पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। शास्त्र कहते हैं कि तिथि के पठन और श्रवण से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। तिथि का क्या महत्व है और किस तिथि में कौन से कार्य करान चाहिए या नहीं यह जानने से लाभ मिलता ह। पंचांग मुख्यतः पाँच भागों से बना है। ये पांच भाग हैं : तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण। यहां दैनिक पंचांग में आपको शुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू माह और पहलू आदि के बारे में जानकारी मिलती है।
डेमोक्रेटिक फ्रंट, आध्यात्मिक डेस्क – पंचांग, 27 फरवरी 2025
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नोटः फाल्गुन अमावस (स्नानादि) प्रातः 8.55 के बाद है। अमावस तिथि का क्षय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती हैं। इस समय फाल्गुन माह चल रहा है। फाल्गुन माह की अमावस्या 27 फरवरी, गुरुवार को है। फाल्गुन अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि इस दिन सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु और पितरों की पूजा करने का विधान है। साथ ही यह दिन ग्रह दोष और पितृ दोष से राहत पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। फाल्गुन अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण, पिंडदान, जप-तप, पूजा अर्चना और दान आदि शुभ कार्य करने का विधान है।
विक्रमी सवत्ः 2081,
शक संवत्ः 1946,
मासः फाल्गुऩ
पक्षः कृष्ण,
तिथिः चतुर्दशी प्रातः काल 08.55 तक है,
वारः गुरूवार।
नोटः आज दक्षिण दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर गुरूवार को दही पूरी खाकर और माथे में पीला चंदन केसर के साथ लगाये और इन्हीं वस्तुओं का दान योग्य ब्रह्मण को देकर यात्रा करें।
नक्षत्रः धनिष्ठा अपराहन् काल 03.44 तक है,
योग शिव रात्रि काल 11.41 तक है,
करणः शकुनि,
सूर्य राशिः कुम्भ, चन्द्र राशिः कुम्भ,
राहू कालः दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक,
सूर्योदयः 06.52, सूर्यास्तः 06.16 बजे।