भारत की सांस्कृतिक विरासत सदा महान रही, पूरे विश्व ने किया अनुसरण : डॉ. मोहन भगवान

राजेश सलूजा, डेमोक्रेटिक फ्रंट, हिसार – 13 अक्टूबर :

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा विश्व आज विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है। परिवार टूट रहे है बच्चो के हाथों में हथियार है। कोरोना के बाद स्थिति और भी गंभीर हुई है। कलयुग में भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना मे काफी अच्छी है। हमारे यहां परिवार संस्कृति व संबंध कायम है, फिर भी देश को आगे बढाना है तो हमें मित्रसेन आर्य जैसे लोगों के विचारो को आगे बढाना होगा। जो समाज व देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहते है।

आएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत वीरवार को गाव खांडाखेङी में भारत मित्र स्तंभ का उद्घाटन करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पहुंचने पर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने गुलदस्ता भेंट करके आरएसएस प्रमुख का स्वागत किया। यहां पहुंचते ही आरएसएस प्रमुख ने सबसे पहले भारत मित्र स्तम्भ का अवलोकन किया। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यह सोने का समय नहीं बल्कि जागने का समय है, यह हर पुरुषार्थ को सिखाना होगा। नीति व संस्कारों को प्राथमिकता देनी होगी। वर्तमान के मोबाइल युग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज ऐसे हालत हो गए हैं कि दो चार लोग यदि एक साथ बैठे हैं तो भी आपस में बात नहीं करेंगे बल्कि अपने—अपने मोबाइल पर लगे रहेंगे। उन्होंने खांडा खेड़ी में बनाए गए भारत मित्र स्तम्भ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह स्तम्भ अपने आप में भारत की सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए हैं, बच्चों को इस स्तम्भ की यात्रा करनी चाहिए, उन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराना चाहिए, तभी तो वे जान पाएंगे कि हमारा देश व संस्कृति क्या थी। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे लोग व समाज चाहिए जो अच्छे काम को अच्छा बता सके, यह कहने वाले चाहिए कि आपने दो कदम रखे हैं, हम आपके साथ चार कदम रखते हैं। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यह केवल उनका भाषण नहीं है, उनके मन की बात है और भावों में व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत मित्र स्तम्भ की स्थापना व स्व. चौधरी मित्रसेन के परिवार की एकजुटता से हमें सीख लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रमुख आर्य समाजी चौधरी मित्रसेन से भले ही दो बार मिलना हुआ हो, परतु खांडा खेड़ी में भारत मित्र स्तंभ देखकर न केवल मित्रसेन के जीवन परिचय, बल्कि भारत की संस्कृति व सभ्यता के भी दर्शन हो गए। हमारी नई पीढी को संस्कार, सस्कृति व सभ्यता से जोड़ने के लिए देश में मित्रसेन के पदचिन्ह पर चलना चाहिए। समाज में महापुरूषो का अनुसरण करने का प्रयास करने वाले बहुत से लोग हैं। बस जरूरत उनका हौसला बढ़ाने की है, ताकि वह और अधिक उत्साह के साथ काम कर सके।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि स्व. चौधरी मित्रसेन के परिवार के प्रति उनका आत्मीय भाव है। कल तक उनका यहां आने का कोई कार्यक्रम नहीं था परन्तु वे अपने को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि स्व. चौधरी मित्रसेन से उनकी कई-कई घंटे बात होती थी और मित्रसेन हमेशा उनसे अपने बेटों—बेटियों की तरह स्नेह रखते थे। उन्होंने कहा कि आज के समय में संयुक्त परिवार मिलना व परिवार को संयुक्त रखना बहुत बड़ी बात है, लेकिन मित्रसेन के परिवार में हमें यह सब देखने को मिल जाता है। उन्होंने कहा कि बड़ी माता परमेश्वरी देवी व छोटी माता सरोज ने पूरे परिवार को जोड़कर रखा है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि स्व. चौधरी मित्रसेन के सपनों का आर्य समाज व सपनों का भारत बनाने के लिए हमें एकजुटता से काम करना होगा, अपनी संस्कृति को पहचानना होगा और भारत मित्र स्तम्भ के रूप में उनके पुत्रों ने जो तोहफा दिया है, उससे हमें जन—जन को अवगत कराना होगा। यह स्तम्भ हमें हमारी विरासत व संस्कृति से अवगत करवाता है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश आरएसएस के संघचालक प्रो. सीताराम व्यास, हरियाणा आरएसएस के संघचालक पवन जिंदल विशिष्ठ अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम में  स्वामी रामदेव ने चौधरी  मित्रसेन की स्मृति में ग्रंथ का विमोचन  किया गया। इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और परम मित्र मानव निर्माण संस्थान के अध्यक्ष कैप्टन रुद्रसेन द्वारा स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती, डॉ. विवेक आर्य, आचार्य डॉ. धनंजय को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।  

कार्यक्रम में उपरोक्त के अलावा मुख्य रूप से भाजपा प्रदेश प्रभारी बिप्लब देब, प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, सांसद बृजेन्द्र सिंह, धर्मबीर सिंह, डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा, कृषि मंत्री जेपी दलाल, विधायक विनोद भ्याणा, विधायक सोमबीर सांगवान, जोगीराम सिहाग, पूर्व मंत्री रामबिलास शर्मा, पूर्व सांसद सुधा यादव, पूर्व विधायक डॉ. पवन सैनी, भाजपा जिला अध्यक्ष कैप्टन भूपेन्द्र, पार्टी नेता रणधीर पनिहार सहित अनेक वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।