केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुरने कहा कि क्या उन्हें हार का डर सता रहा था? जहां एक ओर समाजवादी पार्टी का सूपड़ा साफ हो रहा है तो दूसरी तरफ उन्हें (स्वामी प्रसाद मौर्य) हारने का डर सता रहा है। ऐसी स्थिति हो गई है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी सीट पर भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं है। आखिर क्या मजबूरी है कि उन्हें पडरौना छोड़कर भागना पड़ा।

डेमोक्रेटिक फ्रंट, लखनऊ(ब्यूरो) :
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच बीजेपी छोड़कर सपा का दामन थामने वाले ओबीसी के दिग्गज नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी परंपरागत सीट बदल दी है। सपा ने स्वामी प्रसाद को पडरौना के बजाय फाजिलनगर सीट से प्रत्याशी बनाया है। हालांकि, स्वामी प्रसाद मौर्य ने ऐसे ही अपनी सीट नहीं बदली बल्कि इसके पीछे कांग्रेस से बीजेपी में आए आरपीएन सिंह एक अहम फैक्टर माने जा रहे हैं तो दूसरा फाजिलनगर सीट का सियासी समीकरण है। ऐसे में देखना है कि स्वामी प्रसाद छठी बार विधानसभा पहुंचने में कामयाब होते हैं कि नहीं ?
स्वामी प्रसाद मौर्य का इस बारे में कहना है कि आरपीएन सिंह ना तो मेरे लिए चुनौती थे, ना हैं और ना होंगे। यदि भाजपा सिंह को पडरौना से सीट देती है तो उनसे कमजोर कोई उम्मीदवार नहीं होगा। उन्होंने अखिलेश यादव का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि मैं पडरौना से तीन बार विधायक रह चुका हूं। मैंने काफी लम्बे समय जनता की सेवा की है। जनता के लिए मेरे दिल में हमेशा प्यार रहेगा. जहां तक फाजिलनगर से प्रत्याशी बनाए जाने का सवाल है, तो मैं अखिलेश यादव का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे इस सीट से उम्मीदवार बनाया। मैं अखिलेश यादव को यहां की जनता की सेवा के लिए मौका देने पर आभार व्यक्त करता हूं।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही BJP का हाथ छोड़कर मौर्य सपा में शामिल हुए थे। दूसरी तरफ आरपीएन सिंह भी हाल ही कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। सिंह को पडरौना का राजा भी कहा जाता है। ऐसे में भाजपा उन्हें इसी सीट से उतारने का मन बना रही है. माना जा रहा है कि इस कारण मौर्य को अपनी सीट बदलना पड़ा है।

