- 7- 8 घण्टे का रोजाना रियाज गायन में देता है परिपक्वता
- सुधा मल्होत्रा की वो मखमली आवाज ‘तुम मुझे भूल भी जाओ’ को कौन भूल सकता है

चंडीगढ़ संवाददाता, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़, 6 जून
मोहब्बत की आंखों से अश्कें चुराकर, किसी ने फलक पे सितारे सजाए’, कुछ इसी तरह से, संगीत जगत के फलक पर कई सुमधुर स्वरों की मल्लिका को उनकी सदाबहार गीतों ने खुद नक्षत्रों की तरह हमेशा के लिए सुर आकाश में सजा दिए, जिसकी चमक दशकों युगों तक फीकी नहीं पड़ी, उन्ही नक्षत्रों में से एक है अपने समय की लोकप्रिय गायिका सुधा मल्होत्रा। जिनकी आवाज में वह धनक है जो गांव की कच्ची मिट्टी से महकती है और जिसमें भावनाओं की नाजुक लचक हमारी नस-नस में मदहोशी भर देती है।
बॉलीवुड की सदाबहार आवाज पद्मश्री सुधा मल्होत्रा अमूल्य माइंडजेन द्वारा प्रस्तुत लोकप्रिय साप्ताहिक टॉक शो अमूल्य टॉक्स के माध्यम से जुड़ी। अपने प्रशंसकों से सुधा ने कहा मैं गायन के लिए जन्मजात प्रतिभा वाले समर्पित महत्वाकांक्षी गायकों को प्रशिक्षण देकर समाज को वापस देना चाहती हूं, हालांकि ट्रेनी गायकों को कड़ी मेहनत, कड़ी मेहनत और कड़ी मेहनत से अच्छे गायकों के रूप में विकसित होने के लिए शुरुआत करनी होगी।इस तरह सदाबहार गायिका पदमश्री सुधा मल्होत्रा ने अमूल्य माइंडजेन द्वारा प्रस्तुत साप्ताहिक टॉक शो अमूल्य वार्ता में अपनी जीवन यात्रा, अनुभव और जीवन की शिक्षाओं को साझा किया। उनके प्रशंसकों, दोस्तों और परिवार का प्यार उन्हें बनाए रखता है।इस परिपक्व उम्र में भी तरोताज़ा , क्योंकि जब भी वह निराश महसूस करती है तो वह हमेशा उन्हें खुश करने के लिए उन्हें ढूंढती है। वह अपनी सिंगिंग को परफेक्ट करने के लिए एक बार में 7 से 8 घंटे रियाज करती थीं। अच्छे गायन के लक्ष्य का कोई शार्ट कट नहीं है सिवाय दृढ़ता और कार्य के प्रति समर्पण के। वह कभी-कभी अपने घर पर साप्ताहिक रविवार बैठक में भजन गाते हुए आध्यात्मिक आगोश प्राप्त करती थीं। उनके प्रशंसक, दोस्त और परिवार उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। वह हर झटके के बाद अपने जीवन के साथ आगे बढ़ना पसंद करती है।
चंडीगढ़ के संगीत प्रेमी अमूल्य टॉक्स शो जो की हर रविवार शाम 5 बजे होता है व कोई न कोई बड़ी मशहूर हस्ती जुड़ती है।

