जो बायडेन की मदद से अनुच्छेद-370 को वापस लायेंगे: युवा कॉंग्रेस नेता जहाँ जेब सिरवाल

कॉंग्रेस की सबसे बड़ी परेशानि उन मुद्दों को लेकर है जिन मुद्दों क मोदी सरकार ने सहज ही निपटा दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री नहरु का दिया हुआ काश्मीर विवाद भी उनही में से एक है। कॉंग्रेस को आज भी भारत में काश्मीर को ले कर ‘दो विधान दो निशान दो परधान चाहिए’, वह धारा 370 के हटाये जाने के विरोध में है। इस पार्टी के नये पुराने सभी नेता भारतीय संसद मे पारित हुए मोदी सरकार के किसी भी प्रस्ताव को असंवैधानिक मानती है। धारा 370 पर कॉंग्रेस आज भी यदा कदा बयान देते रहते हैं। ताज़ा मामला जहाँ जेब सिरवाल का है जो युवा कॉंग्रेस नेता हैं ओर उन्हे जो बायडेन से बहुत उम्मीद है। ज़ेब सिरवाल को यकीन है कि नव निर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति काश्मीर में एक बार फिर धारा 370 बहाल करवाने में मदद करेंगे।

जम्मू/ चंडीगढ़:

जम्मू कश्मीर की स्थानीय पार्टियों का भारत-विरोधी रुख तो जगजाहिर है, लेकिन अब कॉन्ग्रेस पार्टी भी फ़ारूक़ अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती जैसे नेताओं के सुर में सुर मिला रही है। कम से कम जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस नेताओं के बयान देख कर तो यही लगता है। ताज़ा मामला है जहाँ जेब सिरवाल का, जो प्रदेश में कॉन्ग्रेस के चर्चित नेताओं में से एक हैं। वो अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन की मदद से अनुच्छेद-370 को वापस लाने का दावा कर रहे हैं।

अमेरिका में ‘डेमोक्रेटिक पार्टी’ के जो बायडेन और ने वहाँ के पदस्थ राष्ट्रपति व ‘रिपब्लिकन पार्टी’ के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प को हरा दिया है और कमला हैरिस उनकी डिप्टी के रूप में चुनी गई हैं। कॉन्ग्रेस नेता जहाँजेब सिरवाल ने भी इन दोनों नेताओं को जीत की बधाई दी लेकिन इस दौरान वो अपना भारत-विरोधी रवैया उजागर करना नहीं भूले। कॉन्ग्रेस के युवा नेता ने इसे व्यक्तिगत जीत न होकर एक ‘विचारधारा की जीत’ करार दिया।

उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि जहाँ तक भारत और जम्मू-कश्मीर की बात है, उनकी जीत से यहाँ सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इतना तो साफ है उनकी जीत से इस्लामोफोबिया में कमी आएगी। बता दें कि ये कट्टरपंथी नेता इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ आवाज़ उठाने को भी ‘इस्लामोफोबिया’ कहते हैं। कमोबेश पूरी दुनिया में इस्लामी कट्टरपंथियों का लगभग यही रुख है और वो आतंकवाद की निंदा तक नहीं करते।

इसी तरह कॉन्ग्रेस के युवा नेता जहाँजेब सिरवाल ने कहा कि जो बायडेन के पुराने बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि वो भारत सरकार पर दबाव बनाएँगे और सरकार अनुच्छेद-370 और 35-ए को फिर से वापस लाएगी और इन्हें लागू करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अलोकतांत्रिक तरीके से अनुच्छेद-370 को हटाया था और इसे वापस लाने से ‘इस्लामोफोबिया’ में कमी आएगी।

इससे पहले जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह ने ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल (LAC)’ पर चीन के आक्रामक रवैये के लिए भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के फैसले को जिम्मेदार बताया था। ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ के अध्यक्ष ने कहा था कि चीन ने कभी भी अनुच्छेद 370 को लेकर भारत सरकार के फैसले को स्वीकार नहीं किया है। साथ ही उन्होंने उम्मीद भी जताई थी कि चीन की मदद से फिर से अनुच्छेद 370 को वापस लाया जा सकेगा।

उन्हीं के नक्शेकदम और चलते हुए जम्मू कश्मीर की एक अन्य पूर्व-मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा था कि जब तक उनका झंडा (जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा) वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह दूसरा झंडा (तिरंगा) नहीं उठाएँगी। मुफ्ती ने कहा था कि उनका झंडा ‘डाकुओं’ ने ले लिया है। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा और वो कश्मीर को पुराना दर्जा दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगी।

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