.62 फीसदी महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.

इस विधानसभा क्षेत्र में पिछले चुनाव की तुलना में 8 प्रतिशत ज्यादा डाला गया है. जबकि पिछले चुनाव में बसपा लगभग तीन प्रतिशत वोट ज्यादा लाकर चुनाव जीत गई थी. मनगंवा की सीट बसपा ने मात्र 275 वोटों से जीती थी. इस सीट पर पिछली बार महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 59.05 था जो इस चुनाव में बढ़कर 61.81 प्रतिशत हुआ है.


ब्यौहारी की सीट कांग्रेस ने लगभग दस प्रतिशत वोटों के अंतर से जीती थी. ब्यौहारी में इस बार महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में दो फीसदी कम हुआ है. महिला और पुरुषों के वोटिंग में भी मामूली अंतर है. पिछले विधानसभा चुनाव में जहां भी महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत बढ़ा था, वहां ज्यादा फायदा भारतीय जनता पार्टी को हुआ था.


विधानसभा के इस चुनाव में कांग्रेस को विंध्य क्षेत्र से बड़ी उम्मीदें हैं. कांग्रेस 18 सीट जीतने की उम्मीद लगाए हुए है. विंध्य कभी कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था. अर्जुन सिंह जैसे दिग्गज नेता इसी क्षेत्र से आते थे. वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद इस क्षेत्र में कांग्रेस कमजोर हुई है. बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का भी असर इस क्षेत्र में बढ़ने से कांग्रेस को नुकसान हुआ है. इस बार भी कांग्रेस की राह में मुश्किल इन दोनों दलों के कारण खड़ी दिखाई दे रही है.

महाकौशल के आदिवासी इलाकों में भी ज्यादा है महिला पोलिंग परसेंट

विंध्य की तुलना में ग्वालियर एवं चंबल क्षेत्र की 34 विधानसभा सीटों पर महिलाओं का पोलिंग परसेंट में खास बड़ा अंतर दिखाई नहीं दे रहा है. यह कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाला क्षेत्र है. इलाके की पांच सीटें ऐसी हैं जहां महिलाओं का पोलिंग परसेंट पुरुषों की तुलना में ज्यादा है.

ये विधानसभा क्षेत्र विजयपुर, सबलगढ़,जौरा, अटेर और भिंड हैं. इनमें दो सीट विजयपुर और अटेर पर कांग्रेस का कब्जा है. इस इलाके में भी बसपा और सपा की मौजूदगी चुनावी समीकरण को बिगाड़ रही है. इसके विपरीत महाकौशल के कई आदिवासी इलाकों में भी महिलाओं का वोटिंग परसेंट बढ़ा है.

कांग्रेस की कब्जे वाली मंडला विधानसभा सीट पर पुरुषों की तुलना में लगभग एक परसेंट ज्यादा महिलाओं ने वोट डाले हैं. पिछले चुनाव की तुलना में इस विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं का वोट परसेंट चार से भी ज्यादा बढ़ा है. बालाघाट जिले की बैहर, लांजी, परसवाड़ा वारासिवनी, कटंगी में भी महिलाओं का पोलिंग परसेंट ज्यादा रहा है.

सिवनी और छिंदवाड़ा जिले की भी कुछ विधानसभा सीटों पर महिलाओं के वोट ज्यादा पड़े हैं. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा संसदीय सीट से चुनाव लड़ते हैं. यह उनके प्रभाव वाला इलाका है. राज्य के सबसे समृद्ध माने जाने वाले मालवा-निमाड़ इलाके में इस तरह का वोटिंग पैटर्न दिखाई नहीं दिया है. पुलिस फायरिंग में किसानों की मौत के बाद चर्चा में आया मंदसौर इसी मालवा का हिस्सा है.

सरकार के पक्ष में पॉजेटिव वोट मान रही है बीजेपी

पिछले चुनाव की तुलना में महिला पोलिंग परसेंट बढ़ने से भारतीय जनता पार्टी उत्साहित है. पार्टी के मीडिया प्रभारी दीपक विजयवर्गीय कहते हैं कि शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं से जो भाई का रिश्ता बनाया है उसके कारण यह वोट परसेंट बढ़ा है. विजयवर्गीय ने दावा किया कि सरकार की महिला हितेषी नीतियों से भी बीजेपी को पॉजिटिव वोट मिल रहा है.


कांग्रेस प्रवक्ता जगदीप धनोपिया का दावा है कि बढ़ती महंगाई से नाराज होकर महिलाओं ने अधिक संख्या में घर से निकलकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया है.


चुनिंदा सीटों पर महिलाओं का वोटिंग परसेंट बढ़ने से राजीतिक प्रेक्षक भी हैरान हैं. लगभग सैंतालीस सीटों पर महिलाओं का पोलिंग परसेंट बढ़ने से सबसे ज्यादा चिंता कांग्रेस में दिखाई दे रही है.

कांग्रेस के एक नेता ने आकंडे़ सामने आने के बाद आशंका जाहिर की है कि विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की सीटों पर महिलाओं का पोलिंग परसेंट बीजेपी के इलेक्शन मेनेजमेंट का हिस्सा हो सकता है. राज्य में सरकार बनाने के लिए 116 सीटों की जरूरत होती है.

बीजेपी को पिछले चुनाव में 165 सीटें मिलीं थीं. कांग्रेस को 58 सीटों से संतोष करना पड़ा था. कांग्रेस और बीजेपी के बीच वोटों का अंतर आठ प्रतिशत से भी अधिक रहा था. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्य में लगातार चौथी बार बीजेपी की सरकार बनाने के लिए पिछले एक साल से महिला वोटरों को फोकस कर रहे थे.

चुनाव के ठीक पहले लागू की गई संबल योजना में महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली कई योजनाएं लागू की हैं. वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव को जीतने में शिवराज सिंह चौहान की मदद लाडली लक्ष्मी योजना ने की थी. वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में कन्यादान योजना की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी गई थी.

मनमोहन सरकार के दौरान हुई थी 3 सर्जिकल स्ट्राइक, लेकिन हमने नहीं उठाया फायदा- राहुल


राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश चुनाव में किया क्योंकि वो हार रहे थे अचानक ही राजस्थान चुनाव में कांग्रेस सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगते मांगते मोदी को ही उसका लाभार्थी बता रही है।

जबकि सच तो यह है कि यदि कांग्रेस काल में कोई सर्जिकल स्ट्राइक हुई भी थी तो उसका श्रेय सेना को नहीं दिया गया, जबकि मोदी ने उसका श्रेय दोनों बार सेना ही को दिया वह तो इनके नेता संजय निरूपम, पी चिदम्बरम और अरविंद केजरीवाल  के सबूत मांगने के बाद इस स्ट्राइक का राजनीतिकरण हुआ था। 


राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज यानी शनिवार को उदयपुर में थे. इस दौरान उन्होंने शहर के युवाओं, कारोबारियों और अन्य क्षेत्र के लोगों से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की वसुंधरा सरकार पर जमकर हमला बोला. राहुल ने सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी, जीएसटी, बेरोजगारी से लेकर तमाम मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला. राहुल ने कहा कि पीएम मोदी सर्जिकल स्ट्राइक को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं.

राहुल ने कहा कि क्या आपको पता है? मनमोहन सिंह ने तीन सर्जिकल स्ट्राइक कराए थे. जब आर्मी मनमोहन सिंह के पास गई और कहा कि हमें पाकिस्तान के खिलाफ बदले की कार्रवाई करनी है और इसे सिक्रेट रखना है. राहुल ने कहा कि मनमोहन सिंह ने आर्मी की बात मानी और सर्जिकल स्ट्राइक हुआ.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मनमोहन सिंह के पास आर्मी आई थी लेकिन नरेंद्र मोदी खुद आर्मी के पास गए और सर्जिकल स्ट्राइक को रचा और इसे राजनीतिक संपत्ति में बदल दिया जबकि यह मिलिट्री का डिसिजन था. राहुल ने कहा कि आर्मी को यह पसंद आता कि हम इसे करते और किसी को पता नहीं चलता कि हमने किया है. लेकिन मोदी जी यह नहीं करना चाहते थे. वह उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ रहे थे और हार रहे थे. इसलिए उन्होंने मिलिट्री की संपत्ति को राजनीति की संपत्ति में बदल दिया.

राहुल ने नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इस बात से आश्वस्त हैं कि सेना को क्या करना है, वे उनसे बेहतर जानते हैं. वे विदेश मंत्री से बेहतर जानते हैं कि विदेश मंत्रालय में क्या करना है. कृषि मंत्री से बेहतर जानते हैं कि कृषि मंत्रालय में क्या करना है. पीएम को लगता है सारा ज्ञान उन्हीं के दिमाग से आता है.

राहुल गांधी ने यहां पर हिंदू धर्म पर भी बात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म का सार क्या है? गीता में क्या है? ज्ञान हर किसी के पास है और आपके चारों ओर है. प्रत्येक के पास ज्ञान है. हमारे पीएम कहते हैं कि हम हिंदू हैं लेकिन वे हिंदू धर्म की नींव को नहीं समझते हैं. उन्होंने सवाल पूछा कि वह किस तरह के हिंदू हैं?

आज देश के बैंकिंग सिस्टम में 12 लाख करोड़ का एनपीए

उन्होंने कहा कि आज हिंदुस्तान के बैंकिंग सिस्टम में 12 लाख करोड़ का एनपीए है. पिछले 3-4 साल में मोदी जी ने, उनकी सरकार ने 3 लाख 50 हजार करोड़ रुपए कर्ज माफ किया है.

राहुल ने कहा कि ये जो कर्ज हैं वो देश के मात्र 15 से 20 लोगों के हैं. अनिल अंबानी पर 45 हजार करोड़ का कर्ज है. राहुल ने कहा कि एक साल के लिए मनरेगा योजना में 35 हजार करोड़ रुपए लगते हैं. नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या जैसे लोगों ने लाखों करोड़ रुपए लेकर देश से भाग गए.


राहुल गांधी यह जताने की कोशिश में है की मेहुल चौकसी, नीरव मोदी और मल्लाया 2014 के बाद ऋण से लाभान्वित हुए थे और मोदी ने साढ़े तीन लाख करोड़ के कर्जे माफ कर दिये, हैरानी तो यह है की जितना पैसा एक साल में कांग्रेस नीत मानरेगा में लगता है इन तीनों का कर्ज़ तो उससे आधा भी नहीं पड़ता और उसमें से भी लगभग आधे की सम्पत्तियों की कुर्की हो चुकी है। 


उन्होंने कहा कि ये लोग तो पैसे लेकर चले गए, जो रही सही कसर थी उसे गब्बर सिंह टैक्स (जीएसटी) और नोटबंदी ने पूरी कर दी. राहुल ने कहा कि इन दोनों से देश के असंगठित क्षेत्र की कमर टूट गई. उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र में काफी लोगों को रोजगार मिलता है और यह बैकबोन है. राहुल ने कहा कि इनफॉर्मल सेक्टर को नोटबंदी और जीएसटी से सरकार ने इसलिए तोड़ा क्योंकि इसमें देश के चंद उद्योगपतियों अंदर घुसने का रास्ता मिले.

राहुल ने कहा कि यह एक प्रकार का झूठ है कि देश के निजी शिक्षण संस्थान अच्छे हैं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के लिए हम सरकारी संस्थान के बगैर देश नहीं चला सकते. राहुल ने कहा कि राजस्थान और केंद्र की सरकार सोचती है कि सबकुछ प्राइवेट से हो जाएगा, मगर ऐसा संभव नहीं है.

जिला पंचकूला में लाल डोरा बढ़ने की आस टूटी : विजय बंसल      


“चार वर्ष से मामला काग़ज़ों में विचाराधीन रहा “
“सरकार मस्त , जनता त्रस्त”


पंचकूला(1 दिसम्बर 2018):

शिवालिक विकास मंच के प्रदेशाध्यक्ष व हरियाणा किसान कांग्रेस के प्रदेशउपाध्यक्ष विजय बंसल ने बताया कि बीते चार वर्षों में हरियाणा की भाजपा सरकार, हरियाणा के 6800 गाँवो में लाल डोरा बड़ाने के लिए गम्भीर नहीं है । हरियाणा सरकार ने विजय बंसल द्वारा लाल डोरा बढ़ाने के लिए दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद कैप्टन अभिमन्यु,वित्त मंत्री की अध्यक्षता में 5 मंत्रियो की कमेटी बनाई थी। कैप्टन अभिमन्यु , वित्त मंत्री हरियाणा सरकार की अध्यक्षता में 10 जुलाई 2018 को बैठक हुई जिसमें कविता जैन, ओपी धनखड़ समेत कमेटी ने निर्णय लिया कि जब तक बंदोबस्त नही होता तब तक लाल डोरा नही बढ़ाया जा सकता।लाल डोरा से बाहर जो निर्माण ग्रामीण क्षेत्रो में हुआ है जहां कंट्रोल्ड एरिया एक्ट 1963 लागू है वहा कंट्रोल्ड एरिया एक्ट 1963 ही फैसला करेगा। जो गांव नगर पालिका में शामिल हो चुके है तथा जो निर्माण लाल डोरा से बाहर हुआ है वहा हरियाणा डेवलपमेंट एवं रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरियाज एक्ट 1975 नियमुनसार फैसला करेगा।विजय बंसल ने भाजपा सरकार की कार्यशेली पर आरोप लगाया कि चार वर्ष बीत जाने के बाद भी भाजपा हरियाणा के 6800 गाँवो में लाल डोरा की सीमा बढ़ाने हेतु कोई उचित निर्णय नहीं ले पाई है ।

2010 में विजय बंसल ने लाल डोरा बढाने हेतु पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका नंबर 6169 औफ 2010 डाली।माननीय न्यायालय ने  24 मार्च 2014 को फैसला किया।सुनवाई के दौरान सरकार ने पक्ष रखते हुए बताया कि एक्ट नंबर 1 ,1953 में आबादी देह शब्द का वर्णन नहीं किया गया। इसके बाद 1948 के अधिनियम में आबादी देह प्रभाषित नहीं किया गया है। इसके परिभाषा के अभाव में नगर एवं ग्राम आयोजन विभाग द्वारा लाल डोरा में पड़ने वाले क्षेत्र को आबादी देह क्षेत्र माना गया है,परिणाम स्वरुप लाल डोरा के भीतर व लाल डोरा के बाहर किन्तु 1948 नियम के अधीन चकबंदी के समय व नियमित फिरनी के भीतर ग्राम निवासियों द्वारा किये गए निर्माण को अवैध माना जाता रहा है।जिससे ग्रामीण जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा विधान सभा में बिल पास किया गया जिसमे गाँव की फिरनी तक क्षेत्र को लाल डोरा माना गया है। कालका क्षेत्र में बंदोबस्त ना होने के कारण गाँवों की फिरनिया नहीं है जिस कारण नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने 114 वर्ष पहले लाल डोरा को ही आबादी क्षेत्र मान लिया है जिस कारण लोगो को दिकत आ रही है जबकि पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशानुसार हरियाणा के बाकि क्षेत्रो में फिरनी तक आबादी देह क्षेत्र माना गया है।कालका क्षेत्र के गाँवों में चंडीगढ़ के निर्माण के समय से 1952 न्यू पंजाब केपिटल पेराफेरी एक्ट लागू हैं।साथ ही पूरे हरियाणा में 1962 के बाद बंदोबस्त नहीं हुआ है।महानिदेशक भू अभिलेख हरियाणा पंचकूला के रिकार्डअनुसार भारत के आजादी के समय से लाल डोरा नहीं बढ़ाया गया बल्कि संयुक्त पंजाब का आखरी बंदोबस्त वर्ष 1902 से 1909 तक किया गया।इसी दौरान लाल  डोरा बढ़ाया गया था।इसके बाद ना ही बंदोबस्त हुआ ना ही लाल डोरा बढ़ाया गया। हरियाणा में लगभग 110 वर्ष में आबादी बहुत बढ़ गई हैं।लोगो को अपने आवास बनाने में बहुत परेशानी आने लगी है। जिला पंचकूला के बरवाला,रायपुरानी ,मोरनी ब्लॉक्स में कंट्रोल्ड एरिया एक्ट 1963 लागू है जबकि नगर निगम सीमा के बाहर के ग्रामीण क्षेत्रो में पेराफरी कंट्रोल्ड एरिया एक्ट 1952 लागू है।

बंसल ने इस विषय में कैप्टन अभिमन्यु संयोजक , लाल डोरा बढाओ कमेटी व मनोहर लाल मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार को कई बार ज्ञापन भेज कर मांग की थी कि हरियाणा के 6800 गाँवो में लाल डोरा बड़ाया जाए परंतु जब जवाब नहीं आया तो विजय बंसल द्वारा आरटीआई में पूछा गया कि इस कमेटी की अब तक कुल कितनी बैठके हो चुकी है , इन बेठको में क्या कार्यवाही करी गई , क्या निर्णय लिए गए व हरियाणा के 6800 गाँवो में लाल डोरा को लेकर भविष्य में क्या योजना है।विजय बंसल ने कहा कि इस संदर्भ में जवाब दिया गया कि जब तक बंदोबस्त नही होता तब तक लाल डोरा नही बढ़ाया जाएगा।

शिवालिक विकास मंच के प्रदेशाध्यक्ष विजय बंसल ने लाल डोरा बढाने के लिए हरियाणा सरकार को कई ज्ञापन दिए परंतु कोई कार्यवाही नही हुई।

प्लॉट आवंटन मामले में आज पंचकूला विशेष सीबीआई कोर्ट में सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीट


AJL प्लॉट आवंटन मामला : पूर्व CM भूपेंद्र हुड्डा और मोती लाल वोरा के खिलाफ की गई चार्जशीट दाखिल

  • गलत तरीके से जमीन आवंटित करने के मामले में सीबीआई ने दायर की चार्जशीट

  • हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा हैं आरोपी

  • हुड्डा पर पद का दुरुपयोग करते हुए पंचकूला में जमीन आवंटित करने का आरोप है

  • मौजूदा बीजेपी सरकार ने साल 2016 में मामला सीबीआई को सुपुर्द किया था


सीबीआइ ने नेशनल हेराल्‍ड के स्‍वामित्‍व वाली कंपनी एजेएल कंपनी को प्‍लॉट आवंटन के मामले में शनिवार को अदालत में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दिया। सीबीआइ ने चार्जशीट पंचकूला की विशेष अदालत में दाखिल किया। हुड्डा पर एजेएल को पंचकूला में प्लॉट आवंटन में हुई गड़बड़ी में शा‍मिल होने का अारोप है।

पूरा मामला

24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी -17 तब के सीएम चौधरी भजनलाल ने अलॉट कराया। कंपनी को इस पर 6 माह में निर्माण शुरू करके दो साल में काम पूरा करना था। लेकिन, कंपनी 10 साल में भी ऐसा नहीं कर पाई। 30 अक्टूबर 1992 को हुडा ने अलॉटमेंट कैंसिल करके प्लॉट को रिज्यूम कर लिया।

26 जुलाई 1995 को मुख्य प्रशासक हुडा ने एस्टेट ऑफिसर के आदेश के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज कर दी। 14 मार्च 1998 को कंपनी की ओर से आबिद हुसैन ने चेयरमैन हुडा को प्लॉट का अलॉटमेंट बहाली के लिए अपील की। 14 मई 2005 को चेयरमैन हुडा ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा। लेकिन, कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली के लिए साफ तौर पर इनकार कर दिया।

18 अगस्त 1995 को फ्रेश अलॉटमेंट के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई। 28 अगस्त 2005 को हुड्डा ने एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर लिए। साथ ही कंपनी को 6 माह में निर्माण शुरू करके 1 साल में काम पूरा करने को भी कहा गया। सीए हुडा ने भी पुरानी रेट पर प्लॉट अलॉट करने के आदेश दिए।

एसोसिएटड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के अखबार नेशनल हेराल्ड के लिए पंचकूला में नियमों के खिलाफ जमीन आवंटन का आरोप है। इस मामले में सतर्कता विभाग ने मई 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर केस दर्ज किया गया है। यह मामला हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की शिकायत पर दर्ज हुआ है। चूंकि मुख्यमंत्री हुडा के पदेन अध्यक्ष होते हैं। यह गड़बड़ी हुड्डा के कार्यकाल में हुई, इसलिए उनके खिलाफ यह मामला दर्ज हुआ है। हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) को करीब 62 लाख रुपए का नुकसान पहुंचाए जाने का आरोप है।

Panchkula plot reallotment case: CBI files charge sheet against ex-Haryana CM Bhupinder Singh Hooda


The CBI has today filed a Charge Sheet U/s 120-B of IPC, 420 of IPC and section 13 (2) r/w 13 (1) (d) of PC Act in the Court of Special Judge, CBI cases, Panchkula(Haryana) against Sh. Bhupinder Singh Hooda, the then Chairman, HUDA(then CM), Haryana; Sh. Motilal Vora, then Chairman, M/s Associated Journals Ltd. and M/s Associated Journals Ltd in a case relating to an alleged re-allotment of institutional plot No.C-17, Sector-6, Panchkula to M/s. AJL.

Further investigation is continuing

So far:

The CBI had alleged that AJL was allotted a plot in Panchkula in 1982 on which no construction took place till 1992. HUDA then took back the possession of the plot.

It was alleged that the then chief minister Bhupinder Singh Hooda, also the then chairman of HUDA, re-allotted the same plot measuring 3,500 square metre at original rates plus interest in 2005 by allegedly violating the norms.

It is further alleged that Hooda, in violation of the rules and by misusing his official position, re-allocated land to the New Delhi-based Journals company at original rates and ordered construction on the plot within six months, seeking completion of the same within two years. This led to an alleged loss of Rs 62 lakh (appox) to the Haryana government.

AJL is reportedly controlled by senior Congress leaders, including the Gandhi family. The group runs National Herald.

The case was registered after the Haryana government handed over the case to CBI for investigation. Earlier, the state vigilance department in the Manohar Lal Khattar government had registered a case against Hooda

The case refers to allotment of a plot, made in 2005, measuring 3360 square meters to AJL Ltd in Sector 6, Panchkula. Allegations against the former regime in Haryana are that Hooda had given prime chunk of land to AJL in violation of various norms and against the advise of department.

पाक प्रेम या मानसिक विक्षिप्तता???


मणि शंकर अय्यर , दिग्विजय सिंह और राहुल ही काफी  नहीं थे कि नवजोत सिंह सिद्धु भी पाक प्रेमियों की सूची में शामिल हो गए । कल तक सिद्धू की मुखालफत करने वाले पार्टी के सरमाये दार सिद्धू के ब्यान के बाद सन्नाटे में हैं


Sareeka Tewari V

मणि शंकर अय्यर , दिग्विजय सिंह और राहुल ही काफी  नहीं थे कि नवजोत सिंह सिद्धु भी पाक प्रेमियों की सूची में शामिल हो गए । कल तक सिद्धू की मुखालफत करने वाले पार्टी के सरमाये दार सिद्धू के ब्यान के बाद सन्नाटे में हैं। सोच रहे हैं अब क्या कहें क्या न कहें। सिद्धू के खिलाफ बोलते हैं तो राहुल और कुछ गिने चुने कट्टरपंथी गुस्सा  सिद्धू के हक़ में बोलने से कैप्टन की नज़र में खटक सकते हैं। लेकिन हैरत की बात है कि राहुल ने किस आधार पर सिद्धू को पाकिस्तान जाने के लिए कहा होगा। कैप्टन कि अनदेखी और अनसुनी करने का अर्थ ये तो नहीं राहुल सिद्धू को पंजाब का सिंहासन सोंपने का वादा कर बैठे हैं और  2019 में प्रधान मंत्री बनवाने के लिए से सिफ़ारिश करने भेजा । आपको बता दें कि कुछ महीने पहले पाकिस्तान में अपने मणि शंकर अय्यर ने कहा था कि आप अगर राहुल गांधी को प्रधान मंत्री बनवा दें तो भारत पाक समस्या खत्म करने मे मदद होगी। मणि शंकर अय्यर कांग्रेस्स सरकार के समय विदेशी मामलों के मंत्री थे उससे पहले भारतीय विदेशी सेवा अधिकारी रहे हैं।

या तो ये राजनेता खुले तोर पर देश के हितों कि अनदेखी करते हैं या फिर विक्षिप्त मानसिकता के स्वामी हैं।

अब बात करते हैं नवजोत सिंह सिद्धू आपसे: 

आपका और विवादों का चोली दामन का साथ है, जबकि सार्वजनिक जीवन जीने वालों को जिन बातों से गुरेज करना चाहिए आप उन्ही बातों को नगाड़े की चोट पर कहते हैं, चाहे भाजपा नेत्री को ठोकने की बात हो या प्रधान मंत्री को चोर कहने की। अब दूसरी बार करतारपुर कॉरीडोर का नियोता मिला, भारत से कोई भी जाने के लिए तैयार नहीं था, भारत सरकार और आपकी पंजाब की प्रदेश सरकार ने भी इंकार किया और कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने आपको पुन: चेताया परंतु आप की आँखों पर न जाने कौन सी पट्टी चढ़ी थी की देखना सुनना तो दूर आपने तो सोचना भी बंद कर दिया।

भारत भूमि पर लगातार छद्म युद्ध थोप रहे पाकिस्तान के नव निर्वाचित प्रधान मंत्री इमरान खान ने भारत के कई नेताओं ओर क्रिकेट जगत के पुरोधाओं को न्योता भेजा था, सभी ने घाटी में फैले पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को ध्यान में रखते हुए समारोह में जाने से मना किया, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने भी पाकिस्तान के दोगले रवैये को देखते हुए जाने से इंकार किया और सिद्धु को भी नसीहत दी परंतु सिद्धु को इतना प्यार उमड़ा की वह पैदल ही समारोह में शिरकत करने चले गए। वहाँ शिरकत करना ही किसी को नहीं सुहाया ऊपर से इनहोने जन बाजवा को गलबाहियाँ दी।

मामला क्या है ? आप शक के दायरे में हैं।

गुरु कहीं सिखों को भारत से अलग करने कि पाक कि  नीति में मोहरा तो नहीं बन रहे। क्योंकि चाहे खालिस्तान समर्थक हों या काश्मीरी अलगाववादी या अब रेफेरेंड्म 20 के समर्थक सबके रोटी कपड़ा मकान का इंतजाम पाकिस्तान में ही है।

सनद रहे उनके सेनाध्यक्ष बाजवा वही  है जिस के इशारे पर पाकिस्तान भारत पर जगह जगह आतंकी वारदातों को अंजाम देता है और हमारी युवा शक्ति को लील जाता है। उस बाजवा को गलबहियाँ डालना और फिर वापिस आ कर आप बेशर्मी के साथ भारत के प्रधान मंत्री पर तंज़ कसते हैं कि आप शपथ ग्रहण समारोह में गए थे न की ‘राफेल डील‘ करने। आपको कई बार चेताया जा चुका है की आप जन भावनाओं को ‘कामेडी शो’ की तालियाँ न समझें।