कृष्ण जनमभूमि से मस्जिद नहीं हटेगी, अदालत का निर्णय

उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर दायर याचिका सिविल जज सीनियर डिवीजन लिंक कोर्ट एडीजे एफटीसी (द्वितीय) छाया शर्मा ने खारिज कर दी। उन्होंने इसके पीछे पर्याप्त आधार न होने की बात कही। वहीं श्रीकृष्ण विराजमान के वकील विष्णुशंकर जैन का कहना है कि वे अब हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। बता दें कि श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट हरिशंकर जैन और विष्णुशंकर जैन द्वारा दायर याचिका में मुख्यतः 1968 में कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और ईदगाह ट्रस्ट के मध्य हुए समझौते को रद्द करने, ईदगाह को हटाए जाने और 13.37 एकड़ जगह का मालिकाना हक श्रीकृष्ण विराजमान के नाम करने की बात कही गई थी।

उप्र (ब्यूरो):

उत्तर प्रदेश में कान्हा की नगरी मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से शाही ईदगाह मस्जिद के कब्जे से 13.37 एकड़ जमीन को श्रीकृष्ण विराजमान को सौंपने के लिए दायर वाद बुधवार को मथुरा कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुनवाई के लिए वादी पक्ष के विष्णु जैन, हरीशंकर जैन और रंजन अगिनहोत्री ने सिविल जज सीनियर डिवीज़न न्यायालय में पहुंच कर अपना पक्ष रखा। न्यायालय ने पक्ष की पूरी बात सुनी और सुनवाई पूरी होने के बाद अपने फैसले में वाद को खारिज़ कर दिया।

इससे पहले सोमवार को मथुरा के सिविल कोर्ट में ये वाद लिस्‍टेड हुआ। कोर्ट को यह तय करना था कि इस याचिका को स्‍वीकार किया जाए या नहीं, लेकिन सुनवाई को 30 सितंबर तक के लिए टाल दिया गया।

इन्होंने दाखिल किया वाद

ये वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर की ओर से उनकी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों ने दाखिल किया. हालांकि, प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 इस मामले के आड़े आ रहा था। इस एक्ट के जरिये विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुकदमेबाजी को लेकर मालकिना हक पर मुकदमे में छूट दी गई थी। लेकिन, मथुरा-काशी समेत सभी धार्मिक या आस्था स्थलों के विवादों पर मुकदमेबाजी से रोक दिया गया था।

बता दें याचिका में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के 13.37 एकड़ के स्वामित्व और शाही ईदगाह के निर्माण पर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन इससे पहले हिंदूवादी संगठन और साधु-संतों ने भी इस मामले को वृहद आंदोलन में तब्दील करने और मथुरा के साथ काशी को भी मालिकाना हक देने की मांग कर दी है। इस संबंध में काशी विद्वत परिषद के पश्चिम क्षेत्र के प्रभारी नागेंद्र महाराज के यहां एक बैठक सम्पन्न हुई। जिसमें महामंडलेशर व धर्मगुरुओं ने भाग लिया और सभी ने एक मत से सामाजिक सहमति व राम जन्मभूमि आंदोलन को आधार मानते हुए मामले का पटाक्षेप करने और इस मामले को राजनीतिक मुद्दा न बनाने की मांग की।

अयोध्या तो झांकी थी, मथुरा-काशी बाकी है

नागेंद्र महाराज ने कहा कि अयोध्या तो झांकी थी मथुरा-काशी बाकी है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में बहुत बड़ा विवाद था, लेकिन मथुरा और काशी में कोई बड़ा विवाद नहीं है। जिस तरह से अयोध्या में न्यायालय ने जो फैसला सुनाया है, उसी आधार पर सहमति बन जानी चाहिए। उधर, महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज ने तो साफ कहा कि मुस्लिम भाइयों को बड़ा दिल दिखाते हुए खुद ही पहल करनी चाहिए और मस्जिद का कब्जा मंदिर को दे देना चाहिए। उनका यह काम विश्व में उनको सर्वोपरि बनाएगा।

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