पाँचवाँ नवरात्र: देवी स्कंदमाता का वह रूप जो देवताओं के सेनापति की माँ का स्वरूप होने के साथ साथ महाकवि कालीदास को प्रज्ञावान बनातीं हैं

नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है. मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं. मां अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं. स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं. इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है. बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प ली हुई हैं. इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है. ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं. इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है. सिंह भी इनका वाहन है.

धर्म/संस्कृति पंचकूला:

स्कंदमाता शेर की सवारी करती है जो क्रोध का प्रतीक है और उनकी गोद में पुत्र रूप में भगवान कार्तिकेय हैं, पुत्र मोह का प्रतीक है। देवी का यह स्वरूप हमें सिखाता है कि जब हम ईश्वर को पाने के लिए भक्ति मार्ग पर चलते हैं तो क्रोध पर हमारा पूरा नियंत्रण होना चाहिए जिस प्रकार देवी शेर को अपने काबू मे रखती है। पुत्र मोह का प्रतीक है, देवी सिखाती हैं कि सांसारिक मोह माया में रहते हुए भी भक्ति के मार्ग पर चला जा सकता है, इसके लिए मन में दृढ़ विश्वास होना ज़रूरी है। देवी स्कन्दमाता की पूजा करने से संतान सुख मिलता है। बुद्धि और चेतना बढ़ती है। ऐसा विश्वास है की स्कंदमाता की कृपा से ही कालीदास विद्वान बने और उन्होने मेघदूत और रघुवंशम एतयादी की रचना हुई।

नवरात्र के चौथे दिन:

कोरोना काल में भक्तों की श्रद्धा का सैलाब माता के मंदिर में लगातार उमड़ रहा है। यही तो वजह है कि नवरात्र के चौथे दिन भी 10051 श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए पहुंचे। इतना ही नहीं, चार दिन में माता के भक्तों ने माता के चरणों में कुल 68 लाख 40 हजार 978 रुपये का चढ़ावा भी चढ़ाया है।

माता मनसा देवी मंदिर और काली माता मंदिर कालका में श्रद्धालुओं ने नवरात्र के चौथे दिन माता के चरणों में 12 लाख 36 हजार 332 रुपये की नकद राशि चढ़ाई हैै। इसके साथ ही 59 हजार 200 रुपये की राशि ड्राई प्रसाद वितरित करने के उपरांत प्राप्त हुई। उपायुक्त एवं मुख्य प्रशासक मुकेश कुमार आहूजा ने बताया कि मंगलवार को श्रद्धालुओं ने माता मनसा देवी मंदिर में 43 सिल्वर के नग और काली माता मंदिर में 29 सिल्वर के नग चढ़ाए हैं। इस प्रकार 72 नग चांदी का वजन 355 ग्राम है। उन्होंने बताया कि माता मनसा देवी में कुल 9.46 लाख 439 रुपये और काली माता मंदिर कालका में 2.89 लाख 893 रुपये की राषि चढ़ाई है। इसी प्रकार प्रसाद वितरण योजना में माता मनसा देवी मंदिर में 100 ग्राम वजन में 30 हजार 400 रुपये जबकि 200 ग्राम प्रसाद वितरण में 24 हजार 700 रुपये, काली माता मंदिर में 100 ग्राम प्रसाद वितरण में 1500 रुपये और 200 ग्राम प्रसाद वितरण में 1300 रुपये की राशि के साथ कुल 100 ग्राम प्रसाद वितरण में 31 हजार 900 रुपये और 200 ग्राम वितरण प्रसाद में 26 हजार रुपये की राशि एकत्रित हुई है। उन्होंने बताया कि माता मनसा देवी मंदिर में 54654 और काली माता मंदिर कालका में 12835 श्रद्धालुओं ने मत्था टेका है।

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