नोटःः आज गोष्पाष्टमी पुष्कर मेला प्रारम्भ राजस्थान। पुष्कर मेले का आयोजन राजस्थान पर्यटन एवं जिला प्रशासन की ओर से हर साल किया जाता है, जिसमें प्रदेश की वर्षों पुरानी परम्पराएं एवं विरासत देखने को मिलती है। यह रंग रंगीला मेला ‘पुष्कर मेले’ के नाम से जाना जाता है। यह एक रंगारंग आयोजन है, जिसमें चमचमाते और अनूठे प्रदर्शन होते हैं, विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं और आकर्षक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही यह मेला विश्व के सबसे बड़े पशु मेले के रूप में भी विख्यात है।
विक्रमी संवत्ः 2078,
शक संवत्ः 1943,
मासः कार्तिक़,
पक्षः शुक्ल पक्ष,
तिथिः अष्टमी प्रातः 05.52 तक है,
वारः गुरूवार।
नोटः आज रात्रिः 2.51 से पंचक प्रारम्भ हो रहे हैं, पंचक काल में तृण, काष्ठ, धातु का संचय व भवन निर्माण और नवीन कार्य तथा यात्रा आदि कर्म वर्जित होते हैं।पंचक काल में शव दाह का भी निषेध होता है।चूंकि शव को इतनी लंबी अवधि हेतु रोकना देश काल परिस्थिति के अनुसार मुश्किल हैं, अतः योग्य वैदिक ब्रह्मण की सलाह लेकर पंच पुतलों का दाह और पंचक नक्षत्रों की शांति विधि पूर्वक करानी चाहिए। क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि मृतक व्यक्ति के परिवार व संबंधियों में से ही पाॅच व्यक्तियों के अकालमृत्यु होने की आशंका बनी रहती है।
नक्षत्रः श्रवण दोपहर 02.59 तक है,
योगः वृद्धि प्रातः काल 4.44 तक,
करणः विष्टि,
सूर्य राशिः तुला, चंद्र राशिः मकर,
राहु कालः दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक,
सूर्योदयः 06.45, सूर्यास्तः 05.25 बजे।
विशेषः आज दक्षिण दिशा की यात्रा न करें। अति आवश्यक होने पर गुरूवार को दही पूरी खाकर और माथे में पीला चंदन केसर के साथ लगाये और इन्हीं वस्तुओं का दान योग्य ब्रह्मण को देकर यात्रा करें।

