हाथरस मामले में SIT गठित, 7 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री से हाथरस कांड को लेकर वार्ता हुई है। उन्होंने कहा है कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए। इससे पहले उन्होंने एक और ट्वीट किया था, जिसमें मामले की जांच एसआईटी से कराने और प्रकरण के मुक़दमे को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि एसआईटी सात दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और त्वरित न्याय के लिए मुक़दमे को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए।

उ प्र (ब्यूरो):

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जाँच के लिए ‘स्पेशल टास्क फोर्स (SIT)’ का गठन किया है। प्रदेश के गृह सचिव भगवन स्वरूप की अध्यक्षता में SIT गठित की है। डीआईजी चंद्र प्रकाश और आईपीएस पूनम इस SIT के सदस्य होंगे। ये अपनी जाँच कर के रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपेगी। साथ ही इसके लिए समय-सीमा भी तय की गई है। 7 दिनों में SIT अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से PM मोदी ने भी इस मामले पर चर्चा की। PM मोदी ने इस मामले के दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। CM योगी ने त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए इस केस का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का निर्देश दिया है।

हाथरस मामले में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि SIT समयबद्ध तरीके से 7 दिनों में घटना के तह तक जाए और पूरी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। इस घटना में संलिप्त चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से दोषियों को सज़ा सुनाने के निर्देश दिए हैं। हाथरस डीएम ने भी ये बात दोहराई है। दोषियों को जल्द से जल्द सज़ा दिलाने की बात कही गई है।

सीएम योगी डरा गठित की गई SIT में दलित और महिला सदस्य भी होंगे। दलित और महिला अधिकारियों की टीम वाली ये SIT हाथरस मामले की जड़ तक पहुँच कर रिपोर्ट तैयार करेगी। पीएसी आगरा पूनम और डीआईजी चंद्र प्रकाश इस SIT में शामिल हैं। साथ ही पुलिस-प्रशासन को अपनी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस घटना से पूरे देश में आक्रोश का माहौल है और मीडिया में ये मुद्दा छाया हुआ है।

इधर हाथरस मामले में मीडिया के कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि पुलिस-प्रशासन ने जल्दी-जल्दी में ही पीड़िता का अंतिम-संस्कार करा दिया। वहीं हाथरस पुलिस ने ‘बिना परिजनों की अनुमति के पुलिस द्वारा बलपूर्वक पीड़िता का अंतिम संस्कार कराने’ की मीडिया में चल रही ख़बरों का खंडन करते हुए कहा है कि ये ‘असत्य और भ्रामक’ है। पुलिस के अनुसार, ‘सच्चाई ये है’ कि पुलिस-प्रशासन की देखरेख में परिजनों द्वारा अपने रीति-रिवाज के साथ मृतिका के शव का अंतिम संस्कार किया। 

गौरतलब है कि 14 सितंबर को युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया गया था।  इसके बाद आरोपियों ने उस पर जानलेवा हमला भी किया था।  यह घटना चंदपा थाना क्षेत्र के बूलगढ़ी गांव में हुई।  सोमवार को हालत बेहद गंभीर होने पर उसे अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया था।  जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।  हालांकि मौत से पहले पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को दिए अपने बयान में कहा था कि चार युवकों ने उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और विरोध करने पर उसका गला घोंटने की कोशिश की थी।  पीड़िता ने चारों आरोपियों की पहचान संदीप, रामू, लवकुश और रवि के रूप में की थी।  पुलिस अधीक्षक ने बताया था कि संदीप को घटना के दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था।  बाद में रामू और लवकुश को भी गिरफ्तार किया गया और शनिवार को चौथे आरोपी रवि को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।  चारों आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप और हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया गया है। 

हाथरस पुलिस ने दी सफाई

बिना परिवार की इजाजत दलित लड़की का अंतिम संस्कार करने के मामले में हाथरस पुलिस ने सफाई दी है। अपने ट्वीट में हाथरस पुलिस ने कहा कि यह असत्य खबर फैलायी जा रही है कि थाना चन्दपा क्षेत्रान्तर्गत दुर्भाग्यपूर्ण घटित घटना में मृतिका के शव का अन्तिम संस्कार बिना परिजनों की अनुमति के पुलिस ने जबरन रात में करा दिया। हम इसका खंडन करते हैं।

पुलिस ने जबरन किया अंतिम संस्कार

गौरतलब है कि हाथरस में चंदपा की दुष्कर्म पीड़िता का उसके गांव बुधवार रात में कड़ी सुरक्षा में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले शव को घर की जगह अंत्येष्टि स्थल पर ले जाने को लेकर गांव में विरोध शुरू हो गया। परिजन एंबुलेंस के आगे लेट गए। उनकी मांग थी कि शव को पहले घर पर ले जाया जाए। इसको लेकर लोगों की पुलिस से धक्कामुक्की भी हुई।

पीड़िता के शव का जबरन अंतिम संस्कार कराने का आरोप 

चंदपा क्षेत्र के बुलगाड़ी में कथित गैंगरेप की शिकार पीड़िता की मौत के बाद अब उनके अंतिम संस्कार को लेकर पुलिस व जिला प्रशासन आरोपों के घेरे में है। आरोप  है कि पुलिस ने शव परिजनों को नहीं सौंपा और अंतिम संस्कार कराने का दबाव डालने लगे। जबकि परिजन कुछ वक्त के लिए पीड़िता के शव को घर में रखकर आखिरी बार उसका चेहरा देखना चाहते थे। साथ ही उन्होंने रात में अंतिम संस्कार न करने की भी बात कही। लेकिन पुलिस व जिला प्रशासन ने फ़ोर्स के बल पर आधी रात के बाद बिना रीति रिवाज के मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया। कांग्रेस से लेकर तमाम विपक्षी दल परिवार से अंतिम संस्कार के हक़ छीने जाने को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। इस बीच एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक पुलिस वाला परिजनों व ग्रामीणों को समझाता दिख रहा है। इस वीडियो में वह कहता सुनाई दे रहा है कि रीति रिवाज समय के साथ बदलते रहते हैं। यह असाधारण परिस्थिति है। कहां लिखा है कि रात में अंतिम संस्कार नहीं होता. इस बात को मानिए कि कुछ गलती आप लोगो से भी हुई है।

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