पंचकूला, 16 नवंबर ( ): फेफड़ों की नामुराद खांसी (सीओपीडी) अब उपचारयोग तथा बचाव योगय बीमारी बन गई है, जिस कारण खांसी, बलगम या सांस फूलने की बीमारी होती है। एक अनुमान अनुसार भारत में हर वर्ष 5 लाख सीओपीडी के कारण मारे जाते हैं। सीओपीडी के कारण एडज, डायबिटिज, मलेरिया तथा तपदिक के कारण होने वाली कुल मौतों से भी अधिक मौतें होती हैं। सीओपीडी के बारे बकायदा जागरूकता तथा इसका तुरंत इलाज करवाना बहुत जरूरी है। पारस अस्पताल पंचकूला ने एक सीओपीडी मरीज का कामयाबी के साथ इलाज करके इस क्षेत्र में अपना नाम बनाया है।
पारस अस्पताल के फेफड़ों के रोगों के माहिर डाक्टर ने बताया कि उनके पास एमरजैंसी में एक ऐसा मरीज आया, जिसको सांस लेने में तकलीफ थी तथा वह बतौर इंजीनियर काम करता था, पर लगातार धूम्रपान करता था। उसको लगातार खांसी के अलावा सांस की तकलीफ थी तथा वह सीधा लेट भी नहीं सकता था। टेस्ट करने पर पता लगा कि उसको पूरी आक्सीजन नहीं मिल रही थी। उसको तुरंत इलाज के लिए आईसीयू ले जाया गया। इलाज के बाद वह जल्द ही ठीक हो गया तथा कुछ दिनों के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डाक्टरों ने बताया कि सीओपीडी भारत में सांस की एक बड़ी बीमारी बनती जा रही है, क्योंकि इस कारण मौत दर बहुत ज्यादा हो गया है। उन्होंने बताया कि सीओपीडी फेफड़ों की एक जानलेवा बीमारी है, जिस कारण फेफड़ों में सोजिश तथा आक्सीजन की मात्रा घट जाती है, यहां तक कि फेफड़ों की सांस लेने की समर्था भी घट जाती है। धूम्रपान करने वाले लोगों में 40 वर्ष से अधिक उम्र में यह बीमारी आम है। इस बीमारी के लक्ष्णों में खांसी, सांस फूलना तथा बलगम आना शामिल है।
उन्होंने बताया कि इन लक्ष्णों की सूरत में स्पाइरोमिट्री टेस्ट किया जाता है, जिसमें मरीज को जोर से एक यंत्र में फूंक मारने के लिए कहा जाता है, जिससे फेफड़ों में से हवा बाहर आने की समर्था तथा ताकत का पता लगता है। इससे सीओपीडी किस चरण पर है, इस बात का भी पता लग जाता है। डाक्टरों ने बताया कि सीओपीडी के कारण होने वाली 10 मौतों में 8 ऐसी होती हैं, जो धूम्रपान के आदी होते हैं। इस बीमारी से बचने के लिए धूम्रपान का त्याग तथा सूखी खांसी का समय पर इलाज बहुत जरूरी है।
डाक्टरों ने बताया कि अच्छी जीवनशैली के लिए व्यायाम, फिजीयोथैरेपी तथा योगा जरूरी है, इसके अलावा निमोनिया से बचने के लिए अग्रणि टीकाकरण करवाना चाहिए। कोविड-19 के कारण सीओपीडी के मरीजों के लिए अधिक जोखिम भरा होता है। ऐसे मरीजों को कोविड की वेक्सीन भी लेनी चाहिए।
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