Sunday, May 10

ॐ पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। शास्त्र कहते हैं कि तिथि के पठन और श्रवण से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। तिथि का क्या महत्व है और किस तिथि में कौन से कार्य करान चाहिए या नहीं यह जानने से लाभ मिलता ह। पंचांग मुख्यतः पाँच भागों से बना है। ये पांच भाग हैं: तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण। यहां दैनिक पंचांग में आपको शुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू माह और पहलू आदि के बारे में जानकारी मिलती है।

विक्रमी संवत्ः 2079, 

शक संवत्ः 1944, 

मासः ज्येष्ठ़, 

पक्षः शुक्ल, 

तिथिः षष्ठी (की वृद्धि है, जो कि सोमवार को प्रातः 06.40) तक है। 

वारः सोमवार, 

नक्षत्रः मघा रात्रिः 02.26 तक है, 

योगः हर्ष, अरूणोदय काल 4.52 तक।

विशेषः आज पूर्व दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर सोमवार को दर्पण देखकर, दही,शंख, मोती, चावल, दूध का दान देकर यात्रा करें।

करणः तैतिल, 

सूर्य राशिः वृष,  चंद्र राशिः सिंह, 

राहु कालः प्रातः 7.30 से प्रातः 9.00 बजे तक, 

सूर्योदयः 05.27,  सूर्योदयः  07.13 बजे।