Thursday, May 7

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति के बारे में जानने के लिए उसकी राशि ही काफी होती है। राशि से उस या अमूक व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य के बारे में जानना आसान हो जाता है। इतना ही नहीं, ग्रह दशा को अपने विचारों को सकारात्मक रखें, क्योंकि आपको ‘डर’ नाम के दानव का सामना करना पड़ सकता है। नहीं तो आप निष्क्रिय होकर इसका शिकार हो सकते हैं। आपका कोई पुराना मित्र आज कारोबार में मुनाफा कमाने के लिए आपको सलाह दे सकता है, अगर इस सलाह पर आप अमल करते हैं तो आपको धन लाभ जरुर होगा। घरेलू मामलों पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। आपकी ओर से की गयी लापरावाही महंगी साबित हो सकती है। आपके प्रिय/जीवनसाथी का फ़ोन आपका दिन बना देगा।

डेमोक्रेटिक फ्रंट, आध्यात्मिक डेस्क – पंचांग, 02 फरवरी 2023 :

नोटः आज तिल द्वादशी एवं भीष्म द्वादशी व्रत है।

तिल द्वादशी पर भगवान विष्णु की पूजा से होती है मनोकामनाएं पूर्ण -  worshiping lord vishnu on til dwadashi fulfills wishes
आज तिल द्वादशी

आज तिल द्वादशी : हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन तिल द्वादशी का व्रत रखा जाता है। आज के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने का विधान है। इसके अलावा आज स्नान के साथ तिल का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। तिल द्वादशी तिथि पर खास संयोग बन रहा है क्योंकि आज भगवान विष्णु का समर्पित गुरुवार का दिन है। पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ व्रत रखने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और संसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।

Bhishma Dwadashi 2020: भीष्म द्वादशी के व्रत से होती से संतान की उन्नति और  मिलता है सौभाग्य - Bhishma Dwadashi 2020: Child progress is done due to  fasting of Bhishma Dwadashi
आज भीष्म द्वादशी

भीष्म द्वादशी व्रत: आज भीष्म द्वादशी, पितरों के निमित्त तर्पण करने से मिलता है पुण्य। भीष्म द्वादशी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। गुरुवार को भीष्म द्वादशी की पूजा और व्रत रखा जाएगा। इस दिन को गोविंद द्वादशी भी कहा जाता है। भीष्म द्वादशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विधान बताया गया है।

विक्रमी संवत्ः 2079, 

+शक संवत्ः 1944,

 मासः माघ, 

पक्षः शुक्ल पक्ष, 

तिथिः द्वादशी सांय काल 04.27 तक है, 

वारः गुरूवार। 

विशेषः आज दक्षिण दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर गुरूवार को दही पूरी खाकर और माथे में पीला चंदन केसर के साथ लगाये और इन्हीं वस्तुओं का दान योग्य ब्रह्मण को देकर यात्रा करें।

नक्षत्रः आर्द्रा, अरूणोदय कालः 06.18 तक है, 

योगः वैधृति दोपहरः काल 12.12 तक, 

करणः बालव, 

सूर्य राशिः मकर, चंद्र राशिः मिथुन, 

राहु कालः दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक, 

सूर्योदयः 07.13, सूर्यास्तः 05.57 बजे।