करयोग्य आय पर लगाए जाने वाले सरचार्ज को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए: चंद्रमोहन

हेमन्त किगरं, पंचकुला 2 जून:

          हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से मांग की है कि कोविड-19 रुपी राष्ट्रीय त्रासदी को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों और अन्य वर्गो के लोगों जिसमें दुकानदारों, उधोग पतियों, कारपोरेट घरानों को राहत देने के उद्देश्य से  करयोग्य आवदनी पर लगाए जाने वाले  सैंस और सरचार्ज को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए।                

चन्द्र मोहन ने  कहा कि देश के इमानदार कर दाताओं पर कुल देय टैक्स के अतिरिक्त  4 प्रतिशत की दर से स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर  भी लगाया गया है। यह सैस  उन कर दाताओं पर 4 प्रतिशत की दर से लगाया गया है ,जिनकी वार्षिक आय 2.50  लाख रूपए  से पांच लाख और उससे भी  अधिक है और उस पर जितना टैक्स लगेगा उस पर 4 प्रतिशत  की दर से सैस देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि 2.50 लाख  रूपए वार्षिक से अधिक जितनी भी अधिक  वार्षिक  आय होगी ,उस  पर लगने वाले कुल टैक्स पर 4 प्रतिशत की दर से  सैस के रूप में भुगतान करना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि  कोविड -19 रुपी  महाराक्षस  के भयावह रूप को देखते हुए देश के करदाताओं को राहत देने के उद्देश्य से जो  4 प्रतिशत सैस लगाया गया है उसे  तुरंत वापिस लिया जाए।इसे पूरी तरह समाप्त किया जाए।

चन्द्र मोहन ने कुल करयोग्य आय पर  लगाए जाने वाले सरचार्ज का उल्लेख करते हुए कहा कि 50 लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए तक की कुल करयोग्य आवदनी पर 10 प्रतिशत की दर से ‌सरचार्ज देना पड़ेगा। इसी प्रकार एक करोड़ रुपए से लेकर दो करोड़ रुपए तक  15 प्रतिशत की दर से सरचार्ज देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की आय 2 करोड़ से लेकर 5 करोड़ रुपए तक है तो उसे 25 प्रतिशत की दर से और 5 करोड़ से अधिक आय वालों को 37 प्रतिशत की दर से सरचार्ज की अदायगी करनी होगी।           

चन्द्र मोहन ने कहा कि सैंस और सरचार्ज के रूप में प्राप्त धनराशि में से 85 प्रतिशत  राशि केंद्र सरकार के हिस्से में आएगी जबकि 15 प्रतिशत राशि राज्य सरकारों के खाते में जाएगी। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 7 करोड़ लोग आयकर के ‌अन्तर्गत  रीटर्न भरते हैं और देश के लगभग 5 करोड़ लोगों के पास  पैनकार्ड हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष  केन्द्र सरकार को लगभग  13 लाख करोड़ रुपए  डारेक्ट टैक्स और  लगभग 12 करोड़ रुपए  जीएसटी के माध्यम से प्राप्त हुए। उन्होंने सुझाव दिया कि केन्द्र सरकार द्वारा सैंस और सरचार्ज के रूप में प्राप्त की जाने वाली 85 प्रतिशत राशि को लोगों को इस भयानक त्रासदी का मुकाबला करने के लिए राहत देने के उद्देश्य से अपने हिस्से का पूरा सरचार्ज माफ किया जाना चाहिए।                   

उन्होंने मांग की है कि इसी प्रकार से पैन्शन फण्ड  पर लगाए जाने वाले टैक्स में भी छूट दी जाए  ताकि वरिष्ठ नागरिकों को अपनी प्रतिदिन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक मात्रा में नगद राशि उपलब्ध हो सके। इसी प्रकार से वरिष्ठ नागरिकों को  टैक्स अदायगी के मामले में  एक लाख रुपए की विशेष छूट प्रदान की जाए। इसके अतिरिक्त  आयकर की धारा 80 सी के तहत   बैंक में ब्याज बचत पर पर दी जाने वाली छूट को 10000 रूपए से बढ़ाकर 50 हजार तक किया जाए। उन्होंने केन्द्रीय वित मंत्री से मांग की है कि प्रोविडेंट फंड के अन्तर्गत आयकर की धारा 80 सी के तहत दी जाने वाली छूट राशि की सीमा को  अधिक बचत के उद्देश्य से 1.50 लाख रुपए वार्षिक से बढ़कर 3 लाख रुपए वार्षिक किया जाए।                        

चन्द्र मोहन ने मांग की है कि अभिभावकों द्वारा  ट्यूशन फीस के रूप में दी जाने वाली राशि को आयकर के उद्देश्य से वर्ष 2020-2021 के दौरान  करदाता की कुल व्यक्तीगत आय से  कटोति की जाए। उन्होंने केन्द्रीय वित मंत्री से अपील की है कि कर्मचारियों को  डी ए की किश्त देने पर अगले वर्ष जुलाई 2021 तक प्रतिबंध लगाया गया है ।उस कर्मचारी विरोधी फैसले को तुरंत  वापिस लिया जाए।                        

चन्द्र मोहन ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मांग की है कि प्रदेश में सरकारी विभागों में भर्ती पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस फैसले को तुरंत वापिस लिया जाए ताकि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ को रोका जा सके। इसके साथ ही हरियाणा सरकार द्वारा  एल टी सी पर भी एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है उसे भी तुरंत वापिस लिया जाए। उन्होंने कहा कि इन उपायों के ‌लागु होने से देश एक जूट होकर इस संकट की घड़ी का मुकाबला कर सकेगा ऐसा उनका विश्वास है।   

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