Thursday, April 30

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति के बारे में जानने के लिए उसकी राशि ही काफी होती है। राशि से उस या…

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पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। शास्त्र कहते हैं कि तिथि के…

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सीबीआई की टीम सोमवार दोपहर को अधिकारी के क्वार्टर पहुंची और करीब चार घंटे तक पूछताछ करते हुए उनके क्वार्टर को खंगाला।…

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         22 अगस्त को चंडीगढ़ में तो 23 अगस्त को दिल्ली में दीपेन्द्र हुड्डा के मौजूदगी में काँग्रेस में हुई जॉइनिंग        आदमपुर गांव के सरपंच रहे…

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करणीदानसिंह राजपूत, डेमोक्रेटिक फ्रंट, श्रीगंगानगर – 23 अगस्त, 22 : भ्रष्टाचार से मिलकर लड़ना होगा रंजिशवश कोई भला नागरिक न फंसे राजस्थान…

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कोरल ‘पुरनूर’, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़ – 23 अगस्त, 22 आज दिनांक 23-08-2022 को संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृत दिवस का आयोजन किया गया। इस समारोह में मुख्य तीन कार्यक्रम काव्यपाठ, शास्त्रचर्चा, एवं नृत्यकला हुए।कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. वीरेन्द्र कुमार अलंकार द्वारा की गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण से किया गया। विभाग के सदस्य डॉ. शिवाजी पाण्डेय ने अपने विचार रखते हुए संस्कृत के विभिन्न पक्षों का दिग्दर्शन कराया। संकाय सदस्य सत्यन् ने संस्कृत भाषा के व्यावहारिक पक्ष के महत्त्व को दर्शाते हुए संस्कृत की सार्वभौमिकता से अवगत कराया। विभाग के अध्यापक विजय भारद्वाज ने संस्कृत को आधुनिक परिप्रेक्ष्य से जोडते हुए उसकी मौलिकता और अपरिहार्यता के वर्तमानयुगीन महत्त्व से छात्रों को प्रेरित किया। विभागाध्यक्ष प्रो. वीरेन्द्र कुमार अलंकार ने संस्कृत के गौरव को प्रस्तुत करते हुए संस्कृत में शब्दभण्डार, काव्यसृजन शक्ति, संस्कार, नैतिकता एवं शुद्ध उच्चारण की अपार सम्भावनाओं को बताया तथा सरल विधि से संस्कृत में नूतन कविता की सर्जना भी सिखायी। समारोह की विभिन्न प्रस्तुतियाँ यथा काव्यपाठ में नरेश, रजनीकान्त, कार्तिक, अभिषेक, सीमा, अञ्जलि तथा शास्त्रचर्चा में अंशुल, नीलम, पिंकु, रोहित एवं नृत्यकला में मैना, सीमा, अञ्जलि आदि ने भाग लिया। कार्यक्रम के अन्त में प्रो. अलंकार ने उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए संस्कृत के संरक्षण में सतत प्रयत्नशील होने की प्रेरणा दी।

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