चिराग की चिंगारी जेडीयू पर भारी

एलजेपी को अकेले चुनावी मैदान में उतरने से एनडीए को 24 सीटों पर सियासी फायदा भी मिला है. इनमें बीजेपी को एक सीट, जेडीयू को 20 , जीतनराम मांझी की हम को 2 और वीआईपी को 1 सीट पर चुनावी फायदे मिले हैं. वहीं, एलजेपी के चुनावी मैदान में उतरने से महागठबंधन के दलों को 30 सीटों पर सियासी फायदा मिला है. इनमें आरजेडी को 24 सीट और कांग्रेस 6 सीट पर जीत मिली है. इन सीटों पर एलजेपी को इतना वोट मिला था, जो अगर एनडीए को मिला होता तो वह सीटें उसके खाते में जातीं. 

नयी दिल्ली(ब्यूरो):

बिहार चुनाव में एनडीए से अलग होकर अकेले चुनावी मैदान में उतरे एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान अपने खुद के घर में भले ही रौशन नहीं कर सके, लेकिन एनडीए और महागठबंधन की तस्वीर धूमिल कर दी है. एलजेपी बिहार की 134 सीटों पर चुनावी मैदान में अपने प्रत्याशी उतारकर महज एक सीट ही जीत सकी है. लेकिन 54 सीटों पर राजनीतिक दलों का सियासी खेल बिगाड़ दिया है. इस तरह से एलजेपी ने एनडीए के दलों को 30 सीटों और महागठबंधन को 24 सीटों पर नुकसान पहुंचाया है. 

चिराग पासवान ने बिहार विधासनभा चुनाव में 134 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. इनमें से ज्यादातर प्रत्याशी जेडीयू कैंडिडेट के खिलाफ चुनावी ताल ठोकते नजर आए थे. हालांकि, गोविदंगज, लालगंज, भागलपुर, राघोपुर, रोसड़ा और नरकटियागंज जैसी सीट पर एलजेपी प्रत्याशी बीजेपी के खिलाफ भी चुनाव लड़ रहे थे. मंगलवार देर रात आए बिहार चुनाव नतीजे में एलजेपी को महज एक सीट मिली है जबकि कई सीटों पर वो दूसरे और तीसरे नंबर पर रही है. ऐसे में एलजेपी सबसे बड़ी मुसीबत जेडीयू के लिए बनी है जबकि बीजेपी को महज एक सीट पर नुकसान पहुंचाया है. 

एलजेपी ने जेडीयू के खिलाफ तमाम बीजेपी के 22 बागी प्रत्याशियों को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा था. इनमें से एक भी बागी जीत नहीं सके, लेकिन जेडीयू को नुकसान जरूर पहुंचाने में सफल रहे हैं. बिहार में जेडीयू को 25 सीटों पर एलजेपी के चलते हार का सामना करना पड़ा है जबकि बीजेपी को एक सीट पर और एनडीए में शामिल वीआईपी को 4 सीटों पर नुकसान पहुंचाया. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने एक निजी चैनल पर बोलते हुए कहा था कि अगर एलजेपी साथ मिलकर लड़ती तो हम 150 सीटें आसानी से जीत लेते. 

वहीं, दूसरी ओर महागठबंधन में शामिल आरजेडी को बिहार में 12 सीटों पर एलजेपी प्रत्याशियों के चलते हार झेलनी पड़ी है. ऐसे ही 10 सीटों पर कांग्रेस को एलजेपी ने गहरी चोट दी है और दो सीटों पर सीपीआई (माले) के प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा है. हालांकि, एलजेपी के चुनावी मैदान में उतरने से सिर्फ नुकसान ही नहीं बल्कि कुछ सीटों पर सियासी फायदे भी एनडीए और महागठबंधन को मिले हैं. 

एलजेपी को अकेले चुनावी मैदान में उतरने से एनडीए को 24 सीटों पर सियासी फायदा भी मिला है. इनमें बीजेपी को एक सीट, जेडीयू को 20 , जीतनराम मांझी की हम को 2 और वीआईपी को 1 सीट पर चुनावी फायदे मिले हैं. वहीं, एलजेपी के चुनावी मैदान में उतरने से महागठबंधन के दलों को 30 सीटों पर सियासी फायदा मिला है. इनमें आरजेडी को 24 सीट और कांग्रेस 6 सीट पर जीत मिली है. इन सीटों पर एलजेपी को इतना वोट मिला था, जो अगर एनडीए को मिला होता तो वह सीटें उसके खाते में जातीं. 

0 replies

Leave a Reply

Want to join the discussion?
Feel free to contribute!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *